Author: bharati

  • महाकाल मंदिर उज्जैन अब भक्तों को नहीं होगी नकद की चिंतादान से लेकर प्रसाद तक सब कुछ हुआ कैशलेस

    महाकाल मंदिर उज्जैन अब भक्तों को नहीं होगी नकद की चिंतादान से लेकर प्रसाद तक सब कुछ हुआ कैशलेस


    उज्जैन । उज्जैन विश्व के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शुमार भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने एक बड़ी सुविधा शुरू की है। अब देश-विदेश से आने वाले भक्तों को मंदिर में दान देने या अन्य सेवाओं के लिए नकद रखने की अनिवार्यता नहीं होगी। मंदिर समिति ने पूरे परिसर को कैशलेस ट्रांजेक्शन से जोड़ते हुए जगह-जगह क्यूआर कोड और बारकोड लगा दिए हैं।

    इन सेवाओं में मिलेगी कैशलेस सुविधा

    मंदिर प्रशासन का लक्ष्य है कि श्रद्धालु बिना किसी आर्थिक उलझन के बाबा के दर्शन कर सकें। वर्तमान में निम्नलिखित सेवाओं में ई-वॉलेट और डिजिटल भुगतान का लाभ मिल रहा है भस्म आरती बुकिंग ऑनलाइन पोर्टल पर ई-वॉलेट के जरिए बुकिंग पहले से जारी है। शीघ्र दर्शन टिकट सशुल्क दर्शन के लिए काउंटर पर डिजिटल पेमेंट की सुविधा। दान काउंटर मंदिर के विभिन्न दान काउंटरों पर बारकोड के माध्यम से सीधा भुगतान। लड्डू प्रसाद अब महाकाल का सुप्रसिद्ध लड्डू प्रसाद भी ऑनलाइन पेमेंट के जरिए लिया जा सकेगा। धर्मशाला एवं अन्न क्षेत्र महाकालेश्वर और हरसिद्धि धर्मशाला में रुकने का शुल्क और अन्न क्षेत्र का सहयोग भी कैशलेस किया गया है।

    नेटवर्क की चिंता नहीं नकद भुगतान भी रहेगा जारी

    डिजिटल सुविधाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ मंदिर समिति ने व्यवहारिकता का भी ध्यान रखा है। अक्सर मंदिर परिसर में भीड़ और तकनीकी कारणों से नेटवर्क की समस्या आ जाती है। इसे देखते हुए समिति ने स्पष्ट किया है कि नकद भुगतान की सुविधा भी अनिवार्य रूप से बनी रहेगी। यदि ई-पेमेंट में कोई तकनीकी खामी आती हैतो दर्शनार्थी पुराने तरीके से भी भुगतान कर सकेंगे ताकि उनकी व्यवस्था प्रभावित न हो।

    मंदिर परिसर में हर जगह उपलब्ध हैं बारकोड

    भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर के प्रमुख स्थानोंविश्राम धाम और कार्यालयों के बाहर बारकोड लगाए गए हैं। श्रद्धालु अपने मोबाइल से किसी भी यूपीआई ऐप जैसे PhonePeGoogle PayPaytm के माध्यम से सुरक्षित रूप से दान राशि जमा कर सकते हैं। इसकी रसीद भी डिजिटल या भौतिक रूप से प्राप्त करने की व्यवस्था की जा रही है।

    प्रशासक का विजन सुलभ और पारदर्शी व्यवस्था

    मंदिर समिति के अनुसारइस कदम से न केवल भक्तों को सुविधा होगीबल्कि मंदिर के कोष और लेखा-जोखा में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। डिजिटल लेन-देन से रिकॉर्ड रखने में आसानी होती है और सुरक्षा की दृष्टि से भी यह बेहतर है। सुविधा दानप्रसादऔर बुकिंग के लिए कैशलेस व्यवस्था। माध्यम बारकोडक्यूआर कोड और ई-वॉलेट। विकल्प डिजिटल के साथ नकद भुगतान की सुविधा भी बरकरार। स्थान महाकालेश्वर मंदिरउज्जैन।

  • जबलपुर के डॉक्टरों का चमत्कार 22 साल की महिला के पेट से निकाला 22 किलो का ट्यूमरनया जीवन दान

    जबलपुर के डॉक्टरों का चमत्कार 22 साल की महिला के पेट से निकाला 22 किलो का ट्यूमरनया जीवन दान



    जबलपुर । जबलपुर संस्कारधानी के चिकित्सा इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। यहाँ के सुखसागर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अपनी निपुणता का परिचय देते हुए एक 22 वर्षीय युवती को नया जीवन प्रदान किया है। युवती के पेट में पिछले काफी समय से एक विशालकाय गांठ पल रही थीजिसे एक बेहद चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के बाद सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया।

    22 किलो का विशालकाय ट्यूमर देख कर डॉक्टर भी रह गए हैरान
    मरीज जब अस्पताल पहुँचीतो उसका पेट काफी फूल चुका था और उसे सांस लेने व चलने-फिरने में गंभीर समस्या हो रही थी। जांच के बाद पता चला कि उसके पेट में इंट्रा-एब्डॉमिनल पेल्विक ट्यूमर है। इस ट्यूमर का आकार और वजन इतना अधिक था कि इसने शरीर के अन्य अंगों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। ऑपरेशन के बाद जब ट्यूमर का वजन किया गयातो वह लगभग 22 किलो निकला। युवती की उम्र और ट्यूमर के वजन का यह दुर्लभ संयोग चिकित्सा क्षेत्र में एक रिकॉर्ड माना जा रहा है।

    आयुष्मान भारत योजना बनी मददगार

    इस मामले की सबसे सुखद बात यह रही कि गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली इस युवती को इलाज के लिए एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ा। आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना AB-PMJAY के तहत यह पूरी सर्जरीदवाइयाँ और अस्पताल का खर्च पूरी तरह निःशुल्क रहा। इस योजना ने एक बार फिर साबित किया कि यह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

    अनुभवी टीम का समन्वय और सफलता

    यह सर्जरी बेहद जोखिम भरी थीक्योंकि इतने बड़े ट्यूमर को निकालते समय रक्तस्राव और अंगों की क्षति का खतरा बना रहता है। अस्पताल की अनुभवी सर्जिकल टीमएनेस्थीसिया विशेषज्ञों और ओटी स्टाफ के बेहतर तालमेल और तकनीकी दक्षता के कारण यह ऑपरेशन सफल रहा। सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू में विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया हैजहाँ उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है।

    संस्थान का संकल्प सुलभ और गुणवत्तापूर्ण इलाज

    सुखसागर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इस सफलता पर डॉक्टरों की टीम को बधाई दी है। संस्थान ने दोहराया कि उनका मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। इस सफल ऑपरेशन ने न केवल अस्पताल का मान बढ़ाया हैबल्कि जबलपुर को चिकित्सा हब के रूप में भी मजबूती दी है मरीज 22 वर्षीय युवती। ट्यूमर का वजन लगभग 22 किलोग्राम। अस्पताल सुखसागर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटलजबलपुर। योजना आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज। र्जरी का प्रकार दुर्लभ इंट्रा-एब्डॉमिनल पेल्विक ट्यूमर।

  • MP में आयकर विभाग का बड़ा धमाका जबलपुर और कटनी में माइनिंग कारोबारियों और BJP नेता के ठिकानों पर रेड

    MP में आयकर विभाग का बड़ा धमाका जबलपुर और कटनी में माइनिंग कारोबारियों और BJP नेता के ठिकानों पर रेड


    जबलपुर ।  मध्य प्रदेश के जबलपुर/कटनी में भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के खिलाफ जांच एजेंसियों ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार तड़के आयकर विभाग की टीमों ने जबलपुर और कटनी में एक साथ दबिश देकर खनन कारोबारियों और रसूखदार नेताओं के होश उड़ा दिए। यह पूरी कार्रवाई आय से अधिक संपत्तिटैक्स चोरी और संदिग्ध लेन-देन की शिकायतों के आधार पर की गई है।

    स्वच्छता अभियान का स्टिकर लगा कर पहुँची टीम
    इस छापेमारी में सबसे चौंकाने वाली बात आयकर विभाग की रणनीति रही। विभाग के अधिकारी किसी सरकारी गाड़ी के बजाय ऐसी कारों में पहुँचे जिन पर स्वच्छता जागरूकता अभियान 2025 के पोस्टर लगे थे। जबलपुर के सिविल लाइन स्थित खनन कारोबारी राजीव चड्ढा के घर जब ये गाड़ियां रुकींतो सुरक्षाकर्मियों को लगा कि नगर निगम की टीम किसी सर्वे के लिए आई है। लेकिन जैसे ही अधिकारियों ने अपना परिचय दियाहड़कंप मच गया।

    BJP नेता और माइनिंग किंग रडार पर

    छापेमारी का मुख्य केंद्र कटनी और जबलपुर रहे। कटनी में जिला पंचायत उपाध्यक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता अशोक विश्वकर्मा के ठिकानों पर आयकर विभाग ने घेराबंदी की है। अशोक विश्वकर्मा की फर्म वीएमसी विश्वकर्मा माइंस  के नाम से संचालित होती है। अधिकारियों ने अशोक विश्वकर्मा के निवास के साथ-साथ उनके तीन भाइयों शंकर लाल विश्वकर्मा व अन्य के ठिकानों पर भी एक साथ छापा मारा। ग्राम टिकरिया और सिघनपुरी स्थित खदानों पर भी टीम की मौजूदगी रही। वहींजबलपुर के रसल चौक और सिविल लाइन इलाके में बड़े खनन कारोबारी राजीव चड्ढा और नितिन शर्मा के घर और दफ्तरों को खंगाला जा रहा है। चड्ढा माइन्स के ऑफिस से भारी मात्रा में दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

    25 सदस्यों की टीम और भारी पुलिस बल

    सूत्रों के अनुसारइस पूरी कार्रवाई में भोपालइंदौर और जबलपुर के लगभग 25 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम में महिला अधिकारियों को भी शामिल किया गया है ताकि घरों की सघन तलाशी ली जा सके। खबर लिखे जाने तकअधिकारियों ने डिजिटल सबूतबैंक लॉकर के कागजात और संदिग्ध निवेश से जुड़े दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया है।

    करोड़ों की टैक्स चोरी का अनुमान

    आयकर विभाग को लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि खनन के कारोबार में बड़े पैमाने पर कैश का लेन-देन हो रहा है और वास्तविक आय को छुपाया जा रहा है। जांच टीम का मानना है कि इस छापेमारी के अंत तक करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी और बेनामी संपत्तियों का खुलासा हो सकता है। फिलहालकिसी भी अधिकारी ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया हैक्योंकि सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। मध्य प्रदेश में चुनाव के बाद आर्थिक अनियमितताओं पर यह अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाहियों में से एक मानी जा रही है।
    भाजपा नेता के घर हुई इस रेड ने सियासी गलियारों में भी चर्चा तेज कर दी है। अब देखना यह है कि जांच के बाद क्या बड़े खुलासे होते हैं। लोकेशन जबलपुर सिविल लाइनरसल चौक और कटनी जलपा वार्डटिकरिया। निशाने पर राजीव चड्ढानितिन शर्मा और भाजपा नेता अशोक विश्वकर्मा। वजह आय से अधिक संपत्तिटैक्स चोरी और अवैध माइनिंग लेन-देन। विभाग आयकर विभाग भोपाल और इंदौर की संयुक्त टीम।

  • ग्वालियर में अपात्र लोगों को पुलिस सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब..

    ग्वालियर में अपात्र लोगों को पुलिस सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब..


    ग्वालियर/मध्यप्रदेश के ग्वालियर में अपात्र और निजी व्यक्तियों को दी जा रही पुलिस सुरक्षा का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट के संज्ञान में आया है। इस मुद्दे को गंभीर जनहित से जुड़ा मानते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि पुलिस बल का इस तरह दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है।यह मामला याचिकाकर्ता नवल किशोर शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका के माध्यम से उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के बावजूद निजी व्यक्तियों को दी जा रही पुलिस सुरक्षा की कोई प्रभावी समीक्षा नहीं की गई। इसके कारण आज भी कई ऐसे लोग पुलिस सुरक्षा का लाभ उठा रहे हैं, जो इसके पात्र नहीं हैं।

    याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डीपी सिंह ने अदालत को बताया कि ग्वालियर में पुलिस बल की पहले से ही भारी कमी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी निजी व्यक्तियों की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं। इससे न केवल आम जनता की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।वकील ने अदालत के सामने उदाहरण पेश करते हुए बताया कि विनय सिंह नामक व्यक्ति को दी गई पुलिस सुरक्षा के दौरान ही उनके खिलाफ वसूली सहित पांच आपराधिक मामले दर्ज हुए। यह साफ तौर पर पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब सुरक्षा पाने वाले ही अपराधों में लिप्त हों, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।

    हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि पूर्व आदेश के बाद सूचना के अधिकार RTI के तहत जो जानकारी सामने आई, वह और भी चिंताजनक है। RTI से खुलासा हुआ कि 19 व्यक्तियों की सुरक्षा में 33 पुलिसकर्मी तैनात थे, जबकि इनमें से अधिकांश व्यक्ति सुरक्षा के पात्र ही नहीं थे। यह स्थिति तब है जब शहर में आम नागरिकों को पर्याप्त पुलिस सहायता नहीं मिल पा रही है।इससे पहले भी हाईकोर्ट इस तरह के मामलों में सख्त रुख अपना चुका है। दिलीप शर्मा और संजय शर्मा को दी गई पुलिस सुरक्षा के मामले में कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए दोनों भाइयों से सुरक्षा पर हुए खर्च की वसूली के आदेश दिए थे। उस समय कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी तुच्छ या अपात्र व्यक्ति को सरकारी खर्च पर पुलिस सुरक्षा नहीं दी जा सकती।

    न्यायालय ने अपने पुराने आदेशों में यह भी कहा था कि पुलिस सुरक्षा देने के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और ठोस नियम बनाए जाने चाहिए। कोर्ट का मानना है कि सुरक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था का इस्तेमाल केवल वास्तविक और प्रमाणित खतरे वाले मामलों में ही होना चाहिए, न कि प्रभाव या रसूख के आधार पर।हाईकोर्ट ने यह सुझाव भी दिया था कि जिन मामलों में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा या निजी कारणों से खतरे की आशंका हो, और संबंधित परिवार के पास लाइसेंसी हथियार उपलब्ध हों, वहां निजी सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था एक बेहतर विकल्प हो सकती है। कोर्ट के अनुसार, निजी सुरक्षा गार्ड कई बार पुलिसकर्मियों की तुलना में ज्यादा सजग और प्रभावी साबित हो सकते हैं, जबकि पुलिस बल को कानून-व्यवस्था के मूल कामों में लगाया जाना चाहिए।

    ताजा सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि अब तक पूर्व आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया और अपात्र लोगों को दी जा रही सुरक्षा पर क्या कार्रवाई की गई है। नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है।यह मामला न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे प्रदेश में पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और जवाबदेही से जुड़ा एक अहम उदाहरण बनता जा रहा है। आने वाले समय में राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और कोर्ट का अगला रुख इस व्यवस्था की दिशा तय करेगा।

  • बीजिंग ने कैसे तोड़ा प्रदूषण का घेरा? ‘गैस चैंबर’ बनती दिल्ली के लिए चीन की स्टेप-बाय-स्टेप सीख

    बीजिंग ने कैसे तोड़ा प्रदूषण का घेरा? ‘गैस चैंबर’ बनती दिल्ली के लिए चीन की स्टेप-बाय-स्टेप सीख


    नई दिल्ली /दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। हालात ऐसे हैं कि सरकार को वर्क फ्रॉम होम निर्माण गतिविधियों पर रोक और बिना पीयूसी पेट्रोल-डीजल न मिलने जैसी सख्त पाबंदियां लागू करनी पड़ी हैं। गैस चैंबर बनती राजधानी के बीच अब चीन का उदाहरण चर्चा में है। चीन के दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने बताया है कि बीजिंग ने किस तरह प्रदूषण को मात दी और कैसे एक दशक में हवा की गुणवत्ता में ऐतिहासिक सुधार किया।यू जिंग ने दिल्ली और बीजिंग की तुलना करते हुए आंकड़े साझा किए। उनके अनुसार वर्ष 2013 में बीजिंग में पीएम 2.5 का औसत स्तर 101.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। यह स्तर 2024 तक घटकर 30.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ जब चीन में तेज शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार जारी रहा। इसके बावजूद लगातार और कठोर नीतियों के कारण बीजिंग आज प्रदूषण नियंत्रण की मिसाल बन चुका है।

    वाहनों पर सबसे पहला वार

    चीन की रणनीति का पहला और सबसे अहम कदम था वाहन उत्सर्जन पर सख्त नियंत्रण। बीजिंग में यूरोपियन मानकों के बराबर कड़े उत्सर्जन नियम लागू किए गए। पुराने और ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाया गया। निजी वाहनों की संख्या सीमित करने के लिए लाइसेंस प्लेट लॉटरी सिस्टम ऑड-ईवन जैसी योजनाएं और सप्ताह के कुछ तय दिनों में गाड़ी चलाने पर रोक लगाई गई।इसके साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन को मजबूत किया गया। मेट्रो और बस नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा दिया गया। आज बीजिंग में इलेक्ट्रिक बसों और टैक्सियों की संख्या लाखों में है जिससे प्रदूषण पर सीधा असर पड़ा।

    उद्योगों पर सख्त फैसला

    बीजिंग में प्रदूषण का बड़ा स्रोत भारी उद्योग भी थे। चीन ने इस मोर्चे पर भी कोई नरमी नहीं दिखाई। शहर से 3000 से अधिक बड़ी और प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों को या तो बंद कराया गया या फिर शहर से बाहर स्थानांतरित किया गया। देश की बड़ी स्टील कंपनी शौगांग को हटाने से ही हवा में खतरनाक कणों में लगभग 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।दिलचस्प बात यह है कि जिन इलाकों में पहले फैक्ट्रियां थीं वहां अब पार्क व्यावसायिक क्षेत्र और तकनीकी हब विकसित किए गए। शौगांग का पुराना औद्योगिक परिसर 2022 के शीतकालीन ओलंपिक का प्रमुख स्थल बना जो पर्यावरणीय बदलाव का प्रतीक बन गया।

    क्षेत्रीय सहयोग बना गेमचेंजर

    चीन ने सिर्फ बीजिंग तक सीमित रहकर कदम नहीं उठाए। आसपास के 26 शहरों को साथ लेकर साझा प्रदूषण नियंत्रण रणनीति अपनाई गई। कोयले का उपयोग न केवल उद्योगों में बल्कि घरों में भी चरणबद्ध तरीके से खत्म किया गया। स्वच्छ ईंधन और गैस आधारित प्रणालियों को बढ़ावा दिया गया।

    भारत के लिए क्या सीख?

    भारत में भी स्वच्छ ईंधन निजी वाहनों पर नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने पर लंबे समय से चर्चा होती रही है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की विशेषज्ञ अनुमिता रॉय चौधरी का कहना है कि फर्क नीति के इरादे और उसके पैमाने का है। चीन ने सालभर सख्ती बरती जबकि दिल्ली में अधिकतर कदम आपात स्थिति में ही उठाए जाते हैं।विशेषज्ञ मानते हैं कि दिल्ली में उद्योगों को पूरी तरह हटाना मुश्किल है लेकिन बेहतर तकनीक साझा प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था और लगातार निगरानी से हालात सुधारे जा सकते हैं। बीजिंग का अनुभव बताता है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो और नीतियां लंबी अवधि की हों तो प्रदूषण जैसे जटिल संकट पर भी काबू पाया जा सकता है।

  • तेजस एक्सप्रेस को पटरी से उतारने की साजिश नाकाम, उन्नाव में ट्रैक पर मिला सीमेंटेड स्लीपर

    तेजस एक्सप्रेस को पटरी से उतारने की साजिश नाकाम, उन्नाव में ट्रैक पर मिला सीमेंटेड स्लीपर


    नई दिल्ली ।लखनऊ /उत्तर प्रदेश में एक बार फिर रेलवे सुरक्षा को चुनौती देने वाली घटना सामने आई है। लखनऊ-कानपुर रेल रूट पर उन्नाव जिले के मगरवारा रेलवे स्टेशन के पास तेजस एक्सप्रेस को पलटाने की कथित साजिश का मामला सामने आया है। डाउन ट्रैक पर एक सीमेंटेड स्लीपर रखे जाने से हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि समय रहते स्थिति को भांप लिया गया और बड़ा हादसा टल गया।यह घटना बुधवार रात करीब पौने नौ बजे की हैजब स्थानीय लोगों ने मगरवारा स्टेशन के पास डाउन लाइन की एक पटरी पर सीमेंटेड स्लीपर रखा हुआ देखा। लोगों ने तुरंत स्टेशन मास्टर को इसकी सूचना दीजिसके बाद रेलवे कंट्रोल रूम को अलर्ट किया गया। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल RPF-राजकीय रेलवे पुलिस GRP- और अन्य रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंच गए।

    इसी दौरान नई दिल्ली से लखनऊ जा रही तेजस एक्सप्रेस को एहतियातन गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया। ट्रेन करीब 27 मिनट तक वहां खड़ी रही। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर कई अन्य ट्रेनों को भी रोक दिया गयाजिससे कुछ समय के लिए इस रूट पर रेल यातायात प्रभावित हुआ।रेलवे अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ट्रैक की जांच की और सीमेंटेड स्लीपर को हटवाया। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद रात लगभग 9:19 बजे ट्रैक को पूरी तरह क्लियर कर दिया गयाजिसके बाद तेजस एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनों को रवाना किया गया।

    आरपीएफ इंस्पेक्टर हरीश कुमार मीणा ने बताया कि मगरवारा स्टेशन के पास गिट्टी उतारने का कार्य चल रहा है। संभव है कि ट्रेनों की तेज धमक के कारण सीमेंटेड स्लीपर ट्रैक पर आ गया हो। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह किसी अराजक तत्व की शरारत हो। मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है।वहीं मगरवारा स्टेशन मास्टर शिव बहादुर ने बताया कि डाउन लाइन पर स्लीपर पड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि यह निर्माण कार्य के दौरान अपनी जगह से खिसक सकता हैलेकिन साजिश की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पीडब्ल्यूआई स्थायी मार्ग निरीक्षक- की टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए स्लीपर हटाया और ट्रैक को सुरक्षित घोषित किया।

    इस घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेजस एक्सप्रेस जैसी हाई-स्पीड और प्रीमियम ट्रेन को निशाना बनाए जाने की आशंका ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। रेलवे अब आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रहा है और स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।उधरप्रदेश के कई हिस्सों में घने कोहरे का असर भी रेल यातायात पर साफ दिखाई दिया। मुरादाबाद मंडल समेत उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में कोहरे के कारण ट्रेनों की रफ्तार धीमी रही और कई प्रमुख ट्रेनें घंटों की देरी से चलीं। दृश्यता कम होने के चलते लोको पायलटों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।

    बुधवार को 20505 डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस करीब सवा दो घंटे की देरी से मुरादाबाद पहुंची। वहीं जम्मूतवी-कोलकाता एक्सप्रेसदुर्गियाना एक्सप्रेसअमरनाथ एक्सप्रेस और जनसाधारण एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनें एक से सात घंटे तक लेट रहीं। ट्रेनों के विलंब से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और जंक्शनों पर वेटिंग हॉल यात्रियों से भरे नजर आए। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी जरूर लें। साथ ही ट्रैक की सुरक्षा को लेकर निगरानी और गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैंताकि भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

  • प्रियंका और राहुल गांधी के बीच परिवारिक कलह केंद्रीय मंत्री ने झगड़े का दावा किया

    प्रियंका और राहुल गांधी के बीच परिवारिक कलह केंद्रीय मंत्री ने झगड़े का दावा किया


    नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही आंतरिक कलह को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच गंभीर विवाद चल रहा है जिससे राहुल गांधी ने परिवार और पार्टी से लड़कर विदेश जाने का निर्णय लिया। बिट्टू ने कहा राहुल गांधी का विदेश में होना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस परिवार में कुछ गहरे मतभेद हैं। राहुल गांधी पार्टी और परिवार से झगड़कर विदेश गए हैं जबकि उनकी बहन प्रियंका गांधी भी लगातार अपनी बात रख रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के अंदर ‘टीम प्रियंका बनाम टीम राहुल’ का झगड़ा अब खुलकर सामने आ चुका है।

    केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जर्मनी में हैं जहां उनकी तस्वीरें दिखाई दी हैं जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए दुनिया भर में काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के नेताओं को महात्मा गांधी से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि वे अपनी आंतरिक लड़ाई में उलझे हुए हैं। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कांग्रेस की आंतरिक कलह का दावा किया था और इसे टीम प्रियंका बनाम टीम राहुल के रूप में पेश किया था। पूनावाला ने कहा था कांग्रेस की आंतरिक कलह अब बाहर आ गई है जो कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति के लिए चिंता का विषय है।

    बिट्टू के बयान के बाद कांग्रेस से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन यह संकेत देता है कि पार्टी के भीतर कोई बड़ा विवाद चल रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की तरफ से इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान न आने से अटकलें और भी तेज हो गई हैं। इस आंतरिक कलह को लेकर भाजपा ने कांग्रेस को घेरते हुए सवाल उठाए हैं जबकि कांग्रेस के नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

  • यात्रियों को होगा एक्स्ट्रा खर्च ज्यादा सामान लेकर ट्रेन यात्रा करने पर देना होगा अतिरिक्त शुल्क

    यात्रियों को होगा एक्स्ट्रा खर्च ज्यादा सामान लेकर ट्रेन यात्रा करने पर देना होगा अतिरिक्त शुल्क


    नई दिल्ली । रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में एक महत्वपूर्ण जानकारी दी है जिसमें कहा गया है कि अब ट्रेन यात्रा करते समय यदि यात्री निर्धारित सीमा से अधिक सामान ले जाते हैं तो उन्हें अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा। यह नियम ट्रंक सूटकेस और बक्से जैसी वस्तुओं के लिए लागू होगा जिनका बाहरी माप निर्धारित सीमा से ज्यादा होगा। ऐसे सामान को यात्री के डिब्बों में नहीं बल्कि ब्रेकवैन एसएलआर/पार्सल वैन में बुक करके ले जाना होगा। वैष्णव ने यह जानकारी तेलुगु देशम पार्टी के सांसद वेमिरेड्डी प्रभाकर रेड्डी के सवाल के जवाब में दी। उन्होंने बताया कि विभिन्न श्रेणियों में सामान ले जाने की अधिकतम सीमा तय की गई है।

    क्या हैं नए नियम

    द्वितीय श्रेणी 35 किग्रा तक सामान मुफ्त 70 किग्रा तक शुल्क देकर ले जा सकते हैं। स्लीपर श्रेणी 40 किग्रा तक मुफ्त 80 किग्रा तक शुल्क देकर ले जा सकते हैं। एसी थ्री टियर/चेयर कार 40 किग्रा तक सामान मुफ्त अधिकतम सीमा भी 40 किग्रा। प्रथम श्रेणी/एसी टू टियर 50 किग्रा तक मुफ्त 100 किग्रा तक शुल्क देकर ले जा सकते हैं। एसी प्रथम श्रेणी 70 किग्रा तक मुफ्त 150 किग्रा तक शुल्क देकर ले जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त अगर कोई यात्री 100 सेंटीमीटर लंबा 60 सेंटीमीटर चौड़ा और 25 सेंटीमीटर ऊंचा सामान लेता है तो उसे ब्रेकवैन या पार्सल वैन में बुक करना होगा। यह सामान यात्री डिब्बों में नहीं ले जाया जा सकेगा।

    मंत्री ने यह भी कहा कि कमर्शियल सामान को निजी सामान के रूप में डिब्बों में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। इस नए नियम के लागू होने से यात्रियों को यात्रा के दौरान अधिक सामान ले जाने के मामले में ध्यान रखना होगा ताकि उन्हें अतिरिक्त शुल्क का सामना न करना पड़े।
     रेल मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इन नियमों का उद्देश्य यात्रियों को सुविधाजनक यात्रा प्रदान करना है और साथ ही रेलवे के संसाधनों का भी बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

  • ढाका में भारतीय उच्चायोग को धमकी, भारत ने बांग्लादेशी हाई कमिश्नर को किया तलब; कूटनीतिक तनाव गहराया

    ढाका में भारतीय उच्चायोग को धमकी, भारत ने बांग्लादेशी हाई कमिश्नर को किया तलब; कूटनीतिक तनाव गहराया


    नई दिल्ली / ढाका /भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में एक बार फिर तल्खी देखने को मिल रही है। ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग को कथित रूप से धमकी मिलने की खबर के बाद भारत सरकार ने बांग्लादेश के हाई कमिश्नर को तलब किया है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धमकी किस तरह की थी और किस माध्यम से दी गई। इसके बावजूद इस मामले को गंभीर मानते हुए भारत ने कूटनीतिक स्तर पर कड़ा संदेश दिया है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब बांग्लादेश में विजय दिवस मनाए जाने के ठीक एक दिन बाद माहौल संवेदनशील बना हुआ है। बुधवार को ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हुई जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने भारत में तैनात बांग्लादेश के हाई कमिश्नर को तलब कर इस विषय पर स्पष्टीकरण मांगा। फिलहाल भारत सरकार की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।इस बीच यह भी ध्यान देने योग्य है कि हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर लगातार बयानबाजी और आपसी आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले हैं। इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने रविवार को ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब किया था। यह तलबगी अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा दिए गए कथिती भड़काऊ बयानोंको लेकर की गई थी।

    पीटीआई-भाषा के अनुसार बांग्लादेश सरकार ने भारत के समक्ष यह आपत्ति दर्ज कराई थी कि शेख हसीना को भारत में रहते हुए ऐसे बयान देने की अनुमति दी जा रही है जो बांग्लादेश की आंतरिक स्थिति को अस्थिर कर सकते हैं। बांग्लादेश का आरोप है कि हसीना अपने समर्थकों को कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसा रही हैं और उनका उद्देश्य आगामी संसदीय चुनावों को बाधित करना है।गौरतलब है कि शेख हसीना इस समय भारत में हैं। बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। इसके बाद से ही बांग्लादेश भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। इस मुद्दे ने भी दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है।

    तनाव को और हवा देने वाले बयान बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी NCP के नेता हसनत अब्दुल्ला की ओर से सामने आए हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि यदि भारत बांग्लादेश को अस्थिर करने की कोशिश करता है तो ढाका को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को ‘अलग-थलगकरने की दिशा में कदम उठाना चाहिए और क्षेत्र में अलगाववादी तत्वों को समर्थन देना चाहिए। उनके इस बयान को भारत में गंभीर उकसावे के रूप में देखा गया।इन बयानों पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि पिछले एक वर्ष से बांग्लादेश की ओर से बार-बार ऐसे बयान सामने आ रहे हैं जिनमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को अलग कर बांग्लादेश का हिस्सा बनाने की बात की जाती है। मुख्यमंत्री ने इसे न केवल अव्यावहारिक बल्कि खतरनाक सोच करार दिया था।

    हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा था कि भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ऐसे में बांग्लादेश द्वारा इस तरह की बातें सोचना भी गलत मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने यह तक कहा कि इस तरह की सोच को किसी भी स्तर पर प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए और बांग्लादेश को दी जाने वाली मदद पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।फिलहाल ढाका में भारतीय उच्चायोग को मिली धमकी दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब किया जाना और तीखे राजनीतिक बयान-इन सबने भारत-बांग्लादेश संबंधों को एक संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश इस तनाव को कूटनीतिक बातचीत के जरिए कैसे संभालते हैं।

  • सरकार का सोनिया गांधी पर हमला नेहरू के दस्तावेज लौटाने की मांग कहा – ये निजी संपत्ति नहीं हैं

    सरकार का सोनिया गांधी पर हमला नेहरू के दस्तावेज लौटाने की मांग कहा – ये निजी संपत्ति नहीं हैं


    नई दिल्ली । भारत सरकार ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से पंडित जवाहरलाल नेहरू से संबंधित 51 बक्सों में रखे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय पीएमएमएल को वापस करने की मांग की है। यह दस्तावेज 2008 में तात्कालिक प्रधानमंत्री संग्रहालय से गांधी परिवार को सौंपे गए थे लेकिन अब तक इन्हें वापस नहीं किया गया है। सरकार ने इन दस्तावेजों को निजी संपत्ति मानने से इनकार करते हुए कहा है कि ये सार्वजनिक अभिलेख हैं और इनकी सार्वजनिक पहुंच जरूरी है।

    केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस मुद्दे पर कहा यह कोई निजी पारिवारिक दस्तावेज नहीं हैं। ये भारत के पहले प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय अभिलेख हैं और इन्हें सार्वजनिक अभिलेखागार में होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इन दस्तावेजों की अदला-बदली को लेकर संसद में कई बार चर्चा हो चुकी है लेकिन अब तक इन्हें वापस नहीं किया गया।

    विवाद तब और बढ़ गया जब भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में एक सवाल उठाया कि क्या 2025 में पीएमएमएल के निरीक्षण के दौरान नेहरू के दस्तावेज गायब पाए गए थे। इसके जवाब में शेखावत ने साफ किया कि ये दस्तावेज लापता नहीं हैं बल्कि सोनिया गांधी के पास हैं और उनका स्थान पूरी तरह से ज्ञात है। उन्होंने कहा कि ये दस्तावेज 2008 में विधिवत तरीके से गांधी परिवार को सौंपे गए थे लेकिन वे अब भी वापस नहीं किए गए हैं।

    शेखावत ने आगे कहा सोनिया गांधी से यह पूछा जाना चाहिए कि क्यों ये दस्तावेज अब तक वापस नहीं किए गए जबकि कई बार पीएमएमएल की ओर से पत्र भेजे गए हैं। अगर कुछ छिपाया जा रहा है तो क्या यह सही है? उन्होंने यह भी जोड़ा कि इतिहास को सही तरीके से समझने और उसमें सही दृष्टिकोण विकसित करने के लिए इन दस्तावेजों तक सभी को पहुंच मिलनी चाहिए। विपक्षी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जवाब देते हुए शेखावत से पूछा कि क्या अब वह माफी मांगेंगे क्योंकि यह स्पष्ट हो गया है कि दस्तावेज गायब नहीं थे। कांग्रेस ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह इस मुद्दे को केवल राजनीतिक लाभ के लिए तूल दे रही है।

    कुल मिलाकर यह मामला अब एक गंभीर राजनीतिक मुद्दा बन गया है। जहां एक तरफ सरकार ने नेहरू के दस्तावेजों को सार्वजनिक अभिलेखागार में रखने की जरूरत जताई है वहीं कांग्रेस और गांधी परिवार की ओर से इसे एक निजी और परिवारिक अधिकार बताया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस मामले पर ममता बनर्जी और सोनिया गांधी किस तरह की प्रतिक्रिया देती हैं और सरकार इस मुद्दे को किस दिशा में ले जाती है।