Author: bharati

  • भोपाल वकील-पुलिस विवाद में निलंबित थाना प्रभारी राजन अहिरवार ने वीडियो जारी कर जांच को लेकर रखी अपनी बात

    भोपाल वकील-पुलिस विवाद में निलंबित थाना प्रभारी राजन अहिरवार ने वीडियो जारी कर जांच को लेकर रखी अपनी बात

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल के जहांगीराबाद इलाके में वकील और पुलिसकर्मियों के बीच हुआ विवाद अब जांच और कार्रवाई के अगले चरण में पहुंच गया है। मामले में दोनों पक्षों की ओर से शिकायत दर्ज होने के बाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। निलंबन के बाद राजन अहिरवार ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपना पक्ष सामने रखा है।

    राजन अहिरवार ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में कहा कि उनकी जांच से महिला पुलिस अधिकारी को दूर रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक उनकी बात सही तरीके से नहीं पहुंच पाई। प्रदर्शन के बाद उन्होंने अपना मोबाइल फ्लाइट मोड पर रखा था और सुबह वीडियो पोस्ट कर अपनी बात सार्वजनिक की।

    विवाद के मामले में अधिवक्ता राकेश रावल की शिकायत पर जहांगीराबाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार और दो अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। दूसरी ओर पुलिस की तरफ से भी राकेश रावल के खिलाफ सरकारी काम में रुकावट डालने, बदसलूकी और मारपीट के आरोपों में मामला दर्ज किया गया है।

    विवाद के बाद डीसीपी जोन-1 ने थाना प्रभारी राजन अहिरवार के साथ कॉन्स्टेबल यश लखेरा और आरक्षक रामस्वरूप को निलंबित कर दिया। कार्रवाई के बाद जहांगीराबाद थाने की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर हरि किशन लोहिया को सौंपी गई है। पुलिस विभाग की ओर से पूरे मामले की जांच जारी है।

    मामले को लेकर अधिवक्ताओं ने भी प्रदर्शन किया। कार्रवाई की मांग को लेकर मंगलवार रात वकील जहांगीराबाद थाने में देर रात करीब तीन बजे तक प्रदर्शन करते रहे। इसके बाद बुधवार को भी अधिवक्ताओं ने कोर्ट चौराहे पर प्रदर्शन किया और रास्ते बंद कर दिए।

    विवाद की शुरुआत 22 सितंबर की शाम गणेश विसर्जन के दौरान खटलापुरा इलाके में हुई बताई गई है। आरक्षक हरि ओम वर्मा की शिकायत के अनुसार, उस समय उनकी ड्यूटी इलाके में लगाई गई थी। इसी दौरान एक लाल रंग की कार वहां पहुंची। आरक्षक ने चालक को आगे जाने से रोकने की कोशिश की, जिसके बाद कार सड़क पर खड़ी कर दी गई।

    शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद पुलिसकर्मियों और अधिवक्ता राकेश रावल के बीच बहस हुई। आरक्षक हरि ओम वर्मा ने आरोप लगाया कि राकेश रावल ने पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज की, मारपीट की और धमकी भी दी। आरक्षक के अनुसार, घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई और इसके बाद थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई गई।

    दूसरी ओर अधिवक्ता की शिकायत के आधार पर भी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस तरह दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ रही है।

    निलंबन के बाद थाना प्रभारी राजन अहिरवार की ओर से सामने आए वीडियो ने मामले को एक और मोड़ दिया है। उन्होंने अपनी जांच से महिला पुलिस अधिकारी को अलग रखने की मांग करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचने में कमी का दावा किया है। फिलहाल पूरे मामले की जांच पुलिस विभाग की ओर से की जा रही है और इसी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, चांदी भी फिसली; दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में आज इतने हुए भाव

    सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, चांदी भी फिसली; दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में आज इतने हुए भाव

    नई दिल्ली । भारतीय सर्राफा बाजार में 24 सितंबर 2026, गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। दोनों प्रमुख कीमती धातुओं के भाव में कमजोरी दर्ज की गई है। सोने की कीमत में 390 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई, जबकि चांदी का भाव करीब 1,460 रुपये प्रति किलोग्राम तक फिसल गया।

    सोने की कीमतों में आई इस गिरावट के बाद 22 कैरेट गोल्ड का भाव अधिकांश प्रमुख शहरों में 1,39,060 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे पहुंच गया है। वहीं 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,750 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम हो गई है। अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर दर्ज किया गया है।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,700 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। दिल्ली में दोनों कैरेट के भाव में गिरावट के बाद ये कीमतें सामने आई हैं।

    मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जबकि 22 कैरेट गोल्ड का भाव 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। अहमदाबाद में 24 कैरेट सोना 1,51,600 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,38,958 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    कोलकाता में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट का भाव 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,51,700 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    बेंगलुरु में 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट की कीमत 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। लखनऊ में 24 कैरेट सोना 1,51,700 रुपये और 22 कैरेट गोल्ड 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी सोने की कीमतें प्रमुख शहरों के करीब रहीं। यहां 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,600 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,38,958 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई।

    सोने के साथ चांदी के भाव में भी आज कमजोरी आई है। पिछले दिन की तुलना में चांदी की कीमत में करीब 1,460 रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद अधिकांश शहरों में चांदी का भाव 2,34,620 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गया है।

    24 सितंबर को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में आई गिरावट से सर्राफा बाजार में दोनों धातुओं के भाव नीचे आए हैं। अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतों में मामूली अंतर है, जबकि चांदी का भाव अधिकांश शहरों में करीब 2,34,620 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया है।

    अगर आप सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो खरीदारी से पहले अपने शहर में लागू ताजा भाव की जानकारी लेना जरूरी है, क्योंकि शहर के अनुसार कीमतों में अंतर हो सकता है।

  • ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात के बीच अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर पर राहत, व्यापारिक युद्धविराम जनवरी 2027 तक बढ़ाया गया

    ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात के बीच अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर पर राहत, व्यापारिक युद्धविराम जनवरी 2027 तक बढ़ाया गया


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से जारी व्यापारिक तनाव के बीच दोनों देशों ने फिलहाल राहत की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। दोनों देशों ने मौजूदा व्यापारिक युद्धविराम की अवधि को करीब दो महीने आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। पहले यह समझौता 10 नवंबर 2026 को समाप्त होना था, लेकिन अब इसकी अवधि बढ़ाकर 10 जनवरी 2027 कर दी गई है।

    इस फैसले से अमेरिका और चीन को टैरिफ सहित कई व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत जारी रखने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापारिक विवाद में टैरिफ, आयात-निर्यात और अन्य आर्थिक विषयों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में युद्धविराम की अवधि बढ़ने से बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का अवसर मिलेगा।

    यह फैसला चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान सामने आया है। शी जिनपिंग अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ अमेरिका पहुंचे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ने उनका स्वागत किया। इसके बाद ट्रंप और जिनपिंग के बीच मुलाकात भी हुई।

    दोनों नेताओं की बैठक को अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बातचीत के दौरान टैरिफ समेत कई आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम करने और आगे की बातचीत का रास्ता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

    मौजूदा व्यापारिक युद्धविराम की अवधि बढ़ाए जाने का सीधा मतलब यह है कि दोनों देशों के पास अब अपने विवादित मुद्दों पर चर्चा के लिए पहले की तुलना में अधिक समय रहेगा। इससे तत्काल व्यापारिक टकराव बढ़ने की स्थिति को टालने में मदद मिल सकती है।

    अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं, लेकिन दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद जरूरी है।

    अमेरिका और चीन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। इसी वजह से दोनों देशों के बीच टैरिफ और व्यापार नीति से जुड़े फैसलों पर दुनियाभर की नजर रहती है।

    युद्धविराम की अवधि बढ़ने के बावजूद दोनों देशों के बीच सभी व्यापारिक मतभेद समाप्त नहीं हुए हैं। टैरिफ और अन्य आर्थिक मुद्दों पर आगे भी बातचीत जारी रहने की संभावना है। दोनों पक्षों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे अस्थायी राहत को आगे किसी व्यापक व्यापारिक समझौते की दिशा में ले जा सकें।

    अब 10 जनवरी 2027 तक अमेरिका और चीन के पास व्यापारिक विवादों पर बातचीत आगे बढ़ाने का अतिरिक्त समय है। ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात के बीच हुआ यह फैसला दोनों देशों के बीच जारी व्यापारिक संवाद को बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

  • आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत मामले में राहुल गांधी ने परिवार से की बात, हरसंभव मदद का भरोसा दिया

    आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत मामले में राहुल गांधी ने परिवार से की बात, हरसंभव मदद का भरोसा दिया

    नई दिल्ली ।आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत का मामला लगातार चर्चा में है। इसी बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने साहिल के परिवार से बातचीत कर समर्थन जताया और न्याय की लड़ाई में हरसंभव मदद का भरोसा दिया। गुरुवार को उन्होंने साहिल के माता-पिता से वीडियो कॉल के जरिए बात की। बातचीत के दौरान परिवार की स्थिति और मामले से जुड़ी उनकी चिंताओं को लेकर चर्चा हुई।

    साहिल वाकोडे की मौत के बाद उनके परिवार ने संस्थान के प्रशासन और कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार की ओर से साहिल के साथ कथित जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की जांच अभी जारी है। परिवार ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    साहिल की मौत के मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है। जांच एजेंसी परीक्षा केंद्र, हॉस्टल और घटना से पहले की गतिविधियों से जुड़े अलग-अलग साक्ष्यों को खंगाल रही है। जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अलावा साहिल तथा संबंधित अधिकारियों के बीच हुई बातचीत को भी देखा जा रहा है।

    पुलिस की जांच में 18 सितंबर को परीक्षा के दौरान हुई घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, दोपहर करीब 12:30 बजे से 12:45 बजे के बीच साहिल परीक्षा कक्ष में मौजूद था। इस दौरान उसके पास मौजूद किसी वस्तु को लेकर उससे पूछताछ की गई और बाद में उसे अन्य छात्रों से अलग ले जाया गया। इसके बाद वह हॉस्टल की ओर गया।

    साहिल ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में द्वितीय वर्ष का छात्र था। संस्थान की ओर से बताया गया था कि परीक्षा के दौरान उसके पास मोबाइल फोन पाया गया था और उसने प्रश्नपत्र से जुड़े जवाब हासिल करने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी। संस्थान के अनुसार, परीक्षा प्रशिक्षक और विभाग प्रमुख ने इस संबंध में साहिल से बातचीत की थी। उसे समझाया गया था और यह भरोसा दिलाया गया था कि इस घटना का उसके करियर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    बातचीत के बाद साहिल अपने हॉस्टल के कमरे में लौट गया था। बाद में उसी दिन वह कमरे में मृत पाया गया। उसके परिवार ने इस घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठाए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

    जातिगत भेदभाव के आरोपों को लेकर संस्थान की ओर से कहा गया है कि साहिल ने अपने जीवनकाल में एससी-एसटी प्रकोष्ठ या प्रशासन के पास इस तरह की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। दूसरी ओर, परिवार ने संबंधित अधिकारियों पर कथित भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की सच्चाई जांच का विषय है।

    मामले में साहिल के कमरे से मिले मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। परीक्षा हॉल और हॉस्टल के अलग-अलग हिस्सों के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है। फाइनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी इंतजार है।

    इस बीच साहिल के परिवार से राहुल गांधी की बातचीत को मामले में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तक्षेप के तौर पर देखा जा रहा है। बातचीत के दौरान उन्होंने परिवार को समर्थन और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। मामले में जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • रुपये में मजबूती की गुंजाइश, चालू खाता घाटा घटने और एफटीए से निर्यात बढ़ने की उम्मीद

    रुपये में मजबूती की गुंजाइश, चालू खाता घाटा घटने और एफटीए से निर्यात बढ़ने की उम्मीद

    नई दिल्ली ।भारतीय रुपये में मौजूदा स्तर से स्थिरता आने के साथ आगे मजबूती की भी पर्याप्त गुंजाइश है। भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि आने वाले वर्षों में चालू खाते का घाटा कम होने की उम्मीद है। इसके साथ वस्तुओं के निर्यात में बढ़ती सफलता और हाल के मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसर रुपये की स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

    31 मार्च 2025 से 16 सितंबर 2026 के बीच रुपया प्वाइंट-टू-प्वाइंट आधार पर कुल 13.1 प्रतिशत कमजोर हुआ है। ऐसे में मौजूदा स्तर से भारतीय मुद्रा के स्थिर होने और मजबूत होने की संभावना पर ध्यान दिया जा रहा है। पूनम गुप्ता ने कहा कि जब पूंजी प्रवाह से जुड़े उपाय पहली बार घोषित किए गए थे, तब बाजार विश्लेषकों ने भी रुपये के स्थिर होने और मजबूती की उम्मीद जताई थी।

    मुंबई में आयोजित एक सम्मेलन में पूनम गुप्ता ने कहा कि आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक के पास कई दशकों के चालू खाते के घाटे या भुगतान संतुलन में दर्ज शुद्ध घाटे को पूरा करने की क्षमता है।

    भारत पारंपरिक रूप से चालू खाते में मामूली घाटा और पूंजी खाते में बड़ा अधिशेष दर्ज करता रहा है। इसी वजह से देश का कुल भुगतान संतुलन सामान्य तौर पर सकारात्मक रहा है। समय के साथ सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के मुकाबले चालू खाते का घाटा कम हुआ है, जिससे बाहरी क्षेत्र की स्थिति को मजबूती मिली है।

    पूनम गुप्ता के मुताबिक, भारत का चालू खाता घाटा उन स्तरों से काफी नीचे रहा है, जिन्हें आमतौर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए उचित माना जाता है। देश के शुद्ध सेवा निर्यात और विदेशों से आने वाला धन यानी प्रेषण भारतीय अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण संरचनात्मक ताकत बने हुए हैं। इन दोनों के मजबूत होने से वस्तुओं के व्यापार घाटे की भरपाई करने में मदद मिलती है और चालू खाता घाटे को जीडीपी के एक प्रतिशत से नीचे बनाए रखने में सहायता मिलती है।

    हालांकि, हाल में तेल और सोने की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव के कारण चालू खाते का घाटा अस्थायी रूप से बढ़ा है। इसके अलावा पिछले दो वर्षों के दौरान पूंजी खाते का अधिशेष भी चालू खाते के घाटे की तुलना में कम रहा। इसके परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 5 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2025-26 में 23.6 अरब डॉलर का नकारात्मक भुगतान संतुलन दर्ज हुआ।

    उन्होंने कहा कि भविष्य में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के बढ़ते इस्तेमाल और देश में तेल भंडार खोजने के प्रयासों से आयातित तेल पर भारत की निर्भरता कम होने की उम्मीद है। इससे जीडीपी के मुकाबले तेल की मांग में लंबे समय से जारी गिरावट की प्रवृत्ति और मजबूत हो सकती है।

    पूनम गुप्ता ने यह भी कहा कि यदि संघर्ष समाप्त होने के बाद तेल की कीमतों में स्थिरता आती है, तो बाहरी क्षेत्र को अतिरिक्त राहत मिल सकती है। इसके साथ हाल के मुक्त व्यापार समझौतों के सकारात्मक प्रभाव सामने आने और अनुकूल विनिमय दर की स्थिति बने रहने से आने वाले वर्षों में रुपये को मजबूती मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

  • साउथ सिनेमा में बॉलीवुड सितारों का दबदबा, राघव जुयाल से इमरान हाशमी तक बने खतरनाक विलेन

    साउथ सिनेमा में बॉलीवुड सितारों का दबदबा, राघव जुयाल से इमरान हाशमी तक बने खतरनाक विलेन

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के बीच कलाकारों का आदान-प्रदान लंबे समय से देखने को मिलता रहा है। हिंदी फिल्मों के कई कलाकार दक्षिण भारतीय फिल्मों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। खास तौर पर पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड सितारों के साउथ फिल्मों में खलनायक के किरदार निभाने का चलन तेजी से बढ़ा है। अब इस सूची में अभिनेता और डांसर राघव जुयाल का नाम भी जुड़ गया है।

    राघव जुयाल साउथ की चर्चित फिल्म ‘द पैराडाइज’ में खलनायक की भूमिका में दिखाई देंगे। नानी अभिनीत इस फिल्म में राघव के किरदार को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता है। बताया गया है कि वह फिल्म में विक्रम मालिक नाम के मुख्य खलनायक का किरदार निभा रहे हैं। उनका यह किरदार पहले निभाई गई भूमिकाओं से अलग और अधिक आक्रामक अंदाज में नजर आने वाला है।

    राघव ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत हिंदी फिल्म ‘सोनाली केबल’ से की थी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों में काम किया। अब साउथ सिनेमा में उनकी एंट्री बतौर विलेन हुई है। ‘द पैराडाइज’ में उनकी भूमिका फिल्म की कहानी में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ भी दक्षिण भारतीय फिल्मों में नकारात्मक भूमिकाएं निभा चुके हैं। उन्होंने ‘साहो’ में रॉय का किरदार निभाया था। इसके बाद वह रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर’ में वर्मन के रूप में नजर आए। दोनों फिल्मों में उनके किरदारों का अंदाज हिंदी फिल्मों में निभाई गई उनकी पारंपरिक भूमिकाओं से अलग रहा।

    बॉबी देओल ने भी साउथ सिनेमा में खलनायक के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने सूर्या की फिल्म ‘कंगुवा’ में उधीरन की भूमिका निभाई थी। इसके बाद वह विजय की फिल्म ‘जन नायगन’ में महादेव के किरदार में दिखाई दिए। साउथ की फिल्मों में बॉबी के नकारात्मक किरदारों ने उनके अभिनय के एक अलग पक्ष को दर्शकों के सामने रखा।

    संजय दत्त भी दक्षिण भारतीय फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभा चुके हैं। यश अभिनीत ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ में उन्होंने अधीरा का किरदार निभाया था। फिल्म में उनका लुक और किरदार काफी अलग अंदाज में पेश किया गया था। यह फिल्म व्यावसायिक रूप से भी बड़ी सफलता हासिल करने में कामयाब रही।

    इमरान हाशमी का नाम भी इस सूची में शामिल है। उन्होंने पवन कल्याण की फिल्म ‘दे कॉल हिम ओजी’ में ओमी भाई नाम के खलनायक की भूमिका निभाई। इस फिल्म के जरिए इमरान ने दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी अलग मौजूदगी दर्ज कराई। उनके किरदार को लेकर भी दर्शकों के बीच काफी चर्चा रही।

    सैफ अली खान ने भी साउथ फिल्म ‘देवरा पार्ट 1’ में नकारात्मक भूमिका निभाई। उन्होंने फिल्म में भैरा का किरदार निभाया था। फिल्म में उनके साथ जूनियर एनटीआर और जान्हवी कपूर नजर आए थे। सैफ का यह किरदार भी उनके अब तक के कई हिंदी फिल्म किरदारों से अलग था।

    इस तरह राघव जुयाल के ‘द पैराडाइज’ में खलनायक बनने के साथ बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के बीच कलाकारों का यह सिलसिला एक बार फिर चर्चा में है। अलग-अलग भाषाओं और फिल्म उद्योगों के कलाकारों के साथ आने से दर्शकों को भी नए तरह के किरदार और अभिनय देखने को मिल रहे हैं।

  • अभिजीत दीपके अचानक दिल्ली रवाना, ज्ञानेश कुमार का लिया नाम; चुनाव आयोग पर नए विरोध के संकेत

    अभिजीत दीपके अचानक दिल्ली रवाना, ज्ञानेश कुमार का लिया नाम; चुनाव आयोग पर नए विरोध के संकेत

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके समेत संगठन के प्रमुख नेता अपने तय कार्यक्रम रद्द कर तत्काल दिल्ली रवाना हुए हैं। संगठन ने गुरुवार को राजधानी में एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की घोषणा की है। इस घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर संगठन की ओर से नए कदम या विरोध कार्यक्रम की घोषणा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    अभिजीत दीपके के साथ आशुतोष रांका और सौरभ दास भी दिल्ली पहुंचने की तैयारी में जुटे हैं। नेताओं ने अपने पहले से तय कार्यक्रमों को रद्द करने की जानकारी दी है। दीपके ने एक पोस्ट में कहा कि वह महाराष्ट्र और गुजरात सीमा क्षेत्र में थे, लेकिन अब दिल्ली की उड़ान पकड़ने के लिए लौट रहे हैं। इसी संदेश में उन्होंने ज्ञानेश कुमार का भी उल्लेख किया।

    इससे पहले दीपके ने चुनाव आयोग में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली में जरूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस की जानकारी दी थी। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के नाम का उल्लेख करते हुए संकेत दिया था कि संगठन अब चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े मुद्दों को अपने अभियान का हिस्सा बना सकता है।

    आशुतोष रांका ने भी कहा था कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता से जुड़ी हालिया घटनाओं को देखते हुए उन्होंने अपने पहले से तय कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। उनके मुताबिक, संगठन के प्रमुख नेता तत्काल दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं और वहां अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी बात रखेंगे।

    पहले इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का समय दोपहर 12 बजे बताया गया था, लेकिन बाद में इसे दोपहर 2 बजे करने की जानकारी दी गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास के शामिल होने की बात कही गई है। संगठन ने इसके लिए लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखा है।

    यह घटनाक्रम चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच सामने आया है। चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची की समीक्षा को लेकर कई राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ भी अलग-अलग आपत्तियां और मांगें सामने आई हैं। इन मुद्दों को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप और चुनाव प्रक्रिया से संबंधित अन्य मांगों की चर्चा भी जारी है।

    वहीं, चुनाव आयोग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि एसआईआर समेत उसके फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए जाते हैं। आयोग के अनुसार, मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा कोई नई प्रक्रिया नहीं है और पहले भी अलग-अलग समय पर ऐसी कवायद की जाती रही है। इस बार तकनीक के इस्तेमाल से प्रक्रिया को अधिक व्यापक और व्यवस्थित बनाने की बात कही गई है।

    चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि निर्णय प्रक्रिया में अधिकारियों के बीच मतभेद या अलग-अलग विचार होना अपने आप में संस्थागत टकराव का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। आयोग के अनुसार अंतिम निर्णय सभी संबंधित अधिकारियों की सहमति से लिए जा रहे हैं।

    ऐसे में अब दिल्ली में होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नजर बनी हुई है। अभिजीत दीपके और संगठन के अन्य नेताओं के दिल्ली पहुंचने तथा ज्ञानेश कुमार का लगातार उल्लेख किए जाने से यह स्पष्ट है कि चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे उनके अगले सार्वजनिक अभियान में प्रमुखता से उठ सकते हैं। हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन की ओर से कौन से ठोस कदम या नए कार्यक्रम घोषित किए जाएंगे, इसकी जानकारी आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • चांदी में तेजी का अनुमान, अगली दिवाली तक 4 लाख रुपये किलो तक पहुंचने की संभावना

    चांदी में तेजी का अनुमान, अगली दिवाली तक 4 लाख रुपये किलो तक पहुंचने की संभावना

    नई दिल्ली ।चांदी की कीमतों को लेकर आने वाले समय के लिए एक बड़ा अनुमान सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक मांग में लगातार बढ़ोतरी और खदानों से सीमित आपूर्ति के कारण वैश्विक बाजार में चांदी की कीमतों में आगे भी तेजी देखने को मिल सकती है। अनुमान के अनुसार अगले छह महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत 85 से 90 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है, जबकि दिवाली 2027 तक यह 120 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक जाने की संभावना जताई गई है।

    सितंबर 2026 में घरेलू बाजार में चांदी का बेंचमार्क भाव करीब 2.34 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि रुपये-डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क और प्रीमियम जैसे कारकों को ध्यान में रखते हुए घरेलू बाजार में चांदी की कीमत दिवाली 2027 तक करीब 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा स्तर की तुलना में लगभग 71 फीसदी तक की संभावित बढ़ोतरी का संकेत देता है। हालांकि यह एक अनुमान है और वास्तविक कीमत बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है।

    चांदी में संभावित तेजी के पीछे सबसे प्रमुख कारण औद्योगिक मांग को माना गया है। चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, तकनीकी उपकरणों और कई औद्योगिक उत्पादों में होता है। तकनीकी क्षेत्र के विस्तार के साथ इसकी मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर, खदानों से चांदी की आपूर्ति उसी गति से बढ़ाना आसान नहीं है।

    वैश्विक बाजार में 2026 के दौरान चांदी की मांग और आपूर्ति के बीच करीब 4.63 करोड़ औंस का अंतर रहने का अनुमान लगाया गया है। यह लगातार छठा वर्ष हो सकता है जब चांदी की वैश्विक आपूर्ति मांग से कम रहेगी। मांग और आपूर्ति के इस अंतर को कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल किया जा रहा है।

    चांदी के उत्पादन की संरचना भी इसकी आपूर्ति को प्रभावित करती है। अनुमान के अनुसार 2026 में वैश्विक चांदी उत्पादन करीब 84.41 करोड़ औंस रह सकता है। खास बात यह है कि कुल चांदी उत्पादन का केवल लगभग एक चौथाई हिस्सा प्राथमिक चांदी की खदानों से आता है। चांदी की बड़ी मात्रा तांबा, जस्ता और सीसा जैसी दूसरी धातुओं के खनन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है।

    इस वजह से चांदी की कीमत बढ़ने के बावजूद इसका उत्पादन उसी अनुपात में बढ़ाना चुनौतीपूर्ण रहता है। यदि औद्योगिक मांग आगे भी मजबूत बनी रहती है और खनन से मिलने वाली आपूर्ति सीमित रहती है, तो बाजार में मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ सकता है।

    रिपोर्ट में अगले छह महीनों के लिए अंतरराष्ट्रीय चांदी की कीमत 85 से 90 डॉलर प्रति औंस और दिवाली 2027 तक 120 डॉलर प्रति औंस का अनुमान दिया गया है। घरेलू बाजार के लिए करीब 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का संभावित स्तर बताया गया है। हालांकि चांदी की कीमतों पर वैश्विक बाजार, मुद्रा विनिमय दर, आयात शुल्क, औद्योगिक मांग, निवेश मांग और उपलब्ध आपूर्ति जैसे कई कारकों का असर पड़ता है। इसलिए ये आंकड़े बाजार का अनुमान हैं, निश्चित कीमत नहीं।

  • चीन का एआई मिशन तेज, रोबोटिक्स और सरकारी निवेश के सहारे तकनीकी ताकत बढ़ाने की तैयारी

    चीन का एआई मिशन तेज, रोबोटिक्स और सरकारी निवेश के सहारे तकनीकी ताकत बढ़ाने की तैयारी

    नई दिल्ली । चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी क्षमता तेजी से बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार भारी निवेश, तकनीकी अनुसंधान और औद्योगिक विकास के जरिए एआई को अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की योजना पर आगे बढ़ रही है। इस रणनीति का उद्देश्य आने वाले वर्षों में चीन को वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाना है।

    चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाल ही में एक प्रौद्योगिकी पार्क का दौरा किया, जहां रोबोटिक्स और एआई से जुड़ी कई परियोजनाओं को प्रदर्शित किया गया। इस दौरान उन्होंने रोबोटिक तकनीक के इस्तेमाल को देखा और कहा कि उन्नत रोबोटिक्स तथा उच्चस्तरीय विनिर्माण चीन की अगली आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। चीन की सरकार एआई को केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय विभिन्न औद्योगिक और सामाजिक क्षेत्रों में इस्तेमाल करने की दिशा में काम कर रही है।

    जिस प्रौद्योगिकी पार्क का दौरा किया गया, वहां सैकड़ों कंपनियां अत्याधुनिक चिप्स और एआई मॉडल विकसित करने में लगी हैं। स्थानीय प्रशासन इन कंपनियों को बड़े स्तर पर कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध करा रहा है। इसका उद्देश्य एआई अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास की गति को बढ़ाना है।

    चीन में एआई से जुड़े अनुसंधान का दायरा भी लगातार विस्तृत किया जा रहा है। तकनीकी प्रदर्शनों में ऐसे चिप्स और उपकरण शामिल हैं जिनका इस्तेमाल अत्याधुनिक प्रणालियों में किया जा सकता है। इसके अलावा लकवाग्रस्त मरीजों को संवाद करने में मदद करने वाली ब्रेन-इम्प्लांट तकनीक जैसे प्रयोग भी सामने आए हैं। इससे संकेत मिलता है कि चीन एआई और रोबोटिक्स को औद्योगिक उपयोग के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी आगे बढ़ाना चाहता है।

    इस अभियान में सरकारी पूंजी की भूमिका काफी बड़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2000 से 2023 के बीच सरकार के नेतृत्व वाले फंडों ने एआई कंपनियों में 184 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया। इसके अलावा पिछले साल सरकार और सरकारी बैंकों की ओर से एआई क्षेत्र में सैकड़ों अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई थी। हालांकि निजी क्षेत्र से चीन में होने वाला एआई निवेश अभी अमेरिका की तुलना में कम बताया गया है।

    चीन की बढ़ती बुजुर्ग आबादी भी रोबोटिक्स के विकास की एक बड़ी वजह है। देश में ऐसे बुद्धिमान रोबोट तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है जो भविष्य में कामगारों की कमी को पूरा करने में मदद कर सकें। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी एआई आधारित डिजिटल तकनीक के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर काम हो रहा है।

    सरकार का लक्ष्य 2030 तक एआई टूल्स और एआई एजेंट्स की पहुंच चीनी समाज के 90 प्रतिशत हिस्से तक बढ़ाने का है। हालांकि इस लक्ष्य को किस तरह मापा जाएगा, इसकी स्पष्ट रूपरेखा सामने नहीं आई है।

    एआई के विस्तार के साथ चीन के सामने कुछ जोखिम भी हैं। उन्नत चैटबॉट और सूचना आधारित तकनीक सरकारी सूचना नियंत्रण की व्यवस्था के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकती हैं। वहीं अत्याधुनिक विदेशी एआई मॉडल साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसके बावजूद चीन सरकार एआई, रोबोटिक्स और उन्नत तकनीक में निवेश तथा अनुसंधान को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।

  • USS अब्राहम लिंकन पर 8 नौसैनिकों ने की आत्महत्या की कोशिश, 286 दिन समुद्र में रही तैनाती

    USS अब्राहम लिंकन पर 8 नौसैनिकों ने की आत्महत्या की कोशिश, 286 दिन समुद्र में रही तैनाती


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन पर लंबे समय तक समुद्र में तैनाती के दौरान आठ नौसैनिकों द्वारा आत्महत्या की कोशिश किए जाने की जानकारी सामने आई है। अमेरिकी कार्यवाहक नेवी सेक्रेटरी हंग काओ ने सीएनएन को दिए एक पत्र में यह जानकारी दी है। यह पत्र उन्होंने सीनेटर किर्स्टन गिलीब्रांड के सवालों के जवाब में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ओर से लिखा था।

    हंग काओ के मुताबिक, लिंकन की तैनाती शुरू होने के बाद से पूरे स्ट्राइक ग्रुप में आत्महत्या के कुल आठ प्रयास दर्ज किए गए। इनमें USS अब्राहम लिंकन के क्रू के साथ एयरविंग, डिस्ट्रॉयर स्क्वाड्रन और स्ट्राइक ग्रुप के साथ तैनात अन्य जहाजों के सैन्यकर्मी भी शामिल हैं। यह पोत ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के तहत लंबे समय तक समुद्र में तैनात रहा था।

    USS अब्राहम लिंकन करीब 286 दिन समुद्र में रहने के बाद एक सितंबर को थाईलैंड के एक पर्यटन शहर पहुंचा। उसकी तैनाती पहले मई में समाप्त होनी थी, लेकिन ईरान के साथ तनाव जारी रहने के कारण इसे आगे बढ़ा दिया गया था।

    समुद्र में कूदने की कोशिश की घटनाएं भी सामने आईं

    अगस्त में दो सैन्य समाचार पत्रों ने नौसैनिकों की मानसिक स्थिति और पोत पर काम करने की परिस्थितियों को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की थीं। इनमें कुछ सैन्यकर्मियों द्वारा समुद्र में कूदने की कोशिश किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इसके बाद डेमोक्रेटिक सांसदों ने मामले की जांच की मांग की थी।

    काओ के अनुसार, मार्च में एक नौसैनिक को उसके साथियों ने समुद्र में कूदने से रोक लिया था। वहीं, अगस्त में एक सैन्यकर्मी वास्तव में समुद्र में कूद गया था। उसे बचा लिया गया और इलाज के लिए जहाज से बाहर भेजा गया।

    खाने और जरूरी सामान की कमी की शिकायतें

    पोत पर तैनात सैन्यकर्मियों की परिस्थितियों को लेकर अन्य शिकायतें भी सामने आई थीं। इनमें फफूंद की समस्या के अलावा भोजन और साबुन जैसी जरूरी वस्तुओं की कमी की खबरें शामिल थीं।

    काओ ने स्वीकार किया कि जहाज पर खाने के विकल्पों में अस्थायी रूप से कटौती की गई थी। हालांकि, उनके मुताबिक नौसैनिकों को रोजाना चार बार संतुलित भोजन उपलब्ध कराया जाता रहा। इससे पहले रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पोत पर खराब परिस्थितियों से जुड़ी खबरों को गलत बताया था।

    ताजा जानकारी सामने आने के बाद सीनेटर किर्स्टन गिलीब्रांड ने सरकार पर सैन्यकर्मियों की परिस्थितियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। लंबे समय तक समुद्र में तैनाती, मानसिक स्वास्थ्य और जहाज पर उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सामने आई जानकारी ने अमेरिकी नौसेना में सैनिकों की स्थिति पर बहस को फिर तेज कर दिया है।