Author: bharati

  • ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का फोकस, वैकल्पिक मार्गों से LPG-LNG की आपूर्ति सुनिश्चित

    ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का फोकस, वैकल्पिक मार्गों से LPG-LNG की आपूर्ति सुनिश्चित


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच भारत ने एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। देश में कुकिंग गैस की संभावित कमी को लेकर सामने आई रिपोर्ट्स के बीच सरकार ने वैकल्पिक आयात मार्गों और नए स्रोतों से गैस आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न देशों और वैकल्पिक समुद्री मार्गों से प्राप्त की गई एलपीजी और एलएनजी की खेप जल्द ही भारत पहुंचने वाली है, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति संतुलित बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बावजूद भारत की यह रणनीति घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों के लिए राहत देने वाली साबित हो सकती है।

    घरेलू रिफाइनरियों ने बढ़ाया एलपीजी उत्पादन
    सरकार द्वारा तेल कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए जाने के बाद देश की रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है। अधिकारियों के अनुसार भारतीय रिफाइनरियों ने कुकिंग गैस के घरेलू उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। इसका उद्देश्य संभावित आयात बाधाओं के बावजूद देश में गैस की उपलब्धता बनाए रखना है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने से आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है और बाजार में कीमतों पर भी नियंत्रण बनाए रखने में सहूलियत होती है।

    जामनगर रिफाइनरी में उत्पादन बढ़ाने पर जोर
    देश की सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी Reliance Industries Limited ने भी इस दिशा में अहम कदम उठाए हैं। कंपनी का Jamnagar Refinery परिसर कुकिंग गैस एलपीजी के उत्पादन को अधिकतम स्तर तक पहुंचाने के लिए काम कर रहा है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में जारी अस्थिरता के बीच भारतीय घरों के लिए जरूरी ईंधनों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। कंपनी के अनुसार जामनगर स्थित रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स में उत्पादन बढ़ाने के लिए संचालन को लगातार अनुकूलित किया जा रहा है और टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं।

    केजी-डी6 गैस से भी मिलेगी मदद
    कंपनी ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं और सरकारी दिशानिर्देशों के अनुरूप KG‑D6 Basin से उत्पादित प्राकृतिक गैस को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की आपूर्ति के लिए डायवर्ट किया जाएगा। इससे घरेलू गैस वितरण नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और शहरों में पाइप्ड गैस और सीएनजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू गैस उत्पादन का बेहतर उपयोग देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    सरकार ने नागरिकों को किया आश्वस्त
    इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात स्रोतों में विविधता ला रहा है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद देश विभिन्न देशों और मार्गों से ऊर्जा आयात प्राप्त कर रहा है। इससे देश में ईंधन की उपलब्धता स्थिर बनी हुई है और आम नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    सीएनजी और पीएनजी आपूर्ति भी सामान्य
    सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को सीएनजी और पीएनजी की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहे। अधिकारियों के अनुसार शहरों में गैस वितरण कंपनियों को पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वाहनों के लिए सीएनजी और घरों में पीएनजी की आपूर्ति प्रभावित न हो। इसके साथ ही आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण का प्रबंधन किया जा रहा है।

    उद्योगों को भी मिल रही पर्याप्त गैस
    भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद उद्योगों को भी गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा मिल रहा है। सरकार के अनुसार उद्योगों को उनकी कुल गैस आवश्यकताओं का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे उत्पादन गतिविधियों पर अधिक असर नहीं पड़ने की संभावना है। सरकार का कहना है कि देश भर में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस
    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार देश के हर घर तक सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। वैकल्पिक आयात स्रोतों की तलाश, घरेलू उत्पादन में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने जैसे कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम साबित होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार इन उपायों से वैश्विक संकट के बावजूद भारत में गैस आपूर्ति स्थिर रहने की उम्मीद है।

  • नेतन्याहू का ईरान की जनता से सीधा संदेश, कहा—अयातुल्ला शासन हटाने का मौका न गंवाएं

    नेतन्याहू का ईरान की जनता से सीधा संदेश, कहा—अयातुल्ला शासन हटाने का मौका न गंवाएं

    तेल अवीव। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच Benjamin Netanyahu ने ईरान की जनता को सीधा संदेश देते हुए उन्हें अपने देश में बदलाव के लिए तैयार रहने की अपील की है। इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा हालात एक ऐतिहासिक मौका बन सकते हैं, जब ईरान के लोग अयातुल्ला शासन के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं।

    नेतन्याहू ने कहा कि यह संघर्ष केवल सैन्य टकराव नहीं बल्कि आजादी और बदलाव की लड़ाई है। उनके मुताबिक यह अवसर बार-बार नहीं आता और ईरान की जनता को इसे पहचानकर अपने भविष्य के लिए निर्णायक कदम उठाना चाहिए।

    ईरान की जनता से क्या बोले नेतन्याहू

    नेतन्याहू ने अपने संदेश में कहा कि ईरान के लोग लंबे समय से आजादी चाहते हैं और मौजूदा हालात उन्हें बदलाव का मौका दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब सही समय आएगा तो बदलाव की मशाल ईरान की जनता के हाथ में होगी, इसलिए लोगों को उस पल के लिए तैयार रहना चाहिए।

    ईरान में सर्वोच्च धार्मिक नेतृत्व का प्रतीक अयातुल्ला प्रणाली है, जिसका नेतृत्व वर्तमान में Ali Khamenei के हाथ में है।

    अमेरिका-इजरायल की रणनीति

    नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल और अमेरिका मिलकर तेहरान की सत्ता पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि Donald Trump के नेतृत्व में अमेरिका और इजरायल की रणनीति का उद्देश्य ईरान के शासकों को कमजोर करना और क्षेत्र में स्थिरता लाना है।

    उनके अनुसार सैन्य और रणनीतिक दबाव के जरिए ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं, जिनसे ईरान के भीतर राजनीतिक बदलाव की संभावना बढ़ सकती है।

    ईरान की आंतरिक राजनीति पर असर

    विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान ईरान की घरेलू राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। ईरान लंबे समय से धार्मिक नेतृत्व वाले शासन के तहत चल रहा है और बाहरी दबाव या युद्ध जैसी स्थितियां देश के भीतर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती हैं।

    हालांकि तेहरान की सरकार ऐसे बयानों को अक्सर विदेशी हस्तक्षेप बताकर खारिज करती रही है।

    क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका

    पश्चिम एशिया में पहले से ही हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद Iran कई जगह जवाबी कार्रवाई कर चुका है।

    ऐसे में नेतन्याहू का यह बयान क्षेत्रीय राजनीति को और संवेदनशील बना सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पूरे संघर्ष पर बनी हुई है, क्योंकि इसका असर पूरे मध्य-पूर्व और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ सकता है।

  • बुलियन मार्केट में नरमी, गोल्ड-सिल्वर के दाम घटे; ग्लोबल डेटा पर टिकी नजर

    बुलियन मार्केट में नरमी, गोल्ड-सिल्वर के दाम घटे; ग्लोबल डेटा पर टिकी नजर


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में जारी अस्थिरता के बीच बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के सतर्क रुख और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों से पहले बाजार में मुनाफावसूली के कारण दोनों कीमती धातुओं के दाम कमजोर पड़े। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा के चलते निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेत और केंद्रीय बैंकों की नीति दिशा ही इन धातुओं की आगे की चाल तय करेंगे।

    एमसीएक्स पर सोना-चांदी के दाम फिसले
    घरेलू वायदा बाजार में भी कमजोरी का असर साफ दिखाई दिया। Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर सुबह करीब 10:30 बजे सोने के 2 अप्रैल 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का भाव 0.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,62,795 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं चांदी के 5 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का भाव 0.78 प्रतिशत गिरकर 2,75,690 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हाल के दिनों में सोने और चांदी में आई तेजी के बाद निवेशकों ने कुछ मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों पर दबाव देखा गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कमजोरी
    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं के दाम दबाव में रहे। अमेरिकी वायदा बाजार COMEX पर सोना लगभग 0.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,212.64 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी करीब 1.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 88.493 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। वैश्विक निवेशकों का ध्यान फिलहाल अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिका हुआ है, जिसके चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

    युद्ध के संकेतों से बाजार में अनिश्चितता
    कमोडिटी बाजार में अस्थिरता का एक बड़ा कारण मध्य-पूर्व में जारी तनाव भी है। हाल के दिनों में Donald Trump के बयान और युद्ध से जुड़े मिले-जुले संकेतों ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। पहले संकेत मिले थे कि संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन ताजा घटनाक्रमों से तत्काल तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है और युद्ध लगातार बारहवें दिन तक जारी रहने की खबरों ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव
    स्थिति तब और संवेदनशील हो गई जब ईरान ने दावा किया कि उसने जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने के लिए Strait of Hormuz में बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल से ईरान पर हमले रोकने का आग्रह किया है। इन घटनाओं के कारण ऊर्जा बाजार में भी हलचल बढ़ गई है, जिसका असर सोने और चांदी जैसी सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली धातुओं पर पड़ता है।

    अमेरिकी आंकड़ों पर टिकी बाजार की नजर
    विशेषज्ञों के अनुसार अब कमोडिटी बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले अहम आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई है। निवेशक विशेष रूप से अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति यानी महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगे की मौद्रिक नीति का संकेत मिल सकता है। यदि महंगाई ज्यादा रहती है तो ब्याज दरों में बदलाव की संभावनाएं बन सकती हैं, जिसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ता है।

    जीडीपी और मुद्रास्फीति से तय होगी आगे की दिशा
    विश्लेषकों का कहना है कि इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी जीडीपी और मुद्रास्फीति के आंकड़े बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इन आंकड़ों से वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति और भविष्य की नीतिगत दिशा को लेकर अधिक स्पष्टता मिलेगी। ऐसे में निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और नए आर्थिक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। यही कारण है कि फिलहाल सोने और चांदी की कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

    निवेशकों के लिए क्या संकेत
    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेत, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है, जबकि मजबूत आर्थिक आंकड़े आने पर कीमती धातुओं पर दबाव भी बढ़ सकता है। इसलिए निवेशकों को फिलहाल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • ऑयल संकट: पहाड़ की गुफाओं से बना टैंकर, बुरे से बुरे वक्त के लिए है तैयारी, जानें भारत ने कहां छिपाया तेल भंडार?

    ऑयल संकट: पहाड़ की गुफाओं से बना टैंकर, बुरे से बुरे वक्त के लिए है तैयारी, जानें भारत ने कहां छिपाया तेल भंडार?


    नई दिल्‍ली। मिडिल ईस्ट में ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर खतरे की खबरों के बीच पूरी दुनिया की नजर तेल सप्लाई पर टिक गई है. ऐसे में भारत को लेकर भी एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि अगर वैश्विक सप्लाई अचानक रुक जाए तो देश कितने दिनों तक अपने भंडार के भरोसे चल सकता है. बहुत कम लोगों को पता है कि भारत ने इस तरह की आपात स्थिति के लिए बेहद खास इंतजाम कर रखे हैं.
    देश ने पहाड़ों की मजबूत चट्टानों के भीतर विशाल गुफाओं जैसी संरचनाओं में कच्चे तेल का भंडार छिपाकर रखा है. ये गुफाएं दरअसल भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व हैं. इन्हें युद्ध, आपदा या वैश्विक सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है.
    दरअसल इस पूरी योजना की शुरुआत अचानक नहीं हुई थी. इसकी कहानी 1991 के उस आर्थिक संकट से जुड़ी है जब गल्फ वॉर के दौरान भारत के सामने गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा हो गया था. उस समय ऐसी खबरें सामने आई थीं कि देश के पास तेल का स्टॉक बेहद सीमित रह गया था. कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि भारत के पास सिर्फ तीन दिनों का तेल बचा था, जबकि कुछ में इसे एक सप्ताह या दस दिन बताया गया. असल समस्या यह थी कि तेल खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खत्म हो रहा था. उस संकट ने भारत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है.
    1991 के समय भारत के पास जो तेल स्टॉक था वह असल में तेल कंपनियों का कमर्शियल भंडार था. यानी वह रोजमर्रा की सप्लाई के लिए रखा जाता था. सरकार के पास अलग से ऐसा कोई रणनीतिक भंडार नहीं था जिसे सिर्फ आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सके. हालांकि उस समय भी तेल कंपनियां सरकारी नियंत्रण में ही थीं, लेकिन फिर भी संकट के समय अलग से सुरक्षित रिजर्व होना जरूरी समझा गया.
    दुनिया के कई बड़े देशों ने पहले से ही अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) बना रखे थे. इनका मकसद यही होता है कि अगर युद्ध, वैश्विक संकट या प्राकृतिक आपदा की वजह से तेल सप्लाई रुक जाए तो देश कुछ समय तक अपने भंडार के सहारे चल सके. इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे पुराने स्कूटरों में पेट्रोल टैंक में एक रिजर्व सिस्टम होता था. जब टैंक का पेट्रोल खत्म हो जाता था तो रिजर्व खोलकर नजदीकी पेट्रोल पंप तक पहुंचा जा सकता था. उसी तरह यह सरकारी रिजर्व होता है जिसे सिर्फ संकट की स्थिति में ही खोला जाता है.
    तेल कंपनियों के कमर्शियल भंडार आम तौर पर बड़े-बड़े तेल टैंकों या डिपो में रखे जाते हैं. लेकिन रणनीतिक भंडार के लिए ऐसी जगह चाहिए होती है जहां युद्ध या हमले का असर कम से कम हो.
    अगर कोई दुश्मन देश तेल डिपो को निशाना बना दे या किसी आपदा में डिपो नष्ट हो जाए तो संकट और बढ़ सकता है. इसलिए तय किया गया कि रणनीतिक भंडार जमीन के ऊपर नहीं बल्कि चट्टानों के भीतर बनाए जाएं.
    इसके लिए कई भौगोलिक मानकों पर विचार किया गया. पहली शर्त थी कि वहां मजबूत चट्टानें हों, जिनमें बड़ी गुफाएं बनाई जा सकें. दूसरी शर्त यह थी कि उन चट्टानों से तेल रिसना नहीं चाहिए. तीसरी शर्त थी कि उस इलाके में भूकंप का खतरा कम हो. चौथी शर्त यह थी कि समुद्री बंदरगाह पास हो, ताकि जहाजों से तेल आसानी से लाया जा सके. और पांचवीं शर्त यह थी कि रिफाइनरी भी ज्यादा दूर न हो, ताकि पाइपलाइन से तेल पहुंचाया जा सके
  • ईरान की जेल से रिहा हुए गाजियाबाद के मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता

    ईरान की जेल से रिहा हुए गाजियाबाद के मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता

    तेहरान। मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता को 57 दिन बाद ईरान की जेल से रिहा किया गया। फिलहाल वह भारतीय दूतावास की निगरानी में हैं और हालात सामान्य होने पर भारत लौटेंगे।
    मर्चेंट नेवी केतन मेहता खबर
    गाजियाबाद: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच शहर के लिए खुशखबरी आई है। डीएलएफ कॉलोनी में रहने वाले मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता को 57 दिन बाद ईरान की जेल से रिहा कर दिया गया।

    केतन फिलहाल ईरान में ही भारतीय दूतावास की निगरानी में एक होटल में रह रहे हैं। स्थिति सामान्य होने पर उन्हें भारत लाया जाएगा।

    उनके घर पर परिवार में जश्न का माहौल है।
    गिरफ्तारी का सिलसिला
    केतन मेहता को 6 जनवरी 2026 को ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट पर ईरानी कोस्ट गार्ड ने गिरफ्तार कर लिया था। तब से वह तेहरान की जेल में बंद थे। उनके पिता मुकेश मेहता ने विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री से उनके सुरक्षित भारत लाने की मदद की गुहार लगाई थी।

    केतन दुबई की तेल कंपनी में थर्ड इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने जून 2025 में मरीन इंजीनियर के रूप में कंपनी जॉइन की थी। इस कंपनी के जहाज ईरान से तेल लाने का कार्य करते हैं।

    परिवार से संपर्क और राहत की खबर
    भारतीय दूतावास के सहयोग से केतन मेहता को जेल से ही अपने परिवार से बात करने की अनुमति मिली थी।

    इस प्रक्रिया के जरिए मुकेश मेहता अक्सर अपने बेटे से संपर्क बनाए रखते थे।

    मुकेश मेहता ने बताया कि 31 दिसंबर को आखिरी बार फोन पर बात हुई थी। केतन ने कहा था कि तीन-चार दिन में वह दुबई लौटेंगे, लेकिन उसके बाद उसका फोन नहीं लगा। 16 जनवरी को पता चला कि उनके बेटे को ईरान कोस्ट गार्ड्स ने गिरफ्तार कर लिया है।

    होली पर मिली खुशी
    अब 4 मार्च, यानी होली वाले दिन फोन की घंटी बजी और बेटे की आवाज आई, पापा मैं छूट गया हूं। इस खबर ने परिवार को बहुत भावुक कर दिया। भारत सरकार की एंबेसी ने कोर्ट में पैरवी कर उन्हें रिहा कराया। केतन को फिलहाल एक होटल में दूतावास की निगरानी में रखा गया है। भारत लौटने के लिए सभी पेपर्स तैयार किए जा रहे हैं और जैसे ही फ्लाइट्स शुरू होंगी, केतन अपने देश लौट जाएंगे।

  • तेल बाजार में गिरावट, IEA के संभावित रिजर्व रिलीज के बीच क्रूड 90 डॉलर से नीचे

    तेल बाजार में गिरावट, IEA के संभावित रिजर्व रिलीज के बीच क्रूड 90 डॉलर से नीचे


    नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली और दाम 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए। गिरावट की प्रमुख वजह International Energy Agency (IEA) द्वारा इमरजेंसी रिजर्व से तेल जारी कर आपूर्ति बढ़ाने की संभावित योजना को माना जा रहा है।

    ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों में गिरावट
    रिपोर्ट्स के मुताबिक खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई।

    Brent Crude की कीमत 0.99% गिरकर 86.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं West Texas Intermediate (WTI) वायदा 0.75% गिरकर 82.82 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।

    आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी
    रिपोर्ट्स के अनुसार International Energy Agency इमरजेंसी रिजर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति जारी करने पर विचार कर रहा है ताकि हाल के दिनों में तेजी से बढ़ी कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।

    बताया जा रहा है कि यह प्रस्तावित आपूर्ति 2022 में Russia द्वारा Ukraine पर हमले के बाद जारी किए गए 182 मिलियन बैरल से भी अधिक हो सकती है। G7 देशों ने भी आईईए से इस तरह के कदम के लिए तैयार रहने को कहा है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य से बढ़ा था तनाव
    हाल के दिनों में Strait of Hormuz में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% हिस्सा गुजरता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका के कारण Brent Crude की कीमत हाल के दिनों में करीब 50% बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।

    ट्रंप के बयान का भी असर
    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की एक वजह Donald Trump का बयान भी माना जा रहा है। उन्होंने कहा था कि United States और Iran के बीच चल रहा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी जारी है और संघर्ष दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है।

    इस बीच खबरें सामने आई हैं कि Iran Strait of Hormuz में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि अगर ऐसा हुआ है तो उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए।

  • ईरान की मार से बैकफुट पर आया इजरायल, शिया मुल्क के लोगों से लगाने लगा गुहार

    ईरान की मार से बैकफुट पर आया इजरायल, शिया मुल्क के लोगों से लगाने लगा गुहार

    वाशिंगटन। अमेरिका और इजरायल ने एकजुट होकर ईरान पर अटैक कर दिया. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई मारे जा चुके हैं. सेना के कई ठिकाने तबाह हो चुके हैं, लेकिन तेहरान के पास मिसाइल्‍स और ड्रोन का भंडार अभी भी बाकी है.
    यही वजह है कि ईरान की तरफ से इजरायल और अरब देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन अटैक किया जा रहा है. ईरान के साथ ही इजरायल पर भी युद्ध का काफी असर पड़ा है. व्‍यापक पैमाने पर तबाही मची है. अमेरिका और इजरायल का अनुमान था कि खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान आसानी से सरेंडर कर देगा, पर इसके आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं. दूसरी तरफ, दुनिया भर में एनर्जी संकट जैसी स्थिति पैदा हो गई है. ऐसे में इजरायल के रुख में नरमी दिखने लगी है.
    बेंजामिन नेतन्‍याहू बैकफुट पर दिख रहे हैं. शायद यही वजह है कि इजरायल पीएम ने ईरान की जनता से खास गुहार लगाई है. उन्‍होंने ईरानी जनता के लिए भावुक संदेश जारी किया है.

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान की जनता को संबोधित करते हुए एक कड़ा और भावनात्मक संदेश जारी किया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात ईरान के लोगों के लिए जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर है, जिसके जरिए वे अयातुल्ला खामेनेई के शासन को हटाकर अपनी स्वतंत्रता हासिल कर सकते हैं. नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव और संघर्ष लगातार बढ़ रहा है.

    नेतन्याहू ने अपने संदेश में कहा कि इजरायल और अमेरिका मिलकर तेहरान के तानाशाहों के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों की कार्रवाई से ईरान की सत्ता से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया है और इस अभियान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े हजारों लड़ाके तथा कई मिसाइल लॉन्चर नष्ट किए गए हैं.
    हमारा टार्गेट ईरानी शासन के ठिकाने – नेतन्‍याहू
    इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य केवल ईरानी शासन के ठिकाने हैं, न कि आम नागरिक. उन्होंने कहा कि इजरायल पूरी कोशिश कर रहा है कि ईरान की जनता को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे.
    उनके मुताबिक, इजरायल खुद को ईरान के लोगों का सहयोगी मानता है और उनकी संस्कृति, संप्रभुता तथा विरासत का सम्मान करता है. नेतन्याहू ने अपने संबोधन में दावा किया कि अयातुल्ला और उनके सहयोगी अब भाग रहे हैं और उनके पास छिपने की कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ऐसी परिस्थितियां बनाई जाएंगी, जिससे ईरान की जनता अपने भविष्य का फैसला खुद कर सके.
  • गोरखपुर में कपड़े की दुकान में भीषण आग, कार और दो बाइक भी जली

    गोरखपुर में कपड़े की दुकान में भीषण आग, कार और दो बाइक भी जली

    गोरखपुर। शहर के रायगंज गोरखपुर इलाके में मंगलवार शाम एक कपड़े की दुकान में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि दुकान के साथ-साथ गोदाम और पास में खड़ी एक कार व दो बाइक भी उसकी चपेट में आ गईं। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद दमकल टीम ने आग पर काबू पाया।
    राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।

    शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका

    घटना Kotwali Police Station, Gorakhpur क्षेत्र के घनी आबादी वाले रायगंज इलाके की है। यहां अमित गुप्ता की निष्ठा ट्रेडर्स नाम से कपड़े की दुकान है, जहां चुनरी, चादर और कपड़ों का थोक कारोबार होता है। बताया जा रहा है कि शाम करीब सात बजे दुकान में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ और आग लग गई।

    कुछ ही देर में आग दुकान से सटे गोदाम तक फैल गई। लपटें बढ़ने से गलियारे में खड़ी एक कार और दो मोटरसाइकिल भी जलने लगीं।

    परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया

    दुकान के ऊपर परिवार रहता था। आग लगते ही लोगों ने तुरंत परिवार के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। देखते ही देखते आसपास के लोग मौके पर जुट गए और इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    दमकल की 10 गाड़ियों ने पाया काबू

    सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। करीब 10 दमकल गाड़ियों की मदद से आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। मकान में सीढ़ियों और छत पर भी कपड़ा रखा होने की वजह से आग तेजी से फैलती चली गई।

    करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात करीब 10 बजे आग पर काबू पा लिया गया।

    अधिकारी भी पहुंचे मौके पर

    घटना की सूचना मिलते ही Deepak Meena (डीएम) और Dr. Kaustubh (एसएसपी) भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

    मुख्य अग्निशमन अधिकारी Santosh Rai ने बताया कि सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां तुरंत भेजी गई थीं। आग अंदर तक फैल चुकी थी, लेकिन टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद उस पर काबू पा लिया।

    प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

  • पति की हत्या कर पेड़ पर लटकाया, पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर की वारदात

    पति की हत्या कर पेड़ पर लटकाया, पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर की वारदात


    सतना। एमपी के सतना में पुलिस ने एक युवक की हत्या का खुलासा किया है। पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति राजाभइया को शराब पिलाकर गला घोंट दिया और आत्महत्या दिखाने के लिए शव पेड़ से लटका दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर दिया है।
    मध्य प्रदेश के सतना जिले में पुलिस ने एक हत्या की गुत्थी सुलझा ली है जिसे पहले आत्महत्या समझा जा रहा था। 5 मार्च को जंगल में एक शख्स की लाश पेड़ से लटकी पाई गई थी। पोस्टमार्टम से पता चला कि शख्स की गला घोंटकर हत्या की गई थी। जांच में खुलासा हुआ है कि मृतक की पत्नी रामबाई ने अपने प्रेमी बाबूलाल के साथ मिलकर यह साजिश रची थी। दोनों ने पहले उसे शराब पिलाकर बेसुध किया फिर गला घोंटकर मार डाला और शव को पेड़ पर लटका दिया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
    सोची-समझी साजिश के तहत किया गया कत्ल

    पहली नजर में वारदात को आत्महत्या माना जा रहा था। यह एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया कत्ल निकला। युवक की पत्नी ने ही अपने प्रेमी के साथ मिलकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
    हत्या का मामला दर्ज

    दरअसल, 5 मार्च की सुबह मोटवा-बरहा के जंगल में एक व्यक्ति का शव फंदे पर लटका मिला था। शुरुआत में मामला खुदकुशी का लग रहा था, लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई तो पुलिस के होश उड़ गए। युवक की मौत फंदे पर लटकने से पहले ही गला घोंटने की वजह से हो चुकी थी।

    थाना प्रभारी आदित्य नारायण सिंह धुर्वे ने इसके बाद तुरंत हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
    सोशल मीडिया पर फोटो देख चीख पड़े परिजन

    मृतक की पहचान शुरू में नहीं हो सकी थी, लेकिन पुलिस ने उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल की।

    इसे देखकर जैतवारा के किटहा गांव के लोगों ने उसकी पहचान राजाभइया डोहर (45) के रूप में की। परिजनों ने बताया कि 2 मार्च को राजाभइया अपनी पत्नी रामबाई के साथ मजदूरी के लिए निकला था, लेकिन वह वापस नहीं लौटा और पत्नी अकेले घर आई थी।
    बेवफाई और कत्ल की खौफनाक कहानी

    जांच में पुलिस को पता चला कि मृतक की पत्नी रामबाई का कोठी क्षेत्र के रहने वाले बाबूलाल चौधरी (40) के साथ प्रेम-प्रसंग चल रहा था। पुलिस ने जब दोनों को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

  • बाजार में बिकवाली का दबाव, सेंसेक्स में करीब 1,000 अंक की बड़ी गिरावट

    बाजार में बिकवाली का दबाव, सेंसेक्स में करीब 1,000 अंक की बड़ी गिरावट


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार के दौरान बड़ी गिरावट देखने को मिली। दोपहर करीब 12 बजे BSE Sensex 987 अंक यानी 1.26% टूटकर 77,218 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 275 अंक यानी 1.13% की गिरावट के साथ 23,986 पर कारोबार करता दिखा।

    बैंकिंग शेयरों ने बढ़ाया दबाव
    आज की गिरावट में बैंकिंग शेयरों की बड़ी भूमिका रही। Nifty Bank करीब 1.6% गिरकर 56,044 के स्तर पर पहुंच गया।

    इसके अलावा ऑटो, प्राइवेट बैंक, फाइनेंशियल सर्विस, सर्विसेज, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, रियल्टी, डिफेंस, आईटी और इंफ्रा सेक्टर के शेयर भी दबाव में कारोबार कर रहे थे। हालांकि फार्मा, एनर्जी, मीडिया, मेटल, हेल्थकेयर और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में हल्की मजबूती देखने को मिली।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव
    बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली मानी जा रही है।

    मंगलवार को Foreign Institutional Investors (FII) ने करीब 4,673 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। वहीं Domestic Institutional Investors (DII) ने करीब 6,333 करोड़ रुपये का निवेश किया। हालांकि घरेलू निवेशकों की खरीदारी के बावजूद विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर बाजार पर साफ दिख रहा है।

    वैश्विक तनाव भी बना बड़ी वजह
    वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर भी भारतीय बाजार पर पड़ा है। हाल ही में United States और Iran के बीच बढ़ते टकराव और Israel की ओर से ईरान पर हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। इस तनाव के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कम हुआ है, जिससे शेयर बाजार में दबाव बना हुआ है।

    बाजार में बढ़ी अस्थिरता
    बाजार में उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला India VIX करीब 8.73% बढ़कर 20.55 पर पहुंच गया है। आमतौर पर जब वोलैटिलिटी इंडेक्स बढ़ता है तो बाजार में अस्थिरता बढ़ती है और गिरावट देखने को मिल सकती है।

    सपाट शुरुआत के बाद आई तेज गिरावट
    बुधवार को बाजार की शुरुआत लगभग सपाट रही थी।

    BSE Sensex 33 अंक की हल्की बढ़त के साथ 78,238 पर खुला था।

    Nifty 50 30 अंक की मामूली गिरावट के साथ 24,231 पर खुला था।

    लेकिन कारोबार बढ़ने के साथ बिकवाली तेज हो गई और बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।