Author: bharati

  • बदलते मौसम में बार-बार बीमार पड़ रहे हैं तो न करें इग्नोर… भारी पड़ सकती है ये गलतियां

    बदलते मौसम में बार-बार बीमार पड़ रहे हैं तो न करें इग्नोर… भारी पड़ सकती है ये गलतियां


    नई दिल्ली।
    क्या हर बार मौसम बदलते (Weather Changes) ही आप भी बीमार (Sick) हो जाते हैं? पहले गला खराब, दो दिन बाद सर्दी-जुकाम (Cold and cough) और फिर बुखार। बीमारी ठीक हुई तो कुछ दिन बाद दोबारा वही परेशानी। अगर आपके साथ ऐसा बार-बार हो रहा है तो इसे सिर्फ बदलते मौसम का असर मानकर इग्नोर करने की गलती न करें।

    जब बात बार-बार होने वाली बीमारियों की आती है तो हम अक्सर मान लेते हैं कि ये इम्युनिटी (Immunity) कमजोर होने की वजह से हो रहा है। ये सच भी है लेकिन हर बार बीमार पड़ने की वजह कमजोर इम्युनिटी ही हो, ऐसा भी जरूरी नहीं है।

    हमारी रोज की कुछ आदतें भी बीमारी का रास्ता खोल सकती हैं। मसलन रात में देर तक जागना, अच्छी नींद न लेना, खाना समय पर न खाना, डाइट में जरूरी पोषक तत्वों की कमी शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। ये सभी आपके बार-बार बीमार होने के पीछे के साइलेंट कारण हो सकते हैं।

    डॉक्टर कहते हैं, जिस तरह से दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू का दौर चल रहा है, ऐसे में लोगों को बुखार, सर्दी-जुकाम होना सामान्य है। पर अगर आप हर एक-दो महीने में इन समस्याओं का शिकार हो रहे हैं, तो थोड़ा सावधान हो जाने की जरूरत है। एक बार मुड़कर अपनी आदतों की तरफ भी देखिए, कहीं गलती यहां तो नहीं हो रही है?


    कहीं आपकी नींद तो खराब नहीं रहती?

    अगर आप लगातार कम सो रहे हैं तो सबसे पहले इसी आदत को सुधारने की जरूरत है। नींद सिर्फ थकान दूर नहीं करती है, ये शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रक्रिया में भी भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी और पर्याप्त नींद शरीर को स्वस्थ रखने और बीमारियों से बचाव में मदद करती है।

    रोज देर रात तक मोबाइल चलाना या ऑफिस का काम करना और अलग-अलग समय पर सोना आपकी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें। वयस्कों के लिए आम तौर पर कम से कम 8-9 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है।


    डाइट में जरूरी पोषक तत्व हैं या नहीं?

    शरीर को स्वस्थ रखने के लिए डाइट का संतुलित होना जरूरी है। फल-सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन-फाइबर जैसे पोषक तत्वों को अपने आहार का हिस्सा जरूर बनाएं। इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए पोषण से भरपूर संतुलित भोजन बहुत जरूरी है। अगर आपकी डाइट ज्यादातर पैकेज्ड फूड, तला-भुना खाना या बहुत ज्यादा मीठे पेय पर निर्भर है तो इसमें बदलाव जरूरी है। घर का बना खाना और रोजाना मौसमी फल खाना आपको कई बीमारियों से बचाए रखने में मदद कर सकता है।


    हाथों की साफ-सफाई का रखते हैं ध्यान?

    ऑफिस (Office), स्कूल, भीड़भाड़ वाली जगहों या घर में किसी बीमार व्यक्ति (Sick person) के संपर्क में रहने पर भी संक्रमण (Infection) का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बार-बार बीमार पड़ने का कारण हमेशा शरीर की कमजोरी नहीं होती। आप कितनी बार संक्रमण के संपर्क में आते हैं, यह भी मायने रखता है।

    हाथों (Hand hygiene) को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना संक्रमण फैलने से रोकने के सबसे आसान तरीकों में से एक है। हाथ धोने से कई तरह के वायरस और बैक्टीरिया का संक्रमण कम किया जा सकता है।


    क्या कहते हैं डॉक्टर?

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपको बार-बार संक्रमण हो रहा है या मौसम बदलते ही बीमार हो जाते हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। कुछ स्वास्थ्य स्थितियां संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। हाई ब्लड शुगर के शिकार लोगों में शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता को प्रभावित हो जाती है, ये आपमें बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है।

    डायबिटीज के शुरुआती स्थिति में अक्सर कोई खास लक्षण नहीं होते हैं इसलिए इसका देर से पता चल पाता है। इसलिए समय रहते जांच से शरीर की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। समय पर डॉक्टरी सलाह आपमें बीमारी का कारण पता लगाने और बार-बार होने वाली समस्याओं को रोकने में मददगार हो सकती है।

  • ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों से बचना है तो डाइट में इन चीजों को करें शामिल

    ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों से बचना है तो डाइट में इन चीजों को करें शामिल


    नई दिल्ली।
    हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) और दिल की बीमारियां (Heart diseases) अब बहुत आम हो गई हैं। कम उम्र वाले भी इनका शिकार हो रहे हैं। हम अक्सर ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) और दिल की सेहत की बात करते समय सबसे ज्यादा ध्यान नमक-तेल के कम सेवन, वजन कंट्रोल करने और एक्सरसाइज पर देते हैं। ये निश्चित ही दिल की सेहत के लिए जरूरी है, पर क्या आप जानते हैं कि एक मिनरल यानी खनिज तत्व ऐसा है जिस ब्लड प्रेशर और हार्ट की सेहत का सबसे अच्छा दोस्त कहा जाता है?

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पोटैशियम हमारे हेल्थ के लिए बहुत जरूरी मिनरल है। शरीर को इसकी जरूरत सिर्फ मांसपेशियों के कामकाज के लिए नहीं होती, बल्कि यह ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने और हृदय सहित पूरे कार्डियोवस्कुलर सिस्टम के सामान्य कामकाज में भूमिका निभाता है।

    पोटैशियम शरीर में सोडियम के स्तर को कंट्रोल रखने में भी मदद करता है जिससे बीपी अचानक बढ़ने का जोखिम कम होता है और हृदय स्वस्थ बना रहता है।


    शरीर के लिए जरूरी है पोटैशियम

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के विशेषज्ञ कहते हैं, सभी वयस्कों के लिए रोजाना कम से कम 3400 मिलीग्राम पोटैशियम लेना जरूरी माना जाता है। पोटैशियम शरीर से सोडियम को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा यह रक्त वाहिकाओं की दीवारों के तनाव को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है। यही कारण है कि हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने वाली डैश डाइट में फल-सब्जियां, दालें, साबुत अनाज के साथ पोटैशियम वाले खाद्य पदार्थों को भी शामिल किया जाता है।


    पोटैशियम शरीर में करता क्या है?

    पोटैशियम शरीर के लिए जरूरी इलेक्ट्रोलाइट और मिनरल है। यह कोशिकाओं, मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज में भूमिका निभाता है। खासतौर पर हृदय सहित अन्य मांसपेशियों के सामान्य काम के लिए शरीर में पोटैशियम का संतुलन जरूरी होता है। पोटैशियम का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह अतिरिक्त सोडियम को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भोजन में पर्याप्त मात्रा में पोटैशियम वाली चीजें शामिल करने से ब्लड प्रेशर तथा हृदय रोग, स्ट्रोक और कोरोनरी हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।


    क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

    अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार पोटैशियम रक्त वाहिकाओं की दीवारों के तनाव को कम करने में भी मदद करता है, जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने में सहायता मिल सकती है। पोटैशियम की जरूरत उम्र के अनुसार अलग हो सकती है। अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार वयस्क पुरुषों के लिए पर्याप्त सेवन 3,400 मिलीग्राम और महिलाओं के लिए 2,600 मिलीग्राम प्रतिदिन है।

    पोटैशियम का सबसे अच्छा तरीका भोजन से इसे लेना है। केला इसका सबसे अच्छा स्रोत है। इसके अलावा बीन्स- मटर, नट्स, पालक-पत्तागोभी जैसे खाद्य पदार्थ भी पोटैशियम के स्रोत हैं।
    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भोजन से पोटैशियम की जरूरत पूरी करें। कुछ लोगों को डॉक्टर पोटैशियम सप्लीमेंट्स दे सकते हैं, हालांकि बिना डॉक्टरी सलाह के इसे लेना नुकसानदायक हो सकता है।

  • बरसात में डेंगू का खतरा बढ़ा, प्लेटलेट्स ही नहीं, ये संकेत भी बताते हैं बीमारी हो रही गंभीर

    बरसात में डेंगू का खतरा बढ़ा, प्लेटलेट्स ही नहीं, ये संकेत भी बताते हैं बीमारी हो रही गंभीर


    नई दिल्ली।
    बरसात (Rain) के दिनों में मच्छरों (Mosquitoes) के कारण होने वाली डेंगू (Dengue) जैसी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते दिनों हुई बारिश और जगह-जगह जल जमाव के कारण राजधानी दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में डेंगू के मामले बढ़ने लगे हैं।

    दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में इस साल अब तक डेंगू के 272 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा मलेरिया के 95 और चिकनगुनिया के 21 मामले दर्ज हो चुके हैं। इतना ही नहीं पिछले एक सप्ताह में डेंगू के 26, मलेरिया के 15 और चिकनगुनिया के दो नए मामले सामने आए हैं।

    राजधानी दिल्ली पहले से ही स्वाइन फ्लू का प्रकोप झेल रही है ऐसे में डेंगू के मामलों ने डबल अटैक कर दिया है। एडीज एजिप्टी मच्छरों के कारण होने वाली ये बीमारी कुछ लोगों में गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है। इन्हीं खतरों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को मच्छरों से बचाव को लेकर अलर्ट रहने की सलाह दे रहे हैं।


    गंभीर हो सकती है डेंगू की बीमारी

    डेंगू का नाम आते ही सबसे पहले दिमाग में प्लेटलेट्स काउंट घूमने लगता है। डेंगू के टेस्ट में इसका कम होना चिंता बढ़ाने लगता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि डेंगू की गंभीरता सिर्फ प्लेटलेट्स काउंट से तय नहीं होती।

    कई बार मरीज की हालत बिगड़ने लगती है। शरीर प्लेटलेट्स की रिपोर्ट से पहले ही खतरे के संकेत देता है। डॉक्टर कहते हैं, अगर आपको तेज बुखार के साथ लगातार पेट में तेज दर्द, उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आने, बहुत ज्यादा सुस्ती जैसी परेशानी हो रही है तो इसे बिल्कुल इग्नोर न करें। ये भी इशारा करते हैं कि बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।


    डेंगू में पेट की दिक्कतों पर भी दें ध्यान

    बुखार के साथ या बुखार कम होने के बाद भी अगर अचानक तेज पेट दर्द शुरू हो जाए तो इसे बिल्कुल हल्के में न लें। पेट में दर्द गंभीर डेंगू का संकेत हो सकता है। डेंगू के मरीजों को उल्टी होने की भी दिक्कत रहती है। बार-बार उल्टी होने की स्थिति में अगर मरीज पानी और दूसरे तरल पदार्थ ठीक से नहीं ले रहा है तो इससे शरीर में डिहाइड्रेशन की दिक्कत बढ़ सकती है।


    नाक या मसूड़ों से खून आना

    नाक या मसूड़ों से खून आना डेंगू का गंभीर संकेत हो सकता है। कुछ लोगों में उल्टी या मल में भी खून दिखाई दे सकता है। डॉक्टर कहते हैं, गंभीर स्थिति में डेंगू अत्यधिक रक्तस्राव का कारण बनता है। इसलिए डेंगू के मरीज में किसी भी तरह का असामान्य रक्तस्राव दिखाई दे तो इसे सिर्फ प्लेटलेट्स कम होने का सामान्य असर मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षणों में तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।


    थकान-कमजोरी की दिक्कत

    गंभीर डेंगू में शरीर से तरल पदार्थ निकलने के कारण खून का संचार प्रभावित हो सकता है। इससे लो ब्लड प्रेशर और शॉक जैसी समस्याओं का भी जोखिम हो सकता है। इस स्थिति में मरीज को अचानक बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होती है। लगातार बढ़ती कमजोरी को सिर्फ बुखार के बाद की थकान मानना सही नहीं है। अगर डेंगू के मरीज की अचानक सांस फूलने लगे या सांस लेने में दिक्कत हो तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।


    क्या कहते हैं डॉक्टर?

    डॉक्टर कहते हैं, डेंगू को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि बुखार उतर जाने पर अक्सर लोग मान लेते हैं कि बीमारी ठीक हो गई। हालांकि कई बार डेंगू के गंभीर संकेत अक्सर बुखार कम होने के 24 से 48 घंटे बाद दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बुखार उतरने के बाद भी मरीज की सेहत पर लगातार ध्यान देते रहें। पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, खून आने, बहुत ज्यादा सुस्ती, बेचैनी या सांस लेने में परेशानी जैसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डेंगू में प्लेटलेट्स की जांच महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल प्लेटलेट्स काउंट से ही बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जा सकती।

  • Prayagraj : स्वामी नारायण मंदिर का 3 मंजिला हिस्सा भरभराकर गड्ढे में गिरा…

    Prayagraj : स्वामी नारायण मंदिर का 3 मंजिला हिस्सा भरभराकर गड्ढे में गिरा…


    प्रयागराज।
    संगम नगरी प्रयागराज (Confluence City Prayagraj) में शुक्रवार देर रात बारिश के दौरान बड़ा हादसा हो गया. यहां स्वामी नारायण मंदिर (Swaminarayan Temple) का तीन मंजिला हिस्सा भरभराकर गड्ढे में जा गिरा. तेज आवाज के साथ हुए हादसे से आस-पास के लोग दहशत में आ गए.‌ ऐसा लगा जैसे कोई आस-पास बड़ा विस्फोट हुआ है, लेकिन जब लोग अपने घरों से बाहर निकले तो देखा कि स्वामी नारायण मंदिर का एक हिस्सा धराशाई हो चुका है।

    दरअसल, मंदिर के पीछे निर्माण कार्य चल रहा है. बताया जा रहा है कि इसी निर्माण कार्य के चलते बगल में गड्ढा खोदा. बारिश के चलते गड्ढे में पानी भर जाता था. पिछले तीन-चार महीने से निर्माण कार्य चल रहा था, लेकिन इन दिनों बारिश के चलते निर्माण कार्य बंद था. आशंका जताई जा रही है कि गड्ढे की वजह से मंदिर में बने कमरे की नींव कमजोर हो गई थी. इससे देर रात उसी गड्ढे में मंदिर का तीन मंजिला हिस्सा भरभरा कर गिर गया. हालांकि गनीमत यह रही कि उसे वक्त वहां पर कोई मौजूद नहीं था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई है।

    मंदिर के सुरक्षा गार्ड सूबेदार सिंह ने बताया कि यहां पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आकर रुकते थे. खास तौर पर दक्षिण भारतीय श्रद्धालु यहां पर आकर ठहरते हैं. मंदिर का जो हिस्सा गिरा है वह धर्मशाला के रूप में प्रयोग किया जाता था. स्वामी नारायण मंदिर केपी कम्युनिटी सेंटर के सामने जार्ज टाउन थाना क्षेत्र में स्थित है।

    वहीं पुलिस और प्रशासन भी इस मामले में जांच पड़ताल में जुट गया है. हादसे में कोई जनहानि न होने से प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है. हादसे के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रशासन बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

  • नेपाल आपदा से बचकर 21 भारतीयों की हुई सुरक्षित वापसी…, 320 अब भी लापता

    नेपाल आपदा से बचकर 21 भारतीयों की हुई सुरक्षित वापसी…, 320 अब भी लापता


    नई दिल्ली।
    नेपाल त्रासदी (Nepal Tragedy) से बचाए गए 21 भारतीय नागरिक शुक्रवार को दिल्ली लौट आए, जबकि 320 अब भी लापता हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल आपदा के बाद से करीब 320 भारतीय नागरिकों (320 Indian citizens) से संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं, भारतीय मूल के 100 लोगों का भी अब तक पता नहीं चल सका है।


    मानसरोवर यात्रा पर थे ये लोग

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने बताया कि नेपाल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित निकाले गए तमिलनाडु के रहने वाले 21 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। गुरुवार को काठमांडू पहुंचने के बाद भारतीय दूतावास की मदद से उन्हें इंडिगो की उड़ान से भारत लाया गया। दिल्ली हवाई अड्डे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) ने इन लोगों से मुलाकात की। जैसवाल ने बताया, त्रिशूली बिजली परियोजना में कार्यरत 63 लोगों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया है। इस परियोजना में बड़ी संख्या में भारतीय कार्य कर रहे थे, जो प्रभावित हुए हैं।


    तिब्बत-चीन में 400 भारतीय सुरक्षित

    जैसवाल ने बताया कि बाढ़ प्रभावित तिब्बत और चीन की तरफ 400 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। हालांकि, सभी सुरक्षित हैं और परिजनों के संपर्क में हैं। मार्ग बाधित होने से उनकी वापसी में दिक्कत है। बता दें कि अब तक 96 भारतीयों को वहां से निकालकर नेपाल लाया गया है।


    स्थिति पर नजर

    मंत्रालय ने बताया कि दिल्ली और काठमांडू में बनाए गए नियंत्रण कक्ष लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भारतीय दूतावास राहत-बचाव और तलाशी अभियान में जुटी स्थानीय एजेंसियों के संपर्क में है।


    भारत ने मदद की तीसरी खेप भेजी

    जैसवाल ने बताया कि भारत ने अब तक नेपाल को 57 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी है। 26 अगस्त को 10 टन मदद लेकर पहला विमान भेजा था। 27 अगस्त को नेपाल सरकार के अनुरोध पर 37.5 टन सहायता लेकर दूसरा विमान भेजा गया। शुक्रवार को तीसरा विमान 12-13 टन सामान लेकर रवाना हुआ। इसमें पोर्टेबल जनरेटर सेट, महिलाओं के लिए जरूरी सामान, खाने के पैकेट और पानी साफ करने वाली गोलियां शामिल हैं।

    गुजरात के 26 लोग लापता हैं, जिनमें कुछ एनआरआई भी शामिल हैं। राज्य के मंत्री जीतू वाघाणी ने बताया कि राज्य सरकार विदेश मंत्रालय के साथ तालमेल बिठा रही है। सीएम भूपेंद्र पटेल के निर्देश पर सभी जिलों में हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। नेपाल में फंसे गुजरातवासियों की जानकारी के लिए उनके परिवार हेल्पलाइन नंबर 1070 के अलावा कंट्रोल रूम के नंबर (079)232-51900 या 9978405304 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

    उधर, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कोलकाता मूल के एक ब्रिटिश जोड़े का नेपाल में बाढ़ के बाद पिछले चार दिनों से कोई पता नहीं चल पाया है। उधर, कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल और तिब्बत में कर्नाटक के 28 लोगों का पता नहीं चल पा रहा है। चार लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।


    चंपारण के छह लोग भी रसुवा में गायब

    भीषण बाढ़ और मलबे की चपेट में आने से बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के चनपटिया थाने के तुरहापट्टी वार्ड-1 के तीन बढ़ई लापता हो गए हैं। लापता युवकों की पहचान समीर अंसारी, मोख्तार मियां और अरमान आलम के रूप में हुई है। उधर, पूर्वी चंपारण के केसरिया के प्रखंड क्षेत्र जगीरहां पंचायत के निवासी तीन युवक नेपाल में आई भीषण त्रासदी के बाद से लापता हैं।


    पलामू के युवक का पता नहीं

    नेपाल के बाणेश्वर स्थित हाइड्रो पावर प्लांट निर्माण कार्य में लगे पलामू जिले के हैदरनगर प्रखंड के बरवाडीह गांव निवासी 50 वर्षीय महेंद्र विश्वकर्मा पिछले कई दिनों से लापता हैं। उनका मोबाइल फोन लगातार बंद मिलने से परिजनों की चिंता बढ़ गई है।


    हरदोई के दो लोग गुम

    हरदोई के पिहानी थाना क्षेत्र के अहेमी ग्राम सभा के दो युवकों का परिवार से सम्पर्क टूट गया है। तीन दिन से कोई जानकारी न मिलने से परिजन परेशान हैं। वे लगातार संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं।

  • SC की फटकार के बाद FSSAI का बड़ा कदम… खाद्य पदार्थों के पैकेटों पर लिखी होगी चीनी-नमक की मात्रा

    SC की फटकार के बाद FSSAI का बड़ा कदम… खाद्य पदार्थों के पैकेटों पर लिखी होगी चीनी-नमक की मात्रा


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने पैक फूड (Packaged food) पर शिंकजे की तैयारी शुरू कर दी है। जिन खाद्य पदार्थों में चीनी (Sugar), फैट और नमक की मात्रा तय मानक से अधिक होगी, उनके पैकेट या डिब्बे के ऊपरी हिस्से पर हाई शुगर, हाई फैट और हाई सॉल्ट के रूप में चेतावनी लाल रंग में अंकित करना अनिवार्य किया जा सकता है।

    भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) (Food Safety and Standards Authority of India – FSSAI) ने जस्टिस जेबी पारदीवाला की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पीठ के समक्ष दाखिल छह पन्नों के हलफनामे में यह जानकारी दी। कोर्ट को बताया गया कि इससे जुड़ा प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। एफएसएसएआई ने कहा कि यह चेतावनी तस्वीर (षट्भुजाकार) के रूप में अंकित होगी, ताकि ग्राहक आसानी से पहचान सकें कि किन खाद्य पदार्थ में नमक या चीनी जैसे पदार्थ अधिक ‌मात्रा में हैं। इसका फॉन्ट साइज पैकेट के पीछे न्यूट्रिशन की जानकारी देने वाली टेबल में इस्तेमाल होने वाले फॉन्ट साइज से एक पॉइंट बड़ा होगा।


    जनहित याचिका पर सुनवाई

    एफएसएसएआई ने यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में लगाई गई फटकार के बाद दाखिल किया है। कोर्ट गैर सरकारी संस्था ‘3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रहा है।


    दो चरणों में लागू होगा

    प्रस्तावित नियम दो चरण में लागू किए जाएंगे, ताकि इंडस्ट्री को उत्पाद दोबारा तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिले। पहले चरण में उन उत्पादों पर नियम लागू होंगे, जिनमें दो या अधिक विशिष्ट पोषक तत्व एडेड फैट, एडेड शुगर या नमक अधिक मात्रा में हों। दूसरे चरण में वे उत्पाद शामिल होंगे, जिनमें एक पोषक तत्व अधिक मात्रा में हो।


    इन उत्पादों को छूट मिलेगी

    हलफनामे में एफएसएसएआई ने कहा है कि सिंगल-इंग्रीडिएंट यानी एक ही चीज से बने खाद्य पदार्थों और उन चीजों को प्रस्तावित नियम से छूट दी जाएगी, जिनमें प्राकृतिक रूप से वसा, चीनी या नमक अधिक होता है। जैसे घी, खाद्य तेल, गुड़ और शहद आदि। हालांकि, खाद्य सुरक्षा, लेबलिंग के बाकी नियमों से छूट नहीं मिलेगी।

  • MP: .ग्वालियर में बारिश से सड़कों पर भरा घुटनों तक पानी… उसी में धरने पर बैठे विधायक

    MP: .ग्वालियर में बारिश से सड़कों पर भरा घुटनों तक पानी… उसी में धरने पर बैठे विधायक


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) के शंकरपुर में बारिश के बाद घुटनों तक पानी भर गया। जलभराव के विरोध में कांग्रेस विधायक साहब सिंह गुर्जर (Congress MLA Sahib Singh Gurjar) पानी से भरी सड़क पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने नगर निगम पर नालियों की सफाई और जल निकासी में लापरवाही का आरोप लगाते हुए स्थायी समाधान की मांग की।

    दरअसल, ग्वालियर शहर में झमाझम बारिश ने एक बार फिर नगर निगम के जल निकासी के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। बारिश के बाद वार्ड क्रमांक 64 के शंकरपुर इलाके में हालात ऐसे हो गए कि सड़कें घुटनों तक पानी में डूब गईं। जलभराव के कारण स्थानीय लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    बारिश के बीच जलभराव की समस्या का विरोध करने के लिए कांग्रेस के ग्रामीण विधायक साहब सिंह गुर्जर मौके पर पहुंचे। उन्होंने पानी से लबालब सड़क पर ही धरना शुरू कर दिया। विधायक के धरने में स्थानीय नागरिक भी शामिल हो गए और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    विधायक साहब सिंह गुर्जर ने मौके से फेसबुक लाइव किया और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि शंकरपुर में जलभराव की समस्या आज की नहीं है, बल्कि पिछले दो साल से लगातार बनी हुई है। इस समस्या को कई बार अधिकारियों के सामने उठाया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया। विधायक का आरोप है कि इलाके में नालियों की पर्याप्त सफाई नहीं होने और जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश होते ही सड़कें पानी में डूब जाती हैं। स्थानीय लोगों को हर बार इसी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    बारिश के बीच विधायक के धरने के दौरान लोगों ने ‘नगर निगम होश में आओ’ के नारे लगाए। जलभराव के बीच किया गया यह विरोध प्रदर्शन अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बारिश के दौरान सड़क पर इतना पानी भर जाता है कि लोगों के लिए घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि हर साल बारिश से पहले जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति बारिश के बाद सामने आ जाती है।

    विधायक और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि शंकरपुर की जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि जब तक इलाके में बेहतर जल निकासी व्यवस्था नहीं बनाई जाती, तब तक हर बारिश में लोगों को इसी तरह परेशानी झेलनी पड़ेगी। बारिश थमी तो पानी भी धीरे-धीरे उतर गया, लेकिन शंकरपुर में जलभराव को लेकर नगर निगम की तैयारियों और दावों पर सवाल जरूर खड़े हो गए।

  • निजी यात्रा पर गए इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लापता… नेपाल बाढ़ के बाद से नहीं हो रहा संपर्क

    निजी यात्रा पर गए इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लापता… नेपाल बाढ़ के बाद से नहीं हो रहा संपर्क


    नई दिल्ली।
    इंफोसिस (Infosys) ने शुक्रवार को बताया कि उसकी सहायक कंपनी इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज (Infosys Public Services) के प्रमुख लैक्स गोपीसेट्टी (Lax Gopisetty) नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद से संपर्क में नहीं हैं। इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज, सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी इंफोसिस की सहायक कंपनी है। यह कंपनी मुख्य रूप से अमेरिका और कनाडा के सरकारी क्षेत्र के लिए काम करती है।

    इंफोसिस ने बताया कि गोपीसेट्टी निजी यात्रा पर इस इलाके में गए थे। कंपनी ने कहा कि इस समय उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता उनकी सुरक्षा और सेहत सुनिश्चित करना है। इंफोसिस ने एक बयान में कहा, हम पुष्टि कर सकते हैं कि हमारे सहयोगी लैक्स गोपिसेट्टी फिलहाल संपर्क में नहीं हैं, जो निजी यात्रा पर इस इलाके में गए थे।

    कंपनी ने आगे कहा कि वह संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर जानकारी जुटा रही है। साथ ही गोपीसेट्टी से संपर्क करने की कोशिश भी की जा रही है। इंफोसिस ने यह भी कहा कि वह गोपीसेट्टी के परिवार के लगातार संपर्क में है। कंपनी इस मुश्किल समय में परिवार को हर जरूरी मदद दे रही है।

    इंफोसिस ने कहा, हम परिवार के लगातार संपर्क में हैं और इस मुश्किल समय में हर जरूरी मदद दे रहे हैं। हमारी संवेदनाएं लैक्स और इस त्रासदी से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं। कंपनी ने कहा कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ और इसमें हुई लोगों की मौत से उसे बहुत दुख हुआ है।


    फंसे हुए भारतीयों को लेकर एमईए ने क्या कहा?

    विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं। वहीं, 400 अन्य भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत काठमांडू को इस स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव मदद देने के लिए तैयार है।

    एमईए ने बताया कि चीन की तरफ फंसे 153 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच गए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि 21 भारतीय शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली पहुंचे। ये लोग एक दिन पहले नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से काठमांडू पहुंचे थे।


    गोपीसेट्टी क्या काम करते हैं?

    इंफोसिस की वेबसाइट पर दी गई उनकी प्रोफाइल के मुताबिक, गोपीसेट्टी सरकारी क्षेत्र के संगठनों को रणनीति, तकनीक, कामकाज और बदलाव से जुड़े मामलों में सलाह देते हैं। इसका मकसद सरकारी एजेंसियों के काम और लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करना है। वह कंपनी की रणनीति और उसे लागू करने के काम की भी देखरेख करते हैं, ताकि तय उद्देश्यों को पूरा किया जा सके।

    इस पद पर आने से पहले गोपीसेट्टी इंफोसिस में ग्लोबल वाइस प्रेसिडेंट थे। वह बिजनेस एप्लीकेशंस और डिजिटल वर्कस्पेस सर्विस के प्रमुख भी थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका, यूरोप और एशिया में इस काम का विस्तार किया।

    इंफोसिस में शामिल होने से पहले गोपिसेट्टी एक्सेंचर में प्रबंध निदेशक थे। वहां उन्होंने उत्तर अमेरिका में कंपनी के हेल्थ एंड पब्लिक सर्विसेज कारोबार के एक हिस्से का नेतृत्व किया। इंफोसिस की वेबसाइट के मुताबिक, गोपीसेट्टी ने बियरिंगपॉइंट, आईबीएम, पीडब्ल्यूसी और एचसीएल में भी तेजी से बढ़ते कारोबार और सेवाओं को खड़ा किया है।

  • NTA की व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी….. पूरी प्रक्रिया की समीक्षा में जुटी सरकार

    NTA की व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी….. पूरी प्रक्रिया की समीक्षा में जुटी सरकार


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) (National Testing Agency -NTA) की मौजूदा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए परीक्षाओं के आयोजन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, अभ्यर्थियों की पहचान, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, परिणाम तैयार करने और शिकायतों के निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया की समीक्षा (Review) की जा रही है।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी (Pralhad Joshi) लगातार विशेषज्ञों के साथ बैठकें कर रहे हैं। मंत्रालय का जोर एनटीए के पूरे परीक्षा तंत्र को अधिक मजबूत, विश्वसनीय, तकनीक-सक्षम और पारदर्शी बनाने पर है। इसके लिए देश और दुनिया में अपनाई जा रही सफल व्यवस्थाओं यानी ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ का अध्ययन किया जा रहा है। कई महत्वपूर्ण बदलावों की तैयारी है। इनमें परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षित संचालन, परीक्षा केंद्रों की जवाबदेही, तकनीकी सुरक्षा, मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया को और मजबूत करना शामिल है।


    बेस्ट प्रैक्टिसेज होंगी साझा

    एनटीए में सुधार के लिए विभिन्न संस्थानों, परीक्षा विशेषज्ञों और तकनीकी विशेषज्ञों से बेस्ट प्रैक्टिसेज साझा करने को कहा जा रहा है। उद्देश्य विश्वसनीयता कायम रखना है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में एक संयुक्त सचिव, तीन निदेशक और एक संयुक्त निदेशक की नियुक्ति की है।

    कार्मिक मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी आदेश के मुताबिक, 2005 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) अधिकारी अंशुमान शर्मा को पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए एनटीए में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। मंत्रालय की ओर से 27 अगस्त को जारी अलग-अलग आदेशों के अनुसार, भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के अधिकारी सत्या एस., भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी रवि कुमार सिंह और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी प्रसन्ना वेंकटेश वी. को निदेशक नियुक्त किया गया है। वहीं, 2016 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (सीमा शुल्क एवं अप्रत्यक्ष कर) के अधिकारी अमित समदरिया को संयुक्त निदेशक नियुक्त किया गया है।

    मंत्रालय के सर्कुलर के अनुसार, नियुक्त अधिकारियों को आदेश जारी होने के तीन सप्ताह के भीतर अपना नया पद संभालना होगा। हाल ही में सरकार ने एनटीए की परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलावों की घोषणा की थी।


    कौन से बदलाव संभावित

    – प्रश्नपत्र सुरक्षा : प्रश्नपत्रों की डिजिटल एन्क्रिप्शन, सुरक्षित भंडारण और परीक्षा शुरू होने तक बहु-स्तरीय एक्सेस कंट्रोल।
    – अभ्यर्थी की पहचान : आधार/डिजिटल आईडी के साथ बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन जैसी बहु-स्तरीय पहचान व्यवस्था।
    – परीक्षा केंद्रों की निगरानी : सीसीटीवी की लाइव मॉनिटरिंग, एआई आधारित संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और केंद्रों की रियल टाइम निगरानी।
    – परीक्षा केंद्रों का चयन : केंद्रों की रैंकिंग और जोखिम के आधार पर उनकी नियमित ऑडिटिंग, ताकि संदिग्ध या कमजोर केंद्रों को हटाया जा सके।
    – चार-स्तरीय जांच : प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर प्रिंटिंग, वितरण और परीक्षा संचालन तक अलग-अलग स्तरों पर स्वतंत्र सत्यापन।
    – तकनीकी सुरक्षा : सर्वर, परीक्षा सॉफ्टवेयर और डेटा के लिए साइबर सिक्योरिटी ऑडिट, लॉग मॉनिटरिंग और बैकअप व्यवस्था।

  • तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और झील फटने से बढ़ा खतरा, बिहार के इन क्षेत्रों में हाई अलर्ट

    तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और झील फटने से बढ़ा खतरा, बिहार के इन क्षेत्रों में हाई अलर्ट


    पटना।
    कुदरत के कहर से जूझ रहे नेपाल (Nepal) पर शुक्रवार को खतरा तब और बढ़ गया, जब तिब्बत-नेपाल सीमा (Tibet-Nepal border) पर बनी एक और झील फट गई। संभावित खतरे से निबटने के लिए बिहार के सभी तटबंधों की चौकसी बढ़ा दी गई है। सरकार के आदेश पर वाल्मीकिनगर एवं कोसी बराज (Kosi Barrage) पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। विशेषकर गंडक नदी के जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव और भारी मात्रा में मलबा के आगमन को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने सारण तटबंध सहित सभी महत्वपूर्ण तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी का आदेश दिया गया है।


    पड़ोसी देश में जलप्रलय के बाद कोसी बराज पर बढ़ी सतर्कता

    नेपाल में आई बाढ़ से भारी तबाही के बाद वीरपुर बराज पर निगरानी कड़ी कर दी गई है। कोसी बराज के 56 में से 17 फाटक खोल दिए गए हैं। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं। सभी स्पर, स्टड एवं अन्य संरचनाओं की स्थिति सामान्य है। कंट्रोल रूम के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे कोसी बराज से घटते क्रम में 1,42,360 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज दर्ज किया गया। इसी समय बराह क्षेत्र में 90,800 क्यूसेक दर्ज किया गया। दोपहर 12 बजे कोसी बराज का डिस्चार्ज 1,34,225 क्यूसेक दर्ज हुआ, जबकि बराह में बढ़कर 99,500 क्यूसेक रहा। शाम छह बजे कोसी बराज का डिस्चार्ज बढ़कर 1,44,775 क्यूसेक पहुंच गया। बराह में डिस्चार्ज 99,500 क्यूसेक रहा। विभाग अलर्ट है। नेपाल के भोटे कोशी से 10 हजार क्यूसेक तक अतिरिक्त पानी आने की संभावना है, जिसका कोसी के प्रवाह पर असर पड़ने की संभावना नहीं है।


    दिन रात काम कर रही इंजीनियरों की टीम

    संभी संबंधित अधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दे दिया गया है, ताकि बाढ़ आने पर तुरंत आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी जाए। जल संसाधन विभाग ने संबंधित जिलों के पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को भी अलर्ट मोड में रहने को कहा है। संबंधित जिले के जिलाधिकारी अपने अधीन तटबंधों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग के मुख्यालय स्तर पर हर आधे घंटे पर गंडक नदी के डिस्चार्ज की जानकारी ली जा रही है। इंजीनियरों की टीम चौबीसो घंटे काम कर रही है।


    क्या बोले डिप्टी सीएम विजय चौधरी?

    उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि ग्लेशियर फटने से नेपाल में बाढ़ की तबाही हुई है। लेकिन बिहार के वाल्मिकीनगर अवस्थित गंडक बराज से नेपाल के उस केंद्रबिंदु की दूरी लगभग 250-300 किलोमीटर है। इस कारण नेपाल से आने वाले पानी का प्रवाह-प्रभाव नीचे आते-आते कम हो गया है। इसका लाभ बिहार को हुआ। इसके अलावा गंडक के पूरे प्रवाह में पहले से भी सामान्य से कम पानी था। खतरे के निशान से नदी बह रही थी। इसलिए जो भी पानी आया, उससे बहुत भयावह स्थिति नहीं बनी। शुक्रवार को गंडक में वाल्मीकिनगर बराज के समीप लगभग एक लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होता रहा।


    नेपाल की दो दर्जन नदियों से उत्तर बिहार को खतरा

    नेपाल की पहाड़ियों से आने वाली गंडक समेत दो दर्जन से अधिक पहाड़ी नदियों से पश्चिम चंपारण जिले समेत उत्तर बिहार को खतरा है। नेपाल की त्रिशूली नदी जैसा हादसा सीमावर्ती क्षेत्रों में होने पर पश्चिम चंपारण समेत उत्तर बिहार में गंडक व सिकरहना तबाही मचा सकती हैं। नेपाल से आने वाली नारायणी नदी ही भारत में गंडक के नाम से जानी जाती है। इसमें काली गंडक, मर्स्यांगदी, माड़ी और सेती नदियां आकर मिलती हैं। नेपाल के देवघाट के पास नारायणी में त्रिशूली नदी मिलती है।

    नेपाल डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के समन्वयक डॉ. विवास बहादुर बस्न्यात व नवलपरासी जिले के वरिष्ठ जल विज्ञानी बिनोद पराजुली बताते हैं कि त्रिशूली नदी तिब्बत के क्यिरोंग जिले की पेखु कांगरी पर्वतमाला से निकलती है। त्रिशूली नदी अपने साथ भोटेकोशी, ल्हेन्दे खोला, मैलमंग खोला, चिलीमे खोला, आंखू खोला और बूढ़ी गंडक नदी को लेकर नारायणी में मिलती है। ऊंची पहाड़ियों से निकलने के कारण यह नदी बेहद खतरनाक मानी जाती है। त्रिशूली नदी में ही बाढ़ के कारण नेपाल में भारी तबाही मची है। दोबारा झील टूटने से इसका असर भारतीय क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।


    तिब्बत के नाले से निकली गंडक, नाम जुगूं खोला था

    नदियों के विशेषज्ञ देवी लाल यादव ने बताया कि गंडक तिब्बत के कागबेनी के नाले से निकलती है। यहां उसका नाम जुगूं खोला है। अन्नपूर्णा के पास यह काली गंडकी के नाम से जानी जाती है। इसमें ठाकुर जी मिलती हैं। आगे बढ़ने पर कृष्णा गंडकी और देवघाट में नारायणी के नाम से जानी जाती है। बराज से पूर्व यह गंडक हो जाती है। नेपाल में 123 लेक आउट हैं। इन झीलों पर अवरोधक बने हुए हैं। कभी भी इनमें बर्स्ट आउट हो सकता है। इससे भारी तबाही मच सकती है।

    सिकरहना लाई थी तबाही
    रामनगर और गौनाहा से आने वाली डेढ़ दर्जन पहाड़ी नदियां लौरिया, चनपटिया व सिकटा में आकर सिकरहना से मिलती हैं। 2017 में सिकरहना में बाढ़ आने पर चंपारण, मुजफ्फरपुर समेत बेगूसराय में तबाही मची थी।

    बताते चलें कि 26 अगस्त को नेपाल में प्रलयंकारी बाढ़ आ गई थी। पानी गंडक में प्रवाह होने से गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर जिले में बाढ़ आने की संभावना जताई गई थी। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने गंडक बराज पर मुख्यालय स्तर से अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में एक तकनीकी दल को तैनात कर दिया है। गंडक बराज के सभी 36 गेटों को खोल दिया है, ताकि नेपाल से आने वाला बाढ़ का पानी निकल सके।