Author: bharati

  • महाराष्ट्र के मंत्री का आमिर खान पर सीधा हमला: तीसरी शादी को लेकर दिया विवादित बयान, सियासी गलियारों में मची हलचल

    महाराष्ट्र के मंत्री का आमिर खान पर सीधा हमला: तीसरी शादी को लेकर दिया विवादित बयान, सियासी गलियारों में मची हलचल


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता आमिर खान एक बार फिर अपनी व्यक्तिगत जिंदगी को लेकर बड़े राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गए हैं। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता नितेश राणे ने आमिर खान की कथित तीसरी शादी को लेकर बेहद तीखा और आक्रामक रुख अपनाया है। राणे ने अभिनेता पर सीधा निशाना साधते हुए उन्हें ‘लव जिहाद का ब्रांड एंबेसडर’ तक कह डाला है। इस बयान के सामने आने के बाद फिल्म उद्योग से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में एक नई बहस छिड़ गई है और सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा नेता नितेश राणे अपने बेबाक और कड़े बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान आमिर खान के पिछले विवाहों और हालिया चर्चाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि ऐसी शादियां समाज में एक खास तरह का संदेश देती हैं, जिसे वे स्वीकार्य नहीं मानते। राणे ने अभिनेता के निजी फैसलों को सामाजिक और धार्मिक चश्मे से देखते हुए उन पर यह गंभीर टिप्पणी की है। महाराष्ट्र की राजनीति में इस बयान को लेकर अचानक से तापमान बढ़ गया है।

    आमिर खान की बात करें तो वे अपनी बेहतरीन फिल्मों और अभिनय के लिए जाने जाते हैं, लेकिन अपनी शादियों और बयानों के कारण वे अक्सर ट्रोल्स और कुछ राजनीतिक संगठनों के निशाने पर भी रहे हैं। उनकी पहली शादी रीना दत्ता और दूसरी शादी किरण राव से हुई थी, और दोनों ही शादियां आपसी सहमति से तलाक के मोड़ पर खत्म हुईं। हाल के दिनों में उनकी तीसरी शादी से जुड़ी कुछ खबरें और अफवाहें मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तैर रही थीं, जिसने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।

    इस पूरे मामले पर अभी तक आमिर खान या उनके आधिकारिक प्रवक्ताओं की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आमतौर पर आमिर खान ऐसे व्यक्तिगत विवादों पर चुप्पी साधे रखना ही पसंद करते हैं, लेकिन फिल्म जगत के कई समर्थकों और प्रशंसकों ने नितेश राणे के इस बयान को पूरी तरह से गैर-जरूरी और किसी के निजी जीवन में अत्यधिक हस्तक्षेप बताया है। विपक्ष के कुछ नेताओं ने भी भाजपा पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयानों का सहारा लेने का आरोप लगाया है।

    चुनावों और राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के बीच इस तरह के संवेदनशील मुद्दों का उछलना कोई नई बात नहीं है। नितेश राणे के इस बयान ने मनोरंजन जगत और राजनीति के बीच की कड़वाहट को एक बार फिर से उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या यह विवाद महज एक राजनीतिक बयानबाजी बनकर शांत हो जाता है या फिर इस पर बॉलीवुड और अन्य राजनीतिक दलों की तरफ से कोई बड़ी और संगठित प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।

  • संगीत जगत को अपूरणीय क्षति नहीं रहीं महान पार्श्व गायिका एस जानकी छह दशक तक सुरों से सजाया भारतीय सिनेमा

    संगीत जगत को अपूरणीय क्षति नहीं रहीं महान पार्श्व गायिका एस जानकी छह दशक तक सुरों से सजाया भारतीय सिनेमा


    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत की सबसे सशक्त और मधुर आवाजों में शुमार महान पार्श्व गायिका एस जानकी अब हमारे बीच नहीं रहीं। 88 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली और अपने पीछे ऐसा संगीत खजाना छोड़ गईं जो आने वाली कई पीढ़ियों तक श्रोताओं के दिलों में गूंजता रहेगा। उनके निधन से फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर है। दक्षिण भारतीय सिनेमा से लेकर पूरे देश के संगीत प्रेमी इस खबर से भावुक हैं क्योंकि एक ऐसा युग समाप्त हो गया जिसने अपनी आवाज से लाखों लोगों की भावनाओं को शब्द और सुर दिए।

    जानकारी के अनुसार शुक्रवार रात उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई जिसके बाद मैसुरु के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि परिवार की ओर से की गई। उनकी पोती अप्सरा व्यद्युला ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए बताया कि उनकी प्रिय दादी और महान गायिका अब इस दुनिया में नहीं रहीं। उन्होंने कहा कि परिवार के बीच शांतिपूर्वक विदा लेने वाली जानकी ने अपने गीतों के जरिए करोड़ों लोगों के जीवन में खुशियां और यादें छोड़ी हैं। उन्होंने लोगों से परिवार की निजता का सम्मान करने की भी अपील की।

    एस जानकी का नाम भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने अपने छह दशक लंबे करियर में लगभग 48 हजार गीत गाए और यह उपलब्धि उन्हें देश की सबसे अधिक गीत रिकॉर्ड करने वाली गायिकाओं में शामिल करती है। उनकी आवाज केवल तमिल कन्नड़ तेलुगु और मलयालम फिल्मों तक सीमित नहीं रही बल्कि उन्होंने हिंदी उड़िया बंगाली पंजाबी उर्दू सहित करीब 20 भारतीय भाषाओं में भी अपनी गायकी का जादू बिखेरा। फिल्मों के अलावा उन्होंने एल्बम टेलीविजन और रेडियो के लिए भी अनेक यादगार गीत गाए जिनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है।

    23 अप्रैल 1938 को तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के गुंटूर जिले में जन्मी एस जानकी का संगीत से जुड़ाव बचपन से ही हो गया था। महज नौ वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी थी। उनके पिता आयुर्वेदिक चिकित्सक और शिक्षक थे जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचानकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने नादस्वरम वादक पेडीस्वामी से संगीत की शुरुआती शिक्षा ली लेकिन विशेष बात यह रही कि उन्होंने कभी शास्त्रीय संगीत की औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की। अपनी स्वाभाविक प्रतिभा और अथक अभ्यास के दम पर उन्होंने भारतीय संगीत जगत में वह मुकाम हासिल किया जिसकी मिसाल बहुत कम देखने को मिलती है।

    एस जानकी की आवाज की सबसे बड़ी विशेषता उसकी भावनात्मक गहराई और विविधता थी। रोमांटिक गीतों से लेकर भक्ति संगीत लोकधुनों और संवेदनशील रचनाओं तक उन्होंने हर शैली को पूरी आत्मा के साथ निभाया। उनकी गायकी ने अनगिनत फिल्मों को यादगार बनाया और कई पीढ़ियों के संगीत प्रेमियों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बनी रही।

    उनका निधन केवल एक कलाकार का जाना नहीं बल्कि भारतीय संगीत की एक अमूल्य विरासत का युगांत है। हालांकि वह अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी आवाज उनके गीत और उनकी कला हमेशा जीवित रहेंगे। भारतीय संगीत जगत उन्हें हमेशा श्रद्धा सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करेगा।

  • बड़े सपनों ने बदली किस्मत आर माधवन बोले सड़क पर मिला ऑफर बना जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट

    बड़े सपनों ने बदली किस्मत आर माधवन बोले सड़क पर मिला ऑफर बना जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के सबसे प्रतिभाशाली और बहुमुखी अभिनेताओं में गिने जाने वाले आर माधवन की सफलता की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। आज करोड़ों दिलों पर राज करने वाले इस अभिनेता ने हाल ही में अपनी जिंदगी से जुड़ा ऐसा किस्सा साझा किया जिसने यह साबित कर दिया कि बड़े सपने देखने वालों की किस्मत भी कभी न कभी उनका दरवाजा जरूर खटखटाती है। दिलचस्प बात यह है कि माधवन को अभिनय का पहला प्रस्ताव किसी ऑडिशन या फिल्मी दफ्तर में नहीं बल्कि सड़क पर मिला था और उस समय उन्हें यह पूरा मामला किसी स्कैम जैसा लगा था।

    एक बातचीत के दौरान आर माधवन ने बताया कि उन्होंने महज 17 वर्ष की उम्र में अपनी जिंदगी के लक्ष्य तय कर लिए थे। उन्होंने अपनी नोटबुक में साफ शब्दों में लिखा था कि वह एक दिन अमीर और मशहूर अभिनेता बनना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि वह जीवन में हर क्षेत्र की थोड़ी बहुत जानकारी हासिल करेंगे लेकिन कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में ऐसी महारत बनाएंगे जिससे उनकी अलग पहचान बने। आज भी वह नोटबुक उनके पास सुरक्षित है और उसे देखकर उन्हें अपने शुरुआती सपनों की याद आती है।

    माधवन का मानना है कि इंसान को सपने देखने से कभी डरना नहीं चाहिए। उनके अनुसार अधिकांश लोग अपनी क्षमताओं से पहले ही समझौता कर लेते हैं और यह मान बैठते हैं कि उनके सपने पूरे नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि ऐसे सपने देखने चाहिए जिन्हें सुनकर लोग आपको पागल समझें क्योंकि असंभव दिखने वाले सपने ही इंसान को असाधारण सफलता तक पहुंचाते हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन महानायक अमिताभ बच्चन उनके जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं देंगे लेकिन जिंदगी ने उन्हें यह खुशी भी दी।

    सबसे रोचक किस्सा उनके अभिनय करियर की शुरुआत से जुड़ा है। माधवन ने बताया कि वह मूल रूप से अभिनेता बनने मुंबई नहीं आए थे। उस समय वह टेक कम्युनिकेशन और पब्लिक स्पीकिंग का प्रशिक्षण देते थे और अच्छी खासी कमाई कर रहे थे। उनकी मासिक आय उस दौर में सत्तर से अस्सी हजार रुपए के बीच थी जो उस समय बेहद बड़ी रकम मानी जाती थी। वह अपने काम और जीवन से संतुष्ट थे और फिल्मों में आने की कोई योजना नहीं थी।

    इसी दौरान एक दिन सड़क पर एक अनजान व्यक्ति ने उनसे पूछा कि क्या वह अभिनय करना चाहेंगे। माधवन ने स्वीकार किया कि पहली प्रतिक्रिया यही थी कि शायद कोई धोखाधड़ी करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि बाद में उन्होंने उस प्रस्ताव को गंभीरता से लिया और यही छोटा सा अवसर उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। इसी मौके ने उन्हें मॉडलिंग और विज्ञापनों की दुनिया तक पहुंचाया और फिर धीरे धीरे फिल्मों के दरवाजे भी खुल गए।

    आज आर माधवन भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने हिंदी के साथ तमिल और अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी शानदार पहचान बनाई है। उन्होंने अपने अभिनय से यह साबित किया कि सफलता केवल किस्मत से नहीं बल्कि स्पष्ट लक्ष्य आत्मविश्वास और लगातार मेहनत से मिलती है। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है जो बड़े सपने देखने से घबराते हैं। माधवन का मानना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो जिंदगी किसी भी मोड़ पर सफलता का ऐसा मौका दे सकती है जो पूरी दुनिया बदल दे।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इंग्लैंड का धमाका: नॉर्वे को हराकर सेमीफाइनल में मारी एंट्री, जूड बेलिंगहैम ने दागे दो ऐतिहासिक गोल

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इंग्लैंड का धमाका: नॉर्वे को हराकर सेमीफाइनल में मारी एंट्री, जूड बेलिंगहैम ने दागे दो ऐतिहासिक गोल

    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट चरण में फुटबॉल जगत का एक बड़ा उलटफेर और रोमांचक मुकाबला देखने को मिला है। स्टार मिडफील्डर जूड बेलिंगहैम के असाधारण और दमदार प्रदर्शन के दम पर इंग्लैंड की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने नॉर्वे को शिकस्त देकर फीफा विश्व कप के सेमीफाइनल में शान से प्रवेश कर लिया है। इस खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड की जीत के सबसे बड़े नायक जूड बेलिंगहैम रहे, जिन्होंने मैच के बेहद दबाव वाले क्षणों में दो बेहतरीन गोल दागकर अपनी टीम की जीत सुनिश्चित की। इस हार के साथ ही नॉर्वे का विश्व कप का सफर क्वार्टर फाइनल में ही समाप्त हो गया है।

    मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। नॉर्वे की टीम ने अपने मजबूत डिफेंस और आक्रामक विंगर्स के दम पर शुरुआती हाफ में इंग्लैंड के फॉरवर्ड लाइन को काफी परेशान किया। हालांकि, खेल के आगे बढ़ने के साथ ही इंग्लिश टीम ने मैच पर अपनी पकड़ मजबूत करना शुरू कर दी। मध्यक्रम में खेलते हुए जूड बेलिंगहैम ने न केवल नॉर्वे के आक्रमण को विफल किया, बल्कि इंग्लैंड के लिए लगातार गोल करने के बेहतरीन मौके भी बनाए। उनके इस आक्रामक खेल का नॉर्वे के पास कोई जवाब नहीं था।

    हाफ टाइम के बाद मैच का रोमांच चरम पर पहुंच गया, जब बेलिंगहैम ने विपक्षी टीम के डिफेंस को छकाते हुए पहला शानदार मैदानी गोल दागा और इंग्लैंड को बढ़त दिला दी। इसके कुछ ही समय बाद नॉर्वे ने भी पलटवार करने की कोशिश की, लेकिन बेलिंगहैम के रणनीतिक खेल और दूसरे निर्णायक गोल ने नॉर्वे की वापसी की उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया। इस पूरे मुकाबले में बेलिंगहैम का फुटवर्क और मैदान पर उनकी सूझबूझ अद्भुत रही, जिसके लिए उन्हें मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुना गया।

    इंग्लैंड के फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह एक बेहद ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाला क्षण है, क्योंकि टीम लंबे समय बाद विश्व कप के इतने करीब पहुंची है। टीम के मुख्य कोच ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जूड बेलिंगहैम की जमकर तारीफ की और कहा कि बेलिंगहैम ने न केवल अपनी व्यक्तिगत प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि एक सच्चे लीडर की तरह पूरी टीम को एकजुट रखकर सेमीफाइनल का टिकट दिलाया। कतर विश्व कप की कड़वी यादों को पीछे छोड़ते हुए अब इंग्लिश टीम इस बार खिताब अपने नाम करने के लिए प्रबल दावेदार मानी जा रही है।

    दूसरी ओर, इस हार से नॉर्वे के खेमे में मायूसी छा गई है, लेकिन टूर्नामेंट में उनके जुझारू प्रदर्शन की हर तरफ सराहना हो रही है। अब सभी फुटबॉल प्रेमियों की नजरें आगामी सेमीफाइनल मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां इंग्लैंड का सामना दुनिया की अन्य दिग्गज टीमों से होगा। खेल समीक्षकों का मानना है कि यदि जूड बेलिंगहैम का यह शानदार फॉर्म आगे भी जारी रहता है, तो इंग्लैंड को इस साल विश्व चैंपियन बनने से रोकना किसी भी टीम के लिए बेहद मुश्किल चुनौती साबित होने वाला है।

  • महिला क्रिकेट के एक स्वर्णिम युग का अंत: इंग्लैंड की विश्व विजेता कप्तान हीदर नाइट ने किया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान

    महिला क्रिकेट के एक स्वर्णिम युग का अंत: इंग्लैंड की विश्व विजेता कप्तान हीदर नाइट ने किया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान

    नई दिल्ली । महिला क्रिकेट जगत से एक बेहद भावुक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ इंग्लैंड की महान और दिग्गज क्रिकेटर हीदर नाइट ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। भारत के खिलाफ ऐतिहासिक लॉर्ड्स के मैदान पर खेला जा रहा महिला टेस्ट मैच उनके 16 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मुकाबला साबित होने जा रहा है। उनके साथ ही इंग्लैंड की एक और अनुभवी खिलाड़ी टैमी ब्यूमोंट भी इस ऐतिहासिक टेस्ट मैच की समाप्ति के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को हमेशा के लिए अलविदा कह देंगी। इस तरह इंग्लैंड महिला क्रिकेट के एक बेहद सफल और स्वर्णिम युग का समापन हो रहा है।

    हीदर नाइट ने साल 2010 में इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए पदार्पण किया था और तब से लेकर अब तक वे टीम के मध्यक्रम की सबसे मजबूत रीढ़ बनी रहीं। उन्होंने अपने करियर में तीनों प्रारूपों को मिलाकर कुल 320 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले, जिसमें उन्होंने 7,994 रन बनाए। उनके नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 6 शानदार शतक और 42 अर्धशतक दर्ज हैं, जबकि अपनी उपयोगी गेंदबाजी के दम पर उन्होंने 84 विकेट भी चटकाए हैं। वह इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली महिला क्रिकेटर हैं। साल 2020 में उन्होंने टी20 विश्व कप में शतक जड़कर क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में शतक लगाने वाली इंग्लैंड की पहली महिला खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया था।

    नाइट के पूरे क्रिकेटिंग सफर का सबसे ऐतिहासिक और यादगार पल साल 2017 में आया था। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए महिला वनडे विश्व कप के बेहद रोमांचक फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम का सपना तोड़ते हुए विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। उन्होंने साल 2016 में दिग्गज खिलाड़ी चार्लोट एडवर्ड्स के बाद टीम की कमान संभाली थी और साल 2025 तक कुल 199 मैचों में इंग्लैंड का नेतृत्व किया, जिसमें से टीम ने 134 मुकाबलों में जीत दर्ज की। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली एशेज सीरीज में पराजय के बाद उन्होंने कप्तानी छोड़ दी थी।

    अपने संन्यास की घोषणा करते हुए हीदर नाइट बेहद भावुक नजर आईं और उन्होंने कहा कि पिछले 16 वर्षों की यह यात्रा उनके लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं रही है। उन्होंने इस सफर में मिले अनुभवों, यादों और ड्रेसिंग रूम के साथियों का आभार व्यक्त किया। पिछले कुछ वर्षों में नाइट को गंभीर चोटों का भी सामना करना पड़ा, जिसमें साल 2024 के टी20 विश्व कप के दौरान पिंडली की चोट और साल 2025 में हैमस्ट्रिंग टेंडन की गंभीर चोट शामिल थी। इन बाधाओं के बावजूद उन्होंने शानदार वापसी की और हालिया टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 58 रनों की जुझारू पारी खेलकर अपनी टीम को संकट से निकाला था।

    इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्लेयर कॉनर और चेयरमैन रिचर्ड थॉम्पसन ने हीदर नाइट के योगदान को असाधारण बताते हुए उनकी प्रतिबद्धता और नेतृत्व क्षमता की जमकर सराहना की है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद हीदर नाइट अब खेल प्रशासनिक भूमिका में कदम रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्हें द हंड्रेड टूर्नामेंट की प्रसिद्ध टीम ‘लंदन स्पिरिट’ का नया जनरल मैनेजर नियुक्त किया गया है, जिसकी जिम्मेदारी वे जुलाई के अंत में शुरू होने वाले नए सीजन से संभालेंगी।

  • बॉलीवुड में गोविंदा के बेटे यशवर्धन की ग्रैंड एंट्री: सितंबर में रिलीज होगी डेब्यू फिल्म, मां सुनीता आहूजा भी स्क्रीन पर आएंगी नजर

    बॉलीवुड में गोविंदा के बेटे यशवर्धन की ग्रैंड एंट्री: सितंबर में रिलीज होगी डेब्यू फिल्म, मां सुनीता आहूजा भी स्क्रीन पर आएंगी नजर

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत के दिग्गज और लोकप्रिय अभिनेता गोविंदा के प्रशंसकों के लिए एक बड़ी और बेहद रोमांचक खबर सामने आ रही है। गोविंदा के बेटे यशवर्धन आहूजा अब अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए बड़े पर्दे पर अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यशवर्धन की बहुप्रतीक्षित डेब्यू फिल्म की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और यह फिल्म इसी साल सितंबर के महीने में सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए निर्धारित की गई है। इस खबर के सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर स्टार किड को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    इस खास प्रोजेक्ट को लेकर सबसे बड़ा सरप्राइज यह है कि फिल्म में केवल यशवर्धन ही नहीं, बल्कि उनकी मां और गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा भी अभिनय करती हुई नजर आने वाली हैं। हाल ही में एक रियलिटी शो और मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी बेबाक बातचीत से सुर्खियां बटोरने वाली सुनीता आहूजा ने खुद इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बेटा यशवर्धन पिछले काफी समय से अभिनय, डांस और फिल्म निर्माण की बारीकियों को सीख रहा था और अब वह दर्शकों के सामने आने के लिए पूरी तरह से परिपक्व हो चुका है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, यशवर्धन आहूजा को बॉलीवुड में लॉन्च करने का जिम्मा मशहूर फिल्म निर्माता एकता कपूर ने उठाया है। यह फिल्म एकता कपूर के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाई जा रही है, जो लीक से हटकर और मनोरंजक सिनेमा बनाने के लिए जानी जाती हैं। हालांकि, फिल्म के नाम और इसकी मुख्य कहानी को लेकर अभी तक पूरी गोपनीयता बरती जा रही है, लेकिन उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह एक आधुनिक दौर की कमर्शियल एंटरटेनर फिल्म होगी, जिसमें यशवर्धन को एक बेहद प्रभावशाली किरदार में पेश किया जाएगा।

    यशवर्धन ने बड़े पर्दे पर कदम रखने से पहले सिनेमा की तकनीकी समझ विकसित करने के लिए निर्माता-निर्देशक साजिद नाडियाडवाला के साथ बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर भी काम किया है। उन्होंने अभिनय की बाकायदा ट्रेनिंग ली है और अपने पिता की तरह ही डांस कौशल को भी निखारा है। सुनीता आहूजा ने मीडिया से बातचीत में अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि एक मां के तौर पर उनके लिए यह बेहद गर्व का क्षण है कि उनका बेटा आखिरकार अपने सपनों को पूरा करने जा रहा है और वे खुद भी इस सफर में स्क्रीन पर उनके साथ जुड़कर बेहद उत्साहित हैं।

    गोविंदा के फैंस लंबे समय से उनके बेटे के बॉलीवुड डेब्यू का इंतजार कर रहे थे। नब्बे के दशक में अपनी अनूठी कॉमेडी और बेजोड़ डांस स्टाइल से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले गोविंदा की विरासत को आगे बढ़ाना यशवर्धन के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी होगी। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि सितंबर में होने वाली यह रिलीज इस साल के सबसे बड़े डेब्यू में से एक हो सकती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पिता गोविंदा की तरह यशवर्धन अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों और समीक्षकों का दिल जीतने में कितने कामयाब हो पाते हैं।

  • अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हड़कंप: फिलिस्तीन दौरे पर गए भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना को इजरायली क्षेत्र में 90 मिनट तक रोका

    अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हड़कंप: फिलिस्तीन दौरे पर गए भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना को इजरायली क्षेत्र में 90 मिनट तक रोका

    नई दिल्ली । फिलिस्तीन और इजरायल के बीच जारी तनावपूर्ण माहौल के बीच एक बेहद गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय मूल के प्रमुख अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने खुलासा किया है कि फिलिस्तीन की आधिकारिक यात्रा के दौरान उन्हें और उनके साथ मौजूद अन्य अमेरिकी नागरिकों को इजरायली बस्ती के हथियारबंद तत्वों द्वारा बंदूक की नोक पर करीब 90 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी के दिग्गज नेता खन्ना बुधवार को दक्षिणी वेस्ट बैंक के ऐतिहासिक गांव खिरबेट जनुता के खंडहरों का निरीक्षण करने पहुंचे थे, तभी इस अप्रत्याशित संकटपूर्ण स्थिति का जन्म हुआ।

    सांसद रो खन्ना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जब वे खंडहरों का दौरा कर रहे थे, तभी अमेरिकी निर्मित एम4एस राइफलों से लैस इजरायली बस्ती के कुछ लोगों ने उन्हें और उनके पूरे प्रतिनिधिमंडल को जबरन हिरासत में ले लिया। खन्ना का आरोप है कि घटना की सूचना मिलने के बाद जब इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) के जवान मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने हथियारबंद हमलावरों को रोकने के बजाय उल्टा उनका ही साथ दिया और अमेरिकी नागरिकों को आगे बढ़ने से रोके रखा। अमेरिकी डेलिगेशन के साथ मौजूद सुरक्षा अधिकारियों और इजरायली बलों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई।

    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के एक अमेरिकी फोटोग्राफर भी सांसद खन्ना के साथ मौजूद थे, जिन्होंने इस तनावपूर्ण स्थिति को करीब से देखा। अमेरिकी मीडिया से बातचीत करते हुए रो खन्ना ने अपना दर्द बयां किया और कहा कि उस असाधारण परिस्थिति में उन्होंने खुद को पूरी तरह से असहाय महसूस किया। उन्होंने कहा कि उनके पास जीवन के तमाम विशेषाधिकार और उच्च सुरक्षा कवच होने के बावजूद उन्हें इस खौफनाक दौर से गुजरना पड़ा, जिससे वहां के सामान्य नागरिकों की दैनिक सुरक्षा व्यवस्था और जमीनी हकीकत का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

    घटना के तुरंत बाद अमेरिकी राजनयिकों को इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद वॉशिंगटन से लेकर यरूशलेम तक कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। अमेरिकी दूतावास और इजरायली पुलिस के उच्च अधिकारियों के बीच हुए कड़े कूटनीतिक हस्तक्षेप और लंबी बातचीत के बाद आखिरकार लगभग डेढ़ घंटे के बाद रो खन्ना और उनके सहयोगियों को सुरक्षित वहां से जाने की अनुमति दी गई। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और इसे अमेरिकी जनप्रतिनिधि के साथ एक अक्षम्य दुर्व्यवहार माना जा रहा है।

    इस घटना के बाद वैश्विक स्तर पर इजरायली बस्तियों में सक्रिय हथियारबंद गुटों की भूमिका और वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। रो खन्ना ने अपने बयान में जोर देते हुए कहा कि यदि अमेरिकी संसद के किसी शक्तिशाली सदस्य को इस प्रकार 90 मिनट तक बंधक बनाकर बेबस किया जा सकता है, तो कब्जे के साये में रह रहे आम फिलिस्तीनी नागरिकों को हर दिन न जाने किस स्तर के उत्पीड़न और असुरक्षा का सामना करना पड़ता होगा। इस घटना ने पश्चिम एशिया के इस संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा और मानवाधिकारों की स्थिति को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।

  • आस्था और तकनीक का बेजोड़ संगम: कहीं धड़कता है भगवान का दिल तो कहीं आता है साक्षात पसीना, जानें इन तीन रहस्यमयी मंदिरों की गाथा

    आस्था और तकनीक का बेजोड़ संगम: कहीं धड़कता है भगवान का दिल तो कहीं आता है साक्षात पसीना, जानें इन तीन रहस्यमयी मंदिरों की गाथा


    नई दिल्ली । भारत के दक्षिणी राज्यों में स्थित प्राचीन मंदिर अपनी वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्ता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। लेकिन तमिलनाडु के तीन ऐसे विशिष्ट मंदिर भी हैं, जहाँ की मूर्तियां निर्जीव पत्थरों की होने के बावजूद इंसानों की तरह व्यवहार करती दिखाई देती हैं। इन विग्रहों में मानवीय धड़कन महसूस होने, भीषण गर्मी में साक्षात पसीना आने और चेहरे पर मूंछों के बाल प्राकृतिक रूप से बढ़ने के दावे किए जाते हैं। आधुनिक विज्ञान और शोधकर्ताओं के लिए यह चमत्कारी घटनाएं आज भी एक अबूझ पहेली बनी हुई हैं, जबकि श्रद्धालुओं के लिए यह ईश्वर की प्रत्यक्ष उपस्थिति का प्रमाण है।

    तमिलनाडु में स्थित चिदंबरम नटराज मंदिर भगवान शिव के सबसे पवित्र और प्रमुख धामों में से एक माना जाता है, जहाँ शिव जी नटराज स्वरूप में विराजमान हैं। इस मंदिर को लेकर वैज्ञानिक जगत और शोधकर्ताओं के बीच लंबे समय से अध्ययन जारी है। प्रामाणिक मान्यताओं के अनुसार यदि मंदिर की मुख्य विग्रह के हृदय वाले स्थान पर अत्यंत ध्यानपूर्वक महसूस किया जाए, तो वहाँ एक निरंतर धड़कन की ध्वनि सुनाई देती है। यह कंपन बिल्कुल किसी जीवित मनुष्य के हृदय की गति के समान प्रतीत होता है। विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मानता है कि यह देवालय पृथ्वी के चुंबकीय केंद्र पर निर्मित है, जिससे यहाँ एक अत्यंत तीव्र और शक्तिशाली ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।

    रहस्य की इस कड़ी में अगला नाम तिरुनेलवेली के थिरुमालीरुंचोलई मंदिर का आता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस पावन परिसर में ग्रीष्म ऋतु के दौरान एक अत्यंत विस्मयकारी दृश्य देखने को मिलता है। जब बाहरी वातावरण का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है, तब गर्भगृह के भीतर स्थापित भगवान विष्णु की पाषाण निर्मित मूर्ति को साक्षात पसीना आने लगता है। मूर्ति के मुखमंडल और शरीर पर स्वेद की छोटी-छोटी बूंदें स्पष्ट रूप से उभर आती हैं। इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं और मंदिर के सेवादार प्रतिदिन अत्यंत आदर भाव से सूती वस्त्र की सहायता से इस जल को पोंछते हैं।

    तीसरा चमत्कार कोयंबटूर के निकट स्थित पेरूर पट्टेश्वरर मंदिर से जुड़ा हुआ है, जो अपनी प्राचीन कलाकृति के साथ-साथ एक विशेष मूर्ति के लिए चर्चा में रहता है। मंदिर परिसर में स्थापित एक विशिष्ट विग्रह की मूंछों के बाल समय के साथ प्राकृतिक रूप से बड़े होते जाते हैं। स्थानीय परंपराओं और पीढ़ियों से सेवा कर रहे पुजारियों के अनुसार, एक निश्चित समयावधि के पश्चात इन बालों को तराशना पड़ता है। पाषाण खंड पर इस तरह से बालों का विकास होना विज्ञान के सभी स्थापित नियमों को चुनौती देता है।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार इन घटनाओं के पीछे पत्थरों की विशिष्ट प्रकृति, वातावरण की आर्द्रता, भौगोलिक स्थिति अथवा कोई अज्ञात भू-गर्भीय या रासायनिक प्रतिक्रिया उत्तरदायी हो सकती है। हालांकि, कड़े और नियंत्रित वातावरण के भीतर भी इन विसंगतियों का कोई ठोस वैज्ञानिक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं किया जा सका है। हमारे पूर्वजों ने किस अदृश्य तकनीक और वैज्ञानिक चेतना के बल पर इन दिव्य संरचनाओं का निर्माण किया था, यह रहस्य आज भी इतिहास के गर्भ में छिपा हुआ है, लेकिन इन स्थलों के प्रति जनमानस की अगाध श्रद्धा निरंतर बनी हुई है।

  • भगवान भोलेनाथ की आराधना का विशेष दिन: प्रदोष व्रत और शिवरात्रि एक ही दिन होने से बना दुर्लभ संयोग, इन विशेष वस्तुओं के दान से चमकेगी किस्मत

    भगवान भोलेनाथ की आराधना का विशेष दिन: प्रदोष व्रत और शिवरात्रि एक ही दिन होने से बना दुर्लभ संयोग, इन विशेष वस्तुओं के दान से चमकेगी किस्मत

    नई दिल्ली । सनातन धर्म में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि का एक ही दिन पड़ना बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है। इस वर्ष 12 जुलाई 2026 को भगवान शिव को समर्पित दो अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत, रवि प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि एक ही दिन पड़ रहे हैं। इस दुर्लभ संयोग के कारण शिव भक्तों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और सुबह से ही देश भर के शिवालयों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। ज्योतिषविदों के अनुसार इस प्रकार के संयोग में की गई पूजा और दान का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।

    धार्मिक गणना के अनुसार आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी तिथि के चलते प्रदोष व्रत का पालन किया जा रहा है। चूंकि आज रविवार का दिन है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि रवि प्रदोष का व्रत रखने और प्रदोष काल में भगवान शिव व माता पार्वती की संयुक्त उपासना करने से जीवन के समस्त संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। आज प्रदोष काल में पूजा के लिए सबसे उत्तम समय शाम को 07:20 बजे से लेकर रात के 09:30 बजे तक निर्धारित किया गया है, जिसमें श्रद्धालु विशेष आरती और अर्घ्य आदि प्रदान कर सकते हैं।

    इसके साथ ही, संध्या काल के पश्चात चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ होने के कारण आज ही के दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत भी रखा जा रहा है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में इसके लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। मासिक शिवरात्रि की मुख्य पूजा निशिता काल यानी मध्य रात्रि में संपन्न की जाती है। इस व्रत के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त 13 जुलाई की रात को यानी आधी रात के समय 12:07 बजे से लेकर 12:47 बजे तक रहेगा, जहां शिव भक्त शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करेंगे।

    इस महासंयोग के अवसर पर दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार आज के दिन अनाज जैसे चावल, गेहूं और दाल का दान करने से घर में कभी भी अन्न-धन की कमी नहीं होती है। भगवान भोलेनाथ को सफेद रंग अत्यधिक प्रिय है, इसलिए आज के दिन सफेद रंग की मिठाइयों का दान करने से आर्थिक उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं और इच्छित वरदान की प्राप्ति होती है। इसके अलावा सफेद वस्त्रों का दान करने से जातक को सौभाग्य की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य संबंधी सभी परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।

    पर्यावरण और ग्रहों की शांति के दृष्टिकोण से आज के शुभ दिन पर पौधों का दान करना भी अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि रवि प्रदोष और मासिक शिवरात्रि के इस पावन अवसर पर छायादार या पूजनीय पौधों का दान करने से कुंडली के विभिन्न ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस प्रकार श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, उचित समय पर महादेव का अभिषेक करने और जरूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार दान देने से मनुष्य को मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज पर नया विवाद गैरकानूनी स्क्रीनिंग्स के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचा मामला

    दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज पर नया विवाद गैरकानूनी स्क्रीनिंग्स के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचा मामला

    नई दिल्ली । दिलजीत दोसांझ की बहुचर्चित फिल्म सतलुज एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। पहले ओटीटी प्लेटफॉर्म से फिल्म हटाए जाने को लेकर चर्चा हुई और अब इसकी कथित गैरकानूनी सार्वजनिक स्क्रीनिंग्स का मामला पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। फिल्म को लेकर दायर नई याचिका ने पूरे घटनाक्रम को एक नया कानूनी मोड़ दे दिया है और अब सभी की नजर अदालत की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

    फिल्म का नाम पहले पंजाब 95 था और लंबे समय तक विभिन्न कारणों से इसकी रिलीज टलती रही। आखिरकार यह फिल्म तीन जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई लेकिन महज दो दिन बाद ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इसके बाद भी फिल्म की चर्चा थमी नहीं बल्कि कई स्थानों पर लोगों ने अपने स्तर पर इसकी सार्वजनिक स्क्रीनिंग शुरू कर दी। पंजाब के कई गांवों और शहरों में बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाकर सामूहिक रूप से फिल्म दिखाई जाने लगी। कुछ स्थानों पर गुरुद्वारों और खुले मैदानों में भी लोग एक साथ बैठकर फिल्म देखते नजर आए। राजस्थान से भी ऐसी स्क्रीनिंग्स की तस्वीरें सामने आईं जिनकी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई।

    इसी बीच एडवोकेट विनीत जिंदल ने पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इन सार्वजनिक स्क्रीनिंग्स पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि बिना वैध अनुमति फिल्म की स्क्रीनिंग कराना कानून का उल्लंघन है और इससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि कुछ धार्मिक संगठनों और राजनीतिक समूहों की ओर से आयोजित की जा रही इन स्क्रीनिंग्स के कारण सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।

    याचिका में अदालत से मांग की गई है कि ऐसी सभी कथित गैरकानूनी स्क्रीनिंग्स पर तत्काल रोक लगाई जाए और आयोजन करने वाले लोगों तथा संस्थाओं के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना फिल्म दिखाना उचित नहीं है और इससे भविष्य में गंभीर स्थिति भी पैदा हो सकती है।

    दूसरी ओर फिल्म के समर्थकों का कहना है कि ओटीटी से फिल्म हटाए जाने के बाद दर्शकों ने इसे देखने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशे। कई जगह स्थानीय स्तर पर लोगों ने फिल्म डाउनलोड कर सामूहिक रूप से देखने की व्यवस्था की। इन आयोजनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने भी इनमें से कुछ तस्वीरों को साझा किया था।

    फिल्म हटाए जाने के बाद दिलजीत दोसांझ का एक वीडियो भी सामने आया था जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें पहले से अंदेशा था कि फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाएगा। उनके अनुसार उन्हें उम्मीद थी कि फिल्म कुछ दिनों बाद हटेगी लेकिन यह अपेक्षा से पहले ही हटा दी गई। उन्होंने दर्शकों से फिल्म देखने की अपील भी की थी जिससे यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया।

    अब पूरा विवाद कानूनी दायरे में पहुंच चुका है। एक ओर फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग्स को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दर्शकों की पसंद से जोड़कर देखा जा रहा है तो दूसरी ओर बिना अनुमति सार्वजनिक प्रदर्शन को लेकर कानूनी सवाल उठाए जा रहे हैं। हाई कोर्ट में दायर इस याचिका पर आने वाला फैसला न केवल सतलुज बल्कि भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाई गई फिल्मों की सार्वजनिक स्क्रीनिंग्स को लेकर भी महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।