Author: bharati

  • दिल्ली में मोदी–विजय बैठक, मेकेदातु विवाद के बीच तमिलनाडु सीएम की पीएम से पहली औपचारिक भेंट

    दिल्ली में मोदी–विजय बैठक, मेकेदातु विवाद के बीच तमिलनाडु सीएम की पीएम से पहली औपचारिक भेंट

    नई दिल्ली । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री Vijay ने बुधवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi से नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसे दोनों नेताओं के बीच पिछले एक दशक से अधिक समय के बाद हुई महत्वपूर्ण राजनीतिक भेंट माना जा रहा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी प्रधानमंत्री से पहली औपचारिक मुलाकात रही, जिससे राजनीतिक हलकों में इस बैठक को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी इस मुलाकात की जानकारी साझा की गई, जिसमें इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया। हालांकि आधिकारिक बयान में विस्तृत एजेंडा सामने नहीं आया, लेकिन माना जा रहा है कि बातचीत का केंद्र तमिलनाडु से जुड़े विकास मुद्दे, केंद्र प्रायोजित योजनाएं और राज्य में चल रही परियोजनाएं रहीं।

    यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब दक्षिण भारत की राजनीति में कावेरी जल विवाद से जुड़े मेकेदातु प्रोजेक्ट को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। तमिलनाडु सरकार लंबे समय से इस परियोजना का विरोध कर रही है और मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। राज्य सरकार का कहना है कि कावेरी नदी पर किसी भी नए बांध या परियोजना से तमिलनाडु के हिस्से के जल प्रवाह पर असर पड़ सकता है, जिससे कृषि क्षेत्र और किसानों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसी पृष्ठभूमि में यह मुलाकात राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

    मुख्यमंत्री विजय का राजनीतिक सफर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाते हुए राज्य में नई पार्टी का गठन किया और धीरे-धीरे जनाधार मजबूत किया। उनके नेतृत्व में पार्टी ने युवा मतदाताओं और शहरी क्षेत्रों में प्रभावशाली समर्थन हासिल किया, जिससे पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिला। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी यह दिल्ली यात्रा पहली बड़ी औपचारिक राजनीतिक मुलाकातों में से एक मानी जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, विजय और प्रधानमंत्री मोदी की यह मुलाकात लगभग 12 साल बाद हुई है। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कोयंबटूर में हुई थी, जब विजय एक अभिनेता के रूप में राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। अब दोनों नेताओं का मिलना पूरी तरह से अलग राजनीतिक संदर्भ में हुआ है, जहां एक तरफ प्रधानमंत्री देश के शीर्ष नेतृत्व में हैं और दूसरी ओर विजय एक राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में केंद्र से संवाद कर रहे हैं।

    बैठक के दौरान प्रशासनिक सहयोग, विकास योजनाओं और केंद्र-राज्य समन्वय से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। तमिलनाडु सरकार का जोर राज्य में बुनियादी ढांचे, औद्योगिक निवेश और कृषि क्षेत्र के विकास पर है, जिसके लिए केंद्र सरकार के साथ बेहतर तालमेल को जरूरी माना जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुलाकात केवल शिष्टाचार भेंट नहीं बल्कि भविष्य की राजनीतिक दिशा को भी संकेत देती है। विशेषकर मेकेदातु जैसे संवेदनशील मुद्दे और राज्य-केंद्र संबंधों की पृष्ठभूमि में यह बैठक आने वाले समय में नीतिगत फैसलों पर असर डाल सकती है। फिलहाल दोनों पक्षों ने इसे सकारात्मक और औपचारिक बातचीत बताया है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थों पर नजर बनी हुई है।

  • 45°C की आग उगलती गर्मी में ऐसे बचाएं खुद को, नौतपा में भूलकर भी न करें ये गलतियां

    45°C की आग उगलती गर्मी में ऐसे बचाएं खुद को, नौतपा में भूलकर भी न करें ये गलतियां


    नई दिल्ली । नौतपा के नौ दिन साल के सबसे गर्म दिनों में गिने जाते हैं। इस दौरान सूरज की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं और तापमान कई शहरों में 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। तेज धूप, गर्म हवाएं और लू शरीर पर तेजी से असर डालती हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी डीहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती है। खासकर उन लोगों के लिए खतरा ज्यादा बढ़ जाता है जिन्हें रोजमर्रा के काम, नौकरी, व्यापार या यात्रा के कारण घर से बाहर निकलना पड़ता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक नौतपा में सबसे जरूरी है कि शरीर को ज्यादा गर्म होने से बचाया जाए और पानी की कमी न होने दी जाए। डॉक्टरों का कहना है कि अगर सही सावधानी बरती जाए तो इस भीषण गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    घर से बाहर निकलते समय कुछ जरूरी चीजें हमेशा साथ रखनी चाहिए। पानी की बोतल, ORS या ग्लूकोज, छाता या टोपी, सनग्लास, गमछा या कॉटन कपड़ा, हल्का स्नैक और जरूरी दवाइयां साथ रखना बेहद जरूरी माना गया है। धूप में निकलते समय सिर और चेहरे को ढंकना लू से बचाने में काफी मदद करता है।

    नौतपा के दौरान सुबह 6 बजे से 10 बजे तक और शाम 5 बजे के बाद बाहर निकलना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक का समय सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। इस दौरान गर्म हवाएं और तेज धूप शरीर का तापमान तेजी से बढ़ा देती हैं। यदि जरूरी काम न हो तो इस समय बाहर निकलने से बचना चाहिए।

    पैदल चलने वालों और बाइक सवारों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। बाइक चलाते समय फुल स्लीव कपड़े, ग्लव्स और हेलमेट का इस्तेमाल करें। हेलमेट के अंदर कॉटन का कपड़ा लगाने से सिर जल्दी गर्म नहीं होता। वहीं पैदल चलने वाले लोग बीच-बीच में छांव में रुककर आराम करें और हर 20 से 30 मिनट में पानी पीते रहें। खाली पेट बाहर निकलना भी खतरनाक हो सकता है।

    डॉक्टरों के अनुसार कुछ शारीरिक संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार सिरदर्द, चक्कर आना, ज्यादा पसीना आना या अचानक पसीना बंद हो जाना, तेज कमजोरी, उल्टी, सांस लेने में दिक्कत, शरीर का तापमान बढ़ना, बेहोशी या दिल की धड़कन तेज होना हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत छांव या ठंडी जगह पर जाएं और मेडिकल मदद लें।

    नौतपा में सिर्फ पानी पीना काफी नहीं होता। शरीर से पसीने के साथ जरूरी मिनरल्स भी निकल जाते हैं। इसलिए ORS, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और बेल या आम पना जैसे देसी पेय शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। बहुत ज्यादा चाय, कॉफी, शराब और कोल्ड ड्रिंक्स से बचना चाहिए क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं।

    बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में खास देखभाल की जरूरत होती है। बच्चों को धूप में खेलने से बचाएं और उन्हें बार-बार पानी या तरल पदार्थ देते रहें। वहीं बुजुर्गों को लंबे समय तक गर्मी में न रहने दें। जिन लोगों को ब्लड प्रेशर, शुगर, हार्ट या सांस की बीमारी है उन्हें अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है।

    नौतपा के दौरान लाइफस्टाइल में भी बदलाव जरूरी है। हल्का और सुपाच्य भोजन करें। तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और मौसमी फल डाइट में शामिल करें। ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर में हवा का संचार बना रहे। पर्याप्त नींद और आराम भी शरीर को गर्मी से लड़ने की ताकत देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नौतपा को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। सही सावधानी और जागरूकता ही इस भीषण गर्मी में सबसे बड़ा बचाव है।

  • चारधाम यात्रा पर भारी पड़ रही ऊंचाई और गर्मी, 39 दिन में 105 श्रद्धालुओं की मौत

    चारधाम यात्रा पर भारी पड़ रही ऊंचाई और गर्मी, 39 दिन में 105 श्रद्धालुओं की मौत


    नई दिल्ली । उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस बार आस्था के साथ-साथ चिंता का विषय भी बनती जा रही है। यात्रा शुरू होने के महज 39 दिनों के भीतर 105 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर मौतें हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, सांस की तकलीफ और पुरानी बीमारियों के कारण हुई हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार मौतों का आंकड़ा कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ा है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और यात्रा प्रबंधन पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल 14 मई तक 40 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी, लेकिन इसके बाद बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ती भीड़ के बीच सिर्फ 14 दिनों में 65 और लोगों ने जान गंवा दी। सबसे ज्यादा 50 मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं, जबकि बद्रीनाथ में 30, यमुनोत्री में 15 और गंगोत्री-गौमुख क्षेत्र में 10 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई है।

    हाल ही में टिहरी जिले के देवप्रयाग में महाराष्ट्र से आए दो श्रद्धालुओं की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मृतकों में 49 वर्षीय किशन नरहरि और 81 वर्षीय विमल ज्ञानोबा शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ज्यादातर श्रद्धालु ऊंचाई वाले इलाकों में शरीर पर पड़ने वाले दबाव को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।

    चारधाम यात्रा में इस बार रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है। अब तक 23 लाख से ज्यादा श्रद्धालु गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पहुंच चुके हैं, जबकि रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 42 लाख के पार पहुंच गया है। सबसे ज्यादा भीड़ केदारनाथ धाम में उमड़ी है, जहां 9 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। बद्रीनाथ में 6 लाख 42 हजार, यमुनोत्री और गंगोत्री में 4-4 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।

    सरकार लगातार दावा कर रही है कि यात्रा मार्ग पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मेडिकल कैंप, डॉक्टर, एम्बुलेंस और स्वास्थ्य टीमों की तैनाती की गई है। यात्रा शुरू होने से पहले एडवाइजरी जारी कर बुजुर्गों, हृदय रोगियों, हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई थी। बावजूद इसके लगातार बढ़ रही मौतों ने यात्रा की चुनौतियों को उजागर कर दिया है।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल ने कहा कि कई श्रद्धालु अति उत्साह में शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर तेजी से यात्रा पूरी करने की कोशिश करते हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी और लगातार चढ़ाई की वजह से हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि अगर सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत यात्रा रोककर चिकित्सकीय मदद लें।

    चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। कपाट खुलने के बाद से ही चारों धामों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

    आस्था के इस महापर्व में जहां करोड़ों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं लगातार बढ़ती मौतों ने यह साफ कर दिया है कि पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों की यात्रा को हल्के में लेना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

  • पद्मनाभस्वामी मंदिर में सुरक्षा पर बड़ा सवाल, खजाने से गायब हुए सोने और हीरे के बहुमूल्य आभूषण

    पद्मनाभस्वामी मंदिर में सुरक्षा पर बड़ा सवाल, खजाने से गायब हुए सोने और हीरे के बहुमूल्य आभूषण


    नई दिल्ली । केरल के ऐतिहासिक और विश्वप्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मंदिर के खजाने से सोने और हीरे के बहुमूल्य आभूषणों के गायब होने की खबर सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच और पुलिस रिपोर्ट में मंदिर की इन्वेंट्री में कई महत्वपूर्ण वस्तुओं की कमी दर्ज की गई है, जिसके बाद मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। देश के सबसे समृद्ध और प्रतिष्ठित मंदिरों में शामिल इस धार्मिक स्थल से जुड़े इस घटनाक्रम ने श्रद्धालुओं और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

    पुलिस महानिदेशक द्वारा गृह विभाग को सौंपी गई विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार मंदिर के रिकॉर्ड में लगभग 78 ग्राम सोने के आभूषण कम पाए गए हैं। इसके साथ ही ‘वैरम नामा’ नामक हीरे से जड़ा एक अत्यंत कीमती आभूषण भी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं मिला। बताया जा रहा है कि यह आभूषण कई महीने पहले मरम्मत के लिए बाहर भेजा गया था, लेकिन अब तक उसे वापस मंदिर में जमा नहीं कराया गया। इसी प्रकार मंदिर का एक सोने का दीया भी रखरखाव कार्य के लिए बाहर भेजा गया था, जो अभी तक वापस नहीं आया है।

    मामले के सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सदियों पुराने इस मंदिर में मौजूद संपत्तियों और बहुमूल्य धरोहरों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही विशेष सतर्कता बरती जाती रही है, लेकिन अब सामने आई इस चूक ने पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता को चुनौती दी है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इतने संवेदनशील और ऐतिहासिक महत्व वाले मंदिर में रिकॉर्ड प्रबंधन और निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।

    रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई अहम सुझाव भी दिए गए हैं। इसमें मंदिर की सभी सोने और चांदी की वस्तुओं को सुरक्षित तिजोरियों में रखने की अनुशंसा की गई है। इसके अलावा श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे के लिए अलग और सुरक्षित लॉकर व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। मंदिर परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सख्त जांच सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है, ताकि बिना उचित सत्यापन के कोई भी संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंच न सके।

    श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध माना जाता है। तिरुवनंतपुरम स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और दक्षिण भारत की श्री वैष्णव परंपरा में इसका विशेष धार्मिक महत्व है। मंदिर को देश ही नहीं बल्कि विश्व के सबसे धनी मंदिरों में गिना जाता है। वर्षों पहले मंदिर के गुप्त तहखानों से मिले बहुमूल्य खजाने ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था। ऐसे में अब आभूषणों के गायब होने की खबर ने सुरक्षा और संरक्षण व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।

    प्रशासन फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच में जुटा हुआ है। मंदिर से जुड़े रिकॉर्ड, मरम्मत प्रक्रिया और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की विस्तार से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं श्रद्धालुओं की मांग है कि मंदिर की प्राचीन धरोहरों की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक और पारदर्शी निगरानी प्रणाली को तत्काल लागू किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

  • एयर इंडिया पर बढ़ा परिचालन दबाव: तकनीकी खराबी से बीच सफर लौटी फ्लाइट, अब घरेलू उड़ानों में भी कटौती की तैयारी

    एयर इंडिया पर बढ़ा परिचालन दबाव: तकनीकी खराबी से बीच सफर लौटी फ्लाइट, अब घरेलू उड़ानों में भी कटौती की तैयारी

    नई दिल्ली । एयर इंडिया की दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को जा रही एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान बुधवार को तकनीकी खराबी के कारण बीच रास्ते से वापस लौट आई। करीब आठ घंटे तक हवा में रहने के बाद विमान की दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। इस घटना के दौरान विमान में लगभग 230 यात्री सवार थे, जिनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पायलट ने एहतियातन उड़ान को वापस दिल्ली मोड़ने का फैसला लिया। घटना के बाद एयर इंडिया ने विमान की विस्तृत तकनीकी जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार बोइंग 777-300 ईआर विमान ने निर्धारित समय पर दिल्ली से उड़ान भरी थी और वह सैन फ्रांसिस्को के लिए लंबी अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर था। उड़ान भरने के कुछ घंटों बाद विमान के तकनीकी सिस्टम में गड़बड़ी के संकेत मिले। उस समय विमान विदेशी हवाई क्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहा था। संभावित जोखिम को देखते हुए पायलट और एयरलाइन की तकनीकी टीम ने तत्काल स्थिति की समीक्षा की और सुरक्षा मानकों के तहत विमान को वापस दिल्ली लाने का निर्णय लिया गया।

    विमान की सुरक्षित लैंडिंग के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की ग्राउंड टीम ने यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की। प्रभावित यात्रियों को होटल, भोजन और दूसरी उड़ानों की सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। एयरलाइन ने यात्रियों को हुई असुविधा पर खेद जताते हुए कहा कि सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और विमान की गहन तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।

    इस घटना ने एक बार फिर देश में विमान सुरक्षा और एयरलाइंस के बढ़ते परिचालन दबाव को लेकर बहस तेज कर दी है। हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन साथ ही तकनीकी रखरखाव, ईंधन लागत और परिचालन खर्च भी लगातार बढ़ रहे हैं। विमानन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी दूरी की उड़ानों में तकनीकी निगरानी और रखरखाव की जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि ऐसे विमानों में छोटी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़े जोखिम का कारण बन सकती है।

    इसी बीच एयर इंडिया की ओर से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती की तैयारी की खबर ने भी यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। बढ़ती ईंधन कीमतों और भारी परिचालन लागत के कारण एयरलाइन आने वाले महीनों में अपनी उड़ानों के फेरों को सीमित करने की योजना बना रही है। जानकारी के मुताबिक जून से अगस्त 2026 के बीच कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूटों पर उड़ानों की संख्या कम की जा सकती है। एयरलाइन का कहना है कि यह कदम परिचालन लागत को नियंत्रित करने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए उठाया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ानों में कटौती का असर यात्रियों पर सीधे तौर पर पड़ सकता है। टिकटों की उपलब्धता कम होने से किराए बढ़ सकते हैं और यात्रियों को शेड्यूल में बदलाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वहीं एयर इंडिया के सामने एक ओर सुरक्षा मानकों को बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर आर्थिक दबाव के बीच परिचालन संतुलन कायम रखना भी बड़ी जिम्मेदारी बन गया है। फिलहाल एयरलाइन ने साफ किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और तकनीकी जांच पूरी होने तक संबंधित विमान को सेवा में शामिल नहीं किया जाएगा।

  • पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल बढ़ी, BJP सांसद का दावा- हरी झंडी मिलते ही TMC में बड़ा टूट संभव

    पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल बढ़ी, BJP सांसद का दावा- हरी झंडी मिलते ही TMC में बड़ा टूट संभव

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक बदलाव की अटकलों ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद सौमित्र खान के एक बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसद और 50 विधायक भाजपा के संपर्क में हैं और पार्टी नेतृत्व की अनुमति मिलते ही वे पाला बदल सकते हैं। इस बयान के सामने आने के बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।

    लगातार तीसरी बार लोकसभा पहुंचे सौमित्र खान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कई जनप्रतिनिधि अपनी ही पार्टी की कार्यप्रणाली और नेतृत्व से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष का माहौल बना हुआ है और कई नेता राजनीतिक भविष्य को लेकर नई संभावनाओं की तलाश में हैं। खान ने कहा कि यदि भाजपा नेतृत्व चाहे तो आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है। हालांकि उन्होंने उन नेताओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए जो कथित तौर पर भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

    इस दावे के बाद राजनीतिक गलियारों में दल-बदल विरोधी कानून को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के पास 29 सांसद हैं, जबकि भाजपा के पास 12 और कांग्रेस के पास एक सीट है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ पार्टी बदलते हैं तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता पर खतरा नहीं रहता। ऐसे में 29 सांसदों वाली पार्टी के लिए यह आंकड़ा लगभग 19 से 20 सांसदों का बनता है, जो सौमित्र खान के दावे के काफी करीब माना जा रहा है।

    दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा सांसद के बयान को पूरी तरह निराधार बताया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि भाजपा जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है और ऐसा कोई राजनीतिक संकट तृणमूल कांग्रेस में मौजूद नहीं है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए इस तरह के दावे कर रही है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। तृणमूल कांग्रेस ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह एकजुट है और नेतृत्व के खिलाफ किसी तरह की नाराजगी जैसी बातें केवल राजनीतिक प्रचार का हिस्सा हैं।

    पश्चिम बंगाल में दलबदल की राजनीति कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले भी तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने भाजपा का दामन थामा था। हालांकि चुनाव के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और कई नेता फिर से अपनी पुरानी पार्टी में लौट गए। लेकिन इस बार राज्य की राजनीति पहले से अलग नजर आ रही है। बीते कुछ समय में तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों पर असंतोष जाहिर किए जाने की घटनाओं ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए पश्चिम बंगाल में सियासी समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। भाजपा लगातार राज्य में अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सक्रिय रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में सौमित्र खान का यह बयान आने वाले समय में बंगाल की राजनीति को और अधिक दिलचस्प बना सकता है।

  • मई का अंतिम प्रदोष व्रत 28 मई को, प्रदोष काल में करें शिव पूजा, मिलेगा विशेष फल

    मई का अंतिम प्रदोष व्रत 28 मई को, प्रदोष काल में करें शिव पूजा, मिलेगा विशेष फल


    नई दिल्ली । मई 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत बेहद खास माना जा रहा है। इस बार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि गुरुवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है, लेकिन गुरुवार के संयोग के कारण इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व बढ़ जाता है। माना जाता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर शिवजी और विष्णुजी दोनों की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन के दुख और बाधाएं दूर होती हैं।

    पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी तिथि का आरंभ 28 मई 2026 गुरुवार सुबह 7 बजकर 58 मिनट पर होगा। वहीं यह तिथि 29 मई शुक्रवार सुबह 9 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल के आधार पर व्रत और पूजा 28 मई को ही की जाएगी। गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जा रहा है।

    हिंदू धर्म में प्रदोष काल का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। इस बार प्रदोष काल 28 मई को शाम 6 बजकर 12 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। सूर्यास्त का समय शाम 7 बजकर 12 मिनट बताया गया है। सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और बाद का समय प्रदोष काल माना जाता है।

    गुरु प्रदोष व्रत की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर को साफ कर चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें और घी का दीपक जलाएं।

    शाम के समय प्रदोष काल में शिव मंदिर जाकर भगवान शिव का जल, दूध, दही, शहद और शक्कर से अभिषेक करें। शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करें और चंदन लगाएं। इसके बाद शिव मंत्रों का जप करें तथा प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान शिव की आरती कर भोग अर्पित करें और प्रसाद परिवार में बांटें।

    चूंकि यह व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए भगवान विष्णु की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। विष्णुजी के सामने घी का दीपक जलाकर उनकी आराधना करने से सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है।

  • चुनाव आयोग की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, कहा- निष्पक्ष लोकतंत्र के लिए जरूरी है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन

    चुनाव आयोग की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, कहा- निष्पक्ष लोकतंत्र के लिए जरूरी है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन

    नई दिल्ली । देश में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया। सर्वोच्च अदालत ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के लिए कराए जाने वाले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी विशेष गहन संशोधन को पूरी तरह संवैधानिक और वैध करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची का समय-समय पर सुधार और शुद्धिकरण आवश्यक है तथा यह चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि चुनाव आयोग को कानून के तहत विशेष परिस्थितियों में मतदाता सूची का विशेष संशोधन कराने का अधिकार प्राप्त है। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर इस प्रक्रिया को गलत नहीं ठहराया जा सकता कि यह सामान्य संशोधन प्रक्रिया से अलग है। यदि चुनाव आयोग को उचित कारण दिखाई देते हैं तो वह किसी भी समय मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का आदेश दे सकता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान का अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की व्यापक जिम्मेदारी देता है। इसी संवैधानिक दायित्व को प्रभावी बनाने के लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में आयोग को मतदाता सूची के संशोधन और शुद्धिकरण की शक्तियां दी गई हैं। अदालत ने माना कि विशेष गहन संशोधन की प्रक्रिया इन प्रावधानों के अनुरूप है और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने का कार्य करती है।

    पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मतदाता के दस्तावेजों में गंभीर विसंगति दिखाई देती है या नागरिकता को लेकर संदेह उत्पन्न होता है तो चुनाव आयोग को संबंधित नामों की जांच और आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार है। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि दस्तावेज मांगने या सत्यापन कराने का अर्थ यह नहीं माना जा सकता कि संबंधित व्यक्ति की नागरिकता पर अंतिम रूप से सवाल खड़ा किया जा रहा है। यह केवल मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि चुनाव आयोग ने मतदाताओं को पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए थे। नाम जोड़ने, सुधार कराने, आपत्ति दर्ज करने और अपील करने जैसी व्यवस्थाएं प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाती हैं। नोटिस जारी करना, सार्वजनिक सूचना देना और कानूनी उपाय उपलब्ध कराना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप माना गया।

    दरअसल, इस मामले में कई याचिकाएं दायर कर चुनाव आयोग की विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इतने बड़े स्तर पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराने का अधिकार चुनाव आयोग को प्राप्त नहीं है और यह प्रक्रिया नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। कुछ याचिकाओं में यह भी कहा गया था कि पूर्वजों से जुड़े दस्तावेज मांगना अत्यधिक कठोर शर्त है।

    अदालत ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और अद्यतन होना अनिवार्य है। यदि गलत या अपात्र नाम सूची में बने रहते हैं तो इससे लोकतंत्र की मूल भावना प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियों की बड़ी पुष्टि माना जा रहा है और आने वाले समय में यह निर्णय चुनावी सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है।

  • दिग्विजय सिंह को फिर राज्यसभा भेजने की मांग तेज, दिल्ली में कांग्रेस करेगी मंथन

    दिग्विजय सिंह को फिर राज्यसभा भेजने की मांग तेज, दिल्ली में कांग्रेस करेगी मंथन


    भोपाल । मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के भीतर एक बार फिर वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को राज्यसभा भेजने की मांग जोर पकड़ने लगी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने खुलकर कहा है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए दिग्विजय सिंह को राज्यसभा भेजा जाना चाहिए।

    पीसी शर्मा ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार हाईकमान के साथ चर्चा कर अंतिम निर्णय लेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि जल्द ही कांग्रेस अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकती है। उनके अनुसार दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेता भी इस मामले में अपना निर्णय और राय देंगे।

    इधर राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस आलाकमान के स्तर पर दिल्ली में रणनीतिक बैठक होने जा रही है। बताया जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीटों को लेकर विस्तार से चर्चा होगी और संभावित नामों पर मंथन किया जाएगा।

    सूत्रों के मुताबिक तीन दिनों में दूसरी बार राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर चर्चा हो रही है। पार्टी के भीतर रायशुमारी कर एक नाम पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस फिलहाल अपने एकमात्र संभावित सीट के लिए ऐसा चेहरा तलाश रही है जो संगठन और सियासी समीकरण दोनों के लिहाज से मजबूत माना जाए।

    वहीं कांग्रेस के इस मंथन पर बीजेपी ने भी तंज कसा है। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस में नेताओं के बीच एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ मची हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की हालत ऐसी हो चुकी है कि उसकी हर बैठक विवाद और खींचतान का कारण बन रही है।

    राज्यसभा चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 1 जून 2026 से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी जबकि 11 जून नाम वापसी की अंतिम तारीख तय की गई है। मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू की जाएगी।

    देश के 10 राज्यों की कुल 24 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। मध्यप्रदेश में तीन सीटों पर मतदान होगा। इनमें दिग्विजय सिंह, जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
    मध्यप्रदेश विधानसभा में वर्तमान संख्या बल के हिसाब से भाजपा के 164 और कांग्रेस के 64 विधायक हैं। इसी गणित के अनुसार बीजेपी को दो सीटें और कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है।

  • बेंगलुरु एयरपोर्ट पर इबोला का अलर्ट, युगांडा से लौटी महिला में संदिग्ध लक्षण मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर

    बेंगलुरु एयरपोर्ट पर इबोला का अलर्ट, युगांडा से लौटी महिला में संदिग्ध लक्षण मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर

    नई दिल्ली । इबोला वायरस को लेकर दुनियाभर में बढ़ती चिंता के बीच कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक संदिग्ध मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। युगांडा से भारत पहुंची 28 वर्षीय महिला में इबोला संक्रमण से जुड़े संभावित लक्षण दिखाई देने पर उसे तत्काल आइसोलेशन में भर्ती कराया गया है। एयरपोर्ट पर मेडिकल जांच के दौरान महिला की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने बिना किसी देरी के स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक प्रोटोकॉल लागू कर दिए। इस घटना के बाद एयरपोर्ट प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार महिला हाल ही में अफ्रीकी क्षेत्र से यात्रा करके बेंगलुरु पहुंची थी। एयरपोर्ट पर नियमित स्क्रीनिंग के दौरान उसके स्वास्थ्य को लेकर संदेह पैदा हुआ। प्रारंभिक जांच में शरीर दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण सामने आने के बाद मेडिकल टीम ने अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए उसे तुरंत निगरानी में ले लिया। बाद में महिला को शहर के निर्धारित महामारी अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां विशेष आइसोलेशन वार्ड में उसका इलाज और निगरानी की जा रही है। डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    स्वास्थ्य अधिकारियों ने महिला के सैंपल एकत्र कर उन्हें पुणे स्थित राष्ट्रीय स्तर की वायरोलॉजी प्रयोगशाला में जांच के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट आने तक महिला को पूर्ण चिकित्सा निगरानी में रखा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों के अनुसार दोबारा परीक्षण भी कराया जाएगा ताकि किसी प्रकार की आशंका को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके। फिलहाल जांच रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

    बताया जा रहा है कि बेंगलुरु पहुंचने के बाद महिला एक होटल में रुकी थी। वहीं उसे शरीर में असहजता और दर्द महसूस हुआ, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी मिली। सूचना मिलते ही मेडिकल टीम सक्रिय हुई और महिला को होटल से सीधे अस्पताल पहुंचाया गया। इसके साथ ही उसके संपर्क में आए लोगों की जानकारी भी जुटाई जा रही है ताकि आवश्यकता पड़ने पर एहतियाती निगरानी की जा सके।

    इबोला वायरस को विश्व के सबसे गंभीर और घातक संक्रमणों में गिना जाता है। हाल के महीनों में अफ्रीकी देशों में इसके मामलों में वृद्धि देखी गई है। इसी स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने पहले ही कई देशों को सतर्क रहने की सलाह दी थी। कर्नाटक सरकार ने भी प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू कर रखी है। एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग बढ़ाई गई है और विदेश से लौटने वाले यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी निर्देश दिए जा रहे हैं।

    राज्य सरकार ने संभावित संक्रमण से निपटने के लिए विशेष अस्पतालों और क्वारंटाइन केंद्रों की व्यवस्था पहले से तैयार कर रखी है। बेंगलुरु सहित तटीय क्षेत्रों में भी अलग आइसोलेशन सुविधाएं बनाई गई हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की आवश्यकता नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार सतर्कता, समय पर जांच और संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का पालन ही ऐसे मामलों में सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।