Author: bharati

  • महाराष्ट्र में सूखे का गहराता संकट: 80% फसलें तबाह, जलाशयों में 12% पानी

    महाराष्ट्र में सूखे का गहराता संकट: 80% फसलें तबाह, जलाशयों में 12% पानी


    मुंबई। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में इस बार बारिश की कमी ने खरीफ की फसलों को बर्बाद कर दिया है। लातूर, बीड और धाराशिव समेत प्रभावित इलाकों में करीब 80 फीसदी फसलें सूख चुकी हैं, जबकि लातूर जिले के 158 जलाशयों में औसत जल भंडारण महज 12.5 फीसदी रह गया है। किसान अब सिर्फ मौजूदा फसल के नुकसान से नहीं, बल्कि अगली फसल के लिए पूंजी जुटाने और परिवार का खर्च चलाने के संकट से भी जूझ रहे हैं।

    आसमान से देखने पर मराठवाड़ा के कई हिस्से भले ही हरे दिखाई दें, लेकिन जमीन पर पहुंचते ही सूखे की भयावह तस्वीर सामने आती है। खेतों में सोयाबीन पीली पड़ चुकी है, कपास की बढ़वार रुक गई है, अरहर मुरझा गई है और गन्ना अपनी सामान्य ऊंचाई तक पहुंचने से पहले ही सूखने लगा है। लातूर, बीड और धाराशिव के आसपास बारिश की बेरुखी ने किसानों की खरीफ की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।

    खर्च भी नहीं निकलने की चिंता

    मराठवाड़ा में लातूर, बीड, परभणी और धाराशिव सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में हैं। जून से सितंबर के बीच इन इलाकों में सामान्य बारिश 679.5 मिमी के मुकाबले सिर्फ 424.5 मिमी बारिश दर्ज हुई। बारिश की कमी का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। पशुओं के चारे, ग्रामीण मजदूरी, घरेलू आमदनी और अगली फसल के लिए जरूरी पूंजी पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है।

    लातूर जिले के देवकरा गांव में पहली बार किसी किसान की आत्महत्या का मामला सामने आया है। दो एकड़ जमीन के काश्तकार तुकाराम गुट्टे ने आत्महत्या कर ली। कीनगांव से आगे बढ़ने पर खेतों में खड़ी फसलों के बजाय सूखे का असर साफ दिखाई देता है। सोयाबीन, कपास और अरहर की फसलें सूख रही हैं।

    हिंगणगांव के किसान तुकाराम अंबाजी करीब 40 एकड़ में खेती करते हैं। उन्होंने फसल पर प्रति एकड़ 30 से 35 हजार रुपए खर्च किए हैं। उनका कहना है कि मौजूदा हालात देखकर ऐसा लगता है कि फसल से लागत निकलना भी मुश्किल होगा।

    डेढ़ लाख खर्च कर बोई फसल, हटाने में भी 40 हजार लगेंगे

    हगदल गांव के किसान बालाजी मुंडे गन्ने के खेत की ओर इशारा करते हुए बताते हैं कि सामान्य स्थिति में गन्ना 20 से 25 फुट तक ऊंचा होता है, लेकिन इस बार 10 से 12 फुट पर ही उसकी बढ़वार रुक गई है। अब फसल सूखने लगी है।

    मुंडे के मुताबिक, वर्ष 2025 में ज्यादा बारिश ने परेशान किया था और इस साल बारिश की कमी ने संकट खड़ा कर दिया है। सावरगांव रोकड़े के किसान राम बेल्लाडे सोयाबीन, अरहर और ज्वार की खेती करते हैं। उन्होंने आठ एकड़ की फसल पर करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च किए हैं।

    अब स्थिति यह है कि यदि फसल पूरी तरह खराब हो जाती है तो खेत साफ करने के लिए भी प्रति एकड़ करीब 5 हजार रुपए खर्च करने पड़ेंगे। यानी आठ एकड़ की फसल हटाने में करीब 40 हजार रुपए और लगेंगे। बेल्लाडे के मुताबिक, फसल में कुछ बचा तो वह सिर्फ मवेशियों के चारे के काम आएगा।

    नदियां सूखीं, जलाशयों में सिर्फ 12.5% पानी

    लातूर और बीड जिलों में तालाबों और जलाशयों में पानी का स्तर भी तेजी से नीचे गया है। लातूर की जीवनवाहिनी मानी जाने वाली माजरा नदी भी सूखने की स्थिति में पहुंच गई है। लातूर शहर से करीब 70 किलोमीटर दूर धाराशिव और बीड की सीमा के पास स्थित माजरा बांध का जलस्तर बेहद नीचे पहुंच चुका है।

    लातूर जिले के 158 जलाशयों में औसत स्टोरेज करीब 12.5 फीसदी ही बचा है। क्षेत्र का नवाबकालीन साइ डैम भी इसी जल इतिहास का हिस्सा है। स्थानीय पत्रकार शशिकांत पाटिल बताते हैं कि कभी साइ डैम के पानी से लातूर की प्यास बुझती थी, लेकिन अब यह इस्तेमाल में नहीं है। उनका कहना है कि जल रिसाव रोकने और पानी के बेहतर प्रबंधन पर पर्याप्त ध्यान दिया जाता तो संकट की तीव्रता कुछ कम की जा सकती थी।

    बुआई से अब फसल हटाने तक पहुंचा संकट

    लातूर और आसपास के किसानों से बातचीत में वर्ष 1972 का सूखा बार-बार सामने आता है। पूर्व जिला परिषद सदस्य त्र्यंबक नारायण गुट्टे इसे 1972 के बाद की सबसे गंभीर सूखा परिस्थितियों में से एक मानते हैं।

    इस बार संकट के संकेत मानसून के शुरुआती महीनों में ही दिखाई देने लगे थे। पहले किसानों के सामने बुआई का संकट था। इसके बाद बारिश की कमी के बीच खड़ी फसल को बचाने की चुनौती आई। अब तीसरा और सबसे गंभीर चरण सामने है—खराब हो चुकी फसल को खेत से हटाना और अगली खेती के लिए पूंजी जुटाना।

    किसानों के लिए समस्या सिर्फ इस साल की फसल के नुकसान तक सीमित नहीं है। यदि मौजूदा फसल से लागत नहीं निकलती और अगली बुआई के लिए पैसा नहीं बचता है तो इसका असर अगले कृषि चक्र पर भी पड़ सकता है।

    राहत के लिए 50 हजार करोड़ तक का बोझ

    महाराष्ट्र सरकार ने सूखा प्रभावित इलाकों में राहत प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कदम उठाए हैं। सितंबर के अंत में राज्य के 265 तालुकों के बाद 43 और तालुकों को सूखा प्रभावित सूची में जोड़ा गया है। फसल नुकसान के पंचनामे, पानी और चारे की व्यवस्था समेत राहत उपायों पर चर्चा हुई है।

    अधिकारियों का अनुमान है कि सूखे से निपटने के लिए सरकारी खजाने पर करीब 50 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। हालांकि किसानों के सामने राहत की जरूरत तत्काल है। फसल नुकसान की भरपाई, पीने और खेती के लिए पानी, पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने के साथ ही अगली फसल तक परिवार का खर्च चलाने के लिए आय का सहारा भी जरूरी है।

    मराठवाड़ा के खेतों में सूखती फसलें इस संकट की सबसे साफ तस्वीर पेश कर रही हैं। किसानों के लिए अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि इस सीजन की फसल कितनी बची, बल्कि यह भी है कि अगली खेती शुरू करने के लिए वे पूंजी कहां से जुटाएंगे।

  • Form-6 से SIR का अतिरिक्त कॉलम हटने पर अभिजीत दीपके का तंज, बोले- ‘पहले क्यों जरूरत थी?’

    Form-6 से SIR का अतिरिक्त कॉलम हटने पर अभिजीत दीपके का तंज, बोले- ‘पहले क्यों जरूरत थी?’


    नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में ऑनलाइन Form-6 से SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा हटा दी है। आयोग के इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आयोग के फैसले से जुड़ी खबर साझा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा और लिखा- “पहले क्यों जरूरत थी, ज्ञानू?”

    Form-6 में अब अतिरिक्त घोषणा जरूरी नहीं

    चुनाव आयोग के मुताबिक, जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां नए मतदाता पंजीकरण के लिए ऑनलाइन Form-6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा अब नहीं भरनी होगी। यह बदलाव 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की मौजूदगी में हुई पूर्ण आयोग की बैठक के बाद किया गया।

    आयोग के अनुसार, Form-6 के साथ जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा SIR की प्रक्रिया के लिए थी। इसके तहत नए आवेदकों से यह जानकारी मांगी जाती थी कि वे, उनके माता-पिता या दादा-दादी पहले किसी गहन पुनरीक्षण के दौरान तैयार मतदाता सूची में शामिल थे या नहीं।

    जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है, वहां यह घोषणा फिलहाल उपलब्ध है। वहीं, जहां प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां ECINET ऐप और पोर्टल के साथ संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल से भी इसे हटा दिया गया है। अब ऐसे राज्यों में नए मतदाताओं को केवल ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ के तहत निर्धारित वैधानिक Form-6 भरना होगा।

    Form-6 में बदलाव पर पहले उठे थे सवाल

    Form-6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने को लेकर पहले भी विवाद हुआ था। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form-6 में किए गए बदलाव पर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि दोनों अधिकारियों ने इस तरह के बदलाव को लेकर कानूनी प्रक्रिया और वैधानिक फॉर्म में संशोधन के अधिकार पर सवाल उठाए थे।

    एक अन्य इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर 14 अलग-अलग मौकों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें Form-6 में बदलाव के अलावा SIR से जुड़े अन्य मुद्दे भी शामिल थे।

    हालांकि, इन रिपोर्टों पर चुनाव आयोग का कहना रहा है कि आयोग के भीतर होने वाली चर्चाएं और मतभेद निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा अंतिम फैसले पूर्ण आयोग की ओर से लिए जाते हैं।

    दीपके ने सवाल के अंदाज में साधा निशाना

    Form-6 से अतिरिक्त घोषणा हटाए जाने के बाद अभिजीत दीपके ने इसी पुराने विवाद को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने आयोग के फैसले से संबंधित खबर शेयर करते हुए लिखा- “पहले क्यों जरूरत थी, ज्ञानू?”

    उनकी टिप्पणी का आशय इस बात से था कि अगर SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अतिरिक्त घोषणा को हटाया जा सकता है, तो इसे Form-6 में जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी थी।

    CJP के प्रदर्शन का भी ऐलान

    इस बीच चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक विवाद जारी है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने हाल में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए हैं और उनके इस्तीफे की मांग की है।

    अभिजीत दीपके ने यह भी कहा है कि मुंबई पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद उनकी पार्टी CJP 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने पुलिस के फैसले की आलोचना करते हुए इसे नागरिकों की आवाज दबाने का प्रयास बताया है। दीपके ने कहा है कि अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में CJP गांधी जयंती पर ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करेगी।

    इस तरह Form-6 से SIR की अतिरिक्त घोषणा हटाने के चुनाव आयोग के फैसले के बाद एक ओर प्रक्रिया में बदलाव हुआ है, वहीं दूसरी ओर इसी मुद्दे को लेकर आयोग पर पहले उठे सवाल और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी चर्चा में बनी हुई हैं।

  • नीला ड्रम कांड: दोषी ठहराए जाने के बाद फूट-फूट कर रोए मुस्कान-साहिल, रात का खाना भी नहीं खाया

    नीला ड्रम कांड: दोषी ठहराए जाने के बाद फूट-फूट कर रोए मुस्कान-साहिल, रात का खाना भी नहीं खाया


    मेरठ। सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी ठहराए जाने के बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला भावुक हो गए। बुधवार को दोनों जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत की कार्यवाही में शामिल हुए थे। सुनवाई के दौरान मुस्कान की गोद में उसकी नन्हीं बेटी भी मौजूद थी। अदालत से दोषी करार दिए जाने के बाद दोनों रोते हुए वीसी रूम से बाहर निकले। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, दोनों ने रात का खाना भी नहीं खाया।

    दोषी ठहराए जाने के बाद एक-दूसरे से भी दूरी

    बुधवार को जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुस्कान और साहिल की पेशी कराई गई। सुनवाई के दौरान मुस्कान अपनी नन्हीं बेटी को गोद में लिए हुए थी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि अदालत की कार्यवाही पूरी होने के बाद दोनों काफी उदास नजर आए। इसके बाद दोनों रोते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम से बाहर निकले। कार्यवाही खत्म होने के बाद भी मुस्कान और साहिल ने एक-दूसरे से दूरी बनाए रखी। दोनों ने एक-दूसरे की ओर देखा तक नहीं और अपने-अपने बैरक की ओर चले गए।

    फैसले के दिन सुबह से बेचैन थे दोनों

    जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के अनुसार, बुधवार को फैसला आने की वजह से मुस्कान और साहिल सुबह से ही बेचैन दिखाई दे रहे थे। मुस्कान दिनभर पूजा-पाठ में लगी रही। दोनों ने दिन में भी सामान्य से कम खाना खाया। अदालत की ओर से दोषी करार दिए जाने के बाद दोनों की उदासी और बढ़ गई। जेल प्रशासन के मुताबिक, दोनों ने रात का खाना खाने से इनकार कर दिया और बाद में अपने-अपने बैरक में चले गए।

    अदालत ने दोनों को हत्या का दोषी माना

    मेरठ के जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा द्वितीय की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और पत्रावलियों के आधार पर मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने कहा कि पत्रावलियों में मौजूद साक्ष्य इस बात को साबित करते हैं कि दोनों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया। इसके साथ ही अदालत ने सजा सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की है।

    सजा पर पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय

    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई कार्यवाही के दौरान जिला जज ने मुस्कान और साहिल से सजा के बिंदु पर उनका पक्ष रखने को कहा। अदालत ने दोनों दोषियों को यह बताने के लिए 15 दिन का समय दिया है कि उनकी सजा क्यों कम की जानी चाहिए।

    इस अवधि में दोनों दोषी अपनी सफाई या दलील अदालत के सामने रख सकेंगे। इसके बाद 14 अक्टूबर को अदालत सजा का ऐलान करेगी। फिलहाल दोनों को दोषी ठहराया जा चुका है, लेकिन सजा की अवधि अभी तय नहीं हुई है। अगली सुनवाई इसी बिंदु पर होगी।

  • MP से 2-3 दिन में मानसून की विदाई, अब सिर्फ बूंदाबांदी के आसार, भारी बारिश का अलर्ट नहीं

    MP से 2-3 दिन में मानसून की विदाई, अब सिर्फ बूंदाबांदी के आसार, भारी बारिश का अलर्ट नहीं


    भोपाल। मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई अगले 2 से 3 दिन में हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले तीन दिन नमी के असर से कुछ जिलों में बूंदाबांदी और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है, लेकिन प्रदेश में कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। मानसून की विदाई के साथ ही बारिश का यह दौर भी खत्म हो जाएगा।

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य पीरियड 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस बार मानसूनी सीजन के आखिरी सप्ताह में प्रदेश में अति भारी या भारी बारिश नहीं हुई। इसका असर सीजन के कुल बारिश के आंकड़ों पर भी पड़ा है।

    प्रदेश के 55 जिलों में से 30 जिलों में अब तक सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है। भोपाल और ग्वालियर समेत 25 जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो चुका है। आलीराजपुर में सामान्य बारिश की आधी मात्रा भी रिकॉर्ड नहीं हुई, जबकि निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से ज्यादा बारिश हुई है।

    अब जो बारिश होगी, वह ‘बोनस’ जैसी

    मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की आधिकारिक विदाई होने तक नमी के कारण बूंदाबांदी का दौर जारी रह सकता है। इसे मानसूनी सीजन की सामान्य बारिश के आंकड़े में शामिल नहीं किया जाएगा। यानी विदाई से पहले होने वाली यह बारिश सीजन के आंकड़ों के लिहाज से एक तरह से अतिरिक्त यानी ‘बोनस’ बारिश होगी।

    आज इन जिलों में बूंदाबांदी-गरज चमक

    मौसम विभाग ने गुरुवार को मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में बूंदाबांदी के साथ गरज-चमक का अनुमान जताया है।

    वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, जबलपुर समेत प्रदेश के अन्य जिलों में मौसम मुख्य रूप से साफ रहेगा और तेज धूप खिलने के आसार हैं।

    प्रदेश में अब तक 35.8 इंच बारिश

    IMD के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अब तक 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। यह सामान्य बारिश 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच के मुकाबले करीब 1.5 इंच कम है। इस तरह प्रदेश में कुल मिलाकर सामान्य से 4% कम बारिश हुई है।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4% ज्यादा बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% कम पानी गिरा है।

    पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा बारिश, 9 जिलों में कमी

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 4% ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है। पूर्वी हिस्से के अधिकांश जिलों में सामान्य कोटा पूरा हो चुका है। हालांकि, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी MP के 20 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश रिकॉर्ड हुई है।

    इनमें आलीराजपुर में स्थिति सबसे कमजोर रही, जहां सामान्य बारिश की आधी मात्रा भी पूरी नहीं हो सकी। इसके उलट निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    मानसून की विदाई के साथ अब प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलने लगेगा। अगले कुछ दिनों तक जहां कहीं-कहीं बूंदाबांदी और गरज-चमक हो सकती है, वहीं ज्यादातर हिस्सों में धूप बढ़ने के आसार हैं।

  • गुजरात में सांड से टकराई Land Rover Discovery, डिवाइडर से भिड़ने के बाद SUV के उड़े परखच्चे, दो की मौत

    गुजरात में सांड से टकराई Land Rover Discovery, डिवाइडर से भिड़ने के बाद SUV के उड़े परखच्चे, दो की मौत

    गुजरात : के थराड के पास भारतमाला हाईवे पर 27 सितंबर की सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। राजकोट से राजस्थान की ओर जा रही Land Rover Discovery SUV अचानक हाईवे पर आए सांड से टकरा गई। टक्कर के बाद वाहन का नियंत्रण बिगड़ गया और SUV हाईवे के डिवाइडर से जा भिड़ी। हादसा इतना भीषण था कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसमें सवार तीन लोगों में से दो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीसरा व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।

    बताया जा रहा है कि हादसा थराड-डीसा हाईवे पर मालपुर के पास हुआ। तेज रफ्तार से चल रही SUV के सामने अचानक सांड आ गया। ड्राइवर को प्रतिक्रिया देने का पर्याप्त मौका नहीं मिला और वाहन सीधे सांड से टकरा गया। इसके बाद SUV का संतुलन बिगड़ गया और वह डिवाइडर से जा भिड़ी। डिवाइडर से हुई जोरदार टक्कर के कारण वाहन का अगला और साइड का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

    हादसे के बाद SUV का मलबा हाईवे के काफी बड़े हिस्से में फैल गया। मौके पर मौजूद लोगों ने दुर्घटना के बाद राहत कार्य शुरू किया और 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को पहले नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने के कारण बाद में उसे बेहतर इलाज के लिए अहमदाबाद रेफर किया गया। हादसे में शामिल Land Rover Discovery का रजिस्ट्रेशन राजकोट का बताया जा रहा है।

    घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें दुर्घटना के बाद SUV की बेहद खराब हालत दिखाई दे रही है। तस्वीरों में वाहन को हुए भारी नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है। सांड से टकराने के बाद डिवाइडर से हुई दूसरी टक्कर ने वाहन को काफी नुकसान पहुंचाया। पुलिस और संबंधित अधिकारियों की जांच के जरिए हादसे की पूरी परिस्थितियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

    इस हादसे ने हाईवे पर आवारा मवेशियों की मौजूदगी से जुड़े खतरे को भी सामने ला दिया है। तेज रफ्तार वाले मार्गों पर अचानक किसी बड़े जानवर के सामने आने से वाहन चालक को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। ऐसी स्थिति में अचानक ब्रेक लगाने या वाहन को मोड़ने की कोशिश से भी नियंत्रण बिगड़ने का खतरा रहता है। इससे वाहन डिवाइडर, दूसरे वाहन या सड़क किनारे किसी वस्तु से टकरा सकता है।

    Land Rover Discovery एक प्रीमियम लग्जरी SUV है। तीन रो वाली इस SUV की कीमत 1.25 करोड़ रुपये से शुरू होकर टॉप मॉडल के लिए 1.37 करोड़ रुपये तक बताई गई है। इसमें 3.0 लीटर का छह सिलेंडर डीजल इंजन दिया जाता है, जो अधिकतम 350 PS की पावर देता है। कंपनी के अनुसार यह SUV 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार 6.3 सेकंड में पकड़ सकती है।

    SUV में ऑल-व्हील ड्राइव के साथ ट्विन-स्पीड ट्रांसमिशन और 3,500 किलोग्राम तक की टोइंग क्षमता दी गई है। सुरक्षा और ड्राइविंग सहायता के लिए इसमें ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग, फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग, लेन कीप असिस्ट, ब्लाइंड स्पॉट असिस्ट, रियर ट्रैफिक मॉनिटर और ड्राइवर कंडिशन मॉनिटर जैसे फीचर्स मिलते हैं। इसके अलावा 360 डिग्री कैमरा, 3D सराउंड व्यू कैमरा, कई एयरबैग, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, ट्रैक्शन कंट्रोल, रोल स्टेबिलिटी कंट्रोल और ISOFIX चाइल्ड-सीट माउंट जैसे सुरक्षा फीचर्स भी दिए गए हैं।

  • रायसेन के खेत में मिली 6-7 साल की बाघिन की लाश, बिजली के तार की चपेट में आने से मौत की आशंका

    रायसेन के खेत में मिली 6-7 साल की बाघिन की लाश, बिजली के तार की चपेट में आने से मौत की आशंका

    मध्य प्रदेश: के रायसेन जिले से वन्यजीवों से जुड़ी एक दुखद घटना सामने आई है। ओबेदुल्लागंज तहसील के दाहोद फॉरेस्ट रेंज के कागवान इलाके में एक किसान के खेत में 6 से 7 साल की वयस्क बाघिन मृत अवस्था में मिली। घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

    प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि खेत में बिछाए गए बिजली के तार की चपेट में आने से बाघिन की मौत हुई हो सकती है। हालांकि, वन विभाग ने अभी मौत के कारण की अंतिम पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों के अनुसार, बाघिन की मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर हेमंत रायकवार ने बताया कि बाघिन का शव सोमवार शाम जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर कागवान इलाके में किसान के खेत से बरामद किया गया। शुरुआती जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे बिजली का झटका लगने की आशंका सामने आई है। घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    घटना के बाद वन विभाग ने संबंधित क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया है। आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है, ताकि घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके और जांच प्रभावित न हो। अधिकारियों की टीम मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाने में लगी रही।

    वन विभाग के अनुसार, बाघिन के शव का पोस्टमार्टम राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए के निर्धारित मानकों और प्रोटोकॉल के तहत कराया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव का नियमानुसार निस्तारण कर दिया गया। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बाघिन की मौत किन परिस्थितियों में हुई और खेत में मौजूद बिजली के तार की इसमें क्या भूमिका रही।

    मध्य प्रदेश को देश का सबसे बड़ा टाइगर स्टेट कहा जाता है। साल 2022 की राष्ट्रीय बाघ जनगणना में राज्य में 785 बाघ दर्ज किए गए थे, जो देश के किसी भी राज्य में सबसे अधिक संख्या थी। प्रदेश में वर्तमान में कुल 9 टाइगर रिजर्व हैं। ऐसे में किसी बाघ या बाघिन की मौत वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।

    खेतों में फसलों की सुरक्षा के लिए अवैध तरीके से बिजली के तार बिछाए जाने से वन्यजीवों के लिए खतरा पैदा होने की आशंका बनी रहती है। रायसेन की इस घटना में भी बिजली के तार से करंट लगने की आशंका सामने आने के बाद वन विभाग सतर्क है। हालांकि, बाघिन की मौत का सटीक कारण जांच और पोस्टमार्टम से जुड़े निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • FCRA पंजीकरण के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में गृह मंत्रालय के दो अधिकारी गिरफ्तार, जांच के बीच बढ़ी हलचल

    FCRA पंजीकरण के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में गृह मंत्रालय के दो अधिकारी गिरफ्तार, जांच के बीच बढ़ी हलचल

    नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय से जुड़े दो अधिकारियों को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी एफसीआरए के तहत पंजीकरण कराने में मदद करने के बदले कथित तौर पर रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दोनों अधिकारियों को 28 सितंबर को दिल्ली में पकड़ा गया। इनमें एक वरिष्ठ लेखाकार और दूसरा लेखाकार बताया गया है। आरोपों की जांच जारी है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    गृह मंत्रालय के अनुसार, गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में से एक वर्तमान में मंत्रालय के विदेशी प्रभाग में तैनात था। दूसरा अधिकारी फिलहाल वेतन एवं लेखा कार्यालय में कार्यरत था और इससे पहले विदेशी प्रभाग में सेवाएं दे चुका है। शुरुआती पूछताछ में दोनों के कुछ संस्थाओं के संपर्क में रहने और एफसीआरए पंजीकरण तथा लाइसेंस के नवीनीकरण में मदद करने के बदले कथित तौर पर पैसे मांगने की जानकारी सामने आई है।

    मामला सामने आने के बाद एफसीआरए से जुड़ी सेवाओं की प्रक्रिया को लेकर भी लोगों को सावधान किया गया है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एफसीआरए से संबंधित सेवाएं ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं। किसी भी मध्यस्थ, एजेंट या निजी व्यक्ति को इन सेवाओं में मदद करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है।

    मामले की जांच अभी जारी है। आरोपों की पुष्टि अदालत में होना बाकी है। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इस कार्रवाई के बीच मंत्रालय ने भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रुख दोहराते हुए एफसीआरए सेवाओं से जुड़े मामलों में किसी अनधिकृत व्यक्ति के माध्यम से काम कराने से बचने की बात कही है।

    एफसीआरए के तहत विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए पंजीकरण जरूरी होता है। विदेशी फंडिंग से संबंधित गतिविधियों की निगरानी के लिए गृह मंत्रालय नोडल प्राधिकरण के रूप में काम करता है। इसी व्यवस्था के तहत पंजीकरण, नवीनीकरण और अन्य नियामकीय प्रक्रियाएं संचालित की जाती हैं।

    इसी बीच विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर संसद की संयुक्त समिति की बैठक भी हुई। 31 सदस्यीय समिति प्रस्तावित संशोधनों की विस्तृत जांच कर रही है। 29 सितंबर की बैठक में गृह और कानून मंत्रालय के अधिकारियों ने विधेयक के प्रावधानों और 2010 के मूल कानून में बदलाव की जरूरत को लेकर समिति के सामने जानकारी रखी।

    यह विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और बाद में दोनों सदनों की मंजूरी के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया। समिति प्रस्तावित बदलावों की विभिन्न कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं से जांच कर रही है। विधेयक अभी संसद की समिति के विचाराधीन है और कानून नहीं बना है।

    प्रस्तावित संशोधनों में ऐसे संगठनों से जुड़े विदेशी अंशदान और संपत्तियों के प्रबंधन से संबंधित प्रावधान शामिल हैं, जिनका एफसीआरए प्रमाणपत्र समाप्त हो जाता है, रद्द कर दिया जाता है या जिसका नवीनीकरण नहीं हो पाता। समिति इन प्रावधानों पर विभिन्न पक्षों और विशेषज्ञों के विचार भी सुन रही है।

    एफसीआरए से जुड़े मौजूदा रिश्वत मामले और प्रस्तावित संशोधन विधेयक की संसदीय जांच अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। एक तरफ दो अधिकारियों पर मौजूदा पंजीकरण प्रक्रिया में कथित तौर पर रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ संसद की समिति विदेशी अंशदान से जुड़े कानून में प्रस्तावित बदलावों की समीक्षा कर रही है।

    मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि गिरफ्तार अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और एफसीआरए सेवाओं को लेकर अनधिकृत बिचौलियों से सावधान रहने की अपील की गई है।

  • राज्यसभा चुनाव में सपा के तीसरे उम्मीदवार पर केशव मौर्य का बड़ा बयान, बोले- नौवां प्रत्याशी उतारेगी भाजपा

    राज्यसभा चुनाव में सपा के तीसरे उम्मीदवार पर केशव मौर्य का बड़ा बयान, बोले- नौवां प्रत्याशी उतारेगी भाजपा

    उत्तर प्रदेश: के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो भाजपा नौवां प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। उन्होंने विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी।

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को लखनऊ में राज्यसभा चुनाव की तैयारियों और विपक्षी दलों की रणनीति को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी अगर राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो भाजपा की ओर से नौवां प्रत्याशी उतारा जाएगा।

    केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भाजपा राज्यसभा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भाजपा की ओर से आठ उम्मीदवार मैदान में उतारे जा सकते हैं। अगर समाजवादी पार्टी तीसरे उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारती है तो भाजपा भी नौवां प्रत्याशी उतार सकती है। इस बयान के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों पक्षों के बीच मुकाबले की चर्चा तेज हो गई है।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में सीटों के गणित के बीच उम्मीदवारों की संख्या महत्वपूर्ण हो गई है। समाजवादी पार्टी की ओर से तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की संभावना पर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में भाजपा की ओर से नौवां उम्मीदवार उतारने की बात सामने आने से चुनावी समीकरण और अधिक चर्चा में आ गए हैं।

    केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल साथ मिलकर चुनाव लड़ें या अलग-अलग, भाजपा वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने विपक्षी दलों की एकजुटता और चुनावी रणनीति को लेकर भी अपनी बात रखी।

    चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी केशव प्रसाद मौर्य ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनावी परिस्थितियों के अनुसार चुनाव व्यवस्था को लेकर अपना रुख बदलते हैं। उनके अनुसार, जब इन दलों को चुनाव में सफलता मिलती है तो उन्हें चुनाव व्यवस्था ठीक दिखाई देती है, जबकि भाजपा या एनडीए को सफलता मिलने पर वही व्यवस्था सवालों के घेरे में बताई जाती है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने चुनाव परिणामों को अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी सुविधा के अनुसार परिभाषित किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने वर्ष 2004 और 2009 में केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार बनने का उल्लेख किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन के प्रदर्शन का भी जिक्र किया।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में, जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, भाजपा गठबंधन ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 73 सीटें जीती थीं। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन ने 325 सीटें हासिल की थीं, जबकि समाजवादी पार्टी 47 सीटों तक सीमित रह गई थी। मौर्य ने कहा कि चुनावी परिणामों को अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग तरीके से देखना उचित नहीं है।

    विपक्षी दलों की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि ये दल अपनी सुविधा के अनुसार चुनाव परिणामों की व्याख्या करते हैं। उन्होंने इसके लिए “मीठा-मीठा गप-गप और तीखा-तीखा थू-थू” वाली टिप्पणी का इस्तेमाल किया।

    केशव प्रसाद मौर्य ने अपने राजनीतिक और वैचारिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए राम, कृष्ण और विश्वनाथ से जुड़े विषयों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीरामलला का भव्य मंदिर बन चुका है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विश्वनाथ से जुड़े विषय अभी शेष हैं। तेलंगाना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बयानों से भाजपा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और पार्टी संगठन के विस्तार तथा जनसेवा के संकल्प के साथ काम कर रही है।

  • अजीत अगरकर की जगह प्रज्ञान ओझा को मिली अंतरिम चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी, स्थायी नियुक्ति पर भी बन सकती है सहमति

    अजीत अगरकर की जगह प्रज्ञान ओझा को मिली अंतरिम चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी, स्थायी नियुक्ति पर भी बन सकती है सहमति

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम की सिलेक्शन कमिटी में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अजीत अगरकर का कार्यकाल अभी 4 अक्टूबर तक है, लेकिन उससे पहले ही उन्हें सिलेक्शन कमिटी की मौजूदा बैठक से अलग कर दिया गया है। उनकी जगह कमिटी के सदस्य और पूर्व भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा को फिलहाल अंतरिम चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    मंगलवार 29 सितंबर को गुवाहाटी में हुई सिलेक्शन कमिटी की बैठक की अध्यक्षता प्रज्ञान ओझा ने की। इस बैठक में अजीत अगरकर शामिल नहीं हुए। आने वाले न्यूजीलैंड दौरे को लेकर टीम की रूपरेखा तैयार करने के लिए 30 सितंबर को होने वाले दूसरे वनडे के दौरान भी सभी चयनकर्ताओं के स्टेडियम में मौजूद रहने की बात कही गई है।

    प्रज्ञान ओझा को फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के तहत कमिटी का प्रमुख बनाया गया है। हालांकि, आगे चलकर उन्हें स्थायी रूप से चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी मिलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। नए सिलेक्टर की नियुक्ति और चयन समिति की संरचना स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि मौजूदा व्यवस्था कितने समय तक जारी रहती है।

    प्रज्ञान ओझा चयन समिति के मौजूदा सदस्यों में टेस्ट क्रिकेट के अनुभव के लिहाज से सबसे वरिष्ठ हैं। उन्होंने भारतीय टीम के लिए 24 टेस्ट मैच खेले हैं। मौजूदा चयन समिति में शिव सुंदर दास ने 23 टेस्ट, आरपी सिंह ने 14 टेस्ट और अजय रात्रा ने 6 टेस्ट मैच खेले हैं। इसी अनुभव के कारण चयन समिति की अध्यक्षता के लिए ओझा का नाम सामने आया है।

    ओझा ने भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज के तौर पर अपनी पहचान बनाई थी। अब वह चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें समिति के सदस्यों के बीच स्वीकार्य विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

    सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि प्रज्ञान ओझा की यह जिम्मेदारी केवल अस्थायी रहेगी या उन्हें आगे भी चयन समिति का प्रमुख बनाए रखा जाएगा। इसका जवाब नए चयनकर्ता के चयन के बाद सामने आएगा। यदि पार्थिव पटेल अजीत अगरकर की जगह चयन समिति में शामिल होते हैं, तो ऐसी स्थिति में उनके चेयरमैन बनने की संभावना भी बताई जा रही है।

    वहीं, अगर परिस्थितियां अलग रहती हैं तो प्रज्ञान ओझा चयन समिति के प्रमुख के पद पर बने रह सकते हैं। इस समय चयन समिति में नेतृत्व को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है और आगे होने वाले फैसलों के बाद तस्वीर साफ होगी।

    अजीत अगरकर के कार्यकाल की अवधि पूरी होने से पहले ही उन्हें चयन समिति की बैठक से अलग किए जाने के बाद क्रिकेट प्रशासन में बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, वर्तमान में प्रज्ञान ओझा की भूमिका अंतरिम है और स्थायी नियुक्ति को लेकर अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है।

    न्यूजीलैंड के आगामी दौरे को देखते हुए चयन समिति के लिए आने वाले फैसले महत्वपूर्ण होंगे। टीम संयोजन, खिलाड़ियों के चयन और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा के बीच प्रज्ञान ओझा फिलहाल चयन समिति की कमान संभाल रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नई चयन समिति बनने के बाद चेयरमैन पद की जिम्मेदारी किसे मिलती है।

  • नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने पर कांग्रेस में फिर चर्चा, दिग्विजय बोले- रोकना चाहिए था, सोनिया गांधी ने दी अलग राय

    नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने पर कांग्रेस में फिर चर्चा, दिग्विजय बोले- रोकना चाहिए था, सोनिया गांधी ने दी अलग राय


    नई दिल्ली। कांग्रेस कार्यसमिति की मंगलवार को हुई बैठक में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से अलग होने का मुद्दा भी चर्चा में आया। बैठक में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार को गठबंधन से जाने नहीं देना चाहिए था और अगर वह साथ रहते तो राजनीतिक परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। इस पर सोनिया गांधी ने अलग राय रखते हुए कहा कि नीतीश कुमार को गठबंधन से बाहर जाना ही था।

    नीतीश कुमार पहले विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा थे, लेकिन बाद में उन्होंने गठबंधन से अलग होकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का रुख किया था। मंगलवार की बैठक में उनके इस फैसले और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई। सामने आई जानकारी के मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन के साथ बने रहते तो सियासी हालात अलग होते।

    दिग्विजय सिंह की टिप्पणी पर सोनिया गांधी ने कहा कि नीतीश कुमार INDIA गठबंधन में रुकना नहीं चाहते थे। उनके मुताबिक, वह गठबंधन से बाहर निकलने के रास्ते तलाश रहे थे। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि उनका बाहर जाना पहले से तय दिशा में था। इस तरह बैठक में नीतीश कुमार के फैसले को लेकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग आकलन सामने आए।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस चर्चा में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर बोलना नहीं चाहते थे, लेकिन नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से बाहर निकलने के रास्ते तलाशने की बात सामने रखी। खड़गे के मुताबिक, गठबंधन का संयोजक बनने की उनकी कोशिश भी वास्तविक राजनीतिक प्रतिबद्धता के बजाय दिखावे तक सीमित थी। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार पहले उनसे राज्य की राजनीति में रहने और केंद्र में INDIA गठबंधन को समर्थन देने की बात कह चुके थे।

    नीतीश कुमार के मुद्दे पर हुई यह चर्चा ऐसे समय हुई, जब कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। कांग्रेस ने मतदाता सूची में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कीं। पार्टी की ओर से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक करने समेत कई मांगें रखी गईं।

    कांग्रेस की बैठक के अगले दिन INDIA गठबंधन की बैठक भी नई दिल्ली में निर्धारित थी। इसमें विपक्षी दलों के नेताओं को चुनाव आयोग, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति पर चर्चा करनी थी। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अन्य घटक दलों के प्रमुख नेताओं की भागीदारी तय थी।

    कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दौरान राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बातचीत का एक हल्का-फुल्का पल भी चर्चा में रहा। बैठक में खड़गे ने राहुल गांधी के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि पार्टी उनके पीछे चल रही है। इस पर राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए पूछा कि वे बहुत पीछे तो नहीं हैं। इसके बाद खड़गे ने कहा कि पार्टी उनके साथ चल रही है।

    नीतीश कुमार को लेकर हुई चर्चा ने INDIA गठबंधन के गठन और उसके बाद बदले राजनीतिक समीकरणों को फिर से सामने ला दिया। एक तरफ दिग्विजय सिंह ने उनके गठबंधन में बने रहने को लेकर अलग संभावना व्यक्त की, वहीं सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनके अलग होने को उनकी राजनीतिक दिशा से जुड़ा फैसला बताया। इसी बीच विपक्षी दल चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी संयुक्त रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं।