Author: bharati

  • जमशेदपुर के 300 साल पुराने हाथी खेदा मंदिर के अनोखे नियम, महिलाओं को नहीं मिलता प्रसाद


    रांची।
    झारखंड के जमशेदपुर के पास दलमा की पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच स्थित हाथी खेदा ठाकुर मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं और मान्यताओं के लिए जाना जाता है। करीब 300 साल पुराने इस मंदिर में किसी देवी-देवता की पारंपरिक प्रतिमा नहीं है। यहां मिट्टी से बने हाथियों की पूजा की जाती है। स्थानीय लोगों के बीच यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।

    हाथियों के आतंक से जुड़ी है मंदिर की कहानी

    स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सैकड़ों साल पहले दलमा के जंगलों में जंगली हाथियों का आतंक था। हाथियों के झुंड रात के समय गांवों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते थे। ग्रामीण ढोल बजाकर और मशालें जलाकर हाथियों को दूर रखने की कोशिश करते थे, लेकिन समस्या बनी रही।

    बताया जाता है कि इसके बाद गांव के बुजुर्गों की सलाह पर लोगों ने मिट्टी के हाथी बनाकर उनकी पूजा शुरू की। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इसके बाद हाथियों के गांवों में आने की घटनाएं कम होने लगीं। स्थानीय भाषा में ‘खेदा’ का अर्थ भगाना या दूर रखना बताया जाता है। इसी वजह से मंदिर का नाम हाथी खेदा पड़ा।

    मंदिर में सिर्फ मिट्टी के हाथियों की पूजा

    हाथी खेदा मंदिर की सबसे खास बात यहां मौजूद मिट्टी के हाथी हैं। मंदिर परिसर में संगमरमर या धातु से बनी किसी पारंपरिक देवी-देवता की प्रतिमा के बजाय अलग-अलग आकार के मिट्टी के हाथी दिखाई देते हैं।

    मान्यता के अनुसार, श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने की कामना से यहां मिट्टी का हाथी चढ़ाते हैं। इसके अलावा नारियल, धूप, दीप और चुनरी चढ़ाने की परंपरा भी है।

    मन्नत पूरी होने पर बलि की परंपरा

    मंदिर से कई स्थानीय और आदिवासी रीति-रिवाज भी जुड़े हुए हैं। श्रद्धालुओं की ओर से मन्नत पूरी होने पर बकरे या भेड़ की बलि देने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है। स्थानीय लोगों के लिए यह सदियों पुरानी आस्था और परंपरा का हिस्सा है।

    प्रसाद को लेकर सख्त मान्यता

    हाथी खेदा मंदिर में प्रसाद को लेकर भी एक अनोखी परंपरा बताई जाती है। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, मंदिर में चढ़ाया गया प्रसाद महिलाओं को नहीं दिया जाता। इसके अलावा श्रद्धालुओं को प्रसाद मंदिर परिसर में ही ग्रहण करना होता है और उसे घर ले जाने की अनुमति नहीं है। मंदिर आने वाले श्रद्धालु इन परंपराओं का पालन करते हैं और इन्हें स्थानीय धार्मिक आस्था का हिस्सा मानते हैं।

    त्योहारों पर लगता है मेला

    मकर संक्रांति, चैत्र महीने और स्थानीय आदिवासी त्योहारों के दौरान हाथी खेदा मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंगलवार और रविवार को भी यहां विशेष भीड़ रहती है।

    आज भी दलमा के जंगलों में जंगली हाथियों की मौजूदगी रहती है। ऐसे में हाथी खेदा मंदिर स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था के साथ-साथ जंगल और वहां रहने वाले वन्यजीवों के साथ उनके ऐतिहासिक संबंध की एक अलग तस्वीर पेश करता है।

  • जम्मू-कश्मीर में हजारों किताबों पर कार्रवाई से सियासी बहस तेज, उमर और मीरवाइज ने उठाए सवाल

    जम्मू-कश्मीर में हजारों किताबों पर कार्रवाई से सियासी बहस तेज, उमर और मीरवाइज ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर के कॉलेजों और पुस्तकालयों में मौजूद किताबों की व्यापक स्क्रीनिंग और हजारों पुस्तकों को हटाए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सरकार के अनुसार 21,81,582 किताबों और प्रकाशनों की जांच की गई, जिनमें से 4,767 किताबों को प्रचलन से हटाया गया है। इनमें 518 ऐसी किताबें शामिल हैं, जिन पर पहले से प्रतिबंध लागू था। इसके अलावा 1,752 किताबों को विशेषज्ञ जांच के लिए भेजा गया है।

    इस कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किताबों पर प्रतिबंध लगाने का मुद्दा लोकतंत्र में व्यापक बहस का विषय है। उनके अनुसार मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में निर्वाचित सरकार के पास ऐसे फैसले खुद लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि परिस्थितियां बदलने पर इस पूरे मामले की दोबारा समीक्षा की जा सकती है।

    मामले पर मीरवाइज उमर फारूक ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने हजारों किताबों को हटाए जाने की कार्रवाई को चिंताजनक बताते हुए संबंधित किताबों के नाम और उन्हें हटाने के कारण सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अकादमिक स्वतंत्रता तथा अलग-अलग विचारों और दृष्टिकोणों तक छात्रों की पहुंच शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में किताबों को हटाने के पीछे आखिर किस तरह की नीति और उद्देश्य काम कर रहा है।

    सरकार की ओर से कार्रवाई को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया गया है। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने कहा कि किताबों की जांच करना और उनकी सामग्री का तथ्यात्मक परीक्षण करना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। उनका कहना है कि यदि कोई किताब आधिकारिक रूप से प्रतिबंधित है या उसमें आपत्तिजनक सामग्री पाई गई है, तो उसे सरकारी संस्थानों और पुस्तकालयों में नहीं रखा जाना चाहिए।

    भाजपा विधायक आरएस पठानिया ने भी कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में इतिहास तथ्यों के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए। उनके अनुसार काल्पनिक किस्सों, अफवाहों या किंवदंतियों को इतिहास के रूप में शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।

    भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता जोरवार सिंह जमवाल ने भी हटाई गई किताबों की सामग्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐतिहासिक विषयों पर आधारित पुस्तकों में तथ्यात्मकता और विश्वसनीयता जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में ऐसी सामग्री नहीं होनी चाहिए जो युवाओं को भ्रमित करने वाली हो।

    किताबों की स्क्रीनिंग से जुड़े आंकड़े विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सामने आए। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार जम्मू क्षेत्र में 9,32,941 और कश्मीर क्षेत्र में 12,48,641 किताबों तथा प्रकाशनों की जांच की गई। कार्रवाई के तहत कश्मीर क्षेत्र से 4,474 और जम्मू क्षेत्र से 293 किताबें हटाई गईं। वहीं 1,752 किताबों को विशेषज्ञ परीक्षण के लिए भेजा गया है, जिनमें जम्मू क्षेत्र की 538 और कश्मीर क्षेत्र की 1,214 किताबें शामिल हैं।

    सरकार के मुताबिक यह स्क्रीनिंग जुलाई में दो किताबों की खरीद को लेकर उठे विवाद के बाद शुरू हुई। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों और संबंधित पुस्तकालयों में उपलब्ध पुरानी और नई किताबों की सामग्री की जांच के निर्देश दिए। सरकार ने कहा है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में संवैधानिक मूल्यों, अकादमिक स्वतंत्रता, आलोचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिम्मेदार नागरिकता को बढ़ावा देने वाला वातावरण बनाए रखना जरूरी है। मामले में राजनीतिक दलों और विभिन्न पक्षों के अलग-अलग रुख के बीच अब किताबों की जांच और उन्हें हटाने के कारणों को लेकर बहस जारी है।

  • आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल की मौत मामले में नया खुलासा, आखिरी बातचीत में परीक्षा को लेकर कही थी ये बात

    आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल की मौत मामले में नया खुलासा, आखिरी बातचीत में परीक्षा को लेकर कही थी ये बात

    नई दिल्ली ।आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के मामले में जांच के बीच उनकी आखिरी बातचीत को लेकर नया खुलासा सामने आया है। बताया जा रहा है कि मौत से कुछ घंटे पहले साहिल ने एक महिला मित्र से फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान दोनों के बीच सेमेस्टर परीक्षा को लेकर चर्चा हुई थी। बातचीत के दौरान साहिल ने कहा था कि उनका पेपर अच्छा नहीं गया और यह भी कहा था कि उनसे गलती हो गई।

    जानकारी के मुताबिक, यह बातचीत 18 सितंबर की दोपहर करीब 2:30 बजे हुई थी। इसके कुछ घंटे बाद शाम के समय साहिल ने अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस बातचीत को साहिल की किसी व्यक्ति से हुई आखिरी बातचीत बताया जा रहा है। सामने आई जानकारी के अनुसार, इस दौरान साहिल ने जातिगत भेदभाव का कोई जिक्र नहीं किया था।

    साहिल की मौत से कुछ घंटे पहले परीक्षा को लेकर भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ था। बताया गया है कि सेमेस्टर परीक्षा के दौरान साहिल को कथित तौर पर मोबाइल फोन पर चैटजीपीटी का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। इसके बाद परीक्षा से जुड़ी स्थिति को लेकर साहिल और महिला मित्र के बीच बातचीत हुई थी। इसी बातचीत में उन्होंने परीक्षा ठीक नहीं जाने की बात कही थी।

    साहिल की मौत की खबर मिलने के बाद उनकी महिला मित्र की तबीयत बिगड़ने की भी जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि खबर सुनने के बाद उन्हें पैनिक अटैक आया, जिसके बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मामले की जांच कर रही पुलिस ने महिला मित्र का बयान भी दर्ज किया है। आखिरी बातचीत से जुड़े तथ्यों को जांच के महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।

    साहिल की मौत के बाद मामले की जांच को लेकर संस्थान स्तर पर भी कई कदम उठाए गए हैं। निष्पक्ष जांच के उद्देश्य से उस परीक्षा में निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को छुट्टी पर भेज दिया गया है। वह उसी परीक्षा में इनविजिलेटर थे, जिसमें साहिल को मोबाइल फोन के इस्तेमाल के मामले में पकड़े जाने की बात सामने आई है।

    मामले की विस्तृत जांच के लिए 10 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति भी गठित की गई है। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति की अध्यक्षता आईआईटी पलक्कड़ के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरपर्सन रमेश वेंकटेश्वरन कर रहे हैं। इसमें छात्रों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है।

    जांच समिति ने परीक्षा के दौरान की घटनाओं को समझने के लिए सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही उस कमरे में मौजूद छात्रों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। जांच में परीक्षा के दौरान की परिस्थितियों, साहिल की आखिरी बातचीत और उनकी मौत से पहले हुए घटनाक्रम को अलग-अलग पहलुओं से देखा जा रहा है।

    साहिल की मौत के बाद जातिगत भेदभाव से जुड़े आरोपों और परीक्षा से संबंधित घटनाओं को लेकर अलग-अलग चर्चाएं सामने आई हैं। हालांकि, आखिरी बातचीत के संबंध में सामने आई जानकारी में परीक्षा को लेकर बातचीत का उल्लेख है और उसमें जातिगत भेदभाव की चर्चा नहीं होने की बात कही गई है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ सीसीटीवी फुटेज, छात्रों के बयान और अन्य उपलब्ध जानकारी के आधार पर घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म अभी बाकी, अग्नियुग में लाला लाजपत राय के किरदार में आएंगे नजर

    धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म अभी बाकी, अग्नियुग में लाला लाजपत राय के किरदार में आएंगे नजर

    नई दिल्ली । धर्मेंद्र की फिल्मों को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए उनकी आखिरी फिल्म को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है। उनके निधन के बाद रिलीज हुई फिल्म इक्कीस को उनकी अंतिम फिल्म माना जा रहा था, लेकिन अब पता चला है कि उनकी एक और फिल्म रिलीज होना बाकी है। इस फिल्म का नाम अग्नियुग: द फायर बताया गया है। फिल्म का निर्देशन बिस्वजीत चटर्जी कर रहे हैं और इसमें धर्मेंद्र स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की भूमिका निभाते नजर आएंगे।

    फिल्म के निर्देशक बिस्वजीत चटर्जी करीब चार दशक बाद निर्देशन की दुनिया में वापसी करने जा रहे हैं। उन्होंने फिल्म से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि अग्नियुग: द फायर में धर्मेंद्र महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई देंगे। फिल्म में उन्हें पंजाब केसरी के नाम से प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय के किरदार में प्रस्तुत किया जाएगा।

    बिस्वजीत के अनुसार फिल्म में धर्मेंद्र को इस भूमिका के लिए तैयार करने की कहानी भी काफी खास रही। उन्होंने बताया कि शुरुआत में धर्मेंद्र फिल्म में काम करने के लिए तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि वह फिलहाल फिल्म नहीं करना चाहते। उस समय उन्हें यह भी जानकारी नहीं थी कि उनके लिए कौन सा किरदार सोचा गया है।

    निर्देशक ने जब उन्हें बताया कि वह लाला लाजपत राय की भूमिका के लिए उनके पास आए हैं और इस किरदार के लिए उनके अलावा किसी और को लेकर उन्होंने विचार नहीं किया, तो धर्मेंद्र ने इस बारे में विस्तार से जानना चाहा। बिस्वजीत ने उन्हें बताया कि यह किरदार एक बड़े देशभक्त का है और लाला लाजपत राय के जीवन से जुड़ा है।

    भूमिका के बारे में सुनने के बाद धर्मेंद्र की दिलचस्पी बढ़ गई। उन्होंने फिल्म करने को लेकर विचार किया और आखिरकार इसके लिए हामी भर दी। निर्देशक के मुताबिक, किरदार के बारे में जानने के बाद धर्मेंद्र फिल्म को लेकर काफी उत्साहित हो गए थे। उन्होंने यहां तक कहा था कि फिल्म में अपने स्टंट खुद करने की कोशिश करेंगे और इसके लिए बॉडी डबल का सहारा नहीं लेना चाहते।

    बिस्वजीत चटर्जी ने धर्मेंद्र के परिवार के साथ हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, धर्मेंद्र के निधन के बाद उन्होंने परिवार के सदस्यों को फिल्म में उनके किरदार से जुड़ी तस्वीर दिखाई थी। तस्वीर में धर्मेंद्र लाला लाजपत राय के रूप में नजर आ रहे थे। इसी दौरान उन्होंने बताया कि यह धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म होगी।

    धर्मेंद्र के बेटे बॉबी देओल को भी फिल्म के बारे में जानकारी थी। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि फिल्म की कहानी सुनाए जाने के समय उन्हें भी इस प्रोजेक्ट के बारे में पता चला था। इस तरह फिल्म में धर्मेंद्र की मौजूदगी उनकी फिल्मी यात्रा का एक और महत्वपूर्ण अध्याय बन गई है।

    अग्नियुग: द फायर की रिलीज डेट अभी घोषित नहीं की गई है। फिल्म में जैकी श्रॉफ के भी शामिल होने की संभावना बताई जा रही है। धर्मेंद्र ने अपने लंबे फिल्मी करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों के जरिए हिंदी सिनेमा में अपनी खास पहचान बनाई। अब अग्नियुग: द फायर में उनका लाला लाजपत राय के रूप में नजर आना दर्शकों के लिए उनकी फिल्मी यात्रा से जुड़ा एक अहम अध्याय होगा।

  • गोंधल की ऑस्कर एंट्री पर अनुराग कश्यप की टिप्पणी के बाद डायरेक्टर संतोष डावखर ने दिया जवाब

    गोंधल की ऑस्कर एंट्री पर अनुराग कश्यप की टिप्पणी के बाद डायरेक्टर संतोष डावखर ने दिया जवाब

    नई दिल्ली ।गोंधल फिल्म के भारत की ओर से ऑस्कर 2027 के लिए आधिकारिक एंट्री चुने जाने के बाद फिल्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिल्मकार अनुराग कश्यप ने गोंधल के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा था कि भारत कई बड़े अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में इसलिए पीछे रह जाता है क्योंकि कई बार फिल्मों के चयन में सही विकल्प नहीं चुने जाते। अब गोंधल के निर्देशक संतोष डावखर ने इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि किसी भी फिल्म पर फैसला सुनाने से पहले उसे देखना जरूरी है।

    संतोष डावखर के मुताबिक उन्होंने गोंधल के बारे में अनुराग कश्यप से पहले भी बातचीत की थी। उन्होंने बताया कि एक फ्लाइट के दौरान उन्होंने अनुराग को अपनी फिल्म के बारे में जानकारी दी थी। उस समय अनुराग ने फिल्म देखने की बात कही थी। हालांकि, संतोष का दावा है कि इसके बाद फिल्म उन्हें दिखाई नहीं गई और मुंबई में भी फिल्म उपलब्ध नहीं है।

    फिल्म के चयन और उस पर हो रही चर्चाओं के बीच संतोष ने लोगों से अपील की कि वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले गोंधल को जरूर देखें। उनका कहना है कि फिल्म को लेकर राय बनाने से पहले उसे समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि एक फिल्मकार के तौर पर वह इस जिम्मेदारी को समझते हैं कि उनकी फिल्म अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही है।

    संतोष डावखर ने कहा कि गोंधल एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है, जिसमें मराठी संस्कृति के साथ वैश्विक दर्शकों को ध्यान में रखकर कहानी और प्रस्तुति तैयार की गई है। उनके अनुसार फिल्म को बड़े पर्दे के लिए बनाया गया है और इसका उद्देश्य केवल ओटीटी दर्शकों तक सीमित रहना नहीं है।

    उन्होंने दर्शकों से फिल्म को थिएटर में देखने की अपील करते हुए कहा कि दोबारा रिलीज होने पर लोग इसे बड़े पर्दे पर देखें और इसके बाद अपना फैसला सुनाएं। संतोष ने यह भी कहा कि उन्हें पता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना एक बड़ी जिम्मेदारी है और वह अपने देश को निराश नहीं करना चाहते।

    वहीं, अनुराग कश्यप ने अपनी पिछली टिप्पणी में कहा था कि भारत कई बड़े पुरस्कारों में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाता, क्योंकि कई बार फिल्मों का चयन सही तरीके से नहीं होता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कुछ ऐसी भारतीय फिल्मों का भी उल्लेख किया था, जिन्हें उनके मुताबिक सही चयन के बावजूद अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में सफलता नहीं मिली।

    अनुराग ने यह भी कहा था कि किसी फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेजने से पहले उसे विदेशों के प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में ले जाना और अमेरिकी वितरण की संभावनाओं को देखना महत्वपूर्ण होना चाहिए। उनके अनुसार गोंधल को पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में अपनी मौजूदगी दर्ज करानी चाहिए थी।

    गोंधल साल 2025 में रिलीज हुई मराठी भाषा की ड्रामा थ्रिलर फिल्म है। इसका लेखन और निर्देशन संतोष डावखर ने किया है। फिल्म को 99वें अकादमी पुरस्कार यानी ऑस्कर 2027 में बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के रूप में चुना गया है। अब फिल्म को लेकर उठी बहस के बीच निर्देशक ने दर्शकों से अपील की है कि वे पहले फिल्म देखें और उसके बाद ही उसके चयन या कहानी को लेकर अपनी राय बनाएं।

  • हुरुन रिच लिस्ट में बॉलीवुड का जलवा शाहरुख 10 हजार करोड़ पर सलमान 3 हजार करोड़ के साथ शामिल

    हुरुन रिच लिस्ट में बॉलीवुड का जलवा शाहरुख 10 हजार करोड़ पर सलमान 3 हजार करोड़ के साथ शामिल


    नई दिल्ली। हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 जारी हो चुकी है और इस बार भी बॉलीवुड के सबसे अमीर सितारों को लेकर तस्वीर काफी दिलचस्प है। इस सूची में शाहरुख खान लगातार दूसरे साल सबसे अमीर भारतीय एक्टर बने हुए हैं। उनकी अनुमानित नेट वर्थ 10 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले शाहरुख खान की संपत्ति में 2490 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। साल 2025 में उनकी अनुमानित संपत्ति 12490 करोड़ रुपये थी जो अब घटकर 10 हजार करोड़ रुपये रह गई है।

    शाहरुख खान की संपत्ति के आकलन में उनके फिल्म और कारोबारी हितों को भी शामिल किया गया है। इसमें रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और नाइट राइडर्स स्पोर्ट्स जैसे बिजनेस शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि संपत्ति में कमी आने के बावजूद शाहरुख खान सबसे अमीर भारतीय एक्टर की सूची में अपनी पहली जगह बरकरार रखने में सफल रहे हैं। इसी साल की शुरुआत में जारी हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट में भी उनकी संपत्ति का अनुमान करीब 10800 करोड़ रुपये लगाया गया था।

    इस सूची में महानायक अमिताभ बच्चन 4 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित नेट वर्थ के साथ दूसरे स्थान पर हैं। अमिताभ बच्चन की संपत्ति पिछले साल के मुकाबले काफी बढ़ी है। 2025 में उनकी अनुमानित संपत्ति करीब 1630 करोड़ रुपये बताई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक अमिताभ बच्चन खुद कोई बड़ा कारोबार सक्रिय रूप से संचालित नहीं करते हैं लेकिन उनके फैमिली ऑफिस के कई कंपनियों और रियल एस्टेट में निवेश हैं। यही निवेश उनकी कुल संपत्ति के आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    इस बार हुरुन इंडिया रिच लिस्ट में सलमान खान की एंट्री भी खास चर्चा में है। सलमान खान करीब 3 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित नेट वर्थ के साथ बॉलीवुड के अमीर एक्टर्स की सूची में तीसरे स्थान पर हैं। यह उनकी इस लिस्ट में नई एंट्री है। फिल्मों के अलावा विज्ञापन ब्रांड और अन्य कारोबारी गतिविधियां भी सलमान खान की कमाई के प्रमुख माध्यम रहे हैं।

    ऋतिक रोशन 2500 करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति के साथ चौथे स्थान पर हैं। उनकी संपत्ति पिछले साल के 2160 करोड़ रुपये के अनुमान से बढ़ी है। ऋतिक रोशन के कारोबार और उनके ब्रांड HRX को भी उनकी संपत्ति में योगदान देने वाले प्रमुख हितों में शामिल किया गया है।

    हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 में बॉलीवुड के कुछ पुराने नाम इस बार नजर नहीं आए। जुही चावला और करण जौहर पिछले साल की सूची में शामिल थे लेकिन इस बार उनकी एंट्री नहीं हुई है। 2025 में जुही चावला की अनुमानित नेट वर्थ 7790 करोड़ रुपये और करण जौहर की करीब 1880 करोड़ रुपये बताई गई थी।

    वहीं रामायण से जुड़े प्रोडक्शन काम के लिए चर्चा में रहे नमित मल्होत्रा के पिता नरेश मल्होत्रा भी इस साल की सूची में शामिल हैं। उनकी अनुमानित नेट वर्थ 16 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। कुल मिलाकर हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 ने एक बार फिर दिखाया है कि बॉलीवुड सितारों की संपत्ति का दायरा सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है बल्कि प्रोडक्शन कारोबार ब्रांड निवेश और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों का भी इसमें बड़ा योगदान है। इस बार भारत की रिच लिस्ट में कुल 391 डॉलर बिलियनपति शामिल हुए हैं जो एक नया रिकॉर्ड बताया गया है।

  • खाद्य तेल होगा सस्ता…! केन्द्र ने घटाया मूल सीमा शुल्क…. नई दरें आज से लागू

    खाद्य तेल होगा सस्ता…! केन्द्र ने घटाया मूल सीमा शुल्क…. नई दरें आज से लागू


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) ने खाद्य तेलों (Edible Oil) पर मूल सीमा शुल्क घटाया है। कच्चे सोयाबीन (Raw Soybeans) और पाम तेल पर शुल्क 10 से 5 फीसदी, जबकि रिफाइंड पर 32.5 से 27.5 फीसदी हुआ। कच्चे सूरजमुखी तेल पर शुल्क 10 फीसदी से शून्य, और रिफाइंड पर 32.5 से 22.5 फीसदी किया गया। ये बदलाव आज यानी 24 सितंबर से प्रभावी हो गए हैं।

    केंद्र सरकार की अधिसूचना के मुताबिक सोयाबीन, पाम और सूरजमुखी तेल सहित विभिन्न खाद्य तेलों पर मूल सीमा शुल्क (BCD) में कटौती की गई है। सरकार का लक्ष्य खाद्य तेलों की कीमतों को कम करके उपभोक्ताओं को राहत देना है। इससे समग्र मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

    अधिसूचना के अनुसार, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम तेल पर BCD 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। रिफाइंड सोयाबीन तेल और रिफाइंड पाम तेल पर शुल्क 32.5 फीसदी से घटाकर 27.5 फीसदी किया गया है। कच्चे सूरजमुखी तेल पर BCD 10 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया गया है। वहीं, रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर शुल्क 32.5 फीसदी से घटाकर 22.5 फीसदी किया गया है।


    क्या है सरकार का उद्देश्य?

    उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बताया कि आयात शुल्क में कमी से खाद्य तेलों की लैंडेड लागत और खुदरा कीमतें घटेंगी। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और कुल मुद्रास्फीति कम होगी। यह कदम घरेलू रिफाइनिंग को भी बढ़ावा देगा। साथ ही, किसानों के लिए उचित मुआवजा बनाए रखने में मदद करेगा। 2025 में भी केंद्र ने कच्चे खाद्य तेलों, जैसे सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम तेल पर BCD 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी किया था। उस समय कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेलों के बीच आयात शुल्क अंतर 8.75 फीसदी से 19.25 फीसदी था।


    क्या महंगाई पर पड़ेगा असर?

    वित्त मंत्रालय की अगस्त 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खाद्य मुद्रास्फीति में बदलाव आया है। प्रोटीन युक्त वस्तुएं, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और खाद्य तेल मूल्य दबाव के प्रमुख कारण बने हैं। जुलाई 2026 में उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) आधारित मुद्रास्फीति 5.52 फीसदी तक बढ़ गई थी, जो जून के 5.32 फीसदी से अधिक थी। वैश्विक वनस्पति तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए लगातार मुद्रास्फीति दबाव का स्रोत हैं। देश कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात पर निर्भर है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वैश्विक वनस्पति तेल आपूर्ति में कमी का एक कारण पाम, सोयाबीन और रेपसीड तेलों का बायोफ्यूल उत्पादन की ओर मोड़ना है। एल नीनो की स्थिति फसल उपज और खाद्य कीमतों के लिए जोखिम बढ़ाती है।

  • पहाड़ों की खूबसूरती और झील का सुकून एक ही जगह दिल्ली के पास मौजूद है ये शानदार डेस्टिनेशन

    पहाड़ों की खूबसूरती और झील का सुकून एक ही जगह दिल्ली के पास मौजूद है ये शानदार डेस्टिनेशन


    नई दिल्ली। दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए वीकेंड पर घूमने के लिए ऐसी जगह तलाशना अक्सर मुश्किल होता है जहां शहर की भीड़भाड़ से दूर प्रकृति का सुकून भी मिले और सफर बहुत लंबा भी न हो। अगर आप भी कुछ घंटों की दूरी पर किसी शांत और खूबसूरत जगह जाने का प्लान बना रहे हैं तो गुरुग्राम के पास मौजूद दमदमा झील आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है। यहां आपको एक ही जगह पर अरावली की पहाड़ियां झील और हरियाली से घिरा प्राकृतिक वातावरण देखने को मिलता है।

    दमदमा झील अरावली पर्वतमाला की तलहटी में स्थित है और यही इसकी सबसे खास खूबसूरती है। एक तरफ ऊंची नीची अरावली की पहाड़ियां दिखाई देती हैं तो दूसरी तरफ झील का शांत पानी पूरे वातावरण को आकर्षक बना देता है। आसपास मौजूद हरियाली और प्राकृतिक इलाका इस जगह को दिल्ली की भागदौड़ से अलग एक सुकून भरा अनुभव देता है। यही वजह है कि यह जगह उन लोगों को खास तौर पर पसंद आ सकती है जो कुछ समय शहर की भीड़ से दूर प्रकृति के बीच बिताना चाहते हैं।

    दमदमा झील का माहौल खासतौर पर उन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है जिन्हें प्रकृति और आउटडोर गतिविधियां पसंद हैं। यहां पहुंचने के बाद पहाड़ियों और झील का एक साथ दिखाई देने वाला नजारा सफर की थकान कम कर सकता है। शांत वातावरण में बैठकर आसपास के प्राकृतिक दृश्य देखना अपने आप में एक अलग अनुभव देता है। फोटो खींचने के शौकीनों के लिए भी यहां का लैंडस्केप काफी आकर्षक हो सकता है क्योंकि झील के पानी के साथ पीछे दिखाई देती अरावली की पहाड़ियां तस्वीरों को खूबसूरत बैकग्राउंड देती हैं।

    दिल्ली एनसीआर से इस जगह की कनेक्टिविटी भी इसे वीकेंड ट्रिप के लिए सुविधाजनक बनाती है। बहुत लंबी छुट्टी लिए बिना भी यहां घूमने का प्लान बनाया जा सकता है। परिवार के साथ समय बिताने वाले लोगों से लेकर दोस्तों के साथ छोटा ट्रिप प्लान करने वालों तक के लिए यह जगह अलग तरह का अनुभव दे सकती है। खासकर उन लोगों के लिए जो हर बार मॉल और बाजार जाने के बजाय खुले वातावरण में कुछ घंटे बिताना चाहते हैं उनके लिए दमदमा झील एक अलग विकल्प बन सकती है।

    यहां जाने से पहले मौसम और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेना बेहतर रहेगा। आरामदायक कपड़े और जरूरी सामान साथ रखने से यात्रा ज्यादा सुविधाजनक हो सकती है। प्रकृति के बीच समय बिताते हुए साफ सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है ताकि इस तरह के प्राकृतिक स्थलों की खूबसूरती बनी रहे।

    कुल मिलाकर दमदमा झील दिल्ली एनसीआर के आसपास मौजूद उन जगहों में शामिल है जहां कम समय में प्रकृति के करीब पहुंचने का मौका मिल सकता है। अरावली की पहाड़ियों के बीच शांत झील और आसपास की हरियाली का मेल इसे वीकेंड पर कुछ अलग देखने वालों के लिए आकर्षक बना सकता है। अगर आप दिल्ली के आसपास किसी ऐसे ठिकाने की तलाश में हैं जहां पहाड़ झील और जंगल जैसा प्राकृतिक माहौल एक साथ महसूस हो तो दमदमा झील को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।

  • MP में फिर OBC आरक्षण की गूंज… राहुल गांधी ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर की ये मांग

    MP में फिर OBC आरक्षण की गूंज… राहुल गांधी ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर की ये मांग


    नई दिल्ली।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में एक बार फिर ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) का मुद्दा गर्मा गया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) को चिट्ठी लिखकर राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और इसके तहत रुकी हुई नियुक्तियों का रास्ता साफ करने की मांग की है।

    22 सितंबर को लिखी चिट्ठी राहुल गांधी ने कहा कि शनिवार को इंदौर में हुए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के कई छात्रों ने शिक्षा, रोजगार और अपने भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दे उनके सामने रखे थे. इनमें OBC आरक्षण से जुड़ी नियुक्तियों के रुके होने का मुद्दा प्रमुख था।

    राहुल गांधी ने चिट्ठी में कहा कि छात्रों ने बताया कि नियुक्तियों में लंबे समय से हो रही देरी के कारण वे अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं. इन युवाओं ने परीक्षाएं पास कर ली हैं और चयन प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन ’87:13′ फॉर्मूले के कारण OBC आरक्षण से जुड़े 13 प्रतिशत पदों को होल्ड पर रखा गया है. इसके चलते चयनित अभ्यर्थी 2022 से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

    राहुल गांधी ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का सर्वसम्मति से समर्थन किया था, इसके बावजूद यह मामला अब तक नहीं सुलझ पाया है. उन्होंने कहा कि नियुक्तियों में हो रही देरी के कारण अभ्यर्थियों को OBC आरक्षण लागू कराने और नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग को लेकर बार-बार सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।

    राहुल गांधी ने अपना पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा किया. उन्होंने लिखा कि इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान OBC वर्ग के छात्रों ने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के तहत 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां वर्षों से रुकी हुई हैं. राहुल ने कहा कि छात्र बेहद परेशान हैं और चार साल से अधिक समय से इंतजार कर रहे इन युवाओं का कीमती समय अब और बर्बाद नहीं होना चाहिए।

    उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से छात्रों की मांग सुनने की अपील करते हुए कहा कि सभी दलों की सर्वसम्मति से पारित 27 प्रतिशत OBC आरक्षण को लागू किया जाए और सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दी जाएं।

  • MP: उज्जैन पहुंचे संत बम-बम भोला, खड़े हनुमान जी के दर्शन किए, प्रतिमा को नहीं हटाने की मांग की

    MP: उज्जैन पहुंचे संत बम-बम भोला, खड़े हनुमान जी के दर्शन किए, प्रतिमा को नहीं हटाने की मांग की


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) स्थित खड़े हनुमान मंदिर (Khade Hanuman Temple) इन दिनों आस्था और चर्चा का केंद्र बना हुआ है। प्रतिमा को लेकर चल रही प्रक्रिया के बीच मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में साधु-संतों की मौजूदगी भी लगातार देखी जा रही है। इसी क्रम में संत ‘बम-बम भोला’ (Saint ‘Bam-Bam Bhola’) खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ किया और भगवान हनुमान के दर्शन किए।


    बोले- धर्म की तुलना विज्ञान से न करें
    दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में संत ‘बम-बम भोला’ ने कहा कि धर्म और विज्ञान की तुलना नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में AI और ड्रोन जैसी तकनीकें आ चुकी हैं, लेकिन उनके अनुसार धर्म और सनातन परंपरा को विकास की बहस से अलग समझना चाहिए। उन्होंने खड़े हनुमान की प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग की और कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े स्थानों को लेकर संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए।


    मंदिर के आसपास कथित अतिक्रमण का मुद्दा उठाया

    संत ने मंदिर के सामने मस्जिद की ओर से कथित अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए इसे हटाने की मांग भी उठाई। उन्होंने मुस्लिम समाज से भाईचारे का परिचय देते हुए इस कथित अतिक्रमण को हटाने की अपील की। यह आरोप संत के बयान के रूप में सामने आया है। ऐसे दावे की प्रशासनिक पुष्टि या अतिक्रमण की कानूनी स्थिति को स्वतंत्र रूप से स्थापित करने वाली जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।


    मंदिर में बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

    खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रही चर्चा के बीच यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। रिपोर्टों के मुताबिक देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग मंदिर पहुंच रहे हैं और हनुमान चालीसा, सुंदरकांड तथा धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं।

    खड़े हनुमान की प्रतिमा को सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया से जोड़कर विवाद सामने आया था। प्रशासन ने बाद में कहा कि प्रतिमा को लेकर विशेषज्ञों की जांच और संत समाज व स्थानीय प्रतिनिधियों से सहमति के बाद ही आगे फैसला लिया जाएगा। फिलहाल खड़े हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़, संतों की मौजूदगी और प्रतिमा को लेकर जारी चर्चा ने इसे उज्जैन के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में ला दिया है।