Author: bharati

  • 504 करोड़ के बैंक घोटाले में छह अफसरों पर चार्जशीट, रिश्वत और नियमों की अनदेखी के आरोप

    504 करोड़ के बैंक घोटाले में छह अफसरों पर चार्जशीट, रिश्वत और नियमों की अनदेखी के आरोप

    चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और संस्थाओं से जुड़े 504 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में छह अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। जांच एजेंसी ने साकेत कुमार, राम कुमार सिंह, पंकज अग्रवाल, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन पर बैंक अधिकारियों तथा अन्य आरोपियों के साथ कथित आपराधिक साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। चार्जशीट में सरकारी धन को निजी बैंकों में स्थानांतरित कराने, बैंक चयन और एफडी निवेश से जुड़े नियमों की अनदेखी तथा वित्त विभाग की निर्धारित सीमाओं को दरकिनार करने जैसे आरोप शामिल हैं।

    जांच के मुताबिक अधिकारियों पर सरकारी धन के निवेश में प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने के साथ-साथ कथित तौर पर रिश्वत या अन्य अनुचित लाभ लेने के आरोप भी लगाए गए हैं। मामले में सबूत छिपाने और वित्तीय फैसलों के जरिए कुछ निजी बैंक अधिकारियों को फायदा पहुंचाने की बात भी चार्जशीट में कही गई है।

    साकेत कुमार के संबंध में आरोप है कि उन्होंने 16 जून 2025 से 10 अप्रैल 2026 के बीच विकास एवं पंचायत विभाग के आयुक्त एवं सचिव के पद पर रहते हुए हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। जांच के अनुसार, एक निजी बैंक के पूर्व अधिकारी की सिफारिश पर एचपीजीसीएल पेंशन फंड ट्रस्ट से 25 करोड़ रुपये निकाले गए और उन्हें संबंधित बैंक में जमा कराया गया।

    पंचकूला नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राम कुमार सिंह को लेकर भी चार्जशीट में वित्तीय लेनदेन का उल्लेख है। जांच के अनुसार, 11 जनवरी 2026 को उनके आवास पर 50 लाख रुपये पहुंचाए गए। इसके बाद 22 जनवरी को दिल्ली में उनके बेटे प्रशांत सिंह को तीन अलग-अलग किश्तों में कुल दो करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप है। इन किश्तों में एक करोड़ रुपये, 50 लाख रुपये और 50 लाख रुपये शामिल थे।

    हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष विनीत गर्ग के मामले में भी कथित अनुचित लाभ का उल्लेख किया गया है। जांच में आरोप लगाया गया कि दीपावली से पहले एक बैंक अधिकारी के माध्यम से उनके घर 50-50 ग्राम वजन के दो सोने के सिक्के पहुंचाए गए। चार्जशीट में पंकज अग्रवाल के लिए होटल में पार्टियों और नृत्य कार्यक्रमों के आयोजन का भी उल्लेख है। इन घटनाओं को सरकारी वित्तीय फैसलों से जुड़े कथित अनुचित लाभ के संदर्भ में जांचा गया।

    एचपीजीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष मोहम्मद शाइन पर भी बैंक को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। चार्जशीट के मुताबिक नवंबर 2024 में इंडसइंड बैंक में करीब 108.46 करोड़ रुपये की एफडी समय से पहले तुड़वाई गई। इसमें से 50 करोड़ रुपये दूसरे निजी बैंक में जमा कराए गए। जांच एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया से एचपीजीसीएल को करीब 1.66 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ।

    वहीं, प्रदीप कुमार पर ब्याज दरों से संबंधित अनियमितताओं के जरिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है। चार्जशीट के अनुसार इस मामले में बोर्ड को करीब 159.86 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

    कुल मिलाकर जांच में सरकारी संस्थाओं के बैंक खातों और सावधि जमा से जुड़े फैसलों, बैंक चयन, धन हस्तांतरण और कथित निजी लाभ के बीच संबंधों की पड़ताल की गई है। छह अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप फिलहाल चार्जशीट में दर्ज आरोप हैं। मामले में इन आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जांच होगी और अंतिम जिम्मेदारी अदालत के निर्णय के आधार पर तय होगी।

  • सीजेपी प्रदर्शन में एआई से महिला की फोटो से छेड़छाड़ का आरोप, चार नामों के साथ एफआईआर दर्ज

    सीजेपी प्रदर्शन में एआई से महिला की फोटो से छेड़छाड़ का आरोप, चार नामों के साथ एफआईआर दर्ज

    नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान एक महिला की निजी तस्वीर के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। महिला की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उसकी निजी तस्वीर को एआई और फेस-स्वैप टूल की मदद से बदलकर फर्जी तस्वीर तैयार की गई और बाद में उसका इस्तेमाल प्रदर्शन से जुड़े पोस्टर और बैनर में किया गया।

    महिला ने साइबर पुलिस थाने में दी शिकायत में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने उसकी तस्वीर का उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किया। उसके मुताबिक, मूल तस्वीर में डिजिटल तरीके से बदलाव कर उसे आपत्तिजनक और गलत रूप दिया गया। महिला का कहना है कि इस तस्वीर का इस्तेमाल उसकी सामाजिक छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।

    शिकायत के अनुसार, कथित तौर पर तैयार की गई फर्जी तस्वीर के बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर जंतर-मंतर पर लगाए गए। महिला ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उसके खिलाफ अमर्यादित नारे भी लगाए गए। उसने कहा कि उसकी निजी तस्वीर को सार्वजनिक प्रदर्शन में इस तरह इस्तेमाल किए जाने से उसकी गरिमा प्रभावित हुई और उसे सामाजिक स्तर पर नुकसान उठाना पड़ा।

    महिला ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान वीडियो बनाए गए और बाद में उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। शिकायत में विशेष रूप से इंस्टाग्राम के माध्यम से वीडियो वायरल किए जाने का उल्लेख है। महिला के अनुसार, तस्वीर और वीडियो के प्रसार से उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा तथा निजी जीवन से जुड़ी सामग्री उसकी सहमति के बिना सार्वजनिक हुई।

    इस मामले में एफआईआर में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के नाम दर्ज किए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन चारों को एफआईआर में आरोपी नहीं बनाया गया है। एफआईआर में नाम दर्ज होने और आरोपी बनाए जाने की स्थिति अलग-अलग होती है, इसलिए मामले में उनकी भूमिका जांच के दौरान स्पष्ट होगी।

    महिला ने अपनी शिकायत में यह भी स्पष्ट किया है कि उसका सीजेपी या जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है। उसका आरोप है कि इसके बावजूद उसकी तस्वीर को बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया। उसने कहा कि तस्वीर में डिजिटल छेड़छाड़ कर उसे ऐसे तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे उसकी व्यक्तिगत गरिमा और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई।

    मामले में अब पुलिस द्वारा प्रदर्शन से संबंधित पोस्टर, बैनर, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच की जा सकती है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि महिला की मूल तस्वीर कहां से प्राप्त की गई, उसमें बदलाव किस माध्यम से किया गया और तैयार की गई सामग्री को प्रदर्शन तक कैसे पहुंचाया गया।

    इसके अलावा सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो और तस्वीरों की भी पड़ताल की जा सकती है। डिजिटल सामग्री तैयार करने, उसे सार्वजनिक करने और प्रदर्शन में इस्तेमाल करने वालों की भूमिका जांच का हिस्सा हो सकती है। एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

    महिला ने पूरे घटनाक्रम को अपनी निजता, गरिमा और प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि या जिम्मेदारी तय होना पुलिस जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगा।

  • डॉक्टरों के परिवार की बेटी कैसे बनीं अभिनेत्री? छोटी बुआ से शुरू हुआ फिल्मों का सफर, मां ने दिया सबसे बड़ा सहारा

    डॉक्टरों के परिवार की बेटी कैसे बनीं अभिनेत्री? छोटी बुआ से शुरू हुआ फिल्मों का सफर, मां ने दिया सबसे बड़ा सहारा


    नई दिल्ली। अभिनेत्री दिव्या दत्ता आज 25 सितंबर को अपना 49वां जन्मदिन मना रही हैं। करीब तीन दशक से ज्यादा लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने अलग अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी खास पहचान बनाई है। लुधियाना जैसे शहर से निकलकर मुंबई की फिल्मी दुनिया तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। इसके पीछे परिवार का साथ मेहनत संघर्ष और खुद पर भरोसा सबसे बड़ी वजह रहे। दिव्या दत्ता का जन्म 25 सितंबर 1977 को पंजाब के लुधियाना में डॉक्टर माता पिता के घर हुआ था। परिवार में ज्यादातर लोग डॉक्टर थे लेकिन बचपन से ही दिव्या का मन अभिनय और फिल्मों की तरफ खिंचने लगा था।

    दिव्या दत्ता पढ़ाई में भी काफी अच्छी थीं। बचपन में उनके माता पिता दोनों सरकारी डॉक्टर थे और उनके घर मरीजों का आना जाना लगा रहता था। लोगों के अलग अलग बोलने के अंदाज को सुनते सुनते दिव्या ने कई तरह की भाषा सीख ली थी। उनके पिता को लगा कि बच्ची को कुछ समय दिल्ली में अपनी बुआओं के साथ रहना चाहिए। इसके बाद दिव्या दिल्ली में अपनी तीन बुआओं के पास रहने लगीं। उनकी बुआएं शिक्षिका थीं और उन्होंने दिव्या की पढ़ाई के साथ उनके व्यक्तित्व को भी निखारा।

    दिव्या के भीतर फिल्मों का शौक उनकी सबसे छोटी बुआ ने जगाया। उन्हें फिल्में देखने का बहुत शौक था और दिव्या भी उनके साथ फिल्में देखने लगीं। धीरे धीरे फिल्मों की दुनिया उन्हें आकर्षित करने लगी। वह स्कूल जाने के लिए भी अपनी पसंदीदा अभिनेत्रियों जैसा हेयरस्टाइल बनवाना चाहती थीं। कभी वह नीतू कपूर की तरह दिखना चाहतीं तो कभी जीनत अमान और हेमा मालिनी से प्रभावित होतीं। इसी दौर में उनके भीतर अभिनेत्री बनने का सपना आकार लेने लगा।

    लेकिन दिव्या की जिंदगी में सात साल की उम्र में बड़ा बदलाव आया। उनके पिता का अचानक निधन हो गया। इस घटना ने बेहद कम उम्र में उन्हें जिम्मेदार बना दिया। इसके बाद उनकी मां डॉ नलिनी दत्ता ने दिव्या और उनके भाई की परवरिश अकेले की। दिव्या अपनी मां के बेहद करीब थीं और उनके साथ रहते हुए उन्होंने अभिनय की कई बारीकियां अनजाने में सीख लीं।

    दिव्या बताती हैं कि उनकी मां को पुरानी अभिनेत्रियां पसंद थीं और वह अक्सर उनके अंदाज में एक्सप्रेशन देती थीं। दिव्या भी मां की नकल किया करती थीं। दोनों साथ में गाने सुनते और छत पर डांस करते थे। मां के हाव भाव और अभिनय की शैली को देखते देखते दिव्या के भीतर अभिनय की समझ विकसित होती गई। आगे चलकर फिल्म ट्रेन टू पाकिस्तान में काम करते समय मां से सीखी ये बातें उनके काफी काम आईं।

    मुंबई पहुंचने की कहानी भी दिलचस्प है। दिव्या को फिल्मी मैगजीन पढ़ने का शौक था। एक दिन उन्होंने स्टारडस्ट में छपे टैलेंट हंट का फॉर्म भर दिया लेकिन बाद में इसे भूल गईं। जब उनका फॉर्म स्वीकार हो गया तो उन्होंने अपनी मां को बताया कि वह अभिनेत्री बनना चाहती हैं और मुंबई जाना चाहती हैं। परिवार में कई लोगों ने इस फैसले का विरोध किया लेकिन उनकी मां बेटी के सपने के साथ मजबूती से खड़ी रहीं।

    मुंबई आने के बाद दिव्या को कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने फिल्मों में अपनी जगह बनाई और कई यादगार किरदार निभाए। आज दिव्या दत्ता का नाम उन अभिनेत्रियों में लिया जाता है जिन्होंने अपने दमदार अभिनय से हिंदी सिनेमा में अलग पहचान बनाई है। उनके जन्मदिन पर उनकी यह कहानी बताती है कि एक छोटे शहर से शुरू हुआ सपना परिवार के भरोसे और लगातार संघर्ष के दम पर मायानगरी तक पहुंच सकता है।

  • यूएन में नेतन्याहू ने ममदानी पर साधा निशाना, कहा- न्यूयॉर्क में यहूदी खुद को सुरक्षित नहीं मानते

    यूएन में नेतन्याहू ने ममदानी पर साधा निशाना, कहा- न्यूयॉर्क में यहूदी खुद को सुरक्षित नहीं मानते

    नई दिल्ली । इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ममदानी की गाजा और इस्राइल से जुड़ी टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि उनकी बयानबाजी से न्यूयॉर्क में रहने वाले यहूदी समुदाय के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ी है। नेतन्याहू ने ममदानी को यहूदी-विरोधी मेयर भी बताया।

    अपने भाषण में नेतन्याहू ने कहा कि ममदानी के मेयर चुने जाने के बाद कई यहूदी न्यूयॉर्क में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग उनसे बातचीत के दौरान कहते हैं कि शहर तेजी से बदल गया है और अब वह पहले जैसा नहीं रहा। यह टिप्पणी दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चल रहे सार्वजनिक विवाद के बीच आई है।

    ममदानी गाजा में इस्राइल की सैन्य कार्रवाई के मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने नेतन्याहू के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं और फिलिस्तीनी अधिकारों की वकालत की है। ममदानी का रुख रहा है कि इस्राइल की नीतियों की आलोचना करना अपने आप में यहूदी-विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। दूसरी ओर, नेतन्याहू उनकी टिप्पणियों को इस्राइल और यहूदी समुदाय की सुरक्षा से जोड़ते रहे हैं।

    नेतन्याहू और ममदानी के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय यानी आईसीसी का गिरफ्तारी वारंट भी रहा है। ममदानी ने अपने चुनाव अभियान के दौरान कहा था कि यदि नेतन्याहू न्यूयॉर्क आए तो वह उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लागू कराने की कोशिश करेंगे। बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि न्यूयॉर्क शहर के पास किसी विदेशी नेता को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है। हाल के दिनों में उन्होंने अमेरिकी संघीय सरकार से आईसीसी के वारंट का सम्मान करने की अपील भी की है।

    नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान इस मुद्दे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ममदानी ने उन्हें न्यूयॉर्क आने से रोकने और चुप कराने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि न तो उन्हें और न ही सच्चाई को चुप कराया जा सकता है।

    इसी सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ममदानी के बीच न्यूयॉर्क में मुलाकात भी हुई थी। दोनों नेताओं के बीच कई राजनीतिक और नीतिगत मतभेद हैं, लेकिन बैठक में शहर से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई। नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप के इस्राइल के प्रति समर्थन की प्रशंसा की और उन्हें अपना महत्वपूर्ण साझेदार बताया।

    इस पूरे विवाद में एक तरफ ममदानी इस्राइल की गाजा नीति और फिलिस्तीनी अधिकारों को लेकर अपनी आलोचना पर कायम हैं, वहीं नेतन्याहू उनकी टिप्पणियों को यहूदी समुदाय की सुरक्षा और यहूदी-विरोधी भावना के संदर्भ में पेश कर रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक टकराव अब गाजा युद्ध के साथ-साथ न्यूयॉर्क में यहूदी सुरक्षा, आईसीसी के गिरफ्तारी वारंट और अमेरिकी सरकार की भूमिका जैसे मुद्दों से भी जुड़ गया है।

    नेतन्याहू के संयुक्त राष्ट्र संबोधन के दौरान कई प्रतिनिधि सभागार से बाहर भी चले गए और न्यूयॉर्क में उनके दौरे के खिलाफ प्रदर्शन हुए। इस घटनाक्रम ने उनके भाषण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी राजनीतिक मतभेदों को भी सामने ला दिया।

  • लद्दाख हिंसा की बरसी पर सोनम वांगचुक ने जताया एनकाउंटर का डर, मांगा अमित शाह का इस्तीफा

    लद्दाख हिंसा की बरसी पर सोनम वांगचुक ने जताया एनकाउंटर का डर, मांगा अमित शाह का इस्तीफा

    नई दिल्ली । लद्दाख में पिछले साल हुई लेह हिंसा की पहली बरसी पर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका जताई। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें मुठभेड़ में मारे जाने का डर है। वांगचुक ने इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए 24 सितंबर 2025 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।

    लेह में हिंसा की पहली बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वांगचुक ने कहा कि उन्हें अपनी जान को लेकर चेतावनियां मिली हैं। उनका कहना था कि यदि देश और समाज को किसी मुद्दे पर जागरूक करने के लिए उन्हें किसी भी तरह के परिणाम का सामना करना पड़े, तो वह उसके लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जेल भेजे जाने के बाद अब उनके साथ मुठभेड़ होने की आशंका भी जताई जा रही है।

    वांगचुक ने पिछले साल की घटना की न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि रिपोर्ट सामने नहीं लाई जाती है तो पुलिस कार्रवाई और गोलीबारी की परिस्थितियों की जांच के लिए स्वतंत्र जन न्यायाधिकरण गठित करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। उनका कहना था कि घटना में हुई मौतों के लिए जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

    24 सितंबर 2025 को लेह में गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति के बाद पुलिस कार्रवाई में चार लोगों की मौत हुई थी। केंद्र सरकार ने घटना की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई और चार लोगों की मौत के कारणों की जांच के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीएस चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक जांच गठित की थी। वांगचुक ने जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और घटना के लिए जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई।

    वांगचुक ने कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साल के प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने स्थानीय युवाओं पर स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल किया और बाद में प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रविरोधी बताया गया। उन्होंने कहा कि घटना में मारे गए लोगों को गोली लगी थी और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। ये आरोप वांगचुक द्वारा लगाए गए हैं।

    उन्होंने दिल्ली में छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग का भी उल्लेख किया। वांगचुक ने उस मांग का समर्थन करते हुए सवाल उठाया कि लद्दाख में हुई हिंसा और चार लोगों की मौत के मामले में भी समान रूप से जवाबदेही की मांग क्यों नहीं की गई।

    हिंसा की पहली बरसी पर लेह और लद्दाख के कई हिस्सों में बंद का असर दिखाई दिया। लेह और कारगिल में दुकानें तथा कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे और सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में कम आवाजाही रही। कुछ लोगों ने 24 सितंबर को मृतकों की याद में शहीद दिवस के रूप में मनाया।

    वांगचुक ने यह भी कहा कि बरसी के कार्यक्रम में अपेक्षाकृत कम लोगों की मौजूदगी को आंदोलन की हार नहीं माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधों के बीच भी लोगों ने पिछले साल की घटना में मारे गए चार लोगों को याद किया और न्याय तथा जवाबदेही की मांग को सामने रखा। लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन का मुद्दा भी इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में बना हुआ है।

  • शी जिनपिंग ने पांच साल में एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन बुलाने का किया बड़ा एलान

    शी जिनपिंग ने पांच साल में एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन बुलाने का किया बड़ा एलान


    नई दिल्ली ।
    चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अगले पांच वर्षों में एक लाख युवा अमेरिकियों को चीन आने का निमंत्रण दिया है। इन युवाओं के लिए पढ़ाई और विभिन्न आदान-प्रदान कार्यक्रमों के अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब चीन और अमेरिका के बीच संबंधों में व्यापार, तकनीक और अन्य रणनीतिक मुद्दों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। शी जिनपिंग ने युवाओं को दोनों देशों के भविष्य के संबंधों से जोड़ते हुए लोगों के बीच संपर्क और आपसी समझ बढ़ाने पर जोर दिया।

    शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका के रिश्तों की उम्मीद दोनों देशों के लोगों से जुड़ी है और इन संबंधों का भविष्य युवाओं के हाथ में है। इसी सोच के तहत उन्होंने अगले पांच वर्षों में एक लाख युवा अमेरिकियों को चीन आने का न्योता देने की घोषणा की। इन यात्राओं में शिक्षा के साथ सांस्कृतिक और अन्य आदान-प्रदान कार्यक्रमों को भी शामिल किया जाएगा।

    यह पहली बार नहीं है जब चीन की ओर से अमेरिकी युवाओं को इस तरह आमंत्रित किया गया है। नवंबर 2023 में भी पांच वर्षों के भीतर 50 हजार युवा अमेरिकियों को चीन बुलाने की पहल की गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह लक्ष्य तय समय से करीब ढाई साल पहले ही पूरा हो गया। इसके बाद अब प्रस्तावित संख्या को बढ़ाकर एक लाख कर दिया गया है।

    इस पहल के तहत अमेरिकी युवाओं ने चीन के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया है। कई युवाओं ने वहां शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लिया, स्थानीय लोगों से मुलाकात की और चीन के इतिहास तथा आधुनिक विकास को करीब से समझने का अवसर पाया। चीन में आयोजित कार्यक्रमों में विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच संवाद और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां भी शामिल रही हैं।

    अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने चीन और अमेरिका के पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दोनों देशों के सहयोग को याद किया और कहा कि उस समय दोनों पक्षों ने फासीवादी ताकतों के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ी थी। उनका कहना था कि इस साझा इतिहास को दोनों देशों के लोगों ने याद रखा है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन और अमेरिका के सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने चीन की मदद करने वाले अमेरिकी पायलटों के समूह ‘फ्लाइंग टाइगर्स’ की भूमिका को याद किया। इसके साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच पुराने संपर्कों से जुड़े ‘गंग हो’ शब्द का भी जिक्र किया और इसे मिलकर काम करने के अर्थ से जोड़ा।

    शी जिनपिंग ने यह भी कहा कि चीन के राष्ट्रीय पुनरुत्थान का लक्ष्य और अमेरिका को फिर से महान बनाने की कोशिश एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती और संपर्क बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

    एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन बुलाने की नई पहल को शिक्षा, सांस्कृतिक संपर्क और लोगों के बीच संवाद बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। पिछले कार्यक्रम में 50 हजार युवाओं का लक्ष्य समय से पहले पूरा होने के बाद अब इसकी संख्या दोगुनी की गई है। आने वाले पांच वर्षों में इस पहल के तहत कितने युवा चीन पहुंचते हैं और इससे दोनों देशों के बीच शैक्षणिक एवं सामाजिक संपर्क किस स्तर तक बढ़ता है, यह आगे स्पष्ट होगा।

  • यूपी समेत पांच चुनावी राज्यों में अक्टूबर में वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण की तैयारी

    यूपी समेत पांच चुनावी राज्यों में अक्टूबर में वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण की तैयारी

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश समेत अगले वर्ष विधानसभा चुनाव वाले पांच राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी SSR की प्रक्रिया अक्टूबर में शुरू किए जाने की संभावना है। इसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। प्रस्तावित प्रक्रिया में 1 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि माना जा सकता है। इन राज्यों में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष की शुरुआत में प्रस्तावित हैं, ऐसे में चुनाव से पहले मतदाता सूचियों को अपडेट करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    SSR के तहत मौजूदा मतदाता सूची को संशोधित और अपडेट किया जाता है। इसमें नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना, विवरण में सुधार करना और जरूरी संशोधन करना शामिल होता है। इसके विपरीत SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण में मतदाता सूची का अधिक व्यापक सत्यापन किया जाता है। इसमें मतदाताओं की पात्रता और दर्ज विवरणों की विस्तृत जांच की जाती है।

    मौजूदा स्थिति में देशभर में एक साथ SSR कराने की संभावना कम बताई जा रही है। इसकी प्रमुख वजह 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के तीसरे चरण की प्रक्रिया और जनगणना से जुड़ी गतिविधियां हैं। चुनाव आयोग को विभिन्न राज्यों में चल रही इन प्रक्रियाओं के बीच मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्यक्रम तय करना है।

    पांच चुनावी राज्यों में SSR कराने का संबंध आगामी विधानसभा चुनावों से भी है। चुनाव से पहले संबंधित मतदाता सूचियों को निर्धारित अर्हता तिथि के आधार पर अपडेट किया जाता है। प्रस्तावित प्रक्रिया में 1 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि रखा जा सकता है। इससे उन लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जो निर्धारित तिथि तक मतदान की पात्रता हासिल कर चुके होंगे।

    इस बीच चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अलग-अलग स्तर पर उठाए गए सवाल भी चर्चा में हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले कुछ समय के दौरान आयोग की प्रक्रियाओं और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मुद्दों में मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया समेत पुनरीक्षण से जुड़े विषय शामिल बताए गए हैं।

    इन आपत्तियों पर चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले एक वर्ष में लिए गए उसके आदेश और फैसले पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम रहे हैं। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों पर भी आयोग ने आंतरिक सहमति होने की बात कही है।

    देशव्यापी SSR को लेकर जनगणना की समय-सारणी भी एक महत्वपूर्ण कारक है। वर्ष 2026 में जनगणना की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ रही है। कुछ पहाड़ी और बर्फीले क्षेत्रों में इसकी समय-सारणी को अलग रखा गया है। ऐसे में पूरे देश में एक साथ मतदाता सूची पुनरीक्षण कराने के बजाय चुनावी राज्यों को प्राथमिकता देने की संभावना जताई जा रही है।

    फिलहाल अक्टूबर में पांच राज्यों में SSR के संभावित आदेश और इसकी विस्तृत समय-सारणी पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। यदि प्रक्रिया शुरू होती है, तो उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर की मतदाता सूचियों में नए नाम जोड़ने, गलतियों को सुधारने और आवश्यक संशोधन करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए सरकार ने मांगा दो साल का समय

    OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए सरकार ने मांगा दो साल का समय

    नई दिल्ली । अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC क्रीमी लेयर से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने दो साल का समय मांगा है। सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि फैसले को लागू करने की प्रक्रिया इस तरह तय की जानी चाहिए, जिससे पहले से चल रही और पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं पर अचानक असर न पड़े। अदालत ने केंद्र की इस मांग पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है।

    सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को OBC क्रीमी लेयर से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम यानी PSU या निजी क्षेत्र में कार्यरत माता या पिता के वेतन अथवा आय को अकेले ही इस आधार के रूप में नहीं माना जा सकता कि संबंधित परिवार OBC क्रीमी लेयर के दायरे में आता है। अदालत ने क्रीमी लेयर निर्धारित करने के लिए माता-पिता के पद और उनकी श्रेणी की स्थिति के साथ आय या संपत्ति से जुड़े निर्धारित मानकों को भी ध्यान में रखने की बात कही थी।

    इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सरकार का पक्ष रखा। केंद्र ने आग्रह किया कि फैसले को भविष्य में प्रभावी तरीके से लागू करने की अनुमति दी जाए। सरकार का कहना था कि अदालत द्वारा तय किए गए कानूनी सिद्धांत को लागू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त तैयारी की जरूरत होगी।

    सरकार ने दो साल की अवधि इसलिए मांगी है ताकि नई व्यवस्था लागू करते समय पहले से शुरू हो चुकी भर्ती प्रक्रियाओं में अनिश्चितता पैदा न हो। केंद्र के अनुसार, इस अवधि में अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़े मामलों को व्यवस्थित करने, प्रतिस्पर्धी उम्मीदवारों के अधिकारों में संतुलन बनाने और प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक बदलाव करने का अवसर मिलेगा।

    सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़े मामलों पर अलग-अलग उच्च न्यायालयों में विचार किया गया है। केंद्र की ओर से बताया गया कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों को सुप्रीम कोर्ट या किसी एक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने के लिए भी याचिका दायर की गई है। इससे जुड़े मामलों में एकरूपता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

    सुप्रीम कोर्ट के मूल फैसले का केंद्र सरकार ने विरोध नहीं किया है। सरकार की मांग मुख्य रूप से फैसले को लागू करने की समयसीमा से जुड़ी है। केंद्र का कहना है कि दो साल का समय मिलने से व्यवस्था में अचानक बदलाव के कारण पैदा होने वाली प्रशासनिक कठिनाइयों को कम किया जा सकेगा।

    11 मार्च के फैसले में अदालत ने OBC क्रीमी लेयर की पहचान से जुड़े मानकों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। अदालत के अनुसार, केवल माता-पिता की आय को देखकर निर्णय नहीं किया जा सकता, बल्कि उनके पद और सेवा की स्थिति को भी निर्धारित नियमों के साथ देखा जाना जरूरी है। इस व्यवस्था का संबंध उन उम्मीदवारों की पात्रता से है जो OBC आरक्षण का लाभ लेना चाहते हैं।

    अब केंद्र की ओर से मांगी गई दो साल की मोहलत पर आगे की सुनवाई में स्थिति स्पष्ट होगी। इस मामले का असर OBC क्रीमी लेयर की पात्रता और भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े प्रशासनिक नियमों पर पड़ सकता है।

  • एसपी बालासुब्रमण्यम की आवाज के वो 10 यादगार गीत, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में बनाई खास पहचान

    एसपी बालासुब्रमण्यम की आवाज के वो 10 यादगार गीत, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में बनाई खास पहचान

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के महान पार्श्व गायकों में शामिल एसपी बालासुब्रमण्यम की आज छठी पुण्यतिथि है। पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने हिंदी के साथ तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम समेत कई भाषाओं में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी। उनकी आवाज में भावनाओं की ऐसी विविधता थी कि रोमांटिक गीतों से लेकर भावुक और मधुर रचनाओं तक हर तरह के गाने श्रोताओं के बीच खास पहचान बना लेते थे। 25 सितंबर 2020 को उनके निधन के बाद भी उनके गीत लगातार लोगों की यादों का हिस्सा बने हुए हैं।

    4 जून 1946 को जन्मे एसपी बालासुब्रमण्यम ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, लेकिन संगीत के प्रति उनका लगाव उन्हें गायकी की दुनिया में ले आया। उन्होंने संगीत प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया और 15 दिसंबर 1966 को तेलुगु फिल्म ‘श्री श्री श्री मर्यादा रामन्ना’ से बतौर पार्श्व गायक अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाई और आगे चलकर हिंदी फिल्मों में भी उनकी आवाज बेहद लोकप्रिय हुई।

    साल 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान मजबूत की। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इसके बाद सलमान खान की फिल्मों में उनकी आवाज ने खास लोकप्रियता हासिल की। ‘मैंने प्यार किया’, ‘हम आपके हैं कौन’, ‘साजन’ और ‘लव’ जैसी फिल्मों के गीतों ने उनकी आवाज को हिंदी दर्शकों के बीच घर-घर पहुंचाया।

    एसपी बालासुब्रमण्यम के नाम गायकी से जुड़े कई उल्लेखनीय रिकॉर्ड भी रहे। उनका करियर करीब पांच दशक तक चला और उन्होंने 16 भारतीय भाषाओं में 40 हजार से अधिक गीत रिकॉर्ड किए। एक दिन में उन्होंने कन्नड़ में 21, तमिल में 19 और हिंदी में 16 गाने रिकॉर्ड किए। उन्हें अलग-अलग भाषाओं में गायकी के लिए छह बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें 2001 में पद्म श्री और 2011 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

    उनके लोकप्रिय हिंदी गीतों में ‘आजा शाम होने आई’ खास है। इसी तरह ‘दिल दीवाना’ और ‘मेरे रंग में रंगने वाली’ जैसे गीतों ने भी उनकी आवाज को घर-घर तक पहुंचाया। इन गीतों में उनकी गायकी की सहजता और रोमांटिक अंदाज साफ नजर आता है।

    फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ का ‘पहला पहला प्यार है’ भी आज तक श्रोताओं के बीच लोकप्रिय है। ‘साजन’ का ‘बहुत प्यार करते हैं’ और ‘देखा है पहली बार’ उनकी यादगार प्रस्तुतियों में शामिल हैं। वहीं फिल्म ‘लव’ का ‘साथिया तूने क्या किया’ भी उनकी चर्चित प्रस्तुतियों में गिना जाता है।

    ‘एक दूजे के लिए’ का ‘हम बने तुम बने’ भी उनकी यादगार प्रस्तुतियों में शामिल है। वहीं ‘पत्थर के फूल’ का ‘कभी तू छलिया लगता है’ भी उनकी लोकप्रिय गीतों की सूची का हिस्सा रहा। इन गीतों के जरिए एसपी बालासुब्रमण्यम ने हिंदी सिनेमा के संगीत में अपनी अलग पहचान बनाई, जिसे आज भी संगीत प्रेमी याद करते हैं।

  • एशियन गेम्स में भारत का जोरदार प्रदर्शन शूटिंग में गोल्ड के बाद कबड्डी के दोनों फाइनल में एंट्री स्क्वैश में भी मेडल पक्का

    एशियन गेम्स में भारत का जोरदार प्रदर्शन शूटिंग में गोल्ड के बाद कबड्डी के दोनों फाइनल में एंट्री स्क्वैश में भी मेडल पक्का


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए 25 सितंबर का दिन पदकों और शानदार मुकाबलों से भरा रहा। प्रतियोगिता के इस चरण में भारतीय खिलाड़ियों ने शूटिंग कबड्डी स्क्वैश हॉकी और बॉक्सिंग समेत कई खेलों में अपना दम दिखाया। दिन की शुरुआत ही शूटिंग में बड़ी उपलब्धि के साथ हुई जब कमलजीत और सुरुचि सिंह की जोड़ी ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। भारतीय जोड़ी ने 484.6 अंक के एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। यह भारत का शूटिंग में पहला गोल्ड और एशियन गेम्स में कुल दूसरा गोल्ड रहा।

    शूटिंग में भारत को एक और पदक मिला। पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम स्पर्धा में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर रुद्रांक्ष पाटिल और नीरज कुमार की तिकड़ी ने सिल्वर मेडल जीता। हालांकि व्यक्तिगत स्पर्धा में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर फाइनल तक पहुंचे लेकिन वह पांचवें स्थान पर रहे जबकि नीरज कुमार आठवें स्थान पर रहे। इस तरह शूटिंग में भारत का प्रदर्शन कई पदकों के साथ जारी रहा।

    कबड्डी के मैदान से भी भारत के लिए बड़ी खबर सामने आई। भारतीय महिला टीम ने सेमीफाइनल में नेपाल को 48-24 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। इसके बाद पुरुष टीम ने भी थाईलैंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए 66-28 की जीत दर्ज की और फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। इस तरह एशियन गेम्स में भारतीय महिला और पुरुष दोनों कबड्डी टीमें खिताबी मुकाबले में पहुंच गईं।

    स्क्वैश में भी भारत के खाते में पदक पक्के हुए। अभय सिंह ने पुरुष सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में जापान के रयुनोसुके त्सुकुए को 11-4 11-3 11-6 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। महिला सिंगल्स में अनाहत सिंह ने हमवतन तन्वी खन्ना को 3-0 से हराकर अंतिम चार में प्रवेश किया। मिक्स्ड डबल्स में जोशना चिनप्पा और वेलवन सेंथिलकुमार की जोड़ी ने भी सेमीफाइनल में जगह बनाकर पदक सुनिश्चित किया।

    हॉकी में भी भारतीय महिला टीम ने जापान के खिलाफ 3-1 से जीत दर्ज की। भारत की ओर से लालरेमसियामी इशिका और नवनीत ने गोल किए। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में जगह बनाई। वहीं बॉक्सिंग में सचिन सिवाच ने 60 किलोग्राम वर्ग में मोहम्मद अबू जाजेह को 4-1 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया और वह पदक से एक जीत दूर पहुंच गए।

    टेबल टेनिस में भारत को कुछ सफलता मिली तो कुछ मुकाबलों में निराशा भी हाथ लगी। दिव्या चितले और मनुष शाह की जोड़ी ने सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्का किया जबकि मानव ठक्कर का पुरुष सिंगल्स अभियान दूसरे दौर में हार के साथ खत्म हो गया। भारतीय तैराकों ने भी फाइनल में जगह बनाकर उम्मीदें कायम रखीं। साजन प्रकाश पुरुषों की 200 मीटर बटरफ्लाई के फाइनल में पहुंचे जबकि ऋषभ दास और उत्कर्ष पाटिल ने 200 मीटर बैकस्ट्रोक के फाइनल में जगह बनाई।

    25 सितंबर की शुरुआत भारत ने 17 पदकों के साथ की थी और शूटिंग के गोल्ड तथा सिल्वर के बाद पदक संख्या 19 तक पहुंच गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भारत के खाते में अब 2 गोल्ड 8 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज हैं। एशियन गेम्स में भारतीय दल के लिए आगे भी एथलेटिक्स कबड्डी शूटिंग स्क्वैश बैडमिंटन और अन्य खेलों में मुकाबले जारी हैं।