सेंधा नमक के फायदेपाचन में सहायता
सर्दी जुकाम और खांसी
सूजन में आराम
बीपी और रक्त संचार में सुधार
दांतों का स्वास्थ्य
सेंधा नमक का सेवन करने का तरीका
कौन लोग सेंधा नमक का सेवन नहीं करें

सेंधा नमक के फायदेपाचन में सहायता
सर्दी जुकाम और खांसी
सूजन में आराम
बीपी और रक्त संचार में सुधार
दांतों का स्वास्थ्य
सेंधा नमक का सेवन करने का तरीका
कौन लोग सेंधा नमक का सेवन नहीं करें

प्रमुख हादसों में शामिल घटनाएं -प्रयागराज महाकुंभ जनवरी
दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ फरवरी
गोवा नाइट क्लब अग्निकांड दिसंबर
हवाई दुर्घटना एयर इंडिया बोइंग 787 जून
जश्न के दौरान भगदड़ बेंगलुरु जून
तेलंगाना फैक्ट्री विस्फोट जून
देशभर में शोक की लहर
निरंतर बढ़ते हादसों पर सरकार का ध्यान

सीसीटीवी से पहचान
पुलिस ने घटना के बाद सीसीटीवी कैमरों को खंगाला और चालक का चेहरा पहचान लिया। अब पुलिस चालक की तलाश कर रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार करने की उम्मीद है।यह घटना ग्वालियर में ट्रैफिक नियमों और पुलिस की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाओं से न केवल पुलिसकर्मियों की जान को खतरा है बल्कि इससे सड़क सुरक्षा की स्थिति भी बिगड़ सकती है।

कलेक्टर ने 23 कॉलोनियों को रडार पर लिया
दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

एक महीने में चार लोग घायल
चाइना डोर के कारण हुए हादसों की यह कोई पहली घटना नहीं है। एक महीने के भीतर चार लोग इस खतरनाक डोर की चपेट में आ चुके हैं। 20 दिसंबर को एग्रीकल्चर थर्ड सेमेस्टर के छात्र योगेश आंजना उम्र 20 वर्ष अपने गांव पिपलियाधूमा झारड़ा से उज्जैन परीक्षा देने आया था। परीक्षा के बाद वह बाइक से घर लौट रहा था जब उसे भी चाइना डोर से गंभीर चोटें आईं। इसके अलावा पहले भी इस प्रकार की घटनाएं उज्जैन में हो चुकी हैं जिनमें लोग चाइना डोर से घायल हो चुके हैं।
गंभीर चिंता का विषय
चाइना डोर की इन घटनाओं ने शहरवासियों को गंभीर चिंता में डाल दिया है। हालाँकि प्रशासन ने इसके उपयोग पर रोक लगाने के लिए कई प्रयास किए हैं लेकिन इस पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। यह जानलेवा डोर न केवल सड़कों पर चलने वाले लोगों के लिए खतरा बन गई है बल्कि इसका इस्तेमाल करने वाले लोग भी इसके खतरों से अनजान रहते हैं।
शहरवासियों और प्रशासन से अपील की जा रही है कि चाइना डोर के खतरों को लेकर जागरूकता फैलाई जाए और इस पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि और किसी की जान को खतरा न हो।

शांतिपूर्ण लेकिन सख्त कार्रवाई
कलेक्टर ने 23 कॉलोनियों को रडार पर लिया
दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
रजिस्ट्री-नामांतरण पर प्रतिबंध

आयुष मंत्रालय ने एक पोस्ट के माध्यम से इन चार आसान उपायों को साझा किया है जिनमें से पहला उपाय है आई पामिंग। इस विधि में दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में रगड़कर गर्म किया जाता है और फिर इन्हें आंखों पर रखा जाता है। इससे आंखों की थकान कम होती है और आंखें रिलैक्स महसूस करती हैं। लगातार स्क्रीन पर काम करने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और आई पामिंग इस दबाव को कम करने में मदद करता है।
दूसरा उपाय है त्राटक। यह एक अभ्यास है जिसमें मोमबत्ती की लौ को बिना पलक झपकाए कुछ देर तक देखा जाता है। यह अभ्यास आंखों की रोशनी को बेहतर करने आंखों की सफाई और आंखों की नमी को बनाए रखने में मदद करता है। त्राटक से आंखों की आंतरिक स्पष्टता बढ़ती है और यह आँखों की थकान को कम करता है।
तीसरा उपाय है गीले कॉटन पैड का इस्तेमाल। गीले कॉटन पैड से आंखों के तनाव को कम किया जा सकता है और सिर दर्द से भी राहत मिलती है। इसके लिए रूई को ठंडे पानी या गुलाब जल में भिगोकर आंखों पर कुछ देर के लिए रखा जाता है। यह उपाय आंखों के नीचे सूजन को कम करने और आंखों को ताजगी देने के लिए बहुत प्रभावी है। कुछ लोग इसकी जगह खीरे के टुकड़े भी इस्तेमाल करते हैं।
चौथा उपाय है भाप लेना। सर्दियों में कई बार आंखों में गंदगी जमा हो जाती है जिससे पलके चिपकने लगती हैं। हल्की भाप से आंखों को शुद्ध किया जा सकता है जिससे पलके चिपकने से बचती हैं। हालांकि ध्यान रखें कि अधिक भाप लेने से आंखों की ड्राइनेस बढ़ सकती है इसलिए इसे संतुलित मात्रा में लें।

लखनऊ की ब्यूटी एक्सपर्ट अमरीश कौर के अनुसार, सबसे पहला कदम है बार-बार मॉइस्चराइज करना। इसके लिए हैंड क्रीम और फेस मॉइस्चराइजर चुनते समय ऐसे प्रोडक्ट्स का चयन करें जिसमें शीया बटर, एलोवेरा या हयालूरोनिक एसिड हो। हर बार हाथ धोने और चेहरे को साफ करने के बाद मॉइस्चराइज करना बेहद जरूरी है।
रात में स्किन की देखभाल और भी ज्यादा असरदार होती है। सोने से पहले चेहरे और हाथों पर पेट्रोलियम जेली या विटामिन ई ऑयल लगाकर कॉटन ग्लव्स और मोज़े पहनें। इससे स्किन पूरी रात पोषित और मुलायम रहती है। हफ्ते में एक बार हल्का एक्सफोलिएशन करना भी जरूरी है। चीनी और ऑलिव ऑयल मिलाकर चेहरे और हाथों की मृत त्वचा को हटाएं और फिर मॉइस्चराइज करें।
नाखून और सनस्क्रीन का महत्व
सर्दियों में सिर्फ चेहरे और हाथ ही नहीं, बल्कि नाखूनों और क्यूटिकल की देखभाल भी जरूरी है। रात में क्यूटिकल ऑयल लगाकर हल्की मसाज करने से नाखून मजबूत रहते हैं। दिन में बाहर निकलते समय SPF वाली हैंड क्रीम और फेस सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना त्वचा को UV किरणों से बचाता है और झुर्रियों को रोकता है।
हवा और धूप दोनों ही त्वचा से नमी चुराते हैं, इसलिए ग्लव्स पहनना जरूरी है। घर में बर्तन धोते समय, सफाई करते समय या बगीचे में काम करते समय भी दस्ताने पहनें। माइल्ड साबुन का उपयोग करें और बहुत गर्म पानी की जगह गुनगुना पानी ही इस्तेमाल करें।
नेचुरल उपाय और पोषण
त्वचा की सुंदरता सिर्फ बाहरी देखभाल से नहीं आती। पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार लेना और सही नींद लेना भी जरूरी है। गाजर, पालक, टमाटर और मेवे जैसी चीजें विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं और त्वचा को अंदर से पोषण देती हैं। इसके अलावा, घर पर तैयार नेचुरल फेस पैक और मास्क जैसे हल्दी और दूध, दही और शहद, एवोकैडो और शहद आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये न केवल त्वचा को मॉइस्चराइज करते हैं बल्कि उसे प्राकृतिक चमक भी देते हैं।
सर्दियों में त्वचा की देखभाल के लिए सही रूटीन अपनाना बेहद जरूरी है। बार-बार मॉइस्चराइज करना, रात की ओवरनाइट केयर, एक्सफोलिएशन, सनस्क्रीन का इस्तेमाल और ग्लव्स पहनना आपकी त्वचा को रूखेपन से बचाएगा। नेचुरल प्रोडक्ट्स और संतुलित जीवनशैली से त्वचा हमेशा मुलायम, नर्म और चमकदार बनी रहेगी। नियमित आदतों और सही प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से सर्दियों में भी त्वचा की खूबसूरती बरकरार रखी जा सकती है।

प्राचीन सभ्यताओं में बाल धोने का कार्य केवल स्वच्छता से जुड़ा नहीं था बल्कि इसे आध्यात्मिक और प्राकृतिक दृष्टिकोण से भी देखा जाता था। मिस्र भारत और अन्य सभ्यताओं में बाल धोने के पीछे एक गहरी सोच और सिद्धांत था। उदाहरण के लिए हमारे पूर्वजों का मानना था कि बालों के साथ शरीर की ऊर्जा भी जुड़ी होती है और खास दिन जैसे पूर्णिमा अमावस्या या शनिवार को बाल धोने से शरीर की ऊर्जा में असंतुलन हो सकता है। इन दिनो को शुद्धता और मानसिक संतुलन के लिए अवकाश के रूप में देखा जाता था और इन दिनों को शरीर की ऊर्जा को पुनः संतुलित करने के लिए उपयोग किया जाता था।
बाल धोने को लेकर धार्मिक दृष्टिकोण भी काफी महत्वपूर्ण था। हिन्दू धर्म में शास्त्रों में बताया गया है कि विशेष अवसरों पर बाल धोने से पुण्य मिलता है। इसके अलावा बाल धोते वक्त शरीर और मस्तिष्क की शुद्धि के साथ-साथ नकारात्मक ऊर्जा से बचने का भी ध्यान रखा जाता था। कई बार पुराने जमाने में बाल धोने को एक मानसिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाता था जिसे आंतरिक शांति और संतुलन प्राप्त करने के लिए अपनाया जाता था।
मिस्र में भी बाल धोने के दौरान रचनात्मक और आध्यात्मिक विचारों का एक मिश्रण था। वहाँ के लोग मानते थे कि बालों में शरीर की पवित्रता और आत्मा की शक्ति को भी संजोया जाता है और इसलिए विशेष अवसरों पर बाल धोने से आत्मा की शुद्धि होती थी। इस तरह से बाल धोने को एक आध्यात्मिक अनुष्ठान समझा जाता था न कि केवल स्वच्छता का एक साधारण काम।
यद्यपि आज के समय में इन नियमों को तर्कहीन या अंधविश्वास समझा जाता है फिर भी ये हमारे पूर्वजों की जीवन के साथ जुड़ी गहरी समझ और उनके ज्ञान का प्रतीक हैं। अब जबकि हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बहुत सी चीजों को समझने लगे हैं फिर भी हमें इन पारंपरिक मान्यताओं को सम्मान के साथ देखना चाहिए क्योंकि ये शारीरिक और मानसिक संतुलन के लिए एक रचनात्मक पहलू को प्रस्तुत करती हैं।