Author: bharati

  • पापा ने एक हां में बदल दी किस्मत, सनी देओल ने बताया कैसे धर्मेंद्र के भरोसे बनी सुपरहिट फिल्म घायल

    पापा ने एक हां में बदल दी किस्मत, सनी देओल ने बताया कैसे धर्मेंद्र के भरोसे बनी सुपरहिट फिल्म घायल


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल इन दिनों अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म बंटवारा 1947 को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है और इसके साथ ही सनी देओल लगातार प्रमोशन में जुटे हुए हैं। इसी दौरान उन्होंने अपनी सुपरहिट फिल्म घायल से जुड़ा एक ऐसा भावुक किस्सा साझा किया जिसने उनके प्रशंसकों के साथ फिल्म प्रेमियों का भी दिल जीत लिया। सनी ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब इस फिल्म पर कोई निर्माता पैसा लगाने को तैयार नहीं था लेकिन उनके पिता और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र ने उन पर भरोसा जताया और वही भरोसा आगे चलकर भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में से एक की नींव बना।

    सनी देओल ने सोशल मीडिया पर निर्देशक राजकुमार संतोषी के साथ एक वीडियो साझा करते हुए उस दौर को याद किया। उन्होंने बताया कि युवा राजकुमार संतोषी ने घायल की कहानी लिखी थी और उन्हें इस कहानी पर शुरू से पूरा विश्वास था। दोनों कई निर्माताओं के पास गए लेकिन किसी ने भी फिल्म बनाने में रुचि नहीं दिखाई। लगातार निराशा मिलने के बाद सनी ने फैसला किया कि अब इस कहानी को अपने पिता धर्मेंद्र को सुनाया जाए।

    उस समय धर्मेंद्र जयपुर में फिल्म बंटवारा की शूटिंग कर रहे थे और रामबाग पैलेस में ठहरे हुए थे। सनी देओल राजकुमार संतोषी को लेकर उनके पास पहुंचे। संतोषी ने पूरी कहानी सुनाई और कहानी खत्म होते ही धर्मेंद्र ने बिना किसी हिचकिचाहट के फिल्म बनाने के लिए हामी भर दी। सनी ने बताया कि उनके पिता को सिर्फ कहानी ही नहीं बल्कि इस बात पर भी गर्व था कि उनके बेटे ने इतनी दमदार स्क्रिप्ट को पहचाना और उस पर विश्वास बनाए रखा।

    सनी ने कहा कि घायल की सफलता केवल एक फिल्म की सफलता नहीं थी बल्कि यह उनके पिता के भरोसे और विश्वास की जीत थी। उन्होंने कहा कि अगर उस समय धर्मेंद्र उनका साथ नहीं देते तो शायद घायल कभी बड़े पर्दे तक नहीं पहुंच पाती। यही भरोसा उनके जीवन का सबसे बड़ा संबल बना और आगे चलकर घायल ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल करते हुए भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई।

    सनी देओल ने एक और दिलचस्प संयोग का जिक्र करते हुए बताया कि जिस जयपुर शहर में धर्मेंद्र ने बंटवारा की शूटिंग के दौरान घायल के लिए हां कही थी उसी शहर में वर्षों बाद वह अपनी नई फिल्म बंटवारा 1947 का पहला प्रमोशन कर रहे हैं। उनके अनुसार यह महज संयोग नहीं बल्कि जीवन का खूबसूरत चक्र है जो उन्हें पुराने संघर्ष और नई सफलता दोनों की याद दिलाता है।

    बंटवारा 1947 की कहानी भारत विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में सनी देओल एक मुस्लिम व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं जो विभाजन के दौरान पाकिस्तान पहुंच जाता है। वहां जिस घर में वह रहता है उसकी ऊपरी मंजिल पर एक हिंदू महिला रहती है जो अपना घर छोड़ने से इनकार कर देती है। सांप्रदायिक तनाव और दंगों के बीच सनी का किरदार उस महिला और अपने परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाता है। फिल्म में मानवीय रिश्तों और इंसानियत के संदेश को प्रमुखता से दिखाया गया है।

    फिल्म में प्रीति जिंटा पांच साल से अधिक समय बाद अभिनय की दुनिया में वापसी कर रही हैं। करण देओल भी अहम भूमिका में नजर आएंगे और फिल्म में सनी देओल के बेटे का किरदार निभा रहे हैं। इसके अलावा अली फजल अभिमन्यु सिंह खुशी हजारे और कनिका कपूर भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। एआर रहमान के संगीत और जावेद अख्तर के गीतों से सजी इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने बिना किसी कट के मंजूरी दी है। आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी यह फिल्म दर्शकों के बीच पहले ही जबरदस्त उत्सुकता पैदा कर चुकी है।

  • रोज योग करते हैं फिर भी नहीं दिख रहा असर तो अपनाइए सही नियम बढ़ेगी ऊर्जा मिलेगा बेहतर स्वास्थ्य

    रोज योग करते हैं फिर भी नहीं दिख रहा असर तो अपनाइए सही नियम बढ़ेगी ऊर्जा मिलेगा बेहतर स्वास्थ्य


    नई दिल्ली। योग भारत की प्राचीन जीवन पद्धति है जो केवल शरीर को स्वस्थ रखने तक सीमित नहीं है बल्कि मानसिक शांति आत्मिक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली का भी आधार मानी जाती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लाखों लोग योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं लेकिन कई लोग सही नियमों की जानकारी के बिना योग करते हैं जिसकी वजह से उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। योग का वास्तविक फायदा तभी मिलता है जब इसे सही समय सही स्थान और सही विधि से किया जाए।

    योग करने का सबसे उपयुक्त समय सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के आसपास माना जाता है। इस समय वातावरण शुद्ध रहता है और शरीर तथा मन दोनों अधिक सक्रिय होते हैं। यदि सुबह समय न मिल पाए तो शाम को भी योग किया जा सकता है लेकिन भोजन के कम से कम तीन से चार घंटे बाद ही अभ्यास करना चाहिए। भरे पेट योग करने से शरीर पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है और कई बार पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

    योग हमेशा शांत स्वच्छ और हवादार स्थान पर करना चाहिए। खुली हवा में किया गया योग शरीर को अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध कराता है जिससे फेफड़े बेहतर तरीके से काम करते हैं। योग करते समय ढीले और आरामदायक सूती कपड़े पहनना सबसे अच्छा माना जाता है ताकि शरीर की गतिविधियों में किसी तरह की रुकावट न आए।

    योग शुरू करने से पहले कुछ मिनट गहरी सांस लेकर शरीर और मन को शांत करना चाहिए। इसके बाद हल्के वार्मअप से मांसपेशियों को तैयार करें ताकि चोट लगने की संभावना कम हो जाए। किसी भी आसन को जल्दबाजी में करने की बजाय धीरे धीरे और पूरी एकाग्रता के साथ करना चाहिए। योग प्रतियोगिता नहीं बल्कि संतुलन और संयम का अभ्यास है इसलिए अपनी क्षमता से अधिक शरीर पर दबाव नहीं डालना चाहिए।

    योग के दौरान सांसों का विशेष महत्व होता है। प्रत्येक आसन में सांस लेने और छोड़ने की सही प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है क्योंकि प्राणायाम और नियंत्रित श्वास शरीर में ऊर्जा का संचार करती है। यदि सांसों पर नियंत्रण सही रहेगा तो योग का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है और मानसिक तनाव भी तेजी से कम होता है।

    किसी भी गंभीर बीमारी उच्च रक्तचाप हृदय रोग गर्भावस्था या हाल ही में हुई सर्जरी की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही योग करना चाहिए। कुछ कठिन आसनों का अभ्यास प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में करना अधिक सुरक्षित माना जाता है। गलत तरीके से किया गया योग लाभ की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है।

    योग करने के बाद तुरंत भारी भोजन नहीं करना चाहिए। पहले कुछ मिनट शवासन में आराम करें ताकि शरीर सामान्य अवस्था में लौट सके। इसके बाद हल्का गुनगुना पानी या पौष्टिक आहार लिया जा सकता है। योग के साथ संतुलित भोजन पर्याप्त नींद और सकारात्मक सोच भी जरूरी है क्योंकि स्वस्थ जीवन केवल आसनों से नहीं बल्कि अच्छी दिनचर्या से बनता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित और अनुशासित तरीके से किया गया योग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है मानसिक तनाव कम करता है पाचन सुधारता है हृदय को स्वस्थ रखता है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार करता है। यदि योग को रोजमर्रा की आदत बना लिया जाए और उसके मूल नियमों का पालन किया जाए तो यह केवल बीमारी से बचाने का माध्यम नहीं बल्कि संपूर्ण स्वस्थ और संतुलित जीवन की मजबूत नींव बन सकता है।

  • देशसेवा और फिटनेस का संगम, राष्ट्रपति मुर्मु ने सोल्जरथॉन व NCC साइक्लोथॉन का किया शुभारंभ

    देशसेवा और फिटनेस का संगम, राष्ट्रपति मुर्मु ने सोल्जरथॉन व NCC साइक्लोथॉन का किया शुभारंभ


    नई दिल्ली। देश में फिटनेस राष्ट्रभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से राजधानी दिल्ली में शनिवार को कई प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किए गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन परिसर से पीबीजी सोल्जरथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जबकि केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम से एनसीसी साइक्लोथॉन 2026 की शुरुआत कर युवाओं को अनुशासन फिटनेस और राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया। इन आयोजनों ने देशवासियों विशेषकर युवाओं में देशभक्ति और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया।

    राष्ट्रपति भवन में आयोजित पीबीजी सोल्जरथॉन का आयोजन सैनिकों के साथ दौड़ें सैनिकों के लिए दौड़ें विषय पर किया गया। इस पहल का उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों के साहस समर्पण और बलिदान को सम्मान देना तथा आम नागरिकों और सैनिकों के बीच मजबूत भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करना था। इस अवसर पर मिजोरम के राज्यपाल और इस अभियान के संरक्षक जनरल वीके सिंह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सैनिकों और आम नागरिकों ने भाग लेकर एक साथ दौड़ लगाई और राष्ट्रीय ध्वज के साथ देश के वीर जवानों के प्रति अपना सम्मान और समर्थन व्यक्त किया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि सोल्जरथॉन केवल एक दौड़ नहीं बल्कि नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच विश्वास और सम्मान का मजबूत सेतु है। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक सीमाओं पर दिन रात देश की रक्षा करते हैं और उनके साहस तथा त्याग को सम्मान देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। राष्ट्रपति ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करते हैं और लोगों को सैनिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराते हैं।

    दूसरी ओर भारत की आजादी के 79 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एनसीसी साइक्लोथॉन 2026 को केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस कार्यक्रम में 79 एनसीसी कैडेट शामिल हुए जिन्होंने अनुशासन फिटनेस और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया। कार्यक्रम में ओलंपिक पदक विजेता और विश्व चैंपियन मुक्केबाज मैरी कॉम की उपस्थिति ने युवाओं का उत्साह और बढ़ा दिया।

    मनसुख मांडविया ने कहा कि एनसीसी केवल एक संगठन नहीं बल्कि अनुशासन नेतृत्व क्षमता और समाज सेवा की पाठशाला है। उन्होंने कहा कि आज के युवा विकसित भारत के सबसे मजबूत आधार हैं और उनकी ऊर्जा देश के भविष्य को नई दिशा दे सकती है। उन्होंने युवाओं से फिट रहने समाज के प्रति जिम्मेदार बनने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

    मैरी कॉम ने भी युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि एनसीसी की वर्दी केवल कपड़ा नहीं बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी और सेवा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए अनुशासन मेहनत और समर्पण सबसे महत्वपूर्ण हैं तथा युवा इन्हीं मूल्यों को अपनाकर अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।

    इसी क्रम में जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से नशा मुक्त भारत अभियान के तहत फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल के 84वें संस्करण का भी आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को नियमित व्यायाम स्वस्थ जीवनशैली और नशामुक्त समाज के प्रति जागरूक करना था।

    इन सभी आयोजनों ने यह संदेश दिया कि फिट शरीर अनुशासित जीवन और राष्ट्र के प्रति समर्पण ही विकसित भारत की मजबूत नींव हैं। सैनिकों के सम्मान से लेकर युवाओं की भागीदारी तक दिल्ली में आयोजित ये कार्यक्रम देशभक्ति सामाजिक एकता और स्वस्थ भारत के संकल्प को नई मजबूती देने वाले साबित हुए।

  • CWG 2026: भारत ने 10वें दिन रचा इतिहास, पदक विजेताओं को पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

    CWG 2026: भारत ने 10वें दिन रचा इतिहास, पदक विजेताओं को पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का दसवां दिन भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार दिनों में शामिल हो गया। ग्लासगो में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में 16 पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल रहे जिसने भारत की पदक तालिका को और मजबूत कर दिया। मुक्केबाजी से लेकर पैरा एथलेटिक्स तक भारतीय खिलाड़ियों ने हर मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। खिलाड़ियों की इस शानदार उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी पदक विजेताओं को बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन की खुलकर सराहना की और इसे देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।

    दसवें दिन भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा सबसे ज्यादा देखने को मिला। भारत ने बॉक्सिंग में कुल 10 पदक अपने नाम किए और कई खिलाड़ियों ने स्वर्ण जीतकर तिरंगा ऊंचा लहराया। पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में सचिन सिवाच ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी के मुक्केबाजों को प्रेरित करेगी और वे भविष्य में भी देश का नाम रोशन करते रहेंगे।

    महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रधानमंत्री ने उनके संघर्ष और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनका समर्पण देशभर के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग में अरुंधति चौधरी ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उनकी तकनीक आत्मविश्वास और आक्रामक खेल की प्रधानमंत्री ने खुलकर तारीफ की। वहीं 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घांगस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सफलता उनके कौशल और मानसिक मजबूती का प्रमाण है।

    भारत की एक और महिला मुक्केबाज साक्षी ने 51 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें निर्णायक जीत के लिए बधाई देते हुए भविष्य में और बड़ी सफलताओं की शुभकामनाएं दीं। पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में जदुमणि सिंह मंडेंगबाम ने रजत पदक जीतकर भारत की झोली में एक और महत्वपूर्ण पदक जोड़ा। प्रधानमंत्री ने उनकी दृढ़ता अनुशासन और संघर्ष की सराहना की।

    पैरा एथलेटिक्स में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। पुरुषों के शॉट पुट एफ57 वर्ग में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। यह इस स्पर्धा में भारत का पहला कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी प्रतियोगिता के दौरान उनका फोकस और अटूट संकल्प साफ दिखाई दिया। इसी स्पर्धा में शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर भारत की सफलता में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। प्रधानमंत्री ने उनकी तकनीक और समर्पण की प्रशंसा करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

    भारतीय खिलाड़ियों के इस शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि देश अब हर खेल में वैश्विक स्तर पर मजबूती से अपनी पहचान बना रहा है। एक ही दिन में 16 पदकों का ऐतिहासिक प्रदर्शन भारतीय खेलों के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा है और खिलाड़ियों की यह सफलता देशवासियों के लिए गर्व का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बधाई ने खिलाड़ियों का उत्साह और बढ़ाया है तथा पूरे देश में इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया जा रहा है।

  • 19 साल बाद कोलकाता लौटीं तसलीमा नसरीन, बोलीं- अन्याय लंबा चल सकता है, लेकिन हमेशा नहीं रहता

    19 साल बाद कोलकाता लौटीं तसलीमा नसरीन, बोलीं- अन्याय लंबा चल सकता है, लेकिन हमेशा नहीं रहता


    कोलकाता। करीब 19 वर्ष बाद पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुंचीं निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा कि उनकी वापसी इस बात का प्रतीक है कि अन्याय लंबे समय तक चल सकता है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं रहता। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में किसी लेखक को अपने विचारों के कारण अपना देश छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होना पड़े।

    रवींद्र सदन में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में तसलीमा ने कहा कि कोलकाता लौटकर उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे वह अपने जीवन के उसी हिस्से में वापस आ गई हैं, जिसे वर्षों पहले यहीं छोड़ना पड़ा था। कार्यक्रम के दौरान मंच पर पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े एक नेता को आमंत्रित किए जाने को लेकर कुछ देर विवाद और हंगामे की स्थिति भी बनी।

    ‘मैं राजनीति नहीं, महिलाओं के अधिकारों की बात करने आई हूं’
    तसलीमा नसरीन ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में बोलना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह केवल महिलाओं के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में अपनी बात रखने आई हैं।

    उन्होंने कहा कि यूरोप ने उन्हें नागरिकता और रहने का स्थान दिया, लेकिन बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में उन्हें स्थायी ठिकाना नहीं मिल सका। तसलीमा ने यह भी कहा कि किसी अदालत ने उन्हें कभी दोषी नहीं ठहराया, लेकिन कट्टरपंथी ताकतों के विरोध के कारण उन्हें निर्वासन का जीवन जीना पड़ा।

    सुरक्षा का मिला आश्वासन
    कार्यक्रम में मौजूद पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने तसलीमा नसरीन का स्वागत करते हुए कहा कि जब भी वह राज्य आएंगी, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल आने पर उन्हें किसी तरह की असुरक्षा महसूस नहीं होने दी जाएगी।

    2007 में छोड़ना पड़ा था कोलकाता
    तसलीमा नसरीन वर्ष 2004 से 2007 के बीच कोलकाता में रही थीं। उनकी आत्मकथा ‘द्विखंडितो’ के कुछ अंशों को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया था। कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए नवंबर 2007 में उन्हें कोलकाता छोड़ना पड़ा।

    इससे पहले वर्ष 1994 में बांग्लादेश में अपनी लेखनी को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों की धमकियों के बाद उन्होंने अपना देश छोड़ दिया था। तब से वह निर्वासन का जीवन जी रही हैं।

  • भारत की लंबी दूरी की दौड़ को मिला नया हीरो, गुलवीर सिंह ने 5000 मीटर में ब्रॉन्ज जीतकर बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

    भारत की लंबी दूरी की दौड़ को मिला नया हीरो, गुलवीर सिंह ने 5000 मीटर में ब्रॉन्ज जीतकर बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक और ऐतिहासिक पल सामने आया है। लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया जो अब तक कोई भारतीय ट्रैक एंड फील्ड खिलाड़ी हासिल नहीं कर पाया था। इससे पहले वह 10000 मीटर स्पर्धा में रजत पदक जीत चुके थे। इसी के साथ गुलवीर कॉमनवेल्थ गेम्स के एक ही संस्करण में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बन गए। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान देने के साथ देश का गौरव भी बढ़ाया है।

    स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में आयोजित 5000 मीटर फाइनल बेहद रोमांचक रहा। शुरुआत में गुलवीर आठवें स्थान पर चल रहे थे लेकिन उन्होंने शानदार रणनीति और धैर्य का परिचय देते हुए धीरे धीरे अपनी रफ्तार बढ़ाई। शुरुआती 400 मीटर उन्होंने 1 मिनट 10.6 सेकंड में पूरे किए। इसके बाद अगले चरण में उन्होंने तेजी दिखाई और चौथे स्थान तक पहुंच गए। लगातार शानदार लय बनाए रखते हुए उन्होंने 3000 मीटर की दूरी 8 मिनट 16.6 सेकंड में पूरी की और अंतिम चरण में जबरदस्त स्प्रिंट लगाकर तीसरे स्थान पर कब्जा जमा लिया।

    गुलवीर सिंह ने 13 मिनट 24.95 सेकंड का समय निकालते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। केन्या के मैथ्यू किपचुम्बा किपसांग ने 13 मिनट 23.61 सेकंड के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि ऑस्ट्रेलिया के काय रॉबिन्सन ने 13 मिनट 24.70 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक हासिल किया। अंतिम 200 मीटर में गुलवीर ने जिस संयम और गति का प्रदर्शन किया उसने उन्हें पोडियम तक पहुंचा दिया।

    इससे पहले 10000 मीटर दौड़ में भी गुलवीर सिंह ने 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालते हुए रजत पदक जीता था। उस प्रदर्शन ने ही संकेत दे दिया था कि भारतीय धावक इस बार इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरे हैं। 5000 मीटर में कांस्य जीतने के साथ उन्होंने अपनी शानदार फिटनेस और निरंतरता का भी परिचय दिया।

    उत्तर प्रदेश के अतरौली के रहने वाले 28 वर्षीय गुलवीर सिंह भारतीय सेना में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाले गुलवीर की सफलता युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है। कठिन मेहनत अनुशासन और लगातार अभ्यास की बदौलत उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन लगातार मजबूत होता जा रहा है। अब तक भारतीय दल 39 पदक जीत चुका है जिनमें 13 स्वर्ण 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। पदक तालिका में भारत चौथे स्थान पर बना हुआ है और आने वाले मुकाबलों में देश को खिलाड़ियों से और भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है।

    गुलवीर सिंह की ऐतिहासिक उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए नई उम्मीद और नई दिशा का प्रतीक है। यह जीत बताती है कि भारत अब लंबी दूरी की दौड़ में भी दुनिया की बड़ी ताकतों को चुनौती देने की क्षमता रखता है। आने वाले वर्षों में गुलवीर जैसे खिलाड़ी देश को वैश्विक प्रतियोगिताओं में और भी बड़ी सफलताएं दिलाने का दम रखते हैं।

  • गुजरात के जूनागढ़ में लोहे के गेट में फंसा शेर, उल्टा लटका, वन विभाग ने ऐसे किया रेस्क्यू

    गुजरात के जूनागढ़ में लोहे के गेट में फंसा शेर, उल्टा लटका, वन विभाग ने ऐसे किया रेस्क्यू


    जूनागढ़। गुजरात के जूनागढ़ शहर में एक एशियाई शेर लोहे के गेट को पार करने के प्रयास में फंस गया। पिछला पैर सलाखों के बीच अटकने से वह खुद को छुड़ा नहीं सका और कुछ समय तक गेट पर उल्टा लटका रहा। सूचना मिलने पर वन विभाग और सक्करबाग जू की रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे सुरक्षित बाहर निकाला।

    वन विभाग के अनुसार, ग्रोफेड क्षेत्र में स्थित एक पुरानी मिल के परिसर के पास तड़के करीब 1 से 2 वर्ष का नर शेर घूम रहा था। गेट लांघने की कोशिश के दौरान उसका पिछला पैर लोहे की सलाखों के बीच फंस गया। बाहर निकलने के लिए उसने काफी प्रयास किए, लेकिन हर कोशिश के साथ उसकी स्थिति और कठिन होती गई।

    वन विभाग ने संभाला मोर्चा
    घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग और सक्करबाग जू की विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। सबसे पहले आसपास का क्षेत्र खाली कराया गया, ताकि बचाव अभियान के दौरान किसी प्रकार का खतरा न रहे। इसके बाद निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए शेर को सावधानीपूर्वक सलाखों से मुक्त कराया गया।

    घायल शेर का कराया गया उपचार
    रेस्क्यू के बाद शेर को सक्करबाग जू ले जाया गया, जहां पशु चिकित्सकों ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। वन विभाग के मुताबिक, शेर के पिछले पैर में चोट आई है, लेकिन उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर है। उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है और लगातार उपचार किया जा रहा है।

    वन अधिकारियों का कहना है कि यदि सूचना समय पर नहीं मिलती और रेस्क्यू में देरी होती, तो शेर की चोट गंभीर हो सकती थी। समय रहते बचाव अभियान शुरू होने से बड़ा हादसा टल गया।

    आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं शेर
    गिर और जूनागढ़ क्षेत्र एशियाई शेरों का प्राकृतिक आवास है। भोजन की तलाश या अपने क्षेत्र से भटकने के कारण कई बार शेर आबादी वाले इलाकों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में पुराने ढांचे, लोहे के गेट, तार और गड्ढे जैसे अवरोध वन्यजीवों के लिए खतरा बन जाते हैं। फिलहाल घायल शेर का इलाज जारी है और वन विभाग उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

  • गुना जिले में मंगेतर से युवक के सामने गैंगरेप का प्रयास, पहले की मारपीट फि‍र लूटपाट, जाने पूरा मामला

    गुना जिले में मंगेतर से युवक के सामने गैंगरेप का प्रयास, पहले की मारपीट फि‍र लूटपाट, जाने पूरा मामला


    गुना । मध्य प्रदेश के गुना में नेशनल हाइवे-46 पर हुई सनसनीखेज वारदात ने इलाके में दहशत फैला दी है. पुलिस के अनुसार, झारखंड के रहने वाले एक युवक और उसकी मंगेतर के साथ लूटपाट की गई. बदमाश उन्हें सड़क किनारे से जंगल में घसीटकर ले गए और युवती के साथ गैंगरेप का प्रयास किया. विरोध करने पर युवक के साथ मारपीट की गई. युवती के शोर मचाने पर आरोपी मौके से फरार हो गए.

    पुलिस के मुताबिक, पीड़ित युवक राघौगढ़ स्थित एक प्लांट में इंजीनियर है. वह अपनी मंगेतर के साथ टेकरी मंदिर में दर्शन करने के बाद बाइक से लौट रहा था. नेशनल हाइवे-46 पर बाइक पंचर हो गई. दोनों सड़क किनारे खड़े होकर मदद का इंतजार कर रहे थे. इसी दौरान जंगल में छिपे बैठे 6-7 बदमाशों ने उन्हें घेर लिया.

    पुलिस का कहना है कि बदमाश दोनों को जंगल की ओर ले गए, युवक के साथ मारपीट की. इसके बाद युवती के साथ गैंगरेप का प्रयास किया. युवती ने विरोध किया और शोर करते हुए मदद के लिए आवाज लगाई. आवाज सुनकर हाइवे से गुजर रहे कुछ लोगों की हलचल बढ़ी, जिससे आरोपी घबरा गए. इसके बाद वे युवती का पर्स और मोबाइल लूटकर मौके से फरार हो गए.

    घटना की सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची. दोनों घायलों को अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज कराया गया. पुलिस ने तुरंत इलाके की घेराबंदी कर जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया. शुरुआती जांच के बाद अलग-अलग टीमों का गठन कर आरोपियों की तलाश शुरू की गई.

    बदमाशों ने युवक के साथ मारपीट की और युवती के साथ गैंगरेप की कोशिश की. दुपट्टे से युवती के हाथ बांधकर प्राइवेट पार्ट में लकड़ी से चोट पहुंचाई गई. मंगेतर ने विरोध किया तो उसे बुरी तरह से पीटा. इस घटना की सूचना के बाद डायल 112 पुलिस भी पहुंच गई. पुलिस ने दोनों को अस्पताल भेजा. इसके बाद एक टीम जंगल में बदमाशों की सर्चिंग के लिए भेजी गई.

    एसपी हितिका वासल ने बताया कि महिला और पुरुष के साथ लूटपाट की घटना हुई है. बदमाशों ने महिला के साथ गैंगरेप की भी कोशिश की. चीख-पुकार के बाद बदमाश फरार हो गए. पुलिस ने सात में से पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. बाकी दो की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है. मैं खुद निजी तौर पर इस मामले की निगरानी कर रही हूं और प्रयास रहेगा कि केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर आरोपियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए.

    पुलिस के अनुसार, घटना के बाद युवती गहरे सदमे में है. उसकी काउंसलिंग और मेडिकल हेल्प की व्यवस्था की गई है. पुलिस मौके से मिले सबूतों, फॉरेंसिक जांच और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है.

  • अभिजीत दिपके के परिवार और CJP फंडिंग की जांच की मांग, RTI कार्यकर्ता ने EC और GST विभाग को लिखा पत्र

    अभिजीत दिपके के परिवार और CJP फंडिंग की जांच की मांग, RTI कार्यकर्ता ने EC और GST विभाग को लिखा पत्र


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और संगठन के लिए घोषित लीगल डिफेंस फंड को लेकर नए सवाल उठे हैं। गुजरात के सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग और केंद्रीय GST विभाग से पूरे मामले की वित्तीय जांच कराने की मांग की है।

    RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने शनिवार को बताया कि उन्होंने इस संबंध में दोनों संस्थाओं को पत्र भेजा है। उनकी मांग है कि CJP की फंडिंग, संगठन की वैधानिक स्थिति और अभिजीत दिपके के परिवार की वित्तीय पृष्ठभूमि की जांच की जाए।

    विदेश में पढ़ाई के खर्च पर सवाल
    तिवारी ने अपने पत्र में कहा है कि अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके, जो महाराष्ट्र सरकार से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, उनके बेटे की विदेश में उच्च शिक्षा का खर्च किस स्रोत से वहन किया गया, इसकी जांच होनी चाहिए।

    CJP के पंजीकरण की भी जांच की मांग
    RTI कार्यकर्ता ने निर्वाचन आयोग से यह भी अनुरोध किया है कि CJP की कानूनी स्थिति स्पष्ट की जाए। उनका कहना है कि यदि संगठन राजनीतिक दल की तरह गतिविधियां चला रहा है और उसके नाम पर फंड जुटाया जा रहा है, तो यह जांचना आवश्यक है कि क्या उसका पंजीकरण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत हुआ है या नहीं। यदि पंजीकरण नहीं है, तो इस आधार पर भी जांच होनी चाहिए।

    1 करोड़ के लीगल डिफेंस फंड पर GST का मुद्दा
    अमित तिवारी ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) को भी पत्र लिखकर वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा घोषित 1 करोड़ रुपये के लीगल डिफेंस फंड पर लागू कर नियमों की जांच की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से इस राशि पर संभावित GST देनदारी की समीक्षा करने का आग्रह किया है।

    NEET प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
    यह विवाद NEET पेपर लीक मामले को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद सामने आया है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए CJP प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए 1 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी। इसी फंड और उससे जुड़े वित्तीय पहलुओं को लेकर अब जांच की मांग उठाई गई है।

  • अलसी से करें स्किन की नेचुरल केयर चेहरे पर आएगा ग्लो कम होंगे पिंपल्स और बढ़ती उम्र के निशान भी होंगे हल्के

    अलसी से करें स्किन की नेचुरल केयर चेहरे पर आएगा ग्लो कम होंगे पिंपल्स और बढ़ती उम्र के निशान भी होंगे हल्के


    नई दिल्ली। आजकल हर कोई साफ चमकदार और स्वस्थ त्वचा चाहता है। इसके लिए लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट और तरह तरह के ब्यूटी ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं। हालांकि कई बार प्राकृतिक चीजें भी त्वचा को बेहतरीन पोषण देने में मदद कर सकती हैं। इन्हीं में से एक है अलसी। छोटे से दिखने वाले अलसी के बीज पोषक तत्वों का खजाना माने जाते हैं और आयुर्वेद के साथ आधुनिक पोषण विज्ञान में भी इन्हें काफी महत्व दिया जाता है। नियमित और सही तरीके से अलसी का उपयोग करने से त्वचा को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं।

    अलसी में ओमेगा थ्री फैटी एसिड एंटीऑक्सीडेंट फाइबर विटामिन ई और कई जरूरी खनिज पाए जाते हैं। ये तत्व त्वचा को अंदर से पोषण देने में मदद करते हैं। एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक माने जाते हैं जिससे त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ और दमकती हुई नजर आ सकती है। वहीं ओमेगा थ्री फैटी एसिड त्वचा की नमी बनाए रखने और उसे मुलायम रखने में मदद कर सकता है।

    अगर आपकी त्वचा रूखी रहती है तो अलसी आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। नियमित रूप से संतुलित मात्रा में अलसी का सेवन करने से त्वचा को आवश्यक पोषण मिलता है जिससे उसका प्राकृतिक ग्लो बरकरार रहने में मदद मिल सकती है। कई लोग अलसी का जेल बनाकर चेहरे पर भी लगाते हैं। यह त्वचा को ठंडक देने और उसे हाइड्रेट रखने में सहायक माना जाता है।

    बढ़ती उम्र के साथ चेहरे पर झुर्रियां और महीन रेखाएं दिखाई देने लगती हैं। अलसी में मौजूद पोषक तत्व त्वचा की लोच बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। यही कारण है कि इसे प्राकृतिक एंटी एजिंग फूड भी माना जाता है। हालांकि यह किसी चिकित्सीय उपचार का विकल्प नहीं है लेकिन संतुलित आहार और सही स्किन केयर के साथ इसका उपयोग त्वचा की देखभाल में सहायक हो सकता है।

    मुंहासों और त्वचा की हल्की सूजन से परेशान लोगों के लिए भी अलसी लाभदायक मानी जाती है। इसके सूजनरोधी गुण त्वचा को शांत रखने में मदद कर सकते हैं। यदि त्वचा पर बार बार पिंपल्स निकलते हैं तो संतुलित खानपान पर्याप्त पानी और त्वचा की नियमित सफाई के साथ अलसी को आहार में शामिल किया जा सकता है। हालांकि गंभीर त्वचा समस्याओं में त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

    अलसी का फेस जेल तैयार करना भी आसान माना जाता है। इसके लिए अलसी के बीजों को पानी में उबालकर गाढ़ा जेल तैयार किया जाता है। ठंडा होने के बाद इसे साफ चेहरे पर कुछ मिनट तक लगाकर सामान्य पानी से धोया जा सकता है। किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर रहता है ताकि एलर्जी की संभावना का पता चल सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बाहरी देखभाल से ही त्वचा स्वस्थ नहीं रहती बल्कि संतुलित आहार पर्याप्त नींद नियमित व्यायाम और भरपूर पानी पीना भी उतना ही जरूरी है। अलसी को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले यदि किसी को एलर्जी पाचन संबंधी समस्या या कोई गंभीर बीमारी है तो डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।

    यदि आप प्राकृतिक तरीके से त्वचा की देखभाल करना चाहते हैं तो अलसी एक अच्छा विकल्प हो सकती है। सही जीवनशैली और नियमित स्किन केयर के साथ इसका उपयोग आपकी त्वचा को स्वस्थ चमकदार और लंबे समय तक तरोताजा बनाए रखने में मदद कर सकता है।