Author: bharati

  • दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, गोल्ड 800 और सिल्वर 3,730 रुपये तक टूटी

    दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, गोल्ड 800 और सिल्वर 3,730 रुपये तक टूटी

    नई दिल्ली । दिवाली और धनतेरस से पहले सोने-चांदी की खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बाजार से राहत भरी खबर सामने आई है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 0.59 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि चांदी की कीमत में करीब 1.96 प्रतिशत की गिरावट आई। कारोबार के दौरान चांदी 3,730 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई। वैश्विक बाजार में कमजोर रुख और अमेरिका की आर्थिक परिस्थितियों को इस गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

    घरेलू वायदा बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले कारोबारी बंद भाव 1,42,596 रुपये प्रति 10 ग्राम से 843 रुपये नीचे आकर 1,41,753 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान इसमें लगभग 0.59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, चांदी का भाव पिछले बंद स्तर 1,89,453 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 1,85,723 रुपये पर आ गया। इसमें 3,730 रुपये यानी करीब 1.96 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। कॉमेक्स पर सोना लगभग 0.28 प्रतिशत गिरकर 4,020 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं चांदी की कीमत 1.20 प्रतिशत टूटकर 51.750 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। वैश्विक स्तर पर डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर बदलती परिस्थितियों का असर सोने-चांदी की मांग पर पड़ रहा है।

    बाजार में गिरावट की एक प्रमुख वजह अमेरिका में महंगाई के आंकड़े हैं। सितंबर में अमेरिकी कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई दर में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि सालाना दर 3.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके अलावा तीसरी तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई। इन आंकड़ों से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है।

    बाजार में यह आशंका भी बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। उपलब्ध बाजार अनुमानों के अनुसार, इस संभावना को 80 प्रतिशत से अधिक माना जा रहा है। ब्याज दरें ऊंची रहने पर निवेशकों का रुझान उन विकल्पों की ओर बढ़ सकता है, जिनसे नियमित ब्याज मिलता है। सोना और चांदी ब्याज नहीं देते, इसलिए ऐसी परिस्थितियों में इनकी मांग प्रभावित होती है।

    तकनीकी स्तरों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने के लिए 1.40 लाख से 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। यदि कीमत इस दायरे से नीचे जाती है तो इसमें 1.37 लाख से 1.38 लाख रुपये तक गिरावट की संभावना बन सकती है। चांदी के लिए 1.83 लाख से 1.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर अहम माना जा रहा है।

    चांदी की मौजूदा कीमतों की तुलना इस साल बने रिकॉर्ड स्तर से करें तो गिरावट काफी बड़ी दिखाई देती है। जनवरी के आखिरी सप्ताह में चांदी ने 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक उच्चतम स्तर छुआ था। इसके बाद कीमतों में लगातार कमजोरी आई और अब यह अपने रिकॉर्ड स्तर के आधे से भी कम भाव पर कारोबार कर रही है।

    इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित कर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव, ईरान से जुड़े घटनाक्रम और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं से तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई पर दबाव आ सकता है, जिसके कारण केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती का फैसला टाल सकते हैं।

    अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 8 और 9 दिसंबर को होने वाली बैठक पर है। साथ ही महंगाई और रोजगार से जुड़े आगामी आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। यदि आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका घटती है तो सोने-चांदी की कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है। इसके विपरीत महंगाई के मजबूत आंकड़े आने पर गिरावट का दबाव जारी रह सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

  • एक ही मकान में मकान मालिक और किरायेदार ले सकते हैं अलग-अलग LPG कनेक्शन, जानें क्या हैं जरूरी शर्तें

    एक ही मकान में मकान मालिक और किरायेदार ले सकते हैं अलग-अलग LPG कनेक्शन, जानें क्या हैं जरूरी शर्तें

    नई दिल्ली ।किराए के मकान में रहने वाले लोगों के सामने अक्सर रसोई गैस कनेक्शन को लेकर असमंजस की स्थिति रहती है। खासकर तब, जब मकान मालिक के नाम पर पहले से घरेलू LPG कनेक्शन मौजूद हो। ऐसे में किरायेदार के मन में सवाल उठता है कि क्या वह उसी मकान के पते पर अपने नाम से अलग गैस कनेक्शन ले सकता है? इसका जवाब हां है। निर्धारित शर्तें पूरी होने पर एक ही पते पर मकान मालिक और किरायेदार दोनों के नाम से अलग-अलग घरेलू गैस कनेक्शन हो सकते हैं।

    घरेलू LPG कनेक्शन के नियमों के अनुसार, एक परिवार के लिए सामान्य रूप से एक ही घरेलू गैस कनेक्शन की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य एक ही परिवार के सदस्यों द्वारा अलग-अलग नामों से एक से अधिक घरेलू कनेक्शन लेने पर रोक लगाना है। हालांकि, एक ही मकान में रहने वाले दो अलग-अलग परिवार अपनी अलग रसोई होने पर अलग-अलग कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    इस नियम के तहत मकान मालिक और किरायेदार को अलग परिवार के रूप में रहना जरूरी है। साथ ही दोनों की रसोई भी अलग-अलग होनी चाहिए। केवल मकान के अलग-अलग हिस्सों में रहने या अलग कमरे इस्तेमाल करने से दूसरा गैस कनेक्शन लेने की पात्रता नहीं बनती। परिवार और रसोई की अलग व्यवस्था इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    उदाहरण के तौर पर, यदि मकान मालिक अपने परिवार के साथ पहली मंजिल पर रहता है और किरायेदार दूसरी मंजिल पर रहता है, तो केवल मंजिल अलग होने से किरायेदार को दूसरा LPG कनेक्शन नहीं मिल सकता। यदि दोनों परिवार एक ही रसोई में खाना बनाते हैं और साझा व्यवस्था का इस्तेमाल करते हैं, तो अलग-अलग कनेक्शन लेने की अनुमति नहीं होगी।

    इसके विपरीत, यदि मकान मालिक और किरायेदार के परिवार अलग हैं और दोनों के पास खाना बनाने के लिए अपनी स्वतंत्र रसोई है, तो वे एक ही मकान के पते पर अलग-अलग घरेलू गैस कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, आवेदन करने के बाद संबंधित गैस कंपनी और वितरक की ओर से दस्तावेजों तथा पात्रता की जांच की जाएगी। अंतिम मंजूरी इसी प्रक्रिया के आधार पर मिलेगी।

    नया गैस कनेक्शन लेने के लिए किरायेदार को अपनी पहचान और निवास से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं। इसमें आधार कार्ड या अन्य मान्य पहचान पत्र, किराए का समझौता और बिजली बिल जैसे पते के प्रमाण शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा गैस एजेंसी की ओर से निर्धारित KYC प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।

    कुछ मामलों में एजेंसी अलग परिवार और स्वतंत्र रसोई होने से संबंधित जानकारी या अतिरिक्त दस्तावेज भी मांग सकती है। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित LPG वितरक से आवश्यक कागजात और प्रक्रिया की जानकारी लेना उचित रहेगा। इससे आवेदन के दौरान दस्तावेजों की कमी या पात्रता को लेकर होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है।

    वहीं, यदि मकान मालिक और किरायेदार वास्तव में एक ही परिवार का हिस्सा हैं और एक ही रसोई का इस्तेमाल करते हैं, तो अलग-अलग घरेलू कनेक्शन लेने का विकल्प उपलब्ध नहीं होगा। ऐसी स्थिति में डबल बॉटल कनेक्शन यानी DBC की सुविधा ली जा सकती है।

    DBC में एक ही घरेलू गैस कनेक्शन के तहत दो सिलेंडर उपलब्ध कराए जाते हैं। इसमें एक सिलेंडर खत्म होने पर दूसरे सिलेंडर का उपयोग किया जा सकता है। इससे गैस की आपूर्ति बनाए रखने में सुविधा मिलती है। हालांकि, इसे दो अलग-अलग घरेलू गैस कनेक्शन नहीं माना जाता।

    इसलिए किराए के मकान में रहने वाले लोगों को नया LPG कनेक्शन लेने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका परिवार और रसोई मकान मालिक से अलग हैं। निर्धारित दस्तावेजों और जांच प्रक्रिया के बाद ही एक ही पते पर अलग कनेक्शन की मंजूरी मिल सकती है।

  • मेट्रो यात्रियों को मिली टिकट की नई सुविधा, हर स्टेशन पर लगीं दो मशीनें; बोर्ड ऑफिस में आई खराबी

    मेट्रो यात्रियों को मिली टिकट की नई सुविधा, हर स्टेशन पर लगीं दो मशीनें; बोर्ड ऑफिस में आई खराबी


    भोपाल । भोपाल और इंदौर मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों के लिए टिकट लेने की प्रक्रिया अब पहले से आसान होने जा रही है। दोनों शहरों के मेट्रो स्टेशनों पर गुरुवार 30 अक्टूबर से टिकट वेंडिंग मशीन यानी TVM की सुविधा शुरू कर दी गई है। अब यात्रियों को टिकट के लिए काउंटर पर लंबी लाइन में लगने की जरूरत नहीं होगी। वे स्टेशन पर लगी मशीन के जरिए खुद ही टिकट प्राप्त कर सकेंगे। मेट्रो कॉरपोरेशन का दावा है कि मशीन से टिकट लेने की पूरी प्रक्रिया में करीब 30 सेकंड का समय लगेगा। हालांकि सुविधा शुरू होने के पहले ही दिन भोपाल के बोर्ड ऑफिस मेट्रो स्टेशन पर मशीन में तकनीकी खराबी सामने आ गई।

    बोर्ड ऑफिस स्टेशन पर टिकट वेंडिंग मशीन से टिकट निकालने की कोशिश के दौरान दो बार टिकट जनरेट नहीं हुआ। इसके बाद मशीन में आई खराबी को ठीक किया गया और मेंटेनेंस के बाद टिकट निकल सका। इस दौरान मौके पर मशीन के पास कोई मेट्रो कर्मचारी मौजूद नहीं था। यात्रियों ने जब मशीन चलाने में मदद मांगी तो कर्मचारी ने भी मशीन की पूरी जानकारी नहीं होने की बात कही। बाद में तकनीकी सुधार के बाद मशीन से करीब 30 सेकंड में टिकट प्राप्त हो गया। शुरुआती दिन ही आई इस परेशानी के बाद मशीनों के रखरखाव और यात्रियों की सहायता के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता पर सवाल उठने लगे हैं।

    मेट्रो प्रबंधन ने भोपाल और इंदौर के सभी स्टेशनों पर दो-दो टिकट वेंडिंग मशीनें लगाई हैं। भोपाल के छह स्टेशनों पर कुल 12 मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इन मशीनों के माध्यम से यात्री अपनी जरूरत के अनुसार टिकट ले सकेंगे। खास बात यह है कि दृष्टिबाधित यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मशीनों में ब्रेल लिपि का प्रावधान भी किया गया है। इससे तकनीक के इस्तेमाल में उन्हें भी मदद मिल सकेगी।

    नई सुविधा शुरू होने के बाद अब भोपाल और इंदौर मेट्रो में टिकट लेने के तीन विकल्प उपलब्ध होंगे। यात्री MPMRCL मोबाइल ऐप के जरिए डिजिटल टिकट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा स्टेशन पर मौजूद टिकट काउंटर से टिकट लेने की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी। तीसरा विकल्प अब टिकट वेंडिंग मशीन का होगा। डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था में यात्रियों को UPI QR कोड और ई-वॉलेट के माध्यम से कैशलेस भुगतान करने की सुविधा भी दी गई है।

    मेट्रो यात्रियों को टिकट पर प्रमोशनल डिस्काउंट का लाभ भी मिल रहा है। यह छूट 11 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। इसके तहत सिंगल जर्नी टिकट पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त छूट दी जा रही है। रिटर्न जर्नी टिकट पर कुल 30 प्रतिशत और ग्रुप टिकट पर कुल 35 प्रतिशत छूट का लाभ मिल रहा है। ग्रुप टिकट की सुविधा को भी आसान बनाया गया है। अब इसके लिए कम से कम दो यात्री ही पात्र होंगे।

    टिकट वेंडिंग मशीन शुरू होने से यात्रियों को टिकट लेने के लिए एक और विकल्प मिल गया है। इससे काउंटर पर भीड़ कम करने और टिकट प्रक्रिया को तेज बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि पहले ही दिन मशीन में आई खराबी ने यह भी दिखाया है कि नई व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए नियमित तकनीकी निगरानी और यात्रियों को सही जानकारी देने वाले कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी होगी।

  • दिल्ली के 20 बड़े बाजारों पर महारैली का असर पड़ने की आशंका, 12 हजार करोड़ के कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता

    दिल्ली के 20 बड़े बाजारों पर महारैली का असर पड़ने की आशंका, 12 हजार करोड़ के कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता

    नई दिल्ली ।दिल्ली में 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की महारैली को लेकर व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि रैली के कारण मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के प्रमुख बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है। इसका असर धनतेरस और दिवाली से पहले होने वाले कारोबार पर पड़ने की आशंका है। इस संबंध में चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है।

    कांग्रेस की इस महारैली में करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है। व्यापारिक संगठन का दावा है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के लिए 15 से 20 हजार वाहनों की जरूरत पड़ सकती है। संगठन के अनुसार, रामलीला मैदान में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं है। यहां 200 बड़ी बसों को खड़ा करने की भी पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बड़ी संख्या में बसों, कारों और अन्य वाहनों के मध्य दिल्ली में पहुंचने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    CTI ने अपने पत्र में बताया है कि रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के करीब 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजार स्थित हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट, पहाड़गंज और दरियागंज शामिल हैं।

    संगठन के मुताबिक, इन बाजारों में प्रतिदिन 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। यहां दिल्ली के नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर और मंगोलपुरी समेत 56 औद्योगिक क्षेत्रों से करीब पांच हजार ट्रक और टेंपो माल लेकर पहुंचते हैं। इसके अलावा रोजाना लगभग तीन हजार ट्रक इन बाजारों से सामान लेकर गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत सहित एनसीआर के 25 शहरों तथा देश के विभिन्न राज्यों में जाते हैं।

    CTI का कहना है कि रैली का असर केवल 1 नवंबर तक सीमित नहीं रह सकता। संगठन के अनुसार, 31 अक्टूबर की दोपहर से ही सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर बॉर्डर पर वाहनों की आवाजाही बढ़ सकती है। शाम से बहादुर शाह जफर मार्ग और जेएलएन मार्ग पर बैरिकेडिंग होने की आशंका भी जताई गई है। ट्रांसपोर्टरों की ओर से 31 अक्टूबर से ही मालवाहक गाड़ियां भेजने में असमर्थता जताए जाने की बात कही गई है।

    व्यापारियों ने अपनी आशंका के समर्थन में 10 अक्टूबर का उदाहरण भी दिया है। CTI के अनुसार, उस दिन जंतर-मंतर पर पांच से सात हजार लोगों की मौजूदगी के बावजूद मध्य दिल्ली में करीब आठ घंटे तक यातायात प्रभावित रहा था। ऐसे में 10 लाख लोगों की प्रस्तावित भीड़ के कारण स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    संगठन ने सोनिया गांधी के सामने दो विकल्प रखे हैं। पहली मांग है कि महारैली को दिवाली के बाद 10 या 11 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए। दूसरा विकल्प यह दिया गया है कि यदि रैली निर्धारित समय पर ही करनी है तो इसे रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी मैदान में कराया जाए, जहां संगठन के अनुसार 15 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था हो सकती है।

    CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि व्यापारी रैली का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि त्योहारों के सबसे व्यस्त कारोबारी समय में अपने व्यापार को सुरक्षित रखना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली है। संगठन ने राहुल गांधी से भी रैली आगे बढ़ाने की अपील की थी, लेकिन उनकी ओर से इनकार किए जाने के बाद अब सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अंतिम गुहार लगाई गई है।

  • गोल्ड-सिल्वर रेशियो 76 पर पहुंचा, सोने के मुकाबले चांदी हुई सस्ती, जानिए अब किस धातु में निवेश का पलड़ा भारी

    गोल्ड-सिल्वर रेशियो 76 पर पहुंचा, सोने के मुकाबले चांदी हुई सस्ती, जानिए अब किस धातु में निवेश का पलड़ा भारी

    नई दिल्ली ।धनतेरस और दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों को लेकर निवेशकों और खरीदारों की नजर बाजार के नए संकेतों पर है। इस बीच गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़कर करीब 76 तक पहुंच गया है। इस बदलाव ने दोनों कीमती धातुओं के प्रदर्शन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। बाजार के जानकारों के अनुसार, मौजूदा अनुपात बताता है कि सोने की तुलना में चांदी अपेक्षाकृत सस्ती हो गई है। ऐसे में आने वाले समय में सोने की कीमतों में और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। हालांकि, यह अनुपात अपने आप में कीमतों की दिशा तय करने वाला संकेत नहीं है।

    गोल्ड-सिल्वर रेशियो का इस्तेमाल सोने और चांदी की तुलनात्मक कीमत समझने के लिए किया जाता है। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि रेशियो 76 है तो एक औंस सोने के बराबर कीमत हासिल करने के लिए लगभग 76 औंस चांदी चाहिए। इस अनुपात में बढ़ोतरी का अर्थ है कि सोना चांदी के मुकाबले महंगा हो रहा है या चांदी का प्रदर्शन कमजोर पड़ रहा है। इसके विपरीत रेशियो घटने पर चांदी की स्थिति मजबूत मानी जाती है।

    मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड-सिल्वर रेशियो इस साल करीब 27 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले एक महीने में ही इसमें लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका स्तर लंबे समय के औसत 65 से 70 के दायरे से भी ऊपर पहुंच गया है। इससे संकेत मिलता है कि चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने सोने के मुकाबले उसे सस्ता बना दिया है।

    साल 2026 की शुरुआत में दोनों धातुओं के अनुपात में इसके उलट स्थिति देखने को मिली थी। उस समय चांदी की कीमत बढ़कर 121.6 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। इसके चलते गोल्ड-सिल्वर रेशियो गिरकर लगभग 43.6 रह गया था। यह स्तर एक दशक से अधिक समय में सबसे कम था। इसके बाद बाजार में परिस्थितियां बदलीं और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई।

    आंकड़ों के अनुसार, चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से 55 प्रतिशत से अधिक टूट चुकी है। इस साल इसकी कीमत में लगभग 27 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह करीब 52.8 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है। दूसरी ओर सोने की कीमत में इस साल लगभग 7 प्रतिशत की कमी आई है और इसका भाव करीब 4,027 डॉलर प्रति औंस बताया गया है। दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट की रफ्तार अलग-अलग रहने से रेशियो में बढ़ोतरी हुई है।

    कमोडिटी बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड-सिल्वर रेशियो को खरीदारी या बिकवाली का अंतिम संकेत मानने के बजाय निवेश की रणनीति समझने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। जब यह अनुपात ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर चला जाता है, तब निवेशक सोने की तुलना में चांदी में निवेश धीरे-धीरे बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। वहीं, रेशियो बहुत नीचे आने पर चांदी में कुछ मुनाफा निकालकर सोने में निवेश बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

    इतिहास में भी इस अनुपात के आधार पर बाजार के बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। मार्च 2020 में कोरोना महामारी के दौरान गोल्ड-सिल्वर रेशियो लगभग 126 तक पहुंच गया था। इसके बाद अगले पांच महीनों में चांदी की कीमतों में करीब 140 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। आमतौर पर 80 से ऊपर का अनुपात चांदी के लिए अनुकूल स्थिति का संकेत माना जाता है, जबकि 50 से नीचे का स्तर सोने के बेहतर प्रदर्शन की ओर इशारा करता है।

    निवेशकों के लिए इस अनुपात का एक अन्य उपयोग पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखना है। इसके तहत सोने और चांदी में निवेश का एक निश्चित हिस्सा तय किया जा सकता है। रेशियो में बड़ा बदलाव आने पर उसी के अनुसार निवेश का अनुपात बदला जा सकता है। हालांकि, केवल एक संकेतक के आधार पर निवेश का फैसला करने के बजाय चरणबद्ध निवेश और जोखिम का ध्यान रखना जरूरी है।

  • मध्यप्रदेश में महंगाई भत्ता 60% हुआ, जनवरी से मिलेगा फायदा और तीन किस्तों में आएगा 9 महीने का एरियर

    मध्यप्रदेश में महंगाई भत्ता 60% हुआ, जनवरी से मिलेगा फायदा और तीन किस्तों में आएगा 9 महीने का एरियर


    भोपाल। मध्यप्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राज्य सरकार ने राहत भरा फैसला लिया है। केंद्र सरकार के बाद अब मध्यप्रदेश सरकार ने भी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और पेंशनर्स की महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले से प्रदेश के करीब 12 लाख कर्मचारी अधिकारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा। बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता जनवरी 2026 से लागू किया जाएगा। वहीं जनवरी से सितंबर तक के 9 महीने के एरियर का भुगतान तीन बराबर मासिक किस्तों में किया जाएगा। कर्मचारियों को बढ़े हुए भत्ते का नकद लाभ अक्टूबर के वेतन के साथ नवंबर में मिलने लगेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अक्टूबर महीने के वेतन का भुगतान नवंबर में किया जाएगा और इसी वेतन के साथ बढ़े हुए महंगाई भत्ते की राशि भी नकद दी जाएगी। सरकार ने पेंशनर्स के लिए भी महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। पेंशनर्स के लिए यह बढ़ोतरी जुलाई 2026 से लागू होगी। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी बढ़ती महंगाई के बीच आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

    इस बढ़ोतरी के बाद मध्यप्रदेश के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगा। वहीं पेंशनर्स की महंगाई राहत में भी 2 प्रतिशत का इजाफा होगा। हालांकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में मध्यप्रदेश के कर्मचारी अभी भी पीछे रहेंगे। केंद्र सरकार ने 28 अक्टूबर को केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 63 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद मध्यप्रदेश में भी बढ़ोतरी की मांग तेज हो गई थी। राज्य सरकार के नए फैसले के बावजूद प्रदेश के कर्मचारी और अधिकारी केंद्रीय कर्मचारियों से 3 प्रतिशत कम महंगाई भत्ता प्राप्त करेंगे।

    महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की मांग को लेकर पेंशनर्स संगठनों की ओर से भी लगातार आवाज उठाई जा रही थी। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य सचिव और वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर लंबित महंगाई राहत जारी करने की मांग की थी। एसोसिएशन ने 1 जनवरी 2026 से लंबित 2 प्रतिशत और 1 जुलाई 2026 से 3 प्रतिशत महंगाई राहत का भुगतान जल्द करने की मांग रखी थी। संगठन के मुताबिक कुल 5 प्रतिशत महंगाई राहत लंबित थी।

    एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी ने कहा कि महंगाई राहत पेंशनर्स के लिए बढ़ती कीमतों के असर को कम करने का महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा है। दवाइयों से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक लगातार बढ़ते खर्च के बीच पेंशनर्स को मिलने वाली राहत उनकी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।

    सरकार के ताजा फैसले से कर्मचारियों और पेंशनर्स को कुछ आर्थिक राहत जरूर मिलेगी। अब कर्मचारियों की नजर एरियर की तीन किस्तों के भुगतान और बढ़े हुए भत्ते के वेतन में शामिल होने पर रहेगी। वहीं केंद्र और राज्य के महंगाई भत्ते के बीच बना अंतर भी कर्मचारियों के लिए आगे मांग का विषय बना रह सकता है।

  • इंदौर में 25 वर्षीय युवक ने दी जान, आखिरी वीडियो में पत्नी और ससुराल पक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

    इंदौर में 25 वर्षीय युवक ने दी जान, आखिरी वीडियो में पत्नी और ससुराल पक्ष पर लगाए गंभीर आरोप


    इंदौर । इंदौर के लसूड़िया इलाके में एक 25 वर्षीय युवक की आत्महत्या का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। युवक ने गुरुवार देर रात अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। घटना का पता उस समय चला जब उसकी चाची उसे खाना खाने के लिए बुलाने कमरे में पहुंचीं। वहां युवक फंदे पर लटका हुआ मिला। परिजन उसे तत्काल नजदीकी नर्सिंग होम लेकर पहुंचे। इसके बाद उसे एमवाय अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। इस मामले में सबसे अहम बात यह सामने आई है कि युवक ने जान देने से पहले एक वीडियो बनाया था। इसमें उसने अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष के कुछ लोगों पर मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप लगाए हैं।

    लसूड़िया पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान रवि सोलंकी उम्र 25 वर्ष के रूप में हुई है। वह जगदीश सोलंकी का बेटा था और श्रीराम नगर में रहता था। परिजनों ने पुलिस को बताया कि रवि देर रात ऑटो लेकर घर पहुंचा था। घर आने के बाद वह ऊपर बने अपने कमरे में चला गया। परिवार के लोगों को उस समय किसी अनहोनी की आशंका नहीं हुई। रात करीब दो बजे जब उसकी चाची उसे खाना खाने के लिए बुलाने कमरे में पहुंचीं तो वह फंदे पर लटका मिला। इसके बाद घर में अफरा तफरी मच गई और परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे।

    परिवार के मुताबिक रवि की पत्नी करीब आठ दिन पहले विवाद के बाद अपने मायके बागली चली गई थी। इसके बाद वह वापस नहीं लौट रही थी। पत्नी के घर छोड़कर जाने और वापस नहीं आने की बात को लेकर रवि परेशान चल रहा था। परिजनों ने बताया कि इस पारिवारिक विवाद का असर उसकी मानसिक स्थिति पर भी पड़ रहा था। हालांकि आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह क्या थी इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले में सामने आए वीडियो ने जांच को एक नया पहलू दे दिया है। बताया गया है कि रवि ने आत्महत्या से पहले अपना वीडियो रिकॉर्ड किया था। इसमें उसने पत्नी के अलावा भोपाल में रहने वाले अपने साढ़ू भाई और ससुराल पक्ष के अन्य लोगों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। वीडियो में उसने इन लोगों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार भी बताया है। युवक के इन आरोपों के सामने आने के बाद पुलिस वीडियो की सामग्री और उसमें कही गई बातों की जांच कर रही है।

    पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रवि और उसकी पत्नी के बीच विवाद किस बात को लेकर हुआ था। पत्नी के मायके जाने के बाद दोनों के बीच क्या बातचीत हुई थी और युवक ने वीडियो में जिन लोगों का उल्लेख किया है उनकी इस पूरे मामले में क्या भूमिका रही। इन सभी बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल युवक की मौत के मामले में पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। वीडियो में लगाए गए आरोपों को जांच के बाद ही प्रमाणित माना जा सकेगा।

  • पार्षद पति पर हमले के बाद गरमाया मामला, एक पक्ष ने मारपीट तो दूसरे ने पिस्टल दिखाने का लगाया आरोप

    पार्षद पति पर हमले के बाद गरमाया मामला, एक पक्ष ने मारपीट तो दूसरे ने पिस्टल दिखाने का लगाया आरोप


    इंदौर । इंदौर के ऊषागंज इलाके में एक पार्षद के पति के घर में घुसकर मारपीट और तोड़फोड़ करने का मामला सामने आया है। गीतांजलि अपार्टमेंट में हुई इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। प्रॉपर्टी कारोबारी और पार्षद पति सुमित तलरेजा ने चार लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि पुराने विवाद को लेकर आरोपी उनके घर पहुंचे और गाली गलौज करते हुए हमला करने की कोशिश की। इस दौरान घर के बाहर लगा पार्षद का बोर्ड चाकू से फाड़ दिया गया। गमले और अन्य सामान भी तोड़ दिए गए। वहीं दूसरे पक्ष ने भी सुमित तलरेजा पर पिस्टल दिखाकर डराने का आरोप लगाया है। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों और आरोपों को ध्यान में रखते हुए जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के मुताबिक सुमित तलरेजा अपनी पत्नी पंखुड़ी तलरेजा के साथ थाने पहुंचे और घटना की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 29 अक्टूबर को वे अपने घर पर मौजूद थे। इसी दौरान उनका पुराना परिचित प्रशांत करौसिया अपने तीन साथियों अंशए सुमित खरे और विशाल बौरासी के साथ वहां पहुंच गया। आरोप है कि चारों पुराने विवाद के समझौते को लेकर उनसे बातचीत करने आए थे लेकिन कुछ ही देर में विवाद बढ़ गया। इसके बाद आरोपियों ने गाली गलौज शुरू कर दी और उनके साथ मारपीट करने के लिए आगे बढ़े।

    सुमित की शिकायत के अनुसार आरोपियों ने घर के बाहर लगा पार्षद का बोर्ड चाकू से फाड़ दिया। स्थिति बिगड़ती देख सुमित खुद को बचाने के लिए मल्टी की दूसरी मंजिल पर स्थित अपने फ्लैट में चले गए। इसके बाद भी आरोपियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उन्होंने फ्लैट के दरवाजे पर लात मारी और बाहर रखे गमलों को तोड़ना शुरू कर दिया। आरोप है कि वहां खड़ी गाड़ियों और कुर्सियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। इस दौरान सुमित की ओर गमला फेंकने और उन्हें तथा उनकी पत्नी को जान से मारने की धमकी देने की बात भी शिकायत में कही गई है।

    घटना के दौरान सुमित और उनकी पत्नी ने शोर मचाया तो आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। लोगों की मौजूदगी बढ़ने के बाद आरोपी वहां से भाग निकले। इसके बाद दंपति ने पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पुलिस ने सुमित की शिकायत पर चार लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    हालांकि इस घटना में दूसरा पक्ष भी सामने आया है। दूसरे पक्ष का आरोप है कि विवाद की शुरुआत सुमित तलरेजा ने की थी और उन्होंने पिस्टल दिखाकर डराने की कोशिश की थी। इस आरोप के सामने आने के बाद मामला और पेचीदा हो गया है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बयान और उनके आरोपों की जांच कर रही है। घटना के पीछे पुराने विवाद और समझौते को लेकर हुई कहासुनी को अहम वजह माना जा रहा है। पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद किस बात से शुरू हुआ और घटना के दौरान किस पक्ष की क्या भूमिका रही।

  • सेंसेक्स-निफ्टी में मामूली बढ़त के बावजूद शेयर बाजार में बिकवाली हावी, कच्चे तेल और ग्लोबल गिरावट ने बढ़ाई चिंता

    सेंसेक्स-निफ्टी में मामूली बढ़त के बावजूद शेयर बाजार में बिकवाली हावी, कच्चे तेल और ग्लोबल गिरावट ने बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को कारोबार के दौरान दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में कारोबार करते नजर आए, लेकिन व्यापक बाजार में बिकवाली का रुख बना रहा। खासतौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली देखने को मिली। आईटी और फार्मा कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को गिरावट से बचाने में मदद की, लेकिन बाजार की कुल स्थिति कमजोर बनी रही।

    शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 74,422.42 के ऊपरी स्तर और 74,099.33 के निचले स्तर के बीच कारोबार कर रहा था। इसी तरह निफ्टी ने 23,019.25 का उच्चतम और 22,919.85 का न्यूनतम स्तर दर्ज किया। प्रमुख सूचकांकों में मामूली तेजी के बावजूद ज्यादातर शेयरों में गिरावट ने बाजार की वास्तविक स्थिति को कमजोर बनाए रखा।

    बाजार में बिकवाली का अंदाजा मार्केट ब्रेड्थ के आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शुरुआती कारोबार के दौरान कुल 3,076 शेयरों में कारोबार हो रहा था। इनमें से 934 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि 2,053 शेयर गिरावट में थे। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कुल 3,541 शेयरों में कारोबार हुआ। इनमें 1,234 शेयरों में तेजी और 2,097 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट था कि बाजार में तेजी का दायरा सीमित था और अधिकांश शेयरों पर बिकवाली का दबाव बना हुआ था।

    बाजार में कमजोरी की एक प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी रही। शुक्रवार सुबह ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 1.20 प्रतिशत बढ़कर 112.13 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत में लगभग 1.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 103.15 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल के महंगे होने से भारत जैसे आयात पर निर्भर देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से तेल की कीमतों में तेजी को बाजार के लिए अहम चिंता माना जा रहा है।

    दूसरा बड़ा कारण एशियाई शेयर बाजारों में आई गिरावट रही। शुक्रवार को जापान का निक्केई 225 करीब 2.58 प्रतिशत टूट गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.87 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था। ताइवान के बाजार में 2.53 प्रतिशत और इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट में 1.61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले अमेरिकी बाजार में भी नैस्डैक करीब 1.42 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ था। वैश्विक बाजारों के इस रुख का असर भारतीय निवेशकों की धारणा पर भी दिखाई दिया।

    तीसरा महत्वपूर्ण संकेत बाजार में बढ़ती अस्थिरता का रहा। इंडिया VIX शुक्रवार सुबह करीब 3.24 प्रतिशत उछलकर 15.61 के स्तर पर पहुंच गया। इसे बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव और निवेशकों की अनिश्चितता का संकेतक माना जाता है। इसमें बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि निवेशक आने वाले समय में बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं। इसका असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर विशेष रूप से पड़ सकता है।

    हालांकि, बिकवाली के बीच आईटी और फार्मा शेयरों में खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1.37 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा में 0.96 प्रतिशत की तेजी रही। हेल्थकेयर इंडेक्स भी 0.82 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स 1.78 प्रतिशत गिर गया। निफ्टी बैंक में 0.27 प्रतिशत, निफ्टी मेटल में 0.67 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.32 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।

    इस तरह शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में प्रमुख सूचकांकों की मामूली बढ़त और व्यापक स्तर पर जारी बिकवाली के बीच अंतर दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी बाजारों की कमजोरी और इंडिया VIX में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

  • अनुकंपा नियुक्ति के बाद रिश्वत का आरोप, लोकायुक्त के शिकंजे में आए उपयंत्री पर निगम करेगा कार्रवाई

    अनुकंपा नियुक्ति के बाद रिश्वत का आरोप, लोकायुक्त के शिकंजे में आए उपयंत्री पर निगम करेगा कार्रवाई


    इंदौर । इंदौर नगर निगम में रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त पुलिस के हाथों पकड़े गए उपयंत्री हर्ष गहलोत की मुश्किलें अब और बढ़ सकतीI हैं। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद निगम प्रशासन ने भी उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों के स्तर पर उसे फील्ड से हटाने को लेकर जल्द निर्णय लिया जा सकता है। हर्ष गहलोत को बुधवार को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया था। आरोप है कि उसने टैंकर के बिल का भुगतान कराने के लिए लॉग बुक का सत्यापन करने के बदले रिश्वत की मांग की थी। लोकायुक्त पुलिस ने उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की है।

    लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक इस मामले में शिकायतकर्ता सोहेल पटेल नायता मुंडला क्षेत्र का निवासी है और पेटी कॉन्ट्रैक्टर के रूप में काम करता है। उसके टैंकर नगर निगम के काम में लगाए जाते हैं। टैंकरों के बिल का भुगतान कराने के लिए लॉग बुक का सत्यापन जरूरी था। इसी सिलसिले में वह जोन कार्यालय पहुंचा था। आरोप है कि उपयंत्री हर्ष गहलोत ने लॉग बुक का सत्यापन करने के बदले उससे 6 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। बातचीत के बाद दोनों के बीच 5 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। इसके बाद सोहेल ने लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की। शिकायत की जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया के बाद बुधवार को जैसे ही हर्ष ने तय रकम ली लोकायुक्त की टीम ने उसे पकड़ लिया।

    इस कार्रवाई के बाद नगर निगम प्रशासन भी मामले को गंभीरता से देख रहा है। निगम के अधिकारी उपयंत्री के खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई करने की तैयारी में हैं। उसे फील्ड की जिम्मेदारी से हटाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय होना बाकी है। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अब विभागीय जांच और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।

    बताया जाता है कि हर्ष गहलोत को पिता की मौत के बाद नगर निगम में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। बाद में कमिश्नर के आदेश पर उसे उपयंत्री के पद पर पदस्थ किया गया। वह जोन 13 में सहायक यंत्री प्रदीप के अधीन काम कर रहा था। नौकरी मिलने के बाद उसने निगम के अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारी संभाली थी। हाल ही में उसका तबादला कर उसे जोन 13 में पदस्थ किया गया था।

    हर्ष की पिछली पदस्थापना वार्ड 75 में थी। यहां एक पार्षद के साथ उसका विवाद होने की बात सामने आई थी। इसके बाद उसका तबादला वार्ड 74 के अंतर्गत आने वाले जोन 13 में कर दिया गया था। अब इसी जोन में रिश्वत लेने के आरोप में लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद उसका नाम फिर चर्चा में है।

    शिकायतकर्ता सोहेल पटेल अपने टैंकरों के भुगतान से जुड़ी लॉग बुक का सत्यापन कराने के लिए लंबे समय से जोन कार्यालय के चक्कर लगा रहा था। इसी काम के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद निगम प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि उसे फील्ड से हटाया जाता है तो यह लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद निगम स्तर पर उठाया गया पहला बड़ा कदम होगा।