Author: bharati

  • अमेरिकियों के लिए भी अच्छा है मजबूत भारत, शांति बनाने में भूमिका अहम; US अधिकारी बोले

    अमेरिकियों के लिए भी अच्छा है मजबूत भारत, शांति बनाने में भूमिका अहम; US अधिकारी बोले

    वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के साथ-साथ एशिया में अनुकूल शक्ति संतुलन सुनिश्चित करने के लिए भारत की भूमिका बेहद जरूरी है। उन्होंने भू-राजनीति में हो रहे व्यापक बदलाव के मद्देनजर दोनों पक्षों के बीच गहरे रक्षा संबंधों के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

    अमेरिकी युद्ध नीति के उप सचिव एलब्रिज कोल्बी ने अनंत केंद्र में अपने संबोधन में भारत-अमेरिका रणनीतिक जुड़ाव के महत्व को रेखांकित करते हुए चार प्रमुख बिंदु पेश किए और इस बात पर जोर दिया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी एक शक्ति का प्रभुत्व नहीं होना चाहिए।

    उनके इस बयान को परोक्ष रूप से चीन की तरफ संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
    भारत की भूमिका को जरूरी बताया

    उन्होंने कहा, ‘अमेरिका का मानना ​​है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अनुकूल शक्ति संतुलन सुनिश्चित करने में भारत केंद्रीय भूमिका निभाएगा। इस संदर्भ में, एक मजबूत और आत्मविश्वासी भारत न केवल भारतीय जनता के लिए अच्छा है, बल्कि अमेरिकियों के लिए भी अच्छा है।’ पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कोल्बी की दो दिवसीय नई दिल्ली यात्रा का विशेष महत्व है।
    ‘भारत और अमेरिका को हर बात पर सहमत होना जरूरी नहीं’

    उन्होंने कहा, ‘सबसे पहली बात तो यह कि प्रभावी सहयोग के लिए अमेरिका और भारत को हर बात पर सहमत होना जरूरी नहीं है। जरूरी यह है कि हमारे हित और उद्देश्य मूलभूत मुद्दों पर तेजी से एक समान होते जा रहे हैं।’ कोल्बी ने कहा, ‘रणनीतिक मामलों पर सामंजस्य और सहयोग को गहरा करने के लिए मतभेद और यहां तक ​​कि विवाद भी पूरी तरह से अनुकूल हैं। हमारी साझेदारी की जड़ें दिखावे से कहीं अधिक गहरी और सतही सौहार्द से कहीं अधिक टिकाऊ हैं; ये स्थायी रणनीतिक और आपसी हित में गहराई से शामिल हैं।’
    किससे होगा फायदा

    उन्होंने कहा, ‘हमारे दोनों देशों को एक ऐसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र से लाभ होता है जिसमें कोई भी शक्ति इस क्षेत्र पर हावी नहीं हो सकती।

    दोनों को खुले व्यापार और राष्ट्रीय स्वायत्तता से लाभ होता है।’ कोल्बी ने तर्क दिया कि ये ठोस और साझा हित हमारी स्थायी रणनीतिक साझेदारी की नींव हैं।

    अपने दूसरे बिंदु को स्पष्ट करते हुए कोल्बी ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों ही इस क्षेत्र में टिकाऊ संतुलन के लिए सैन्य शक्ति की रणनीतिक केंद्रीयता को पहचानते हैं, और इसलिए रक्षा सहयोग को केवल प्रतीकात्मक या निष्क्रियता से प्रेरित होने के बजाय वास्तविक क्षमता को बढ़ाने पर केंद्रित होना चाहिए।
    रक्षा संबंधों पर की बात

    कोल्बी ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के हवाले से कहा कि दोनों पक्षों के बीच रक्षा संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा औद्योगिक और प्रौद्योगिकी सहयोग को ‘नई गति’ मिल रही है। इस संदर्भ में उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में अंतिम रूप दिए गए ‘प्रमुख रक्षा साझेदारी’ ढांचे का भी उल्लेख किया।

    कोल्बी ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ मिलकर लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता, सुदृढ़ रसद आपूर्ति, पनडुब्बी रोधी युद्ध और उन्नत प्रौद्योगिकियों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को तेज करने और बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
    तीसरा पॉइंट

    अपने तीसरे बिंदु में, अमेरिकी उप सचिव ने सैन्य हार्डवेयर के संभावित सह-उत्पादन और सह-विकास के महत्व पर जोर दिया। कोल्बी ने कहा कि अमेरिका भारत को सैन्य बिक्री बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन साथ ही वह नई दिल्ली की ओर से स्वदेशी रक्षा उद्योग को विकसित करने की महत्वाकांक्षा को भी मान्यता देता है।

    उन्होंने कहा, ‘एक मजबूत घरेलू औद्योगिक आधार संप्रभुता और लचीलेपन को बढ़ाता है। अमेरिका इस उद्देश्य का समर्थन करता है। भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।’ ट्रंप प्रशासन के अधिकारी ने कहा, ‘भारत के पास पहले से ही एक प्रभावशाली रक्षा औद्योगिक आधार है और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में भारत का नेतृत्व हमारे रक्षा सहयोग को और भी व्यापक बनाने में सहायक है।’

    कोल्बी ने अपने चौथे बिंदु में कहा कि अमेरिका और भारत हर मुद्दे पर सहमत नहीं होंगे, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया कि किसी भी असहमति से सहयोग में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए।

  • कॉम्पटीशन खत्म अब साथ मिलकर काम RVNL IRCON मर्जर से क्या बदलेगा

    कॉम्पटीशन खत्म अब साथ मिलकर काम RVNL IRCON मर्जर से क्या बदलेगा


    नई दिल्ली:     देश के प्रमुख डिस्काउंट ब्रोकर Zerodha ने ट्रेडर्स को बड़ा झटका दिया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल से इंट्राडे फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग के कुछ मामलों में ब्रोकरेज चार्ज ₹20 से बढ़ाकर ₹40 प्रति ऑर्डर कर दिया जाएगा। इस फैसले से खासतौर पर डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेड करने वाले निवेशकों की लागत बढ़ने वाली है

    यह बदलाव हर ट्रेडर पर लागू नहीं होगा। कंपनी के अनुसार, यह बढ़ा हुआ शुल्क केवल उन निवेशकों पर लगेगा जो Securities and Exchange Board of India के नियमों का पालन नहीं करते। सेबी के नियम के मुताबिक, किसी भी ट्रेड के लिए कुल मार्जिन का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा कैश या कैश इक्विवेलेंट के रूप में होना जरूरी है

    अब तक Zerodha ऐसे मामलों में ग्राहकों की कमी को अपने फंड से पूरा कर देता था और इसके लिए अलग से कोई चार्ज नहीं लेता था। लेकिन अब कंपनी इस सुविधा की लागत वसूल करेगी। यानी अगर कोई ट्रेडर पर्याप्त कैश मार्जिन नहीं रखता और ब्रोकर के फंड का इस्तेमाल करता है, तो उसे ₹40 प्रति ऑर्डर देना होगा

    हालांकि कंपनी ने यह भी साफ किया है कि इस फैसले का असर इंट्राडे इक्विटी ट्रेडिंग पर नहीं पड़ेगा। यह बदलाव केवल F&O यानी डेरिवेटिव ट्रेडिंग तक सीमित रहेगा

    इस फैसले के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। एक तरफ बाजार में पहले से ही डेरिवेटिव ट्रेडिंग वॉल्यूम पर दबाव है, वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT बढ़ाने का प्रस्ताव भी लागत बढ़ाने वाला है। बजट 2026 में फ्यूचर्स पर STT को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने की बात कही गई है

    कंपनी के सह संस्थापक और सीईओ Nithin Kamath ने भी इस फैसले को जरूरी बताया है। उनका कहना है कि ग्राहकों के कोलेटरल में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है और कंपनी को मार्जिन फंडिंग के लिए उधार लेना पड़ सकता है जिसकी लागत होती है। ऐसे में यह कदम कंपनी के लिए जरूरी हो गया था

    मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Zerodha का यह फैसला पूरे ब्रोकरेज इंडस्ट्री पर असर डाल सकता है। अगर दूसरे ब्रोकर भी इसी राह पर चलते हैं तो आने वाले समय में ट्रेडिंग और महंगी हो सकती है

    यह बदलाव उन ट्रेडर्स के लिए चेतावनी है जो ज्यादा लीवरेज लेकर ट्रेड करते हैं। अब उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी और पर्याप्त कैश मार्जिन रखना होगा वरना ट्रेडिंग की लागत सीधे दोगुनी हो जाएगी

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    Zerodha, F&O Trading, Stock Market India, SEBI Rules, Brokerage Charges📝 शॉर्ट डिस्क्रिप्शन

  • ₹5500 से ज्यादा महंगा हुआ सोना, चांदी में 12,000 रुपये से अधिक उछाल

    ₹5500 से ज्यादा महंगा हुआ सोना, चांदी में 12,000 रुपये से अधिक उछाल

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के बीच बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना ₹5500 से ज्यादा महंगा हो गया, जबकि चांदी के दाम में 12,000 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई।
    दूसरी तरफ इंटरनेशनल मार्केट सोना 2% से अधिक बढ़ गया। रॉयटर्स के मुताबिक बुधवार को नरम डॉलर, युद्ध खत्म होने के संकेतों, कच्चे तेल में कमजोरी के कारणसोना हाजिर 2.1% बढ़कर 4,568.29 डॉलर प्रति औंस हो गया। अप्रैल डिलीवरी के लिए अमेरिकी सोना वायदा 3.8% बढ़कर 4,569.40 डॉलर हो गया। जबकि, हाजिर चांदी 3.8% बढ़कर 73.94 डॉलर प्रति औंस हो गई।
    युद्ध के बीच शांति की उम्मीद से सोने को सपोर्ट
    सोने की कीमतों में यह उछाल अमेरिका-ईरान के बीच संभावित बातचीत की खबरों के कारण आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि मध्य पूर्व युद्ध को खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ता तलाशा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जल्द ही हाई-लेवल शांति वार्ता हो सकती है, हालांकि ईरान की ओर से अभी अंतिम प्रतिक्रिया का इंतजार है। इस खबर ने बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया।
    तेल गिरा, डॉलर कमजोर, सोना मजबूत
    ब्लूमबर्ग के मुताबिक सोने की तेजी के पीछे एक और कारण है, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और डॉलर का कमजोर होना।
    डॉलर इंडेक्स करीब 0.2% गिरा, जिससे सोना निवेशकों के लिए सस्ता और आकर्षक हो गया। दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ हफ्तों में सोना शेयर बाजार के साथ चल रहा था, जबकि तेल के साथ इसका उल्टा संबंध देखने को मिला।
    फिर भी खतरा बरकरार: युद्ध और महंगाई का दबाव

    हालांकि सोने में तेजी आई है, लेकिन बाजार में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर पकड़ बनाए रखी है और इजरायल के हमले जारी हैं। अमेरिका ने भी करीब 2,000 सैनिकों को मध्य पूर्व भेजने का फैसला किया है। ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण महंगाई का खतरा बढ़ गया है, जिससे ब्याज दरें ऊंची रह सकती हैं और यह सोने के लिए नकारात्मक संकेत है।

  • गुजरात विधानसभा में UCC बिल पारित…. शादी-तलाक जैसे मामलों में सभी के लिए समान कानून

    गुजरात विधानसभा में UCC बिल पारित…. शादी-तलाक जैसे मामलों में सभी के लिए समान कानून


    अहमदाबाद।
    गुजरात सरकार (Gujarat Government.) ने विधानसभा (Assembly) से समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code.- UCC) बिल 2026 पास हो गया है। इस विधेयक का मकसद शादी, तलाक और विरासत जैसे विषयों के लिए सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान कानून की व्यवस्था करना है। उत्तराखंड के बाद गुजरात ऐसा करने वाला दूसरा राज्य बनेगा। यह कानून राज्य के निवासियों और बाहर रह रहे गुजरातियों पर लागू होगा लेकिन अनुसूचित जनजातियों को इससे बाहर रखा गया है। बिल की मुख्य बातों में बहुविवाह पर रोक और लिव-इन संबंधों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन शामिल है।


    यूसीसी वाला दूसरा राज्य होगा गुजरात

    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक विधानसभा से पारित होने के साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में यूसीसी विधेयक पारित किया था।


    एक हफ्ते पहले सौंपी थी रिपोर्ट

    गुजरात सरकार की ओर से नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति ने यूसीसी के क्रियान्वयन पर एक हफ्ते पहले अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। ‘गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026’ नामक यह प्रस्तावित कानून पूरे राज्य में लागू होगा। यही नहीं गुजरात की सीमा से बाहर रहने वाले राज्य के निवासियों पर भी यह कानून प्रभावी होगा।


    समान कानूनी ढांचा तैयार करना है मकसद

    यह प्रस्तावित कानून अनुसूचित जनजातियों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगा जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत संरक्षित हैं। विधेयक का मकसद राज्य में समान कानूनी ढांचा तैयार करना है।


    एक से अधिक शादियां करने पर भी रोक

    इस विधेयक में लिव-इन के रजिस्ट्रेशन और औपचारिक घोषणा के माध्यम से उनके समापन का प्रावधान किया गया है। यह बिल एक से अधिक शादियां करने पर भी रोक लगाता है। इस विधेयक के मुताबिक, इस कोड के तहत शादी तभी मान्य मानी जाएगी जब शादी के समय दोनों में से किसी भी पक्ष का कोई जीवित जीवनसाथी ना हो।


    अहमदाबाद में विरोध प्रदर्शन

    इस विधेयक का सड़कों पर विरोध भी शुरू हो गया है। यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल के विरोध में अहमदाबाद के लाल दरवाजे पर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। इस कानून के विरोध में AIMIM भी है। AIMIM के कार्यकर्ता भी इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।

  • PM मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर श्रीलंका के राष्ट्रपति से की फोन पर बात, जानें किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

    PM मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर श्रीलंका के राष्ट्रपति से की फोन पर बात, जानें किन मुद्दों पर हुई चर्चा?


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके (Sri Lankan President Anura Kumara Dissanayake) से मंगलवार को फोन पर बातचीत की। इस चर्चा में पश्चिम एशिया (West Asia.) की बदलती स्थिति पर विस्तार से विचार विमर्श हुआ। खासतौर पर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहे असर को लेकर गहरी चिंता जताई गई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। बातचीत के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच ऊर्जा सहयोग से जुड़ी प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई।

    दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने का फैसला किया। क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। यह सहयोग दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाया जाएगा। भारत और श्रीलंका को निकट और विश्वसनीय साझेदार बताया गया। दोनों नेताओं ने साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।


    एनर्जी सप्लाई पर हुई चर्चा

    वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में हो रही बाधाओं से निपटने के लिए रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। यह साझेदारी दोनों देशों की सुरक्षा और विकास के लिए अहम है। इस चर्चा से भारत-श्रीलंका संबंधों में नई ऊर्जा मिली है। दोनों पक्षों ने भविष्य में भी नियमित संपर्क बनाए रखने और व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। क्षेत्रीय शांति और प्रगति के लिए यह साझा प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    भारत और श्रीलंका के संबंध बेहद पुराने हैं, जो सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत पर आधारित हैं। श्रीलंकाई गृहयुद्ध और भारतीय शांति सेना (IPKF) के हस्तक्षेप से तनाव बढ़ा, लेकिन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने आर्थिक सहयोग को मजबूत किया। बीते वर्षों में, श्रीलंकाई आर्थिक संकट में भारत ने लगभग 4 अरब डॉलर की सहायता (क्रेडिट लाइन, करेंसी स्वैप, ईंधन और खाद्य सामग्री) देकर पड़ोस प्रथम नीति का सबूत दिया। कोविड महामारी में ऑक्सीजन और वैक्सीन सहायता भी प्रदान की गई। हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय यात्राओं, रक्षा समझौते, ऊर्जा कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान और व्यापार से संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचे हैं।

  • CG: वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 साथियों के साथ डाले हथियार, किया आत्मसमर्पण

    CG: वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 साथियों के साथ डाले हथियार, किया आत्मसमर्पण


    छत्तीसगढ़।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में नक्सलियों (Naxalites) की दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति के सदस्य व वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापाराव (Senior Naxalite Commander Paparao) ने अपने 17 अन्य साथी माओवादियों के साथ मंगलवार को बीजापुर जिले में आत्मसमर्पण कर दिया। हथियार डालने वाले नक्सलियों में 11 पुरुष और 7 महिला नक्सली शामिल हैं। यह सरेंडर सुरक्षाबलों व राज्य सरकार के लिए एक अहम रणनीतिक सफलता है और 31 मार्च तक देश से माओवादी उग्रवाद के खात्मे की डेडलाइन के संबंध में सबसे अहम पड़ाव भी है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ कुटरू थाने में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उन्हें वहां से बस के जरिए जगदलपुर ले जाया गया। अब इस बारे में राज्य सरकार बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए जानकारी दे सकती है।


    पापा राव पर घोषित था 25 लाख रुपए का इनाम

    दो दशकों से ज्यादा समय तक घने इंद्रावती-अबूझमाड़ जंगल इलाके में सक्रिय रहा पापा राव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े आखिरी बड़े कमांडरों में से एक है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार पापा राव लगभग 25 वर्षों से जंगलों में सक्रिय था और इस दौरान कई बार सुरक्षा बलों के साथ उसकी मुठभेड़ भी हुई, लेकिन हर बार वह बच निकलता था। राज्य सरकार ने उस पर 25 लाख रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा था।

    पापा राव ने दक्षिण बस्तर में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमलों की साज़िश रची थी, जिनमें 2010 का ताड़मेटला हमला (तब के दंतेवाड़ा जिले में था, लेकिन अब सुकमा में है) भी शामिल है। इस हमले में 76 जवान मारे गए थे।


    सबसे अहम कमेटी का मुख्य सदस्य था पापा राव

    बस्तर संभाग और आसपास के राज्यों के कुछ हिस्सों में माओवादी गतिविधियों को अंजाम देने वाले दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) को इस प्रतिबंधित संगठन की सबसे मजबूत इकाई माना जाता था। पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमले करने में इसकी अहम भूमिका रही है।

    अधिकारियों के मुताबिक पापा राव का समर्पण छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने बताया कि यह समर्पण देश के सबसे लंबे समय से चल रहे उग्रवादों में से एक के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत है।

    बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा, ‘नक्सली संगठन में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य तथा साउथ सब जोनल ब्यूरो के इंचार्ज पापा राव का 17 अन्य साथियों के साथ पुनर्वास, क्षेत्र में वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के हमारे सतत प्रयासों में एक निर्णायक सफलता का प्रतीक है।’


    नक्सलियों ने AK-47 समेत अन्य हथियार भी सौंपे

    सुंदरराज ने बताया कि पापा राव, डिविजनल कमेटी सदस्य प्रकाश मड़वी, अनिल ताती सहित कुल 18 माओवादियों के इस समूह ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा के साथ आत्मसमर्पण किया है। इनमें सात महिला नक्सली भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने आत्मसपर्मण के दौरान एके-47 राइफलें तथा अन्य हथियार भी सौंपे।

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी आंदोलन के इतिहास में पहली बार नक्सल संगठन प्रभावी रूप से नेतृत्वविहीन हो गया है। सुंदरराज ने कहा कि सरकार की परिकल्पना और क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से रही आकांक्षा के अनुरूप, बस्तर अब एक नई ऊर्जा, नए उत्साह और सकारात्मक पहचान के साथ और अधिक सशक्त होकर उभरने की दिशा में अग्रसर है।


    दो दशकों में हुए कई हमलों में शामिल रहा था DKSZC

    उन्होंने बताया कि DKSZC बस्तर संभाग और पड़ोसी राज्यों के कुछ हिस्सों में माओवादी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार है और इसे प्रतिबंधित माओवादी संगठन की सबसे मजबूत इकाई माना जाता था। पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमले करने में इसकी अहम भूमिका रही थी।

    सुंदरराज ने कहा, ‘हमें आशा है कि शेष बचे माओवादी, जो वर्तमान में छोटे-छोटे समूहों में भटक रहे हैं, भी आने वाले दिनों में हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लेंगे।’ उन्होंने बताया कि साउथ सब जोनल ब्यूरो इलाके से जुड़े समर्पण करने वाले सभी 18 माओवादियों को औपचारिक रूप से मुख्यधारा में शामिल करने की प्रक्रिया बाद में पूरी की जाएगी।


    पापा राव को मंगू के नाम से भी जाना जाता है

    इससे पहले दिन में, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, जिनके पास गृह मंत्रालय का प्रभार भी है, ने कहा कि राव, जिन्हें मंगू के नाम से भी जाना जाता है, बस्तर इलाके में अपने दल के एक दर्जन से अधिक सदस्यों के साथ समर्पण करेंगे। शर्मा ने कहा, ‘इस समर्पण के साथ ही, राज्य में उस वरिष्ठ स्तर का कोई भी नक्सली नेता सक्रिय नहीं रहेगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ 31 मार्च, 2026 की तय समयसीमा तक सशस्त्र नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।’


    ‘कभी पशुपति से तिरुपति तक फैला हुआ था रेड कॉरिडोर’

    अधिकारियों ने बताया कि यह समर्पण भाकपा (माओवादी) से जुड़े माओवादी नेटवर्क के बड़े पैमाने पर कमजोर पड़ने का संकेत है, जिसने सालों तक मध्य भारत के बड़े हिस्सों में अपनी समानांतर सत्ता कायम रखी थी। उन्होंने कहा कि ‘रेड कॉरिडोर’ कभी बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों से होते हुए ‘पशुपति से तिरुपति’ तक फैला हुआ था और नक्सलियों के प्रभाव वाले इस गलियारे को देश के लिए ‘सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती’ माना जाता था। अधिकारियों ने बताया कि इस इलाके में शासन-प्रशासन कमज़ोर पड़ गया था, और माओवादियों ने हाशिए पर पड़े समुदायों के बीच जोर-जबरदस्ती और सहमति, दोनों के जरिए अपना प्रभाव जमा रखा था।

  • पश्चिम एशिया तनाव में भी चीन में पेट्रोल-LPG की हो रही भरपूर सप्लाई…. जिनपिंग ने ढूंढा नया रास्ता!

    पश्चिम एशिया तनाव में भी चीन में पेट्रोल-LPG की हो रही भरपूर सप्लाई…. जिनपिंग ने ढूंढा नया रास्ता!


    बीजिंग।
    मिडल ईस्ट (Middle East) में छिड़ी भीषण जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की तालाबंदी ने दुनिया के कई देशों में हाहाकार मचा दिया है. तेल संकट से जूझ रहे देशों में चीन (China) भी शामिल होता लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने एक रास्ता ढूंढ़ लिया है. ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा देखते हुए बीजिंग (Beijing) ने पुराने ट्रे़ड रास्तों का विकल्प ढूंढना शुरू कर दिया है. ऐसे में म्यांमार चीन के लिए सिर्फ एक पड़ोसी नहीं, बल्कि हिंद महासागर में उतरने का सबसे सुरक्षित ‘बैकडोर’ बन गया है. चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारा (CMEC) अब केवल व्यापार का जरिया नहीं, बल्कि एक रणनीतिक ढाल बन चुका है।

    बड़ी-बड़ी पाइपलाइनें: चीन ने म्यांमार के क्यायुकफ्यू बंदरगाह से लेकर चीन के कुनमिंग शहर तक दो बड़ी-बड़ी पाइपलाइनें बिछाई हैं. इनका सबसे बड़ा मकसद ‘मलक्का डिलेमा’ से बचना है.

    कच्चा तेल: यह पाइपलाइन सालाना 2.2 करोड़ टन यानी लगभग 2,40,000 बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल ले जाने की क्षमता रखती है. खाड़ी देशों और अफ्रीका से आने वाले बड़े टैंकर म्यांमार के तट पर तेल उतारते हैं, जो पाइपलाइन के जरिए सीधे चीन पहुंचता है.

    नैचुरल गैस: इसके साथ ही एक गैस पाइपलाइन भी है जो सालाना 12 अरब क्यूबिक मीटर गैस सप्लाई करती है. इसमें म्यांमार के अपने अपतटीय क्षेत्रों की गैस भी शामिल है.


    हिंद महासागर में चीन की बिसात

    चीन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए ‘मोतियों की माला’ (String of Pearls) की नीति को और मजबूत कर रहा है. मालदीव में चीन ने इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘फ्रेंडशिप ब्रिज’ जैसे प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश किया है ताकि भारत के प्रभाव को कम किया जा सके।

    भारत ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर नया एयरपोर्ट और मिलिट्री बेस बनाकर चीन की घेराबंदी तेज कर दी है. यह बेस बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य के बीच एक ‘नेचुरल बैरियर’ की तरह काम करेगा.

    म्यांमार: चीन का ‘ट्रम्प कार्ड’
    सारे रास्तों के बंद होने पर म्यांमार ही वो एकमात्र रास्ता है जो चीन को सीधे बंगाल की खाड़ी से जोड़ता है. चीन ने इसके लिए कई तरह की चालें चली हैं, जिसमें से एक म्यांमार के आंतरिक संघर्षों में एक ‘मध्यस्थ’ की भूमिका भी है, ताकि CMEC के प्रोजेक्ट्स सुरक्षित रहें. चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वाशिंगटन में भी अब चर्चा शुरू हो गई है कि क्या म्यांमार पर लगाए गए प्रतिबंध उसे पूरी तरह चीन की गोद में धकेल रहे हैं?

  • 63 गेंदों में 120 रन ठोक धोनी से छीनी जीत फिर अचानक गायब हो गया IPL का ये हीरो

    63 गेंदों में 120 रन ठोक धोनी से छीनी जीत फिर अचानक गायब हो गया IPL का ये हीरो


    नई दिल्ली:  इंडियन प्रीमियर लीग को अक्सर किस्मत बदलने वाली लीग कहा जाता है जहां एक शानदार प्रदर्शन खिलाड़ी को रातोंरात स्टार बना देता है। लेकिन हर कहानी का अंत खुशहाल नहीं होता। कुछ खिलाड़ी ऐसे भी होते हैं जो एक समय चमकते हैं और फिर अचानक गुमनामी में खो जाते हैं। ऐसी ही कहानी है Paul Valthaty की
    साल 2011 का आईपीएल सीजन इस खिलाड़ी के नाम रहा। 13 अप्रैल 2011 को Kings XI Punjab और Chennai Super Kings के बीच मोहाली में मुकाबला खेला गया। चेन्नई की टीम उस समय MS Dhoni की कप्तानी में थी और उन्होंने पहले बल्लेबाजी करते हुए 188 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया था। उस दौर में यह स्कोर जीत के लिए काफी माना जाता था

    लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने सबको हैरान कर दिया। पंजाब की ओर से ओपनिंग करने उतरे पॉल वल्थाटी ने अकेले दम पर मैच पलट दिया। उन्होंने 63 गेंदों में नाबाद 120 रन ठोक दिए जिसमें 19 चौके और 2 छक्के शामिल थे। उनकी इस विस्फोटक पारी की बदौलत पंजाब ने 19.1 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। यह पारी आज भी आईपीएल इतिहास की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है

    वल्थाटी सिर्फ एक मैच के हीरो नहीं थे। पूरे 2011 सीजन में उन्होंने 14 मैचों में 463 रन बनाए और 7 विकेट भी लिए। उस समय वह ऑरेंज कैप की दौड़ में भी शामिल थे और बड़े खिलाड़ियों को टक्कर दे रहे थे। ऐसा लग रहा था कि भारतीय क्रिकेट को एक नया सितारा मिल गया है

    लेकिन किस्मत ने अचानक करवट बदल ली। शानदार सीजन के बाद वल्थाटी को कलाई में गंभीर चोट लग गई। उन्होंने वापसी की कोशिश जरूर की लेकिन पुरानी लय हासिल नहीं कर सके। 2012 में उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा और 2013 में भी वह कुछ खास नहीं कर पाए। इसके बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया और फिर किसी फ्रेंचाइजी ने उन्हें मौका नहीं दिया धीरे धीरे वह आईपीएल और क्रिकेट की मुख्यधारा से गायब हो गए। एक समय जो खिलाड़ी सुर्खियों में था वह अब फैंस की यादों में भी धुंधला पड़ गया

    हालांकि क्रिकेट से उनका रिश्ता पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अब वह अमेरिका में कोचिंग के जरिए अपनी नई पारी खेल रहे हैं और युवा खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। उन्होंने खेल से संन्यास के बाद नौकरी भी की और क्रिकेट प्रशासन से भी जुड़े

    पॉल वल्थाटी की कहानी क्रिकेट की उस सच्चाई को दिखाती है जहां सफलता और असफलता के बीच की दूरी बहुत कम होती है। एक पारी आपको आसमान पर पहुंचा सकती है और एक चोट आपको जमीन पर ला सकती है यह कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं बल्कि उस अनिश्चितता की है जो क्रिकेट जैसे खेल को इतना रोमांचक और भावनात्मक बनाती है

  • कन्‍या पूजन में लांगूर क्यों बुलाया जाता है? जानिए इसका पौराणिक महत्व

    कन्‍या पूजन में लांगूर क्यों बुलाया जाता है? जानिए इसका पौराणिक महत्व


    नई दिल्ली। हिन्दू धर्म में नवरात्रि का पर्व बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि शुरू हुई और 27 मार्च 2026 को इसका समापन होगा। 26 मार्च को अष्टमी और 27 मार्च को नवमी मनाई जाएगी। नवमी के दिन हवन और कन्‍या पूजन का आयोजन होता है। यह व्रत और पूजा कन्‍या पूजन के बिना अधूरी मानी जाती है।

    कन्‍या पूजन का तरीका
    कन्‍या पूजन में 2 से 9 साल तक की छोटी लड़कियों को बुलाया जाता है। उन्हें देवी दुर्गा का रूप मानकर पूजा जाता है। पूजा के दौरान इन कन्‍याओं को सम्मानपूर्वक खीर-पूड़ी और हलवे का भोजन कराया जाता है इसके बाद उन्हें भेंट दी जाती है।

    लांगूर कौन होता है?
    कन्‍या पूजन में कन्‍याओं के साथ एक छोटे लड़के को भी बुलाना जरूरी होता है जिसे लांगूर कहा जाता है। जिस तरह कन्‍याएं देवी दुर्गा का रूप मानी जाती हैं वैसे ही यह लड़का भैरवनाथ का रूप माना जाता है। उसे लंगूर लंगूरिया या बटुक भी कहा जाता है। बिना लांगूर के बुलाए कन्‍या पूजन पूरी नहीं माना जाता।

    लांगूर के पूजन का पौराणिक कारण
    कथा के अनुसार जब भगवान शिव ने माता दुर्गा की रक्षा के लिए भैरव का रूप धारण किया था तब माता दुर्गा ने वरदान दिया कि जो भी भक्त मेरी पूजा करेगा उसे भैरव की भी पूजा करनी होगी। इसलिए कन्‍या पूजन में लड़के को भैरव का रूप मानकर पूजा किया जाता है ताकि पूजा पूर्ण हो सके।

    भैरव देवता का महत्व

    कई प्रसिद्ध देवीधामों में भैरव का मंदिर होता है जैसे वैष्णो देवी मंदिर में। यहाँ तक कि मंदिर दर्शन तब तक अधूरे माने जाते हैं जब तक भैरव बाबा के दर्शन नहीं किए जाते।

    सुख-समृद्धि और सुरक्षा का संदेश

    बाबा काल भैरव को शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करने वाला देवता माना जाता है। मान्यता है कि कन्‍या पूजन में बटुक या लांगूर को बुलाकर पूजन और भोजन कराने से घर में सुख समृद्धि आती है और सुरक्षा बनी रहती है।

    Disclaimer: यह खबर केवल जागरूकता के लिए लिखी गई है। इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली गई है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

  • हरियाणा में एक और बैंक घोटाला…. कोटक महिंद्रा पर 160 करोड़ रुपये गायब करने का आरोप

    हरियाणा में एक और बैंक घोटाला…. कोटक महिंद्रा पर 160 करोड़ रुपये गायब करने का आरोप


    पंचकूला।
    हरियाणा (Haryana) में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) में 590 करोड़ रुपये (590 Crore Rupees) के घोटाले के बाद अब एक और बैंक में स्कैम किया गया है. पंचकूला (Panchkula) के सेक्टर-11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) की शाखा में हरियाणा सरकार (Haryana Government) के करीब 160 करोड़ रुपये गायब मिले हैं. इसमें पंचकूला नगर निगम की पांच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का रिकॉर्ड नहीं मिलने से हड़कंप मच गया है. फिलहाल, जांच के आदेश दिए गए हैं. उधर, विजिलेंस ने इस संंबंध में केस दर्ज कर लिया है. बैंक कर्मचारियों और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

    जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने इस बैंक शाखा में कुल 16 एफडी करवाई थीं, जिन्हें पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से ट्रांसफर किया गया था. हाल ही में जब निगम ने एफडी मैच्योर होने पर राशि वापसी के लिए पत्र लिखा, तो बैंक ने जवाब दिया कि संबंधित एफडी का कोई रिकॉर्ड उनके पास मौजूद नहीं है।

    इस खुलासे के बाद नगर निगम ने तत्काल आंतरिक जांच शुरू की. अकाउंट अधिकारियों, कमिश्नर और ज्वाइंट कमिश्नर की टीम ने दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट सरकार और बैंक को भेजी. शुरुआती जांच में सामने आया कि फर्जी तरीके से समान दस्तावेजों पर अतिरिक्त खाते खोलकर रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर की गई. मामले में एक महिला खाते में बड़ी राशि ट्रांसफर होने की भी आशंका जताई जा रही है. अहम बात है कि पैसा शैल कंपनियों के खाते में जमा किया गया था।

    घोटाले को छिपाने के लिए कथित तौर पर एफडी के रिन्यूअल दस्तावेज नियमित रूप से निगम को भेजे जाते रहे, जिससे अधिकारियों को संदेह नहीं हुआ. हालांकि, जब हालिया घोटालों के बाद राशि वापस मांगी गई, तब पूरा मामला उजागर हुआ. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (इकोनॉमिक्स विंग) को जांच सौंपी गई है. साथ ही बैंक प्रबंधन ने भी शिकायत दर्ज कराई है. यह मामला करीब 590 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले से जुड़ा माना जा रहा है, जिसमें पहले ही अन्य बैंकों के नाम सामने आ चुके हैं. अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।


    महिला के खाते में ट्रांसफर हुआ पैसा

    अब तक मिली जानकारी के अनुसार, एफडी के नाम पर बैंक में जमा कराई गई राशि को बैंक ने विभिन्न फर्जी खातों में ट्रांसफर किया है. मामले का खुलासा तब हुआ जब निगम ने 58 करोड़ रुपये और 102 करोड़ की एफडी की मैच्योरिटी राशि अपने खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा और फिर बैंक ने स्टेटमेंट में राशि ट्रांसफर दिखाई और बताया कि वास्तविक खाते में पैसा नहीं पहुंचा. जांच में पता चला कि स्टेटमेंट भी फर्जी थी और रकम गायब है. सूत्रों के अनुसार एक महिला के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर हुई है. बताया जा रहा है कि उसके परिवार में कुछ IAS -IPS अधिकारी हैं।


    पहले हुआ था 590 करोड़ रुपये का स्कैम

    गौर रहे कि इसके पहले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू बैंक में भी पंचकूला नगर निगम के करोड़ों रुपये का गबन किया गया था. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में कुल 590 करोड़ रुपये की राशि का फ्रॉड हुआ था, हरियाणा सरकार का यह पैसा हालांकि, बैंक ने बाद में लौटा दिया था, लेकिन इस मामले में अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।