Author: bharati

  • अखिलेश के CM बनने की कामना, 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर पैदल निकले बॉबी यादव

    अखिलेश के CM बनने की कामना, 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर पैदल निकले बॉबी यादव

    गाजियाबाद। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने की मनोकामना को लेकर रेसलिंग खिलाड़ी बॉबी यादव हरिद्वार से 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर पैदल यात्रा पर निकले हैं। शुक्रवार को वह अपने साथियों के साथ मुरादनगर पहुंचे, जहां कांवड़ियों ने स्थानीय थाने में विश्राम किया और उनका स्वागत किया गया।

    नोएडा के सर्फाबाद निवासी बॉबी यादव ने बताया कि उन्होंने एक जुलाई को अखिलेश यादव के जन्मदिन के अवसर पर हरिद्वार से गंगाजल उठाया था। उन्होंने विशेष संकल्प के साथ यह कांवड़ यात्रा शुरू की है और पैदल चलते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं।

    साथियों के साथ जारी है यात्रा
    बॉबी यादव के साथ इस यात्रा में रिंकू, मोनू, हर्ष, राज, लविश समेत कई साथी भी शामिल हैं। यात्रा के दौरान यह दल विभिन्न स्थानों पर पड़ाव डालते हुए आगे बढ़ रहा है। रास्ते में स्थानीय लोगों और समर्थकों की ओर से उनका स्वागत और सत्कार भी किया जा रहा है।

    आस्था और संकल्प का प्रतीक
    बॉबी यादव का कहना है कि यह कांवड़ यात्रा उनकी धार्मिक आस्था और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। उनका विश्वास है कि भगवान शिव की कृपा से उनकी मनोकामना पूरी होगी और वे इसी भावना के साथ गंगाजल अर्पित करने की यात्रा पूरी कर रहे हैं।
  • महंगे हेल्थ सप्लीमेंट से मिलेगी राहत जन औषधि के न्यूट्रास्यूटिकल्स से सस्ती कीमत पर मिलेगा बेहतर पोषण

    महंगे हेल्थ सप्लीमेंट से मिलेगी राहत जन औषधि के न्यूट्रास्यूटिकल्स से सस्ती कीमत पर मिलेगा बेहतर पोषण


    नई दिल्ली। सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों पर अब कई तरह के पोषण संबंधी उत्पाद उपलब्ध हैं जिनमें प्रोटीन बार इम्यूनिटी बार माल्ट आधारित पोषण आहार प्रोटीन पाउडर और महिलाओं के लिए विशेष प्रोटीन बूस्ट शामिल हैं। इन उत्पादों को अलग अलग आयु वर्ग और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है ताकि हर वर्ग के लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार विकल्प मिल सकें।

    जन औषधि पोर्टफोलियो में 35 ग्राम के पैक में प्रोटीन बार और इम्यूनिटी बार उपलब्ध हैं। इसके अलावा महिलाओं के लिए तैयार किया गया जन औषधि वुमेन प्रोटीन बूस्ट चॉकलेट और वनीला फ्लेवर में उपलब्ध है जिसकी कीमत बाजार में मिलने वाले कई समान उत्पादों की तुलना में काफी कम रखी गई है। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं को अपनी दैनिक प्रोटीन आवश्यकता पूरी करने में मदद मिलेगी।

    परिवारों के लिए माल्ट आधारित पोषण आहार भी उपलब्ध कराया गया है जिसमें आवश्यक विटामिन और खनिज तत्व शामिल हैं। यह उत्पाद बच्चों के विकास युवाओं की ऊर्जा और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। अलग अलग पैक साइज उपलब्ध होने से उपभोक्ता अपनी जरूरत और बजट के अनुसार इन्हें खरीद सकते हैं।

    फिटनेस के प्रति जागरूक लोगों और अधिक प्रोटीन की आवश्यकता रखने वालों के लिए जन औषधि केंद्रों पर प्रोटीन पाउडर और 100 प्रतिशत व्हे प्रोटीन पाउडर भी उपलब्ध है। यह मांसपेशियों की रिकवरी और दैनिक प्रोटीन जरूरत पूरी करने में सहायक माना जाता है। वनीला और केसर पिस्ता जैसे फ्लेवर उपलब्ध होने से उपभोक्ताओं को पसंद के अनुसार विकल्प चुनने की सुविधा भी मिलती है।

    सरकार का कहना है कि इन उत्पादों की सबसे बड़ी विशेषता इनकी किफायती कीमत है। बाजार में मिलने वाले महंगे हेल्थ सप्लीमेंट की तुलना में जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध उत्पाद कम कीमत में खरीदे जा सकते हैं जिससे आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों को विशेष लाभ मिलेगा। इससे पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकेगा।

    हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विशेष पोषण संबंधी उत्पादों का सेवन डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। हर व्यक्ति की शारीरिक आवश्यकता अलग होती है इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी सप्लीमेंट का नियमित उपयोग शुरू नहीं करना चाहिए।

    प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का उद्देश्य केवल सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना ही नहीं बल्कि लोगों को किफायती स्वास्थ्य सेवाएं और बेहतर पोषण उपलब्ध कराना भी है। सरकार का मानना है कि न्यूट्रास्यूटिकल्स की यह पहल देश के लाखों परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में मजबूत सहारा प्रदान करेगी और स्वस्थ भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • वास्तु दोष दूर करने के आसान उपाय अपनाएं और घर में सुख समृद्धि सकारात्मक ऊर्जा का करें स्वागत

    वास्तु दोष दूर करने के आसान उपाय अपनाएं और घर में सुख समृद्धि सकारात्मक ऊर्जा का करें स्वागत


    नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहीं से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। मुख्य द्वार हमेशा साफ सुथरा और आकर्षक होना चाहिए। इसके आसपास गंदगी टूटा सामान या कचरा नहीं रखना चाहिए। नियमित रूप से दीपक जलाना और स्वच्छता बनाए रखना शुभ माना जाता है।

    पूजा घर को उत्तर पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। इस स्थान पर नियमित पूजा पाठ करने से घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बना रहता है। पूजा स्थल के आसपास अनावश्यक सामान रखने से बचना चाहिए। धार्मिक ग्रंथों और पूजा सामग्री को भी व्यवस्थित रखना अच्छा माना जाता है।

    रसोईघर को अग्नि तत्व का स्थान माना जाता है। वास्तु के अनुसार खाना बनाते समय पूर्व दिशा की ओर मुख रखना शुभ माना जाता है। रसोई को साफ रखना और गैस चूल्हे तथा पानी के स्रोत के बीच उचित दूरी बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे घर में संतुलन और सकारात्मकता बनी रहती है।

    शयनकक्ष का भी विशेष महत्व बताया गया है। परिवार के मुखिया का कमरा दक्षिण पश्चिम दिशा में होना शुभ माना जाता है। सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखने की सलाह दी जाती है। इससे बेहतर नींद और मानसिक शांति मिलने की मान्यता है।

    घर में टूटे हुए फर्नीचर बंद घड़ियां खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान और बेकार वस्तुओं को लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए। ऐसी चीजें नकारात्मक ऊर्जा का कारण मानी जाती हैं। समय समय पर घर की सफाई और अनावश्यक वस्तुओं को हटाना वातावरण को बेहतर बनाता है।

    तुलसी का पौधा और हरे पौधे घर की सकारात्मकता बढ़ाने वाले माने जाते हैं। तुलसी को आंगन या बालकनी में उचित स्थान पर लगाने से वातावरण शुद्ध रहने की मान्यता है। वहीं कांटेदार पौधों को मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    घर में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का प्रवेश भी बहुत जरूरी माना जाता है। बंद और अंधेरे स्थान नकारात्मकता बढ़ा सकते हैं। इसलिए रोजाना खिड़कियां खोलकर घर में धूप और ताजी हवा आने देना लाभकारी माना जाता है।

    यदि किसी कारणवश घर में वास्तु संबंधी बदलाव संभव नहीं हैं तो साफ सफाई नियमित पूजा सकारात्मक सोच और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सम्मान बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यही बातें किसी भी घर को सुख शांति और समृद्धि से भर सकती हैं।

    ध्यान रहे कि वास्तु शास्त्र पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसे आस्था और व्यक्तिगत विश्वास के अनुसार अपनाया जा सकता है। किसी भी समस्या का समाधान केवल वास्तु उपायों पर निर्भर न रखकर व्यावहारिक प्रयास और सही निर्णय भी जरूरी हैं।

  • निजी विवाद के बीच श्वेता तिवारी की सोशल मीडिया एंट्री, ‘किस पर भरोसा किया जाए’ लिखा संदेश

    निजी विवाद के बीच श्वेता तिवारी की सोशल मीडिया एंट्री, ‘किस पर भरोसा किया जाए’ लिखा संदेश

    नई दिल्ली । टेलीविजन अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने अपने पूर्व पति राजा चौधरी की ओर से लगाए गए हालिया आरोपों के बाद पहली बार सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा की है। हालांकि, श्वेता ने अपने पोस्ट में राजा चौधरी के किसी भी आरोप का सीधे तौर पर जवाब नहीं दिया है, लेकिन उनके लिखे कैप्शन को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है। श्वेता ने अपनी आगामी रियलिटी शो ‘ट्रेटर्स 2’ से जुड़ी एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, “इस बार असली कसौटी यह जानना है कि किस पर भरोसा किया जाए।”

    राजा चौधरी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपनी बेटी पलक तिवारी और पूर्व पत्नी श्वेता तिवारी को लेकर कई दावे किए थे। उन्होंने कहा था कि उनकी बेटी पलक उन्हें पिता के रूप में स्वीकार नहीं करती हैं और उन्होंने उन्हें सोशल मीडिया पर भी ब्लॉक कर दिया है। इसके अलावा राजा ने श्वेता द्वारा लगाए गए पुराने घरेलू हिंसा के आरोपों से भी इनकार किया था।

    राजा चौधरी ने श्वेता तिवारी पर कई व्यक्तिगत आरोप भी लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि श्वेता के टेलीविजन शो के दौरान उनके को-स्टार के साथ संबंध थे। हालांकि, श्वेता ने इन नए आरोपों पर अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अभिनेत्री ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट को केवल अपने नए प्रोजेक्ट से जोड़कर साझा किया है।

    राजा चौधरी और श्वेता तिवारी की शादी वर्ष 1998 में हुई थी। दोनों का रिश्ता करीब नौ साल बाद वर्ष 2007 में खत्म हो गया था। अलगाव के बाद श्वेता ने कई बार अपने रिश्ते से जुड़े अनुभवों के बारे में बात की थी। उन्होंने अलग होने के पीछे घरेलू समस्याओं और राजा की कुछ आदतों को वजह बताया था। वहीं राजा चौधरी ने अब इन आरोपों को खारिज किया है और अपनी ओर से अलग पक्ष रखा है।

    राजा ने अपनी बेटी पलक तिवारी से जुड़े पुराने विवाद पर भी बात की। उन्होंने दावा किया कि तलाक के समझौते के दौरान उन्होंने कुछ संपत्ति से जुड़े फैसले लिए थे और उस समय की परिस्थितियां अलग थीं। उनका कहना था कि उन्होंने अपनी परेशानियों और परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया था। हालांकि, इस मामले में श्वेता की ओर से कोई नया बयान सामने नहीं आया है।

    वहीं दूसरी ओर श्वेता तिवारी इन दिनों अपने आगामी रियलिटी शो ‘ट्रेटर्स 2’ को लेकर चर्चा में हैं। इस शो के जरिए वह एक बार फिर रियलिटी टेलीविजन में नजर आने वाली हैं। शो में कई अन्य चर्चित चेहरे भी शामिल हैं और इसके फॉर्मेट को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है।

    श्वेता की नई पोस्ट के बाद उनके प्रशंसक उनके समर्थन में प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हालांकि अभिनेत्री ने अपने संदेश में पारिवारिक विवाद या राजा चौधरी के बयानों का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनके कैप्शन को मौजूदा परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    फिलहाल श्वेता तिवारी अपने नए प्रोजेक्ट पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जबकि राजा चौधरी के बयानों के बाद दोनों के बीच पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आने वाले समय में इस मामले पर किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

  • हॉलीवुड फिल्मों में नया बेंचमार्क बना 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे', दूसरे दिन भी भारत में शानदार कमाई का सिलसिला जारी

    हॉलीवुड फिल्मों में नया बेंचमार्क बना 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे', दूसरे दिन भी भारत में शानदार कमाई का सिलसिला जारी

    नई दिल्ली । मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ भारत में रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर बड़ा धमाका कर रही है। फिल्म ने पहले दिन शानदार कमाई के साथ हॉलीवुड फिल्मों के लिए नया रिकॉर्ड बनाया और दूसरे दिन भी इसकी रफ्तार कम होती नजर नहीं आ रही है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक फिल्म ने रिलीज के दूसरे दिन दोपहर तक ही 70 करोड़ रुपये से अधिक का कुल कलेक्शन दर्ज कर लिया है।

    टॉम हॉलैंड स्टारर इस फिल्म को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। पहले दिन बड़ी संख्या में दर्शकों के सिनेमाघरों तक पहुंचने के बाद दूसरे दिन भी कई शहरों में फिल्म के शो हाउसफुल नजर आए। फिल्म की एडवांस बुकिंग और दर्शकों की प्रतिक्रिया ने इसकी मजबूत शुरुआत में अहम भूमिका निभाई है।

    ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ ने अपने पहले दिन भारत में करीब 60.60 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म ने भारत में सबसे बड़ी हॉलीवुड ओपनिंग का नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। फिल्म का शुरुआती ग्रॉस कलेक्शन भी 70 करोड़ रुपये से अधिक रहा, जिसने इसे भारतीय बाजार में हॉलीवुड फिल्मों की सूची में सबसे ऊपर पहुंचा दिया।

    फिल्म की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसने पहले दिन करीब 72 प्रतिशत से ज्यादा ऑक्यूपेंसी दर्ज की। अंग्रेजी भाषा के साथ-साथ हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में भी फिल्म को दर्शकों का अच्छा समर्थन मिला। हिंदी वर्जन ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़ी संख्या में दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचा है।

    दूसरे दिन भी फिल्म की कमाई का सिलसिला जारी रहा। शुरुआती रुझानों के अनुसार दोपहर तक फिल्म ने करीब 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली थी। इसके साथ ही फिल्म का दो दिनों का कुल कलेक्शन 70 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। माना जा रहा है कि दिन खत्म होने तक फिल्म की कमाई में और बढ़ोतरी हो सकती है।

    इस फिल्म ने हॉलीवुड की सबसे सफल फिल्मों में शामिल ‘एवेंजर्स: एंडगेम’ के शुरुआती रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। इससे पहले भारत में सबसे बड़ी हॉलीवुड ओपनिंग का रिकॉर्ड ‘एवेंजर्स: एंडगेम’ के नाम था। लेकिन ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ ने अपनी दमदार शुरुआत के साथ नया इतिहास बना दिया है।

    फिल्म की सफलता के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। मार्वल फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता, स्पाइडर-मैन किरदार के प्रति दर्शकों का लगाव और बड़े पैमाने पर किए गए प्रचार ने फिल्म के प्रति उत्सुकता बढ़ाई है। युवा दर्शकों के साथ-साथ परिवारों में भी इस फिल्म को लेकर काफी क्रेज देखा जा रहा है।

    भारतीय बॉक्स ऑफिस पर हॉलीवुड फिल्मों की बढ़ती पकड़ के बीच ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ की सफलता एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। फिल्म की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए आने वाले दिनों में इसके कई और रिकॉर्ड बनाने की संभावना जताई जा रही है। अगर फिल्म इसी तरह दर्शकों को आकर्षित करती रही तो यह भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हॉलीवुड फिल्मों की सूची में एक नया स्थान बना सकती है।

  • अमेरिकी चुनावों पर विदेशी दखल का दावा तेज, व्हाइट हाउस ने चीन पर वोटर डेटा चोरी का लगाया गंभीर आरोप

    अमेरिकी चुनावों पर विदेशी दखल का दावा तेज, व्हाइट हाउस ने चीन पर वोटर डेटा चोरी का लगाया गंभीर आरोप

    नई दिल्ली । अमेरिकी चुनावी सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि चीन और उससे जुड़े साइबर नेटवर्क ने अमेरिका के करीब 22 करोड़ मतदाताओं का पंजीकरण डेटा हासिल किया है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, यह मामला विदेशी हस्तक्षेप और साइबर सुरक्षा से जुड़ा है, जिसने चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

    व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक दस्तावेज में दावा किया गया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में ऐसे संकेत मिले हैं कि चीन से जुड़े साइबर समूहों ने वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़ी ऐसी जानकारियां हासिल कीं, जो पूरी तरह सार्वजनिक नहीं थीं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि विदेशी ताकतें चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर सकती हैं।

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, विदेशी हस्तक्षेप केवल चुनाव के दिन मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों, मतदाताओं और चुनावी ढांचे से जुड़ी सूचनाओं को निशाना बनाना भी शामिल हो सकता है। प्रशासन ने कहा कि वोटर रजिस्ट्रेशन सिस्टम और उससे जुड़े डेटा पर हमला चुनावी प्रक्रिया में बाधा पैदा करने का एक तरीका हो सकता है।

    व्हाइट हाउस के दस्तावेज में बताया गया कि वर्ष 2022 की खुफिया रिपोर्ट में एक चीनी साइबर नेटवर्क से जुड़े समूह की पहचान की गई थी, जिसने व्यावसायिक वेबसाइटों पर मौजूद मतदाता पंजीकरण डेटा तक पहुंच बनाई थी। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ऐसे साइबर समूह अक्सर ऐसी सूचनाएं जुटाने की कोशिश करते हैं, जो सामान्य रूप से उपलब्ध नहीं होती हैं।

    अमेरिकी सरकार ने साइबर हमलों से जुड़े संभावित खतरों का भी उल्लेख किया है। प्रशासन के अनुसार, यदि किसी विदेशी ताकत को मतदाता डेटा तक पहुंच मिल जाती है, तो वह उसमें बदलाव करने, मतदाताओं को मतदान में परेशानी पहुंचाने या चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने जैसी गतिविधियों की कोशिश कर सकती है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कथित डेटा हासिल करने की घटना से किसी चुनाव परिणाम पर कोई सीधा प्रभाव पड़ा है।

    यह मामला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विदेशी चुनावी गतिविधियों से जुड़े कुछ खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के फैसले के बाद सामने आया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का उद्देश्य चुनावी सुरक्षा से जुड़े आकलनों में पारदर्शिता बढ़ाना और विदेशी साइबर गतिविधियों के प्रति लोगों को जागरूक करना है।

    व्हाइट हाउस ने बताया कि कई प्रमुख अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के बयान और इससे जुड़े दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया में सहयोग किया। प्रशासन के अनुसार, इन एजेंसियों ने उपलब्ध खुफिया जानकारी के आधार पर तथ्यों की समीक्षा की।

    चीन की ओर से इस आरोप पर तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, अमेरिका और चीन के बीच पहले भी साइबर सुरक्षा, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और डेटा सुरक्षा को लेकर तनाव रहा है। दोनों देशों के बीच डिजिटल क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुकी है।

    अमेरिका में चुनावी सुरक्षा को लेकर यह बहस ऐसे समय में तेज हुई है, जब दुनिया भर में साइबर हमलों और डिजिटल हस्तक्षेप के खतरे बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक चुनाव प्रणालियों की सुरक्षा के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचे और लगातार निगरानी की आवश्यकता है।

  • शिवपुरी में थार का हाईवोल्टेज ड्रामा, कार-बाइक को टक्कर मारकर भागे, गड्ढे में फंसने पर पकड़े गए

    शिवपुरी में थार का हाईवोल्टेज ड्रामा, कार-बाइक को टक्कर मारकर भागे, गड्ढे में फंसने पर पकड़े गए


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी में गुरुवार शाम तेज रफ्तार थार सवारों ने शहर की सड़कों पर जमकर हंगामा मचाया। आरोप है कि नशे की हालत में वाहन चला रहे दो युवकों ने पहले एक कार को टक्कर मारी और विरोध होने पर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने पीछा शुरू किया तो भागते समय उन्होंने एक बाइक को भी टक्कर मार दी, जिससे दो युवक घायल हो गए। करीब आधे घंटे तक चले पीछा के बाद फिजिकल थाना पुलिस ने थार को घेरकर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।

    घटना शाम करीब साढ़े सात बजे माधव चौक पर हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लाल रंग की थार ने गौतम शर्मा की कार को टक्कर मार दी। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो वाहन में सवार युवकों ने धमकाते हुए मौके से भागने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई कि थार सवार तेज रफ्तार में शहर से निकल रहे हैं।

    सूचना मिलते ही पुलिस ने वायरलेस के जरिए अलर्ट जारी किया और शहर के विभिन्न स्थानों पर थार को रोकने का प्रयास किया। हालांकि चालक लगातार पुलिस को चकमा देता रहा। थार ग्वालियर नाका, सोनचिरैया होटल, भूत पुलिया, टूरिस्ट विलेज और करबला क्षेत्र से तेज रफ्तार में गुजरती रही। इस दौरान वाहन का एक टायर फटने के बावजूद चालक ने रफ्तार कम नहीं की।

    भागने के दौरान करबला क्षेत्र में थार ने सामने से आ रही एक बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में बड़ी नोहरी निवासी वीरेंद्र शर्मा और नवाब साहब रोड निवासी गौरव शर्मा घायल हो गए। दोनों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायल वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि वह परिवार के साथ बांकड़े मंदिर से दर्शन कर लौट रहे थे, तभी तेज रफ्तार थार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।

    लगातार पीछा कर रही पुलिस ने आखिरकार थार को घेर लिया। भागने के दौरान वाहन अनियंत्रित होकर एक गड्ढे में फंस गया, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने थार को भी जब्त कर लिया।

    पुलिस के मुताबिक थार चला रहे चालक की पहचान सिरसौद निवासी 30 वर्षीय बृजेश विश्वकर्मा के रूप में हुई है। वाहन मालिक चंद्रपाल चौहान भी कार में मौजूद था। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 281 और 125(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और हादसे में हुए नुकसान सहित अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

  • शिवपुरी में लेब्राडोर की संदिग्ध मौत, शव लेकर थाने पहुंची महिला ने FIR की मांग की

    शिवपुरी में लेब्राडोर की संदिग्ध मौत, शव लेकर थाने पहुंची महिला ने FIR की मांग की


    शिवपुरी मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक पालतू लेब्राडोर कुत्ते की मौत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शांति नगर क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने अपने पड़ोसियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उसके आठ माह के पालतू लेब्राडोर को लाठियों से पीट-पीटकर मार डाला। घटना के विरोध में महिला शुक्रवार को कुत्ते का शव लेकर फिजिकल थाना पहुंची और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    महिला प्रीति परिहार के मुताबिक गुरुवार शाम उनका पालतू लेब्राडोर खाना खाने के बाद घर से बाहर निकल गया था। कुछ देर बाद वह पास स्थित एक आरओ प्लांट संचालक के घर की ओर चला गया। देर रात तक कुत्ता वापस नहीं लौटा तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान आसपास के लोगों से जानकारी मिली कि कुत्ते के साथ मारपीट की गई है।

    प्रीति परिहार का आरोप है कि आरओ प्लांट संचालक, उसके बेटे और ड्राइवर ने मिलकर लाठियों से उनके पालतू कुत्ते की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई। उनका यह भी आरोप है कि घटना के बाद कुत्ते के शव को दूर फेंक दिया गया ताकि मामला सामने न आए।

    महिला का कहना है कि जब वह घटना की जानकारी लेने आरोपियों के घर पहुंचीं तो उनके साथ गाली-गलौज की गई। विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और मारपीट करने की कोशिश भी की गई। शुक्रवार सुबह कुत्ते का शव मिलने के बाद वह उसे लेकर सीधे फिजिकल थाना पहुंचीं और पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    अपनी शिकायत में महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित आरओ प्लांट में रात के समय संदिग्ध और अनैतिक गतिविधियां संचालित होती हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    फिजिकल थाना पुलिस का कहना है कि शिकायत प्राप्त हो गई है। मामले में लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • SCO शिखर सम्मेलन में PM मोदी के पाकिस्तान दौरे पर सस्पेंस, इस्लामाबाद ने सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करने की तैयारी शुरू की

    SCO शिखर सम्मेलन में PM मोदी के पाकिस्तान दौरे पर सस्पेंस, इस्लामाबाद ने सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करने की तैयारी शुरू की

    नई दिल्ली । शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के आगामी शिखर सम्मेलन को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक गतिविधियां चर्चा में हैं। साल 2027 में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले SCO सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करने की बात कही गई है।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि SCO के नियमों और प्रोटोकॉल के तहत सम्मेलन में सभी सदस्य देशों को निमंत्रण भेजा जाएगा। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि संगठन के सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को सम्मेलन में आमंत्रित करना मेजबान देश की जिम्मेदारी है।

    इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SCO सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान जाएंगे। हालांकि, भारत की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। प्रधानमंत्री की किसी भी विदेश यात्रा का फैसला समय, परिस्थितियों और कूटनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर लिया जाता है।

    SCO एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय संगठन है, जिसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान सहित कई अन्य देश सदस्य हैं। इस संगठन का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग, सुरक्षा, आर्थिक विकास और आपसी संबंधों को मजबूत करना है। हर साल सदस्य देशों के बीच अध्यक्षता बदलती रहती है और जिस देश के पास अध्यक्षता होती है, वही शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है।

    2027 में SCO की अध्यक्षता पाकिस्तान के पास रहने की संभावना है, जिसके तहत इस्लामाबाद में राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों की बैठक आयोजित की जाएगी। ऐसे सम्मेलनों में सदस्य देशों के शीर्ष नेता क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं।

    भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से चुनौतीपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद हैं, जिनमें सीमा सुरक्षा और आतंकवाद जैसे विषय प्रमुख हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के पाकिस्तान दौरे का फैसला केवल SCO की बैठक तक सीमित नहीं होगा, बल्कि व्यापक कूटनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

    इस बीच पाकिस्तान ने भारत और अन्य सदस्य देशों के साथ SCO प्रक्रिया के तहत सामान्य राजनयिक प्रोटोकॉल का पालन करने की बात कही है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच संभावित बैठक को लेकर भी सवाल किया गया था, जिस पर उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी प्रस्तावित मुलाकात की जानकारी नहीं है।

    SCO की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी। संगठन का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। समय के साथ इसका दायरा बढ़ा है और यह एशिया के प्रमुख बहुपक्षीय मंचों में शामिल हो गया है।

    अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि भारत इस सम्मेलन को लेकर क्या रुख अपनाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित भागीदारी को लेकर अंतिम फैसला आने वाले समय में भारत सरकार की कूटनीतिक रणनीति और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

  • चुनाव आयुक्त चयन पैनल विवाद में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, पारदर्शिता और न्याय के सिद्धांत पर जोर

    चुनाव आयुक्त चयन पैनल विवाद में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, पारदर्शिता और न्याय के सिद्धांत पर जोर

    नई दिल्ली । मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और अदालत के बीच महत्वपूर्ण बहस हुई। केंद्र सरकार ने चयन प्रक्रिया में प्रधानमंत्री की भूमिका का बचाव करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और सरकार के प्रतिनिधियों पर विश्वास किया जाना चाहिए। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष पर भरोसे या अविश्वास का नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की नियुक्ति प्रक्रिया में न्याय, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का है।

    केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई कि चयन समिति में प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री की मौजूदगी को लेकर संदेह करना उचित नहीं है। सरकार ने कहा कि यह मान लेना गलत होगा कि प्रधानमंत्री या उनके मंत्रिमंडल के सदस्य किसी गलत उद्देश्य से काम करेंगे। केंद्र का तर्क था कि चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाना संसद की समझ और उसके बनाए कानून पर भी सवाल खड़ा करता है।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत का उद्देश्य किसी व्यक्ति की नीयत पर सवाल उठाना नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे जनता के बीच निष्पक्षता और स्वतंत्रता का भरोसा कायम रहे। कोर्ट ने कहा कि चर्चा किसी व्यक्ति विशेष के विश्वास की नहीं, बल्कि संस्थागत व्यवस्था में निष्पक्षता दिखाई देने की है।

    केंद्र सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनाए गए चयन पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किए जाने के तर्क पर भी सवाल उठाया। सरकार ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री के निर्णय पर भरोसा नहीं किया जा सकता, तो फिर अन्य संवैधानिक नियुक्तियों में भी बाहरी व्यक्तियों या पूर्व न्यायाधीशों को शामिल करने की मांग उठ सकती है।

    वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि वर्ष 2023 में बनाए गए कानून ने सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के पुराने फैसले के प्रभाव को बदल दिया है। संविधान पीठ ने अपने एक फैसले में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति की व्यवस्था सुझाई थी।

    इसके बाद संसद ने नया कानून पारित किया, जिसमें चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री को शामिल करने का प्रावधान किया गया। याचिकाओं में इसी बदलाव को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था की नियुक्ति प्रक्रिया में संतुलन और निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है।

    चुनाव आयोग देश में चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करने वाली महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है। ऐसे में उसके प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर होने वाली बहस का संबंध केवल कानूनी प्रावधानों से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और जनता के विश्वास से भी जुड़ा है।

    सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। अब आगे की सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया संवैधानिक सिद्धांतों और निष्पक्ष व्यवस्था के अनुरूप है या नहीं। इस मामले के फैसले का असर भविष्य में चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है।