Author: bharati

  • शनिवार का राशिफल: ग्रहण दोष से रहें सावधान इन राशियों पर बढ़ेगा संकट जबकि इन जातकों के लिए खुलेगा धन और तरक्की का मार्ग

    शनिवार का राशिफल: ग्रहण दोष से रहें सावधान इन राशियों पर बढ़ेगा संकट जबकि इन जातकों के लिए खुलेगा धन और तरक्की का मार्ग


    नई दिल्ली । अगस्त महीने का पहला दिन यानी 1 अगस्त 2026 शनिवार ज्योतिष की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिन चंद्रमा कुंभ राशि में गोचर करेंगे और राहु के साथ उनकी युति होने से चंद्र राहु ग्रहण दोष का निर्माण होगा। हालांकि इसके साथ ही शोभन योग वाशि योग सुनफा योग और आनंदादि योग जैसे कई शुभ संयोग भी बन रहे हैं जो कई राशियों के लिए उन्नति और सफलता के द्वार खोल सकते हैं। ऐसे में यह दिन कुछ लोगों के लिए नई शुरुआत लेकर आएगा जबकि कुछ राशियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन सामाजिक सम्मान और आर्थिक लाभ देने वाला रहेगा। व्यापार में अच्छी प्रगति होगी और कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। परिवार में भी खुशी का माहौल रहेगा। वृषभ राशि वालों के लिए शोभन योग विशेष लाभकारी रहेगा। कारोबार में नई डील फाइनल हो सकती है और नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है।

    मिथुन राशि के लोगों को भाग्य का अच्छा साथ मिलेगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और व्यापार में नए अवसर सामने आएंगे। सामाजिक क्षेत्र में प्रतिष्ठा बढ़ेगी। वहीं कर्क राशि वालों को ग्रहण दोष के कारण विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। आर्थिक मामलों में सोच समझकर निर्णय लें और किसी भी विवाद से दूरी बनाए रखें। स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी रहेगा।

    सिंह राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने के योग हैं। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा और लंबे समय से रुका काम पूरा हो सकता है। कन्या राशि के लिए यह दिन बेहद शुभ रहेगा। शोभन योग के प्रभाव से धन लाभ के साथ करियर में नई उपलब्धियां मिल सकती हैं। नौकरी में तरक्की और व्यापार में विस्तार के संकेत हैं।

    तुला राशि वालों को नई योजनाओं पर काम करने का मौका मिलेगा। कारोबार में आधुनिक तकनीक अपनाने से लाभ होगा। परिवार का सहयोग मिलेगा। वृश्चिक राशि के जातकों को चंद्र राहु ग्रहण दोष के कारण निवेश और लेनदेन में सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी बड़े फैसले से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

    धनु राशि वालों के लिए मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने की संभावना है। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और पुराने संपर्क भविष्य में लाभ दिला सकते हैं। मकर राशि के लिए आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। नया अनुबंध या बड़ा सौदा फायदेमंद साबित हो सकता है और परिवार में सुखद वातावरण रहेगा।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए यह दिन आत्मविश्वास और उपलब्धियों से भरा रहेगा। सरकारी कार्यों में सफलता मिल सकती है और रुके हुए काम पूरे होने के योग हैं। वहीं मीन राशि वालों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी गई है। ग्रहण दोष के प्रभाव से मानसिक तनाव बढ़ सकता है इसलिए धैर्य और संयम के साथ निर्णय लेना ही बेहतर रहेगा।

    ज्योतिष के अनुसार शनिवार को राहुकाल में कोई नया या शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। साथ ही भगवान शनि और भगवान शिव की पूजा तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं। कुल मिलाकर अगस्त का पहला दिन कई राशियों के लिए नए अवसर लेकर आएगा जबकि कुछ लोगों को सतर्क रहकर अपने निर्णय लेने की आवश्यकता होगी।

  • राष्ट्रमंडल खेल 2026: अस्मिता डे ने जूडो में जीता स्वर्ण, भारत को दिलाया ऐतिहासिक पहला गोल्ड

    राष्ट्रमंडल खेल 2026: अस्मिता डे ने जूडो में जीता स्वर्ण, भारत को दिलाया ऐतिहासिक पहला गोल्ड


    ग्लासगो।
    भारत की युवा जूडोका अस्मिता डे ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में इतिहास रचते हुए महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया। त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता ने फाइनल में कनाडा की हाइडी क्वाच को युको (2-1) से हराकर राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो का भारत का पहला स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    फाइनल मुकाबले की शुरुआत बेहद संघर्षपूर्ण रही। दोनों खिलाड़ियों के बीच मैट के किनारों पर लगातार जोरदार भिड़ंत देखने को मिली। मुकाबले के दौरान कनाडाई खिलाड़ी क्वाच ने 2 मिनट 35 सेकंड पर पिन के जरिए पहला अंक हासिल कर बढ़त बना ली।

    हालांकि, अस्मिता ने शानदार वापसी करते हुए दबाव बनाए रखा। इसके बाद उन्होंने तेज़ थ्रो और पिन के जरिए बराबरी का अंक हासिल कर मुकाबले को रोमांचक बना दिया। नियमित समय तक दोनों खिलाड़ी बराबरी पर रहीं, जिसके बाद मुकाबला गोल्डन स्कोर में पहुंच गया।

    गोल्डन स्कोर में अस्मिता ने संयम और बेहतरीन तकनीक का प्रदर्शन करते हुए 4 मिनट 25 सेकंड पर शानदार पिन लगाकर निर्णायक अंक हासिल किया और स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

    जीत के बाद अस्मिता ने मुस्कुराते हुए दर्शकों का अभिवादन किया और अपने खास अंदाज में जश्न मनाया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाकर अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया।

    हालांकि इसके बाद पुरुष वर्ग में हर्ष सिंह ने भी भारत को जूडो में आज लगातार दूसरा स्वर्ण पदक दिलाया। हर्ष ने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को हराया।

  • देश का विदेशी मुद्रा भंडार 6.12 अरब डॉलर बढ़कर 682.354 अरब डॉलर पर

    देश का विदेशी मुद्रा भंडार 6.12 अरब डॉलर बढ़कर 682.354 अरब डॉलर पर


    नई दिल्ली।
    विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार चौथे हफ्ते इजाफा हुआ है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 24 जुलाई को समाप्त हफ्ते में 6.12 अरब डॉलर बढ़कर 682.354 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में बताया है कि 24 जुलाई को समाप्त हफ्ते में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 6.12 अरब डॉलर बढ़कर 682.354 अरब डॉलर रहा है। इससे पिछले सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 1.08 अरब डॉलर बढ़कर 676.24 अरब डॉलर रहा था।

    आरबीआई के जारी आंकड़ों के मुताबिक 24 जुलाई को समाप्त हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम घटक माने जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियां (एफसीए) 4.87 अरब डॉलर बढ़कर 555.93 अरब डॉलर हो गईं। इस अवधि में स्वर्ण भंडार का मूल्य 1.31 अरब डॉलर बढ़कर 103.06 अरब डॉलर हो गया।

    आंकड़ों के विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 5.3 करोड़ डॉलर घटकर 18.62 अरब डॉलर रह गया। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत का आरक्षित कोष 1.1 करोड़ डॉलर घटकर 4.75 अरब डॉलर रहा है।

    उल्लेखनीय है कि आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार 27 फरवरी को समाप्त हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर रिकॉर्ड 728.49 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

  • पश्चिम एशिया संकट के बीच इथेनॉल ब्लेंडिंग बनी सुरक्षा कवच, ग्राहकों के बचे 30 रुपये प्रति लीटर

    पश्चिम एशिया संकट के बीच इथेनॉल ब्लेंडिंग बनी सुरक्षा कवच, ग्राहकों के बचे 30 रुपये प्रति लीटर


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर बड़ा दावा किया है। सरकार का कहना है कि अगर पेट्रोल में इथेनॉल नहीं मिलाया जाता, तो हाल के पश्चिम एशिया संकट के दौरान देश में पेट्रोल की कीमत 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी लेकिन इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की वजह से ग्राहकों को बड़ी राहत मिली और उन्हें करीब 30 रुपये प्रति लीटर तक की बचत हुई है।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी एक बयान में बताया कि पेट्रोल में ईथेनॉल का मिश्रण सिर्फ ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने में मदद नहीं कर रहा, बल्कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत हो रही है। मंत्रालय ने कहा कि पेट्रोल में इथेनॉल को मिलाने (ब्लेंडिंग) से दिल्ली के उपभोक्ताओं को प्रति लीटर लगभग 30 रुपये की बचत हुई है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर बिना इथेनॉल के दिल्ली में पेट्रोल 125 रुपये प्रति लीटर हो सकता था, जो इस मिश्रण के कारण 94.77 रुपये प्रति लीटर मिला।

    पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम ने कई मोर्चों पर फायदा पहुंचाया है। इससे जहां एक ओर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है। वहीं, किसानों और डिस्टिलरी उद्योग को आर्थिक लाभ मिला है। मंत्रालय के अनुसार यह योजना खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और देश की ऊर्जा जरूरतों के बीच संतुलन बनाने का काम कर रही है।

    सरकार ने साफ किया है कि इथेनॉल बनाने के लिए केवल वही अनाज इस्तेमाल किया जाता है, जो खाद्य सुरक्षा की जरूरतें पूरी होने के बाद अतिरिक्त बचता है। सरकार ने ये साफ किया है कि ई20 पेट्रोल से पुरानी या नई गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंचने की बातें साबित नहीं हुई हैं।

  • वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत का निधन, 90 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

    वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत का निधन, 90 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार, पद्मश्री से सम्मानित और हिंदी भवन भोपाल के पूर्व निदेशक कैलाश चंद्र पंत का शुक्रवार को हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) से निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे।

    शुक्रवार को उन्होंने भोपाल में अपने निवास में अंतिम सांस ली। उनके निधन से भोपाल से लेकर उनके पैतृक उत्तराखंड के बागेश्वर के गांव खंतोली में शोक की लहर दौड़ गई। वे अपने पीछे तीन विवाहित पुत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। कुछ वर्ष पहले उनकी पत्नी का भी निधन हो गया था।

    परिजनों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार शनिवार को भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि कैलाश चंद्र पंत लंबे समय तक मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति से जुड़े रहे। हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

    इंदौर के पास महू में हुआ था जन्म
    कैलाश चंद्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को इंदौर के पास महू में हुआ था। उनका पैतृक गांव उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का खंतोली गांव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत इंदौर स्थित यूनियन थियोलॉजिकल सेमिनरी में व्याख्याता के रूप में की। बाद में वे भोपाल के पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य भी रहे।

    उन्होंने शिक्षा प्रदीप, जनधर्म और दुर्गामी आह्वान जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं का संपादन भी किया। इसके अलावा वे हिंदी भवन भोपाल के निदेशक रहे और भारत कृषक समाज, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति तथा मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति जैसी कई साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

    इसी वर्ष पद्मश्री से हुए थे सम्मानित
    कैलाश चंद्र पंत की प्रमुख कृतियों में ‘कौन किसका आदमी’, ‘धुंध के आर-पार’, ‘शब्द का विचार-पथ’ और ‘शैलेश मटियानी : सृजन यात्रा’ शामिल हैं। हिंदी साहित्य में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 मई 2026 को पद्मश्री से सम्मानित किया था। कैलाशचंद्र पंत स्वयं इस सम्मान को लेने के लिए राष्ट्रपति के समक्ष गए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। इसके अलावा उन्हें साहित्य भूषण सम्मान, निराला साहित्य सम्मान, साहित्य शिरोमणि सम्मान और संस्कृति गौरव सम्मान जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले।

  • मप्रः मुख्यमंत्री ने जनजातीय परिवार के घर किया भोजन, बहनों से बंधवाई राखी

    मप्रः मुख्यमंत्री ने जनजातीय परिवार के घर किया भोजन, बहनों से बंधवाई राखी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को झाबुआ जिले के थांदला में जनजातीय समुदाय के बसंत सिंह बामनिया के घर पहुंचकर उनके परिवार के साथ समय बिताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिवार के सदस्यों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने जनजातीय बहनों से सावन मास में रक्षाबंधन से पूर्व राखी बंधवाई तथा बच्चों को स्नेह-दुलार देकर उन्हें अपनेपन का एहसास कराया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव थांदला में आयोजित प्रदेश स्तरीय स्व-सहायता समूहों के क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में होंगे शामिल होने के लिए पहुंचे थे। उनके साथ प्रभारी मंत्री विजय शाह और निर्मला भूरिया तथा सांसद अनिता नागर सिंह चौहान भी उपस्थित रहीं। सभी अतिथियों ने परिवार के बीच बैठकर उनके साथ भोजन ग्रहण किया।

    गोदड़ी पर बैठकर पत्तल में किया भोजन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामान्य जन की तरह गोदड़ी पर बैठकर पत्तल में भोजन किया। मिट्टी और गारे से बने सादे घर के आंगन में परिवार के बीच बैठकर उन्होंने आत्मीय वातावरण में भोजन ग्रहण किया। परिवार की महिलाओं ने अपने हाथों से पारंपरिक जनजातीय व्यंजन बड़े प्रेम और आत्मीयता के साथ परोसे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से उड़द की दाल-पानिया का स्वाद लिया तथा भोजन की सराहना करते हुए परिवार द्वारा दिये गये प्रेम और सम्मान का आभार जताया।

    बहनों ने बांधी राखी, मुख्यमंत्री ने दिया स्नेह और सम्मान

    मुख्यमंत्री डॉ.यादव की कलाई पर जनजातीय समुदाय की बहनों ने राखी बांधकर उनके मंगलमय जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों को शुभकामनाएं दीं।


    लाड़ली बहनों और लाड़ली लक्ष्मी बेटियों से मिले

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिवार की लाड़ली बहनों और लाड़ली लक्ष्मी बेटियों से हालचाल जाना तथा उनसे अपनत्व भरी बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा हर परिवार की खुशहाली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिवार के बच्चों से भी बड़े स्नेहपूर्वक मुलाकात की। बच्चों के साथ सहज बातचीत करते हुए उन्होंने उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने नन्हे शिवांश को स्नेहपूर्वक दुलारा।

    जनजातीय परिवार से किया आत्मीय संवाद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोजन के बाद परिवार के सदस्यों से चर्चा की। उन्होंने जनजातीय समाज की परंपराओं, आजीविका, शिक्षा, बच्चों के भविष्य तथा शासन की योजनाओं से मिलने वाले लाभों के संबंध में जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराएं और जीवन-मूल्य मध्यप्रदेश की अमूल्य धरोहर हैं। राज्य सरकार उनके सर्वांगीण विकास और सम्मान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री आवास योजना से मिला पक्का घर, फिर भी परंपरा और बुजुर्गों की स्मृतियों से जुड़ा है परिवार
    बसंत सिंह बामनिया ने बताया कि उन्हें पीएम आवास योजना के अंतर्गत सभी मूलभूत सुविधाओं से युक्त पक्का आवास प्राप्त हो चुका है। परिवार आज भी अपने पुराने गारे-मिट्टी के घर में रहना पसंद करता है। उनका कहना है कि यह घर केवल एक मकान नहीं, बल्कि परिवार की कई पीढ़ियों की यादों, परंपराओं और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। बुजुर्गों की स्मृतियों को संजोए इस घर से उनका विशेष लगाव है। साथ ही, उनका मानना है कि मिट्टी के घर का प्राकृतिक और शुद्ध वातावरण आज भी उन्हें आत्मीय सुकून और अपनापन प्रदान करता है। इसलिए परिवार के साथ यहां भी रहते है। श्री बसंत मप्र शासन की संबल योजना के भी हितग्राही है।

  • बहनों की शक्ति और आशीर्वाद से आगे बढ़ रहा मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    बहनों की शक्ति और आशीर्वाद से आगे बढ़ रहा मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण का कार्य सरकार और सामाजिक दोनों स्तर पर हो रहा है। बहनों की शक्ति और आशीर्वाद से प्रदेश आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को झाबुआ जिले के थांदला में आयोजित स्व-सहायता समूहों के क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बहनें स्व-सहायता समूहों को नई ताकत दे रही हैं। कृषि, पशुपालन, बैंक, उद्यम सखियां भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। बहनों की सार्थक भूमिका से प्रत्येक परिवार में समृद्धि आ रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में नगरीय निकायों और पंचायतों में 50 प्रतिशत स्थान बहनों के लिए आरक्षित है। सरकारी सेवाओं में बहनों के लिए 35 प्रतिशत स्थान आरक्षित रखे गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकसभा और राज्यसभा में बहनों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृ्त्व में मध्य प्रदेश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी जब लगातार तीन बार पड़ौसी राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब झाबुआ के आसपास जनजातीय अंचल में विकास के अद्भुत कार्य हुए। पूरी दुनिया गुजरात की शक्ति से परिचित हुई।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके मन में बहनों के लिए विशेष सम्मान है। उनके माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी बहनें के सशक्तिकरण के लिए 300 करोड़ रुपये के ऋण दिए गए हैं। स्व-सहायता समूहों से बहनों की समृद्धि का मार्ग खुल रहा है। यह आत्मनिर्भरता और समाजिक सशक्तिकरण का एक बड़ा आंदोलन बन रहा है। सहयोग और सहभागिता से समृद्ध होकर बहनें नए रिकॉर्ड बना रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हमारी बहनें 10 हजार रुपये प्रति महीना तक आय अर्जित कर रही हैं। प्रदेश की लाड़ली बहनें, उद्यमी बहनें, कृषि सखी सभी आगे बढ़ रही हैं। प्रदेश में स्व-सहायता समूहों के द्वारा 196 दीदी कैफे संचालित किए जा रहे हैं। झाबुआ में भी बहनें चार कैफे चला रही हैं। प्रदेश में 85 आजीविका पुस्तकालयों का संचालन स्व-सहायता समूहों की बहनों के हाथों में है। गैर कृषि आधारित 150 से अधिक कार्य बहनें कर रही हैं। यह आयोजन महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट प्रमाण है। होलकर साम्राज्य की रानी लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने भील पल्टन बनाकर जनजातीय समुदाय पर विश्वास जताया था। रानी दुर्गावती, वीरांगना अवंतीबाई, रानी पद्मावती, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई जैसी बहनों ने सुशासन और त्याग के बल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया।

    रोजगार दिलवाना प्राथमिकता

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार दिलवाने के लिये निरन्तर नई पहल कर रही है। मध्य प्रदेश में ग्वालियर अंचल में संचार क्षेत्र में नई इकाई की स्थापना की जाएगी। इससे 14 हजार नये रोजगार के अवसर सृजित होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने गत 17 सितम्बर को धार जिले में देश के पहले पीएम मित्र पार्क का शिलान्यास किया। पीएम मित्र पार्क से 3 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। कपास उत्पादक किसान इस पार्क से बड़ी संख्या में लाभान्वित होंगे।

    उन्होंने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्र में जो पट्टे दिए गए हैं, उनकी नि:शुल्क रजिस्ट्री भी करवाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई मिशनरी धर्मान्तरण नहीं कर सकेगी। स्थानीय निवासी ज्यादा से ज्यादा गौशाला खोलें, दूध का उत्पादन बढाएं। ऐसे कार्यों के लिए सरकार पूरी सहायता कर रही है।प्रदेश में उद्योग और एमएसएमई के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। अब झाबुआ, धार, आलीराजपुर के लोगों को रोजगार के लिए पलायन करने की जरूरत नहीं होगी। अपने घर में ही काम मिलेगा। बड़े-बड़े कारखाने यहां आएंगे।

    स्व-सहायता समूहों को राशि वितरित

    मुख्यमंत्री ने राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण के लिए 300 करोड़ रुपये के ऋण का वितरण किया। इसमें झाबुआ जिले के 215 स्व-सहायता समूहों के लिए 10.8 करोड़ का ऋण भी शामिल है। मुख्यमंत्री ने झाबुआ जिले को 174.64 करोड़ रुपये के 29 विकास कार्यों के भूमि-पूजन और 109.17 करोड़ रुपये के 28 विकास एवं आधारभूत संरचना कार्यों के लोकार्पण की सौगात दी। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया और मेधावी विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने “आजीविका मेला” प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

    प्राकृतिक खेती के लिए अनुकूल झाबुआ

    मुख्यमंत्री ने कहा कि झाबुआ क्षेत्र प्राकृतिक खेती के लिए वरदान है। उन्होंने प्राकृतिक खेती करने वाले प्रगतिशील किसानों से संवाद किया। उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन की विभिन्न योजनाओं एवं प्रयासों पर चर्चा भी की। महिला कृषक बहनों ने बताया कि प्राकृतिक खेती से पिछले दो-तीन साल में जीवन में बड़ा बदलाव आया है। राज्य सरकार कृषि कल्याण वर्ष मना रही है। इसमें बहनों की बड़ी भूमिका है। हमारी बहनें ट्रैक्टर से लेकर ड्रोन तक चला रही हैं। ड्रोन दीदीयां खेतों में कीटनाशकों क छिड़काव कर रही हैं।

    समान नागरिक संहिता

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सभी धर्मों के लोगों के सम्मान के लिए एक समान कानून लागू करने का निर्णय लिया है। इसमें जनजातीय समुदाय को मुक्त रखा गया है। यूसीसी बिल विधानसभा से पास हो चुका है।

    दुराचार करने वालों को फांसी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि झाबुआ और धार में धर्मांतरण करने वालों को कानून के अनुसार सजा दिलवाई जाएगी। महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए महिला सुरक्षा डेस्क और प्रत्येक जिले में महिला थाने बनाए जा रहे हैं। महिलाओं के साथ दुराचार करने वालों को फांसी की सजा मिलेगी। केंद्र सरकार के सहयोग और नक्सलवाद को पूरी तरह से समाप्त करने के दृढ़ संकल्प के कारण प्रदेश के बालाघाट, मंडला, डिंडौरी अंचल से नक्सलवाद को पूर्णत: समाप्त कर दिया गया है।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में चमके हर्ष सिंह, पुरुष जूडो में भारत को दिलाया पहला स्वर्ण

    कॉमनवेल्थ गेम्स में चमके हर्ष सिंह, पुरुष जूडो में भारत को दिलाया पहला स्वर्ण


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पुरुषों के 60 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया। फाइनल में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी जुडोका और ओलंपियन जोशुआ कात्ज़ को पराजित कर राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पुरुष जूडो में भारत का पहला स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    23 वर्षीय हर्ष सिंह दिल्ली के रहने वाले हैं और अंतरराष्ट्रीय जूडो महासंघ (IJF) के सर्किट में भारत के उभरते खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। राष्ट्रमंडल खेलों से पहले वह कई ग्रैंड स्लैम और ग्रैंड प्रिक्स प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रतिस्पर्धा से मिले अनुभव का लाभ उन्हें ग्लासगो में देखने को मिला।

    41 सेकेंड में पलटा मुकाबला

    फाइनल मुकाबले में हर्ष का सामना ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कात्ज़ से हुआ, जिन्हें इस स्पर्धा का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। चार मिनट तक चले मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर रही और अंतिम क्षणों तक कोई निर्णायक बढ़त नहीं बन सकी।

    मैच समाप्त होने से 41 सेकेंड पहले हर्ष ने प्रतिद्वंद्वी की एक छोटी सी चूक का फायदा उठाते हुए ‘वाजा-अरी’ (Waza-ari) स्कोर किया। इसके बाद उन्होंने शेष समय तक बढ़त बरकरार रखते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया और स्वर्ण पदक जीत लिया।

    अनुभवी प्रतिद्वंद्वी को दी मात

    जोशुआ कात्ज़ ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी जुडोका हैं। वह कई बार ओशिनिया चैंपियन रह चुके हैं और 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीत चुके हैं। उनके परिवार का भी जूडो से गहरा संबंध रहा है और उनके पिता ऑस्ट्रेलिया की ओलंपिक जूडो टीम के राष्ट्रीय कोच रह चुके हैं।

    भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक दिन

    हर्ष सिंह की इस उपलब्धि ने भारतीय जूडो के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। इससे पहले महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में अस्मिता डे ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत को पहली सफलता दिलाई थी। इसके बाद हर्ष ने पुरुष वर्ग में स्वर्ण जीतकर एक ही दिन में भारत को जूडो में दो स्वर्ण पदक दिलाने का इतिहास रच दिया।

    कम उम्र में पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में उतरकर स्वर्ण पदक जीतने वाले हर्ष सिंह की यह सफलता भारतीय जूडो के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है और इससे आने वाले खिलाड़ियों को भी नई प्रेरणा मिलेगी।

  • कुलगाम में आतंकियों ने दो गैर-स्थानीय मजदूरों को मारी गोली, एक की मौत, दूसरा गंभीर

    कुलगाम में आतंकियों ने दो गैर-स्थानीय मजदूरों को मारी गोली, एक की मौत, दूसरा गंभीर


    श्रीनगर।
    दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने एक बार फिर गैर-स्थानीय मजदूरों को निशाना बनाया। केलम क्षेत्र में गुरुवार शाम आतंकियों की गोलीबारी में दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां एक मजदूर ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया, जबकि दूसरे की हालत गंभीर बनी हुई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, केलम इलाके में काम कर रहे दो गैर-स्थानीय मजदूरों पर अज्ञात आतंकियों ने अचानक गोलीबारी कर दी। घटना के बाद दोनों घायल मजदूरों को अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने एक मजदूर को मृत घोषित कर दिया, जबकि दूसरे का उपचार जीएमसी अनंतनाग में जारी है।

    घटना के तुरंत बाद पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर संयुक्त तलाशी अभियान शुरू कर दिया। हमलावर आतंकियों की तलाश के लिए इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

    हाल के वर्षों में गैर-स्थानीय लोगों पर प्रमुख आतंकी हमले

    • 31 जुलाई 2026, केलम (कुलगाम): दो गैर-स्थानीय मजदूरों पर गोलीबारी, एक की मौत और एक गंभीर रूप से घायल।
    • 22 अप्रैल 2025, बैसरन (पहलगाम): पर्यटकों और गैर-स्थानीय लोगों पर आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत।
    • 20 अक्टूबर 2024, गगनगीर (गांदरबल): जेड-मोड़ सुरंग परियोजना शिविर पर हमले में छह गैर-स्थानीय मजदूर और एक चिकित्सक की हत्या।
    • 17 अप्रैल 2024, बिजबिहाड़ा (अनंतनाग): बिहार निवासी गैर-स्थानीय विक्रेता राजा शाह की गोली मारकर हत्या।
    • 7-8 फरवरी 2024, हब्बा कदल (श्रीनगर): पंजाब के दो गैर-स्थानीय मजदूरों अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

    सुरक्षा एजेंसियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उन्हें जल्द पकड़ने के लिए व्यापक अभियान जारी है।

  • भारत-चीन रिश्तों में नई शुरुआत के संकेत? सितंबर में BRICS समिट के लिए शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा पर टिकी दुनिया की नजर

    भारत-चीन रिश्तों में नई शुरुआत के संकेत? सितंबर में BRICS समिट के लिए शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा पर टिकी दुनिया की नजर

    नई दिल्ली । सितंबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को लेकर भारत और चीन के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह दौरा तय होता है तो वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुए सैन्य संघर्ष के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। इस संभावित दौरे को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शी जिनपिंग की मौजूदगी की संभावना है। उनकी यात्रा ऐसे समय में प्रस्तावित है जब भारत और चीन पिछले कुछ वर्षों से सीमा पर बने तनाव को कम करने और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के संबंधों में आई तल्खी के कारण कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ताएं हुईं, जिसके बाद अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिशें जारी हैं।

    शी जिनपिंग की पिछली भारत यात्रा अक्टूबर 2019 में हुई थी, जब दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच अनौपचारिक शिखर वार्ता आयोजित की गई थी। इसके कुछ महीनों बाद जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को दशकों के सबसे कठिन दौर में पहुंचा दिया। इसके बाद सीमा पर लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा और दोनों देशों ने कई स्तरों पर बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

    प्रस्तावित यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनयिक संपर्क बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के चीन दौरे की चर्चा है, जहां सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। हालांकि उनकी यात्रा की आधिकारिक तारीखों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसके अलावा भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए गठित कार्य तंत्र (WMCC) की बैठक भी आने वाले समय में आयोजित होने की उम्मीद है। इसके बाद दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा विवाद पर आगे की वार्ता हो सकती है।

    यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं तो ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके बीच द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना पर भी नजर रहेगी। ऐसी बैठक में सीमा प्रबंधन, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, निवेश, आर्थिक सहयोग और आपसी विश्वास बहाली जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत बने हुए हैं, लेकिन सीमा विवाद के कारण राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर कई चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं।

    यह संभावित यात्रा ऐसे समय में सामने आ रही है जब वैश्विक स्तर पर कई भू-राजनीतिक चुनौतियां उभर रही हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, वैश्विक व्यापार पर दबाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच बदलते समीकरणों के बीच भारत और चीन जैसे बड़े देशों के बीच संवाद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं होगा, बल्कि यह वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच रणनीतिक समन्वय को भी नई दिशा देने का अवसर बन सकता है।