नई दिल्ली । संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी तीखे टकराव के बीच एक नया और संवेदनशील विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने संसद परिसर में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को गद्दार कहा। इस कथित टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में ही नहीं, बल्कि सिख समाज में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। मामला इतना बढ़ गया कि भारतीय जनता पार्टी के कई सिख नेताओं ने एकजुट होकर राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत संसद परिसर में हुई कथित नोकझोंक से मानी जा रही है। आरोप है कि राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को ट्रेटर यानी गद्दार कहा। इस पर तुरंत पलटवार करते हुए बिट्टू ने राहुल गांधी को देश का दुश्मन बताया। दोनों नेताओं के बीच हुई इस जुबानी जंग ने राजनीतिक विवाद को सामाजिक और भावनात्मक मुद्दे में बदल दिया, क्योंकि यह टिप्पणी एक सिख नेता को लेकर की गई थी।
राहुल गांधी की कथित टिप्पणी के बाद सिख समाज में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। बीजेपी के सिख नेताओं का कहना है कि किसी सिख नेता को गद्दार कहना पूरे सिख समाज का अपमान है। इसी सिलसिले में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीजेपी नेता आरपी सिंह और अरविंदर सिंह लवली ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा एक सिख नेता को गद्दार कहना बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हम सभी सिख समाज से आते हैं और सिखों का इतिहास देशभक्ति, बलिदान और त्याग से भरा हुआ है। पुरी ने कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही को लगातार बाधित करने का आरोप भी लगाया और कहा कि विपक्ष जानबूझकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
आरपी सिंह ने राहुल गांधी के पुराने बयानों और रुख का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून का भी विरोध किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि राजीव गांधी फाउंडेशन में विदेशी फंडिंग कहां से आई, इस पर भी कांग्रेस को जवाब देना चाहिए। आरपी सिंह ने कहा कि संसद के भीतर और बाहर मर्यादा और भाषा की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है।
बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस मुद्दे पर सबसे तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और उनका परिवार शुरू से ही सिखों के खिलाफ मानसिकता रखते आए हैं। सिरसा ने आरोप लगाया कि सिखों को हमेशा आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश की गई, जबकि सच्चाई यह है कि सिखों ने देश की सीमाओं पर अपनी जान कुर्बान की है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया, उन्हें गद्दार कहना न केवल अपमानजनक है बल्कि अक्षम्य अपराध भी है।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने 1980 के दशक की घटनाओं का जिक्र करते हुए गांधी परिवार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अगर कोई गद्दार है तो वह गांधी परिवार है, जिसने दरबार साहिब पर टैंक और तोपें चलवाईं, अकाल तख्त साहिब को गिराया और निर्दोष सिखों को जिंदा जलाया। उन्होंने इसे सिख समाज की तौहीन बताते हुए कहा कि यह बयान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने लोकसभा स्पीकर से राहुल गांधी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की।
आरपी सिंह ने आगे कहा कि रवनीत सिंह बिट्टू केवल एक सांसद नहीं हैं, बल्कि वे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं, जिन्होंने आतंकवाद के दौर में शांति बहाल करने के लिए अपनी जान गंवाई। ऐसे परिवार से आने वाले व्यक्ति को गद्दार कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि सिख समाज की पहचान एकता, भाईचारे और “पंगत” की परंपरा से है, जहां सभी बराबरी से बैठते हैं।
अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणी से सिख समाज में गहरा गुस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी पहले भी सिखों के खिलाफ रुख अपनाते रहे हैं और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़े विधेयकों के साथ भी उनका व्यवहार सम्मानजनक नहीं रहा।
इस पूरे विवाद के बीच दिल्ली में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों ने उनके बयान की निंदा करते हुए माफी और कार्रवाई की मांग की। कुल मिलाकर, संसद के भीतर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक सीमा से निकलकर सामाजिक और ऐतिहासिक भावनाओं से जुड़ गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या संसद या अन्य संवैधानिक संस्थाएं इस मामले में कोई कदम उठाती हैं।