Author: bharati

  • MP: शिवपुरी के करैरा में कुएं में मिले मां-बेटे का शव…. महिला ने मासूम को दुपट्टे से बांध रखा था

    MP: शिवपुरी के करैरा में कुएं में मिले मां-बेटे का शव…. महिला ने मासूम को दुपट्टे से बांध रखा था


    शिवपुरी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शिवपुरी जिले (Shivpuri district) के करैरा (Karera) में पुलिस लाइन के नीचे बने ‘पीपल वाले कुएं’ में एक महिला और उसके बेटे का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. घटना की सूचना मिलते ही करैरा थाना प्रभारी (टीआई) विनोद छाबई पुलिस टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे. पुलिस ने नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों की मदद से दोनों शवों को कुएं से बाहर निकाला और पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।

    मृतका की पहचान शिवानी विश्वकर्मा पत्नी भूपेंद्र विश्वकर्मा निवासी करैरा के रूप में हुई है. दिल दहला देने वाली बात यह सामने आई है कि महिला ने अपने 7 साल के मासूम बेटे को अपने दुपट्टे से बांधकर कुएं में छलांग लगाई थी.


    पति से विवाद के बाद दिल्ली से आई थी मायके

    परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, शिवानी का अपने पति भूपेंद्र से विवाद चल रहा था. इसी अनबन के कारण वह करीब एक से डेढ़ महीने पहले दिल्ली से अपने 7 वर्षीय बेटे को लेकर करैरा स्थित अपने मायके आई हुई थी।


    ‘वोट चोरी नहीं हो रहे, जनता ने चोरों को वोट देना बंद कर दिया…
    ‘
    मंगलवार को महिला और उसका बेटा अचानक घर से लापता हो गए थे. परिजनों ने उस वक्त ज्यादा खोजबीन नहीं की, क्योंकि उन्हें लगा कि शिवानी अपने पति से बात करके वापस दिल्ली लौट गई होगी. लेकिन बुधवार को जब कुएं में दोनों के शव मिलने की खबर फैली, तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

    पूरे मामले पर करैरा टीआई विनोद छाबई ने बताया, ”पुलिस लाइन के नीचे स्थित कुएं में महिला और उसके बच्चे का शव बरामद किया गया है. प्रथम दृष्टया यह मामला पारिवारिक विवाद के चलते आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है. पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है. मौत के सटीक कारणों और समय का वास्तविक खुलासा पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

  • सामाजिक और आर्थिक बदलाव की राह पर भारत…. देश के 2.8 करोड़ बच्चे बने पहली शिक्षित पीढ़ी

    सामाजिक और आर्थिक बदलाव की राह पर भारत…. देश के 2.8 करोड़ बच्चे बने पहली शिक्षित पीढ़ी


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में करीब 2.8 करोड़ बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने अपने परिवार में छह साल की स्कूली शिक्षा (School Education) पूरी करने वाली पहली पीढ़ी बनकर पीढ़ियों से चले आ रहे अभाव के बीच बदलाव की नई शुरुआत की है। यह आंकड़ा बताता है कि शिक्षा अब केवल बच्चों के भविष्य को बदलने का माध्यम नहीं, बल्कि परिवारों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव (Social and Economic changes) की राह भी बना रही है। हालांकि, वैश्विक आंकड़े यह भी बताते हैं कि शिक्षा की इस प्रगति को टिकाऊ बनाने के लिए बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और घर की बुनियादी सुविधाओं पर भी समान ध्यान देना होगा।

    ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (ओपीएचआई) के अध्ययन में विकासशील देशों में बच्चों की गरीबी, कुपोषण और शिक्षा की स्थिति का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और ओपीएचआई के वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें गरीबी को केवल परिवार की आय से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर से जुड़े कई अभावों के आधार पर देखा गया है।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत में शिक्षा की पहली पीढ़ी बनने वाले 2.8 करोड़ बच्चों का आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक बच्चे का स्कूल पहुंचना केवल उसके व्यक्तिगत जीवन में बदलाव नहीं लाता। जब किसी परिवार में पहली बार कोई बच्चा छह साल की स्कूली शिक्षा पूरी करता है, तो वह अगली पीढ़ी के लिए शिक्षा को सामान्य और जरूरी बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाता है।

    अध्ययन के अनुसार दुनिया के 108 देशों में 10 से 17 वर्ष की उम्र के करीब 7.1 करोड़ बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने अपने परिवार में कम से कम छह साल की स्कूली शिक्षा पूरी करने वाली पहली पीढ़ी का दर्जा हासिल किया है। इनमें करीब आधे बच्चे दक्षिण एशिया में हैं। भारत इस बदलाव में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाले देशों में शामिल है।

    दक्षिण एशिया में भारत के अलावा बांग्लादेश में 30 लाख से अधिक, पाकिस्तान में करीब 20 लाख, नेपाल में 8.37 लाख और अफगानिस्तान में करीब 5.08 लाख बच्चे इस श्रेणी में हैं। भारत, भूटान और बांग्लादेश में इस तरह अपने परिवार की पहली शिक्षित पीढ़ी बनने वाली बच्चियों की हिस्सेदारी लड़कों की तुलना में अधिक पाई गई है। बच्चों के जीवन में शिक्षा और पोषण की चुनौतियां एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। अध्ययन में विकासशील देशों के पांच साल से कम उम्र के 51.8 करोड़ बच्चों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें 25.2 करोड़ बच्चे कुपोषण, बहुआयामी गरीबी या दोनों से प्रभावित पाए गए।


    महिलाओं की शिक्षा से भी जुड़ी बच्चों की स्थिति

    बहुआयामी गरीबी में रहने वाले दो-तिहाई से अधिक बच्चे ऐसे परिवारों से हैं, जहां किसी महिला ने छह साल की स्कूली शिक्षा पूरी नहीं की है। स्कूल से बाहर रहने वाले गरीब बच्चों में यह अनुपात करीब 82 फीसदी है।


    शिक्षा की राह खुली, मंजिल दूर

    अध्ययन की तस्वीर में भारत के लिए एक तरफ 2.8 करोड़ बच्चों की उपलब्धि उम्मीद पैदा करती है तो दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट करती है कि शिक्षा को गरीबी से स्थायी मुक्ति का माध्यम बनाने के लिए कई मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा। पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छ पानी, स्वच्छता, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं के बिना केवल स्कूल तक पहुंच सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं होगा।


    13.6 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर

    108 देशों में स्कूल जाने की उम्र के करीब 104 करोड़ बच्चों के आंकड़ों में 13.6 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर पाए गए। इनमें 11 करोड़ यानी 80 फीसदी से अधिक बच्चे बहुआयामी गरीबी में भी हैं। अध्ययन के अनुसार, स्कूल से बाहर रहने वाले गरीब बच्चों को औसतन पांच अन्य प्रकार के अभावों का भी सामना करना पड़ता है।

  • Kedarnath : बासुकीताल ट्रेक पर गया पांच सदस्यीय ट्रेकिंग दल लापता… दो जवान भी शामिल

    Kedarnath : बासुकीताल ट्रेक पर गया पांच सदस्यीय ट्रेकिंग दल लापता… दो जवान भी शामिल


    रुद्रप्रयाग।
    केदारनाथ (Kedarnath)- बासुकीताल ट्रेक (Vasuki Taal Trek) पर गए पांच सदस्यीय ट्रेकिंग दल लापता हो गया। इनमें दो पीएसी जवान (Two PAC personnel) भी शामिल हैं। दल से संपर्क टूटने के बाद मंगलवार को रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया है। इनमें से एक ट्रेकर के परिजन यशवंत सिंह चौहान (Yashwant Singh Chauhan) ने जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) को सूचना दी कि उनका भाई प्रवेश चौहान अपने पांच साथियों के साथ 25 सितंबर को केदारनाथ-बासुकीताल ट्रेक पर गए थे। दल की योजना ओडिन कॉल होते हुए गंगोत्री पहुंचने की थी। परिजनों का उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

    जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस नियंत्रण कक्ष और वन्यजीव प्रभाग गोपेश्वर को अवगत कराया गया। साथ ही 40वीं वाहिनी पीएसी से समन्वय स्थापित किया गया।


    कौन-कौन हैं लापता

    लापता ट्रेकर्स में अमित फर्सवाण (40वीं वाहिनी पीएसी हरिद्वार), नवीन रावत (40वीं वाहिनी पीएसी रुद्रप्रयाग), प्रवेश चौहान (फॉरेस्टर, उत्तरकाशी), विवेक (निवासी जग्गी बगवान) और संजय सिंह रावत (पशुपालन विभाग केदारनाथ) शामिल हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और वन विभाग की टीमों ने खोजबीन शुरू कर दी है। हेलीकॉप्टर से भी सर्च अभियान चलाया गया किन्तु कम दृश्यता से अभियान स्थगित करना पड़ा।


    कालिंदी पास पर रेस्क्यू पूरा, 67 ट्रेकर्स निकाले

    उत्तरकाशी। कालिंदी पास और ओडिन कॉल क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी के बीच फंसे 139 पर्वतारोही, ट्रेकर्स और सहयोगी स्टाफ की सुरक्षित वापसी के लिए मंगलवार को रेस्क्यू अभियान चलाया गया। दूसरे दिन भी 27 पर्वतारोही, ट्रेकरों और पोर्टर्स को हेलीकॉप्टरों से सुरक्षित निकाला गया। इसके साथ मंगलवार दोपहर तक तक यह अभियान पूरा हो गया है। दूसरी ओर क्षेत्र में पर्वतारोहण अभियानों पर गए 72 पर्वतारोहियों और ट्रेकरों ने अभियान जारी रखने का निश्चय किया है।

    उनका कहना है कि वे स्वयं वापस लौट जाएंगे। अभियान में अब तक कुल 67 सदस्यों को हेलीकॉप्टरों से निकाला जा चुका है। इनमें ओडिन कॉल पास से 29, जोगिन वन से आठ, सतोपंथ से 08, कालिंदी पास से 19 और वासुकीताल से तीन लोग शामिल हैं। सभी को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है। बता दें कि गत सप्ताह बारिश-बर्फबारी से 139 ट्रेकर फंस गए थे।


    सुरक्षित निकाले गए 27 ट्रेकर्स

    सोमवार को पहले दिन 40 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। मौसम अनुकूल न होने पर अभियान रोकना पड़ा। मंगलवार को मौसम साफ होने पर सुबह से फिर अभियान शुरू किया गया। इस दौरान कालिंदी पास से आठ, जोगिन वन से आठ और सतोपंथ पीक बेस कैंप से नौ ट्रेकर्स को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित हर्षिल लाया गया। वासुकीताल क्षेत्र से दो आर्मी पोर्टर्स को भी रेस्क्यू किया गया।

  • गांव में शराब लेकर पहुंचना पड़ा भारी, महिलाओं ने युवक को पकड़ा, खंभे से बांधा और पेटियों में लगाई आग

    गांव में शराब लेकर पहुंचना पड़ा भारी, महिलाओं ने युवक को पकड़ा, खंभे से बांधा और पेटियों में लगाई आग


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के करैरा क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ महिलाओं का गुस्सा सड़क पर देखने को मिला। मंगलवार को समोहा गांव में शराब की पेटियां लेकर पहुंचे दो बाइक सवारों को महिलाओं ने घेर लिया। दोनों युवकों ने मौके से भागने की कोशिश की लेकिन महिलाओं ने उनका पीछा कर लिया और पीछे बैठे एक व्यक्ति को पकड़ लिया। इसके बाद महिलाओं ने शराब की पेटियां अपने कब्जे में लेकर उन्हें सड़क पर फेंक दिया और आग लगा दी। पकड़े गए युवक को रस्सी से एक खंभे में बांध दिया गया और पुलिस को पूरे मामले की सूचना दी गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें महिलाओं का विरोध और शराब की पेटियों को जलाने का दृश्य दिखाई दे रहा है।

    जानकारी के मुताबिक मंगलवार को दो बाइक सवार समोहा गांव में शराब की पेटियां लेकर पहुंचे थे। गांव में उनकी गतिविधियों को देखकर महिलाओं ने उन्हें रोकने की कोशिश की। बाइक सवारों ने वहां से निकलने का प्रयास किया लेकिन महिलाएं उनके पीछे दौड़ पड़ीं। इस दौरान एक व्यक्ति महिलाओं के हाथ लग गया जबकि दूसरा मौके से निकल गया। महिलाओं ने पकड़े गए युवक को रस्सी से खंभे से बांध दिया। इसके बाद शराब की पेटियों को सड़क पर रखकर उनमें आग लगा दी गई। मामले की सूचना मिलने के बाद करैरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को अपने साथ थाने ले गई।

    पुलिस के अनुसार पकड़े गए व्यक्ति की पहचान सुरेंद्र राय के रूप में हुई है। पुलिस ने मामले में आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब कहां से लाई गई थी और गांव में इसकी सप्लाई कौन कर रहा था। साथ ही दूसरे बाइक सवार और शराब की सप्लाई से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

    वहीं गांव की महिलाओं का आरोप है कि समोहा में कई जगहों पर अवैध तरीके से शराब बेची जा रही है। महिलाओं का दावा है कि गांव में करीब तीन स्थानों पर शराब की बिक्री होती है और कुछ लोग परचून की दुकानों की आड़ में शराब बेच रहे हैं। उनका कहना है कि गांव में आसानी से शराब उपलब्ध होने के कारण परिवारों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। महिलाओं ने प्रशासन और पुलिस से अवैध शराब की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की है।

    महिलाओं के इस विरोध को हाल में सागर में शराब से हुई मौतों के बाद शराब की अवैध बिक्री को लेकर बढ़ी चिंता से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि शिवपुरी की इस घटना में पुलिस की कार्रवाई और जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शराब की सप्लाई का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है। फिलहाल गांव में महिलाओं के इस तरह सड़क पर उतरकर विरोध करने की घटना चर्चा में है। पुलिस ने पकड़े गए युवक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और अवैध शराब की बिक्री से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।

  • बुधवार का व्रत करने से पहले जान लें पूजा की सही विधि सुबह से शाम तक इन नियमों का रखें ध्यान मिलेगा शुभ फल

    बुधवार का व्रत करने से पहले जान लें पूजा की सही विधि सुबह से शाम तक इन नियमों का रखें ध्यान मिलेगा शुभ फल


    नई दिल्ली। बुधवार का दिन भगवान गणेश और बुध देव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार के दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को बुद्धि विवेक और एकाग्रता की प्राप्ति होती है। कई लोग बुधवार का व्रत अपने जीवन में सुख समृद्धि और कार्यों में सफलता की कामना से रखते हैं। माना जाता है कि बुध ग्रह का संबंध बुद्धि वाणी शिक्षा व्यापार और तर्क क्षमता से है। इसलिए बुधवार को विधि विधान से पूजा करने की परंपरा है।

    बुधवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थान की साफ सफाई करके भगवान गणेश और बुध देव का ध्यान करना चाहिए। पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की आराधना से करना शुभ माना जाता है क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार फल फूल तथा प्रसाद चढ़ाएं।

    इसके बाद बुध देव की पूजा करें। पूजा स्थान पर बुध देव का ध्यान करते हुए दीपक और धूप जलाएं। हरे रंग का विशेष महत्व माना जाता है इसलिए पूजा में हरे वस्त्र या हरे फल का उपयोग किया जा सकता है। श्रद्धा के अनुसार हरे मूंग का दान भी किया जाता है। इसके बाद बुध देव के मंत्र का जाप करें। जो लोग मंत्र जाप करते हैं वे अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जाप की संख्या निर्धारित कर सकते हैं।

    बुधवार व्रत में भोजन को लेकर अलग अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। कुछ लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। व्रत की अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार ही भोजन करना उचित माना जाता है। फलाहार में फल दूध और अन्य सात्विक चीजों का सेवन किया जा सकता है। व्रत के दौरान मन को शांत रखना और नकारात्मक विचारों से बचना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

    पूजा के दौरान भगवान गणेश की आरती करें और बुध देव का स्मरण करें। इसके बाद अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। बुधवार व्रत में जरूरतमंद व्यक्ति को हरे रंग की वस्तु हरे मूंग या अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्य सामग्री का दान करने की भी परंपरा है। दान करते समय दिखावे से बचना चाहिए और श्रद्धा को महत्व देना चाहिए।

    बुधवार व्रत करने वालों को इस दिन किसी के साथ कटु वाणी का प्रयोग करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में बुध ग्रह को वाणी और बुद्धि से जोड़ा जाता है इसलिए मीठा बोलने और संयमित व्यवहार करने को विशेष महत्व दिया जाता है। किसी का अपमान करना या क्रोध में आकर विवाद करना भी उचित नहीं माना जाता।

    व्रत समाप्त करने के लिए पूजा और आरती के बाद प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक बुधवार का व्रत कर रहा है तो व्रत की संख्या और उद्यापन की परंपरा अपने परिवार की मान्यता या किसी योग्य आचार्य की सलाह के अनुसार तय कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्रत में श्रद्धा संयम और सात्विक आचरण बनाए रखा जाए।

  • Lauki Juice Benefits: लौकी का जूस डाइट में शामिल करने से मिल सकते हैं ये 5 फायदे, लेकिन कड़वी लौकी से रहें सावधान

    Lauki Juice Benefits: लौकी का जूस डाइट में शामिल करने से मिल सकते हैं ये 5 फायदे, लेकिन कड़वी लौकी से रहें सावधान

    Lauki Juice Benefits: लौकी को सेहत के लिए फायदेमंद सब्जियों में शामिल किया जाता है। इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है और यह कुछ जरूरी पोषक तत्वों का स्रोत भी है। इसी वजह से कई लोग लौकी की सब्जी के अलावा इसका जूस भी अपनी डाइट में शामिल करते हैं। बिना चीनी और अतिरिक्त सामग्री के तैयार किया गया ताजा लौकी का जूस हल्का पेय विकल्प हो सकता है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए और न ही किसी एक जूस पर निर्भर रहना सही है। इसे संतुलित खानपान के हिस्से के तौर पर लेना बेहतर है। लौकी के जूस से जुड़े फायदों की बात करें तो इसमें मौजूद पानी और कुछ पोषक तत्व शरीर को पर्याप्त तरल पदार्थ उपलब्ध कराने और डाइट की पोषण गुणवत्ता बेहतर करने में योगदान दे सकते हैं।

    लौकी का जूस शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है। लौकी में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है, इसलिए इससे तैयार ताजा जूस शरीर में तरल पदार्थ की पूर्ति में योगदान दे सकता है। गर्मी या शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है और इस स्थिति में सादा पानी सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। इसलिए लौकी के जूस को पानी का विकल्प नहीं समझना चाहिए। इसके अलावा लौकी में मौजूद पानी और यदि जूस में कुछ गूदा शामिल रहे तो थोड़ी मात्रा में फाइबर भी मिल सकता है। संतुलित डाइट में फाइबर पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज के लिए महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, पूरी लौकी खाने की तुलना में जूस में फाइबर की मात्रा कम हो सकती है।

    लौकी को आमतौर पर कम कैलोरी वाली सब्जियों में शामिल किया जाता है। बिना चीनी मिलाया गया लौकी का जूस भी कैलोरी के लिहाज से हल्का पेय हो सकता है। यदि इसे अधिक कैलोरी या मीठे पेय की जगह लिया जाए तो कुल कैलोरी सेवन को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, केवल लौकी का जूस पीने से वजन कम करने की उम्मीद करना सही तरीका नहीं है। वजन नियंत्रित रखने के लिए संतुलित खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। इसी तरह लौकी को डाइट में शामिल करने से शरीर को कुछ विटामिन और मिनरल्स भी मिल सकते हैं। अलग-अलग सब्जियों और फलों को उनकी पूरी अवस्था में खाने से शरीर को विविध पोषण और पर्याप्त फाइबर मिल सकता है।

    बिना चीनी और अतिरिक्त सामग्री के तैयार किया गया ताजा लौकी का जूस उन लोगों के लिए हल्का पेय विकल्प हो सकता है, जो मीठे शीतल पेय या अधिक कैलोरी वाले ड्रिंक्स कम करना चाहते हैं। हालांकि, इसे डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह ली जा सकती है। खास तौर पर लौकी का जूस तैयार करते समय एक जरूरी सावधानी का ध्यान रखना चाहिए। यदि लौकी का स्वाद कड़वा हो तो उसका जूस बिल्कुल नहीं पीना चाहिए। कड़वी लौकी में विषैले कुकुर्बिटासिन की मात्रा अधिक हो सकती है। इसलिए जूस बनाने से पहले लौकी का स्वाद जांचना जरूरी है और कड़वी लौकी का सेवन नहीं करना चाहिए।

    कुल मिलाकर, लौकी का ताजा जूस हाइड्रेशन में योगदान देने, संतुलित डाइट में पोषक तत्व शामिल करने और मीठे या अधिक कैलोरी वाले पेय के विकल्प के रूप में उपयोगी हो सकता है। पाचन के लिए भी इसमें मौजूद पानी और कुछ गूदे के कारण थोड़ी मात्रा में फाइबर मिल सकता है। फिर भी जूस की तुलना में पूरी सब्जी खाना अधिक फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि जूस बनाने की प्रक्रिया में फाइबर कम हो जाता है। इसलिए लौकी को संतुलित आहार का हिस्सा बनाना बेहतर है और किसी बीमारी के इलाज या वजन घटाने के लिए केवल इसके जूस पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

  • एमपी में गजब घटनाओं की भरमार, CMHO ऑफिस में पिल्लों का जन्म, विधायक के बाइक स्टंट से मचा हंगामा

    एमपी में गजब घटनाओं की भरमार, CMHO ऑफिस में पिल्लों का जन्म, विधायक के बाइक स्टंट से मचा हंगामा


    भोपाल । मध्यप्रदेश में इन दिनों राजनीति प्रशासन और सरकारी व्यवस्थाओं से जुड़ी ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जो चर्चा का विषय बन गई हैं। कहीं सरकारी स्वास्थ्य कार्यालय में आवारा कुतिया ने छह पिल्लों को जन्म दे दिया तो कहीं प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में सांप के पहुंचने से लोगों में हड़कंप मच गया। इसी बीच कालापीपल के भाजपा विधायक घनश्याम चंद्रवंशी का बाइक चलाते हुए स्टंट करने का वीडियो सामने आया तो आगर जिले के सुसनेर में कांग्रेस विधायक भैरों सिंह परिहार का तहसीलदार को फोन पर फटकार लगाने का मामला भी सुर्खियों में आ गया। इन घटनाओं ने सरकारी व्यवस्थाओं से लेकर जनप्रतिनिधियों के आचरण तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    छतरपुर में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी CMHO के कार्यालय में रविवार रात एक आवारा कुतिया पहुंच गई। बताया गया कि वह कार्यालय के एक खाली केबिन में अलमारियों और फाइलों के बीच चली गई और वहीं उसने छह पिल्लों को जन्म दे दिया। सोमवार सुबह जब कर्मचारी कार्यालय पहुंचे तो फाइलों के बीच पिल्लों को देखकर हैरान रह गए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद कार्यालय की साफ सफाई और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। मामला अधिकारियों तक पहुंचा तो कलेक्टर ने CMHO को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए।

    इसी तरह इंदौर के एमवाय अस्पताल में भी एक सांप के पहुंचने से अफरा तफरी मच गई। अस्पताल की न्यू ओपीडी में सांप काफी देर तक घूमता रहा। उसे देखकर वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। बाद में काफी मशक्कत के बाद सांप को पकड़ा गया और अस्पताल परिसर से बाहर निकाला गया। इससे पहले अस्पताल में चूहों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। अब सांप के पहुंचने की घटना ने अस्पताल की साफ सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।

    उधर कालापीपल से भाजपा विधायक घनश्याम चंद्रवंशी का बाइक चलाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो में वह कुछ समय के लिए दोनों हाथ छोड़कर बाइक चलाते दिखाई दिए। वीडियो वायरल होने के बाद नियमों की अनदेखी को लेकर सवाल उठे। विधायक ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कोई स्टंट नहीं किया था और यह उत्साह में हो गया। उन्होंने आगे ऐसी गलती नहीं करने की बात कही। खास बात यह है कि विधायक पहले लोगों को हेलमेट और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह देते नजर आए थे।

    आगर जिले के सुसनेर में कांग्रेस विधायक भैरों सिंह परिहार का तहसीलदार से फोन पर विवाद भी चर्चा में रहा। नगर परिषद अध्यक्ष पद के उपचुनाव के दौरान विधायक ने बिना सूचना EVM बदले जाने का आरोप लगाते हुए तहसीलदार से फोन पर नाराजगी जताई। बातचीत के दौरान उन्होंने तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। हालांकि बाद में विधायक खुद पूछते सुनाई दिए कि फोन पर कौन था।

    इन घटनाओं के बीच प्रशासनिक गलियारों में संभावित IAS तबादलों की चर्चा भी तेज है। एक जिले के कलेक्टर द्वारा अपनी कुर्सी बचाने के लिए कथित तौर पर प्रभावशाली संपर्कों का सहारा लेने की चर्चा है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में इन दिनों सरकारी व्यवस्थाओं और जनप्रतिनिधियों से जुड़ी कई घटनाएं एक साथ सुर्खियों में हैं।

  • 30 सितंबर का वास्तु उपाय: घर में सुख-समृद्धि और पॉजिटिव एनर्जी के लिए करें ये छोटे बदलाव, इन गलतियों से बचना जरूरी

    30 सितंबर का वास्तु उपाय: घर में सुख-समृद्धि और पॉजिटिव एनर्जी के लिए करें ये छोटे बदलाव, इन गलतियों से बचना जरूरी


    नई दिल्ली। 30 सितंबर 2026 को घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखने के लिए वास्तु से जुड़े कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं। वास्तु शास्त्र में घर की दिशा साफ सफाई और वस्तुओं की सही जगह को महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि घर का वातावरण व्यवस्थित और स्वच्छ रहने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार बेहतर होता है। इसलिए रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ छोटी बातों का ध्यान रखकर घर के माहौल को बेहतर बनाया जा सकता है।

    वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार बेहद महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। मुख्य द्वार के आसपास गंदगी या अनावश्यक सामान जमा नहीं करना चाहिए। 30 सितंबर को सुबह घर की सफाई करते समय मुख्य प्रवेश द्वार को भी अच्छी तरह साफ करें। दरवाजे के आसपास पर्याप्त रोशनी और स्वच्छता रखने से घर का वातावरण सकारात्मक बनाए रखने में मदद मिल सकती है। प्रवेश द्वार पर सुंदर और साफ सजावट करना भी शुभ माना जाता है।

    घर के उत्तर और पूर्व दिशा को भी वास्तु में विशेष महत्व दिया जाता है। इन स्थानों को यथासंभव साफ और खुला रखने की सलाह दी जाती है। भारी सामान को इन दिशाओं में रखने से बचना बेहतर माना जाता है। यदि घर में कोई ऐसी वस्तु लंबे समय से रखी है जिसका इस्तेमाल नहीं होता तो उसे हटाकर जगह को व्यवस्थित किया जा सकता है। इससे घर अधिक खुला और साफ दिखाई देगा।

    रसोईघर में भी वास्तु के कुछ नियम बताए गए हैं। गैस चूल्हे और सिंक को एक दूसरे के बिल्कुल पास रखने से बचने की सलाह दी जाती है। रसोई को साफ रखना और रात में बर्तन इधर उधर न छोड़ना अच्छी आदत मानी जाती है। भोजन बनाने की जगह स्वच्छ रहने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

    शयनकक्ष में भी अनावश्यक सामान जमा करने से बचना चाहिए। खासकर बिस्तर के नीचे बेकार वस्तुएं रखने की आदत छोड़ना बेहतर माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार सोने की जगह शांत और व्यवस्थित होनी चाहिए। कमरे में जरूरत से ज्यादा सामान रखने के बजाय खुली जगह बनाए रखना उपयोगी हो सकता है।

    पूजा स्थान को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए। 30 सितंबर को सुबह पूजा स्थान की सफाई करके दीपक जलाया जा सकता है। धार्मिक मान्यता रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार भगवान की पूजा और प्रार्थना कर सकते हैं। पूजा स्थान के आसपास टूटे हुए सामान या लंबे समय से अनुपयोगी वस्तुएं रखने से बचना चाहिए।

    घर में पानी के स्रोत और उससे जुड़ी जगहों की स्वच्छता पर भी ध्यान देना चाहिए। नल से लगातार पानी टपक रहा हो तो उसे ठीक कराना चाहिए। वास्तु मान्यताओं में पानी को समृद्धि और ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए पानी की बर्बादी रोकना और घर में स्वच्छता बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    वास्तु के इन उपायों को धार्मिक विश्वास और पारंपरिक मान्यताओं के रूप में देखा जाना चाहिए। इनका उद्देश्य घर को साफ व्यवस्थित और सकारात्मक बनाए रखने की आदतों को बढ़ावा देना है। 30 सितंबर को छोटी शुरुआत करके घर के मुख्य द्वार रसोई पूजा स्थान और कमरों की सफाई पर ध्यान दिया जा सकता है।

  • खिलाड़ियों के लिए बड़ी सौगात, हर विधानसभा में CM Sports Complex, गांव-शहर में बढ़ेंगी खेल सुविधाएं

    खिलाड़ियों के लिए बड़ी सौगात, हर विधानसभा में CM Sports Complex, गांव-शहर में बढ़ेंगी खेल सुविधाएं


    भोपाल । मध्यप्रदेश में खेल प्रतिभाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश की हर विधानसभा में CM Sports Complex विकसित किए जाएंगे। इन परिसरों में खिलाड़ियों के लिए अलग अलग खेलों के मैदान और प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही फिटनेस सेंटर चेंजिंग रूम उपकरण कक्ष फायर सेफ्टी सिस्टम और दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की जाएंगी। जरूरत पड़ने पर आपातकालीन सेवाओं के संचालन के लिए परिसर में हेलीपैड की सुविधा भी उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा जा रहा है। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मंगलवार को मंत्रालय में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्माणाधीन CM Sports Complex की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्माण कार्य में गुणवत्ता के साथ साथ परिसर की उपयोगिता पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

    इन स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की खास बात यह होगी कि एक ही परिसर में कई खेलों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां बैडमिंटन एथलेटिक्स ट्रैक मार्शल आर्ट टेबल टेनिस खो खो कबड्डी वॉलीबॉल और फुटबॉल जैसे खेलों के लिए मैदान और आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार की जाएंगी। इससे बच्चों और युवाओं को अपने विधानसभा क्षेत्र में ही नियमित अभ्यास और प्रशिक्षण का अवसर मिल सकेगा। अभी कई खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाओं के लिए जिला मुख्यालय या बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। विधानसभा स्तर पर आधुनिक खेल परिसरों के विकसित होने से स्थानीय खिलाड़ियों को अपने आसपास ही अभ्यास का बेहतर माहौल मिलने की उम्मीद है।

    परिसर में सिर्फ खेल मैदान ही नहीं बल्कि खिलाड़ियों की जरूरत से जुड़ी दूसरी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। एडमिन ब्लॉक फिटनेस सेंटर उपकरण कक्ष चेंजिंग रूम इलेक्ट्रिकल रूम और फायर सेफ्टी सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं परिसर का हिस्सा होंगी। दिव्यांग खिलाड़ियों और अन्य दिव्यांगजनों के लिए उनकी जरूरत के अनुसार विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य खेल परिसर को अधिक सुविधाजनक और सभी के लिए उपयोगी बनाना है।

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत खिलाड़ियों को बेहतर मैदान प्रशिक्षण उपकरण और सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की है। विधानसभा स्तर पर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के युवाओं को खेलों के लिए बेहतर मंच मिल सकेगा। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले खिलाड़ी आगे चलकर जिला संभाग राज्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंच सकेंगे।

    इन परिसरों में हेलीपैड का प्रावधान भी महत्वपूर्ण है। सामान्य परिस्थितियों में इसका उपयोग खेल परिसर का हिस्सा रहते हुए किया जा सकता है जबकि आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन सेवाओं और त्वरित राहत कार्यों में इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। सरकार की कोशिश है कि ये परिसर केवल भवन और मैदान बनकर न रह जाएं बल्कि उनका नियमित और प्रभावी उपयोग हो। अधिकारियों को इसी उद्देश्य के साथ निर्माण की गुणवत्ता के साथ सुविधाओं की उपयोगिता और संचालन पर भी ध्यान देने को कहा गया है। यदि योजना के अनुसार इन परिसरों का प्रभावी संचालन होता है तो आने वाले समय में प्रदेश के युवाओं को स्थानीय स्तर पर खेल अभ्यास और प्रशिक्षण के लिए एक नया मंच मिल सकता है।

  • भोपाल के बाद पूरे MP में कांग्रेस का आंदोलन, जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और कलेक्टर कार्यालय घेराव

    भोपाल के बाद पूरे MP में कांग्रेस का आंदोलन, जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और कलेक्टर कार्यालय घेराव


    भोपाल । मध्यप्रदेश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का आंदोलन बुधवार को जिला स्तर तक पहुंचने जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस के आह्वान पर सभी जिला मुख्यालयों में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन करेंगे और कलेक्टर कार्यालयों का घेराव करने की तैयारी है। पार्टी की ओर से यह आंदोलन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद के बीच किया जा रहा है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई है। देश के दूसरे हिस्सों में भी कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रही है और उनके इस्तीफे की मांग सामने रख रही है।

    मध्यप्रदेश में इस आंदोलन की शुरुआत भोपाल से हो चुकी है। 28 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस ने भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय का घेराव किया था। प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने किया था। इसमें प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अलावा विधायक पूर्व विधायक पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए थे। उस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की की स्थिति भी बनी थी और कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए थे। अब कांग्रेस ने इसी आंदोलन को प्रदेश के अलग अलग जिलों तक ले जाने की रणनीति बनाई है। भोपाल के प्रदर्शन की रिपोर्ट भी सामने आई है जिसमें SIR को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों और CEC के इस्तीफे की मांग का उल्लेख है।

    कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर गंभीर सवाल हैं। पार्टी इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है। बुधवार को जिला मुख्यालयों पर होने वाले प्रदर्शनों में यही मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए जाने हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता अपने अपने जिलों में एकत्र होकर कलेक्टर कार्यालयों की ओर मार्च करेंगे और वहां प्रदर्शन करेंगे।

    इस बीच चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR 2026 से जुड़ी मतदाता सेवाएं उपलब्ध हैं। आयोग की वेबसाइट पर अंतिम SIR मतदाता सूची में नाम खोजने की सुविधा दी गई है। आयोग के अनुसार मतदाता अपने EPIC नंबर या मतदाता संबंधी विवरण के माध्यम से जानकारी देख सकते हैं।

    CEC ज्ञानेश कुमार फिलहाल भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक उन्होंने 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था।

    SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस की ओर से विरोध प्रदर्शन का सिलसिला लगातार जारी है। दूसरी ओर इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच अलग अलग दावे सामने आ रहे हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश में बुधवार को होने वाले जिला स्तरीय प्रदर्शनों पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी। कांग्रेस का आंदोलन कितना व्यापक रहता है और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन के दौरान क्या स्थिति बनती है यह दिनभर की प्रमुख राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहेगा।