Author: bharati

  • मकोका आरोपों पर सुकेश की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस को अपना पक्ष रखने का निर्देश

    मकोका आरोपों पर सुकेश की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस को अपना पक्ष रखने का निर्देश

    नई दिल्ली । 200 करोड़ रुपए की वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत लगाए गए आरोपों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। सुकेश ने निचली अदालत के उस फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की है, जिसमें उसके खिलाफ मकोका के तहत आरोप तय किए गए थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की है।

    सुकेश चंद्रशेखर की याचिका में कहा गया है कि उसके खिलाफ लगाए गए मकोका के आरोपों पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का पक्ष है कि इस कानून के तहत कार्रवाई को लेकर नए सिरे से समीक्षा की आवश्यकता है। अब इस मामले में दिल्ली पुलिस के जवाब के बाद हाईकोर्ट आगे की सुनवाई करेगा और तय करेगा कि मकोका आरोपों को लेकर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

    यह पूरा मामला करीब 200 करोड़ रुपए की कथित वसूली और धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर पर आरोप है कि उसने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर एक कारोबारी परिवार से बड़ी रकम हासिल की। आरोप है कि उसने प्रभावशाली लोगों से संपर्क होने और कानूनी मामलों को सुलझाने का भरोसा दिलाकर पैसे की मांग की थी।

    मामला उस समय सामने आया जब फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और खुद को केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पेश किया। उसने उनके पति से जुड़े कानूनी मामलों में मदद दिलाने का दावा किया और इसके बदले बड़ी रकम की मांग की गई। इसके बाद पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की।

    जांच में एजेंसियों ने आरोप लगाया कि इस कथित साजिश में कई लोग शामिल थे और सरकारी अधिकारियों की पहचान का गलत इस्तेमाल किया गया। जांच के दौरान करीब 217 करोड़ रुपए तक की रकम अलग-अलग माध्यमों से हासिल किए जाने का दावा किया गया। इसी आधार पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।

    जांच आगे बढ़ने के बाद सुकेश चंद्रशेखर की भूमिका सामने आने पर उसे गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप था कि वह जेल के अंदर रहते हुए भी अपनी गतिविधियों को संचालित कर रहा था। जांच एजेंसियों ने उसके पास से मोबाइल फोन मिलने का भी दावा किया था। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ मकोका के तहत कार्रवाई की।

    महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून यानी मकोका का इस्तेमाल संगठित अपराध से जुड़े मामलों में किया जाता है। इस कानून के तहत कार्रवाई के लिए पुलिस को यह दिखाना होता है कि अपराध किसी संगठित गिरोह या लगातार आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली पुलिस का आरोप रहा है कि सुकेश ने अकेले नहीं बल्कि एक समूह के साथ मिलकर कथित अपराध को अंजाम दिया।

    अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई इस बात पर केंद्रित होगी कि सुकेश के खिलाफ मकोका के तहत लगाए गए आरोप कानूनी रूप से सही हैं या नहीं। दिल्ली पुलिस के जवाब के बाद मामले में आगे की दिशा तय होगी। इस मामले में लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच हाईकोर्ट की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा में रिकॉर्ड बारिश, गांवों में जलभराव, SDRF ने 10 घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

    खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा में रिकॉर्ड बारिश, गांवों में जलभराव, SDRF ने 10 घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। सबसे ज्यादा बारिश खरगोन जिले के गोगावां में 7.6 इंच रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा बुरहानपुर शहर में 7 इंच और बैतूल के भीमपुर में 6.6 इंच बारिश हुई। लगातार हो रही बारिश से कई नदियां और नाले उफान पर हैं, जबकि घरों, खेतों और सड़कों पर पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार बड़वानी के वरला, आलीराजपुर के उदयगढ़ और बुरहानपुर के खकनार में 5.3 इंच, खंडवा शहर में 5.1 इंच तथा खरगोन के बड़वाह में 4.4 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं झाबुआ के रानापुर में 4 इंच, खरगोन के सेगांव में 4.3 इंच और खरगोन शहर में 4.2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। प्रदेश के 33 शहरों और कस्बों में भारी से अति भारी वर्षा दर्ज होने से कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई।

    बड़वानी जिले के सेंधवा ब्लॉक में 24 घंटे के दौरान साढ़े चार इंच से अधिक बारिश हुई। तेज बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए और धनोरा गांव में नाले का पानी 10 से 15 घरों में घुस गया। कई मकानों में करीब दो फीट तक पानी भर गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी मक्का की फसल भी गिर गई। सेंधवा ब्लॉक का सबसे बड़ा तालाब ओवरफ्लो हो गया, जबकि वरला और बलवाड़ी क्षेत्र में भी जलभराव की स्थिति बनी रही।

    खंडवा जिले में भी लगातार बारिश से हालात गंभीर बने रहे। यहां 24 घंटे के दौरान 128 मिलीमीटर यानी पांच इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव के साथ कपास और मक्का की फसलों को नुकसान पहुंचा है। आबना और सुक्ता नदी में तेज बहाव के कारण हांड़ी-कुंडी गांव के पास बने टापू पर चार लोग फंस गए। सूचना मिलने पर खंडवा और इंदौर की एसडीआरएफ टीम ने करीब साढ़े दस घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के दौरान ड्रोन के माध्यम से फंसे लोगों तक लाइफ जैकेट भी पहुंचाई गई।

    लगातार बारिश के चलते कई जिलों में निचले इलाकों में जलभराव, ग्रामीण सड़कों पर पानी भरने और खेतों में फसल नुकसान की खबरें सामने आई हैं। प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों से नदी-नालों के आसपास नहीं जाने तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में प्रशासन ने जिलों को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन दलों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

  • बस्तर के विकास का नया रोडमैप लेकर पीएम मोदी से मिले सीएम साय, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग पर हुई बड़ी चर्चा

    बस्तर के विकास का नया रोडमैप लेकर पीएम मोदी से मिले सीएम साय, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग पर हुई बड़ी चर्चा

    नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर के कायाकल्प की योजना और राज्य में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की जानकारी प्रधानमंत्री के सामने रखी। उन्होंने बस्तर को विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के सामने राज्य की तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें राजनांदगांव में प्रस्तावित 10,500 करोड़ रुपये की गैस आधारित यूरिया परियोजना को जल्द मंजूरी देने का आग्रह प्रमुख रहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध करा दी गई है और राज्य स्तर की सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं। परियोजना शुरू होने से किसानों को उर्वरक की उपलब्धता में सुविधा मिलेगी और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

    इसके अलावा मुख्यमंत्री ने उन 461 गांवों को स्थायी बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए विशेष सहायता की मांग की, जहां सुरक्षा और भौगोलिक चुनौतियों के कारण अब तक ऑफ-ग्रिड बिजली व्यवस्था संचालित हो रही है। उन्होंने रायपुर या बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक पहल करने का अनुरोध किया।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर विजन के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाला बस्तर अब विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनसे लाखों लोगों को लाभ मिल रहा है। राशन, स्वास्थ्य बीमा, जनधन खाते, वन अधिकार और आवास जैसी योजनाओं का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

    शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है। इसके साथ ही दूरदराज के इलाकों में बेहतर शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर के बच्चों को बेहतर अवसर और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि विशेष स्वास्थ्य अभियान के तहत बड़ी संख्या में लोगों की जांच कर उन्हें चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि बस्तर में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है, जिससे लोगों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने बस्तर में बढ़ती कनेक्टिविटी का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सड़क, रेल और हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। रेल परियोजनाओं, एक्सप्रेस-वे और सिंचाई योजनाओं से क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    बस्तर की संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा, चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं की भागीदारी और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।

    बैठक में छत्तीसगढ़ में बढ़ते निवेश और उद्योगों के विस्तार का मुद्दा भी प्रमुख रहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में नई औद्योगिक नीतियों के कारण बड़े निवेश प्रस्ताव आए हैं और कई क्षेत्रों में नई परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। एआई, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण और अन्य आधुनिक उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।

    मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण, डिजिटल सेवाओं और सुशासन से जुड़े कार्यों की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों को आसान और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ विकास के नए लक्ष्य हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर में हो रहे बदलाव से क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है और आने वाले समय में यह विकास और अवसरों का केंद्र बनेगा।

  • NEET आंदोलन के समर्थन के बाद बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप- पुलिस ने 10 बार बदलवाया बयान

    NEET आंदोलन के समर्थन के बाद बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप- पुलिस ने 10 बार बदलवाया बयान


    इंदौर इंदौर में NEET परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलन के समर्थन को लेकर कांग्रेस और पुलिस प्रशासन के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे से गुरुवार को पंढरीनाथ थाने में करीब पांच घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान उन्हें लंबे समय तक थाने में बैठाए रखने की खबर फैलते ही पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा सहित कई कांग्रेस नेता और समर्थक थाने पहुंच गए। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जमा होने से थाने के बाहर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। बाद में पुलिस ने चौकसे को जाने की अनुमति दे दी।

    थाने से बाहर आने के बाद चिंटू चौकसे ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि कांग्रेस ने टंट्या भील चौराहे पर NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया था और इसी वजह से उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने पहुंचने के बाद पुलिस ने कई घंटे तक उन्हें बैठाए रखा और बयान में बार-बार संशोधन कराया। उनके अनुसार वहां मौजूद पुलिसकर्मी केवल वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन कर रहे थे और पूरा घटनाक्रम पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर हुआ।

    चौकसे ने दावा किया कि उनके बयान में लगभग दस बार संशोधन कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार बयान की भाषा और उसमें लिखी गई बातों को बदलने का दबाव बनाया गया। उनके मुताबिक यह केवल एक व्यक्ति को परेशान करने का मामला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि जो भी जनता की आवाज उठाता है या छात्र, किसान और आम लोगों के आंदोलनों का समर्थन करता है, उसे प्रशासनिक दबाव के जरिए चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी के आह्वान पर कांग्रेस देशभर में छात्रों के समर्थन में खड़ी है और इंदौर में भी पार्टी ने NEET अभ्यर्थियों के आंदोलन को समर्थन दिया था। उनका आरोप है कि जैसे ही प्रशासन को कांग्रेस की सक्रिय भूमिका की जानकारी मिली, छह महीने पुराने मामले में उन्हें नोटिस भेज दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।

    चौकसे ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पहले कांग्रेस कार्यालय पर हमला हुआ, पत्थरबाजी हुई और कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हुए, लेकिन पुलिस ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की जबकि भाजपा से जुड़े लोगों के खिलाफ अज्ञात आरोपियों के रूप में मामला दर्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस के माध्यम से विपक्षी नेताओं को परेशान कर रही है और आंदोलनों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

    कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। चिंटू चौकसे ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में आने वाले दिनों में इंदौर पुलिस के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और राजनीतिक विरोध की आवाज को दबाने के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा।

    हालांकि इस मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में कांग्रेस के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

  • दिल की धड़कनों का बिगड़ा संतुलन पड़ सकता है भारी जानिए Atrial Fibrillation के लक्षण कारण और बचाव के आसान उपाय

    दिल की धड़कनों का बिगड़ा संतुलन पड़ सकता है भारी जानिए Atrial Fibrillation के लक्षण कारण और बचाव के आसान उपाय


    नई दिल्ली। दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है और इसकी नियमित धड़कन पूरे शरीर में रक्त संचार को सुचारु बनाए रखती है। लेकिन जब दिल की धड़कन सामान्य लय खो देती है और बहुत तेज या अनियमित होने लगती है तो यह Atrial Fibrillation यानी एट्रियल फिब्रिलेशन का संकेत हो सकता है। यह ऐसी बीमारी है जिसके बारे में आज भी बड़ी संख्या में लोग जानकारी नहीं रखते जबकि यह स्ट्रोक हार्ट फेलियर और कई गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है।

    Atrial Fibrillation में दिल के ऊपरी कक्ष यानी एट्रिया सामान्य तरीके से सिकुड़ने की बजाय बहुत तेजी और अनियमित रूप से कंपन करने लगते हैं। इसके कारण दिल पूरे शरीर में रक्त को प्रभावी ढंग से पंप नहीं कर पाता। जब रक्त का प्रवाह धीमा होता है तो दिल के भीतर थक्का बनने की आशंका बढ़ जाती है। यही थक्का मस्तिष्क तक पहुंचकर स्ट्रोक का कारण बन सकता है जो कई बार जानलेवा भी साबित होता है।

    इस बीमारी के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। मरीज को दिल की धड़कन तेज महसूस होना सीने में घबराहट सांस फूलना चक्कर आना कमजोरी जल्दी थक जाना या सीने में असहजता महसूस हो सकती है। कुछ लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते और बीमारी का पता नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान चलता है। यही कारण है कि इसे खामोश बीमारी भी कहा जाता है।

    बढ़ती उम्र उच्च रक्तचाप मधुमेह मोटापा थायरॉयड की समस्या धूम्रपान अत्यधिक शराब का सेवन तनाव और पहले से मौजूद हृदय रोग Atrial Fibrillation के प्रमुख जोखिम कारक माने जाते हैं। इसके अलावा शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतुलित खानपान भी इस बीमारी की संभावना बढ़ा सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और सही इलाज से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टर ईसीजी इकोकार्डियोग्राफी या अन्य जांचों के माध्यम से इसकी पुष्टि करते हैं। उपचार के दौरान मरीज की स्थिति के अनुसार दवाएं दी जाती हैं ताकि दिल की धड़कन नियंत्रित रहे और रक्त का थक्का बनने का खतरा कम हो सके। कुछ मामलों में विशेष चिकित्सीय प्रक्रियाओं की भी आवश्यकता पड़ सकती है।

    स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित व्यायाम करें संतुलित और पौष्टिक भोजन लें नमक और तैलीय भोजन का सेवन सीमित रखें धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए रखें पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करने के लिए योग या ध्यान का सहारा लें। यदि पहले से ब्लड प्रेशर या डायबिटीज जैसी समस्या है तो उसका नियमित उपचार कराना भी बेहद जरूरी है।

    यदि आपको बार बार दिल की धड़कन अनियमित महसूस होती है सांस लेने में परेशानी होती है या अचानक कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्या होती है तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा न करें। समय पर हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर जांच कराना भविष्य में होने वाली गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है। जागरूकता और समय पर उपचार ही इस खामोश लेकिन गंभीर बीमारी से सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • बांग्लादेशी घुसपैठ पर संसदीय समिति सख्त, सीमाओं पर संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने की दी सिफारिश।

    बांग्लादेशी घुसपैठ पर संसदीय समिति सख्त, सीमाओं पर संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने की दी सिफारिश।

    नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों और सीमा प्रबंधन को लेकर संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति ने एक महत्वपूर्ण समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की है। वरिष्ठ सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ आज भी भारत की आंतरिक सुरक्षा और जनसांख्यिकी के लिए एक अत्यंत गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। समिति ने इस संवेदनशील समस्या से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच एक समर्पित ‘संयुक्त कार्य समूह’ या स्थायी द्विपक्षीय तंत्र स्थापित करने का सुझाव दिया है, ताकि सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

    रिपोर्ट में उजागर किया गया है कि वर्तमान समय में लगभग 2,369 संदिग्ध प्रवासियों की राष्ट्रीयता की पुष्टि का मामला बांग्लादेश सरकार के पास लंबित पड़ा हुआ है। स्थायी समिति का मानना है कि दोनों देशों के बीच एक औपचारिक और जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा बनने से पहचान सत्यापन की यह प्रक्रिया त्वरित गति से पूरी की जा सकेगी। इसके साथ ही, समिति ने यह मानवीय और कानूनी हिदायत भी दी है कि जांच और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया के दौरान पूरी सतर्कता बरती जाए ताकि किसी भी भारतीय नागरिक को गलती से सीमा पार न भेजा जाए और हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।

    सीमा सुरक्षा के तकनीकी पहलुओं का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों देशों के बीच फैली 4,096 किलोमीटर लंबी कुल सीमा में से लगभग 3,231 किलोमीटर हिस्से में ही सुरक्षा बाड़ लगाई जा सकी है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, नदी क्षेत्रों और विवादित भूखंडों के कारण अभी भी करीब 864 किलोमीटर की सीमा बिना बाड़ के खुली हुई है, जिसका फायदा अवैध गतिविधियों के लिए उठाया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार इस घुसपैठ का सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव सीमावर्ती राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल और असम पर पड़ रहा है, जहां सुरक्षा एजेंसियों को लगातार सतर्क रहना पड़ता है।

    सुरक्षा चिंताओं के अलावा समिति ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक नियमों के दुरुपयोग पर भी गंभीर आपत्ति जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) के तहत मिलने वाली रियायतों का गलत फायदा उठाकर तीसरे देशों की सामग्री, विशेष रूप से चीनी कपड़ों और उत्पादों को बांग्लादेश के रास्ते भारतीय बाजारों में खपाया जा रहा है। इससे घरेलू उद्योगों और निष्पक्ष व्यापार प्रतिस्पर्धा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। समिति ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को व्यापारिक नियमों को और अधिक कड़ा करने और उच्च स्तर पर इस मुद्दे को उठाने का परामर्श दिया है।

    संसदीय समिति ने सुरक्षा और व्यापारिक कड़ाई के साथ-साथ कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को पुनः पटरी पर लाने की आवश्यकता पर भी बल दिया है। स्थिति सामान्य होते ही वीजा सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से सुचारू करने, वार्षिक संयुक्त साहित्य महोत्सवों के आयोजन और युवाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से जन-सामान्य के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने की सिफारिश की गई है। इसके अतिरिक्त, समिति ने वैश्विक पटल पर भारत की वैज्ञानिक और कूटनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए ‘ध्रुवीय राजदूत’ की नियुक्ति और अंटार्कटिका में अनुसंधान केंद्रों के निर्माण में तेजी लाने का सुझाव भी दिया है।

  • महान एयर और आईआरजीसी को सहायता पहुंचाने के आरोप में चार देशों की छह संस्थाओं व व्यक्तियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू।

    महान एयर और आईआरजीसी को सहायता पहुंचाने के आरोप में चार देशों की छह संस्थाओं व व्यक्तियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू।

    नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर एक नया तनावपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने ईरान की शक्तिशाली सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष सहायता प्रदान करने के गंभीर आरोप में भारत, चीन, रूस और ईरान से जुड़ी छह संस्थाओं तथा व्यक्तियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने की आधिकारिक घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य मध्य पूर्व क्षेत्र में ईरानी सैन्य गतिविधियों को मिलने वाले वित्तीय, तकनीकी और रसद संबंधी सहयोग को पूरी तरह से रोकना है।

    अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इन प्रतिबंधों की मुख्य जद में वे अंतरराष्ट्रीय इकाइयां और कंपनियां आई हैं जो ईरान की विवादित विमानन सेवा ‘महान एयर’ को रसद तथा अन्य संसाधन उपलब्ध करा रही थीं। वाशिंगटन का आरोप है कि इस एयरलाइन का उपयोग लंबे समय से मध्य पूर्व के विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों में हथियार, सैन्य कर्मियों और आधुनिक युद्ध उपकरणों के परिवहन के लिए किया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त, टेक सेक्टर से जुड़ी संस्था डाडेनेगर स्टार्टअप स्टूडियो को भी प्रतिबंधित सूची में डाला गया है, जिस पर आईआरजीसी की फ्रंट कंपनी के रूप में काम करने और अमेरिकी व इजरायली रक्षा ठिकानों की निगरानी जानकारी जुटाने का आरोप है।

    यह दंडात्मक कार्रवाई अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ (ओएफएसी) द्वारा संशोधित कार्यकारी आदेश 13224 के तहत लागू की गई है। यह विशेष आदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी संगठनों, उनके सहयोगियों, समर्थकों और वित्तीय तंत्र को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। अमेरिकी नीति निर्माताओं ने स्पष्ट किया है कि आईआरजीसी और उससे जुड़े वैश्विक तंत्र को किसी भी प्रकार की सहायता प्रदान करने वाली विदेशी संस्थाओं को अमेरिकी वित्तीय बाजार से पूरी तरह से अलग कर दिया जाएगा।

    कार्रवाई के साथ ही अमेरिकी विदेश विभाग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और निजी वैश्विक कंपनियों के लिए एक गंभीर चेतावनी भी जारी की है। इसमें विशेष रूप से महान एयर या अन्य किसी प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइन के साथ वाणिज्यिक संबंध रखने वाली संस्थाओं को उनसे जुड़े गंभीर कानूनी, व्यावसायिक और वित्तीय जोखिमों के प्रति आगाह किया गया है। अमेरिकी विदेश नीति के अधिकारियों ने दोहराया कि वे उन सभी व्यक्तिगत और संस्थागत नेटवर्क की पहचान जारी रखेंगे जो क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करने वाले सैन्य संगठनों को संसाधन उपलब्ध कराते हैं।

    उल्लेखनीय है कि महान एयर को सबसे पहले वर्ष 2011 में आईआरजीसी की विशेष ‘कुद्स फोर्स’ को तकनीकी और वित्तीय सहायता देने के कारण अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में शामिल किया गया था। वहीं, आईआरजीसी स्वयं कई वर्षों से अमेरिका की ओर से कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। चार प्रमुख देशों से जुड़ी संस्थाओं पर एक साथ हुई इस कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक क्षेत्र और वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

  • वरिष्ठ अभिनेता के बयान से बॉलीवुड में नई चर्चा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जताई गहरी श्रद्धा और सम्मान।

    वरिष्ठ अभिनेता के बयान से बॉलीवुड में नई चर्चा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जताई गहरी श्रद्धा और सम्मान।

    नई दिल्ली। फिल्म उद्योग के जाने-माने अभिनेता सुदेश बेरी अपने एक हालिया बयान को लेकर अचानक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बातचीत के दौरान उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपना गहरा सम्मान व्यक्त किया है। अभिनेता ने प्रधानमंत्री के संघर्ष और नेतृत्व क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि भले ही वे उनसे कभी व्यक्तिगत रूप से नहीं मिले हैं, लेकिन उनके मन में देश के सर्वोच्च नेता के प्रति ईश्वर तुल्य आदर और निष्ठा का भाव है।

    वार्तालाप के दौरान सुदेश बेरी ने देश में चल रहे विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रदर्शनों की शैली पर भी बेबाक राय रखी। उन्होंने हाल के दिनों में चर्चा में आए एक संगठन और उनके विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि केवल जंतर-मंतर जैसी जगहों पर बैठकर प्रदर्शन करने से समाज का वास्तविक भला नहीं होता। अभिनेता का मानना है कि यदि कोई सच में जनसेवा करना चाहता है, तो उसे बच्चों के लिए खेल के मैदान, बुजुर्गों के लिए आश्रम और जरूरतमंदों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे ठोस सामाजिक कार्यों में अपना योगदान देना चाहिए।

    प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए अभिनेता ने उनके शुरुआती जीवन के संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा कि एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से उठकर विश्व पटल पर देश का प्रतिनिधित्व करना कोई साधारण बात नहीं है। उन्होंने भावुक होते हुए व्यक्त किया कि जिस तरह लोग बिना देखे ईश्वर पर विश्वास और उनका सम्मान करते हैं, ठीक उसी तरह वे भी प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व और राष्ट्र-निर्माण के प्रयासों के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा रखते हैं और अवसर मिलने पर उन्हें नमन करना चाहते हैं।

    मनोरंजन जगत में अक्सर कलाकारों के राजनीतिक और सामाजिक बयानों को लेकर काफी बहस देखने को मिलती है। सुदेश बेरी के इस बयान ने भी सोशल मीडिया और सिनेमा प्रेमियों के बीच एक नई वैचारिक चर्चा को जन्म दे दिया है। जहां कुछ लोग उनके बेबाक अंदाज और विचार की सराहना कर रहे हैं, वहीं कुछ अन्य लोग विरोध प्रदर्शनों पर दिए गए उनके सुझावों को लेकर अलग दृष्टिकोण रखते हैं।

    अभिनय क्षेत्र की बात करें तो सुदेश बेरी लंबे समय से भारतीय सिनेमा और टेलीविजन उद्योग से जुड़े रहे हैं। उन्होंने ‘बॉर्डर’ जैसी देशभक्ति पर आधारित ऐतिहासिक फिल्मों से लेकर कई लोकप्रिय धारावाहिकों में अपनी सशक्त अभिनय क्षमता का परिचय दिया है। हाल ही में वे ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के सीक्वल में एक संक्षिप्त भूमिका में नजर आए थे। फिलहाल उनके इस बयान के बाद बॉलीवुड के गलियारों में उनकी काफी चर्चा हो रही है।

  • ग्लास्गो में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, आठवें दिन दो पदक जीतकर बढ़ाया देश का मान।

    ग्लास्गो में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, आठवें दिन दो पदक जीतकर बढ़ाया देश का मान।

    नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेल 2026 के आठवें दिन भारतीय एथलीटों ने उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में दो महत्वपूर्ण पदक डाले। ग्लास्गो में चल रहे इन खेलों में भारत को पुरुषों की भारोत्तोलन स्पर्धा में एक रजत और महिलाओं की डिस्कस थ्रो प्रतियोगिता में एक कांस्य पदक हासिल हुआ। इसके साथ ही एथलेटिक्स के कई अन्य आयोजनों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी और फाइनल दौर में प्रवेश कर आगामी दिनों में और अधिक पदकों की उम्मीदों को जीवंत कर दिया है।

    भारोत्तोलन के मैदान से भारत के लिए सबसे बड़ी सफलता पुरुषों के 110+ किलोग्राम भार वर्ग में आई, जहां लवप्रीत सिंह ने अपनी ताकत का लोहा मनवाया। लवप्रीत ने स्नैच श्रेणी में 176 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क श्रेणी में 212 किलोग्राम का वजन उठाते हुए कुल 388 किलोग्राम भार उठाया और रजत पदक अपने नाम किया। वह बेहद कड़े मुकाबले में महज एक किलोग्राम के अंतर से स्वर्ण पदक से चूक गए। वहीं, महिला वर्ग के 86+ किलोग्राम भार वर्ग में मार्टिना देवी मेबाम कुल 245 किलोग्राम भार उठाकर पांचवें स्थान पर रहीं।

    दिन की दूसरी बड़ी उपलब्धि महिलाओं की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में मिली, जहां अनुभवी एथलीट सीमा ने भारत को कांस्य पदक दिलाया। सीमा ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 58.65 मीटर दूर थ्रो फेंककर पोडियम पर तीसरा स्थान पक्का किया। इसी स्पर्धा में भारत की एक अन्य खिलाड़ी निधि रानी ने भी शानदार प्रदर्शन किया और 57.10 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहीं। एथलेटिक्स में भारत का यह मिला-जुला प्रदर्शन वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती धाक को प्रदर्शित करता है।

    एथलेटिक्स के अन्य ट्रैक और फील्ड इवेंट्स में भी भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के क्वालिफिकेशन राउंड में नीरज चोपड़ा, रोहित यादव और यशवीर सिंह तीनों खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शीर्ष-12 में जगह बनाई और फाइनल में प्रवेश किया। इसके अतिरिक्त, पुरुषों की त्रिकूद स्पर्धा में प्रवीण चित्रावले और सेल्वा प्रभु ने क्वालिफाइंग दौर में क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान हासिल कर फाइनल का टिकट पक्का किया, जबकि डेकाथलॉन में तेजस्विन शंकर ने हाई जंप और लॉन्ग जंप में व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए बेहतरीन अंक बटोरे।

    हालांकि, कुछ स्पर्धाओं में भारत को निराशा का सामना भी करना पड़ा। पुरुषों की 200 मीटर दौड़ के सेमीफाइनल में अनिमेष कुजुर और 400 मीटर दौड़ में विशाल टीके फाइनल में जगह बनाने से चूक गए। गोला फेंक में तजिंदर पाल सिंह तूर पांचवें स्थान पर रहे। दूसरी ओर, लॉन बॉल्स में पुरुषों की पेयर्स टीम ने जीत दर्ज की, जबकि ट्रैक साइकिलिंग में भारतीय टीम पदक दौर तक नहीं पहुंच सकी। कुल मिलाकर आठवां दिन भारत के लिए पदकों और नए अवसरों से भरा रहा।

  • केसरिया रंग पर छिड़ा घमासान, भारतीय हॉकी की पहचान और नीली जर्सी के इतिहास पर उठा बड़ा सवाल।

    केसरिया रंग पर छिड़ा घमासान, भारतीय हॉकी की पहचान और नीली जर्सी के इतिहास पर उठा बड़ा सवाल।

    नई दिल्ली। खेल जगत में किसी भी राष्ट्रीय टीम की जर्सी केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि उसकी दशकों पुरानी पहचान, विरासत और प्रशंसकों के भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक होती है। भारतीय खेल इतिहास में ‘मैन इन ब्लू’ और ‘विमेन इन ब्लू’ की अवधारणा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भारत की खेल पहचान बन चुकी है। आगामी एफआईएच विश्व कप से ठीक पहले हॉकी इंडिया द्वारा भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम की प्राथमिक जर्सी का रंग पारंपरिक नीले से बदलकर केसरिया करने के फैसले ने देश में एक नया विवाद और गहन वैचारिक बहस छेड़ दी है।

    हॉकी इंडिया ने जर्सी का रंग बदलने के पीछे तकनीकी और खेल विज्ञान से जुड़े कारणों का हवाला दिया है। महासंघ का तर्क है कि आधुनिक अंतरराष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिताओं में अधिकांश सिंथेटिक एस्ट्रोटर्फ नीले रंग की होती हैं। मैचों के दौरान नीली जर्सी पहनकर खेलने से खिलाड़ियों के कपड़े नीले टर्फ के रंग में मिल जाते हैं, जिससे मैदान पर साथी खिलाड़ियों की दृश्यता में बाधा आती है और त्वरित निर्णय लेने में परेशानी होती है। सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों के परामर्श से दृश्यता में सुधार के उद्देश्य से ही यह बदलाव किया गया है।

    हालांकि, इस तकनीकी दलील के बावजूद खेल जगत के कई दिग्गजों और पूर्व कप्तानों ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। पूर्व दिग्गजों का कहना है कि भारतीय हॉकी का गौरवशाली इतिहास नीली जर्सी के साथ जुड़ा हुआ है और विश्व पटल पर भारत की पहचान इसी रंग से बनती रही है। खेल के अंतरराष्ट्रीय जानकारों का मानना है कि ब्राजील की पीली, न्यूजीलैंड की काली या इटली की नीली जर्सी की तरह भारतीय टीम का नीला रंग भी दशकों की मेहनत के बाद एक वैश्विक ब्रांड बना था, जिसे एक झटके में बदलना अनुचित है।

    राजनीतिक गलियारों में भी इस बदलाव को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस फैसले को सांस्कृतिक और वैचारिक ब्रांडिंग का हिस्सा बताते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि खेल प्रशासन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि खेलों में जर्सी के डिजाइन और रंग समय-समय पर बदलते रहे हैं और इस निर्णय को किसी राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।

    वैश्विक खेलों में जर्सी के रंग और राष्ट्रीय ध्वज के बीच अंतर होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन किसी स्थापित खेल राष्ट्र की प्राथमिक पहचान को अचानक बदल देना हमेशा से चर्चा का विषय बनता रहा है। 1928 से लेकर अब तक ओलंपिक और विश्व कप के मंचों पर भारतीय हॉकी ने जो स्वर्णिम अध्याय लिखे हैं, वे किसी एक रंग से कहीं बढ़कर हैं। फिलहाल, यह बहस केवल एक रंग तक सीमित न रहकर खेल की ब्रांडिंग, विरासत और संस्थागत फैसलों में पारदर्शिता के इर्द-गिर्द घूम रही है।