Author: bharati

  • लिथियम से लेकर टाइटेनियम तक भारत की नई खनिज नीति से आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

    लिथियम से लेकर टाइटेनियम तक भारत की नई खनिज नीति से आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल


    नई दिल्ली:
    देश की आर्थिक उन्नति और भविष्य की ऊर्जा परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है सोमवार से खनिज ब्लॉकों की नीलामी के सातवें चरण की शुरुआत होगी इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी और राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे द्वारा किया जाएगा। भारत के खान मंत्रालय के अनुसार यह नीलामी देश की खनिज सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए बेहद अहम मानी जा रही है
    आज के समय में जब दुनिया स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ रही है तब लिथियम ग्रेफाइट दुर्लभ पृथ्वी तत्व टंगस्टन वैनेडियम और धातुओं जैसे खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है हालांकि इन खनिजों की उपलब्धता सीमित है और कुछ ही क्षेत्रों में केंद्रित होने के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना रहता है।
    46 खनिज ब्लॉकों की नीलामी कर चुकी है जिसे उद्योग जगत से पॉजिटिव रिएक्शन मिला है इससे यह संकेत मिलता है कि भारत के खनिज क्षेत्र में निवेश और भागीदारी बढ़ रही है सातवें चरण में इस रेट को जारी रखते हुए कई राज्यों में 19 नए ब्लॉक नीलामी के लिए पेश किए जाएंगे जिनमें स्वच्छ ऊर्जा उर्वरक और खनिज उद्योगों के लिए जरूरी खनिज शामिल हैं

    नीलामी प्रक्रिया को ज्यादा उचित और असरदार बनाने के लिए सरकार ने नियमों में भी कई सुधार किए हैं 2025 और 2026 के संशोधनों के तहत प्रदर्शन सुरक्षा अग्रिम भुगतान और अन्य गतिविधियों को सरल बनाया गया है साथ ही बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा गारंटी बॉन्ड की सुविधा भी दी गई है जिससे भारतीयों को आसानी होगी

    यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन दो चरणों वाली उचित नीलामी प्रणाली के तहत आयोजित की जाएगी जिसमें उच्चतम बोली लगाने वाले को खनन का अधिकार मिलेगा इस पहल से न केवल देश की खनिज आपूर्ति मजबूत होगी बल्कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता भी वहीं

    आने वाले समय में यह कदम भारत को स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है

  • डिमोना-अराद मिसाइल स्ट्राइक: ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया

    डिमोना-अराद मिसाइल स्ट्राइक: ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया


    नई दिल्ली । इजरायल के दक्षिणी शहरों डिमोना और अराद में शनिवार को ईरान ने बड़े पैमाने पर मिसाइल हमला किया जिसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। घायलों में से 11 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। इजरायली मीडिया के अनुसार ईरान की ओर से ताबड़तोड़ हमलों में इजरायली एयर डिफेंस कम से कम दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा।

    हमलों के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायल डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा कि देश अपने दुश्मनों से हर मोर्चे पर लड़ता रहेगा। हमलों में गंभीर रूप से घायल लोगों में डिमोना में हुए हमले के कारण 12 साल का एक लड़का और अराद में 5 साल की एक लड़की शामिल हैं।

    डिमोना इलाके में ईरान ने कई मिसाइल हमले किए जिन्हें न्यूक्लियर रिसर्च फैसिलिटी को निशाना बनाने के लिए किया गया था। यह फैसिलिटी डिमोना से लगभग 10 किलोमीटर और अराद से 30 किलोमीटर दूर स्थित है। ईरानी मीडिया ने बताया कि यह हमला इजरायल के परमाणु केंद्रों पर बदले के तौर पर किया गया है। अमेरिका और इजरायल पहले से ही ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए लगातार दबाव डाल रहे हैं।

    इजरायल के मैगन डेविड एडोम इमरजेंसी सर्विस के अनुसार डिमोना में हमले के दौरान गंभीर रूप से घायल लड़के के अलावा 30 साल की एक महिला को भी कांच के टुकड़ों से मामूली चोटें आईं। शहर में 31 अन्य लोगों को हल्की चोटों का इलाज किया गया जबकि 14 लोगों को एक्यूट एंग्जायटी के लिए मेडिकल सहायता मिली। एमडीए पैरामेडिक कार्मेल कोहेन ने कहा कि हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मची हुई थी और बहुत ज्यादा नुकसान हुआ।

    बीर्शेबा के सोरोका मेडिकल सेंटर ने जानकारी दी कि हमले में घायल सात लोगों को भर्ती किया गया जिनमें गंभीर रूप से घायल 12 साल का बच्चा भी शामिल था। बच्चों और अन्य गंभीर घायलों का इलाज ट्रॉमा रूम और सर्जिकल इमरजेंसी रूम में किया जा रहा है।

    डिमोना में हुए हमले के कुछ घंटों बाद पास के अराद में भी एक बैलिस्टिक मिसाइल के टकराने से कई इमारतों को नुकसान हुआ। एमडीए की टीम ने अराद में हमले के दौरान 71 लोगों का इलाज किया और उन्हें अस्पताल भेजा। इसमें 10 गंभीर घायल शामिल थे जिनमें 5 साल की बच्ची भी थी। 13 लोगों की हालत स्थिर बताई गई जबकि 48 लोगों को हल्की चोटें आईं। चार और लोगों को अतिरिक्त इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

    इस हमले ने इजरायल के न्यूक्लियर शहरों और नागरिक सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न किया है। विशेषज्ञ इसे ईरान की ओर से इजरायल के परमाणु कार्यक्रम और सुरक्षा रणनीति पर बड़ा प्रहार मान रहे हैं। इस घटना ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक स्थिरता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

  • ईरान में युद्ध का कहर: तेहरान सहित देशभर में हमलों की संख्या 80,000 से ऊपर

    ईरान में युद्ध का कहर: तेहरान सहित देशभर में हमलों की संख्या 80,000 से ऊपर


    नई दिल्ली । ईरान के रेड क्रेसेंट सोसायटी के अध्यक्ष पीरहुसैन कोलिवंद ने एक बयान में कहा है कि युद्ध की शुरुआत के बाद से अमेरिका और इजरायल ने ईरान में 80 000 से अधिक नागरिक स्थलों पर हमला किया है। इन हमलों में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन भी शामिल है। कोलिवंद ने बताया कि इनमें से 20 000 से अधिक हमले तेहरान में हुए हैं जबकि शेष 60 000 अन्य इलाकों में दर्ज किए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि इन हमलों में करीब 18 790 व्यापारिक प्रतिष्ठान 266 मेडिकल सेंटर और 498 स्कूल निशाने पर रहे। हमलों में कम से कम 12 स्वास्थ्यकर्मी मारे गए और 90 से अधिक घायल हुए। युद्ध की शुरुआत से अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है जिनमें बच्चे और 231 महिलाएं भी शामिल हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस संघर्ष में अब तक 1 500 से अधिक लोग मारे गए हैं।

    इसी बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने देश के मध्य हवाई क्षेत्र में इजरायल के एफ-16 लड़ाकू विमान को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार तेहरान की सेना ने तेल अवीव के पास बेन गुरियन एयरपोर्ट पर सैन्य विमानों के ईंधन टैंकों पर भी हमला किया।

    ईरान के खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोल्फ़ागरी ने चेतावनी दी कि यदि संयुक्त अरब अमीरात से दक्षिणी ईरानी द्वीपों पर हमले दोहराए गए तो रास अल-खैमाह पर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर हमला उसी जगह पर जवाब देगा जहां से हमला हुआ।

    28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर हमला किया था। इस हमले में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और आम नागरिक मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

    इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक तेल और ऊर्जा बाजार पर भी गहरा प्रभाव डाला है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस पर चिंता व्यक्त की है और युद्ध की तत्काल समाप्ति की आवश्यकता को रेखांकित किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश अपने नागरिकों और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई का जवाब देगा।

    इस संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित किया है बल्कि वैश्विक मानवाधिकार और युद्ध कानून की स्थितियों को भी चुनौती दी है। नागरिक इलाकों स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों पर हमले ने एक मानवीय संकट को जन्म दिया है जिसे तत्काल अंतरराष्ट्रीय ध्यान की आवश्यकता है।

  • भारत में यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी पर रूस का बड़ा हमला दूतावास की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

    भारत में यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी पर रूस का बड़ा हमला दूतावास की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

    नई दिल्ली: भारत में हाल ही में जापानी नागरिकों के अपराधी मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया विवाद खड़ा किया गया है, राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 13 मार्च को नई दिल्ली, कोलकाता और कोलकाता के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर छह जापानी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिकों पर मामला दर्ज किया था।

    रूस के विदेश मंत्री की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने आरोप लगाया कि ये जापानी नागरिक सीमा पार कर मिजोरम के रास्ते भारत में बचे हुए थे और उन्होंने स्थानीय हथियार बंद विचारधारा से संपर्क स्थापित किया था और उनका उद्देश्य कथित तौर पर यूरोप में बने साम्राज्य पर हमला करना और इन विचारधाराओं को कम्युनिस्ट असेंबल करना और इलेक्ट्रॉनिक वॉर्सफेयर की ट्रेनिंग देना था।

    रूस ने यह भी दावा किया है कि उत्तर पूर्व भारत में सक्रिय विद्रोही सहयोगियों के साथ संबंध हो सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।

    इस पूरी घटना में रूस ने भारत में यूक्रेनी दूतावास की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। मारिया जखारोवा ने कहा कि दूतावास की प्रतिक्रिया हैरान करने वाली है और वह अपने देश के सहयोगियों को अलग करने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जापान ने भारत के समकक्ष टेररिज्म कानून के उल्लंघन पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी और समर्थित मीडिया पर आरोप लगाया।

    रूस ने इस अंक में वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के नेतृत्व वाले वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के नेतृत्व में इस मुद्दे को रखा है, जिसमें कहा गया है कि दुनिया भर में कम्युनिस्ट पार्टी का केंद्र बनाया जा रहा है और पश्चिमी देशों द्वारा सैन्य समर्थन के कारण स्थिति और जटिल हो रही है।

    रूस का दावा है कि जापान से जुड़े नेटवर्क को मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और अफ्रीका तक सक्रिय किया जा सकता है।

    इस मामले में पूरे भारत में सुरक्षा शैक्षणिक संस्थान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को एक बार फिर से उजागर किया गया है, वहीं यह घटना वैश्विक राजनीति में बढ़ते तनाव और आरोप प्रत्यारोप के नए दौर की ओर भी संकेत दिए गए हैं, इस मामले में इस मामले पर और घोषणा होने की संभावना है, जिससे स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

  • जी7 ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की, कहा ये वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा

    जी7 ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की, कहा ये वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा


    वॉशिंगटन । जी7 देशों ने ईरान द्वारा पश्चिम एशिया में किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इन हरकतों से न केवल प्रभावित देशों बल्कि वैश्विक सुरक्षा को भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। समूह ने साथ ही प्रभावित देशों के प्रति अपना समर्थन भी जाहिर किया।

    जी7 देशों के विदेश मंत्रियों ने यूरोपीय संघ के हाई रिप्रेजेंटेटिव के साथ संयुक्त बयान में कहा कि वे ईरान और उसके प्रॉक्सी के हमलों के खिलाफ अपने साझेदारों का समर्थन करते हैं। बयान में उल्लेख किया गया कि बहरीन कुवैत ओमान कतर सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात जॉर्डन और इराक में आम नागरिकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए हमलों की निंदा करते हैं जिसमें ऊर्जा सुविधाएं भी शामिल हैं।

    समूह ने चेतावनी दी कि ईरानी गतिविधियां क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने तेहरान से अपील की कि अपनी सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकें। जी7 ने खासकर होर्मुज स्ट्रेट और उससे जुड़े महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की अहमियत पर जोर दिया।

    बयान में कहा गया कि वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा मार्केट की स्थिरता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। जी7 ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्यों द्वारा 11 मार्च को किए गए स्टॉक रिलीज फैसले का हवाला देते हुए ग्लोबल ऊर्जा सप्लाई की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई।

    इसके अलावा समूह ने दोहराया कि ईरान को कभी भी न्यूक्लियर हथियार हासिल नहीं करने चाहिए। उन्होंने ईरान से बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रोकने अस्थिर गतिविधियों को खत्म करने और अपने ही नागरिकों के खिलाफ हिंसा बंद करने की अपील की।

    जी7 ने प्रभावित देशों के हमलों से खुद की रक्षा करने के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा कि ये देश अपने नागरिकों और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए उचित कदम उठा सकते हैं। समूह ने इराक में ईरान और उसकी मिलिशिया द्वारा डिप्लोमैटिक सुविधाओं और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की भी निंदा की खासकर अमेरिका और काउंटर आईएसआईएस कोएलिशन फोर्स के खिलाफ। बयान में निष्कर्ष निकाला गया कि जी7 क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी और आवश्यक क़दम उठाने के लिए तैयार हैं।

  • ट्रेन की टक्कर से बस पर तबाही, 12 मृतक और दर्जनों घायल, रेलवे जांच में जुटी

    ट्रेन की टक्कर से बस पर तबाही, 12 मृतक और दर्जनों घायल, रेलवे जांच में जुटी


    नई दिल्ली । बांग्लादेश के कोमिला में रविवार सुबह एक दर्दनाक रेल हादसा हुआ। पडुआ बाजार लेवल क्रॉसिंग पर मेल ट्रेन और बस की भीषण टक्कर में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए। घटना इतनी भयानक थी कि बस के परखच्चे उड़ गए और कई यात्रियों की चीखें सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे।

    कोमिला सदर साउथ पुलिस स्टेशन के ईपीजेड चौकी के सब इंस्पेक्टर सैफुल इस्लाम ने बताया कि मरने वालों में सात पुरुष, तीन महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि इलाज के दौरान अन्य मृतकों की संख्या बढ़कर 12 हो गई।

    स्थानीय सूत्रों और पुलिस के अनुसार, ट्रेन मामून स्पेशल बस को जंगल्या कचुआ क्षेत्र में लगभग आधा किलोमीटर तक घसीटती हुई ले गई। घटना के समय क्रॉसिंग पर कोई गेटमैन मौजूद नहीं था। घटना के बाद फायर सर्विस, हाईवे पुलिस और स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुँचे और घायल यात्रियों को अस्पताल ले गए।

    बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, हादसे वाली बस चपैनवाबगंज से लक्ष्मीपुर जा रही थी। ट्रेन के इंजन में बस उलझ गई और ट्रेन रुकने से पहले लगभग एक किलोमीटर तक बस घिसटती चली गई। इसके कारण बस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक 18 घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जिनमें से आठ अभी भी भर्ती हैं।

    रेलवे प्रशासन ने घटना की जांच के लिए दो कमेटियां गठित की हैं, एक डिविजनल और एक रीजनल। इसके अलावा, पडुआर बाजार क्रॉसिंग के दो गेटमैन मेहदी हसन और हेलाल उद्दीन को सस्पेंड कर दिया गया है। हादसे के कारण ढाका चटगांव रेल मार्ग पर ट्रेन सेवा तीन घंटे तक बाधित रही। बांग्लादेश रेलवे के अधिकारियों ने कहा कि दुर्घटना का कारण और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच की जा रही है। घटना ने पूरे इलाके में चिंता और सदमे का माहौल पैदा कर दिया है।

  • स्टारडम से गिरावट तक अरमान कोहली का संघर्ष अक्षय-सनी भी नहीं बचा सके डूबता करियर

    स्टारडम से गिरावट तक अरमान कोहली का संघर्ष अक्षय-सनी भी नहीं बचा सके डूबता करियर


    नई दिल्ली:
    बॉलीवुड में कई ऐसे सितारे रहे हैं जिनकी किस्मत ने बड़ा साथ नहीं दिया और अरमान कोहली का नाम भी उन्हीं में शामिल है एक समय था जब उनके पिता राजकुमार कोहली ने अपने बेटे के करियर को संवारने के लिए अपनी पूरी ताकत और पूंजी दांव पर लगा दी थी इसके बावजूद अरमान कोहली वह मुकाम हासिल नहीं कर सके जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही थी

    वर्ष 2002 में रिलीज हुई फिल्म जानी दुश्मन: एक अनोखी कहानी में अक्षय कुमार सनी देओल सुनील शेट्टी और मनीषा कोइराला जैसे बड़े सितारों के बीच भी फिल्म का मुख्य केंद्र अरमान कोहली ही थे उनके पिता राजकुमार कोहली ने इस फिल्म के जरिए अपने बेटे के डूबते करियर को संवारने की पूरी कोशिश की लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई हालांकि बाद में यह टीवी पर जरूर लोकप्रिय हो गई

    अरमान कोहली का जन्म एक फिल्मी परिवार में हुआ था जहां उनके पिता 70 और 80 के दशक के मशहूर निर्माता निर्देशक थे और उनकी मां निशि कोहली भी अपने समय की एक सफल अभिनेत्री रही हैं ऐसे माहौल में उनका बचपन फिल्मों और बड़े सितारों के बीच बीता जिससे उन्हें इंडस्ट्री में शुरुआत से ही कई मौके मिले

    लेकिन करियर की शुरुआत से ही उनके फैसलों ने उनके भविष्य पर गहरा असर डाला 1992 में उन्हें दीवाना फिल्म में दिव्या भारती के साथ काम करने का मौका मिला लेकिन सेट पर उनके व्यवहार के कारण उन्हें इस फिल्म से बाहर कर दिया गया बाद में यह फिल्म शाहरुख खान के लिए एक बड़ी सफलता साबित हुई और उन्होंने रातोंरात सुपरस्टार का दर्जा हासिल कर लिया

    इसके बाद बाजीगर और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स भी उनके हाथ से निकल गए क्योंकि उन्होंने उन भूमिकाओं को स्वीकार करने से मना कर दिया जो उन्हें लीड रोल के बराबर नहीं लगती थीं इन फैसलों का सीधा फायदा अन्य कलाकारों को मिला और वे फिल्में इतिहास बन गईं

    इसी दौरान उनके पिता ने लगातार उन्हें लॉन्च करने की कोशिश की लेकिन विरोधी अनाम और जुआरी जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं हालांकि फिल्म कहर में सनी देओल और सुनील शेट्टी जैसे सितारों के साथ काम करने के बाद भी उन्हें बड़ा ब्रेक नहीं मिला

    2015 में सलमान खान की सिफारिश पर उन्हें प्रेम रतन धन पायो में एक नकारात्मक भूमिका मिली और फिल्म सफल भी रही लेकिन यह उनके करियर को नई ऊंचाई नहीं दे सकी

    2013 में रियलिटी शो बिग बॉस 7 ने उन्हें एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया लेकिन इस बार वजह नकारात्मक थी शो में उनके गुस्से और विवादों ने उनकी छवि को काफी नुकसान पहुंचाया एक घटना के दौरान सोफिया हयात के साथ विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस तक मामला पहुंच गया और उन्हें राष्ट्रीय टेलीविजन पर गिरफ्तार भी किया गया

    यह घटना उनके करियर के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुई और उनकी छवि एक गुस्सैल और अस्थिर व्यक्ति के रूप में स्थापित हो गई आज अरमान कोहली भले ही एक्टिंग से दूर हैं लेकिन वह अपने नए प्रोजेक्ट्स और निर्देशन की योजना के साथ इंडस्ट्री में वापसी की कोशिश में जुटे हुए हैं

  • ट्रोलिंग से टूटीं श्रीलीला एक्टिंग छोड़ने तक पहुंची थी, मां से करती थीं पढ़ाई की बात

    ट्रोलिंग से टूटीं श्रीलीला एक्टिंग छोड़ने तक पहुंची थी, मां से करती थीं पढ़ाई की बात


    नई दिल्ली:
    पुष्पा 2: द रूल के आइटम सॉन्ग किसिक से पैन इंडिया स्टार बनीं श्रीलीला आज भले ही फिल्म इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी हों, लेकिन शुरुआती दिनों में उन्हें कई मुश्किलों और मानसिक दबावों का सामना करना पड़ा था हाल ही में उन्होंने खुलासा किया कि एक समय ऐसा भी आया जब वह पूरी तरह से एक्टिंग छोड़ने के बारे में सोचने लगी थीं

    श्रीलीला ने बताया कि जब उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखा था, तब वह काफी सेंसिटिव थीं और सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग का उन पर गहरा असर पड़ता था उन्हें कई बार इतना बुरा लगता था कि वह रोने लगती थीं इस कठिन दौर में उन्होंने अपनी मां से भी अपनी भावनाएं साझा की थीं और यहां तक कह दिया था कि उन्हें नहीं लगता कि वह यह काम कर पाएंगी और वह स्कूल या कॉलेज वापस जाने के बारे में सोच रही थीं

    उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती दिनों की यह असुरक्षा उनके लिए काफी भारी थी लेकिन धीरे धीरे उन्होंने खुद को संभाला और इस ट्रोलिंग के साथ जीना सीख लिया समय के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा और अब वह इन नकारात्मक टिप्पणियों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेतीं

    श्रीलीला का मानना है कि आज के दर्शक पहले की तुलना में ज्यादा समझदार हो गए हैं और वे चीजों को समझने की कोशिश करते हैं उन्होंने कहा कि लोग अब केवल ट्रोलिंग को देखकर प्रतिक्रिया नहीं देते बल्कि सोच समझकर अपनी राय बनाते हैं इस बातचीत में उनकी को स्टार राशी खन्ना ने भी सहमति जताई और कहा कि सोशल मीडिया पर कई बार लोग सिर्फ क्लिकबेट के लिए कुछ भी लिख देते हैं

    राशी खन्ना ने भी स्वीकार किया कि ट्रोलिंग आज के समय में एक बड़ी चुनौती बन चुकी है उन्होंने कहा कि लोग बिना सच्चाई जाने किसी को जज कर लेते हैं और यह कलाकारों के लिए मानसिक रूप से काफी कठिन होता है उन्होंने यह भी कहा कि अपनी पहचान और वर्षों की मेहनत को बनाए रखना भी ऐसे माहौल में एक बड़ी चुनौती बन जाता है

    वर्क फ्रंट की बात करें तो श्रीलीला जल्द ही कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाली हैं जिसमें वह कार्तिक आर्यन के साथ अनुराग बसु की फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू करेंगी इसके अलावा वह धनुष की आगामी फिल्म का भी हिस्सा होंगी उन्होंने 2019 में अपने करियर की शुरुआत की थी और अब वह तेजी से आगे बढ़ रही हैं

    वहीं राशी खन्ना भी लगातार अपने करियर में सक्रिय हैं और कई फिल्मों और प्रोजेक्ट्स का हिस्सा हैं वह फर्जी सीजन 2 और अन्य कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आएंगी दोनों अभिनेत्रियों ने यह साबित किया है कि ट्रोलिंग और मुश्किलों के बावजूद अगर हौसला मजबूत हो तो सफलता जरूर मिलती है

  • दुबई के रास्ते सोना तस्करी का नेटवर्क रान्या राव केस में नए खुलासे से हड़कंप

    दुबई के रास्ते सोना तस्करी का नेटवर्क रान्या राव केस में नए खुलासे से हड़कंप

    नई दिल्ली:कन्नड़ एक्ट्रेस रान्या राव से जुड़े 102 करोड़ रुपये के हाई प्रोफाइल गोल्ड तस्करी मामले में अब एक नया और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है जांच एजेंसियों के अनुसार रान्या और उनके पार्टनर तरुण कोंडुरु राजू ने एक सुनियोजित प्लान के तहत भारत में बड़े पैमाने पर सोने की तस्करी का नेटवर्क तैयार किया था इस प्लान में अफ्रीकी देशों जैसे युगांडा केन्या और तंजानिया से सोना खरीदने और उसे दुबई के जरिए भारत लाने की योजना शामिल थी

    इस पूरी साजिश में एक और मोड़ तब आया जब उनके साथ जुड़े युगांडा के एक तस्कर ने उन्हें करीब 2 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया बताया जा रहा है कि इस तस्कर ने अफ्रीका से सीधे सोने की सप्लाई का वादा किया था लेकिन पैसे लेने के बाद उसने अपना वादा पूरा नहीं किया इस धोखाधड़ी के बाद रान्या और उनके पार्टनर ने केन्या के अधिकारियों से भी संपर्क किया लेकिन अंततः उन्होंने अफ्रीका से सीधे सोना मंगवाने की योजना को छोड़ दिया

    जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था राजस्व खुफिया निदेशालय ने मार्च 2025 में रान्या राव को उस समय पकड़ा जब वह दुबई से भारत लौट रही थीं उनके पास से लगभग 14.213 किलोग्राम सोना बरामद हुआ जिसकी कीमत करोड़ों में आंकी गई थी यह मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच में सामने आया कि रान्या के पास से मिले सोने की तस्करी कोई एक बार की घटना नहीं थी बल्कि यह एक लंबे समय से चल रहे नेटवर्क का हिस्सा था

    प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह भी सामने आया है कि मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच इस नेटवर्क ने करीब 127 किलोग्राम सोने की तस्करी की जिसकी कुल कीमत लगभग 102 करोड़ रुपये बताई जा रही है इस सोने को देश के विभिन्न हिस्सों में ज्वैलर्स और अन्य हैंडलर्स के नेटवर्क के जरिए बाजार में खपाया गया

    ईडी ने इस मामले में रान्या राव और उनके पार्टनर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत कार्रवाई करते हुए उनकी करीब 34 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त कर ली हैं इसके अलावा हवाला नेटवर्क से जुड़े एक अन्य व्यक्ति का नाम भी इस जांच में सामने आया है जिससे इस पूरे रैकेट की जटिलता का अंदाजा लगाया जा सकता है

    जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल तस्करी तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले हुए नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया है दुबई को एक ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल कर सोने को भारत में लाने की कोशिश की गई जिससे यह पूरा ऑपरेशन और भी जटिल और खतरनाक बन गया

    इस केस ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि कैसे संगठित गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर तस्करी जैसे अपराधों को अंजाम देते हैं और किस तरह जांच एजेंसियां लगातार इन नेटवर्क्स को तोड़ने के लिए काम कर रही हैं आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है

  • आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति की ओर भारत की तेज रफ्तार और पाकिस्तान के लिए नई चुनौती

    आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति की ओर भारत की तेज रफ्तार और पाकिस्तान के लिए नई चुनौती


    नई दिल्ली :
    भारत ने बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए अपनी रक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव किया है और अब देश नॉन कॉन्टैक्ट वॉरफेयर के युग के लिए खुद को तैयार कर रहा है इसका उद्देश्य सीधे टकराव के बजाय तकनीक और उन्नत सिस्टम के जरिए दुश्मन के हमलों को पहले ही निष्क्रिय करना है इसी रणनीति के तहत सरकार ने लगभग ₹2.19 लाख करोड़ की लागत वाली कई प्रमुख रक्षा परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है जो आने वाले समय में देश की सैन्य क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाएंगी

    इस पूरी रणनीति के केंद्र में ‘अनंत शस्त्र’ QRSAM सिस्टम है जो क्विक रिएक्शन के जरिए कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और मिसाइल जैसे खतरों को तेजी से नष्ट करने में सक्षम होगा आधुनिक युद्ध में जहां ड्रोन और सटीक हमले तेजी से बढ़ रहे हैं वहां यह सिस्टम भारतीय वायु रक्षा को बेहद मजबूत बनाएगा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक दुश्मन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी क्योंकि यह सिस्टम तेजी से प्रतिक्रिया देकर हमलों को शुरुआती चरण में ही खत्म करने की क्षमता रखता है

    इसके साथ ही भारत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली LRSAM प्रणाली पर भी काम कर रहा है जिसे रूस की S-400 प्रणाली के समकक्ष माना जा रहा है यह सिस्टम दुश्मन के विमानों और बैलिस्टिक मिसाइलों को लंबी दूरी से ही निष्क्रिय कर सकता है जिससे भारत की एयर डिफेंस क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी इस दिशा में हो रहे निवेश का उद्देश्य विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता को कम करना और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना है

    हवाई ताकत के क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट AMCA अब डिजाइन चरण से आगे बढ़कर विकास के चरण में पहुंच चुका है यह पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट होगा जिसमें दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता होगी साथ ही स्वदेशी इंजन पर भी काम चल रहा है जिससे भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल होगी आने वाले समय में छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर भी काम किया जाएगा जिन्हें भविष्य के युद्धों के लिए ‘फ्लाइंग कमांड सेंटर’ माना जा रहा है

    सिर्फ वायु शक्ति ही नहीं बल्कि समुद्री और साइबर सुरक्षा पर भी भारत का ध्यान केंद्रित है नौसेना के लिए एंटी ड्रोन और टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं वहीं इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम दुश्मन के संचार और रडार सिस्टम को जाम करने में सक्षम होंगे इससे भारतीय युद्धपोतों की सुरक्षा और मजबूत होगी

    इसके अलावा रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन DRDO आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा पर भी बड़ा निवेश कर रहा है ताकि साइबर हमलों को रोका जा सके और स्वायत्त हथियारों का बेहतर उपयोग हो सके मिसाइल सिस्टम में भी ‘अस्त्र’ ‘नाग’ और ‘ध्रुवास्त्र’ के नए संस्करणों पर काम चल रहा है जिससे उनकी मारक क्षमता और सटीकता और अधिक बढ़ेगी

    इस पूरी रणनीति के पीछे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और हाल के आतंकी हमलों जैसे घटनाक्रमों का भी बड़ा प्रभाव माना जा रहा है इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में तकनीकी श्रेष्ठता और त्वरित प्रतिक्रिया कितनी महत्वपूर्ण है इसी को ध्यान में रखते हुए भारत अपने रक्षा बजट में लगातार वृद्धि कर रहा है और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है

    आने वाले समय में यह स्पष्ट होता जा रहा है कि भारत न केवल अपनी सुरक्षा को और मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर एक शक्तिशाली सैन्य ताकत के रूप में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ करेगा