Author: bharati

  • हाईकोर्ट में 31 अस्पतालों की सुनवाई ने पकड़ा नया मोड़, गलत जांच रिपोर्ट और अवैध संचालन के आरोपों से बढ़ी मुश्किलें

    हाईकोर्ट में 31 अस्पतालों की सुनवाई ने पकड़ा नया मोड़, गलत जांच रिपोर्ट और अवैध संचालन के आरोपों से बढ़ी मुश्किलें


    इंदौर  इंदौर के 31 अस्पतालों की वैधता और स्वास्थ्य संबंधी नियमों के पालन को लेकर दायर जनहित याचिका में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश के अनुसार याचिकाकर्ता एडवोकेट चर्चित शास्त्री ने अपना रिजाइंडर यानी प्रत्युत्तर अदालत में पेश किया जिसमें सीएमएचओ डॉ माधव हासानी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई जांच रिपोर्ट वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाती और इससे नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों को बचाने का प्रयास किया गया है।

    रिजाइंडर में कहा गया है कि सीएमएचओ की ओर से कोर्ट में दी गई रिपोर्ट भ्रामक है और उसमें वास्तविक स्थिति को पूरी तरह सामने नहीं रखा गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि गलत तथ्यों के आधार पर अदालत को गुमराह करने की कोशिश की गई ताकि बिना नियमों का पालन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई प्रभावित हो सके।

    याचिकाकर्ता ने अपने प्रत्युत्तर के साथ कई ऐसे दस्तावेज भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जिनके बारे में दावा किया गया कि वे कूटरचित हैं। इसके अलावा कुछ अस्पतालों के ऐसे रिकॉर्ड भी पेश किए गए जिनके संबंध में कहा गया कि वे आवश्यक वैधानिक अनुमति और पंजीयन के बिना संचालित हो रहे हैं जबकि आधिकारिक दस्तावेजों में अलग स्थिति दिखाई गई है। याचिका में यह भी कहा गया कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

    इससे पहले हुई सुनवाई में भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए थे। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि जिन 31 अस्पतालों के संबंध में मामला लंबित है उनके स्थान पर 34 संस्थानों की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। साथ ही विनायक पैथोलॉजी लैब और लेडी हलीमा हॉस्पिटल को सील किए जाने से जुड़े कथित फर्जी आदेश भी रिकॉर्ड पर रखने का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा कुछ अस्पतालों की ओर से नगर निगम के कथित फर्जी शपथ पत्रों के आधार पर भवन अनुमति से जुड़े दस्तावेज पेश किए जाने का दावा भी किया गया।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि जनहित याचिका दायर करने के बाद उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और हमले की कोशिशें भी हुई हैं। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है और उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।

    अब ताजा सुनवाई में पेश किए गए रिजाइंडर और उससे जुड़े दस्तावेजों के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई करेगी। कोर्ट यह जांच करेगी कि प्रस्तुत रिपोर्ट और रिकॉर्ड में कितनी सच्चाई है तथा यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या गलत जानकारी दी गई है तो उसके लिए क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मामले का फैसला इंदौर के स्वास्थ्य तंत्र और निजी अस्पतालों की जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे भविष्य में अस्पतालों के संचालन और नियामकीय व्यवस्था पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भोजशाला के समीप तय स्थल पर अदा हुई जुमे की नमाज, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भोजशाला के समीप तय स्थल पर अदा हुई जुमे की नमाज, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम


    धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर के पीछे बाउंड्रीवॉल से सटी खसरा नंबर 612 की भूमि पर शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोगों ने जुमे की नमाज अदा की। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और जिला प्रशासन व मुस्लिम पक्ष के बीच बनी सहमति के बाद की गई।

    नमाज से पहले प्रशासन ने बारिश के कारण गीली जमीन पर तिरपाल बिछवाए और पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौजूद रहे।

    निजी जमीन बताकर हिंदू पक्ष ने जताई आपत्ति
    नमाज शुरू होने से पहले स्थानीय हिंदू समाज के कुछ लोगों ने संबंधित भूमि को निजी बताते हुए वहां नमाज की अनुमति का विरोध किया। उनका कहना था कि वे लंबे समय से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं और यदि आवश्यकता पड़ी तो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय का रुख करेंगे।

    सूचना मिलने पर एसडीएम राजकुमार हलदर मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे लोगों से चर्चा कर आश्वासन दिया कि उनकी आपत्तियों पर नियमानुसार सुनवाई की जाएगी। इसके बाद स्थिति सामान्य हो गई।

    मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट के आदेश का पालन करने की बात कही
    कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने बताया कि खसरा नंबर 611 और 612 से कमाल मौला मस्जिद सीधे दिखाई देती है, इसलिए इस स्थान पर नमाज पढ़ने पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि यदि अगले शुक्रवार तक अदालत का कोई नया अंतरिम या अंतिम आदेश आता है, तो उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनी व्यवस्था
    गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद से जुड़े अपने अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए मुस्लिम समाज के लिए भोजशाला के समीप दरगाह परिसर की निर्धारित भूमि पर प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए थे।

    आदेश के बाद धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया। देर शाम मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के बीच हुई बैठक में खसरा नंबर 611 और 612 की भूमि पर नमाज अदा कराने को लेकर सहमति बनी।
    आदेश के बाद धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया। देर शाम मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के बीच हुई बैठक में खसरा नंबर 611 और 612 की भूमि पर नमाज अदा कराने को लेकर सहमति बनी।

    100 से अधिक नमाजी पहुंचे
    शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे से निर्धारित स्थल पर नमाजी पहुंचने लगे। शुरुआत में 10 से 15 लोग मौजूद थे, लेकिन धीरे-धीरे संख्या बढ़कर 100 से अधिक हो गई। इस दौरान कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारी और याचिकाकर्ता भी उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा।

  • फ्रूट जूस भी बन सकता है सेहत का दुश्मन नई स्टडी में बचपन की आदत और हाई बीपी के बीच मिला बड़ा संबंध

    फ्रूट जूस भी बन सकता है सेहत का दुश्मन नई स्टडी में बचपन की आदत और हाई बीपी के बीच मिला बड़ा संबंध


    नई दिल्ली। बच्चों को स्वस्थ रखने की चाह में माता पिता अक्सर उन्हें फ्रूट जूस और मीठे पेय पदार्थ पिलाना बेहतर विकल्प मानते हैं। कई परिवारों में यह धारणा बनी हुई है कि बाजार में मिलने वाले पैक्ड फ्रूट जूस या मीठे ड्रिंक्स सॉफ्ट ड्रिंक से अधिक फायदेमंद होते हैं। लेकिन हाल ही में सामने आई एक बड़ी रिसर्च ने इस सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अध्ययन के अनुसार बचपन में नियमित रूप से अधिक मात्रा में फ्रूट जूस और चीनी वाले पेय पदार्थों का सेवन आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ा सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ बच्चों के खानपान में संतुलन और प्राकृतिक आहार को प्राथमिकता देने की सलाह दे रहे हैं।

    यह अध्ययन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Circulation में प्रकाशित हुआ है। इसमें अमेरिका के 25 हजार से अधिक लोगों के स्वास्थ्य पर लगभग 25 वर्षों तक नजर रखी गई। इसे इस विषय पर अब तक की सबसे लंबी और व्यापक रिसर्च में से एक माना जा रहा है। शोधकर्ताओं ने बचपन और किशोरावस्था में खानपान की आदतों का विश्लेषण किया और फिर वयस्क होने पर उनके स्वास्थ्य परिणामों का मूल्यांकन किया।

    रिसर्च में सामने आया कि जो बच्चे और किशोर प्रतिदिन दो या उससे अधिक बार चीनी वाले ड्रिंक्स पीते थे उनमें बड़े होने पर हाई ब्लड प्रेशर का खतरा उन लोगों की तुलना में लगभग 52 प्रतिशत अधिक पाया गया जो ऐसे पेय सप्ताह में तीन बार से भी कम पीते थे। इसी तरह जो बच्चे प्रतिदिन डेढ़ या उससे अधिक सर्विंग फ्रूट जूस का सेवन करते थे उनमें भी हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम लगभग 35 प्रतिशत अधिक देखा गया। यह निष्कर्ष बताता है कि केवल सॉफ्ट ड्रिंक ही नहीं बल्कि अधिक मात्रा में फ्रूट जूस भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि पैक्ड फ्रूट जूस में अक्सर अतिरिक्त चीनी मिलाई जाती है और इनमें प्राकृतिक फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है। जब बच्चे पूरा फल खाते हैं तो उन्हें विटामिन खनिज और फाइबर एक साथ मिलते हैं जिससे शरीर में शुगर धीरे धीरे अवशोषित होती है। इसके विपरीत जूस में फाइबर की कमी होने से शरीर में शुगर तेजी से पहुंचती है और लंबे समय तक इसका असर ब्लड प्रेशर मेटाबॉलिज्म और हृदय स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

    बच्चों में मीठे पेय पदार्थों की अधिक आदत मोटापा इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप टू डायबिटीज जैसी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ा सकती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ बच्चों को पैक्ड जूस और शुगर युक्त पेय पदार्थों के बजाय ताजे फल सादा पानी नारियल पानी और बिना चीनी वाले प्राकृतिक पेय देने की सलाह देते हैं। यदि जूस देना भी हो तो उसकी मात्रा सीमित रखनी चाहिए और जहां तक संभव हो पूरा फल खिलाना अधिक लाभकारी माना जाता है।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली की शुरुआत बचपन से ही होती है। संतुलित आहार नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद और कम चीनी वाला भोजन बच्चों को भविष्य में हृदय रोग हाई ब्लड प्रेशर और अन्य गंभीर बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए माता पिता को बच्चों की खानपान संबंधी आदतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए और केवल स्वाद के आधार पर नहीं बल्कि पोषण को प्राथमिकता देकर भोजन का चयन करना चाहिए।

    हालांकि यह अध्ययन एक महत्वपूर्ण संबंध की ओर संकेत करता है लेकिन किसी भी बच्चे के खानपान में बड़ा बदलाव करने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ या पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा। सही जानकारी और संतुलित भोजन ही बच्चों के स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव बन सकता है।

  • पहाड़ों की रानी मनाली क्यों है हर ट्रैवलर की पहली पसंद जानिए घूमने का सही समय और खास जगहें

    पहाड़ों की रानी मनाली क्यों है हर ट्रैवलर की पहली पसंद जानिए घूमने का सही समय और खास जगहें


    नई दिल्ली। मनाली केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं बल्कि एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए भी खास पहचान रखता है। सोलंग वैली में पैराग्लाइडिंग जिपलाइन रोपवे और सर्दियों में स्कीइंग का रोमांच पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है। रोहतांग दर्रा और अटल टनल के आसपास का नजारा किसी पोस्टकार्ड जैसा दिखाई देता है। बर्फबारी के मौसम में यहां आने वाले पर्यटक स्नो एक्टिविटी का भरपूर आनंद लेते हैं और यादगार तस्वीरें अपने साथ लेकर लौटते हैं।

    मनाली की सांस्कृतिक विरासत भी इसे खास बनाती है। हिडिंबा देवी मंदिर अपनी अनोखी लकड़ी की वास्तुकला और धार्मिक महत्व के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। मनु मंदिर वशिष्ठ मंदिर और गर्म पानी के प्राकृतिक कुंड भी यहां आने वाले लोगों की पसंदीदा जगहों में शामिल हैं। इन स्थलों पर पहुंचकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है।

    अगर आपको स्थानीय संस्कृति और खरीदारी का शौक है तो मनाली का मॉल रोड जरूर घूमना चाहिए। यहां ऊनी कपड़े हस्तशिल्प की वस्तुएं शॉल टोपी और स्थानीय स्मृति चिन्ह आसानी से मिल जाते हैं। इसके अलावा हिमाचली व्यंजनों का स्वाद आपकी यात्रा को और भी खास बना देता है। सिड्डू थुकपा मोमोज और स्थानीय चाय का स्वाद पर्यटकों को लंबे समय तक याद रहता है।

    प्रकृति प्रेमियों के लिए मनाली के आसपास कई खूबसूरत स्थान मौजूद हैं। नग्गर कैसल जोगिनी वाटरफॉल वन विहार और सेब के बगीचे मन को सुकून देने वाले अनुभव प्रदान करते हैं। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यहां हर मोड़ पर शानदार दृश्य देखने को मिलते हैं। सुबह की सुनहरी धूप और शाम के समय पहाड़ों पर बिखरती रोशनी मन मोह लेने वाला दृश्य प्रस्तुत करती है।

    मनाली घूमने का सबसे अच्छा समय आपकी पसंद पर निर्भर करता है। यदि आप बर्फबारी का आनंद लेना चाहते हैं तो दिसंबर से फरवरी का समय उपयुक्त है जबकि हरियाली और सुहावने मौसम का आनंद लेने के लिए मार्च से जून तक की यात्रा शानदार रहती है। मानसून के दौरान भूस्खलन की संभावना को देखते हुए यात्रा से पहले मौसम की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

    यात्रा के दौरान गर्म कपड़े आरामदायक जूते और जरूरी दवाइयां साथ रखें। ऊंचाई वाले इलाकों में जाते समय पर्याप्त पानी पीना और मौसम के अनुसार तैयारी करना जरूरी है। पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्लास्टिक का उपयोग कम करें और प्राकृतिक स्थलों की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।

    मनाली केवल एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि ऐसा अनुभव है जहां प्रकृति रोमांच संस्कृति और सुकून एक साथ मिलते हैं। परिवार दोस्तों या जीवनसाथी के साथ बिताया गया यहां का हर पल जिंदगी भर की याद बन जाता है। अगर आप अगली छुट्टियों की योजना बना रहे हैं तो मनाली को अपनी यात्रा सूची में जरूर शामिल करें।

  • रामायणम् ट्रेलर में नहीं दिखे हनुमान, सनी देओल ने खुद बताई वजह, बोले- किरदार निभाने के लिए अभी बाकी है लंबा सफर

    रामायणम् ट्रेलर में नहीं दिखे हनुमान, सनी देओल ने खुद बताई वजह, बोले- किरदार निभाने के लिए अभी बाकी है लंबा सफर

    नई दिल्ली । बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायणम् का ट्रेलर रिलीज होने के बाद दर्शकों के बीच इसे लेकर उत्साह बढ़ गया है। नितेश तिवारी के निर्देशन और नमित मल्होत्रा के निर्माण में बन रही इस फिल्म में भारतीय पौराणिक कथा को बड़े स्तर पर पेश करने की तैयारी की जा रही है। ट्रेलर में भगवान राम, माता सीता और रावण समेत कई प्रमुख किरदारों की झलक दिखाई गई, लेकिन राम भक्त हनुमान के किरदार में नजर आने वाले सनी देओल की अनुपस्थिति ने दर्शकों का ध्यान खींच लिया।

    ट्रेलर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर कई प्रशंसकों ने सवाल उठाया कि आखिर हनुमान के महत्वपूर्ण किरदार को दिखाया क्यों नहीं गया। फिल्म में हनुमान की भूमिका सनी देओल निभा रहे हैं, लेकिन ट्रेलर के चार मिनट से ज्यादा लंबे वीडियो में उनकी कोई झलक नहीं दिखाई गई। हालांकि इसके पीछे की वजह खुद सनी देओल पहले ही बता चुके हैं।

    ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान सनी देओल ने हनुमान के किरदार को लेकर अपनी तैयारी और अनुभव के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने अभी तक फिल्म के लिए बहुत कम काम किया है और इस किरदार के लिए अभी काफी लंबा सफर तय करना बाकी है। अभिनेता ने यह भी कहा था कि हनुमान जी का किरदार निभाना उनके लिए सम्मान की बात है और इसे निभाना आसान नहीं होगा।

    सनी देओल ने बताया था कि हनुमान का व्यक्तित्व बेहद खास है। वह एक साथ सरल, मासूम, शक्तिशाली और समर्पित चरित्र हैं। ऐसे किरदार को पर्दे पर सही तरीके से प्रस्तुत करना बड़ी जिम्मेदारी है। अभिनेता ने इस भूमिका के अवसर के लिए आभार भी जताया था और कहा था कि यह उनके करियर का एक अलग और यादगार अनुभव हो सकता है।

    रामायणम् के ट्रेलर में भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर, माता सीता के रूप में साई पल्लवी और रावण के रूप में यश दिखाई दिए। इसके अलावा अरुण गोविल, लारा दत्ता, रवि दुबे, रकुल प्रीत सिंह और विवेक ओबेरॉय जैसे कलाकारों की झलक भी देखने को मिली। ट्रेलर की शुरुआत रावण के प्रभावशाली किरदार से होती है, जिसमें उसकी शक्ति और साम्राज्य को दिखाया गया है।

    फिल्म की कहानी भारतीय महाकाव्य रामायण पर आधारित है, जिसे आधुनिक तकनीक और बड़े पैमाने पर प्रस्तुत करने की तैयारी है। फिल्म का संगीत एआर रहमान और हांस जिमर तैयार कर रहे हैं। रामायणम् को दो भागों में रिलीज किया जाएगा। फिल्म का पहला भाग दीपावली 2026 और दूसरा भाग दीपावली 2027 में दर्शकों के सामने आने की योजना है।

    4000 करोड़ रुपये के बड़े बजट वाली इस फिल्म को भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। निर्माताओं की कोशिश है कि फिल्म के हर किरदार को प्रभावशाली तरीके से पेश किया जाए। यही वजह है कि हनुमान जैसे महत्वपूर्ण पात्र को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है।

    सनी देओल की लोकप्रियता और उनके दमदार अभिनय को देखते हुए दर्शकों को अब फिल्म में उनके हनुमान रूप की पहली झलक का इंतजार है। हालांकि ट्रेलर में उनकी अनुपस्थिति ने उत्सुकता बढ़ा दी है और आने वाले समय में उनके किरदार को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • ‘रामायणम्’ के ट्रेलर में रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी समेत प्रमुख कलाकारों के किरदारों की पहली झलक सामने आई है।

    ‘रामायणम्’ के ट्रेलर में रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी समेत प्रमुख कलाकारों के किरदारों की पहली झलक सामने आई है।

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की बहुप्रतीक्षित पौराणिक फिल्म ‘रामायणम्’ का ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया है। फिल्म की पहली झलक सामने आते ही दर्शकों के बीच इसे लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। महाकाव्य रामायण पर आधारित इस बड़े प्रोजेक्ट में कई प्रमुख कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। ट्रेलर में भगवान राम के किरदार में रणबीर कपूर, रावण के रूप में यश और सीता के रूप में साई पल्लवी की पहली झलक दिखाई गई है।

    फिल्म के ट्रेलर में भव्य सेट, युद्ध के दृश्य और पौराणिक वातावरण को बड़े स्तर पर प्रस्तुत किया गया है। निर्माताओं ने कहानी के प्रमुख पात्रों और उनके स्वरूप को दर्शकों के सामने पेश करने की कोशिश की है। रणबीर कपूर का राम अवतार इस ट्रेलर का मुख्य आकर्षण बना हुआ है, वहीं यश का रावण रूप भी दर्शकों का ध्यान खींच रहा है।

    ‘रामायणम्’ में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। उनके किरदार को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी। ट्रेलर में उनके चरित्र को गंभीर और मर्यादित रूप में दिखाया गया है। वहीं दक्षिण भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता यश फिल्म में रावण की भूमिका निभा रहे हैं। उनके किरदार को एक प्रभावशाली और शक्तिशाली रूप में पेश किया गया है।

    फिल्म में साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में दिखाई देंगी। उनके किरदार की झलक भी ट्रेलर में देखने को मिली है। इसके अलावा रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे। लोकप्रिय अभिनेता अरुण गोविल एक बार फिर रामायण से जुड़े किरदार में दिखाई देंगे, इस बार वह राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं।

    फिल्म में रकुलप्रीत सिंह शूर्पणखा के किरदार में और विवेक ओबरॉय विद्युतजीह्व की भूमिका में नजर आएंगे। अलग-अलग कलाकारों के जुड़ने से फिल्म का स्टार कास्ट काफी मजबूत हो गया है। निर्माताओं ने पौराणिक कथा के प्रमुख पात्रों को बड़े पर्दे पर नए अंदाज में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

    रामायण भारतीय संस्कृति और साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण कथाओं में से एक है। इस पर पहले भी कई फिल्में और धारावाहिक बनाए जा चुके हैं, लेकिन आधुनिक तकनीक और बड़े बजट के साथ बनाई जा रही ‘रामायणम्’ को अलग स्तर पर पेश करने की तैयारी की गई है। फिल्म में दृश्य प्रभावों और भव्य प्रस्तुति पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    ट्रेलर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म के किरदारों और प्रस्तुति को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। खासतौर पर रणबीर कपूर और यश के लुक को लेकर चर्चा हो रही है। दर्शक अब फिल्म की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं।

    ‘रामायणम्’ के जरिए एक बार फिर भारतीय पौराणिक कथा को बड़े पर्दे पर नए रूप में देखने का मौका मिलेगा। फिल्म की कहानी, कलाकारों का अभिनय और भव्य निर्माण इसे साल की चर्चित फिल्मों में शामिल कर रहे हैं। अब दर्शकों की नजर फिल्म की रिलीज और इसके अंतिम प्रदर्शन पर टिकी हुई है।

  • मेरठ में आस्था संग सेवा की मिसाल, नानी को कांवड़ में बैठाकर पदयात्रा कर रहा शिवभक्त

    मेरठ में आस्था संग सेवा की मिसाल, नानी को कांवड़ में बैठाकर पदयात्रा कर रहा शिवभक्त


    मेरठ। कांवड़ यात्रा सिर्फ भगवान शिव के प्रति आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि रिश्तों में समर्पण, सेवा और जिम्मेदारी का भी संदेश देती है। मेरठ में इस बार दो शिवभक्त अपनी अनोखी कांवड़ यात्रा के कारण श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। एक युवक अपनी 75 वर्षीय नानी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पदयात्रा कर रहा है, जबकि दूसरा बैग में गंगाजल सुरक्षित रखकर पैदल अपने गांव की ओर बढ़ रहा है।

    बैग में गंगाजल लेकर पैदल यात्रा
    मथुरा के बलदेव थाना क्षेत्र के रहने वाले धीरेंद्र (27) वर्तमान में दिल्ली के राजनगर में अपने इंजीनियर भाई के साथ रहते हैं। वह 10 जुलाई को ट्रेन से हरिद्वार पहुंचे और 11 जुलाई से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा शुरू की।

    धीरेंद्र ने गंगाजल को बैग में सुरक्षित रखा है और चरणबद्ध तरीके से यात्रा पूरी कर रहे हैं। पहले दिन उन्होंने 4 किलोमीटर, दूसरे दिन 18 किलोमीटर और तीसरे दिन 15 किलोमीटर की दूरी तय की। इसके बाद वह प्रतिदिन 10 से 12 किलोमीटर चलते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। यह उनकी हरिद्वार से गंगाजल लाने की लगातार तीसरी कांवड़ यात्रा है।

    कांवड़ में नानी को बैठाकर निभा रहे सेवा का धर्म
    नोएडा के सेक्टर-5 स्थित हरौला गांव निवासी हिमांशु चौहान अपनी 75 वर्षीय नानी रूपरानी को कांवड़ के एक पलड़े में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पदयात्रा कर रहे हैं। उनके साथ मौसेरे भाई प्रिंस राघव, बहन लक्ष्मी और परिवार के अन्य सदस्य भी यात्रा में शामिल हैं।

    हिमांशु ने 19 जुलाई को हरिद्वार से यात्रा शुरू की। कांवड़ के एक हिस्से में करीब 45 किलोग्राम वजन की उनकी नानी बैठी हैं, जबकि दूसरे हिस्से में 55 लीटर गंगाजल से भरे कलश रखे गए हैं। लगभग एक क्विंटल वजन वाली इस कांवड़ को हिमांशु और प्रिंस राघव बारी-बारी से अपने कंधों पर उठाकर यात्रा पूरी कर रहे हैं।

    श्रद्धालुओं ने किया जोरदार स्वागत
    यात्रा के दौरान हिमांशु की बहन लक्ष्मी लगातार पंखे से दोनों भाइयों और अपनी नानी को हवा करती रहती हैं। मेरठ के पल्लवपुरम पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने इन शिवभक्तों का भव्य स्वागत किया। सेवा, समर्पण और शिवभक्ति का यह अनोखा संगम कांवड़ यात्रा में लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बना हुआ है।

  • रणबीर कपूर की ‘रामायणम्’ में रावण की मां कैकसी बनीं शोभना, 56 साल की एक्ट्रेस का रजनीकांत से है खास कनेक्शन

    रणबीर कपूर की ‘रामायणम्’ में रावण की मां कैकसी बनीं शोभना, 56 साल की एक्ट्रेस का रजनीकांत से है खास कनेक्शन

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हो चुकी निर्देशक नितेश तिवारी की ‘रामायणम्’ लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। फिल्म के ट्रेलर में भगवान श्रीराम, माता सीता, रावण और अन्य प्रमुख किरदारों की झलक देखने के बाद अब एक और किरदार ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह किरदार है रावण की मां कैकसी का, जिसे मशहूर अभिनेत्री शोभना निभा रही हैं।

    फिल्म में रावण का किरदार अभिनेता यश निभा रहे हैं, जबकि उनकी मां कैकसी के रूप में शोभना नजर आएंगी। खास बात यह है कि पर्दे पर मां-बेटे का रिश्ता निभाने वाले दोनों कलाकारों की वास्तविक उम्र में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। शोभना की उम्र 56 साल है, जबकि यश 40 साल के हैं। दोनों कलाकारों के बीच करीब 16 साल का अंतर है, लेकिन अपने अभिनय और लुक के जरिए शोभना ने कैकसी के किरदार को प्रभावशाली बना दिया है।

    रामायण की कथा में कैकसी राक्षस कुल से संबंध रखने वाली महत्वपूर्ण पात्र थीं। वह लंकापति रावण की माता थीं और कथा में उनका किरदार काफी अहम माना जाता है। ‘रामायणम्’ में इस भूमिका के लिए शोभना का चयन किया गया है, जिसकी झलक ट्रेलर में देखने के बाद दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है।

    शोभना भारतीय सिनेमा की अनुभवी अभिनेत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने मलयालम, तमिल, तेलुगु, हिंदी, कन्नड़ और अंग्रेजी फिल्मों में काम किया है। अपने लंबे करियर में उन्होंने कई यादगार किरदार निभाए हैं और अपनी शानदार अभिनय क्षमता के लिए जानी जाती हैं।

    शोभना का सुपरस्टार रजनीकांत के साथ भी खास जुड़ाव रहा है। उन्होंने रजनीकांत के साथ साल 1989 में आई फिल्म ‘शिवा’ और 1991 में रिलीज हुई ‘थलापति’ में काम किया था। दोनों फिल्मों में उनकी जोड़ी को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। इसके अलावा वह रजनीकांत की फिल्म ‘कोचादाइयां’ में भी नजर आ चुकी हैं।

    ‘रामायणम्’ को भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक बताया जा रहा है। फिल्म का बजट करीब 4000 करोड़ रुपये होने की चर्चा है। इस भव्य परियोजना में रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की भूमिका में नजर आएंगे, जबकि साई पल्लवी माता सीता का किरदार निभा रही हैं। वहीं यश को रावण की भूमिका में प्रस्तुत किया गया है।

    फिल्म में अरुण गोविल राजा दशरथ, लारा दत्ता महारानी कैकई, शीबा चड्ढा मंथरा और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में दिखाई देंगे। बड़े कलाकारों की मौजूदगी और विशाल स्तर पर तैयार किए जा रहे सेट के कारण यह फिल्म रिलीज से पहले ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है।

    ‘रामायणम्’ को दो भागों में रिलीज करने की योजना है। फिल्म का पहला भाग दीपावली 2026 के मौके पर रिलीज किया जाएगा, जबकि दूसरा भाग दीपावली 2027 में दर्शकों के सामने आएगा। फिल्म की कहानी, कलाकारों के किरदार और भव्य प्रस्तुति को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

  • प्रयागराज मेट्रो को मिलेगी रफ्तार, 12 हजार करोड़ की परियोजना का दिसंबर तक शिलान्यास संभव

    प्रयागराज मेट्रो को मिलेगी रफ्तार, 12 हजार करोड़ की परियोजना का दिसंबर तक शिलान्यास संभव


    प्रयागराज। प्रयागराज में मेट्रो रेल परियोजना को जल्द धरातल पर उतारने की तैयारी तेज हो गई है। करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने राइट्स (RITES) को 14 अगस्त तक डीपीआर सौंपने के निर्देश दिए हैं। यदि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी हो गईं, तो वर्ष के अंत तक परियोजना का शिलान्यास किया जा सकता है।

    पीडीए के अधिकारियों के अनुसार, डीपीआर मिलने के बाद अगस्त में ही प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा। प्रदेश कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे केंद्र सरकार के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। चुनावी वर्ष को देखते हुए इस परियोजना को तय समय पर शुरू कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    दो कॉरिडोर और 40 स्टेशन होंगे
    प्रस्तावित योजना के तहत प्रयागराज में दो प्रमुख मेट्रो कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। पहला ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर प्रयागराज एयरपोर्ट से झूंसी स्थित सिटी लेक फॉरेस्ट तक जाएगा, जबकि दूसरा नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर फाफामऊ के शांतिपुरम कॉलोनी से नैनी तक संचालित होगा। दोनों कॉरिडोर पर कुल 40 मेट्रो स्टेशन बनाए जाने का प्रस्ताव है। परेड मैदान को इंटरचेंज जंक्शन बनाया जाएगा, जहां से यात्रियों को चारों दिशाओं में मेट्रो की सुविधा मिलेगी। परियोजना के तहत झूंसी और नैनी में 20-20 हेक्टेयर भूमि पर मेट्रो डिपो भी विकसित किए जाएंगे।

    महाकुंभ और शहर की यातायात व्यवस्था को मिलेगा लाभ
    मेट्रो सेवा शुरू होने के बाद महाकुंभ और माघ मेले में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को संगम और शहर के प्रमुख इलाकों तक तेज और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। परेड इंटरचेंज से झूंसी, फाफामऊ, बमरौली और नैनी की ओर सीधी मेट्रो सेवा उपलब्ध होगी। संगम क्षेत्र में भी मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित है।

    तीन से आठ कोच वाली मेट्रो का प्रस्ताव
    पीडीए के उपाध्यक्ष ऋषि राज ने बताया कि प्रयागराज के लिए तीन से आठ कोच वाली फुल मेट्रो ट्रेन की योजना पर डीपीआर तैयार की जा रही है। राइट्स को 14 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य दिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं जल्द पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि परियोजना निर्धारित समय पर शुरू हो सके।

  • मेरठ दक्षिण सीट पर सपा में टिकट की जंग तेज, कई दावेदारों के बीच किस पर लगेगी मुहर?

    मेरठ दक्षिण सीट पर सपा में टिकट की जंग तेज, कई दावेदारों के बीच किस पर लगेगी मुहर?


    मेरठ। मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी के लिए इस बार सबसे चुनौतीपूर्ण सीटों में शामिल हो गई है। जिले की सात विधानसभा सीटों में सबसे अधिक टिकट दावेदार इसी सीट से सामने आए हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसा उम्मीदवार चुनने की है, जो संगठन और चुनावी समीकरण-दोनों पर खरा उतर सके। टिकट की दौड़ में शामिल नेता लगातार लखनऊ का रुख कर रहे हैं और अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। इससे पार्टी के भीतर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

    इन नेताओं के नाम सबसे आगे
    मेरठ दक्षिण से टिकट के प्रमुख दावेदारों में सपा महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी का नाम सबसे प्रमुख माना जा रहा है। वह इस सीट से दो बार चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी सोमेंद्र तोमर को कड़ी टक्कर दी थी। उस चुनाव में आदिल को 1,21,725 वोट मिले थे और वे केवल 7,942 मतों से चुनाव हारे थे।

    इसके अलावा जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी, डॉ. किशन पाल गुर्जर, मुखिया गुर्जर और जितेंद्र गुर्जर भी टिकट के लिए प्रयासरत बताए जा रहे हैं। वहीं, यदि पूर्व विधायक योगेश वर्मा को हस्तिनापुर सीट से टिकट नहीं मिलता है, तो मेरठ दक्षिण से उनकी दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है।

    गठबंधन की स्थिति भी बनेगी अहम
    राजनीतिक चर्चाओं के बीच कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के संभावित गठबंधन की भी चर्चा है। यदि गठबंधन होता है तो कांग्रेस भी इस सीट पर अपनी दावेदारी पेश कर सकती है। हाल ही में पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना की मौजूदगी को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

    गुटबाजी का खतरा भी बरकरार
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टिकट के लिए बड़ी संख्या में दावेदार होना संगठन की मजबूती का संकेत जरूर है, लेकिन इससे अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी का खतरा भी बढ़ सकता है। यदि टिकट वितरण के बाद असंतोष उभरता है तो चुनावी मुकाबले में इसका नुकसान पार्टी को उठाना पड़ सकता है।

    किसके पक्ष में जा सकते हैं समीकरण?
    जानकारों के मुताबिक, टिकट उसी उम्मीदवार को मिलने की संभावना अधिक है, जो जातीय और सामाजिक समीकरणों के साथ संगठन में भी मजबूत पकड़ रखता हो। मेरठ दक्षिण में मुस्लिम, दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के मतदाता चुनाव परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    इसी वजह से ऐसे चेहरे को प्राथमिकता मिल सकती है, जो विभिन्न वर्गों में स्वीकार्यता रखता हो, संगठन के भीतर मजबूत समर्थन हो और विवादों से दूर रहा हो। मौजूदा चर्चाओं में आदिल चौधरी और योगेश वर्मा को मजबूत दावेदारों के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान के हाथ में है।