Author: bharati

  • सेहत और ऊर्जा का राज महिलाओं के लिए ये सात फूड्स बेहद जरूरी

    सेहत और ऊर्जा का राज महिलाओं के लिए ये सात फूड्स बेहद जरूरी


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं अक्सर अपने परिवार की देखभाल करते करते खुद की सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। इसका असर यह होता है कि उनके शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और धीरे धीरे कमजोरी हार्मोन असंतुलन और कई गंभीर बीमारियां उन्हें घेर लेती हैं। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं अपने दैनिक आहार में कुछ खास पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करें ताकि उनका शरीर मजबूत और स्वस्थ बना रहे।

    सबसे पहले बात करें रागी की तो यह कैल्शियम आयरन और फाइबर से भरपूर होती है। रागी का नियमित सेवन हड्डियों को मजबूत बनाता है और शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है। इसे रोटी चीला या लड्डू के रूप में आसानी से खाया जा सकता है। इसके अलावा यह बाल और त्वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है।

    दूसरा महत्वपूर्ण आहार है आंवला जो विटामिन सी का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और संक्रमण से बचाने में मदद करता है। आंवले को जूस चटनी या मुरब्बे के रूप में रोजाना लिया जा सकता है।

    तीसरे स्थान पर चिया सीड्स आते हैं जो कैल्शियम और फाइबर से भरपूर होते हैं। यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और वजन को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। चिया सीड्स को पानी दूध या स्मूदी में मिलाकर आसानी से सेवन किया जा सकता है।

    चौथे नंबर पर अलसी के बीज हैं जो ओमेगा 3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत होते हैं। यह दिल को स्वस्थ रखते हैं और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही हार्मोन संतुलन में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है और यह पीसीओडी जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माने जाते हैं।

    पांचवें स्थान पर कद्दू के बीज आते हैं जो मैग्नीशियम और जिंक से भरपूर होते हैं। यह शरीर की कई जरूरी क्रियाओं को संतुलित रखते हैं और थायराइड जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करते हैं। रोजाना एक चम्मच कद्दू के बीज का सेवन शरीर के लिए लाभदायक होता है।

    छठे नंबर पर अखरोट का नाम आता है जो मस्तिष्क को मजबूत बनाने और याददाश्त को बेहतर करने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से नसों की कमजोरी दूर होती है और बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।

    सातवें और आखिरी स्थान पर चुकंदर है जो शरीर में खून की कमी को दूर करने में बेहद कारगर माना जाता है। महिलाओं में एनीमिया की समस्या आम होती है ऐसे में चुकंदर का सेवन रक्त की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है। इसे सलाद जूस या रोटी के रूप में आहार में शामिल किया जा सकता है।

    इन सात चीजों को अपने रोजाना के आहार में शामिल करके महिलाएं न केवल अपनी सेहत को बेहतर बना सकती हैं बल्कि लंबे समय तक ऊर्जा और संतुलन बनाए रख सकती हैं। सही खानपान ही स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत नींव है और छोटी छोटी आदतें ही बड़े बदलाव लाती हैं।

  • अयोध्या में कब मनेगी राम नवमी जानिए तिथि मुहूर्त और सूर्य तिलक का समय

    अयोध्या में कब मनेगी राम नवमी जानिए तिथि मुहूर्त और सूर्य तिलक का समय


    नई दिल्ली । पूरे देश में राम नवमी को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं लेकिन इस वर्ष तिथि को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विशेष रूप से अयोध्या में इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि यह भगवान श्रीराम की जन्मस्थली है और यहां राम नवमी का उत्सव अत्यंत भव्य रूप में मनाया जाता है।

    पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च 2026 को सुबह 11 बजकर 46 मिनट पर प्रारंभ हो रही है और 27 मार्च 2026 को सुबह 10 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगी। भगवान श्रीराम का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था इसलिए कई श्रद्धालु 26 मार्च को भी राम नवमी मना रहे हैं। वहीं उदया तिथि के आधार पर 27 मार्च को भी इस पर्व का आयोजन किया जा रहा है जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

    धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के अनुसार अयोध्या में राम नवमी 27 मार्च 2026 शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसी दिन राम मंदिर में रामलला का भव्य जन्मोत्सव आयोजित किया जाएगा। दोपहर 12 बजकर 27 मिनट पर मध्याह्न मुहूर्त में भगवान श्रीराम का जन्म उत्सव मनाया जाएगा जो इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण क्षण माना जाता है।

    राम नवमी के अवसर पर अयोध्या में एक विशेष आकर्षण सूर्य तिलक होता है। इस बार भी वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से सूर्य की किरणें सीधे भगवान राम के मस्तक पर पड़ेंगी और यह अद्भुत दृश्य लगभग चार से पांच मिनट तक दिखाई देगा। यह नजारा लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विज्ञान का अनूठा संगम होता है जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग अयोध्या पहुंचते हैं।

    राम नवमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। यह दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्म का प्रतीक है जो धर्म सत्य और मर्यादा के आदर्श माने जाते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में सत्य और धर्म का मार्ग ही सर्वोपरि है और अंततः अच्छाई की ही जीत होती है।

    अयोध्या में इस अवसर पर मंदिरों को भव्य रूप से सजाया जाता है और विशेष पूजा अर्चना भजन कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालु बड़ी संख्या में सरयू नदी में स्नान कर भगवान राम के दर्शन करते हैं और अपने जीवन में सुख समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।

    इस प्रकार राम नवमी 2026 का पर्व अयोध्या में 27 मार्च को अत्यंत श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि आस्था और संस्कृति का भी प्रतीक है जो हर भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा लेकर आता है।

  • मां जगदम्बा की पूजा से लेकर शरीर की देखभाल तक, दूब घास का अद्भुत उपयोग

    मां जगदम्बा की पूजा से लेकर शरीर की देखभाल तक, दूब घास का अद्भुत उपयोग

    नई दिल्ली । घास का महत्व केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य और शरीर की देखभाल में भी अहम भूमिका निभाती है। विशेष रूप से दूब घास, जिसे आयुर्वेद में ‘अमृता’ की उपाधि दी गई है, शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी मानी जाती है। नवरात्रि में मां जगदम्बा की पूजा में दूब घास का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि बिना दूब के पूजन अधूरा माना जाता है। घर में कन्या पूजन के समय भी दूब घास का इस्तेमाल पैर छूने और सम्मान के लिए किया जाता है।

    धार्मिक महत्व के अलावा दूब घास के गुणों को आयुर्वेद में कई तरह से दर्शाया गया है। यह कफ और वात को संतुलित करने वाली औषधि मानी जाती है। यदि शरीर में वात या कफ असंतुलित हैं तो दूब घास का उचित सेवन इन दोषों को संतुलित करने में मदद करता है। लेकिन इसके सही उपयोग से पहले इसके आंतरिक और बाहरी गुणों को जानना बेहद आवश्यक है।

    बाहरी उपयोग:


    दूब घास में रक्त को रोकने की क्षमता होती है। चोट लग जाने पर यदि रक्त नहीं रुक रहा है या पुराने घाव में बार-बार खून आता है, तो दूब का लेप किया जा सकता है। यह घाव को भरने और संक्रमण से बचाने में भी मदद करता है। गर्मियों में नाक से खून आना या सिरदर्द जैसी समस्याओं में दूब के रस को नाक में डालना आराम देता है। इसके अलावा, मुल्तानी मिट्टी के साथ मिलाकर सूंघने से भी राहत मिलती है। यदि गर्मियों में त्वचा जलने लगती है, तो दूब का लेप त्वचा को ठंडक और आराम प्रदान करता है।

    आंतरिक उपयोग:
    दूब घास का आंतरिक सेवन पेट संबंधी परेशानियों और मासिक धर्म के दर्द में लाभकारी होता है। इसके लिए दूब का रस लेने से पहले चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है। आयुर्वेद में इसे पाचन सुधारने और शरीर को पोषण देने वाला उपाय माना गया है। सीमित मात्रा में इसका नियमित सेवन शरीर को ऊर्जा, मजबूती और आंतरिक शांति प्रदान करता है।

    ध्यान देने योग्य बात यह है कि दूब घास का अधिक सेवन या गलत तरीके से इस्तेमाल करने से प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकते हैं। इसलिए बाहरी या आंतरिक उपयोग में आयुर्वेदिक और चिकित्सकीय मार्गदर्शन को अपनाना आवश्यक है।

    इस प्रकार दूब घास का महत्व सिर्फ धार्मिक पूजा में ही नहीं, बल्कि शरीर और स्वास्थ्य के लिए भी अद्वितीय है। बाहरी लेप के रूप में इसका प्रयोग चोट, जलन और रक्तस्राव में राहत देता है, वहीं आंतरिक रूप में इसका सेवन पेट, मासिक धर्म और दोष संतुलन के लिए उपयोगी है। नवरात्रि या किसी भी दिन इसे सही तरीके से अपनाकर व्यक्ति स्वास्थ्य और आध्यात्मिक लाभ दोनों प्राप्त कर सकता है।

  • घर पर बनाएं स्वादिष्ट दानेदार सूजी का हलवा भंडारे जैसा स्वाद पाएं आसान टिप्स के साथ

    घर पर बनाएं स्वादिष्ट दानेदार सूजी का हलवा भंडारे जैसा स्वाद पाएं आसान टिप्स के साथ

    नई दिल्ली:  नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद खास माना जाता है। इस दौरान कन्या पूजन के साथ बनाए जाने वाले भोग में सूजी का हलवा विशेष स्थान रखता है। सूजी का हलवा को आमतौर पर भंडारे जैसा स्वादिष्ट और दानेदार बनाने की कोशिश की जाती है लेकिन घर पर वही स्वाद और बनावट पाना कई लोगों के लिए मुश्किल होता है।

    दरअसल भंडारे जैसा हलवा बनाने के पीछे कुछ खास तकनीक और सही अनुपात का बड़ा योगदान होता है। अगर सामग्री और प्रक्रिया का सही ध्यान रखा जाए तो घर पर भी हलवाई जैसा स्वाद और बनावट हासिल की जा सकती है।

    सबसे पहले सामग्री का सही संतुलन जरूरी होता है। इसके लिए एक कप सूजी एक कप देसी घी एक कप चीनी और तीन कप पानी लिया जाता है। यह अनुपात हलवे को न तो ज्यादा सूखा बनने देता है और न ही चिपचिपा। इसी के साथ चाशनी तैयार करने में भी एक अहम भूमिका होती है। पानी में चीनी इलायची और केसर डालकर हल्की चाशनी तैयार की जाती है लेकिन इसे एक तार की चाशनी तक नहीं पकाना चाहिए।

    इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण आता है सूजी को भूनना। एक भारी तले वाले पैन में देसी घी गर्म करके उसमें सूजी डाली जाती है। इस दौरान अगर सूजी के साथ थोड़ी मात्रा में बेसन मिलाया जाए तो हलवे का रंग और बनावट और भी बेहतर हो जाती है। सूजी को धीमी आंच पर तब तक भूनना चाहिए जब तक वह सुनहरी भूरी न हो जाए और उसमें से घी अलग होता दिखे। इस प्रक्रिया में जल्दबाजी करने से हलवे का स्वाद बिगड़ सकता है।

    जब सूजी अच्छे से भुन जाए तो तैयार की गई गर्म चाशनी को धीरे-धीरे उसमें मिलाया जाता है। इस समय सावधानी रखना जरूरी है क्योंकि मिश्रण उछल सकता है। लगातार चलाते रहने से गुठलियां नहीं बनतीं और हलवा एकसार बनता है।

    हलवे में स्वाद और पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इसमें काजू और बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स डाले जाते हैं। अंत में एक चम्मच घी डालने से हलवे में एक सुंदर चमक आती है। इसके बाद इसे ढककर कुछ मिनट के लिए धीमी आंच पर छोड़ दिया जाता है जिससे सूजी के दाने अच्छी तरह फूल जाते हैं और हलवा दानेदार बन जाता है।

    इस तरह कुछ आसान टिप्स और सही विधि अपनाकर आप घर पर भी भंडारे जैसा स्वादिष्ट और दानेदार सूजी का हलवा बना सकते हैं। यह न केवल स्वाद में बेहतरीन होता है बल्कि पूजा के लिए एक शुद्ध और पारंपरिक प्रसाद के रूप में भी खास माना जाता है।

  • न्यायपालिका पर दबाव की कोशिश पर CJI का कड़ा संदेश कानून से बच नहीं पाएंगे दोषी

    न्यायपालिका पर दबाव की कोशिश पर CJI का कड़ा संदेश कानून से बच नहीं पाएंगे दोषी

    नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और दबाव बनाने की कोशिश का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक केस से जुड़े व्यक्ति ने सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant के परिवार से संपर्क करने की हिम्मत दिखाई इस घटना पर चीफ जस्टिस ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संदेश दिया कि ऐसे तत्वों को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा चाहे वे देश के बाहर ही क्यों न हों

    मामला उस समय सामने आया जब एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था जिसने सामान्य श्रेणी से होने के बावजूद बौद्ध धर्म अपनाने के बाद अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने का लाभ मांगा था इस पर अदालत ने पहले ही हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि वह अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र से जुड़े नियमों और दिशा निर्देशों को कोर्ट में प्रस्तुत करे

    सुनवाई के दौरान Surya Kant ने भरी अदालत में इस घटना का खुलासा किया उन्होंने बताया कि संबंधित व्यक्ति ने उनके भाई को फोन कर उनके द्वारा दिए गए आदेश पर सवाल उठाए यह न केवल एक गंभीर हस्तक्षेप था बल्कि न्यायपालिका की गरिमा को चुनौती देने जैसा भी था

    इस घटना से नाराज चीफ जस्टिस ने कहा कि वह पिछले 23 वर्षों से ऐसे दबाव और हस्तक्षेप करने वाले तत्वों से निपटते आ रहे हैं और इस तरह की हरकतों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा उन्होंने दो टूक कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह उस व्यक्ति को देश के बाहर से भी पकड़ लेंगे

    चीफ जस्टिस ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की संभावना पर भी विचार करने का निर्देश दिया उन्होंने हरियाणा सरकार के वकील को निर्देश दिया कि उस व्यक्ति से इस हरकत के लिए जवाब मांगा जाए और स्पष्ट किया जाए कि उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए

    यह मामला न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है और चीफ जस्टिस का यह सख्त रुख इस बात का संकेत है कि न्याय प्रणाली पर किसी भी तरह का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा

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  • कल है दुर्गा अष्टमी 2026 इस शुभ मुहूर्त में करें कन्या पूजन मिलेगा मां महागौरी का आशीर्वाद

    कल है दुर्गा अष्टमी 2026 इस शुभ मुहूर्त में करें कन्या पूजन मिलेगा मां महागौरी का आशीर्वाद


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्र का पावन पर्व अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और अब भक्तों को महाअष्टमी का बेसब्री से इंतजार है। दुर्गा अष्टमी का दिन नवरात्र के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है और कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से पूजा करने पर जीवन में सुख समृद्धि और खुशहाली आती है।

    पंचांग के अनुसार इस वर्ष अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। ऐसे में महाअष्टमी का पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

    कन्या पूजन के लिए इस बार तीन प्रमुख शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 16 मिनट से लेकर 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त सुबह 10 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से लेकर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। इन सभी समयों में श्रद्धालु कन्या पूजन कर सकते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

    इस वर्ष दुर्गा अष्टमी पर विशेष योग का भी संयोग बन रहा है जो इसे और अधिक शुभ बना रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है। यह योग शाम 4 बजकर 19 मिनट से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह तक रहेगा। ऐसे योग में किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है और जीवन में सफलता के मार्ग खुलते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र में अष्टमी और नवमी दोनों दिन कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जहां कन्याओं का सम्मान होता है वहां देवी का वास होता है। इसलिए इस दिन नौ कन्याओं को माता का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। उन्हें भोजन के रूप में हलवा पूरी और चने का प्रसाद दिया जाता है और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।

    कन्या पूजन केवल एक धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक भी है। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि समाज में महिलाओं का सम्मान और आदर करना कितना महत्वपूर्ण है। इस प्रकार दुर्गा अष्टमी का दिन श्रद्धा भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस शुभ अवसर पर सही मुहूर्त में कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

  • सरकार का बड़ा फैसला उड़ान स्कीम से देश के 100 नए एयरपोर्ट्स विकसित होंगे कनेक्टिविटी होगी मजबूत

    सरकार का बड़ा फैसला उड़ान स्कीम से देश के 100 नए एयरपोर्ट्स विकसित होंगे कनेक्टिविटी होगी मजबूत


    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना यानी उड़ान योजना के संशोधित संस्करण को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत 28,840 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय तय किया गया है और इसका उद्देश्य देश के छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों में हवाई संपर्क को मजबूत करना है।

    यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी और इसका मुख्य फोकस उन क्षेत्रों पर होगा जहां अभी तक हवाई सेवाएं सीमित या उपलब्ध नहीं हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के जरिए देश के 100 नए एयरपोर्ट विकसित किए जाएं, जिससे टियर 2 और टियर 3 शहरों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

    इस योजना से न केवल हवाई यात्रा सस्ती और सुलभ होगी बल्कि दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच भी बेहतर होगी। इससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    कैबिनेट के अनुसार इस योजना के तहत हवाई अड्डों के संचालन और रखरखाव के लिए भी सहायता दी जाएगी ताकि वे आर्थिक रूप से टिकाऊ बन सकें। इसके लिए प्रति हवाई अड्डा 3.06 करोड़ रुपये और हेलीपोर्ट के लिए 0.90 करोड़ रुपये की सहायता देने का प्रस्ताव है। लगभग 441 हवाई अड्डों के लिए यह सहायता दी जाएगी।

    इसके अलावा सरकार ने पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड बनाने का भी प्रस्ताव रखा है। इससे आपातकालीन सेवाओं और अंतिम मील कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जा सकेगा। इस योजना के तहत 15 करोड़ रुपये प्रति हेलीपैड की लागत तय की गई है।

    सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप है और इसका उद्देश्य देश के एयरोस्पेस सेक्टर को मजबूत करना है। साथ ही ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में भी यह योजना अहम भूमिका निभाएगी।

    योजना के तहत एयरलाइन ऑपरेटरों को वित्तीय सहायता भी दी जाएगी जिसे विजिबिलिटी फंड यानी वीजीएफ के रूप में जाना जाता है। इसके लिए 10,043 करोड़ रुपये का प्रावधान अगले 10 वर्षों में किया गया है ताकि एयरलाइंस कम लाभ वाले मार्गों पर भी सेवाएं जारी रख सकें।

    इसके साथ ही छोटे विमानों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने पवन हंस के लिए दो हेलीकॉप्टर और एलायंस एयर के लिए दो विमान खरीदने का भी प्रस्ताव रखा है। इससे देश में हवाई सेवाओं का नेटवर्क और मजबूत होगा।

  • आकाशवाणी में बड़ा बदलाव अब बजेगा ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण All India Radio

    आकाशवाणी में बड़ा बदलाव अब बजेगा ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण All India Radio


    नई दिल्ली: भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत संचालित All India Radio यानी आकाशवाणी ने अपने सुबह के प्रसारण में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है अब तक जहां सुबह की शुरुआत प्रतिष्ठित धुन और उसके बाद ‘वंदे मातरम’ के दो छंदों वाले संस्करण से होती थी वहीं अब इसकी जगह राष्ट्रीय गीत का पूरा संस्करण प्रसारित किया जाएगा यह बदलाव 26 मार्च 2026 से लागू हो रहा है

    आजादी के बाद से आकाशवाणी की यह परंपरा रही है कि वह अपने सुबह के कार्यक्रम की शुरुआत एक खास धुन से करता है और उसके बाद ‘वंदे मातरम’ का छोटा संस्करण बजाया जाता था जिसकी अवधि लगभग 65 सेकंड होती थी लेकिन गृह मंत्रालय द्वारा 28 जनवरी 2026 को जारी नए दिशानिर्देशों के बाद अब इस परंपरा में बदलाव किया गया है नए नियम के अनुसार अब राष्ट्रीय गीत के छह छंदों वाला पूर्ण संस्करण हर दिन प्रसारित किया जाएगा

    इस नए संस्करण की अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है और इसकी प्रस्तुति प्रसिद्ध हिंदी शास्त्रीय गायक Pandit Chandrashekhar Vaze द्वारा राग देश में की गई है उनकी आवाज में गाया गया यह संस्करण देशभक्ति की भावना और संगीत की गहराई को और अधिक प्रभावी बनाता है अब श्रोता पूरे गीत के माध्यम से ‘वंदे मातरम’ की मूल भावना और उसकी भावनात्मक शक्ति को बेहतर तरीके से अनुभव कर सकेंगे

    इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब देशभर के अलग अलग राज्यों के लिए ‘वंदे मातरम’ के क्षेत्रीय संस्करण भी तैयार किए जाएंगे इन संस्करणों में स्थानीय संगीत वाद्ययंत्रों और शास्त्रीय धुनों का उपयोग किया जाएगा जिससे हर क्षेत्र के लोग अपनी भाषा और संगीत के अंदाज में इस गीत को सुन और महसूस कर सकेंगे यह कदम भारत की सांस्कृतिक विविधता को सम्मान देने और उसे और अधिक समृद्ध बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है

    आकाशवाणी का यह नया कदम न केवल राष्ट्रीय गीत को एक नए स्वरूप में प्रस्तुत करेगा बल्कि नई पीढ़ी को भी इसकी पूरी गहराई से परिचित कराएगा इससे श्रोताओं को एक समग्र और समृद्ध देशभक्ति का अनुभव मिलेगा और सुबह की शुरुआत पहले से कहीं अधिक प्रेरणादायक और ऊर्जावान बन जाएगी

  • रामनवमी पर बड़ा फैसला 26 के साथ 27 मार्च को भी अवकाश Yogi Adityanath का ऐलान

    रामनवमी पर बड़ा फैसला 26 के साथ 27 मार्च को भी अवकाश Yogi Adityanath का ऐलान



    नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में रामनवमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने एक बड़ा और जनभावनाओं को ध्यान में रखने वाला निर्णय लिया है सरकार ने अब 26 मार्च के साथ साथ 27 मार्च 2026 को भी सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया है यह फैसला खासतौर पर उन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लिया गया है जो रामनवमी के अवसर पर बड़े पैमाने पर मंदिरों में दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं

    रामनवमी का मुख्य पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा और उस दिन पहले से ही छुट्टी तय थी लेकिन प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे अयोध्या मथुरा और वाराणसी में भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और सरकार ने अतिरिक्त अवकाश देने का निर्णय लिया है इस फैसले से लाखों श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन करने का अवसर मिलेगा और यात्रा के दौरान होने वाली भीड़ और दबाव को भी कम किया जा सकेगा

    सरकार का मानना है कि त्योहारों के दौरान मंदिरों में उमड़ने वाली भीड़ से न सिर्फ यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है बल्कि सुरक्षा बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है ऐसे में दो दिन की छुट्टी से श्रद्धालु आराम से अपने समय के अनुसार दर्शन पूजन कर सकेंगे और किसी तरह की जल्दबाजी या भीड़भाड़ से बचा जा सकेगा

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं खासकर अयोध्या जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जहां देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं प्रशासन को भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष प्रबंध करने के आदेश दिए गए हैं साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है

    यह निर्णय न केवल श्रद्धालुओं के लिए राहत लेकर आया है बल्कि सरकारी कर्मचारियों को भी अपने परिवार के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने का अवसर देगा आस्था और सुविधा के संतुलन को ध्यान में रखते हुए लिया गया यह कदम प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है

    रामनवमी जैसे बड़े पर्व पर लगातार दो दिन का अवकाश घोषित करना इस बात का संकेत है कि सरकार धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करते हुए आम जनता की सुविधा को भी प्राथमिकता दे रही है इस फैसले से त्योहार के दौरान होने वाली भीड़ और अव्यवस्था को नियंत्रित करने में प्रशासन को भी काफी मदद मिलेगी

  • मंडला की पहाड़ियों में विराजमान नक्खी माता हर मुराद होती है पूरी सदियों पुरानी आस्था

    मंडला की पहाड़ियों में विराजमान नक्खी माता हर मुराद होती है पूरी सदियों पुरानी आस्था


    मंडला । चैत्र नवरात्र 2026 के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के मंडला जिले में स्थित नक्खी माता मंदिर एक बार फिर श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मंडला निवास मार्ग पर बसे ग्राम बकौरी की पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यहां से जुड़ी जनश्रुतियां और चमत्कारिक मान्यताएं इसे विशेष बनाती हैं।

    प्राकृतिक सुंदरता से घिरे इस मंदिर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को अद्भुत शांति और ऊर्जा का अनुभव होता है। मान्यता है कि यहां विराजमान मां नक्खी माता स्वयं प्रकट हुई हैं और यह प्रतिमा मानव निर्मित नहीं है। यही कारण है कि इस मंदिर की महिमा दूर दूर तक फैली हुई है और सालभर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। कोई संतान सुख की कामना लेकर आता है तो कोई अपने जीवन में सुख समृद्धि और शांति की प्रार्थना करता है।

    चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान इस मंदिर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठता है। गांव के लोग मिलकर जवारे बोते हैं और कलश स्थापना के साथ माता का विशेष श्रृंगार किया जाता है। ढोल नगाड़ों और जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठता है और हर ओर भक्ति का उत्साह दिखाई देता है। खास बात यह है कि पहाड़ी पर स्थित होने के बावजूद श्रद्धालु सीधे अपने वाहनों से मंदिर तक पहुंच सकते हैं जिससे बुजुर्ग और दूरदराज से आने वाले भक्तों को सुविधा मिलती है।

    स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार जब से मां नक्खी माता इस गांव में विराजमान हुई हैं तब से गांव पर कभी कोई बड़ा संकट नहीं आया। ग्रामीण इसे देवी की कृपा मानते हैं और हर सुख दुख में सबसे पहले मां के दरबार में पहुंचते हैं। मंदिर में स्थापित पाषाण प्रतिमा के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालु भावविभोर हो जाते हैं और उन्हें मानसिक शांति का अनुभव होता है।

    इस मंदिर का इतिहास भी बेहद रोचक है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर का जीर्णोद्धार वर्ष 1997 में किया गया जिसके बाद इसे भव्य स्वरूप प्रदान किया गया। मंदिर के गुंबद को विशेष चौपहला आकार दिया गया और परिसर का विस्तार कर श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाएं विकसित की गईं।

    मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध जनश्रुति लोगों की आस्था को और गहरा करती है। कहा जाता है कि सैकड़ों वर्ष पहले जब लुटेरे इस गांव पर हमला करने पहुंचे तब देवी ने एक छोटी कन्या का रूप धारण कर गांव वालों को खतरे की सूचना दी। जब लुटेरे उस कन्या पर हमला करने दौड़े तो उसका शरीर पत्थर का हो गया। क्रोधित लुटेरों ने उस पत्थर की मूर्ति की नाक काट दी। तभी से देवी को नक्खी माई के नाम से जाना जाने लगा और यह प्रतिमा स्वयं प्रकट मानी जाती है।

    आज नक्खी माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि आस्था विश्वास और भक्ति का जीवंत प्रतीक बन चुका है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु अपने साथ एक उम्मीद लेकर आता है और मां के आशीर्वाद के साथ लौटता है। अगर आप भी इस नवरात्र में आध्यात्मिक शांति और दिव्यता का अनुभव करना चाहते हैं तो इस पावन धाम के दर्शन आपके लिए एक विशेष अनुभव साबित हो सकते हैं।