Author: bharati

  • खजराना मंदिर विवाद में नया मोड़: पीड़िता बोलीं- केस वापस लेने का बनाया जा रहा दबाव

    खजराना मंदिर विवाद में नया मोड़: पीड़िता बोलीं- केस वापस लेने का बनाया जा रहा दबाव


    मध्यप्रदेश। इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार को लेकर चल रहे विवाद में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न और मंदिर प्रबंधन से जुड़े गंभीर आरोप लगाने वाली डॉ. इंद्रा भट्ट (शर्मा) ने दावा किया है कि उन पर दर्ज प्रकरण वापस लेने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली लोगों द्वारा उन्हें समझाने और मामला खत्म करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वह न्याय की लड़ाई से पीछे हटने वाली नहीं हैं।

    मंगलवार को डॉ. इंद्रा कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचीं और अधिकारियों को आवेदन सौंपकर मांग की कि उनके पति एवं खजराना मंदिर के पुजारी पुनीत भट्ट के गर्भगृह में प्रवेश और पूजा-अर्चना करने पर जांच पूरी होने तक रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि जब किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हो और मामले की जांच जारी हो, तब तक उसे मंदिर की महत्वपूर्ण धार्मिक जिम्मेदारियों से दूर रखा जाना चाहिए।

    डॉ. इंद्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मामला दर्ज होने के बाद कई प्रभावशाली लोग उनके घर पहुंचे। उनके अनुसार उन्हें यह कहकर समझाने का प्रयास किया गया कि सामने वाला परिवार काफी प्रतिष्ठित और रसूखदार है, इसलिए विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं। उनका कहना है कि न्याय की लड़ाई कठिन जरूर है, लेकिन वह इसे अंत तक लड़ेंगी।

    पीड़िता ने यह भी कहा कि उनके लिए केवल एफआईआर दर्ज हो जाना या अदालत में मामला चलना ही न्याय नहीं है। उनके अनुसार वास्तविक न्याय तब होगा जब उन्हें अपने वैवाहिक घर में रहने का अधिकार मिलेगा। उनका आरोप है कि उन्हें बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के घर से बाहर कर दिया गया और अब अपने ही ससुराल में वापस प्रवेश पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।

    डॉ. इंद्रा ने अपने आवेदन में आंध्र प्रदेश के एक मंदिर से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां एक समान शिकायत के बाद प्रशासन ने संबंधित पुजारियों को सेवा से निलंबित कर दिया था। इसी आधार पर उन्होंने मांग की है कि जांच लंबित रहने तक पुनीत भट्ट को मंदिर की धार्मिक गतिविधियों और गर्भगृह से दूर रखा जाए।

    पीड़िता ने मंदिर परिसर में कथित अनियमितताओं और श्रद्धालुओं द्वारा दी गई दक्षिणा के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि उनके पास इन आरोपों से जुड़े कुछ दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध कराया जा सकता है।

    दूसरी ओर, मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल संबंधित प्रकरण न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है। इस बीच डॉ. इंद्रा भट्ट का कहना है कि महिलाओं को हर दौर में अपने अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन वह अपने पक्ष को साबित करने और न्याय प्राप्त करने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी।

    खजराना मंदिर से जुड़े इस विवाद पर अब प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और संबंधित पक्षों की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • अलविदा कहने से पहले दे गए उजाला: इंदौर ने 14 हजार लोगों की जिंदगी में लौटाई रोशनी

    अलविदा कहने से पहले दे गए उजाला: इंदौर ने 14 हजार लोगों की जिंदगी में लौटाई रोशनी


    मध्यप्रदेश। किसी व्यक्ति का जीवन भले ही समाप्त हो जाए, लेकिन उसका एक फैसला किसी दूसरे की दुनिया रोशन कर सकता है। इंदौर ने इसी सोच को जनआंदोलन में बदलकर पूरे प्रदेश के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। नेत्रदान के क्षेत्र में मध्य प्रदेश का अग्रणी शहर बन चुके इंदौर में पिछले 12 वर्षों के दौरान 18 हजार से अधिक लोगों ने मृत्यु के बाद अपने नेत्र दान किए हैं। इन दानों की बदौलत 14 हजार से ज्यादा लोगों की अंधेरी दुनिया में फिर से उजाला लौट पाया है।

    विश्व नेत्रदान दिवस के अवसर पर सामने आए आंकड़े बताते हैं कि शहर में नेत्रदान को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में स्थिति यह है कि हर महीने 100 से अधिक परिवार अपने प्रियजनों की मृत्यु के बाद नेत्रदान का निर्णय लेकर मानवता की एक अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। यह केवल चिकित्सा क्षेत्र की उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता और जागरूकता का भी प्रतीक है।

    इंदौर में वर्तमान में संकरा आई बैंक, एमके इंटरनेशनल आई बैंक और चोइथराम आई बैंक सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इनके साथ मुस्कान ग्रुप, दधीचि मिशन, गोल्ड क्वाइन सहित कई सामाजिक संस्थाएं भी लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित कर रही हैं। इन संगठनों की सतत कोशिशों ने शहर में नेत्रदान की संस्कृति को मजबूत आधार दिया है।

    संकरा आई बैंक की विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में केवल उनके संस्थान को 2700 से अधिक कॉर्निया प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 1670 का सफल प्रत्यारोपण किया जा चुका है। कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सफलता दर 70 से 80 प्रतिशत तक रहती है, जो हजारों मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि नेत्रदान के बाद प्राप्त कॉर्निया का उपयोग सीधे नहीं किया जाता। पहले डोनर की एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसी जरूरी जांचें की जाती हैं। सभी रिपोर्ट सामान्य आने के बाद ही प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी होती है।

    कॉर्निया प्रत्यारोपण का लाभ बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के मरीजों को मिल रहा है। जन्मजात कॉर्निया संबंधी समस्याएं, दुर्घटनाओं में आंखों की क्षति, आंखों में सफेदी आना या रासायनिक पदार्थों से दृष्टि प्रभावित होने जैसी स्थितियों में यह उपचार नई जिंदगी का आधार बनता है। कई मरीजों को एक आंख तो कई को दोनों आंखों में प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है।

    इस अभियान की सफलता के पीछे कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने इसे अपना जीवन मिशन बना लिया है। इंदौर के 58 वर्षीय इलेक्ट्रॉनिक व्यवसायी जितेंद्र बगानी, जिन्हें लोग ‘जीतू ग्रेजुएट’ के नाम से जानते हैं, उनमें से एक हैं। मुस्कान संस्था से जुड़े बगानी अब तक 6 हजार से अधिक नेत्रदाताओं से कॉर्निया प्राप्त कर चुके हैं। विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वे वर्षों से दिन-रात इस सेवा कार्य में जुटे हैं। नेत्रदान की सूचना मिलते ही वे तुरंत मौके पर पहुंचते हैं और कुछ ही मिनटों में प्रक्रिया पूरी कर जरूरतमंदों तक रोशनी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    इंदौर की यह सफलता बताती है कि जब समाज जागरूक और संवेदनशील होता है तो मृत्यु भी जीवन का संदेश बन जाती है। नेत्रदान केवल एक दान नहीं, बल्कि किसी की अंधेरी दुनिया में प्रकाश भरने का सबसे बड़ा माध्यम है। यही कारण है कि इंदौर आज नेत्रदान के क्षेत्र में पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल बनकर उभर रहा है।

  • जॉइंट डायरेक्टर के ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, 9.5 करोड़ की संपत्ति का खुलासा

    जॉइंट डायरेक्टर के ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, 9.5 करोड़ की संपत्ति का खुलासा


    मध्यप्रदेश। इंदौर में बुधवार सुबह लोकायुक्त संगठन ने महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान सामने आए शुरुआती तथ्यों ने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया। लोकायुक्त की प्राथमिक जांच में कंडवाल के पास उनकी वैध आय की तुलना में 241 प्रतिशत अधिक संपत्ति होने के संकेत मिले हैं। अब तक की जांच में करीब 9.5 करोड़ रुपए की संपत्ति का खुलासा हुआ है, जबकि उनके पूरे सेवाकाल की अनुमानित वैध आय लगभग ढाई करोड़ रुपए आंकी गई है।

    लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, कंडवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत की प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। इसके बाद विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त कर अलग-अलग टीमों ने सुबह करीब छह बजे एक साथ कई स्थानों पर कार्रवाई शुरू की।

    कार्रवाई इतनी गोपनीय रखी गई थी कि संयुक्त संचालक और उनके परिवार को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। सुबह-सुबह बड़ी संख्या में लोकायुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों के पहुंचने से संबंधित इलाकों में चर्चा का माहौल बन गया। जांच के दौरान अधिकारियों को कई ऐसे निवेश और व्यावसायिक प्रतिष्ठान मिले, जिनकी भव्यता ने टीम को भी चौंका दिया।

    सबसे अधिक चर्चा एक दो मंजिला आधुनिक जिम सेंटर को लेकर रही। जांच में सामने आया कि कंडवाल से जुड़ा यह फिटनेस सेंटर अत्याधुनिक सुविधाओं और महंगी मशीनों से सुसज्जित है। बताया जा रहा है कि यह शहर के प्रमुख निजी जिमों में शामिल है। इसके अलावा एक बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर की भी जांच की गई, जहां रोजमर्रा के उपभोक्ता सामानों का बड़े पैमाने पर कारोबार संचालित किया जा रहा था।

    लोकायुक्त टीम को अब तक पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के आसपास 12 प्लॉट, इंदौर में एक व्यावसायिक प्लॉट और अन्य अचल संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इसके साथ ही एक बैंक लॉकर की जानकारी भी सामने आई है, जिसकी जांच और तलाशी की प्रक्रिया आगे की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि संपत्ति का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है क्योंकि दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत पड़ताल जारी है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि अपने सेवाकाल के दौरान कंडवाल झाबुआ, रतलाम, नीमच, रीवा, शहडोल, उज्जैन, देवास और इंदौर सहित कई जिलों में पदस्थ रहे हैं। लोकायुक्त अब उनकी आय के स्रोतों, निवेश के तरीकों और संपत्ति अर्जित करने की प्रक्रिया की विस्तृत जांच कर रही है।

    इस कार्रवाई को प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद संपत्ति के वास्तविक मूल्यांकन, निवेश के स्रोत और वित्तीय लेनदेन से जुड़े अन्य तथ्यों को भी सार्वजनिक किया जाएगा। फिलहाल बरामद दस्तावेजों और संपत्तियों का सत्यापन किया जा रहा है तथा मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

  • राजवाड़ा में गूंजा मालवा का रंग, विदेशी मेहमानों ने किया लोकनृत्य

    राजवाड़ा में गूंजा मालवा का रंग, विदेशी मेहमानों ने किया लोकनृत्य


    मध्यप्रदेश। इंदौर में आयोजित पांच दिवसीय ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के दूसरे दिन शहर की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण विकास मॉडल ने विदेशी प्रतिनिधियों का दिल जीत लिया। बुधवार सुबह 20 देशों से आए प्रतिनिधियों ने ऐतिहासिक राजवाड़ा पहुंचकर इंदौर की समृद्ध विरासत, संस्कृति और इतिहास को करीब से जाना। इस दौरान विदेशी मेहमानों ने न केवल शहर की ऐतिहासिक धरोहरों का अवलोकन किया, बल्कि मालवा की लोक संस्कृति और कृषि उत्पादों का भी अनुभव किया।

    राजवाड़ा पहुंचने पर प्रतिनिधियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। होलकरकालीन इस ऐतिहासिक धरोहर के महत्व और इंदौर के गौरवशाली इतिहास की जानकारी इतिहासकार जफर अंसारी ने दी। उन्होंने मेहमानों को राजवाड़ा के स्थापत्य, होलकर राजवंश के योगदान और शहर की सांस्कृतिक विरासत के बारे में विस्तार से बताया। विदेशी प्रतिनिधियों ने ऐतिहासिक भवन की वास्तुकला और उसकी भव्यता की सराहना की।

    इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ढक्कनवाला कुआं स्थित ग्रामीण हाट बाजार पहुंचा, जहां मध्यप्रदेश की कृषि, हस्तशिल्प, ग्रामीण उद्यमिता और पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। यहां विदेशी मेहमानों का मालवी परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया। उन्हें पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया, जिससे वे बेहद उत्साहित नजर आए।

    ग्रामीण हाट में जनजातीय और लोक कलाकारों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। ढोल-मांदल और लोकधुनों की गूंज के बीच कई विदेशी प्रतिनिधि स्वयं को रोक नहीं सके और कलाकारों के साथ मंच पर थिरकते दिखाई दिए। मालवा की संस्कृति से उनका यह जुड़ाव सम्मेलन का सबसे आकर्षक दृश्य बन गया। विदेशी मेहमानों ने लोकनृत्य की लय और उत्साह की खुलकर सराहना की।

    प्रतिनिधियों ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना के तहत लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का भी अवलोकन किया। बुरहानपुर के केले से बने उत्पाद, बालाघाट का जीआई टैग प्राप्त चिन्नौर चावल, रीवा के प्रसिद्ध आम, झाबुआ की पारंपरिक फसलें और अन्य कृषि उत्पादों ने उनका ध्यान आकर्षित किया। विशेष रूप से मध्यप्रदेश के आमों का स्वाद विदेशी प्रतिनिधियों को खूब पसंद आया। उन्होंने आमों की गुणवत्ता, मिठास और सुगंध की प्रशंसा करते हुए इसे प्रदेश की विशेष पहचान बताया।

    मृगनयनी के स्टॉल पर प्रदर्शित चंदेरी, महेश्वरी और कोसा वस्त्रों ने भी मेहमानों को प्रभावित किया। इसके अलावा प्राकृतिक शहद, ए-2 दुग्ध उत्पाद, हर्बल सामग्री और महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को भी खूब सराहना मिली। प्रतिनिधियों ने ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता के प्रयासों की प्रशंसा की।

    ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के माध्यम से मध्यप्रदेश ने दुनिया के सामने अपनी कृषि क्षमता, प्राकृतिक खेती के मॉडल, ग्रामीण नवाचार और सांस्कृतिक समृद्धि को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। विदेशी प्रतिनिधियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने यह साबित कर दिया कि प्रदेश न केवल कृषि क्षेत्र में बल्कि संस्कृति और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी वैश्विक पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

  • एमपी में मौसम का डबल अटैक: कहीं ओलावृष्टि-बारिश, कहीं 46 डिग्री की भीषण गर्मी

    एमपी में मौसम का डबल अटैक: कहीं ओलावृष्टि-बारिश, कहीं 46 डिग्री की भीषण गर्मी


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश में मौसम इन दिनों दोहरे रंग दिखा रहा है। एक ओर प्रदेश के कई जिलों में प्री-मानसून की गतिविधियों ने जोर पकड़ लिया है, जहां तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर कई इलाके अब भी भीषण गर्मी की चपेट में हैं। मंगलवार को प्रदेश के कई जिलों में मौसम का मिजाज अचानक बदला और तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। जबलपुर और दमोह में ओले गिरने की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई।

    मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान भिंड, दतिया, मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, सागर, छतरपुर, छिंदवाड़ा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, सतना और मऊगंज सहित 18 जिलों में तेज आंधी और बारिश हुई। सिंगरौली और नरसिंहपुर में धूलभरी आंधी ने जनजीवन को प्रभावित किया। कई स्थानों पर पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं भी सामने आईं।

    सबसे ज्यादा असर जबलपुर में देखने को मिला, जहां 74 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली। तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ गिर गए और वाहनों को नुकसान पहुंचा। सीधी में 68 किलोमीटर प्रति घंटे, सागर में 59 किलोमीटर प्रति घंटे और ग्वालियर में 46 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। इसके अलावा आगर-मालवा, अशोकनगर, रीवा, गुना, शिवपुरी और शहडोल में भी तेज हवाओं का असर देखा गया।

    बारिश और आंधी के बीच गर्मी का प्रकोप भी कम नहीं हुआ है। खजुराहो मंगलवार को प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कई अन्य जिलों में भी तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा, जिससे लोगों को उमस और गर्म हवाओं का सामना करना पड़ा।

    मौसम विभाग ने बुधवार को बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर जिलों में बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर और रीवा संभाग के कई जिलों में गर्मी का असर बरकरार रह सकता है।

    दिलचस्प बात यह है कि मौसम विभाग ने पहले 10 और 11 जून के लिए कुछ जिलों में लू का अलर्ट जारी किया था, लेकिन ताजा पूर्वानुमान में स्थिति बदल गई है। अब 12 जून को मुरैना, भिंड, टीकमगढ़ और छतरपुर में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज आंधी और बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी तथा सक्रिय प्री-मानसून सिस्टम के कारण मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में भी प्रदेशवासियों को गर्मी, आंधी और बारिश के मिले-जुले मौसम का सामना करना पड़ सकता है।

  • भोपाल में 17 वर्षीय छात्रा ने फांसी लगाकर दी जान, कमरे से मिला मोबाइल और गर्भनिरोधक गोलियों का पत्ता

    भोपाल में 17 वर्षीय छात्रा ने फांसी लगाकर दी जान, कमरे से मिला मोबाइल और गर्भनिरोधक गोलियों का पत्ता


    मध्यप्रदेश। राजधानी भोपाल के बजरिया थाना क्षेत्र में एक 17 वर्षीय छात्रा द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार रात सामने आए इस मामले में पुलिस को घटनास्थल से कुछ ऐसे सामान मिले हैं, जिन्होंने जांच की दिशा को और महत्वपूर्ण बना दिया है। छात्रा के कमरे से एक मोबाइल फोन और गर्भनिरोधक गोलियों का पत्ता बरामद हुआ है। फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।

    जानकारी के अनुसार, मृतका ने इसी वर्ष 12वीं कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। वह अपने पिता के साथ रहती थी। उसकी मां वर्ष 2017 से परिवार से अलग रह रही है। परिवार में उससे छोटे एक भाई और एक बहन भी हैं। घटना के समय दोनों छोटे भाई-बहन घर के बाहर खेल रहे थे।

    बताया गया है कि मंगलवार रात करीब साढ़े आठ बजे जब दोनों भाई-बहन घर लौटे तो उन्होंने अपनी बहन को आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। कई बार दरवाजा खटखटाने के बाद भी प्रतिक्रिया न मिलने पर उन्होंने अपने चाचा को सूचना दी। इसके बाद चाचा ने छात्रा के पिता को बुलाया। जब पिता घर पहुंचे तो दरवाजे में बने छोटे छेद से अंदर झांककर देखा गया। अंदर का दृश्य देखकर परिवार के होश उड़ गए। किसी तरह दरवाजा खोला गया तो छात्रा फंदे से लटकी हुई मिली।

    घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। बुधवार को छात्रा का पोस्टमार्टम कराया गया। प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिस को कमरे से एक मोबाइल फोन और गर्भनिरोधक गोलियों का पत्ता मिला। इन बरामद वस्तुओं ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

    मृतका के पिता ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि उन्होंने अपनी बेटी को कभी मोबाइल फोन नहीं दिलाया था। उनके अनुसार घटनास्थल के पास मिला मोबाइल किसका है और उनकी बेटी के पास कैसे पहुंचा, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इसी तरह गर्भनिरोधक गोलियों के पत्ते को लेकर भी उन्होंने अनभिज्ञता जताई है। पिता ने मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है ताकि घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। ऐसे में आत्महत्या के कारणों का पता लगाने के लिए मोबाइल फोन की तकनीकी जांच, कॉल डिटेल्स, डिजिटल गतिविधियों और परिजनों के बयानों का विश्लेषण किया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी जांच का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

    बजरिया थाना प्रभारी ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है और सभी संभावित पहलुओं पर जांच की जा रही है। पुलिस फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारणों और परिस्थितियों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

    यह घटना एक बार फिर किशोरावस्था में मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों को समझने की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित करती है। फिलहाल पूरा परिवार गहरे सदमे में है और पुलिस सच्चाई तक पहुंचने के लिए सभी तथ्यों की पड़ताल कर रही है।

  • भोपाल के कलाकार उदय अठरौलिया का बड़ा पर्दे पर दमदार कमबैक, दो फिल्मों में दिखेगा अभिनय का अलग अंदाज

    भोपाल के कलाकार उदय अठरौलिया का बड़ा पर्दे पर दमदार कमबैक, दो फिल्मों में दिखेगा अभिनय का अलग अंदाज


    मध्यप्रदेश। राजधानी भोपाल के रंगमंच से निकलकर मुंबई की फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता उदय अठरौलिया इन दिनों अपनी दो नई फिल्मों को लेकर चर्चा में हैं। वर्षों तक थिएटर से जुड़े रहने के बाद उदय ने फिल्मों और विज्ञापनों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। अब उनकी आगामी फिल्में ‘भड़िया’ और ‘काला हिरण’ दर्शकों के बीच उत्सुकता का विषय बनी हुई हैं।

    उदय अठरौलिया ने हाल ही में फिल्म ‘भड़िया’ की शूटिंग पूरी की है। यह एक इंडिपेंडेंट फिल्म है, जिसकी शूटिंग चंबल के बीहड़ों में की गई है। फिल्म में उदय एक प्रभावशाली और दबंग चरित्र ‘लंबरदार’ की भूमिका निभा रहे हैं, जिसे इलाके में चोरों का दादा माना जाता है। कहानी पुरानी और नई पीढ़ी के बीच टकराव को दर्शाती है, जहां लंबरदार का पोता अपराध की परंपरा को छोड़कर मुंबई में अपनी अलग पहचान बनाने का सपना देखता है। फिल्म में सामाजिक बदलाव, पारिवारिक संघर्ष और बदलती सोच को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

    फिल्म का निर्देशन युवा निर्देशक प्रमोद पाराशर ने किया है। इसमें दीपराज राणा, विक्रम कोचर और अंशुमन झा जैसे प्रतिभाशाली कलाकार भी नजर आएंगे। खास बात यह है कि फिल्म में बुंदेलखंड की प्रसिद्ध ‘राई’ लोकसंस्कृति और स्थानीय जीवनशैली को वास्तविक रूप में दिखाने का प्रयास किया गया है। वर्तमान में फिल्म की डबिंग का काम जारी है और निर्माताओं की योजना इसे अगले वर्ष जनवरी में रिलीज करने की है।

    दूसरी ओर उदय की फिल्म ‘काला हिरण’ भी काफी चर्चा में है। यह फिल्म एक वास्तविक घटना से प्रेरित बताई जा रही है, जिसमें उदय डीएसपी जोशी के किरदार में दिखाई देंगे। उनका चरित्र एक ऐसे ईमानदार पुलिस अधिकारी का है, जो व्यवस्था के दबाव और अपने कर्तव्य के बीच संघर्ष करता नजर आएगा। फिल्म की शूटिंग राजस्थान के जैसलमेर में की गई है, लेकिन फिलहाल प्रोजेक्ट कुछ कानूनी और प्रशासनिक कारणों से चर्चा में है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म के शीर्षक और विषयवस्तु को लेकर अभिनेता सलमान खान की ओर से प्रोडक्शन टीम को कानूनी नोटिस भेजा गया है। बताया जा रहा है कि नोटिस में फिल्म के निर्माण और प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की मांग की गई है। हालांकि इस मामले में अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।

    फिल्मों के अलावा उदय अठरौलिया ने हाल ही में एक प्रमुख ब्रांड के विज्ञापन में भी काम किया है। इस विज्ञापन में आधुनिक जीवनशैली के कारण परिवारों में बढ़ती भावनात्मक दूरी और रिश्तों में आ रहे बदलाव को संवेदनशील तरीके से दिखाया गया है। साथ ही उन्होंने एक ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए भी नई फिल्म साइन की है, जिसका शीर्षक जल्द घोषित किया जाएगा।

    भोपाल से अपने जुड़ाव को याद करते हुए उदय कहते हैं कि रंगमंच ने ही उन्हें अभिनय की बुनियादी सीख दी है। वे जल्द ही एक नई फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में भोपाल आने वाले हैं। पिछले दो दशकों से मुंबई में सक्रिय उदय अठरौलिया को वर्ष 2018 में फिल्मों ‘तितली’ और ‘लक्ष्मी बम’ के लिए अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का सम्मान भी मिल चुका है। अब उनकी आगामी फिल्में दर्शकों के बीच उनके अभिनय के नए आयाम प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं।

  • टेक-ऑफ से ठीक पहले रुकी भोपाल की फ्लाइट, रनवे पर दौड़ते विमान में अचानक लगे ब्रेक

    टेक-ऑफ से ठीक पहले रुकी भोपाल की फ्लाइट, रनवे पर दौड़ते विमान में अचानक लगे ब्रेक


    मध्यप्रदेश । मुंबई से भोपाल आने वाले यात्रियों के लिए मंगलवार का सफर उस समय तनावपूर्ण बन गया, जब इंडिगो की एक फ्लाइट को टेक-ऑफ के अंतिम चरण में अचानक रोकना पड़ा। विमान रनवे पर पूरी रफ्तार से उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था और कुछ ही क्षणों में हवा में उड़ने वाला था, तभी पायलट को सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी का संकेत मिला। सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्होंने तत्काल टेक-ऑफ निरस्त कर विमान को रोक दिया।

    जानकारी के अनुसार, इंडिगो की एयरबस A-321 नियो फ्लाइट ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दोपहर करीब 3:50 बजे भोपाल के लिए उड़ान भरने की प्रक्रिया शुरू की थी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल से अनुमति मिलने के बाद विमान रनवे पर तेजी से आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान कॉकपिट में तकनीकी चेतावनी संकेत दिखाई दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पायलट ने तुरंत निर्णय लेते हुए विमान के ब्रेक लगाए और उड़ान रोक दी।

    अचानक हुई इस कार्रवाई से विमान में सवार 221 यात्रियों के बीच कुछ समय के लिए घबराहट का माहौल बन गया। कई यात्रियों ने बताया कि विमान के तेजी से दौड़ते हुए अचानक रुकने का अनुभव काफी तनावपूर्ण था। नियमित हवाई यात्री देवाशीष ने कहा कि उस पल सभी यात्रियों को लगा कि कोई बड़ी समस्या आ गई है। हालांकि, चालक दल ने संयम बनाए रखा और यात्रियों को सुरक्षित रखा।

    टेक-ऑफ निरस्त होने के बाद विमान को रनवे से हटाकर पार्किंग बे में ले जाया गया। यहां इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने विमान की गहन जांच शुरू की। विमान में हज यात्रा से लौट रहे लगभग 25 यात्री भी सवार थे। भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए परिजन और रिश्तेदार बड़ी संख्या में पहुंचे थे, लेकिन फ्लाइट में हुई देरी के कारण उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।

    करीब एक घंटे बाद एयरलाइन की ओर से यात्रियों को तकनीकी जांच और देरी के कारणों की जानकारी दी गई। सभी आवश्यक परीक्षण और सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बाद विमान को दोबारा उड़ान की अनुमति मिली। शाम 6:26 बजे फ्लाइट ने मुंबई से दोबारा उड़ान भरी और रात लगभग 7:40 बजे भोपाल एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की।

    हालांकि एयरलाइन ने तकनीकी खराबी की प्रकृति के बारे में कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि टेक-ऑफ के अंतिम चरण में उड़ान रोकना बेहद दुर्लभ स्थिति होती है। इसके बावजूद यदि पायलट को किसी भी प्रकार का तकनीकी संकेत मिलता है तो सुरक्षा नियमों के तहत टेक-ऑफ रद्द करना ही सबसे सुरक्षित और उचित विकल्प माना जाता है।

    इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विमानन क्षेत्र में सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाता। पायलट की सतर्कता और तकनीकी टीम की तत्परता के चलते सभी यात्री सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच सके।

  • किसानों के अनाज से सजी पीएम मोदी की भव्य रंगोली, 12 साल के कार्यकाल पर भोपाल में विशेष आयोजन

    किसानों के अनाज से सजी पीएम मोदी की भव्य रंगोली, 12 साल के कार्यकाल पर भोपाल में विशेष आयोजन


    मध्यप्रदेश । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने और देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी भोपाल में भाजपा द्वारा एक विशेष और अनूठा आयोजन किया गया। शहर के नीलबड़ स्थित दुर्गा माता मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों के अनाज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशाल और आकर्षक रंगोली बनाई गई, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

    इस आयोजन की पहल भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने की। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन स्थल पर सुबह से ही भाजपा कार्यकर्ताओं, किसानों और स्थानीय नागरिकों की बड़ी संख्या जुटने लगी थी। धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल के बीच प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को याद किया गया।

    कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण किसानों के अनाज से तैयार की गई रंगोली रही। इस रंगोली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया। रंगोली के निर्माण में विभिन्न प्रकार के अनाज का उपयोग किया गया, जो देश के अन्नदाताओं के सम्मान और कृषि क्षेत्र के महत्व को भी प्रदर्शित करता है। उपस्थित लोगों ने इस अनूठी कलाकृति की सराहना करते हुए इसे प्रधानमंत्री और किसानों के बीच मजबूत संबंध का प्रतीक बताया।

    कार्यक्रम के दौरान सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और भाजपा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इसके पश्चात मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और आरती संपन्न हुई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ, दीर्घायु और सफल जीवन की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने देश की प्रगति, समृद्धि और विकास के लिए भी प्रार्थना की।

    विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास, सुशासन और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। उन्होंने बताया कि किसानों द्वारा उपलब्ध कराए गए अनाज से रंगोली बनाकर अन्नदाता वर्ग की भावनाओं को भी सम्मान दिया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रधानमंत्री के कार्यों के प्रति आभार व्यक्त करना और जनभागीदारी के माध्यम से उनके योगदान को याद करना था।

    उधर, भाजपा के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने नेहरू नगर स्थित करुणाधाम आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यहां ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया गया। इस अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी, किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा, जिला अध्यक्ष रविंद्र यति, प्रदेश सह-मीडिया प्रभारी बृजगोपाल लोया सहित अनेक भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

    धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता के संदेश के साथ आयोजित यह कार्यक्रम भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण जनसंपर्क अभियान भी साबित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

  • पार्षद से संसद तक का सफर! महेश केवट बनेंगे राज्यसभा सांसद, केवट-मल्लाह समाज को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व

    पार्षद से संसद तक का सफर! महेश केवट बनेंगे राज्यसभा सांसद, केवट-मल्लाह समाज को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा नाम चर्चा के केंद्र में है, जो अब तक राष्ट्रीय राजनीति से दूर था, लेकिन जल्द ही संसद के उच्च सदन में पहुंच सकता है। निवाड़ी जिले के ऐतिहासिक नगर ओरछा के निवासी महेश केवट का राज्यसभा सांसद बनना लगभग तय माना जा रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की राह काफी आसान हो गई है। यदि कांग्रेस को अदालत से राहत नहीं मिलती, तो महेश केवट मध्य प्रदेश से केवट, मल्लाह, माझी, भोई और रैकवार समाज के पहले राज्यसभा सांसद बनेंगे।

    ओरछा के वार्ड नंबर 12 स्थित हरिशंकरी मोहल्ले में रहने वाले महेश केवट का राजनीतिक सफर बेहद साधारण पृष्ठभूमि से शुरू हुआ। वे वर्ष 2000 से 2005 तक ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहने वाले महेश के परिवार का धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र से भी गहरा जुड़ाव है। उनके परिवार के सदस्य ओरछा के प्रसिद्ध फूलबाग स्थित लाला हरदौल बैठका की वर्षों से सेवा करते आ रहे हैं। उनके छोटे भाई आज भी नियमित रूप से यहां सेवा कार्य करते हैं। महेश स्वयं सीमेंट व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।

    महेश केवट का राजनीतिक सफर हमेशा आसान नहीं रहा। वर्ष 2022 के नगर परिषद चुनाव के दौरान स्थानीय भाजपा नेतृत्व ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाते हुए निष्कासन की कार्रवाई की थी। हालांकि बाद में जब मामले की जांच हुई तो प्रदेश स्तर पर उनके निष्कासन का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद भाजपा संगठन ने वर्ष 2023 में औपचारिक रूप से निष्कासन समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने महेश के राजनीतिक कद को और अधिक चर्चा में ला दिया।

    भाजपा संगठन में हाल ही में हुए बदलावों के बाद पार्टी ने ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई, जो लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे हों लेकिन अब तक बड़े पदों पर न पहुंचे हों। इसी रणनीति के तहत सामाजिक रूप से प्रभावशाली लेकिन राजनीतिक रूप से अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व वाले केवट और निषाद समाज पर फोकस किया गया। महेश केवट को पहले मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया और अब उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने बड़ा सामाजिक संदेश देने की कोशिश की है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महेश केवट का चयन केवल मध्य प्रदेश तक सीमित रणनीति नहीं है। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां निषाद, केवट और मल्लाह समाज की बड़ी राजनीतिक भूमिका है। ओरछा की भौगोलिक स्थिति झांसी और बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण महेश केवट भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश में भी प्रभावी प्रचारक साबित हो सकते हैं।

    मध्य प्रदेश में भी ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड, विंध्य, महाकौशल और नर्मदा क्षेत्र की कई विधानसभा सीटों पर केवट, मल्लाह, कहार, धीमर और निषाद समाज का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में भाजपा का यह दांव आगामी चुनावों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक छोटे नगर के जनप्रतिनिधि से लेकर राज्यसभा सांसद बनने की दहलीज तक पहुंचे महेश केवट की कहानी अब प्रदेश की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व और नए नेतृत्व के उभार का बड़ा उदाहरण बनती नजर आ रही है।