Author: bharati

  • यश की Toxic में दिखा जबरदस्त स्वैग, लेकिन कहानी ने बिगाड़ा पूरा खेल; 3 घंटे 15 मिनट की फिल्म पर कैसी है राय?

    यश की Toxic में दिखा जबरदस्त स्वैग, लेकिन कहानी ने बिगाड़ा पूरा खेल; 3 घंटे 15 मिनट की फिल्म पर कैसी है राय?


    नई दिल्ली। कन्नड़ सिनेमा के सुपरस्टार यश की फिल्म Toxic को लेकर पिछले चार साल से दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई थी। KGF जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बाद यश की अगली फिल्म से उम्मीदें स्वाभाविक तौर पर बहुत ज्यादा थीं। लंबे इंतजार के बाद जब Toxic सिनेमाघरों में पहुंची तो दर्शक यश के नए अंदाज और एक बड़े सिनेमाई अनुभव की उम्मीद लेकर थिएटर पहुंचे। हालांकि फिल्म देखने के बाद सामने आई राय उम्मीदों से काफी अलग नजर आती है। फिल्म में यश की परफॉर्मेंस दमदार है और तकनीकी स्तर पर भी Toxic कई जगह प्रभावित करती है लेकिन कमजोर राइटिंग और धीमी कहानी फिल्म के सबसे बड़े कमजोर पक्ष बनकर सामने आते हैं।

    करीब 3 घंटे 15 मिनट लंबी Toxic से यह उम्मीद की जा सकती है कि कहानी को स्थापित करने में थोड़ा समय लगेगा। फिल्म की शुरुआत भी इसी अंदाज में होती है और दर्शक धैर्य के साथ कहानी के खुलने का इंतजार करता है। समस्या तब शुरू होती है जब आधी फिल्म गुजरने के बावजूद कहानी ऐसा मजबूत मोड़ नहीं ले पाती जो दर्शकों को पूरी तरह बांध सके। इंटरवल के आसपास एक बड़ा सीन जरूर आता है लेकिन वह भी वैसा असर नहीं छोड़ता जिसकी उम्मीद यश जैसे बड़े स्टार की फिल्म से की जाती है। पूरी फिल्म के दौरान यही उम्मीद बनी रहती है कि अब कहानी रफ्तार पकड़ेगी और कोई बड़ा सरप्राइज मिलेगा लेकिन कई मौकों पर यह इंतजार निराशा में बदल जाता है।

    Toxic की सबसे बड़ी समस्या इसकी राइटिंग बताई जा सकती है। यश को एक बेहद प्रभावशाली और खतरनाक किरदार में पेश करने की कोशिश की गई है लेकिन इस कोशिश में कहानी और स्क्रीनप्ले पीछे छूटते नजर आते हैं। कई डायलॉग जरूरत से ज्यादा नाटकीय महसूस होते हैं और किरदारों के बीच संवाद भी कई जगह स्वाभाविक नहीं लगते। यश को देखकर लगातार Rocky Bhai की याद आती है और फिल्म का नया किरदार अपनी अलग पहचान बनाने के बजाय उसी छवि के आसपास घूमता हुआ दिखाई देता है। यही वजह है कि दर्शक किरदार से भावनात्मक रूप से जुड़ने में परेशानी महसूस कर सकता है।

    हालांकि अभिनय के मोर्चे पर यश बिल्कुल निराश नहीं करते। फिल्म में उनका डबल रोल है और दोनों किरदारों को उन्होंने अलग अंदाज में निभाने की पूरी कोशिश की है। खास तौर पर Raya के किरदार में उनकी एक्टिंग रेंज दिखाई देती है। यश की स्क्रीन प्रेजेंस और स्टारडम अब भी जबरदस्त है लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले उनकी मेहनत पर भारी पड़ता है। नयनतारा भी फिल्म में यश की बहन के किरदार में प्रभावी नजर आती हैं और उन्होंने अपने हिस्से की भूमिका को मजबूती से निभाया है। दोनों के बीच के भावनात्मक दृश्यों में क्षमता नजर आती है लेकिन कहानी उन्हें उस स्तर तक विकसित नहीं कर पाती जहां दर्शक पूरी तरह जुड़ सके।

    तकनीकी और विजुअल स्तर पर Toxic बेहतर अनुभव देती है। बड़े पर्दे पर फिल्म के विजुअल्स और एक्शन सीक्वेंस आकर्षक लग सकते हैं और अच्छे थिएटर में इसका प्रभाव और बढ़ सकता है। लेकिन किसी भी फिल्म की असली ताकत उसकी कहानी होती है और यहीं Toxic कमजोर पड़ती दिखाई देती है। चार साल तक जिस फिल्म का इंतजार किया गया उससे दर्शकों को सिर्फ स्टारडम और शानदार विजुअल्स नहीं बल्कि एक मजबूत कहानी की भी उम्मीद थी।

    इसलिए Toxic को लेकर सबसे बड़ी शिकायत यश से नहीं बल्कि फिल्म की राइटिंग से है। यश ने अपनी तरफ से शानदार प्रदर्शन किया है लेकिन कहानी उनकी क्षमता के अनुरूप नहीं बन पाई। चार साल के इंतजार के बाद दर्शक जिस दमदार सिनेमाई अनुभव की उम्मीद लेकर थिएटर पहुंचे थे वह पूरी तरह हासिल होता नजर नहीं आता। अब यश की अगली बड़ी फिल्म Ramayana को लेकर उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं। सवाल यही है कि क्या वहां यश अपनी पिछली फिल्म से मिली निराशा को दूर कर पाएंगे या फिर दर्शकों को एक बार फिर उम्मीदों का इंतजार करना पड़ेगा।

  • विकेट लेने के बजाय बार-बार नो-बॉल! जडेजा ने बनाया ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई गेंदबाज नहीं चाहेगा

    विकेट लेने के बजाय बार-बार नो-बॉल! जडेजा ने बनाया ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई गेंदबाज नहीं चाहेगा


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे टेस्ट मुकाबले में टीम इंडिया ने पहली पारी के आधार पर बड़ी बढ़त हासिल की लेकिन इसी बीच भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा के नाम ऐसा अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज हो गया है जिसे शायद ही कोई गेंदबाज अपने नाम देखना चाहेगा। टेस्ट क्रिकेट में जडेजा की नो-बॉल फेंकने की समस्या एक बार फिर सामने आई और आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 से अब तक वह टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा नो-बॉल फेंकने वाले स्पिन गेंदबाज बन गए हैं। जडेजा के नाम इस अवधि में कुल 88 नो-बॉल दर्ज हो चुकी हैं और इस मामले में वह बाकी स्पिनर्स से काफी आगे हैं।

    कोलंबो टेस्ट में भी भारतीय स्पिन गेंदबाजों की ओर से नो-बॉल की समस्या देखने को मिली। मुकाबले में भारतीय स्पिनर्स अब तक कुल 10 नो-बॉल फेंक चुके थे। टेस्ट क्रिकेट में स्पिन गेंदबाजों द्वारा नो-बॉल करना वैसे भी टीम के लिए महंगा साबित हो सकता है क्योंकि इससे बल्लेबाज को अतिरिक्त मौका मिलने के साथ विपक्षी टीम को अतिरिक्त रन भी मिलते हैं। जडेजा जैसे अनुभवी गेंदबाज से ऐसी गलती बार-बार होना टीम के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

    साल 2021 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो रवींद्र जडेजा 88 नो-बॉल के साथ इस अनचाही सूची में सबसे ऊपर हैं। पाकिस्तान के स्पिनर नोमान अली 40 नो-बॉल के साथ दूसरे स्थान पर हैं। यानी जडेजा और दूसरे नंबर के गेंदबाज के बीच भी बड़ा अंतर है। श्रीलंका के लसिथ एम्बुलडेनिया 33 नो-बॉल के साथ तीसरे नंबर पर हैं। इंग्लैंड के जैक लीच ने इस दौरान 19 नो-बॉल फेंकी हैं। वहीं वेस्टइंडीज के जोमेल वारिकन और अफगानिस्तान के जहीर खान के नाम 17-17 नो-बॉल दर्ज हैं।

    जडेजा के लिए यह आंकड़ा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह भारतीय टेस्ट टीम के सबसे अनुभवी और भरोसेमंद ऑलराउंडर्स में शामिल हैं। गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी और फील्डिंग में भी उनकी भूमिका बेहद अहम रहती है। ऐसे में नो-बॉल की बार बार होने वाली गलती विपक्षी टीम के खिलाफ भारत की स्थिति को प्रभावित कर सकती है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में जब एक विकेट के लिए लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ती है तब नो-बॉल पर मिला अतिरिक्त मौका मैच का रुख बदल सकता है।

    अगर कोलंबो टेस्ट की बात करें तो भारत ने पहली पारी में 503 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में श्रीलंका की पहली पारी 290 रन पर समाप्त हो गई और भारत को 213 रन की बड़ी बढ़त मिली। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल ने श्रीलंका को फॉलोऑन देने का फैसला किया। दूसरी पारी में श्रीलंका की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए।

    हालांकि इसके बाद पासिंदु सूर्यबंदारा और धनंजय डी सिल्वा ने पारी को संभाल लिया। चौथे दिन बारिश के कारण खेल जल्दी समाप्त होने तक श्रीलंका ने दूसरी पारी में 6 विकेट पर 229 रन बना लिए थे और टीम ने भारत के खिलाफ 16 रन की बढ़त हासिल कर ली थी। ऐसे में भारतीय गेंदबाजों के लिए आखिरी विकेट हासिल करना बेहद जरूरी हो गया था। इस दौरान जडेजा की नो-बॉल भी चर्चा का बड़ा कारण बनी।

    जडेजा भले ही इस रिकॉर्ड को कभी याद नहीं रखना चाहेंगे लेकिन आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में नो-बॉल उनकी गेंदबाजी की एक बड़ी कमजोरी बन गई है। अब भारतीय टीम को उम्मीद होगी कि आगे के मुकाबलों में वह इस गलती पर नियंत्रण पाएंगे और अपनी शानदार गेंदबाजी से टीम को ज्यादा से ज्यादा सफलता दिलाएंगे।

  • साल के आखिरी चंद्र ग्रहण की उल्टी गिनती शुरू, 28 अगस्त को इतने बजे से रहेगा ग्रहण; भारत में सूतक भी नहीं

    साल के आखिरी चंद्र ग्रहण की उल्टी गिनती शुरू, 28 अगस्त को इतने बजे से रहेगा ग्रहण; भारत में सूतक भी नहीं


    नई दिल्ली। साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगने जा रहा है और इस खगोलीय घटना को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। यह ग्रहण सावन मास की पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है। पंचांग के अनुसार इस बार लगने वाला चंद्र ग्रहण उपच्छाया यानी पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण है और दुनिया के कुछ हिस्सों में इसे आंशिक रूप से देखा जा सकेगा। हालांकि भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। यही वजह है कि भारत में रहने वाले लोगों के लिए इससे जुड़ा सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा। ऐसे में सामान्य धार्मिक और शुभ कार्यों को रोकने की जरूरत नहीं होगी।

    भारतीय समय के अनुसार चंद्र ग्रहण की शुरुआत 28 अगस्त की सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर होगी। इसके बाद सुबह 8 बजकर 4 मिनट पर ग्रहण का आंशिक चरण शुरू होगा। ग्रहण अपने चरम पर सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर पहुंचेगा। इसके बाद धीरे धीरे ग्रहण का प्रभाव कम होगा और दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर यह समाप्त हो जाएगा। यानी ग्रहण की पूरी अवधि करीब 5 घंटे 38 मिनट बताई गई है। हालांकि भारत से इसे प्रत्यक्ष रूप से देख पाना संभव नहीं होगा।

    इस चंद्र ग्रहण की खास बात यह भी है कि इसका असर दुनिया के अलग अलग हिस्सों में अलग तरीके से दिखाई देगा। पश्चिमी एशिया के कुछ क्षेत्रों के अलावा दक्षिण अमेरिका अफ्रीका और यूरोप के कई हिस्सों में लोग इस खगोलीय घटना को देख सकेंगे। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां सूतक को लेकर किसी तरह की विशेष पाबंदी नहीं होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिन स्थानों पर ग्रहण दिखाई देता है वहां ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल माना जाता है। लेकिन भारत में दृश्यता नहीं होने के कारण यह नियम यहां लागू नहीं होगा।

    ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताओं की बात करें तो जिन स्थानों पर यह दिखाई देता है वहां लोग इस दौरान पूजा पाठ मंत्र जाप और भगवान का ध्यान करने जैसी गतिविधियां करते हैं। महामृत्युंजय मंत्र चंद्र देव के मंत्र हनुमान चालीसा सुंदरकांड और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करने की परंपरा भी बताई जाती है। हालांकि इन उपायों का संबंध धार्मिक आस्था से है और इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जाता है।

    ग्रहण से पहले भोजन पानी और दूध में तुलसी की पत्तियां रखने की परंपरा भी कई घरों में देखने को मिलती है। यह भी धार्मिक मान्यता है जिसे व्यक्ति अपनी श्रद्धा के अनुसार अपना सकता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करने घर की साफ सफाई करने और पूजा स्थल को व्यवस्थित करने की परंपरा बताई गई है।

    इस बार 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। चंद्र ग्रहण के कारण लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या राखी बांधने पर इसका कोई असर पड़ेगा। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने और सूतक मान्य नहीं होने के कारण रक्षाबंधन के आयोजन पर किसी विशेष रोक की बात नहीं है। हालांकि राखी बांधने और पूजा के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए शुभ समय को देखना बेहतर रहेगा। इस तरह 28 अगस्त का दिन खगोलीय घटना और भाई बहन के प्रेम के पर्व दोनों के लिहाज से खास रहने वाला है।

  • पूर्णिमा सुबह 09:09 बजे से प्रारंभ…. आज पूरे दिन भद्रा का साया और कल पंचक, जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त!

    पूर्णिमा सुबह 09:09 बजे से प्रारंभ…. आज पूरे दिन भद्रा का साया और कल पंचक, जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त!


    नई दिल्ली।
    हिंदू धर्म ( Hinduism) में सावन पूर्णिमा (Sawan Purnima) का विशेष महत्व है। इस दिन रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) या राखी का त्योहार मनाया जाता है। यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक है। इस साल सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 09: 09 मिनट पर प्रारंभ हो गई है और 28 अगस्त 2026 को सुबह 09:47 बजे समाप्त होगी।

    प्रदोष काल और चंद्रोदय के समय पूर्णिमा तिथि व्याप्त होने के कारण सावन पूर्णिमा व्रत आज 27 अगस्त को है। 27 अगस्त को पूर्णिमा व्रत के दिन भद्रा और पंचक का साया भी रहेगा। इस बार पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) के कारण सावन पूर्णिमा व्रत के दिन ही रक्षा बंधन मनाया जाएगा और भद्रा के कारण राखी बांधने में अड़चन आएगी या नहीं। आइए जानते हैं रक्षा बंधन कब मनाएं?

    27 या 28 अगस्त कब मनाएं रक्षा बंधन:

    पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, हिंदू धर्म में किसी भी पर्व या त्योहार को उदया तिथि में मनाना सर्वोत्तम माना गया है। सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह प्रारंभ होगी। शास्त्रों में पूर्णिमा व्रत का विधान उस दिन है, दिन समय पूर्णिमा तिथि के साथ चंद्रोदय होता है। ऐसा संयोग 27 अगस्त को ही मिल रहा है। 28 अगस्त को सुबह के समय पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी जिसके कारण पूर्णिमा युक्त चंद्रोदय संभव नहीं है। इसलिए सावन पूर्णिमा का व्रत 27 अगस्त को मान्य रहेगा।

    अगर रक्षा बंधन के पर्व की बात करें तो यह त्योहार हमेशा भद्रा रहित पूर्णिमा में मनाना उत्तम माना गया है। 27 अगस्त को भद्रा सुबह 07 बजे से शाम 06:02 बजे तक रहेगी। 28 अगस्त को सूर्योदय से पूर्व भद्रा समाप्त हो जाएगी और उदया पूर्णिमा मिलेगी। इसलिए उदयाव्यापी पूर्णिमा में रक्षा बंधन और सावन पूर्णिमा का स्नान-दान मनाना उत्तम रहने वाला है। हालांकि इस दिन पंचक भी रहेगा। लेकिन रक्षा बंधन पर भद्रा ज्यादा महत्वपूर्ण मानी गई है। मान्यता है कि भद्रा काल में भाई को राखी बांधने से भाई-बहन दोनों को ही नकारात्मक फलों की प्राप्ति होती है। इसलिए भद्रा के समय राखी बांधने से बचना चाहिए।


    28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त:

    28 अगस्त 2026 को भाई की कलाई पर राखी बांधने का सबसे उत्तम और श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से सुबह 9:48 बजे तक रहेगा। अगर आप सुबह के समय राखी नहीं बांध पाते हैं तो दोपहर 12:04 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक भी राखी बांधने का शुभ मुहूर्त रहेगा। शुभ मुहूर्त में राखी बांधना अत्यंत शुभ माना गया है। भद्रा विराजमान नहीं होने के कारण 28 अगस्त को पूरे दिन राखी का पर्व मनाया जा सकेगा। हालांकि राहुकाल का विचार अनिवार्य है।

    28 अगस्त को राहुकाल कब से कब तक है:
    ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को शुभ नहीं माना गया है। मान्यता है कि इस समय किए गए कार्यों का अशुभ फल प्राप्त होता है। 28 अगस्त को राहुकाल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे के बीच रहेगा।


    चंद्र ग्रहण का राखी पर असर:

    28 अगस्त को साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा। भारतीय समयानुसार इस ग्रहण की शुरुआत सुबह 06 बजकर 53 मिनट पर होगी और दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगा। यह ग्रहण अपने चरम पर सुबह 09 बजकर 43 मिनट के आसपास होगा। यह ग्रहण दिन में लगेगा, जिसके कारण भारत में यह नजर नहीं आएगा। ग्रहण नहीं दिखने के कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। सूतक काल नहीं लगने के कारण चंद्र ग्रहण का राखी के पर्व पर कोई असर नहीं रहेगा।

  • आशा भोसले का आखिरी नगमा सुनने का इंतजार खत्म, इसी खास दिन रिलीज होगा ‘ऐ मेरी जिंदगी’

    आशा भोसले का आखिरी नगमा सुनने का इंतजार खत्म, इसी खास दिन रिलीज होगा ‘ऐ मेरी जिंदगी’


    नई दिल्ली। संगीत की दुनिया में अपनी जादुई आवाज से दशकों तक राज करने वाली महान गायिका आशा भोसले के प्रशंसकों के लिए एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। आशा ताई की आवाज में रिकॉर्ड किया गया उनका आखिरी गाना अब जल्द ही लोगों के बीच आने वाला है। फिल्म ओम का हरि के लिए रिकॉर्ड किए गए इस खास गाने का नाम ऐ मेरी जिंदगी तू छुपा है कहां है और इसे आशा भोसले की 93वीं जयंती के मौके पर 8 सितंबर को रिलीज किया जाएगा। फिल्म के अभिनेता अंशुमन झा ने इस बात की पुष्टि की है। आशा भोसले की आवाज में आखिरी बार रिकॉर्ड हुए इस गीत को लेकर फैंस के बीच पहले से ही काफी उत्सुकता है और अब रिलीज की तारीख सामने आने के बाद इस इंतजार को एक भावुक मुकाम मिल गया है।

    आशा भोसले ने अपनी जिंदगी में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी और अलग अलग दौर के संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी आवाज की खासियत यह रही कि उन्होंने रोमांस से लेकर दर्द और खुशी से लेकर जिंदगी के बेहद गहरे भावों तक हर एहसास को अपनी गायकी के जरिए बेहद खूबसूरती से पेश किया। यही वजह है कि उनके निधन के बाद भी उनकी आवाज लोगों के बीच लगातार जीवित है। फिल्म ओम का हरि के लिए रिकॉर्ड किया गया ऐ मेरी जिंदगी तू छुपा है कहां उनके संगीत सफर की आखिरी रिकॉर्डिंग में से एक बेहद खास गीत है। इस गाने को लेकर फिल्म से जुड़े लोगों की भावनाएं भी काफी गहरी हैं।

    अंशुमन झा ने इस गाने को लेकर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ओम का हरि उनके लिए बेहद खास फिल्म है। उनके मुताबिक इस गीत की मूल भावना एक बेटे की ओर से अपने पिता से आई लव यू कहने की है। अंशुमन के लिए यह भाव इसलिए भी बेहद निजी और भावुक है क्योंकि वह अपने पिता से इस तरह की बात कहने का मौका नहीं पा सके। ऐसे में आशा भोसले की आवाज में इस भावना का फिल्म का हिस्सा बनना उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है।

    अंशुमन ने आशा ताई के साथ स्टूडियो में बिताए पलों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उनके साथ स्टूडियो में रहना बेहद सुखद और दिल को सुकून देने वाला अनुभव था। उन्होंने यह भी कहा कि काश आशा भोसले खुद इस खास पल को उनके साथ सेलिब्रेट करने के लिए मौजूद होतीं। हालांकि उनका मानना है कि आशा ताई अपनी आवाज और संगीत के जरिए हमेशा लोगों के बीच मौजूद रहेंगी।

    खास बात यह है कि आशा भोसले ने इस गाने की रिकॉर्डिंग साल 2023 में की थी। उस समय उनकी उम्र 90 साल थी। इतनी उम्र में भी उनकी आवाज का जादू बरकरार था और उन्होंने इस गीत को अपनी खास शैली में रिकॉर्ड किया। फिल्म ओम का हरि का निर्देशन हरीश व्यास ने किया है और इसकी कहानी एक पिता और बेटे के रिश्ते के इर्द गिर्द बुनी गई है। ऐसे में आशा भोसले की आवाज में रिकॉर्ड किया गया यह गीत फिल्म की भावनात्मक कहानी को और गहराई देने वाला माना जा रहा है। अब 8 सितंबर को जब यह गाना रिलीज होगा तो यह सिर्फ एक नया गीत नहीं बल्कि आशा ताई की यादों और उनकी अमर आवाज से जुड़ा एक बेहद भावुक पल होगा।

  • Amazon और Flipkart ने ऑर्डर कैंसलेशन नियम बदले, सेलर्स पर नए शुल्क और पेनल्टी का कितना पड़ेगा असर जानिए

    Amazon और Flipkart ने ऑर्डर कैंसलेशन नियम बदले, सेलर्स पर नए शुल्क और पेनल्टी का कितना पड़ेगा असर जानिए

    नई दिल्ली ।फेस्टिव सीजन से पहले Amazon और Flipkart ने अपने सेलर्स के लिए ऑर्डर पूरा करने और कैंसलेशन से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। इन बदलावों का उद्देश्य ग्राहकों के ऑर्डर समय पर पूरा कराने और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर डिलीवरी प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद बनाना है। हालांकि, छोटे और मध्यम कारोबारियों ने नए शुल्क और पेनल्टी से लागत बढ़ने की चिंता जताई है।

    Amazon ने Easy Ship और Self Ship मॉडल के तहत काम करने वाले सेलर्स के लिए कैंसलेशन फीस की गणना का तरीका बदला है। नया ढांचा 17 अगस्त से लागू किया गया है। Self Ship व्यवस्था में विक्रेता अपने स्तर पर उत्पाद की पैकिंग और डिलीवरी कराता है तथा अपनी कूरियर सेवा का इस्तेमाल करता है। इसमें Amazon की लॉजिस्टिक्स सेवा शामिल नहीं होती।

    नए नियम के तहत कैंसलेशन फीस अब ऑर्डर की कीमत के प्रतिशत के आधार पर निर्धारित होगी। 10 हजार रुपये से कम मूल्य वाले ऑर्डर पर सेलर से ऑर्डर वैल्यू का 10 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। 10,001 से 50 हजार रुपये तक के ऑर्डर पर यह शुल्क 8 प्रतिशत होगा।

    इसी तरह 50,001 रुपये से एक लाख रुपये तक के ऑर्डर पर कैंसलेशन फीस 5 प्रतिशत और एक लाख रुपये से अधिक मूल्य वाले ऑर्डर पर 2 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इन शुल्कों के अतिरिक्त 18 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर भी लागू होगा।

    हालांकि, यह शुल्क प्रत्येक कैंसलेशन पर लागू नहीं होगा। ग्राहक की मांग पर किए गए कैंसलेशन को इससे अलग रखा गया है। शुल्क तब लागू होगा जब सेलर अपनी तरफ से किसी कारण से ऑर्डर कैंसिल करता है। इसके अलावा अनुमानित शिपिंग तारीख के 24 घंटे के भीतर सेलर द्वारा शिपमेंट भेजकर उसकी पुष्टि नहीं करने पर ऑर्डर अपने आप कैंसिल होने की स्थिति में भी शुल्क लगाया जा सकता है।

    Amazon की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि सेलर के नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों में होने वाले कैंसलेशन के लिए अलग व्यवस्था मौजूद है। कंपनी का कहना है कि उसका उद्देश्य सेलर्स को ग्राहकों के ऑर्डर भरोसेमंद तरीके से पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस तरह के सेलर-initiated कैंसलेशन प्लेटफॉर्म पर कुल ऑर्डर का एक प्रतिशत से भी कम हैं।

    दूसरी ओर Flipkart ने भी सेलर्स के लिए तीन स्तर वाली पेनल्टी व्यवस्था लागू की है। यह नया सिस्टम 23 अगस्त से प्रभावी हुआ है और इसका संबंध ऑर्डर को तय समयसीमा में डिस्पैच के लिए तैयार नहीं करने तथा बाद में कैंसिल होने जैसी स्थितियों से है।

    नए नियम के तहत यदि कोई ऑर्डर तय Dispatch By Date तक पिकअप के लिए तैयार नहीं होता है तो प्रति शिपमेंट 30 रुपये की पेनल्टी लग सकती है। यदि सेलर खुद ऑर्डर कैंसिल करता है या तीन बार डिस्पैच की समयसीमा चूकने के बाद ऑर्डर अपने आप कैंसिल होता है, तो प्रति शिपमेंट 60 रुपये का शुल्क लगाया जाएगा।

    यदि ऑर्डर में देरी होने के बाद वह कैंसिल हो जाता है तो पेनल्टी 90 रुपये प्रति शिपमेंट तक पहुंच सकती है। इससे पहले समयसीमा चूकने पर सेलर का अकाउंट कुछ अवधि के लिए लॉक होने जैसी कार्रवाई भी हो सकती थी।

    Flipkart ने नए सेलर्स को इस व्यवस्था से शुरुआती तीन महीनों तक बाहर रखा है। इसका उद्देश्य नए कारोबारियों को प्लेटफॉर्म की प्रक्रिया समझने और अपनी लॉजिस्टिक्स व्यवस्था तैयार करने के लिए समय देना है।

    दोनों कंपनियों के बदलाव ऐसे समय में आए हैं जब त्योहारी खरीदारी का सीजन शुरू होने वाला है और ऑनलाइन ऑर्डर में तेजी आने की संभावना रहती है। ग्राहकों के लिए इसका सीधा उद्देश्य समय पर ऑर्डर और बेहतर सेवा सुनिश्चित करना है, जबकि सेलर्स को अब स्टॉक, डिस्पैच और डिलीवरी समयसीमा की योजना पहले से अधिक सावधानी से बनानी होगी।

  • सरकार की सख्ती का असर…..4 दिन में 8 रुपये सस्ती हुई शक्कर, ₹51 प्रति किलो पर आए दाम

    सरकार की सख्ती का असर…..4 दिन में 8 रुपये सस्ती हुई शक्कर, ₹51 प्रति किलो पर आए दाम


    नई दिल्ली।
    चीनी (Sugar) की बढ़ती कीमतों (Rising Prices) को काबू में करने के लिए सरकार (Government) की ओर से उठाए गए कई कदमों का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है। देश के कई हिस्सों में चीनी के भाव नरम हुए हैं। दक्षिण महाराष्ट्र (Southern Maharashtra) में जहां चीनी का भाव करीब 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था, वहीं अब महाराष्ट्र में मिल स्तर पर यह करीब 51-52 रुपये प्रति किलो में कारोबार कर रही है। कोलकाता में थोक भाव करीब 53 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है। कोलकाता पूर्वोत्तर राज्यों के लिए चीनी का प्रमुख आपूर्ति केंद्र है।

    ChiniMandi के सूत्रों के मुताबिक, थोक और मिल स्तर पर आई इस नरमी का असर अगले 3-5 दिनों में खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।


    रिटेल मार्केट में 8 रुपये तक सस्ती हुई चीनी

    ChiniMandi के ताजा रेट्स के मुताबिक दिल्ली में बुधवार को चीनी 62 रुपये किलो बिकी। इसका हाई 68 रुपये था। वहीं, कानपुर में चीनी की कीमत अब 69 की जगह 62 रुपये पर आ गई है। मुंबई में चीनी का भाव अब 68 रुपये से घटकर 61 रुपये, गुवाहटी में 71 से घटकर 63, हैदराबाद में 70 से घटकर 62 और चेन्नई में 70 रुपये से घटकर 65 रुपये किलो रह गई।


    चीनी के थोक भाव में बड़ी गिरावट

    अगर होलसेल प्राइस की बात करें तो मुंबई में चीनी अपने हाई से 950 रुपये प्रति क्विंटल सस्ती हो चुकी है। मुंबई में चीनी 5800 रुपये पर आ गई है जबकि, 22 अगस्त को 6750 रुपये के ऑल टाइम हाई पर थी। दिल्ली में चीनी 6000 रुपये प्रति क्विंटल पर ही टिकी है। यह 6600 रुपये पर पहुंच गई थी। चार दिन में कानपुर में भी चीनी के दाम में भी 600 रुपये की बड़ी गिरावट है। यहां एक क्विंटल चीनी 6050 रुपये पर आ गई है।


    सरकार ने क्या-क्या उठाए हैं कदम

    स्टॉक लिमिट: कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं और डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय की। इससे इनके पास जमा अतिरिक्त चीनी बाजार में आने लगी और उपलब्धता बढ़ी। सप्लाई सुधरने के साथ ही कीमतों पर दबाव कम हुआ है।

    जमाखोरी पर छापेमारी: सरकार ने चीनी की जमाखोरी और स्टॉक छिपाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज कर दी है। देशभर में अब तक 1,000 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी या निरीक्षण किए जाने की बात सामने आई है। इसके साथ ही चीनी मिलों को निर्देश दिया गया है कि अगस्त का निर्धारित कोटा जिन मिलों ने अभी तक बाजार में नहीं उतारा है, उसे जल्द से जल्द बेचें। इससे आने वाले दिनों में बाजार में चीनी की उपलब्धता और बढ़ सकती है।

    ड्यूटी-फ्री आयात: सरकार ने 21 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी। सूत्रों के मुताबिक, निर्यातक देशों से करीब 70-80 हजार टन चीनी वाली 3-4 खेपें पहले ही रवाना हो चुकी हैं। इनके सितंबर के मध्य से अंत तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है।

    त्योहारों से पहले सरकार की नजर कीमतों पर
    अगस्त के बचे हुए कोटे की चीनी बाजार में आने, आयातित चीनी की खेपों के पहुंचने और बंदरगाहों पर रिफाइन होने वाली चीनी की उपलब्धता बढ़ने से प्रमुख खपत वाले इलाकों में सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है।

    खासकर त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार की कोशिश बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने की है। अगर ये सभी कदम उम्मीद के मुताबिक काम करते हैं, तो आने वाले हफ्तों में चीनी के भाव में और नरमी देखने को मिल सकती है।

  • मजदूरी से पढ़ाई तक और फिर KBC की हॉटसीट! विशाल ने 5 लाख जीतकर रचा कमाल, अब सामने होगा 50 लाख का सवाल

    मजदूरी से पढ़ाई तक और फिर KBC की हॉटसीट! विशाल ने 5 लाख जीतकर रचा कमाल, अब सामने होगा 50 लाख का सवाल


    नई दिल्ली। ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ का मंच एक बार फिर ऐसी कहानी का गवाह बना है जिसने ज्ञान के साथ मेहनत और हौसले की ताकत भी दिखा दी। महाराष्ट्र के वाशिम जिले से पहुंचे विशाल प्रेमचंद राठौड़ ने अपनी शानदार समझ और तेज दिमाग के दम पर 5 लाख रुपये की रकम जीत ली है। विशाल की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि वह ऐसे परिवार से आते हैं जहां रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए परिवार के सदस्यों को दिहाड़ी मजदूरी तक करनी पड़ती है। आर्थिक परेशानियों के बावजूद पढ़ाई का सपना नहीं छोड़ा और अब अमिताभ बच्चन के सामने हॉटसीट पर बैठकर उन्होंने अपनी मेहनत का शानदार उदाहरण पेश किया है। 5 लाख रुपये जीतने के बाद अब विशाल 50 लाख रुपये के सवाल का सामना करेंगे।
    विशाल ने ‘फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट’ राउंड में सबसे तेज जवाब देकर हॉटसीट तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की। जब वह अमिताभ बच्चन के सामने पहुंचे तो इस खास पल की खुशी और भावनाओं को संभालना उनके लिए आसान नहीं था। उनके माता-पिता और दोनों बहनें भी शो में मौजूद थीं। बेटे को इतने बड़े मंच पर देखकर परिवार की आंखों में खुशी साफ दिखाई दी। विशाल के लिए यह सिर्फ एक टीवी शो में पहुंचने की उपलब्धि नहीं बल्कि वर्षों से चले आ रहे संघर्ष के बीच मिली बड़ी कामयाबी है।

    विशाल ने शो में अपने परिवार की आर्थिक स्थिति के बारे में भी बताया। उनके पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और कई बार विशाल भी उनके साथ काम की तलाश में निकलते हैं। उनकी मां सफाईकर्मी के तौर पर काम करती हैं। परिवार की आमदनी का कोई स्थायी जरिया नहीं है और इसके बावजूद हर महीने करीब 7 हजार रुपये मकान का किराया देना पड़ता है। विशाल खुद मजदूरी करके रोजाना लगभग 500 से 600 रुपये कमा पाते हैं। सबसे मुश्किल बात यह है कि हर दिन काम मिलना भी तय नहीं होता। कई बार काम नहीं मिलने पर उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है।

    इन मुश्किल परिस्थितियों के बीच विशाल ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने मजदूरी के साथ पढ़ाई पूरी की और पिछले करीब तीन साल से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC की तैयारी कर रहे हैं। उनका सपना सरकारी अधिकारी बनने का है। वह चाहते हैं कि एक दिन उनकी मेहनत रंग लाए और वह अपने परिवार को आर्थिक तंगी से बाहर निकाल सकें।

    हालांकि उनके लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना भी आसान नहीं था। कई बार परीक्षा का फॉर्म भरने तक के लिए पैसे जुटाना मुश्किल हो जाता था। पढ़ाई के लिए जरूरी किताबें खरीदने में भी आर्थिक परेशानियां सामने आती थीं। लेकिन इन परिस्थितियों ने विशाल के हौसले को कमजोर नहीं किया। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा।

    अब KBC 18 ने विशाल को अपनी मेहनत और ज्ञान दिखाने का एक बड़ा मंच दिया है। 5 लाख रुपये जीतने के बाद उनके सामने 50 लाख रुपये का सवाल है। विशाल के आगे का सफर कितना लंबा होगा और क्या वह बड़ी रकम अपने नाम कर पाएंगे यह आने वाले एपिसोड में पता चलेगा। फिलहाल उनकी कहानी उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।

  • MP: शक्कर की कीमतों पर कैलाश विजयवर्गीय का अजीब तर्क… बोले- खूब महंगी होनी चाहिए चीनी

    MP: शक्कर की कीमतों पर कैलाश विजयवर्गीय का अजीब तर्क… बोले- खूब महंगी होनी चाहिए चीनी


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के एक सीनियर मंत्री (Senior Minister) ने चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों की चिंता को खारिज करते हुए एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने तर्क दिया कि चीनी ‘बहुत महंगी’ (Sugar ‘Very Expensive’) होनी चाहिए और जोर देकर कहा कि 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को चीनी बिल्कुल नहीं मिलनी चाहिए।

    राज्य के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) ने बुधवार को त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों पर विपक्षी दलों की आलोचना के जवाब में ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि आजकल 90 प्रतिशत लोग मिठाइयां पसंद नहीं करते हैं, और उन्होंने खुद भी ऐसी चीज़ें खाना पूरी तरह बंद कर दिया है।

    पत्रकारों से बात करते हुए बीजेपी नेता ने दावा किया कि चीनी की कीमतें लगातार कम हो रही हैं. उन्होंने कहा, “वैसे भी, आजकल 90 प्रतिशत लोग मिठाइयां पसंद नहीं करते हैं. मैं आपको बता दूं, मैं बिल्कुल भी मिठाई नहीं खाता हूं.”

    मंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “मेरा कहना है कि (चीनी) बहुत महंगी होनी चाहिए. (चीनी) सिर्फ़ बच्चों के लिए सरकारी उचित मूल्य की दुकानों पर सस्ती दरों पर मिलनी चाहिए… बुजुर्गों को चीनी बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए.”

    उन्होंने कहा कि डॉक्टर, खासकर आयुर्वेदिक डॉक्टर, 40 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों के लिए चीनी का सेवन अच्छा नहीं मानते हैं. उन्होंने कहा, “अगर आप 40 साल से ज़्यादा उम्र के हैं, तो कभी-कभी गुड़ खा सकते हैं, लेकिन चीनी से पूरी तरह परहेज करें।


    ‘बीजेपी नेता गरीबों का मजाक उड़ा रहे हैं’

    राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सत्ताधारी बीजेपी पर निशाना साधने के लिए विजयवर्गीय के बयानों का सहारा लिया. उन्होंने कहा कि महंगाई कम करने के वादे के साथ सत्ता में आए बीजेपी नेता चीनी पर अपने “बेतुके” बयानों से गरीबों और मध्यम वर्ग का अपमान और मज़ाक उड़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, “देश बीजेपी नेताओं को देख रहा है. लोग आने वाले चुनावों में उनकी हंसी का मुंहतोड़ जवाब देंगे. तब देखेंगे कि उनकी मुस्कान बनी रहती है या वे आंसू बहाते हैं.”


    पेट्रोल में इथेनॉल और चीनी की कीमतें

    विपक्षी दल पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की मात्रा बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं. उनका आरोप है कि इस नीति से चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं और लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. सरकार ने इन दावों को खारिज कर दिया है और इसके बजाय कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इंडस्ट्री को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने के कारण बुधवार को लगातार दूसरे दिन खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलोग्राम से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई।

    सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति देने के बाद मिल-गेट कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद, चीनी की खुदरा कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं. उपभोक्ता मामलों के विभाग (मूल्य निगरानी प्रभाग) द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त को चीनी का अखिल भारतीय औसत भाव 65.05 रुपये प्रति किलोग्राम था, जबकि मंगलवार को यह 63.97 रुपये प्रति किलोग्राम था।

  • रिकॉर्डतोड़ कीमत ने बदले आभूषण बाजार के नियम…. अब कम वजन का सोना खरीद रहा आम उपभोक्ता

    रिकॉर्डतोड़ कीमत ने बदले आभूषण बाजार के नियम…. अब कम वजन का सोना खरीद रहा आम उपभोक्ता


    नई दिल्ली।
    सोने (Gold) की रिकॉर्डतोड़ कीमतों (Record-Breaking Prices) ने भारत के करीब 7 लाख करोड़ रुपये के आभूषण बाजार के बुनियादी नियमों को पूरी तरह बदल दिया है। पहली नजर में यह बड़ा विरोधाभास लगता है, लेकिन आम उपभोक्ता कम वजन का सोना (Low Weight Gold) खरीद रहा है, जबकि कारोबारियों की तिजोरियां रिकॉर्ड कमाई से भर रही हैं। यानी अब बाजार की वृद्धि ज्यादा ग्राम सोना बेचने से नहीं, बल्कि प्रति ग्राम अधिक वैल्यू निकालने से तय हो रही है।

    वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 की पहली छमाही में देश में सोने के जेवरों की मांग वजन के लिहाज से 17.1 फीसदी गिर गई, लेकिन खर्च की गई कुल रकम 40 फीसदी बढ़कर 2.13 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई। इस बदलाव को भांपते हुए आभूषण कारोबारियों ने हल्के वजन, कम कैरेट, स्टड डायमंड्स और पुराने सोने की रीसाइक्लिंग को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है।


    ब्रांडेड जूलरी पर बढ़ रहा भरोसा :

    जीएसटी, अनिवार्य हॉलमार्किंग और पैन कार्ड नियमों ने असंगठित सुनारों के पारंपरिक बाजार को झटका दिया है। केयरएज के निदेशक अखिल गोयल के मुताबिक, पहले ग्राहक अपने खानदानी सुनार के व्यक्तिगत संबंध पर भरोसा करते थे। लेकिन अब संगठित ब्रांड्स ने इसकी जगह मानकीकृत शुद्धता, पारदर्शी बिलिंग, आसान बायबैक व डिजिटल डिस्कवरी का ऐसा मजबूत ढांचा खड़ा किया है, जो टियर-2 व टियर-3 शहरों में भी तेजी से अपनी पैठ बना रहा है।


    वजन घटा फिर भी बिल बढ़ा

    आंकड़े बताते हैं कि सोने की रिकॉर्ड कीमतों के कारण खरीदारों का व्यवहार और बाजार का ढांचा तेजी से बदल रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, साल 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में देश में सोने के जेवरों की मांग वजन के लिहाज से 15.4 फीसदी गिरकर 75.1 टन रह गई, लेकिन इसी अवधि में खर्च की गई कुल रकम 34.4 फीसदी के उछाल के साथ 1.13 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई। वहीं, पूरे 2026 की पहली छमाही की बात करें तो सोने की मांग वजन में 17.1 फीसदी घटी, जबकि कुल खरीदारी की वैल्यू 40 फीसदी बढ़कर 2.13 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो यह साबित करता है कि उपभोक्ता अब बजट तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन वजन कम खरीद रहे हैं।

    इस बदलाव का सीधा फायदा संगठित और बड़े ब्रांड्स को मिला है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में टाइटन की जूलरी आय में 43 फीसदी की वृद्धि हुई, जिसमें तनिष्क और कैरेटलेन में खरीदारों की संख्या दोहरे अंकों में बढ़ी। इसी तरह कल्याण ज्वैलर्स का समेकित राजस्व 46 फीसदी बढ़कर 10,589 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जिसमें कुल बिक्री का 55 फीसदी से अधिक हिस्सा पुराने सोने की रीसाइक्लिंग से आया।

    खुदरा बाजार में भी बड़ा बदलाव आया है। सीबीआरई के आंकड़ों के अनुसार, कुल संगठित रिटेल लीजिंग में ज्वैलरी सेक्टर की हिस्सेदारी 2019 के मात्र 2 फीसदी से बढ़कर 2025-26 में 8 फीसदी हो गई है। 8,000 वर्ग फुट से बड़े एक्सपीरियंस सेंटर्स और मेगा शोरूम का दबदबा 50 फीसदी तक पहुंच चुका है।


    पुराना सोना बना ग्रोथ इंजन

    महंगे अंतरराष्ट्रीय आभूषणों से बचने के लिए कंपनियों ने भारतीय घरों की तिजोरियों में पड़े सोने को रिसाइकिल करने का नया मॉडल खड़ा किया है। कल्याण ज्वैलर्स के कार्यकारी निदेशक रमेश कल्याणरामन के अनुसार, मई में शुरू हुए शाइन विद इंडिया अभियान के बाद जून में कंपनी के कुल राजस्व में पुराने सोने के एक्सचेंज की हिस्सेदारी 55 से 60 फीसदी तक पहुंच गई है। कंपनियों को अब महंगा विदेशी सोना आयात करने के बजाय घरेलू ग्राहकों से ही कच्चा माल मिल रहा है, जिससे उनकी पूंजी की लागत घटी है और मुनाफा मार्जिन सुरक्षित हुआ है।


    आभूषण अब निवेश नहीं

    केयरएज रेटिंग्स और सीबीआरई की संयुक्त रिपोर्ट बताती है कि युवा पीढ़ी के बीच सोने की पारंपरिक 22 कैरेट वाली भारी जूलरी की जगह डेली वियर और स्टाइलिश गहनों ने ले ली है। सेनको गोल्ड और तनिष्क जैसे ब्रांड्स ने 9-कैरेट और 14-कैरेट में स्टडड डायमंड जूलरी पेश की है। जो ग्राहक 22 कैरेट के भारी सोने का सेट नहीं खरीद पा रहे, वे उसी बजट में हल्के 14 कैरेट सोने के साथ हीरे जड़े आकर्षक डिजाइन खरीद रहे हैं। सेनको ने लाइफस्टाइल ब्रांड सेनेस और पुरुषों के लिए 20,000 से एक लाख रुपये के टाइटेनियम गहनों का दायरा बढ़ाया है। युवा खरीदार अब गहनों को सिर्फ लॉकर में बंद रखने वाले निवेश के बजाय रोज पहनने वाले फैशन एक्सेसरी के रूप में देख रहे हैं।