Author: bharati

  • अब तक सिर्फ 1.97 करोड़ ITR दाखिल, डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद नहीं… कहीं भारी न पड़ जाए 31 जुलाई का इंतजार!

    अब तक सिर्फ 1.97 करोड़ ITR दाखिल, डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद नहीं… कहीं भारी न पड़ जाए 31 जुलाई का इंतजार!


    नई दिल्ली।
    अगर आपने अभी तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return- ITR) दाखिल नहीं किया है और सोच रहे हैं कि पिछले साल की तरह इस बार भी सरकार अंतिम तारीख बढ़ा देगी, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए 31 जुलाई ITR फाइल करने की आखिरी तारीख है। हालांकि, अब तक केवल करीब 1.97 करोड़ ITR ही दाखिल हुए हैं, जबकि पिछले दो वर्षों में कुल 7 करोड़ से ज्यादा रिटर्न फाइल हुए थे। धीमी रफ्तार को देखकर कई लोग डेडलाइन (Deadline) बढ़ने की उम्मीद लगा रहे हैं, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि इस बार ऐसा होने की संभावना बेहद कम है।

    पिछले साल सरकार ने ITR फाइल करने की अंतिम तारीख इसलिए बढ़ाई थी, क्योंकि आयकर विभाग ने ITR फॉर्म और ऑनलाइन फाइलिंग यूटिलिटी जारी करने में देरी की थी। इसके कारण करदाताओं के पास रिटर्न दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा था। लेकिन, इस साल स्थिति पूरी तरह अलग है। अधिकांश ITR फॉर्म, ऑनलाइन यूटिलिटी, फॉर्म 16, फॉर्म 26AS, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और TIS (Taxpayer Information Summary) पहले से उपलब्ध हैं। ऐसे में टैक्सपेयर्स के पास समय की कमी का कोई बड़ा कारण नहीं है।

    एक्सपर्ट का मानना है कि अगर कोई बड़ा तकनीकी व्यवधान या आयकर पोर्टल पर गंभीर समस्या नहीं आती, तो सरकार के पास डेडलाइन बढ़ाने का कोई ठोस आधार नहीं होगा। इसलिए केवल उम्मीद के भरोसे बैठना महंगा साबित हो सकता है।

    अगर कोई करदाता 31 जुलाई के बाद ITR फाइल करता है, तो उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सबसे पहले इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234F के तहत लेट फाइलिंग फीस देनी पड़ सकती है। अगर टैक्स बकाया है, तो उस पर ब्याज भी देना होगा। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में कैपिटल लॉस या बिजनेस लॉस को अगले सालों में कैरी फॉरवर्ड करने का लाभ भी नहीं मिलेगा, यानी देरी सिर्फ जुर्माने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य की टैक्स प्लानिंग पर भी असर डाल सकती है।

    टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि जल्दी ITR फाइल करने के कई फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर आपको टैक्स रिफंड मिलना है, तो वह जल्दी प्रोसेस हो जाएगा। इसके अलावा अगर रिटर्न में कोई गलती रह जाती है, तो उसे समय रहते सुधारा भी जा सकता है। आखिरी दिनों में पोर्टल पर भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट धीमी पड़ने या तकनीकी दिक्कतें आने की संभावना भी बढ़ जाती है, जिससे फाइलिंग में परेशानी हो सकती है।

    ITR दाखिल करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। सबसे पहले फॉर्म 16, बैंक इंटरेस्ट सर्टिफिकेट, कैपिटल गेन स्टेटमेंट, अन्य आय से जुड़े दस्तावेज और टैक्स कटौती की पूरी जानकारी एकत्र कर लें। इसके बाद फॉर्म 26AS, AIS और TIS में दर्ज जानकारी का मिलान करें ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचा जा सके। साथ ही यह भी जांच लें कि इस बार आपके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) बेहतर है या नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime)। सिर्फ पिछले साल चुने गए विकल्प के आधार पर निर्णय लेना सही नहीं होगा।

    इस बार ITR की अंतिम तारीख बढ़ने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। इसलिए आखिरी समय तक इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द रिटर्न दाखिल करना ही समझदारी होगी। इससे न केवल जुर्माने और ब्याज से बचा जा सकेगा, बल्कि रिफंड भी जल्दी मिलेगा और किसी संभावित टैक्स नोटिस की आशंका भी कम हो जाएगी। अगर आपने अभी तक ITR फाइल नहीं किया है, तो 31 जुलाई से पहले यह काम पूरा करना आपके लिए सबसे सुरक्षित विकल्प होगा।

  • जब मोहम्मद रफी की आवाज ने रचा इतिहास इस एक गीत ने दिलाया जिंदगी का पहला और आखिरी नेशनल अवॉर्ड

    जब मोहम्मद रफी की आवाज ने रचा इतिहास इस एक गीत ने दिलाया जिंदगी का पहला और आखिरी नेशनल अवॉर्ड


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की बात जब भी होती है तो मोहम्मद रफी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। उनकी आवाज में ऐसी मिठास ऐसी गहराई और ऐसा दर्द था जिसने करोड़ों लोगों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना ली। चार दशक से ज्यादा लंबे अपने शानदार करियर में उन्होंने हजारों गीत गाए और हर तरह की भावनाओं को अपनी गायकी से जीवंत कर दिया। रोमांस हो भक्ति हो देशभक्ति हो या फिर बिछड़ने का दर्द रफी साहब की आवाज हर एहसास को श्रोताओं तक पूरी सच्चाई के साथ पहुंचाती थी। यही वजह है कि आज भी उनके गीत उतने ही पसंद किए जाते हैं जितने अपने दौर में हुआ करते थे।

    मोहम्मद रफी को अपने करियर में कई सम्मान मिले लेकिन एक उपलब्धि ऐसी रही जिसने उनके नाम को भारतीय संगीत इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज कर दिया। यह उपलब्धि थी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार यानी नेशनल अवॉर्ड। खास बात यह रही कि उन्हें यह सम्मान अपने पूरे करियर में केवल एक बार मिला और वह भी एक ऐसे गीत के लिए जो आज भी लोगों की जुबान पर रहता है।

    साल 1977 में रिलीज हुई फिल्म हम किसी से कम नहीं उस दौर की सबसे चर्चित म्यूजिकल फिल्मों में शामिल थी। फिल्म में ऋषि कपूर और तारिक खान मुख्य भूमिका में नजर आए थे। आरडी बर्मन के संगीत से सजी इस फिल्म के लगभग सभी गीत सुपरहिट साबित हुए। बचना ऐ हसीनों चांद मेरा दिल है अगर दुश्मन जमाना और हमको तो यारा तेरी यारी जैसे गीतों ने फिल्म को जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई। लेकिन इन सभी गीतों के बीच एक ऐसा गाना था जिसने लोगों के दिलों को सबसे ज्यादा छुआ और वह था क्या हुआ तेरा वादा।

    यह गीत सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं बल्कि टूटे हुए प्यार के दर्द की ऐसी अभिव्यक्ति बन गया जिसे हर पीढ़ी ने अपनाया। पर्दे पर अभिनेता तारिक खान की भावनाओं को मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज से ऐसा जीवन दिया कि हर श्रोता इस गीत से जुड़ गया। उनकी आवाज में दर्द की गहराई और भावनाओं की सच्चाई इतनी प्रभावशाली थी कि यह गीत सुनने वालों की आंखें नम कर देता था।

    इसी गीत के लिए मोहम्मद रफी को सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का नेशनल अवॉर्ड मिला। यही उनके जीवन का पहला और आखिरी राष्ट्रीय सम्मान साबित हुआ। इतना ही नहीं इसी गीत के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला जबकि गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी को सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार प्रदान किया गया। इस गीत ने उस दौर के कई दिग्गज गायकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई और संगीत प्रेमियों के दिलों में स्थायी स्थान हासिल किया।

    फिल्म हम किसी से कम नहीं उस वर्ष की सबसे सफल फिल्मों में शामिल रही। अमिताभ बच्चन की कई बड़ी फिल्मों के बीच भी इस फिल्म ने अपने संगीत के दम पर अलग पहचान बनाई। आरडी बर्मन की धुनें और मोहम्मद रफी की जादुई आवाज ने इसे हिंदी फिल्म संगीत की अमर धरोहर बना दिया। आज भी जब क्या हुआ तेरा वादा सुनाई देता है तो यह सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि मोहम्मद रफी की महान गायकी और भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत की याद ताजा कर देता है। यही कारण है कि यह गीत और उससे जुड़ा यह राष्ट्रीय सम्मान हमेशा संगीत प्रेमियों के लिए खास बना रहेगा।

  • सेंसेक्स निफ्टी में आज क्या होगा बड़ा उतार चढ़ाव निवेशकों के लिए 14 जुलाई का पूरा मार्केट आउटलुक

    सेंसेक्स निफ्टी में आज क्या होगा बड़ा उतार चढ़ाव निवेशकों के लिए 14 जुलाई का पूरा मार्केट आउटलुक


    नई दिल्ली । 14 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच होने जा रही है। निवेशकों की नजर एक ओर कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों पर रहेगी तो दूसरी ओर वैश्विक बाजारों की चाल भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बीते कारोबारी सत्र में बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला था और अब निवेशक यह जानने को उत्सुक हैं कि नया कारोबारी दिन किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की चाल पर विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद और बिकवाली का सीधा असर दिखाई दे सकता है। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी मजबूत रहती है तो बाजार को सहारा मिल सकता है जबकि लगातार बिकवाली होने पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों पर भी निवेशकों की पैनी नजर बनी रहेगी क्योंकि इनका असर कई प्रमुख सेक्टरों पर पड़ता है।

    इस सप्ताह कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले हैं। ऐसे में बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहेंगे उनके शेयरों में तेजी आने की संभावना बन सकती है जबकि कमजोर नतीजों का असर संबंधित शेयरों पर दबाव के रूप में दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय कंपनियों के प्रदर्शन और बाजार के रुझान पर ध्यान देना चाहिए।

    वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत भी आज के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। अमेरिका और एशियाई बाजारों का प्रदर्शन भारतीय बाजार की शुरुआती चाल को प्रभावित कर सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक माहौल रहता है तो घरेलू बाजार में भी उत्साह देखने को मिल सकता है। वहीं किसी बड़े आर्थिक घटनाक्रम या भू राजनीतिक तनाव की स्थिति में बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।

    तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार बाजार फिलहाल महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के बीच कारोबार कर सकता है। यदि प्रमुख सूचकांक शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाते हैं तो चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी बढ़ सकती है। दूसरी ओर कमजोर शुरुआत होने पर मुनाफावसूली का दबाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे माहौल में लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने के बजाय मजबूत मूलभूत आधार वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।

    बाजार विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों को अफवाहों या तेजी से बदलते माहौल में भावनात्मक फैसले लेने से बचना चाहिए। जोखिम प्रबंधन के साथ निवेश करना और अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना हमेशा बेहतर रणनीति मानी जाती है। खासकर नए निवेशकों को बिना पर्याप्त जानकारी के किसी भी शेयर में निवेश करने से बचना चाहिए।

    कुल मिलाकर 14 जुलाई का कारोबारी दिन कई अहम आर्थिक संकेतों और कॉरपोरेट नतीजों के कारण बाजार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। निवेशकों को पूरे दिन बाजार की गतिविधियों पर नजर रखते हुए सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए ताकि बदलते माहौल में बेहतर निवेश अवसरों का लाभ उठाया जा सके।

  • सुनेत्रा पवार के NCP अध्यक्ष पद पर उठे सवाल, पार्टी नेता ने चुनाव प्रक्रिया को दी चुनौती

    सुनेत्रा पवार के NCP अध्यक्ष पद पर उठे सवाल, पार्टी नेता ने चुनाव प्रक्रिया को दी चुनौती


    मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में एक बार फिर आंतरिक विवाद सामने आता दिखाई दे रहा है। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और NCP अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के नेतृत्व को लेकर पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि अध्यक्ष पद के लिए कराया गया चुनाव पार्टी संविधान के नियमों के अनुसार नहीं हुआ।

    पार्टी नेता की ओर से सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष पद के चुनाव को चुनौती देते हुए कानूनी नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, इस मामले पर अभी तक उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    26 फरवरी के चुनाव पर उठाई गई आपत्ति
    दिल्ली स्थित विधि फर्म एआरएस एसोसिएट्स ने NCP के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह की ओर से 9 जुलाई को यह कानूनी नोटिस जारी किया। इसमें दावा किया गया है कि 26 फरवरी को हुआ पार्टी अध्यक्ष का चुनाव असंवैधानिक था और इसे अमान्य घोषित किया जाना चाहिए। यह नोटिस सुनेत्रा पवार, NCP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजा गया है।

    चुनाव प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का आरोप
    नोटिस में आरोप लगाया गया है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू करने से पहले पार्टी संविधान में तय अनिवार्य नियमों का पालन नहीं किया गया। इसमें दावा किया गया कि पार्टी प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को चुनाव की जानकारी भी विधिवत नहीं दी गई।

    नोटिस के अनुसार, तत्कालीन NCP अध्यक्ष अजित पवार के 28 जनवरी को निधन के बाद पार्टी ने निर्वाचन आयोग को जानकारी दी थी कि नए अध्यक्ष के चुनाव तक प्रफुल्ल पटेल कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका निभाएंगे। आरोप है कि इसके बावजूद महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने बिना संवैधानिक अधिकार के राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया और चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी।

    नामांकन और मतदान प्रक्रिया पर भी सवाल
    सच्चिदानंद सिंह की ओर से जारी नोटिस में दावा किया गया है कि पार्टी संविधान के मुताबिक न तो केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का गठन किया गया, न ही निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया और न ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया। नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रतिनिधियों को उम्मीदवारों के नामांकन, चुनाव लड़ने और मतदान करने का उचित अवसर नहीं दिया गया।

    चुनाव आयोग को भेजे पत्र वापस लेने की मांग
    सिंह ने निर्वाचन आयोग को भेजे गए 28 फरवरी, 10 मार्च और 29 अप्रैल के पार्टी पत्रों को वापस लेने की मांग की है। इन पत्रों में चुनाव और पार्टी पदाधिकारियों से जुड़ी जानकारी दर्ज की गई थी।

    उन्होंने स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण की निगरानी में नए सिरे से संगठनात्मक चुनाव कराने की मांग की है। नोटिस में पार्टी नेतृत्व को मांगों पर कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। ऐसा नहीं होने पर आगे कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही गई है।

    NCP ने आरोपों को बताया गलत
    वहीं, NCP प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि सच्चिदानंद सिंह 26 फरवरी को आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में मौजूद थे और उन्होंने हाथ उठाकर सुनेत्रा पवार के पक्ष में मतदान किया था। चव्हाण ने दावा किया कि सुनेत्रा पवार का चुनाव सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कराया गया था। फिलहाल NCP में अध्यक्ष पद को लेकर उठे इस विवाद पर आगे की स्थिति कानूनी प्रक्रिया और पार्टी के रुख पर निर्भर करेगी।

  • मंगलवार को इन आसान वास्तु उपायों से दूर करें घर के दोष, हनुमान जी की कृपा से खुलेंगे सुख समृद्धि के द्वार

    मंगलवार को इन आसान वास्तु उपायों से दूर करें घर के दोष, हनुमान जी की कृपा से खुलेंगे सुख समृद्धि के द्वार


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा साहस आत्मविश्वास और सफलता प्राप्त होती है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार मंगलवार को किए गए कुछ विशेष उपाय घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने और वास्तु दोष को कम करने में मदद करते हैं। यदि लंबे समय से घर में आर्थिक परेशानियां पारिवारिक तनाव या कार्यों में बार बार रुकावट आ रही हो तो मंगलवार के दिन कुछ आसान उपाय शुभ फल दे सकते हैं।

    मंगलवार की सुबह स्नान के बाद सबसे पहले घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। स्वच्छ वातावरण सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। इसके बाद भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाकर सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। हनुमान चालीसा बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करने से मानसिक शक्ति बढ़ती है और नकारात्मक प्रभाव कम होने लगते हैं।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के दक्षिण दिशा का संबंध मंगल ग्रह और ऊर्जा से माना जाता है। मंगलवार के दिन इस दिशा को साफ सुथरा रखना चाहिए। यहां किसी भी प्रकार का कचरा टूटा सामान या बेकार वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और परिवार में सुख शांति बढ़ती है।

    यदि घर में लगातार आर्थिक संकट बना रहता है तो मंगलवार को लाल रंग का छोटा ध्वज हनुमान मंदिर में चढ़ाना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही गरीब और जरूरतमंद लोगों को लाल वस्त्र मसूर की दाल गुड़ या लाल फल का दान करने से मंगल ग्रह मजबूत होता है और शुभ परिणाम मिलने लगते हैं।

    घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक या शुभ चिन्ह बनाना भी मंगलवार को अत्यंत लाभकारी माना गया है। इससे नकारात्मक शक्तियां घर में प्रवेश नहीं करतीं और परिवार के सदस्यों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पूजा घर में नियमित रूप से दीपक जलाने और धूप करने से वातावरण शुद्ध बना रहता है।

    मंगलवार को बंदरों और गाय को भोजन कराना भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। ऐसा करने से भगवान हनुमान की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं। यदि संभव हो तो इस दिन लाल चंदन या लाल फूल भी भगवान को अर्पित करें।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार मंगलवार के दिन क्रोध विवाद और कटु वचन से बचना चाहिए क्योंकि यह दिन ऊर्जा और साहस का प्रतीक है। सकारात्मक सोच और सेवा भाव के साथ किए गए कार्य कई गुना अधिक शुभ फल प्रदान करते हैं। यदि इन उपायों को नियमित रूप से अपनाया जाए तो घर का वातावरण शांत सुखद और समृद्ध बन सकता है तथा परिवार में खुशहाली का संचार होता है।

  • ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, बढ़ा आयात खर्च, जून में व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर पर पहुंचा

    ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, बढ़ा आयात खर्च, जून में व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर पर पहुंचा


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारत का आयात बिल बढ़ गया है। इसका सीधा असर देश के व्यापार घाटे पर पड़ा है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर करीब 30.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहा और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो भारत पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

    महंगे तेल ने बढ़ाया आयात खर्च
    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के आयात खर्च पर पड़ता है। जून महीने में कच्चे तेल का आयात 40 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 19.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके पीछे मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    इसके अलावा खाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान और मशीनरी के आयात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके चलते जून में भारत का कुल आयात बढ़कर 70.8 अरब डॉलर हो गया।

    निर्यात बढ़ा, लेकिन घाटे पर नहीं लगी लगाम
    भारत के लिए राहत की बात यह रही कि जून में निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई। देश का कुल निर्यात करीब 40.4 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है।

    इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और रसायनों की विदेशी मांग मजबूत रही। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगातार सुधार देखा गया, वहीं हीरे और आभूषणों के निर्यात में भी बढ़ोतरी हुई। हालांकि, आयात में हुई तेज वृद्धि के मुकाबले निर्यात की रफ्तार कम रही, जिसके कारण व्यापार घाटा बढ़ गया।

    आम लोगों पर क्या हो सकता है असर?
    व्यापार घाटे में बढ़ोतरी का असर केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता। यदि कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ा सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इसी वजह से सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    आगे की चुनौती और सरकार की रणनीति
    आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो भारत का आयात बिल ऊंचा बना रह सकता है। इससे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। सरकार फिलहाल निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों में जुटी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में बढ़ता निर्यात सकारात्मक संकेत दे रहा है।

    हालांकि, भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए वैश्विक बाजार की स्थिति अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक हालात देश की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर विवाद की खबरों को सर्जियो गोर ने बताया गलत, बोले- बातचीत सकारात्मक दिशा में जारी

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर विवाद की खबरों को सर्जियो गोर ने बताया गलत, बोले- बातचीत सकारात्मक दिशा में जारी


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर चल रही अटकलों पर अब अमेरिकी पक्ष की ओर से सफाई सामने आई है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने उन खबरों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता अटक गया है या किसी पक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया है।

    सर्जियो गोर ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ऐसी खबरें गलत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका दोनों ही व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और हाल की बातचीत सकारात्मक रही है।

    सर्जियो गोर ने कहा- किसी पक्ष ने डील रिजेक्ट नहीं की
    अमेरिकी राजदूत ने एक्स पर लिखा, “फेक न्यूज अलर्ट! किसी ने कुछ भी रिजेक्ट नहीं किया है।” उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक माहौल में आगे बढ़ रही है और ट्रेड डील को पूरा करने के लिए दोनों पक्ष सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि संबंधित पक्षों को इससे बेहतर काम करना चाहिए।

    भारत सरकार ने भी रिपोर्टों को बताया भ्रामक
    भारत सरकार ने भी उन दावों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि नई दिल्ली व्यापार समझौते में देरी कर रही है या पीछे हट गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इन दावों को झूठा, आधारहीन और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता लगातार जारी है और समझौते की दिशा में काफी प्रगति हुई है।

    गोयल ने यह भी कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील से दूरी नहीं बनाई है और न ही जानबूझकर इसमें देरी की जा रही है। उन्होंने रॉयटर्स की रिपोर्ट में किए गए दावों को पूरी तरह गलत बताया।

    क्या थी रिपोर्ट में कही गई बात?
    इससे पहले समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत और अमेरिका बेहतर शर्तों की तलाश में व्यापार समझौते को लेकर सहमति तक नहीं पहुंच सके हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए किसी ऐसे समझौते में जल्दबाजी नहीं करना चाहता, जिससे घरेलू स्तर पर नुकसान हो। इसमें यह भी दावा किया गया था कि दोनों देश अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेसन ग्रीयर की भारत यात्रा के दौरान अंतरिम समझौते की शर्तों को अंतिम रूप देने में सफल नहीं हो पाए।

    रिपोर्ट के अनुसार, एक भारतीय अधिकारी ने दावा किया था कि अमेरिका की ओर से कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है। इनमें चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को लेकर टैरिफ लाभ और समझौते के बाद नए अमेरिकी शुल्कों से सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल बताए गए थे।

    संवेदनशील क्षेत्रों पर भारत का रुख
    रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि भारत कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करना चाहता। भारत का जोर ऐसे व्यापार समझौते पर है, जो दोनों देशों के हितों के अनुरूप हो। फिलहाल भारत और अमेरिका दोनों की ओर से यही संकेत दिए गए हैं कि बातचीत जारी है और ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

  • Vastu Tips: घर में दीपक जलाते समय रखें इन बातों का ध्यान, बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि

    Vastu Tips: घर में दीपक जलाते समय रखें इन बातों का ध्यान, बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा में दीपक को केवल पूजा का हिस्सा नहीं माना गया है, बल्कि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक भी है। Vastu Tips के अनुसार यदि सही स्थान पर दीपक जलाया जाए तो घर का वातावरण शांत और पवित्र बना रहता है। सबसे पहले पूजा घर में भगवान के सामने दीपक अवश्य जलाना चाहिए। इसके अलावा घर के मुख्य द्वार पर शाम के समय दीपक रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और शुभता का प्रवेश माना जाता है। यदि घर में तुलसी का पौधा है तो उसके पास भी संध्या के समय दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। कई लोग रसोई में भी भोजन बनने से पहले छोटा दीपक जलाते हैं, जिससे अन्न और लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।

    Vastu Tips: दीपक जलाने की सही दिशा क्या होनी चाहिए
    वास्तु शास्त्र में दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। Vastu Tips के अनुसार दीपक को हमेशा इस प्रकार रखना चाहिए कि उसकी लौ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे। यह दिशा ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। यदि पूजा के समय भगवान की प्रतिमा पूर्व दिशा में स्थापित है तो दीपक भगवान के सामने इस प्रकार रखें कि लौ पूर्व की ओर रहे। दक्षिण दिशा में बिना विशेष धार्मिक कारण के दीपक जलाने से बचना चाहिए। साथ ही दीपक को कभी भी ऐसी जगह न रखें जहां हवा के कारण वह बार-बार बुझता रहे, क्योंकि इसे शुभ नहीं माना जाता।

    Vastu Tips: घी और तेल के दीपक में क्या है अंतर
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घी और तेल दोनों के दीपक का अपना अलग महत्व है। Vastu Tips के अनुसार भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान कृष्ण की पूजा में शुद्ध देसी घी का दीपक जलाना अधिक शुभ माना जाता है। घी का दीपक घर में सात्विक ऊर्जा और मानसिक शांति का वातावरण बनाता है। वहीं सरसों या तिल के तेल का दीपक भगवान शनि, हनुमान जी और देवी-देवताओं की विशेष आराधना में जलाया जाता है। तेल का दीपक नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और बाधाओं को कम करने का प्रतीक माना जाता है। आवश्यकता और पूजा के उद्देश्य के अनुसार दीपक का चुनाव करना अधिक उचित माना जाता है।

    Vastu Tips: घर में दीपक जलाने का सही तरीका
    दीपक जलाते समय केवल उसे प्रज्वलित करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है। Vastu Tips के अनुसार दीपक हमेशा साफ और पवित्र स्थान पर रखें। दीपक में रुई की नई बत्ती का प्रयोग करें और उसे श्रद्धा के साथ जलाएं। कोशिश करें कि दीपक अपने आप न बुझे और उसमें पर्याप्त मात्रा में घी या तेल हो। पूजा समाप्त होने के बाद दीपक को फूंक मारकर बुझाने की बजाय उसे स्वयं शांत होने दें या किसी फूल की सहायता से धीरे से बुझाएं। साथ ही जले हुए दीपक को इधर-उधर रखने की बजाय सम्मानपूर्वक निर्धारित स्थान पर रखें। इन सरल नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और मन को भी शांति का अनुभव होता है।
  • आगरा में फ्रिज की बर्फ में दिखी शिवलिंग जैसी आकृति, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, लोग कर रहे पूजा-अर्चना

    आगरा में फ्रिज की बर्फ में दिखी शिवलिंग जैसी आकृति, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, लोग कर रहे पूजा-अर्चना


    आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में एक घर के फ्रिज के फ्रीजर में जमी बर्फ की शिवलिंग जैसी दिखाई देने वाली आकृति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। आकृति की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग घर पहुंचने लगे और कई श्रद्धालुओं ने इसे भगवान शिव का प्रतीक मानते हुए पूजा-अर्चना शुरू कर दी। घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं।

    यह मामला आगरा के खेरिया मोड़ स्थित नगला भुजा क्षेत्र का बताया जा रहा है। जहां एक ओर कई लोग इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे बर्फ के प्राकृतिक जमाव का परिणाम मान रहे हैं।

    फ्रीजर में नजर आई शिवलिंग जैसी आकृति
    परिवार के सदस्यों के अनुसार, जब उन्होंने फ्रिज खोला तो फ्रीजर में जमी बर्फ के बीच एक ऐसी आकृति दिखाई दी, जो देखने में शिवलिंग जैसी प्रतीत हो रही थी। इसकी सूचना पड़ोसियों और परिचितों तक पहुंची तो लोगों का वहां आना शुरू हो गया।

    देखते ही देखते घर के बाहर श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। कई लोगों ने हाथ जोड़कर भगवान शिव का स्मरण किया, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने जल, फूल और बेलपत्र अर्पित कर पूजा की। पूरे इलाके में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे भी सुनाई दिए। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते रहे।

    अमरनाथ हिमलिंग से की जा रही तुलना
    घटना के बाद कुछ श्रद्धालुओं ने इस आकृति की तुलना जम्मू-कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा में बनने वाले प्राकृतिक हिमलिंग से की। इसी दौरान मोहल्ले के एक बाबा भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने उपस्थित लोगों को अमरनाथ गुफा से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं तथा वहां रहने वाले कबूतरों के जोड़े की कथा सुनाई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग वहां मौजूद रहे।

    पूजा-अर्चना और चढ़ावा भी शुरू
    स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना की जानकारी फैलने के बाद श्रद्धालुओं ने मौके पर पूजा-पाठ शुरू कर दिया। कई लोगों ने जलाभिषेक किया, फूल और प्रसाद अर्पित किए। बताया जा रहा है कि श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावा भी चढ़ाया जा रहा है। हालांकि यह पूरी गतिविधि स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था के आधार पर हो रही है।

    वैज्ञानिक नजरिए से क्या है वजह?
    विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रिज या फ्रीजर के भीतर तापमान, नमी, हवा के प्रवाह और पानी के जमने की प्रक्रिया के कारण बर्फ कई तरह की आकृतियां बना सकती है। कई बार ये आकृतियां किसी परिचित वस्तु, चेहरे या धार्मिक प्रतीक जैसी दिखाई देती हैं।

    मनोविज्ञान में इस प्रवृत्ति को ‘पैरेडोलिया (Pareidolia)’ कहा जाता है, जिसमें मानव मस्तिष्क अनियमित आकृतियों में परिचित चेहरे, आकृतियां या धार्मिक प्रतीकों जैसी छवि पहचान लेता है। वैज्ञानिक दृष्टि से ऐसी आकृतियों का बनना असामान्य नहीं माना जाता।

    सोशल मीडिया पर दो राय
    घटना के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर बहस छिड़ गई है। एक वर्ग इसे भगवान शिव से जुड़ा चमत्कार मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम बता रहा है। कई लोगों ने धार्मिक आस्था का सम्मान करने की बात कही है, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी समझना जरूरी है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी सुझाव दिया कि यदि यह केवल बर्फ का प्राकृतिक जमाव है, तो समय के साथ उसके पिघलने से स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।

  • अब घरों में रखा सोना आएगा अर्थव्यवस्था के काम, सरकार 'गोल्ड मोनेटाइजेशन 2.0' प्रस्ताव पर कर रही विचार

    अब घरों में रखा सोना आएगा अर्थव्यवस्था के काम, सरकार 'गोल्ड मोनेटाइजेशन 2.0' प्रस्ताव पर कर रही विचार


    नई दिल्ली। भारतीय परिवारों के घरों और लॉकरों में वर्षों से सुरक्षित रखे सोने को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार एक नए प्रस्ताव पर विचार कर रही है। सराफा कारोबारियों की ओर से तैयार किए गए इस प्रस्ताव को ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम 2.0’ नाम दिया गया है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो घरेलू स्तर पर मौजूद सोने का बड़ा हिस्सा बाजार में वापस आ सकता है, जिससे सोने के आयात पर निर्भरता कम होने के साथ अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    शुरुआती लक्ष्य 200 टन सोना बाजार में लाने का
    सराफा संगठनों द्वारा सरकार को सौंपे गए प्रस्ताव के अनुसार, योजना के पहले चरण में देशभर के घरों में रखा करीब 200 टन सोना औपचारिक व्यवस्था में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे घरेलू मांग का कुछ हिस्सा देश के भीतर उपलब्ध सोने से पूरा किया जा सकेगा और विदेशों से सोना आयात करने की आवश्यकता कम हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप विदेशी मुद्रा की बचत होने की संभावना भी जताई गई है।

    पुरानी योजना से कैसे होगी अलग?
    इससे पहले लागू की गई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी, क्योंकि लोग सीधे बैंकों के माध्यम से प्रक्रिया अपनाने में सहज महसूस नहीं करते थे।

    नए प्रस्ताव में व्यवस्था को अधिक आसान बनाने की बात कही गई है। इसके तहत ग्राहक अपने पुराने या अनुपयोगी आभूषण लेकर सीधे बैंक जाने के बजाय पंजीकृत ज्वेलर्स के पास पहुंच सकेंगे। ज्वेलर गहनों को गलाकर उनकी शुद्धता का आकलन करेगा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें बैंक में जमा कराया जाएगा।

    ग्राहकों को मिल सकती हैं गोल्ड यूनिट्स
    प्रस्ताव के मुताबिक, जमा किए गए सोने के बदले ग्राहक के बैंक खाते में उसी मूल्य के बराबर गोल्ड यूनिट्स क्रेडिट की जा सकती हैं। इससे लोग पुराने डिजाइनों के गहनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और अपनी पसंद के नए आभूषण खरीदने का विकल्प भी मिलेगा। वहीं ज्वेलरी उद्योग को अपेक्षाकृत कम लागत पर कच्चे माल के रूप में सोना उपलब्ध होने की संभावना है।

    टैक्स नियमों को लेकर भी राहत की उम्मीद
    योजना के मसौदे में प्रक्रिया को पारदर्शी रखने और लोगों की टैक्स संबंधी आशंकाओं को कम करने पर भी जोर दिया गया है। मौजूदा आयकर नियमों के अनुसार, विवाहित महिला के पास 500 ग्राम, अविवाहित महिला के पास 250 ग्राम और पुरुष के पास 100 ग्राम तक सोना रखने पर सामान्य परिस्थितियों में राहत का प्रावधान है। हालांकि, अंतिम स्थिति संबंधित नियमों और प्रत्येक मामले के तथ्यों पर निर्भर करती है।

    सरकार की मंजूरी का इंतजार
    फिलहाल केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि, सराफा बाजार इस पहल को सकारात्मक मान रहा है। कारोबारियों का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है तो घरों में निष्क्रिय पड़े सोने को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा। इससे न केवल गोल्ड मार्केट को नई गति मिल सकती है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलने की संभावना है।