Author: bharati

  • स्किन को रखें हमेशा जवान और चमकदार जानें रोजाना की सही स्किन केयर टिप्स

    स्किन को रखें हमेशा जवान और चमकदार जानें रोजाना की सही स्किन केयर टिप्स

    नई दिल्ली । स्वस्थ और चमकदार त्वचा हर किसी की चाहत होती है लेकिन इसके लिए केवल महंगे कॉस्मेटिक उत्पादों पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। सही दिनचर्या संतुलित आहार और नियमित देखभाल से त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ और खूबसूरत बनी रह सकती है। त्वचा की देखभाल का पहला नियम है कि उसे हमेशा साफ रखें। दिन में दो बार अपनी स्किन टाइप के अनुसार हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करें ताकि धूल मिट्टी अतिरिक्त तेल और प्रदूषण से त्वचा को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।

    चेहरा धोने के बाद मॉइस्चराइजर लगाना बेहद जरूरी है। तैलीय त्वचा हो या रूखी हर प्रकार की त्वचा को नमी की आवश्यकता होती है। सही मॉइस्चराइजर त्वचा की प्राकृतिक नमी बनाए रखने में मदद करता है और उसे मुलायम बनाता है।

    धूप से बचाव भी स्किन केयर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन जरूर लगाएं। तेज धूप त्वचा पर झुर्रियां पिग्मेंटेशन और समय से पहले एजिंग की समस्या पैदा कर सकती है। हर तीन से चार घंटे में जरूरत के अनुसार सनस्क्रीन दोबारा लगाना भी लाभदायक माना जाता है।

    स्वस्थ त्वचा के लिए पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। दिनभर में आठ से दस गिलास पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और त्वचा में प्राकृतिक चमक बनी रहती है। इसके साथ ही मौसमी फल हरी सब्जियां सूखे मेवे और प्रोटीन युक्त भोजन त्वचा को भीतर से पोषण देते हैं। अधिक तला भुना जंक फूड और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए।

    अच्छी नींद भी त्वचा के लिए किसी प्राकृतिक उपचार से कम नहीं है। रोजाना सात से आठ घंटे की पर्याप्त नींद लेने से त्वचा खुद को रिपेयर करती है और चेहरा अधिक ताजा तथा चमकदार दिखाई देता है। तनाव कम रखने के लिए योग ध्यान और नियमित व्यायाम भी फायदेमंद होते हैं क्योंकि मानसिक तनाव का असर सीधे त्वचा पर दिखाई देता है।

    सप्ताह में एक या दो बार हल्का एक्सफोलिएशन करने से मृत कोशिकाएं हटती हैं और नई कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया बेहतर होती है। हालांकि बहुत अधिक स्क्रब करने से त्वचा को नुकसान भी हो सकता है इसलिए संतुलित देखभाल जरूरी है।

    यदि त्वचा पर लगातार मुंहासे दाग धब्बे एलर्जी या किसी प्रकार की गंभीर समस्या बनी रहती है तो घरेलू उपायों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प होता है। सही देखभाल नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली अपनाकर लंबे समय तक स्वस्थ और प्राकृतिक रूप से चमकदार त्वचा पाई जा सकती है।

  • भारत-जापान संबंधों को नई दिशा, रणनीतिक साझेदारी से समुद्री सुरक्षा तक कई बड़े फैसले; ताकाइची ने मजबूत सहयोग का दिया संदेश

    भारत-जापान संबंधों को नई दिशा, रणनीतिक साझेदारी से समुद्री सुरक्षा तक कई बड़े फैसले; ताकाइची ने मजबूत सहयोग का दिया संदेश

    नई दिल्ली । भारत और जापान ने बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं। नई दिल्ली में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा रणनीति को आगे बढ़ाने पर व्यापक सहमति बनी। दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षित समुद्री मार्ग और नियम-आधारित व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आपसी सहयोग लगातार मजबूत किया जाएगा।

    वार्ता के बाद जापान की प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में समान सोच रखने वाले देशों के बीच सहयोग पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। उनका कहना था कि भारत और जापान अपनी-अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग करते हुए साझा विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को भरोसे, सम्मान और दीर्घकालिक साझेदारी पर आधारित बताया।

    बैठक के दौरान रणनीतिक सहयोग को भविष्य की प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया गया। दोनों पक्षों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्र, खुला और सुरक्षित समुद्री वातावरण बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और आपसी समन्वय को बढ़ाने के लिए रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर भी सहमति बनी।

    समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों ने संयुक्त नौसैनिक गतिविधियों का विस्तार करने का निर्णय लिया। हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त अभ्यास बढ़ाने, नौसैनिक समन्वय को मजबूत करने तथा समुद्री निगरानी और परिचालन क्षमता में सहयोग बढ़ाने पर सकारात्मक चर्चा हुई। इसके साथ ही नौसेना से जुड़े रखरखाव, मरम्मत और तकनीकी सहयोग के क्षेत्रों में भी साझेदारी को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई।

    वार्ता में रक्षा उत्पादन और औद्योगिक सहयोग भी प्रमुख विषय रहा। दोनों देशों ने आधुनिक रक्षा तकनीकों, विनिर्माण क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करने की इच्छा व्यक्त की। इससे रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग के नए अवसर विकसित होने की संभावना जताई गई।

    आर्थिक सहयोग को लेकर भी दोनों पक्षों ने निवेश, औद्योगिक विकास और भविष्य की तकनीकों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों का मानना है कि मजबूत आर्थिक संबंध न केवल द्विपक्षीय व्यापार को गति देंगे बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को भी अधिक स्थिर और लचीला बनाएंगे। नवाचार, आधारभूत संरचना और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

    इस वर्ष दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दोनों नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत-जापान संबंध अब नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने साझा मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और पारस्परिक विश्वास को भविष्य की साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत बताया। दोनों देशों ने यह भी दोहराया कि क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सतत विकास के लिए उनका सहयोग आने वाले वर्षों में और अधिक व्यापक तथा प्रभावी रूप लेगा।

  • ईमेल से मिली बम धमकी के बाद ISRO परिसर में हाई अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियों का व्यापक सर्च ऑपरेशन; स्रोत की पड़ताल जारी

    ईमेल से मिली बम धमकी के बाद ISRO परिसर में हाई अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियों का व्यापक सर्च ऑपरेशन; स्रोत की पड़ताल जारी

    नई दिल्ली । बेंगलुरु स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के न्यू BEL रोड परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सतर्क कर दी गई। धमकी भरा ईमेल प्राप्त होते ही एहतियात के तौर पर पूरे परिसर को तत्काल खाली कराया गया और सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई तथा सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं पर निगरानी बढ़ा दी गई।

    सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, बम निरोधक दस्ता और अन्य सुरक्षा इकाइयों की टीमें मौके पर पहुंचीं। इसके बाद भवन और परिसर के प्रत्येक हिस्से की सावधानीपूर्वक जांच की गई। कई घंटों तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान किसी भी प्रकार का विस्फोटक, संदिग्ध सामग्री या सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली वस्तु बरामद नहीं हुई। प्रारंभिक जांच में धमकी को फर्जी माना जा रहा है, हालांकि सुरक्षा एजेंसियां मामले को पूरी गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

    अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों से जुड़ी किसी भी प्रकार की धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यही कारण है कि सूचना मिलते ही निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार परिसर को खाली कराया गया और विशेषज्ञ टीमों की निगरानी में विस्तृत तलाशी अभियान चलाया गया। जांच पूरी होने तक सुरक्षा व्यवस्था को अतिरिक्त रूप से मजबूत रखा गया।

    जांच एजेंसियां अब धमकी भरे ईमेल के स्रोत, उसकी तकनीकी जानकारी और उसे भेजने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान करने में जुटी हैं। डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ईमेल किस माध्यम से भेजा गया और इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका तो नहीं है। साइबर विशेषज्ञ भी तकनीकी जांच में सहयोग कर रहे हैं।

    हाल के समय में कई सरकारी संस्थानों, न्यायिक परिसरों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को भी इसी प्रकार के धमकी भरे ईमेल प्राप्त होने की घटनाएं सामने आई हैं। अधिकांश मामलों में तलाशी के दौरान कोई विस्फोटक नहीं मिला, लेकिन प्रत्येक सूचना पर सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ कार्रवाई कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

    इसी क्रम में एक संदिग्ध व्यक्ति को विभिन्न संस्थानों को कथित रूप से फर्जी बम धमकी वाले ईमेल भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या वर्तमान घटना का उससे कोई संबंध है या यह मामला अलग है। फिलहाल इस संबंध में विस्तृत जांच जारी है और सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।

    सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि संबंधित परिसर पूरी तरह सुरक्षित है और सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी या अफवाह पर विश्वास न करें तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। मामले की जांच पूरी होने तक सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी।

  • पहली बारिश में ही खुली करोड़ों की परियोजना की पोल, अटल भवन में जलभराव से निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल

    पहली बारिश में ही खुली करोड़ों की परियोजना की पोल, अटल भवन में जलभराव से निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल


    मध्य प्रदेश:
    की राजधानी भोपाल में हाल ही में तैयार किए गए नगर निगम के नए मुख्यालय अटल भवन की निर्माण गुणवत्ता पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस भवन में वर्षा का पानी प्रवेश कर जाने से कार्यालय परिसर के भीतर जलभराव की स्थिति बन गई। घटना के सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के पालन और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    करीब 73 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस भवन को आधुनिक सुविधाओं से लैस प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। उद्देश्य यह था कि नगर निगम की विभिन्न शाखाओं को एक ही परिसर में बेहतर सुविधाओं के साथ संचालित किया जा सके। लेकिन पहली ही बारिश के दौरान भवन के भीतर पानी पहुंचने की घटना ने इस परियोजना की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है।

    बारिश के दौरान भवन के विभिन्न हिस्सों में पानी जमा होने से कर्मचारियों और अधिकारियों को कामकाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कार्यालय के भीतर जलभराव की स्थिति बनने से यह सवाल भी उठने लगा कि क्या भवन के निर्माण में जल निकासी और वर्षा प्रबंधन से जुड़े आवश्यक मानकों का पर्याप्त ध्यान रखा गया था।

    इस घटना ने निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली के साथ-साथ परियोजना की तकनीकी निगरानी पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। आमतौर पर इस स्तर की सार्वजनिक परियोजनाओं में निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण, निरीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन की कई प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। ऐसे में पहली ही बारिश में सामने आई यह स्थिति इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए सरकारी भवन में वर्षा जल निकासी, छत की सीलिंग, ड्रेनेज नेटवर्क और जलरोधक व्यवस्था का विशेष महत्व होता है। यदि इन पहलुओं में किसी स्तर पर कमी रह जाए तो शुरुआती बारिश में ही ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए तकनीकी कारणों की विस्तृत जांच आवश्यक मानी जा रही है।

    घटना के बाद भवन की गुणवत्ता को लेकर लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। सार्वजनिक धन से निर्मित बड़ी परियोजनाओं से उच्च गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोग की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में निर्माण के तुरंत बाद सामने आई इस तरह की समस्या ने जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराता है या नहीं और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मानकों की अनदेखी पाई जाती है तो उसके लिए जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल यह घटना सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण और प्रभावी निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता को एक बार फिर प्रमुखता से सामने लेकर आई है।

  • 'एनर्जी ड्रिंक' दावों पर सख्त हुआ एफएसएसएआई, रेड बुल, स्टिंग, कैम्पा समेत कई ब्रांड्स को जारी किए नोटिस

    'एनर्जी ड्रिंक' दावों पर सख्त हुआ एफएसएसएआई, रेड बुल, स्टिंग, कैम्पा समेत कई ब्रांड्स को जारी किए नोटिस


    नई दिल्ली । भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द के उपयोग और उत्पादों पर किए जा रहे कथित भ्रामक दावों को लेकर कई प्रमुख पेय पदार्थ ब्रांड्स को नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    नियामक के अनुसार, मौजूदा खाद्य सुरक्षा कानून और संबंधित नियमों में ‘एनर्जी ड्रिंक’ श्रेणी के लिए कोई अलग मानक निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे में किसी उत्पाद को इस नाम से प्रस्तुत करना या उसकी पैकेजिंग एवं प्रचार सामग्री में ऐसे शब्दों का उपयोग करना नियामकीय जांच के दायरे में आता है। इसी आधार पर संबंधित कंपनियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

    नोटिस में यह भी कहा गया है कि उत्पादों की ब्रांडिंग और लेबलिंग के दौरान ऐसे दावों से बचना आवश्यक है, जिनसे यह संकेत मिले कि संबंधित पेय शरीर या मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाता है, ऊर्जा स्तर में वृद्धि करता है, ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है या सामान्य कमजोरी दूर करने जैसे चिकित्सीय अथवा कार्यात्मक लाभ प्रदान करता है। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत इस प्रकार के दावों को स्वीकृति प्राप्त नहीं है।

    खाद्य नियामक का कहना है कि उत्पादों की पैकेजिंग, विज्ञापन और प्रचार सामग्री उपभोक्ताओं को स्पष्ट, तथ्यात्मक और नियमों के अनुरूप जानकारी उपलब्ध कराए। यदि किसी उत्पाद के बारे में ऐसे दावे किए जाते हैं जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, तो उन्हें भ्रामक माना जा सकता है। इसी कारण संबंधित कंपनियों से जवाब तलब किया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य एवं पेय उद्योग में ब्रांडिंग और मार्केटिंग के दौरान किए जाने वाले दावों की पारदर्शिता उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। किसी भी उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और उसके संभावित प्रभावों के बारे में सही जानकारी उपलब्ध होना उपभोक्ताओं के सूचित निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    हाल के समय में खाद्य उत्पादों की लेबलिंग, प्रचार और गुणवत्ता को लेकर नियामकीय निगरानी लगातार बढ़ी है। इससे पहले भी विभिन्न खाद्य कारोबार संचालकों को उत्पादों के दावों, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और उपभोक्ता शिकायतों से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन के मामलों में नोटिस जारी किए जा चुके हैं। साथ ही उन्हें निर्धारित नियमों के अनुरूप आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए थे।

    विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई का उद्देश्य उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाना, उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करना और यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपलब्ध खाद्य एवं पेय उत्पाद निर्धारित कानूनी मानकों और लेबलिंग नियमों का पूरी तरह पालन करें। इससे भविष्य में उत्पादों की प्रस्तुति और विपणन के तौर-तरीकों में भी अधिक जवाबदेही देखने को मिल सकती है।

  • क्राइम सीन पर अब तुरंत फॉरेंसिक जांच, गुजरात की 47 हाईटेक मोबाइल वैन से मजबूत होगी जांच और दोषसिद्धि की प्रक्रिया

    क्राइम सीन पर अब तुरंत फॉरेंसिक जांच, गुजरात की 47 हाईटेक मोबाइल वैन से मजबूत होगी जांच और दोषसिद्धि की प्रक्रिया

    गांधीनगर । गुजरात में अपराध जांच को अधिक वैज्ञानिक, सटीक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्यभर में 47 मोबाइल फॉरेंसिक वैन सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इन अत्याधुनिक वाहनों की मदद से पुलिस को घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक परीक्षण, साक्ष्यों के संरक्षण और शुरुआती फॉरेंसिक विश्लेषण की सुविधा मिल रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण साक्ष्य समय रहते सुरक्षित किए जा सकें और उनके साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ या दूषित होने की संभावना न्यूनतम रहे।

    राज्य में फॉरेंसिक विज्ञान के विस्तार के लिए पिछले वर्षों में विशेष प्रयास किए गए हैं। इसी दिशा में फॉरेंसिक शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए स्थापित संस्थान को अब केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिल चुका है। इसके साथ ही अपराध जांच में वैज्ञानिक तरीकों के अधिकतम उपयोग पर लगातार जोर दिया गया है, जिससे पुलिस जांच की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

    नई आपराधिक व्यवस्था लागू होने के बाद वैज्ञानिक जांच की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। विशेष रूप से ऐसे मामलों में, जिनमें सात वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य बनाए जाने के बाद घटनास्थल पर तत्काल विशेषज्ञ सहायता की आवश्यकता बढ़ी है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मोबाइल फॉरेंसिक वैन की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।

    पिछले दो वर्षों के दौरान ये मोबाइल फॉरेंसिक वैन राज्यभर में हजारों अपराध स्थलों पर पहुंचकर जांच एजेंसियों की सहायता कर चुकी हैं। हत्या, यौन अपराध, पॉक्सो, लूट, चोरी, आगजनी, मादक पदार्थों से जुड़े मामलों और अन्य गंभीर अपराधों में घटनास्थल पर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने का कार्य किया गया। इसके अलावा संदिग्ध मौत, हिरासत में मृत्यु, दुर्घटनाओं और अन्य संवेदनशील मामलों में भी इन वैनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    इन विशेष वाहनों में आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और परीक्षण किटों की व्यापक व्यवस्था की गई है। इनमें डीएनए और जैविक नमूनों की जांच, यौन अपराधों से जुड़े साक्ष्यों का संग्रह, मादक पदार्थों और विस्फोटक पदार्थों की प्रारंभिक पहचान, आगजनी से संबंधित विश्लेषण तथा गन शॉट अवशेषों की जांच के लिए आवश्यक किट उपलब्ध हैं। इसके साथ ही पैरों और टायर के निशानों के संरक्षण तथा अन्य सूक्ष्म साक्ष्यों के संग्रह की भी सुविधा मौजूद है।

    मोबाइल फॉरेंसिक वैन में उच्च क्षमता वाले कैमरे, स्टीरियो माइक्रोस्कोप, जीपीएस आधारित बॉडी कैमरा, लैपटॉप, प्रिंटर, मिनी रेफ्रिजरेटर, एलईडी डिस्प्ले, उच्च तीव्रता वाली फॉरेंसिक लाइट और अन्य आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। इनकी सहायता से घटनास्थल पर रक्त के धब्बों, फिंगरप्रिंट, बाल, फाइबर, मिट्टी, कांच के टुकड़ों, जैविक नमूनों और अन्य सूक्ष्म साक्ष्यों की प्रारंभिक जांच और सुरक्षित संग्रहण किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल फॉरेंसिक वैन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अपराध स्थल पर तुरंत वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध हो जाती है, जिससे महत्वपूर्ण साक्ष्यों के नष्ट होने या दूषित होने की आशंका काफी कम हो जाती है। विशेषकर यौन अपराध और पॉक्सो जैसे मामलों में समय पर जैविक साक्ष्य एकत्र करना जांच की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के व्यापक उपयोग से गुजरात में अपराध जांच की कार्यप्रणाली अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बन रही है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया को भी मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है।

  • 5 से 12 साल की उम्र में सही पोषण है सबसे बड़ी पूंजी, संतुलित आहार से मिलेगा तेज दिमाग और मजबूत शरीर

    5 से 12 साल की उम्र में सही पोषण है सबसे बड़ी पूंजी, संतुलित आहार से मिलेगा तेज दिमाग और मजबूत शरीर

    नई दिल्ली । पांच से बारह वर्ष की आयु बच्चों के संपूर्ण विकास का सबसे महत्वपूर्ण दौर माना जाता है। इसी उम्र में शरीर तेजी से बढ़ता है, मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती हैं तथा मस्तिष्क नई चीजों को सीखने और समझने की क्षमता विकसित करता है। ऐसे में संतुलित और पोषणयुक्त आहार बच्चों के वर्तमान स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके भविष्य की सेहत की भी मजबूत नींव तैयार करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों की दैनिक डाइट में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल होना चाहिए। प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं के निर्माण, मांसपेशियों के विकास और ऊतकों की मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दाल, दूध, दही, पनीर, अंडा, सोया, चना और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ नियमित रूप से देने से बच्चों की शारीरिक वृद्धि बेहतर होती है और उनकी ताकत भी बढ़ती है।

    हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी भी बेहद आवश्यक हैं। बढ़ती उम्र में हड्डियों का विकास तेज गति से होता है, इसलिए दूध, दही, पनीर, रागी और अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को भोजन का हिस्सा बनाना चाहिए। साथ ही नियमित रूप से कुछ समय धूप में बिताने से शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन डी प्राप्त करने में मदद मिलती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं।

    फल और हरी सब्जियां बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनमें मौजूद विटामिन, खनिज और फाइबर शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं। रंग-बिरंगे फल और विभिन्न प्रकार की सब्जियां खाने वाले बच्चों में संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम रहता है और उनका मानसिक विकास भी बेहतर माना जाता है।

    ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति के लिए साबुत अनाज को भोजन में शामिल करना लाभदायक होता है। गेहूं, ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और मल्टीग्रेन खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे बच्चे लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं और पढ़ाई या अन्य गतिविधियों के दौरान उनकी एकाग्रता बनी रहती है। इसके विपरीत अत्यधिक रिफाइंड आटे और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना बेहतर माना जाता है।

    दिमाग के स्वस्थ विकास के लिए हेल्दी फैट भी जरूरी है। बादाम, अखरोट, मूंगफली और विभिन्न बीजों में मौजूद पोषक तत्व याददाश्त, एकाग्रता और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं। इन्हें सीमित मात्रा में नियमित रूप से आहार में शामिल किया जा सकता है।

    पर्याप्त पानी पीना भी बच्चों के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पानी शरीर में तरल संतुलन बनाए रखने, पाचन प्रक्रिया को बेहतर करने और शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है। वहीं अत्यधिक मीठे पेय और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि इनके अधिक उपयोग से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बचपन से ही बच्चों में संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ खान-पान की आदतें विकसित की जाएं तो उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। यही आदतें आगे चलकर उन्हें स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान जीवन की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करती हैं।

  • HDFC बैंक डेबिट कार्ड यूजर्स के लिए बड़ी राहत, स्मार्ट इस्तेमाल से हर महीने हजारों रुपये तक की बचत का मौका

    HDFC बैंक डेबिट कार्ड यूजर्स के लिए बड़ी राहत, स्मार्ट इस्तेमाल से हर महीने हजारों रुपये तक की बचत का मौका

    नई दिल्ली । डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दौर में डेबिट कार्ड केवल नकदी निकालने का साधन नहीं रह गया है। यदि ग्राहक उपलब्ध सुविधाओं और ऑफर्स का सही तरीके से उपयोग करें तो रोजमर्रा के खर्चों में उल्लेखनीय बचत की जा सकती है। एचडीएफसी बैंक अपने डेबिट कार्ड धारकों के लिए कई ऐसे लाभ उपलब्ध कराता है, जिनकी मदद से ऑनलाइन खरीदारी, यात्रा बुकिंग और नियमित बिल भुगतान पर अतिरिक्त फायदा मिल सकता है।

    बैंक की डिजिटल भुगतान सेवाओं का उपयोग करने वाले ग्राहकों के लिए विशेष कैशबैक और रिवॉर्ड ऑफर्स उपलब्ध हैं। डेबिट कार्ड को डिजिटल वॉलेट से लिंक कर भुगतान करने पर पात्र ग्राहकों को निर्धारित शर्तों के अनुसार कैशबैक का लाभ मिल सकता है। इससे डिजिटल ट्रांजैक्शन न केवल आसान बनते हैं, बल्कि खर्च का कुछ हिस्सा भी वापस मिलने की संभावना रहती है।

    यात्रा और ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले ग्राहकों के लिए भी कई आकर्षक ऑफर्स उपलब्ध हैं। फ्लाइट, होटल और बस टिकट की बुकिंग के साथ-साथ प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खरीदारी करने पर भी कैशबैक या अन्य लाभ मिल सकते हैं। ऐसे ऑफर्स का लाभ उठाकर ग्राहक अपने मासिक बजट पर पड़ने वाले खर्च को कम कर सकते हैं।

    कॉन्टैक्टलेस डेबिट कार्ड सुविधा भी ग्राहकों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। ‘टैप टू पे’ तकनीक के जरिए बिना कार्ड स्वाइप किए तेज और सुरक्षित भुगतान किया जा सकता है। पात्र लेनदेन पर कैशबैक जैसे लाभ भी उपलब्ध हो सकते हैं। यह सुविधा विशेष रूप से किराना, रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप और अन्य दैनिक भुगतान के दौरान समय बचाने के साथ अतिरिक्त बचत का अवसर भी देती है।

    नियमित बिलों के लिए ऑटो-पेमेंट सुविधा अपनाने वाले ग्राहकों को भी निर्धारित शर्तों के अनुसार अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। बिजली, मोबाइल, गैस, इंटरनेट और अन्य आवश्यक सेवाओं के बिल समय पर स्वतः जमा होने से लेट फीस से बचाव होता है। इसके साथ पात्र ग्राहकों को कैशबैक या अन्य प्रोत्साहन का लाभ भी मिल सकता है।

    वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग उत्पादों के साथ मिलने वाले ऑफर्स का लाभ तभी अधिक मिलता है, जब ग्राहक उनकी शर्तों और पात्रता को समझकर उनका उपयोग करें। अनावश्यक खर्च करने के बजाय आवश्यक खरीदारी और नियमित भुगतान में इन सुविधाओं का इस्तेमाल करने से मासिक बजट पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

    ग्राहकों को किसी भी ऑफर का लाभ लेने से पहले उसकी वैधता, न्यूनतम लेनदेन राशि, पात्रता और अन्य नियमों की जानकारी अवश्य प्राप्त करनी चाहिए। समय-समय पर बैंक विभिन्न ऑफर्स में बदलाव भी करते हैं, इसलिए अपडेट जानकारी के आधार पर ही ट्रांजैक्शन करना बेहतर माना जाता है। सही योजना और समझदारी के साथ डेबिट कार्ड का उपयोग करने पर डिजिटल भुगतान अधिक सुविधाजनक होने के साथ बचत का प्रभावी माध्यम भी बन सकता है।

  • 'गेम बदलने' के दावे के साथ मैदान में उतरे ओवैसी, मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस से सपा-कांग्रेस की बढ़ी चिंता, बीजेपी भी रख रही पैनी नजर

    'गेम बदलने' के दावे के साथ मैदान में उतरे ओवैसी, मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस से सपा-कांग्रेस की बढ़ी चिंता, बीजेपी भी रख रही पैनी नजर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में विभिन्न जिलों के दौरों और लगातार जनसभाओं के जरिए उन्होंने यह संकेत दिया है कि उनकी पार्टी इस बार पहले की तुलना में अधिक संगठित और आक्रामक रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। इसी क्रम में उनके ‘गेम बदलने’ वाले दावे ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

    ओवैसी ने मुस्लिम बहुल और सामाजिक रूप से प्रभावशाली मानी जाने वाली विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस करने की रणनीति बनाई है। पार्टी का कहना है कि वह प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में संगठन को मजबूत कर रही है और स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। चुनावी सभाओं के माध्यम से एआईएमआईएम खुद को एक वैकल्पिक राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है।

    हालांकि उत्तर प्रदेश में अब तक पार्टी को विधानसभा चुनावों में कोई सीट हासिल नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कई सीटों पर सीमित वोटों का अंतर भी चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में यदि एआईएमआईएम कुछ क्षेत्रों में उल्लेखनीय वोट हासिल करती है तो इसका असर उन दलों पर पड़ सकता है, जिनका पारंपरिक समर्थन आधार अल्पसंख्यक मतदाता रहे हैं।

    प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टियां लंबे समय से मुस्लिम मतदाताओं के बड़े हिस्से को अपने साथ बनाए रखने का प्रयास करती रही हैं। ऐसे में एआईएमआईएम की सक्रियता विपक्षी दलों के लिए नई चुनौती के रूप में देखी जा रही है। कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि विपक्षी मतों का बिखराव होता है तो इसका सीधा असर कई करीबी मुकाबलों वाली सीटों पर दिखाई दे सकता है।

    दूसरी ओर, एआईएमआईएम का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी दल को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि अपने राजनीतिक आधार का विस्तार करना और उन वर्गों की आवाज को मजबूती देना है, जिन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला। पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह प्रदेश की राजनीति में दीर्घकालिक भूमिका निभाने के इरादे से चुनाव लड़ रही है।

    चुनावी तैयारियों के बीच संभावित राजनीतिक गठबंधनों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। अलग-अलग क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल की संभावनाओं पर समय-समय पर अटकलें लगती रही हैं, हालांकि फिलहाल किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है। राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार चुनाव नजदीक आने पर नए समीकरण बनने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव केवल सीटों की संख्या का मुकाबला नहीं होता, बल्कि सामाजिक समीकरण, स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और मतों के ध्रुवीकरण जैसे कई कारक परिणाम तय करते हैं। ऐसे में एआईएमआईएम का प्रदर्शन भले सीटों में न बदले, लेकिन कई निर्वाचन क्षेत्रों में उसका प्रभाव चुनावी तस्वीर को प्रभावित कर सकता है।

    आने वाले महीनों में जैसे-जैसे चुनावी गतिविधियां तेज होंगी, विभिन्न दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देंगे। ऐसे माहौल में ओवैसी की सक्रियता और उनकी पार्टी की चुनावी योजना उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनावी मैदान में यह रणनीति वास्तविक जनसमर्थन में कितनी बदल पाती है और प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों पर इसका कितना असर पड़ता है।

  • किशोर कुमार के बेटे से लेकर अपनी अलग पहचान तक, अमित कुमार ने सुरों से रचा सुनहरा इतिहास; जन्मदिन पर खास कहानी

    किशोर कुमार के बेटे से लेकर अपनी अलग पहचान तक, अमित कुमार ने सुरों से रचा सुनहरा इतिहास; जन्मदिन पर खास कहानी

    नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत की दुनिया में अमित कुमार का नाम उन चुनिंदा गायकों में लिया जाता है, जिन्होंने पारिवारिक विरासत से आगे बढ़कर अपनी अलग पहचान बनाई। अपनी मधुर आवाज, सहज गायकी और भावपूर्ण प्रस्तुति के दम पर उन्होंने 1980 के दशक में एक ऐसी जगह बनाई, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच विशेष महत्व रखती है। 3 जुलाई 1952 को कोलकाता में जन्मे अमित कुमार का जीवन संगीत, अभिनय और रचनात्मकता से भरपूर रहा।

    अमित कुमार के पिता महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार तथा मां प्रसिद्ध अभिनेत्री और गायिका रूमा गुहा ठाकुरता थीं। ऐसे संगीतपूर्ण वातावरण में पले-बढ़े अमित का रुझान बचपन से ही गायन और अभिनय की ओर था। कोलकाता में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी प्रस्तुति को काफी सराहना मिली और उनकी प्रतिभा धीरे-धीरे फिल्म जगत का ध्यान आकर्षित करने लगी।

    फिल्मी दुनिया में उनका शुरुआती सफर अभिनय से शुरू हुआ। कम उम्र में उन्होंने अपने पिता के निर्देशन वाली फिल्म में अभिनय किया और इसके बाद बाल कलाकार के रूप में अपना पहला गीत भी रिकॉर्ड किया। हालांकि पार्श्वगायक के रूप में पहचान बनाने का सफर आसान नहीं था। शुरुआती वर्षों में उन्होंने लगातार अभ्यास किया और अपनी गायकी को निखारने पर पूरा ध्यान दिया।

    उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्हें संगीतकार आरडी बर्मन के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। उस समय वह बेहद घबराए हुए थे, लेकिन उनकी प्रस्तुति ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। यही अवसर आगे चलकर उनके संगीत सफर की मजबूत नींव बना और उन्हें बड़े संगीतकारों के साथ काम करने का अवसर मिला।

    साल 1981 में एक लोकप्रिय फिल्म के गीत ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई। इसके बाद उनकी आवाज कई युवा अभिनेताओं की पहचान बन गई। रोमांटिक, भावनात्मक और ऊर्जावान गीतों में उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब पसंद किया। 1980 के दशक में उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गीत गाकर खुद को उस दौर के सबसे लोकप्रिय पार्श्वगायकों में स्थापित कर लिया।

    उनके करियर का एक ऐतिहासिक क्षण वह भी रहा जब प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक की दौड़ में उनका मुकाबला अपने ही पिता किशोर कुमार से हुआ। पुरस्कार मिलने के बाद पिता और पुत्र का वह भावनात्मक पल भारतीय फिल्म संगीत के सबसे यादगार क्षणों में गिना जाता है। यह उपलब्धि अमित कुमार के स्वतंत्र और सफल करियर की बड़ी पहचान बन गई।

    पिता किशोर कुमार के निधन के बाद उन्होंने उनकी अधूरी फिल्म को पूरा करने की जिम्मेदारी निभाई। बाद में अपने मार्गदर्शक आरडी बर्मन के निधन के पश्चात उन्होंने धीरे-धीरे पार्श्वगायन से दूरी बनाई और स्वतंत्र संगीत, लाइव कॉन्सर्ट तथा अपने संगीत प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित किया। आज भी अमित कुमार की आवाज और उनके गीत भारतीय फिल्म संगीत की अमूल्य धरोहर माने जाते हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि विरासत प्रेरणा दे सकती है, लेकिन स्थायी पहचान केवल प्रतिभा, मेहनत और समर्पण से ही बनती है।