Author: bharati

  • श्री खरे वैश्य समाज ने बिलासपुर में जिला संयोजक के रूप में जगदीश प्रसाद गुप्ता की नियुक्ति की

    श्री खरे वैश्य समाज ने बिलासपुर में जिला संयोजक के रूप में जगदीश प्रसाद गुप्ता की नियुक्ति की


    नई दिल्ली:अखिल भारतीय श्री खरे वैश्य समाज ने छत्तीसगढ़ में अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। समाज की राष्ट्रीय टीम ने हाल ही में बिलासपुर जिले के लिए श्री जगदीश प्रसाद गुप्ता को जिला संयोजक नियुक्त करने की औपचारिक घोषणा की है। श्री गुप्ता ने अपने जीवन का अधिकांश समय कृषि विभाग में कार्यरत रहते हुए सेवा भाव के साथ बिताया है और सामाजिक क्षेत्र में भी लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

    समाज की ओर से जारी जानकारी के अनुसारयह नियुक्ति मुख्य रूप से संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनानेसमाज के सदस्यों को एक साझा मंच पर जोड़ने और सामाजिक गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। राष्ट्रीय नेतृत्व का मानना है कि श्री गुप्ता के प्रशासनिक अनुभव और सामाजिक समझ से बिलासपुर जिले में समाज की गतिविधियों को नई दिशा और गति मिलेगी।श्री खरे वैश्य समाज की राष्ट्रीय टीम ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया यहीं समाप्त नहीं होगी। आने वाले समय में जिला स्तरीय टीम के अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों की घोषणा भी की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य एक समन्वित और सशक्त कार्यकारिणी का गठन करना है, जिसमें समाज के सभी वर्ग-युवा, महिला, वरिष्ठ नागरिक और पेशेवर-सक्रिय रूप से जुड़े।

    घोषणा के बाद बिलासपुर जिले के समाजजनों में उत्साह देखा गया। कई सदस्यों ने इसे संगठन के लिए सकारात्मक और दूरगामी कदम बताया। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में समाज के सामाजिक शैक्षणिक और सेवा से जुड़े कार्यक्रमों में तेजी आएगी। संगठन का उद्देश्य केवल विस्तार नहीं है बल्कि आपसी सहयोग, सामाजिक एकता और जरूरतमंदों की सहायता को भी प्राथमिकता देना है।समाज ने बिलासपुर जिले के सभी सदस्यों से अपील की है कि वे आगामी बैठकों और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाएं। इसके लिए जानकारी और संपर्क के लिए मोबाइल नंबर 9399362152 उपलब्ध कराया गया है। समाज ने जोर दिया है कि अधिक से अधिक लोग सक्रिय होकर संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में योगदान दें।

    अखिल भारतीय श्री खरे वैश्य समाज देशभर में समाज के हितों के संरक्षण, सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन और सामाजिक विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। बिलासपुर जिले में नई जिम्मेदारी के साथ संगठन को उम्मीद है कि स्थानीय स्तर पर समाज की आवाज और प्रभावी रूप से सामने आएगी। संगठन की योजना है कि एकजुटता और सामूहिक प्रयास के माध्यम से आने वाले वर्षों में विभिन्न योजनाओं को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जाए।श्री गुप्ता की नियुक्ति से बिलासपुर में न केवल संगठन की सक्रियता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय समुदायों में सामाजिक समन्वय और सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। समाज की गतिविधियों में भागीदारी के जरिए युवा वर्ग और अन्य सदस्य संगठन की विकास योजनाओं का हिस्सा बन सकेंगे।इस प्रकार, बिलासपुर में श्री गुप्ता की नई जिम्मेदारी से समाज की संरचना मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर सामाजिक एकता, सेवा और सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन में नई ऊर्जा आएगी।

  • साल 2025 का आखिरी धमाका: मॉडर्न डायग्नोस्टिक का IPO 31 दिसंबर से खुलेगा, निवेश से पहले जान लें पूरी डिटेल

    साल 2025 का आखिरी धमाका: मॉडर्न डायग्नोस्टिक का IPO 31 दिसंबर से खुलेगा, निवेश से पहले जान लें पूरी डिटेल


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2025 आईपीओ के लिहाज से बेहद शानदार रहा है। अब इस साल के आखिरी पड़ाव पर निवेश का एक और मौका सामने आया है। हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनी मॉडर्न डायग्नोस्टिक एंड रिसर्च सेंटर Modern Diagnostic and Research Centre अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम IPO लेकर आ रही है। यह इस साल का आखिरी और नए साल की शुरुआत करने वाला आईपीओ होगा।

    IPO का शेड्यूल और साइज

    मॉडर्न डायग्नोस्टिक का आईपीओ निवेश के लिए 31 दिसंबर 2025 को खुलेगा और निवेशक 2 जनवरी 2026 तक इसमें बोली लगा सकेंगे। कंपनी इस इश्यू के जरिए बाजार से 36.89 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। खास बात यह है कि यह आईपीओ पूरी तरह से ‘फ्रेश इश्यू’ Fresh Issue पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि आईपीओ से मिलने वाली पूरी राशि सीधे कंपनी के पास जाएगी और इसका इस्तेमाल कंपनी के विस्तार और कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत कंपनी कुल 41 लाख नए शेयर जारी करेगी।

    प्राइस बैंड और निवेश की सीमा

    कंपनी ने अपने शेयरों के लिए 85 रुपये से 90 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। चूंकि यह SME सेगमेंट का आईपीओ है, इसलिए इसमें लॉट साइज सामान्य आईपीओ की तुलना में काफी बड़ा रखा गया है।मॉडर्न डायग्नोस्टिक आईपीओ का एक लॉट 1600 शेयरों का है।कंपनी के निर्देशों के अनुसार, निवेशकों को कम से कम 2 लॉट के लिए आवेदन करना होगा।इस लिहाज से, एक रिटेल निवेशक को कम से कम 2,88,000 रुपये का निवेश करना होगा।यह आईपीओ बीएसई एसएमई BSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होगा, जो छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायों के लिए एक विशेष एक्सचेंज सेगमेंट है।

    ग्रे मार्केट प्रीमियम GMP की स्थिति

    निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जीएमपी Grey Market Premium फिलहाल शांत नजर आ रहा है। बाजार विशेषज्ञों और ‘इन्वेस्टर गेन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, Modern Diagnostic IPO का जीएमपी आज जीरो ₹0 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। इसका मतलब है कि फिलहाल ग्रे मार्केट में इस शेयर को लेकर कोई अतिरिक्त हलचल या प्रीमियम नहीं देखा जा रहा है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे सब्सक्रिप्शन की तारीख करीब आएगी, बाजार की धारणा में बदलाव हो सकता है।

    कंपनी का प्रोफाइल और भविष्य

    1985 में स्थापित हुई यह कंपनी पिछले करीब चार दशकों से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाए हुए है। कंपनी मुख्य रूप से पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी सेवाएं प्रदान करती है। इनके पोर्टफोलियो में टेस्ट पैकेज, होम कलेक्शन और ऑनलाइन रिपोर्टिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। वर्तमान में कंपनी का नेटवर्क काफी मजबूत है:कुल 21 सेंटर का संचालन। इनमें 18 लैब और 3 डायग्नोस्टिक सेंटर शामिल हैं।कंपनी के पास एक बड़ा ‘इंस्टीट्यूशनल कस्टमर’ बेस है, जो इसकी आय का एक मुख्य स्रोत है।

    प्रबंधन और रजिस्ट्रार
    इस पब्लिक इश्यू के प्रबंधन की जिम्मेदारी बीलाइन कैपिटल एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी गई है, जो बुक रनिंग लीड मैनेजर की भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, आईपीओ के लिए MUFG Intime India को आधिकारिक रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है, जो अलॉटमेंट और रिफंड की प्रक्रिया को संभालेंगे।हेल्थकेयर सेक्टर में लगातार बढ़ती मांग और कंपनी के पुराने अनुभव को देखते हुए, लंबी अवधि के निवेशक इसे अपनी वॉचलिस्ट में रख सकते हैं। हालांकि, SME आईपीओ में जोखिम और लिक्विडिटी की स्थिति को ध्यान में रखना अनिवार्य है।
  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर ईशनिंदा के आरोपों से बढ़ी हिंसा, ह्यूमन राइट्स रिपोर्ट में हुई चेतावनी

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर ईशनिंदा के आरोपों से बढ़ी हिंसा, ह्यूमन राइट्स रिपोर्ट में हुई चेतावनी


    नई दिल्ली:बांग्लादेश में ईशनिंदा के आरोपों के तहत हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाओं में तेजी देखी जा रही है। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज HRCBM की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जून से दिसंबर 2025 के बीच कम से कम 71 हमले दर्ज किए गए। यह रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती है कि ये घटनाएं अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि एक लगातार चल रहे पैटर्न का हिस्सा हैं।

    रिपोर्ट में बताया गया कि हिंसा बांग्लादेश के 30 से अधिक जिलों में हुई। इनमें रंगपुर, चांदपुर, चटगांव, दिनाजपुर, लालमोनिरहाट, सुनामगंज, खुलना, कुमिल्ला, गाजीपुर, टांगाइल और सिलहट जैसे जिले शामिल हैं। मानवाधिकार संगठन का कहना है कि इतने व्यापक इलाके में बार-बार इस तरह की घटनाओं का होना अल्पसंख्यक समुदाय की प्रणालीगत असुरक्षा को दर्शाता है।रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अक्सर सोशल मीडिया या निजी बातचीत में किसी व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप लगाया जाता है। इसके बाद पुलिस कार्रवाई होती है, भीड़ इकट्ठा हो जाती है और हिंसा फैलती है। अक्सर हिंसा सिर्फ आरोपी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हिंदू मोहल्लों के घर, मंदिर और दुकानों को भी निशाना बनाया जाता है।

    विशेष चिंता की बात यह है कि हिंसा में नाबालिग भी शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 90 फीसदी से ज्यादा आरोपी हिंदू थे, जिनमें 15 से 17 साल के नाबालिग भी शामिल थे। उदाहरण के लिए, 27 जुलाई 2025 को रंगपुर के बेटगारी यूनियन में एक 17 वर्षीय लड़के की गिरफ्तारी के बाद भीड़ ने कम से कम 22 हिंदू घरों में तोड़फोड़ की।एचआरसीबीएम के मुताबिक, कई मामलों में सोशल मीडिया खासतौर से फेसबुक का इस्तेमाल आरोपों के लिए हुआ। कई बार अकाउंट हैक पाए गए और पोस्ट की सच्चाई साबित नहीं हो सकी। इसके बावजूद पुलिस ने भीड़ के दबाव में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच पूरी होने से पहले ही FIR दर्ज कर दी जाती थी।

    शिक्षण संस्थानों में भी इसका असर पड़ा। कई कॉलेज और यूनिवर्सिटी छात्रों को निलंबित किया गया, उन्हें कॉलेज से निकाल दिया गया और कुछ को पुलिस रिमांड में भेजा गया। रिपोर्ट में साइबर सिक्योरिटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों की संख्या भी उल्लेखनीय बताई गई है।रिपोर्ट में कई मौतों का भी जिक्र है। 18 दिसंबर 2025 को मयमनसिंह में 30 वर्षीय हिंदू युवक को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और शव को जला दिया। खुलना में एक नाबालिग पर कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में हमला किया गया। इन घटनाओं ने कानून व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    भारत ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय MEA ने हालात को लगातार जारी दुश्मनी करार दिया और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग की।एचआरसीबीएम की रिपोर्ट साफ करती है कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यक विशेषकर हिंदू समुदाय लगातार असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और बांग्लादेश सरकार दोनों से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

  • बिहार में भीषण ट्रेन हादसा मालगाड़ी के पटरी से उतरने से 34 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन प्रभावित

    बिहार में भीषण ट्रेन हादसा मालगाड़ी के पटरी से उतरने से 34 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन प्रभावित


    बिहार । शनिवार रात बिहार के झाझा–जसीडीह रेलखंड पर एक भीषण ट्रेन हादसा हुआ जिससे रेलवे परिचालन पूरी तरह से बाधित हो गया। टेलवा बाजार हाल्ट के पास पुल संख्या 676 पर एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई जिससे न केवल मालगाड़ियों बल्कि एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों के मार्ग पर भी असर पड़ा। इस हादसे ने रेलवे सिस्टम को हिलाकर रख दिया और करीब 34 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ।

    हादसे का विवरण

    रात के वक्त हुआ यह हादसा तब हुआ जब मालगाड़ी पुल से गुजर रही थी और अचानक उसके डिब्बे पटरी से उतर गए। घटना के बाद रेलवे विभाग ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया लेकिन इस दुर्घटना के कारण ट्रैक पूरी तरह से जाम हो गया और यातायात बाधित हो गया। हादसे के कारण अप लाइन की 22214 पटना–शालीमार दुरंतो एक्सप्रेस को घंटों झाझा स्टेशन पर रोक दिया गया। ट्रेन को लंबी देरी के बाद गया–किऊल रेलखंड के रास्ते वापस भेजा गया। इस घटना के कारण कई एक्सप्रेस ट्रेनें भी विभिन्न स्टेशनों पर खड़ी रहीं जिनमें जमुई और मननपुर स्टेशनों पर खड़ी ट्रेनें शामिल थीं।रेलवे विभाग ने इन ट्रेनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजने का निर्णय लिया लेकिन यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रेनें कई घंटों तक खड़ी रही और इस दौरान यात्री अपनी यात्रा में भारी विलंब का सामना करते रहे।

    कई जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों का प्रभावित होना

    इस हादसे के कारण लगभग 34 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ा जो इस रूट से गुजरने वाली थीं। इनमें से कई ट्रेनों के मार्ग को बदला गया और यात्रियों को भारी असुविधा हुई। खासकर उन यात्रियों के लिए यह बहुत कठिन था जिनकी ट्रेनें स्थगित या मार्ग बदलने के बाद भी घंटों तक नहीं चल पाईं।रेलवे अधिकारियों ने कहा कि जैसे ही ट्रैक पर काम पूरा होगा ट्रेनें फिर से सामान्य रूप से चलने लगेंगी। हालांकि घटना के कारण ट्रेन परिचालन में देरी होने से रेलवे विभाग को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है।

    रेलवे द्वारा राहत कार्य की शुरुआत

    हादसे के बाद रेलवे अधिकारियों ने तत्परता से राहत कार्य शुरू कर दिया। रेलवे कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचे और प्रभावित ट्रैक को सुधारने के लिए काम शुरू किया। वहीं ट्रेनों के मार्ग को बदलने और यात्रियों की सहायता के लिए रेलवे के कंट्रोल रूम द्वारा त्वरित निर्णय लिए गए।
    रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना स्थल पर राहत कार्य तेज़ी से चल रहा है और जल्द ही ट्रैक को बहाल किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यात्रीगणों को वैकल्पिक मार्गों से भेजने के लिए रेलवे द्वारा विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि लोगों को अधिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    यात्री परेशान

    इस हादसे ने यात्रियों को भारी परेशानी में डाल दिया। कई यात्री ट्रेन के रुकने और मार्ग बदलने के कारण घंटों तक अपनी यात्रा में देरी का सामना कर रहे थे। सोशल मीडिया पर भी यात्रियों ने अपनी परेशानियों का उल्लेख किया जिसमें देर से ट्रेन चलने जानकारी के अभाव और अधिक समय तक खड़े रहने का जिक्र किया गया।कई यात्रियों ने रेलवे की सेवाओं में सुधार की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके और यात्रियों को सुरक्षित और समय पर अपनी यात्रा पूरी करने का मौका मिले। बिहार के झाझा–जसीडीह रेलखंड पर हुए इस भीषण ट्रेन हादसे ने न केवल ट्रेन यातायात को प्रभावित किया बल्कि यात्रियों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। रेलवे ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया लेकिन इस घटना के बाद यह भी स्पष्ट है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए रेलवे को और अधिक सुरक्षा उपायों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

  • टीम इंडिया में बड़े बदलाव की आहट: न्यूजीलैंड वनडे सीरीज से ऋषभ पंत की छुट्टी तय, ईशान किशन की होगी 'तूफानी' वापसी!

    टीम इंडिया में बड़े बदलाव की आहट: न्यूजीलैंड वनडे सीरीज से ऋषभ पंत की छुट्टी तय, ईशान किशन की होगी 'तूफानी' वापसी!


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के घरेलू सत्र 2025-26 का समापन करीब है और इसी बीच टीम इंडिया के सामने न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीम की चुनौती है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आगाज 13 जनवरी से होने जा रहा है। हालांकिभारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI ने अभी तक आधिकारिक तौर पर स्क्वॉड का ऐलान नहीं किया हैलेकिन क्रिकेट गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को वनडे टीम से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। उनकी जगह घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगाने वाले विस्फोटक बल्लेबाज ईशान किशन की वापसी लगभग तय मानी जा रही है।

    ऋषभ पंत: मौके मिलेपर भुना नहीं पाए


    ऋषभ पंत के लिए पिछला कुछ समय वनडे क्रिकेट में संघर्षपूर्ण रहा है। पंत को हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए स्क्वॉड में शामिल किया गया थालेकिन विडंबना यह रही कि उन्हें पूरी सीरीज के दौरान एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। पंत ने अपना आखिरी वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच 7 अगस्त 2024 को श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में खेला था। तब से वह छोटे फॉर्मेट में अपनी उस लय को नहीं पा सके हैं जिसके लिए वे जाने जाते हैं। चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट के लिए अब पंत का ‘फॉर्म और बैलेंस’ चिंता का विषय बना हुआ हैजिसके चलते उन्हें इस सीरीज से ड्रॉप करने की तैयारी की जा रही है।

    ईशान किशन: घरेलू क्रिकेट में मचाया कोहराम


    दूसरी ओरईशान किशन ने अपने हालिया प्रदर्शन से चयनकर्ताओं के दरवाजे पर जोर-शोर से दस्तक दी है। ईशान किशन ने लगभग दो साल से भारत के लिए कोई वनडे मैच नहीं खेला है (आखिरी बार 11 अक्टूबर 2023बनाम अफगानिस्तान)। लेकिन पिछले कुछ महीनों में उनके बल्ले से निकले रनों ने सबको चौंका दिया है।ईशान ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बनकर अपनी टीम झारखंड को पहला खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी आक्रामकता यहीं नहीं रुकी; विजय हजारे ट्रॉफी में 24 दिसंबर को कर्नाटक के खिलाफ उन्होंने महज 33 गेंदों में शतक जड़कर इतिहास रच दिया। यह किसी भी भारतीय द्वारा लिस्ट ए क्रिकेट में दूसरा सबसे तेज शतक है। उनके इसी प्रचंड फॉर्म के कारण उन्हें पहले ही न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली 5 मैचों की टी20 सीरीज के लिए चुना जा चुका है।

    रणनीतिक बदलाव और किशन की उपयोगिता


    ईशान किशन के आने से टीम इंडिया को थ्री-इन-वन विकल्प मिलता है। किशन न केवल केएल राहुल के लिए एक मजबूत बैकअप विकेटकीपर साबित होंगेबल्कि वह एक बेहतरीन बैकअप ओपनर की भूमिका भी निभा सकते हैं। साथ हीमिडिल ऑर्डर में तेजी से रन बनाने की उनकी काबिलियत टीम को मध्यक्रम में वह लचीलापन Flexibility प्रदान करती हैजिसकी तलाश कप्तान और कोच को काफी समय से है।बीसीसीआई से जुड़े सूत्रों का कहना है कि टीम मैनेजमेंट अब 2025-26 के आगामी घरेलू असाइनमेंट को ध्यान में रखते हुए टीम में संतुलन बनाना चाहता है। ईशान किशन का बाएं हाथ का बल्लेबाज होना और टॉप से लेकर मिडिल ऑर्डर तक कहीं भी फिट हो जानाउनके पक्ष में सबसे बड़ा तर्क है।

    कब होगा टीम का ऐलान?


    इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसारचयन समिति इस हफ्ते के अंत तक न्यूजीलैंड सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान कर सकती है। इस सीरीज को चैंपियंस ट्रॉफी और आगामी महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है। यदि ईशान किशन को मौका मिलता हैतो यह उनके वनडे करियर को दोबारा पटरी पर लाने का सुनहरा अवसर होगा। वहींऋषभ पंत के लिए यह एक संकेत होगा कि उन्हें अपनी फॉर्म और फिटनेस पर दोबारा काम करने की जरूरत है।क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें अब बीसीसीआई के आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैंजो यह तय करेगा कि क्या युवा जोश ईशान अनुभवी फिनिशर पंत पर भारी पड़ेगा।
  • विराट कोहली की टेस्ट रिटायरमेंट पर नवजोत सिंह सिद्धू का इमोशनल पोस्ट सोशल मीडिया पर छाया, बोले-भगवान से सिर्फ एक विश मांगूंगा।

    विराट कोहली की टेस्ट रिटायरमेंट पर नवजोत सिंह सिद्धू का इमोशनल पोस्ट सोशल मीडिया पर छाया, बोले-भगवान से सिर्फ एक विश मांगूंगा।


    नई दिल्ली:भारतीय क्रिकेट में अगर किसी खिलाड़ी ने पिछले डेढ़ दशक में सबसे ज्यादा जुनून, जुनूनी फैंस और जज्बे की पहचान बनाई है, तो वह नाम विराट कोहली का है। मैदान पर उतरते ही कोहली सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं रहते, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं की धड़कन बन जाते हैं। उनके हर शॉट, हर रिएक्शन और हर जश्न में फैंस खुद को देख लेते हैं।

    हालांकि अब विराट कोहली अपने करियर के अंतिम दौर की ओर बढ़ रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर उन्होंने धीरे-धीरे क्रिकेट के कुछ फॉर्मेट्स को अलविदा कह दिया है। टी20 क्रिकेट से पहले ही दूरी बना चुके कोहली ने इसी साल टेस्ट क्रिकेट से भी संन्यास लेकर फैंस को भावुक कर दिया। फिलहाल 37 वर्षीय कोहली केवल वनडे क्रिकेट में ही भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।फैंस भले ही विराट को टी20 में पसंद करते रहे हों, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनकी मौजूदगी कुछ अलग ही रोमांच पैदा करती थी। उनकी आक्रामक कप्तानी, तेज गेंदबाजों को उकसाने वाला अंदाज और कठिन परिस्थितियों में टीम को संभालने की क्षमता टेस्ट क्रिकेट को खास बना देती थी। यही वजह है कि आज भी फैंस को टेस्ट क्रिकेट में विराट कोहली की सबसे ज्यादा कमी खलती है।

    इसी भावनात्मक जुड़ाव को शब्दों में पिरोया है भारत के पूर्व क्रिकेटर और मशहूर कमेंटेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने। हाल ही में सिद्धू ने सोशल मीडिया पर विराट कोहली को लेकर एक पोस्ट साझा की जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इस पोस्ट को फैंस कोहली पगलूपोस्ट कहकर शेयर कर रहे हैं और जमकर भावनाएं जता रहे हैं।नवजोत सिंह सिद्धू ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि अगर भगवान उन्हें सिर्फ एक इच्छा मांगने का मौका दें, तो वह विराट कोहली की टेस्ट रिटायरमेंट वापस लेने की मांग करेंगे। सिद्धू के इस बयान ने करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की भावनाओं को जैसे आवाज दे दी हो।

    अपनी पोस्ट में सिद्धू ने लिखा,

    अगर भगवान मुझे एक विश देते तो मैं उनसे कहता कि विराट कोहली को टेस्ट क्रिकेट की रिटायरमेंट से वापस लाओ। 1.5 अरब लोगों के देश को इससे बड़ी खुशी और आनंद किसी और चीज से नहीं मिल सकता। उनकी फिटनेस आज भी 20 साल के लड़के जैसी है। विराट खुद 24 कैरेट सोने जैसे खरे इंसान हैं।सिद्धू का यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि विराट कोहली ने इसी साल इंग्लैंड दौरे से ठीक पहले टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था। यह फैसला कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था, क्योंकि कोहली की फिटनेस और फॉर्म अभी भी बेहतरीन मानी जा रही थी।

    विराट कोहली ने 12 मई 2025 को आधिकारिक रूप से टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा। उन्होंने भारत के लिए 123 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 46.85 की शानदार औसत से 9,230 रन बनाए। उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में 30 शतक और 31 अर्धशतक दर्ज हैं। आंकड़ों से कहीं ज्यादा, कोहली का योगदान भारतीय टेस्ट टीम की मानसिकता बदलने में रहा।आज भले ही विराट टेस्ट क्रिकेट से दूर हों, लेकिन उनकी मौजूदगी और विरासत हर टेस्ट मैच में महसूस की जाती है। नवजोत सिंह सिद्धू का यह पोस्ट इस बात का सबूत है कि विराट कोहली सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि एक युग हैं जिसकी कमी आने वाले सालों तक महसूस की जाती रहेगी।

  • भा.ज.पा. पार्षद अशोक सिंह का वायरल वीडियो: महिला को धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार

    भा.ज.पा. पार्षद अशोक सिंह का वायरल वीडियो: महिला को धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार


    सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले के रामपुर बघेलान में भाजपा के एक पार्षद अशोक सिंह का एक विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पार्षद महिला से धमकी देते हुए दिखाई दे रहे हैं और वह थाना प्रभारी रामपुर बघेलान के लिए अभद्र भाषा का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। वीडियो में भाजपा पार्षद अशोक सिंह महिला से यह कहते हुए नजर आ रहे हैं मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा और वह महिला को जान से मारने की धमकी भी देते हैं। महिला ने पार्षद के खिलाफ पहले ही पुलिस अधीक्षक एसपी मने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।

    महिला का कहना है कि भाजपा पार्षद अशोक सिंह लंबे समय से उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। महिला ने बताया कि वह कई बार थाने में शिकायत करने गई लेकिन अशोक सिंह के राजनीतिक प्रभाव के कारण पुलिस कार्रवाई में कोई भी ठोस कदम नहीं उठा रही थी।वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भाजपा नेता अशोक सिंह के खिलाफ छेड़छाड़ जान से मारने की धमकी और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पार्षद को गिरफ्तार भी कर लिया है।

    राजनीतिक हलचल

    इस घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल मच गई है। भाजपा पार्षद का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दलों ने इस मामले में भाजपा नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है वहीं कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने पार्षद अशोक सिंह का समर्थन भी किया है।स्थानीय सूत्रों के मुताबिक अशोक सिंह पहले भी कई विवादों में घिरे रहे हैं लेकिन उनका राजनीतिक प्रभाव होने के कारण मामले हल होते रहे हैं। इस बार महिला के साहस और वीडियो के वायरल होने के कारण पुलिस ने मामले में सख्त कदम उठाया है।

    पुलिस का बयान

    सतना जिले के पुलिस अधीक्षक एसपी ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा हमने पार्षद अशोक सिंह के खिलाफ सभी आवश्यक धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। किसी भी दबाव या राजनीतिक प्रभाव से ऊपर उठकर हम निष्पक्ष जांच करेंगे। पुलिस ने यह भी कहा कि वीडियो को तकनीकी रूप से विश्लेषण किया जा रहा है ताकि मामले में सभी तथ्यों का सही तरीके से आकलन किया जा सके। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास इस मामले से संबंधित कोई और जानकारी हो तो वे उसे पुलिस के साथ साझा करें।

    महिला के समर्थन में लोग

    महिला के समर्थन में कई सामाजिक संगठनों ने आवाज उठाई है। इन संगठनों ने महिला के खिलाफ पार्षद द्वारा किए गए उत्पीड़न की कड़ी निंदा की और प्रशासन से यह मांग की कि मामले में त्वरित कार्रवाई की जाए। साथ ही महिला को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाने का संकल्प लिया है। यह घटना महिला के खिलाफ हो रहे उत्पीड़न और राजनीतिक दबाव के खिलाफ लड़ाई को और भी मजबूती देती है। यह भी दिखाता है कि अगर समाज में हर व्यक्ति अपनी आवाज उठाए तो ताकतवर लोग भी जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं।

    भा.ज.पा. पार्षद अशोक सिंह का वायरल वीडियो और उस पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है। इस मामले में महिला के साहस और पुलिस की तत्परता से यह संदेश भी गया है कि कानून से कोई भी ऊपर नहीं है चाहे वह कितनी भी राजनीतिक ताकत रखता हो। अब यह देखना होगा कि इस मामले में न्याय जल्दी मिलता है या नहीं और क्या अन्य पीड़ित महिलाएं भी इस तरह की घटनाओं के खिलाफ आवाज उठा पाती हैं।

  • यशस्वी जायसवाल फॉर्म और किस्मत का सही संयोजन जरूरी

    यशस्वी जायसवाल फॉर्म और किस्मत का सही संयोजन जरूरी

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के युवा सितारे यशस्वी जायसवाल ने खुद को एक शानदार बल्लेबाज के रूप में साबित किया है जो तीनों फॉर्मेट में शतक लगा चुका है। उनकी क्षमता किसी भी क्रिकेट फॉर्मेट में खेलने और प्रदर्शन करने की है लेकिन फिर भी उन्हें अपनी जगह पक्की करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। 24 साल के यशस्वी जायसवाल का जन्म 28 दिसंबर 2001 को उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में हुआ था। मुंबई में अपने परिवार के साथ बसीं जायसवाल ने यहां क्रिकेट में अपना करियर बनाने का सपना देखा और बेहद कठिन आर्थिक हालातों के बावजूद उन्होंने संघर्ष करके खुद को एक अच्छे बल्लेबाज के रूप में स्थापित किया।
    घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें 14 जुलाई 2023 को वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू का मौका मिला। इसके बाद उन्होंने उसी साल टी20 डेब्यू किया और 2025 में वनडे डेब्यू किया। जायसवाल ने अब तक तीनों फॉर्मेट में खुद को एक विस्फोटक और भरोसेमंद सलामी बल्लेबाज के रूप में साबित किया है। वह उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से हैं जिन्होंने तीनों फॉर्मेट में शतक लगाया है। हालांकि इसके बावजूद वनडे और टी20 में उनकी जगह अभी तक स्थिर नहीं हो पाई है।

    किस्मत का साथ जरूरी है

    क्रिकेट में फॉर्म के साथ-साथ किस्मत का भी बहुत बड़ा योगदान होता है। यशस्वी जायसवाल के पास फॉर्म तो है लेकिन उनकी किस्मत उनके साथ उतनी मेहरबान नहीं है जितनी होनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर 2024 में होने वाले टी20 विश्व कप के लिए उनका चयन तो किया गया था लेकिन उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। वहीं 2026 के टी20 विश्व कप के लिए उन्हें टीम में जगह नहीं मिली जो उनके लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।वनडे में भी जायसवाल को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गिल की चोट के कारण मौका मिला था और उन्होंने आखिरी वनडे मैच में शतक भी लगाया। हालांकि गिल की वापसी के बाद यह देखना होगा कि उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी वनडे सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं।

    टेस्ट क्रिकेट में सफलता

    टेस्ट क्रिकेट में जायसवाल का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। डेब्यू के बाद से ही उन्हें लगातार मौके मिलते रहे हैं और उन्होंने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी चुनौतीपूर्ण पिचों पर भी रन बनाए हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनकी सफलता ने उन्हें भारतीय टीम में एक महत्वपूर्ण सदस्य बना दिया है।आईपीएल में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। वह राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हैं और वहां भी उन्होंने अपने आक्रामक खेल से अपनी पहचान बनाई है। आईपीएल में उनका रन-स्कोरिंग फॉर्म जबरदस्त रहा है जिससे उन्होंने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीता है।

    जायसवाल के आंकड़े

    यशस्वी जायसवाल ने अब तक 28 टेस्ट मैचों में 7 शतकों के साथ 2511 रन बनाए हैं। वहीं 4 वनडे मैचों में 1 शतक के साथ 171 रन और 23 टी20 मैचों में 1 शतक और 5 अर्धशतकों के साथ 723 रन उनके नाम पर दर्ज हैं। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि वह किसी भी फॉर्मेट में लगातार प्रदर्शन कर सकते हैं और भविष्य में भारतीय टीम के लिए एक अहम खिलाड़ी साबित हो सकते हैं।

    भविष्य की उम्मीदें

    यद्यपि यशस्वी जायसवाल को फिलहाल लगातार खेलने का मौका नहीं मिल रहा है लेकिन उनका भविष्य बेहद उज्जवल दिखता है। क्रिकेट में फॉर्म और किस्मत दोनों का साथ होना जरूरी होता है और जायसवाल के मामले में यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे आने वाले समय में उन्हें और अधिक मौके मिलते हैं या नहीं। यशस्वी जायसवाल का क्रिकेट करियर अब तक शानदार रहा है और उनकी मेहनत और प्रतिबद्धता को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि वह भविष्य में तीनों फॉर्मेट में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर मैदान में अपना जलवा दिखाते रहेंगे।
  • सलमान खान के लिए आदित्य चोपड़ा ने छोड़ी रिलीज डेट, ‘बैटल ऑफ गलवान’ के सामने नहीं लाई आलिया भट्ट की फिल्म

    सलमान खान के लिए आदित्य चोपड़ा ने छोड़ी रिलीज डेट, ‘बैटल ऑफ गलवान’ के सामने नहीं लाई आलिया भट्ट की फिल्म


    नई दिल्ली:बॉलीवुड में जब भी दो बड़ी फिल्मों की रिलीज एक ही तारीख पर तय होती हैतो बॉक्स ऑफिस पर टकराव तय माना जाता है। साल 2026 में भी ऐसा ही एक बड़ा क्लैश देखने को मिल सकता थालेकिन अब यह टल गया है। वजह हैं सलमान खान और उनके लिए दिखाई गई आदित्य चोपड़ा की दोस्ती और सम्मान।

    सलमान खान के 60वें जन्मदिन के खास मौके पर उनकी आने वाली फिल्मबैटल ऑफ गलवान का टीजर रिलीज कर दिया गया है। इस टीजर के साथ ही मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट का भी ऐलान कर दिया है। यह फिल्म 17 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। पहले इसी तारीख पर आलिया भट्ट और शरवरी स्टारर स्पाई यूनिवर्स फिल्मअल्फा रिलीज होने वाली थी।अगर दोनों फिल्में एक ही दिन रिलीज होतींतो यह साल 2026 का सबसे बड़ा बॉक्स ऑफिस क्लैश बन सकता था। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक,अल्फा के निर्माता आदित्य चोपड़ा ने सलमान खान के साथ अपने पुराने रिश्ते और आपसी सम्मान के चलते यह तारीख छोड़ने का फैसला किया।

    सूत्रों के अनुसारआदित्य चोपड़ा पहले पूरी प्लानिंग के साथअल्फा को 17 अप्रैल 2026 को रिलीज करने वाले थे। लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि सलमान खान अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्मबैटल ऑफ गलवान इसी दिन लाने वाले हैंउन्होंने अपनी फिल्म की रिलीज डेट बदल दी। इंडस्ट्री में इसे एक बड़ा और सम्मानजनक कदम माना जा रहा है।अब सलमान खान 17 अप्रैल 2026 को पूरी तरह से सोलो रिलीज के साथ सिनेमाघरों में नजर आएंगे। उनके 60वें जन्मदिन पर रिलीज हुआबैटल ऑफ गलवान का टीजर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। टीजर में सलमान एक आर्मी ऑफिसर के रूप में नजर आते हैंजिनके चेहरे पर देशभक्ति का जोश और आंखों में गुस्सा साफ झलकता है।

    टीजर में दमदार डायलॉग्सऊंचे लेवल का बैकग्राउंड म्यूजिक और युद्ध जैसे माहौल की झलक दिखाई गई है। सलमान की भारी आवाज और गंभीर अंदाज दर्शकों को पहली ही झलक में बांध लेता है। यह फिल्म साल 2020 में भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हुए संघर्ष से प्रेरित बताई जा रही है।‘बैटल ऑफ गलवान में उस ऐतिहासिक टकराव को पर्दे पर दिखाया जाएगाजिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। सलमान खान इस फिल्म में एक भारतीय सेना अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। उनके लिए यह फिल्म बेहद खास मानी जा रही हैक्योंकि हाल के वर्षों में उनकी कुछ फिल्में दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई थीं।

    ऐसे मेंबैटल ऑफ गलवान को सलमान खान के करियर का अहम मोड़ माना जा रहा है। फिल्म से दर्शकों और ट्रेड दोनों को काफी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि यह फिल्म न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करेगीबल्कि सलमान की इमेज को भी मजबूती देगी।इसके अलावा खबरें यह भी हैं किबैटल ऑफ गलवान की शूटिंग पूरी होते ही सलमान खान नए प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करेंगे। फिलहाल वह कई स्क्रिप्ट्स सुन रहे हैं और जल्द ही अपने अगले प्रोजेक्ट्स का ऐलान कर सकते हैं।

  • किरदार को सच्चा दिखाने के लिए शबाना आज़मी ने अपनाया अनोखा तरीका, जुगल हंसराज ने किया खुलासा

    किरदार को सच्चा दिखाने के लिए शबाना आज़मी ने अपनाया अनोखा तरीका, जुगल हंसराज ने किया खुलासा


    नई दिल्ली:बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार रहे हैं जिन्होंने अपने किरदार को पर्दे पर जीवंत दिखाने के लिए खुद को पूरी तरह उसमें ढाल लिया। कई बार तो अभिनेता अपने निजी व्यवहार रिश्तों और भावनाओं तक को नियंत्रित कर लेते हैं ताकि फिल्म में दिखाई जाने वाली सच्चाई जरा भी कमजोर न पड़े। ऐसी ही मिसाल 42 साल पहले दिग्गज अभिनेत्री शबाना आज़मी ने फिल्ममासूम के दौरान पेश की थी जिसका खुलासा अब फिल्म के चाइल्ड आर्टिस्ट रहे जुगल हंसराज ने किया है।

    साल 1983 में रिलीज हुईमासूम आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे संवेदनशील और भावनात्मक फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में शबाना आज़मी और नसीरुद्दीन शाह ने पति-पत्नी की भूमिका निभाई थी जबकि जुगल हंसराज ने उनके पति के नाजायज़ बेटे का किरदार निभाया था। यही रिश्ता कहानी की भावनात्मक धुरी भी था।हाल ही में जुगल हंसराज ने एक इंटरव्यू में बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान शबाना आज़मी उनसे जानबूझकर दूरी बनाकर रखती थीं। उस वक्त जुगल महज 9 साल के थे और उन्हें यह बात समझ में नहीं आती थी कि शबाना जी उनसे बात क्यों नहीं करतीं जबकि सेट पर मौजूद अन्य बच्चों से वह बेहद प्यार और अपनापन दिखाती थीं।

    जुगल ने बताया कि फिल्म में उर्मिला मातोंडकर और आराधना शबाना आज़मी की बेटियों के रोल में थीं। शबाना उनके साथ सेट पर खूब बातें करती थीं हंसती-मुस्कुराती थीं और मां जैसा स्नेह भी देती थीं। लेकिन जुगल के मामले में उनका व्यवहार बिल्कुल अलग था। वह उनसे औपचारिक दूरी बनाए रखती थीं और ज्यादा बातचीत से बचती थीं।जुगल के मुताबिक उस उम्र में उन्हें यह अजीब लगता था लेकिन समय के साथ उन्हें समझ आया कि यह सब शबाना आज़मी के अभिनय के प्रोसेस का हिस्सा था। दरअसल फिल्म में शबाना का किरदार जुगल के किरदार को सहजता से स्वीकार नहीं कर पाता। दोनों के बीच एक अनकहा तनाव अजनबीपन और असहजता होती है जिसे पर्दे पर दिखाना बेहद जरूरी था।

    शबाना आज़मी नहीं चाहती थीं कि असल जिंदगी में जुगल के साथ अपनापन बढ़े क्योंकि ऐसा होने से कैमरे के सामने वह भावनात्मक दूरी और असहजता स्वाभाविक रूप से नहीं आ पाती। यही वजह थी कि उन्होंने जानबूझकर एक बच्चे से भी भावनात्मक फासला बनाए रखा ताकि दर्शकों को कहानी असली लगे।जुगल हंसराज ने यह भी कहा कि आज पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि शबाना आज़मी ने कितनी खूबसूरती और ईमानदारी से अपने किरदार के साथ न्याय किया। उस दौर में इस तरह की तैयारी और किरदार में डूब जाना बहुत कम देखने को मिलता था।गौरतलब है किमासूम का निर्देशन शेखर कपूर ने किया था और फिल्म में सईद जाफरी तनुजा और सुप्रिया पाठक जैसे दमदार कलाकार भी नजर आए थे। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से जबरदस्त सराहना मिली थी और बाद में इसे तेलुगु और तुर्की भाषाओं में भी रीमेक किया गया।आज भीमासूम को भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है और शबाना आज़मी का यह समर्पण नए कलाकारों के लिए एक मिसाल माना जाता है।