Author: bharati

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की शानदार सफलता, राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति ने खिलाड़ियों को दी बधाई

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की शानदार सफलता, राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति ने खिलाड़ियों को दी बधाई


    नई दिल्ली। भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में 16 पदक अपने नाम किए, जिनमें मुक्केबाजी से 10 पदक शामिल रहे। इस शानदार सफलता पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि उनके साहस, समर्पण और संघर्ष ने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह की ऐतिहासिक उपलब्धि की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज और इससे पहले 10000 मीटर में सिल्वर मेडल जीतकर गुलवीर ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों स्पर्धाओं में भारत के लिए पहला पदक जीतना न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

    राष्ट्रपति ने भारतीय मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन को भी देश के लिए गर्व का क्षण बताया। पुरुषों के 90 प्लस किलोग्राम वर्ग में सिल्वर जीतने वाले नरेंद्र बेरवाल की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि कठिन मुकाबलों में उनका जुझारूपन और आत्मविश्वास भविष्य की बड़ी सफलताओं का संकेत है। पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीतने वाले अंकुश पंघाल को बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि रिंग में उनके बेहतरीन प्रदर्शन ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है और तिरंगे को सबसे ऊंचे स्थान पर पहुंचाया है।

    60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले सचिन सिवाच की प्रशंसा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि फाइनल मुकाबले में उनका धैर्य, संयम और शानदार तकनीक उन्हें स्वर्ण पदक तक लेकर गई। उन्होंने विश्वास जताया कि सचिन भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करेंगे। महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन के सिल्वर मेडल को भी उन्होंने भारतीय खेलों की बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि उनका अनुशासन तथा दृढ़ संकल्प हर खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है।

    उधर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन की खुलकर सराहना की। उन्होंने अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल को गोल्ड मेडल जीतने पर बधाई देते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन और अटूट जज्बे से देश का सम्मान बढ़ाया है। साथ ही लवलीना बोरगोहेन के सिल्वर मेडल को भी उन्होंने भारत के लिए गर्व का क्षण बताया।

    उपराष्ट्रपति ने महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतने वाली प्रिया घांगस और 51 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीतने वाली साक्षी चौधरी को भी शुभकामनाएं दीं। इसके अलावा महिलाओं की 63 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली उन्नति शर्मा की उपलब्धि को भी उन्होंने देश के लिए गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों का संघर्ष, मेहनत और समर्पण पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का लगातार शानदार प्रदर्शन यह साबित कर रहा है कि देश खेलों के हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की ओर से मिली सराहना ने खिलाड़ियों का मनोबल और बढ़ाया है। अब पूरे देश की नजरें आने वाले मुकाबलों पर हैं, जहां भारतीय खिलाड़ी पदकों की संख्या बढ़ाकर इतिहास रचने की तैयारी में जुटे हैं।

  • पोस्टर ही बेच देता है फिल्म, जानिए दुनिया भर के मूवी पोस्टरों के पीछे छिपे 6 सीक्रेट फॉर्मूले

    पोस्टर ही बेच देता है फिल्म, जानिए दुनिया भर के मूवी पोस्टरों के पीछे छिपे 6 सीक्रेट फॉर्मूले


    नई दिल्ली। किसी भी फिल्म का पोस्टर उसकी पहली पहचान होता है। दर्शक फिल्म देखने जाए या नहीं इसका फैसला कई बार ट्रेलर से पहले पोस्टर ही कर देता है। यही वजह है कि आज फिल्म पोस्टर डिजाइनिंग अपने आप में एक अलग कला और विज्ञान बन चुकी है। आधुनिक तकनीक और एडवांस ग्राफिक्स के दौर में भले ही पोस्टर पहले से कहीं ज्यादा आकर्षक नजर आते हों लेकिन हैरानी की बात यह है कि दुनिया भर में बनने वाले ज्यादातर फिल्म पोस्टर आज भी केवल छह मूल डिजाइन फॉर्मूलों पर आधारित होते हैं।

    एक समय था जब फिल्मी पोस्टर हाथों से बनाए जाते थे। कलाकार कैनवास पर पूरी फिल्म की झलक उकेरते थे और फिर उनमें रंग भरकर उन्हें जीवंत बनाया जाता था। उस दौर में एक पोस्टर तैयार करने में कई दिन लग जाते थे। समय बदला तो कंप्यूटर और डिजाइन सॉफ्टवेयर ने यह काम आसान बना दिया लेकिन पोस्टर बनाने के मूल सिद्धांत आज भी लगभग वही हैं।

    भारत के चर्चित पोस्टर डिजाइनर और मार्चिंग एंट्स एडवर्टाइजिंग के क्रिएटिव हेड राज खत्री के अनुसार दुनिया भर के फिल्म पोस्टरों को मुख्य रूप से छह श्रेणियों में बांटा जा सकता है। उन्होंने बाहुबली उरी द सर्जिकल स्ट्राइक अंधाधुन एमएस धोनी और धुरंधर जैसी फिल्मों के पोस्टर डिजाइन किए हैं।

    पहला और सबसे लोकप्रिय तरीका होता है फिल्म के मुख्य किरदार को पोस्टर का केंद्र बनाना। इसमें पूरी कहानी का प्रतिनिधित्व हीरो या मुख्य पात्र करता है। पोस्टर देखते ही दर्शक उस किरदार से जुड़ जाता है। बाहुबली और एमएस धोनी जैसी फिल्मों में इसी रणनीति का इस्तेमाल किया गया था।

    दूसरा तरीका फिल्म के किसी प्रतीक चिन्ह लोगो या आइकन के जरिए पूरी कहानी का संकेत देना होता है। इस तरह के पोस्टर में कलाकारों की बजाय किसी खास निशान या डिजाइन के जरिए फिल्म का विषय सामने रखा जाता है। कई बार सिर्फ एक प्रतीक ही पूरी फिल्म की पहचान बन जाता है।

    तीसरा तरीका शब्दों या संवादों को पोस्टर का सबसे बड़ा आकर्षण बनाना है। इसमें किसी दमदार डायलॉग किसी खास शब्द या किसी संख्या को इस तरह पेश किया जाता है कि वही दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दे और फिल्म के प्रति दिलचस्पी पैदा कर दे।

    चौथा तरीका जिसे डिजाइन की भाषा में किचन सिंक कहा जाता है भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। इसमें फिल्म के लगभग सभी प्रमुख किरदारों को एक ही पोस्टर में दिखाया जाता है। साथ ही कहानी से जुड़े हथियार लोकेशन या अन्य महत्वपूर्ण तत्व भी शामिल कर दिए जाते हैं ताकि दर्शकों को पूरी फिल्म का व्यापक अंदाजा मिल सके।

    पांचवां तरीका पूरी तरह स्टार पावर पर आधारित होता है। इसमें कहानी या अन्य किरदारों की बजाय सिर्फ बड़े सितारे को सबसे प्रमुख स्थान दिया जाता है। पोस्टर का उद्देश्य केवल अभिनेता की लोकप्रियता के दम पर दर्शकों को सिनेमाघर तक लाना होता है। बड़े सुपरस्टार्स की फिल्मों में यह तरीका अक्सर देखने को मिलता है।

    छठा और अंतिम तरीका फिल्म के किसी यादगार दृश्य को पोस्टर में बदलना होता है। इसमें फिल्म के सबसे प्रभावशाली सीन को इस तरह प्रस्तुत किया जाता है कि वही फिल्म की पहचान बन जाए और दर्शकों के मन में उत्सुकता पैदा करे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि फिल्म का पोस्टर केवल प्रचार का माध्यम नहीं बल्कि पूरी मार्केटिंग रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। एक प्रभावशाली पोस्टर दर्शकों की जिज्ञासा बढ़ाता है सोशल मीडिया पर चर्चा पैदा करता है और कई बार फिल्म की सफलता की मजबूत नींव भी तैयार कर देता है। यही वजह है कि तकनीक बदलने के बावजूद दुनिया भर के पोस्टर डिजाइनर आज भी इन्हीं छह सिद्धांतों को आधार बनाकर नई फिल्मों के लिए आकर्षक और यादगार पोस्टर तैयार करते हैं।

  • शेयर मार्केट में पैसा लगाने से पहले न करें ये बड़ी गलतियां, समझदारी से निवेश कर बढ़ा सकते हैं अपना मुनाफा

    शेयर मार्केट में पैसा लगाने से पहले न करें ये बड़ी गलतियां, समझदारी से निवेश कर बढ़ा सकते हैं अपना मुनाफा


    नई दिल्ली। आज के समय में शेयर बाजार केवल बड़े निवेशकों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि आम लोग भी अपनी बचत को बढ़ाने के लिए इसमें निवेश कर रहे हैं। मोबाइल ऐप और ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की वजह से निवेश करना पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। हालांकि आसान पहुंच का मतलब यह नहीं है कि शेयर बाजार में बिना जानकारी के निवेश किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार में सफलता का सबसे बड़ा मंत्र सही जानकारी धैर्य और अनुशासन है। यदि निवेश सोच समझकर किया जाए तो यह लंबे समय में अच्छी संपत्ति बनाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

    शेयर बाजार में निवेश का मतलब किसी कंपनी में हिस्सेदारी खरीदना होता है। जब कंपनी का कारोबार अच्छा चलता है और उसका मुनाफा बढ़ता है तो उसके शेयर की कीमत में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ऐसे में निवेशकों को पूंजी लाभ के साथ कई कंपनियां लाभांश का भी फायदा देती हैं। लेकिन यदि कंपनी का प्रदर्शन कमजोर हो जाए या बाजार में नकारात्मक माहौल बन जाए तो शेयरों की कीमत गिर सकती है और निवेशकों को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

    विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि निवेश की शुरुआत करने से पहले कंपनी के कारोबार वित्तीय स्थिति प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं को समझना जरूरी है। केवल सोशल मीडिया की अफवाहों या किसी की सलाह पर पैसा लगाना जोखिम भरा साबित हो सकता है। निवेश से पहले यह तय करना भी जरूरी है कि आपका उद्देश्य क्या है और आप कितने समय तक निवेश बनाए रखना चाहते हैं।

    शेयर बाजार में सबसे बड़ी गलती जल्द अमीर बनने की सोच होती है। कई लोग तेजी से मुनाफा कमाने के लालच में बिना रिसर्च के निवेश कर देते हैं और बाजार में उतार चढ़ाव आते ही घबरा कर अपने शेयर बेच देते हैं। इससे नुकसान की संभावना बढ़ जाती है। इसके विपरीत लंबी अवधि का निवेश अक्सर बेहतर परिणाम देने वाला माना जाता है क्योंकि समय के साथ अच्छी कंपनियां अपने कारोबार का विस्तार करती हैं और निवेशकों को बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं।

    जो लोग बाजार के उतार चढ़ाव से बचते हुए धीरे धीरे निवेश करना चाहते हैं उनके लिए नियमित अंतराल पर निवेश करने की रणनीति भी उपयोगी मानी जाती है। इससे बाजार के अलग अलग स्तरों पर निवेश होता रहता है और जोखिम कुछ हद तक संतुलित हो सकता है। साथ ही अपने पूरे निवेश को केवल एक ही कंपनी या एक ही सेक्टर में लगाने के बजाय अलग अलग क्षेत्रों में निवेश करना भी बेहतर रणनीति मानी जाती है।

    विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि निवेश करने से पहले एक आपातकालीन फंड तैयार रखना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर शेयरों को नुकसान में बेचने की नौबत न आए। इसके अलावा निवेश करते समय भावनाओं के बजाय तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेना अधिक लाभदायक माना जाता है। बाजार में गिरावट हमेशा नुकसान का संकेत नहीं होती बल्कि कई बार मजबूत कंपनियों में उचित मूल्य पर निवेश का अवसर भी बन सकती है।

    आज भारत का शेयर बाजार तेजी से विकसित हो रहा है और बड़ी संख्या में नए निवेशक इसमें शामिल हो रहे हैं। डिजिटल तकनीक ने निवेश को आसान बनाया है लेकिन इसके साथ वित्तीय जागरूकता भी उतनी ही जरूरी हो गई है। निवेशकों को कंपनी के परिणाम आर्थिक नीतियों ब्याज दरों महंगाई और वैश्विक घटनाओं पर भी नजर रखनी चाहिए क्योंकि इन सभी का असर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।

    शेयर बाजार में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। सही जानकारी धैर्य अनुशासन और लंबी अवधि की सोच ही निवेश को सफल बना सकती है। यदि सोच समझकर निवेश किया जाए और जोखिम को समझते हुए फैसले लिए जाएं तो शेयर बाजार भविष्य में मजबूत आर्थिक आधार तैयार करने का प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है।

  • दिव्या भारती की अधूरी फिल्म बनी श्रीदेवी के करियर की बड़ी हिट, जानिए 'लाड़ला' की अनसुनी कहानी

    दिव्या भारती की अधूरी फिल्म बनी श्रीदेवी के करियर की बड़ी हिट, जानिए 'लाड़ला' की अनसुनी कहानी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के इतिहास में कई ऐसी फिल्में हैं जिनकी कहानी जितनी दिलचस्प रही उतनी ही भावुक उनकी मेकिंग भी रही। साल 1994 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म लाड़ला भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है जिसकी शूटिंग के दौरान एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरी टीम को झकझोर कर रख दिया। फिल्म के क्लाइमेक्स से पहले ही इसकी मूल नायिका दिव्या भारती का निधन हो गया और निर्माताओं को लगभग पूरी फिल्म दोबारा शूट करनी पड़ी। इसके बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफल रही और उस दौर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हो गई।

    फिल्म लाड़ला में आखिरकार श्रीदेवी अनिल कपूर और रवीना टंडन मुख्य भूमिकाओं में नजर आए लेकिन शुरुआत में श्रीदेवी इस फिल्म का हिस्सा नहीं थीं। निर्माता और निर्देशक ने इस किरदार के लिए दिव्या भारती को चुना था। दिव्या उस समय बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शुमार थीं और लगातार सुपरहिट फिल्में दे रही थीं। उनके साथ फिल्म की लगभग 90 से 95 प्रतिशत शूटिंग पूरी भी हो चुकी थी।

    फिल्म के लेखक अनीस बज्मी ने हाल ही में एक बातचीत में उस दौर की यादें साझा करते हुए बताया कि पूरी यूनिट दिव्या भारती के निधन से गहरे सदमे में थी। उन्होंने कहा कि फिल्म लगभग पूरी हो चुकी थी और सिर्फ क्लाइमेक्स सहित कुछ हिस्सों की शूटिंग बाकी थी। लेकिन अचानक दिव्या की मौत ने सब कुछ बदल दिया। पूरी टीम को समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या किया जाए। हादसे के बाद करीब दो महीने तक फिल्म पर कोई काम नहीं हुआ क्योंकि सभी लोग मानसिक रूप से टूट चुके थे।

    अनीस बज्मी ने बताया कि आखिरकार निर्माताओं ने फैसला किया कि फिल्म को नए सिरे से शूट किया जाएगा। इसके बाद श्रीदेवी को इस भूमिका के लिए चुना गया। श्रीदेवी ने फिल्म में शानदार अभिनय किया और पूरी फिल्म दोबारा शूट की गई। यह निर्णय आसान नहीं था क्योंकि पहले से शूट हो चुका अधिकांश हिस्सा दोबारा फिल्माना पड़ा जिससे समय और लागत दोनों में भारी बढ़ोतरी हुई।

    अनीस बज्मी ने दिव्या भारती के आखिरी शूट का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि चेन्नई में फिल्म की शूटिंग चल रही थी और दिव्या ने अपनी मौत से एक दिन पहले एक भावनात्मक दृश्य फिल्माया था। उस दृश्य में उनका किरदार कैमरे से दूर जाता है और एक नकाबपोश व्यक्ति उन्हें खींचकर ले जाता है। उस दौरान उनका आखिरी संवाद था मुझे बचाओ। अगले ही दिन दिव्या भारती के निधन की खबर ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को स्तब्ध कर दिया।

    दिलचस्प बात यह है कि केवल लाड़ला ही नहीं बल्कि फिल्म अंगरक्षक भी दिव्या भारती की मौत के बाद दोबारा शूट करनी पड़ी थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनके असमय निधन ने बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों और निर्माताओं को कितना प्रभावित किया था।

    सभी मुश्किलों के बावजूद लाड़ला 1994 में रिलीज हुई और दर्शकों ने इसे भरपूर प्यार दिया। श्रीदेवी और अनिल कपूर की जोड़ी को खूब सराहा गया जबकि फिल्म के संवाद गीत और दमदार कहानी ने इसे बड़ी सफलता दिलाई। आज भी लाड़ला सिर्फ एक सफल फिल्म नहीं बल्कि बॉलीवुड के सबसे भावुक और यादगार फिल्मी सफरों में से एक मानी जाती है जहां एक दर्दनाक हादसे के बाद भी पूरी टीम ने हिम्मत नहीं हारी और एक यादगार फिल्म दर्शकों तक पहुंचाई।

  • हमारी छोटी-छोटी लापहवाहियां देश पर बढ़ा रही आर्थिक बोझ…. 3 साल में खराब हो गए 62.13 अरब नोट

    हमारी छोटी-छोटी लापहवाहियां देश पर बढ़ा रही आर्थिक बोझ…. 3 साल में खराब हो गए 62.13 अरब नोट


    कानपुर।
    जेब से निकला मुड़ा नोट… उस पर लिखा मोबाइल नंबर… कोने पर लगी स्टेपल… या पर्स में ठूंसकर रखा गया गंदा नोट। ये ऐसे दृश्य हैं जो रोज दिखाई देते हैं, लेकिन यही छोटी-छोटी लापरवाहियां (Negligence) देश पर बड़ा आर्थिक बोझ (Heavy Economic Burden) डाल रही हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ तीन वर्षों में 62.13 अरब नोट घिसने, फटने और गंदे होने के कारण चलन से बाहर करने पड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि नोटों को संभालकर रखने की आदत न सिर्फ उनकी उम्र बढ़ा सकती है, बल्कि नए नोट छापने पर होने वाला भारी खर्च भी घटा सकती है।

    रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक , वर्ष 2024-25 नोटों के खराब होने के मामले में सबसे भारी साल रहा। इस एक वर्ष में ही 23.86 अरब नोट चलन से बाहर करने पड़े। 2025-26 में खराब होने के कारण चलन से बाहर होने वाले नोटों की संख्या घटकर 17.02 अरब रही। खराब होने की वजह से वर्ष 2023-24 में 21.25 अरब नोट बाजार से हटाने पड़े। यह संख्या बताती है कि नोटों की देखभाल को लेकर लोगों में अभी भी पर्याप्त जागरूकता नहीं है।

    500 के नोटों पर मार अधिक
    आरबीआई के अनुसार, सबसे ज्यादा मार 500 रुपये के नोटों पर पड़ी। तीन वर्षों में 21.30 अरब नोट खराब होने के कारण चलन से हटाने पड़े। इसके बाद 100 रुपये के 17.67 अरब नोट भी वापस लेने पड़े। 200, 50, 20, 10 और 5 रुपये के करोड़ों नोट भी घिसने, फटने और गंदे होने की वजह से बेकार हो गए। इससे साफ है कि सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नोट सबसे पहले खराब हो रहे हैं।

    ऐसे बढ़ सकती है नोटों की उम्र
    – नोटों पर कुछ भी न लिखें।
    – स्टेपल, पिन या टेप का इस्तेमाल न करें
    – नोटों को मोड़कर रखने के बजाय सीधा रखें
    – गीले और तेल लगे हाथों से नोट पकड़ने से बचें
    – फटे या क्षतिग्रस्त नोट बैंक में बदलवाएं।

  • सऊदी के प्रिंस ने ट्रंप को लगाया फोन…. ईरान पर अमेरिकी सेना के हमले के प्लान पर जताई चिंता

    सऊदी के प्रिंस ने ट्रंप को लगाया फोन…. ईरान पर अमेरिकी सेना के हमले के प्लान पर जताई चिंता


    नई दिल्ली।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (Crown Prince Mohammed bin Salman) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) से फोन पर बात की है. इस दौरान उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना की बड़े पैमाने पर नए हमले करने के प्लान पर चिंता जताई है।

    दो अमेरिकी अधिकारियों और इस फोन कॉल की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने इस बातचीत की पुष्टि की है. सूत्र ने ‘एक्सियोस’ को बताया, ‘सऊदी अरब ने अमेरिका की इस प्लानिंग पर गंभीर चिंता जताई है और पूरे प्लान पर सफाई मांगी है।

    दरअसल, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए ईरानी मिसाइल हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही में हो रही रुकावटों के जवाब में ट्रंप बेहद सख्त रुख अपना रहे हैं. वो आने वाले दिनों में ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर जोरदार हमले करने के बारे में सोच रहे हैं।

    बातचीत की जानकारी रखने वाले दूसरे सूत्र ने बताया कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से हमलों को रोकने की अपील की है. हालांकि व्हाइट हाउस और वॉशिंगटन स्थित सऊदी दूतावास ने इस मामले में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।


    सऊदी रक्षा मंत्री ने भी दिया शांति का संदेश

    इससे पहले, बुधवार को ट्रंप ने सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान से मुलाकात की थी. सूत्रों के मुताबिक, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ हुई बैठक में सऊदी रक्षा मंत्री ने बताया था कि उनका देश ईरान के साथ मामले को सुलझाने और तनाव घटाने के पक्ष में है।


    ईरान ने दी धमकी

    दूसरी तरफ, ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो वो इजरायल और खाड़ी देशों के ऊर्जा और बुनियादी ठिकानों पर पलटवार करेगा. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को सऊदी अरब और तुर्की के विदेश मंत्रियों से बात की।

    अपने टेलीग्राम चैनल पर जारी बयान के मुताबिक अराघची ने सऊदी विदेश मंत्री से कहा, ‘अमेरिका या इजरायल की किसी भी कार्रवाई या उसमें क्षेत्रीय देशों की भागीदारी का ईरान के सशस्त्र बल करारा और बराबर का जवाब देंगे।


    कतर कर रहा मध्यस्थता की कोशिश

    बता दें कि मिडिल-ईस्ट की जंग रोकने के लिए सऊदी अरब के साथ-साथ कतर, UAE, तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश भी अमेरिका और ईरान पर दबाव बना रहे हैं. शनिवार को कतर ने ईरानी विदेश मंत्री, व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ और ओमान के अधिकारियों से अलग-अलग बातचीत की, ताकि होर्मुज को फिर से खोलने पर सहमति बन सके।

  • केंद्र सरकार की जुलाई में बंपर कमाई…. GST कलेक्‍शन 15.4% बढ़कर ₹2.11 करोड़ पहुंचा

    केंद्र सरकार की जुलाई में बंपर कमाई…. GST कलेक्‍शन 15.4% बढ़कर ₹2.11 करोड़ पहुंचा


    नई दिल्‍ली।
    जुलाई महीने (July Month) में केंद्र सरकार (Central Government) को बंपर कमाई हुई है. सरकारी कोष में जीएसटी (GST) और टैक्‍स (Tax) से मोटी रकम शामिल हुई है. शनिवार को जारी सरकार के मंथली जीएसटी राजस्व आंकड़ों के अनुसार, घरेलू खपत में मजबूती, उच्च अनुपालन और आयात से टैक्‍स कलेक्‍शन (Tax collection) में तेज बढ़ोतरी के कारण जुलाई 2026 में भारत के सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्‍शन में साल-दर-साल 15.4% की बढ़ोतरी हुई और यह 2.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

    वैश्विक अनिश्चितताओं और वेस्‍ट एशिया में भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद मजबूत आर्थिक गतिविधि को दर्शाते हुए, कलेक्‍शन लगातार दूसरे महीने 2 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े से ऊपर बना रहा. घरेलू ट्रांजैक्‍शन से मिले सकल जीएसटी कलेक्‍शन जुलाई में पिछले साल के ₹1.31 लाख करोड़ से 10.1% बढ़कर ₹1.45 लाख करोड़ हो गया।

    आयात से मिले जीएसटी कलेक्‍शन में 28.8% की कहीं ज्‍यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बढ़कर ₹66,511 करोड़ हो गया, जिससे कुल कलेक्‍शन ₹2.11 लाख करोड़ तक पहुंच गया. रिफंड को ध्‍यान में रखते हुए नेट जीएसटी कलेक्‍शन ₹1.81 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 15.8% अधिक है।

    रिफंड अमाउंट भी बढ़ रहा
    इसी महीने जीएसटी रिफंड में भी दो अंकों की बढ़ोतरी देखी गई है. कुल रिफंड में साल-दर-साल 13.1% की वृद्धि हुई और यह ₹29,968 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि ICEGATE सिस्‍टम के माध्यम से संसाधित निर्यात रिफंड में 22.7% की वृद्धि हुई और यह ₹12,288 करोड़ तक पहुंच गया, जो निर्यातकों के लिए निरंतर सपोर्ट का संकेत देता है।

    वित्त वर्ष 2027 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में सकल जीएसटी कलेक्‍शन ₹8.43 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में मिले ₹7.66 लाख करोड़ से 10.1% अधिक है. इस अवधि के दौरान नेट जीएसटी कलेक्‍शन में 9.2% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹7.21 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

    बड़े राज्यों में मजबूत ग्रोथ
    हरियाणा में जीएसटी कलेक्‍शन में सबसे अधिक 25% की वृद्धि दर्ज की गई, इसके बाद गुजरात और तेलंगाना का स्थान रहा, जिनमें से प्रत्येक में 19% की वृद्धि हुई. पंजाब और केरल में 16% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि उत्तर प्रदेश में 15% की वृद्धि हुई।

    भारत में जीएसटी राजस्व का सबसे बड़ा योगदान देने वाले महाराष्ट्र राज्य में कलेक्‍शन में 13% की वृद्धि देखी गई, जबकि कर्नाटक में 12% की वृद्धि दर्ज की गई. दिल्ली में कलेक्‍शन पिछले साल जुलाई की तुलना में 8% बढ़ा. हालांकि, कुछ राज्यों में कलेक्‍शन में गिरावट दर्ज की गई. हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक 22% की गिरावट दर्ज की गई, इसके बाद उत्तराखंड (18%), पुडुचेरी (17%), मध्य प्रदेश (10%), आंध्र प्रदेश (5%) और तमिलनाडु में 1% की गिरावट आई।

  • कच्चे तेल की खोज….. समुद्र मंथन योजना पर 84084 करोड़ खर्च करेगा भारत

    कच्चे तेल की खोज….. समुद्र मंथन योजना पर 84084 करोड़ खर्च करेगा भारत


    नई दिल्‍ली।
    भारत (India) एनर्जी निर्भरता (Energy Dependence) को कम करने के लिए कई बड़े कदम उठा रहा है. अब भारत ने समुद्र से कच्‍चे तेल (Crude Oil) को निकालने के लिए एक योजना शुरू किया है. इस योजना के तहत समुद्र के नीचे अधिक तेल और प्राकृतिक गैस की खोज की जाएगी. यह एक लॉन्‍गटर्म स्‍कीम है. इस प्रोग्राम का नाम ‘समुद्र मंथन’ रखा गया है.

    नेशनल आफसोर एक्‍सप्‍लोरेशन योजना (समुद्र मंथन) के तहत 84,084 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है. यह खर्च वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगा, जिसका लक्ष्य गहरे जल क्षेत्रों में घरेलू तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है. समुद्र में उन जगहों पर तेल और गैस की खोज की जाएगी, जहां पर विशाल संसाधन मौजूद हैं और अभी तक किसी ने खोज नहीं की है।

    सरकार के अनुसार, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस नजरिए को दर्शाती है, जिसे उन्होंने पहली बार 2025 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में चर्चा की थी, जिसमें भारत की ऊर्जा क्षमता को उजागर करने के लिए आधुनिक युग के समुद्र मंथन का संचालन करने की बात कही गई थी।

    यह कार्यक्रम ऐसे समय में शुरू किया गया है जब भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88-89% और प्राकृतिक गैस का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है. यानी देश की ऊर्जा की बढ़ती मांग विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है और जियो-पॉलिटिक तनाव के कारण भारत के लिए एनर्जी सप्‍लाई प्रभावित हुई है।


    इस योजना के तहत क्‍या होगा?

    भारत में कई आफशोर सेमीडेंट्र्री बेसिन हैं, जिनमें तेल और प्राकृतिक गैस मौजूद हो सकती है, लेकिन इनमें से कई अभी भी बड़े पैमाने पर अनछुए हैं क्योंकि वहां से तेल निकालना कठिन और महंगा है. इस योजना के तहत, सरकार बड़े पैमाने पर सर्वे, भूवैज्ञानिक अध्ययन, ड्रिलिंग और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे प्रमुख प्रारंभिक चरण के कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराएगी।

    इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले भूवैज्ञानिक डेटा का उत्पादन करना है जो आशाजनक हाइड्रोकार्बन संसाधनों की पहचान कर सके और तेल-गैस निकालने में मदद कर सके. भारत के इस कदम से घरेलू स्‍तर पर तेल और गैस में बड़ा निवेश आ सकता है. साथ ही भारत का एनर्जी क्षमता मजबूत हो सकती है।


    समुद्र मंथन आखिर करेगा क्या?

    इस योजना के तहत आधुनिक टेक्‍नोलॉजी का उपयोग करते हुए उन जगहों की पहचानल की जाएगी, जहां पर तेल और गैस के होने की संभावना है. इसके बाद आशाजनक गहरे पानी और अति-गहरे पानी के क्षेत्रों में ड्रिलिंग की जाएगी. इस योजना के तहत सीमावर्ती जगहों में वैज्ञानिक ड्रिलिंग, सामान्य उत्पादन और निकासी, तेल और गैस विनिर्माण और सेवा क्षेत्र, आधुनिक टेक, डिजिटल प्रोगाम मैनेजमेंट और क्षमता निर्माण भी शामिल हैं।

    इससे क्‍या लाभ हो सकता है?
    सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से समय के साथ तेल और गैस भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल के बराबर मात्रा जुड़ जाएगी. हालांकि व्यावसायिक उत्पादन में अभी कई साल लगेंगे, लेकिन सफल खोजों से भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, लॉन्‍गटर्म ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है, निवेश आकर्षित हो सकता है, रोजगार पैदा हो सकते हैं और देश की ऊर्जा क्षमताओं को बढ़ावा मिल सकता है।

  • E20 पर सरकार का जवाब, इथेनॉल मिश्रण ने बचाए उपभोक्ताओं के हजारों करोड़, पेट्रोल 125 रुपये लीटर तक जाने से रुका

    E20 पर सरकार का जवाब, इथेनॉल मिश्रण ने बचाए उपभोक्ताओं के हजारों करोड़, पेट्रोल 125 रुपये लीटर तक जाने से रुका


    नई दिल्ली। इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा दावा किया है। सरकार का कहना है कि यदि देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम लागू नहीं किया गया होता तो पश्चिम एशिया में ईरान संकट के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ता और दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। सरकार के अनुसार E20 नीति ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की महंगाई का प्रभाव काफी हद तक कम करने में मदद की है।

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण वाली E20 नीति का उद्देश्य केवल वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना नहीं है बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना भी है। मंत्रालय का कहना है कि वैश्विक बाजार में जब कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं तब इथेनॉल मिश्रण की वजह से पेट्रोल की लागत को नियंत्रित रखने में मदद मिली और उपभोक्ताओं को संभावित भारी मूल्य वृद्धि से राहत मिली।

    सरकार ने उन दावों को भी खारिज किया है जिनमें कहा जा रहा था कि E20 पेट्रोल पुराने वाहनों के लिए नुकसानदायक है या इससे बड़ी संख्या में वाहन अनुपयोगी हो जाएंगे। मंत्रालय के अनुसार E20 को लागू करने से पहले विभिन्न ऑटोमोबाइल कंपनियों और तकनीकी संस्थानों द्वारा व्यापक परीक्षण किए गए थे। सरकार का कहना है कि यह ईंधन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है और कई देशों में लंबे समय से उपयोग किया जा रहा है।

    मंत्रालय के मुताबिक इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का एक बड़ा फायदा विदेशी मुद्रा की बचत भी है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार चढ़ाव का सीधा असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में इथेनॉल ब्लेंडिंग से पेट्रोल में आयातित ईंधन की हिस्सेदारी कम होती है जिससे आयात बिल घटाने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलती है।

    हालांकि E20 को लेकर कुछ वाहन मालिकों और विशेषज्ञों ने माइलेज तथा पुराने इंजनों पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल भी उठाए हैं। सरकार का कहना है कि E20 अनुकूल वाहनों में माइलेज पर प्रभाव सीमित है और यह वाहन की तकनीक रखरखाव तथा ड्राइविंग परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि अपुष्ट दावों और भ्रामक सूचनाओं के बजाय आधिकारिक तकनीकी जानकारी पर भरोसा करें।

    सरकार का मानना है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम केवल ईंधन लागत नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है बल्कि इससे किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध होता है पर्यावरणीय दृष्टि से कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होती है। इसी कारण केंद्र सरकार आने वाले समय में भी इथेनॉल आधारित ईंधन नीति को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।

  • अवैध घुसपैठ से निपटने के लिए समुद्र में 1600 फीट की दीवार बनाएगा स्पेन

    अवैध घुसपैठ से निपटने के लिए समुद्र में 1600 फीट की दीवार बनाएगा स्पेन


    मैड्रिड।
    मोरक्को (Morocco) से घुस आए अवैध प्रवासियों (Illegal Immigrants) के चलते स्पेन (Spain) में काफी समस्या हुई है। अब स्पेन ने इससे निपटने के लिए नया तरीका इस्तेमाल करने का फैसला किया है। स्पेन (Spain) ने घोषणा की है कि वह अपने उत्तरी अफ़्रीकी क्षेत्र स्यूटा और पड़ोसी मोरक्को के बीच समुद्री सीमा (Maritime border.) पर 500 मीटर लंबा (1,600 फीट) बैरियर बनाएगा। एक रिपोर्ट के अनुसार, सेउटा के तटीय इलाके में ताराजल ब्रेकवॉटर के पास एक तैरता हुआ अवरोध लगाया गया था। गौरतलब है कि मोरक्को के साथ लगती स्पेन के सेउटा सीमा पर मरने वालों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है। स्पेन सरकार ने शनिवार को यह जानकारी दी।


    ब्रेकवॉटर बैरियर को पार कर गए

    स्पेन सरकार ने कहाकि मृतकों में कुछ ऐसे लोग शामिल हैं जो डूब गए और कुछ ‘ब्रेकवॉटर बैरियर’ को पार करने की भगदड़ में मारे गए। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने सेउटा की घटनाओं पर यूरोपीय संघ के कुछ नेताओं की प्रतिक्रिया की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहाकि स्पेन को यूरोपीय संघ के सीमा-रहित शेंगेन क्षेत्र से निलंबित करने की मांग पूर्वाग्रह, फर्जी खबरों, अज्ञानता या राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है। शनिवार सुबह तैरकर सेउटा के ताराजल तट पर पहुंचे कुछ थके-हारे प्रवासियों को सैनिकों ने सीमा के पार वापस भेज दिया।


    गृह मंत्रालय ने क्या कहा

    स्पेन के गृह मंत्रालय का कहना है कि उत्तरी अफ्रीका में स्पेन के इलाके में दाखिल होने वालों में ज्यादातर लोग पहले ही मोरक्को लौट चुके हैं। स्पेन के गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे-मार्लास्का ने शनिवार को सेउटा में पत्रकारों से कहाकि हम कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्ती से पेश आते हैं। जब यह सवाल पूछा गया कि दोनों तरफ कड़ी सुरक्षा के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोग सीमा कैसे पार कर पाए और क्या मोरक्को से सेउटा को कोई खतरा है, तो मार्लास्का ने रबात में मौजूद सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहाकि इन घटनाओं का स्पेन और मोरक्को को मिलकर जायजा लेने की जरूरत है। लेकिन पड़ोसी देशों के साथ सहयोग की वजह से ही स्पेन 24 घंटे में हालात को सामान्य कर पाया।


    इटनी ने शुरू की यात्रियों की जांच

    उधर, इटली ने स्पेन से आने वाले यात्रियों पर अस्थायी रूप से सीमा पर जांच शुरू कर दी है। फ्रांस ने भी अपनी सीमाओं पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री सांचेज ने यूरोपीय संघ के गृह मंत्रियों की आपातकालीन बैठक बुलाने का भी आह्वान किया है। करीब 84,000 की आबादी वाले सेउटा शहर पर इस अचानक आए दबाव के कारण स्पेन और पूरे यूरोप में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। इटली ने हवाई और समुद्री मार्ग से स्पेन से आने वाले गैर-यूरोपीय संघ के नागरिकों की जांच शुरू कर दी है। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि यूरोपीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए यह कदम आवश्यक था।