Author: bharati

  • चांद के करीब इंसान की वापसी! आर्टेमिस II मिशन से सामने आया धरती का अद्भुत नजारा

    चांद के करीब इंसान की वापसी! आर्टेमिस II मिशन से सामने आया धरती का अद्भुत नजारा


    नई दिल्ली। मानव अंतरिक्ष इतिहास में एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया है। NASA का Artemis II मिशन आधी सदी बाद इंसानों को फिर से चंद्रमा के करीब ले गया है। इस ऐतिहासिक मिशन पर गए अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरिक्ष से पृथ्वी की ऐसी शानदार तस्वीरें भेजी हैं, जिन्हें देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो रहा है।

    ओरियन कैप्सूल से दिखी ‘ब्लू मार्बल’ की खूबसूरती

    मिशन के कमांडर Reid Wiseman द्वारा ली गई तस्वीरों में पृथ्वी का अद्भुत नजारा देखने को मिला। Orion spacecraft की खिड़की से ली गई एक तस्वीर में धरती का घुमावदार हिस्सा दिखाई देता है, जबकि दूसरी तस्वीर में पूरी पृथ्वी नजर आती है नीले महासागर, सफेद बादल और हरे रंग की चमकती ऑरोरा के साथ। इन तस्वीरों में पृथ्वी की खूबसूरती और उसकी नाजुकता दोनों साफ झलकती हैं, मानो अंतरिक्ष से ‘ब्लू मार्बल’ जीवंत हो उठी हो।

    ‘टर्मिनेटर’ लाइन ने खींचा ध्यान

    एक अन्य तस्वीर में दिन और रात के बीच की स्पष्ट सीमा दिखाई देती है, जिसे ‘टर्मिनेटर’ कहा जाता है। यह वह रेखा होती है जहां सूरज की रोशनी और अंधेरा मिलते हैं। इस दृश्य ने वैज्ञानिकों और आम लोगों दोनों को आकर्षित किया है।

    तकनीक का कमाल: शटर स्पीड से बदली तस्वीरों की कहानी

    इन तस्वीरों को अलग-अलग शटर स्पीड पर कैद किया गया है। एक तस्वीर में ज्यादा शटर स्पीड के कारण धरती की रोशनी अधिक चमकदार दिख रही है, जबकि दूसरी में कम शटर स्पीड के जरिए रात में चमकती मानव बस्तियों और प्राकृतिक रोशनी को बेहतर तरीके से दिखाया गया है। यह अंतरिक्ष फोटोग्राफी की तकनीकी खूबसूरती को भी दर्शाता है।

    1972 के बाद पहली बार इतना करीब

    यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि 1972 में Apollo 17 के बाद पहली बार कोई मानव मिशन चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है। लगभग 50 साल बाद इंसान एक बार फिर चांद के पड़ोस तक पहुंचा है, जो भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए रास्ता खोलता है।

    चार अंतरिक्ष यात्री, एक साझा सपना

    इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। एक्सप्लोरेशन सिस्टम लीडर लकीशा हॉकिन्स ने कहा, “इस तस्वीर को देखते हुए यह एहसास होता है कि हमारे चार अंतरिक्ष यात्रियों को छोड़कर पूरी मानवता इसमें शामिल है।” यह बयान इस मिशन की भावनात्मक गहराई को भी दर्शाता है।

    चंद्रमा की ओर बढ़ता कदम

    रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 1,80,000 किलोमीटर दूर पहुंच चुके हैं और उन्हें चंद्रमा तक पहुंचने के लिए करीब 2,40,000 किलोमीटर और सफर तय करना है। मिशन की योजना चंद्रमा की परिक्रमा कर ‘यू-टर्न’ लेकर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटने की है, बिना लैंडिंग के।

    भविष्य के मिशनों की नींव

    Artemis II मिशन को आने वाले समय में चंद्रमा पर मानव लैंडिंग की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह मिशन न सिर्फ तकनीकी परीक्षण है, बल्कि मानवता के अंतरिक्ष में आगे बढ़ने के सपनों को नई उड़ान भी देता है।

  • हादसे ने लिया उग्र रूप युवक की मौत के बाद पथराव और आगजनी से हाईवे पर हड़कंप

    हादसे ने लिया उग्र रूप युवक की मौत के बाद पथराव और आगजनी से हाईवे पर हड़कंप


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में एक सड़क हादसा उस समय हिंसक रूप ले बैठा जब एक युवक की मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने जमकर हंगामा कर दिया घटना गरोठ नेशनल हाईवे पर बीती रात की है जहां दिल्ली से उज्जैन महाकाल दर्शन के लिए आ रही एक मिनी बस और ट्रैक्टर के बीच जोरदार टक्कर हो गई इस हादसे में 21 वर्षीय युवक विजय सोलंकी की दर्दनाक मौत हो गई जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मिनी बस तेज रफ्तार में थी और तुलाहेड़ा टोल प्लाजा के पास उसने ट्रैक्टर को पीछे से टक्कर मार दी टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रैक्टर पलट गया और विजय सोलंकी उसके नीचे दब गया बताया जा रहा है कि वह करीब एक घंटे तक ट्रैक्टर के नीचे फंसा रहा और समय पर राहत नहीं मिलने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई इस हादसे में उसका साथी राजेश शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गया वहीं बस चालक शिवकुमार और यात्री बॉबी व धर्मेंद्र कुमार भी घायल हुए हैं गंभीर घायलों को निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है

    हादसे के बाद जैसे ही युवक की मौत की खबर गांव में फैली लोगों में आक्रोश फैल गया बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्होंने मिनी बस पर पथराव शुरू कर दिया देखते ही देखते गुस्सा इतना बढ़ गया कि बस में आग लगा दी गई आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी बस और उसमें रखा यात्रियों का सामान जलकर खाक हो गया हालांकि राहत की बात यह रही कि सभी यात्री समय रहते बस से बाहर निकल गए और उनकी जान बच गई बाद में उन्हें अन्य वाहनों के जरिए उज्जैन रवाना किया गया

    घटना के बाद ग्रामीणों ने हाईवे पर चक्काजाम कर दिया और टोल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की उनका आरोप था कि टोल प्लाजा पर मौजूद कर्मचारियों की लापरवाही के कारण राहत कार्य में देरी हुई और यदि समय पर मदद मिल जाती तो विजय सोलंकी की जान बचाई जा सकती थी इस आरोप ने स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में करने की कोशिश की भारी पुलिस बल तैनात किया गया और समझाइश के बाद जाम खुलवाया गया प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है

    यह घटना न केवल एक सड़क हादसे की त्रासदी को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि समय पर राहत और जिम्मेदारी की कमी कैसे हालात को और बिगाड़ सकती है एक तरफ जहां एक युवक की मौत ने परिवार को गहरे दुख में डाल दिया वहीं दूसरी ओर गुस्से की आग ने एक और नुकसान की तस्वीर सामने ला दी अब देखना होगा कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है और जिम्मेदारी तय होती है या नहीं

  • निवेशकों के लिए अलर्ट! सोना-चांदी में आई बड़ी गिरावट के पीछे क्या कारण, आगे खरीदें या रुकें?

    निवेशकों के लिए अलर्ट! सोना-चांदी में आई बड़ी गिरावट के पीछे क्या कारण, आगे खरीदें या रुकें?


    नई दिल्ली। वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और अमेरिका-ईरान संघर्ष के पांचवें सप्ताह में पहुंचने के बावजूद, अब बाजार का रुख बदलता नजर आ रहा है। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2.2% और चांदी 3.8% तक टूट गई, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है।

    रिकॉर्ड स्तर से भारी गिरावट

    घरेलू बाजार में भी इसका असर साफ दिखाई दिया। एमसीएक्स पर सोना अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 50 हजार रुपए नीचे आ गया है, जबकि चांदी में तो और बड़ी गिरावट आई है—यह अपने उच्चतम स्तर से करीब 2 लाख रुपए तक टूट चुकी है। इस गिरावट ने उन निवेशकों को झटका दिया है जिन्होंने ऊंचे स्तर पर निवेश किया था।

    मजबूत डॉलर बना सबसे बड़ा कारण

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना और चांदी खरीदना महंगा हो जाता है। इससे मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बनता है।

    कच्चे तेल और महंगाई का असर

    इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई की चिंता को बढ़ा दिया है। महंगाई बढ़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकते हैं। ऊंची ब्याज दरों का सीधा असर सोने और चांदी पर पड़ता है, क्योंकि ये धातुएं ब्याज नहीं देतीं। ऐसे में निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए अन्य विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं।

    ट्रंप के बयान से बदला बाजार का मूड

    विश्लेषकों के अनुसार, शुरुआत में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने को “सेफ हेवन” के रूप में समर्थन मिला था, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीद कमजोर पड़ी, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया और कीमतें नीचे आ गईं।

    चांदी में ज्यादा गिरावट क्यों?

    चांदी की कीमतों में ज्यादा गिरावट की एक अहम वजह यह है कि यह सिर्फ निवेश धातु नहीं, बल्कि एक औद्योगिक धातु भी है। जब वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो उद्योगों में इसकी मांग घटने का डर रहता है, जिससे कीमतों पर ज्यादा दबाव आता है।

    आगे कैसी रहेगी चाल?

    अब निवेशकों की नजर अमेरिका के अहम आर्थिक आंकड़ों नॉन-फार्म पेरोल, एडीपी रोजगार डेटा और बेरोजगारी दर पर टिकी है। ये आंकड़े आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। तकनीकी तौर पर सोने के लिए 1,48,000 रुपए के आसपास सपोर्ट और 1,55,000 रुपए के करीब रेजिस्टेंस माना जा रहा है। हालांकि, सभी दबावों के बावजूद सोने ने सप्ताह के दौरान करीब 2.20% की बढ़त भी दर्ज की है, जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है।

    निवेशकों के लिए संकेत

    फिलहाल बाजार पूरी तरह मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतों जैसे महंगाई, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर निर्भर है। आने वाले समय में भी सोना-चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

  • TET नियम पर सियासत तेज दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र लाखों शिक्षकों को राहत की मांग

    TET नियम पर सियासत तेज दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र लाखों शिक्षकों को राहत की मांग


    भोपाल । मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इस नियम पर दोबारा विचार करने की मांग की है उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा है कि यह निर्णय लाखों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है इसलिए सरकार को संवेदनशीलता के साथ इस पर पुनर्विचार करना चाहिए

    दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि TET की अनिवार्यता को भूतलक्षी यानी पिछली तारीख से लागू करना न्यायसंगत नहीं है उन्होंने सुझाव दिया कि इसे भविष्यलक्षी प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए ताकि पहले से कार्यरत शिक्षकों पर अचानक कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े उनका कहना है कि जिन शिक्षकों ने वर्षों पहले नियुक्ति पाई है और लंबे समय से सेवा दे रहे हैं उनके लिए नए नियमों को अचानक लागू करना असमानता पैदा करता है

    इस फैसले के बाद राज्यभर में दो लाख से अधिक शिक्षकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है खासतौर पर वे शिक्षक जो वर्ष 2009 से पहले नियुक्त हुए थे और जिनकी सेवा अवधि में अभी पांच साल से अधिक का समय शेष है उन्हें अब TET परीक्षा देना अनिवार्य किया गया है ऐसे में कई शिक्षकों को अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है

    दिग्विजय सिंह ने सरकार से यह भी मांग की है कि इस पूरे मामले में रिव्यू या क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने पर विचार किया जाए ताकि न्यायिक स्तर पर भी इस मुद्दे का समाधान निकल सके उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अंतिम निर्णय आने तक TET की अनिवार्यता को स्थगित रखा जाए ताकि शिक्षकों को मानसिक और पेशेवर दबाव से राहत मिल सके

    इस मुद्दे ने शिक्षा व्यवस्था के भीतर कई सवाल खड़े कर दिए हैं एक तरफ सरकार गुणवत्ता और मानकों को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठा रही है वहीं दूसरी ओर लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नीति को लागू करते समय संतुलन और व्यावहारिकता बेहद जरूरी होती है ताकि सुधार के प्रयासों का असर नकारात्मक न पड़े

    फिलहाल सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मांग पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है और क्या शिक्षकों को किसी तरह की राहत मिलती है या नहीं यह मुद्दा आने वाले समय में और ज्यादा चर्चा का विषय बन सकता है क्योंकि इससे सीधे तौर पर शिक्षा व्यवस्था और लाखों परिवारों का भविष्य जुड़ा हुआ है

  • क्या आयुर्वेद केवल क्रॉनिक बीमारियों के लिए है? जानिए सच्चाई और इसके चौंकाने वाले फायदे

    क्या आयुर्वेद केवल क्रॉनिक बीमारियों के लिए है? जानिए सच्चाई और इसके चौंकाने वाले फायदे

    नई दिल्ली। आजकल आयुर्वेद को लेकर कई गलत धारणाएं फैली हुई हैं, जो लोगों को इसके असली फायदों से दूर रखती हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, आयुर्वेद को सही तरीके से समझकर अपनाया जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक साबित हो सकता है।

    मिथक है कि आयुर्वेद केवल पुरानी बीमारियों के लिए है। इस मंत्रालय बताता है कि यह तथ्य सही नहीं है। आयुर्वेद तीव्र (एक्यूट) और पुरानी (क्रॉनिक) दोनों प्रकार की समस्याओं में सहायक है। यह न सिर्फ बीमारी का इलाज करता है, बल्कि बीमारी होने से पहले रोकथाम भी करता है। सही समय पर आयुर्वेदिक उपचार से कई छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।

    आयुर्वेद को लेकर यह भी मिथक है कि घरेलू नुस्खे ही आयुर्वेद हैं। इसका खंडन करते हुए एक्सपर्ट बताते हैं कि घरेलू नुस्खे आयुर्वेद का सिर्फ एक छोटा हिस्सा हैं। असली आयुर्वेद विशेषज्ञ द्वारा निर्धारित उपचार, जड़ी-बूटियों का सही संयोजन, पंचकर्म, आहार-विहार और जीवनशैली परिवर्तन पर आधारित होता है। बिना विशेषज्ञ सलाह के गलत नुस्खे अपनाने से नुकसान भी हो सकता है, इसलिए योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है। मंत्रालय का कहना है कि आयुर्वेद को सिर्फ दवा के रूप में नहीं, बल्कि पूरी जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। रोजाना संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, योग, प्राणायाम और पर्याप्त नींद आयुर्वेद के मूल सिद्धांत हैं।

    एक्सपर्ट बताते हैं कि आयुर्वेद के बारे में कहा जाता है कि यह बहुत धीरे काम करता है। यह मिथक है। यह एक आम गलतफहमी है। आयुर्वेद सही निदान और योग्य चिकित्सक की देखरेख में प्रभावी ढंग से काम करता है और स्थायी लाभ देता है। आयुर्वेद बीमारी की जड़ को दूर करने पर फोकस करता है, इसलिए कभी-कभी समय लग सकता है।

    आयुर्वेद शरीर के तीन दोषों वात, पित्त और कफ को संतुलित रखकर स्वास्थ्य बनाए रखता है। यह न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी काम करता है। गलत धारणाओं को दूर करके अगर आयुर्वेद को सही तरीके से अपनाएं तो कई बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। ऐसे में एक्सपर्ट का मानना है कि आयुर्वेद को समझकर और विशेषज्ञ की सलाह से अपनाएं।

  • ऐंठन और दर्द से परेशान? इन योगासन से मिलेगा आराम और पीरियड्स होंगे बेहतर

    ऐंठन और दर्द से परेशान? इन योगासन से मिलेगा आराम और पीरियड्स होंगे बेहतर


    नई दिल्ली। पीरियड्स के दौरान दर्द, थकान, मूड स्विंग्स और अनियमित चक्र जैसी परेशानियां कई महिलाओं को प्रभावित करती हैं। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट कुछ विशेष योगासन को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं।

    योग इन समस्याओं को प्राकृतिक तरीके से कम करने में बहुत मददगार साबित हो सकता है। नियमित योग अभ्यास से मासिक धर्म चक्र सही रहता है, दर्द कम होता है और मानसिक तनाव भी घटता है। साथ ही मंत्रालय ने मासिक धर्म के दौरान सेहत सुधारने के लिए कुछ आसान और प्रभावी योगासनों को अपनाने की सलाह महिलाओं को दी है। ये आसान आसन घर पर भी किए जा सकते हैं और पीरियड्स के दौरान होने वाली असुविधाओं को काफी हद तक कम करने में प्रभावी भी हैं।

    एक्सपर्ट के अनुसार, इन आसनों को नियमित रूप से करने से न सिर्फ मासिक धर्म संबंधी शारीरिक समस्याएं कम होती हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। योग अभ्यास के साथ माइंडफुलनेस रखना भी जरूरी है। हालांकि पीरियड्स के दौरान अगर दर्द बहुत ज्यादा हो तो डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। स्वस्थ आहार, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद के साथ योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

    बेहतर मासिक धर्म स्वास्थ्य के लिए सुप्त बद्ध कोणासन करें, यह आसन पेल्विक क्षेत्र को खोलता है, रक्त संचार बढ़ाता है और पेट व कमर के दर्द को कम करता है। पश्चिमोत्तानासन यह आसन पीठ और पैरों की मांसपेशियों को खींचता है, जिससे मासिक धर्म संबंधी ऐंठन और दर्द में राहत मिलती है। यह तनाव भी कम करता है। वहीं, वक्रासन रीढ़ की हड्डी को मोड़ने वाला यह आसन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करने में मदद करता है।

    बालासन या बच्चे की मुद्रा कहलाने वाला यह आसन शरीर को गहरी छूट देता है। पीरियड्स के दौरान होने वाली थकान और मूड स्विंग्स को शांत करता है। सेतु बंधासन, जिसे पुल मुद्रा भी कहते हैं, आसन कमर और पेल्विक क्षेत्र को मजबूत बनाता है व हार्मोनल बैलेंस बनाए रखने में सहायक है। साथ ही विपरीत करणी भी राहत देता है। दीवार के सहारे पैर ऊपर करके लेटने वाला यह आसन रक्त प्रवाह को सुधारता है और पैरों में सूजन तथा थकान को कम करता है।

  • क्या आपका बायां हाथ दर्द कर रहा है? जानिए कब यह दिल की बीमारी का इशारा बन जाता है

    क्या आपका बायां हाथ दर्द कर रहा है? जानिए कब यह दिल की बीमारी का इशारा बन जाता है


    नई दिल्ली। आजकल हृदय रोग मृत्यु का एक बड़ा कारण बन गया है। यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, सीने में दर्द, सांस फूलना और खासकर बाएं हाथ में दर्द जैसे लक्षण हृदय रोग के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में एक पल की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है।

    नेशनल हेल्थ मिशन बताता है कि यदि हृदय रोग के मुख्य लक्षण दिखें तो सावधान हो जाएं और उसकी पहचान करें और बचाव के लिए कुछ उपाय दिए गए हैं, उसे फॉलो करें। एक्सपर्ट स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हृदय रोग से बचा जा सकता है। संतुलित खान-पान, नियमित व्यायाम और समय पर जांच से दिल स्वस्थ रहता है। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके अपने और अपने परिवार के हृदय की रक्षा कर सकते हैं।

    हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, सीने में भारीपन या दर्द, बाएं हाथ, गर्दन, जबड़े या पीठ में दर्द, सांस फूलना, थकान होना, ठंडा पसीना आना जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसके अलावा, अगर धड़कन बार-बार अनियमित, तेज या फड़फड़ाती महसूस हो रही है तो यह हृदय रोग का संकेत हो सकता है। चक्कर आना या बेहोशी भी खतरनाक हो सकता है। यह तब होती है जब मस्तिष्क को पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाता। यह अनियमित हृदय गति या ब्लडप्रेशर की समस्या का संकेत हो सकता है। बार-बार ऐसा होने पर इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं।

    हृदय रोग से बचाव के लिए संतुलित आहार लें, ताजी सब्जियां, फल, दालें, अनाज और कम तेल-मसालेदार भोजन खाएं। नियमित व्यायाम करें, इसके लिए रोजाना कम से कम 30-40 मिनट योग या हल्का व्यायाम करें। ब्लड प्रेशर और शुगर जांच नियमित करवाएं। धूम्रपान और शराब छोड़ें, ये हृदय के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। तनाव कम करें, इसके लिए ध्यान, प्राणायाम या अच्छी नींद से तनाव नियंत्रित रखें।

    साथ ही ज्यादा तला-भुना और जंक फूड न खाएं। लंबे समय तक एक जगह बैठे न रहें, तनाव और चिंता को बढ़ने न दें। इन सभी लक्षणोंं को नजरअंदाज न करें।

  • तेज रफ्तार का कहर नर्मदापुरम हाईवे पर खड़े ट्रक से भिड़ी कार दो की दर्दनाक मौत

    तेज रफ्तार का कहर नर्मदापुरम हाईवे पर खड़े ट्रक से भिड़ी कार दो की दर्दनाक मौत


    नर्मदापुरम । मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में नेशनल हाईवे 46 पर शनिवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे ने दो परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया सुबह करीब चार बजे हुई इस भीषण दुर्घटना में तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े ट्रक से पीछे से जा टकराई टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया

    प्राप्त जानकारी के अनुसार कार नागपुर के हिंगनघाट क्षेत्र से शाजापुर जिले के बेरछा गांव की ओर जा रही थी वाहन में तीन लोग सवार थे जो अपने परिचित के घर जा रहे थे लेकिन रास्ते में नर्मदापुरम के निटाया क्षेत्र के पास यह हादसा हो गया बताया जा रहा है कि कार तेज रफ्तार में थी और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका जिसके चलते कार सीधे सड़क किनारे खड़े ट्रक में पीछे से घुस गई

    हादसा इतना भीषण था कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें बैठे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला मौके पर ही विशाल बाड़कुरे निवासी हिंगनघाट नागपुर और ज्ञान सिंह मासोध निवासी बैतूल की मौत हो गई दोनों की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवारों में कोहराम मच गया वहीं तीसरा युवक रूपेश गहलोत गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया

    घटना की सूचना मिलते ही इटारसी से 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची आपातकालीन सेवा के कर्मचारियों ने बिना समय गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू किया ईएमटी विसराम अहिरवार ने घायल रूपेश को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया जिससे उसकी स्थिति कुछ हद तक स्थिर हो सकी इसके बाद एम्बुलेंस पायलट प्रशांत ने तेजी दिखाते हुए उसे सरकारी अस्पताल नर्मदापुरम पहुंचाया जहां उसका इलाज जारी है और डॉक्टर उसकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं

    हादसे के बाद पुलिस भी तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है साथ ही दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार और वाहन पर नियंत्रण खोना हादसे की मुख्य वजह मानी जा रही है

    यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार के खतरों की ओर इशारा करता है खासकर हाईवे पर जहां थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है सड़क किनारे खड़े वाहनों से टकराव के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं लेकिन इसके बावजूद सावधानी बरतने में अक्सर चूक हो जाती है

    नर्मदापुरम का यह हादसा न केवल एक दुखद घटना है बल्कि यह एक गंभीर चेतावनी भी है कि यात्रा के दौरान सतर्कता और गति नियंत्रण कितना जरूरी है जरा सी जल्दबाजी कई जिंदगियों को हमेशा के लिए बदल सकती है

  • सावधान! कच्चा प्याज बना सकता है सेहत बिगाड़ने की वजह, जानिए किन लोगों को करना चाहिए परहेज

    सावधान! कच्चा प्याज बना सकता है सेहत बिगाड़ने की वजह, जानिए किन लोगों को करना चाहिए परहेज


    नई दिल्ली। भारतीय खाने में कच्चा प्याज एक अहम हिस्सा माना जाता है। सलाद से लेकर दाल-रोटी तक, इसे खाने के साथ जोड़ना आम बात है। प्याज में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और कई जरूरी तत्व पाए जाते हैं। लेकिन हर हेल्दी चीज हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद हो, यह जरूरी नहीं होता।

    मेडिकल रिसर्च बताती है कि कच्चा प्याज कुछ खास परिस्थितियों में शरीर को फायदा देने के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि किन लोगों को इसे नहीं खाना चाहिए।

    जिन लोगों को पाचन से जुड़ी दिक्कतें रहती हैं, उन्हें प्याज के सेवन से बचना चाहिए। वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, कच्चे प्याज में ऐसे कार्बोहाइड्रेट होते हैं जो आंत में पूरी तरह पच नहीं पाते। इन्हें फोडमैप कहा जाता है, जो पेट में गैस बनने की वजह बन सकते हैं। जिन लोगों को पहले से गैस, पेट फूलना या अपच की समस्या रहती है, उनके लिए कच्चा प्याज खाने के बाद ये परेशानी और बढ़ सकती है।

    इसी तरह, एसिडिटी या सीने में जलन की समस्या वाले लोगों को भी कच्चे प्याज से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कच्चा प्याज पेट में एसिड के स्तर को बढ़ा सकता है। इससे एसिड रिफ्लक्स की समस्या तेज हो सकती है, जिसमें खाना वापस गले की ओर आने लगता है। इसके कारण सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। जिन लोगों को पहले से यह समस्या रहती है, उनके लिए कच्चा प्याज ट्रिगर का काम कर सकता है।

    कुछ मामलों में कच्चा प्याज एलर्जी की वजह भी बन सकता है। हालांकि, यह समस्या हर किसी में नहीं होती, लेकिन जिन लोगों को प्याज से एलर्जी होती है, उनके शरीर में तुरंत प्रतिक्रिया दिखाई दे सकती है। रिसर्च बताती है कि ऐसे लोगों को त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, सूजन या सांस लेने में परेशानी तक हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति को प्याज खाने के बाद ऐसे लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत इसका सेवन बंद कर देना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

    ब्लड प्रेशर और खास तरह की दवाएं लेने वाले लोगों के लिए भी सावधानी जरूरी है। कच्चे प्याज में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो खून को पतला करने में मदद कर सकते हैं। सामान्य स्थिति में यह दिल के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति पहले से ब्लड थिनर दवाएं ले रहा है, तो यह असर ज्यादा बढ़ सकता है। इसलिए ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना ज्यादा मात्रा में कच्चा प्याज नहीं खाना चाहिए।

    सर्जरी से जुड़े मामलों में भी कच्चा प्याज नुकसानदायक हो सकता है। मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार, ऑपरेशन से पहले और बाद में ऐसी चीजों से बचने की सलाह दी जाती है जो खून को पतला करती हैं। कच्चा प्याज भी इसी श्रेणी में आता है। अगर किसी व्यक्ति का हाल ही में ऑपरेशन हुआ है, तो इसके सेवन से ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है और रिकवरी पर असर पड़ सकता है।

  • आक्रामक अंदाज का राज! प्रियांश आर्या बोले- ‘बिना जोखिम लिए नहीं मिलती सफलता’

    आक्रामक अंदाज का राज! प्रियांश आर्या बोले- ‘बिना जोखिम लिए नहीं मिलती सफलता’


    नई दिल्ली।आईपीएल 2026 में चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए रोमांचक मुकाबले में पंजाब किंग्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को 5 विकेट से हराकर शानदार जीत दर्ज की। इस मुकाबले में जीत के हीरो रहे युवा सलामी बल्लेबाज प्रियांश आर्या, जिन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से मैच का रुख शुरुआती ओवरों में ही पंजाब की ओर मोड़ दिया। उनकी शानदार पारी के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।

    “रिस्क लेना मेरे खेल का हिस्सा” – प्रियांश आर्या

    मैच के बाद प्रियांश आर्या ने अपने आक्रामक अंदाज पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “मेरा खेलने का अंदाज बचपन से ही ऐसा रहा है। जब मुझे लगता है कि टीम को फायदा होगा, तो मैं उसी तरह खेलता हूं। थोड़ा जोखिम लेना पड़ता है और मुझे खुद पर भरोसा है कि अगर मैं पहली गेंद पर शॉट खेल सकता हूं, तो जरूर खेलूंगा।”

    उन्होंने आगे कहा कि इस स्तर पर गेंदबाज ज्यादा अनुभवी होते हैं, लेकिन आत्मविश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। “मुझे अपनी काबिलियत पर भरोसा है और यही भरोसा मुझे अच्छे परिणाम देता है,” प्रियांश ने जोड़ा।

    मेहनत का नतीजा: दिन में दो-दो सत्र में अभ्यास

    प्रियांश ने अपनी सफलता का श्रेय लगातार मेहनत को दिया। उन्होंने बताया कि बल्लेबाजी उन्हें बेहद पसंद है, इसलिए वे रोजाना दो सत्रों में अभ्यास करते हैं और हर सत्र करीब डेढ़ घंटे का होता है। उनकी यही कड़ी मेहनत मैदान पर उनके आत्मविश्वास और आक्रामक खेल में साफ नजर आई।

    11 गेंदों में मैच का पासा पलटा

    पंजाब के लिए पारी की शुरुआत करने उतरे प्रियांश ने आते ही आक्रमण शुरू कर दिया। पहली ही दो गेंदों पर चौका और छक्का जड़कर उन्होंने अपने इरादे साफ कर दिए। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने महज 11 गेंदों में 3 चौके और 4 छक्कों की मदद से 47 रन ठोक दिए। उनकी इस विस्फोटक पारी ने पावरप्ले में ही सीएसके के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया और मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।

    CSK की मजबूत बल्लेबाजी, लेकिन नाकाम गेंदबाजी

    मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए चेन्नई सुपर किंग्स ने 20 ओवर में 5 विकेट पर 209 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। आयुष म्हात्रे ने 73 रन की शानदार पारी खेली, जबकि शिवम दुबे (45) और सरफराज खान (32) ने भी अहम योगदान दिया। हालांकि, इतना बड़ा स्कोर भी टीम के गेंदबाज बचा नहीं पाए।

    पंजाब की संतुलित बल्लेबाजी से आसान जीत

    210 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए पंजाब की शुरुआत तेज रही। प्रियांश के अलावा प्रभसिमरन सिंह ने 43 रन की पारी खेली और कप्तान श्रेयस अय्यर ने 50 रन बनाकर टीम को जीत तक पहुंचाया। पंजाब ने 18.4 ओवर में 5 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया।

    पंजाब का बढ़ता आत्मविश्वास

    इस जीत के साथ पंजाब किंग्स ने यह साबित कर दिया है कि उनकी टीम में आक्रामक बल्लेबाजों के साथ-साथ दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता भी है। खासकर प्रियांश आर्या जैसे युवा खिलाड़ियों का फॉर्म टीम के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।