Author: bharati

  • बंगाल में बड़ा सर्च ऑपरेशन: ईडी ने रंगदारी और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर कसा शिकंजा, कई शहरों में एक साथ कार्रवाई

    बंगाल में बड़ा सर्च ऑपरेशन: ईडी ने रंगदारी और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर कसा शिकंजा, कई शहरों में एक साथ कार्रवाई


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में गुरुवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। कोलकाता से लेकर मुर्शिदाबाद तक कई ठिकानों पर एक साथ की गई छापेमारी ने कथित रंगदारी और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े नेटवर्क पर जांच एजेंसियों का शिकंजा और कस दिया है। यह कार्रवाई सुबह करीब छह बजे शुरू हुई, जब अलग-अलग टीमों ने एक साथ कई स्थानों पर दबिश दी और जांच अभियान को तेज कर दिया।

    सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला कथित जबरन वसूली और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जिसकी जांच लंबे समय से चल रही थी। जांच एजेंसी को शुरुआती इनपुट्स में ऐसे संकेत मिले थे कि इस नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध धन को इधर-उधर किया गया और उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई। इसी आधार पर कई स्थानों को चिन्हित कर एक साथ कार्रवाई की गई।

    कोलकाता के रॉय स्ट्रीट इलाके में स्थित एक होटल और एक कारोबारी के घर पर जांच टीमों ने छापेमारी की। इसके अलावा शहर के कुछ अन्य हिस्सों में भी तलाशी अभियान चलाया गया, जहां दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच की गई। इसी दौरान कोलकाता पुलिस से जुड़े एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और एक सब-इंस्पेक्टर के आवास पर भी जांच एजेंसी की टीमों के पहुंचने की जानकारी सामने आई, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

    वहीं मुर्शिदाबाद जिले के कांडी इलाके में भी एक महत्वपूर्ण ठिकाने पर छापेमारी की गई, जो कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े व्यक्ति का निवास बताया जा रहा है। जांच एजेंसी इस पूरे मामले में आर्थिक लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि धन का प्रवाह किन माध्यमों से और किन लोगों तक पहुंचा।

    जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पूछताछ और प्रारंभिक विश्लेषण के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क में कई संस्थाओं और व्यक्तियों का उपयोग किया गया, जिसके जरिए काले धन को वैध आर्थिक ढांचे में बदलने की कोशिश की गई। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि इस पूरे रैकेट से किन प्रभावशाली लोगों को लाभ मिला और उनका इसमें क्या रोल रहा।

    फिलहाल जांच एजेंसी की टीमें दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और वित्तीय रिकॉर्ड को खंगालने में जुटी हैं। अभी तक इस कार्रवाई को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन यह साफ है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे संभव हैं।

  • शादी से लौटते परिवार की गुमशुदगी का 26 साल बाद दर्दनाक खुलासा, नहर से निकली पुरानी वैन

    शादी से लौटते परिवार की गुमशुदगी का 26 साल बाद दर्दनाक खुलासा, नहर से निकली पुरानी वैन

    नई दिल्ली । भाखड़ा नहर में 26 साल पहले हुई एक रहस्यमयी गुमशुदगी का अंत आखिरकार उस समय हुआ जब गहराई में दबी एक पुरानी वैन और उसमें मौजूद मानव अवशेषों ने पूरे मामले की परतें खोल दीं। यह घटना न केवल एक दर्दनाक हादसे की याद दिलाती है बल्कि उस लंबे इंतजार की कहानी भी बयान करती है, जिसमें एक परिवार और गांव ने दशकों तक अपने प्रियजनों की वापसी की उम्मीद को जिंदा रखा।

    साल 2000 में कोटला गांव के चार लोग एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे। तेज राम, मुन्नी लाल, सुरजीत सिंह और सुरजीत का आठ साल का बेटा कालू एक वैन में सवार थे। यह वैन तेज राम की थी, जिसे उन्होंने हाल ही में जमीन बेचकर खरीदा था। लेकिन उस रात घर लौटते समय चारों लोग अचानक लापता हो गए। न तो उनका कोई सुराग मिला और न ही वैन का पता चल सका। यह मामला धीरे-धीरे एक रहस्यमयी गुमशुदगी में बदल गया, जिसने पूरे क्षेत्र को लंबे समय तक बेचैन रखा।

    परिजनों ने वर्षों तक खोज जारी रखी। खेत बिके, आर्थिक संसाधन खत्म हुए, निजी स्तर पर गोताखोरों की मदद ली गई और नहरों की तलाशी तक करवाई गई, लेकिन हर प्रयास नाकाम रहा। समय के साथ उम्मीदें धुंधली पड़ती गईं, लेकिन सवाल वही बना रहा कि आखिर उस रात हुआ क्या था।

    हाल ही में एक अन्य मामले की जांच के दौरान जब गोताखोर भाखड़ा नहर में उतरे, तो तलाशी अभियान के दौरान उन्हें पानी की गहराई में एक पुरानी वैन दिखाई दी। वैन को बाहर निकाला गया तो अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। वाहन के भीतर मानव कंकाल, पुराने कपड़े और कुछ निजी सामान बरामद हुए, जिससे यह पुष्टि हुई कि यह वही वाहन है जो 26 साल पहले लापता हुआ था।

    प्रारंभिक जांच में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि रात के समय दृश्यता कम होने के कारण वैन अनियंत्रित होकर नहर में गिर गई होगी, और अंदर बैठे लोग बाहर निकलने में असमर्थ रहे होंगे। तेज बहाव और गहरी जलधारा के कारण वाहन वर्षों तक पानी के भीतर छिपा रहा और किसी को इसकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

    इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में शोक और सन्नाटा फैल गया है। जिस परिवार ने इतने वर्षों तक अपने परिजनों की वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ी थी, उन्हें अब 26 साल बाद यह कठोर सत्य मिला है कि उनका इंतजार कभी पूरा नहीं हो सकता। गांव में लोग इस घटना को एक ऐसे Cold Case के रूप में देख रहे हैं, जिसने समय के साथ अपनी परतें खोली हैं लेकिन साथ ही कई सवाल भी छोड़ दिए हैं। यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि कुछ रहस्य समय के साथ दबते नहीं, बल्कि और अधिक गहरे होकर किसी दिन अचानक सामने आ ही जाते हैं।

  • महिला सुरक्षा पर फिर उठा बड़ा सवाल, नूंह की घटना को लेकर कांग्रेस-BJP में तीखी बयानबाजी, जांच की मांग तेज

    महिला सुरक्षा पर फिर उठा बड़ा सवाल, नूंह की घटना को लेकर कांग्रेस-BJP में तीखी बयानबाजी, जांच की मांग तेज

    नई दिल्ली। हरियाणा के नूंह जिले में सामने आए एक गंभीर मामले ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि इसने राजनीतिक माहौल को भी गर्मा दिया है। 19 वर्षीय युवती के साथ कथित गैंगरेप और बाद में आत्महत्या की घटना को लेकर अब सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस पूरे मामले ने महिला सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गहरी चिंता पैदा कर दी है और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

    घटना के सामने आने के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब एक युवती अपने ही घर में सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही, तो राज्य और देश में महिलाओं की सुरक्षा के दावों पर कैसे भरोसा किया जा सकता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और प्रशासनिक तंत्र उन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहा है।

    मामला नूंह के बिछोर थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। पीड़िता के परिवार के अनुसार, 18 मई को कुछ लोग घर में घुसे और युवती के साथ कथित रूप से गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया। आरोप यह भी है कि आरोपियों ने इस दौरान वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी दी और लगातार ब्लैकमेल करते रहे। इस मानसिक प्रताड़ना के कारण युवती गहरे तनाव में चली गई और उसने जहर खा लिया। इलाज के दौरान दिए गए बयान में उसने पूरी घटना का जिक्र किया, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।

    पुलिस ने इस पूरे प्रकरण में पीड़िता के पिता की शिकायत के आधार पर पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं और जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दी जा सके।

    इस बीच कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि मामले की जांच फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत कराई जाए ताकि पीड़िता को जल्द न्याय मिल सके। पार्टी का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में देरी न्याय प्रणाली पर जनता का भरोसा कमजोर करती है। साथ ही कांग्रेस ने यह भी कहा है कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाना समय की जरूरत है।

    घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी लोगों में रोष देखा जा रहा है। महिला सुरक्षा को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने भी चिंता जताई है और प्रशासन से ठोस कदम उठाने की अपील की है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि आखिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है और क्या इसमें और सुधार की जरूरत है।

    फिलहाल पुलिस जांच जारी है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और दोषियों तक कानून कितनी तेजी से पहुंचता है।

  • घर के अंदर हुआ खून का खेल, जिस पोते को दादा ने पाला, उसी ने ले ली जान, गांव में मातम और गुस्सा

    घर के अंदर हुआ खून का खेल, जिस पोते को दादा ने पाला, उसी ने ले ली जान, गांव में मातम और गुस्सा

    नई दिल्ली। रिश्तों की नींव पर जब भरोसा दरकता है, तो घटनाएं इंसानियत को झकझोर देती हैं। ऐसा ही एक दर्दनाक मामला हरियाणा के हांसी क्षेत्र के एक गांव से सामने आया है, जहां पारिवारिक विवाद ने एक घर को मातम में बदल दिया। जिस दादा ने कभी अपने पोते को उंगली पकड़कर चलना सिखाया था, उसी पोते पर अब उनके जीवन को समाप्त करने का आरोप लगा है। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और लोग अभी भी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि एक ही परिवार के भीतर इतना बड़ा और भयावह कदम कैसे उठाया जा सकता है।

    घटना देर रात की बताई जा रही है, जब घर के अंदर अचानक तेज आवाजें सुनाई दीं। शुरुआत में ग्रामीणों को लगा कि यह कोई सामान्य पारिवारिक विवाद होगा, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति गंभीर हो गई। घर के अंदर अफरा-तफरी मच गई और जब लोग मौके पर पहुंचे तो उन्होंने 80 वर्षीय बुजुर्ग को गंभीर रूप से घायल अवस्था में देखा। यह दृश्य इतना भयावह था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति स्तब्ध रह गया। कुछ ही समय में पूरे गांव में इस घटना की खबर फैल गई और माहौल गम और गुस्से में बदल गया।

    जानकारी के अनुसार, मृतक बुजुर्ग की पहचान बरखा राम के रूप में हुई है, जिनकी कथित तौर पर उनके ही पोते अंकित ने हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि आरोपी अविवाहित है और लंबे समय से पारिवारिक तनाव का माहौल बना हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि घर में अक्सर झगड़े की स्थिति रहती थी और कई बार विवाद हिंसक रूप भी ले लेते थे। यह भी आरोप सामने आए हैं कि आरोपी नशे की हालत में भी दादा से विवाद करता था, जिससे घर का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहता था।

    बताया जा रहा है कि बुजुर्ग कुछ समय से अपनी बेटियों के पास रह रहे थे और करीब 15 दिन पहले ही गांव लौटे थे। घटना वाली रात किसी बात को लेकर दादा और पोते के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो धीरे-धीरे गंभीर विवाद में बदल गई। इसी दौरान हमला हुआ, जिसमें बुजुर्ग को सिर पर गंभीर चोट लगी। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमला किस वस्तु से किया गया, लेकिन चोटों की गंभीरता को देखते हुए स्थिति बेहद नाजुक मानी गई।

    घटना के बाद पूरे गांव में मातम जैसा माहौल बन गया। हर कोई यही सवाल कर रहा है कि आखिर एक पोता अपने ही दादा के साथ इतना क्रूर व्यवहार कैसे कर सकता है। ग्रामीणों के बीच आक्रोश भी देखा जा रहा है और लोग इस घटना को रिश्तों पर एक गहरा धक्का बता रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है, जबकि मामले की गहन जांच जारी है।

    पुलिस का कहना है कि घटना के पीछे के कारणों और परिस्थितियों की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके। वहीं यह दर्दनाक घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि पारिवारिक रिश्तों में बढ़ता तनाव किस तरह कभी-कभी भयावह परिणामों में बदल सकता है।

  • चार घंटे चली मोदी सरकार की बड़ी बैठक: विकसित भारत 2047, रिफॉर्म्स और वैश्विक संकट पर गहन मंथन

    चार घंटे चली मोदी सरकार की बड़ी बैठक: विकसित भारत 2047, रिफॉर्म्स और वैश्विक संकट पर गहन मंथन

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की एक महत्वपूर्ण और विस्तृत बैठक में देश के भविष्य की दिशा को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया। करीब चार से साढ़े चार घंटे तक चली इस बैठक में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य, प्रशासनिक सुधारों, आम नागरिकों के जीवन को सरल बनाने तथा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से निपटने की रणनीतियों पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में प्रधानमंत्री के साथ सभी केंद्रीय मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री भी उपस्थित रहे, जिससे यह बैठक नीति निर्माण और समीक्षा के दृष्टिकोण से बेहद अहम मानी जा रही है।

    बैठक में 9 प्रमुख मंत्रालयों ने अपने-अपने कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया, जिसमें उनके कामकाज का रिपोर्ट कार्ड भी शामिल था। सबसे पहले वाणिज्य मंत्रालय ने अपनी प्रस्तुति दी, जिसके बाद पेट्रोलियम, गृह, वित्त और विदेश मंत्रालय सहित अन्य महत्वपूर्ण विभागों ने अपने-अपने क्षेत्र में किए गए सुधारों और उपलब्धियों को सामने रखा। सभी मंत्रालयों को पहले से निर्देश दिया गया था कि वे अपने कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित कर प्रस्तुत करें—कानूनी सुधार, नियामक बदलाव, नीतिगत परिवर्तन और कार्य प्रणाली में सुधार। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि इन सुधारों का सीधा असर आम जनता के जीवन पर किस प्रकार पड़ा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने मंत्रियों से अपील की कि वे अपने-अपने विभागों में ऐसे सुधारों को प्राथमिकता दें, जिनसे ‘ईज ऑफ लिविंग’ यानी नागरिकों के दैनिक जीवन को अधिक सरल और सुविधाजनक बनाया जा सके। इसके साथ ही ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि आर्थिक विकास की गति को और तेज किया जा सके।

    बैठक में पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और उसके वैश्विक प्रभावों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसके संभावित प्रभावों का आकलन किया गया। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिया कि इस स्थिति के मद्देनज़र ऐसे कदम उठाए जाएं जिससे आम नागरिकों पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े। ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, विमानन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को विशेष रूप से संवेदनशील मानते हुए उन पर सतत निगरानी रखने पर जोर दिया गया।

    बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट संकेत दिया गया कि सरकार आने वाले वर्षों में नीति निर्माण और क्रियान्वयन के स्तर पर बड़े सुधारों की दिशा में आगे बढ़ेगी। तकनीक आधारित प्रशासन, पारदर्शिता और तेज निर्णय प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात दोहराई गई। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक कल्याण, सुशासन और नागरिक संतुष्टि भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

    इस बैठक को सरकार के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत में एक महत्वपूर्ण समीक्षा और दिशा निर्धारण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें भविष्य की नीतियों और प्राथमिकताओं की स्पष्ट रूपरेखा उभरकर सामने आई है।

  • भारत-अमेरिका रिश्तों में नई ऊर्जा की बात, मार्को रूबियो बोले-भारत को जितना तेल चाहिए, देने को तैयार अमेरिका

    भारत-अमेरिका रिश्तों में नई ऊर्जा की बात, मार्को रूबियो बोले-भारत को जितना तेल चाहिए, देने को तैयार अमेरिका


    नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा सहयोग के बीच भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर एक अहम बयान सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में ध्यान खींचा है। क्वाड देशों की आगामी बैठक से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत को लेकर सकारात्मक और सहयोगात्मक रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि भारत एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार है और दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिका भारत की बढ़ती मांग को पूरा करने की क्षमता रखता है और जितनी मात्रा में भारत तेल या ऊर्जा संसाधनों की आवश्यकता महसूस करेगा, उसे उपलब्ध कराने की दिशा में अमेरिका तैयार है। उनके इस बयान को दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूती देने वाले संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    रूबियो ने यह टिप्पणी अपनी आगामी विदेश यात्रा से पहले मियामी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की। उन्होंने कहा कि भारत के साथ सहयोग कई क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रहा है और दोनों देश वैश्विक चुनौतियों पर मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने भारत को एक ऐसा साझेदार बताया जिसके साथ अमेरिका लंबे समय से विश्वास और सहयोग के आधार पर संबंध बनाए हुए है।

    ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच अमेरिका अपनी उत्पादन और निर्यात क्षमता को लगातार बढ़ा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा सुरक्षा आज दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और अमेरिका इस दिशा में सहयोगी देशों, खासकर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है।

    नई दिल्ली। आगामी क्वाड बैठक को लेकर भी उन्होंने उत्साह व्यक्त किया। यह बैठक 26 मई को आयोजित होने जा रही है, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री शामिल होंगे। भारत इस बैठक की अध्यक्षता करेगा और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इस महत्वपूर्ण मंच का नेतृत्व करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

    रूबियो ने यह भी बताया कि उनका भारत दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें चार प्रमुख देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और करीब से समझने और आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि क्वाड सहयोग वैश्विक स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है और इसमें भारत की भूमिका अत्यंत अहम है।

    नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री का यह दौरा 23 मई से 26 मई तक प्रस्तावित है, जिसमें वे नई दिल्ली के अलावा कोलकाता, आगरा और जयपुर जैसे शहरों का भी दौरा करेंगे। कोलकाता यात्रा विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कई वर्षों बाद कोई अमेरिकी विदेश मंत्री वहां पहुंचने वाला है, जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    कुल मिलाकर मार्को रूबियो का यह बयान और आगामी भारत यात्रा ऐसे समय में सामने आए हैं जब वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग न केवल ऊर्जा क्षेत्र में बल्कि व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है।

  • गजकेसरी और बुधादित्य योग का शुभ संयोग, आज से इन 5 राशियों के तरक्की और धन लाभ के योग

    गजकेसरी और बुधादित्य योग का शुभ संयोग, आज से इन 5 राशियों के तरक्की और धन लाभ के योग

    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज ग्रहों की विशेष स्थिति से गजकेसरी योग और बुधादित्य योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह योग बेहद शुभ माना जाता है और इसका प्रभाव कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। गजकेसरी योग गुरु बृहस्पति और चंद्रमा की युति से बनता है, जो सुख-समृद्धि और मान-सम्मान प्रदान करता है। वहीं सूर्य और बुध की युति से बनने वाला बुधादित्य योग बुद्धि, करियर और व्यापार में सफलता दिलाने वाला माना गया है।

    इन दोनों शुभ योगों के प्रभाव से 5 राशियों के लिए आज से अच्छे दिनों की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं और आर्थिक लाभ के भी मजबूत योग बन रहे हैं।

    मेष राशि
    मेष राशि वालों के लिए यह समय बेहद अनुकूल रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में नई डील या बड़ा लाभ मिलने के संकेत हैं। सरकारी कार्यों या कानूनी मामलों में सकारात्मक प्रगति देखने को मिल सकती है।

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के जातकों को बुध की शुभ स्थिति का विशेष लाभ मिल सकता है। धन लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं। पुराने निवेश से अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। निर्णय क्षमता मजबूत रहेगी।

    सिंह राशि
    सिंह राशि वालों का आत्मविश्वास और प्रभाव बढ़ने वाला है। नौकरी बदलने की कोशिश कर रहे लोगों को सफलता मिल सकती है। कार्यस्थल पर आपकी नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा होगी। वाहन या प्रॉपर्टी खरीदने की योजना साकार हो सकती है।

    तुला राशि
    तुला राशि के लिए यह योग आर्थिक और पारिवारिक सुख लेकर आ सकता है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। पुराने कर्ज से राहत मिलने की संभावना है। परिवार में चल रहे मतभेद दूर हो सकते हैं। पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता मिलने के योग हैं।

    धनु राशि
    गुरु ग्रह की कृपा से धनु राशि पर इस योग का प्रभाव सबसे अधिक शुभ माना जा रहा है। रुके हुए कार्यों में तेजी आएगी। विदेश यात्रा या उच्च शिक्षा से जुड़े प्रयास सफल हो सकते हैं। कारोबार में नए अवसर मिल सकते हैं। बड़े प्रोजेक्ट या ऑर्डर मिलने से प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

  • OTT से बॉलीवुड तक अपनी अदाओं का जादू बिखेर चुकी सपना पब्बी अब ‘बंदर’ में बनेंगी बॉबी देओल की सबसे बड़ी मुसीबत

    OTT से बॉलीवुड तक अपनी अदाओं का जादू बिखेर चुकी सपना पब्बी अब ‘बंदर’ में बनेंगी बॉबी देओल की सबसे बड़ी मुसीबत


    नई दिल्ली ।
    टीवी शो ‘घर आजा परदेसी’ और ’24’ में उन्हें अहम किरदार निभाते देखा गया. एक वक्त पर वो यामी गौतम के साथ ‘फेयर एंड लवली’ के विज्ञापन में भी नजर आई करती थीं. 2015 में फिल्म ‘खामोशियां’ से उन्होंने अपना बॉलीवुड डेब्यू किया था. पिक्चर में अली फजल संग केमिस्ट्री और बोल्ड सीन्स के चलते उनके खूब चर्चे हुए थे.
    हिंदी के साथ-साथ सपना पब्बी ने पंजाबी और तेलुगू सिनेमा में भी काम किया है. उन्हें ‘टोली प्रेमा’, ‘मार गए ओए लोको’, ‘अरदास करां’, ‘ड्राइव’, ‘सार्जेंट’, ‘सरदार जी 3’ जैसी फिल्मों में देखा गया है. जल्द सपना, फिल्म ‘बंदर’ में नजर आएंगी. इस पिक्चर का प्रीमियर 2025 में हुए टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल यानी TIFF में हुआ था.

    टेलीवीजन और फिल्मी दुनिया के साथ-साथ सपना पब्बी का दबदबा ओटीटी की दुनिया में भी खूब है. उन्हें ‘द ट्रिप’, ‘ब्रीद’, ‘बॉम्बर्स’, ‘फोर मोर शॉट्स प्लीज’, ‘इनसाइड एज’, ‘लंदन फाइल्स’, नेवर किस योर बेस्ट फ्रेंड 2′ समेत यूनाइटेड कच्चे’ जैसी सीरीज में देखा जा चुका है.

    2012 से लेकर अभी तक सपना पब्बी काफी काम कर चुकी हैं. उन्होंने अपने करियर के साथ-साथ ढेरों एक्सपेरिमेंट कर खुद को बेहतर बनाया है और अपने टैलेंट को साबित करके दिखाया है. देखना होगा कि फिल्म ‘बंदर’ में वो क्या कमाल करती हैं. ये फिल्म 5 जून को सिनेमाघरों में हो रही है.
  • 2.30 घंटे का धैर्य टेस्ट! ‘चांद मेरा दिल’ में प्यार तो है, लेकिन कहानी और लेखन ने किया निराश

    2.30 घंटे का धैर्य टेस्ट! ‘चांद मेरा दिल’ में प्यार तो है, लेकिन कहानी और लेखन ने किया निराश

    नई दिल्ली ।  ‘चांद मेरा दिल’ को सबसे खतरनाक यूजलेस फिल्म क्या बनाता है? क्या वो पिक्चर की खराब कहानी है? या उसके क्रिंज डायलॉग या फिर डायरेक्टर विवेक सोनी की ऑडेसिटी जो ये सोच रहे थे कि वो इस जमाने की सबसे बेहतरीन रोमांटिक फिल्म बना रहे हैं? इसका जवाब है- सबकुछ.
    बॉलीवुड में बीते काफी वक्त से रीमेक और सीक्वल बन रहे हैं. ऐसे में कोई नई कहानी ऑडियंस को परोसना मेकर्स के लिए शायद मुश्किल हो गया है, या फिर हमने पूरी तरह से कोशिश करना छोड़ दिया है. जो भी है…
    ओटीटी के जमाने में जनता को फिल्म देखने के लिए थिएटर तक खींचना बड़ी बात हो गई है. ऐसे में आपकी पिक्चर एकदम बेदम हो तो चीजें और खराब हो जाती हैं.कुछ कहानियां आइडिया में बहुत अच्छी लगती हैं. मगर इसका मतलब यह नहीं है कि वो पर्दे परभी उतनी ही खूबसूरत लगें, जितनी पन्ने पर लग रही थी. ‘चांद मेरा दिल’ भी कुछ ऐसी ही है. किसी नए राइटर की नई-सी किताब में अगर इस कहानी को पढ़ा होता तो 14-15 साल की बच्चियां फिर भी इसे पचा लेतीं. पर हमसे ये न हो पाई, भैया!

    क्या है फिल्म की कहानी?

    कहानी है आरव रावत (लक्ष्य) और चांदनी प्रसाद (अनन्या पांडे) की. 21 साल की उम्र में इंजीनियरिंग कॉलेज में मिले आरव और चांदनी को एक-दूसरे से प्यार हो जाता है. मगर एक दूसरे की आंखों में खोए, मैसेज में एम्बेरेसिंग बातें करने वाले ‘आरु और चांद’ नहीं जानते कि जिंदगी में सिर्फ प्यार काफी नहीं होता. दोनों एकदम अलग परिवारों से आए हैं. चांदनी ऐसे घर में पली-बढ़ी है, जिसमें उसने अपनी मां को घरेलू हिंसा का शिकार होते देखा है. तो वहीं आरव के मां-बाप को हमेशा से अपने बच्चों से ज्यादा इमेज की चिंता रही है. अपने घरों में अनदेखे हुए और कम प्यार पाकर जिए आरव-चांदनी एक दूसरे के लिए ‘दुनिया खूबसूरत’ बना रहे हैं.
    दोनों की जिंदगी में एक क्राइसिस आता है और परिवार उनसे मुंह फेर लेता है. अब आरव और चांदनी दुनिया में एक दूसरे का सहारा हैं. उनके पास बड़ी जिम्मेदारी है, जिसके बोझ तले वो दब रहे हैं. एक दिन वो होता है, जो किसी ने नहीं सोचा और दोनों की जिंदगी बदल जाती है. इमेजिन करने में कहानी प्यारी लग रही है, है न? देखने में नहीं है! देखने में ये बॉलीवुड की बहुत ही पुराने जमाने की कहानी है, जिसमें बच्चे खुद को समझदार समझकर बड़े फैसले ले लेते हैं और फिर उन्हें समझ आता है कि अब हमारे बस की तो ये है नहीं, अब हम फंस गए. ऐसी कहानियां हम बहुत बार बॉलीवुड में बनते देख चुके हैं. अगर ये कोई शॉर्ट फिल्म भी होती तो शायद खूबसूरत लगती. मगर एक पूरी लगभग 2.30 घंटे की पिक्चर के रूप में ‘चांद मेरा दिल’, बोरिंग, प्रेडिक्टेबल और क्रिंज है.
    परफॉरमेंस
    आरव के रोल में लक्ष्य ने बढ़िया काम किया है. वो अच्छे एक्टर हैं, इस बात में कोई दोराय नहीं है. मगर ये फिल्म उनके टैलेंट के हिसाब की है ही नहीं. ‘किल’ और ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ के साथ लक्ष्य ने अपने एक्टिंग टैलेंट को साबित किया है. ‘चांद मेरा दिल’ में उनका किरदार फिर भी समझदार था. अनन्या पांडे ने भी पिक्चर में अच्छा काम किया है. मगर उनका किरदार चांदनी इतना इरिटेटिंग है कि आपका उसपर चिल्लाने का मन करता है. चांदनी इस रिश्ते में टॉक्सिक इंसान है. वो डेलुलु में जीती है और कन्फ्यूज ही रहती है. बेवकूफी भरी हरकत करती है, लेकिन अगर कोई बोल दे दो तो उसे बुरा लग जाता है. फिल्म में मनीष चौधरी और चारु शंकर संग अन्य कलाकारों ने भी काम किया है. उनका काम लिमिटेड था और सही भी रहा.
    सब्र का लेगी इम्तिहान
    डायरेक्टर विवेक सोनी और तुषार परांजपे का स्क्रीनप्ले काफी खराब और बोरिंग है. इसको और खराब बनाते हैं पिक्चर के डायलॉग. आरव और चांदनी, दोनों के ही किरदार आपको शुरुआत से पसंद नहीं आते. दोनों बेहद चीजी हरकतें करते हैं, बचपना दिखाते हैं और फिर आप सोचते हो कि अभी तो ये बच्चे हैं कोई बात नहीं. मगर इस सबका अंत कहीं नहीं होता. पिक्चर की कहानी आप बैठे-बैठे जो सोच रहे हैं वही जाती है.
    आपको ये जानने के लिए इसे देखने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी कि इसमें आखिर क्या हुआ. ‘चांद मेरा दिल’ शुरुआत से ही आपका ध्यान अपनी ओर खींचने में नाकाम होती है. इंटरवल आते-आते आप सोचने लगते हैं कि क्या इसे छोड़कर घर वापस लौट जाना चाहिए. आप खुद को इसे अंत तक देखने के लिए फोर्स करते हैं और फिर आरव और चांदनी के बीच एक बात आपकी हिट करती है. पिक्चर के अंत में आरव, चांदनी से पूछता है, ‘कहीं हम गलती तो नहीं कर रहे?’ वो कहती है, ‘अगर गलत है तो गलत सही.’ यहां थिएटर में बैठे आप सोचते हो, ‘गलती तो मैंने कर दी इस मूवी को देखने आकर.’
    ‘चांद मेरा दिल’ की अच्छी बात सिर्फ उसके गाने हैं. इस फिल्म को देखने के एक्सपीरिएंस की सबसे अच्छी बात थी चांद देखना. नहीं, फिल्म में किसी चांद को नहीं, बल्कि थिएटर से बाहर निकलकर घर आते हुए असली चांद को. वो सुंदर लग रहा था.
  • कम रेटिंग समझकर जिन हॉरर फिल्मों को लोगों ने किया नजरअंदाज, अब वही बन रही हैं डर की सबसे बड़ी वजह, दर्शकों ने कहा- रातभर नहीं आई नींद

    कम रेटिंग समझकर जिन हॉरर फिल्मों को लोगों ने किया नजरअंदाज, अब वही बन रही हैं डर की सबसे बड़ी वजह, दर्शकों ने कहा- रातभर नहीं आई नींद


    नई दिल्ली ।  अक्सर जब हम कोई नई हॉरर फिल्म देखने बैठते हैं, तो सबसे पहले उसकी IMDb रेटिंग चेक करते हैं। अगर रेटिंग 6 या 6.5 के आसपास हो, तो हम मान लेते हैं कि फिल्म ठीक ठाक होगी और उसे स्किप कर देते हैं। लेकिन हॉरर जॉनर के साथ ऐसा करना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है।सिनेमा लवर्स सोशल मीडिया पर ऐसी तीन फिल्में रीकमंड कर रहे हैं जिनकी रेटिंग कम है, लेकिन डर के मामले में बेस्ट है। ये फिल्में लोगों के पसीने छुड़ा दे रही हैं। आइए आपको बताते हैं कि इन तीन फिल्मों की खास बात क्या है।
    द टेकिंग ऑफ डेबोरा लोगान (The Taking of Deborah Logan)
    क्यों देखें ये फिल्म?: अगर आपको लगता है कि आपने सबकुछ देख लिया है और अब आपको डर नहीं लगता, तो ये फिल्म आपका भ्रम तोड़ देगी। ये फिल्म ‘फाउंड फुटेज’ स्टाइल में बनी है, जिससे स्क्रीन पर दिखने वाली हर घटना एकदम असली महसूस होती है।
    कहानी और डर का फैक्टर: कहानी एक मेडिकल टीम की है जो अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित एक बुजुर्ग महिला पर डॉक्यूमेंट्री बना रही है। शुरुआत में ये एक इमोशनल लगती है, लेकिन धीरे-धीरे अल्जाइमर पेशेंट की हरकतें इतनी अजीब और खौफनाक होने लगती हैं कि पूरी टीम की जान पर बन आती है।
    लोग क्या बोल रहे: सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि फिल्म का आखिरी का 20 मिनट का एक सीन इतना भयानक और डिस्टर्बिंग है कि कमजोर दिल वाले उसे झेल नहीं पाएंगे।
    2. द डार्क एंड द विक्ड (The Dark and The Wicked)

    क्यों देखें ये फिल्म?: यह कोई आम भूतिया फिल्म नहीं है जहां अचानक कोई सामने आकर आपको डराए, बल्कि ये एक ऐसी साइकोलॉजिकल हॉरर फिल्म है जो आपके दिमाग से खेलती है।
    कहानी और डर का फैक्टर: इस फिल्म में दो भाई-बहन की कहानी दिखाई गई है जो अपने बीमार पिता की देखभाल करने के लिए एक बेहद सुनसान फार्महाउस पर जाते हैं। वहां पहुंचते ही उन्हें महसूस होता है कि कोई बेहद खतरनाक ताकत उनके पूरे परिवार को खत्म करना चाहती है।
    लोग क्या बोल रहे: लोग कह रहे हैं कि ये फिल्म थोड़ी स्लो है, जिसकी वजह से इसकी रेटिंग कम रह गई। हालांकि हॉरर फिल्में देखने वालों के लिए ये मास्टरपीस है।

    यहां देखिए फिल्म का ट्रेलर
    क्यों देखें ये फिल्म?: थाईलैंड के काले जादू, ओझा और अंधविश्वास पर बनी ये फिल्म रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी है। इसे मॉक्युमेंट्री स्टाइल में शूट किया गया है यानी आपको ऐसा लगेगा जैसे आप कोई असली घटना लाइव देख रहे हैं।
    कहानी और डर का फैक्टर: ये फिल्म थाईलैंड के एक छोटे से गांव की कहानी है, जहां एक लड़की पर किसी प्राचीन और बहुत ही दुष्ट आत्मा का साया आ जाता है। फिल्म का पहला पार्ट धीरे-धीरे सस्पेंस बनाता है, लेकिन सेकेंड हाफ और इसका क्लाइमेक्स इतना ज्यादा खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला है कि इसे अकेले या अंधेरे में देखने की गलती बिल्कुल न करें।