Author: bharati

  • बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदलेगा, कांग्रेस के सवाल पर उच्च शिक्षा मंत्री ने स्थिति की साफ की तस्वीर

    बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदलेगा, कांग्रेस के सवाल पर उच्च शिक्षा मंत्री ने स्थिति की साफ की तस्वीर

    मध्य प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में राजधानी भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं पर सरकार ने स्पष्ट रुख सामने रख दिया है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उनके इस जवाब के बाद पिछले कुछ महीनों से जारी अटकलों और राजनीतिक बहस पर फिलहाल विराम लग गया है।

    बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का मुद्दा उस समय चर्चा में आया था, जब विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने इसका नाम बदलकर “मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” करने का प्रस्ताव पारित किया था। यह प्रस्ताव राज्य सरकार और कुलाधिपति के पास भेजा गया था। प्रस्ताव सामने आने के बाद राजनीतिक स्तर पर इस विषय को लेकर विभिन्न दलों के बीच मतभेद भी देखने को मिले और इसे लेकर सार्वजनिक बहस तेज हो गई थी।

    विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक आतिफ आरिफ अकील ने इस विषय पर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने तारांकित प्रश्न के माध्यम से पूछा कि क्या शासन ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि यदि ऐसा कोई प्रस्ताव है तो नया नाम क्या होगा और लगभग तीन दशक से अधिक समय से स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलने के पीछे सरकार की मंशा क्या है।

    विधायक ने अपने प्रश्न में यह मुद्दा भी उठाया कि डॉ. बरकतउल्ला भोपाली भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या राज्य सरकार उन्हें स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मान्यता देती है और यदि ऐसा है तो उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलना किस आधार पर उचित माना जाएगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय का नाम बदलने की वैधानिक प्रक्रिया और आवश्यक स्वीकृतियों के संबंध में भी जानकारी मांगी गई।

    उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने लिखित उत्तर में स्पष्ट कहा कि सरकार ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आगे कोई प्रश्न उत्पन्न नहीं होता। डॉ. बरकतउल्ला भोपाली से जुड़े प्रश्न पर मंत्री ने बताया कि संबंधित जानकारी एकत्रित की जा रही है। वहीं विश्वविद्यालय का नाम बदलने की प्रक्रिया के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तित करने के लिए उसे संचालित करने वाले अधिनियम में संशोधन करना आवश्यक होता है, जो विधेयक के माध्यम से किया जाता है। अन्य प्रक्रियात्मक जानकारी निर्धारित अभिलेखों में उपलब्ध है।

    सरकार के इस आधिकारिक जवाब के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वर्तमान समय में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की कोई सरकारी योजना नहीं है। इससे लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगने की संभावना है। हालांकि विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा पारित प्रस्ताव और उससे जुड़ी चर्चाओं को लेकर राजनीतिक विमर्श भविष्य में भी जारी रह सकता है। फिलहाल विधानसभा में सरकार के स्पष्ट बयान ने इस विषय पर अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दी है।

  • मानसून सत्र की शुरुआत हंगामेदार, कांग्रेस विधायकों का विधानसभा परिसर में प्रदर्शन, किसानों की समस्याओं पर सरकार से जवाब की मांग

    मानसून सत्र की शुरुआत हंगामेदार, कांग्रेस विधायकों का विधानसभा परिसर में प्रदर्शन, किसानों की समस्याओं पर सरकार से जवाब की मांग

    मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को राजनीतिक गर्माहट के साथ हुई। सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस विधायक दल ने किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। खाद की कमी, सरकारी खरीद में कथित अनियमितताओं और किसानों को समय पर उचित मुआवजा नहीं मिलने के आरोपों के साथ विपक्ष ने राज्य सरकार को घेरते हुए इन मुद्दों पर तत्काल समाधान की मांग की। प्रदर्शन के दौरान विधानसभा परिसर में राजनीतिक माहौल काफी गर्म रहा।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस के विधायकों ने सरकार के खिलाफ सांकेतिक विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान कुछ विधायकों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री के मुखौटे पहनकर विरोध जताया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान में गंभीरता नहीं दिखा रही है और कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की लगातार अनदेखी की जा रही है।

    कांग्रेस विधायकों का कहना है कि प्रदेश के कई हिस्सों में किसान खाद की उपलब्धता को लेकर परेशान हैं और उन्हें लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। साथ ही फसलों के उचित दाम, मुआवजे के भुगतान और सरकारी खरीद व्यवस्था को लेकर भी किसानों में असंतोष है। विपक्ष का आरोप है कि किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार प्रभावी कदम उठाने में असफल रही है। कांग्रेस ने दावा किया कि वह इन सभी मुद्दों को विधानसभा के भीतर मजबूती से उठाएगी और जरूरत पड़ने पर सदन के बाहर भी आंदोलन जारी रखेगी।

    विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आवास पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में मानसून सत्र के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर रणनीति बनाई गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसानों की परेशानी के अलावा बेरोजगारी, युवाओं को रोजगार, अतिथि शिक्षकों की मांगें, पिछड़ा वर्ग से जुड़े विषय और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मामलों पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। विपक्ष का कहना है कि राज्य के विभिन्न वर्गों से जुड़े मुद्दों को पूरी मजबूती के साथ सदन में रखा जाएगा।

    कांग्रेस ने यह भी कहा कि केन-बेतवा परियोजना, प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विषय और अन्य जनहित के मामलों पर भी सरकार को घेरने की तैयारी की गई है। विपक्ष का मानना है कि प्रदेश के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं, जिन पर गंभीर चर्चा और ठोस निर्णय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से विधायक दल ने सत्र के दौरान समन्वित रणनीति अपनाने का फैसला किया है।

    वहीं, विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी दिनों में सदन के भीतर किसानों, कृषि, रोजगार, शिक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। विपक्ष ने सरकार से किसानों के हितों की रक्षा, खाद की पर्याप्त उपलब्धता, पारदर्शी खरीद व्यवस्था और लंबित मुआवजे के मामलों का शीघ्र समाधान करने की मांग दोहराई है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार इन आरोपों और मांगों पर सदन के भीतर क्या जवाब देती है और किसानों से जुड़े मुद्दों पर कौन से ठोस कदम सामने आते हैं।

  • जंग के साए में कूटनीति, ट्रंप के दूत से मुलाकात को लेकर ईरानी विदेश मंत्री ने किए चौंकाने वाले दावे

    जंग के साए में कूटनीति, ट्रंप के दूत से मुलाकात को लेकर ईरानी विदेश मंत्री ने किए चौंकाने वाले दावे


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ हुई बातचीत को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ वार्ता ऐसे माहौल में हुई जहां किसी भी समय बमबारी शुरू होने का खतरा बना हुआ था। अराघची के इस बयान ने यह संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद भले जारी रहा हो लेकिन जमीन पर हालात बेहद तनावपूर्ण और अस्थिर बने हुए थे।

    एक साक्षात्कार में अराघची ने कहा कि उन्होंने बातचीत के दौरान विटकॉफ से सवाल किया था कि क्या वह कभी ऐसी वार्ता का हिस्सा बने हैं जहां हर पल हवाई हमले की आशंका बनी रहती हो। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह बातचीत किस स्थान या किस दौर की थी लेकिन उनके बयान से उस समय की गंभीर स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। ईरानी विदेश मंत्री का कहना था कि युद्ध जैसे माहौल में भी बातचीत का रास्ता खुला रखना आसान नहीं होता।

    अराघची ने यह भी दोहराया कि ईरान किसी भी तरह के दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि तेहरान अपने राष्ट्रीय हितों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता केवल दबाव या धमकी के आधार पर नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की स्थिति की तुलना वेनेजुएला से नहीं की जा सकती और उनका देश बाहरी दबाव में अपने फैसले नहीं बदलेगा।

    रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच पिछले कई महीनों से अलग-अलग स्तर पर बातचीत होती रही है। औपचारिक बैठकों के अलावा दोनों पक्षों के बीच सीधे संदेशों के जरिए भी संपर्क बनाए रखने की कोशिश की गई ताकि तनाव को कम किया जा सके। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और क्षेत्रीय घटनाक्रम ने हालात को और अधिक जटिल बना दिया है।

    इसी बीच क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। अमेरिका ने हाल के दिनों में ईरान से जुड़े कई रणनीतिक ठिकानों पर हवाई कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई अपने सैनिकों पर हुए हमलों के जवाब में की गई। दूसरी ओर ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों और सैन्य हितों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। कुवैत बहरीन और जॉर्डन जैसे देशों ने संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों को देखते हुए अपनी वायु रक्षा प्रणाली को हाई अलर्ट पर रखा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती तनातनी अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल आपूर्ति के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।

    हालांकि कूटनीतिक संपर्क अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं लेकिन मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि बातचीत और सैन्य टकराव समानांतर रूप से चल रहे हैं। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर यह संकट और गहरा होता है।

  • सलमान खान ने एक पोस्ट से खत्म की अटकलें, नई तस्वीरें शेयर कर फैंस से किया दिल छू लेने वाला सवाल

    सलमान खान ने एक पोस्ट से खत्म की अटकलें, नई तस्वीरें शेयर कर फैंस से किया दिल छू लेने वाला सवाल


    नई दिल्ली। बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गए हैं। हाल ही में उनकी कुछ तस्वीरें इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुई थीं जिनमें अभिनेता पहले की तुलना में अलग नजर आ रहे थे। तस्वीरों में उनके चेहरे पर बढ़ती उम्र के निशान और हल्की थकान दिखाई देने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। कुछ लोगों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई तो कुछ ने इसे बढ़ती उम्र का स्वाभाविक असर बताया। इन तमाम अटकलों के बीच सलमान खान ने अपने खास अंदाज में फैंस को जवाब दिया और एक ऐसा सवाल पूछा जिसने सभी का दिल जीत लिया।

    सलमान खान ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर ब्लैक एंड व्हाइट अंदाज में अपनी पांच नई तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में वह हल्की बढ़ी हुई दाढ़ी और स्टाइलिश हैट पहने नजर आए। तस्वीरों के साथ उन्होंने बेहद छोटा लेकिन दिलचस्प कैप्शन लिखा कि आप लोगों की तबीयत कैसी है। अभिनेता का यह अंदाज फैंस को बेहद पसंद आया और देखते ही देखते पोस्ट पर लाखों लाइक और हजारों प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

    सलमान के इस पोस्ट के बाद प्रशंसकों ने भी उसी आत्मीयता के साथ जवाब दिया। कई लोगों ने लिखा कि हमारी तबीयत तो ठीक है लेकिन आप अपना ख्याल रखिए। कुछ प्रशंसकों ने दुआ करते हुए लिखा कि भगवान और अल्लाह आपको हमेशा स्वस्थ और खुश रखें। वहीं कई यूजर्स ने कहा कि आपकी हालिया तस्वीरों ने उन्हें चिंतित कर दिया था लेकिन अब नई तस्वीरें देखकर राहत मिली है। सोशल मीडिया पर अभिनेता के समर्थन में बड़ी संख्या में प्रशंसकों ने सकारात्मक संदेश साझा किए।

    दरअसल कुछ दिन पहले सलमान खान एक सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए थे जहां उनकी तस्वीरें वायरल हो गई थीं। उन तस्वीरों में उनके चेहरे पर झुर्रियां और पहले जैसी चमक न होने की बात सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई थी। हालांकि यह भी सच है कि सलमान अब साठ वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं और उम्र बढ़ने के साथ चेहरे पर बदलाव आना पूरी तरह स्वाभाविक है। इसके बावजूद तीन दशक से अधिक समय से अपनी फिटनेस और व्यक्तित्व के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता को देखकर कई प्रशंसक भावुक हो गए थे।

    सलमान खान का यह नया पोस्ट किसी आधिकारिक सफाई की तरह नहीं था लेकिन उनके अंदाज ने यह जरूर दिखा दिया कि वह अपने प्रशंसकों से सीधे जुड़ना पसंद करते हैं। बिना किसी विवाद या लंबी प्रतिक्रिया के उन्होंने एक साधारण सवाल पूछकर फैंस का ध्यान अपनी ओर खींच लिया और सोशल मीडिया पर चल रही तमाम अटकलों को भी काफी हद तक शांत कर दिया।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो सलमान खान आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाले हैं। उनकी फिल्म मातृभूमि का प्रशंसकों को बेसब्री से इंतजार है जबकि दक्षिण भारतीय फिल्म एसवीसी 63 की शूटिंग भी जारी है। इस फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री नयनतारा मुख्य भूमिका निभा रही हैं। फैंस को उम्मीद है कि सलमान एक बार फिर बड़े पर्दे पर अपने दमदार अंदाज से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।

  • इंग्लैंड दौरे की हार भुलाकर नई चुनौती को तैयार टीम इंडिया, 23 जुलाई से जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज अब

    इंग्लैंड दौरे की हार भुलाकर नई चुनौती को तैयार टीम इंडिया, 23 जुलाई से जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज अब


    नई दिल्ली। इंग्लैंड दौरे पर टी20 और वनडे दोनों सीरीज गंवाने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के पास ज्यादा आराम का समय नहीं है। टीम अब नई ऊर्जा और नए इरादों के साथ जिम्बाब्वे दौरे के लिए तैयार है जहां 23 जुलाई से तीन मैचों की टी20 सीरीज खेली जाएगी। इस सीरीज को भारतीय टीम के लिए सिर्फ वापसी का मौका ही नहीं बल्कि युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा साबित करने का बड़ा मंच भी माना जा रहा है। क्रिकेट प्रेमियों की सबसे ज्यादा नजर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर रहेगी जिनसे विस्फोटक प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

    जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टीम की कमान श्रेयस अय्यर को सौंपी गई है। इंग्लैंड दौरे का हिस्सा रहे खिलाड़ी सीधे वहीं से जिम्बाब्वे रवाना होंगे जबकि बाकी खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ पहले ही टीम के साथ जुड़ चुके हैं। अंतरिम मुख्य कोच वीवीएस लक्ष्मण की देखरेख में टीम इस सीरीज में नई शुरुआत करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी।

    भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीनों मुकाबले हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले जाएंगे। पहला मैच 23 जुलाई दूसरा मुकाबला 25 जुलाई और तीसरा तथा अंतिम टी20 26 जुलाई को खेला जाएगा। सभी मैच भारतीय समयानुसार शाम 4 बजकर 30 मिनट पर शुरू होंगे जबकि टॉस आधा घंटा पहले होगा। लगातार तीन मुकाबलों की इस छोटी सीरीज में टीम इंडिया के पास अपनी गलतियों को सुधारने और आत्मविश्वास वापस हासिल करने का शानदार अवसर होगा।

    भारतीय टीम में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का संतुलित मिश्रण देखने को मिलेगा। कप्तान श्रेयस अय्यर के साथ उपकप्तान तिलक वर्मा बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभालेंगे। ईशान किशन और प्रभसिमरन सिंह विकेटकीपर की भूमिका में रहेंगे जबकि अभिषेक शर्मा रिंकू सिंह शिवम दुबे और वैभव सूर्यवंशी जैसे आक्रामक बल्लेबाज टीम की ताकत बढ़ाएंगे। गेंदबाजी विभाग में वरुण चक्रवर्ती मयंक यादव यश ठाकुर प्रिंस यादव अशोक शर्मा और हर्ष दुबे जैसे युवा गेंदबाज विपक्षी बल्लेबाजों को चुनौती देंगे।

    इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा था। पहले आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में हार मिली फिर इंग्लैंड ने टी20 और वनडे दोनों सीरीज अपने नाम कर ली। ऐसे में जिम्बाब्वे दौरा टीम इंडिया के लिए आत्मविश्वास लौटाने का सुनहरा अवसर माना जा रहा है। खासकर उन खिलाड़ियों के लिए जो आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में अपनी जगह मजबूत करना चाहते हैं।

    इस सीरीज का एक बड़ा आकर्षण युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी होंगे जिन्होंने घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अपने आक्रामक अंदाज से सभी का ध्यान खींचा है। फैंस को उम्मीद है कि वह जिम्बाब्वे के खिलाफ अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से टीम इंडिया को मजबूत शुरुआत दिलाएंगे और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ेंगे।

    भारतीय दर्शकों के लिए इस सीरीज की लाइव स्ट्रीमिंग फैनकोड के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद है कि इंग्लैंड दौरे की निराशा पीछे छोड़कर टीम इंडिया जिम्बाब्वे में जीत के साथ नए अभियान की शुरुआत करेगी और युवा सितारे अपने प्रदर्शन से भविष्य के लिए मजबूत दावेदारी पेश करेंगे।

  • लाइव शो के दौरान जैस्मिन सैंडलस हुईं असहज, वायरल वीडियो ने उठाए कलाकारों की सुरक्षा पर सवाल

    लाइव शो के दौरान जैस्मिन सैंडलस हुईं असहज, वायरल वीडियो ने उठाए कलाकारों की सुरक्षा पर सवाल


    नई दिल्ली। देहरादून में आयोजित एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान लोकप्रिय पंजाबी गायिका जैस्मिन सैंडलस के साथ कथित अभद्र व्यवहार की घटना ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान स्टेज के पास मौजूद भीड़ में से कुछ लोगों ने सिंगर को अनुचित तरीके से छूने की कोशिश की जिससे वह असहज नजर आईं। हालांकि इस घटना को लेकर जैस्मिन सैंडलस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है लेकिन वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर हो रही चर्चाओं ने कलाकारों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जैस्मिन सैंडलस हाल ही में देहरादून में अपने लाइव म्यूजिक शो के लिए पहुंची थीं। बड़ी संख्या में मौजूद दर्शकों ने उनके गानों पर जमकर उत्साह दिखाया और पूरे कार्यक्रम के दौरान शानदार माहौल बना रहा। परफॉर्मेंस के अंतिम चरण में जब जैस्मिन अपने प्रशंसकों का अभिवादन करने और उनसे हाथ मिलाने के लिए स्टेज के किनारे पहुंचीं तब अचानक भीड़ बेकाबू होती दिखाई दी। इसी दौरान वायरल वीडियो में कुछ लोग उन्हें छूते हुए नजर आते हैं और दावा किया जा रहा है कि इस हरकत से सिंगर असहज हो गईं।

    वीडियो में यह भी दिखाई देता है कि घटना के बाद स्टेज के पास अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। कुछ लोगों को एक-दूसरे को पीछे हटाते और बहस करते देखा गया। मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की और भीड़ को नियंत्रित किया। हालांकि वीडियो में पूरी घटना स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती इसलिए अलग-अलग दावे भी सामने आ रहे हैं। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि कथित तौर पर अनुचित तरीके से छूने वाला व्यक्ति एक महिला थी जबकि कुछ अन्य इसके विपरीत दावा कर रहे हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    घटना के बाद सोशल मीडिया पर जैस्मिन सैंडलस के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग सामने आए। यूजर्स ने कहा कि किसी भी कलाकार के साथ मंच पर या सार्वजनिक कार्यक्रम में इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। कई लोगों ने आयोजकों से भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने की मांग की ताकि कलाकार बिना किसी डर या असहजता के अपने प्रशंसकों के बीच प्रस्तुति दे सकें। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि फैन और कलाकार के बीच सम्मानजनक दूरी बनाए रखना हर दर्शक की जिम्मेदारी है।

    जैस्मिन सैंडलस पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। फिल्म धुरंधर के गानों से उन्हें नई पहचान मिली है और देशभर में उनके लाइव कॉन्सर्ट को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। हाल ही में उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान अपने मंगेतर शेखर चौधरी का परिचय भी प्रशंसकों से कराया था जिसके बाद उनकी निजी जिंदगी भी सुर्खियों में रही।

    फिलहाल देहरादून कॉन्सर्ट से जुड़ा यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना की आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार किया जा रहा है लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में कलाकारों की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर और अधिक सख्त इंतजाम किए जाने की आवश्यकता है।

  • बॉक्स ऑफिस पर 124 करोड़ के पार अब OTT पर दस्तक देगी धमाल 4 सामने आई रिलीज को लेकर बड़ी जानकारी

    बॉक्स ऑफिस पर 124 करोड़ के पार अब OTT पर दस्तक देगी धमाल 4 सामने आई रिलीज को लेकर बड़ी जानकारी


    नई दिल्ली। अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म धमाल 4 सिनेमाघरों में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रही है। रिलीज के बाद से फिल्म बॉक्स ऑफिस पर लगातार अच्छी कमाई कर रही है और अब इसकी OTT रिलीज को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिल्म देखने से चूक गए दर्शक यह जानना चाहते हैं कि आखिर यह एडवेंचर कॉमेडी कब और किस प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम होगी। हालांकि अभी तक निर्माताओं की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी संभावित OTT रिलीज को लेकर अहम जानकारी सामने आई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक धमाल 4 के डिजिटल स्ट्रीमिंग अधिकार नेटफ्लिक्स के पास हैं और फिल्म इसी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो सकती है। मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए अधिकांश बड़ी हिंदी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज होने के चार से छह सप्ताह बाद OTT पर आती हैं। इसी आधार पर माना जा रहा है कि यदि फिल्म का थिएटर प्रदर्शन सामान्य रहता है तो इसे अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर की शुरुआत में नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम किया जा सकता है। हालांकि दर्शकों को अंतिम तारीख के लिए आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

    धमाल फ्रेंचाइजी की चौथी कड़ी में एक बार फिर अजय देवगन के साथ रितेश देशमुख अरशद वारसी और जावेद जाफरी की लोकप्रिय तिकड़ी नजर आ रही है। इनके अलावा अंजलि आनंद संजीदा शेख और रवि किशन भी अहम भूमिकाओं में दिखाई दे रहे हैं। फिल्म में कॉमेडी के साथ एडवेंचर और मनोरंजन का तड़का लगाया गया है जिसने परिवार के साथ फिल्म देखने वाले दर्शकों को आकर्षित किया है।

    बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म ने मजबूत प्रदर्शन किया है। शुरुआती दस दिनों में फिल्म ने 124 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर लिया है। पहले सप्ताह के बाद भी इसकी कमाई स्थिर बनी हुई है जिससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में इसका कलेक्शन और बढ़ सकता है। यही वजह है कि निर्माता फिलहाल थिएटर रन का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं और इसके बाद ही OTT रिलीज की आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना है।

    हालांकि फिल्म को दर्शकों का अच्छा समर्थन मिला है लेकिन समीक्षकों की राय कुछ अलग रही। कई फिल्म समीक्षकों ने माना कि धमाल फ्रेंचाइजी की पहचान उसकी हल्की फुल्की कॉमेडी रही है लेकिन इस बार कहानी और हास्य शैली में अपेक्षित नया प्रयोग देखने को नहीं मिला। कुछ समीक्षकों ने कॉमेडी को पुराना बताया जबकि कुछ ने इसे पारिवारिक मनोरंजन के लिहाज से सफल फिल्म माना। इसके बावजूद दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन यह दिखाते हैं कि फिल्म ने अपनी अलग पहचान बनाने में सफलता हासिल की है।

    फिल्म का निर्देशन इंद्र कुमार ने किया है जो इससे पहले भी धमाल सीरीज की फिल्मों और कई सफल कॉमेडी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। उनकी शैली को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म एक बार फिर हल्के फुल्के मनोरंजन का पैकेज साबित हो रही है।

    जो दर्शक सिनेमाघरों में फिल्म नहीं देख पाए हैं उनके लिए OTT रिलीज एक अच्छा विकल्प होगी। हालांकि अभी तक रिलीज डेट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है इसलिए दर्शकों को निर्माताओं या स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की औपचारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

  • ओमिक्रॉन का नया सब वैरिएंट RF.5 चर्चा में कितना खतरनाक है नया कोविड स्ट्रेन क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    ओमिक्रॉन का नया सब वैरिएंट RF.5 चर्चा में कितना खतरनाक है नया कोविड स्ट्रेन क्या कहते हैं विशेषज्ञ


    नई दिल्ली। देश में एक बार फिर कोविड-19 के नए मामलों के बीच ओमिक्रॉन के सब वैरिएंट RF.5 की पहचान ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बढ़ा दी है। आंध्र प्रदेश में चार संक्रमित नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग के दौरान इस नए सब वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है लेकिन सावधानी और सतर्कता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

    जानकारी के अनुसार आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले से कोविड-19 के चार पॉजिटिव नमूनों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए पुणे स्थित वायरोलॉजी प्रयोगशाला भेजा गया था। जांच में इन सभी नमूनों में ओमिक्रॉन परिवार के RF.5 सब वैरिएंट की मौजूदगी पाई गई। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि संक्रमित मरीजों की निगरानी की जा रही है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक RF.5 कोई पूरी तरह नया वायरस नहीं बल्कि ओमिक्रॉन परिवार का ही एक विकसित सब वैरिएंट है। यह प्राकृतिक रूप से विकसित हुआ है और अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी उत्पत्ति पहले से मौजूद ओमिक्रॉन लाइनिएज के विकासक्रम से हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस वैरिएंट की निगरानी कर रहा है क्योंकि इसके मामले पहले सिंगापुर और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देशों में भी सामने आ चुके हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक उपलब्ध आंकड़ों से ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है कि RF.5 व्यापक स्तर पर पहले के ओमिक्रॉन वैरिएंट की तुलना में बहुत अधिक गंभीर बीमारी फैला रहा है। हालांकि इसकी संक्रमण क्षमता और व्यवहार को लेकर लगातार अध्ययन जारी हैं। इसलिए सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों को सतर्क रहने और कोविड संबंधी सावधानियों का पालन करने की सलाह दे रही हैं।

    RF.5 के लक्षण भी काफी हद तक ओमिक्रॉन के अन्य सब वैरिएंट जैसे बताए जा रहे हैं। संक्रमित व्यक्ति में गले में खराश खांसी बुखार सिरदर्द शरीर में दर्द थकान और कुछ मामलों में नाक बंद होने जैसी शिकायतें हो सकती हैं। अधिकांश मरीजों में लक्षण हल्के रहते हैं लेकिन बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड से बचाव के लिए पहले अपनाए गए उपाय आज भी प्रभावी हैं। नियमित रूप से साबुन से हाथ धोना या अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का उपयोग करना भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना और खांसी या बुखार जैसे लक्षण दिखाई देने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है। यदि किसी व्यक्ति में लगातार बुखार सांस लेने में तकलीफ या गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा जारी जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि सतर्कता जरूरी है लेकिन बिना पुष्टि वाली खबरों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। समय पर जांच उपचार और आवश्यक सावधानियां अपनाकर कोविड संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • अस्पताल की कथित गलती ने बदल दी दो परिवारों की किस्मत 38 साल बाद डीएनए टेस्ट से खुला जन्म का सबसे बड़ा राज

    अस्पताल की कथित गलती ने बदल दी दो परिवारों की किस्मत 38 साल बाद डीएनए टेस्ट से खुला जन्म का सबसे बड़ा राज


    नई दिल्ली। अमेरिका के नॉर्थ डकोटा राज्य से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने चिकित्सा व्यवस्था और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि वर्ष 1988 में एक अस्पताल की कथित लापरवाही के कारण जन्म के तुरंत बाद दो नवजात बच्चों की अदला-बदली हो गई और दोनों अपने जैविक माता-पिता की बजाय दूसरे परिवारों के साथ बड़े हुए। करीब 38 वर्ष तक किसी को इस गलती का पता नहीं चला। आखिरकार एक सामान्य डीएनए टेस्ट ने ऐसा सच उजागर किया जिसने दो परिवारों की पूरी दुनिया बदल दी।

    रिपोर्ट के अनुसार यह मामला नॉर्थ डकोटा के ग्राफ्टन शहर स्थित यूनिटी मेडिकल सेंटर से जुड़ा है। परिवारों का कहना है कि 26 जनवरी 1988 को अस्पताल में केवल दो बच्चों का जन्म हुआ था। आरोप है कि अस्पताल से छुट्टी के समय दोनों नवजातों को गलत परिवारों के साथ भेज दिया गया। इसके बाद दोनों बच्चे अपने नए परिवारों में पले बढ़े और उन्हें कभी इस बात का अंदाजा नहीं हुआ कि उनके जैविक माता-पिता कोई और हैं।

    समय के साथ दोनों ने सामान्य जीवन जिया। पढ़ाई की नौकरी की परिवार बसाया और अपने रिश्तों को उसी रूप में स्वीकार किया जैसा उन्हें बचपन से बताया गया था। हालांकि उनमें से एक व्यक्ति को बचपन से ही यह महसूस होता था कि उसका चेहरा और शारीरिक बनावट परिवार के अन्य सदस्यों से काफी अलग है। उस समय इसे सामान्य संयोग मान लिया गया लेकिन वर्षों बाद यही संदेह एक बड़े खुलासे की वजह बना।

    करीब दो वर्ष पहले दूसरे व्यक्ति ने अपने पारिवारिक इतिहास के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से डीएनए टेस्ट कराया। जांच रिपोर्ट में सामने आए परिणाम पूरी तरह अप्रत्याशित थे। रिपोर्ट ने ऐसे जैविक रिश्तों की ओर संकेत किया जिनके बारे में उन्हें पहले कोई जानकारी नहीं थी। इसके बाद आगे की जांच और पारिवारिक रिकॉर्ड की पड़ताल में कथित अदला-बदली की पूरी कहानी सामने आने लगी। परिवारों का दावा है कि जन्म के समय अस्पताल की पहचान पट्टी में दर्ज विवरण भी उनकी आशंकाओं को मजबूत करता है।

    सच्चाई सामने आने के बाद दोनों परिवारों के लिए भावनात्मक स्थिति बेहद कठिन हो गई। जिन लोगों को वे जीवनभर अपना माता-पिता और भाई-बहन मानते रहे थे उनके साथ रिश्ते तो बने रहे लेकिन अचानक यह जानना कि जैविक परिवार कोई और है किसी बड़े मानसिक आघात से कम नहीं था। दोनों पक्षों ने अपने वास्तविक परिवारों से मुलाकात की लेकिन लगभग चार दशक बाद नए रिश्तों को स्वीकार करना आसान नहीं रहा।

    परिवारों का आरोप है कि उन्होंने पहले अस्पताल के साथ बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद अस्पताल के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया गया। उनका कहना है कि अस्पताल की कथित लापरवाही ने दो परिवारों का जीवन पूरी तरह बदल दिया और उन्हें दशकों तक अपने वास्तविक रिश्तों से दूर रखा।

    वहीं अस्पताल ने इस मामले में परिवारों की भावनात्मक पीड़ा पर संवेदना जताई है लेकिन अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। अस्पताल ने अदालत से मामला खारिज करने की मांग की है। अब अंतिम निर्णय न्यायालय में पेश किए जाने वाले सबूतों और सुनवाई के आधार पर होगा।

    यह मामला केवल एक संभावित प्रशासनिक गलती का नहीं बल्कि पहचान रिश्तों और परिवार जैसी गहरी मानवीय भावनाओं का भी है। यदि अदालत में आरोप साबित होते हैं तो यह मामला चिकित्सा इतिहास के सबसे गंभीर लापरवाही के मामलों में गिना जा सकता है और भविष्य में अस्पतालों की सुरक्षा प्रक्रियाओं को और सख्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण भी बन सकता है।

  • अमेरिका में हरी मिर्च के दाम सुनकर चौंके भारतीय एक छोटे पैकेट की कीमत ने सोशल मीडिया पर मचा दी बहस

    अमेरिका में हरी मिर्च के दाम सुनकर चौंके भारतीय एक छोटे पैकेट की कीमत ने सोशल मीडिया पर मचा दी बहस


    नई दिल्ली। भारतीय रसोई में हरी मिर्च का महत्व किसी से छिपा नहीं है। दाल सब्जी चटनी सलाद या पराठा लगभग हर व्यंजन में इसका इस्तेमाल आम बात है। देश के कई हिस्सों में तो सब्जी खरीदते समय दुकानदार कुछ हरी मिर्च बिना अतिरिक्त पैसे लिए ही थैले में रख देता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इसी हरी मिर्च को चर्चा का विषय बना दिया है। वीडियो में अमेरिका में रहने वाली एक भारतीय महिला वहां बिकने वाली हरी मिर्च की कीमत दिखाती है जिसे देखकर बड़ी संख्या में भारतीय हैरान रह गए।

    वीडियो में महिला एक छोटा पैकेट दिखाती है जिसमें लगभग 114 ग्राम हरी मिर्च है। उसके अनुसार इस पैकेट में करीब 12 से 13 मिर्च हैं और इसकी कीमत भारतीय मुद्रा में लगभग 400 रुपये के बराबर पड़ती है। महिला का दावा है कि यदि इसी अनुपात से एक किलोग्राम की कीमत निकाली जाए तो यह करीब 3500 रुपये तक पहुंच सकती है। वीडियो में वह हल्के फुल्के अंदाज में कहती है कि भारत में इतनी मिर्च तो कई बार सब्जी वाला मुफ्त में दे देता है। यही तुलना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।

    वीडियो सामने आने के बाद भारतीय यूजर्स ने अलग अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने लिखा कि भारत के अधिकांश शहरों में 20 से 30 रुपये में अच्छी मात्रा में हरी मिर्च मिल जाती है। कुछ ने मजाक करते हुए कहा कि इतने पैसों में भारत में पूरे परिवार के लिए सब्जियां खरीदी जा सकती हैं। वहीं कुछ लोगों ने सलाह दी कि विदेश जाने वाले भारतीय अपने साथ हरी मिर्च ले जाया करें।

    हालांकि कई यूजर्स ने इस तुलना को अधूरा भी बताया। उनका कहना था कि केवल डॉलर को रुपये में बदलकर किसी वस्तु की कीमत की तुलना करना सही तस्वीर पेश नहीं करता। अमेरिका में औसत आय भारत की तुलना में कहीं अधिक है और वहां की क्रय शक्ति भी अलग है। इसलिए किसी भी वस्तु की वास्तविक लागत को समझने के लिए वहां की आय जीवनयापन का खर्च कर व्यवस्था और स्थानीय बाजार की स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में भारतीय भोजन में इस्तेमाल होने वाली कुछ विशेष किस्म की हरी मिर्च हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होती। कई बार इन्हें दूसरे क्षेत्रों या देशों से आयात किया जाता है। इसके अलावा पैकिंग परिवहन कोल्ड स्टोरेज और श्रम लागत जैसी कई वजहें भी कीमत बढ़ा देती हैं। यही कारण है कि कुछ भारतीय खाद्य सामग्री वहां अपेक्षाकृत महंगी दिखाई देती है।

    यह भी ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका के अलग अलग शहरों और स्टोर्स में कीमतें अलग हो सकती हैं। भारतीय ग्रॉसरी स्टोर एशियन मार्केट और बड़े सुपरमार्केट में एक ही वस्तु अलग कीमत पर मिल सकती है। इसी तरह मौसम और उपलब्धता के अनुसार दाम बदलते रहते हैं। इसलिए किसी एक वीडियो में दिखाई गई कीमत को पूरे अमेरिका का मानक नहीं माना जा सकता।

    भारत में भी हरी मिर्च की कीमत पूरे साल एक जैसी नहीं रहती। मौसम फसल और आपूर्ति के अनुसार इसके दाम बदलते रहते हैं। कई बार यह बेहद सस्ती होती है तो कई बार कीमत काफी बढ़ जाती है। यह वायरल वीडियो केवल हरी मिर्च की कीमत का नहीं बल्कि भारत और विदेश की जीवनशैली तथा खर्च के अंतर पर भी चर्चा छेड़ रहा है। यही वजह है कि यह वीडियो लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गया है।