Author: bharati

  • असम के तिनसुकिया में स्वच्छता नियम तोड़ने वालों पर सख्ती, खुले में पेशाब और गंदगी फैलाने वालों के वीडियो अब LED स्क्रीन पर होंगे प्रदर्शित

    असम के तिनसुकिया में स्वच्छता नियम तोड़ने वालों पर सख्ती, खुले में पेशाब और गंदगी फैलाने वालों के वीडियो अब LED स्क्रीन पर होंगे प्रदर्शित

    नई दिल्ली । असम के तिनसुकिया शहर में सार्वजनिक स्वच्छता बनाए रखने के उद्देश्य से नगर प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। तिनसुकिया नगर बोर्ड ने सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने और खुले में पेशाब करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए ‘हॉल ऑफ शेम’ अभियान लागू किया है। इस अभियान के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों की पहचान सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से की जाती है और उनके वीडियो फुटेज शहर के प्रमुख स्थानों पर लगी बड़ी एलईडी स्क्रीन पर प्रदर्शित किए जाते हैं। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से लोगों में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी और सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन बढ़ेगा।

    नगर बोर्ड ने शहर के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क स्थापित किया है। इन कैमरों की सहायता से ऐसे लोगों की निगरानी की जा रही है जो सड़कों, दीवारों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकते हैं या खुले में पेशाब करते हैं। कैमरों में रिकॉर्ड हुई घटनाओं को डिजिटल स्क्रीन पर दिखाकर लोगों को नियमों के पालन के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि बार-बार जागरूकता अभियान चलाने और जुर्माना लगाने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा था, इसलिए यह नई व्यवस्था लागू की गई है।

    नगर निकाय के अधिकारियों के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अपमानित करना नहीं, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी को मजबूत करना है। उनका मानना है कि जब लोगों को यह एहसास होगा कि नियमों की अनदेखी सार्वजनिक रूप से सामने आ सकती है, तो वे स्वच्छता नियमों का अधिक गंभीरता से पालन करेंगे। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे शहर में गंदगी फैलाने की घटनाओं में कमी आएगी और सार्वजनिक स्थान अधिक साफ-सुथरे बने रहेंगे।

    हालांकि इस पहल ने सामाजिक और कानूनी स्तर पर नई बहस को भी जन्म दिया है। कई नागरिकों ने इसे स्वच्छ भारत की दिशा में एक प्रभावी कदम बताते हुए समर्थन दिया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थानों की सफाई केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व भी है। ऐसे में यदि कठोर उपायों से लोगों की आदतों में सुधार आता है तो इससे पूरे शहर को लाभ मिलेगा।

    वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने इस अभियान पर गंभीर सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना निजता के अधिकार से जुड़ा संवेदनशील विषय है। उनका तर्क है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और जागरूकता अभियान जैसे उपाय पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि सार्वजनिक प्रदर्शन से व्यक्तिगत सम्मान और गोपनीयता प्रभावित हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग प्रभावी साबित हो सकता है, लेकिन इसके साथ नागरिकों के अधिकारों और कानूनी प्रावधानों का संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। यदि तकनीक का उपयोग पारदर्शिता, स्पष्ट नियमों और उचित निगरानी के साथ किया जाए तो ऐसे अभियान बेहतर परिणाम दे सकते हैं।

    तिनसुकिया नगर बोर्ड की यह पहल अब अन्य शहरों के लिए भी चर्चा का विषय बन गई है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि यह अभियान सार्वजनिक स्वच्छता में कितना बदलाव ला पाता है और साथ ही निजता एवं नागरिक अधिकारों से जुड़े उठ रहे सवालों का समाधान किस प्रकार किया जाता है। फिलहाल यह पहल देश में स्वच्छता प्रबंधन और तकनीक के उपयोग को लेकर एक नई बहस का केंद्र बन चुकी है।

  • राहुल गांधी की गैरमौजूदगी से कांग्रेस की रणनीति पर असर, पटना का कार्यक्रम टला, अब देहरादून में होगा छात्रों से संवाद

    राहुल गांधी की गैरमौजूदगी से कांग्रेस की रणनीति पर असर, पटना का कार्यक्रम टला, अब देहरादून में होगा छात्रों से संवाद

    नई दिल्ली । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पिछले कुछ समय से सार्वजनिक गतिविधियों में अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच पार्टी ने बिहार की राजधानी पटना में 15 जुलाई को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को स्थगित कर दिया है। अब यह कार्यक्रम 17 जुलाई को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित किए जाने की तैयारी की जा रही है। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की रणनीति और संगठनात्मक स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ‘छात्रों की गूंज’ अभियान कांग्रेस द्वारा शिक्षा से जुड़े मुद्दों और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत राहुल गांधी को विभिन्न राज्यों में छात्रों के साथ संवाद करना था। पटना में होने वाला कार्यक्रम भी इसी श्रृंखला का हिस्सा था, लेकिन अंतिम समय में इसके स्थगित होने से राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ गई है।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम को पटना से देहरादून स्थानांतरित करने के पीछे बिहार कांग्रेस के भीतर चल रही संगठनात्मक चुनौतियां एक प्रमुख कारण मानी जा रही हैं। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में प्रदेश इकाई के भीतर बढ़ी आंतरिक खींचतान को देखते हुए नेतृत्व ने कार्यक्रम के स्थान में बदलाव का निर्णय लिया। इसके बाद उत्तराखंड में आयोजन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

    इसी बीच राहुल गांधी की सार्वजनिक अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पिछले करीब 20 दिनों से उनकी ओर से कोई सार्वजनिक कार्यक्रम, प्रेस संबोधन या सोशल मीडिया गतिविधि सामने नहीं आई है। पार्टी के भीतर से यह जानकारी सामने आई है कि वह विदेश यात्रा पर हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक यात्रा कार्यक्रम या विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। उनकी वापसी को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

    सूत्रों का यह भी कहना है कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति के कारण कांग्रेस को पहले से निर्धारित कई कार्यक्रमों में बदलाव करना पड़ा है। पटना के अलावा प्रयागराज में प्रस्तावित एक कार्यक्रम भी स्थगित किए जाने की चर्चा है। पार्टी अब आगामी आयोजनों की नई रूपरेखा तैयार कर रही है ताकि अभियान की गति प्रभावित न हो और विभिन्न राज्यों में निर्धारित कार्यक्रम समय पर आयोजित किए जा सकें।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी राज्यों में कांग्रेस के लिए संगठनात्मक एकजुटता और नेतृत्व की सक्रिय मौजूदगी महत्वपूर्ण होगी। ऐसे समय में किसी भी बड़े कार्यक्रम के स्थगित होने से राजनीतिक संदेश पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर पार्टी का कहना है कि अभियान जारी रहेगा और आवश्यक परिस्थितियों के अनुसार कार्यक्रमों में बदलाव करना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है।

    फिलहाल कांग्रेस की ओर से देहरादून में होने वाले कार्यक्रम की तैयारियां जारी हैं। पार्टी का उद्देश्य छात्रों से संवाद के माध्यम से शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है। वहीं राहुल गांधी की वापसी के बाद उनके आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक गतिविधियों पर भी सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में पार्टी की ओर से आधिकारिक कार्यक्रमों की नई रूपरेखा सामने आने की संभावना है।

  • 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा में टिकट पर बड़ा संदेश, सांसद आनंद भदौरिया बोले- उम्मीदवार तय करेंगे सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव

    2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा में टिकट पर बड़ा संदेश, सांसद आनंद भदौरिया बोले- उम्मीदवार तय करेंगे सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी में टिकट वितरण को लेकर चल रही चर्चाओं पर पार्टी सांसद आनंद भदौरिया ने स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों का अंतिम निर्णय केवल पार्टी नेतृत्व और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ही करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं और टिकट के दावेदारों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की सिफारिश या व्यक्तिगत अपेक्षाओं के बजाय पार्टी की आधिकारिक प्रक्रिया पर भरोसा रखें।

    धौरहरा लोकसभा क्षेत्र से सांसद आनंद भदौरिया ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी तय करने का अधिकार पूरी तरह पार्टी नेतृत्व के पास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार किसी व्यक्ति की सिफारिश या व्यक्तिगत प्रभाव के आधार पर टिकट मिलने की संभावना नहीं है। पार्टी जिस उम्मीदवार को अधिक उपयुक्त समझेगी, उसी को चुनाव मैदान में उतारा जाएगा और सभी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी होगी कि वे उसे विजयी बनाने के लिए पूरी निष्ठा से काम करें।

    उन्होंने कहा कि उनकी व्यक्तिगत पसंद का कोई उम्मीदवार नहीं है। सांसद होने के नाते उनकी जिम्मेदारी अपने लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटों के प्रति है। इसलिए पार्टी यदि किसी भी विधानसभा क्षेत्र में किसी भी नेता को उम्मीदवार बनाती है तो वह पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ उसके समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के निर्णय के खिलाफ जाना उनके सिद्धांतों में नहीं है और संगठन सर्वोपरि है।

    आनंद भदौरिया ने टिकट की उम्मीद रखने वाले नेताओं को सलाह दी कि यदि वे चुनाव लड़ना चाहते हैं तो अपना पक्ष सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने रखें। उन्होंने कहा कि कई बार कुछ लोग आवश्यकता पड़ने पर उनकी प्रशंसा करते हैं, लेकिन अपेक्षाएं पूरी नहीं होने पर वही लोग आलोचना करने लगते हैं। इस प्रकार का दोहरा व्यवहार राजनीतिक कार्यशैली के अनुरूप नहीं माना जा सकता और पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकसभा चुनाव के दौरान जिन कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका सहयोग किया था, उनसे उन्होंने कभी टिकट दिलाने का कोई वादा नहीं किया था। वर्तमान में भी उन्होंने किसी को टिकट दिलाने का आश्वासन नहीं दिया है। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि जिन लोगों ने उनके साथ मेहनत की है, उनके योगदान को वह सम्मान देते हैं और समय-समय पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर उनका सहयोग करने का प्रयास करते रहेंगे।

    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं। विभिन्न दलों में संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता भी लगातार बढ़ रही है। समाजवादी पार्टी के भीतर भी टिकट को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन आनंद भदौरिया के बयान को संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व की भूमिका को स्पष्ट करने वाले संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व की ओर से स्पष्ट संकेत मिलने से कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति कम हो सकती है। साथ ही यह संदेश भी जाता है कि उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया संगठन के स्तर पर तय मानकों के अनुसार होगी। आने वाले समय में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने के साथ विभिन्न दलों में टिकट वितरण और चुनावी रणनीति को लेकर गतिविधियां और अधिक बढ़ने की संभावना है।

  • यूरोप के तीन देशों के दौरे पर जाएंगे पीयूष गोयल, व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी सहयोग को नई दिशा देने पर रहेगा फोकस

    यूरोप के तीन देशों के दौरे पर जाएंगे पीयूष गोयल, व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी सहयोग को नई दिशा देने पर रहेगा फोकस


    नई दिल्ली ।
    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 13 से 17 जुलाई तक स्पेन, बेल्जियम और फिनलैंड के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर जाएंगे। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और यूरोप के बीच व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी, नवाचार और टिकाऊ विकास के क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देना है। इस दौरान केंद्रीय मंत्री विभिन्न सरकारी प्रतिनिधियों, उद्योग संगठनों और वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकों में भाग लेंगे।

    इस दौरे में पीयूष गोयल भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, रत्न एवं आभूषण, फूड प्रोसेसिंग, हेल्थकेयर और डिजाइन जैसे क्षेत्रों की प्रमुख भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सरकार का उद्देश्य भारतीय उद्योगों और यूरोपीय कंपनियों के बीच प्रत्यक्ष कारोबारी साझेदारी को बढ़ावा देना तथा नए निवेश अवसरों की पहचान करना है।

    यात्रा का पहला चरण स्पेन में होगा, जहां केंद्रीय मंत्री उद्योग संगठनों की ओर से आयोजित एक विशेष बिजनेस राउंडटेबल में भाग लेंगे। इस बैठक में ऑटोमोबाइल, नवीकरणीय ऊर्जा, रेलवे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, फूड प्रोसेसिंग और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि इस मंच पर भविष्य की साझेदारी और निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे।

    भारत और स्पेन के बीच यह संवाद ऐसे समय हो रहा है जब दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई स्पेनिश कंपनियों ने भारत में अपने निवेश और कारोबार का विस्तार किया है। वहीं भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी कंपनियां भी स्पेन में अपनी उपस्थिति लगातार मजबूत कर रही हैं, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और गहरे हुए हैं।

    दौरे के दूसरे चरण में भारतीय प्रतिनिधिमंडल 14 और 15 जुलाई को बेल्जियम पहुंचेगा। यहां पीयूष गोयल यूरोप के प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्र एंटवर्प पोर्ट का दौरा करेंगे। इस दौरान मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, ग्रीन लॉजिस्टिक्स और वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाने से जुड़े विभिन्न मॉडलों का अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही वे कई प्रमुख वैश्विक औद्योगिक समूहों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीईओ स्तर की बैठकें भी करेंगे।

    बेल्जियम में केंद्रीय मंत्री भारत-यूरोपीय संघ बिजनेस राउंडटेबल और ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की बैठकों में भी भाग लेंगे। इन बैठकों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, व्यापार को सरल बनाने, आधुनिक तकनीकों के उपयोग, टिकाऊ औद्योगिक विकास और मजबूत सप्लाई चेन जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। इन वार्ताओं का उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाना है।

    दौरे के अंतिम चरण में 16 और 17 जुलाई को प्रतिनिधिमंडल फिनलैंड जाएगा। यहां आयोजित इंडिया-फिनलैंड बिजनेस राउंडटेबल में डिजिटलाइजेशन, क्लीन एनर्जी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों पर विचार किया जाएगा। इस यात्रा को भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति के महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यूरोपीय देशों के साथ आर्थिक साझेदारी मजबूत होने, निवेश बढ़ने और भारतीय उद्योगों के लिए नए कारोबारी अवसर खुलने की उम्मीद है।

  • 'आत्मसम्मान से कभी समझौता नहीं किया', इंडस्ट्री के कठिन दौर को याद कर छलका कल्पना अय्यर का दर्द, सम्मान बचाने के लिए छोड़ दिया अभिनय

    'आत्मसम्मान से कभी समझौता नहीं किया', इंडस्ट्री के कठिन दौर को याद कर छलका कल्पना अय्यर का दर्द, सम्मान बचाने के लिए छोड़ दिया अभिनय

    नई दिल्ली । अभिनेत्री कल्पना अय्यर ने अपने लंबे अभिनय सफर और उससे जुड़े संघर्षों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपने करियर में कई कठिन दौर देखे, लेकिन कभी भी आत्मसम्मान और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि मनोरंजन जगत में काम करना उनके लिए केवल पेशा नहीं था, बल्कि अपने मूल्यों के साथ आगे बढ़ने का माध्यम भी था। जब परिस्थितियां ऐसी बनने लगीं कि सम्मान से समझौता किए बिना काम करना मुश्किल हो गया, तब उन्होंने अभिनय से दूरी बनाने का निर्णय लिया।

    कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया पर अपनी पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए अपने करियर के विभिन्न पड़ावों को याद किया। उन्होंने बताया कि टेलीविजन की दुनिया में उनका प्रवेश एक ऐसे अवसर से हुआ, जिसने उनके अभिनय जीवन को नई दिशा दी। उन्होंने उस महिला निर्देशक का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिन्होंने उनकी पहले से बनी छवि से अलग एक किरदार में उनकी क्षमता को पहचाना और उन पर भरोसा जताया। उसी विश्वास के कारण उन्होंने अपना पहला टेलीविजन शो करने का निर्णय लिया, जिसने उनके लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए।

    उन्होंने कहा कि शुरुआती सफलता के बाद उन्हें कई लोकप्रिय धारावाहिकों में अभिनय करने का मौका मिला। इन परियोजनाओं ने उन्हें एक कलाकार के रूप में पहचान दिलाई और लंबे समय तक वह लगातार काम करती रहीं। इस दौरान उन्हें रचनात्मक संतुष्टि के साथ आर्थिक स्थिरता भी मिली। उन्होंने स्वीकार किया कि वह अपने करियर और निजी जीवन दोनों से संतुष्ट थीं और उस दौर को अपने जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय मानती हैं।

    अभिनेत्री ने बताया कि समय के साथ मनोरंजन उद्योग में कई बदलाव आए। नई कार्यशैली और बदलते माहौल ने कलाकारों के लिए परिस्थितियां अलग बना दीं। उनके अनुसार धीरे-धीरे ऐसे अवसर सामने आने लगे, जहां सम्मानजनक व्यवहार की कमी महसूस होने लगी। कई बार छोटे किरदारों और कम पारिश्रमिक के साथ काम करने का दबाव भी बढ़ा। उन्हें यह महसूस होने लगा कि यदि इंडस्ट्री में बने रहना है तो बिना सवाल किए हर तरह की शर्त स्वीकार करनी होगी।

    कल्पना अय्यर ने कहा कि उन्होंने इस स्थिति पर गंभीरता से विचार किया और अपने जीवन के मूल्यों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया। उनके लिए आत्मसम्मान किसी भी पेशेवर अवसर से अधिक महत्वपूर्ण था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह केवल काम करते रहने के लिए अपनी ईमानदारी, गरिमा और सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकती थीं। यही कारण रहा कि उन्होंने अभिनय से दूर होकर जीवन में आगे बढ़ने का फैसला किया।

    उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए यह भी संकेत दिया कि हर कलाकार के सामने ऐसे क्षण आते हैं, जब उसे सफलता और आत्मसम्मान के बीच चुनाव करना पड़ता है। उनके अनुसार किसी भी पेशे में सम्मान और नैतिक मूल्यों का महत्व सबसे अधिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में लिए गए कुछ फैसले आसान नहीं होते, लेकिन यदि वे अपने सिद्धांतों की रक्षा करते हैं तो लंबे समय में वही सबसे सही साबित होते हैं।

    कल्पना अय्यर की यह भावनात्मक टिप्पणी मनोरंजन जगत में बदलते कार्य परिवेश और कलाकारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी ध्यान आकर्षित करती है। उनका मानना है कि किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान उसका आत्मसम्मान और उसके मूल्य होते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने करियर का कठिन लेकिन महत्वपूर्ण फैसला लिया और आज भी उसे सही मानती हैं।

  • रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारत ने बढ़ाई रफ्तार, जून में 34 प्रतिशत उछाल के साथ ऊर्जा आयात रणनीति हुई और मजबूत

    रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारत ने बढ़ाई रफ्तार, जून में 34 प्रतिशत उछाल के साथ ऊर्जा आयात रणनीति हुई और मजबूत

    नई दिल्ली । भारत ने जून 2026 में रूस से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज करते हुए अपनी ऊर्जा आयात रणनीति को और मजबूत किया है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच भारत ने रूस से 4.5 अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल आयात किया, जो मई के मुकाबले 34 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़ोतरी के साथ भारत चीन के बाद रूस के हाइड्रोकार्बन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध रूसी तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आयात लागत को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    ऊर्जा और स्वच्छ वायु पर शोध करने वाली संस्था की रिपोर्ट के अनुसार जून महीने में भारत के कुल रूसी जीवाश्म ईंधन आयात का सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का रहा। कुल 5.5 अरब यूरो के रूसी हाइड्रोकार्बन आयात में 83 प्रतिशत हिस्सेदारी केवल कच्चे तेल की रही, जिसकी कीमत 4.5 अरब यूरो आंकी गई। इससे स्पष्ट है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों में रूसी कच्चे तेल का महत्व लगातार बना हुआ है।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुल कच्चे तेल आयात में भी मासिक आधार पर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान देश की कई प्रमुख रिफाइनरियों ने रूस से तेल खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां लागत और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए रूसी आपूर्ति का अधिक उपयोग कर रही हैं।

    देश की सबसे बड़ी रिफाइनिंग इकाइयों में इस दौरान रूसी तेल की आपूर्ति में तेज वृद्धि देखने को मिली। जामनगर रिफाइनरी में रूस से आने वाले कच्चे तेल का आयात पिछले महीने की तुलना में 150 प्रतिशत बढ़ गया। वहीं पारादीप रिफाइनरी में यह वृद्धि 126 प्रतिशत रही। कोच्चि रिफाइनरी ने भी अपनी खरीद में 83 प्रतिशत का इजाफा किया, जबकि वाडिनार रिफाइनरी में रूसी तेल की आपूर्ति 45 प्रतिशत बढ़ी। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि प्रमुख रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल पर पहले से अधिक भरोसा जता रही हैं।

    भारत की बढ़ी हुई मांग का असर रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात पर भी दिखाई दिया। जून के दौरान रूस के कच्चे तेल के निर्यात की मात्रा में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अपेक्षाकृत कम रहने के कारण रूस की निर्यात आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो सकी। कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली दैनिक आय घटकर 348 मिलियन यूरो रह गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अधिक मात्रा में निर्यात होने के बावजूद कम कीमतों ने राजस्व पर दबाव बनाए रखा।

    रूस के कुल जीवाश्म ईंधन निर्यात से होने वाली आय में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार निर्यात की मात्रा बढ़ने के बावजूद कुल दैनिक आय एक प्रतिशत घटकर 734 मिलियन यूरो रह गई। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव और मांग के संतुलन को दर्शाती है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कच्चे तेल के अलावा भारत ने रूस से 488 मिलियन यूरो मूल्य के तेल उत्पाद और 444 मिलियन यूरो का कोयला भी आयात किया। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार लगातार मजबूत बना हुआ है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि वैश्विक बाजार में कीमतें अनुकूल रहती हैं और आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और लागत प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद को प्राथमिकता देता रह सकता है।

  • वियतनाम नाव हादसा: 15 भारतीयों के पार्थिव शरीर हो ची मिन्ह पहुंचेंगे, औपचारिकताएं पूरी होते ही स्वदेश लाने की तैयारी तेज

    वियतनाम नाव हादसा: 15 भारतीयों के पार्थिव शरीर हो ची मिन्ह पहुंचेंगे, औपचारिकताएं पूरी होते ही स्वदेश लाने की तैयारी तेज

    नई दिल्ली । वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के निकट हुए दर्दनाक पर्यटक नौका हादसे में जान गंवाने वाले 15 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। वियतनाम स्थित भारतीय दूतावास ने बताया है कि सभी शव रविवार शाम तक हो ची मिन्ह सिटी पहुंच जाएंगे। वहां आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें जल्द से जल्द भारत भेजा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय दूतावास और वियतनामी प्रशासन लगातार समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।

    भारतीय दूतावास के अनुसार, स्थानीय अधिकारियों ने पार्थिव शरीरों को शीघ्र भारत भेजने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है। दूतावास और भारतीय वाणिज्य दूतावास की टीमें संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक देरी न हो और मृतकों के परिजनों तक उनके प्रियजनों के पार्थिव शरीर जल्द पहुंचाए जा सकें।

    शवों की स्वदेश वापसी की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए एक अधिकृत एजेंसी को नियुक्त किया गया है। यह एजेंसी मृतकों के परिजनों से संपर्क कर आवश्यक अनुमति, दस्तावेज और अन्य औपचारिकताओं को पूरा कराएगी। अधिकारियों का कहना है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होते ही पार्थिव शरीर विशेष व्यवस्था के तहत भारत भेज दिए जाएंगे।

    हादसे में घायल हुए एक भारतीय नागरिक की हालत में लगातार सुधार बताया गया है। उनका इलाज वियतनाम के एक सरकारी अस्पताल में चल रहा है और चिकित्सकों की निगरानी में स्वास्थ्य पहले से बेहतर हो रहा है। वहीं, दुर्घटना में सुरक्षित बचाए गए अन्य भारतीय पर्यटकों की स्वदेश वापसी की भी व्यवस्था की गई है। सभी यात्रियों को रविवार को उनके-अपने गृह राज्यों के लिए रवाना किए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

    अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित पर्यटकों की यात्रा संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं ताकि वे सुरक्षित अपने घर पहुंच सकें। भारतीय दूतावास लगातार सभी यात्रियों और उनके परिवारों के संपर्क में है तथा जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। संबंधित एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और राहत एवं सहायता कार्य पूरी तरह सक्रिय हैं।

    यह हादसा शनिवार को उस समय हुआ था जब भारतीय पर्यटकों को लेकर जा रही एक पर्यटन नौका फु क्वोक द्वीप के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में भ्रमण के दौरान पलट गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नौका में लगभग 32 भारतीय सवार थे। इनमें तमिलनाडु के पर्यटकों की संख्या सबसे अधिक थी, जबकि अन्य यात्री आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल से थे।

    स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि इस दुर्घटना में 15 भारतीयों की मृत्यु हुई, जबकि अन्य यात्रियों को समय रहते सुरक्षित निकाल लिया गया। बचाए गए लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और आवश्यक देखभाल की गई। हादसे के बाद भारतीय दूतावास ने राहत एवं समन्वय कार्यों को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लगातार कार्रवाई जारी रखी है।

    इस घटना ने विदेश यात्रा पर गए भारतीय पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े किए हैं। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान मृतकों के पार्थिव शरीर सम्मानपूर्वक भारत पहुंचाने, घायलों के उपचार और सभी प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।

  • 116 करोड़ की इमारतों में बंद लिफ्ट 5 करोड़ की साइकिलें बेकार स्मार्ट सिटी की हकीकत ने चौंकाया

    116 करोड़ की इमारतों में बंद लिफ्ट 5 करोड़ की साइकिलें बेकार स्मार्ट सिटी की हकीकत ने चौंकाया


    भोपाल । भोपाल स्मार्ट सिटी मिशन को देश की सबसे महत्वाकांक्षी शहरी विकास योजनाओं में शामिल किया गया था। आधुनिक सुविधाओं से लैस राजधानी बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में शुरू हुई इस परियोजना पर अब तक एक हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कई बड़े सवाल खड़े कर रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब सत्तारूढ़ दल के विधायक भगवानदास सबनानी ने भी खुलकर कहा है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर शहर का नुकसान हुआ और बदले में नागरिकों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल सकीं।

    जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक में विधायक की नाराजगी के बाद सामने आई तस्वीरें बताती हैं कि कई परियोजनाएं या तो अधूरी हैं या फिर रखरखाव के अभाव में अपनी उपयोगिता खो चुकी हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए आवासीय टावर इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। करीब 116 करोड़ रुपये की लागत से बने तीन 13 मंजिला टावरों में सरकारी कर्मचारियों को फ्लैट आवंटित किए गए लेकिन कुछ ही समय में लिफ्ट बंद हो गईं और रखरखाव की जिम्मेदारी तय नहीं होने से रहवासी परेशान हैं। अग्निशमन व्यवस्था डोर कैमरे पार्क और अन्य सुविधाएं भी उचित देखरेख के अभाव में प्रभावित हो रही हैं।

    स्मार्ट सिटी क्षेत्र में लगभग 49 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हाट बाजार भी सवालों के घेरे में है। तीन मंजिला इमारत में सैकड़ों दुकानें बनाई गईं लेकिन पार्किंग और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि वर्षों पहले दुकानों का वादा किया गया था लेकिन आज तक उन्हें आवंटन नहीं मिला।

    करीब 31 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रहा स्मार्ट दशहरा मैदान भी अब तक अधूरा पड़ा है। धीमी निर्माण गति के कारण यह स्थान असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। लगातार टेंडर प्रक्रिया के बावजूद परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

    स्मार्ट सिटी की सबसे चर्चित योजनाओं में शामिल सार्वजनिक साइकिल परियोजना भी पूरी तरह विफल साबित हुई। वर्ष 2018 में लगभग 5 करोड़ 36 लाख रुपये खर्च कर खरीदी गई 500 साइकिलें अब धूल खा रही हैं। जिन साइकिल ट्रैक पर इन्हें चलाया जाना था वे भी कई स्थानों पर उखड़ चुके हैं। अब दोबारा नई एजेंसी नियुक्त करने और नए सिरे से काम शुरू करने की तैयारी की जा रही है जिससे अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ेगा।

    इसी तरह स्मार्ट सिटी क्षेत्र में विकसित किए गए बड़े व्यावसायिक प्लॉट भी अपेक्षित खरीदार नहीं जुटा सके हैं। कुल 42 प्लॉटों में से केवल 18 ही बिक पाए हैं जबकि शेष खाली पड़े हैं। विधायक का सुझाव है कि बड़े प्लॉटों को छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाए ताकि छोटे और मध्यम व्यापारी भी निवेश कर सकें और परियोजना को गति मिल सके।

    शहर में लगाए गए स्मार्ट पोल भी अपनी घोषित सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा सके। वाईफाई ई वाहन चार्जिंग और पब्लिक एड्रेस सिस्टम जैसी सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं। पांच करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई स्मार्ट डस्टबिन परियोजना भी विफल रही। इसके अलावा हजारों पेड़ों की कटाई पर्यावरण को लेकर चिंता का विषय बनी हुई है जबकि कई खाली सरकारी परिसरों पर दोबारा अवैध कब्जों की शिकायतें सामने आ रही हैं।

    हालांकि सदर मंजिल जैसे कुछ प्रोजेक्ट बेहतर उपयोग के उदाहरण बने हैं जहां ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण कर उसे निजी संचालन के माध्यम से राजस्व से जोड़ा गया है। लेकिन समग्र तस्वीर यह संकेत देती है कि स्मार्ट सिटी मिशन में केवल निर्माण कार्य पर्याप्त नहीं है बल्कि समय पर रखरखाव जवाबदेही और योजनाओं के प्रभावी संचालन पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है। भोपाल का अनुभव यह बताता है कि विकास केवल करोड़ों रुपये खर्च करने से नहीं बल्कि नागरिकों तक सुविधाएं पहुंचाने से सफल माना जाएगा।

  • Dividend Alert: सोमवार को एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे 5 बड़े शेयर, जानिए किस कंपनी ने कितना डिविडेंड घोषित किया और किन निवेशकों को मिलेगा सीधा लाभ

    Dividend Alert: सोमवार को एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे 5 बड़े शेयर, जानिए किस कंपनी ने कितना डिविडेंड घोषित किया और किन निवेशकों को मिलेगा सीधा लाभ


    नई दिल्ली ।
    अगले कारोबारी सप्ताह की शुरुआत डिविडेंड निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाली है। सोमवार 13 जुलाई को शेयर बाजार में पांच कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड पर कारोबार करेंगे। इनमें महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज, भंसाली इंजीनियरिंग पॉलिमर्स, सुपर सेल्स इंडिया, एक्सप्रो इंडिया और इंगरसोल-रैंड (इंडिया) शामिल हैं। इन कंपनियों ने अपने-अपने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड घोषित किया है। ऐसे में केवल वे निवेशक इसका लाभ प्राप्त कर सकेंगे जिनके नाम रिकॉर्ड डेट तक कंपनी के शेयरधारकों की सूची में दर्ज होंगे।

    एक्स-डिविडेंड डेट शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण अवधारणा मानी जाती है। इस तारीख के बाद यदि कोई निवेशक संबंधित कंपनी का शेयर खरीदता है तो वह घोषित डिविडेंड का पात्र नहीं होता। इसलिए डिविडेंड का लाभ लेने के इच्छुक निवेशकों को एक्स-डिविडेंड डेट से पहले शेयर खरीदना आवश्यक होता है। इसी वजह से रिकॉर्ड डेट और एक्स-डिविडेंड डेट का विशेष महत्व माना जाता है।

    महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज ने अपने शेयरधारकों के लिए 7.50 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है। कंपनी की एक्स-डिविडेंड डेट 13 जुलाई निर्धारित की गई है। मौजूदा समय में कंपनी का शेयर करीब 341 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। समय पर शेयर रखने वाले पात्र निवेशकों को कंपनी की ओर से घोषित लाभांश का फायदा मिलेगा।

    सुपर सेल्स इंडिया ने भी अपने निवेशकों के लिए 2.50 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है। कंपनी के शेयर सोमवार को एक्स-डिविडेंड हो जाएंगे। इसका अर्थ यह है कि एक्स-डिविडेंड डेट के बाद शेयर खरीदने वाले निवेशक इस डिविडेंड के पात्र नहीं होंगे। कंपनी का शेयर फिलहाल लगभग 866.85 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

    एक्सप्रो इंडिया ने अपने शेयरधारकों को 2 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देने का निर्णय लिया है। कंपनी की एक्स-डिविडेंड डेट भी 13 जुलाई तय की गई है। कंपनी का शेयर करीब 1455 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। डिविडेंड के साथ-साथ निवेशक कंपनी के दीर्घकालिक प्रदर्शन पर भी नजर बनाए हुए हैं।

    इंगरसोल-रैंड (इंडिया) ने इस सूची में सबसे अधिक 20 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है। कंपनी की एक्स-डिविडेंड डेट भी 13 जुलाई ही है। वर्तमान में इसका शेयर लगभग 4466.80 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। अधिक डिविडेंड की घोषणा के कारण यह शेयर निवेशकों के बीच विशेष चर्चा में बना हुआ है।

    भंसाली इंजीनियरिंग पॉलिमर्स ने 1 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है। कंपनी ने 13 जुलाई को ही रिकॉर्ड डेट और एक्स-डिविडेंड डेट निर्धारित की है। कंपनी का शेयर फिलहाल करीब 103.10 रुपये पर कारोबार कर रहा है। रिकॉर्ड डेट से पहले शेयर रखने वाले निवेशक घोषित लाभांश प्राप्त करने के पात्र होंगे।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि डिविडेंड निवेशकों के लिए नियमित आय का एक महत्वपूर्ण माध्यम होता है, लेकिन केवल डिविडेंड को आधार बनाकर निवेश का निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, भविष्य की विकास संभावनाओं, लाभप्रदता और दीर्घकालिक प्रदर्शन का भी मूल्यांकन करना चाहिए। एक्स-डिविडेंड डेट के आसपास शेयरों में कीमतों में सामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, इसलिए निवेश से पहले सभी पहलुओं पर सावधानीपूर्वक विचार करना आवश्यक है।

  • AI रणनीति ने बदली IT कंपनी की तस्वीर, पहली तिमाही में 17% बढ़ा मुनाफा, 1.68 अरब डॉलर के नए ऑर्डर से मजबूत हुई भविष्य की कारोबारी संभावनाएं

    AI रणनीति ने बदली IT कंपनी की तस्वीर, पहली तिमाही में 17% बढ़ा मुनाफा, 1.68 अरब डॉलर के नए ऑर्डर से मजबूत हुई भविष्य की कारोबारी संभावनाएं

    नई दिल्ली । आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एलटीआईमाइंडट्री ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 1,466 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 1,254 करोड़ रुपये था। बेहतर आय और लगातार बढ़ती कारोबारी मांग ने कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती दी है।

    पहली तिमाही के दौरान कंपनी की परिचालन आय भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी। ऑपरेशन से प्राप्त राजस्व 17.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 11,608 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि एक वर्ष पहले यह 9,840.6 करोड़ रुपये था। पिछली तिमाही की तुलना में भी राजस्व में सुधार दर्ज किया गया, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनी लगातार नए व्यवसाय हासिल करने और मौजूदा ग्राहकों से कारोबार बढ़ाने में सफल रही है।

    तिमाही के दौरान कंपनी को लगभग 1.68 अरब डॉलर के नए ऑर्डर प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 3.1 प्रतिशत अधिक हैं। वहीं पिछले बारह महीनों में कुल ऑर्डर बुक का मूल्य बढ़कर 6.65 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह वृद्धि बताती है कि कंपनी की सेवाओं की मांग वैश्विक ग्राहकों के बीच लगातार बनी हुई है और भविष्य के लिए उसकी कारोबारी स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है।

    कंपनी का कहना है कि इस प्रदर्शन के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधानों पर केंद्रित रणनीति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विभिन्न उद्योगों के ग्राहक अब AI तकनीक को तेजी से अपनाने की दिशा में निवेश कर रहे हैं, जिससे कंपनी को बड़े और दीर्घकालिक प्रोजेक्ट हासिल करने में मदद मिल रही है। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और ऑटोमेशन से जुड़े समाधान भी कंपनी की आय बढ़ाने में सहायक बने हैं।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक वेणु लाम्बू ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजे इस बात का संकेत हैं कि AI-केंद्रित रणनीति व्यावसायिक रूप से सकारात्मक परिणाम दे रही है। उनके अनुसार ग्राहक अब AI आधारित समाधानों से वास्तविक कारोबारी लाभ प्राप्त कर रहे हैं, जिसके कारण कंपनी को अधिक मूल्य वाले प्रोजेक्ट और नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाली तिमाहियों में भी यह रणनीति कंपनी की विकास यात्रा को गति देगी।

    मानव संसाधन के मोर्चे पर कंपनी में 30 जून तक कुल 87,886 कर्मचारी कार्यरत थे। पिछली तिमाही की तुलना में कर्मचारियों की संख्या में 64 की मामूली कमी दर्ज की गई। वहीं पिछले बारह महीनों की कर्मचारी त्याग दर 13.3 प्रतिशत पर स्थिर रही, जिससे संकेत मिलता है कि कार्यबल की स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है।

    हालांकि वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा है, लेकिन शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन अब भी दबाव में है। इस वर्ष अब तक शेयर में 33 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। पिछले एक वर्ष में भी निवेशकों को लगभग 24 प्रतिशत का नुकसान हुआ है, जबकि तीन वर्षों के दौरान शेयर करीब 19 प्रतिशत कमजोर हुआ है। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि मजबूत तिमाही नतीजे, बढ़ती ऑर्डर बुक और AI आधारित रणनीति आने वाले समय में कंपनी के शेयर प्रदर्शन को कितनी मजबूती दे पाते हैं।