Author: bharati

  • पाकिस्तान में 'कॉकरोच पार्टी' की एंट्री से बढ़ी सियासी हलचल, गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान ने छेड़ी नई बहस

    पाकिस्तान में 'कॉकरोच पार्टी' की एंट्री से बढ़ी सियासी हलचल, गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान ने छेड़ी नई बहस

    नई दिल्ली । पाकिस्तान में आर्थिक चुनौतियों, महंगाई और राजनीतिक असंतोष के बीच सोशल मीडिया पर उभर रहे एक नए ऑनलाइन अभियान ‘कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान’ को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हाल के दिनों में इस अभियान को सोशल मीडिया पर व्यापक ध्यान मिला है। इसी बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी का एक बयान भी चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने युवाओं की बढ़ती नाराजगी और सामाजिक असंतोष को लेकर चिंता व्यक्त की।

    रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान इस समय आर्थिक दबाव, महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों के बीच सोशल मीडिया पर सक्रिय एक समूह ‘कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान’ के नाम से विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहा है। यह अभियान विशेष रूप से युवाओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसके समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ने का दावा किया जा रहा है।

    गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि यदि युवाओं की अपेक्षाओं को पूरा नहीं किया गया और उनकी नाराजगी लगातार बढ़ती रही, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उनके बयान को कई राजनीतिक विश्लेषक देश में बढ़ते जनअसंतोष की स्वीकारोक्ति के रूप में देख रहे हैं। हालांकि सरकार की ओर से इस बयान का विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

    बताया जा रहा है कि ‘कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान’ स्वयं को भ्रष्टाचार, परिवारवाद और शासन व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी के खिलाफ अभियान चलाने वाला समूह बताती है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेशों में रोजगार, शिक्षा, आर्थिक सुधार, ऊर्जा संकट, जवाबदेही और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। समूह ने कथित तौर पर एक घोषणापत्र भी जारी किया है और संगठनात्मक ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाने का दावा किया है।

    कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इस अभियान ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से जुड़े मानवाधिकार और प्रशासनिक मुद्दों को भी उठाया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं पाकिस्तान सरकार की ओर से भी इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में आर्थिक संकट और लगातार बढ़ती महंगाई के कारण युवाओं में असंतोष बढ़ा है, जिसका असर सोशल मीडिया अभियानों में भी दिखाई दे रहा है। हालांकि किसी भी नए राजनीतिक या सामाजिक अभियान की वास्तविक लोकप्रियता और उसके प्रभाव का आकलन केवल सोशल मीडिया गतिविधियों के आधार पर करना उचित नहीं माना जाता। ऐसे अभियानों का वास्तविक प्रभाव समय के साथ ही स्पष्ट हो पाता है।

    फिलहाल पाकिस्तान की राजनीति में इस नए ऑनलाइन अभियान और गृह मंत्री के बयान को लेकर बहस जारी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह अभियान केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहता है या फिर इसका असर देश की राजनीतिक गतिविधियों और जनचर्चा पर भी व्यापक रूप से दिखाई देता है।

  • पीओजेके में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तान की कार्रवाई पर भारत का तीखा हमला, अंतरराष्ट्रीय जांच और जवाबदेही की उठाई मांग

    पीओजेके में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तान की कार्रवाई पर भारत का तीखा हमला, अंतरराष्ट्रीय जांच और जवाबदेही की उठाई मांग

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई को लेकर भारत ने शुक्रवार को पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान की कार्रवाई को निंदनीय बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। भारत ने कहा कि पीओजेके में नागरिकों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, वह गंभीर चिंता का विषय है और इससे वहां की स्थिति लगातार बिगड़ती दिखाई दे रही है।

    विदेश मंत्रालय के नियमित साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान लगातार पीओजेके में शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई में 40 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। भारत का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के प्रति पाकिस्तान प्रशासन का रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के विपरीत है।

    भारत ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों को देश का “दुश्मन” बताया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की टिप्पणी यह दर्शाती है कि पाकिस्तान अपने ही नागरिकों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास कर रहा है। भारत ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध करने वालों को इस प्रकार निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।

    प्रेस ब्रीफिंग के दौरान भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के राजनीतिक मामलों के विशेष सहायक राणा सनाउल्लाह की हालिया टिप्पणियों का भी जिक्र किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के वरिष्ठ नेताओं ने स्वयं स्वीकार किया है कि अतीत में जिन उग्रवादी समूहों को समर्थन दिया गया था, वे अब पाकिस्तान के लिए ही चुनौती बन गए हैं। भारत ने इसे आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति का परिणाम बताया।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि पीओजेके में हाल के घटनाक्रमों ने वहां के लोगों में असंतोष को और बढ़ा दिया है। भारत के अनुसार, वहां के नागरिक स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं और कई स्थानीय संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हस्तक्षेप की अपील भी की है। भारत ने वैश्विक समुदाय से आग्रह किया कि वह इन आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे और मानवाधिकारों के कथित उल्लंघनों पर पाकिस्तान से जवाब मांगे।

    रिपोर्टों के अनुसार, पीओजेके के विभिन्न क्षेत्रों में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आई हैं। सोशल मीडिया पर साझा किए गए कई वीडियो में कथित रूप से प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और अफरा-तफरी के दृश्य दिखाई देने का दावा किया गया है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    भारत ने दोहराया कि पीओजेके भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहां रहने वाले लोगों के अधिकारों तथा सुरक्षा को लेकर वह लगातार अपनी चिंता व्यक्त करता रहेगा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। भारत का मानना है कि पारदर्शी जांच और जवाबदेही से ही क्षेत्र में विश्वास बहाल करने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में सार्थक कदम उठाए जा सकते हैं।

  • यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती रिजल्ट घोषित, 76,184 अभ्यर्थी सफल, सामान्य का कट-ऑफ OBC से ज्यादा

    यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती रिजल्ट घोषित, 76,184 अभ्यर्थी सफल, सामान्य का कट-ऑफ OBC से ज्यादा


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा का बहुप्रतीक्षित परिणाम शुक्रवार को घोषित कर दिया गया। 32,679 रिक्त पदों के लिए आयोजित लिखित परीक्षा में 76,184 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने विभिन्न वर्गों की कट-ऑफ सूची भी जारी कर दी है। अब सफल अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन (DV), शारीरिक मानक परीक्षण (PST) और शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) से गुजरना होगा।

    जनरल की कट-ऑफ सबसे ज्यादा
    भर्ती बोर्ड के अनुसार, सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 258.03 अंक रही, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 251.63 अंक निर्धारित की गई। इस तरह सामान्य वर्ग की कट-ऑफ ओबीसी से करीब 7 अंक अधिक रही। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की कट-ऑफ ओबीसी से कम रही। वहीं अनुसूचित जाति (SC) की कट-ऑफ 239.34 और अनुसूचित जनजाति (ST) की 210.10 अंक रही।

    17 अगस्त से होगा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन
    भर्ती बोर्ड ने बताया कि सफल अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन (DV) और फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST) 17 अगस्त से शुरू होगा। इसके बाद सितंबर में शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) आयोजित की जाएगी। इन चरणों की विस्तृत जानकारी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अंतिम चयन सूची प्रकाशित होगी।

    फिजिकल टेस्ट में दौड़ होगी अनिवार्य
    शारीरिक दक्षता परीक्षा में पुरुष अभ्यर्थियों को 4.8 किलोमीटर की दौड़ 25 मिनट में पूरी करनी होगी। वहीं महिला अभ्यर्थियों को 2.4 किलोमीटर की दौड़ 14 मिनट के भीतर पूरी करनी होगी।

    करीब 29 लाख ने किया था आवेदन
    इस भर्ती प्रक्रिया के लिए 28,86,797 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें 19,62,560 पुरुष और 9,24,237 महिला उम्मीदवार शामिल थीं। लिखित परीक्षा 8, 9 और 10 जून को प्रदेश के सभी 75 जिलों में बनाए गए 1,183 परीक्षा केंद्रों पर छह पालियों में आयोजित की गई थी।

    6.94 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में नहीं पहुंचे
    भर्ती बोर्ड के अनुसार, कुल 21,92,236 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जबकि करीब 6.94 लाख उम्मीदवार अनुपस्थित रहे। परीक्षा 300 अंकों की थी, जिसमें 150 प्रश्न पूछे गए थे और प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का था। इस बार परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं रखी गई थी।

    फर्जीवाड़े पर सख्ती
    परीक्षा के दौरान नकल और फर्जीवाड़े पर कड़ी निगरानी रखी गई। ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक सत्यापन और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के जरिए अनियमितताओं पर नजर रखी गई। इस दौरान 12 मुकदमे दर्ज किए गए और 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

  • भारत में जुट सकते हैं दुनिया के बड़े नेता, BRICS समिट में शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की संभावित मौजूदगी पर टिकी नजर

    भारत में जुट सकते हैं दुनिया के बड़े नेता, BRICS समिट में शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की संभावित मौजूदगी पर टिकी नजर

    नई दिल्ली । भारत सितंबर 2026 में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी की तैयारी में जुटा है। इस सम्मेलन को लेकर सबसे अधिक चर्चा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को लेकर हो रही है। यदि उनका दौरा तय होता है, तो यह कोविड-19 महामारी और वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुए सीमा विवाद के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है, यह सम्मेलन भारत की कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भी शामिल होने की संभावना है। रूस की ओर से पहले ही संकेत दिए जा चुके हैं कि राष्ट्रपति पुतिन भारत यात्रा कर सकते हैं। वहीं ब्रिक्स के नए सदस्य देशों में शामिल ईरान भी सम्मेलन में भाग लेने की तैयारी कर रहा है। हालांकि ईरान की ओर से किस स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। यदि सभी प्रमुख नेता सम्मेलन में शामिल होते हैं तो यह हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय बैठकों में से एक होगी।

    ब्रिक्स सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले महीने किर्गिस्तान में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना भी जताई जा रही है। इस दौरान उनकी रूस, चीन और ईरान सहित कई सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात हो सकती है। यह बैठक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद एससीओ देशों की पहली शीर्ष स्तरीय बैठक मानी जा रही है, इसलिए क्षेत्रीय सुरक्षा, पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा सहयोग, व्यापार और बहुपक्षीय साझेदारी जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शी जिनपिंग नई दिल्ली आते हैं तो यह भारत और चीन के संबंधों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत होगा। पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद और तनाव के कारण दोनों देशों के रिश्तों में दूरी आई थी, लेकिन हाल के महीनों में संवाद बढ़ाने के प्रयास भी तेज हुए हैं। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की संभावित मुलाकात द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से अहम मानी जा रही है। सीमा प्रबंधन, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी चर्चा की संभावना जताई जा रही है।

    इस बीच पाकिस्तान की ओर से भी संकेत मिले हैं कि वर्ष 2027 में इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए भारत सहित सभी सदस्य देशों को औपचारिक निमंत्रण भेजा जाएगा। पाकिस्तान सितंबर 2026 से एससीओ की अध्यक्षता संभालेगा और मेजबान देश होने के नाते सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को आमंत्रित करना उसकी जिम्मेदारी होगी। इस घटनाक्रम को भी क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नई दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर अब दुनिया की नजरें टिकी हैं। यदि चीन, रूस, भारत और अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेता एक मंच पर आते हैं, तो वैश्विक आर्थिक सहयोग, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, व्यापार, निवेश, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे कई अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है। ऐसे में यह सम्मेलन केवल सदस्य देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीतिक परिदृश्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

  • भारतीय रेलवे की बड़ी डिजिटल पहल, अब टिकट बुकिंग के साथ ही ऑनलाइन बुक होगा अतिरिक्त सामान, पार्सल काउंटर के चक्कर खत्म

    भारतीय रेलवे की बड़ी डिजिटल पहल, अब टिकट बुकिंग के साथ ही ऑनलाइन बुक होगा अतिरिक्त सामान, पार्सल काउंटर के चक्कर खत्म

    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल करते हुए अतिरिक्त सामान की ऑनलाइन बुकिंग की नई सेवा शुरू कर दी है। अब ट्रेन का कन्फर्म टिकट बुक कराने वाले यात्री उसी समय निर्धारित मुफ्त सीमा से अधिक सामान ले जाने के लिए ऑनलाइन बुकिंग और भुगतान भी कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को पार्सल कार्यालय की लंबी कतारों और अतिरिक्त कागजी प्रक्रिया से राहत देना है, जिससे पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और सुविधाजनक हो जाएगी।

    अब तक रेलवे में मुफ्त सीमा से अधिक सामान लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों को स्टेशन के पार्सल कार्यालय में जाकर अलग से बुकिंग करानी पड़ती थी। इसके लिए अतिरिक्त समय और औपचारिकताओं का सामना करना पड़ता था। नई ऑनलाइन सुविधा लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया टिकट बुकिंग के साथ ही पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और यात्रा से पहले होने वाली असुविधा भी काफी हद तक कम होगी।

    रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों के लिए उपलब्ध होगी। साथ ही इसका लाभ केवल उन श्रेणियों में मिलेगा, जहां मुफ्त सीमा से अधिक सामान निर्धारित शुल्क देकर ले जाने की अनुमति है। एसी फर्स्ट क्लास, एसी टू-टियर, फर्स्ट क्लास, स्लीपर क्लास और सेकेंड क्लास के यात्री इस सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। वहीं एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, क्योंकि इन श्रेणियों में मुफ्त सामान की सीमा और अधिकतम अनुमत सीमा समान निर्धारित है।

    रेलवे के मौजूदा नियमों के अनुसार एसी फर्स्ट क्लास के यात्री बिना अतिरिक्त शुल्क के 70 किलोग्राम तक सामान ले जा सकते हैं, जबकि निर्धारित शुल्क देकर अधिकतम 150 किलोग्राम तक सामान ले जाने की अनुमति है। एसी टू-टियर और फर्स्ट क्लास में 50 किलोग्राम तक मुफ्त तथा अधिकतम 100 किलोग्राम तक सामान ले जाया जा सकता है। स्लीपर क्लास में यात्रियों को 40 किलोग्राम तक मुफ्त सामान ले जाने की अनुमति है और अतिरिक्त शुल्क देकर यह सीमा 80 किलोग्राम तक बढ़ाई जा सकती है। सेकेंड क्लास में 35 किलोग्राम तक सामान मुफ्त है, जबकि अधिकतम 70 किलोग्राम तक सामान ले जाने की अनुमति दी गई है।

    दूसरी ओर, एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार के यात्रियों के लिए 40 किलोग्राम की सीमा ही मुफ्त और अधिकतम अनुमत सीमा दोनों है। इसी कारण इन श्रेणियों में अतिरिक्त सामान की ऑनलाइन बुकिंग का विकल्प उपलब्ध नहीं कराया गया है। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुफ्त सीमा से अधिक लेकिन अधिकतम अनुमत सीमा के भीतर सामान ले जाने पर यात्रियों को निर्धारित अतिरिक्त शुल्क देना अनिवार्य होगा।

    रेलवे ने सामान के आकार को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सामान्य श्रेणियों में यात्री 100 सेंटीमीटर × 60 सेंटीमीटर × 25 सेंटीमीटर तक के ट्रंक, सूटकेस या बक्से अपने साथ ले जा सकते हैं। वहीं एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार में सामान का अधिकतम आकार 55 सेंटीमीटर × 45 सेंटीमीटर × 22.5 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है।

    रेलवे का मानना है कि यह नई डिजिटल सुविधा यात्रियों के लिए यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था से न केवल स्टेशन पर भीड़ कम होगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध भी बनेगी। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ भारतीय रेलवे यात्रियों को आधुनिक और बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार नए कदम उठा रहा है।

  • दिल्ली दंगा केस: IB अधिकारी की हत्या के दोषी ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद, कोर्ट ने बताया गंभीर अपराध

    दिल्ली दंगा केस: IB अधिकारी की हत्या के दोषी ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद, कोर्ट ने बताया गंभीर अपराध

    नई दिल्ली। वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि इस अपराध ने पूरे समाज को झकझोर दिया था।

    इस मामले में अदालत ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन, नाजिम, काशिम, अनस और जावेद को हत्या, अपहरण, दंगा और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का दोषी करार दिया था। वहीं, मुकदमे में शामिल 11 आरोपियों में से छह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।

    कोर्ट ने क्या कहा
    अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ताहिर हुसैन उस हिंसक भीड़ का हिस्सा थे, जो हथियारों से लैस होकर हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा, आगजनी और लूटपाट के इरादे से एकत्रित हुई थी। कोर्ट के अनुसार, इसी भीड़ ने लगातार और बेरहमी से हमला कर आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या की।

    पुलिस ने फांसी की मांग की थी
    सजा पर बहस के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत से दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। अभियोजन पक्ष का कहना था कि अंकित शर्मा की मौत के बाद भी उन पर हमला जारी रखा गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हत्या बेहद क्रूर और पूर्व नियोजित थी। इसलिए यह मामला फांसी की सजा के योग्य है।

    बचाव पक्ष की दलील
    ताहिर हुसैन के वकील ने अदालत में दलील दी कि हर हत्या का मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में नहीं आता। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दोषी की व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट रूप से अलग-अलग स्थापित नहीं की गई है, इसलिए मृत्युदंड उचित नहीं होगा।

    नाले में मिला था अंकित शर्मा का शव
    दिल्ली में 23 फरवरी 2020 को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर शुरू हुई हिंसा के बीच 25 फरवरी को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। अगले दिन उनका शव चांदबाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले से बरामद किया गया। अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाने में मामला दर्ज हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन AAP पार्षद ताहिर हुसैन और उनके साथियों ने हत्या कर शव को नाले में फेंक दिया।

    2020 के दिल्ली दंगों में 53 लोगों की हुई थी मौत
    23 से 26 फरवरी 2020 के बीच नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन और विरोध में प्रदर्शन के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में व्यापक हिंसा हुई थी। इस दौरान 53 लोगों की मौत हुई, जबकि 250 से अधिक लोग घायल हुए थे। मृतकों में 38 मुस्लिम और 15 हिंदू शामिल थे। हिंसा में करीब 800 दुकानों और 500 से अधिक मकानों को भी आग के हवाले कर दिया गया था।

  • सुभालय विहार में गरजा बुलडोजर, अवैध निर्माण पर निगम का एक्शन; नियम तोड़कर बनी दो मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त

    सुभालय विहार में गरजा बुलडोजर, अवैध निर्माण पर निगम का एक्शन; नियम तोड़कर बनी दो मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त


    भोपाल । भोपाल में अवैध निर्माण और अनधिकृत प्लॉटिंग के खिलाफ नगर निगम ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को बावड़ियाकलां स्थित सुभालय विहार में अवैध रूप से निर्मित दो मंजिला भवन पर जेसीबी चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया गया। नगर निगम की इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों की मौजूदगी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।

    नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई गौरव गृह निर्माण सहकारी समिति के अंतर्गत आने वाले सुभालय परिसर में स्थित मकान क्रमांक बी 93 पर की गई। जांच में सामने आया कि जिस भूखंड पर निर्माण किया गया उसका मूल क्षेत्रफल 1312 वर्गमीटर था जबकि लगभग 900 वर्गमीटर क्षेत्र में जी प्लस वन भवन का निर्माण कर लिया गया था। सबसे अहम बात यह रही कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग द्वारा स्वीकृत लेआउट में इस भूखंड को एकल प्लॉट के रूप में स्वीकृति मिली थी लेकिन इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए इसका अवैध विभाजन कर दिया गया।

    नगर निगम की जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित भूखंड को अनधिकृत तरीके से छोटे हिस्सों में बांटकर बेचा गया और बाद में स्वीकृत मानकों के विपरीत भवन निर्माण कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का निर्माण पूरी तरह नियमों के खिलाफ था इसलिए नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। निगम का कहना है कि शहर में अवैध प्लॉटिंग और बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा वहां इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    कार्रवाई के दौरान नगर निगम के इंजीनियर राजस्व विभाग के अधिकारी और पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन ने पूरे अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराया ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।

    नगर निगम ने शहरवासियों से भी अपील की है कि किसी भी संपत्ति की खरीद या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित विभागों से उसकी वैधता और स्वीकृत लेआउट की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें। बिना अनुमति के निर्माण या अवैध प्लॉटिंग में निवेश करने से लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।

    नगर निगम का कहना है कि अवैध निर्माण केवल शहर की नियोजित विकास व्यवस्था को प्रभावित नहीं करता बल्कि भविष्य में सड़क जल निकासी पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर भी गंभीर असर डालता है। इसी कारण प्रशासन ऐसे मामलों में लगातार अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।

    प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में वैध और नियमानुसार विकास सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। इसलिए जो लोग बिना स्वीकृति के निर्माण कर रहे हैं या अवैध प्लॉटिंग में शामिल हैं उनके खिलाफ आने वाले समय में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

  • नकली पिस्टल के दम पर राहगीरों से वसूली, भोपाल में LLB छात्र सहित दो फर्जी पुलिसकर्मी गिरफ्तार

    नकली पिस्टल के दम पर राहगीरों से वसूली, भोपाल में LLB छात्र सहित दो फर्जी पुलिसकर्मी गिरफ्तार


    भोपाल । भोपाल में फर्जी पुलिस बनकर राहगीरों से वसूली करने वाले दो युवकों का भंडाफोड़ हो गया। राजधानी के शाहपुरा थाना क्षेत्र में दोनों आरोपी सिविल ड्रेस पहनकर चौराहे पर वाहन चालकों को रोकते थे और खुद को पुलिसकर्मी बताकर हेलमेट व अन्य यातायात नियमों के नाम पर लोगों से पैसे वसूलने की कोशिश करते थे। गुरुवार रात लोगों की सतर्कता और सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से एक नकली पिस्टल भी बरामद हुई है जिसके बाद उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    पुलिस के अनुसार गुरुवार रात करीब साढ़े नौ बजे शाहपुरा चौराहे से सूचना मिली कि दो युवक खुद को पुलिसकर्मी बताकर वाहन चालकों की जांच कर रहे हैं और उनसे रुपए मांग रहे हैं। सूचना मिलते ही शाहपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान दोनों ने पहले खुद को कोहेफिजा थाने में पदस्थ पुलिसकर्मी बताया लेकिन जब उनसे पहचान संबंधी दस्तावेज मांगे गए और सख्ती से पूछताछ की गई तो उनका झूठ सामने आ गया।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमान खान और कार्तिक मिश्रा के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में अमान खान ने बताया कि वह एमपी नगर स्थित एक निजी आईटी कंपनी में एचआर के पद पर कार्यरत है जबकि कार्तिक मिश्रा एलएलबी का छात्र है। तलाशी के दौरान अमान खान की कमर से एक नकली पिस्टल भी बरामद हुई जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया।

    घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों को दोनों युवकों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। लोगों ने उनसे पूछा कि वे किस थाने से हैं और अपना पहचान पत्र दिखाएं। जब दोनों कोई वैध पहचान नहीं दिखा सके तो लोगों ने उनका वीडियो बनाना शुरू कर दिया। वीडियो में लोग यह भी सवाल करते दिखाई दे रहे हैं कि जब वे खुद बिना हेलमेट वाहन चला रहे हैं तो दूसरों को किस अधिकार से रोक रहे हैं। इसी दौरान पुलिस को सूचना दी गई जिसके बाद दोनों की पोल खुल गई।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी हेलमेट नहीं पहनने या अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन का डर दिखाकर लोगों से मौके पर ही पैसे मांगते थे। हालांकि वे किसी भी वाहन चालक का वैधानिक चालान नहीं काटते थे। पुलिस का मानना है कि दोनों लोगों को पुलिस कार्रवाई का भय दिखाकर अवैध वसूली कर रहे थे।

    गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने सफाई देते हुए कहा कि वे लोगों के साथ केवल प्रैंक कर रहे थे लेकिन पुलिस ने इस दावे को खारिज कर दिया। थाना प्रभारी के मुताबिक मौके पर कोई वीडियो शूट नहीं हो रही थी और ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि दोनों केवल मजाक कर रहे थे। पुलिस इसे सुनियोजित तरीके से लोगों को धोखा देकर पैसे ऐंठने का मामला मान रही है।

    फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने पहले भी इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं। अमान खान के खिलाफ पहले से मारपीट का एक मामला दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है जबकि कार्तिक मिश्रा के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि दोनों अब तक कितने लोगों से फर्जी पुलिस बनकर वसूली कर चुके हैं और इस पूरे नेटवर्क में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

  • भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिर मजबूत, 682.23 अरब डॉलर पर पहुंचा; गोल्ड रिजर्व में भी दर्ज हुई बड़ी बढ़ोतरी

    भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिर मजबूत, 682.23 अरब डॉलर पर पहुंचा; गोल्ड रिजर्व में भी दर्ज हुई बड़ी बढ़ोतरी

    नई दिल्ली । भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूत होता जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 24 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 6.118 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के साथ 682.2354 अरब डॉलर पर पहुंच गया। लगातार दूसरे सप्ताह दर्ज हुई इस वृद्धि को देश की बाहरी आर्थिक स्थिति के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    इससे पहले 17 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 1.08 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। लगातार दो सप्ताह तक विदेशी मुद्रा भंडार में हुई वृद्धि से यह संकेत मिल रहा है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी हुई है और विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार का क्रम जारी है।

    केंद्रीय बैंक के अनुसार, इस दौरान स्वर्ण भंडार के मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। समीक्षा अवधि में गोल्ड रिजर्व 1.308 अरब डॉलर बढ़कर 103.058 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां भी 4.873 अरब डॉलर बढ़कर 555.929 अरब डॉलर हो गईं। यह बढ़ोतरी देश की समग्र वित्तीय मजबूती का संकेत देती है।

    भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया कि विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में केवल अमेरिकी डॉलर ही नहीं बल्कि यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का भी प्रभाव शामिल होता है। इसलिए विदेशी मुद्रा भंडार में होने वाले बदलाव वैश्विक मुद्रा बाजार की गतिविधियों से भी प्रभावित होते हैं।

    हालांकि इस अवधि में स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) में मामूली गिरावट दर्ज की गई। यह 5.3 करोड़ डॉलर घटकर 18.617 अरब डॉलर रह गया। इसके बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य प्रमुख घटकों में हुई वृद्धि के कारण कुल भंडार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली।

    वर्ष 2026 की शुरुआत में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बना था। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते रुपये पर भी दबाव देखा गया, जिसके बाद बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने समय-समय पर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया था। इसके कारण कुछ सप्ताह तक विदेशी मुद्रा भंडार में कमी दर्ज की गई थी।

    उल्लेखनीय है कि फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। उसके बाद आई गिरावट से अब धीरे-धीरे उबरने का क्रम जारी है और हाल के सप्ताहों में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है।

    आरबीआई का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी विशेष विनिमय दर को बनाए रखना नहीं है, बल्कि केवल बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करना और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है। आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है ताकि रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोका जा सके।

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार होता है। इससे आयात भुगतान, बाहरी ऋण दायित्वों का निर्वहन और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौरान वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है। हालिया बढ़ोतरी को भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति और वैश्विक चुनौतियों से निपटने की क्षमता के रूप में देखा जा रहा है।

  • भोपाल में जल गुणवत्ता पर विवाद, यूनियन कार्बाइड क्षेत्र के पानी में फीकल कोलीफॉर्म मिलने का दावा

    भोपाल में जल गुणवत्ता पर विवाद, यूनियन कार्बाइड क्षेत्र के पानी में फीकल कोलीफॉर्म मिलने का दावा


    भोपाल । भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गैस पीड़ितों के चार संगठनों ने दावा किया है कि फैक्ट्री के आसपास की बस्तियों में लोगों को सीवेज से दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही है जिससे बड़े स्तर पर स्वास्थ्य संकट पैदा होने का खतरा बढ़ गया है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हालात किसी बड़े जलजनित रोग के प्रकोप में बदल सकते हैं।

    संगठनों ने बताया कि इस महीने प्रभावित इलाकों की 30 बस्तियों से पेयजल के 63 नमूने एकत्र किए गए थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के बैक्टीरिया की मौजूदगी इस बात का संकेत होती है कि पेयजल में मल या सीवेज का मिश्रण हो चुका है और ऐसा पानी स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने कहा कि जांच के नतीजे बेहद चिंताजनक हैं। उनका दावा है कि करीब 70 प्रतिशत नमूने दूषित पाए गए हैं और 30 में से 19 बस्तियों में लोगों तक असुरक्षित पानी पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ा तालाब से सप्लाई किए गए पानी के अधिकांश नमूने और कोलार डैम से जुड़े कुछ नमूने भी जांच में दूषित मिले हैं।

    गैस पीड़ित संगठनों का आरोप है कि प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग लंबे समय से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इसके कारण दस्त उल्टी टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उनका कहना है कि कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और स्थानीय क्लीनिकों में संक्रमण से जुड़े मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

    संगठनों ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड परिसर के आसपास भूजल के रासायनिक प्रदूषण को गंभीर मानते हुए प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पानी पहुंचाने की व्यवस्था करने की बात कही गई थी लेकिन उनका आरोप है कि जमीनी स्तर पर आज भी स्थिति संतोषजनक नहीं है।

    भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि वर्ष 2018 में भी सुप्रीम कोर्ट ने सीवर लाइन और ड्रेनेज व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए थे। नगर निगम ने तय समय में काम पूरा करने का भरोसा दिया था लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी अधिकांश क्षेत्रों में समस्या जस की तस बनी हुई है।

    भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने मांग की कि दूषित पेयजल आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मामले में लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। साथ ही प्रभावित इलाकों में सीवर और ड्रेनेज परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र एवं नियमित निगरानी की व्यवस्था भी लागू की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।