Author: bharati

  • भारत का बड़ा मानवीय कदम, अफगानिस्तान को भेजी 20 टन वैक्सीन, बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम को मिलेगा बूस्ट

    भारत का बड़ा मानवीय कदम, अफगानिस्तान को भेजी 20 टन वैक्सीन, बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम को मिलेगा बूस्ट


    नई दिल्ली। भारत ने एक बार फिर अपने मानवीय सहयोग के तहत अफगानिस्तान की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस बार भारत की ओर से काबुल को करीब 20 टन जरूरी वैक्सीन की खेप भेजी गई है, जिसका उद्देश्य वहां बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाना है। इस सहायता में मुख्य रूप से बीसीजी और टेटनस-डिप्थीरिया से संबंधित टीके शामिल हैं, जो संक्रामक बीमारियों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत लगातार अफगानिस्तान के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में यह नई खेप भेजी गई है, जिससे वहां चल रहे इम्यूनाइजेशन कार्यक्रमों को मजबूती मिलेगी और बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह सहायता केवल एक बार की नहीं है, बल्कि लगातार जारी मानवीय प्रयासों का हिस्सा है।

    इससे पहले भी भारत ने अफगानिस्तान को स्वास्थ्य और आपदा राहत के क्षेत्र में सहायता उपलब्ध कराई है। हाल ही में ट्यूबरकुलोसिस से लड़ने के लिए बीसीजी वैक्सीन की खेप भेजी गई थी, जिससे बच्चों के टीकाकरण अभियान को बढ़ावा मिला था। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ और भूकंप के समय भी भारत ने राहत सामग्री भेजकर वहां प्रभावित लोगों की मदद की थी।

    भारत का यह कदम न केवल स्वास्थ्य सहयोग को दर्शाता है, बल्कि दोनों देशों के बीच मानवीय संबंधों को भी मजबूत करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास अफगानिस्तान जैसे देशों में स्वास्थ्य संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जहां चिकित्सा सुविधाएं सीमित संसाधनों पर निर्भर हैं।

    भारत की यह पहल यह भी दर्शाती है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और मानव कल्याण को लेकर अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभा रहा है। टीकाकरण जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं बच्चों की जीवन रक्षा में अहम होती हैं और इस दिशा में दी गई सहायता लंबे समय तक सकारात्मक प्रभाव छोड़ सकती है।

    आने वाले समय में भी भारत की ओर से अफगानिस्तान को इस तरह की सहायता जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि स्वास्थ्य और मानवीय सहायता के माध्यम से लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है और इसी दिशा में यह प्रयास एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • खंडवा SP से गुहार: मारपीट केस में CCTV और कॉल डिटेल जांच की मांग

    खंडवा SP से गुहार: मारपीट केस में CCTV और कॉल डिटेल जांच की मांग


    मध्य प्रदेश । खंडवा जिले के बोरगांव चौकी क्षेत्र में दर्ज मारपीट के एक मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। खिराला गांव निवासी कलीम उर्फ कल्लू ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर खुद को निर्दोष बताते हुए मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

    कलीम का आरोप है कि उसे व्यक्तिगत रंजिश और पुलिस की कथित मिलीभगत के चलते झूठे मामले में फंसाया गया है। उसने दावा किया कि 16 मई की रात जब घटना हुई, उस समय वह मौके पर मौजूद नहीं था, बल्कि खिराला से करीब 5 किलोमीटर दूर एक होटल में था। कलीम ने कहा कि उसके पास होटल के CCTV फुटेज और मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मौजूद हैं, जो उसकी बेगुनाही साबित कर सकते हैं।

    शिकायत में तत्कालीन बोरगांव चौकी प्रभारी और वर्तमान देशगांव चौकी प्रभारी रामप्रकाश यादव पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कलीम ने आरोप लगाया कि घटना के बाद रामप्रकाश यादव आरोपी पक्ष के व्यक्ति रईस से अस्पताल में मिलने पहुंचे थे, जिससे मामले की निष्पक्ष जांच पर सवाल खड़े होते हैं।

    वहीं इस पूरे मामले पर पूर्व चौकी प्रभारी रामप्रकाश यादव ने सफाई देते हुए कहा कि रईस उनका परिचित है, इसलिए वह सिर्फ मिलने के लिए अस्पताल गए थे। दूसरी ओर बोरगांव चौकी प्रभारी अविनाश भोपले ने बताया कि एफआईआर फरियादी के बयान के आधार पर दर्ज की गई है और मामले की जांच प्रक्रिया जारी है। अब पूरा मामला जांच के दायरे में है और दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच सच्चाई सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।

  • खरगोन में अवैध शराब पर सख्ती, करोड़ों की जब्ती नष्ट कराई गई

    खरगोन में अवैध शराब पर सख्ती, करोड़ों की जब्ती नष्ट कराई गई


    मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 25 लाख रुपये मूल्य की लगभग 9 हजार लीटर देशी और विदेशी शराब को नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई शुक्रवार सुबह ट्रेचिंग ग्राउंड क्षेत्र में जेसीबी मशीन और रोलर की मदद से की गई।

    यह पूरी प्रक्रिया पुलिस अधीक्षक रविन्द्र वर्मा की मौजूदगी में संपन्न हुई। कार्रवाई के दौरान आबकारी विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौके पर उपस्थित रहे। पुलिस ने कोर्ट के आदेशों के बाद गठित विशेष समिति की निगरानी में शराब नष्ट करने की यह प्रक्रिया पूरी की।

    जानकारी के अनुसार, यह शराब जिले के 14 अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज कुल 64 मामलों में जब्त की गई थी। यह माल लंबे समय से थानों में सुरक्षित रखा गया था, जिसे अब विधिवत प्रक्रिया के तहत नष्ट किया गया।

    एसपी रविन्द्र वर्मा ने बताया कि अवैध शराब के मामलों में जब्त की गई सामग्री को न्यायालय की अनुमति और समिति की देखरेख में नष्ट किया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी ताकि अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाई जा सके। बड़ी मात्रा में शराब पर की गई इस कार्रवाई से जिले में अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है।

  • आर.डी. बर्मन और आनंद बख्शी की जादुई रचना का खुलासा, विशाल ददलानी ने बताया ‘चिंगारी कोई भड़के’ का अनसुना किस्सा

    आर.डी. बर्मन और आनंद बख्शी की जादुई रचना का खुलासा, विशाल ददलानी ने बताया ‘चिंगारी कोई भड़के’ का अनसुना किस्सा

    नई दिल्ली /मुंबई। हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर के कई गीत आज भी लोगों की यादों में उतने ही ताज़ा हैं जितने अपने समय में थे। ऐसे ही एक अमर गीत ‘चिंगारी कोई भड़के’ के बनने की कहानी हाल ही में संगीतकार और गायक विशाल ददलानी ने साझा की, जिसने एक बार फिर इस क्लासिक गीत के प्रति लोगों की रुचि बढ़ा दी है। यह किस्सा न केवल संगीत की रचनात्मकता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे एक साधारण जीवन अनुभव कालजयी कला में बदल सकता है।

    विशाल ददलानी ने एक सिंगिंग रियलिटी शो के दौरान इस गीत की पृष्ठभूमि का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस गीत की धुन मशहूर संगीतकार आर. डी. बर्मन ने तैयार की थी, जिन्हें संगीत की दुनिया में पंचम दा के नाम से जाना जाता है। धुन तैयार होने के बाद इसे गीतकार आनंद बख्शी को दिया गया ताकि वह इसके बोल लिख सकें।

    कहानी के अनुसार, उस समय मौसम बेहद सुहावना था और बारिश हो रही थी। आनंद बख्शी देर रात घर लौट रहे थे, और रास्ते में उन्होंने सिगरेट जलाने की कोशिश की। लेकिन लगातार बारिश की वजह से उनका लाइटर बार-बार बुझ जा रहा था। यह बेहद साधारण सा पल था, लेकिन इसी क्षण ने उनके मन में एक गहरी कल्पना को जन्म दिया।

    उन्हीं परिस्थितियों में उनके दिमाग में एक ऐसी पंक्ति आई, जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार गीतों में से एक बन गई—“चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाए।” यह पंक्ति केवल एक गीत का हिस्सा नहीं बनी, बल्कि भावनाओं और प्रतीकों का ऐसा संगम बन गई, जिसने सुनने वालों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी।

    विशाल ददलानी ने इस अनुभव को साझा करते हुए कहा कि असली कलाकार वही होता है जो जीवन के छोटे-छोटे पलों को भी गहराई से महसूस करता है और उन्हें कला में बदल देता है। उनके अनुसार, सामान्य लोग ऐसे अनुभवों को शायद नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन महान रचनाकार उन्हीं क्षणों को अमर बना देते हैं। उन्होंने आर. डी. बर्मन और आनंद बख्शी की जोड़ी को भारतीय संगीत का एक अनमोल रत्न बताया।

    यह गीत वर्ष 1972 में रिलीज हुई फिल्म ‘अमर प्रेम’ का हिस्सा था, जिसमें राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म के साथ-साथ इसके गीतों ने भी दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। ‘चिंगारी कोई भड़के’ को प्रसिद्ध गायक किशोर कुमार ने अपनी आवाज दी थी, जिसने इस गीत को और भी भावनात्मक और प्रभावशाली बना दिया।

    आज भी यह गीत संगीत प्रेमियों के बीच उतनी ही लोकप्रियता रखता है जितनी इसके रिलीज के समय थी। इसकी गहराई, शब्दों की सादगी और संगीत की भावनात्मक पकड़ इसे समय से परे एक क्लासिक बनाती है। विशाल ददलानी द्वारा साझा किया गया यह किस्सा एक बार फिर याद दिलाता है कि महान कला अक्सर सबसे साधारण क्षणों से जन्म लेती है।

  • खेत विवाद में कुल्हाड़ी से वार कर बेटे की हत्या, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

    खेत विवाद में कुल्हाड़ी से वार कर बेटे की हत्या, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा


    मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में एक दिल दहला देने वाले हत्याकांड में अदालत ने आरोपी पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला 6 दिसंबर 2024 का है, जिसमें खेत के विवाद के चलते एक पिता ने अपने ही बेटे की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी थी।

    अतिरिक्त लोक अभियोजक राजकुमार अत्रे ने जानकारी देते हुए बताया कि तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश राजकुमार यादव की अदालत ने आरोपी रुमसिंग पिता गुमानसिंह भिलाला (55), निवासी उपड़ी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 के तहत दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी को उम्रकैद के साथ 5000 रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई।

    अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के दिन सुबह पिता और पुत्र के बीच खेत में हल चलाने को लेकर विवाद हुआ था। विवाद इतना बढ़ गया कि शाम करीब 5 बजे जब पुत्र हिरालाल घर के बाहर खटिया पर सो रहा था, तभी आरोपी पिता ने उस पर कुल्हाड़ी से गर्दन पर तीन-चार वार कर दिए। गंभीर चोटों के कारण हिरालाल की मौके पर ही मौत हो गई।

    इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका मृतक की बहू शर्मिला की गवाही की रही। शर्मिला ने अदालत में बताया कि उसने अपने ससुर को अपने जेठ हिरालाल पर हमला करते हुए देखा था, जिससे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो गई।

    अदालत ने बहू की प्रत्यक्षदर्शी गवाही और जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए कठोर सजा सुनाई। इस मामले की जांच तत्कालीन ऊन थाना प्रभारी गणपत कनेल द्वारा की गई थी।

    इस फैसले के बाद इलाके में इस जघन्य अपराध को लेकर चर्चा तेज हो गई है और ग्रामीणों ने भी इसे एक गंभीर पारिवारिक विवाद का दुखद परिणाम बताया।

  • 42°C गर्मी में सड़क पर उतरे PESA मोबिलाइजर, सेवा समाप्ति आदेश रद्द करने की मांग

    42°C गर्मी में सड़क पर उतरे PESA मोबिलाइजर, सेवा समाप्ति आदेश रद्द करने की मांग


    मध्य प्रदेश । खरगोन जिले में भीषण गर्मी के बीच पेसा मोबिलाइजर कर्मचारियों का गुस्सा सड़क पर उतर आया। 42 डिग्री सेल्सियस तापमान में लगभग 200 कर्मचारियों ने सेवा समाप्ति आदेश के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

    भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले निकाली गई यह आक्रोश रैली दोपहर 2 बजे शुरू हुई। प्रदर्शनकारी कर्मचारी नारे लगाते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश को तुरंत रद्द कर उनकी बहाली की मांग की गई।

    कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पेसा कानून और विभिन्न सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसके बावजूद सरकार ने अचानक उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। उनका कहना है कि वे पिछले पांच वर्षों से मात्र 4000 रुपये मासिक वेतन पर कार्य कर रहे थे और अब उन्हें बेरोजगार कर दिया गया है।

    प्रदर्शन के दौरान भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने भी सरकार पर नाराजगी जताई। संगठन के नेताओं ने कहा कि पेसा मोबिलाइजरों ने ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं को लागू करने में अहम योगदान दिया है, लेकिन उनके साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया गया है।

    कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर सेवा समाप्ति आदेश वापस लेकर बहाली नहीं की गई, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद वे भोपाल कूच करेंगे और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।

    प्रदर्शन में नरेंद्र पटेल, अपर्णा बैरागी और पुनीत तारे सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल रहे। भीषण गर्मी के बावजूद कर्मचारियों का आक्रोश कम नहीं हुआ और वे लगातार सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

  • स्ट्रे डॉग्स विवाद पर गरमाई बहस, सोनम बाजवा ने उठाई संवेदनशील समाधान की मांग

    स्ट्रे डॉग्स विवाद पर गरमाई बहस, सोनम बाजवा ने उठाई संवेदनशील समाधान की मांग


    नई दिल्ली। देश में स्ट्रे डॉग्स को लेकर चल रही बहस एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। इसी मुद्दे पर अभिनेत्री सोनम बाजवा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपील करते हुए बेजुबान जानवरों के लिए उचित व्यवस्था और शेल्टर इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान केवल हटाने से नहीं बल्कि एक व्यवस्थित और मानवीय दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए।

    सोनम बाजवा ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को गलत तरीके से समझा जा रहा है। उनके अनुसार अदालत ने स्ट्रे डॉग्स को पूरी तरह हटाने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि एबीसी यानी एनिमल बर्थ कंट्रोल, वैक्सीनेशन और शेल्टरिंग जैसे उपायों के जरिए समस्या के समाधान की बात कही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली सवाल यह है कि आखिर इन जानवरों के लिए पर्याप्त शेल्टर और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर कहां है।

    अभिनेत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ-साथ दया और जिम्मेदारी का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर दोबारा विचार किया जाए और ऐसा समाधान निकाला जाए जो मानव और पशु दोनों के हित में हो।

    उन्होंने सुझाव दिया कि इस विषय पर पशु कल्याण से जुड़े विशेषज्ञों, एनजीओ, पशु चिकित्सकों और प्रशासनिक अधिकारियों को एक साथ बैठाकर एक व्यावहारिक योजना तैयार की जानी चाहिए। उनके अनुसार केवल सख्त कदम उठाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता, बल्कि एक व्यवस्थित नीति और मजबूत ढांचे की जरूरत है।

    यह मुद्दा उस समय और अधिक चर्चा में आ गया है जब सुप्रीम कोर्ट ने स्ट्रे डॉग्स से जुड़े मामलों में राज्य सरकारों को एबीसी कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी कहा है कि कई क्षेत्रों में इस कार्यक्रम के सही तरीके से लागू न होने के कारण समस्या लगातार बढ़ रही है और इससे सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ी है।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद कई राज्यों में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है, जहां एक तरफ सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात हो रही है तो दूसरी तरफ पशु अधिकारों और उनके संरक्षण की मांग भी उठ रही है। सोनम बाजवा की यह अपील इसी बहस को एक नया दृष्टिकोण देती है, जिसमें समाधान को केवल नियंत्रण तक सीमित न रखकर एक संवेदनशील और व्यवस्थित नीति की जरूरत पर जोर दिया गया है।

  • कमल हासन की देशवासियों से अपील: संकट के समय राजनीति नहीं, राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए

    कमल हासन की देशवासियों से अपील: संकट के समय राजनीति नहीं, राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने देशवासियों से एकजुटता और जिम्मेदारी की अपील की है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा समय केवल आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह ऐसा दौर है जब पूरे देश को मिलकर राष्ट्रहित में सोचने और कार्य करने की आवश्यकता है।

    कमल हासन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि ईरान क्षेत्र में जारी संघर्षऔर समुद्री व्यापार मार्गों में बाधाओं का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत जैसे देशों पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं। इसके कारण पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल सरकारों के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी जिम्मेदारी का समय है। कमल हासन ने लोगों से अपील की कि वे ईंधन और बिजली की खपत कम करने जैसे छोटे-छोटे कदम उठाकर देश की आर्थिक स्थिरता में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई विकसित देश पहले ही ऊर्जा संरक्षण को लेकर सख्त नीतियां अपना चुके हैं और नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है।

    अपने संदेश में उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि संकट के समय भारत ने हमेशा एकजुटता दिखाई है। उन्होंने 1962 के युद्ध और 1965 के खाद्य संकट का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय देशवासियों ने त्याग और सहयोग की मिसाल पेश की थी। उन्होंने कहा कि आज भले ही परिस्थितियां उतनी गंभीर न हों, लेकिन सामूहिक जिम्मेदारी उतनी ही आवश्यक है।

    कमल हासन ने यह भी कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, कोल गैसीफिकेशन और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने इस प्रयास को सकारात्मक बताते हुए कहा कि विदेशी तेल और गैस पर निर्भरता कम करना दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी है।

    उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से भी अपील की कि वे मिलकर ईंधन पर लगने वाले करों में संतुलन लाएं और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुलभ और किफायती बनाएं। उनका कहना था कि यदि बस, ट्रेन और मेट्रो जैसे साधनों को बढ़ावा दिया जाए तो निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और ईंधन की बचत संभव होगी।

    कमल हासन ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री से सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक संयुक्त बैठक बुलाने का भी आग्रह किया, ताकि ऊर्जा संकट और उससे जुड़ी चुनौतियों पर सामूहिक रणनीति बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि देश को इस समय राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सोचने की आवश्यकता है, क्योंकि राष्ट्रहित सबसे महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि देशवासी मिलकर ऊर्जा बचत और जिम्मेदारी से खपत की दिशा में कदम उठाते हैं, तो भारत इस वैश्विक संकट से और अधिक मजबूत होकर बाहर निकल सकता है। उनके अनुसार, आज बचाया गया हर यूनिट बिजली और हर लीटर ईंधन भविष्य की पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण निवेश है।

  • जेनजी में बढ़ती लोकप्रियता पर बोले जैकी श्रॉफ, इंसानियत और अपनापन ही मेरी असली पहचान है

    जेनजी में बढ़ती लोकप्रियता पर बोले जैकी श्रॉफ, इंसानियत और अपनापन ही मेरी असली पहचान है

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ अपनी अलग शैली, सहज व्यक्तित्व और दमदार अभिनय के लिए लंबे समय से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाए हुए हैं। 80 और 90 के दशक में बड़े पर्दे पर अपनी छाप छोड़ने के बाद भी आज वह नई पीढ़ी यानी जेनजी के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं। सोशल मीडिया से लेकर युवा दर्शकों तक उनकी बढ़ती लोकप्रियता लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।

    इसी बीच अपनी आगामी फिल्म के प्रमोशन के दौरान बातचीत में जैकी श्रॉफ ने अपनी इस लोकप्रियता का कारण बेहद सरल शब्दों में बताया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा लोगों को उम्र के आधार पर नहीं देखते, बल्कि इंसानियत और व्यवहार को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं। उनके अनुसार कोई भी व्यक्ति चाहे किसी भी उम्र का हो, हर किसी के साथ समान सम्मान और अपनापन रखना ही उनके स्वभाव की असली पहचान है।

    अभिनेता ने कहा कि उनके लिए जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज इंसानी रिश्ते हैं। वह मानते हैं कि जब कोई व्यक्ति अपने दिल को खुला रखता है और दूसरों की बातों को ध्यान से सुनता है, तो संबंध अपने आप मजबूत हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है, इसलिए खुद को किसी से बड़ा या बेहतर समझना सही नहीं है।

    जैकी श्रॉफ ने यह भी बताया कि वह हमेशा लोगों के साथ सहजता से जुड़ने की कोशिश करते हैं, चाहे वह बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग। उनके अनुसार जब व्यवहार में सादगी और अपनापन होता है, तो पीढ़ियों के बीच की दूरी अपने आप खत्म हो जाती है। यही कारण है कि वह अलग-अलग उम्र के दर्शकों से आसानी से जुड़ पाते हैं और उनकी लोकप्रियता हर पीढ़ी में बनी रहती है।

    नई दिल्ली। अपनी आगामी फिल्म को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए बेहद खास है क्योंकि इसमें एक अनोखी और अलग सोच को दिखाया गया है। फिल्म में उनका किरदार एक दादा का है, जो अपने पोते के साथ दोस्त जैसा रिश्ता साझा करता है। यह कहानी पारिवारिक संबंधों को एक नए दृष्टिकोण से पेश करती है, जहां उम्र की दीवारें रिश्तों को सीमित नहीं करतीं।

    अभिनेता ने कहा कि इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसका नया कॉन्सेप्ट है, जो पारंपरिक सोच से हटकर एक ताजा अनुभव देता है। यह फिल्म यह संदेश देती है कि प्यार, समझ और अपनापन किसी भी पीढ़ी के बीच दूरी को खत्म कर सकता है।

    जैकी श्रॉफ का यह नजरिया न केवल उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक कलाकार अपने व्यवहार और सोच के जरिए सभी उम्र के दर्शकों से जुड़ा रह सकता है। उनकी सरलता और मानवीय दृष्टिकोण ही उन्हें आज भी दर्शकों के बीच खास बनाता है।

  • सोने की कीमतों में उछाल से ज्वेलरी बाजार पर दबाव, बिक्री घटी लेकिन कंपनियों की कमाई में जोरदार बढ़ोतरी का अनुमान

    सोने की कीमतों में उछाल से ज्वेलरी बाजार पर दबाव, बिक्री घटी लेकिन कंपनियों की कमाई में जोरदार बढ़ोतरी का अनुमान

    नई दिल्ली । देश में लगातार बढ़ती सोने की कीमतों ने ज्वेलरी बाजार की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। एक ओर जहां ग्राहकों की खरीदारी क्षमता पर दबाव बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर ज्वेलरी कंपनियों की आय में वृद्धि के संकेत भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में तेज उछाल और हाल ही में आयात शुल्क में की गई बढ़ोतरी का सीधा असर बाजार की मांग पर पड़ रहा है, जिससे आने वाले समय में बिक्री मात्रा में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिल सकती है।

    बाजार विश्लेषण के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में संगठित गोल्ड ज्वेलरी सेक्टर की बिक्री मात्रा में लगभग 13 से 15 प्रतिशत तक की कमी आने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में भी ज्वेलरी बिक्री में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन इस बार परिस्थितियां और अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही हैं। सोने की ऊंची कीमतों के कारण उपभोक्ता अपनी खरीदारी योजनाओं में बदलाव कर रहे हैं और भारी तथा महंगे गहनों की बजाय हल्के वजन और कम कैरेट वाले विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    इसके बावजूद, कंपनियों के लिए राहत की बात यह है कि बिक्री मात्रा में गिरावट के बावजूद कुल राजस्व में वृद्धि की संभावना बनी हुई है। अनुमान है कि ज्वेलरी कंपनियों की आय में लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका मुख्य कारण सोने की ऊंची कीमतें हैं, जिनकी वजह से प्रति यूनिट बिक्री मूल्य बढ़ गया है। यानी ग्राहक कम मात्रा में सोना खरीद रहे हैं, लेकिन कीमत अधिक होने के कारण कंपनियों की कुल कमाई बढ़ सकती है।

    सरकारी स्तर पर हाल ही में सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने का भी बाजार पर प्रभाव पड़ा है। इसका उद्देश्य न केवल आयात को नियंत्रित करना है, बल्कि देश के व्यापार घाटे को कम करना और रुपये को स्थिर बनाए रखना भी है। इस कदम से घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल रहा है, जिससे मांग और प्रभावित हो रही है।

    रिपोर्टों के अनुसार, देश में गोल्ड की कुल मांग इस वित्त वर्ष में 620 से 640 टन के बीच रहने का अनुमान है, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कमजोर स्तरों में से एक माना जा सकता है। कोविड काल को छोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा पिछले एक दशक में सबसे निचले स्तर पर पहुंच सकता है।

    सोने की बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं के व्यवहार में भी बड़ा बदलाव किया है। अब लोग निवेश और गहनों दोनों के लिए सोने की खरीद में अधिक सतर्क हो गए हैं। बीते वर्षों में जहां निवेश के लिए गोल्ड बार और सिक्कों की मांग में तेजी देखी गई थी, वहीं अब बाजार में हल्के और डिजाइनर ज्वेलरी की ओर झुकाव बढ़ा है। 16 से 22 कैरेट ज्वेलरी की मांग में वृद्धि दर्ज की जा रही है क्योंकि ये अपेक्षाकृत सस्ती और उपयोगी विकल्प मानी जा रही हैं।

    कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि सोने की कीमतों का यह उछाल बाजार के स्वरूप को बदल रहा है। जहां एक ओर मांग में कमी चिंता का विषय है, वहीं दूसरी ओर कीमतों के सहारे कंपनियों की आय में बढ़ोतरी एक नया संतुलन बना रही है, जो आने वाले महीनों में और स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।