Author: bharati

  • Womens Asia Cup : श्रीलंका की बड़ी जीत, UAE को 9 विकेट से हराया… आज भारत का थाइलैंड से मुकाबला

    Womens Asia Cup : श्रीलंका की बड़ी जीत, UAE को 9 विकेट से हराया… आज भारत का थाइलैंड से मुकाबला


    दुबई।
    विमेंस एशिया कप 2026 (Womens Asia Cup 2026) का आगाज हो गया है। इस बार टूर्नामेंट की मेजबानी यूएई (UAE) कर रहा है। अभी तक खेले गए दो मुकाबलों में थाइलैंड (Thailand) और श्रीलंका (Sri Lanka) ने जीत दर्ज की है। थाइलैंड ने अपने पहले मुकाबले में हॉन्ग-कॉन्ग को हराया था, जबकि श्रीलंका ने मेजबान यूएई को 9 विकेट से धूल चटाई। यह श्रीलंका विमेंस टीम (Sri Lanka Women’s Team) की टी20 क्रिकेट में सबसे बड़ी जीत है। यूएई के खिलाफ उन्होंने मुकाबले महज 7.5 ओवर में ही खत्म कर दिया। उन्हें जीत के लिए 80 रनों का मामूली टारगेट मिला था, जिसे कप्तान चमारी अट्टापट्टू की 48 रनों की तूफानी पारी के दम पर उन्होंने आसानी से हासिल कर लिया। आज हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम इंडिया अपने अभियान का आगाज थाइलैंड के खिलाफ करने जा रही है। भारत इस टूर्नामेंट में बतौर फेवरेट उतरेगी।

    बता दें, विमेंस एशिया कप में इस बार कुल 8 टीमें हिस्सा ले रहीं हैं, जिन्हें 4-4 के दो ग्रुप में बांटा गया है।
    ग्रुप-ए- भारत, पाकिस्तान, थाइलैंड और हॉन्ग-कॉन्ग जैसी टीमें हैं।
    ग्रुप-बी- श्रीलंका, बांग्लादेश, यूएई और इंडोशनेशिया है।

    ग्रुप स्टेज में टॉप-2 में रहने वाली टीमों को सेमीफाइनल का टिकट मिलेगा। सेमीफाइनल 10 और 11 सितंबर को दुबई में खेले जाएंगे, जबकि खिताबी मुकाबला इसी मैदान पर 13 सितंबर को आयोजित होगा।

    वुमेंस एशिया कप का 10वां एडिशन है। पिछली बार इस टूर्नामेंट को श्रीलंका ने अपने घर पर जीता था। फाइनल में उन्होंने 7 बार की चैंपियन टीम इंडिया को हराया था। भारत इस टूर्नामेंट में जरूरत उनसे बदला लेना चाहेगा।

    ग्रुप-ए का पहला मैच थाइलैंड और हॉन्ग-कॉन्ग के बीच खेला गया था। इस मैच में पहले बैटिंग करते हुए थाइलैंड की टीम ने 120 रन बोर्ड पर लगाए थे, जिसके जवाब में हॉन्ग-कॉन्ग की विमेंस टीम 114 रन बना पाई थी। थाइलैंड ने यह मैच 6 रनों के अंतर से जीता। आज हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम इंडिया थाइलैंड के खिलाफ अपने अभियान का आगाज करेगी। भारत-पाकिस्तान बहुप्रतीक्षित मैच 5 सितंबर को खेला जाएगा।

    श्रीलंका ने यूएई के खिलाफ गेंदों के मामले में अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए विमेंस एशिया कप का आगाज किया। श्रीलंका ने अपना पहला मैच 73 गेंदें शेष रहते जीता। यूएई ने पहले बैटिंग करते 79 रन ही बोर्ड पर लगाए, उनकी पूरी टीम 19.5 ओवर में सिमट गई। श्रीलंका ने इस टारगेट को 7.5 ओवर में 1 विकेट के नुकसान पर आसानी से चेज कर लिया। चमीरा अट्टापट्टू ने 48 रनों की तूफानी पारी खेली।

  • UP: वाराणसी को मिलेगी बड़ी सौगात…200 करोड़ से बनेगा प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल

    UP: वाराणसी को मिलेगी बड़ी सौगात…200 करोड़ से बनेगा प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल


    वाराणसी।
    वाराणसी (Varanasi) में प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल (International Cruise Terminal) बनाया जाएगा। आईडब्ल्यूएआई की ओर से निर्माण कराया जाएगा। नगर निगम सामनेघाट में 2 एकड़ जमीन उपलब्ध कराएगा। इस क्रूज टर्मिनल (Cruise Terminal) पर दुनिया भर से बड़े जहाजों और मालवाहकों का ठहराव होगा। पर्यटन के साथ जल परिवहन के जरिये हल्दिया तक की यात्रा होगी। रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। निर्माण में 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    आईडब्ल्यूएआई के निदेशक संजीव कुमार ने बताया कि जल्द ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सामनेघाट में बनने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल में एक समय में 10,000 यात्रियों की क्षमता होगी। इमिग्रेशन काउंटर, कस्टम्स काउंटर, डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनर, सुरक्षा जांच काउंटर, सीसीटीवी निगरानी, पब्लिक एड्रेस सिस्टम होगा।

    यात्रियों के लिए पैसेंजर लाउंज, बैगेज ट्रॉली, इलेक्ट्रिक बग्गी, शौचालय, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट होंगे। इसके अलावा कैफेटेरिया और ड्यूटी-फ्री शॉपिंग के लिए व्यावसायिक जगह भी होगी। वाहन पार्किंग और प्रीपेड टैक्सी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। टर्मिनल को दिव्यांग-अनुकूल बनाया जाएगा। अभी मुख्यालय में डीपीआर तैयार की जा रही है।


    कोच्चि से 3.6 गुना बड़ा होगा क्रूज टर्मिनल

    कोच्चि के सागरिका में 2,253 वर्गमीटर क्रूज टर्मिनल बनाया गया है। कोच्चि टर्मिनल में 48 इमिग्रेशन काउंटर, 10-12 कस्टम काउंटर, बैगेज स्कैनर, लाउंज, ड्यूटी-फ्री शॉप और पार्किंग जैसी सुविधाएं हैं। इसके मुकाबले वाराणसी में सामनेघाट पर दो एकड़ यानी 8,094 वर्गमीटर में टर्मिनल का निर्माण होगा। ऐसे में वाराणसी का प्रस्तावित टर्मिनल क्षेत्रफल के लिहाज से कोच्चि से करीब 3.6 गुना बड़ा होगा।


    रोजगार और व्यापार के बढ़ेंगे अवसर

    टर्मिनल के निर्माण के बाद वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की योजनाओं के एक बेड़े में एक और उपलब्धि जुड़ जाएगी। टर्मिनल बन जाने से देश विदेश से व्यापार बढ़ जाएगा। अभी तक जो व्यापार पानी के रास्ते नहीं हो पा रहा था वो आने वाले समय में संभव होगा। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

  • Vastu Upay: बेड और बाथरूम में भूलकर भी न करें भोजन! जानें खाने की सही जगह और शुभ दिशा

    Vastu Upay: बेड और बाथरूम में भूलकर भी न करें भोजन! जानें खाने की सही जगह और शुभ दिशा


    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर की सुख शांति और समृद्धि के लिए कई तरह के नियम बताए गए हैं। इन्हीं में भोजन करने से जुड़े कुछ नियम भी शामिल हैं। मान्यता है कि भोजन केवल शरीर की भूख मिटाने का साधन नहीं है बल्कि इसे घर की सकारात्मक ऊर्जा और सुख समृद्धि से भी जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि खाना खाते समय जगह साफ हो और आसपास का वातावरण शांत हो इसका विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। आजकल व्यस्त जीवनशैली में लोग सुविधा के अनुसार कहीं भी बैठकर खाना शुरू कर देते हैं। कई लोगों को टीवी या मोबाइल देखते हुए बेड पर भोजन करने की आदत होती है जबकि वास्तु मान्यताओं के अनुसार कुछ जगहों पर बैठकर खाना शुभ नहीं माना जाता।

    सबसे पहले बेड पर बैठकर खाना खाने की आदत से बचने की सलाह दी जाती है। आज के समय में टीवी देखते हुए या मोबाइल चलाते हुए बिस्तर पर खाना खाना आम हो गया है लेकिन वास्तु के अनुसार भोजन के लिए बेड को उचित स्थान नहीं माना जाता। मान्यता है कि ऐसा करने से घर के वातावरण में नकारात्मकता बढ़ सकती है और मानसिक शांति प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा खाने के टुकड़े बिस्तर पर गिरने से गंदगी और साफ सफाई से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं।

    इसी तरह घर के मुख्य दरवाजे के बिल्कुल पास बैठकर भोजन करने से भी बचने की सलाह दी जाती है। मुख्य द्वार घर में आने जाने का प्रमुख स्थान होता है और यहां लगातार लोगों की आवाजाही रहती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस जगह पर बैठकर भोजन करने से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है और सुख समृद्धि में बाधा आने की आशंका मानी जाती है। इसलिए भोजन के लिए घर की कोई शांत और स्वच्छ जगह चुनना बेहतर माना जाता है।

    बाथरूम के सामने या उसके बिल्कुल आसपास बैठकर खाना खाने से भी बचना चाहिए। वास्तु शास्त्र में भोजन के स्थान की स्वच्छता को काफी महत्वपूर्ण माना गया है। बाथरूम के पास भोजन करने से वातावरण की स्वच्छता और सकारात्मकता प्रभावित होने की मान्यता है। इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि भोजन हमेशा साफ और व्यवस्थित स्थान पर ही किया जाए।

    टूटे हुए या गंदे बर्तनों में भोजन करना भी वास्तु के अनुसार अच्छा नहीं माना जाता। प्लेट कटोरी या गिलास टूट गया हो तो उसे इस्तेमाल करने के बजाय अलग कर देना बेहतर माना जाता है। मान्यता है कि टूटे बर्तन घर की सकारात्मकता और सुख शांति को प्रभावित कर सकते हैं। इसी तरह भोजन हमेशा साफ बर्तनों में करना चाहिए ताकि स्वच्छता के साथ सकारात्मक माहौल भी बना रहे।

    अंधेरी या बहुत कम रोशनी वाली जगह पर भोजन करने से भी बचने की सलाह दी जाती है। भोजन करते समय पर्याप्त रोशनी और साफ वातावरण होना जरूरी माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसी जगह भोजन करना बेहतर होता है जहां प्राकृतिक या कृत्रिम रोशनी पर्याप्त हो।

    वहीं भोजन के लिए साफ शांत और व्यवस्थित स्थान को शुभ माना जाता है। पारंपरिक वास्तु मान्यताओं के अनुसार पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके भोजन करना अच्छा माना जाता है। जमीन पर आराम से बैठकर भोजन करना भी भारतीय परंपरा में शुभ और सुविधाजनक माना गया है। हालांकि ये बातें वास्तु से जुड़ी मान्यताएं हैं वैज्ञानिक रूप से इनका आर्थिक स्थिति पर सीधा प्रभाव प्रमाणित नहीं है।
  • गोल्डन बॉय की राह में चोट बनी रोड़ा! नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स से बाहर, भारत की गोल्ड की उम्मीदों को लगा झटका

    गोल्डन बॉय की राह में चोट बनी रोड़ा! नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स से बाहर, भारत की गोल्ड की उम्मीदों को लगा झटका


    नई दिल्ली । भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर और दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा को लेकर खेल जगत से बेहद निराश करने वाली खबर सामने आई है। नीरज चोपड़ा चोट के कारण 2026 के बाकी बचे सीजन से बाहर हो गए हैं। इसका सीधा असर सितंबर में जापान के आइची नागोया में होने वाले एशियन गेम्स पर भी पड़ा है जहां नीरज अपने जैवलिन थ्रो के खिताब का बचाव करने उतरने वाले थे। नीरज की गैरमौजूदगी भारत के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है क्योंकि वह देश के सबसे मजबूत पदक दावेदारों में शामिल थे और एशियन गेम्स में उनसे एक बार फिर शानदार प्रदर्शन की उम्मीद थी।

    नीरज ने खुद सोशल मीडिया के जरिए अपनी चोट की जानकारी फैन्स के साथ साझा की है। उन्होंने बताया कि लुसाने डायमंड लीग में 88.05 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करने के बाद वह शानदार लय महसूस कर रहे थे। लंबे समय से जिस मोमेंटम की उन्हें तलाश थी वह उन्हें वापस मिलता नजर आ रहा था लेकिन इसी दौरान ट्रेनिंग में उनके टखने के लिगामेंट में टियर हो गया। चोट के बाद उन्होंने अपनी मेडिकल टीम और डॉक्टरों के साथ विस्तार से चर्चा की और इसके बाद इस सीजन के बाकी मुकाबलों से दूर रहने का फैसला किया।

    नीरज के लिए यह फैसला आसान नहीं रहा होगा क्योंकि चोट ऐसे समय पर आई जब उनका प्रदर्शन धीरे धीरे बेहतर होता दिखाई दे रहा था। ग्लासगो में हुए मुकाबले में उन्होंने पोडियम फिनिश हासिल किया था लेकिन श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो करते हुए उनसे गोल्ड मेडल छीन लिया था। इसके बाद लुसाने डायमंड लीग में भी नीरज ने हिस्सा लिया और 88.05 मीटर का थ्रो उनके लिए सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। वह क्वालिफिकेशन की रेस में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे लेकिन चोट ने उनके पूरे सीजन पर ब्रेक लगा दिया।

    एशियन गेम्स 2026 का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची नागोया में होना है। नीरज के बाहर होने का सबसे बड़ा झटका यह है कि वह जैवलिन थ्रो में अपने पिछले खिताब का बचाव नहीं कर पाएंगे। उनके नाम की मौजूदगी ही भारत के लिए पदक की बड़ी उम्मीद मानी जाती थी। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति से भारतीय एथलेटिक्स टीम पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

    हालांकि नीरज ने इस मुश्किल वक्त में भी सकारात्मक रवैया दिखाया है। उनका कहना है कि चोट और मुश्किलें खेल के सफर का हिस्सा हैं और फिलहाल उनका पूरा ध्यान रिकवरी पर है। वह पूरी तरह फिट होकर पहले से ज्यादा मजबूती के साथ मैदान पर वापसी करना चाहते हैं। अब नीरज की गैरमौजूदगी में भारत की उम्मीदें रोहित यादव पर टिक गई हैं। रोहित ने हाल ही में भुवनेश्वर में 87.68 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए जीत दर्ज की थी। नीरज के बाहर होने के बाद रोहित एशियन गेम्स में भारत के प्रमुख जैवलिन पदक दावेदार के रूप में नजर आएंगे।

  • सितंबर में होगा बड़ा शुक्र गोचर, 7 राशियों की चमकेगी किस्मत, नौकरी-कारोबार में मिलेंगे नए मौके

    सितंबर में होगा बड़ा शुक्र गोचर, 7 राशियों की चमकेगी किस्मत, नौकरी-कारोबार में मिलेंगे नए मौके


    नई दिल्ली। सितंबर की शुरुआत ग्रहों की चाल के लिहाज से खास रहने वाली है। 2 सितंबर 2026 को शुक्र अपनी ही राशि तुला में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुक्र को धन, सुख-सुविधा, प्रेम, सौंदर्य, भौतिक सुख और वैवाहिक जीवन का कारक माना जाता है। ऐसे में शुक्र का अपनी राशि तुला में गोचर कई राशियों के लिए आर्थिक और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

    शुक्र 2 सितंबर को दोपहर 1 बजकर 51 मिनट पर तुला राशि में प्रवेश करेंगे और 6 नवंबर तक इसी राशि में रहेंगे। अपनी ही राशि में शुक्र की मौजूदगी को विशेष माना जाता है। इस दौरान कुछ राशि वालों के लिए नौकरी में नए अवसर, कारोबार में लाभ, आमदनी के नए साधन और रिश्तों में मजबूती के योग बन सकते हैं।

    मेष राशि- करियर में मिल सकता है नया मौका

    मेष राशि वालों के लिए शुक्र का गोचर करियर और आर्थिक मामलों में लाभकारी रह सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या बेहतर नौकरी का ऑफर मिल सकता है। नौकरी बदलने की योजना बना रहे लोगों को भी अच्छा विकल्प मिलने के संकेत हैं। कारोबारियों को नई डील से फायदा हो सकता है। आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आएगा। प्रेम संबंधों में भी मधुरता बढ़ने की संभावना है।

    कर्क राशि- काम की होगी सराहना, सुधरेगी आर्थिक स्थिति

    कर्क राशि के जातकों के लिए यह गोचर सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में आपके काम की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। कारोबार से जुड़े लोगों को नई डील या प्रोजेक्ट मिलने के योग हैं। परिवार का माहौल सुखद रहेगा। आय के लिहाज से भी समय पहले की तुलना में बेहतर हो सकता है।

    कन्या राशि- अटके काम पकड़ेंगे रफ्तार, कमाई के नए रास्ते

    कन्या राशि वालों को शुक्र गोचर के दौरान आर्थिक राहत मिल सकती है। लंबे समय से अटके काम पूरे होने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। कमाई का नया जरिया सामने आ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिलने या नौकरी बदलने का अवसर मिल सकता है। आर्थिक परेशानी को लेकर चल रहा तनाव कम होने की उम्मीद है। प्रेम जीवन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

    तुला राशि- आत्मविश्वास बढ़ेगा, तरक्की के खुलेंगे रास्ते

    शुक्र का गोचर तुला राशि में ही होने वाला है, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए इसे विशेष माना जा रहा है। आत्मविश्वास बढ़ेगा और व्यक्तित्व में निखार आएगा। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। लंबे समय से अटके आर्थिक मामलों में भी गति आने के संकेत हैं। रिश्तों में मधुरता बढ़ सकती है।

    कुंभ राशि- मजबूत होगी आर्थिक स्थिति

    कुंभ राशि वालों के लिए शुक्र का गोचर आर्थिक दृष्टि से लाभकारी रह सकता है। नौकरी से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं। नई जिम्मेदारियों के साथ तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं। कारोबारियों को नया काम शुरू करने या निवेश का अवसर मिल सकता है। इस दौरान घर, वाहन या सुख-सुविधाओं से जुड़ी चीजों पर खर्च होने की संभावना भी है।

    मकर राशि- करियर में नए अवसर, आय-व्यय में रहेगा संतुलन

    मकर राशि वालों के लिए यह गोचर करियर में आगे बढ़ने के मौके लेकर आ सकता है। कारोबारियों को नए प्रोजेक्ट से फायदा मिलने की संभावना है। पुराने अटके काम पूरे हो सकते हैं। किसी बड़ी वस्तु की खरीदारी पर खर्च हो सकता है, लेकिन आमदनी और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखने में सफलता मिल सकती है। नौकरी में बदलाव या नई जिम्मेदारी से जुड़े फैसले भी सामने आ सकते हैं।

    धनु राशि- पैसा और प्रेम दोनों में शुभ संकेत

    धनु राशि वालों के लिए शुक्र का गोचर आर्थिक और प्रेम जीवन दोनों के लिहाज से अच्छा रह सकता है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। पहले किए गए किसी निवेश से लाभ मिलने की संभावना है और पैसों से जुड़ी पुरानी चिंता कम हो सकती है। प्रेम संबंधों में नजदीकियां बढ़ेंगी और पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। कारोबारियों को भी लाभ के अवसर मिल सकते हैं।

    शुक्र गोचर क्यों है खास?

    वैदिक ज्योतिष में शुक्र को धन, भौतिक सुख-सुविधाओं, प्रेम, कला, सौंदर्य, विलासिता और दांपत्य जीवन का कारक माना जाता है। शुक्र का तुला राशि में गोचर इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि तुला उसकी अपनी राशि है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में शुक्र से जुड़े क्षेत्रों में मजबूती देखने को मिल सकती है।

    हालांकि, किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र किस भाव में गोचर कर रहा है और उसका परिणाम कितना शुभ रहेगा, यह उसकी जन्मकुंडली, लग्न और अन्य ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करता है। इसलिए इसे सिर्फ सामान्य ज्योतिषीय संकेत के तौर पर ही देखना चाहिए और महत्वपूर्ण आर्थिक या व्यक्तिगत फैसले केवल राशिफल के आधार पर नहीं लेने चाहिए।

  • भगवान कृष्ण को ही क्‍यों लगाते हैं 56 भोग? इसके पीछे हैं 3 पौराणिक मान्यताएं

    भगवान कृष्ण को ही क्‍यों लगाते हैं 56 भोग? इसके पीछे हैं 3 पौराणिक मान्यताएं


    नई दिल्ली। जन्माष्टमी हो या दिवाली के बाद मनाया जाने वाला अन्नकूट पर्व, भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। खास बात यह है कि छप्पन भोग में सिर्फ मिठाइयां ही शामिल नहीं होतीं, बल्कि मीठे-नमकीन व्यंजन, फल, पेय और कई तरह के पारंपरिक पकवान भी शामिल किए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर भगवान कृष्ण को 56 तरह के भोग ही क्यों लगाए जाते हैं? इस संख्या के पीछे तीन प्रमुख पौराणिक मान्यताएं बताई जाती हैं।

    पहली मान्यता : 7 दिन और 8 प्रहर से बना 56 का आंकड़ा

    पौराणिक कथा के अनुसार, माता यशोदा बाल स्वरूप भगवान कृष्ण को दिन में 8 प्रहर में 8 बार भोजन कराती थीं। जब भगवान कृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली पर उठा लिया, तब वे लगातार 7 दिन तक अन्न-जल ग्रहण नहीं कर सके।

    कथा के अनुसार, आठवें दिन जब बारिश थमी और भगवान ने गोवर्धन पर्वत नीचे रखा, तब ब्रजवासियों और माता यशोदा ने सात दिनों के दौरान भगवान के लिए तय किए गए आठों प्रहर के भोजन को एक साथ परोसा। यानी 7 दिन × 8 प्रहर = 56। तभी से कृष्ण को 56 भोग लगाने की परंपरा शुरू होने की मान्यता है।

    दूसरी मान्यता : दिव्य कमल की 56 पंखुड़ियां

    एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, गोलोक में भगवान कृष्ण राधा जी के साथ जिस दिव्य कमल पर विराजमान रहते हैं, उसमें 56 पंखुड़ियां होती हैं। इस कमल की तीन परतें बताई गई हैं।

    पहली परत में 8, दूसरी में 16 और तीसरी परत में 32 पंखुड़ियां मानी जाती हैं। तीनों को जोड़ने पर संख्या 8+16+32=56 होती है। इसी वजह से भी भगवान कृष्ण को 56 भोग अर्पित करने की परंपरा से जोड़ा जाता है।

    तीसरी मान्यता : गोपिकाओं ने अर्पित किए थे 56 भोग

    श्रीमद्भागवत कथा से जुड़ी एक अन्य मान्यता में बताया जाता है कि भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने की इच्छा से गोपिकाओं ने एक महीने तक प्रतिदिन भोर में यमुना में स्नान किया और कात्यायिनी माता की पूजा-अर्चना करते हुए व्रत रखा।

    जब भगवान कृष्ण ने उनकी मनोकामना पूरी करने की सहमति दी, तब गोपिकाओं ने प्रसन्न होकर भगवान को 56 प्रकार के भोग बनाकर अर्पित किए। इस मान्यता को भी छप्पन भोग की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।

    छप्पन भोग में क्या-क्या होता है?

    छप्पन भोग में अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों के अनुसार व्यंजनों की सूची बदल सकती है। इसमें मिठाइयों के साथ नमकीन पकवान, फल, पेय और विभिन्न प्रकार के पारंपरिक भोजन शामिल किए जाते हैं। भक्त इन्हें श्रद्धा और प्रेम के साथ भगवान कृष्ण को अर्पित करते हैं।

    यानी 56 भोग सिर्फ व्यंजनों की संख्या नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति, प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करने की धार्मिक परंपरा के रूप में देखा जाता है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इन मान्यताओं की अलग-अलग परंपराओं में अलग-अलग व्याख्या मिल सकती है। हम इनकी तथ्यात्मक पुष्टि नहीं करते हैं।

  • आपदा के बीच नेपाल को राहत: चीन बॉर्डर के पास बनी ग्लेशियर झील का खतरा टला, पानी का स्‍तर घटा

    आपदा के बीच नेपाल को राहत: चीन बॉर्डर के पास बनी ग्लेशियर झील का खतरा टला, पानी का स्‍तर घटा


    बीजिंग। चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से बनी झील के अचानक फटने का खतरा फिलहाल कम हो गया है। चीनी अधिकारियों के मुताबिक झील का पानी धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से बाहर निकल रहा है और इसका आकार लगातार घट रहा है। इससे नीचे के इलाकों में अचानक बाढ़ आने की आशंका पहले के मुकाबले कम हुई है। हालांकि, अधिकारी अभी भी झील की 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं।

    यह झील उसी इलाके में बनी है, जहां बुधवार को ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

    तीन दिन में 21 हजार वर्ग मीटर घटा झील का क्षेत्र

    चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार गुरुवार से शनिवार सुबह तक लिए गए सैटेलाइट चित्रों में झील के पानी में लगातार कमी दर्ज की गई है। यह झील तिब्बत क्षेत्र में चीन-नेपाल सीमा के पास दो नदियों के संगम वाले इलाके में बनी है। शनिवार दोपहर तक इसके कुछ हिस्सों में जमीन भी दिखाई देने लगी थी।

    शनिवार सुबह झील का सतही क्षेत्र करीब 99 हजार वर्ग मीटर रह गया था। यह लगभग 14 फुटबॉल मैदानों के बराबर है। गुरुवार की तुलना में झील का क्षेत्रफल करीब 21 हजार वर्ग मीटर घट चुका है। पानी के प्राकृतिक बहाव से झील का आकार कम होने के कारण अधिकारियों ने फिलहाल इसके अचानक फटने के खतरे को कम माना है।

    बाढ़ के बाद मंडरा रहा था दूसरी आपदा का खतरा

    बुधवार को ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद चट्टान, बर्फ, कीचड़ और मलबे के साथ पानी तेजी से नीचे की ओर बहा था। इससे हिमालयी नदी तंत्र में भारी तबाही हुई। चीन और नेपाल को जोड़ने वाला एक सीमा बंदरगाह परिसर भी बाढ़ की चपेट में आ गया था।

    इसके बाद ग्लेशियर के मलबे से बनी झील में पानी बढ़ने पर इसके अचानक फटने की आशंका जताई गई थी। विशेषज्ञों को डर था कि अगर झील फटती है तो नीचे के इलाकों में दूसरी बार अचानक बाढ़ आ सकती है। इससे राहत और बचाव अभियान भी खतरे में पड़ सकता था।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगले दो-तीन दिनों में झील का जलस्तर और तेजी से घटता है तो निचले इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य अपेक्षाकृत सुरक्षित तरीके से जारी रखा जा सकेगा।

    30 मिनट पहले दी जाएगी खतरे की चेतावनी

    अधिकारियों के मुताबिक झील में किसी भी असामान्य बदलाव की स्थिति में बचाव दलों को तत्काल सूचना दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर हटाया जा सकता है। प्रशासन ने ऐसी व्यवस्था भी की है कि संभावित खतरे की स्थिति में 30 मिनट से अधिक पहले चेतावनी जारी की जा सके।

    रडार और ड्रोन से 24 घंटे निगरानी

    चीन की सरकारी इंजीनियरिंग और बचाव कंपनी चाइना एनेंग ने गुरुवार से झील की निगरानी शुरू कर दी है। इलाके में रडार और ड्रोन तैनात किए गए हैं, जिनकी मदद से झील और आसपास के क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    शुक्रवार को झील से पानी के शुरुआती बहाव के कारण कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकना पड़ा था। स्थिति का आकलन करने के बाद जोखिम को फिलहाल नियंत्रण में माना गया और अभियान फिर शुरू करने की अनुमति दी गई।

    नीचे एक और बड़ी झील मिली, 1.20 लाख वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्र

    अधिकारियों ने ग्लेशियर टूटने वाली जगह के नीचे एक और बड़ी झील की पहचान की है। एक इंजीनियर के मुताबिक इसका क्षेत्रफल 1.20 लाख वर्ग मीटर से ज्यादा है। यह मौजूदा झील से भी बड़ी है। इसलिए इस झील की भी लगातार निगरानी की जा रही है।

    चीन में 7 मौतें, 554 लोग अब भी लापता

    इस बीच चीन में आपदा से मरने वालों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक 554 लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता निचले इलाकों में राहत और बचाव अभियान को सुरक्षित रखना है।

  • आरक्षण पर NDA में घमासान: चिराग ने मांगा मांझी का इस्तीफा, बोले- क्रीमी लेयर की बात है तो पहले पद छोड़ें

    आरक्षण पर NDA में घमासान: चिराग ने मांगा मांझी का इस्तीफा, बोले- क्रीमी लेयर की बात है तो पहले पद छोड़ें


    नई दिल्ली। आरक्षण के मुद्दे पर NDA के दो सहयोगी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे की मांग कर दी है। विवाद की शुरुआत HAM की ओर से SC-ST आरक्षण में उप-कोटा और आरक्षण नीति की समीक्षा की मांग के बाद हुई। मांझी ने भी पलटवार करते हुए कहा कि अगर चिराग को गरीबों की चिंता नहीं है तो उन्हें पहले खुद इस्तीफा दे देना चाहिए।

    उप-कोटा की मांग से बढ़ा विवाद

    मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) का कहना है कि SC और ST आरक्षण का लाभ समाज के सबसे कमजोर और लंबे समय से पिछड़े समुदायों तक भी पहुंचना चाहिए। बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण की समीक्षा की जरूरत बताते हुए कहा कि पार्टी आरक्षण खत्म करने के पक्ष में नहीं है, बल्कि इसे ज्यादा न्यायपूर्ण बनाने की मांग कर रही है।

    जीतन राम मांझी बिहार के मुशहर समाज से आते हैं, जिसे दलित समुदाय के सबसे पिछड़े समूहों में माना जाता है। HAM का तर्क है कि पासवान और रविदास जैसे कुछ समुदायों को आरक्षण का अपेक्षाकृत ज्यादा लाभ मिला है, जबकि कई अन्य दलित समुदाय अभी भी पिछड़े हुए हैं।

    संतोष कुमार सुमन का दावा है कि उनके मुशहर समुदाय से अब तक एक भी व्यक्ति IAS अधिकारी नहीं बन पाया है। इसी आधार पर पार्टी SC आरक्षण के भीतर ज्यादा पिछड़े समुदायों के लिए अलग व्यवस्था की मांग कर रही है।

    2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा है विवाद

    आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण का मौजूदा विवाद सुप्रीम कोर्ट के 2024 के अहम फैसले से जुड़ा है। कोर्ट ने राज्यों को SC और ST वर्ग के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति दी थी, ताकि आरक्षण का लाभ इन वर्गों में सबसे ज्यादा पिछड़े समुदायों तक पहुंचाया जा सके।

    हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका में SC-ST वर्ग के सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ चुके लोगों को आरक्षण के लाभ से बाहर करने की मांग भी की गई है। याचिका में 2024 के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि संविधान पीठ के सात में से चार जजों ने SC-ST में भी क्रीमी लेयर के सिद्धांत पर विचार की बात कही थी।

    हालांकि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि SC और ST वर्ग पर क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता। फिलहाल क्रीमी लेयर की व्यवस्था OBC आरक्षण में लागू है।

    चिराग बोले- क्रीमी लेयर की बात है तो पहले इस्तीफा दें

    केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने HAM की मांग का विरोध करते हुए कहा कि जो लोग SC आरक्षण में क्रीमी लेयर की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले खुद आरक्षण का लाभ छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर जीतन राम मांझी क्रीमी लेयर के पक्ष में हैं तो उन्हें केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए। चिराग ने मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे की भी मांग की।

    चिराग की पार्टी LJP (रामविलास) लंबे समय से SC आरक्षण में उप-कोटे का विरोध करती रही है। उनका कहना है कि SC समाज के सभी समुदायों को एकजुट रहना चाहिए और संविधान में SC आरक्षण को आर्थिक आधार पर बांटने का प्रावधान नहीं है।

    चिराग ने कहा कि उप-कोटा या क्रीमी लेयर लागू करने से सामाजिक न्याय का उद्देश्य कमजोर हो सकता है और दलित समाज के भीतर विभाजन बढ़ सकता है।

    मांझी का पलटवार- गरीबों को लाभ से वंचित करना चाहते हैं

    चिराग के बयान पर जीतन राम मांझी ने भी पलटवार किया। गया में उन्होंने कहा कि चिराग के रुख से गरीब और जरूरतमंद लोगों को आरक्षण के लाभ से वंचित किया जा सकता है।

    मांझी ने कहा कि व्यापक जनहित में आरक्षण के भीतर बंटवारा जरूरी है। उन्होंने चिराग पर गरीबों की चिंता नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर चिराग को गरीबों की चिंता नहीं है तो उन्हें पहले अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

    आरक्षण को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन भी हो रहे हैं। ऐसे में NDA के भीतर दो सहयोगी दलों के बीच खुली बयानबाजी ने गठबंधन के अंदर सामाजिक न्याय और आरक्षण को लेकर मतभेदों को फिर चर्चा में ला दिया है।

  • अमेरिकी सेना की मदद करने वाले अफगान परिवार को भी नहीं बख्शा, ट्रंप प्रशासन ने दर्जनों प्रवासियों को अफ्रीका भेजा

    अमेरिकी सेना की मदद करने वाले अफगान परिवार को भी नहीं बख्शा, ट्रंप प्रशासन ने दर्जनों प्रवासियों को अफ्रीका भेजा


    नई दिल्ली। अमेरिकी सेना के साथ काम करने वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाले एक अफगान नागरिक समेत दर्जनों प्रवासियों को ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका से निकालकर अफ्रीकी देश सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य भेज दिया। शनिवार (29 अगस्त) को हुई इस निर्वासन उड़ान में 12 अफगान और 8 ईरानी नागरिकों के अलावा नेपाल और निकारागुआ के कई नागरिक भी शामिल थे। अफगान नागरिक के वकील और मानवाधिकार संगठनों ने इसकी जानकारी दी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, निर्वासित किए गए अफगान नागरिक की उम्र करीब 20 साल है। उसके वकील अल्मा डेविड के अनुसार, अमेरिकी अदालत ने उसे अफगानिस्तान भेजे जाने से सुरक्षा दी थी, क्योंकि वहां उसे तालिबान से खतरा था। अदालत में पेश दस्तावेजों के मुताबिक, अमेरिकी सेना के समर्थन में उसके भाइयों द्वारा किए गए काम की वजह से अफगानिस्तान में उसके परिवार को तालिबान की धमकियां मिली थीं।

    एक भाई अमेरिकी सेना के साथ काम कर चुका, दूसरे की तालिबान ने की हत्या

    अल्मा डेविड के मुताबिक, अफगान नागरिक का एक भाई अमेरिका में रहता है और अफगान नेशनल आर्मी में काम कर चुका है। यह सेना 2021 में तालिबान के सत्ता में आने से पहले अमेरिकी सेना के साथ मिलकर काम करती थी। उसके एक अन्य भाई ने अमेरिकी प्रशिक्षण लेकर पायलट के तौर पर काम किया था, लेकिन तालिबान ने उसकी हत्या कर दी थी।

    इसके बावजूद अफगान नागरिक को अमेरिका में रहने की अनुमति नहीं मिली और उसे निर्वासन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

    12 अफगान और 8 ईरानी नागरिकों को भेजा गया

    शनिवार को सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य की राजधानी बांगुई पहुंची निर्वासन उड़ान में 12 अफगान और 8 ईरानी नागरिक शामिल थे। इसके अलावा नेपाल और निकारागुआ के कई नागरिकों को भी इसी उड़ान से भेजा गया। ह्यूमन राइट्स फर्स्ट की नीति, शरणार्थी और अप्रवासी अधिकार निदेशक सावी अरवे ने इसकी जानकारी दी।

    मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने कई गुप्त समझौतों के तहत हजारों प्रवासियों को करीब दो दर्जन ऐसे देशों में भेजा है, जो उनके अपने देश नहीं हैं। इसे प्रशासन की व्यापक इमिग्रेशन कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है।

    जून के बाद सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य के लिए दूसरी उड़ान

    इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए कुछ शरण मांगने वालों को कानूनी रास्ते से अप्रत्यक्ष रूप से उन देशों में वापस भेजा जा रहा है, जहां से वे भागे थे।

    शनिवार की उड़ान जून के बाद सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य के लिए ऐसी दूसरी निर्वासन उड़ान थी। जून में भेजी गई उड़ान में करीब दो दर्जन प्रवासी शामिल थे। इनमें एक ईरानी महिला भी थी, जिसने अपने देश में उत्पीड़न का सामना करने की बात कही थी।

    मानवाधिकार संगठनों ने ट्रंप प्रशासन की इस नीति को लेकर चिंता जताई है और सवाल उठाया है कि ऐसे लोगों को उन देशों में भेजना कितना सुरक्षित है, जहां उन्हें उत्पीड़न या खतरे का सामना करना पड़ सकता है।

  • सतना समेत 4 जिलों में बाढ़, चित्रकूट में बड़ा पुल बहा, आज 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    सतना समेत 4 जिलों में बाढ़, चित्रकूट में बड़ा पुल बहा, आज 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। अगस्त की विदाई के साथ मध्य प्रदेश में एक बार फिर बाढ़ के हालात बन गए हैं। शनिवार को छतरपुर, पन्ना, सतना और टीकमगढ़ में भारी बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर आ गए और कई इलाके जलमग्न हो गए। चित्रकूट में गोरगी बांध फूटने से हालात बिगड़ गए। मंदाकिनी नदी करीब 30 फीट उफान पर रही और तेज बहाव में रामघाट का बड़ा पुल बह गया। सतना में रेलवे ट्रैक और थाने तक पानी में डूब गए, जबकि पन्ना के कई गांव टापू में तब्दील हो गए। मौसम विभाग ने रविवार को भी प्रदेश के 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    बांध फूटने के बाद चित्रकूट में बिगड़े हालात

    IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के मुताबिक, प्रदेश में सक्रिय लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) के कारण बारिश का सिस्टम मजबूत हुआ है। इसके चलते शनिवार को कई क्षेत्रों में तेज बारिश हुई और नदी-नाले उफान पर आ गए।

    चित्रकूट में गोरगी बांध फूटने के बाद कई इलाकों में पानी भर गया। सतना-चित्रकूट मार्ग तीन स्थानों से बंद हो गया। मंदाकिनी नदी करीब 30 फीट ऊंचाई तक उफान पर रही। तेज बहाव के कारण रामघाट का बड़ा पुल बह गया। कई मोहल्लों में नाव चलाकर लोगों को बाहर निकाला गया। रामघाट और भरतघाट पूरी तरह जलमग्न हो गए, जबकि घाट किनारे की करीब 400 दुकानें पानी में डूब गईं।

    बाढ़ का पानी नयागांव राजमहल के अंदर तक पहुंच गया। कई लोग घरों और होटलों में फंसे रहे। SDRF की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी रहीं।

    सतना में रेलवे ट्रैक और थाने में घुसा पानी

    सतना के मझगवां में बाढ़ का पानी रेलवे ट्रैक पर पहुंच गया। इसके कारण आनंद विहार से रीवा जाने वाली पैसेंजर ट्रेन कई घंटे तक खड़ी रही। नागौद में थाने और पेट्रोल पंप में पानी भर गया।

    कोठी में एक मकान गिरने से चार भैंस मलबे में दब गईं। इनमें दो की मौत हो गई। वहीं, पन्ना में बाढ़ के कारण कई गांवों का संपर्क टूट गया और वे टापू जैसे नजर आए।

    शनिवार को बानसुजारा बांध के आठ गेट खोलकर धसान नदी में 792 घन मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पानी छोड़ा गया।


    आज इन 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    रविवार को मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सतना, मैहर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने के आसार हैं।

    प्रदेश में अब तक 27 इंच बारिश

    IMD के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक 694.5 मिमी यानी करीब 27 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 762.3 मिमी यानी 30 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में अब भी 2.7 इंच कम बारिश हुई है। ओवरऑल बारिश सामान्य से 9% कम है। पूर्वी हिस्से में 5% और पश्चिमी हिस्से में 12% कम बारिश दर्ज की गई है।

    39 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश अब भी सामान्य से 19% तक कम है। बालाघाट, छतरपुर, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ समेत जिलों में 1% से 50% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 51% तक कम पानी गिरा है।

    16 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    प्रदेश के अनूपपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।