Author: bharati

  • बुधवार के वास्तु उपाय: गणपति की कृपा से खुलेंगे तरक्की के रास्ते, घर में आएगी सुख-समृद्धि

    बुधवार के वास्तु उपाय: गणपति की कृपा से खुलेंगे तरक्की के रास्ते, घर में आएगी सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा में बुधवार का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन भगवान गणेश और बुध ग्रह को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुधवार को विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने और कुछ विशेष वास्तु उपाय अपनाने से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का आगमन होता है। वहीं वास्तु शास्त्र भी इस दिन को सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने और घर-परिवार में खुशहाली लाने के लिए महत्वपूर्ण मानता है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार बुधवार के दिन घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। माना जाता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार अधिक होता है। घर के मुख्य द्वार को साफ रखकर वहां रंगोली बनाना या हरे रंग के पौधे लगाना शुभ माना जाता है। मुख्य द्वार से ही घर में ऊर्जा का प्रवेश होता है, इसलिए इसे अव्यवस्थित या गंदा नहीं रखना चाहिए।

    बुधवार को हरे रंग का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि यह रंग बुध ग्रह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घर में हरे रंग के पौधे लगाना, हरे वस्त्र पहनना या पूजा में हरे रंग की वस्तुओं का उपयोग करना लाभकारी माना जाता है। तुलसी का पौधा विशेष रूप से शुभ माना गया है। यदि घर में तुलसी का पौधा है तो बुधवार को उसकी पूजा करने और दीपक जलाने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार बुधवार को घर के उत्तर दिशा क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उत्तर दिशा को बुध ग्रह की दिशा माना गया है। इस दिशा को साफ-सुथरा और खुला रखना शुभ फलदायी माना जाता है। यदि उत्तर दिशा में अनावश्यक सामान रखा हो तो उसे हटा देना चाहिए। ऐसा करने से धन और करियर से जुड़े अवसरों में वृद्धि होने की मान्यता है।

    भगवान गणेश की पूजा भी बुधवार के दिन अत्यंत शुभ मानी जाती है। सुबह स्नान के बाद गणपति बप्पा को दूर्वा, मोदक और हरे रंग के फूल अर्पित करने से बुद्धि, विवेक और सफलता की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि गणेश जी विघ्नहर्ता हैं और उनकी कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। व्यवसाय और नौकरी से जुड़े लोगों के लिए यह उपाय विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

    आर्थिक उन्नति के लिए बुधवार को हरी मूंग का दान करना भी शुभ माना गया है। जरूरतमंद लोगों को हरी सब्जियां, हरे वस्त्र या हरी मूंग दान करने से बुध ग्रह मजबूत होता है और आर्थिक समस्याओं में राहत मिलने की संभावना बढ़ती है। इसके साथ ही पक्षियों को दाना डालना और गाय को हरा चारा खिलाना भी पुण्यदायी माना गया है।

    यदि घर में लगातार तनाव या नकारात्मकता महसूस हो रही हो तो बुधवार को कपूर और लौंग जलाकर पूरे घर में उसकी सुगंध फैलाना लाभकारी माना जाता है। यह उपाय वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

    कुल मिलाकर बुधवार का दिन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वास्तु के नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे उपाय घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मकता लाने में मदद कर सकते हैं। नियमित रूप से इन उपायों का पालन करने से जीवन में संतुलन और सफलता के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

  • सोने की चमक पड़ी फीकी! गोल्ड ETF में टूटा लगातार निवेश का सिलसिला, निवेशकों ने की मुनाफावसूली

    सोने की चमक पड़ी फीकी! गोल्ड ETF में टूटा लगातार निवेश का सिलसिला, निवेशकों ने की मुनाफावसूली

    नई दिल्ली । सोने में निवेश को लेकर निवेशकों का रुख मई महीने में बदलता दिखाई दिया है। लगातार 13 महीनों तक मजबूत निवेश आकर्षित करने वाले गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) से मई 2026 में 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। इसके साथ ही एक वर्ष से अधिक समय से जारी सकारात्मक निवेश प्रवाह का सिलसिला टूट गया। वित्तीय बाजार के विशेषज्ञ इस बदलाव को निवेशकों की रणनीति में आए परिवर्तन और सोने की ऊंची कीमतों से जोड़कर देख रहे हैं।

    हाल के महीनों में वैश्विक अनिश्चितताओं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग के कारण सोने की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखी गई थी। इसी वजह से गोल्ड ईटीएफ में भी निवेशकों की रुचि लगातार बनी हुई थी। हालांकि मई में पहली बार ऐसी स्थिति सामने आई जब निवेशकों ने इस श्रेणी से बड़ी मात्रा में धन निकालना शुरू किया। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो में संतुलन बनाने और मुनाफा सुरक्षित करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।

    वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंचने के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। जब किसी एसेट में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है, तब निवेशक अक्सर अपने निवेश का एक हिस्सा निकालकर लाभ सुरक्षित करते हैं। गोल्ड ईटीएफ में आई निकासी को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।

    बाजार जानकारों के अनुसार, हाल के महीनों में इक्विटी बाजारों में भी निवेश के अवसर बढ़े हैं। कई शेयरों के मूल्यांकन आकर्षक स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने अपने धन का कुछ हिस्सा सोने से निकालकर अन्य परिसंपत्तियों की ओर स्थानांतरित करना शुरू किया है। इससे गोल्ड ईटीएफ में निवेश की रफ्तार स्वाभाविक रूप से धीमी हुई है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि निवेशकों के लिए सोने में निवेश बनाए रखने की अवसर लागत बढ़ी है। फिक्स्ड इनकम निवेश विकल्पों पर बेहतर प्रतिफल मिलने और अन्य परिसंपत्तियों में संभावित अवसर दिखाई देने के कारण कुछ निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ से दूरी बनानी शुरू की। इसके अलावा, बाजार में भविष्य के रिटर्न को लेकर अधिक संतुलित दृष्टिकोण भी देखने को मिल रहा है।

    हालांकि मई में निकासी दर्ज की गई, लेकिन यह तस्वीर का केवल एक पक्ष है। दूसरी ओर गोल्ड ईटीएफ का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट लगातार बढ़ता रहा। इसका अर्थ यह है कि सोने की कीमतों में वृद्धि का असर फंडों की कुल परिसंपत्तियों पर सकारात्मक रूप से दिखाई दिया। इससे स्पष्ट होता है कि निवेशकों का भरोसा पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है, बल्कि निवेश की गति में अस्थायी बदलाव देखने को मिला है।

    वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि सोना अब भी निवेश पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक जोखिमों के दौर में निवेशक इसे सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखते हैं। इसलिए अल्पकालिक निकासी को दीर्घकालिक रुझान में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    मई के आंकड़े यह जरूर संकेत देते हैं कि निवेशक अब अधिक सतर्क और रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। वे केवल सुरक्षित निवेश पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न परिसंपत्तियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले महीनों में सोने की कीमतों, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू बाजार के रुझानों के आधार पर गोल्ड ईटीएफ में निवेश की दिशा तय होगी।

  • फोन पर ऑर्डर, घर तक डिलीवरी: देवास में अवैध शराब सप्लाई नेटवर्क का खुलासा, 79 हजार की शराब जब्त

    फोन पर ऑर्डर, घर तक डिलीवरी: देवास में अवैध शराब सप्लाई नेटवर्क का खुलासा, 79 हजार की शराब जब्त


    मध्यप्रदेश। देवास में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता मिली है। अधिकारियों ने एक ऐसे कथित नेटवर्क का खुलासा किया है, जो मोबाइल फोन के माध्यम से ऑर्डर लेकर ग्राहकों तक शराब पहुंचाने का काम कर रहा था। कार्रवाई के दौरान करीब 79 हजार रुपये मूल्य की 84 बल्क लीटर अवैध शराब जब्त की गई है। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

    जानकारी के अनुसार आबकारी विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि शहर के जयप्रकाश नगर क्षेत्र में एक मकान से अवैध शराब का कारोबार संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने संबंधित स्थान पर दबिश दी। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में शराब बरामद हुई, जिसके बाद मौके पर मौजूद अमित राठौर नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से मोबाइल फोन के जरिए ग्राहकों से संपर्क करता था। ग्राहकों से ऑर्डर प्राप्त होने के बाद शराब को तय स्थानों पर पहुंचाया जाता था। अधिकारियों के अनुसार यह गतिविधि एक संगठित डिलीवरी व्यवस्था की तरह संचालित की जा रही थी। हालांकि पूरे नेटवर्क की वास्तविक संरचना और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

    आबकारी विभाग का कहना है कि आरोपी के कब्जे से बरामद शराब को जब्त कर लिया गया है और उसके स्रोत की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शराब कहां से लाई जा रही थी और इसकी आपूर्ति किन क्षेत्रों तक की जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक अवैध शराब का कारोबार केवल बिक्री तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसके पीछे अक्सर एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय रहता है, इसलिए मामले की गहन जांच की जा रही है।

    जांच एजेंसियों ने आरोपी के मोबाइल फोन को भी जब्त कर लिया है। पुलिस अब कॉल डिटेल्स और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कथित नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। इसके अलावा आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और उसके संपर्कों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

    अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड से इस अवैध कारोबार के दायरे और अवधि के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    आबकारी और पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों ने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और अवैध कारोबार को किसी भी स्थिति में पनपने नहीं दिया जाएगा।

    फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही नेटवर्क के आकार और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

  • पीएम मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल पर राघव चड्ढा की टिप्पणी, बोले- आज के दौर में लगातार जनादेश हासिल करना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण

    पीएम मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल पर राघव चड्ढा की टिप्पणी, बोले- आज के दौर में लगातार जनादेश हासिल करना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बने रहने के नए रिकॉर्ड को लेकर देश की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। इस उपलब्धि पर विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने भी अपनी टिप्पणी देते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण क्षण बताया और प्रधानमंत्री मोदी तथा देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल की परिस्थितियों की तुलना की।

    राघव चड्ढा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 4,399 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करते हुए एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उनके अनुसार यह केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की जटिलताओं और मतदाताओं के लगातार विश्वास का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल, बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक और विविधताओं से भरे देश में लगातार जनसमर्थन बनाए रखना किसी भी नेता के लिए आसान नहीं होता।

    उन्होंने अपने वक्तव्य में भारत की जनसंख्या, सामाजिक विविधता और चुनावी प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में करोड़ों मतदाता हैं, जिनकी प्राथमिकताएं, अपेक्षाएं और राजनीतिक सोच अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे परिदृश्य में एक ही नेतृत्व को लगातार कई चुनावों में समर्थन मिलना लोकतांत्रिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए।

    राघव चड्ढा ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ने अलग-अलग दौर में देश का नेतृत्व किया। उनके अनुसार स्वतंत्रता के बाद का राजनीतिक वातावरण और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां एक-दूसरे से काफी भिन्न हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती दशकों में राजनीतिक समीकरण अलग थे, जबकि वर्तमान समय में क्षेत्रीय दलों का प्रभाव, गठबंधन राजनीति और तीव्र राजनीतिक प्रतिस्पर्धा चुनावी परिदृश्य को अधिक जटिल बनाती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक दौर में मतदाताओं की अपेक्षाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो चुकी हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, सोशल मीडिया, क्षेत्रीय मुद्दों और तेज राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण किसी भी सरकार के लिए लगातार जनसमर्थन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में लगातार तीन आम चुनावों में नेतृत्व के प्रति भरोसा जताया जाना विशेष महत्व रखता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह रिकॉर्ड भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा। लगातार तीन चुनावों में राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव बनाए रखना और लंबे समय तक सत्ता में बने रहना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में उल्लेखनीय उपलब्धि माना जाता है। यही कारण है कि इस उपलब्धि पर विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    राघव चड्ढा ने अपने बयान में भारतीय मतदाताओं की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है और लगातार जनादेश किसी भी नेतृत्व के प्रति जनता के विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

    प्रधानमंत्री मोदी के नए रिकॉर्ड ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में नेतृत्व, जनादेश और लोकतांत्रिक निरंतरता को लेकर बहस को केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में भी यह उपलब्धि राजनीतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से चर्चा का विषय बनी रहने की संभावना है।

  • मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने पर देवास में कांग्रेस का धरना, भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

    मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने पर देवास में कांग्रेस का धरना, भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप


    मध्यप्रदेश। राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति में जारी हलचल के बीच कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त होने के विरोध में देवास में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। बुधवार को शहर कांग्रेस इकाई के नेतृत्व में पुष्कर मंडूक तालाब के समीप धरना आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

    कांग्रेस का यह धरना करीब पांच घंटे तक चला। इस दौरान पार्टी नेताओं ने नामांकन पत्र निरस्त किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक बताया। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि राज्यसभा चुनाव जैसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज होना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक कदम प्रतीत होता है।

    धरना स्थल पर मौजूद नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवार को चुनावी मुकाबले से बाहर करने के उद्देश्य से साजिश रची गई है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर मिलना चाहिए और चुनावी प्रक्रिया किसी भी प्रकार के पक्षपात या दबाव से मुक्त होनी चाहिए।

    प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि नामांकन पत्र निरस्त होने की घटना लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतंत्र के इतिहास का एक “काला दिन” बताते हुए कहा कि यदि ऐसी घटनाओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को केवल राजनीतिक मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय मानती है।

    धरने में शहर कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रयास गौतम सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी और इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाएगी। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने और पूरे मामले की पारदर्शी समीक्षा की मांग भी उठाई।

    धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और प्रशासन के माध्यम से संबंधित अधिकारियों तक अपनी आपत्तियां पहुंचाने का प्रयास किया। पार्टी नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना जनता और राजनीतिक दलों का संवैधानिक अधिकार है तथा वे इसी अधिकार के तहत अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

    फिलहाल राज्यसभा चुनाव और नामांकन विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति में और भी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। वहीं कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले को लेकर अपना विरोध आगे भी जारी रखेगी।

  • सीएम डीके शिवकुमार ने सेब खाकर समर्थकों पर फेंके, वीडियो वायरल, बीजेपी बोली- यह व्यवहार कांग्रेस की सोच का आईना

    सीएम डीके शिवकुमार ने सेब खाकर समर्थकों पर फेंके, वीडियो वायरल, बीजेपी बोली- यह व्यवहार कांग्रेस की सोच का आईना

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में मुख्यमंत्री एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सेब खाते हुए और बाद में उसे समर्थकों की दिशा में उछालते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है और विपक्ष ने इसे जनता के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है।

    यह घटना मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र कनकपुरा में आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान की बताई जा रही है। मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने क्षेत्र में पहुंचे डीके शिवकुमार के स्वागत के लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने विशेष कार्यक्रम आयोजित किया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही और मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए विभिन्न प्रकार की तैयारियां की गई थीं।

    समारोह के दौरान मुख्यमंत्री को सेबों से तैयार एक विशेष माला पहनाई गई थी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के अनुसार यह माला आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी और स्वागत के प्रतीक के रूप में तैयार की गई थी। बाद में मुख्यमंत्री ने माला से कुछ सेब निकालकर खाए और फिर उन्हें समर्थकों की ओर उछाल दिया। इसी दौरान रिकॉर्ड किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और देखते ही देखते राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

    वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। भाजपा नेताओं ने इसे जनता और समर्थकों के प्रति अनुचित व्यवहार बताते हुए मुख्यमंत्री की आलोचना की। विपक्ष का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं से संयमित और सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा की जाती है तथा इस प्रकार की घटनाएं गलत संदेश देती हैं।

    भाजपा ने इस मुद्दे को राजनीतिक तौर पर भी उठाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता किसी भी जनप्रतिनिधि को सम्मान और विश्वास के आधार पर चुनती है, इसलिए सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके साथ व्यवहार भी उसी भावना के अनुरूप होना चाहिए। भाजपा ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं।

    दूसरी ओर कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि घटना को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। उनका तर्क है कि कार्यक्रम का माहौल उत्सवपूर्ण था और मुख्यमंत्री ने समर्थकों के उत्साह के बीच सहज प्रतिक्रिया दी थी। समर्थकों का मानना है कि वीडियो के एक हिस्से के आधार पर पूरे घटनाक्रम का मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा।

    इस बीच सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने इसे सामान्य और अनौपचारिक व्यवहार बताया है, जबकि अन्य ने इसे सार्वजनिक पद की गरिमा से जोड़कर देखा है। यही कारण है कि यह मामला केवल राजनीतिक विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया बहस का भी हिस्सा बन गया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी और राजनीतिक माहौल में इस प्रकार की घटनाएं अक्सर प्रतीकात्मक महत्व हासिल कर लेती हैं। कई बार छोटे घटनाक्रम भी व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन जाते हैं और दल उन्हें अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं। फिलहाल डीके शिवकुमार का यह वीडियो कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी रहने की संभावना है।

  • बैंक ग्राहक के झोले पर ब्लेड मारकर उड़ाए 60 हजार, सात दिन में महिला गिरफ्तार

    बैंक ग्राहक के झोले पर ब्लेड मारकर उड़ाए 60 हजार, सात दिन में महिला गिरफ्तार


    मध्यप्रदेश। देवास जिले के उदयनगर क्षेत्र में बैंक ग्राहक के झोले को ब्लेड से काटकर 60 हजार रुपये चोरी करने के मामले का पुलिस ने सात दिन के भीतर खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस ने इस मामले में एक महिला को गिरफ्तार किया है और उसके कब्जे से चोरी गई पूरी राशि बरामद करने की बात कही है। मामले के खुलासे में सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    पुलिस के अनुसार घटना 2 जून 2026 की है। पीपलपाटी निवासी चम्पालाल यादव ट्रैक्टर की किश्त जमा करने के लिए 60 हजार रुपये लेकर उदयनगर स्थित एसबीआई बैंक पहुंचे थे। शिकायत के मुताबिक बैंक में राशि जमा करने के दौरान हाट बाजार क्षेत्र में किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके झोले को ब्लेड या किसी नुकीली वस्तु से काट दिया और उसमें रखी नकदी निकाल ली। घटना का पता चलने पर पीड़ित ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

    जांच के दौरान पुलिस ने बैंक परिसर और आसपास के हाट बाजार क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। फुटेज में एक महिला संदिग्ध गतिविधियों में शामिल दिखाई दी। पुलिस के मुताबिक विभिन्न स्थानों पर लगे कैमरों से प्राप्त तस्वीरों और वीडियो फुटेज के आधार पर महिला की पहचान करने का प्रयास किया गया। तकनीकी विश्लेषण और निगरानी के बाद पुलिस महिला तक पहुंचने में सफल रही।

    पुलिस ने आरोपी महिला की पहचान सुधा पति शिवचरण सिसोदिया, निवासी कड़ियां सांसी, थाना बोड़ा, जिला राजगढ़ के रूप में की है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को 9 जून को सीहोर जिले के सलकनपुर क्षेत्र से हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान महिला ने कथित रूप से चोरी की वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। इसके बाद उसके कब्जे से चोरी गए 60 हजार रुपये बरामद कर जब्त कर लिए गए।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस मामले में त्रिनेत्रम अभियान के तहत लगाए गए सीसीटीवी कैमरे काफी उपयोगी साबित हुए। कैमरों में दर्ज फुटेज के आधार पर संदिग्ध की पहचान और उसकी गतिविधियों का पता लगाया गया। पुलिस का कहना है कि आधुनिक तकनीक और निगरानी व्यवस्था के कारण अपराधों की जांच में तेजी आई है और आरोपियों तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक आसान हुआ है।

    मामले की जांच पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत के निर्देश पर की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरनारायण बाथम, एसडीओपी बागली संजय सिंह बैस के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी विजेन्द्र सिंह सोलंकी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई थी। टीम ने विभिन्न पहलुओं की जांच करते हुए आरोपी महिला को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।

    पुलिस ने नागरिकों से भीड़भाड़ वाले बाजारों, बैंक परिसरों और सार्वजनिक स्थानों पर नकदी लेकर जाते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने का आग्रह किया है। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

  • नामांकन मंजूर होने पर विधानसभा परिसर में हंगामा, परिमल नथवाणी को लेकर आमने-सामने आए कांग्रेस और भाजपा

    नामांकन मंजूर होने पर विधानसभा परिसर में हंगामा, परिमल नथवाणी को लेकर आमने-सामने आए कांग्रेस और भाजपा

    नई दिल्ली । झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। चुनावी प्रक्रिया के बीच निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी के नामांकन को वैध घोषित किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। नामांकन को लेकर पहले से जारी बहस अब खुलकर राजनीतिक टकराव में बदलती दिखाई दे रही है। विधानसभा परिसर में कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के प्रदर्शन ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

    राज्यसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के दौरान परिमल नथवाणी के दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए गए थे। जांच के दौरान कुछ आपत्तियों के कारण उनके नामांकन को तत्काल अंतिम स्वीकृति नहीं मिली थी और मामले की समीक्षा की जा रही थी। इस वजह से राजनीतिक हलकों में लगातार अटकलों का दौर जारी रहा। हालांकि समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद नामांकन को वैध मान लिया गया, जिसके बाद विवाद और तेज हो गया।

    कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नामांकन से जुड़े जिन बिंदुओं पर सवाल उठाए गए थे, उनकी पर्याप्त और पारदर्शी जांच होनी चाहिए थी। पार्टी के नेताओं का आरोप है कि विभिन्न राज्यों में समान परिस्थितियों में अलग-अलग निर्णय लिए जा रहे हैं, जिससे निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है।

    नामांकन को मंजूरी मिलने की सूचना सामने आते ही कांग्रेस कार्यकर्ता विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन के लिए पहुंच गए। हाथों में झंडे और बैनर लेकर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की तथा फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए मामले की पुनर्समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।

    दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए विरोध प्रदर्शन का जवाब प्रदर्शन से ही दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत संचालित होती है तथा संबंधित अधिकारियों द्वारा लिया गया निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस चुनावी माहौल को प्रभावित करने के उद्देश्य से अनावश्यक विवाद पैदा कर रही है।

    विधानसभा परिसर के बाहर दोनों पक्षों की सक्रियता ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया। विभिन्न नेताओं ने अपने-अपने पक्ष में बयान दिए और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग दावे किए। इस घटनाक्रम ने राज्यसभा चुनाव को केवल एक संसदीय चुनाव न रहने देकर उसे व्यापक राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनावों में संख्या बल के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किसी उम्मीदवार के नामांकन को लेकर उठे विवाद का प्रभाव केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह दलों की रणनीति और राजनीतिक धारणा को भी प्रभावित करता है।

    फिलहाल परिमल नथवाणी का नामांकन वैध घोषित होने के बाद चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन इस फैसले को लेकर पैदा हुआ विवाद अभी थमता दिखाई नहीं दे रहा। आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की रणनीति, चुनावी समीकरण और संभावित प्रतिक्रियाएं इस मुद्दे को और अधिक महत्वपूर्ण बना सकती हैं। राज्यसभा चुनाव के बीच झारखंड की राजनीति में यह मामला फिलहाल सबसे चर्चित विषयों में शामिल हो गया है।

  • तीन गोलियां लगने के बाद भी डटे रहे मोर्चे पर: लश्कर आतंकी को ढेर करने वाले सीआरपीएफ जवान संजय तिवारी का रीवा में भव्य स्वागत

    तीन गोलियां लगने के बाद भी डटे रहे मोर्चे पर: लश्कर आतंकी को ढेर करने वाले सीआरपीएफ जवान संजय तिवारी का रीवा में भव्य स्वागत


    मध्यप्रदेश। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा शौर्य चक्र से सम्मानित किए जाने के बाद सीआरपीएफ जवान संजय तिवारी बुधवार को अपने गृह जिले रीवा पहुंचे, जहां उनका भव्य और भावनात्मक स्वागत किया गया। सिरमौर तहसील के डेलही गांव निवासी संजय तिवारी के सम्मान में रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूल-मालाओं की बारिश और ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच विंध्य के इस वीर सपूत का अभिनंदन किया गया।

    संजय तिवारी को यह प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान दिखाए गए अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए प्रदान किया गया है। सुरक्षा बलों को एक विशेष अभियान के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद क्षेत्र की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। अभियान के दौरान आतंकियों ने अचानक सुरक्षा बलों पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिससे स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई।

    मुठभेड़ के दौरान संजय तिवारी अग्रिम हमला दल का हिस्सा थे। भारी गोलीबारी के बीच उन्होंने साहसपूर्वक आगे बढ़ते हुए मोर्चा संभाले रखा। इस दौरान उनके बांह, घुटने और शरीर के अन्य हिस्सों में तीन गोलियां लगीं। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी पोजीशन नहीं छोड़ी और जवाबी कार्रवाई जारी रखी। उनके साहस और दृढ़ संकल्प के चलते एक आतंकी को मार गिराने में सफलता मिली।

    रीवा पहुंचने पर मीडिया से बातचीत में संजय तिवारी ने कहा कि उनके लिए देश सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ के दौरान लगी चोटों की उन्हें कोई चिंता नहीं थी। उनका एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि आतंकी किसी भी हालत में बचकर न निकल पाए। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई उनके कर्तव्य का हिस्सा है और इसी भावना के साथ उन्होंने अभियान को अंजाम दिया।

    संजय तिवारी की इस उपलब्धि पर पूरे विंध्य क्षेत्र में गर्व का माहौल है। उनके स्वागत के लिए स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की बड़ी संख्या स्टेशन पहुंची। लोगों ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर सम्मानित किया और उनके साहस को राष्ट्रभक्ति का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

    इस अवसर पर सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा कि संजय तिवारी ने अपने शौर्य, साहस और समर्पण से न केवल रीवा और विंध्य क्षेत्र, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि तीन गोलियां लगने के बावजूद जिस तरह संजय ने मोर्चा संभाले रखा, वह देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह साबित करता है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए हमारे जवान किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहते हैं।

    संजय तिवारी की वीरता की यह कहानी केवल एक सैनिक के साहस का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की उस भावना को भी दर्शाती है, जो भारतीय सुरक्षा बलों को दुनिया की सबसे सक्षम और सम्मानित सेनाओं में शामिल करती है। रीवा की धरती अपने इस वीर पुत्र की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रही है।

  • रुपए दोगुने करने का झांसा, सैकड़ों निवेशक परेशान: दंपती पर करोड़ों की कथित ठगी का आरोप

    रुपए दोगुने करने का झांसा, सैकड़ों निवेशक परेशान: दंपती पर करोड़ों की कथित ठगी का आरोप


    मध्यप्रदेश। रीवा में निवेश पर रकम दोगुनी करने का लालच देकर कथित रूप से करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक दंपती ने लोगों को आकर्षक निवेश योजना का भरोसा दिलाकर बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया और बाद में फरार हो गया। मामले में कार्रवाई नहीं होने से नाराज पीड़ित बुधवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    पीड़ितों के अनुसार असलम और उसकी पत्नी अबला सुल्ताना उर्फ नंदा ने लोगों को कम समय में रकम दोगुनी होने का भरोसा दिलाया था। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शुरुआत में कुछ निवेशकों को भुगतान कर उनका विश्वास जीता गया, जिससे क्षेत्र के अन्य लोग भी इस योजना से जुड़ते चले गए। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जमा पूंजी निवेश कर दी। आरोप है कि बाद में जब निवेशकों ने अपनी राशि वापस मांगनी शुरू की तो आरोपियों ने टालमटोल करना शुरू कर दिया और फिर संपर्क से बाहर हो गए।

    प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस कथित ठगी से करीब 200 लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। कई परिवारों ने वर्षों की मेहनत से जोड़ी गई बचत निवेश की थी, जबकि कुछ लोगों ने रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेकर भी रकम लगाई थी। आरोपियों के कथित रूप से फरार होने के बाद अब इन परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    पीड़ित असलम अंसारी ने बताया कि दंपती ने निवेशकों को बेहतर रिटर्न का भरोसा दिलाया था। शुरुआती दौर में कुछ लोगों को भुगतान मिलने से लोगों का भरोसा बढ़ गया और अधिक लोग निवेश करने लगे। हालांकि बाद में रकम वापस मांगने पर उन्हें लगातार आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद आरोपियों के गायब होने की बात सामने आई।

    एक अन्य पीड़िता जन्नत खान ने बताया कि उन्होंने अपनी वर्षों की बचत इस योजना में निवेश की थी। उनके कहने पर परिवार के अन्य सदस्यों ने भी रकम लगाई थी। अब न तो पैसा वापस मिल रहा है और न ही आरोपियों के बारे में कोई जानकारी मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं अपनी जीवनभर की जमा पूंजी खोने के कारण गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही हैं।

    प्रदर्शन के दौरान पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने तथा निवेशकों की राशि वापस दिलाने की मांग की। कई महिलाओं ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि कथित ठगी के कारण उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है।

    मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त शिकायतों के आधार पर जांच की जाएगी और तथ्यों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से पीड़ितों को जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

    फिलहाल पीड़ितों का कहना है कि जब तक आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होती और उनकी राशि वापस दिलाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक वे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे। मामले की जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।