Author: bharati

  • तेलंगाना में घर के आंगन में पहुंचा 12 फीट लंबा अजगर, सुबह-सुबह विशालकाय जीव को देख फैली भारी दहशत।

    तेलंगाना में घर के आंगन में पहुंचा 12 फीट लंबा अजगर, सुबह-सुबह विशालकाय जीव को देख फैली भारी दहशत।

    नई दिल्ली। मानसून के मौसम में वन्यजीवों का प्राकृतिक आवासों से निकलकर आबादी वाले इलाकों की ओर रुख करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी क्रम में तेलंगाना के मंचेरियल जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और भयावह मामला प्रकाश में आया है। मंचेरियल के मंदामर्री सेकेंड जोन इलाके में एक आवासीय मकान के आंगन में अचानक लगभग 12 फीट लंबा विशालकाय अजगर दिखाई देने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सुबह-सुबह घटी इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवार के सदस्यों के बीच भारी दहशत का माहौल बन गया।

    घटना की शुरुआत सुबह के समय हुई जब घर के सदस्य अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। इसी दौरान आंगन में एक कोने में कुंडली मारकर बैठे विशालकाय अजगर पर गृहस्वामी रमेश और उनके परिजनों की नजर पड़ी। इतने बड़े जीव को अचानक अपने घर के परिसर में देखकर परिवार के सदस्य घबरा गए और तुरंत शोर मचाना शुरू कर दिया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के पड़ोसी भी अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए और देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ एकत्रित हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अजगर की लंबाई करीब 12 फीट थी और वह काफी विशाल था। रिहायशी बस्ती के बीचों-बीच इतने बड़े अजगर को देखकर लोग भयभीत हो गए। अनहोनी की आशंका को देखते हुए परिजनों ने तुरंत बच्चों को सुरक्षित कमरों के भीतर बंद कर दिया। हालांकि, इस दौरान कुछ स्थानीय निवासियों ने सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए इस दुर्लभ दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित होने लगा, जिससे आसपास के अन्य इलाकों में भी चर्चा का बाजार गर्म हो गया।

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में छोटी-मोटी प्रजातियों के सांप अक्सर देखे जाते हैं, लेकिन इतने बड़े आकार का अजगर पहली बार किसी के घर के भीतर पहुंचा है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि बारिश के कारण प्राकृतिक आवासों और जंगलों में पानी भर जाने की वजह से यह जीव सूखे और सुरक्षित स्थान की तलाश में भटकते हुए आबादी वाले क्षेत्र में प्रवेश कर गया। इस घटना के बाद से पूरे मोहल्ले में सतर्कता बढ़ा दी गई है और लोग आसपास की झाड़ियों और खाली पड़े भूखंडों पर विशेष निगरानी रख रहे हैं।

    पर्यावरण और वन्यजीव विशेषज्ञों ने मानसून के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जानकारों का कहना है कि बारिश के दिनों में झाड़ियों, पुरानी लकड़ियों के ढेर और पानी जमा होने वाले स्थानों पर विषैले व विशालकाय जीवों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में किसी भी वन्यजीव को नुकसान पहुंचाने या उकसाने के बजाय उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और तुरंत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों या वन विभाग की टीम को सूचित करना चाहिए ताकि समय रहते सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।

  • यूट्यूब व्लॉग के जरिए अभिनेत्री और उनके पति ने साझा की आपबीती, पूरी रात पुलिस स्टेशन में बिताकर कराई एफआईआर।

    यूट्यूब व्लॉग के जरिए अभिनेत्री और उनके पति ने साझा की आपबीती, पूरी रात पुलिस स्टेशन में बिताकर कराई एफआईआर।

    नई दिल्ली। मनोरंजन जगत की चर्चित अभिनेत्री संभावना सेठ और उनके पति अविनाश द्विवेदी एक गंभीर घटनाक्रम के कारण सुर्खियों में आ गए हैं। इस दंपति ने अपनी इंसानियत और सतर्कता का परिचय देते हुए एक युवती को बंधक बनाए जाने और प्रताड़ित किए जाने के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अपनी घरेलू सहायिका की बहन की जान बचाने के लिए इस दंपति को पूरी रात मुंबई के पुलिस स्टेशन में बितानी पड़ी, जिसके बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

    पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब अभिनेत्री की घरेलू सहायिका ने रोते हुए अपनी बहन के साथ हो रहे अत्याचार की जानकारी दी। उसने बताया कि उसकी बहन को मुंबई के खारघर इलाके में स्थित एक मकान में एक एजेंसी के जरिए काम पर रखा गया था। वहां उसे दर्जनों पालतू जानवरों की देखभाल के लिए रखा गया था, लेकिन धीरे-धीरे उस पर काम का अत्यधिक बोझ डाल दिया गया। जब युवती ने काम करने में असमर्थता जताई, तो आरोपी दंपत्ति ने उसे घर में ही बंधक बना लिया। आरोप है कि युवती को खाना देना बंद कर दिया गया, उसके पहचान पत्र और कपड़े छीन लिए गए और लगातार जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अभिनेत्री और उनके पति तुरंत हरकत में आए। उन्होंने पहले फोन के माध्यम से संबंधित पक्षों से संपर्क कर युवती को छुड़ाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद एक गैर-सरकारी संगठन की मदद से बेहद मशक्कत के बाद पीड़िता को उस घर से सुरक्षित बाहर निकाला गया। जब पीड़िता को सुरक्षित स्थान पर लाया गया, तो उसकी मानसिक स्थिति काफी दयनीय थी और वह अत्यधिक डरी-सहमी हुई थी।

    मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी पक्ष ने खुद को बचाने और पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए पीड़िता पर ही झूठे आरोप लगाने की कोशिश की। इसके बाद अभिनेत्री और उनके पति स्वयं आधी रात को मुंबई के बांगुर नगर पुलिस स्टेशन पहुंचे। दोनों ने पूरी रात पुलिस स्टेशन में रुककर अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। काफी मशक्कत और सबूत पेश किए जाने के बाद सुबह पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आरोपियों के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की।

    इस पूरी घटना का विवरण दंपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। घरेलू सहायिका और उसके परिवार ने अभिनेत्री और उनके पति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि वे समय पर ढाल बनकर नहीं खड़े होते, तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कानूनी जांच शुरू कर दी है और पीड़िता को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।

  • सोनम ने किया सरेंडर, अब छह महीने में ट्रायल पूरा करने की चुनौती, जनवरी तक आ सकता है फैसला

    सोनम ने किया सरेंडर, अब छह महीने में ट्रायल पूरा करने की चुनौती, जनवरी तक आ सकता है फैसला


    इंदौर  इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी के ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने के बाद अब मामले की सुनवाई निर्णायक चरण में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के पालन में सोनम ने 29 जुलाई को मेघालय के शिलॉन्ग स्थित ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। इसके साथ ही अब कानूनी प्रक्रिया तेज होने की संभावना जताई जा रही है। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत में सुनवाई तय समय-सीमा के भीतर पूरी होती है तो इस बहुचर्चित मामले में जनवरी 2027 तक फैसला आ सकता है।

    सोनम के सरेंडर के बाद सबसे बड़ा सवाल यह सामने आया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रायल छह महीने में पूरा करने की जो समय-सीमा तय की गई है, उसकी गणना किस तारीख से होगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह अवधि सरेंडर की तारीख से नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई 2026 के आदेश की तारीख से मानी जाएगी। अदालत ने अपने आदेश में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया कि छह महीने की अवधि सरेंडर के दिन से प्रभावी होगी। इसलिए आदेश जारी होने की तारीख ही कानूनी रूप से समय-सीमा का आधार मानी जाएगी।

    कानूनी विशेषज्ञ एडवोकेट आशीष एस. शर्मा के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को सोनम को अंतरिम राहत देते हुए दो महत्वपूर्ण शर्तें रखी थीं। पहली, तीन सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करना और दूसरी, यदि छह महीने के भीतर ट्रायल अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ता या पूरा नहीं होता तो आरोपी को दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता होगी।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि छह महीने की शर्त केवल ट्रायल में देरी के आधार पर दोबारा जमानत मांगने से जुड़ी है। यदि इस दौरान कोई नया कानूनी आधार सामने आता है, जैसे गंभीर स्वास्थ्य समस्या, गवाहों की जिरह में कोई महत्वपूर्ण नया तथ्य या ऐसा कोई कानूनी पहलू जो मामले की दिशा बदल सकता हो, तो आरोपी छह महीने पूरे होने का इंतजार किए बिना भी नई जमानत याचिका दायर कर सकती है।

    अभियोजन पक्ष से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक सबूत, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड और फॉरेंसिक रिपोर्ट अदालत में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अभियोजन को यह साबित करना होगा कि सभी साक्ष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और उनकी पूरी श्रृंखला केवल आरोपियों की संलिप्तता की ओर ही संकेत करती है। यदि यह वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी संदेह से परे सिद्ध हो जाती है, तो इन्हीं के आधार पर दोष सिद्ध होने की संभावना मजबूत होगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार सोनम द्वारा तय समय से पहले सरेंडर करना भी कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इससे यह संदेश जाता है कि उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान किया और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग किया। भविष्य में यदि वह जमानत की मांग करती है तो उसका पक्ष यह तर्क रख सकता है कि उसने अदालत के सभी निर्देशों का समय पर पालन किया और जांच व ट्रायल में पूरा सहयोग दिया। हालांकि केवल समय पर सरेंडर करना जमानत मिलने का स्वतः आधार नहीं बनता।

    अब इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में अदालत की कार्यवाही, आरोप तय होने की प्रक्रिया, गवाहों की गवाही और वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की अपेक्षित समय-सीमा के अनुसार आगे बढ़ती है तो अगले वर्ष जनवरी तक इस बहुचर्चित मामले में फैसला आने की संभावना जताई जा रही है।

  • बॉलीवुड गलियारों के कथित सीक्रेट रिलेशनशिप पर नया खुलासा, इंटरव्यू के इंतजार के दौरान वैनिटी से बाहर निकली थीं अभिनेत्री।

    बॉलीवुड गलियारों के कथित सीक्रेट रिलेशनशिप पर नया खुलासा, इंटरव्यू के इंतजार के दौरान वैनिटी से बाहर निकली थीं अभिनेत्री।

    नई दिल्ली। बॉलीवुड उद्योग में सितारों के व्यक्तिगत जीवन और आपसी संबंधों को लेकर चर्चाएं अक्सर सुर्खियों में बनी रहती हैं। इसी क्रम में अभिनेता सनी देओल और अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया के कथित संबंधों को लेकर एक बार फिर नई चर्चा शुरू हो गई है। फिल्म उद्योग में दशकों से चल रही इन अफवाहों के बीच वरिष्ठ फिल्म पत्रकार ज्योति वेंकटेश ने एक पुराने वाकये का जिक्र करते हुए इस विषय पर बड़ा दावा किया है, जिससे सिनेमा जगत के गलियारों में पुरानी यादें और अटकलें फिर से ताजा हो गई हैं।

    वरिष्ठ पत्रकार ने एक हालिया साक्षात्कार में दावा किया कि फिल्म उद्योग में कई ऐसे संबंध होते हैं, जिनकी जानकारी लगभग सभी को होती है लेकिन उन पर सार्वजनिक रूप से कम ही बात की जाती है। अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि सालों पहले वह अभिनेता सनी देओल का साक्षात्कार लेने के लिए मुंबई स्थित प्रसिद्ध कमालिस्तान स्टूडियो पहुंचे थे। जब वे निर्धारित बातचीत के लिए अभिनेता की वैनिटी वैन की ओर बढ़े, तो वहां मौजूद निजी कर्मचारियों ने उन्हें रोक दिया और थोड़ा इंतजार करने का अनुरोध किया।

    पत्रकार के अनुसार, लगभग आधे घंटे के लंबे इंतजार के बाद अभिनेता स्वयं वैनिटी वैन से बाहर आए और विलंब के लिए शिष्टाचारपूर्वक खेद व्यक्त किया। हालांकि, साक्षात्कार शुरू होने से ठीक पहले जो दृश्य देखने को मिला, वह काफी चौंकाने वाला था। पत्रकार ने दावा किया कि उसी वैनिटी वैन का दरवाजा दोबारा खुला और उसमें से प्रसिद्ध अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया बाहर निकलीं। अभिनेत्री ने वहां मौजूद पत्रकार को देखकर औपचारिक अभिवादन किया और फिर वहां से चली गईं, जिसके बाद साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू हो सकी।

    इस पूरी घटना के बाद जब पत्रकार ने वैनिटी वैन के भीतर जाकर अभिनेता से मुलाकात की, तो माहौल को सहज बनाने का प्रयास किया गया। पत्रकार का कहना है कि अभिनेता ने इस मुलाकात को पूरी तरह व्यावसायिक बताते हुए स्पष्ट किया कि वे दोनों किसी आगामी प्रोजेक्ट की पटकथा पर चर्चा कर रहे थे। हालांकि, इस घटना के बाद से ही दोनों कलाकारों के बीच के समीकरणों को लेकर उद्योग के भीतर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे थे, जो समय-समय पर मीडिया की सुर्खियों का हिस्सा बनते रहे हैं।

    बॉलीवुड के इतिहास में ऐसे कई किस्से दर्ज हैं जो पर्दे के पीछे की कहानियों को सामने लाते हैं। दोनों कलाकारों ने हमेशा अपने निजी जीवन को मीडिया की चकाचौंध से दूर रखने की कोशिश की है और इन दावों पर कभी सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, दशकों पुराने इस वाकये के सार्वजनिक मंच पर आने के बाद एक बार फिर मनोरंजन जगत में दोनों के रिश्तों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

  • सूर्य ग्रहण के बाद स्नान पूजा और दान का क्या है महत्व जानिए कब जरूरी है और कब नहीं लागू होता यह नियम

    सूर्य ग्रहण के बाद स्नान पूजा और दान का क्या है महत्व जानिए कब जरूरी है और कब नहीं लागू होता यह नियम


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं बल्कि गहरी धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक महत्व से जुड़ा अवसर माना जाता है। ग्रहण के दौरान और उसके समाप्त होने के बाद कई परंपराओं का पालन किया जाता है जिनमें स्नान पूजा और दान का विशेष महत्व बताया गया है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के पीछे धार्मिक मान्यताएं और आध्यात्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि सूर्य ग्रहण समाप्त होते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान कर भगवान का स्मरण करते हैं और अपने दिन की शुरुआत शुभ कार्यों से करते हैं।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। ऐसे में ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना शारीरिक और मानसिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि स्नान करने से व्यक्ति स्वयं को पवित्र बनाकर दोबारा पूजा पाठ और धार्मिक कार्यों के योग्य बनाता है। यह परंपरा केवल बाहरी स्वच्छता तक सीमित नहीं बल्कि मन और विचारों की पवित्रता का भी संदेश देती है। हालांकि इस मान्यता का वैज्ञानिक रूप से कोई निश्चित प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इसे मुख्य रूप से धार्मिक आस्था के रूप में ही देखा जाता है।

    स्नान के बाद भगवान की पूजा करने की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है। श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं दीप प्रज्वलित करते हैं मंत्र जाप करते हैं और अपने इष्ट देव की आराधना करते हैं। ऐसा विश्वास किया जाता है कि ग्रहण के बाद किया गया ईश्वर का स्मरण मन को शांति प्रदान करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। कई लोग इस अवसर पर गायत्री मंत्र आदित्य हृदय स्तोत्र और सूर्य मंत्रों का जाप भी करते हैं ताकि जीवन में सुख समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना पूरी हो सके।

    ग्रहण समाप्त होने के बाद दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक ग्रंथों में अन्न वस्त्र फल दक्षिणा और जरूरतमंदों की सहायता को पुण्यदायी माना गया है। यह भी कहा जाता है कि अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान व्यक्ति के भीतर सेवा और परोपकार की भावना को मजबूत करता है। धर्म शास्त्रों में दान को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी प्रतीक माना गया है।

    सूर्य ग्रहण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी रहता है कि यदि ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई ही नहीं दे तो क्या वहां भी ग्रहण के सभी नियम लागू होते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस स्थान पर ग्रहण दिखाई नहीं देता वहां सामान्यतः सूतक काल मान्य नहीं माना जाता। ऐसे में ग्रहण के बाद स्नान करना अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं माना जाता। फिर भी अनेक लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और व्यक्तिगत आस्था के अनुसार स्नान पूजा और दान जैसे कार्य करते हैं।

    ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रहण के बाद स्नान करने की परंपरा नई सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक है। उनका कहना है कि इससे व्यक्ति अपने मन में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लेता है। यदि ग्रहण आपके क्षेत्र में दिखाई नहीं देता तो धार्मिक नियमों का पालन पूरी तरह आपकी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।

    धार्मिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण बात यह मानी जाती है कि ग्रहण के बाद भगवान का स्मरण किया जाए सकारात्मक विचार अपनाए जाएं और जीवन में सदाचार सेवा तथा आध्यात्मिकता को स्थान दिया जाए। यही ग्रहण की परंपराओं का वास्तविक संदेश भी माना जाता है।

  • एमपी सरकार का बड़ा फैसला, बिल्डिंग परमिशन के लिए विभागों के चक्कर खत्म, डिजिटल सिस्टम लागू

    एमपी सरकार का बड़ा फैसला, बिल्डिंग परमिशन के लिए विभागों के चक्कर खत्म, डिजिटल सिस्टम लागू


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण की अनुमति प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब घर, व्यावसायिक भवन या अन्य निर्माण कार्यों के लिए बिल्डिंग परमिशन लेते समय लोगों को कई विभागों से अलग-अलग अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लाने की बाध्यता नहीं रहेगी। सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया है, जिससे आवेदन से लेकर अनुमति जारी होने तक सभी चरण ऑनलाइन पूरे होंगे और केवल डिजिटल दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी आदेश के अनुसार नई व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों, निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को अनावश्यक औपचारिकताओं और विभागीय चक्करों से राहत देना है।

    नई व्यवस्था के तहत सहकारिता विभाग, गृह निर्माण सहकारी समितियों, नजूल विभाग और बिजली विभाग से विभिन्न प्रकार की एनओसी लेने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी अब आवेदक को स्वयं एनओसी लाने की जरूरत नहीं होगी।

    यदि किसी मामले में संबंधित विभाग की राय आवश्यक होगी तो भवन अनुमति देने वाला सक्षम प्राधिकारी आवेदन प्राप्त होने के सात दिन के भीतर संबंधित विभाग को प्रकरण भेजेगा। संबंधित विभाग को 21 दिनों के भीतर अपनी आपत्ति या अनापत्ति दर्ज करनी होगी। यदि निर्धारित समय सीमा में कोई जवाब नहीं मिलता है तो भवन अनुमति की प्रक्रिया बिना विलंब आगे बढ़ाई जा सकेगी। इससे फाइलों के लंबित रहने और अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी।

    हालांकि सरकार ने कुछ मामलों में एनओसी की अनिवार्यता बरकरार रखी है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण और हेरिटेज क्षेत्रों से जुड़े मामलों में एनओसी केवल तभी आवश्यक होगी जब ऑनलाइन जीआईएस आधारित जांच में संबंधित भूखंड प्रतिबंधित या संवेदनशील क्षेत्र में पाया जाएगा। सामान्य मामलों में इन विभागों से अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

    सरकार ने पर्यावरण और अग्निशमन संबंधी नियमों को भी स्पष्ट किया है। केवल निर्धारित सीमा से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक होगी। इसी तरह वृक्ष कटाई की अनुमति भी केवल उन्हीं मामलों में ली जाएगी जहां वास्तव में पेड़ों को हटाने की आवश्यकता होगी। अग्निशमन विभाग की अनापत्ति राष्ट्रीय भवन संहिता के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार लागू रहेगी।

    राज्य सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया तेज होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। डिजिटल प्रक्रिया लागू होने से दस्तावेजों की जांच, स्वीकृति और रिकॉर्ड प्रबंधन भी अधिक प्रभावी होगा। इससे निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ शहरी विकास परियोजनाओं में भी तेजी आने की उम्मीद है।

  • ग्लास्गो में गरजेंगे भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी, नीरज चोपड़ा की अगुआई में तीनों एथलीटों ने फाइनल में बनाई जगह।

    ग्लास्गो में गरजेंगे भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी, नीरज चोपड़ा की अगुआई में तीनों एथलीटों ने फाइनल में बनाई जगह।


    नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के लिए एथलेटिक्स के मैदान से बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। ग्लास्गो के प्रसिद्ध स्कॉटस्टाउन स्टेडियम में आयोजित पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के क्वालिफिकेशन राउंड में दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा की अगुआई में भारत की तीन सदस्यीय जेवलिन टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल का टिकट हासिल कर लिया है। नीरज चोपड़ा के साथ-साथ रोहित यादव और यशवीर सिंह ने भी शीर्ष-12 में जगह बनाई है, जिससे इस स्पर्धा में हिस्सा ले रहा पूरा भारतीय दल अब सीधे पदक की दौड़ में शामिल हो गया है।

    प्रतियोगिता के दौरान स्कॉटस्टाउन स्टेडियम का माहौल खिलाड़ियों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। लगभग 18 डिग्री सेल्सियस का कम तापमान और सामने से लगातार आ रही तेज हवाओं ने थ्रोअर्स की राह कठिन बना दी। विपरीत परिस्थितियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे क्वालिफिकेशन राउंड में भाग ले रहे 18 प्रतिभागियों में से एक भी एथलीट 84 मीटर के ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन मार्क को नहीं छू सका। केवल चार खिलाड़ी ही 80 मीटर की दूरी तय कर पाए, जिसके चलते प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष-12 खिलाड़ियों को अंतिम चरण के लिए चुना गया।

    पूर्व राष्ट्रमंडल खेल स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने अत्यंत संयमित रणनीति के साथ प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 79.61 मीटर की दूरी दर्ज कर क्वालिफिकेशन में पांचवां स्थान प्राप्त किया। शुरुआती प्रयासों में ही स्थान सुरक्षित हो जाने के कारण उन्होंने अपनी ऊर्जा बचाते हुए अंतिम थ्रो नहीं करने का फैसला किया। उनके साथी भारतीय एथलीट रोहित यादव ने 78.37 मीटर थ्रो के साथ नौवां और यशवीर सिंह ने 78.36 मीटर के थ्रो के साथ दसवां स्थान हासिल कर फाइनल में अपनी जगह पक्की की।

    ग्लास्गो की ठंड और कठिन परिस्थितियों के बावजूद स्टेडियम में उपस्थित दर्शकों का सबसे ज्यादा समर्थन भारतीय स्टार नीरज चोपड़ा को मिला। पीठ के निचले हिस्से में लगी चोट के कारण लंबे समय तक मैदान से दूर रहने के बाद हाल ही में प्रतिस्पर्धी खेल में वापसी करने वाले नीरज के लिए यह पड़ाव बेहद खास है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली इस सफलता से खिलाड़ी के गृहनगर हरियाणा के पानीपत जिले में स्थित खंडरा गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है और पूरे देश को अब फाइनल मुकाबले में उनसे एक और ऐतिहासिक स्वर्ण पदक की उम्मीद है।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों की बात करें तो श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने 82.84 मीटर के थ्रो के साथ क्वालिफिकेशन में शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि पेरिस ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता पाकिस्तान के अरशद नदीम 78.63 मीटर के साथ सातवें स्थान पर रहकर फाइनल में पहुंचे। वहीं पूर्व राष्ट्रमंडल चैंपियन केन्या के जूलियस येगो 13वें स्थान पर रहने के कारण प्रतियोगिता से बाहर हो गए। भारतीय दल का यह प्रदर्शन एथलेटिक्स में भारत की बढ़ती धमक को दर्शाता है और अब शुक्रवार देर रात होने वाले खिताबी मुकाबले पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी होंगी।

  • अन्न के अनादर से नाराज हो सकती हैं मां अन्नपूर्णा, जानिए भोजन परोसते समय किन वास्तु नियमों का पालन है अनिवार्य।

    अन्न के अनादर से नाराज हो सकती हैं मां अन्नपूर्णा, जानिए भोजन परोसते समय किन वास्तु नियमों का पालन है अनिवार्य।

    नई दिल्ली। हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में भोजन को केवल शरीर के पोषण का साधन नहीं माना गया है, बल्कि इसे साक्षात अन्नपूर्णा का स्वरूप और अत्यंत पवित्र माना गया है। घर में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए रसोईघर से लेकर भोजन परोसने तक कई महत्वपूर्ण वास्तु नियम बताए गए हैं। इन्हीं नियमों में से एक बेहद महत्वपूर्ण नियम थाली में रोटी परोसने के सही तरीके से जुड़ा हुआ है। अक्सर लोग जल्दबाजी या अनजाने में किसी व्यक्ति के हाथ में सीधे रोटी थमा देते हैं, जिसे वास्तु के दृष्टिकोण से अत्यंत अशुभ और दोषपूर्ण माना गया है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति चाहे वह परिवार का सदस्य हो, अतिथि हो या कोई याचक, उसके हाथ में सीधे रोटी देना अन्न का अनादर करने के समान है। मान्यता है कि इस प्रकार से भोजन देने से देवी अन्नपूर्णा और माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। हाथ में रोटी देने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और धीरे-धीरे परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, ऐसा करने से देने वाले और लेने वाले दोनों के संबंधों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा घर की बरकत समाप्त होने लगती है।

    शास्त्रों में भोजन परोसने की एक निश्चित और मर्यादित प्रक्रिया निर्धारित की गई है। भोजन हमेशा सम्मानपूर्वक साफ-सुथरी थाली या प्लेट में रखकर ही दिया जाना चाहिए। जब भी किसी को रोटी परोसनी हो, तो उसे सीधे हाथ में देने के बजाय प्लेट में ही रखना चाहिए। इसके अलावा, थाली में एक साथ तीन रोटियां परोसना भी वास्तु शास्त्र और हिंदू परंपराओं में वर्जित माना गया है। मान्यता है कि तीन संख्या को शुभ कार्यों में अनुकूल नहीं माना जाता, इसलिए थाली में हमेशा एक, दो या विषम-सम के सही संयोजन में ही रोटियां रखनी चाहिए।

    वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि अन्न का सम्मान सीधे तौर पर व्यक्ति के मानसिक तनाव और घर की सुख-शांति से जुड़ा होता है। जब हम किसी को आदरपूर्वक भोजन कराते हैं, तो उससे सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है। इसके विपरीत, अनुचित तरीके से भोजन परोसने पर घर में क्लेश और बीमारियां पनपने लगती हैं। रसोईघर में पहली रोटी गाय के लिए और अंतिम रोटी कुत्ते के लिए निकालने की परंपरा भी इसी सम्मान और वास्तु संतुलन का हिस्सा है, जिससे ग्रह दोष शांत होते हैं।

    भोजन बनाते समय और परोसते समय मन की पवित्रता भी उतनी ही आवश्यक मानी गई है। वास्तु के अनुसार यदि भोजन बनाते या परोसते समय मन में क्रोध, ईर्ष्या या चिड़चिड़ापन हो, तो उस अन्न का प्रभाव खाने वाले के विचारों पर भी पड़ता है। इसलिए, हाथ में रोटी न देने का नियम केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा वास्तु और व्यावहारिक तर्क छिपा हुआ है। इस छोटे से नियम का पालन करके घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मकता और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखा जा सकता है।

  • कोबरा से सामना, वोट का खुलासा और भ्रष्टाचार पर हमला, मध्य प्रदेश की राजनीति में दिनभर रही हलचल

    कोबरा से सामना, वोट का खुलासा और भ्रष्टाचार पर हमला, मध्य प्रदेश की राजनीति में दिनभर रही हलचल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमे तक चर्चा का माहौल बना दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छात्र जीवन का एक रोमांचक अनुभव साझा किया, जिसमें उनके हाथ पर जहरीला कोबरा लिपट गया था। दूसरी ओर दतिया उपचुनाव में मतदान करने के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने खुले तौर पर बताया कि उन्होंने भाजपा और पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया। वहीं गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने सार्वजनिक मंच से खनिज विभाग पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगाकर अपनी ही सरकार के अधिकारियों पर सवाल खड़े कर दिए।

    उज्जैन में बन रहे स्नेक पार्क के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने कॉलेज जीवन का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि विज्ञान महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्होंने जादू की कुछ ट्रिक्स सीखी थीं। गणेश उत्सव के एक कार्यक्रम में प्रदर्शन के लिए वे एक सांप लेकर पहुंचे और उससे जादू का खेल दिखाया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दोस्तों के कहने पर जब उन्होंने सांप को बाहर निकाला तो वह अचानक सक्रिय हो गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने सांप को मजबूती से पकड़ लिया, लेकिन वह उनके हाथ पर लिपट गया और दूसरे हाथ पर काटने की कोशिश करने लगा। बाद में जब वे सांप को वापस छोड़ने पहुंचे तो पता चला कि वह साधारण सांप नहीं बल्कि जहरीला कोबरा था और उसके विषैले दांत भी सुरक्षित थे। यह सुनकर वे भी हैरान रह गए। मुख्यमंत्री का यह अनुभव सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी आश्चर्यचकित रह गए।

    उधर दतिया विधानसभा उपचुनाव में मतदान के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने कमल के फूल के निशान पर वोट दिया है और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के पक्ष में मतदान किया है। उनके इस बयान की राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा रही। नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा की जीत का दावा भी किया। दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह बड़ी बढ़त से चुनाव जीतेंगे। अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं।

    गुना में उद्योग विभाग के एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वैध रसीद होने के बावजूद रेत लेकर जा रहे व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का प्रयास किया गया। विधायक ने कहा कि कार्रवाई असली दोषियों पर होने के बजाय आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने मंच से ही विभागीय अधिकारियों पर अवैध वसूली के आरोप लगाए और कहा कि इस संबंध में अधिकारियों से बात करने की कोशिश भी की, लेकिन उनकी बात तक नहीं सुनी गई। भाजपा विधायक के इन आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इसी बीच दतिया उपचुनाव से जुड़ा एक दिलचस्प घटनाक्रम भी सामने आया। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की एक टीम वोट मांगने के लिए ऐसे गांव पहुंच गई, जो दतिया विधानसभा क्षेत्र में आता ही नहीं था। जब कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों से भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील की तो लोगों ने बताया कि वे इस उपचुनाव के मतदाता ही नहीं हैं क्योंकि उनका गांव भांडेर विधानसभा क्षेत्र में आता है। यह सुनकर कार्यकर्ता असहज हो गए और उन्हें वहां से लौटना पड़ा।

    एक ही दिन में सामने आए इन घटनाक्रमों ने मध्य प्रदेश की राजनीति में अलग-अलग कारणों से हलचल पैदा कर दी। मुख्यमंत्री का रोचक अनुभव, चुनावी बयानबाजी, सरकारी विभागों पर भ्रष्टाचार के आरोप और चुनाव प्रचार की चूक—इन सभी ने राजनीतिक चर्चा को नया विषय दे दिया।

  • सीमा कालीरमन का बड़ा खुलासा, बोलीं- खेल का आनंद लिया, मेडल अपने आप मिल गया

    सीमा कालीरमन का बड़ा खुलासा, बोलीं- खेल का आनंद लिया, मेडल अपने आप मिल गया


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला डिस्कस थ्रो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाने वाली सीमा कालीरमन ने अपनी सफलता के पीछे का राज साझा किया है। ग्लासगो में शानदार प्रदर्शन के बाद सीमा ने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान उनका पूरा ध्यान केवल अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर था। उन्होंने बताया कि उन्होंने मेडल के बारे में बिल्कुल नहीं सोचा, बल्कि खेल का आनंद लेते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की और यही सोच उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी।

    समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में सीमा ने कहा कि पदक जीतने की खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने परिणाम की चिंता छोड़कर खेल का आनंद लेना शुरू किया है, तभी से उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया है। उनके अनुसार यदि खिलाड़ी केवल अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर ध्यान दे तो सफलता अपने आप उसके कदम चूमती है।

    सीमा ने यह भी बताया कि इस बार वह अपने चार साल के बेटे से दूर रहकर कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने आई थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि बेटे की याद उन्हें लगातार आती रही और उसका जिक्र होते ही वह भावुक हो जाती हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए पूरे फोकस के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और देश के लिए पदक जीतने में सफल रहीं।

    उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का बड़ा श्रेय अपने पति और निजी कोच रविंदर कालीरमन को दिया। सीमा ने कहा कि पिछले वर्ष एशियन चैंपियनशिप में उनके पति साथ नहीं थे, जिसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा था। लेकिन इस बार ग्लासगो में रविंदर की मौजूदगी ने उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया। उन्होंने बताया कि उनके पति ने कभी उन पर पदक जीतने का दबाव नहीं बनाया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि खेल का आनंद लो और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करो। यही सलाह उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी।

    सीमा ने कहा कि एक खिलाड़ी की सफलता केवल मैदान पर दिखाई देने वाले प्रदर्शन तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके पीछे वर्षों का संघर्ष, त्याग और कठिन मेहनत छिपी होती है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को मानसिक दबाव, आर्थिक चुनौतियों और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यदि सही समय पर सहयोग और सुविधाएं मिलें तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम और ऊंचा कर सकते हैं।

    उन्होंने सरकार से भी अपील की कि जिन युवाओं में खेलों के प्रति जुनून और प्रतिभा है, उन्हें शुरुआती स्तर से बेहतर प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। उनका मानना है कि समय पर मिला समर्थन कई खिलाड़ियों के सपनों को साकार कर सकता है और भारत को भविष्य में और अधिक अंतरराष्ट्रीय पदक दिला सकता है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के महिला डिस्कस थ्रो फाइनल में सीमा कालीरमन ने 58.65 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर कांस्य पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि न केवल उनके करियर की बड़ी सफलता है, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। उनके संघर्ष, समर्पण और सकारात्मक सोच ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर हर चुनौती को पार किया जा सकता है।