Author: bharati

  • रणभूमि से आगे मानवीय सेवा तक भारतीय सेना की पहचान, राजनाथ सिंह ने गिनाईं सैन्य चिकित्सा की नई प्राथमिकताएं

    रणभूमि से आगे मानवीय सेवा तक भारतीय सेना की पहचान, राजनाथ सिंह ने गिनाईं सैन्य चिकित्सा की नई प्राथमिकताएं

    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारतीय सशस्त्र बलों की पहचान केवल युद्ध के मैदान में उनके साहस और पराक्रम से नहीं होती, बल्कि मानवीय सहायता, आपदा राहत और सेवा भावना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं, मानवीय संकटों और कठिन परिस्थितियों में भारतीय सैनिक हमेशा लोगों की सहायता के लिए सबसे आगे रहते हैं। उनके अनुसार देश की सुरक्षा के साथ-साथ मानवता की सेवा भी भारतीय सेनाओं की मूल पहचान का हिस्सा है।

    रक्षा मंत्री ने लखनऊ स्थित कमांड हॉस्पिटल में देश के पहले समर्पित ‘डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन’ की स्थापना के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिक दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण और विषम भौगोलिक क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। सियाचिन की अत्यधिक बर्फीली ऊंचाइयों से लेकर रेगिस्तानी इलाकों की भीषण गर्मी तक, जवानों को अनेक प्रकार की शारीरिक और चिकित्सीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि कठिन तैनाती के दौरान सैनिकों को संक्रामक रोगों, अत्यधिक गर्मी और ठंड से होने वाली चोटों, अधिक ऊंचाई से जुड़ी बीमारियों, थकान, पोषण संबंधी समस्याओं, निर्जलीकरण और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों से जूझना पड़ता है। उनका विश्वास है कि नया विभाग इन परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक और प्रभावी चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित करेगा, जिससे सैनिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

    उन्होंने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि आज सुरक्षा चुनौतियां पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गई हैं। रासायनिक, जैविक और रेडियोलॉजिकल खतरों जैसे नए जोखिम लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह विभाग इन उभरती चुनौतियों पर अनुसंधान और विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सैन्य चिकित्सा सेवाओं की प्रतिष्ठा केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है। भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशनों में प्रमुख सैन्य योगदान देने वाले देशों में शामिल है। विदेशों में तैनात भारतीय सैन्य चिकित्सकों को भी विभिन्न प्रकार की चिकित्सा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे अनुभवों के आधार पर विकसित होने वाला यह विभाग भविष्य में वैश्विक स्तर पर भी सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान देने में सक्षम होगा।

    उन्होंने कहा कि कमांड हॉस्पिटल, लखनऊ लंबे समय से सैन्य चिकित्सा, अनुसंधान और अनुशासन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां के चिकित्सकों ने ‘ऑपरेशन विजय’ और कारगिल युद्ध जैसे महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं। अब इसी संस्थान में स्थापित हो रहा ‘डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन’ सैन्य स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने के साथ-साथ चिकित्सा अनुसंधान को भी मजबूत करेगा।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला केवल आर्थिक और सामाजिक प्रगति नहीं होती, बल्कि उसकी सैन्य शक्ति और सैनिकों का मनोबल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि जब कोई सैनिक देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करता है, तो उसके पीछे ऐसा मजबूत स्वास्थ्य तंत्र होना चाहिए जो हर परिस्थिति में उसका साथ दे। उनके अनुसार यह नया विभाग इसी विश्वास को और मजबूत करेगा तथा सशस्त्र बलों के कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।

  • भोपाल में किसान आंदोलन बना संघर्ष और परिवार की कहानी बेटियों ने खिलाया खाना पत्नी ने कहा खाली हाथ मत लौटना

    भोपाल में किसान आंदोलन बना संघर्ष और परिवार की कहानी बेटियों ने खिलाया खाना पत्नी ने कहा खाली हाथ मत लौटना


    भोपाल । भोपाल में जारी किसान आंदोलन अब केवल सरकारी नीतियों के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह किसानों के संघर्ष उनके परिवारों की उम्मीदों और गांव की आर्थिक हकीकत की मार्मिक कहानी बन गया है। राजधानी के होशंगाबाद रोड पर हजारों किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। इस आंदोलन के बीच कई ऐसे दृश्य सामने आए जिन्होंने हर किसी को भावुक कर दिया। कहीं दो बेटियां अपने किसान पिता के लिए घर का बना खाना लेकर पहुंचीं तो कहीं एक पत्नी ने अपने पति को साफ शब्दों में कह दिया कि इस बार मांगें मनवाकर ही घर लौटना।

    संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में निकली किसान क्रांति पैदल यात्रा नर्मदापुरम जिले के बरखेड़ा से शुरू होकर भोपाल पहुंची है। किसान मूंग की शत प्रतिशत सरकारी खरीदी खाद वितरण व्यवस्था में सुधार और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    आंदोलन के बीच कटारा हिल्स में रहने वाली प्रगति पटेल और उनकी बहन प्रकृति पटेल अपने पिता के लिए भोजन लेकर धरना स्थल पहुंचीं। दोनों भोपाल में पढ़ाई कर रही हैं। प्रगति ने कहा कि उन्होंने बचपन से अपने पिता को खेतों में मेहनत करते देखा है लेकिन मेहनत के अनुरूप उन्हें कभी उचित मूल्य नहीं मिला। उनका कहना था कि यदि किसान खेती करना छोड़ देगा तो देश की खाद्य व्यवस्था पर संकट खड़ा हो जाएगा। दोनों बहनों ने कहा कि अपने अधिकारों की लड़ाई में डरने का सवाल ही नहीं उठता और वे अपने पिता के संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ी हैं।

    हरदा से आए किसान अशोक गुर्जर ने बताया कि इस बार भीषण गर्मी में कड़ी मेहनत कर मूंग की फसल तैयार की लेकिन सरकार पूरी उपज खरीदने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि घर से निकलते समय उनकी पत्नी ने उन्हें सिर्फ एक बात कही कि इस बार मांगें पूरी कराकर ही वापस आना। चाहे जितना समय लगे लेकिन खाली हाथ मत लौटना। अशोक का कहना है कि गांव में किसान लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहा है और खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है।

    कई किसानों ने आंदोलन के दौरान अपनी आर्थिक परेशानियां भी साझा कीं। हरदा के किसान बृजेश जाट ने बताया कि मूंग की खेती में उन्होंने गेहूं की पूरी कमाई लगा दी लेकिन सीमित खरीदी की वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि दो महीने से बच्चों की स्कूल फीस तक जमा नहीं कर पाए। फीस नहीं भरने पर स्कूल बस संचालकों ने बच्चों को बस में बैठाने से मना कर दिया और स्कूल प्रशासन ने भी चेतावनी दे दी। उनका कहना है कि किसान परिवार आज सम्मान और अस्तित्व दोनों की लड़ाई लड़ रहा है।

    वहीं किसान दीपक पटवारे ने बताया कि आठ दिन पहले उनके पिता का घुटना बदलने का ऑपरेशन हुआ था लेकिन इसके बावजूद वे आंदोलन में शामिल होने भोपाल पहुंचे। खुद कमर दर्द की समस्या से जूझ रहे दीपक बेल्ट बांधकर पैदल यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पास लगभग 200 क्विंटल मूंग की उपज है लेकिन सरकारी खरीदी सीमित होने से पूरी फसल बिक नहीं पा रही है। परिवार की जिम्मेदारियों और बच्चों की पढ़ाई के बावजूद उन्होंने आंदोलन को प्राथमिकता दी है।

    कई किसानों ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए कठिनाइयों का सामना करना पड़े तो भी वे आंदोलन जारी रखेंगे। किसानों का मानना है कि यह केवल फसल की कीमत का मुद्दा नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और खेती की सुरक्षा की लड़ाई है।

    राजधानी भोपाल में जारी यह आंदोलन अब केवल नारों तक सीमित नहीं है बल्कि परिवार के त्याग संघर्ष और उम्मीदों की ऐसी तस्वीर बन गया है जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अब सभी की नजर सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हुई है।

  • होर्मुज और लाल सागर में बढ़ते तनाव से भारतीय कारोबार पर खतरा, निर्यात-आयात कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका

    होर्मुज और लाल सागर में बढ़ते तनाव से भारतीय कारोबार पर खतरा, निर्यात-आयात कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक व्यापार के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है, तो भारतीय निर्यातकों और आयातकों की लागत बढ़ सकती है। इसका सबसे अधिक प्रभाव उन छोटे और मझोले कारोबारियों पर पड़ने की संभावना है, जिनके लिए बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों तक पहुंचाना आसान नहीं होता।

    रिपोर्ट के मुताबिक भारत के कच्चे तेल के आयात का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इसके अलावा एलएनजी और एलपीजी जैसी ऊर्जा आपूर्ति भी काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर करती है। ऐसे में इस समुद्री रास्ते पर किसी भी तरह का व्यवधान देश की ऊर्जा सुरक्षा और आयात लागत दोनों को प्रभावित कर सकता है।

    विश्लेषण में कहा गया है कि यदि होर्मुज और लाल सागर दोनों समुद्री मार्ग एक साथ प्रभावित होते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेज़ी से बढ़ सकती हैं। इससे ईंधन महंगा होने के साथ-साथ परिवहन, विनिर्माण और ऊर्जा आधारित उद्योगों की लागत में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इसका सीधा असर महंगाई और औद्योगिक उत्पादन पर भी देखने को मिल सकता है।

    रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक समुद्री परिवहन पहले से ही दबाव में है। यदि जहाजों को वैकल्पिक मार्गों से होकर लंबी दूरी तय करनी पड़ी, तो सामान की डिलीवरी में दो से तीन सप्ताह तक अतिरिक्त समय लग सकता है। इससे मालभाड़ा, समुद्री बीमा प्रीमियम और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी अन्य लागतों में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र के अलावा ऑटोमोबाइल, रसायन, उर्वरक, धातु और विनिर्माण जैसे उद्योग भी इस स्थिति से प्रभावित हो सकते हैं। कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत कंपनियों के परिचालन खर्च को बढ़ाएगी, जिससे उनके मुनाफे पर दबाव आएगा। साथ ही सप्लाई चेन में देरी होने से उत्पादन और वितरण की गति भी प्रभावित हो सकती है।

    रिपोर्ट के अनुसार बड़ी कंपनियां अपने विविध आपूर्ति स्रोतों, बेहतर वित्तीय क्षमता और मजबूत वैश्विक नेटवर्क के कारण ऐसे झटकों का सामना अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से कर सकती हैं। वहीं छोटे और मझोले उद्यमों के सामने कार्यशील पूंजी की जरूरत बढ़ने, नकदी प्रवाह पर दबाव और लाभप्रदता में कमी जैसी चुनौतियां अधिक गंभीर रूप से सामने आ सकती हैं।

    विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यदि समुद्री मार्गों में व्यवधान लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर भी दिखाई देगा। ऐसे हालात में कंपनियों को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत, बेहतर जोखिम प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स रणनीति अपनाने की आवश्यकता होगी, ताकि संभावित आर्थिक झटकों के प्रभाव को कम किया जा सके।

  • कंगना रनौत ने बयान पर दी सफाई, बोलीं- अशोभनीय हरकतों का किया था विरोध, मीडिया पर लगाया बयान तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप

    कंगना रनौत ने बयान पर दी सफाई, बोलीं- अशोभनीय हरकतों का किया था विरोध, मीडिया पर लगाया बयान तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप

    नई दिल्ली । अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत के छात्र विरोध प्रदर्शन को लेकर दिए गए हालिया बयान पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बढ़ते विवाद के बीच कंगना ने एक नया वीडियो जारी कर अपने बयान पर विस्तृत सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया और उनके पूरे बयान को दिखाने के बजाय केवल चुनिंदा हिस्सों को प्रचारित किया गया। उनका कहना है कि उन्होंने किसी वर्ग विशेष को निशाना नहीं बनाया, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर अशोभनीय व्यवहार का विरोध किया था।

    कंगना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किए गए वीडियो में कहा कि उन्होंने सड़क पर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की मौजूदगी में होने वाली अभद्र भाषा और अश्लील हरकतों को सामान्य मानने से इनकार किया था। उनके अनुसार ऐसे व्यवहार को सामाजिक स्वीकृति नहीं दी जा सकती और समाज को इस तरह की प्रवृत्तियों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ सामाजिक वातावरण बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

    अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि उनके बयान के बाद मीडिया के एक वर्ग ने उन्हें लगातार निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि उनके सकारात्मक विचारों और अन्य मुद्दों पर दिए गए बयानों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि विवादित हिस्से को बार-बार प्रसारित किया जा रहा है। उनके मुताबिक टीआरपी, लाइक्स और व्यूज की होड़ में उनके पूरे संदेश को सामने नहीं रखा गया, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी।

    कंगना ने यह भी कहा कि उन्होंने हाल के दिनों में देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों की सराहना की है और युवाओं, विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों तथा देश को आगे बढ़ाने वाली नई पीढ़ी की प्रशंसा भी की है। उनका दावा है कि इन सकारात्मक बयानों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया और केवल विवाद से जुड़े अंशों को प्रमुखता मिली।

    वीडियो में उन्होंने अपने आलोचकों की प्रतिक्रियाओं पर भी टिप्पणी की। कंगना ने कहा कि कुछ लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गलत व्याख्या कर रहे हैं। उनके अनुसार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि सार्वजनिक स्थानों पर ऐसा व्यवहार किया जाए जिससे दूसरे लोगों की भावनाएं, आस्था या सम्मान प्रभावित हों। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में अधिकारों के साथ जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।

    उन्होंने आगे कहा कि समाज में अनुशासन और शालीनता का पालन प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक यदि कोई व्यक्ति सामाजिक या पेशेवर जीवन में मर्यादाओं का पालन नहीं करता तो उसे इसके परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन का उद्देश्य स्वयं को बेहतर बनाना और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ना होना चाहिए, न कि ऐसे आचरण को बढ़ावा देना जिससे सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो।

    वीडियो के अंत में कंगना रनौत ने सभी देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लोगों से अपने गुरुओं के बताए मार्ग पर चलने, जीवन में अनुशासन अपनाने और निरंतर बेहतर इंसान बनने का संदेश दिया। उनके इस नए वीडियो के सामने आने के बाद भी उनके बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी है, जबकि समर्थक और आलोचक दोनों अपने-अपने पक्ष पर कायम दिखाई दे रहे हैं।

  • लोकसभा में राहुल गांधी के संबोधन पर हंगामा, किरेन रिजिजू ने असंसदीय भाषा के इस्तेमाल पर जताई कड़ी आपत्ति

    लोकसभा में राहुल गांधी के संबोधन पर हंगामा, किरेन रिजिजू ने असंसदीय भाषा के इस्तेमाल पर जताई कड़ी आपत्ति

    नई दिल्ली । लोकसभा में एंटी पेपर लीक विषय पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संबोधन पर बुधवार को सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। भाषण के दौरान इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों पर सत्तापक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष ने अपने संबोधन में असंसदीय भाषा का प्रयोग किया, जो संसदीय परंपराओं और नियमों के अनुरूप नहीं है।

    राहुल गांधी अपने संबोधन के दौरान एंटी पेपर लीक से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, जिन पर सत्तापक्ष के सांसदों ने आपत्ति दर्ज कराई। विरोध बढ़ने के साथ ही सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया और कई सदस्य अपनी सीटों से खड़े होकर विरोध जताने लगे।

    स्थिति को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि संसदीय नियमों के अनुसार किसी भी सदस्य को मर्यादित भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उनका कहना था कि सरकार विपक्ष की बात सुनने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन चर्चा के दौरान असंसदीय शब्दों का प्रयोग स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    रिजिजू ने नेता प्रतिपक्ष से आग्रह किया कि वे अपनी बात पूरी मजबूती से रखें, लेकिन संसदीय परंपराओं का पालन भी करें। उन्होंने कहा कि नियम सरकार ने नहीं बनाए हैं, बल्कि संसद की स्थापित प्रक्रियाओं के तहत सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू होते हैं। उनके अनुसार किसी भी सदस्य को ऐसे शब्दों से बचना चाहिए, जिनसे सदन की कार्यवाही प्रभावित हो।

    इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए कथित असंसदीय शब्दों को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाया जाए। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने स्थिति पर संज्ञान लिया और सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। हंगामे के शांत होने के बाद अध्यक्ष ने राहुल गांधी को अपना भाषण आगे जारी रखने का अवसर भी दिया।

    चर्चा के दौरान किरेन रिजिजू ने यह भी कहा कि पहले भी कई अवसरों पर विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों के संबोधन के दौरान व्यवधान उत्पन्न किया गया था। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के समय हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि संसद में स्वस्थ और सार्थक बहस लोकतंत्र की पहचान है, लेकिन इसके लिए सभी पक्षों को संसदीय मर्यादाओं का सम्मान करना आवश्यक है।

    दूसरी ओर, विपक्ष एंटी पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरता रहा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा युवाओं के हितों से जुड़े सवाल उठाता रहा। इस विषय पर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

    लोकसभा की कार्यवाही के दौरान हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर संसदीय भाषा, सदन की गरिमा और बहस के स्तर को लेकर चर्चा तेज कर दी है। अब आगे की कार्यवाही में अध्यक्ष के निर्णय और संसदीय नियमों के तहत उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • बारिश ने पकड़ी रफ्तार बालाघाट से ग्वालियर तक झमाझम बरसात 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट प्रशासन सतर्क

    बारिश ने पकड़ी रफ्तार बालाघाट से ग्वालियर तक झमाझम बरसात 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट प्रशासन सतर्क


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और प्रदेश के कई जिलों में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में सक्रिय मजबूत मानसूनी सिस्टम को देखते हुए 15 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। सबसे अधिक असर बालाघाट जिले में देखने को मिला जहां बीते 24 घंटे के दौरान करीब 3 इंच बारिश दर्ज की गई। लगातार हो रही वर्षा के कारण कई नदी नाले उफान पर पहुंच गए हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के कई संपर्क मार्ग बंद करने पड़े हैं। प्रशासन लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील कर रहा है।

    मौसम विभाग के अनुसार बालाघाट सिवनी छिंदवाड़ा नर्मदापुरम और रायसेन जिलों में अति भारी बारिश की संभावना है। इन क्षेत्रों में अगले 24 घंटे के दौरान लगभग 4 इंच तक वर्षा हो सकती है। वहीं देवास सीहोर हरदा बैतूल पांढुर्णा सागर नरसिंहपुर दमोह जबलपुर और छतरपुर सहित अन्य जिलों में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। विभाग ने बिजली गिरने तेज हवाएं चलने और जलभराव जैसी स्थितियों को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के ऊपर सक्रिय मानसून ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से यह मजबूत मौसम प्रणाली बनी हुई है। यह सिस्टम ओडिशा दक्षिण झारखंड और उत्तर छत्तीसगढ़ से होते हुए मध्यप्रदेश के पूर्वी और मध्य हिस्सों को प्रभावित कर रहा है। आने वाले दिनों में इसके धीरे धीरे कमजोर होकर अवदाब और फिर निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना है लेकिन तब तक प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    बालाघाट में लगातार दो दिनों से हो रही बारिश के कारण दैतबर्रा मंगलेगांव पुल टोंडिया नाला और थानेगांव का नाला पूरी तरह उफान पर हैं। सुरक्षा के लिहाज से कई मार्गों पर यातायात रोक दिया गया है। इसके बावजूद कुछ लोग जान जोखिम में डालकर नालों को पार करते दिखाई दिए। टोंडिया नाले का पानी एक ढाबे तक पहुंच गया जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं बैहर परसवाड़ा मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

    ग्वालियर में भी बुधवार सुबह हुई झमाझम बारिश ने कई दिनों से जारी उमस और गर्मी से लोगों को राहत दिलाई। वहीं भोपाल इंदौर उज्जैन रीवा सतना शहडोल धार खरगोन खंडवा बुरहानपुर रतलाम मंदसौर नीमच विदिशा राजगढ़ शिवपुरी मुरैना भिंड दतिया कटनी मंडला डिंडौरी सीधी सिंगरौली पन्ना टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत कई जिलों में भी हल्की से मध्यम और कहीं कहीं तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आगामी दिनों में तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। किसानों को खेतों में सावधानी बरतने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेश में औसतन 13.6 इंच बारिश दर्ज की गई है जबकि इस समय तक लगभग 16.5 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अभी भी करीब 17 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान सक्रिय मानसूनी सिस्टम के चलते आगामी चार दिनों में अच्छी बारिश होने से यह कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान सिस्टम का प्रभाव 1 अगस्त तक बना रहेगा। इस दौरान कई जिलों में अत्यधिक वर्षा होने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से नदी नालों के पास जाने से बचने जलभराव वाले इलाकों में सावधानी बरतने और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।

  • अभिनेता संजय दत्त के 67वें जन्मदिन पर उनके उतार-चढ़ाव भरे जीवन और चार दशक लंबे फिल्मी सफर का लेखा-जोखा

    अभिनेता संजय दत्त के 67वें जन्मदिन पर उनके उतार-चढ़ाव भरे जीवन और चार दशक लंबे फिल्मी सफर का लेखा-जोखा

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में अपनी विशिष्ट अभिनय शैली और दमदार शख्सियत के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता संजय दत्त 29 जुलाई को अपना 67वां जन्मदिन मना रहे हैं। चार दशक से भी लंबे अपने करियर में लगभग 135 से अधिक फिल्मों में अभिनय करने वाले संजय दत्त का जीवन सफलताओं, व्यक्तिगत त्रासदियों, विवादों और कड़े संघर्षों की एक अनूठी दास्तान रहा है। फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद उनका जीवन कभी आसान नहीं रहा और उन्हें कई मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा।

    सुप्रसिद्ध अभिनेता सुनील दत्त और अभिनेत्री नरगिस के घर जन्मे संजय दत्त ने महज बारह वर्ष की उम्र में कव्वाली गायक के रूप में एक छोटी सी भूमिका से अपनी अभिनय यात्रा की शुरुआत की थी। इसके बाद वर्ष 1981 में उन्होंने मुख्य अभिनेता के तौर पर अपनी पहली फिल्म ‘रॉकी’ से बॉलीवुड में औपचारिक कदम रखा। हालांकि फिल्म के प्रदर्शन से ठीक तीन दिन पहले उनकी मां का निधन हो गया, जिसने उनके जीवन पर गहरा मानसिक प्रभाव डाला। इसके बाद वे गंभीर नशे की लत में फंस गए, जिससे उबरने के लिए उन्हें लंबा वक्त लगा।

    अमेरिका स्थित पुनर्वास केंद्र से लौटने के बाद उन्होंने अपनी शारीरिक फिटनेस और अभिनय पर ध्यान केंद्रित किया और 80 व 90 के दशक में एक प्रमुख एक्शन और रोमांटिक हीरो के रूप में खुद को स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने कई ब्लॉकबस्टर और यादगार फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। हालांकि वर्ष 1993 में आए मुंबई बम धमाकों के मामले में कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी के बाद उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन में एक बार फिर गंभीर उथल-पुथल देखने को मिली।

    व्यक्तिगत जीवन में संजय दत्त को कई बार अपनों को खोने का दर्द सहना पड़ा। उनकी पहली पत्नी का कम उम्र में ही गंभीर बीमारी के चलते निधन हो गया था। बाद के वर्षों में विभिन्न उतार-चढ़ावों से गुजरने के बाद उन्होंने मान्यता दत्त से विवाह किया। कई कानूनी लड़ाइयों, जेल की सजा और निजी असफलताओं के बावजूद वे हर बार एक मजबूत वापसी करने में सफल रहे। वर्ष 2018 में उनके संघर्षपूर्ण जीवन पर आधारित एक बायोपिक फिल्म का भी निर्माण किया गया था, जिसे दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया गया।

    वर्तमान समय में संजय दत्त हिंदी सिनेमा के साथ-साथ दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी बेहद सक्रिय हैं और नकारात्मक व मुख्य भूमिकाओं में अपनी छाप छोड़ रहे हैं। एक्शन, कॉमेडी, ड्रामा और थ्रिलर जैसे विभिन्न शैलियों की फिल्मों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के बाद अब वे अपनी आने वाली नई फिल्मों की तैयारियों में जुटे हुए हैं। चार दशक बाद भी उनका स्टारडम और प्रशंसकों के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बनी हुई है।

  • संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए चलाए जाएंगे राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम

    संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए चलाए जाएंगे राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम

    नई दिल्ली । संत गुरु रविदास महाराज के समता, सेवा और सामाजिक न्याय के संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने एक राष्ट्रव्यापी पहल की शुरुआत की है। जमशेदपुर में एक औपचारिक घोषणा के दौरान इस ‘समरसता संकल्प अभियान’ की विस्तृत रूपरेखा साझा की गई। यह व्यापक अभियान आषाढ़ पूर्णिमा से प्रारंभ होकर माघ पूर्णिमा तक चलेगा, जिसमें राष्ट्रीय, राज्य, जिला, मंडल और ग्राम स्तर तक विविध सांस्कृतिक व सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

    इस अभियान का मुख्य ध्येय संत रविदास द्वारा प्रतिपादित ‘बेगमपुरा’ के उस दर्शन को साकार करना है, जो शोषण और भेदभाव से मुक्त समाज की परिकल्पना पर आधारित है। संगठन का मानना है कि विकसित भारत के निर्माण में समाज के सभी वर्गों की समान सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज के प्रत्येक स्तर पर सद्भाव और समरसता का वातावरण तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    अभियान के तहत कई बड़े कार्यक्रमों की योजना तैयार की गई है। इसके शुरुआती चरण में शाम को दीप महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसके साथ ही वाराणसी स्थित पवित्र स्थल की पावन मिट्टी से भरे कलश देश भर के विभिन्न क्षेत्रों में भेजे जाएंगे। इसके अलावा पंजाब के जालंधर से वाराणसी तक एक भव्य समरसता यात्रा भी निकाली जाएगी। एक महीने तक चलने वाली इस यात्रा के माध्यम से आम जनमानस को संत रविदास के विचारों से जोड़ने का प्रयास होगा।

    सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए पूरे अभियान के दौरान संत संपर्क, छात्रावास संपर्क, समरसता संवाद, भजन-कीर्तन और विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला चलेगी। इसके तहत समाज के प्रबुद्ध जनों और संतों से सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर इन सभी गतिविधियों के सुचारू संचालन और समन्वय के लिए जिला और मंडल स्तर पर विशेष आयोजन समितियों का गठन भी शुरू कर दिया गया है।

  • नीट धांधली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

    नीट धांधली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली । नीट परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं को लेकर देश भर में जारी उथल-पुथल के बीच राज्य सरकारों का रुख बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि आंदोलन में भाग लेने वाले सामान्य और निर्दोष छात्रों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कठोर प्रशासनिक कदम नहीं उठाया जाएगा। हालांकि राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी आधिकारिक रुख में यह भी साफ कर दिया गया है कि आपराधिक इतिहास रखने वाले या हिंसा में संलिप्त लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

    राज्य सरकार द्वारा जारी औपचारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि नीट परीक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रमों और छात्र असंतोष पर काफी गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया है। गहन समीक्षा के बाद प्रशासन ने यह तय किया है कि जो युवा या विद्यार्थी केवल अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरे थे, उनके खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और न ही उन्हें बेवजह परेशान किया जाएगा। लेकिन इस सुरक्षा का दायरा केवल निर्दोष विद्यार्थियों तक ही सीमित रहेगा और पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रखने वाले तत्वों पर कानून का शिकंजा कसता रहेगा।

    प्रशासनिक स्तर पर यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के हालिया दिशानिर्देशों और न्यायिक टिप्पणियों के अनुरूप उठाया गया है। शीर्ष अदालत ने भी हाल ही में विभिन्न याचिकाओं पर विचार करते हुए साफ कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए, जबकि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर जांच एजेंसियां नियमानुसार कार्रवाई जारी रख सकती हैं। इसी के तहत राज्य के गृह विभाग ने अपने पुलिस बलों को निर्देश दिए हैं कि वे पुराने दर्ज मामलों की समीक्षा करें और छात्रों की पहचान सुनिश्चित करके ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाएं।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों और अव्यवस्था के सिलसिले में पुलिस में मामला दर्ज किया गया था। इस दर्ज मुकदमे की कड़ी में जांच एजेंसियों ने व्यापक छानबीन की है और अब तक कई संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने प्रदर्शन की आड़ में हिंसा भड़काने या पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों पर हमला करने का प्रयास किया था।

    उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल से पहले पूर्वोत्तर राज्य असम और पड़ोसी राज्य बिहार की सरकारों ने भी इसी तरह का उदार रुख अपनाया था। दोनों राज्यों ने घोषणा की थी कि परीक्षा में धांधली के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों और आम नागरिकों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकारों का मानना है कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किए गए प्रदर्शनों पर दंडात्मक रुख अपनाना उचित नहीं है, बशर्ते उसमें किसी असामाजिक तत्व की साजिश शामिल न हो।

    देशव्यापी स्तर पर नीट परीक्षा को लेकर मचा बवाल जुलाई के अंतिम सप्ताह में केंद्रीय स्तर पर हुए बड़े घटनाक्रमों के बाद थमता नजर आया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद त्यागने के बाद विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के दो दौर की सकारात्मक बातचीत हुई थी। उस वार्ता के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों ने यह सहमति व्यक्त की थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को निरस्त किया जाएगा, पुलिसिया उत्पीड़न रोका जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कानून लाया जाएगा। अब राज्य सरकारें उसी समझौते और न्यायिक आदेशों का क्रियान्वयन कर रही हैं।

  • सरकारी अधिकारियों द्वारा वाहनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने लागू की 'वन ऑफिसर, वन कार' नीति

    सरकारी अधिकारियों द्वारा वाहनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने लागू की 'वन ऑफिसर, वन कार' नीति

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने अपने मंत्रालयों और विभिन्न विभागों में पदस्थ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सरकारी वाहनों के बेजा इस्तेमाल को रोकने के लिए नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत ‘वन ऑफिसर, वन कार’ यानी एक अधिकारी को केवल एक ही सरकारी वाहन आवंटित करने की नीति को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए गए हैं। इस नए कदम से सरकारी तंत्र में अतिरिक्त गाड़ियों के अनधिकृत उपयोग पर पूरी तरह विराम लगने की उम्मीद है।

    नवीनतम सर्कुलर के अनुसार, सरकारी वाहन की पात्रता रखने वाले किसी भी अधिकारी को एक से अधिक कार आवंटित नहीं की जाएगी। यदि किसी अफसर को अपने मूल पद के साथ किसी अन्य मंत्रालय, विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या स्वायत्त निकाय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा जाता है, तब भी वह केवल एक ही आधिकारिक वाहन का उपयोग करने का हकदार होगा। अतिरिक्त दायित्व के आधार पर दूसरी गाड़ी हासिल करने की व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केंद्र के अधीन कार्यरत अधिकारी सार्वजनिक उपक्रमों या स्वायत्त संस्थाओं के बेड़े में शामिल वाहनों को अपने दैनिक या नियमित इस्तेमाल के लिए अपने पास नहीं रख सकेंगे। इस तरह की कार्यप्रणाली पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है। हालांकि, अंतर-राज्यीय या विभागीय आधिकारिक दौरों के दौरान आवश्यकता पड़ने पर अधिकारियों को इन संस्थाओं के वाहनों का उपयोग करने की विशेष छूट दी जाएगी, ताकि शासकीय कार्यों में कोई बाधा न आए।

    नए परिपत्र में सभी मंत्रालयों और विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इस्तेमाल में न आ रहे या अधिशेष वाहनों को तुरंत सुरक्षित कस्टडी में लिया जाए। यह निर्देश पूर्व में जारी उन नियमों को और मजबूती प्रदान करता है, जिनमें अधिकारियों द्वारा तय शुल्क देकर सीमित दायरे में सरकारी गाड़ी के निजी उपयोग की अनुमति दी गई थी। सरकार के इस कड़े रुख से जहां एक तरफ वाहनों के दुरुपयोग पर अंकुश लगेगा, वहीं दूसरी तरफ सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अनावश्यक वित्तीय बोझ में भी बड़ी कमी आएगी।