Author: bharati

  • सिर्फ कुछ सेंटीमीटर ऊंची यह पहाड़ी बनी दुनिया भर में चर्चा का विषय बिना ट्रेनिंग हर कोई बन जाता है पर्वतारोही

    सिर्फ कुछ सेंटीमीटर ऊंची यह पहाड़ी बनी दुनिया भर में चर्चा का विषय बिना ट्रेनिंग हर कोई बन जाता है पर्वतारोही


    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वतों का नाम आते ही लोगों के मन में माउंट एवरेस्ट हिमालय और कंचनजंगा जैसी विशाल चोटियों की तस्वीर उभर आती है। इन पर्वतों पर चढ़ना साहस धैर्य और कठिन प्रशिक्षण की मांग करता है। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसी जगह भी चर्चा में है जिसे दुनिया की सबसे छोटी पहाड़ी कहा जा रहा है। यह जगह अपने आकार से ज्यादा अपने अनोखे दावे और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की वजह से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

    सोशल मीडिया पर इसे माउंट पॉल्ट्री के नाम से प्रचारित किया जा रहा है। दावा किया जाता है कि इसकी ऊंचाई केवल कुछ सेंटीमीटर है और कई पोस्ट में इसे लगभग सात सेंटीमीटर ऊंचा बताया गया है। यही वजह है कि यहां पहुंचने वाले लोग मजाकिया अंदाज में खुद को दुनिया की सबसे छोटी पहाड़ी का विजेता बताते हुए फोटो और वीडियो साझा करते हैं। हालांकि इस दावे की किसी आधिकारिक भूगोल या वैज्ञानिक संस्था द्वारा पुष्टि नहीं की गई है और इसे अधिकतर इंटरनेट पर वायरल सामग्री के रूप में ही देखा जाता है।

    इस कथित पहाड़ी की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां किसी विशेष प्रशिक्षण या पर्वतारोहण उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती। जहां बड़े पर्वतों पर चढ़ने में कई दिन लग जाते हैं वहीं इस छोटे प्राकृतिक उभार को बच्चे बुजुर्ग और यहां तक कि पालतू जानवर भी कुछ ही कदमों में पार कर लेते हैं। यही सरलता इसे लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनाती है और परिवारों के लिए यह एक मनोरंजक अनुभव बन जाता है।

    पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में क्वर्की टूरिज्म यानी अनोखी और अलग तरह की जगहों पर घूमने का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग अब केवल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रहना चाहते बल्कि ऐसी जगहों की तलाश करते हैं जिनकी कहानी रोचक हो और जिसे सोशल मीडिया पर साझा किया जा सके। माउंट पॉल्ट्री भी इसी वजह से चर्चा में आया है। यहां आने वाले पर्यटक कुछ सेकंड की चढ़ाई को भी खास उपलब्धि की तरह पेश करते हैं और मजेदार कैप्शन के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हैं।

    हालांकि भूगोल के विशेषज्ञ किसी स्थान को पहाड़ या पर्वत मानने के लिए उसकी ऊंचाई प्राकृतिक संरचना और भौगोलिक विशेषताओं का अध्ययन करते हैं। ऐसे में इतनी कम ऊंचाई वाले प्राकृतिक उभार को अधिकतर विशेषज्ञ पहाड़ी की बजाय छोटा टीला या प्राकृतिक उभार मानते हैं। इसलिए माउंट पॉल्ट्री को दुनिया की सबसे छोटी पहाड़ी कहना एक लोकप्रिय दावा जरूर है लेकिन इसे स्थापित भौगोलिक तथ्य नहीं माना जाता।

    फिर भी इस अनोखी जगह ने यह साबित कर दिया है कि किसी स्थान की लोकप्रियता केवल उसके आकार से तय नहीं होती। जहां एक ओर दुनिया की ऊंची चोटियां साहस और रोमांच का प्रतीक हैं वहीं दूसरी ओर इस तरह की छोटी और अनोखी जगहें लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने का काम करती हैं। यही कारण है कि इंटरनेट पर माउंट पॉल्ट्री लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे देखने तथा अपनी यादगार तस्वीरें लेने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

  • ईरान का सख्त संदेश परमाणु कार्यक्रम पर नहीं होगा समझौता विदेश मंत्री बोले होर्मुज हमारी सबसे बड़ी ताकत

    ईरान का सख्त संदेश परमाणु कार्यक्रम पर नहीं होगा समझौता विदेश मंत्री बोले होर्मुज हमारी सबसे बड़ी ताकत


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक बार फिर बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ईरान को न तो धमकी देकर झुका सकते हैं और न ही किसी तरह का लालच देकर उसकी नीतियां बदलवा सकते हैं। अराघची ने जोर देकर कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया अब समझ चुकी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकतों में से एक है।

    अराघची ने युद्ध के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि हालात इतने गंभीर थे कि सरकार और सेना के शीर्ष अधिकारियों के बीच संपर्क पूरी तरह टूट गया था। संचार व्यवस्था बाधित हो गई थी और कई घंटों तक यह स्पष्ट नहीं था कि कौन सुरक्षित है और कौन नहीं। उनके अनुसार उस समय पूरे नेतृत्व तंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती हालात को समझना और प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखना था।

    विदेश मंत्री ने दावा किया कि संघर्ष शुरू होने से पहले कई अंतरराष्ट्रीय माध्यमों से ईरान पर दबाव बनाने और उसे परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए मनाने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान विभिन्न प्रस्तावों और प्रलोभनों के जरिए ईरान को अपने रुख से पीछे हटाने का प्रयास हुआ लेकिन तेहरान ने इसे पूरी तरह अस्वीकार कर दिया। अराघची ने कहा कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन किसी सौदे का विषय नहीं है क्योंकि इसके लिए देश ने वर्षों तक आर्थिक प्रतिबंध झेले हैं और कई परमाणु वैज्ञानिकों ने अपनी जान गंवाई है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक समुद्री मार्ग नहीं बल्कि ईरान की रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है इसलिए इसकी सुरक्षा और नियंत्रण का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा प्रभाव पड़ता है। अराघची के अनुसार हालिया संघर्ष ने यह दिखा दिया कि इस क्षेत्र में ईरान की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    ईरान के भीतर चल रही राजनीतिक बहस पर भी विदेश मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि युद्ध और संघर्ष के बावजूद देश की मूल नीतियों में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मित्र और विरोधी दोनों यह स्वीकार कर रहे हैं कि हालिया घटनाओं के बाद ईरान पहले की तुलना में अधिक मजबूत होकर उभरा है। उनके अनुसार कठिन परिस्थितियों ने देश की सैन्य और राजनीतिक क्षमता को और मजबूती दी है।

    हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर लंबे समय से चिंता बनी रहती है क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक असर डाल सकता है। इसी कारण अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस क्षेत्र की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखते हैं।

    अराघची के ताजा बयान से साफ है कि ईरान अपनी रणनीतिक और परमाणु नीतियों पर फिलहाल किसी नरमी के संकेत नहीं दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिका ईरान संबंधों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक संवाद और तनाव कम करने के प्रयास पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होंगे।

  • मानसून सत्र से पहले स्पीकर का बड़ा फैसला टीएमसी के बागी सांसद अब अलग बैठेंगे कई दिग्गज नेताओं की सीट भी बदली

    मानसून सत्र से पहले स्पीकर का बड़ा फैसला टीएमसी के बागी सांसद अब अलग बैठेंगे कई दिग्गज नेताओं की सीट भी बदली


    नई दिल्ली। लोकसभा के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले संसद की बैठने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति देते हुए उनके लिए नई सीटें आवंटित कर दी हैं। इस फैसले का असर केवल इन सांसदों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे सीटिंग प्लान में बदलाव करना पड़ा जिसके चलते कुल 39 सांसदों की सीटें बदल दी गईं। नई व्यवस्था सोमवार से शुरू होने वाले मानसून सत्र से लागू होगी और सभी सांसद अपने नए डिवीजन नंबर तथा नई सीटों के साथ सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे।

    लोकसभा सचिवालय के अनुसार टीएमसी से अलग हुए सांसदों को एक साथ बैठाने के लिए सदन की पूरी बैठने की व्यवस्था में बदलाव करना आवश्यक था। इसी कारण कई अन्य सांसदों की सीटें भी बदलनी पड़ीं। संसद में सीटों का निर्धारण डिवीजन नंबर के आधार पर किया जाता है और यही नंबर किसी सांसद की पहचान तथा उसकी निर्धारित सीट तय करता है। संसदीय कार्यवाही के दौरान मतदान दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अन्य आधिकारिक प्रक्रियाओं में भी इसी डिवीजन नंबर का उपयोग किया जाता है।

    इस फेरबदल का असर कई प्रमुख नेताओं पर भी पड़ा है। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी की सीट बदल दी गई है। इसके अलावा वाईएसआर कांग्रेस के पी वी मिधुन रेड्डी और शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल को भी नई सीटें आवंटित की गई हैं। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय की सीट भी बदलकर 354 कर दी गई है जबकि पहले उनका सीट नंबर 280 था। इन बदलावों के साथ संसद की नई बैठक व्यवस्था मानसून सत्र में पहली बार देखने को मिलेगी।

    लोकसभा अध्यक्ष द्वारा शनिवार को दो महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। पहला फैसला शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को स्वीकार करने से जुड़ा था। दूसरा फैसला टीएमसी के 20 बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति देने का था। जानकारी के अनुसार ये सभी सांसद अब नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई से जुड़े हुए हैं और इसी आधार पर उन्होंने अलग बैठने की मांग की थी।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव केवल बैठने की व्यवस्था तक सीमित नहीं है बल्कि इसका राजनीतिक संदेश भी काफी महत्वपूर्ण है। संसद में किसी समूह को अलग सीटें मिलना उसकी अलग पहचान को भी दर्शाता है। ऐसे में इस फैसले को पश्चिम बंगाल की राजनीति और विपक्ष की रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। मानसून सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है जबकि विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। ऐसे समय में सीटिंग प्लान में यह बदलाव राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद सांसद अपने नए डिवीजन नंबर के अनुसार सदन में बैठेंगे और संसदीय कार्यवाही में भाग लेंगे। माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान इस फैसले पर राजनीतिक बहस भी देखने को मिल सकती है क्योंकि विपक्ष पहले ही कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी कर चुका है।

  • INSAT ने दिखाया मानसून का दम भारत के दो तिहाई हिस्से पर बादलों का कब्जा तेज बारिश और तूफान के संकेत

    INSAT ने दिखाया मानसून का दम भारत के दो तिहाई हिस्से पर बादलों का कब्जा तेज बारिश और तूफान के संकेत


    नई दिल्ली। देशभर में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। इसरो के मौसम उपग्रह INSAT 3DR से मिली ताजा तस्वीरों ने साफ संकेत दिए हैं कि भारत का लगभग दो तिहाई हिस्सा घने मानसूनी बादलों से ढक चुका है। जम्मू कश्मीर से लेकर गंगा के मैदानी इलाकों बिहार पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों तक बादलों का घना फैलाव दिखाई दे रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति आने वाले दिनों में कई राज्यों में तेज बारिश आंधी और कहीं कहीं अत्यधिक वर्षा का कारण बन सकती है।

    19 जुलाई को जारी सैटेलाइट इमेज के विश्लेषण के अनुसार देश के करीब 60 से 70 प्रतिशत भूभाग पर बादलों का प्रभाव देखा गया। सबसे घने बादल पंजाब उत्तर प्रदेश बिहार और पश्चिम बंगाल के ऊपर मौजूद हैं जबकि पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्य बादलों की मोटी परत से ढके हुए हैं। दक्षिण भारत में भी अरब सागर से आने वाली नम हवाओं के कारण लंबी बादल पट्टियां सक्रिय दिखाई दे रही हैं। हालांकि पश्चिमी राजस्थान और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में अपेक्षाकृत साफ मौसम बना हुआ है।

    INSAT 3DR भारत का अत्याधुनिक मौसम निगरानी उपग्रह है जो पृथ्वी से लगभग 36 हजार किलोमीटर ऊपर भू स्थिर कक्षा में रहकर लगातार मौसम पर नजर रखता है। यह हर आधे घंटे में नई तस्वीरें भेजता है जिनका उपयोग भारतीय मौसम विभाग मौसम का पूर्वानुमान तैयार करने के लिए करता है। उपग्रह के विजिबल और थर्मल इंफ्रारेड सेंसर बादलों की मोटाई ऊंचाई और तापमान का विश्लेषण करते हैं जिससे यह पता लगाया जाता है कि किस क्षेत्र में सामान्य बादल हैं और कहां खतरनाक तूफानी बादल विकसित हो रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार क्लाउड टॉप ब्राइटनेस टेम्परेचर यानी बादलों की ऊपरी सतह का तापमान मौसम का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक होता है। जितना अधिक ठंडा बादल का ऊपरी हिस्सा होगा उतना ही ऊंचा और शक्तिशाली वह बादल माना जाता है। माइनस 40 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान वाले बादल तेज बारिश और गरज चमक वाले तूफान का संकेत देते हैं जबकि माइनस 70 डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान वाले बादल बेहद खतरनाक मौसम प्रणाली का हिस्सा माने जाते हैं। ताजा तस्वीरों में जम्मू कश्मीर के ऊपर माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तक ठंडे बादल दर्ज किए गए हैं जबकि उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड और पूर्वोत्तर में भी अत्यधिक सक्रिय बादल मौजूद हैं।

    हालांकि मौसम विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर जगह बादल होने का मतलब भारी बारिश नहीं होता। हल्के मानसूनी बादल केवल सामान्य वर्षा या बूंदाबांदी करा सकते हैं जबकि अत्यधिक बारिश केवल उन क्षेत्रों में होती है जहां गहरे और ऊंचे तूफानी बादल विकसित होते हैं। फिलहाल उत्तरी भारत में सक्रिय मानसून ट्रफ और अरब सागर से आने वाली नमी भरी हवाओं के कारण जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड पंजाब हरियाणा दिल्ली उत्तर प्रदेश बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और मैदानी क्षेत्रों में जलभराव तथा नदियों के जलस्तर बढ़ने का खतरा भी बना रहेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कभी लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनती है तो कभी बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश हो जाती है। ऐसे समय में INSAT 3DR जैसे आधुनिक मौसम उपग्रह मौसम की सटीक निगरानी और समय रहते चेतावनी जारी करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के ताजा मौसम बुलेटिन पर नजर रखें और भारी बारिश वाले इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचें।

  • हार के बाद कप्तान शुभमन गिल का बड़ा खुलासा डेथ ओवरों की खराब गेंदबाजी ने छीनी जीत रोहित की पारी को बताया यादगार

    हार के बाद कप्तान शुभमन गिल का बड़ा खुलासा डेथ ओवरों की खराब गेंदबाजी ने छीनी जीत रोहित की पारी को बताया यादगार


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले गए निर्णायक तीसरे वनडे में 27 रन की हार के साथ भारत ने तीन मैचों की सीरीज 1-2 से गंवा दी। मुकाबला खत्म होने के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने हार के कारणों पर खुलकर बात की और माना कि टीम 45वें ओवर तक मुकाबले में पूरी तरह बनी हुई थी लेकिन आखिरी तीन ओवरों में की गई महंगी गेंदबाजी ने जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। गिल ने यह भी कहा कि शुरुआती ओवरों में अनुशासित गेंदबाजी नहीं होने से इंग्लैंड को बड़ी साझेदारी बनाने का मौका मिल गया जिसका असर पूरे मैच पर पड़ा।

    मैच के बाद गिल ने कहा कि भारतीय टीम की स्थिति 45वें ओवर तक मजबूत थी और खिलाड़ी मुकाबले में वापसी की उम्मीद बनाए हुए थे। हालांकि अंतिम तीन ओवरों में करीब 60 रन खर्च करने से इंग्लैंड विशाल स्कोर तक पहुंच गया। उनके अनुसार यही वह मोड़ था जिसने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। कप्तान ने माना कि यदि डेथ ओवरों में गेंदबाज बेहतर नियंत्रण रखते तो लक्ष्य काफी हद तक सीमित किया जा सकता था।

    शुभमन गिल ने रन चेज की रणनीति का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि टीम ने पहले से योजना बनाई थी कि शुरुआती 40 ओवर तक विकेट बचाकर रखे जाएंगे और पावरप्ले के बाद रन गति लगभग छह से साढ़े छह रन प्रति ओवर रखी जाएगी। इसके बाद अंतिम दस ओवरों में तेज बल्लेबाजी करते हुए 100 से 110 रन बनाने का लक्ष्य रखा गया था। गिल का मानना था कि यदि यह योजना पूरी तरह लागू हो जाती तो भारत के पास मुकाबला जीतने का शानदार मौका होता।

    भारतीय कप्तान ने गेंदबाजी विभाग की कमियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पावरप्ले के दौरान गेंदबाजों ने जरूरत से ज्यादा ऑफ स्टंप के बाहर गेंदें फेंकीं जिसका इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाजों ने पूरा फायदा उठाया। इससे मेजबान टीम ने शुरुआत से ही दबदबा बना लिया और भारत को लगातार दबाव में रखा। गिल के अनुसार पावरप्ले और डेथ ओवरों की गेंदबाजी दोनों ही विभागों में टीम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

    सीरीज हारने के बावजूद शुभमन गिल ने टीम के प्रदर्शन में कई सकारात्मक पहलुओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजों ने पूरी सीरीज में लगातार रन बनाए और गेंदबाजों ने भी अलग अलग मुकाबलों में विकेट लेकर योगदान दिया। उनके अनुसार यह प्रदर्शन आने वाले महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए टीम का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है और खिलाड़ी अपनी गलतियों से सीख लेकर आगे बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

    गिल ने इस दौरान रोहित शर्मा की रिकॉर्डतोड़ बल्लेबाजी की दिल खोलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि रोहित ने वर्षों से दुनिया के अलग अलग देशों में अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया है और लॉर्ड्स में खेली गई 138 रन की पारी भी उसी स्तर की थी। कप्तान ने कहा कि मैच के अंतिम चरण में पिच धीमी हो चुकी थी और ऐसे हालात में इतनी शानदार बल्लेबाजी करना आसान नहीं था। उनके अनुसार रोहित की पारी देखना हर क्रिकेट प्रेमी के लिए किसी खास अनुभव से कम नहीं था।

    गौरतलब है कि इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 387 रन का विशाल स्कोर बनाया। बेन डकेट ने 141 रन जबकि जैकब बेथेल ने 91 रन की शानदार पारी खेली। जो रूट ने नाबाद 74 और जोस बटलर ने तेज 41 रन जोड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। जवाब में रोहित शर्मा के 138 रन शुभमन गिल के 77 और विराट कोहली के 74 रन भी भारत को जीत नहीं दिला सके और टीम 360 रन तक ही पहुंच सकी। इस हार के साथ इंग्लैंड ने वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली।

  • हिटमैन का ऐतिहासिक शतक बेकार इंग्लैंड में तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड लेकिन भारत 27 रन से हारा और सीरीज गंवाई

    हिटमैन का ऐतिहासिक शतक बेकार इंग्लैंड में तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड लेकिन भारत 27 रन से हारा और सीरीज गंवाई


    नई दिल्ली। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे मुकाबले में अपने बल्ले से ऐसा प्रदर्शन किया जिसने एक बार फिर उनकी क्लास और अनुभव की झलक दुनिया को दिखा दी। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर रोहित ने 138 रन की शानदार शतकीय पारी खेलते हुए न सिर्फ अपनी फॉर्म में दमदार वापसी की बल्कि आठ साल पुराना अपना ही रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। हालांकि उनकी यह यादगार पारी भारत को जीत नहीं दिला सकी और टीम को 27 रन से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ भारत ने तीन मैचों की वनडे सीरीज 1-2 से गंवा दी जबकि इससे पहले टी20 सीरीज भी इंग्लैंड के नाम रही थी।

    रोहित शर्मा ने अपनी पारी के दौरान शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए 17 चौके और 5 छक्के लगाए। शुरुआत से ही उन्होंने इंग्लैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा और मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट लगाए। इस पारी के साथ रोहित इंग्लैंड की धरती पर भारत और इंग्लैंड के बीच खेली गई द्विपक्षीय वनडे सीरीज में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी खेलने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने वर्ष 2017 में ट्रेंट ब्रिज में खेली गई अपनी 137 रन की नाबाद पारी का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया और नया इतिहास रच दिया।

    भारतीय पारी की शुरुआत भी शानदार रही। रोहित शर्मा और कप्तान शुभमन गिल ने पहले विकेट के लिए 147 रन की मजबूत साझेदारी कर टीम को बेहतरीन शुरुआत दिलाई। गिल ने 77 रन की शानदार पारी खेली और रोहित का अच्छा साथ निभाया। गिल के आउट होने के बाद विराट कोहली ने भी जिम्मेदारी संभाली और रोहित के साथ दूसरे विकेट के लिए 113 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। कोहली ने 60 गेंदों में 74 रन बनाते हुए लक्ष्य का पीछा करने की उम्मीदों को जिंदा रखा।

    पहले दो वनडे मुकाबलों में रोहित शर्मा का बल्ला खामोश रहा था जिसके बाद उनकी फॉर्म को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। आलोचकों ने उनकी बल्लेबाजी पर सवाल खड़े किए थे लेकिन तीसरे मुकाबले में उन्होंने अपने अनुभव और क्षमता का शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी आलोचनाओं का जवाब बल्ले से दिया। उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास साफ नजर आया और हर शॉट में पुरानी लय दिखाई दी।

    हालांकि रोहित की शानदार पारी के बावजूद भारतीय टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। 388 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत निर्धारित 50 ओवर में 7 विकेट पर 360 रन ही बना सका। रोहित गिल और कोहली के अलावा अन्य बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं बना सके। ईशान किशन 14 रन बनाकर आउट हो गए जबकि श्रेयस अय्यर बिना खाता खोले पवेलियन लौटे। केएल राहुल केवल 12 रन ही बना सके और अक्षर पटेल भी 2 रन बनाकर सस्ते में आउट हो गए। मध्यक्रम की यही नाकामी भारत की हार की सबसे बड़ी वजह बनी।

    इससे पहले इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 387 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। बेन डकेट ने 141 रन की शानदार पारी खेली जबकि जैकब बेथेल ने 91 रन बनाए। अनुभवी बल्लेबाज जो रूट ने नाबाद 74 रन जोड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और अंत में जोस बटलर ने सिर्फ 13 गेंदों में 41 रन की विस्फोटक पारी खेलकर भारत के सामने बेहद कठिन लक्ष्य खड़ा कर दिया।

    भले ही भारत सीरीज हार गया हो लेकिन रोहित शर्मा की रिकॉर्डतोड़ पारी भारतीय क्रिकेट के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाएगी। बड़े मैचों में शानदार प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता एक बार फिर साबित हुई है और आने वाले महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों से पहले उनका फॉर्म में लौटना टीम इंडिया के लिए राहत की खबर है।

  • खिताबी मुकाबले के बाद हाई वोल्टेज ड्रामा स्पेन अर्जेंटीना के खिलाड़ियों में झड़प मैदान पर मारपीट से मचा हड़कंप

    खिताबी मुकाबले के बाद हाई वोल्टेज ड्रामा स्पेन अर्जेंटीना के खिलाड़ियों में झड़प मैदान पर मारपीट से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल जहां स्पेन की ऐतिहासिक जीत के लिए याद रखा जाएगा वहीं मैच समाप्त होने के बाद मैदान पर हुए विवाद ने भी पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व कप का खिताब अपने नाम किया लेकिन अंतिम सीटी बजने के कुछ ही क्षण बाद जश्न का माहौल तनाव में बदल गया। दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई जो देखते ही देखते धक्का मुक्की और हाथापाई तक पहुंच गई। इस घटना ने विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर खेल भावना को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए।

    रिपोर्ट के अनुसार मैच समाप्त होने के बाद अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो पेरेडेस अपनी टीम की हार के बाद बेहद भावुक और गुस्से में नजर आए। इसी दौरान उनकी स्पेन के खिलाड़ियों से तीखी बहस हुई जो जल्द ही शारीरिक झड़प में बदल गई। बताया गया कि उन्होंने स्पेन के डिफेंडर एरिक गार्सिया का गला पकड़कर धक्का दिया। स्थिति बिगड़ती देख अर्जेंटीना के मुख्य कोच लियोनेल स्कालोनी को मैदान में आकर खिलाड़ियों के बीच बचाव करना पड़ा ताकि मामला और न बढ़े।

    विवाद केवल यहीं तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट में दावा किया गया कि पेरेडेस ने स्पेन के युवा मिडफील्डर गावी को भी जमीन पर गिरा दिया और उनके चेहरे पर हाथ रखकर धक्का दिया। इसके अलावा यह भी आरोप लगा कि उन्होंने गावी की ओर अपना बूट भी चलाने की कोशिश की। इसी दौरान अर्जेंटीना के डिफेंडर नहुएल मोलिना पर भी स्पेन के खिलाड़ियों के साथ आक्रामक व्यवहार करने का आरोप लगा। कहा गया कि उन्होंने पहले एक स्पेनिश खिलाड़ी के पेट में मुक्का मारा और बाद में स्पेन के कप्तान रोड्री की ओर भी मुक्का चलाने की कोशिश की। हालांकि रोड्री ने संयम बनाए रखा और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने का प्रयास किया।

    इस घटना की फुटबॉल जगत में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान एलन शियरर ने प्रसारण के दौरान इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि हार का दर्द अपनी जगह है लेकिन मैदान पर हिंसक व्यवहार की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार खिलाड़ियों को खेल भावना का सम्मान करना चाहिए और हार को भी गरिमा के साथ स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम सीटी के बाद अर्जेंटीना के कुछ खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया बेहद निराशाजनक रही।

    विवाद यहीं समाप्त नहीं हुआ। रिपोर्टों के अनुसार पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान भी अर्जेंटीना के कुछ खिलाड़ियों के व्यवहार पर सवाल उठे। दावा किया गया कि जब स्पेन के खिलाड़ी विश्व कप ट्रॉफी और पदक ग्रहण कर रहे थे तब अर्जेंटीना के कई खिलाड़ी समारोह की ओर पीठ करके खड़े रहे। इंग्लैंड के पूर्व खिलाड़ी स्टुअर्ट पियर्स ने भी इस दृश्य पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर खिलाड़ियों से बेहतर खेल भावना की उम्मीद की जाती है।

    स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 16 साल बाद विश्व कप का खिताब अपने नाम किया लेकिन फाइनल के बाद हुई यह घटना खेल से अधिक विवादों की वजह बन गई। अब फुटबॉल प्रेमियों की नजर इस बात पर रहेगी कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर आगे क्या कदम उठाते हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मौके पर खिलाड़ियों का संयम और खेल भावना ही किसी भी महान टीम की असली पहचान होती है।

  • स्पेन की जीत का देशभर में जश्न अर्जेंटीना की हार पर छलका फैंस का दर्द बोले फाइनल में बेहतर साबित हुई स्पेनिश टीम

    स्पेन की जीत का देशभर में जश्न अर्जेंटीना की हार पर छलका फैंस का दर्द बोले फाइनल में बेहतर साबित हुई स्पेनिश टीम


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में स्पेन की ऐतिहासिक जीत ने दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों के बीच उत्साह और भावनाओं का अनोखा संगम देखने को मिला। स्पेन ने रोमांचक मुकाबले में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इस जीत के बाद भारत के कई शहरों में स्पेन समर्थकों ने जमकर जश्न मनाया जबकि अर्जेंटीना की हार ने उसके प्रशंसकों को निराश कर दिया। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक फुटबॉल प्रेमियों की प्रतिक्रियाएं पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रहीं।

    स्पेन की ऐतिहासिक जीत के बाद केरल के कोझिकोड जिले के कुट्टियाडी में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। स्पेन के समर्थक सड़कों पर उतर आए और ढोल नगाड़ों के साथ नाचते गाते हुए अपनी खुशी का इजहार किया। जगह जगह आतिशबाजी की गई और समर्थकों ने स्पेन के झंडे लहराते हुए अपनी टीम की शानदार जीत का स्वागत किया। लंबे समय बाद विश्व कप ट्रॉफी जीतने की खुशी ने प्रशंसकों के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया।

    दूसरी ओर अर्जेंटीना के समर्थकों के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही। मुंबई में कई फुटबॉल प्रेमी मैच खत्म होने के बाद मायूस दिखाई दिए। कुछ प्रशंसकों ने माना कि कप्तान लियोनेल मेसी से जिस स्तर के प्रदर्शन की उम्मीद थी वह फाइनल मुकाबले में देखने को नहीं मिला। उनका कहना था कि स्पेन के मजबूत डिफेंस ने मेसी को खुलकर खेलने का अवसर ही नहीं दिया जिसके कारण अर्जेंटीना अपनी आक्रामक रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर सका। हालांकि कई प्रशंसकों ने यह भी स्वीकार किया कि पूरी प्रतियोगिता में अर्जेंटीना ने शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल तक पहुंचना भी बड़ी उपलब्धि रही।

    मेघालय की राजधानी शिलांग में भी फुटबॉल का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। राज्य सरकार की ओर से आयोजित विशेष स्क्रीनिंग में बड़ी संख्या में फुटबॉल प्रेमी शामिल हुए और विशाल स्क्रीन पर फाइनल मुकाबले का आनंद लिया। मैच समाप्त होते ही स्पेन समर्थकों ने खुशी का इजहार किया जबकि अर्जेंटीना के प्रशंसकों ने अपनी टीम का उत्साह बढ़ाने के लिए तालियां बजाईं। इस दौरान दोनों टीमों की जर्सी पहने हुए प्रशंसक खेल भावना का शानदार उदाहरण पेश करते नजर आए।

    भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त मुहम्मद रियाज हमीदुल्लाह ने भी फाइनल मुकाबले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें अर्जेंटीना से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी लेकिन स्पेन ने पूरे मैच में अधिक संतुलित और प्रभावशाली खेल दिखाया। उनके अनुसार स्पेन ने जिस अनुशासन और रणनीति के साथ मुकाबला खेला उसी का परिणाम रहा कि टीम विश्व चैंपियन बनने में सफल रही।

    दिल्ली के फुटबॉल प्रेमियों ने भी स्पेन के प्रदर्शन की खुलकर सराहना की। कई प्रशंसकों का मानना था कि स्पेन ने पूरे मैच में गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और बेहतर अवसर तैयार किए। वहीं कुछ अर्जेंटीना समर्थकों ने कहा कि उनकी टीम ने फाइनल में जरूरत से ज्यादा रक्षात्मक रणनीति अपनाई और आखिरी दस मिनट में ही आक्रामक खेल दिखाने की कोशिश की जिससे वापसी का मौका नहीं बन सका।

    स्पेन की इस जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विश्व फुटबॉल में मजबूत रणनीति अनुशासित डिफेंस और धैर्य सबसे बड़ी ताकत होते हैं। वहीं अर्जेंटीना की हार के बावजूद उसके समर्थकों ने टीम का हौसला बढ़ाते हुए भविष्य में और मजबूत वापसी की उम्मीद जताई। फाइनल के बाद भारत में देखने को मिला यह उत्साह इस बात का प्रमाण है कि फुटबॉल के प्रति भारतीय प्रशंसकों का जुनून लगातार बढ़ रहा है।

  • एम्बाप्पे का गोल्डन रिकॉर्ड दो लगातार विश्व कप में गोल्डन बूट जीतने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर बने फ्रांस के कप्तान

    एम्बाप्पे का गोल्डन रिकॉर्ड दो लगातार विश्व कप में गोल्डन बूट जीतने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर बने फ्रांस के कप्तान


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 का समापन स्पेन की ऐतिहासिक खिताबी जीत के साथ हुआ लेकिन व्यक्तिगत उपलब्धियों की बात करें तो सबसे बड़ी चर्चा फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे के नाम रही। अपनी विस्फोटक फॉर्म और लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर एम्बाप्पे ने इस टूर्नामेंट में गोल्डन बूट अपने नाम किया और इसके साथ ही विश्व फुटबॉल के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। लगातार दूसरे विश्व कप में गोल्डन बूट जीतने वाले वह दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले कोई भी फुटबॉलर लगातार दो विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल करने का सम्मान हासिल नहीं कर पाया था।

    पूरे टूर्नामेंट में एम्बाप्पे ने अपनी तेज रफ्तार शानदार फिनिशिंग और आक्रामक खेल से विरोधी टीमों के डिफेंस को लगातार परेशान किया। उन्होंने विश्व कप 2026 में कुल 10 गोल दागे और 4 गोल में अपने साथियों की मदद करते हुए असिस्ट भी किए। उनकी यही निरंतरता उन्हें गोल्डन बूट का सबसे बड़ा दावेदार बनाती रही और अंत में उन्होंने इस प्रतिष्ठित पुरस्कार पर कब्जा जमाकर अपनी महानता को फिर साबित कर दिया।

    विश्व कप के दौरान गोल्डन बूट की दौड़ बेहद रोमांचक रही। अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी भी शानदार लय में थे और उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 8 गोल किए। फाइनल मुकाबले से पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि यदि मेसी स्पेन के खिलाफ गोल करते हैं तो वह एम्बाप्पे को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। हालांकि स्पेन की मजबूत रक्षापंक्ति ने मेसी को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और वह फाइनल में गोल करने में सफल नहीं हो सके। इसी के साथ एम्बाप्पे ने गोल्डन बूट की रेस में अपनी बढ़त बरकरार रखी।

    फ्रांस ने भले ही विश्व कप का खिताब नहीं जीता लेकिन तीसरे स्थान के लिए इंग्लैंड के खिलाफ हुए मुकाबले में एम्बाप्पे ने दो शानदार गोल दागकर अपने अभियान का शानदार अंत किया। इन दो गोलों ने उन्हें न केवल मेसी से आगे पहुंचाया बल्कि विश्व कप इतिहास के सबसे सफल गोल स्कोरर का रिकॉर्ड भी उनके नाम कर दिया। अब एम्बाप्पे के नाम फीफा विश्व कप में कुल 22 गोल दर्ज हो चुके हैं जबकि लियोनेल मेसी 21 गोल के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। यह उपलब्धि बताती है कि एम्बाप्पे ने बेहद कम उम्र में विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर कितनी बड़ी छाप छोड़ी है।

    दूसरी ओर विश्व कप का खिताब स्पेन के नाम रहा जिसने फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर 16 साल बाद फिर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। दोनों टीमों के बीच निर्धारित समय तक कोई गोल नहीं हुआ और मुकाबला अतिरिक्त समय तक पहुंचा। आखिरकार फेरान टोरेस ने निर्णायक गोल करते हुए स्पेन को दूसरी बार विश्व चैंपियन बना दिया। इस हार के साथ अर्जेंटीना का लगातार दूसरी बार और कुल चौथी बार विश्व कप जीतने का सपना अधूरा रह गया।

    भले ही फ्रांस ट्रॉफी नहीं जीत सका लेकिन किलियन एम्बाप्पे ने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया कि वह मौजूदा दौर के सबसे प्रभावशाली फुटबॉलरों में शामिल हैं। लगातार दो विश्व कप में गोल्डन बूट जीतना और विश्व कप इतिहास के सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बनना उनकी महान उपलब्धियों में शामिल हो गया है। आने वाले वर्षों में भी दुनिया की नजरें इस स्टार स्ट्राइकर के प्रदर्शन पर टिकी रहेंगी।

  • फेरान टोरेस बने स्पेन के महानायक एक्स्ट्रा टाइम के गोल ने अर्जेंटीना से छीना विश्व कप का ताज 16 साल बाद फिर गूंजा स्पेन का परचम

    फेरान टोरेस बने स्पेन के महानायक एक्स्ट्रा टाइम के गोल ने अर्जेंटीना से छीना विश्व कप का ताज 16 साल बाद फिर गूंजा स्पेन का परचम


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल फुटबॉल इतिहास के सबसे रोमांचक मुकाबलों में शामिल हो गया जहां स्पेन ने मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए इस हाई वोल्टेज मुकाबले में दोनों टीमों ने जीत के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष किया लेकिन आखिरकार एक्स्ट्रा टाइम में सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी फेरान टोरेस ने वह गोल दाग दिया जिसने स्पेन को 16 साल बाद फिर दुनिया का सरताज बना दिया। इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 की अपनी ऐतिहासिक सफलता को दोहराते हुए विश्व फुटबॉल में एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित कर दी।

    फाइनल मुकाबले की शुरुआत से ही स्पेन ने शानदार खेल दिखाया और गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। स्पेनिश खिलाड़ियों ने लगातार आक्रामक फुटबॉल खेलते हुए अर्जेंटीना के गोल पर कई हमले किए लेकिन गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज बार बार दीवार बनकर सामने आए। उन्होंने कई बेहतरीन बचाव करते हुए अर्जेंटीना को लंबे समय तक मुकाबले में बनाए रखा। दूसरी ओर अर्जेंटीना की टीम अपने स्टार खिलाड़ियों के बावजूद स्पेन के मजबूत डिफेंस को भेदने में सफल नहीं हो सकी। कप्तान लियोनेल मेसी को स्पेनिश डिफेंडरों ने पूरे मुकाबले में खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया जिससे अर्जेंटीना का आक्रमण लगातार दबाव में रहा।

    निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमों के बीच कोई गोल नहीं हो सका। मुकाबला जितना आगे बढ़ता गया उतना ही रोमांच और तनाव बढ़ता गया। स्टॉपेज टाइम में अर्जेंटीना को बड़ा झटका तब लगा जब मिडफील्डर एंजो फर्नांडीज को दूसरा येलो कार्ड मिलने के बाद मैदान छोड़ना पड़ा। इसके बाद अर्जेंटीना को एक्स्ट्रा टाइम में केवल 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा जिससे स्पेन को अतिरिक्त बढ़त मिल गई।

    एक्स्ट्रा टाइम के 106वें मिनट में वह पल आया जिसका इंतजार स्पेन के करोड़ों प्रशंसक कर रहे थे। निको विलियम्स के शानदार हेडर से मिली गेंद को फेरान टोरेस ने बेहतरीन तरीके से नियंत्रित किया और बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। अर्जेंटीना के गोलकीपर मार्टिनेज इस बार भी पूरी कोशिश के बावजूद गेंद को रोक नहीं सके। यही गोल मैच का फैसला साबित हुआ और पूरा स्टेडियम स्पेन के समर्थकों की खुशी से गूंज उठा।

    गोल करने के बाद भी स्पेन ने अपना आक्रमण जारी रखा और एक बार फिर गेंद को जाल में पहुंचाया लेकिन फाउल के कारण गोल को अमान्य घोषित कर दिया गया। इसके बावजूद स्पेनिश खिलाड़ियों ने संयम नहीं खोया और अंतिम सीटी बजने तक अर्जेंटीना को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। दूसरी ओर अर्जेंटीना ने आखिरी क्षणों तक बराबरी की कोशिश की लेकिन स्पेन की मजबूत रक्षापंक्ति के सामने उसकी हर रणनीति विफल साबित हुई।

    पूरे टूर्नामेंट में स्पेन का प्रदर्शन शानदार रहा। टीम एक भी मुकाबला नहीं हारी और लगातार संतुलित आक्रमण तथा मजबूत रक्षात्मक खेल के दम पर फाइनल तक पहुंची। फाइनल में भी उसी आत्मविश्वास और अनुशासन का प्रदर्शन करते हुए स्पेन ने विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम कर ली। वहीं 2022 की चैंपियन अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार खिताब जीतने का सपना पूरा नहीं कर सकी। इस जीत के साथ स्पेन ने दुनिया को यह संदेश दिया कि उसकी नई पीढ़ी विश्व फुटबॉल पर लंबे समय तक राज करने का दम रखती है।