Author: bharati

  • रिंकू सिंह की वापसी तय, वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी निगाहें, जिम्बाब्वे दौरे पर बदली नजर आएगी टीम इंडिया

    रिंकू सिंह की वापसी तय, वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी निगाहें, जिम्बाब्वे दौरे पर बदली नजर आएगी टीम इंडिया

    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का आगाज गुरुवार (23 जुलाई) से हरारे स्पोर्ट्स क्लब में हो रहा है। इंग्लैंड दौरा खत्म होने के सिर्फ तीन दिन बाद भारतीय टीम एक बार फिर मैदान पर उतरने जा रही है। वहीं जिम्बाब्वे ने भी हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ अपनी घरेलू सीरीज समाप्त की है।

    करीब दो साल पहले भारत ने जिम्बाब्वे का दौरा किया था। तब टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद युवा टीम को पहले मुकाबले में हार मिली थी, लेकिन इसके बाद लगातार चार मैच जीतकर भारत ने सीरीज अपने नाम कर ली थी। इस बार भी टीम इंडिया युवा खिलाड़ियों के साथ नए प्रयोग करने उतरेगी।

    कप्तानी और टीम पर दबाव
    श्रेयस अय्यर की परीक्षा: इस सीरीज का सबसे बड़ा दबाव कप्तान श्रेयस अय्यर पर रहेगा। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे को मिलाकर उनकी कप्तानी में भारत लगातार सात टी20 मुकाबले नहीं जीत पाया है। श्रेयस अय्यर पहले सात टी20 मैचों में जीत हासिल न करने वाले दुनिया के सिर्फ चौथे फुल मेंबर कप्तान बने हैं।

    जिम्बाब्वे का प्रदर्शन: सिकंदर रजा की कप्तानी वाली टीम इसी साल टी20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका जैसी टीमों को हरा चुकी है। हालांकि हालिया फॉर्म उनकी चिंता बढ़ाती है, क्योंकि टीम अपने पिछले छह टी20 मुकाबलों में से पांच हार चुकी है।

    हेड-टू-हेड आंकड़े
    दोनों टीमों के बीच अब तक 14 टी20 मुकाबले हुए हैं, जिनमें:

    भारत की जीत: 11 मैच

    जिम्बाब्वे की जीत: 03 मैच

    हरारे की पिच और मौसम
    पिच का हाल: हरारे स्पोर्ट्स क्लब की पिच पर हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए वनडे मुकाबलों में कोई भी टीम 250 रन नहीं बना सकी थी। जिम्बाब्वे की सर्दियों में नई गेंद से तेज गेंदबाजों को नमी का फायदा मिलने की उम्मीद है।

    मौसम: मौसम साफ रहने का अनुमान है। तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा और बारिश की कोई संभावना नहीं है।

    वैभव सूर्यवंशी पर फिर होंगी निगाहें
    15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर भारतीय टीम के सबसे चर्चित खिलाड़ी होंगे। इंग्लैंड दौरे पर उनका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा था, लेकिन हरारे उनके लिए खास मैदान है। इसी मैदान पर उन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में 80 गेंदों पर 175 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी।

    रिंकू की वापसी और 3 खिलाड़ियों का हो सकता है डेब्यू
    भारतीय बल्लेबाजी क्रम में रिंकू सिंह की वापसी लगभग तय मानी जा रही है। वहीं तेज गेंदबाज अशोक शर्मा, मयंक यादव, बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर हर्ष दुबे, विकेटकीपर प्रभसिमरन सिंह और तेज गेंदबाज यश ठाकुर पहली बार भारत के लिए टी20 खेलने की दौड़ में हैं।

    डेब्यू की संभावना: संभावना है कि अशोक शर्मा, हर्ष दुबे और यश ठाकुर को पहले मैच में डेब्यू का मौका मिले।

    विशेष आंकड़ा: भारत के लिए जिम्बाब्वे में अब तक 22 खिलाड़ियों ने टी20 इंटरनेशनल डेब्यू किया है। यह भारत के बाहर किसी एक देश में सबसे ज्यादा डेब्यू का दूसरा आंकड़ा है।

    अभिषेक शर्मा की चुनौती: अभिषेक शर्मा 2026 में टी20 क्रिकेट में 9 बार शून्य पर आउट हो चुके हैं, जो एक कैलेंडर वर्ष में संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा है।

    दोनों टीमों की संभावित प्लेइंग-11
    भारत की संभावित XI:

    अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, रिंकू सिंह, हर्ष दुबे/रवि बिश्नोई, अशोक शर्मा/मयंक यादव, यश ठाकुर, प्रिंस यादव।

    जिम्बाब्वे की संभावित XI:

    ब्रायन बेनेट, वेस्ली मधेवेरे, तदिवानाशे मारुमानी (विकेटकीपर)/तफादज़वा त्सिगा, डियोन मायर्स, सिकंदर रजा (कप्तान), रयान बर्ल, मिल्टन शुम्बा, ब्रैड इवांस, न्यूमैन न्यामहुरी, रिचर्ड नगारवा, ब्लेसिंग मुज़रबानी।

    दोनों टीमों का टी20 स्क्वाड
    भारतीय टीम का स्क्वाड:

    अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा, श्रेयस अय्यर (कप्तान), शिवम दुबे, रिंकू सिंह, सूर्यांश शेडगे, प्रिंस यादव, यश ठाकुर, अशोक शर्मा, मयंक यादव, वैभव सूर्यवंशी, प्रभसिमरन सिंह, हर्ष दुबे, रवि बिश्नोई।

    जिम्बाब्वे टीम का स्क्वाड:

    ब्रायन बेनेट, तदिवानाशे मारुमानी (विकेटकीपर), डियोन मायर्स, सिकंदर रजा (कप्तान), रयान बर्ल, ब्रैड इवांस, वेलिंगटन मसाकाद्जा, वेस्ली मधेवेरे, मिल्टन शुम्बा, रिचर्ड नगारवा, तनाका चिवांगा, ब्लेसिंग मुजरबानी, बेन करन, तफादजवा त्सिगा, न्यूमैन न्यामहुरी।

  • 'जन नायगन' से थलपति विजय की दमदार वापसी, बॉबी देओल संग टक्कर पर सिनेमाघरों में गूंजी सीटियां

    'जन नायगन' से थलपति विजय की दमदार वापसी, बॉबी देओल संग टक्कर पर सिनेमाघरों में गूंजी सीटियां

    नई दिल्ली । करीबन 6 महीने के लंबे स्ट्रगल और सेंसर सर्टिफिकेट के विवादों से गुजरने के बाद आखिरकार थलपति विजय की फिल्म ‘जन नायगन’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। यह विजय की बतौर अभिनेता आखिरी फिल्म मानी जा रही है, जिसे लेकर तमिलनाडु समेत पूरे साउथ में जश्न का माहौल है। फैंस में ‘फर्स्ट डे फर्स्ट शो’ (FDFS) देखने की होड़ मची हुई है।

    फैंस को पसंद आई ‘जन नायगन’

    फिल्म को पब्लिक की ओर से धमाकेदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। सोशल मीडिया पर फैंस इसे ‘ब्लॉकबस्टर’, ‘हिट’ और ‘एंटरटेनिंग’ बता रहे हैं। थियेटर्स के अंदर फैंस सीटियां बजा रहे हैं और नोट उड़ा रहे हैं।

    थलपति विजय की एंट्री और स्वैग
    एंट्री सीन: फिल्म में विजय का एंट्री सीन तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे गुंडों की धुलाई करते नजर आ रहे हैं।

    स्क्रीन पर टाइटल: मूवी शुरू होने पर विजय को ‘सीएम विजय’ का टाइटल दिया गया है, जिसे देखकर फैंस सिनेमाहॉल में जमकर नारेबाज़ी और हूटिंग कर रहे हैं।

    विजय और बॉबी देओल का आमना-सामना

    फिल्म में इंटरवल से पहले थलपति विजय और बॉबी देओल के बीच का क्लैश (सामना) दिखाया गया है। साउथ की फिल्म में बॉबी देओल की दमदार मौजूदगी देखकर फैंस काफी उत्साहित हैं और इस सीन की क्लिप्स सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

    सिनेमाघरों के बाहर और अंदर जश्न का माहौल
    थियेटर्स का नजारा: हॉल के अंदर लोग सीटों पर खड़े होकर डांस कर रहे हैं और तालियां बजा रहे हैं।

    कटआउट और आतिशबाजी: सिनेमाघरों के बाहर विजय के बड़े-बड़े पोस्टर्स और कटआउट्स लगाए गए हैं। मदुरई में फैंस पोस्टर्स पर दूध चढ़ाते दिखे, वहीं बेंगलुरु और अन्य शहरों में आतिशबाजी और ढोल-नगाड़ों के साथ डांस किया जा रहा है।

    फिल्म से जुड़ी मुख्य बातें
    रिलीज और स्क्रीन्स: भारत में यह फिल्म 2,500 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई है।

    शो टाइमिंग्स: आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में सुबह 6 बजे से शो शुरू हो गए, जबकि तमिलनाडु में सुबह 9 बजे से स्क्रीनिंग रखी गई।

    स्टार कास्ट: फिल्म का निर्देशन एच. विनोथ ने किया है। विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, ममिता बैजू, प्रकाश राज, गौतम वासुदेव मेनन और नारायण मुख्य भूमिकाओं में हैं।

    बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का अनुमान (रमेश बाला के अनुसार)
    पहला दिन (घरेलू कलेक्शन): ₹60 करोड़ (अनुमानित)

    पहला दिन (वर्ल्डवाइड कलेक्शन): ₹90 – ₹100 करोड़ (अनुमानित)

    ओपनिंग वीकेंड (भारत): ₹150 – ₹180 करोड़ (अनुमानित)

  • 'माई के हार' से बना मैहर, जानिए मां शारदा धाम का रहस्य, आल्हा की भक्ति और संगीत घराने का इतिहास

    'माई के हार' से बना मैहर, जानिए मां शारदा धाम का रहस्य, आल्हा की भक्ति और संगीत घराने का इतिहास


    मध्य प्रदेश का मैहर शहर सिर्फ एक आम धार्मिक जगह नहीं है, यह भक्ति, रहस्य और संगीत का एक अनोखा संगम है। त्रिकूट पर्वत पर बसा मां शारदा का यह धाम पूरी दुनिया में जाना जाता है। हर साल लाखों भक्त यहां अपनी मुराद लेकर आते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि इस पवित्र शहर के नाम और इतिहास के पीछे कितनी दिलचस्प कहानियां छिपी हैं।

    शक्तिपीठ की महिमा हो, अमर योद्धा आल्हा की भक्ति हो या फिर संगीत की दुनिया का मैहर घरानायह जगह हर किसी को अपनी ओर खींचती है।

    माई का हार से कैसे बना मैहर?
    मैहर नाम के पीछे भगवान शिव और माता सती से जुड़ी एक पौराणिक कथा है। माना जाता है कि जब सती के वियोग में शिवजी तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने अपने चक्र से सती के शरीर के टुकड़े किए थे।

    उसी समय माता सती का हार यहां त्रिकूट पर्वत पर गिरा था। हार गिरने की वजह से इस जगह को पहले ‘माई का हार’ कहा गया। धीरे-धीरे समय बीतने के साथ यही नाम बदलकर ‘मैहर’ हो गया। आज यह धाम देश के 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

    1063 सीढ़ियों पर बसा 1500 साल पुराना मंदिर

    पर्वत की चोटी पर स्थित यह मंदिर करीब 1500 साल पुराना बताया जाता है। इतिहासकार भी प्राचीन शिलालेखों के आधार पर इसकी प्राचीनता को मानते हैं।

    मंदिर तक जाने के लिए श्रद्धालुओं को 1063 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

    हालांकि अब यहां रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे बुजुर्ग और बीमार लोग आसानी से ऊपर पहुंच सकते हैं।

    9वीं शताब्दी में आदिगुरु शंकराचार्य ने यहां पहली बार विधिवत पूजा की थी। तांत्रिक साधना करने वालों के लिए भी यह जगह बेहद खास है।

    आज भी आल्हा करते हैं पहली पूजा
    मैहर की सबसे हैरान करने वाली बात अमर योद्धा आल्हा से जुड़ी है। स्थानीय लोगों और पुजारियों का कहना है कि आज भी आल्हा सबसे पहले मां शारदा की पूजा करते हैं।

    रोज सुबह जब मंदिर के दरवाजे खुलते हैं, तो माता के चरणों में ताजे फूल और चंदन चढ़ा हुआ मिलता है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक या लिखित सबूत नहीं है, लेकिन यहां आने वाले भक्तों की इस चमत्कार में अटूट श्रद्धा है। उनका मानना है कि आल्हा आज भी अदृश्य रूप में यहां आते हैं।

    संगीत की दुनिया में मैहर का नाम
    धार्मिक पहचान के अलावा मैहर को संगीत की नगरी भी कहा जाता है। मशहूर सरोद वादक उस्ताद अलाउद्दीन खां ने इसी शहर में ‘मैहर संगीत घराने’ की नींव रखी थी। उन्होंने और उनके शिष्यों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को दुनिया भर में फैलाया। इसलिए संगीत प्रेमियों के लिए मैहर किसी तीर्थ से कम नहीं है।

  • Bihar: मुजफ्फरपुर में गोल्ड फ्लैक के नाम से नकली सिगरेट बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़… 5 करोड़ की मशीनें जब्त

    Bihar: मुजफ्फरपुर में गोल्ड फ्लैक के नाम से नकली सिगरेट बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़… 5 करोड़ की मशीनें जब्त


    मुजफ्फरपुर।
    बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर जिले (Muzaffarpur district) में पुलिस ने ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली सिगरेट (Fake cigarettes) बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री (Illegal Factory) का भंडाफोड़ किया है. तुर्की थाना क्षेत्र के लक्की नंदलालपुर गांव में की गई इस कार्रवाई में लाखों रुपये की तैयार नकली सिगरेट, भारी मात्रा में कच्चा माल और करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक मशीनें जब्त की गई हैं।

    यह कार्रवाई पश्चिम-2 के एसडीपीओ अनिमेष चंद्र ज्ञानी और तुर्की थाना प्रभारी पंकज कुमार के नेतृत्व में की गई. पुलिस के अनुसार, आईटीसी की इंटेलिजेंस टीम पिछले एक महीने से इस फैक्ट्री की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी. पुख्ता जानकारी मिलने के बाद कंपनी के अधिकारियों ने तुर्की थाना पुलिस को सूचना दी. इसके बाद पुलिस और कंपनी की टीम ने संयुक्त रूप से छापेमारी की।

    छापेमारी के दौरान फैक्ट्री और उससे जुड़े दो गोदामों से करीब 25 लाख रुपये मूल्य की गोल्ड फ्लैक ब्रांड के नाम पर तैयार की गई नकली सिगरेट बरामद हुई. इसके अलावा अन्य कंपनियों के नाम पर बनाई गई 10 से 12 लाख रुपये मूल्य की नकली सिगरेट भी जब्त की गई।

    पुलिस ने फैक्ट्री में लगी करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य की मेड इन वियतनाम सिगरेट निर्माण मशीनें भी जब्त की हैं. इसके अलावा एक टाटा मैजिक, एक मालवाहक ऑटो, करीब सात मोटरसाइकिल और सिगरेट बनाने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण भी बरामद किए गए. पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूर मौके से फरार हो गए. पुलिस ने पूरे परिसर को अपने कब्जे में लेकर जब्त सामान की सूची तैयार की और आगे की जांच शुरू कर दी है।

    पश्चिम-2 के एसडीपीओ अनिमेष चंद्र ज्ञानी ने बताया कि फैक्ट्री में एक नामी ब्रांड के नाम और उसके कॉपीराइट का अवैध इस्तेमाल कर नकली सिगरेट तैयार की जा रही थी. इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।


    पुलिस की भनक लगते ही फैक्ट्री से फरार हुए मजदूर

    छापेमारी के बाद संबंधित कंपनी की लीगल ऑथराइज्ड टीम ने भी मौके का निरीक्षण किया. प्रारंभिक जांच के बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट कंपनी मुख्यालय को भेज दी है. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि कॉपीराइट का उल्लंघन कर नकली उत्पाद बनाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • अफ्रीकी देश कांगो में इबोला का कहर…. अब तक 1,031 लोगों की हो चुकी है मौत

    अफ्रीकी देश कांगो में इबोला का कहर…. अब तक 1,031 लोगों की हो चुकी है मौत


    घाना।
    अफ्रीकी देश कांगो (Congo) में इबोला (Ebola) के प्रकोप से 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. यह इतिहास का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप माना जा रहा है।

    बुधवार को घाना में एक स्वास्थ्य सम्मेलन में बोलते हुए, ‘अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ के महानिदेशक डॉ. जीन कासेया (Dr. Jean Casey) ने बताया कि अब तक 1,031 मौतों की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा, ‘ये लोग मर रहे हैं. वे इसलिए मर रहे हैं क्योंकि हमारे पास वैक्सीन नहीं हैं, दवाएं नहीं हैं और फंड नहीं है।

    कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय की ताजा जानकारी के अनुसार, सोमवार तक इस प्रकोप में 2,473 मामले दर्ज किए गए थे. मंत्रालय ने बताया कि कम से कम 737 मरीज आइसोलेशन में थे या अस्पताल में भर्ती थे।

    इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि इबोला प्रकोप का वास्तविक दायरा आधिकारिक आंकड़ों की तुलना में दो से चार गुना बड़ा हो सकता है. WHO के मुताबिक, 15 मई से शुरू हुआ यह प्रकोप इतनी तेजी से फैल रहा है कि स्वास्थ्य अधिकारी इसकी रफ्तार को पकड़ने में सफल नहीं हो पा रहे हैं.

    अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि 80% नए मामले संक्रमण की ज्ञात चेन के बाहर सामने आए हैं. यह इस बात का संकेत है कि प्रकोप स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा ट्रैक किए जा सकने की गति से भी तेजी से फैल रहा है.

    बता दें, इबोला एक बहुत खतरनाक वायरस से होने वाली बीमारी है. यह संक्रमण दुर्लभ जरूर है, लेकिन काफी गंभीर और कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकता है.

    यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे खून, उल्टी, पसीना या वीर्य के संपर्क में आने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है. इसका कोई पक्का इलाज अभी तक नहीं है।

  • नई दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में आज बंद रहेगा महाराष्ट्र

    नई दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में आज बंद रहेगा महाराष्ट्र


    मुंबई।
    वंचित बहुजन आघाड़ी (Vanchit Bahujan Aghadi) ने नई दिल्ली (New Delhi) के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन (Student movement) के पक्ष में गुरुवार को ‘महाराष्ट्र बंद’ का आह्वान किया है। वीबीए अध्यक्ष और डॉ बाबासाहेब आंबेडकर (Dr. Babasaheb Ambedkar) के पोते प्रकाश आंबेडकर (Prakash Ambedkar) ने यहां प्रेस वार्ता में बताया कि वामपंथी राजनीतिक दलों, शैक्षणिक संस्थानों और कोचिंग सेंटरों ने बंद का समर्थन किया है।


    क्या खुला रहेगा, क्या बंद

    बंद के समर्थन में कुछ क्षेत्रों ऐच्छिक रूप से कुछ दुकानें और बाजार बंद रह सकते हैं। हालांकि, इस दौरान जरूरी सेवाएं जारी रहेंगी। खबर है कि इस दौरान पब्लिक ट्रांसपोर्ट सामान्य रूप से चल सकता है। हालांकि, अगर प्रदर्शन होता है तो यातायात व्यवस्था, रोड ब्लॉक जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


    क्यों बुलाया बंद

    उन्होंने कहा, ‘केंद्र सरकार छात्र आंदोलनों से इतनी डरी हुई है कि उसने प्रादेशिक सेना तक को तैनात कर दिया है। वामपंथी दलों और शैक्षणिक संस्थानों ने हमारे बंद का समर्थन किया है, वहीं राज्य के कोचिंग संस्थान भी हमारे संपर्क में हैं।’


    राहुल गांधी से कर दी डिमांड

    उन्होंने कहा, ‘हम नई पीढ़ी खड़ी करने का प्रयास कर रहे हैं। मेरा मानना है कि सरकार को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। छात्रों के आंदोलन पर सरकार ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है, इसलिए 23 जुलाई का महाराष्ट्र बंद होकर रहेगा। मेरी यह भी राय है कि राहुल गांधी को जंतर-मंतर जाकर विरोध प्रदर्शन करना चाहिए।’

    उन्होंने यह भी कहा कि यह छात्र आंदोलन हालांकि उनका नहीं है, फिर भी वह इसका पूरा समर्थन करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा के छात्र संगठन से भी इस इस बंद में हिस्सा लेने की अपील की।


    चर्चाएं जारी

    वीबीए प्रमुख ने कहा, ‘इस बंद को सफल बनाने के लिए हम मजदूर यूनियनों, बेस्ट यूनियनों, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की यूनियनों और अन्य श्रमिक संगठनों से चर्चा कर रहे हैं। दिल्ली में छात्रों पर अमानवीय अत्याचार हुए हैं, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है। कई संगठन इस बंद में शामिल होने को उत्सुक हैं।’


    रिजर्व पुलिस फोर्स बुलाने पर आपत्ति

    उन्होंने कहा ‘दिल्ली में छात्र आंदोलन को कुचलने के लिए कश्मीर से रिजर्व पुलिस बल बुलाये गए हैं, जिसका हम कड़ा विरोध करते हैं। हमारी कोशिश है कि सरकार छात्रों पर आंसू गैस या बल प्रयोग न करे। हमने भाजपा को छोड़कर सभी दलों से बंद में शामिल होने की अपील की है, ताकि आंदोलनकारी छात्रों के प्रति एकजुट होकर हम समर्थन दिखा सकें।’


    दादर में पुलिस कार्रवाई

    इससे पहले मुंबई पुलिस ने आज दादर वेस्ट में समुद्र तट पर स्थित ऐतिहासिक चैत्यभूमि पर वामपंथी दलों की ओर से आयोजित शांतिपूर्ण सभा को तितर-बितर कर दिया। यह स्थान डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का समाधि स्थल होने के साथ-साथ दलित समुदाय के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल भी है।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार एहतियाती तौर पर चैत्यभूमि से हिरासत में लिए गये भाकपा के कॉमरेड मिलिंद रानाडे और अन्य कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर दिया गया है। वहीं माकपा के कॉमरेड शैलेंद्र कांबले और शेतकारी कामगार पार्टी (पीडब्ल्यूपी) के राजू कोरडे के आवासों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।

    उन्होंने बताया कि एहतियाती कार्रवाई के तहत भाकपा से जुड़े अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसएफ) के युवा नेता कॉमरेड आमिर काजी और पीडब्ल्यूपी के साम्य कोरडे को चेतावनी दी गई है कि यदि वे अपने घरों से बाहर निकले तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जायेगा।

    इस बीच मुंबई पुलिस ने चैत्यभूमि को भारी बैरिकेड्स और नाकेबंदी लगाकर पूरी तरह से सील कर दिया है, जहां पहले से ही एक स्थायी पुलिस चौकी मौजूद है। प्रदर्शनकारी जहां तक संभव हो छोटे समूहों में जुटने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी तंग गलियों से होते हुए चैत्यभूमि पहुंचे, तो कुछ ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए।

    कांग्रेस भी साथ
    महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल कहा कि कांग्रेस ने गुरुवार को वीबीए के बुलाए गए महाराष्ट्र बंद का समर्थन किया, जो राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में है।

  • आज का मौसम अपडेट बारिश और बादलों का रहेगा असर जानिए किन इलाकों में भारी वर्षा की संभावना

    आज का मौसम अपडेट बारिश और बादलों का रहेगा असर जानिए किन इलाकों में भारी वर्षा की संभावना


    नई दिल्ली । आज देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने की संभावना है। मानसून की सक्रियता के कारण कई राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं जबकि कुछ स्थानों पर तेज वर्षा भी देखने को मिल सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बादलों की आवाजाही पूरे दिन बनी रह सकती है जिससे कई इलाकों में तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में बारिश के बाद उमस बढ़ सकती है जिससे लोगों को असहजता का सामना भी करना पड़ सकता है।

    उत्तर भारत के कई राज्यों में बादल छाए रहने और रुक रुककर बारिश होने की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर तेज हवाएं चल सकती हैं जिससे मौसम सुहावना बनेगा। वहीं निचले इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी बनी रह सकती है। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

    मध्य भारत के राज्यों में भी मानसून का असर जारी रहने के संकेत हैं। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। लगातार हो रही वर्षा के कारण नदी नाले और जलाशयों का जलस्तर बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से जारी दिशा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। किसानों के लिए यह बारिश खरीफ फसलों के लिहाज से लाभदायक मानी जा रही है हालांकि अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में फसलों को नुकसान की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

    पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। इन इलाकों में कई स्थानों पर गरज चमक के साथ वर्षा हो सकती है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कों पर फिसलन की स्थिति बनने की आशंका को देखते हुए यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। स्थानीय प्रशासन भी मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश के साथ बादल छाए रहने का अनुमान है जबकि तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएं चल सकती हैं। समुद्र के आसपास रहने वाले लोगों और मछुआरों को मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की जरूरत है। मौसम में लगातार बदलाव के कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी लोगों को पर्याप्त पानी पीने और बदलते मौसम के अनुसार खानपान का ध्यान रखने की सलाह दे रहे हैं।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के सक्रिय रहने से आने वाले दिनों में भी कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में लोगों को घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए। जिन क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना हो वहां अनावश्यक यात्रा से बचना और प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करना ही सुरक्षित रहेगा।

    कुल मिलाकर आज का दिन देश के कई हिस्सों में बारिश और बादलों के बीच बीतने की संभावना है। कहीं मौसम सुहावना रहेगा तो कहीं तेज बारिश और उमस लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सतर्कता और सावधानी के साथ मौसम का आनंद लेना ही सबसे बेहतर विकल्प होगा।

  • त्योहारी सीजन में महंगी हुई शक्कर…. एक माह में 15% बढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे दाम

    त्योहारी सीजन में महंगी हुई शक्कर…. एक माह में 15% बढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे दाम


    नई दिल्ली।
    त्योहारी सीजन (Festive Season) से ठीक पहले देश में चीनी की कीमतों (Sugar Prices) में आई तेज बढ़ोतरी ने केंद्र सरकार (Central government) के साथ-साथ आम लोगों की भी चिंता बढ़ा दी है। बीते एक महीने में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें 15 फीसदी से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड स्तर (Record level) पर पहुंच गई हैं।

    उत्तर प्रदेश में एक्स-मिल कीमतें 4,400 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुकी हैं, जबकि दिल्ली के थोक बाजार (Wholesale market) में चीनी 4,800 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है। कीमतों में इस अप्रत्याशित उछाल के बाद सरकार ने चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ आपात बैठक की है। सट्टेबाजी और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए कारोबारियों और चीनी मिलों पर स्टॉक सीमा लगाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल चीनी आयात करने की कोई योजना नहीं है।

    बढ़ती कीमतों को लेकर चीनी मिलें और व्यापारी आमने-सामने आ गए हैं। चीनी मिल मालिकों का कहना है कि वे किसी भी तरह की जमाखोरी नहीं कर रहे हैं। उनका दावा है कि कीमतों में तेजी आने से पहले ही मिलें जुलाई महीने का अपना 80 फीसदी से अधिक बिक्री कोटा बाजार में जारी कर चुकी थीं।

    मिलों का आरोप है कि जमाखोरी व्यापारियों के स्तर पर हो रही है। उनका कहना है कि इस पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सरकार को भौतिक सत्यापन के साथ सख्त स्टॉक सीमा लागू करनी चाहिए, ताकि कृत्रिम कमी पैदा करने वालों पर कार्रवाई हो सके।

    व्यापारियों का कहना है कि एक्स-फैक्ट्री कीमतें खुद चीनी मिलें बढ़ा रही हैं। उनका आरोप है कि मिलों ने शुरुआत में उत्पादन के गलत अनुमान पेश कर सरकार से अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी के निर्यात की मंजूरी हासिल कर ली, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति अचानक कम हो गई और कीमतों में तेज उछाल आ गया।

  • Ayodhya: चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद राम मंदिर की व्यवस्था में बदलाव… संत समाज को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

    Ayodhya: चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद राम मंदिर की व्यवस्था में बदलाव… संत समाज को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी


    अयोध्या।
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) ने राम मंदिर (Ram Temple) की धार्मिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों की पूरी निगरानी अब अयोध्या के संत समाज को सौंप दी है। ट्रस्ट ने धार्मिक समिति का पुनर्गठन करते हुए स्पष्ट किया है कि अब राम मंदिर (Ram Temple ) की सभी धार्मिक गतिविधियां वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुरूप संचालित होंगी और इस संबंध में समिति का निर्णय सर्वोपरि माना जाएगा।

    समिति के अध्यक्ष ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि (Swami Govind Dev Giri) होंगे, जबकि इसमें अयोध्या के पांच प्रमुख संत राम मंदिर के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास (निर्मोही अखाड़ा), महंत कमलनयन दास (मणिराम दास छावनी), महंत डॉक्टर रामानंद दास (रामकथा कुंज), अधिकारी राजकुमार दास (रामबल्लबा कुंज) और महंत मिथिलेशनंदिनी शरणको शामिल किया गया है। इनके अलावा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ और राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि समिति में रहेंगे। नौ सदस्यीय समिति में अयोध्या के संतों का बहुमत रहेगा।

    स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि यह भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है और यहां सेवा-पूजा रामानंदी वैदिक परंपरा के अनुसार ही होती रहे, यह सुनिश्चित करना समिति का सबसे बड़ा दायित्व होगा। अब मंदिर अयोध्या के संतों की निगरानी में चलेगा और वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुसार ही संचालित होगा। ट्रस्ट के इस फैसले को राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा संस्थागत बदलाव माना जा रहा है।


    समिति को मिले पांच बड़े अधिकार

    – मंदिर में नित्य पूजा और सभी धार्मिक अनुष्ठान वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुरूप हो रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी।
    -रामनवमी, विवाह पंचमी, सीता नवमी जैसे सभी वार्षिक पर्वों की तिथि का अंतिम निर्धारण और आयोजन।
    – विशेष वैदिक अनुष्ठानों, यज्ञ, रामार्चा और वेद पारायण जैसे धार्मिक आयोजनों की योजना और संचालन।
    – अर्चकों (पुजारियों) के प्रशिक्षण, नियुक्ति, आचरण, ड्रेस कोड और पूजा-पद्धति की निगरानी तथा स्थायी अर्चक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना।
    – अयोध्या के मठों, मंदिरों, संत समाज और गुरुकुलों के साथ नियमित संवाद और समन्वय स्थापित करना।


    दिनेंद्र दास की भूमिका हुई और मजबूत

    धार्मिक समिति में ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास को शामिल किया जाना भी अहम माना जा रहा है। पिछले कई महीनों से वह लगातार राम मंदिर की पूजा व्यवस्था को पूरी तरह शास्त्रोक्त और परंपरागत बनाए जाने की मांग उठा रहे थे। हाल के दिनों में वह लगभग प्रतिदिन मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की व्यवस्था का निरीक्षण भी कर रहे थे और धार्मिक परंपराओं के पालन पर जोर देते रहे। ऐसे में उन्हें समिति में प्रमुख भूमिका मिलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ट्रस्ट ने पूजा व्यवस्था से जुड़े मामलों में उनके सुझावों और संत समाज की भूमिका को औपचारिक मान्यता दे दी है।

    बनेगी अर्चकों की स्थायी पाठशाला, तैयार होंगे प्रशिक्षित पुजारी
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के लिए प्रशिक्षित अर्चकों (पुजारियों) की स्थायी व्यवस्था करने का फैसला किया है। धार्मिक समिति को अर्चकों के प्रशिक्षण, नियुक्ति और उनके आचरण की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि राम मंदिर परिसर में वर्तमान में 14 मंदिर हैं, जिनके लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित अर्चकों की आवश्यकता है। पहले ट्रस्ट ने एक वर्ष का अर्चक प्रशिक्षण केंद्र संचालित किया था, जिसमें करीब 30 प्रशिक्षित अर्चक तैयार किए गए थे। बाद में यह व्यवस्था बाधित हो गई। अब ट्रस्ट स्थायी अर्चक प्रशिक्षण पाठशाला स्थापित करेगा, जहां पूजा-पद्धति, वैदिक मंत्रों का शुद्ध उच्चारण, कर्मकांड, मंदिर प्रबंधन और रामानंदी परंपरा के अनुरूप सेवा-पूजा का प्रशिक्षण दिया जाएगा।


    राम मंदिर की पूजन व्यवस्था : पहले क्या था, अब क्या बदलेगा

    – पूजा व्यवस्था की निगरानी ट्रस्ट और प्रशासनिक स्तर पर होती थी। अब धार्मिक समिति सीधे पूजा-पद्धति और धार्मिक कार्यों की निगरानी करेगी।
    – पूजा शास्त्रोक्त परंपरा के अनुसार होती थी, लेकिन निगरानी के लिए अलग धार्मिक समिति सक्रिय नहीं थी। अब वैदिक रामानंदी परंपरा के पालन की जिम्मेदारी नौ सदस्यीय धार्मिक समिति को दी गई है।
    – पर्व-उत्सवों की तिथि और आयोजन ट्रस्ट तय करता था। अब रामनवमी, सीता नवमी, विवाह पंचमी जैसे सभी पर्वों की तिथि और आयोजन धार्मिक समिति तय करेगी।
    – विशेष धार्मिक अनुष्ठानों पर अलग-अलग निर्णय लिए जाते थे। अब वेद पारायण, रामार्चा, यज्ञ और अन्य नित्य-अनुष्ठानों की रूपरेखा समिति तय करेगी।
    – पुजारियों की कार्यप्रणाली पर सामान्य निगरानी थी। अब अर्चकों के ड्रेस कोड, पूजा-विधि, आचरण और शास्त्रीय नियमों के पालन की नियमित समीक्षा होगी।
    – अयोध्या के संतों की भूमिका परामर्श तक सीमित मानी जाती थी। अब अयोध्या के पांच संत समिति में बहुमत के साथ धर्म व्यवस्था का नेतृत्व करेंगे।
    – धार्मिक निर्णय ट्रस्ट स्तर पर लिए जाते थे। अब पूजा-पद्धति और धार्मिक विषयों पर समिति का निर्णय सर्वोपरि माना जाएगा।


    चोरी में किसी ट्रस्टी का हाथ नहीं, बैंक कर्मी थे जिम्मेदार : दिनेंद्र दास

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक के बाद निर्मोही अखाड़े के महंत एवं ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के मामले पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी ट्रस्टी की संलिप्तता नहीं थी, बल्कि बैंक कर्मियों की भूमिका सामने आई है।

    मणिराम दास छावनी में मंगलवार को ट्रस्ट की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि चोरी की घटना के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार कर दिए गए हैं। अब मंदिर में सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि चोरी की घटना का श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। रामलला के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु लगातार दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं।

  • ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का पलटवार, बोला- हमारा तेल रुका तो दुनिया की सप्लाई भी ठप होगी

    ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का पलटवार, बोला- हमारा तेल रुका तो दुनिया की सप्लाई भी ठप होगी


    नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के प्रमुख वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि यदि ईरान को अपना तेल निर्यात करने से रोका गया, तो क्षेत्र में कोई भी देश आसानी से तेल नहीं बेच पाएगा। साथ ही उन्होंने दोहराया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में हालात अब युद्ध से पहले जैसे नहीं होंगे।

    ‘या सब बेचेंगे, या कोई नहीं’
    मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मौजूदा हालात का संदेश बिल्कुल साफ है—”या तो सभी तेल बेचेंगे या फिर कोई नहीं।” उन्होंने कहा कि यदि ईरान की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो क्षेत्र के अन्य देशों की तेल आपूर्ति भी सुरक्षित नहीं रह पाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान की सुरक्षा खतरे में होगी तो किसी अन्य देश का महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा भी सुरक्षित नहीं रहेगा। गालिबाफ ने यह भी दोहराया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के बिना ही संभव है और यह समुद्री मार्ग अब पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा।

    ट्रंप ने दी थी सख्त चेतावनी
    इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर मिसाइल, ड्रोन, रॉकेट या अन्य हथियार से हमला किया गया, तो अमेरिका ईरान के अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा।

    ट्रंप ने लिखा कि यदि ईरान समुद्री मार्ग में जहाजों पर हमला करता है, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में पुलों, बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे हमलों के दायरे में तेहरान के आसपास स्थित महत्वपूर्ण ठिकाने भी आ सकते हैं।

    तनाव का सबसे बड़ा केंद्र बना हॉर्मुज स्ट्रेट
    अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया है। शुरुआती युद्धविराम समझौता टूटने के बाद दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों का दौर जारी है। अमेरिका कई बार ईरानी ठिकानों पर कार्रवाई कर चुका है, जबकि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाब दिया है।

    दुनिया की तेल सप्लाई पर पड़ सकता है असर
    हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के कुल तेल निर्यात का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान इस क्षेत्र को अपनी रणनीतिक सुरक्षा का हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग बताते हुए निर्बाध आवाजाही बनाए रखने की वकालत करता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर डाल सकता है।