Author: bharati

  • चंबल में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, बोले उदाहरण पेश करें, खनन माफिया पर करें कड़ी कार्रवाई

    चंबल में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, बोले उदाहरण पेश करें, खनन माफिया पर करें कड़ी कार्रवाई


    मध्यप्रदेश । राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध खनन को बढ़ावा देने वाले लोगों के खिलाफ केवल सामान्य कार्रवाई पर्याप्त नहीं है बल्कि ऐसे मामलों में एहतियाती हिरासत जैसे कड़े कदम उठाकर प्रभावी संदेश दिया जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लग सके।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन तथा उससे संकटग्रस्त जलीय वन्यजीवों और पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभाव से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में अवैध रेत खनन में सहयोग करने वाले 551 लोगों की पहचान की जा चुकी है।

    इस जानकारी पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब संबंधित लोगों की पहचान हो चुकी है तो अब तक उन्हें हिरासत में क्यों नहीं लिया गया। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में एहतियाती हिरासत का उपयोग किया जाना चाहिए ताकि अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त संदेश जाए और अन्य लोग भी इस तरह के अपराध करने से बचें। अदालत ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में कड़ी कार्रवाई उदाहरण बन सकती है।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा कि चंबल नदी और उसकी सहायक नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि प्रकृति के साथ अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया जाए तो वह स्वयं अपना संतुलन बनाए रख सकती है। लेकिन जो लोग अवैध खनन के जरिए पर्यावरण और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचा रहे हैं उनके प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।

    कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य केवल एक संरक्षित क्षेत्र नहीं बल्कि कई दुर्लभ और संकटग्रस्त जलीय जीवों का महत्वपूर्ण आवास भी है। ऐसे में अवैध रेत खनन से नदी का स्वरूप बदलता है और जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्त और प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।

    सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों ने अदालत के समक्ष अवैध खनन रोकने के लिए दर्ज एफआईआर जब्ती की कार्रवाई और अन्य कदमों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। हालांकि अदालत इन प्रयासों से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आई और स्पष्ट किया कि केवल आंकड़े पेश करने से समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि जमीन पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों को अवैध रेत खनन रोकने के लिए और अधिक कठोर कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि चंबल क्षेत्र के पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा हो सके।

    मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। इस दौरान अदालत तीनों राज्य सरकारों से अब तक की गई कार्रवाई और आगे की रणनीति पर विस्तृत रिपोर्ट भी देखेगी।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का रौद्र रूप, भोपाल में जर्जर मकान गिरा, सिवनी में 4.9 इंच बारिश, इंदौर में अकेले निकला दूल्हा

    मध्य प्रदेश में बारिश का रौद्र रूप, भोपाल में जर्जर मकान गिरा, सिवनी में 4.9 इंच बारिश, इंदौर में अकेले निकला दूल्हा


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून का असर लगातार तीसरे दिन भी देखने को मिला। प्रदेश के ऊपर एक साथ सक्रिय तीन मौसम प्रणालियों ने बारिश की रफ्तार और तेज कर दी है। बीते 24 घंटों के दौरान 40 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे ज्यादा 4.9 इंच वर्षा सिवनी में रिकॉर्ड की गई, जबकि राजधानी भोपाल और राजगढ़ में 1.6 इंच बारिश हुई। लगातार हो रही बारिश के चलते कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। कहीं सड़कें जलमग्न हो गईं तो कहीं पुराने भवनों को नुकसान पहुंचा। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए इंदौर और उज्जैन संभाग सहित 17 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मानसून ट्रफ, ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण और पूर्व-पश्चिम शियर जोन एक साथ सक्रिय हैं। इन तीनों सिस्टम के कारण बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार नमी मिल रही है। यही वजह है कि प्रदेश के कई हिस्सों में कम समय में तेज बारिश हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक बारिश का यही सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

    सिवनी में सबसे अधिक 4.9 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा धार, पचमढ़ी, उमरिया, दमोह, सीधी और मंडला में एक इंच से ज्यादा वर्षा हुई। शाजापुर, आगर मालवा, सीहोर, विदिशा, देवास, बड़वानी, मंदसौर, श्योपुर, नर्मदापुरम, रायसेन, इंदौर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, जबलपुर, छतरपुर, बैतूल, रतलाम, गुना, नरसिंहपुर, खंडवा, रीवा, उज्जैन, सागर और सतना समेत कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई।

    लगातार हो रही बारिश का असर आम जनजीवन पर भी साफ दिखाई दिया। राजधानी भोपाल में करीब 90 वर्ष पुराने जर्जर मकान का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया। हादसे में एक युवक घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई इलाकों में सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं और कुछ मार्गों पर आवागमन भी प्रभावित हुआ है।

    रायसेन जिले के बेगमगंज क्षेत्र में बीना नदी का जलस्तर बढ़ने से एक दर्जन से अधिक गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट गया। कई सड़कें पानी में डूब गईं, जिससे ग्रामीणों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं।

    बारिश का असर सामाजिक आयोजनों पर भी देखने को मिला। इंदौर में गुरुवार सुबह गंगवाल से राजमोहल्ला जा रही एक बारात तेज बारिश की वजह से बिखर गई। अधिकांश बाराती बारिश से बचने के लिए रास्ते में रुक गए, जबकि दूल्हा डीजे के साथ अकेले ही आगे बढ़ता दिखाई दिया। यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया।

    मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। भारी बारिश की संभावना को देखते हुए नदियों और नालों के आसपास जाने से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने भी सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रखा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटा जा सके।

  • जंतर मंतर पुलिस कार्रवाई के विरोध में भोपाल में बड़ा आंदोलन, प्रदेशभर से नीलम पार्क पहुंचेंगे छात्र-युवा

    जंतर मंतर पुलिस कार्रवाई के विरोध में भोपाल में बड़ा आंदोलन, प्रदेशभर से नीलम पार्क पहुंचेंगे छात्र-युवा


    मध्यप्रदेश । राजधानी भोपाल गुरुवार को प्रदेशव्यापी छात्र आंदोलन का केंद्र बनने जा रही है। दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से छात्र और युवा भोपाल के नीलम पार्क में एकत्र होंगे। यह प्रदर्शन मूवमेंट अगेंस्ट अनएम्प्लॉयमेंट के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है, जिसमें नर्सिंग छात्र सहित विभिन्न छात्र संगठनों और युवाओं के शामिल होने का दावा किया गया है।

    आयोजकों के अनुसार आंदोलन का उद्देश्य केवल दिल्ली की घटना का विरोध करना नहीं बल्कि युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से उठाना भी है। प्रदर्शन के दौरान बढ़ती बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं, परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताएं, मध्यप्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े, सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने का विरोध तथा विभिन्न विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर भर्ती की मांग प्रमुख रूप से उठाई जाएगी। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी प्रदर्शन का प्रमुख हिस्सा रहेगी।

    आयोजकों का कहना है कि प्रदेश के कई जिलों से बड़ी संख्या में छात्र और युवा भोपाल पहुंच रहे हैं। उनका दावा है कि आंदोलन में हजारों प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। इसके लिए विभिन्न जिलों में पहले से तैयारियां की गई थीं और बड़ी संख्या में छात्र संगठनों ने समर्थन देने की घोषणा भी की है।

    दूसरी ओर संभावित भीड़ और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए भोपाल पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। नीलम पार्क और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रदर्शन स्थल के चारों ओर बैरिकेडिंग की गई है तथा यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त बल और आवश्यक संसाधन उपलब्ध रखे गए हैं।

    प्रशासन की ओर से प्रदर्शन पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कानून व्यवस्था प्रभावित न हो। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है। वहीं आयोजकों का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।

    हाल के दिनों में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और रोजगार के मुद्दों को लेकर युवाओं में असंतोष लगातार बढ़ा है। ऐसे में भोपाल में होने वाला यह राज्यव्यापी प्रदर्शन प्रदेश की राजनीति और छात्र आंदोलनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि आंदोलन के बाद सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

  • जेनजी प्रोटेस्ट पर रघुवीर यादव का भावुक संदेश, छात्रों के समर्थन में बोले मेरे जिस्म का कतरा कतरा उनके साथ है

    जेनजी प्रोटेस्ट पर रघुवीर यादव का भावुक संदेश, छात्रों के समर्थन में बोले मेरे जिस्म का कतरा कतरा उनके साथ है


    मध्यप्रदेश । CJP के जेनजी प्रोटेस्ट के दौरान छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर अब फिल्म और रंगमंच जगत की हस्तियां भी खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दे रही हैं। चर्चित अभिनेता रघुवीर यादव ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा करते हुए घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने छात्रों के साथ हुए कथित व्यवहार को मानवता के लिए पीड़ादायक बताया और कहा कि ऐसी घटनाओं को समाज कभी नहीं भूल सकता। वहीं अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए छात्रों के पक्ष में अपनी बात रखी।

    इन दिनों लोकप्रिय वेब सीरीज पंचायत में प्रधान के किरदार से चर्चा में रहे रघुवीर यादव ने वीडियो संदेश में कहा कि जो दृश्य उन्होंने देखे उन पर उन्हें विश्वास नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि मासूम बच्चों के साथ जिस तरह का कथित व्यवहार हुआ उसने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया है। अभिनेता ने कहा कि यह केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि संवेदनशीलता और मानवता से जुड़ा विषय है।

    रघुवीर यादव ने अपने संदेश में सवाल उठाया कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों का आखिर दोष क्या था। उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे के साथ इस तरह की घटना होती है तो उसका दर्द केवल उसी परिवार तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं पर हर संवेदनशील व्यक्ति को आत्ममंथन करने की जरूरत है।

    वीडियो के दौरान अभिनेता भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल छात्रों के साहस को वह सलाम करते हैं और उनका समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं ने जिस हिम्मत के साथ अपनी बात रखने का प्रयास किया है उससे उन्हें उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी। साथ ही उन्होंने जिम्मेदार पक्षों से भी संवेदनशीलता के साथ स्थिति को देखने की अपील की।

    रघुवीर यादव ने अपने संबोधन में पुलिसकर्मियों का जिक्र करते हुए भी भावनात्मक टिप्पणी की और कहा कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों और युवाओं के साथ मानवीय व्यवहार होना चाहिए। उनका कहना था कि ऐसी घटनाएं समाज पर गहरा असर छोड़ती हैं और भविष्य में भी लंबे समय तक याद रखी जाती हैं।

    इस बीच वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक वीडियो संदेश में शिक्षा और छात्रों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में युवाओं की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के साथ काम करते हुए उन्होंने उनसे बहुत कुछ सीखा है और समाज के भविष्य के लिए उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

    हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग अलग पक्षों के अपने अपने दावे हैं। प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जांच तथा प्रशासनिक पक्ष भी सामने आ चुके हैं। ऐसे में मामले से जुड़े सभी तथ्यों और जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जा रहा है।

    फिलहाल रघुवीर यादव और नसीरुद्दीन शाह की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर व्यापक बहस जारी है।

  • भ्रष्टाचार जांच की सुस्त रफ्तार, 23 हजार से ज्यादा शिकायतों के बावजूद EOW ने सिर्फ 8 मामलों में पेश किया चालान

    भ्रष्टाचार जांच की सुस्त रफ्तार, 23 हजार से ज्यादा शिकायतों के बावजूद EOW ने सिर्फ 8 मामलों में पेश किया चालान


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार और आर्थिक अनियमितताओं की जांच के लिए जिम्मेदार आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। विधानसभा में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि पिछले साढ़े छह वर्षों में ईओडब्ल्यू को 23 हजार से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं, लेकिन इनमें से अदालत तक केवल आठ मामलों के चालान ही पहुंच सके। यह आंकड़ा जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली और मामलों के निपटारे की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    यह जानकारी विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में सामने आई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा प्रस्तुत जवाब के अनुसार वर्ष 2020 से जून 2026 के बीच ईओडब्ल्यू को कुल 23 हजार 261 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से प्रारंभिक जांच के बाद केवल 3 हजार 18 मामलों को शिकायत के रूप में दर्ज किया गया, जबकि 756 आवेदनों को जांच के बाद बंद कर दिया गया।

    सबसे अधिक चर्चा इस बात की हो रही है कि इतने बड़े पैमाने पर शिकायतें मिलने के बावजूद अदालत में चालान पेश किए गए मामलों की संख्या महज आठ रही। इससे यह सवाल उठ रहे हैं कि जांच प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है और भ्रष्टाचार के मामलों में न्यायिक कार्रवाई इतनी धीमी क्यों है।

    आंकड़ों के अनुसार जिन मामलों में चालान पेश किए गए उनमें इंदौर नगर निगम जल कार्य घोटाला, सतना में स्वास्थ्य एवं निर्माण कार्यों में अनियमितता, भोपाल में शासकीय भूमि से जुड़े फर्जी दस्तावेजों का मामला, जबलपुर विकास प्राधिकरण में वित्तीय गड़बड़ी, ग्वालियर की गृह निर्माण सहकारी समिति में कथित धोखाधड़ी, भोपाल की सहकारी संस्था में पद के दुरुपयोग और गबन का मामला, उज्जैन में निर्माण कार्यों से जुड़ी वित्तीय अनियमितताएं तथा रीवा नगर निगम में फर्जी माप पुस्तिका के आधार पर भुगतान का मामला शामिल हैं।

    इनमें से अधिकांश मामलों में शिकायत दर्ज होने और न्यायालय में चालान पेश होने के बीच कई वर्षों का अंतर दिखाई देता है। उदाहरण के तौर पर वर्ष 2020 में दर्ज कुछ शिकायतों में चालान वर्ष 2025 में पेश किए गए। इससे जांच पूरी होने और अभियोजन की प्रक्रिया में लगने वाले लंबे समय पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    वहीं व्यापम और भ्रष्टाचार से जुड़े एक अन्य चर्चित मामले में पूर्व विधायक पारस सकलेचा द्वारा स्वयं को फरियादी के रूप में शामिल करने का आवेदन भी ईओडब्ल्यू ने मूल शिकायत के साथ जोड़ लिया है। यह मामला फिलहाल सत्यापन और जांच की प्रक्रिया में है तथा आगे की कानूनी कार्रवाई जांच पूरी होने के बाद तय की जाएगी।

    विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों ने विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का अवसर भी दिया है। विपक्ष का कहना है कि यदि भ्रष्टाचार के मामलों में जांच और अभियोजन की गति इतनी धीमी रहेगी तो दोषियों तक समय पर कार्रवाई पहुंचाना मुश्किल होगा। वहीं सरकार का कहना है कि वित्तीय अपराधों की जांच जटिल होती है और साक्ष्य जुटाने तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में समय लगता है।

    हालांकि विधानसभा में पेश आंकड़े यह संकेत जरूर देते हैं कि बड़ी संख्या में शिकायतें मिलने के बावजूद मामलों को अंतिम मुकाम तक पहुंचाने की रफ्तार बेहद धीमी है। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार जांच प्रक्रिया को तेज और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।

  • कैंसर की समय रहते होगी पहचान, जीएमसी भोपाल ने बनाया AI आधारित स्क्रीनिंग सिस्टम, भारत सरकार ने दिया पेटेंट

    कैंसर की समय रहते होगी पहचान, जीएमसी भोपाल ने बनाया AI आधारित स्क्रीनिंग सिस्टम, भारत सरकार ने दिया पेटेंट


    मध्यप्रदेश । देश में तेजी से बढ़ रहे मुख कैंसर की चुनौती से निपटने के लिए मध्यप्रदेश से एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। गांधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऐसी अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है जो शुरुआती चरण में ही ओरल कैंसर की पहचान करने में सक्षम होगी। इस नवाचार के तहत तैयार किए गए ओरल कैंसर स्क्रीनिंग डिवाइस के डिजाइन को भारत सरकार ने पेटेंट प्रदान किया है। इसके साथ ही महाविद्यालय के डेंटल सर्जरी विभाग ने मुख आरोग्य नाम का एक स्मार्ट मोबाइल ऐप भी विकसित किया है जो मरीज के मुंह की तस्वीरों का एआई तकनीक से विश्लेषण कर कैंसर के संभावित लक्षणों की पहचान करेगा।

    यह तकनीक प्रदेश में अपनी तरह की पहली पहल मानी जा रही है और भविष्य में मुख कैंसर की स्क्रीनिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। खास बात यह है कि इस तकनीक का लाभ केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों तक भी पहुंचेगा।

    मुख आरोग्य ऐप को विशेष रूप से आशा कार्यकर्ताओं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों के उपयोग के लिए तैयार किया गया है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मुंह की शुरुआती जांच आसानी से की जा सकेगी। यदि किसी व्यक्ति में कैंसर के संभावित लक्षण दिखाई देते हैं तो ऐप तुरंत उसे विशेषज्ञ अस्पताल में रेफर करने की सुविधा भी देगा। इससे बीमारी की पहचान और इलाज के बीच होने वाली देरी काफी कम हो सकेगी।

    भारत में हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख नए ओरल कैंसर के मामले सामने आते हैं। मध्यप्रदेश में भी यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है और पुरुषों में इसकी घटना दर करीब 25 प्रति लाख आबादी दर्ज की गई है। भोपाल उन शहरों में शामिल है जहां मुख कैंसर का बोझ अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब कैंसर काफी बढ़ चुका होता है जिससे इलाज जटिल और महंगा हो जाता है। ऐसे में शुरुआती पहचान मरीज की जान बचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    डेंटल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनुज भार्गव ने बताया कि मोबाइल ऐप मरीज के मुंह के भीतर मौजूद घावों और संदिग्ध लक्षणों की तस्वीरों का विश्लेषण करता है। इसके बाद एआई आधारित प्रणाली यह आकलन करती है कि कैंसर की आशंका है या नहीं। यदि रिपोर्ट संदिग्ध आती है तो मरीज को तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास भेजने की व्यवस्था भी ऐप के माध्यम से की गई है। उनका कहना है कि शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान होने पर इलाज अधिक प्रभावी कम जटिल और कम खर्चीला होता है जबकि मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना भी कई गुना बढ़ जाती है।

    डॉ. अनुज भार्गव ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल नई तकनीक विकसित करना नहीं बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को स्वास्थ्य सेवाओं की अंतिम पंक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह ऐप प्रदेश के सभी जिलों में उपयोग होगा। इससे बड़ी संख्या में स्क्रीनिंग डेटा एकत्र होगा जिससे एआई मॉडल और अधिक सटीक बनेगा तथा भविष्य में आम लोगों को इसका व्यापक लाभ मिलेगा।

    यह अनुसंधान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. कविता ऐन सिंह के मार्गदर्शन में पूरा हुआ। परियोजना के विकास में डॉ. ऋचा शर्मा और डॉ. अनिमेष बड़ोदिया की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश में ओरल कैंसर की शुरुआती पहचान और समय पर उपचार की दिशा में एक नई क्रांति साबित हो सकती है।

  • पीएम मोदी के बयान के बाद खरगे का हमला, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर उठाए गंभीर सवाल

    पीएम मोदी के बयान के बाद खरगे का हमला, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा के बाद देश की राजनीति में इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केवल घोषणाओं से युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। उनका कहना है कि छात्रों और युवाओं को भरोसा दिलाने के लिए सरकार को ठोस और प्रभावी फैसले लेने होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है और युवाओं के सामने रोजगार तथा भविष्य को लेकर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

    खरगे ने कहा कि देश के छात्र और युवा लंबे समय से बेहतर शिक्षा व्यवस्था, निष्पक्ष परीक्षाओं और रोजगार की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल नई घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि दोषियों के खिलाफ समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है ताकि युवाओं का भरोसा फिर से कायम हो सके।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के कार्यकाल में छात्रों के आंदोलनों के दौरान कई स्थानों पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले युवाओं के साथ कठोर व्यवहार किया गया, जबकि लोकतंत्र में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि छात्रों की समस्याओं को कानून-व्यवस्था का विषय बनाने के बजाय संवाद और संवेदनशीलता के साथ समाधान तलाशा जाए।

    खरगे ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी दोहराईं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए, छात्रों पर हुई कार्रवाई के लिए सरकार सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और जिन विद्यार्थियों को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है, उन्हें न्याय सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना था कि युवाओं का भविष्य किसी भी राजनीतिक मतभेद से ऊपर होना चाहिए और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

    उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। खरगे का आरोप है कि देश में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्थायी नौकरियों की संख्या सीमित होती जा रही है, जबकि संविदा आधारित नियुक्तियों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिससे भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को शीघ्र एवं कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री के इसी बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिससे शिक्षा, परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

  • एमपी के लाल विवेक सागर पर फिर देश को भरोसा, हॉकी विश्व कप 2026 के लिए भारतीय टीम में मिली जगह

    एमपी के लाल विवेक सागर पर फिर देश को भरोसा, हॉकी विश्व कप 2026 के लिए भारतीय टीम में मिली जगह


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के लिए एक बार फिर गर्व का अवसर आया है। प्रदेश हॉकी अकादमी के एसोसिएट खिलाड़ी और भारतीय टीम के स्टार मिडफील्डर विवेक सागर प्रसाद का चयन एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 के लिए भारतीय पुरुष टीम में किया गया है। बेल्जियम और नीदरलैंड की संयुक्त मेजबानी में 15 से 30 अगस्त तक आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में विवेक एक बार फिर मिडफील्ड की जिम्मेदारी संभालते हुए टीम इंडिया की जीत की उम्मीदों को मजबूती देंगे।

    भारतीय हॉकी टीम इस बार अनुभवी और युवा खिलाड़ियों के संतुलित मिश्रण के साथ विश्व कप में उतर रही है। टीम की कप्तानी अनुभवी डिफेंडर हरमनप्रीत सिंह के हाथों में होगी जबकि वरिष्ठ खिलाड़ी मनप्रीत सिंह भी टीम का अहम हिस्सा हैं। मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने विश्व कप के लिए ऐसी टीम चुनी है जिसमें अनुभव और युवा जोश का बेहतरीन तालमेल देखने को मिलेगा।

    विश्व कप में भारत को पूल डी में रखा गया है जहां उसका मुकाबला इंग्लैंड पाकिस्तान और वेल्स जैसी मजबूत टीमों से होगा। भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ करेगी। इसके बाद 17 अगस्त को इंग्लैंड से भिड़ेगी जबकि 19 अगस्त को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ बहुप्रतीक्षित मुकाबला खेला जाएगा। इन मुकाबलों पर देशभर के हॉकी प्रेमियों की खास नजर रहेगी।

    विवेक सागर प्रसाद पिछले कई वर्षों से भारतीय हॉकी टीम के भरोसेमंद मिडफील्डर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। अपनी तेज रफ्तार शानदार बॉल कंट्रोल और सटीक पासिंग के दम पर उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बड़े मुकाबलों में दबाव के बीच संयम बनाए रखने की उनकी क्षमता उन्हें टीम का अहम खिलाड़ी बनाती है।

    मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी के लिए भी विवेक का चयन बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। खेल विभाग का कहना है कि प्रदेश की खेल अकादमियां लगातार ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तैयार कर रही हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इससे प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिल रही है और हॉकी के प्रति उनका रुझान लगातार बढ़ रहा है।

    प्रदेश के खेल प्रेमियों और हॉकी प्रशंसकों ने विवेक सागर प्रसाद के चयन पर खुशी जताई है और उम्मीद जताई है कि वह विश्व कप में शानदार प्रदर्शन कर भारत को खिताब की दौड़ में मजबूत दावेदार बनाएंगे। स्वतंत्रता दिवस के दिन विश्व कप अभियान की शुरुआत करने वाली भारतीय टीम से पूरे देश को बेहतर प्रदर्शन और ऐतिहासिक सफलता की उम्मीद रहेगी।

  • NEET पेपर लीक पर पीएम मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट ऐलान का JDU ने किया समर्थन, विपक्ष को दी सदन में चर्चा की नसीहत

    NEET पेपर लीक पर पीएम मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट ऐलान का JDU ने किया समर्थन, विपक्ष को दी सदन में चर्चा की नसीहत

    नई दिल्ली । नीट पेपर लीक मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा के बाद जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी ने प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इस कदम से दोषियों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का रास्ता मजबूत होगा। साथ ही यह भी उम्मीद जताई गई कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें कठोर सजा मिलेगी।

    जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने कहा कि नीट पेपर लीक केवल परीक्षा में शामिल छात्रों का मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे लाखों अभिभावकों की भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश में इस घटना को लेकर चिंता और नाराजगी का माहौल है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा यह संदेश देती है कि सरकार मामले को गंभीरता से लेकर त्वरित न्याय सुनिश्चित करना चाहती है।

    उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोषियों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द कानून के दायरे में लाया जाए। यदि न्यायिक प्रक्रिया तेज होगी तो इससे छात्रों और अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे संयम बनाए रखें और न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखें, क्योंकि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की पूरी संभावना है।

    जेडीयू ने इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। नीरज कुमार ने कहा कि यदि इस विषय पर संसद के भीतर विस्तार से चर्चा होती तो पूरे मामले के अलग-अलग पहलुओं पर गंभीर विचार-विमर्श संभव होता। उनके अनुसार, केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि सभी दलों को मिलकर परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न राज्यों में अतीत में भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों से सबक लेते हुए राजनीतिक दलों को अपनी-अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उनका मानना है कि परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाले संगठित नेटवर्क और आधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर साझा रणनीति तैयार की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    नीट पेपर लीक को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। विभिन्न शहरों में छात्र निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा को सरकार की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है तथा इससे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा किस हद तक बहाल हो पाता है। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाली कानूनी कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक विमर्श को भी नई दिशा दे सकती हैं।

  • बाइक पर बैठकर ऑफिस का काम करता दिखा युवक, वायरल वीडियो ने वर्क-लाइफ बैलेंस पर उठाए गंभीर सवाल

    बाइक पर बैठकर ऑफिस का काम करता दिखा युवक, वायरल वीडियो ने वर्क-लाइफ बैलेंस पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । शहरों में बढ़ती ट्रैफिक समस्या अब केवल लोगों की आवाजाही तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर उनकी पेशेवर और निजी जिंदगी पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने कामकाजी जीवन की बदलती तस्वीर को सामने ला दिया है। वीडियो में एक युवक ट्रैफिक जाम के बीच बाइक पर बैठे-बैठे अपना लैपटॉप खोलकर ऑफिस का काम करता नजर आता है। इस दृश्य ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आधुनिक जीवन में काम का दबाव किस स्तर तक पहुंच चुका है।

    वीडियो में देखा जा सकता है कि सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लगी हुई है और ट्रैफिक बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। बाइक के पीछे बैठा युवक इंतजार करने के बजाय अपने बैग से लैपटॉप निकालता है और उसी दौरान काम शुरू कर देता है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि वह किस प्रकार का कार्य कर रहा था, लेकिन उसके लैपटॉप पर लगातार काम करने का तरीका लोगों का ध्यान खींचने के लिए काफी था। कुछ लोगों ने अनुमान लगाया कि वह ईमेल का जवाब दे रहा होगा या किसी जरूरी प्रोजेक्ट से जुड़ा काम पूरा कर रहा होगा।

    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे मौजूदा कॉर्पोरेट संस्कृति और कर्मचारियों पर बढ़ते कार्यभार का उदाहरण बताया। उनका कहना है कि डिजिटल उपकरणों और इंटरनेट की सुविधा ने काम को हर समय उपलब्ध बना दिया है, जिससे ऑफिस और निजी जीवन के बीच की सीमाएं लगातार धुंधली होती जा रही हैं। कई लोगों का मानना है कि नौकरी का दबाव अब केवल कार्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सफर, घर और छुट्टियों तक भी पहुंच गया है।

    कुछ लोगों ने युवक के प्रति सहानुभूति भी जताई। उनका कहना था कि संभव है वह रास्ते में ही जरूरी काम पूरा कर लेना चाहता हो ताकि घर पहुंचने के बाद परिवार के साथ समय बिता सके। कई लोगों ने यह भी कहा कि लंबे सफर और ट्रैफिक में रोजाना घंटों फंसने वाले कर्मचारियों के सामने समय प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में कुछ लोग यात्रा के दौरान भी काम करने को मजबूर हो जाते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार काम में व्यस्त रहने की आदत मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। पर्याप्त आराम, परिवार के साथ समय और व्यक्तिगत जीवन के लिए अवसर न मिलने से तनाव, थकान और उत्पादकता में कमी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। यही कारण है कि वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर दुनियाभर में लगातार चर्चा हो रही है और कई संस्थान कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य संस्कृति विकसित करने पर जोर दे रहे हैं।

    यह वीडियो केवल एक व्यक्ति की दिनचर्या नहीं दिखाता, बल्कि तेजी से बदलते शहरी जीवन और आधुनिक कार्य संस्कृति की वास्तविक तस्वीर भी सामने लाता है। बढ़ती ट्रैफिक समस्या, लंबी दूरी की यात्रा और हर समय उपलब्ध रहने की अपेक्षा ने कामकाजी लोगों की दिनचर्या को पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। यही वजह है कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया और लोगों को काम तथा निजी जीवन के बीच संतुलन की आवश्यकता पर फिर से सोचने के लिए प्रेरित कर रहा है।