Author: bharati

  • गोल्डन दौर को किया याद हेमा मालिनी ने बताया क्यों नहीं कर रहीं फिल्मों में वापसी और क्या है इसकी सबसे बड़ी वजह

    गोल्डन दौर को किया याद हेमा मालिनी ने बताया क्यों नहीं कर रहीं फिल्मों में वापसी और क्या है इसकी सबसे बड़ी वजह


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा की ड्रीम गर्ल के नाम से मशहूर हेमा मालिनी लंबे समय से बड़े पर्दे से दूर हैं। उनके प्रशंसक अक्सर यह सवाल करते रहे हैं कि आखिर वह नई फिल्मों में नजर क्यों नहीं आतीं। अब खुद हेमा मालिनी ने इस सवाल का जवाब देते हुए अपनी चुप्पी तोड़ी है और साफ कहा है कि आज की फिल्मों का स्वरूप उनके दौर से पूरी तरह बदल चुका है। यही सबसे बड़ी वजह है कि उन्होंने फिल्मों से दूरी बना रखी है।

    एक बातचीत के दौरान हेमा मालिनी ने अपने लंबे फिल्मी सफर को याद करते हुए कहा कि उन्हें उस दौर का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला जिसे हिंदी सिनेमा का स्वर्णिम काल कहा जाता है। उनके अनुसार उस समय बनने वाली फिल्मों में कहानी भावनाएं संगीत और अभिनय का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता था। खास बात यह थी कि महिला प्रधान फिल्मों को भी बराबर महत्व दिया जाता था और अभिनेत्रियों को दमदार किरदार निभाने का अवसर मिलता था।

    उन्होंने बताया कि अपने करियर में उन्हें सीता और गीता सपनों का सौदागर खुशबू शोले ड्रीम गर्ल सत्ते पे सत्ता त्रिशूल क्रांति और बागबान जैसी यादगार फिल्मों में काम करने का अवसर मिला। पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि उन्होंने लगभग दो सौ फिल्मों में अभिनय किया और कई निर्माता निर्देशकों ने बार बार उन्हें अपनी फिल्मों का हिस्सा बनाया। उस दौर में फिल्मों के गीत भी सफलता की सबसे बड़ी पहचान होते थे और हर फिल्म में कई यादगार गाने दर्शकों के दिलों में बस जाते थे।

    हेमा मालिनी का कहना है कि समय के साथ फिल्म निर्माण की शैली पूरी तरह बदल गई है। आज की फिल्मों की सोच प्रस्तुति और कहानी कहने का तरीका पहले से काफी अलग हो चुका है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई लोग उनसे पूछते हैं कि वह अब फिल्मों में काम क्यों नहीं करतीं लेकिन उन्हें लगता है कि वर्तमान दौर की फिल्मों में खुद को सहज रूप से ढाल पाना उनके लिए आसान नहीं है। यही कारण है कि उन्होंने नई फिल्मों से दूरी बनाए रखना बेहतर समझा।

    उन्होंने यह भी कहा कि हर दौर की अपनी अलग पहचान होती है और हर कलाकार उस दौर की जरूरतों के अनुसार काम करता है। उनका मानना है कि जिस तरह का सिनेमा उन्होंने अपने समय में किया वह आज भी दर्शकों के बीच पसंद किया जाता है और यही उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। उनके अनुसार कलाकार के लिए यह संतोष की बात होती है कि वर्षों बाद भी उसके निभाए किरदार लोगों की यादों में जिंदा रहें।

    हेमा मालिनी ने अपने करियर की शुरुआत राज कपूर के साथ फिल्म सपनों का सौदागर से की थी। इसके बाद उन्होंने लगातार कई सफल फिल्मों में अभिनय कर खुद को हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल कर लिया। अपनी खूबसूरती और अभिनय के दम पर उन्होंने करोड़ों दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई और ड्रीम गर्ल की पहचान हासिल की।

    उनकी आखिरी फिल्म शिमला मिर्ची थी जो वर्ष 2020 में रिलीज हुई थी। इसके बाद उन्होंने कोई नई फिल्म स्वीकार नहीं की। फिलहाल वह सक्रिय राजनीति में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं और सार्वजनिक जीवन के साथ परिवार को भी पूरा समय दे रही हैं। मुंबई में रहने के दौरान वह अपनी दोनों बेटियों और नाती नातिनों के साथ समय बिताना पसंद करती हैं। हालांकि फिल्मों से दूरी के बावजूद उनके प्रशंसकों के बीच उनका सम्मान और लोकप्रियता आज भी पहले जैसी ही बनी हुई है।

  • दीपिका संग दो साल के रिश्ते का दावा कर चर्चा में आए मुज्जमिल इब्राहिम बोले मैंने छोड़ा था रिश्ता अब वायरल हो रहा पुराना इंटरव्यू

    दीपिका संग दो साल के रिश्ते का दावा कर चर्चा में आए मुज्जमिल इब्राहिम बोले मैंने छोड़ा था रिश्ता अब वायरल हो रहा पुराना इंटरव्यू


    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर इन दिनों अभिनेता मुज्जमिल इब्राहिम का एक पुराना इंटरव्यू तेजी से वायरल हो रहा है जिसने बॉलीवुड प्रेमियों के बीच नई बहस छेड़ दी है। इस इंटरव्यू में मुज्जमिल ने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को लेकर कई ऐसे दावे किए हैं जिनकी वजह से यह वीडियो फिर चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब वह और दीपिका करीब दो वर्षों तक रिलेशनशिप में रहे थे। उस वक्त दीपिका फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित नाम नहीं थीं और मॉडलिंग की दुनिया में अपना करियर बना रही थीं जबकि वह खुद अभिनय के क्षेत्र में पहचान बना चुके थे।

    मुज्जमिल ने दावा किया कि मुंबई आने के बाद दीपिका सबसे पहले उन्हीं से मिली थीं और दोनों के बीच धीरे धीरे नजदीकियां बढ़ीं। उनके अनुसार दोनों का रिश्ता लगभग दो साल तक चला। उन्होंने यह भी कहा कि इस रिश्ते की शुरुआत दीपिका की ओर से हुई थी और प्रपोज भी उन्होंने ही किया था। हालांकि बाद में परिस्थितियां ऐसी बनीं कि रिश्ता आगे नहीं बढ़ सका और उन्होंने खुद इस संबंध को समाप्त करने का फैसला लिया।

    सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हो रही है जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें दीपिका से अलग होने का कभी अफसोस नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी भी रिश्ते को खत्म करने का पछतावा उन्हें नहीं है। उनका मानना है कि उस समय उन्होंने जो फैसला लिया वह सही था और आज भी वह उसी पर कायम हैं। इंटरव्यू में उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में वह अधिक लोकप्रिय थे जबकि दीपिका अभी अपने करियर की शुरुआती सीढ़ियां चढ़ रही थीं।

    बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या ब्रेकअप के बाद भी दोनों के बीच संपर्क बना रहा तो उन्होंने बताया कि लंबे समय तक दोनों के बीच दोस्ताना रिश्ता कायम रहा। वह एक दूसरे की उपलब्धियों पर शुभकामनाएं देते थे और कभी कभी बातचीत भी हो जाती थी। उनके अनुसार रणवीर सिंह से दीपिका की शादी होने के बाद दोनों के बीच संपर्क पूरी तरह समाप्त हो गया।

    हालांकि इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि दीपिका पादुकोण ने कभी भी सार्वजनिक रूप से मुज्जमिल इब्राहिम के साथ किसी रिश्ते की पुष्टि नहीं की है। इसलिए उनके ये दावे पूरी तरह एकतरफा माने जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई लोग यही सवाल उठा रहे हैं कि इतने वर्षों बाद इस तरह के निजी दावों को सार्वजनिक करने की क्या जरूरत थी।

    वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि पुराने रिश्तों को लेकर इस तरह की बातें करना उचित नहीं है जबकि कई लोगों ने इसे केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश बताया। वहीं कुछ प्रशंसकों ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि अच्छा हुआ दीपिका ने आगे बढ़कर अपनी जिंदगी में सही फैसला लिया। दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि यदि किसी रिश्ते की पुष्टि दोनों पक्षों ने नहीं की है तो ऐसे दावों को अंतिम सच नहीं माना जाना चाहिए।

    फिलहाल दीपिका पादुकोण अपनी निजी और पेशेवर जिंदगी में व्यस्त हैं। रणवीर सिंह के साथ उनकी जोड़ी बॉलीवुड की सबसे चर्चित जोड़ियों में गिनी जाती है। दूसरी ओर मुज्जमिल के पुराने इंटरव्यू का यह वीडियो एक बार फिर इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया है लेकिन इस पूरे विवाद पर दीपिका की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट छोड़िए ऐलोवेरा अपनाइए चेहरे पर आएगा प्राकृतिक निखार और त्वचा रहेगी लंबे समय तक स्वस्थ

    महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट छोड़िए ऐलोवेरा अपनाइए चेहरे पर आएगा प्राकृतिक निखार और त्वचा रहेगी लंबे समय तक स्वस्थ


    नई दिल्ली। ऐलोवेरा को प्राकृतिक स्किन केयर का सबसे प्रभावी पौधा माना जाता है। सदियों से आयुर्वेद में इसका उपयोग त्वचा और बालों की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। इसके अंदर मौजूद विटामिन ए विटामिन सी विटामिन ई एंटीऑक्सीडेंट और कई पोषक तत्व त्वचा को पोषण देने में सहायक माने जाते हैं। यही कारण है कि आज भी कई लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट की बजाय ऐलोवेरा जेल का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। यदि इसे सही तरीके और नियमित रूप से लगाया जाए तो त्वचा को प्राकृतिक निखार मिलने के साथ उसकी नमी भी लंबे समय तक बनी रह सकती है।

    ऐलोवेरा का सबसे बड़ा गुण यह माना जाता है कि यह त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करने में मदद करता है। जिन लोगों की त्वचा रूखी रहती है उनके लिए यह एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर की तरह काम कर सकता है। वहीं तैलीय त्वचा वाले लोग भी इसका उपयोग कर सकते हैं क्योंकि यह त्वचा पर भारीपन महसूस नहीं होने देता। नियमित उपयोग से चेहरा ताजा और मुलायम दिखाई दे सकता है।

    गर्मियों के मौसम में धूप के कारण त्वचा पर जलन और टैनिंग की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे समय में ऐलोवेरा जेल लगाने से ठंडक का एहसास मिलता है और त्वचा को आराम मिल सकता है। इसके अलावा मुंहासों से परेशान लोग भी ऐलोवेरा का उपयोग कर सकते हैं क्योंकि इसमें पाए जाने वाले कुछ प्राकृतिक गुण त्वचा को शांत रखने में सहायक माने जाते हैं। हालांकि यदि किसी को गंभीर त्वचा रोग या लगातार मुंहासों की समस्या हो तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक उचित रहता है।

    चेहरे पर ऐलोवेरा लगाने से पहले त्वचा को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। इसके बाद ताजा ऐलोवेरा जेल या विश्वसनीय उत्पाद का जेल हल्के हाथों से चेहरे पर लगाकर कुछ समय तक छोड़ दें। बाद में सामान्य पानी से चेहरा धो सकते हैं। कुछ लोग इसमें गुलाब जल या शहद मिलाकर भी फेस पैक तैयार करते हैं जिससे त्वचा को अतिरिक्त नमी और ताजगी मिल सकती है। यदि पहली बार ऐलोवेरा का उपयोग कर रहे हैं तो पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर माना जाता है ताकि किसी प्रकार की एलर्जी होने पर तुरंत पता चल सके।

    स्वस्थ और चमकदार त्वचा केवल बाहरी देखभाल से नहीं मिलती बल्कि संतुलित भोजन पर्याप्त पानी नियमित नींद और तनाव मुक्त जीवनशैली भी उतनी ही जरूरी होती है। ऐलोवेरा इन अच्छी आदतों के साथ त्वचा की देखभाल का एक उपयोगी हिस्सा बन सकता है। यदि इसे नियमित दिनचर्या में शामिल किया जाए और त्वचा की जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया जाए तो चेहरे की प्राकृतिक चमक को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    ध्यान रखें कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय का असर सभी पर समान नहीं होता। यदि ऐलोवेरा लगाने के बाद जलन खुजली या लालिमा महसूस हो तो इसका उपयोग बंद कर देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। सही देखभाल और संतुलित जीवनशैली के साथ ऐलोवेरा आपकी स्किन केयर रूटीन का एक प्रभावी और प्राकृतिक हिस्सा बन सकता है।

  • PoK में बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले पाकिस्तान अलर्ट, 4000 जवान और रेंजर्स की 7 विंग तैनात करने की तैयारी

    PoK में बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले पाकिस्तान अलर्ट, 4000 जवान और रेंजर्स की 7 विंग तैनात करने की तैयारी


    नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 15 जुलाई को प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च से पहले पाकिस्तान समर्थित स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। संभावित अशांति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है।

    सीएनएन-न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, एक गोपनीय आधिकारिक दस्तावेज में PoK के गृह विभाग ने इस्लामाबाद से 4,000 अतिरिक्त जवानों और पाकिस्तान रेंजर्स की सात विंग्स की तत्काल तैनाती की मांग की है। यह मांग क्षेत्र में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और तनावपूर्ण हालात को देखते हुए की गई है।

    यह कदम संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर और सैकड़ों अन्य कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद बढ़े जन आक्रोश के बीच उठाया गया है।

    गोपनीय पत्र में सुरक्षा बलों की मांग
    रिपोर्ट के मुताबिक, PoK गृह विभाग की ओर से पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के सचिव को 8 जुलाई को भेजे गए पत्र को ‘अति आवश्यक’ और ‘गोपनीय’ बताया गया है। इसमें कहा गया है कि JAAC की ओर से आयोजित लॉन्ग मार्च, विरोध प्रदर्शन और धरनों के कारण क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति गंभीर हो गई है।

    प्रशासन का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था इस स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। अतिरिक्त बलों की तैनाती का उद्देश्य प्रदर्शनों के प्रभाव को नियंत्रित करना, प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखना और पहले से तैनात सुरक्षा कर्मियों पर दबाव कम करना बताया गया है।

    आधे जवान हथियारों से लैस, आधे को मिलेगा दंगा-रोधी उपकरण
    गोपनीय दस्तावेज के अनुसार, मांगी गई अतिरिक्त फोर्स PoK में पहले से मौजूद सुरक्षा बलों के अतिरिक्त होगी। प्रशासन ने मांग की है कि आने वाले सुरक्षा कर्मियों में 50 प्रतिशत जवान आधुनिक हथियारों और पर्याप्त गोला-बारूद से लैस हों, जबकि बाकी 50 प्रतिशत जवानों को दंगा-रोधी उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।

    दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि यदि दंगा नियंत्रण उपकरणों की कमी हो तो तैनाती से पहले पाकिस्तान के केंद्रीय स्टॉक से इसकी व्यवस्था की जाए।

    JAAC पर लगाए गए हिंसा के आरोप
    PoK प्रशासन ने मौजूदा तनाव के लिए संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को जिम्मेदार ठहराया है। प्रशासन का आरोप है कि पुंछ और रावलकोट में लगातार धरने और पड़ोसी जिलों में रैलियां आयोजित कर लोगों को उकसाया जा रहा है।

    प्रशासन ने यह दावा भी किया है कि प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े सशस्त्र लोग मुजफ्फराबाद और मीरपुर डिवीजनों में माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों और नागरिकों को निशाना बनाने तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले ट्रकों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।

    PoK प्रशासन का दावा है कि हिंसा में अब तक चार सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है और 174 अन्य घायल हुए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

    15 जुलाई के मार्च से पहले बढ़ी चिंता
    15 जुलाई के प्रस्तावित बड़े मार्च से पहले इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की मांग को लेकर क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई है कि भारी सुरक्षा तैनाती के जरिए सरकार प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई कर सकती है।

    JAAC पिछले कुछ समय से PoK में जनता की मांगों और अधिकारों को लेकर सक्रिय संगठन के रूप में सामने आई है। समिति का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और स्थानीय प्रशासन बिजली की ऊंची कीमतों, आटे की कमी और बुनियादी अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान करने में विफल रहे हैं। संगठन का कहना है कि इन मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग किया जा रहा है।

  • बरसात में बालों की देखभाल के ये आसान उपाय बनाएंगे हेयर को मजबूत जानिए कैसे रोकें हेयर फॉल डैंड्रफ और स्कैल्प इंफेक्शन

    बरसात में बालों की देखभाल के ये आसान उपाय बनाएंगे हेयर को मजबूत जानिए कैसे रोकें हेयर फॉल डैंड्रफ और स्कैल्प इंफेक्शन


    नई दिल्ली। बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं यह बालों की सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। हवा में बढ़ी हुई नमी गंदा बारिश का पानी और पसीना मिलकर स्कैल्प को प्रभावित कर सकते हैं जिससे बाल झड़ने डैंड्रफ खुजली और फंगल संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे मौसम में केवल शैंपू करना ही पर्याप्त नहीं होता बल्कि बालों की सही देखभाल और संतुलित दिनचर्या अपनाना भी जरूरी होता है। यदि समय रहते सही हेयर केयर रूटीन अपनाया जाए तो मानसून में भी बालों को स्वस्थ मजबूत और चमकदार बनाए रखा जा सकता है।

    बारिश में भीगने के बाद सबसे पहले बालों को साफ पानी से धोना चाहिए क्योंकि वर्षा के पानी में मौजूद धूल प्रदूषक तत्व और अन्य अशुद्धियां बालों और स्कैल्प को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके बाद हल्के और सौम्य शैंपू से बालों की सफाई करें ताकि स्कैल्प पर जमा गंदगी पूरी तरह निकल जाए। गीले बालों को लंबे समय तक बांधकर रखना भी उचित नहीं माना जाता क्योंकि इससे फंगल संक्रमण और बदबू की समस्या बढ़ सकती है। बालों को प्राकृतिक रूप से सूखने दें या हल्के तौलिए से सुखाएं।

    बरसात के मौसम में बहुत अधिक तेल लगाने से भी बचना चाहिए क्योंकि नमी के कारण स्कैल्प पहले से ही चिपचिपा रहता है। यदि तेल लगाना हो तो हल्के हाथों से कम मात्रा में लगाएं और कुछ समय बाद बाल धो लें। सप्ताह में एक या दो बार नारियल तेल बादाम तेल या अन्य हल्के तेल से मसाज करने से बालों की जड़ों को पोषण मिल सकता है और रक्त संचार बेहतर होने में मदद मिलती है।

    मानसून के दौरान हेयर ड्रायर स्ट्रेटनर और अन्य हीट स्टाइलिंग उपकरणों का अधिक उपयोग करने से बाल रूखे और कमजोर हो सकते हैं। इसलिए जहां तक संभव हो बालों को प्राकृतिक तरीके से सूखने दें। इसके साथ ही गीले बालों में कंघी करने से बचें क्योंकि इस समय बाल अधिक कमजोर होते हैं और आसानी से टूट सकते हैं। चौड़े दांत वाली कंघी का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।

    स्वस्थ बालों के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं बल्कि संतुलित आहार भी बेहद महत्वपूर्ण है। भोजन में प्रोटीन आयरन जिंक बायोटिन और विटामिन से भरपूर चीजों को शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर और स्कैल्प दोनों हाइड्रेट रहें। ताजे फल हरी सब्जियां सूखे मेवे और अंकुरित अनाज बालों की मजबूती बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।

    यदि डैंड्रफ खुजली अत्यधिक बाल झड़ना या स्कैल्प पर लालिमा जैसी समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा या बालों के विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। हर व्यक्ति के बालों की प्रकृति अलग होती है इसलिए किसी भी नए हेयर प्रोडक्ट का उपयोग करने से पहले उसकी उपयुक्तता पर ध्यान देना चाहिए।

    बरसात का मौसम बालों की अतिरिक्त देखभाल की मांग करता है। साफ सफाई सही खानपान नियमित हेयर वॉश और संतुलित हेयर केयर रूटीन अपनाकर आप मानसून में भी अपने बालों को मजबूत चमकदार और स्वस्थ बनाए रख सकते हैं। छोटी छोटी सावधानियां भविष्य में होने वाले बड़े हेयर डैमेज से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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    Healthy Hair
    Scalp Careबरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं यह बालों की सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। हवा में बढ़ी हुई नमी गंदा बारिश का पानी और पसीना मिलकर स्कैल्प को प्रभावित कर सकते हैं जिससे बाल झड़ने डैंड्रफ खुजली और फंगल संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे मौसम में केवल शैंपू करना ही पर्याप्त नहीं होता बल्कि बालों की सही देखभाल और संतुलित दिनचर्या अपनाना भी जरूरी होता है। यदि समय रहते सही हेयर केयर रूटीन अपनाया जाए तो मानसून में भी बालों को स्वस्थ मजबूत और चमकदार बनाए रखा जा सकता है।

    बारिश में भीगने के बाद सबसे पहले बालों को साफ पानी से धोना चाहिए क्योंकि वर्षा के पानी में मौजूद धूल प्रदूषक तत्व और अन्य अशुद्धियां बालों और स्कैल्प को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके बाद हल्के और सौम्य शैंपू से बालों की सफाई करें ताकि स्कैल्प पर जमा गंदगी पूरी तरह निकल जाए। गीले बालों को लंबे समय तक बांधकर रखना भी उचित नहीं माना जाता क्योंकि इससे फंगल संक्रमण और बदबू की समस्या बढ़ सकती है। बालों को प्राकृतिक रूप से सूखने दें या हल्के तौलिए से सुखाएं।

    बरसात के मौसम में बहुत अधिक तेल लगाने से भी बचना चाहिए क्योंकि नमी के कारण स्कैल्प पहले से ही चिपचिपा रहता है। यदि तेल लगाना हो तो हल्के हाथों से कम मात्रा में लगाएं और कुछ समय बाद बाल धो लें। सप्ताह में एक या दो बार नारियल तेल बादाम तेल या अन्य हल्के तेल से मसाज करने से बालों की जड़ों को पोषण मिल सकता है और रक्त संचार बेहतर होने में मदद मिलती है।

    मानसून के दौरान हेयर ड्रायर स्ट्रेटनर और अन्य हीट स्टाइलिंग उपकरणों का अधिक उपयोग करने से बाल रूखे और कमजोर हो सकते हैं। इसलिए जहां तक संभव हो बालों को प्राकृतिक तरीके से सूखने दें। इसके साथ ही गीले बालों में कंघी करने से बचें क्योंकि इस समय बाल अधिक कमजोर होते हैं और आसानी से टूट सकते हैं। चौड़े दांत वाली कंघी का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।

    स्वस्थ बालों के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं बल्कि संतुलित आहार भी बेहद महत्वपूर्ण है। भोजन में प्रोटीन आयरन जिंक बायोटिन और विटामिन से भरपूर चीजों को शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर और स्कैल्प दोनों हाइड्रेट रहें। ताजे फल हरी सब्जियां सूखे मेवे और अंकुरित अनाज बालों की मजबूती बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।

    यदि डैंड्रफ खुजली अत्यधिक बाल झड़ना या स्कैल्प पर लालिमा जैसी समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा या बालों के विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। हर व्यक्ति के बालों की प्रकृति अलग होती है इसलिए किसी भी नए हेयर प्रोडक्ट का उपयोग करने से पहले उसकी उपयुक्तता पर ध्यान देना चाहिए।

    बरसात का मौसम बालों की अतिरिक्त देखभाल की मांग करता है। साफ सफाई सही खानपान नियमित हेयर वॉश और संतुलित हेयर केयर रूटीन अपनाकर आप मानसून में भी अपने बालों को मजबूत चमकदार और स्वस्थ बनाए रख सकते हैं। छोटी छोटी सावधानियां भविष्य में होने वाले बड़े हेयर डैमेज से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

  • रविवार को इन वास्तु नियमों का करें पालन सूर्यदेव की कृपा से दूर होंगे वास्तु दोष और खुलेंगे तरक्की के नए रास्ते

    रविवार को इन वास्तु नियमों का करें पालन सूर्यदेव की कृपा से दूर होंगे वास्तु दोष और खुलेंगे तरक्की के नए रास्ते


    नई दिल्ली। रविवार का दिन भगवान सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष को कम करने में सहायक माने जाते हैं। सूर्यदेव को ऊर्जा प्रकाश और जीवन का आधार माना गया है इसलिए उनकी कृपा प्राप्त होने पर व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास सम्मान स्वास्थ्य और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। यदि घर में लगातार आर्थिक तंगी पारिवारिक कलह मानसिक तनाव या कार्यों में बाधाएं आ रही हों तो रविवार के दिन कुछ सरल वास्तु उपाय अपनाना शुभ माना जाता है।

    रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सबसे पहले भगवान सूर्य को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें। जल में लाल पुष्प अक्षत और थोड़ा सा लाल चंदन डालना शुभ माना जाता है। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर के मुख्य द्वार और आंगन की अच्छी तरह सफाई करें क्योंकि वास्तु शास्त्र के अनुसार स्वच्छता सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है और नकारात्मक प्रभाव को दूर करती है। घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर गंदगी या टूटे फूटे सामान का होना शुभ नहीं माना जाता इसलिए रविवार के दिन ऐसी वस्तुओं को हटाना लाभकारी माना जाता है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार घर की पूर्व दिशा का विशेष महत्व होता है क्योंकि यह दिशा सूर्यदेव से जुड़ी मानी जाती है। इस दिशा को हमेशा साफ सुथरा और खुला रखना चाहिए। यदि यहां भारी सामान या कबाड़ रखा हो तो उसे हटाने का प्रयास करें। पूर्व दिशा में सुबह की धूप आने देना भी शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के सदस्यों का मन प्रसन्न रहता है।

    रविवार के दिन घर में गुड़ और गेहूं का दान करना भी शुभ माना गया है। जरूरतमंद लोगों को लाल वस्त्र या तांबे की वस्तु दान करने से सूर्यदेव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। इसके साथ ही घर में घी का दीपक जलाकर सूर्य मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि होती है। यदि संभव हो तो रविवार के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र या ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे ग्रह दोषों का प्रभाव भी कम होता है।

    वास्तु शास्त्र यह भी कहता है कि घर में टूटी हुई घड़ी बंद इलेक्ट्रॉनिक सामान फटे हुए चित्र या बेकार वस्तुओं को लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं। रविवार का दिन ऐसे अनुपयोगी सामान को हटाने के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। इसके अलावा घर में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का प्रवेश बनाए रखना सकारात्मक वातावरण के लिए आवश्यक माना गया है।

    ध्यान रहे कि वास्तु उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित होते हैं। इनका उद्देश्य घर में स्वच्छता अनुशासन सकारात्मक सोच और संतुलित वातावरण बनाए रखने की प्रेरणा देना है। जब व्यक्ति नियमित रूप से सूर्यदेव की आराधना करता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने का प्रयास करता है तब जीवन में नई उम्मीद आत्मविश्वास और खुशहाली का अनुभव होने लगता है। इसलिए रविवार के दिन इन सरल उपायों को अपनाकर घर के वातावरण को अधिक सुखद और ऊर्जावान बनाया जा सकता है।

  • बारिश के मौसम में बढ़ जाता है पेट की बीमारियों का खतरा, इन आसान उपायों से रखें डाइजेशन बेहतर और शरीर फिट

    बारिश के मौसम में बढ़ जाता है पेट की बीमारियों का खतरा, इन आसान उपायों से रखें डाइजेशन बेहतर और शरीर फिट

    नई दिल्ली । मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इसके साथ पाचन तंत्र से जुड़ी कई स्वास्थ्य चुनौतियां भी लेकर आता है। वातावरण में बढ़ी नमी के कारण बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनप सकते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग, गैस, अपच, दस्त, पेट दर्द और एसिडिटी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में खानपान और व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान देकर इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के मौसम में हमेशा ताजा और गर्म भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए। लंबे समय तक खुले में रखा हुआ या बासी भोजन बैक्टीरिया की वृद्धि का कारण बन सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बाहर मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थ, पहले से कटे फल और बिना ढके रखे भोजन से बचना बेहतर माना जाता है। घर पर ताजा तैयार किया गया भोजन पाचन तंत्र के लिए अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित होता है।

    मानसून में सुरक्षित पेयजल का सेवन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूषित पानी पेट संबंधी संक्रमण का प्रमुख कारण बन सकता है। इसलिए फिल्टर किया हुआ या अच्छी तरह उबाला गया पानी पीने की सलाह दी जाती है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और पाचन प्रक्रिया सामान्य रूप से काम करती है। यदि घर से बाहर जा रहे हों, तो अपने साथ साफ पानी की बोतल रखना एक अच्छी आदत हो सकती है।

    पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने के लिए प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों को भी आहार में शामिल किया जा सकता है। दही और छाछ जैसे खाद्य पदार्थ आंतों में लाभकारी बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं। इसके साथ ही खिचड़ी, दलिया, सूप, उबली सब्जियां और अन्य हल्के भोजन का सेवन पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालता और भोजन आसानी से पचने में मदद करता है।

    स्वच्छता का पालन मानसून में बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। भोजन करने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से हाथ धोना, फल और सब्जियों को अच्छी तरह साफ करना तथा रसोई और बर्तनों की नियमित सफाई बनाए रखना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है। छोटी-छोटी स्वच्छता संबंधी आदतें भी स्वास्थ्य की दृष्टि से बड़ा अंतर पैदा कर सकती हैं।

    बारिश के मौसम में तली-भुनी और अत्यधिक मसालेदार चीजें खाने की इच्छा बढ़ जाती है, लेकिन इनका अधिक सेवन पाचन संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है। अधिक तेल और मसाले वाला भोजन एसिडिटी, गैस और अपच जैसी परेशानियों का कारण बन सकता है। इसलिए संतुलित, पौष्टिक और हल्का भोजन चुनना अधिक लाभदायक माना जाता है।

    यदि लगातार पेट दर्द, दस्त, उल्टी, तेज बुखार या निर्जलीकरण जैसे लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। समय पर उपचार गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकता है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मानसून के मौसम में पाचन तंत्र को बेहतर स्थिति में रखा जा सकता है और पूरे मौसम का आनंद स्वस्थ रहकर लिया जा सकता है।

  • इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बेटे ने बदला नाम, वजह को लेकर उठे सवाल

    इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बेटे ने बदला नाम, वजह को लेकर उठे सवाल


    नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े बेटे यायर नेतन्याहू को लेकर नया विवाद सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यायर नेतन्याहू ने अपना नाम बदलकर ‘योनातन हुन’ कर लिया है। लीक हुए डेटा के आधार पर दावा किया जा रहा है कि यह बदलाव पिछले दो वर्षों के दौरान किया गया।

    जानकारी के मुताबिक, 2024 में टैक्स फाइलिंग के दौरान उन्होंने अपने जन्म नाम यायर नेतन्याहू का ही इस्तेमाल किया था, जबकि 2026 में टैक्स संबंधी दस्तावेजों में उनका नाम ‘योनातन हुन’ दर्ज किया गया। हालांकि, नाम बदलने के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेतन्याहू परिवार पहले से ही टैक्स और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में यायर नेतन्याहू के नाम परिवर्तन को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने यह बदलाव किस उद्देश्य से किया।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाम में यह परिवर्तन उनके मौजूदा नेशनल आइडेंटिफिकेशन नंबर के तहत किए गए रेगुलेटरी अपडेट का हिस्सा है। दस्तावेजों में उनका रेसिडेंशियल एड्रेस ‘बाल्फोर 0’ दर्ज किया गया है, जिसे इजरायल के प्रधानमंत्री आवास से जोड़कर देखा जा रहा है।

    नाम बदलने के उद्देश्य को लेकर बहस तेज
    इजरायल में प्रधानमंत्री के बेटे के नाम बदलने के फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे टैक्स से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे सैन्य सेवा से संबंधित विवादों के संदर्भ में देख रहे हैं।

    दरअसल, 2023 से योनातन हुन के फ्लोरिडा में रहने को लेकर भी आलोचना होती रही है। युद्ध के दौरान जब इजरायल ने रिजर्व सैनिकों को बुलाया, तब विदेश में रहने को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए थे। कुछ आलोचकों का कहना है कि नाम बदलने का संबंध युद्ध से बचने की कोशिश से हो सकता है, जबकि कुछ इसे टैक्स संबंधी कारणों से जोड़ रहे हैं।

    ‘योनातन हुन’ नाम के पीछे ऐतिहासिक कनेक्शन
    इजरायली मीडिया के अनुसार, ‘योनातन’ नाम का संबंध नेतन्याहू परिवार के एक ऐतिहासिक व्यक्ति से है। यह नाम बेंजामिन नेतन्याहू के भाई योनी नेतन्याहू को श्रद्धांजलि के तौर पर देखा जा रहा है, जो 1976 में युगांडा में एक मिशन के दौरान मारे गए थे। उन्हें इजरायल में एक राष्ट्रीय नायक के रूप में देखा जाता है।

    वहीं, ‘हुन’ उपनाम को नेतन्याहू परिवार की पुरानी पारिवारिक जड़ों से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार के बुजुर्ग बेन आर्टजी जब इजरायल आए थे, तब उनका नाम सैमुअल हुन था और बाद में उन्होंने अपना नाम बदला था। इसी पारिवारिक इतिहास से प्रेरित होकर यायर ने अपने नए नाम में ‘हुन’ शब्द शामिल किया है।

    हालांकि, इससे पहले भी यायर नेतन्याहू अपने एक पॉडकास्ट में ‘यायर हुन’ नाम का इस्तेमाल कर चुके हैं, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में शामिल होने के बाद यह नाम आधिकारिक रूप से दर्ज हो गया है। फिलहाल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, उनके बेटे यायर नेतन्याहू या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से नाम बदलने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

  • Curd Face Pack: दही और शहद का आसान घरेलू उपाय, झाइयों और बेजान त्वचा की देखभाल में कैसे हो सकता है मददगार

    Curd Face Pack: दही और शहद का आसान घरेलू उपाय, झाइयों और बेजान त्वचा की देखभाल में कैसे हो सकता है मददगार

    नई दिल्ली । चेहरे पर झाइयां, दाग-धब्बे और असमान त्वचा रंगत आजकल कई लोगों की सामान्य समस्या बन चुकी है। तेज धूप, बढ़ता प्रदूषण, हार्मोनल बदलाव, उम्र का प्रभाव और अनियमित स्किन केयर जैसी कई वजहों से त्वचा पर पिग्मेंटेशन दिखाई देने लगता है। ऐसे में कई लोग महंगे सौंदर्य उत्पादों का सहारा लेते हैं, जबकि कुछ सरल घरेलू उपाय भी त्वचा की देखभाल में सहायक हो सकते हैं। दही से तैयार फेस पैक ऐसा ही एक लोकप्रिय घरेलू विकल्प माना जाता है।

    त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, दही में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला लैक्टिक एसिड त्वचा की ऊपरी सतह पर जमी मृत कोशिकाओं को धीरे-धीरे हटाने में मदद कर सकता है। इससे त्वचा अधिक साफ और मुलायम महसूस हो सकती है। साथ ही दही में मौजूद नमी प्रदान करने वाले गुण त्वचा को शुष्क होने से बचाने में भी सहायक माने जाते हैं। हालांकि यह किसी चिकित्सीय उपचार का विकल्प नहीं है और गंभीर पिग्मेंटेशन की स्थिति में विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक होता है।

    दही का फेस पैक तैयार करने के लिए दो चम्मच ताजा दही में एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर अच्छी तरह मिश्रण तैयार किया जा सकता है। शहद त्वचा को नमी बनाए रखने में मदद करता है, जबकि दही त्वचा की सफाई और कोमलता बनाए रखने में सहायक माना जाता है। यह मिश्रण त्वचा की सामान्य देखभाल के लिए एक सरल घरेलू उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

    फेस पैक लगाने से पहले चेहरे को किसी हल्के फेस वॉश से अच्छी तरह साफ करना चाहिए ताकि त्वचा पर मौजूद धूल, तेल और अन्य अशुद्धियां हट जाएं। इसके बाद तैयार मिश्रण को पूरे चेहरे पर समान रूप से लगाया जा सकता है। आंखों और होंठों के आसपास की संवेदनशील त्वचा पर इसे लगाने से बचना बेहतर माना जाता है।

    लगभग 15 से 20 मिनट तक फेस पैक को त्वचा पर रहने देने के बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लेना चाहिए। चेहरा साफ करते समय त्वचा को जोर से रगड़ने के बजाय हल्के हाथों का प्रयोग करना अधिक सुरक्षित रहता है। इससे त्वचा पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता और उसकी प्राकृतिक नमी भी बनी रहती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के घरेलू फेस पैक का उपयोग सप्ताह में दो से तीन बार किया जा सकता है, लेकिन किसी भी नए उत्पाद या घरेलू नुस्खे को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर होता है। यदि जलन, खुजली या एलर्जी जैसी कोई प्रतिक्रिया दिखाई दे तो इसका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए।

    त्वचा की देखभाल केवल फेस पैक तक सीमित नहीं है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, संतुलित भोजन लेना, पर्याप्त नींद पूरी करना और नियमित रूप से सनस्क्रीन का उपयोग करना भी स्वस्थ त्वचा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि झाइयां लगातार बढ़ रही हों, रंग गहरा होता जा रहा हो या लंबे समय तक सुधार न दिखे, तो त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना सबसे उचित कदम होता है।

  • राम मंदिर में 40 दिन में 70 बार हुई चढ़ावे की चोरी, 50 बार अविनाश ने उड़ाई नकदी, अनुकल्प-लवकुश करते थे प्लानिंग

    राम मंदिर में 40 दिन में 70 बार हुई चढ़ावे की चोरी, 50 बार अविनाश ने उड़ाई नकदी, अनुकल्प-लवकुश करते थे प्लानिंग


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, पूरे गिरोह में चोरी की मुख्य जिम्मेदारी अविनाश शुक्ला को सौंपी गई थी। सीसीटीवी फुटेज में वह सबसे अधिक बार चढ़ावे की रकम निकालते हुए दिखाई दिया, जबकि अन्य आरोपी उसे कवर देने के लिए आसपास मौजूद रहते थे।

    एसआईटी की जांच में सामने आया था कि 40 दिनों के दौरान चढ़ावे की रकम करीब 70 बार चोरी की गई। इनमें लगभग 50 बार अविनाश शुक्ला को नकदी निकालते हुए कैमरों में देखा गया। पुलिस ने भी अपनी विवेचना में सीसीटीवी फुटेज को अहम साक्ष्य के रूप में शामिल किया है। फुटेज के विश्लेषण में एसआईटी की रिपोर्ट की पुष्टि हुई कि अधिकांश मामलों में रकम अविनाश ने ही पार की।

    पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में अविनाश शुक्ला ने स्वीकार किया था कि अधिकतर मौकों पर चोरी की जिम्मेदारी उसी को दी जाती थी। हालांकि एसआईटी की विस्तृत जांच अंतिम चरण में है, जबकि पुलिस की विवेचना अभी जारी रहेगी।

    अनुकल्प और लवकुश बनाते थे पूरी रणनीति
    जांच में यह भी सामने आया कि टिन्नू यादव और गणनाकर्मी सुभाष श्रीवास्तव की मिलीभगत से यह पूरा खेल चलता था। दोनों का काम यह सुनिश्चित करना था कि किसी अन्य कर्मचारी या व्यक्ति की नजर आरोपियों की गतिविधियों पर न पड़े। कब और किस तरह रकम निकालनी है, इसकी पूरी योजना अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा तैयार करते थे। योजना के अनुसार सबसे पहले अविनाश शुक्ला रकम निकालता था, जबकि कई मौकों पर मनीष और रमाशंकर ने भी नकदी चोरी की। बाद में सभी आरोपियों के बीच रकम का बंटवारा कर दिया जाता था।

    लगभग हर दिन दो बार की जाती थी चोरी
    सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ से यह भी स्पष्ट हुआ है कि आरोपी लगभग हर दिन दो बार चढ़ावे की रकम पार करते थे। रिमांड के दौरान अविनाश, अनुकल्प और लवकुश ने बताया था कि अधिकांश दिनों में दो बार चोरी की जाती थी, जबकि अवसर मिलने पर तीन बार भी नकदी निकाल ली जाती थी। कभी-कभी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने पर चोरी करना संभव नहीं हो पाता था। जांच के अनुसार, यह पूरा खेल आरोपियों के काम पर लगाए जाने के समय से ही लगातार चल रहा था।