Author: bharati

  • केंद्र का बड़ा प्लान: रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन 5,000 टन तक पहुंचाने की तैयारी

    केंद्र का बड़ा प्लान: रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन 5,000 टन तक पहुंचाने की तैयारी



    नई दिल्ली।  भारत ने रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि देश में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों से बनने वाले स्थायी चुंबकों की घरेलू उत्पादन क्षमता वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 5,000 टन करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम इलेक्ट्रिक व्हीकल, रक्षा और हाई-टेक सेक्टर के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

    क्या बोले Jitendra Singh?

    केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत दुर्लभ खनिजों और लिथियम की खोज में तेजी ला रहा है। सरकार का फोकस न सिर्फ इन खनिजों की खोज पर है, बल्कि इनके प्रोसेसिंग और उपयोग के लिए मजबूत घरेलू इकोसिस्टम तैयार करना भी है।

    मांग तेजी से बढ़ रही, चुनौती भी बड़ी

    सरकार के मुताबिक, इस समय देश में दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबकों की जरूरत करीब 4,000 टन है, जो 2030 तक बढ़कर लगभग 8,000 टन तक पहुंच सकती है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

    नए प्रोजेक्ट्स से मिलेगी रफ्तार

    सरकार ने इस दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं:

    नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) चुंबकों की प्रायोगिक परियोजना शुरू
    विशाखापत्तनम में समैरियम-कोबाल्ट चुंबक प्लांट चालू
    शुरुआती उत्पादन क्षमता 500 टन/वर्ष, जिसे बढ़ाकर 2,000 टन और फिर 5,000 टन करने की योजना

    ये प्रोजेक्ट भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिलाने में मदद करेंगे।

    किन सेक्टरों के लिए जरूरी हैं ये खनिज?

    दुर्लभ पृथ्वी तत्व और लिथियम कई उभरती तकनीकों की रीढ़ माने जाते हैं, जैसे:

    इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
    नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर, विंड)
    इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर
    रक्षा और एयरोस्पेस
    अंतरिक्ष तकनीक

    इनकी मांग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।

    आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

    सरकार का लक्ष्य एक मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाना है, जिससे भारत इन महत्वपूर्ण खनिजों के लिए दूसरे देशों पर कम निर्भर रहे। इसके लिए अलग-अलग मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं और खनन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जा रहा है।

    क्यों है यह रणनीतिक कदम?

    वैश्विक स्तर पर दुर्लभ पृथ्वी खनिजों पर कुछ ही देशों का दबदबा है। ऐसे में भारत का यह कदम न सिर्फ आर्थिक बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी विकास और औद्योगिक क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

  • LIC को झटका: वित्त वर्ष 2022 के लिए इनकम टैक्स विभाग का डिमांड नोटिस

    LIC को झटका: वित्त वर्ष 2022 के लिए इनकम टैक्स विभाग का डिमांड नोटिस


    नई दिल्ली।  देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India (एलआईसी) को इनकम टैक्स विभाग से बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने जानकारी दी है कि उसे वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारी भरकम डिमांड नोटिस मिला है, जिसमें टैक्स और ब्याज मिलाकर कुल रकम 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है।

    कितना है टैक्स डिमांड?

    एलआईसी के मुताबिक Income Tax Department की असेसमेंट यूनिट ने:

    6,146.71 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में
    953.25 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में
    की मांग की है।

    यह डिमांड टैक्स अधिकारियों द्वारा मूल्यांकन के दौरान किए गए कुछ समायोजनों (adjustments) के कारण सामने आई है।

    किन वजहों से बना मामला?

    इनकम टैक्स विभाग ने एलआईसी की कुछ वित्तीय गणनाओं और दावों को स्वीकार नहीं किया। प्रमुख मुद्दे इस प्रकार हैं:

    अंतरिम बोनस को आय (Income) के रूप में शामिल करना
    जीवन सुरक्षा कोष (Life Fund) से हुए नुकसान को आय में जोड़ना
    नेगेटिव रिजर्व को आय मानना
    धारा 80M के तहत दावा की गई कटौतियों को खारिज करना
    TDS जमा करने में देरी से जुड़े ब्याज खर्च को अस्वीकार करना
    इन सभी कारणों से कंपनी पर यह अतिरिक्त टैक्स बोझ डाला गया है।

    एलआईसी ने क्या कहा?

    एलआईसी ने साफ किया है कि वह इस आदेश से सहमत नहीं है और इसे चुनौती देगी। कंपनी जल्द ही आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील दायर करेगी और कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपना पक्ष रखेगी। कंपनी का यह भी कहना है कि इस नोटिस का उसके रोजमर्रा के कारोबार या संचालन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

    निवेशकों के लिए राहत की खबर

    दिलचस्प बात यह रही कि इस बड़े डिमांड नोटिस के बावजूद बाजार में निवेशकों का भरोसा बरकरार दिखा। National Stock Exchange of India पर एलआईसी का शेयर 20.90 रुपये (2.75%) की बढ़त के साथ 779.60 रुपये पर बंद हुआ।

    नियमों के तहत किया खुलासा

    एलआईसी ने यह जानकारी Securities and Exchange Board of India के LODR (लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट) नियमों के तहत शेयर बाजार को दी है। इन नियमों के मुताबिक, सूचीबद्ध कंपनियों को ऐसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों की जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य होता है।

    आगे क्या होगा?

    अब यह मामला अपील प्रक्रिया में जाएगा, जहां एलआईसी और टैक्स विभाग दोनों अपने-अपने तर्क पेश करेंगे। अंतिम फैसला आने में समय लग सकता है, लेकिन यह मामला बीमा सेक्टर और टैक्स कानूनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

  • इजरायल-अमेरिका और ईरान तनाव से महंगा हुआ तेल, नेपाल-बांग्लादेश ने बढ़ाईं कीमतें

    इजरायल-अमेरिका और ईरान तनाव से महंगा हुआ तेल, नेपाल-बांग्लादेश ने बढ़ाईं कीमतें


    नई दिल्ली। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते कई देशों ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं, जबकि कुछ जगहों पर ईंधन की राशनिंग तक शुरू हो गई है।

    नेपाल में पेट्रोल-डीजल महंगा

    नेपाल में नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) ने पेट्रोल, डीजल और केरोसीन की कीमतों में 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नई दरें आधी रात से लागू हो गई हैं।

    पेट्रोल: 184.50 से 187 रुपये/लीटर (कैटेगरी के अनुसार)
    डीजल/केरोसीन: 164.50 से 167 रुपये/लीटर

    एनओसी ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी के कारण घरेलू कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया था।

    बांग्लादेश में जेट फ्यूल 80% महंगा

    बांग्लादेश में हालात और ज्यादा गंभीर हैं। Bangladesh Energy Regulatory Commission ने जेट फ्यूल की कीमतों में करीब 80% की भारी बढ़ोतरी की है।

    घरेलू उड़ानों के लिए: 112.41 टका से बढ़कर 202.29 टका/लीटर
    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए: 0.738 डॉलर से बढ़कर 1.3216 डॉलर/लीटर

    इस बढ़ोतरी का सीधा असर हवाई यात्रा और कार्गो लागत पर पड़ेगा।

    पाकिस्तान और यूरोप भी प्रभावित

    पाकिस्तान में पहले से आर्थिक संकट के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 20-25% तक उछाल दर्ज किया गया है। वहीं जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों में गैस और पेट्रोल के दाम 10-15% तक बढ़ गए हैं।

    थाईलैंड में शुरू हुई राशनिंग

    थाईलैंड में हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि पेट्रोल पंपों पर राशनिंग लागू करनी पड़ी है। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति को सीमित मात्रा में ही ईंधन दिया जा रहा है, ताकि सप्लाई संतुलित बनी रहे।

    क्या है राशनिंग का मतलब?

    जब किसी देश में ईंधन की भारी कमी हो जाती है या कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो सरकार या पेट्रोल पंप यह तय कर देते हैं कि एक व्यक्ति एक बार में कितना तेल खरीद सकता है। इससे सीमित संसाधनों का संतुलित वितरण किया जाता है।

    आगे क्या असर पड़ेगा?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो:

    तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं
    महंगाई में तेजी आएगी
    ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स महंगे होंगे
    आम लोगों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा

    ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण तेल महंगा हो रहा है, जिससे नेपाल, बांग्लादेश समेत कई देशों में ईंधन कीमतें बढ़ीं और कुछ जगह राशनिंग तक शुरू हो गई।

  • वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी ऊर्जा चिंता, जानें कैसे बढ़ाएं गाड़ी का माइलेज, ये हैं आसान उपाय

    वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी ऊर्जा चिंता, जानें कैसे बढ़ाएं गाड़ी का माइलेज, ये हैं आसान उपाय


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल बाजार की अनिश्चितता के बीच ऊर्जा सुरक्षा फिर से चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने संबोधन में कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि मौजूदा हालात लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं और लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

    चुनौतीपूर्ण समय और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर असर

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ईरान-इस्राइल-अमेरिका के बीच तनाव और महामारी के दौर की तुलना की। उन्होंने कहा कि दोनों ही परिस्थितियों में वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई, भले ही वजह अलग रही। उन्होंने स्पष्ट किया, इस युद्ध के कारण, वैश्विक स्तर पर बनी कठिन स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है। हमें हर स्थिति के लिए तैयार और एकजुट रहना होगा। अफवाह फैलाने वालों को सफल नहीं होने देना चाहिए। हालांकि पीएम ने किसी लॉकडाउन की घोषणा नहीं की, लेकिन उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर पावर लॉकडाउन जैसी चर्चाएं बढ़ गईं।

    अन्य देशों में ऊर्जा संकट के कदम

    विशेषज्ञों के अनुसार, कई देशों में ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अलग-अलग उपाय अपनाए जा रहे हैं:-
    श्रीलंका: स्कूल और गैर-जरूरी सरकारी दफ्तरों में छुट्टी
    बांग्लादेश: ऑनलाइन क्लास और तय बिजली कटौती
    पाकिस्तान और फिलीपींस: सरकारी कर्मचारियों के लिए 4-दिन का वर्क वीक
    वियतनाम: रिमोट वर्क को बढ़ावा
    इन उदाहरणों से साफ है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बचत को लेकर चिंता बढ़ रही है।

    भारत में स्थिति और सावधानियां

    विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल भारत में लॉकडाउन जैसी स्थिति नहीं है। फिर भी ईंधन की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में संभावित रुकावट के बीच हर लीटर ईंधन का अधिकतम उपयोग करना जरूरी हो जाता है।

    माइलेज बढ़ाने के आसान तरीके

    ड्राइविंग स्टाइल बदलें: अचानक एक्सीलेरेशन, बार-बार ब्रेक लगाना और तेज लेन बदलना ईंधन ज्यादा खर्च करता है। स्मूद ड्राइविंग से बचत होती है।
    स्थिर स्पीड बनाए रखें: बार-बार स्पीड बदलने से इंजन पर दबाव बढ़ता है। हाईवे पर समान रफ्तार और शहर में ट्रैफिक को समझकर चलना बेहतर माइलेज देता है।
    इंजन आइडलिंग कम करें: लंबे समय तक गाड़ी चालू रखना ईंधन बर्बाद करता है। सिग्नल या इंतजार के दौरान इंजन बंद करना लाभकारी है।
    वाहन की सही देखभाल: सही टायर प्रेशर, साफ एयर फिल्टर और समय पर इंजन ऑयल बदलना ईंधन की खपत कम करता है।
    वजन और ट्रिप प्लानिंग: गाड़ी में अनावश्यक वजन हटाएं, एक ही ट्रिप में कई काम निपटाएं और भीड़भाड़ वाले समय से बचें।

    सावधान और स्मार्ट ड्राइविंग की जरूरत

    भले ही वैश्विक हालात ईंधन की कीमत और उपलब्धता को प्रभावित करें, सही ड्राइविंग आदतें अपनाकर खर्च को नियंत्रित किया जा सकता है। छोटे-छोटे बदलाव से न सिर्फ माइलेज बढ़ेगा, बल्कि आपकी जेब पर भी कम असर पड़ेगा।

  • रिपोर्ट का दावा: भारत में इस साल हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी रहेगी स्थिर

    रिपोर्ट का दावा: भारत में इस साल हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी रहेगी स्थिर


    नई दिल्ली। भारत में घर खरीदने का सपना देखने वालों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। CBRE South Asia Pvt. Ltd. की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में देश में हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी यानी घर खरीदने की क्षमता स्थिर रहने की संभावना है। बढ़ती आय और सरकार की सहायक नीतियों के चलते प्रॉपर्टी की ऊंची कीमतों का असर काफी हद तक संतुलित हो सकता है, जिससे मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    आय बढ़ेगी, EMI का बोझ होगा कम

    रिपोर्ट ‘इंडिया रेसिडेंशियल मार्केट आउटलुक 2026’ में कहा गया है कि 2021 के बाद पहली बार ऐसा होगा जब लोगों की आय प्रॉपर्टी की कीमतों से तेज गति से बढ़ेगी। इसका सीधा फायदा होम बायर्स को मिलेगा क्योंकि उनकी EMI का बोझ कम होगा और वे आसानी से घर खरीदने का फैसला ले सकेंगे।

    बड़े शहरों में दिखेगा असर

    इस रिपोर्ट में मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों का विश्लेषण किया गया है। 2021 से 2024 के बीच इन शहरों में प्रॉपर्टी कीमतों और ब्याज दरों में तेजी के कारण अफोर्डेबिलिटी पर दबाव बढ़ा था, लेकिन अब हालात सुधरने की उम्मीद जताई गई है।

    बदल रहा है रियल एस्टेट का ट्रेंड

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कम होती ब्याज दरें, धीमी कीमत वृद्धि और बढ़ती आय—ये तीनों मिलकर हाउसिंग डिमांड को मजबूत बनाएंगे। 2026 से 2028 के बीच EMI और आय का अनुपात स्थिर रहने से बाजार में संतुलन बनेगा और खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा।

    प्रीमियम और लग्जरी घरों की बढ़ी मांग

    रिपोर्ट में एक और दिलचस्प ट्रेंड सामने आया है-लोग अब प्रीमियम और लग्जरी घरों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। कुल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी करीब 27% रही, जबकि इस सेगमेंट में बिक्री सालाना आधार पर 30% से ज्यादा बढ़ी है। यह संकेत देता है कि खरीदार अब बेहतर सुविधाओं और लाइफस्टाइल को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    2030 तक और मजबूत होगा सेक्टर

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2030 तक अपर-मिडिल इनकम देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को और मजबूती मिलेगी। बढ़ती आय, शहरीकरण और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण हाउसिंग सेक्टर में लंबे समय तक ग्रोथ बनी रहने की संभावना है।

    निवेश और खरीदारों के लिए सुनहरा मौका

    कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियां घर खरीदने वालों और निवेशकों दोनों के लिए अनुकूल होती दिख रही हैं। अगर ब्याज दरें नियंत्रित रहती हैं और आय में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में घर खरीदना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान हो सकता है।

  • यूपी में ISI के बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा, विदेशों से युवाओं को फंसाकर कराई जा रही संदिग्ध गतिविधियां

    यूपी में ISI के बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा, विदेशों से युवाओं को फंसाकर कराई जा रही संदिग्ध गतिविधियां


    नई दिल्ली। गाजियाबाद पुलिस द्वारा जासूसी के आरोप में पकड़े गए शामली के बुटराड़ा गांव निवासी समीर समेत अन्य आरोपियों से पूछताछ में ISI के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क नेपाल, दुबई, अमेरिका और बांग्लादेश से संचालित हो रहा था, जहां से एजेंट भारत के युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे थे।

    व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप के जरिए नेटवर्क का संचालन

    पुलिस के मुताबिक समीर को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और ISI हैंडलर सरफराज उर्फ सरदार के नाम से बनाए गए व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया था। इन ग्रुपों के जरिए देश-विदेश के युवाओं को जोड़कर उन्हें अलग-अलग काम सौंपे जाते थे। दुबई में बैठे एजेंटों को शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, दिल्ली, सहारनपुर, बिजनौर, हरियाणा और बिहार के युवाओं को जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी।

    हर तीसरे दिन जूम मीटिंग से समीक्षा

    जांच में सामने आया है कि गैंगस्टरों के नाम पर ग्रुप इसलिए बनाए गए ताकि पुलिस को शक न हो। इन ग्रुपों से जुड़े युवाओं को धार्मिक स्थलों और सेना से जुड़े इलाकों की फोटो और वीडियो जुटाने के निर्देश दिए जाते थे। हर तीसरे दिन जूम मीटिंग के जरिए इन गतिविधियों की समीक्षा की जाती थी, जिसमें विदेशों में बैठे सरगना शामिल होते थे।

    20 से ज्यादा एजेंट रडार पर, 250 लोग जांच के दायरे में

    जांच एजेंसियों ने दुबई और नेपाल के 20 से अधिक एजेंटों को चिन्हित किया है। एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक इन ग्रुपों से जुड़े 250 से ज्यादा लोग पुलिस के रडार पर हैं। गाजियाबाद पुलिस अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है और कई अहम सुराग हाथ लगे हैं।

    धार्मिक सामग्री से किया जाता था ब्रेनवॉश

    जांच में यह भी सामने आया है कि युवाओं को प्रभावित करने के लिए ग्रुपों में तबलीगी जमात और अन्य धार्मिक गतिविधियों से जुड़े वीडियो साझा किए जाते थे। साथ ही उर्दू में लिखे दस्तावेज भेजकर उनका ब्रेनवॉश किया जाता था।

    पहचान छिपाने के लिए बदले जा रहे नाम
    पुलिस के अनुसार ISI हैंडलर अपनी पहचान छिपाने के लिए हिंदू नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक व्हाट्सएप ग्रुप सरदार नाम से चलाया जा रहा था, जिसमें सरफराज ने अपना नाम बदल लिया था। कुछ सदस्य ऑनलाइन मीटिंग के दौरान माथे पर टीका लगाकर भी लोगों को भ्रमित करते थे।

    तीन किश्तों में मिले पैसे

    जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि समीर को गिरोह की ओर से तीन बार में कुल 5 हजार रुपये दिए गए थे। पहली और दूसरी बार 1500-1500 रुपये, जबकि तीसरी बार 2000 रुपये मिले। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह रकम कहां से और किस माध्यम से भेजी गई। जानकारी के अनुसार गिरफ्तार मीरा ने भी समीर को पैसे दिए थे। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

  • गुजरात की ताकत पेस अटैक, लेकिन मिडिल ऑर्डर बना चिंता-क्या मिलेगा दूसरा खिताब?

    गुजरात की ताकत पेस अटैक, लेकिन मिडिल ऑर्डर बना चिंता-क्या मिलेगा दूसरा खिताब?


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में गुजरात टाइटंस को अपने दूसरे खिताब की तलाश होगी। शुभमन गिल की कप्तानी में टीम का पेस अटैक इस बार काफी दमदार दिखाई दे रहा है। हालांकि, गुजरात का मध्यक्रम जरूर उनके लिए चिंता का विषय बन सकता है।

    कप्तान शुभमन गिल और साई सुदर्शन गुजरात की तरफ से एक बार फिर पारी का आगाज करते हुए दिखाई देंगे। दोनों का प्रदर्शन पिछले सीजन भी लाजवाब रहा था। वहीं, आईपीएल 2026 में जोस बटलर से टीम को दमदार प्रदर्शन की उम्मीद होगी। हालांकि, बटलर की हालिया फॉर्म बिल्कुल भी अच्छी नहीं है। टी20 विश्व कप 2026 में बटलर रनों के लिए संघर्ष करते नजर आए थे। शेरफेन रदरफोर्ड के जाने से नंबर चार की पोजीशन भी खाली हो गई है।

    गुजरात ने ऑक्शन में ग्लेन फिलिप्स और टॉम बैंटन को खरीदा है। हालांकि, इन दोनों का रिकॉर्ड आईपीएल में कुछ खास नहीं रहा है। फिलिप्स ने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में जरूर अच्छा प्रदर्शन किया था। टीम के मिडिल ऑर्डर में बिखरती हुई पारी को संभालने वाला कोई भरोसेमंद बल्लेबाज नजर नहीं आता है। निचले क्रम में टीम के पास शाहरुख खान और राहुल तेवतिया के रूप में दो अच्छे फिनिशर मौजूद हैं। इसके साथ ही जेसन होल्डर के आने से टीम का संतुलन बेहतर हुआ है। होल्डर बल्ले और गेंद दोनों से अहम योगदान दे सकते हैं।

    गुजरात की सबसे बड़ी ताकत इस सीजन उनकी तेज गेंदबाजी बन सकती है। टीम के पास कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और ईशांत शर्मा के रूप में दमदार गेंदबाज मौजूद हैं। कृष्णा आईपीएल 2025 में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे थे। वहीं, सिराज आगामी सीजन में टीम के लिए ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं। लुक वुड और युवा भारतीय तेज गेंदबाज अशोक शर्मा भी अच्छे विकल्प के तौर पर मौजूद हैं। हालांकि, पिछले सीजन राशिद खान की फॉर्म भी कुछ खास नहीं रही थी। राशिद का फॉर्म में रहना गुजरात के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होगा।

  • खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' आदिवासी खिलाड़ियों के लिए बेहतरीन मंच, पीएम मोदी को धन्यवाद: दिलीप तिर्की

    खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' आदिवासी खिलाड़ियों के लिए बेहतरीन मंच, पीएम मोदी को धन्यवाद: दिलीप तिर्की


    नई दिल्ली। ‘छत्तीसगढ़ में बुधवार से ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ (केआईटीजी) का आगाज हो गया है। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने केआईटीजी को आदिवासी समुदाय के खिलाड़ियों को प्रेरित करने का एक बेहतरीन मंच बताया है।

    हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और पूर्व ओलंपियन दिलीप तिर्की ने ‘आईएएनएस’ से कहा, “छत्तीसगढ़ में पहली बार खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स का आयोजन हो रहा है, जिसके लिए मैं छत्तीसगढ़ सरकार का धन्यवाद देना चाहता हूं। इन आदिवासी खिलाड़ियों के पास प्रतिभा है। इनके पास अपनी प्रतिभा दिखाने का शानदार मंच है। साई (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की सेलेक्शन कमेटी यहां आ रही है, जो श्रेष्ठ खिलाड़ियों को सेलेक्ट करेगी। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए धन्यवाद देना चाहूंगा, जो चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा आदिवासी बच्चे खेलों में आगे बढ़ें। ये बच्चे ओलंपिक 2036 में खेलें। इस सोच के साथ खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स का आयोजन किया जा रहा है। इन खेलों से आदिवासी बच्चों में आत्मविश्वास जागेगा।”

    उन्होंने कहा, “स्पोर्ट्स हमारे समाज को बेहतर बनाने में मदद करता है। हमारा यूथ कई बार मुख्यधारा से हट जाता है। कई बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते, वह राह भटक जाते हैं, लेकिन खेल एक ऐसी गतिविधि है, जिसके जरिए उन्हें आगे बढ़ाया जा सकता है। आदिवासी खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स कोटा के तहत नौकरी भी मिली है। स्पोर्ट्स ने आदिवासी बच्चों को आगे बढ़ने में मदद की है।”

    खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 9 खेलों में हिस्सा ले रहे हैं। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, भारोत्तोलन और कुश्ती में पदक दिए जाएंगे। प्रदर्शनी खेलों में मल्लखंभ और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेल शामिल होंगे। इस प्रतियोगिता में लगभग 3,800 प्रतिभागियों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। यह आयोजन 3 अप्रैल को समाप्त होगा। ये खेल तीन शहरों- रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में आयोजित किए जाएंगे।

    मेजबान छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और असम का इन खेलों में सबसे बड़ा प्रतिनिधित्व होगा। इनमें से प्रत्येक राज्य के 100 से अधिक एथलीट हिस्सा लेंगे। पुरुष और महिला एथलीट्स का अनुपात लगभग बराबर होगा।

    खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में कुल 106 गोल्ड मेडल दिए जाएंगे। सबसे ज्यादा 34 मेडल एथलेटिक्स में होंगे। तैराकी (24), कुश्ती (18), भारोत्तोलन (16) और तीरंदाजी (10) में भी दो अंकों में गोल्ड मेडल दिए जाएंगे। हॉकी और फुटबॉल दो टीम खेल हैं, और ये दोनों ही रायपुर में खेले जाएंगे। एथलेटिक्स इवेंट जगदलपुर में होंगे, जबकि सरगुजा में कुश्ती प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

  • SA vs NZ: रन कम, विकेट ज्यादा! जानें किस गेंदबाज ने मचाया धमाल

    SA vs NZ: रन कम, विकेट ज्यादा! जानें किस गेंदबाज ने मचाया धमाल


    नई दिल्ली। साउथ अफ्रीका ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 मुकाबलों की टी20 सीरीज 3-2 से अपने नाम की। मेहमान साउथ अफ्रीकी टीम ने सीरीज का पहला मैच 7 विकेट से अपने नाम किया, जिसके बाद अगले मैच को 68 रन से गंवा दिया। इसके बाद कीवी टीम ने तीसरे टी20 मैच को 8 विकेट से जीतकर सीरीज में 2-1 से लीड बना ली थी।

    यहां से साउथ अफ्रीका ने चौथा मैच 19 रन से अपने नाम करते हुए सीरीज को रोमांचक बना दिया था। अंतिम मुकाबले में 33 रन से जीत दर्ज करते हुए साउथ अफ्रीका ने सीरीज जीत ली।

    इस पूरी सीरीज में सिर्फ 2 ही बल्लेबाज 100 रन जुटा सके। कॉनर एस्टरहुइजन ने पांच मुकाबलों में 50 की औसत के साथ 200 रन बनाए। इस दौरान दो अर्धशतक भी लगाए। साउथ अफ्रीकी बल्लेबाज ने इस सीरीज मे 45*, 8, 15, 57 और 75 रन की पारियां खेलीं।

    इनके अलावा, न्यूजीलैंड के डेवोन कॉन्वे इस सीरीज में 100 रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे, जिन्होंने 3 मुकाबलों में 33.33 की औसत के साथ 100 रन बनाए। कॉन्वे ने सीरीज के पहले मैच में सिर्फ 1 ही रन बनाया। इसके बाद अगले मुकाबले में 60 रन की पारी खेली। सीरीज के तीसरे मैच में कॉन्वे 39 रन बनाकर आउट हुए थे।

    इस सीरीज के शीर्ष गेंदबाजों की बात करें, तो साउथ अफ्रीकी पेसर गेराल्ड कोएत्जी ने 5 मुकबलों में 18.5 ओवर गेंदबाजी की, जिसमें 117 रन देकर 8 विकेट हासिल किए। इस मामले में कीवी गेंदबाज बेन सियर्स संयुक्त रूप से नंबर-1 रहे, जिन्होंने 5 मुकाबलों में 18 ओवर गेंदबाजी करते हुए 116 रन देकर 8 विकेट हासिल किए।

    इस लिस्ट में साउथ अफ्रीका के ऑटनील बार्टमैन और केशव महाराज संयुक्त रूप से दूसरे पायदान पर हैं। बार्टमैन ने 4 मुकाबलों में 16.57 की औसत के साथ 7 विकेट निकाले, जबकि केशव ने 5 मुकाबलों में 22.43 की औसत के सात 7 विकेट अपने नाम किए। मिचेल सेंटनर, वियान मुल्डर और काइल जेमीसन ने सीरीज में 5-5 विकेट हासिल किए।

  • हरमनप्रीत कौर का बड़ा बयान: इस साल टीम इंडिया ने जीतीं सभी ट्रॉफियां

    हरमनप्रीत कौर का बड़ा बयान: इस साल टीम इंडिया ने जीतीं सभी ट्रॉफियां


    नई दिल्ली। भारत को बतौर कप्तान वनडे वर्ल्ड कप 2025 का खिताब जिताने वाली कप्तान हरमनप्रीत कौर ने महिला क्रिकेट की पहचान और लोकप्रियता में आए बदलाव को जीना ‘एक शानदार एहसास’ बताया है। कप्तान और उनकी टीम को पता था कि देश में बदलाव तभी आएगा, जब उनके नाम कोई बड़ी ट्रॉफी होगी। इसके साथ ही उन्होंने टीम इंडिया की सफलता का श्रेय भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को दिया है।

    भारत ने साल 2026 में हुए दोनों आईसीसी इवेंट्स अपने नाम किए हैं। कौर ने सभी फॉर्मेट में भारत के दबदबे का श्रेय भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को देते हुए कहा, “इस साल, हमने अब तक सभी ट्रॉफियां जीती हैं। यह दिखाता है कि बीसीसीआई क्रिकेट के सभी फॉर्मेट को हर स्टेज पर बेहतर बनाने के लिए कितनी मेहनत कर रहा है। मुझे लगता है कि उनकी मेहनत रंग ला रही है। हमारी सभी टीमों ने अच्छा प्रदर्शन किया है और सभी टीमों ने आईसीसी टाइटल जीते हैं।”

    बुधवार को नई दिल्ली के द्वारका के ओमेक्स स्टेडियम में हरमनप्रीत कौर के सम्मान में स्टैंड का नामकरण हुआ। इस दौरान हरमनप्रीत ने ‘आईएएनएस’ से कहा, “जाहिर है, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। हम सभी जानते थे कि जब वर्ल्ड कप जीतेंगे, तो चीजें बदल जाएंगी। इसलिए, उस बदलाव को महसूस करना और उस बदलाव को जीने का मौका मिलना एक शानदार एहसास है।”

    ओमेक्स स्टेट स्टेडियम के नॉर्थ पवेलियन सेक्शन में 1,500 से ज्यादा सीटों वाले हिस्से का नाम ‘हरमनप्रीत कौर स्टैंड’ रखने का मकसद अधिक से अधिक महिला दर्शकों को मैच देखने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह देश का पहला खास ‘पिंक स्टैंड’ भी होगा, जो 2027 के आखिर में स्टेडियम खुलने पर पूरी तरह से तैयार हो जाएगा।

    भारतीय कप्तान ने कहा, “मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। दुनिया में इस तरह का विचार लाना भी अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है। आजकल हम लड़कियों के खेल-कूद में हिस्सा लेने के बारे में तो खूब बातें करते हैं, लेकिन हमने कभी यह नहीं सोचा कि जो लोग मैच देखने आते हैं, उनके लिए चीजें कैसी होनी चाहिए। इसलिए, उन्हें भी ध्यान में रखना और उन्हें भी उतनी ही अहमियत देना बहुत जरूरी है। मुझे लगता है कि लड़कियों को इस स्टैंड में आकर अपनी पसंदीदा टीम का हौसला बढ़ाते देखना बहुत शानदार होगा। यह एक बहुत अच्छी पहल है।”

    दाएं हाथ की बल्लेबाज ने महिला क्रिकेट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के महत्व पर भी जोर दिया, जिसमें स्टेडियम, रेजिडेंशियल अकादमियां और ट्रेनिंग की सुविधाएं शामिल हैं, ताकि अगली पीढ़ी की महिला क्रिकेटर्स के लिए रास्ता आसान हो सके।

    उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह उनके लिए बहुत अच्छा होगा, क्योंकि उन्हें वे मुश्किल दिन नहीं देखने पड़ेंगे। हमसे पहले हमारे सीनियर्स ने वे दिन देखे थे और हमने भी थोड़े-बहुत देखे थे। तो, अब मुझे लगता है कि ओमेक्स जैसे लोग, वे सच में इस बात का ध्यान रख रहे हैं, ताकि बच्चों के लिए एक अच्छा स्टेडियम बन सके।