Author: bharati

  • अब घरों में रखा सोना आएगा अर्थव्यवस्था के काम, सरकार 'गोल्ड मोनेटाइजेशन 2.0' प्रस्ताव पर कर रही विचार

    अब घरों में रखा सोना आएगा अर्थव्यवस्था के काम, सरकार 'गोल्ड मोनेटाइजेशन 2.0' प्रस्ताव पर कर रही विचार


    नई दिल्ली। भारतीय परिवारों के घरों और लॉकरों में वर्षों से सुरक्षित रखे सोने को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार एक नए प्रस्ताव पर विचार कर रही है। सराफा कारोबारियों की ओर से तैयार किए गए इस प्रस्ताव को ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम 2.0’ नाम दिया गया है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो घरेलू स्तर पर मौजूद सोने का बड़ा हिस्सा बाजार में वापस आ सकता है, जिससे सोने के आयात पर निर्भरता कम होने के साथ अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    शुरुआती लक्ष्य 200 टन सोना बाजार में लाने का
    सराफा संगठनों द्वारा सरकार को सौंपे गए प्रस्ताव के अनुसार, योजना के पहले चरण में देशभर के घरों में रखा करीब 200 टन सोना औपचारिक व्यवस्था में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे घरेलू मांग का कुछ हिस्सा देश के भीतर उपलब्ध सोने से पूरा किया जा सकेगा और विदेशों से सोना आयात करने की आवश्यकता कम हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप विदेशी मुद्रा की बचत होने की संभावना भी जताई गई है।

    पुरानी योजना से कैसे होगी अलग?
    इससे पहले लागू की गई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी, क्योंकि लोग सीधे बैंकों के माध्यम से प्रक्रिया अपनाने में सहज महसूस नहीं करते थे।

    नए प्रस्ताव में व्यवस्था को अधिक आसान बनाने की बात कही गई है। इसके तहत ग्राहक अपने पुराने या अनुपयोगी आभूषण लेकर सीधे बैंक जाने के बजाय पंजीकृत ज्वेलर्स के पास पहुंच सकेंगे। ज्वेलर गहनों को गलाकर उनकी शुद्धता का आकलन करेगा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें बैंक में जमा कराया जाएगा।

    ग्राहकों को मिल सकती हैं गोल्ड यूनिट्स
    प्रस्ताव के मुताबिक, जमा किए गए सोने के बदले ग्राहक के बैंक खाते में उसी मूल्य के बराबर गोल्ड यूनिट्स क्रेडिट की जा सकती हैं। इससे लोग पुराने डिजाइनों के गहनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और अपनी पसंद के नए आभूषण खरीदने का विकल्प भी मिलेगा। वहीं ज्वेलरी उद्योग को अपेक्षाकृत कम लागत पर कच्चे माल के रूप में सोना उपलब्ध होने की संभावना है।

    टैक्स नियमों को लेकर भी राहत की उम्मीद
    योजना के मसौदे में प्रक्रिया को पारदर्शी रखने और लोगों की टैक्स संबंधी आशंकाओं को कम करने पर भी जोर दिया गया है। मौजूदा आयकर नियमों के अनुसार, विवाहित महिला के पास 500 ग्राम, अविवाहित महिला के पास 250 ग्राम और पुरुष के पास 100 ग्राम तक सोना रखने पर सामान्य परिस्थितियों में राहत का प्रावधान है। हालांकि, अंतिम स्थिति संबंधित नियमों और प्रत्येक मामले के तथ्यों पर निर्भर करती है।

    सरकार की मंजूरी का इंतजार
    फिलहाल केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि, सराफा बाजार इस पहल को सकारात्मक मान रहा है। कारोबारियों का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है तो घरों में निष्क्रिय पड़े सोने को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा। इससे न केवल गोल्ड मार्केट को नई गति मिल सकती है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलने की संभावना है।

  • बरसात में जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, इन आसान उपायों से रखें सेहत का पूरा ख्याल और रहें बीमारियों से दूर

    बरसात में जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, इन आसान उपायों से रखें सेहत का पूरा ख्याल और रहें बीमारियों से दूर


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम गर्मी से राहत लेकर आता है लेकिन यही मौसम कई तरह की बीमारियों का कारण भी बन सकता है। वातावरण में बढ़ी नमी बैक्टीरिया वायरस और फंगस को तेजी से पनपने का मौका देती है जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यदि खानपान और साफ सफाई का ध्यान न रखा जाए तो वायरल बुखार डेंगू मलेरिया टाइफाइड फूड पॉइजनिंग और पेट संबंधी समस्याएं आसानी से घेर सकती हैं। इसलिए मानसून का आनंद लेने के साथ अपनी सेहत की सुरक्षा करना भी बेहद जरूरी है।

    बारिश के मौसम में सबसे पहले स्वच्छ भोजन और शुद्ध पानी का सेवन करना चाहिए। बाहर खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से जितना हो सके बचें क्योंकि इनमें संक्रमण होने की संभावना अधिक रहती है। हमेशा ताजा और गर्म भोजन ही खाएं। लंबे समय तक रखा हुआ खाना दोबारा खाने से बचें क्योंकि नमी के कारण उसमें बैक्टीरिया तेजी से विकसित हो सकते हैं। पीने के लिए हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करें ताकि पानी से फैलने वाली बीमारियों से बचा जा सके।

    इस मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना भी बेहद आवश्यक है। रोजाना मौसमी फल हरी सब्जियां दालें दूध दही और प्रोटीन युक्त भोजन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। विटामिन सी से भरपूर फल जैसे संतरा आंवला नींबू और अमरूद इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि शरीर हाइड्रेट रहे और विषैले तत्व बाहर निकल सकें।

    बरसात के दौरान मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर गमले टायर और पानी रखने वाले बर्तनों की नियमित सफाई करें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाएं। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी सुरक्षित रहता है।

    बरसात में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में नहीं रहना चाहिए। भीगने पर तुरंत सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। गीले जूते और मोजे पहनने से फंगल संक्रमण हो सकता है इसलिए पैरों की सफाई और सूखापन बनाए रखना जरूरी है। यदि त्वचा पर खुजली या लाल चकत्ते दिखाई दें तो डॉक्टर की सलाह लें।

    हाथों की स्वच्छता भी संक्रमण से बचाव का सबसे आसान तरीका है। खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने की आदत डालें। बच्चों को भी यही आदत सिखाएं क्योंकि वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकते हैं।

    यदि लगातार बुखार तेज सिरदर्द शरीर में दर्द उल्टी दस्त या कमजोरी जैसी समस्या महसूस हो तो घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर जांच और इलाज गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है।

    बरसात का मौसम प्रकृति की खूबसूरती और ठंडक का एहसास कराता है लेकिन थोड़ी सी सावधानी आपकी सेहत को सुरक्षित रख सकती है। संतुलित आहार स्वच्छता पर्याप्त आराम और नियमित व्यायाम अपनाकर आप पूरे मानसून स्वस्थ और ऊर्जावान रह सकते हैं।

  • 'वक्फ बोर्ड की जांच हो तो सामने आएगा बड़ा घोटाला', मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने सीएम योगी को लिखा पत्र

    'वक्फ बोर्ड की जांच हो तो सामने आएगा बड़ा घोटाला', मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने सीएम योगी को लिखा पत्र


    बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि वक्फ बोर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो अरबों-खरबों रुपये की कथित अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर विस्तृत जांच की मांग की है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौलाना रिजवी ने कहा कि केवल बरेली जिले में ही वक्फ की जमीनों से जुड़े करोड़ों और अरबों रुपये के कथित घोटाले हुए हैं। उनका आरोप है कि वक्फ संपत्तियों का उपयोग जनकल्याण के बजाय निजी हितों के लिए किया गया और सरकार को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

    गरीबों के लिए बनी थी वक्फ संपत्ति
    मौलाना ने कहा कि वक्फ की जमीनें गरीब मुसलमानों, महिलाओं, बच्चों, जरूरतमंदों और बेसहारा लोगों की मदद के उद्देश्य से दान की गई थीं। इन संपत्तियों से होने वाली आय का उपयोग इन्हीं वर्गों के कल्याण पर होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उनका दावा है कि आज भी बड़ी संख्या में गरीब मुसलमान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, जबकि वक्फ की जमीनों से कुछ लोग करोड़ों रुपये का कारोबार कर रहे हैं।

    समाजवादी पार्टी के कार्यकाल पर लगाए आरोप
    मौलाना रिजवी ने आरोप लगाया कि वक्फ की जमीनों की कथित खरीद-फरोख्त समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान सबसे अधिक हुई। उनके अनुसार, जब-जब समाजवादी पार्टी की सरकार सत्ता में रही, तब सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड के जिम्मेदार लोगों ने सरकारी संरक्षण में वक्फ संपत्तियों के सौदे किए।

    उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव 1989-91, 1993-95 और 2003-07 तक मुख्यमंत्री रहे, जबकि अखिलेश यादव 2012 से 2017 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। मौलाना का दावा है कि इन चारों कार्यकालों में अधिकांश समय आजम खान के पास अल्पसंख्यक, वक्फ और हज मंत्रालय की जिम्मेदारी रही।

    चेयरमैनों की नियुक्ति और कार्यशैली पर भी सवाल
    मौलाना ने आरोप लगाया कि आजम खान की पसंद के लोगों को वक्फ बोर्ड में चेयरमैन और सदस्य बनाया गया। उन्होंने बताया कि जुफर अहमद फारूकी वर्ष 2000-01 तक, अमीर आलम 2001-03 तक, हाफिज उस्मान 2004-09 तक और इसके बाद जुफर अहमद फारूकी 2010 से 2026 तक सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहे। उनके अनुसार, इन कार्यकालों में बोर्ड के भीतर मनमाने ढंग से काम हुआ और कई कथित अनियमितताएं हुईं।

    ‘वक्फ की जमीनों का हुआ बंटवारा’
    मौलाना ने दावा किया कि सुन्नी और शिया दोनों वक्फ बोर्डों के कई जिम्मेदार पदाधिकारियों ने वक्फ की जमीनों का दुरुपयोग किया। उनका आरोप है कि जो भी व्यक्ति बोर्ड में सदस्य या पदाधिकारी बना, उसने अपने क्षेत्र में वक्फ की जमीनों का बंटवारा कराया। उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने वक्फ संपत्तियां इसलिए दान की थीं ताकि उनकी आय से गरीबों, यतीमों और जरूरतमंद लोगों की सहायता की जा सके, लेकिन इस उद्देश्य को पूरा नहीं किया गया।

    स्कूल, अस्पताल और मदरसे बनाने का उद्देश्य अधूरा
    मौलाना ने कहा कि वक्फ संपत्तियों पर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और मदरसे विकसित किए जाने थे, लेकिन कथित वक्फ माफिया के कारण यह उद्देश्य पूरा नहीं हो सका। उनका आरोप है कि इन संपत्तियों का लाभ आम लोगों के बजाय सीमित लोगों तक ही पहुंचा।

    मुख्यमंत्री से की कार्रवाई की मांग
    मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि वक्फ बोर्ड द्वारा बेची गई सभी जमीनों की जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने दावा किया कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले से भी बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। उनका यह भी कहना है कि यदि वक्फ की आय का सही उपयोग गरीब मुसलमानों के कल्याण पर किया जाए तो उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार संभव है।

  • मंगलवार के दिन इन नियमों से करें हनुमान जी की पूजा मिलेगा साहस सफलता और हर बाधा से छुटकारा

    मंगलवार के दिन इन नियमों से करें हनुमान जी की पूजा मिलेगा साहस सफलता और हर बाधा से छुटकारा


    नई दिल्ली ।
    सनातन धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक बजरंगबली की पूजा करने से भय संकट रोग और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त होता है। यह दिन मंगल ग्रह को भी समर्पित माना जाता है इसलिए जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है या जीवन में बार बार बाधाएं आती हैं उन्हें मंगलवार का व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी की कृपा से आत्मविश्वास बढ़ता है शत्रुओं पर विजय मिलती है और हर कठिन परिस्थिति का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।

    मंगलवार की पूजा के लिए प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करके भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाएं और सिंदूर चमेली का तेल लाल फूल तथा गुड़ चना अर्पित करें। हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अत्यंत प्रिय माना जाता है इसलिए इनका विशेष महत्व बताया गया है। पूजा के दौरान श्रीराम का स्मरण करते हुए हनुमान चालीसा बजरंग बाण सुंदरकांड या हनुमान अष्टक का पाठ करना शुभ माना जाता है।

    यदि संभव हो तो मंगलवार का व्रत रखें और दिनभर सात्विक भोजन ग्रहण करें। कई श्रद्धालु इस दिन केवल फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग एक समय भोजन का नियम निभाते हैं। पूजा के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराना लाल वस्त्र दान करना या बंदरों को गुड़ चना खिलाना भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इससे भगवान हनुमान शीघ्र प्रसन्न होते हैं और जीवन की परेशानियां धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं।

    धार्मिक मान्यता है कि मंगलवार के दिन क्रोध झूठ और अपशब्दों से दूर रहना चाहिए। किसी का अपमान करने या विवाद में पड़ने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता। इस दिन मांस मदिरा और तामसिक भोजन से भी परहेज करना चाहिए। घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने के लिए राम नाम का जाप और सुंदरकांड का पाठ विशेष लाभ देता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों को नौकरी व्यापार विवाह या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है उन्हें नियमित रूप से मंगलवार की पूजा करनी चाहिए। मंगल ग्रह की शुभता बढ़ाने के लिए लाल मसूर तांबा गुड़ या लाल वस्त्र का दान भी शुभ माना जाता है। यह उपाय जीवन में आने वाली बाधाओं को कम करने और सफलता के नए मार्ग खोलने में सहायक माने जाते हैं।

    श्रद्धा विश्वास और नियमपूर्वक की गई मंगलवार की पूजा केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा का भी स्रोत मानी जाती है। भगवान हनुमान की कृपा से व्यक्ति में साहस धैर्य और आत्मविश्वास का संचार होता है जिससे वह जीवन की हर चुनौती का सामना मजबूती से कर पाता है। इसलिए मंगलवार का दिन भक्ति सेवा और सद्कर्म के साथ बिताना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना गया है।

  • एमपी में मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी, पहली बार बारिश सामान्य से 3% कम, हल्‍की बारिश की संभावना

    एमपी में मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी, पहली बार बारिश सामान्य से 3% कम, हल्‍की बारिश की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान जुलाई में पहली बार बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे पहुंच गया है। अब तक प्रदेश में 241.8 मिमी (9.5 इंच) वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 250.1 मिमी (9.8 इंच) मानी जाती है। इस तरह प्रदेश में फिलहाल 3 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, यह अब तक के निर्धारित मानसूनी कोटे का लगभग 25 प्रतिशत है।

    बारिश की रफ्तार पिछले पांच दिनों से लगभग थमी हुई है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल तो छा रहे हैं, लेकिन तेज बारिश नहीं हो रही। यही वजह है कि आधे से अधिक जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, शहडोल, सागर और रीवा संभागों में औसत से 17 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं पश्चिमी क्षेत्र के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में सामान्य से 10 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।

    आज ऐसा रहेगा मौसम
    मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में आंधी-गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

    वहीं भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में तेज धूप निकलने का अनुमान है।

    क्यों कमजोर पड़ा मानसून?
    मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल मानसून को सक्रिय बनाए रखने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर हो गई हैं या उनका प्रभाव मध्य प्रदेश से दूर चला गया है। इसी कारण अधिकांश क्षेत्रों में केवल बादल छाए रहने और हल्की फुहार जैसी स्थिति बनी हुई है। हालांकि, उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) बनने की संभावना है। यदि यह आगे चलकर निम्न दाब क्षेत्र में परिवर्तित होता है, तो मध्य प्रदेश में एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

    इसके अलावा मौसम विभाग का अनुमान है कि प्रशांत महासागर में तीन नए मौसमीय सिस्टम विकसित हो रहे हैं। इनमें से यदि कोई एक भी बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है, तो प्रदेश में मानसून दोबारा सक्रिय होने की संभावना बढ़ जाएगी।

    जून की तुलना में जुलाई बेहतर, लेकिन पांच दिन की सुस्ती से घटे आंकड़े
    मौसम विभाग के मुताबिक जून में बारिश सामान्य से कम रही थी, जबकि जुलाई की शुरुआत में वर्षा की गतिविधियां बढ़ी थीं। लेकिन पिछले पांच दिनों से तेज बारिश नहीं होने के कारण कुल वर्षा का आंकड़ा घटकर 13 जुलाई को सामान्य से नीचे पहुंच गया।

    आंकड़ों के अनुसार, जुलाई मानसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। इसी महीने प्रदेश में पूरे मानसूनी कोटे की लगभग 40 प्रतिशत बारिश होती है। उदाहरण के तौर पर भोपाल में सामान्य वार्षिक वर्षा 39 इंच है, जिसमें से करीब 14 इंच बारिश केवल जुलाई में होती है। वहीं बड़े शहरों में जबलपुर ऐसा शहर है, जहां जुलाई में सबसे अधिक 17 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की जाती है।

  • हनुमान जी को शीघ्र प्रसन्न करने के आसान उपाय मंगलवार की पूजा से मिलेगा साहस सुख और समृद्धि का आशीर्वाद

    हनुमान जी को शीघ्र प्रसन्न करने के आसान उपाय मंगलवार की पूजा से मिलेगा साहस सुख और समृद्धि का आशीर्वाद


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ बजरंगबली की पूजा करने से भय संकट और नकारात्मकता दूर होती है तथा व्यक्ति को साहस आत्मविश्वास और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हनुमान जी को भगवान श्रीराम का परम भक्त माना जाता है इसलिए उनकी आराधना में भक्ति समर्पण और सेवा का विशेष महत्व बताया गया है।

    मंगलवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर या मंदिर में भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। उन्हें सिंदूर चमेली का तेल लाल फूल और गुड़ चने का भोग अर्पित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह उनकी प्रिय वस्तुओं में शामिल है। पूजा के दौरान श्रीराम का स्मरण अवश्य करें क्योंकि बिना श्रीराम के नाम के हनुमान आराधना अधूरी मानी जाती है।

    हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करना सबसे प्रभावी उपायों में माना जाता है। इसके साथ बजरंग बाण सुंदरकांड या हनुमान अष्टक का पाठ भी किया जा सकता है। माना जाता है कि इन स्तुतियों का नियमित पाठ मानसिक तनाव कम करने आत्मबल बढ़ाने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है। जो लोग किसी विशेष समस्या से परेशान हैं वे लगातार 11 या 21 मंगलवार तक नियमपूर्वक पूजा और पाठ कर सकते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार के दिन व्रत रखने का भी विशेष महत्व है। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करना क्रोध से दूर रहना और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना शुभ माना जाता है। बंदरों को केला गुड़ या चना खिलाना तथा गरीबों को भोजन और वस्त्र दान करना भी पुण्यदायी माना जाता है। सेवा और दान का भाव हनुमान जी को प्रसन्न करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है।

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर हो या जीवन में बार बार बाधाएं आ रही हों उनके लिए मंगलवार की पूजा लाभकारी मानी जाती है। हनुमान जी की आराधना से आत्मविश्वास बढ़ता है और नकारात्मक सोच पर नियंत्रण पाने में मानसिक मजबूती मिलती है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक विश्वास है और इन्हें उसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए।

    पूजा के साथ जीवन में सत्य ईमानदारी अनुशासन और सेवा का भाव अपनाना भी उतना ही आवश्यक माना गया है। केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि अच्छे कर्म और सकारात्मक व्यवहार भी हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का माध्यम बताए गए हैं। यदि व्यक्ति नियमित रूप से भगवान का स्मरण करते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करे और दूसरों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहे तो उसका जीवन अधिक संतुलित और सुखमय बन सकता है। श्रद्धा विश्वास और सदाचार के साथ की गई आराधना ही सच्चे अर्थों में भगवान हनुमान को प्रसन्न करने का सबसे श्रेष्ठ उपाय मानी जाती है।

  • आज का राशिफल 14 जुलाई 2026 आषाढ़ अमावस्या पर किस राशि को मिलेगा भाग्य का साथ और किसे बरतनी होगी सावधानी

    आज का राशिफल 14 जुलाई 2026 आषाढ़ अमावस्या पर किस राशि को मिलेगा भाग्य का साथ और किसे बरतनी होगी सावधानी


    नई दिल्ली । आषाढ़ अमावस्या का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पितरों का स्मरण दान पुण्य और पूजा पाठ का विशेष महत्व रहता है। ग्रहों की स्थिति भी कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव के संकेत दे रही है। कुछ लोगों को आर्थिक लाभ और करियर में सफलता मिलने की संभावना है तो कुछ को धैर्य और संयम के साथ आगे बढ़ने की जरूरत होगी। आइए जानते हैं 14 जुलाई 2026 का सभी राशियों का विस्तृत राशिफल।

    मेष राशि के लिए दिन नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए अनुकूल रहेगा। नौकरी में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और परिवार का सहयोग मिलेगा। वृषभ राशि के जातकों को धन संबंधी मामलों में सतर्क रहने की आवश्यकता है। अनावश्यक खर्च से बचें और सोच समझकर निवेश करें। मिथुन राशि वालों को रुके हुए कार्य पूरे होने से राहत मिलेगी। किसी पुराने मित्र से मुलाकात लाभदायक साबित हो सकती है।

    कर्क राशि के लिए पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा और घर में धार्मिक कार्यक्रम के योग बन सकते हैं। सिंह राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में सम्मान मिलने की संभावना है। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और नई जिम्मेदारियां भविष्य के लिए लाभदायक साबित होंगी। कन्या राशि वालों के लिए दिन मिश्रित रहेगा। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।

    तुला राशि के लोगों को व्यापार और नौकरी दोनों में अच्छे अवसर मिल सकते हैं। आय के नए स्रोत बनने की संभावना है। वृश्चिक राशि के जातकों को किसी महत्वपूर्ण निर्णय में जल्दबाजी से बचना चाहिए। पारिवारिक सलाह आपके लिए लाभदायक साबित होगी। धनु राशि वालों को यात्रा के योग बन रहे हैं। शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है।

    मकर राशि के लिए आर्थिक मामलों में स्थिरता बनी रहेगी। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा और पुराने विवाद सुलझ सकते हैं। कुंभ राशि के जातकों के लिए यह दिन विशेष रूप से शुभ रहने वाला है। आर्थिक लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं। लंबे समय से रुका हुआ धन वापस मिल सकता है या किसी नए निवेश से फायदा मिलने की संभावना है। व्यापारियों के लिए भी दिन लाभदायक रहेगा और करियर में नई संभावनाएं सामने आएंगी।

    मीन राशि के जातकों को अपने कार्यों में धैर्य रखने की जरूरत होगी। किसी भी निर्णय से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना बेहतर रहेगा। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी और मानसिक शांति का अनुभव होगा।

    आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र और दक्षिणा का दान करना शुभ माना गया है। पितरों का स्मरण और भगवान शिव तथा भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। दिनभर सकारात्मक सोच बनाए रखें और किसी भी कार्य में जल्दबाजी करने से बचें। ग्रहों की अनुकूल स्थिति का पूरा लाभ लेने के लिए संयम और परिश्रम दोनों आवश्यक रहेंगे।

  • प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ जाता है चेहरे का ग्लो जानिए हार्मोन से लेकर ब्लड फ्लो तक की पूरी वैज्ञानिक वजह

    प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ जाता है चेहरे का ग्लो जानिए हार्मोन से लेकर ब्लड फ्लो तक की पूरी वैज्ञानिक वजह


    नई दिल्ली । गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का बेहद खास दौर होता है। इन नौ महीनों के दौरान शरीर के भीतर कई ऐसे बदलाव होते हैं जिनका असर केवल मां और शिशु के स्वास्थ्य पर ही नहीं बल्कि त्वचा और चेहरे की रंगत पर भी साफ दिखाई देता है। अक्सर लोग कहते हैं कि गर्भावस्था में महिला के चेहरे पर अलग ही निखार और चमक आ जाती है जिसे सामान्य भाषा में प्रेग्नेंसी ग्लो कहा जाता है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर महिला में यह बदलाव एक जैसा दिखाई दे क्योंकि हर शरीर की बनावट और हार्मोनल प्रतिक्रिया अलग होती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ता है। इन हार्मोन का सीधा असर त्वचा पर पड़ता है। त्वचा तक रक्त संचार बेहतर होने लगता है जिससे चेहरे की कोशिकाओं को अधिक ऑक्सीजन और पोषण मिलता है। यही वजह है कि कई महिलाओं का चेहरा पहले की तुलना में अधिक ताजा साफ और चमकदार दिखाई देता है। गर्भावस्था के चौथे महीने के बाद यह बदलाव अधिक स्पष्ट रूप से नजर आने लगता है क्योंकि शुरुआती महीनों में उल्टी थकान और कमजोरी अधिक रहती है।

    प्रेग्नेंसी ग्लो की एक बड़ी वजह शरीर में बढ़ने वाली रक्त की मात्रा भी होती है। डॉक्टरों के अनुसार गर्भ में पल रहे शिशु की जरूरतों को पूरा करने के लिए महिला के शरीर में रक्त की मात्रा सामान्य से काफी अधिक हो जाती है। इससे चेहरे की महीन रक्त वाहिकाओं तक भी अधिक रक्त पहुंचता है जिससे गालों पर हल्की गुलाबी आभा और प्राकृतिक चमक दिखाई देती है। यही कारण है कि बिना किसी मेकअप के भी कई महिलाओं का चेहरा दमकता हुआ नजर आता है।

    गर्भावस्था के दौरान त्वचा में प्राकृतिक तेल का उत्पादन भी बढ़ जाता है। इससे त्वचा मुलायम और चमकदार दिख सकती है। हालांकि जिन महिलाओं की त्वचा पहले से तैलीय होती है उन्हें इस दौरान मुंहासों या पिंपल्स की समस्या भी हो सकती है। इसलिए यदि किसी गर्भवती महिला को चेहरे पर दाने निकल आएं तो इसे असामान्य नहीं माना जाता क्योंकि यह भी हार्मोनल बदलाव का सामान्य प्रभाव हो सकता है।

    जैसे जैसे गर्भ में शिशु का विकास होता है वैसे वैसे महिला के शरीर में गर्माहट और रक्त प्रवाह भी बढ़ता है। कई महिलाओं को इस दौरान सामान्य से अधिक गर्मी महसूस होती है। इसका असर चेहरे पर हल्की लालिमा और प्राकृतिक चमक के रूप में दिखाई देता है। यही बदलाव प्रेग्नेंसी ग्लो को और अधिक स्पष्ट बनाता है।

    इस दौरान सही खानपान भी त्वचा की खूबसूरती में अहम भूमिका निभाता है। यदि गर्भवती महिला अपने भोजन में ताजे फल हरी सब्जियां दूध दही दाल अंडा और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करती है तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पीती है तो त्वचा को आवश्यक विटामिन और पोषण मिलता है। इससे त्वचा स्वस्थ बनी रहती है और प्राकृतिक निखार बढ़ सकता है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि हर महिला में प्रेग्नेंसी ग्लो दिखाई दे यह जरूरी नहीं है। किसी को चमक मिलती है तो किसी को पिग्मेंटेशन मुंहासे या त्वचा संबंधी दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए गर्भावस्था के दौरान त्वचा में होने वाले बदलावों को सामान्य रूप से स्वीकार करना चाहिए और किसी भी गंभीर समस्या की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प होता है।

  • यूरोप के साथ मजबूत होगी भारत की आर्थिक साझेदारी, स्पेन में व्यापार निवेश और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर बनी रणनीति

    यूरोप के साथ मजबूत होगी भारत की आर्थिक साझेदारी, स्पेन में व्यापार निवेश और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर बनी रणनीति


    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बदलते समीकरणों के बीच भारत और स्पेन ने अपने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पेन की राजधानी मैड्रिड में वहां के अर्थव्यवस्था मंत्री कार्लोस कुएर्पो के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर व्यापार निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग को विस्तार देने पर व्यापक चर्चा की। इस बैठक में दोनों देशों ने भविष्य की आर्थिक साझेदारी को नई गति देने के साथ भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। माना जा रहा है कि यह पहल आने वाले वर्षों में भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी।

    तीन देशों के आधिकारिक दौरे के तहत स्पेन पहुंचे पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच हुई बातचीत बेहद सकारात्मक और परिणामोन्मुख रही। उन्होंने बताया कि भारत और स्पेन ने नवीकरणीय ऊर्जा ग्रीन हाइड्रोजन उन्नत विनिर्माण डिजिटल प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचा नवाचार और सतत विकास जैसे भविष्य के प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष सहमति बनाई है। इन क्षेत्रों में साझेदारी न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगी बल्कि वैश्विक स्तर पर टिकाऊ विकास के लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

    बैठक के दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर भी गंभीर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करने पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता जल्द लागू होता है तो भारतीय उद्योगों को यूरोपीय बाजारों में अधिक अवसर मिलेंगे जबकि यूरोपीय निवेशकों के लिए भी भारत में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। इससे व्यापारिक गतिविधियों के साथ रोजगार सृजन और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

    पीयूष गोयल की यह यात्रा केवल स्पेन तक सीमित नहीं है। 13 से 17 जुलाई तक चलने वाले पांच दिवसीय यूरोप दौरे के दौरान वह बेल्जियम और फिनलैंड भी जाएंगे जहां व्यापार निवेश तकनीक नवाचार और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर उच्चस्तरीय बैठकें होंगी। इस दौरे का उद्देश्य यूरोपीय देशों के साथ भारत की आर्थिक भागीदारी को और मजबूत बनाना तथा वैश्विक निवेशकों को भारत की विकास यात्रा से जोड़ना है।

    स्पेन प्रवास के दौरान पीयूष गोयल की मुलाकात उद्योग एवं पर्यटन मंत्री जोर्डी हेरेउ बोहेर और विदेश यूरोपीय संघ एवं सहयोग मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस बुएनो से भी प्रस्तावित है। इसके अलावा वह भारत स्पेन बिजनेस राउंडटेबल की अध्यक्षता करेंगे जिसमें स्पेन की प्रमुख कंपनियों और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस बैठक में भारत में उपलब्ध निवेश अवसरों को प्रस्तुत किया जाएगा तथा दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच प्रत्यक्ष कारोबारी साझेदारी को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान रहेगा।

    भारत और स्पेन के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। इसी वर्ष फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में भी व्यापार अर्थव्यवस्था स्वास्थ्य डिजिटल प्रौद्योगिकी शिक्षा नवाचार और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने की सहमति बनी थी। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों को मजबूत बनाने में स्पेन के सहयोग की सराहना भी की थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और यूरोप की उन्नत तकनीकी क्षमता दोनों देशों के लिए परस्पर लाभकारी अवसर पैदा कर रही हैं। यदि व्यापारिक समझौतों को समय पर अंतिम रूप दिया जाता है और निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाता है तो भारत और स्पेन के आर्थिक संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। यह पहल भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में और अधिक मजबूत स्थान दिलाने के साथ यूरोप के साथ उसकी रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

  • घर पर बनाएं होटल जैसे खिले-खिले चावल, इन आसान किचन टिप्स से हर दाना रहेगा अलग और स्वाद भी होगा बेहतरीन

    घर पर बनाएं होटल जैसे खिले-खिले चावल, इन आसान किचन टिप्स से हर दाना रहेगा अलग और स्वाद भी होगा बेहतरीन

    नई दिल्ली । भारतीय भोजन में चावल का महत्वपूर्ण स्थान है और लगभग हर घर में इसे नियमित रूप से बनाया जाता है। हालांकि कई बार चावल पकाते समय वे अधिक नरम, चिपचिपे या आपस में चिपक जाते हैं, जिससे उनका स्वाद और प्रस्तुति दोनों प्रभावित होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि होटल या रेस्तरां जैसे खिले-खिले चावल बनाने का रहस्य केवल अच्छी गुणवत्ता वाले चावल में नहीं, बल्कि उन्हें तैयार करने और पकाने की सही तकनीक में छिपा होता है।

    चावल बनाने से पहले उन्हें अच्छी तरह धोना सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। दो से चार बार पानी से धोने पर अतिरिक्त स्टार्च निकल जाता है, जिससे पकने के बाद दाने आपस में कम चिपकते हैं। इसके बाद चावल को लगभग 20 से 30 मिनट तक पानी में भिगोकर रखने से दाने पर्याप्त नमी सोख लेते हैं और पकने के दौरान समान रूप से फूलते हैं। यही कारण है कि पेशेवर रसोई में भी यह तरीका व्यापक रूप से अपनाया जाता है।

    खिले हुए चावल बनाने में पानी की सही मात्रा का विशेष महत्व होता है। प्रत्येक प्रकार के चावल के लिए पानी का अनुपात अलग हो सकता है, लेकिन सामान्य रूप से बासमती चावल के लिए एक कप चावल के साथ लगभग डेढ़ से दो कप पानी उपयुक्त माना जाता है। आवश्यकता से अधिक पानी डालने पर चावल जरूरत से ज्यादा नरम हो सकते हैं और उनकी बनावट प्रभावित हो सकती है। इसलिए चावल के प्रकार के अनुसार पानी की मात्रा तय करना बेहतर परिणाम देता है।

    पकाते समय थोड़ा सा घी या कुछ बूंदें तेल डालने से भी चावल के दाने अलग-अलग बने रहने में मदद मिलती है। इससे चावल की सतह पर हल्की चमक भी आती है। यदि चाहें तो स्वाद और सुगंध बढ़ाने के लिए तेजपत्ता, लौंग या छोटी इलायची जैसे साबुत मसालों का सीमित उपयोग किया जा सकता है, जिससे चावल का स्वाद और अधिक आकर्षक हो जाता है।

    चावल पूरी तरह पक जाने के बाद उन्हें तुरंत चलाने से बचना चाहिए। गैस बंद करने के बाद बर्तन को कुछ मिनट तक ढककर रखने से भाप के माध्यम से चावल समान रूप से तैयार हो जाते हैं। इसके बाद चम्मच के बजाय कांटे से हल्के हाथों से दानों को अलग करने पर वे टूटते नहीं हैं और उनकी बनावट भी बनी रहती है।

    रसोई के बर्तन और आंच का चयन भी अंतिम परिणाम को प्रभावित करता है। मोटे तले वाले बर्तन में चावल पकाने से गर्मी समान रूप से फैलती है और चावल नीचे से जलने की संभावना कम रहती है। शुरुआत में मध्यम आंच और बाद में धीमी आंच पर पकाने से चावल अच्छी तरह तैयार होते हैं और हर दाना अलग दिखाई देता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि पुराने बासमती चावल सामान्यतः अधिक खिले हुए बनते हैं। इसके अलावा चावल को बार-बार चलाने से बचना चाहिए और यदि बचे हुए चावल दोबारा गर्म करने हों तो उन पर थोड़ा पानी छिड़ककर गर्म करना बेहतर माना जाता है। इन सरल लेकिन प्रभावी तरीकों को अपनाकर घर पर भी आसानी से रेस्तरां जैसी गुणवत्ता वाले खिले-खिले और स्वादिष्ट चावल तैयार किए जा सकते हैं।