Author: bharati

  • श्रीलंका के खिलाफ टी20 श्रृंखला के लिए वेस्टइंडीज टीम घोषित, विश्व कप में खराब प्रदर्शन के बाद टीम में हुए 3 बड़े बदलाव

    श्रीलंका के खिलाफ टी20 श्रृंखला के लिए वेस्टइंडीज टीम घोषित, विश्व कप में खराब प्रदर्शन के बाद टीम में हुए 3 बड़े बदलाव

    नई दिल्ली। वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने श्रीलंका के खिलाफ घरेलू मैदानों पर खेली जाने वाली आगामी तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिए अपनी 15 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम का एलान कर दिया है। हाल ही में संपन्न हुए टी20 विश्व कप 2026 के ग्रुप चरण से बाहर होने के बाद कैरेबियाई टीम की यह पहली टी20 श्रृंखला है, जिसके चलते चयनकर्ताओं ने भविष्य की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए टीम में कई चौंकाने वाले और बड़े फेरबदल किए हैं। इस महत्वपूर्ण श्रृंखला में टीम की कमान एक बार फिर स्टार बल्लेबाज शाई होप के हाथों में सौंपी गई है।

    मेजबान वेस्टइंडीज के लिए यह टी20 सीरीज साख बचाने और खोई हुई लय वापस पाने का एक बड़ा अवसर है। इससे पहले दोनों देशों के बीच खेली गई तीन मैचों की वनडे सीरीज बारिश से बुरी तरह प्रभावित रही थी, जहां केवल एक ही मैच का परिणाम आ सका था। उस एकमात्र मुकाबले को जीतकर श्रीलंका ने वनडे सीरीज अपने नाम कर ली थी, जबकि बाकी के दो मैच भारी बारिश के कारण रद्द करने पड़े थे। वनडे सीरीज की इस निराशा को पीछे छोड़कर कैरेबियाई टीम अब सबसे छोटे प्रारूप में पलटवार करने की रणनीति तैयार कर रही है।

    चयनकर्ताओं ने टीम को मजबूत और संतुलित बनाने के लिए अनुभवी बल्लेबाज जॉनसन चार्ल्स, क्वेंटिन सैम्पसन और तेज गेंदबाज जेडेन सील्स को टीम से ड्रॉप कर दिया है। इनके स्थान पर युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी एकीम ऑगस्टे, जेवेल एंड्र्यू और ऑलराउंडर शमर स्प्रिंगर को टीम में जगह दी गई है। हालांकि, टीम के मुख्य तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ अभी भी टीम का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। टीम के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने इन बदलावों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि विश्व कप की निराशा के बाद अब वे टीम को एक नया आकार देने की दिशा में काम कर रहे हैं।

    कोच डैरेन सैमी ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि भारत में हुए विश्व कप के बाद यह हमारी पहली टी20 सीरीज है और यह हमारे लिए बेहद अहम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि टीम उसी जज्बे, जुझारूपन और एकजुटता के साथ मैदान पर उतरेगी जिसके लिए वेस्टइंडीज क्रिकेट को विश्व भर में जाना जाता है। सैमी के अनुसार, टीम का मुख्य लक्ष्य बुनियादी चीजों को दुरुस्त करना, एक सामूहिक इकाई के रूप में आगे बढ़ना और श्रीलंका के खिलाफ उत्कृष्ट प्रदर्शन करके घरेलू फैंस को गौरवान्वित होने का मौका देना है।

    इस टी20 श्रृंखला का पूरा कार्यक्रम भी जारी कर दिया गया है, जिसके तहत तीनों मुकाबले जमैका के ऐतिहासिक सबीना पार्क स्टेडियम में खेले जाएंगे। श्रृंखला का पहला मैच 11 जून को, दूसरा मैच 13 जून को और तीसरा व अंतिम मैच 14 जून को आयोजित होगा। वेस्टइंडीज के लिए सबसे राहत की बात यह है कि इस समय वैश्विक स्तर पर कोई बड़ी टी20 लीग नहीं खेली जा रही है, जिसके चलते उनके सभी प्रमुख और सीनियर खिलाड़ी चयन के लिए उपलब्ध रहे, जिससे बोर्ड को एक मजबूत टीम चुनने में मदद मिली है।

  • 'बुढ़वा मंगल' पर महाबली के चमत्कारी दोहों का महत्व, मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए उमड़ी भीड़

    'बुढ़वा मंगल' पर महाबली के चमत्कारी दोहों का महत्व, मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए उमड़ी भीड़

    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में ज्येष्ठ मास के मंगलवार का अत्यधिक पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। आज छठे बड़े मंगल के पावन अवसर पर तड़के से ही देश के तमाम छोटे-बड़े हनुमान मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर पवनपुत्र हनुमान जी की आराधना करने से भक्तों को जीवन की हर कसौटी पर विजय प्राप्त होती है। यदि कोई श्रद्धालु समय के अभाव में संपूर्ण हनुमान चालीसा का पाठ नहीं कर पाता है, तो उसके कुछ अत्यंत चमत्कारी दोहों और चौपाइयों के मानसिक जाप से भी अद्वितीय लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

    धार्मिक विद्वानों के अनुसार, विद्यार्थियों और रोजगार की तलाश में जुटे युवाओं के लिए हनुमान चालीसा का प्रारंभिक दोहा ‘बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार। बल-बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।’ एक अचूक महामंत्र की तरह कार्य करता है। इस दोहे का सीधा अर्थ है कि साधक स्वयं को बुद्धिहीन मानकर पवनपुत्र का स्मरण कर रहा है, ताकि उसे बल, बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद मिल सके। बड़े मंगल के दिन स्नान के उपरांत तुलसी की माला से इस दोहे का कम से कम 108 बार जाप करने से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है और किसी भी प्रतियोगिता या इंटरव्यू में सफलता के मार्ग खुलते हैं।

    इसके अतिरिक्त, जो लोग अज्ञात भय, मानसिक अवसाद या बुरे सपनों से परेशान रहते हैं, उनके लिए ‘भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महावीर जब नाम सुनावे’ की चौपाई को संजीवनी माना गया है। इस चौपाई के नियमित पाठ से किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्ति या ऊपरी बाधा साधक के समीप नहीं फटकती है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न अंचलों के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में आज के दिन भक्तों को इस चौपाई के सामूहिक कीर्तन के जरिए भयमुक्त होने का संकल्प लेते देखा जा रहा है, जिससे आंतरिक शांति और गहरी नींद की प्राप्ति होती है।

    शारीरिक व्याधियों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पीड़ितों के लिए ‘नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा’ का पाठ परम कल्याणकारी सिद्ध होता है। इस पंक्ति के निरंतर जाप से असाध्य रोगों के कष्टों में कमी आती है और चिकित्सा के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा मिलने से रोगी तेजी से स्वस्थ होने लगता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में पनपने वाले मानसिक तनाव और डिप्रेशन को दूर करने में भी यह चौपाई अत्यंत प्रभावी साबित हुई है, जिसके चलते आज भंडारे और पूजा पंडालों में इसका विशेष गायन किया जा रहा है।

    सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए ‘महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी’ का पाठ करने की सलाह दी जाती है। यह चौपाई मानव मस्तिष्क से दुर्बुद्धि और द्वेष की भावनाओं का समूल नाश कर सद्बुद्धि का संचार करती है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर किसी भी प्रकार के अनैतिक विचारों से बचने तथा ईमानदारी से तरक्की पाने के लिए इस दोहे को आत्मसात करना अनिवार्य माना गया है। कुल मिलाकर, यह छठा बड़ा मंगल भक्तों के लिए दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति का एक बड़ा माध्यम बनकर आया है।

  • अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टीम इंडिया ने रचा स्वर्णिम इतिहास, अफगानिस्तान को हराकर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाला बना पहला देश

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टीम इंडिया ने रचा स्वर्णिम इतिहास, अफगानिस्तान को हराकर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाला बना पहला देश

    नई दिल्ली। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक ऐसा ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर दिया है, जिसके आसपास फिलहाल दुनिया की कोई भी बड़ी क्रिकेट टीम नजर नहीं आती है। न्यू चंडीगढ़ के मुल्लांपुर स्टेडियम में खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में भारत ने अफगानिस्तान को पारी और 300 रनों के बेहद शर्मनाक अंतर से शिकस्त दे दी। इस विशाल जीत के साथ ही भारतीय टीम ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में एक नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा लिया है, जहां क्रिकेट की महाशक्तियां मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमें भारत के आसपास भी नहीं ठहरती हैं।

    यह मुकाबला जीतने के साथ ही अफगानिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम का बिना हारे लगातार 15 मैच खेलने का अनोखा सिलसिला पूरा हो चुका है। भारतीय टीम ने साल 2010 से लेकर 2026 तक के सफर में अफगानिस्तान के खिलाफ सभी प्रारूपों को मिलाकर कुल 15 मुकाबले खेले हैं, जिनमें से 12 मैचों में टीम इंडिया ने एकतरफा जीत हासिल की है। इस सफर के दौरान भारतीय टीम को एक भी मैच में हार का सामना नहीं करना पड़ा है, जिसने भारत को विश्व क्रिकेट इतिहास की सबसे लंबी अजेय स्ट्रीक का मालिक बना दिया है।

    इस वैश्विक सूची पर नजर डालें तो भारत के बाद दूसरे नंबर पर न्यूजीलैंड की टीम मौजूद है, जिसने आयरलैंड के खिलाफ लगातार 13 मुकाबलों में जीत दर्ज की थी। वहीं युगांडा ने नाइजीरिया के खिलाफ लगातार 13 मैच जीते थे। भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले गए इन 15 मुकाबलों के इतिहास में केवल एक मैच साल 2023 के टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान बारिश की भेंट चढ़ा था, जबकि दो बेहद रोमांचक मुकाबले टाई पर समाप्त हुए थे। इनमें से पहला टाई मुकाबला साल 2018 के एशिया कप के दौरान दुबई में खेला गया वनडे मैच था, जिसमें महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में विपक्षी टीम ने भारत को कड़ी टक्कर दी थी।

    इसके बाद साल 2024 में बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में दोनों देशों के बीच खेला गया द्विपक्षीय टी20 मुकाबला क्रिकेट इतिहास के सबसे रोमांचक मैचों में शुमार हो गया था, जहां एक ही मैच में दो बार सुपर ओवर का ड्रामा देखने को मिला था। उस ऐतिहासिक मैच में कप्तान रोहित शर्मा के शानदार 121 रनों और रिंकू सिंह की आतिशी पारी के दम पर भारत ने विशाल स्कोर खड़ा किया था, जिसे अफगानिस्तान ने बराबर कर दिया था। अंततः रवि बिश्नोई की घातक गेंदबाजी के दम पर भारत ने वह दोहरा सुपर ओवर मुकाबला अपने नाम किया था।

    क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप यानी टेस्ट मैच में अफगानिस्तान को बेहद बुरी तरह रौंदकर भारत ने साफ कर दिया है कि खेल के हर फॉर्मेट में उसकी बादशाहत क्यों कायम है। मुल्लांपुर स्टेडियम की पिच पर भारतीय गेंदबाजों और बल्लेबाजों के संयुक्त प्रदर्शन ने विपक्षी टीम को मैच के किसी भी सत्र में संभलने का मौका नहीं दिया। भारतीय क्रिकेट के इस स्वर्णिम दौर में यह नया विश्व रिकॉर्ड खिलाड़ियों की निरंतरता और टीम के मजबूत बेंच स्ट्रेंथ को दर्शाता है, जिसने देश के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

  • बुध के नक्षत्र परिवर्तन से इन राशियों पर बरसेगा धन और सफलता का आशीर्वाद

    बुध के नक्षत्र परिवर्तन से इन राशियों पर बरसेगा धन और सफलता का आशीर्वाद

    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति, संचार और व्यापार का कारक माना जाता है। ऐसे में बुध का नक्षत्र परिवर्तन विशेष महत्व रखता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 11 जून 2026 को बुध देव राहु के आर्द्रा नक्षत्र से निकलकर देवगुरु बृहस्पति के स्वामित्व वाले पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह अवधि विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकती है।

    कब होगा बुध का नक्षत्र परिवर्तन?
    पंचांग के अनुसार, 11 जून 2026, गुरुवार को सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर बुध पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। खास बात यह है कि बुध इस नक्षत्र में लंबे समय तक रहेंगे और 8 अगस्त 2026 तक यहीं विराजमान रहेंगे। इस दौरान बुध की वक्री और मार्गी चाल का प्रभाव भी देखने को मिलेगा।

    पुनर्वसु नक्षत्र आकाश मंडल का सातवां नक्षत्र माना जाता है, जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। गुरु के नक्षत्र में बुध का प्रवेश ज्ञान, विवेक, शिक्षा और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है।

    इन राशियों के लिए खुलेंगे सफलता के द्वार

    वृषभ राशि
    बुध का यह गोचर वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। आय के नए स्रोत बनेंगे और धन आगमन के अवसर बढ़ेंगे। परिवार के साथ धार्मिक या मनोरंजक यात्रा का योग बन सकता है। पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने की भी संभावना है।

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के जातकों को करियर में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और पदोन्नति या वेतन वृद्धि के योग बन सकते हैं। व्यापार में लाभ की संभावना रहेगी तथा लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिल सकता है।

    व्यक्तिगत जीवन में भी सुधार देखने को मिलेगा। वाणी में मधुरता बढ़ेगी, जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा मजबूत होगी। संतान पक्ष से कोई सुखद समाचार मिलने की संभावना है।

    सिंह राशि
    सिंह राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक उन्नति का संकेत दे रहा है। आय के नए रास्ते खुल सकते हैं और निवेश से लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आएगी तथा पुराने मतभेद दूर हो सकते हैं। प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी और कार्यस्थल पर लंबे समय से चल रहे विवादों या तनाव से राहत मिलने की संभावना है।

    कन्या राशि
    कन्या राशि के जातकों के लिए बुध का यह गोचर नई शुरुआत और उपलब्धियों का संकेत लेकर आ रहा है। नया व्यापार शुरू करने या किसी नई योजना पर काम करने के लिए समय अनुकूल रहेगा। वाहन या संपत्ति खरीदने के अवसर भी बन सकते हैं। रचनात्मक क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। बैंकिंग, शिक्षा, लेखन और बौद्धिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को विशेष सफलता मिल सकती है। सरकारी कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी और परिवार का सहयोग प्राप्त होगा।

    ज्ञान और समृद्धि का विशेष योग
    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, बृहस्पति के नक्षत्र में बुध का प्रवेश बुद्धि, शिक्षा, संवाद कौशल और आर्थिक मामलों में सकारात्मक प्रभाव ला सकता है। 11 जून से 8 अगस्त तक की यह अवधि कई लोगों के लिए नए अवसरों, आर्थिक मजबूती और व्यक्तिगत विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

  • 100 करोड़ के क्लब में शामिल होने वाले देश के टॉप-7 फिल्म निर्देशकों की सूची आई सामने, जादुई आंकड़े से बदली फिल्म इंडस्ट्री की दशा

    100 करोड़ के क्लब में शामिल होने वाले देश के टॉप-7 फिल्म निर्देशकों की सूची आई सामने, जादुई आंकड़े से बदली फिल्म इंडस्ट्री की दशा

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के बदलते स्वरूप और बढ़ती पहुंच के बीच बॉक्स ऑफिस पर कमाई के नए रिकॉर्ड स्थापित हो रहे हैं। बॉलीवुड से लेकर साउथ सिनेमा तक, आज के दौर में फिल्मों की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना 100 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होना बन चुका है। इस जादुई और प्रतिष्ठित आंकड़े को सबसे ज्यादा बार छूने का महा-रिकॉर्ड एक्शन फिल्मों के बेताज बादशाह कहे जाने वाले निर्देशक रोहित शेट्टी के नाम दर्ज हो चुका है। रोहित शेट्टी ने अपनी बैक-टू-बैक सुपरहिट कमर्शियल फिल्मों के दम पर एसएस राजामौली और राजकुमार हिरानी जैसे धुरंधर निर्देशकों को भी संख्या के मामले में पीछे छोड़ दिया है।

    फिल्म निर्देशन की दुनिया में रोहित शेट्टी की शैली को सबसे सुरक्षित और बॉक्स ऑफिस फ्रेंडली माना जाता है। अपनी खास एक्शन और कॉमेडी फिल्मों के लिए मशहूर रोहित शेट्टी के करियर में अब तक 10 से ज्यादा ऐसी फिल्में आ चुकी हैं, जिन्होंने घरेलू बाजार में 100 करोड़ रुपये से अधिक की शानदार कमाई की है। उनके इस अनूठे रिकॉर्ड के आसपास फिलहाल इंडस्ट्री का कोई दूसरा निर्देशक नजर नहीं आता है, जो यह दर्शाता है कि दर्शकों की नब्ज पर उनकी पकड़ कितनी मजबूत है।

    इस सूची में दूसरे पायदान पर गंभीर विषयों को बेहद हल्के-फुल्के और मनोरंजक अंदाज में पेश करने वाले निर्देशक राजकुमार हिरानी का नाम आता है। ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’, ‘3 इडियट्स’, ‘पीके’ और ‘संजू’ जैसी कालजयी फिल्में देने वाले राजकुमार हिरानी ने अब तक 5 फिल्में ऐसी दी हैं, जिन्होंने 100 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार किया है। हिरानी की फिल्मों की खासियत यह है कि वे न केवल कमाई के रिकॉर्ड तोड़ती हैं, बल्कि समाज को एक बड़ा संदेश भी देती हैं।

    कमाई के इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में तीसरे नंबर पर एक्शन और स्पाई थ्रिलर फिल्मों के विशेषज्ञ सिद्धार्थ आनंद का कब्जा है। ‘वॉर’, ‘पठान’ और ‘किंग’ जैसी मेगा-बजट और भव्य स्तर की एक्शन फिल्में बनाने वाले सिद्धार्थ आनंद के खाते में भी 4 से 5 ऐसी फिल्में शामिल हैं, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा का कलेक्शन दर्ज कराया है। उनके बाद चौथे नंबर पर निर्देशक आदित्य धर का नाम आता है, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में देशप्रेम और युद्ध पर आधारित दमदार फिल्में बनाकर इतिहास रचा है और उनके खाते में भी 5 से अधिक 100 करोड़ क्लब की फिल्में दर्ज हैं।

    इस सूची में साउथ सिनेमा के दिग्गज निर्देशक सुकुमार भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हैं, जिनकी ‘आर्या’ और वैश्विक स्तर पर तहलका मचाने वाली ‘पुष्पा’ जैसी फिल्मों ने 100 करोड़ रुपये का कलेक्शन आसानी से पार किया है। वहीं हिंदी सिनेमा के हॉरर-कॉमेडी जॉनर को नया जीवन देने वाले निर्देशक अमर कौशिक भी ‘भेड़िया’ और ‘स्त्री 2’ जैसी सुपरहिट फिल्मों के साथ इस एलीट क्लब का हिस्सा बने हुए हैं। सूची के अंतिम छोर पर वैश्विक स्तर पर भारत का नाम चमकाने वाले निर्देशक एसएस राजामौली का नाम है, जिन्होंने ‘बाहुबली’ और ‘आरआरआर’ जैसी कल्ट फिल्मों के जरिए न केवल 100 करोड़ बल्कि हजारों करोड़ की कमाई का नया इतिहास रचा है।

  • एमपी में 15 से 18 जून के बीच मानसून आने की संभावना, आज 18 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट

    एमपी में 15 से 18 जून के बीच मानसून आने की संभावना, आज 18 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री अगले सप्ताह 15 से 18 जून के बीच होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून प्रदेश में इंदौर संभाग के बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, बैतूल या जबलपुर संभाग के छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बालाघाट जिलों के रास्ते प्रवेश कर सकता है। फिलहाल प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय बनी हुई हैं।

    मानसून के आगमन से पहले प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश का दौर जारी रहेगा। मंगलवार को बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया और शहडोल सहित 18 जिलों में तेज हवाओं और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    10 और 11 जून को लू का भी असर

    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार 9 से 11 जून तक प्रदेश में आंधी, बारिश और गर्मी तीनों का असर देखने को मिलेगा। वहीं 10 और 11 जून को भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में हीटवेव यानी लू चलने की चेतावनी जारी की गई है।

    कई जिलों में 42 डिग्री के पार पहुंचा पारा

    प्रदेश में बारिश की गतिविधियों के बावजूद गर्मी का असर बरकरार है। सोमवार को कई जिलों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। मंडला सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। छिंदवाड़ा में 42.1, खजुराहो में 42, दमोह में 41.8, मलाजखंड में 41.7 और राजगढ़ में 41.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।

    बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर में 41.6 डिग्री, जबलपुर में 40 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री, भोपाल में 38.7 डिग्री और इंदौर में 38.6 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    प्रदेश में एक साथ दिख रहा तीन मौसमों का असर

    मौसम विभाग का कहना है कि मध्य प्रदेश इस समय मौसम के संक्रमण काल से गुजर रहा है। प्रदेश में एक ओर भीषण गर्मी है, वहीं दूसरी ओर प्री-मानसून की बारिश और बढ़ती नमी का प्रभाव भी दिखाई दे रहा है।

    रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट और सिवनी जिलों में अगले तीन से चार दिनों के दौरान गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। महाकौशल क्षेत्र में मध्यम बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं, जबकि बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की आशंका भी बनी हुई है।

    भोपाल और आसपास के इलाकों में राहत के आसार

    भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा समेत प्रदेश के मध्य भागों में दोपहर बाद बादल छाने, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। इससे पिछले कुछ दिनों से पड़ रही तेज गर्मी से राहत मिल सकती है। वहीं सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना में भी वर्षा गतिविधियां बढ़ने के संकेत हैं।

    मालवा-निमाड़ में बढ़ेगी नमी और उमस

    इंदौर, उज्जैन, धार, खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर जिलों में अरब सागर से आने वाली नमी का असर देखने को मिलेगा। यहां बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि पूर्वी मध्य प्रदेश की तुलना में वर्षा का दायरा सीमित रहने की संभावना है।

    तापमान में 2 से 5 डिग्री तक गिरावट संभव

    मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक कमी दर्ज की जा सकती है। जिन क्षेत्रों में बारिश होगी वहां मौसम सुहावना रहेगा, जबकि केवल बादल छाए रहने वाले इलाकों में उमस बढ़ सकती है।

    मानसून के स्वागत की तैयारी

    मौजूदा मौसमीय परिस्थितियों और मानसून की प्रगति को देखते हुए प्रदेश में मानसून प्रवेश की अनुकूल स्थिति बन रही है। यदि अगले कुछ दिनों तक यही हालात बने रहे तो दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी मध्य प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को खरीफ फसलों की तैयारी करने की सलाह दी है, लेकिन बुवाई से पहले व्यापक और स्थायी बारिश का इंतजार करना बेहतर रहेगा।

    मौसम में बदलाव की वजह

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में सक्रिय प्री-मानसून सिस्टम के साथ उत्तर-पूर्वी हिस्से में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन बनी हुई है। इसके कारण प्रदेश के मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। वहीं 11 जून को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ का असर भी मध्य प्रदेश के मौसम पर पड़ सकता है।

  • फिल्म 'तीसरी कसम' के सदाबहार गीत 'चलत मुसाफिर' का गहरा दर्शन, मौज-मस्ती के पीछे छिपी है एक कलावंती की बेबसी

    फिल्म 'तीसरी कसम' के सदाबहार गीत 'चलत मुसाफिर' का गहरा दर्शन, मौज-मस्ती के पीछे छिपी है एक कलावंती की बेबसी

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ गीतों को उनके मूल संदर्भ से अलग केवल मनोरंजन के दृष्टिकोण से देखा जाता रहा है, जबकि उनके पीछे गहरे सामाजिक सरोकार छिपे होते हैं। ऐसा ही एक कालजयी उदाहरण वर्ष 1966 में प्रदर्शित निर्देशक बासु भट्टाचार्य की फिल्म ‘तीसरी कसम’ का लोकगीत ‘चलत मुसाफिर मोह लिया रे’ है। रेडियो के जमाने से लेकर आधुनिक रीमिक्स और रील्स के दौर तक इस गीत की धुन पर लोग झूमते आ रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस हंसते-गाते ट्रैक के पीछे एक स्त्री की बेबसी और सामाजिक विडंबना का मर्मस्पर्शी ताना-बाना बुना गया है।

    प्रसिद्ध गीतकार और इस फिल्म के निर्माता शैलेंद्र द्वारा रचित यह गीत फणीश्वरनाथ रेणु की कालजयी कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ पर आधारित फिल्म का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। बॉक्स ऑफिस पर असफल रहने के बावजूद इस फिल्म के गानों को आज भी संगीत की धरोहर माना जाता है। इस विशेष गीत में प्रयुक्त ‘पिंजड़े वाली मुनिया’ का सीधा संबंध फिल्म की मुख्य नायिका हीराबाई के जीवन से है, जिसका किरदार अभिनेत्री वहीदा रहमान ने निभाया था। हीराबाई एक नौटंकी कलाकार है, जिसकी कला पर पूरा समाज फिदा है, लेकिन जब उसे अपनाने की बात आती है, तो वही समाज पीछे हट जाता है।

    फिल्म की कहानी के अनुसार, राज कपूर द्वारा अभिनीत हीरामन नाम का एक सीधा-सादा बैलगाड़ी चालक अनजाने में एक नौटंकी डांसर को अपनी गाड़ी में बिठा लेता है। यात्रा के दौरान दोनों के बीच एक गहरा आत्मीय रिश्ता पनपने लगता है, लेकिन मेले में पहुंचने पर जब हीरामन को हीराबाई के पेशे की असलियत और समाज द्वारा उसे वेश्या जैसी नजरों से देखने का पता चलता है, तो वह टूट जाता है। वह हीराबाई को यह काम छोड़ने की सलाह देता है, परंतु अपनी मजबूरियों के चलते वह ऐसा नहीं कर पाती, जिसके बाद हीरामन जीवन की ‘तीसरी कसम’ खाता है कि वह कभी किसी नौटंकी वाली को अपनी गाड़ी में नहीं बिठाएगा।

    इसी पृष्ठभूमि में ‘पिंजड़े वाली मुनिया’ शब्द उस नाचने वाली महिला का प्रतीक बनकर उभरता है, जो अपनी कला से हर राहगीर और मुसाफिर का मन तो मोह लेती है, लेकिन खुद एक अदृश्य पिंजरे में कैद रहने को अभिशप्त है। गीत के अंतर्निहित अर्थ में समाज के दोहरे मापदंडों पर तीखा प्रहार किया गया है। गीत के बोलों में बताया गया है कि वह मुनिया जब हलवाई की दुकान पर जाती है या पनवाड़ी के पास जाती है, तो हर कोई उसके रस और आकर्षण में डूब जाना चाहता है। हर वर्ग का पुरुष उसके मोहपाश में बंधने को तैयार है, लेकिन उसे अपनी गृहस्थी या सम्मानजनक जीवन का हिस्सा बनाने का साहस किसी में नहीं होता।

    शैलेंद्र ने बेहद चतुराई से एक बेहद चुलबुली लोकधुन का सहारा लेकर उस दौर की कलावंती और नौटंकी महिलाओं की उस नियति को उजागर किया था, जो जिंदगी भर दर्शकों की तालियों के पिंजरे में घुटती रहती थीं। आज के दौर में जब इस गाने की तर्ज पर नए रीमिक्स बनाए जा रहे हैं, तब इस गाने के वास्तविक साहित्यिक और सामाजिक अर्थ को समझना सिनेमा और समाज के अंतर्संबंधों को देखने का एक नया नजरिया प्रदान करता है। यह गीत केवल नाचने-गाने का जरिया नहीं, बल्कि एक मूक विलाप है जिसे उत्सव की तरह गाया जाता रहा है।

  • राजू पाल हत्याकांड: अतीक अहमद के शूटर आबिद को हाईकोर्ट से जमानत, SC जाएंगी पूजा पाल

    राजू पाल हत्याकांड: अतीक अहमद के शूटर आबिद को हाईकोर्ट से जमानत, SC जाएंगी पूजा पाल

    प्रयागराज। बहुचर्चित राजू पाल हत्याकांड में एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मामले में दोषी ठहराए गए अतीक अहमद के शूटर आबिद को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत प्रदान की है। कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर प्रदेश का चर्चित हत्याकांड सुर्खियों में आ गया है।

    इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने आबिद की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह राहत दी। अदालत ने मामले के विभिन्न तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद जमानत मंजूर की, हालांकि इसके साथ कुछ शर्तें भी लगाई गई हैं, जिनका पालन करना अभियुक्त के लिए अनिवार्य होगा।

    2005 में हुई थी दिनदहाड़े हत्या
    गौरतलब है कि 25 जनवरी 2005 को प्रयागराज के धूमनगंज क्षेत्र में तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय यह घटना प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक और आपराधिक वारदातों में शामिल रही थी।

    हमले में राजू पाल के अलावा देवी लाल पाल और संदीप यादव की भी जान गई थी, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में राजू पाल की पत्नी और वर्तमान विधायक पूजा पाल की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था।

    जांच में सामने आए थे कई बड़े नाम
    जांच के दौरान कई आरोपियों के नाम सामने आए थे, जिनमें माफिया अतीक अहमद और उसके करीबी सहयोगी भी शामिल थे। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के बाद मामले में कई आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।

    हाईकोर्ट के फैसले से असहमत पूजा पाल
    आबिद को जमानत दिए जाने के फैसले पर राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने नाराजगी जताई है। उन्होंने साफ कहा है कि वे इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है और जमानत आदेश पर क्या निर्णय आता है।

  • सरहद पार के संगीत का डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जलवा, यूट्यूब और स्पॉटिफाई पर करोड़ों व्यूज बटोर रहे इंडिपेंडेंट सिंगल्स

    सरहद पार के संगीत का डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जलवा, यूट्यूब और स्पॉटिफाई पर करोड़ों व्यूज बटोर रहे इंडिपेंडेंट सिंगल्स

    नई दिल्ली। सोशल मीडिया के इस दौर में संगीत की कोई सीमा नहीं रह गई है और यही वजह है कि इंस्टाग्राम रील्स पर रोजाना जिन गानों पर करोड़ों लोग शॉर्ट वीडियो बना रहे हैं, उनमें से अधिकांश गानों का कनेक्शन सरहद पार से है। भारतीय यूजर्स अक्सर जिन भावुक या रोमांटिक धुनों को देश का समझकर अपनी रील्स में इस्तेमाल करते हैं, वे असल में पाकिस्तान के उभरते हुए इंडी-पॉप कलाकारों की रचनाएं हैं। आज के समय में इंटरनेट और म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने दोनों देशों के संगीत प्रेमियों को एक अनूठे धागे में पिरो दिया है।

    डिजिटल दुनिया में इस वक्त शेहरयार रेहान और जोहा वसीम का गाना ‘मजबूर’ यानी ‘आपका ही कहना बनता’ जबरदस्त तरीके से ट्रेंड कर रहा है। यूट्यूब पर 65 मिलियन से अधिक व्यूज बटोर चुका यह एक स्वतंत्र सिंगल ट्रैक है, जो दिल टूटने और बेबसी के अहसास को बेहद खूबसूरती से बयां करता है। इस गाने के बोल और इसकी धीमी धुन ने भारतीय रील्स क्रिएटर्स को अपनी ओर आकर्षित किया है, जिसके चलते लोग इसे भारतीय संगीत उद्योग का हिस्सा मान बैठते हैं।

    इसी तरह अन्नुरल खालिद और मानू का दर्द भरा गाना ‘झोल’ यूट्यूब पर 571 मिलियन से भी ज्यादा व्यूज हासिल कर चुका है। पाकिस्तान की मशहूर आर-एंड-बी सिंगर अन्नुरल और रैपर मानू का यह नॉन-फिल्मी गाना युवाओं के बीच इस कदर लोकप्रिय है कि इसकी पंक्तियां हर दूसरी रील में सुनाई दे जाती हैं। इसके साथ ही अली सूमरो और अफ्यूजिक का गाना ‘पल पल जीना मुहाल’ भी इंटरनेट पर छाया हुआ है। इस गाने को लेकर भारतीय श्रोताओं में अक्सर यह भ्रम रहता है कि इसे गायक तलविंदर ने गाया है, जबकि इसके मूल निर्माता पाकिस्तान के नए जमाने के कलाकार हैं।

    अब्दुल हन्नान और रोवालियो का गाना ‘इरादे’ भी इस सूची में एक कल्ट हिट बनकर उभरा है, जिसने 125 मिलियन से अधिक व्यूज हासिल किए हैं। सिंपल अकॉस्टिक संगीत और मखमली आवाज के कॉम्बिनेशन वाले इस गाने का इस्तेमाल लोग अपने प्यार का इजहार करने के लिए धड़ल्ले से कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, एक अनोखे क्रॉस-बॉर्डर कोलैबोरेशन के तहत हसन रहीम, उमेर और भारत के तलविंदर का हिप-हॉप ट्रैक ‘विशेस’ भी 134 मिलियन से ज्यादा व्यूज के साथ रील्स पर तहलका मचा रहा है।

    इसके अलावा, पाकिस्तानी टेलीविजन सीरियल्स के टाइटल ट्रैक्स और वहां के पॉप स्टार्स का जादू भी भारतीय दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। असीम अजहर का गाया हुआ ‘कैसी दिल लगी है तू’ का स्लो इंटरनेट वर्जन, जिसे विजार्डो ने रीमिक्स किया है, इन दिनों काफी सुना जा रहा है। साथ ही असीम अजहर का ही भावुक सिंगल ट्रैक ‘जो तू ना मिला’, जिसे भारतीय म्यूजिक लेबल के तहत रिलीज किया गया था, वह भी एकतरफा प्यार के दर्द को दर्शाने के कारण रील्स का एक पसंदीदा ट्रैक बना हुआ है। यह ट्रेंड साफ दिखाता है कि मौजूदा दौर में फिल्मों से इतर इंडिपेंडेंट सिंगल्स का चलन काफी बढ़ गया है।

  • बंगाल में TMC के भीतर बढ़ी हलचल! सांसदों की दिल्ली बैठक से तेज हुई अटकलें, ममता के सामने नई चुनौती?

    बंगाल में TMC के भीतर बढ़ी हलचल! सांसदों की दिल्ली बैठक से तेज हुई अटकलें, ममता के सामने नई चुनौती?


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ सांसदों की दिल्ली में भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि पार्टी की ओर से इसे सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन घटनाक्रम को लेकर कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।

    इस बैठक में राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे चुके सुखेंदु शेखर रॉय की मौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में पार्टी के भीतर उभर रहे असंतोष के संकेत अब खुलकर सामने आने लगे हैं।

    दिल्ली में जुटे कई सांसद
    दिल्ली में हुई इस मुलाकात में TMC के सांसद जगदीश बसुनिया, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, अरूप चक्रवर्ती और कालीपदा सोरेन समेत कई नेता शामिल बताए गए। वहीं शाम को सांसद शताब्दी रॉय के आवास पर भी एक बैठक हुई, जिसमें विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की खबरें सामने आईं। इसी बीच TMC सांसद काकोली घोष ने दावा किया कि प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है और इसी उद्देश्य से संवाद किया जा रहा है।

    इस्तीफे के बाद सुखेंदु शेखर रॉय के आरोप
    राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा देने के बाद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी नेतृत्व पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने संगठन में भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता और आंतरिक लोकतंत्र की कमी जैसे मुद्दों का जिक्र किया था। उनके बयान को पार्टी के अंदरूनी असंतोष का संकेत माना गया।

    कई महीनों से चल रही है नाराजगी की चर्चा
    राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, TMC के भीतर पिछले कुछ समय से असंतोष की चर्चा लगातार होती रही है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से ऐसे दावों को खारिज किया जाता रहा है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इन चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। हाल के दिनों में पार्टी की बैठकों में कई नेताओं की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही है। इससे संगठन के भीतर चल रही गतिविधियों को लेकर राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।

    ऋतब्रत बंद्योपाध्याय की भूमिका पर नजर
    विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय का नाम भी इस पूरे घटनाक्रम में प्रमुखता से सामने आ रहा है। उन्होंने दावा किया है कि TMC के कई नेता उनके संपर्क में हैं और पार्टी के भीतर चल रही हलचलों को लेकर लगातार संवाद जारी है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विपक्ष इसे राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में पेश कर रहा है।

    फिरहाद हाकिम की मुलाकात ने बढ़ाई चर्चा
    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाने वाले फिरहाद हाकिम की विपक्षी नेताओं से हुई मुलाकात ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा को और तेज कर दिया है। इसे लेकर अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। कुछ इसे संवाद की कोशिश मान रहे हैं तो कुछ इसे पार्टी के भीतर की स्थिति को समझने की कवायद बता रहे हैं।

    ममता बनर्जी की चुप्पी भी बनी चर्चा का विषय
    दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मीडिया से अपेक्षाकृत दूरी बनाए रखी। आमतौर पर राष्ट्रीय राजनीति और केंद्र सरकार के मुद्दों पर मुखर रहने वाली ममता की इस बार की चुप्पी को भी राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं।

    आगे क्या?
    फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने यह संकेत जरूर दिया है कि TMC के भीतर कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियां चल रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इन चुनौतियों से कैसे निपटता है और क्या संगठन में किसी बड़े बदलाव की स्थिति बनती है।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर अब TMC के अगले कदम और संभावित रणनीति पर टिकी हुई है, क्योंकि बंगाल की राजनीति में होने वाला हर बदलाव राज्य के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।