Author: bharati

  • भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सरल उपाय, सावन में रोज शिवलिंग पर अर्पित करें यह पवित्र वस्तु

    भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सरल उपाय, सावन में रोज शिवलिंग पर अर्पित करें यह पवित्र वस्तु


    नई दिल्ली। सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूरे महीने में श्रद्धा और नियमपूर्वक महादेव की पूजा करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर हो सकती हैं और सुख समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इस वर्ष सावन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा और इस दौरान देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष का पान भगवान शिव ने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए किया था। विष की तीव्रता को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग पर जल अर्पित करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    सावन के प्रत्येक सोमवार का व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि किसी कारणवश व्रत रखना संभव न हो तो प्रतिदिन भगवान शिव के मंदिर जाकर शिवलिंग पर एक लोटा स्वच्छ जल और बेलपत्र अवश्य अर्पित करना चाहिए। बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और आस्था के साथ बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यदि जल के स्थान पर दूध से अभिषेक करना चाहें तो किया जा सकता है लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार दूध चढ़ाने के लिए तांबे के पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए।

    जल या दूध अर्पित करने के बाद शिव पंचाक्षर मंत्र अथवा ओम नमः शिवाय मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे मन एकाग्र होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके अलावा सावन में भगवान शिव का चंदन दही शहद घी और पंचामृत से अभिषेक करने की भी परंपरा है। धतूरा भांग आक के फूल और भस्म भी भगवान शिव को अर्पित किए जाते हैं जिन्हें उनकी प्रिय सामग्री माना गया है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना चातुर्मास के अंतर्गत आता है और इस अवधि में भगवान शिव की विशेष आराधना का महत्व बढ़ जाता है। जिन लोगों के विवाह में बाधा आ रही हो स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हों आयु को लेकर चिंता हो या कुंडली में ग्रह दोष हों उन्हें विशेष रूप से इस महीने शिव पूजा करने की सलाह दी जाती है। कई लोग इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप और रुद्राभिषेक भी कराते हैं।

    सावन में पूजा के साथ साथ सात्विक जीवनशैली अपनाने पर भी विशेष जोर दिया जाता है। इस दौरान तामसिक भोजन से बचने और शुद्ध सात्विक आहार ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। पत्तेदार सब्जियों का सेवन सीमित रखने और भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाने की परंपरा भी बताई जाती है। नियमित रूप से गुनगुना पानी पीना और स्वच्छता का ध्यान रखना भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्ची श्रद्धा सादगी और भक्ति के साथ की गई शिव आराधना सबसे अधिक फलदायी मानी जाती है। इसलिए सावन के इस पावन महीने में यदि नियमित रूप से भगवान शिव का स्मरण किया जाए और शिवलिंग पर जल तथा बेलपत्र अर्पित किए जाएं तो जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है। हालांकि यह सभी बातें धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं और इन्हें श्रद्धा के भाव से ही देखा जाना चाहिए।

  • 15 अगस्त से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट, 2 से 16 अगस्त तक ड्रोन और हॉट एयर बैलून उड़ाने पर प्रतिबंध

    15 अगस्त से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट, 2 से 16 अगस्त तक ड्रोन और हॉट एयर बैलून उड़ाने पर प्रतिबंध


    नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस 2026 के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने 2 अगस्त से 16 अगस्त तक राजधानी में ड्रोन सहित सभी छोटे हवाई प्लेटफॉर्म के उड़ान संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है।

    पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। इसके अनुसार प्रतिबंध अवधि के दौरान ड्रोन (UAV/UAS), क्वाडकॉप्टर, पैराग्लाइडर, पैरामोटर, हैंग ग्लाइडर, माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट, रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (RPA), हॉट एयर बैलून, छोटे पावर्ड एयरक्राफ्ट तथा विमान से पैरा जंपिंग जैसी सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी में आशंका जताई गई है कि असामाजिक या आतंकवादी तत्व इन हवाई माध्यमों का इस्तेमाल कर आम नागरिकों, वीआईपी और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए एहतियातन यह फैसला लिया गया है।


    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह प्रतिबंध 2 अगस्त से लागू होकर 16 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगा, ताकि स्वतंत्रता दिवस समारोह शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराया जा सके।

  • सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत का दमदार पंच, लवलीना सहित 10 मुक्केबाज पहुंचे फाइनल

    सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत का दमदार पंच, लवलीना सहित 10 मुक्केबाज पहुंचे फाइनल


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। ग्लासगो में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबलों में भारत के दस मुक्केबाजों ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराकर फाइनल में जगह बनाई है। अब पूरा देश इन खिलाड़ियों से स्वर्ण पदकों की उम्मीद लगाए बैठा है। जिस आत्मविश्वास और आक्रामक अंदाज के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने अपने मुकाबले जीते हैं उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि टीम इस बार केवल पदक जीतने नहीं बल्कि बॉक्सिंग में अपना दबदबा स्थापित करने उतरी है।

    महिलाओं की 75 किलोग्राम स्पर्धा में ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने एक बार फिर अपने अनुभव और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने तुवालू की प्रतिद्वंद्वी को एकतरफा मुकाबले में 5-0 से हराते हुए फाइनल में प्रवेश किया। मुकाबले के पहले राउंड से ही लवलीना ने अपने लंबे रीच बेहतरीन फुटवर्क और सटीक पंचों के दम पर विरोधी पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा। उनकी जीत ने भारत की स्वर्ण पदक की उम्मीदों को और मजबूत कर दिया।

    विश्व चैंपियन जैस्मिन लेंबोरिया ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 57 किलोग्राम स्पर्धा में अपनी प्रतिद्वंद्वी को लगातार दबाव में रखा। मुकाबले के दौरान विरोधी खिलाड़ी को कई बार स्टैंडिंग काउंट मिला जिसके बाद रेफरी ने मुकाबला रोकते हुए जैस्मिन को विजेता घोषित कर दिया। उनकी दमदार जीत ने भारतीय टीम का मनोबल और ऊंचा कर दिया।

    महिलाओं की 70 किलोग्राम स्पर्धा में अरुंधति चौधरी ने दिन का सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए गत चैंपियन को हराकर फाइनल में जगह बनाई। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और अपने शानदार पंचों से विरोधी को संभलने का मौका नहीं दिया। इस जीत ने साबित कर दिया कि भारतीय महिला मुक्केबाज अब दुनिया की किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    प्रीति पवार साक्षी और प्रिया घणघस ने भी अपने मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल का टिकट पक्का किया। इन तीनों खिलाड़ियों ने एकतरफा जीत दर्ज कर यह दिखाया कि भारतीय महिला बॉक्सिंग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है और भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करती रहेगी।

    पुरुष वर्ग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। जादुमणि सिंह सचिन सिवाच अंकुश पंघाल और नरेंद्र बरवाल ने अपने अपने मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाई। इन सभी खिलाड़ियों ने तकनीक आत्मविश्वास और आक्रामक खेल का बेहतरीन प्रदर्शन किया। खासकर सुपर हैवीवेट वर्ग में नरेंद्र बरवाल की जीत ने दर्शकों को बेहद प्रभावित किया और भारत के लिए एक और संभावित स्वर्ण पदक की उम्मीद जगा दी।

    भारतीय मुक्केबाजों का यह प्रदर्शन केवल पदकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह देश में बॉक्सिंग के लगातार मजबूत होते स्तर का भी प्रमाण है। पिछले कुछ वर्षों में खिलाड़ियों ने विश्व स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया है और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उनका दबदबा साफ दिखाई दे रहा है। यदि फाइनल में भी यही लय बरकरार रही तो भारत के खाते में कई स्वर्ण पदक आ सकते हैं और यह अभियान भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार अभियानों में शामिल हो सकता है।

  • मानसून में बच्चों की सेहत का रखें खास ध्यान, सही खानपान और साफ-सफाई से रहें सर्दी-खांसी से सुरक्षित

    मानसून में बच्चों की सेहत का रखें खास ध्यान, सही खानपान और साफ-सफाई से रहें सर्दी-खांसी से सुरक्षित


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है वहीं यह बच्चों की सेहत के लिए कई चुनौतियां भी साथ लाता है। इस मौसम में तापमान और नमी में लगातार बदलाव होने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि सर्दी जुकाम खांसी बुखार वायरल संक्रमण और गले की परेशानी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। छोटे बच्चों की इम्यूनिटी पूरी तरह विकसित नहीं होती इसलिए उन्हें विशेष देखभाल और सही दिनचर्या की जरूरत होती है।

    मानसून के दौरान बच्चों को भीगने से बचाना सबसे जरूरी है। यदि बच्चा बारिश में भीग जाए तो घर पहुंचते ही उसके गीले कपड़े बदल दें और शरीर को अच्छी तरह सुखाकर साफ और सूखे कपड़े पहनाएं। लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से शरीर का तापमान कम हो सकता है जिससे सर्दी और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

    इस मौसम में बच्चों के खानपान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। ताजा और घर का बना पौष्टिक भोजन ही खिलाएं। मौसमी फल हरी सब्जियां दाल दूध दही और प्रोटीन से भरपूर आहार बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत बनाने में मदद करते हैं। बहुत ज्यादा ठंडी चीजें आइसक्रीम कोल्ड ड्रिंक या बाहर का खुला और तला हुआ भोजन देने से बचें क्योंकि इससे गले में संक्रमण और पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

    बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना भी जरूरी है। कई बार बारिश के मौसम में प्यास कम लगती है लेकिन शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद आवश्यक होता है। हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ साफ पानी ही पिलाएं ताकि पानी से फैलने वाली बीमारियों का खतरा कम हो सके।

    साफ सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। बच्चों को बाहर से आने के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने की आदत डालें। खाने से पहले और शौचालय के बाद हाथ धोना संक्रमण से बचाव का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है। उनके खिलौनों कपड़ों और आसपास के वातावरण को भी नियमित रूप से साफ रखें।

    यदि मौसम ठंडा हो तो बच्चों को हल्के लेकिन आरामदायक गर्म कपड़े पहनाएं। रात में सोते समय शरीर ढका रहे इसका ध्यान रखें। कमरे में नमी ज्यादा होने पर उचित वेंटिलेशन बनाए रखें ताकि फफूंद और बैक्टीरिया पनपने का खतरा कम हो।

    बच्चों की पर्याप्त नींद भी उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है। समय पर सोना और पर्याप्त आराम करना शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है। साथ ही हल्की शारीरिक गतिविधियां और घर के अंदर खेलने के अवसर भी बच्चों को सक्रिय और स्वस्थ बनाए रखते हैं।

    अगर बच्चे को लगातार बुखार तेज खांसी सांस लेने में तकलीफ या बार बार उल्टी जैसी परेशानी हो तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    बरसात का मौसम सावधानी और सही देखभाल का मौसम है। यदि माता पिता बच्चों के खानपान साफ सफाई कपड़ों और दिनचर्या पर थोड़ा अतिरिक्त ध्यान दें तो सर्दी जुकाम और वायरल संक्रमण जैसी अधिकांश मौसमी बीमारियों से आसानी से बचाव किया जा सकता है। छोटी छोटी आदतें ही बच्चों को पूरे मानसून में स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने का सबसे बड़ा आधार बनती हैं।

  • सावन 2026 में चमकेगी इन 5 राशियों की किस्मत, भोलेनाथ की कृपा से मिलेंगे सफलता और धन के योग

    सावन 2026 में चमकेगी इन 5 राशियों की किस्मत, भोलेनाथ की कृपा से मिलेंगे सफलता और धन के योग


    नई दिल्ली। भगवान शिव को समर्पित सावन का पवित्र महीना आध्यात्मिक ऊर्जा और शुभ संयोगों से भरपूर माना जाता है। इस वर्ष सावन 2026 केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान कई प्रमुख ग्रह अपनी विशेष स्थिति में रहेंगे जिनका प्रभाव सभी बारह राशियों पर पड़ेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार शनि की वक्री चाल देवगुरु बृहस्पति का शुभ प्रभाव और बुध के उदय जैसे योग कुछ राशियों के लिए विशेष लाभ लेकर आए हैं। माना जा रहा है कि इस पूरे सावन में पांच राशियों के जातकों पर भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा बनी रहेगी और उनके जीवन में सुख समृद्धि तथा सफलता के नए द्वार खुल सकते हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह सावन नई शुरुआत का संकेत दे रहा है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना बनेगी। नौकरी करने वाले लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और कार्यक्षेत्र में उनकी नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी। व्यवसाय करने वालों को भी नए अवसर मिल सकते हैं जिससे आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है। भगवान शिव की आराधना करने से आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता में भी वृद्धि होने के संकेत हैं।

    कर्क राशि के लोगों के लिए यह महीना राहत और प्रगति दोनों लेकर आ सकता है। यदि पिछले कुछ समय से आर्थिक या पारिवारिक परेशानियां चल रही थीं तो उनमें सुधार के योग बन रहे हैं। व्यापार से जुड़े लोगों को विस्तार के नए अवसर मिल सकते हैं और परिवार में सुख शांति का वातावरण बना रहेगा। धन संबंधी मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना भी दिखाई दे रही है।

    सिंह राशि के जातकों के लिए सावन आत्मविश्वास और उपलब्धियों का महीना साबित हो सकता है। करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। यदि कोई नया प्रोजेक्ट या व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं तो समय अनुकूल माना जा रहा है। मेहनत का उचित फल मिलने से सम्मान और प्रतिष्ठा में भी वृद्धि हो सकती है।

    धनु राशि वालों के लिए यह महीना भाग्य के नए द्वार खोलने वाला माना जा रहा है। अचानक धन लाभ के अवसर बन सकते हैं और लंबे समय से रुके हुए आर्थिक कार्य पूरे हो सकते हैं। नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को अच्छी सफलता मिलने के संकेत हैं। परिवार में कोई शुभ समाचार मिलने से खुशी का माहौल रहेगा और मानसिक संतोष भी प्राप्त होगा।

    मीन राशि के जातकों के लिए भी सावन शुभ परिणाम देने वाला माना गया है। व्यापार में नए साझेदार मिलने से लाभ के अवसर बढ़ सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ पारिवारिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बना रहेगा। यदि किसी नए निवेश या विस्तार की योजना है तो सोच समझकर आगे बढ़ने पर अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। भगवान शिव की पूजा और नियमित जलाभिषेक करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा अर्चना रुद्राभिषेक महामृत्युंजय मंत्र का जाप और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। हालांकि ज्योतिषीय भविष्यवाणियां सामान्य मान्यताओं पर आधारित होती हैं और इन्हें निश्चित परिणाम नहीं माना जाना चाहिए। जीवन में सफलता के लिए कर्म पर विश्वास और सकारात्मक सोच सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि श्रद्धा और विश्वास के साथ महादेव की आराधना की जाए तो सावन का यह पावन महीना आध्यात्मिक और मानसिक रूप से भी जीवन में नई ऊर्जा भर सकता है।

  • फुटबॉल इतिहास का स्वर्णिम अध्याय हुआ खत्म, फ्रेंको बारेसी के निधन पर दुनिया भर में शोक

    फुटबॉल इतिहास का स्वर्णिम अध्याय हुआ खत्म, फ्रेंको बारेसी के निधन पर दुनिया भर में शोक


    नई दिल्ली। विश्व फुटबॉल के इतिहास में जब भी महान डिफेंडरों का नाम लिया जाएगा तब फ्रेंको बारेसी का नाम हमेशा सबसे सम्मान के साथ लिया जाएगा। इटली के पूर्व कप्तान और एसी मिलान की पहचान बन चुके फ्रेंको बारेसी का 66 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों खिलाड़ियों और खेल विशेषज्ञों में शोक की लहर दौड़ गई। एसी मिलान ने आधिकारिक बयान जारी कर अपने सबसे महान खिलाड़ियों में शामिल बारेसी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और कहा कि क्लब ने सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं बल्कि अपनी आत्मा को खो दिया है।

    फ्रेंको बारेसी का पूरा करियर समर्पण अनुशासन और वफादारी का प्रतीक रहा। ऐसे दौर में जब खिलाड़ी बेहतर अनुबंध और बड़ी रकम के लिए क्लब बदलते रहते हैं तब बारेसी ने अपने पूरे पेशेवर करियर में केवल एसी मिलान की जर्सी पहनी। उन्होंने 1974 में क्लब की युवा अकादमी से सफर शुरू किया और 1978 में सीनियर टीम में पदार्पण किया। इसके बाद लगभग दो दशकों तक उन्होंने एसी मिलान की रक्षा पंक्ति को मजबूती प्रदान की और क्लब को कई ऐतिहासिक सफलताएं दिलाईं।

    महज 22 वर्ष की उम्र में उन्हें टीम का कप्तान बना दिया गया था। कप्तान के रूप में उन्होंने अपने नेतृत्व कौशल से पूरी टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। एसी मिलान के लिए उन्होंने 719 मुकाबले खेले जो लंबे समय तक क्लब का रिकॉर्ड रहा। उनके सम्मान में क्लब ने उनकी प्रतिष्ठित नंबर 6 जर्सी को हमेशा के लिए रिटायर कर दिया जो किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है।

    फ्रेंको बारेसी ने डिफेंडर की भूमिका को नई पहचान दी। उनकी बेहतरीन पोजिशनिंग खेल को पढ़ने की क्षमता और शांत स्वभाव उन्हें दुनिया के बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता था। पाओलो माल्डिनी माउरो टैसोटी और एलेसांद्रो कोस्टाकुर्ता के साथ उन्होंने ऐसी रक्षापंक्ति बनाई जिसे फुटबॉल इतिहास की सबसे मजबूत डिफेंस लाइन में गिना जाता है। उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत एसी मिलान ने छह सीरी ए खिताब और तीन यूरोपीय कप जीतकर यूरोपीय फुटबॉल में अपना दबदबा कायम किया।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका योगदान बेहद यादगार रहा। वे 1982 में विश्व कप जीतने वाली इटली की टीम का हिस्सा थे। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय टीम की कप्तानी भी संभाली और 1994 फीफा विश्व कप में इटली को फाइनल तक पहुंचाया। हालांकि ब्राजील के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में हार के कारण उनका दूसरा विश्व कप जीतने का सपना अधूरा रह गया लेकिन उनके प्रदर्शन की आज भी मिसाल दी जाती है।

    पिछले वर्ष उनके फेफड़े में गांठ मिलने के बाद सर्जरी हुई थी लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी नहीं बनाई। वे लगातार एसी मिलान के मुकाबलों में दिखाई देते रहे और खेल से जुड़े आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाते रहे। हाल ही में आयोजित विंटर ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में भी उन्होंने मशाल लेकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।

    फ्रेंको बारेसी सिर्फ एक महान फुटबॉलर नहीं बल्कि अनुशासन समर्पण और खेल भावना की जीवंत मिसाल थे। उन्होंने यह साबित किया कि महान खिलाड़ी केवल ट्रॉफियों से नहीं बल्कि अपने चरित्र और मूल्यों से भी पहचाने जाते हैं। उनका जाना फुटबॉल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है लेकिन उनकी उपलब्धियां और प्रेरणादायक विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी।

  • जंग का असर: इंडिगो बंद करेगी वाइड-बॉडी उड़ानें, 25 अक्टूबर से बड़ा बदलाव

    जंग का असर: इंडिगो बंद करेगी वाइड-बॉडी उड़ानें, 25 अक्टूबर से बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती परिचालन लागत के बीच देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन इंडिगो ने अपने वाइड-बॉडी विमान संचालन को बंद करने का फैसला किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 25 अक्टूबर 2026 से वाइड-बॉडी ऑपरेशन समाप्त कर दिए जाएंगे। इसी के साथ नॉर्स अटलांटिक एयरवेज के साथ किया गया डैम्प लीज समझौता भी उसी महीने खत्म हो जाएगा।

    इंडिगो ने बताया कि फिलहाल मुंबई-एम्स्टर्डम मार्ग पर डैम्प लीज पर लिए गए बोइंग 787-9 विमान की जगह एयरबस A321XLR विमान से उड़ानें संचालित की जाएंगी। वहीं, लंदन हीथ्रो के लिए एयरलाइन की सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहेंगी। कंपनी का कहना है कि यह सेवा तब दोबारा शुरू होगी, जब उसके ऑर्डर किए गए एयरबस A350-900 विमान बेड़े में शामिल हो जाएंगे।

    2025 में हुआ था समझौता
    इंडिगो ने वर्ष 2025 की शुरुआत में नॉर्स अटलांटिक एयरवेज के साथ छह बोइंग 787-9 विमानों के लिए डैम्प लीज एग्रीमेंट किया था, ताकि लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का विस्तार किया जा सके।

    क्यों लिया गया फैसला?
    एयरलाइन के अनुसार, समझौते के बाद वैश्विक हालात तेजी से बदले हैं। एयरस्पेस पर प्रतिबंध, ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतें और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के दबाव ने परिचालन लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर दी है। इन परिस्थितियों का असर उड़ानों की क्षमता, समयबद्धता, कनेक्टिविटी और प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ा है। इसी वजह से कंपनी ने पूरे कार्यक्रम की समीक्षा कर रणनीति में बदलाव का निर्णय लिया है।

    ‘संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी’
    इंडिगो के प्लानिंग एवं रेवेन्यू मैनेजमेंट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अभिजीत दासगुप्ता ने कहा कि वैश्विक विमानन उद्योग लगातार भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। ऐसे माहौल में अल्पकालिक संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करना और दीर्घकालिक रणनीति को संतुलित रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन भविष्य में भी मिड और लॉन्ग-हॉल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    यात्रियों को दिए जाएंगे विकल्प
    इंडिगो ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले से प्रभावित यात्रियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया जाएगा। उन्हें वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था या लागू नियमों के तहत रिफंड का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो।

  • अमेरिका-ईरान के बीच फिर गहराया तनाव, नए सैन्य हमले के संकेत, व्हाइट हाउस ने तेहरान को दी चेतावनी

    अमेरिका-ईरान के बीच फिर गहराया तनाव, नए सैन्य हमले के संकेत, व्हाइट हाउस ने तेहरान को दी चेतावनी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले किए जा सकते हैं। व्हाइट हाउस का आरोप है कि तेहरान ने युद्धविराम समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया और क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियां जारी रखीं।

    व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह खोले और पिछले महीने हुए सीजफायर समझौते का सम्मान करे। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते पर हस्ताक्षर के बावजूद ईरान ने उस पर अमल नहीं किया, व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया और अमेरिकी सैनिकों की जान ली। उनके अनुसार, ऐसे कदम आतंकवादी गतिविधियों जैसे हैं और अमेरिका इसका जवाब देगा।

    हालांकि बीती रात ईरान पर कोई अमेरिकी हमला नहीं हुआ, लेकिन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो और तेल टैंकरों को निशाना बनाया। वहीं कुवैत ने भी अपने हवाई क्षेत्र में घुसे ड्रोन को मार गिराने की जानकारी दी।

    ‘ईरान को कीमत चुकानी होगी’
    कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ऐसी गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं करेंगे। उनका कहना था कि जब तक ईरान अमेरिका की शर्तों के अनुसार बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तब तक उसे अपने कदमों की कीमत चुकानी पड़ेगी।

    ट्रंप बोले- जोरदार कार्रवाई करेंगे
    मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने भी ईरान पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर “बहुत जोरदार हमला” करेगा और अंततः ईरान को पीछे हटना पड़ेगा। ट्रंप ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल जीत हासिल करना है।

    भारत-पाकिस्तान का भी किया जिक्र
    बातचीत के दौरान ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान तनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संघर्ष रुकवाने में भूमिका निभाई और टैरिफ का हवाला देकर संभावित परमाणु टकराव टालने की बात कही। हालांकि भारत सरकार पहले भी ट्रंप के इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुकी है।

  • नीरज चोपड़ा का सिल्वर, यशवीर सिंह का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज; सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत की पदकों की झड़ी

    नीरज चोपड़ा का सिल्वर, यशवीर सिंह का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज; सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत की पदकों की झड़ी


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स ने एक बार फिर अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन किया। मेंस जैवलिन थ्रो स्पर्धा में भारत के दो खिलाड़ियों ने एक साथ पोडियम पर जगह बनाकर देश का गौरव बढ़ाया। ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के शानदार थ्रो के साथ रजत पदक अपने नाम किया जबकि युवा खिलाड़ी यशवीर सिंह ने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीत लिया। एक ही स्पर्धा में दो भारतीय खिलाड़ियों का पदक जीतना भारतीय एथलेटिक्स के लगातार मजबूत होते प्रदर्शन का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

    प्रतियोगिता की शुरुआत नीरज चोपड़ा ने 80.97 मीटर के थ्रो से की लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने 85.83 मीटर की दूरी तय कर मुकाबले में मजबूत दावेदारी पेश कर दी। इसके बाद भी उन्होंने लगातार स्थिर प्रदर्शन करते हुए 81.29 मीटर और 80.73 मीटर के थ्रो किए। हालांकि श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज ने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया और नीरज को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इसके बावजूद नीरज का यह प्रदर्शन उनके मौजूदा सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा जिसने आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए उनके आत्मविश्वास को नई मजबूती दी।

    दूसरी ओर यशवीर सिंह ने शानदार संघर्ष का परिचय दिया। शुरुआती प्रयासों में वह पदक की दौड़ से कुछ पीछे दिखाई दे रहे थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में 78.55 मीटर और तीसरे प्रयास में 81.33 मीटर का थ्रो करने के बाद उन्होंने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर की दूरी तय कर मुकाबले का रुख बदल दिया। यह उनके करियर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा और इसी के दम पर उन्होंने कांस्य पदक जीतकर भारत को दोहरी खुशी दी। यशवीर का यह प्रदर्शन भारतीय जैवलिन थ्रो की नई पीढ़ी की क्षमता को भी साबित करता है।

    भारत के एक अन्य खिलाड़ी रोहित यादव भी फाइनल में उतरे और उन्होंने 81.56 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए सातवां स्थान हासिल किया। हालांकि वह पदक नहीं जीत सके लेकिन उनका प्रदर्शन भी संतोषजनक माना गया।

    इन दो पदकों के साथ भारत का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुल पदकों का आंकड़ा 23 तक पहुंच गया है। देश के खाते में अब 5 स्वर्ण 12 रजत और 6 कांस्य पदक दर्ज हो चुके हैं। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में भारत ने अब तक 11 पदक जीत लिए हैं जबकि वेटलिफ्टिंग में 8 पदक जूडो में 3 पदक और पैरा पावरलिफ्टिंग में 1 कांस्य पदक हासिल हुआ है।

    पदक तालिका में भारत फिलहाल दसवें स्थान पर बना हुआ है जबकि ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर कायम है। इंग्लैंड दूसरे और कनाडा तीसरे स्थान पर है। भारतीय खिलाड़ियों का लगातार बेहतर प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि आने वाले मुकाबलों में पदकों की संख्या और बढ़ सकती है। नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह की यह उपलब्धि न केवल भारतीय खेल इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ती है बल्कि युवा खिलाड़ियों को भी बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देती है।

  • शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करने की परंपरा क्यों है जानिए इसके पीछे छिपे आध्यात्मिक रहस्य और लाभ

    शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करने की परंपरा क्यों है जानिए इसके पीछे छिपे आध्यात्मिक रहस्य और लाभ


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता भगवान शनि को समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु विशेष रूप से शनि मंदिरों में जाकर सरसों का तेल अर्पित करते हैं और शनि देव की पूजा आराधना करते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शनि पूजा व्यक्ति के जीवन में आने वाली अनेक कठिनाइयों को कम करने में सहायक होती है। यही कारण है कि देशभर के शनि मंदिरों में शनिवार के दिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव कर्मों के आधार पर फल देने वाले देवता हैं। वे किसी के साथ पक्षपात नहीं करते बल्कि अच्छे कर्म करने वालों को सफलता सम्मान और उन्नति प्रदान करते हैं जबकि बुरे कर्म करने वालों को उनके कर्मों के अनुसार दंड भी देते हैं। इसलिए शनि देव की पूजा का सबसे बड़ा संदेश यह माना जाता है कि व्यक्ति सदैव सत्य ईमानदारी और अच्छे आचरण का पालन करे।

    शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार जब भगवान हनुमान ने शनि देव को रावण की कैद से मुक्त कराया था तब युद्ध के दौरान शनि देव को गंभीर चोटें आई थीं। उस समय उनके शरीर पर तेल लगाया गया जिससे उन्हें आराम मिला। तभी से शनि देव को तेल अर्पित करने की परंपरा शुरू हुई और माना जाने लगा कि तेल चढ़ाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं तथा अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।

    एक अन्य मान्यता यह भी है कि सरसों का तेल नकारात्मक ऊर्जा और अशुभ प्रभावों को दूर करने का प्रतीक माना जाता है। शनिवार के दिन श्रद्धालु शनि देव की प्रतिमा पर सरसों का तेल अर्पित करते हैं दीपक जलाते हैं काले तिल उड़द और नीले या काले वस्त्र अर्पित करते हैं। इसके साथ ही शनि स्तोत्र शनि चालीसा और शनि मंत्रों का जाप करने से भी विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती ढैया या प्रतिकूल दशा चल रही हो वे शनिवार के दिन विधि विधान से शनि पूजा करें तो मानसिक तनाव आर्थिक कठिनाइयों और जीवन की बाधाओं में कमी आ सकती है। हालांकि केवल तेल चढ़ाना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि अपने व्यवहार और कर्मों में भी सुधार करना आवश्यक बताया गया है क्योंकि शनि देव सबसे अधिक कर्म और न्याय को महत्व देते हैं।

    शनिवार के दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना काले तिल दान करना गरीबों की सहायता करना गौ सेवा करना और पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। इन कार्यों को शनि कृपा प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम माना गया है। साथ ही किसी का अपमान न करना झूठ छल कपट और अन्याय से दूर रहना भी शनि पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    धार्मिक विद्वानों का मानना है कि शनि देव को तेल अर्पित करने का वास्तविक उद्देश्य केवल पूजा करना नहीं बल्कि जीवन में संयम धैर्य अनुशासन और अच्छे कर्मों को अपनाना है। जब व्यक्ति श्रद्धा के साथ पूजा के साथ-साथ अपने आचरण को भी बेहतर बनाता है तभी शनि देव की वास्तविक कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख शांति समृद्धि तथा सफलता के नए मार्ग खुलते हैं।