Author: bharati

  • टॉक्सिक के तबाही गाने का धमाका 24 घंटे में करोड़ों दर्शक बोल्ड रोमांस और रिकॉर्ड व्यूज ने बढ़ाई फिल्म की चर्चा

    नई दिल्ली । साउथ सुपरस्टार यश और अभिनेत्री कियारा आडवाणी की बहुप्रतीक्षित फिल्म टॉक्सिक रिलीज से पहले ही जबरदस्त चर्चा में है। फिल्म का नया गाना तबाही सामने आते ही सोशल मीडिया और यूट्यूब पर छा गया है। रिलीज के महज 24 घंटे के भीतर इस गाने ने 16 मिलियन से अधिक व्यूज हासिल कर लिए और यूट्यूब ट्रेंडिंग में पहला स्थान भी अपने नाम कर लिया। अलग अलग भाषाओं में रिलीज हुए इस गाने को भी दर्शकों का शानदार समर्थन मिल रहा है जिससे फिल्म को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है।

    गाने में यश और कियारा आडवाणी की रोमांटिक केमिस्ट्री ने दर्शकों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा है। दोनों के बीच फिल्माए गए कई बोल्ड और इंटेंस रोमांटिक दृश्य सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बन गए हैं। कुछ दर्शकों ने इसे डार्क रोमांस का बेहतरीन उदाहरण बताया तो कुछ ने सेंसर बोर्ड को लेकर सवाल उठाते हुए मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने कमेंट करते हुए लिखा कि ऐसा कंटेंट लंबे समय बाद देखने को मिला है जबकि कुछ लोगों ने पुराने दौर की रोमांटिक फिल्मों और कलाकारों की याद भी ताजा कर दी।

    गाने की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कमेंट सेक्शन में हजारों प्रतिक्रियाएं लगातार आ रही हैं। किसी ने यश की स्क्रीन प्रेजेंस की तारीफ की तो किसी ने कियारा आडवाणी के ग्लैमरस अवतार को फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण बताया। कई दर्शकों ने दोनों कलाकारों की जोड़ी को बेहद प्रभावशाली बताया और फिल्म रिलीज होने का इंतजार जताया। वहीं कुछ लोगों ने यह भी अनुमान लगाया कि गाने में दिखाए गए दृश्य फिल्म की कहानी से गहराई से जुड़े हो सकते हैं और यह केवल रोमांस नहीं बल्कि भावनात्मक मोड़ का हिस्सा भी है।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे फनी मीम्स और कमेंट्स ने भी इस गाने की लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी है। कुछ यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में कियारा के पति सिद्धार्थ मल्होत्रा का जिक्र किया तो कई लोगों ने यश की तुलना बॉलीवुड के पुराने रोमांटिक सितारों से कर दी। इन प्रतिक्रियाओं ने गाने को केवल संगीत प्रेमियों तक सीमित नहीं रखा बल्कि आम सोशल मीडिया यूजर्स के बीच भी चर्चा का विषय बना दिया।

    फिल्म टॉक्सिक का टीजर पहले ही यह संकेत दे चुका था कि इसकी कहानी पारंपरिक मसाला फिल्मों से अलग होगी। अब तबाही गाने ने यह साफ कर दिया है कि फिल्म में रोमांस के साथ इमोशन और डार्क टोन का भी खास मिश्रण देखने को मिलेगा। यही वजह है कि दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है।

    फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। इसमें यश और कियारा आडवाणी के अलावा नयनतारा और तारा सुतारिया भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी। फिल्म की रिलीज डेट पहले कई बार बदली जा चुकी है लेकिन अब इसके अगस्त में सिनेमाघरों में आने की उम्मीद जताई जा रही है। तब तक तबाही गाना दर्शकों के बीच अपनी लोकप्रियता का सिलसिला लगातार जारी रखे हुए है और यह साफ संकेत दे रहा है कि टॉक्सिक साल की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हो सकती है।

  • संसदीय समिति की चौंकाने वाली रिपोर्ट जेलों के भीतर मोबाइल और प्रतिबंधित सामान का खेल नहीं थम रहा

    संसदीय समिति की चौंकाने वाली रिपोर्ट जेलों के भीतर मोबाइल और प्रतिबंधित सामान का खेल नहीं थम रहा


    नई दिल्ली । देश की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि मोबाइल फोन समेत कई प्रतिबंधित सामान बड़ी आसानी से जेलों के भीतर पहुंच रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि आधुनिक सुरक्षा उपकरण जैमर और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के बावजूद यह सिलसिला थम नहीं रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में जेल स्टाफ के साथ अस्पताल से जुड़े कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है जिससे जेल सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

    समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जेलों में लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनात रहने वाले कर्मचारियों और कैदियों के बीच नजदीकियां बढ़ जाती हैं। यही कारण है कि कई मामलों में सांठगांठ विकसित हो जाती है और प्रतिबंधित सामान अंदर पहुंचाने का रास्ता आसान बन जाता है। समिति ने सुझाव दिया है कि जेल कर्मचारियों का नियमित अंतराल पर तबादला किया जाए ताकि इस तरह की मिलीभगत की संभावना कम हो सके।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश की अधिकांश जेलों में आधुनिक सुरक्षा संसाधनों की कमी है। कई स्थानों पर लगे जैमर प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहे हैं जबकि सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। इसलिए गृह मंत्रालय से सिफारिश की गई है कि राज्यों को पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए ताकि डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर हैंड हेल्ड स्कैनर बैगेज स्कैनर बॉडी वॉर्न कैमरे आधुनिक सीसीटीवी सिस्टम और अन्य सुरक्षा उपकरण खरीदे जा सकें। साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कैदियों की पेशी को बढ़ावा देने की भी सलाह दी गई है जिससे जेल से बाहर ले जाने की जरूरत कम हो सके।

    हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने जेल सुरक्षा पर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल के भीतर से मोबाइल फोन और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए आपराधिक नेटवर्क संचालित करने के आरोपों ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी पहले कई बार यह संकेत दे चुकी है कि कुछ संगठित अपराधी जेल के भीतर से ही उगाही ड्रग तस्करी हवाला और टारगेट किलिंग जैसी गतिविधियों का संचालन करते रहे हैं।

    पूर्व वरिष्ठ जेल अधिकारियों का भी मानना है कि जेल मैनुअल में समय के अनुसार बदलाव की जरूरत है। उनका कहना है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि कई मामलों में प्रभावशाली लोगों का संरक्षण भी ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी तब तक सुधार की प्रक्रिया अधूरी रहेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जेल केवल अपराधियों को बंद रखने का स्थान नहीं बल्कि सुधार गृह भी हैं। यदि जेलों के भीतर ही आपराधिक गतिविधियां संचालित होती रहेंगी तो कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बढ़ेगा। ऐसे में संसदीय समिति की सिफारिशों को गंभीरता से लागू करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है ताकि जेलों की सुरक्षा मजबूत हो सके और अपराधियों के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

  • देशविरोधी कंटेंट पर सरकार का शिकंजा स्कूलों और कोचिंग सेंटरों की किताबों की होगी स्क्रीनिंग

    देशविरोधी कंटेंट पर सरकार का शिकंजा स्कूलों और कोचिंग सेंटरों की किताबों की होगी स्क्रीनिंग


    नई दिल्ली । जम्मू कश्मीर सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा और अहम फैसला लिया है। सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के साथ साथ कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपनी लाइब्रेरी कक्षाओं और अन्य शैक्षणिक स्थानों पर रखी सभी किताबों की गहन जांच करें। इस जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों तक ऐसी कोई पुस्तक या अध्ययन सामग्री न पहुंचे जिसमें देशविरोधी विचार अलगाववाद हिंसा या किसी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री शामिल हो। सरकार का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राष्ट्रीय मूल्यों का विकास करना है इसलिए किसी भी प्रकार की भ्रामक सामग्री को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनने दिया जाएगा।

    स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार सभी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के प्रमुखों को सात दिनों के भीतर अपनी लाइब्रेरी और कक्षाओं में मौजूद पुस्तकों की जांच पूरी करनी होगी। इसके बाद उन्हें प्रमाणित करना होगा कि उनके संस्थान में ऐसी कोई पुस्तक मौजूद नहीं है जो राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हो या छात्रों के मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालती हो। यदि जांच के दौरान कोई संदिग्ध या आपत्तिजनक पुस्तक मिलती है तो उसकी पूरी जानकारी संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध करानी होगी ताकि आगे आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

    यह कदम हाल ही में सामने आए उस विवाद के बाद उठाया गया है जिसमें कुछ पुस्तकों में जम्मू कश्मीर को भारत के कब्जे वाला क्षेत्र बताया गया था और कुछ अलगाववादी व्यक्तियों का सकारात्मक चित्रण किया गया था। इन पुस्तकों के सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीर मामला मानते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी। इसके बाद उपराज्यपाल ने संबंधित शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया और पूरे प्रदेश में शैक्षणिक सामग्री का ऑडिट कराने के निर्देश दिए।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी शिक्षण संस्थानों में उपयोग होने वाली सामग्री नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप होनी चाहिए। ऐसी किसी भी पुस्तक को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो धार्मिक भावनाओं को आहत करे समाज में विभाजन पैदा करे या छात्रों को भटकाने का प्रयास करे। शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और संस्थानों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    इस पूरे मामले पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे इतिहास और वैचारिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखा है। कुछ नेताओं का कहना है कि किताबों की स्क्रीनिंग के नाम पर इतिहास को बदला नहीं जाना चाहिए जबकि सरकार का तर्क है कि छात्रों को तथ्य आधारित और संतुलित शिक्षा देना उसकी जिम्मेदारी है तथा किसी भी प्रकार की भ्रामक या राष्ट्रविरोधी सामग्री को शिक्षा का हिस्सा नहीं बनने दिया जा सकता।

    इस बीच बाल अधिकारों से जुड़े संगठनों ने भी इस विषय को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि बच्चों को ऐसी सामग्री उपलब्ध कराना जो हिंसा अलगाववाद या भ्रामक विचारों को बढ़ावा देती हो उनके मानसिक विकास और भविष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए शैक्षणिक संस्थानों में पाठ्य सामग्री की समय समय पर समीक्षा आवश्यक है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा किसी भी समाज की सबसे मजबूत नींव होती है। ऐसे में स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई जाने वाली पुस्तकों का तथ्यपरक संतुलित और संविधान की भावना के अनुरूप होना बेहद जरूरी है। यदि किसी सामग्री पर विवाद की आशंका हो तो उसकी निष्पक्ष समीक्षा कर उचित निर्णय लेना शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

  • राज्यसभा उपचुनावः बंगाल में ममता के साथ खेला…BJP ने TMC से आए तीनों सांसदों को बनाया उम्मीदवार

    राज्यसभा उपचुनावः बंगाल में ममता के साथ खेला…BJP ने TMC से आए तीनों सांसदों को बनाया उम्मीदवार


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में चुनाव आयोग (Election Commission) ने खाली हुई राज्यसभा (Rajya Sabha) की तीन सीटों पर उपचुनाव (By-election) की घोषणा कर दी है. इस हादसे की सबसे दिलचस्प बात ये है कि उपचुनाव के बाद भी संसद के उच्च सदन में भेजने वाले चेहरे वही रहने की उम्मीद है, बस उनकी पार्टी का रंग बदल चुका है।

    BJP इन तीनों सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है. दूसरी तरफ, आपसी गुटबाजी और बिखराव से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस के सामने राज्यसभा में अपनी ताकत और कम होने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

    जून में टीएमसी के तीन पूर्व राज्यसभा सांसदों- सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक ने अपनी ही पार्टी और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. विधानसभा चुनाव में टीएमसी की करारी हार के बाद इन नेताओं ने नेतृत्व पर सवाल उठाए थे।


    बीजेपी में शामिल होते ही उम्मीदवार घोषित

    सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक अब ये बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. उन्होंने आज ही बीजेपी जॉइन की और पार्टी ने आज ही उन्हें ही अपना उम्मीदवार बना दिया है।

    संसदीय नियमों के मुताबिक, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बड़ाइक का कार्यकाल सितंबर 2029 तक था, जबकि सुष्मिता देव का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक चलना था. अब इन खाली सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव होने जा रहे हैं और यही तीनों नेता एक बार फिर उम्मीदवार होंगे. सिर्फ उनकी पार्टी नई होगी।


    विधानसभा का गणित: बीजेपी का पलड़ा भारी

    बंगाल विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो नंबर गेम पूरी तरह से बीजेपी के पक्ष में झुका हुआ है. 294 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के पास अपने 208 विधायक हैं. राज्यसभा चुनाव के सिस्टम के मुताबिक, तीन सीटों वाले इस उपचुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 70 वोटों की जरूरत होगी।

    बीजेपी के पास विधायकों की संख्या इतनी ज्यादा है कि वो बिना किसी बाहरी समर्थन के अपने तीनों उम्मीदवारों को आसानी से 70, 69 और 69 वोट दिला सकती है. इस गणित के कारण बीजेपी की तीनों सीटों पर जीत पूरी तरह पक्की मानी जा रही है.


    दो गुटों में बंटी टीएमसी, चुनौती बड़ी

    बीजेपी के इस बड़े ‘खेले’ के सामने टीएमसी बेबस नजर आ रही है. किसी भी विरोधी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 70 वोटों की जरूरत होगी. वैसे तो टीएमसी के टिकट पर जीते विधायकों की कुल संख्या अभी भी करीब 80 है. लेकिन पार्टी के भीतर मचे घमासान ने इसे कमजोर कर दिया है. टीएमसी के विधायक अब दो धड़ों में बंट चुके हैं- एक खेमा ममता बनर्जी के साथ है, तो दूसरा बागी गुट विधानसभा में विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व में काम कर रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर टीएमसी एकजुट होती, तो वह कम से कम एक सीट के लिए मुकाबला कड़ा कर सकती थी. लेकिन अंदरूनी लड़ाई इतनी बढ़ चुकी है कि दोनों गुटों के बीच किसी आम सहमति की गुंजाइश खत्म हो गई है. बागी गुट का दावा है कि टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने पहले ही रीताब्रत बनर्जी का समर्थन किया था और अब उनके साथ करीब 65 विधायक हैं।


    ‘विश्वासघात’ बनाम ‘नेतृत्व का संकट’

    ममता बनर्जी का खेमा इस नुकसान को कम आंकने की कोशिश कर रहा है. उनका कहना है कि ये उन नेताओं का ‘विश्वासघात’ है जिन्होंने संकट के समय पार्टी को छोड़ दिया. टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘ये सीटें टीएमसी की थीं, जो पिछले चुनाव में पार्टी की ताकत के दम पर जीती गई थीं. कुछ लोगों ने मुश्किल समय में पार्टी छोड़ दी, बंगाल की जनता सब देख रही है।

    दूसरी तरफ, बागी गुट के नेताओं का कहना है कि ये कोई आम इस्तीफा नहीं है, बल्कि ये पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को लेकर अविश्वास का नतीजा है. उन्होंने कहा, ‘नेतृत्व ने संगठन के भीतर से मिल रही चेतावनियों को नजरअंदाज किया, जिसका नतीजा विधानसभा चुनाव में देखने को मिला. असली मुद्दा राज्यसभा सीट का नहीं, बल्कि ये है कि चुने हुए प्रतिनिधियों का अब मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा क्यों नहीं रहा।

    फिलहाल, दोनों गुटों के बीच टीएमसी के नाम, सिंबल और संगठन पर कब्जे की लड़ाई चुनाव आयोग के सामने लंबित है. अगर 24 जुलाई को होने वाले उपचुनाव में बीजेपी इन तीनों सीटों पर जीत हासिल करती है, तो राज्यसभा में उसकी ताकत बढ़ेगी और टीएमसी का कद घटेगा।

  • बंगाल की मासूम से दरिंदगी का आरोपी प्रभास मंडल एनकाउंटर में मारा गया अब CID करेगी पूरे घटनाक्रम की जांच

    बंगाल की मासूम से दरिंदगी का आरोपी प्रभास मंडल एनकाउंटर में मारा गया अब CID करेगी पूरे घटनाक्रम की जांच


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के साथ हुई हैवानियत ने पूरे देश को झकझोर दिया। चार दिन तक चली पुलिस जांच के बाद इस सनसनीखेज मामले का मुख्य आरोपी प्रभास मंडल पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। जिस इलाके में मासूम की दर्दनाक मौत हुई थी उसी क्षेत्र के पास आरोपी की मौत होने से यह मामला और भी चर्चा में आ गया है। अब इस पूरे एनकाउंटर की जांच अपराध जांच विभाग यानी CID को सौंपी जा रही है जबकि न्यायिक जांच भी समानांतर रूप से जारी रहेगी।

    घटना की शुरुआत 4 जुलाई को हुई जब बारुईपुर के सूर्यपुर हाट क्षेत्र के एक तालाब से बोरे में बंद 11 वर्षीय बच्ची का शव बरामद हुआ। बच्ची अपनी सहेली के लिए उपहार खरीदने घर से निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी। जांच के दौरान सामने आया कि उसके साथ पहले दरिंदगी की गई और फिर उसे गंभीर रूप से घायल अवस्था में बोरे में भरकर तालाब में फेंक दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी संकेत मिले कि बच्ची तालाब में फेंके जाने के समय जीवित थी और उसके फेफड़ों तथा पेट में पानी मिला जिससे डूबने की पुष्टि हुई। शरीर पर कई चोटों के साथ निजी अंगों पर गंभीर जख्म और काटने के निशान भी पाए गए।

    जांच के दौरान पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में प्रभास मंडल आखिरी बार बच्ची के साथ दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने उसके घर पर दबिश दी। शुरुआत में परिवार ने आरोपी के घर पर न होने का दावा किया लेकिन पुलिस ने घर के अंदर तलाशी ली तो वह एक कोने में छिपा मिला। पूछताछ के दौरान उसने पहले पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और अन्य लोगों पर आरोप लगाया लेकिन बाद में कथित रूप से उसने अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली।

    घटना के चार दिन बाद देर रात पुलिस आरोपी को घटनास्थल पर लेकर पहुंची जहां पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया जा रहा था। पुलिस के अनुसार इसी दौरान प्रभास मंडल ने एक पुलिस अधिकारी की पिस्तौल छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग भी की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोली चलाई जो उसके सीने और शरीर के अन्य हिस्सों में लगी। घायल आरोपी को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    एनकाउंटर के बाद अब पूरे मामले की जांच CID को सौंपने की तैयारी की गई है क्योंकि मुठभेड़ में स्थानीय पुलिस के अधिकारी शामिल थे। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाती है। इसके साथ ही न्यायिक जांच भी जारी रहेगी ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा की जा सके।

    यह मामला एक बार फिर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि ऐसे जघन्य अपराधों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कितनी आवश्यक है ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और समाज में कानून के प्रति विश्वास बना रहे।

  • दुनिया में रहने लायक सबसे अच्छे शहरों की सूची में दिल्ली 120वें स्थान पर, मुम्बई उससे भी पीछे

    दुनिया में रहने लायक सबसे अच्छे शहरों की सूची में दिल्ली 120वें स्थान पर, मुम्बई उससे भी पीछे


    नई दिल्ली।
    दुनिया भर में रहने के लिहाज से सबसे अच्छे शहरों (Best Cities) की ताजा लिस्ट आ गई है। इस हफ्ते ‘द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट’ ने अपनी नई ‘ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2026’ (Global Liveability Index 2026) रिपोर्ट जारी की है। इस सूचकांक में कुल 173 शहरों को वहां मौजूद सुविधाओं और रहने की स्थितियों के अलग-अलग पैमानों पर परखा गया है। अगर भारतीय शहरों की बात करें तो नई दिल्ली (New Delhi) को 120वां स्थान मिला है। वहीं, डेनमार्क का शहर कोपेनहेगन (Copenhagen) दुनिया के सबसे बेहतरीन और रहने लायक शहरों की लिस्ट में नंबर वन पर बरकरार है। कोपेनहेगन ने ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना को पीछे छोड़ते हुए अपना पहला स्थान बरकरार रखा है। द इकोनॉमिस्ट मैगजीन की सहयोगी संस्था ईआईयू ने दुनिया भर के 173 शहरों को शिक्षा, स्थिरता, हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और संस्कृति जैसे पैमानों पर परखा है।


    भारतीय शहरों की रैंकिंग

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के प्रमुख शहरों की रैंकिंग कुछ इस प्रकार है:
    – नई दिल्ली: 120वें पायदान पर
    – मुंबई: 121वें पायदान पर
    – चेन्नई: 123वें पायदान पर
    – बेंगलुरु: 127वें पायदान पर

    गौर करने वाली बात यह है कि देश की राजधानी नई दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई की रैंकिंग में पिछले साल के मुकाबले कोई बदलाव नहीं आया है। ये दोनों शहर अपनी पुरानी स्थिति पर ही बने हुए हैं।


    दुनिया के 10 सबसे बेहतरीन शहर

    रहने के लिहाज से डेनमार्क के कोपेनहेगन ने ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना और ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न को पछाड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है:


    कोपेनहेगन क्यों है नंबर वन?

    रिपोर्ट के मुताबिक, कोपेनहेगन को स्थिरता, इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा के मामले में “परफेक्ट” स्कोर मिला है। ईआईयू के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस शहर की शानदार स्थिरता और बुनियादी ढांचे के साथ-साथ बेहतरीन संस्कृति, पर्यावरण और उच्च गुणवत्ता वाली सार्वजनिक सेवाओं के बेजोड़ तालमेल ने इसे शीर्ष पर बनाए रखा है।


    अमेरिका और कनाडा का क्या है हाल?

    टॉप-10 की ग्लोबल लिस्ट में उत्तरी अमेरिका का केवल एक शहर जगह बना पाया है, और वह है कनाडा का वैंकूवर (9वां स्थान)। अगर अमेरिकी शहरों की बात करें तो न्यूयॉर्क तीन पायदान की छलांग लगाकर 66वें नंबर पर आ गया है। अपराध दर में कमी और आतंकी घटनाओं के कम होते खतरे की वजह से इसके ‘स्टेबिलिटी स्कोर’ में काफी सुधार हुआ है। हालांकि, दो पायदान नीचे खिसकने के बावजूद होनोलूलू (25वां स्थान) अभी भी अमेरिका का सबसे ऊंची रैंकिंग वाला शहर बना हुआ है।


    एशिया के स्कोर में सुधार, यूरोप में ठहराव

    इंडेक्स के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमी यूरोप अभी भी रहने के लिहाज से दुनिया का सबसे शानदार क्षेत्र बना हुआ है, हालांकि अब इसके औसत स्कोर में एक ठहराव आ गया है। इसके उलट, एशिया के औसत स्कोर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2025 की तुलना में इस बार चीन के 10 शहरों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। इसके अलावा, रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि ईरान युद्ध की वजह से पूरे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हुई है।


    एशिया के हेल्थकेयर में सुधार से रैंकिंग उछली

    इस साल एशिया के औसत लिवेबिलिटी स्कोर में 0.3 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह 73.9 हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां की स्वास्थ्य सेवाओं (हेल्थकेयर) का मजबूत होना है। चीन के कई शहरों की रैंकिंग में भी उछाल आया है, जैसे फुझोऊ सात पायदान चढ़कर 93वें नंबर पर पहुंच गया है। ईआईयू की इंडस्ट्री डायरेक्टर एना निकोल्स के मुताबिक, एशिया के स्कोर में बढ़ोतरी का नतीजा यह है कि अब टॉप-20 में यूरोप के सात शहरों के साथ एशिया के नौ शहर शामिल हो गए हैं। वहीं, पश्चिमी यूरोप अभी भी रहने के लिहाज से सबसे मजबूत क्षेत्र बना हुआ है, हालांकि पिछले साल के मुकाबले इसका औसत स्कोर थोड़ा गिरकर 91.7 हो गया है।


    युद्ध की वजह से खाड़ी देशों को भारी नुकसान

    ईरान युद्ध के नतीजे खाड़ी (गल्फ) क्षेत्र के शहरों की रैंकिंग में साफ दिखाई दे रहे हैं, जहां स्थिरता स्कोर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मस्कट 14 पायदान गिरकर 123वें नंबर पर और कुवैत सिटी 12 स्थान खिसककर 105वें नंबर पर आ गया है। लिस्ट में सबसे नीचे सीरिया का दमिश्क शहर है, जो अभी भी दुनिया में रहने के लिहाज से सबसे खराब शहर माना गया है। इसके अलावा, युद्ध के कारण ईरान की राजधानी तेहरान खिसककर 164वें और यूक्रेन का कीव 166वें नंबर पर पहुंच गया है।

  • चीन के जिनजियांग शहर में जूतों की फैक्ट्री में लगी भीषण आग…..28 लोगों की मौत

    चीन के जिनजियांग शहर में जूतों की फैक्ट्री में लगी भीषण आग…..28 लोगों की मौत


    बीजिंग।
    चीन (China) के जिनजियांग शहर (Jinjiang City) में गुरुवार को जूतों की फैक्ट्री (Shoe factory) में भीषण आग लगने से 28 लोगों की मौत हो गई। स्थानीय अधिकारियों ने यह जानकारी दी। घटना के वीडियो में इमारत और उसके आसपास की आग की लपटें उठती हुई दिख रही हैं। आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय ने आग लगने के बाद बचाव और राहत कार्यों के लिए संयुक्त कार्य दल पूर्वी चीन (Eastern China) के फुजियान प्रांत (Fujian Province) के जिनजियांग शहर भेज दिए हैं।

    मंत्रालय ने बताया कि आग दोपहर करीब 12 बजे लगी। सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिकारियों को तलाश और बचाव अभियानों में हरसंभव प्रयास करने, घटना का कारण पता लगाने और जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया है।


    जिनपिंग ने दिए सख्त आदेश

    जिनपिंग ने घटना की तेजी से जांच करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने का आदेश दिया। शहर के फायर डिपार्टमेंट ने एक बयान में कहा कि आग जिनजियांग शहर में हुईटेंग शू कंपनी की एक फैक्ट्री में लगी, जिसे चीन की जूतों की राजधानी भी कहा जाता है। आग लगने का कारण तुरंत पता नहीं चला, और यह भी साफ नहीं है कि हाल के सालों में चीन में लगी सबसे जानलेवा आग में और लोग घायल हुए हैं या नहीं। लोकल मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि लोग छत पर फंस गए थे।


    हिरासत में फैक्ट्री का मालिक और इंचार्ज

    शिन्हुआ के अनुसार, फैक्ट्री के मालिक और दूसरे इंचार्ज को हिरासत में ले लिया गया है और कंपनी के अकाउंट फ्रीज कर दिए गए हैं। स्टेट ब्रॉडकास्टर CCTV के वीडियो में कई मंजिल वाली एक बिल्डिंग का अगला हिस्सा जला हुआ काला और सफेद धुएं से ढका हुआ दिख रहा है। पहले के फुटेज में दिख रहा है कि कई मंजिलों पर आग लगी हुई थी और बिल्डिंग घने काले धुएं से ढकी हुई थी।

    जब आग लगी, तब फैक्ट्री में 237 वर्कर और दो विजिटर थे। अधिकारियों ने 213 लोगों को निकाला या बचाया है। सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के मुताबिक, मरने वाले 28 लोगों में से दो को हॉस्पिटल ले जाने के बाद मृत घोषित कर दिया गया।


    जूते की राजधानी है जिनजियांग

    तटीय फुजियान प्रांत में जिनजियांग जूते और कपड़े बनाने का एक बड़ा हब है और इसे अक्सर चीन की जूते की राजधानी कहा जाता है। एक स्थानीय अधिकारी ने CCTV को बताया कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि आग फैक्ट्री के ग्राउंड फ्लोर पर लगी थी। अधिकारी ने कहा कि बिल्डिंग में रखा जूता बनाने का सामान बहुत ज्यादा आग पकड़ने वाला था और इससे आग तेजी से फैल सकती थी। वहां मौजूद सामान और चिपकने वाली चीजों की वजह से, मौके पर तेज गंध थी, जिससे आंखों में जलन हो रही थी। सरकारी ब्रॉडकास्टर ने फायरफाइटर्स के हवाले से बताया कि सीढ़ियों पर भी बहुत सारा सामान जमा हो गया था, जिससे बचाव और आग बुझाने के काम में रुकावट आ रही थी।

  • MP: BJP विधायक ने लिया ऐसा प्रण… जिसे सुन CM भी हैरान, बोले- अच्छे कार्य के लिए जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं

    MP: BJP विधायक ने लिया ऐसा प्रण… जिसे सुन CM भी हैरान, बोले- अच्छे कार्य के लिए जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं


    शाजापुर।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के कालापीपल (Kalapipal) से भाजपा विधायक घनश्याम चंद्रवंशी (BJP MLA Ghanshyam Chandravanshi) ने गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) के सामने एक ऐसा प्रण ले लिया, जिसे सुनकर सीएम भी हैरान रह गए। चंद्रवंशी ने अपने विधानसभा क्षेत्र की सड़कें बनने तक जूते-चप्पल नहीं पहनने की घोषणा कर दी, जिसके बाद मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि अच्छे कार्य के लिए जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं है, साथ ही विधायक की भाषा के लिए उन्हें एक हिदायत भी दी।

    कालापीपल में आयोजित किसान सम्मेलन के दौरान सीएम की मौजूदगी में विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र की सड़कों की खराब स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक क्षेत्र की सड़कें नहीं बनेंगी, तब तक वह जूते-चप्पल का त्याग करेंगे, चाहे इसमें दस वर्ष ही क्यों न लग जाएं।


    MLA ने लिया काम पूरा होने तक जूते-चप्पल नहीं पहनने का प्रण

    दरअसल कार्यक्रम के दौरान विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने सीएम से अपनी विधानसभा की 48 सड़कों के उन्नयन और 16 नई सड़कों की स्वीकृति समेत नए राजस्व भवन और अरनियाकला में आर्ट एंड साइंस खोलने की मांग रखी। इसी दौरान उन्होंने कहा कि, 16 सड़कें स्वीकृत नहीं हुईं या उनका निर्माण पूरा नहीं हुआ तो मैं जूते-चप्पल नहीं पहनूंगा।


    सीएम बोले- जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं

    विधायक की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंच से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य में पांच लाख किलोमीटर से ज्यादा सड़कों का निर्माण हुआ है और सरकार विकास कार्यों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि अच्छे और सच्चे कार्य के लिए संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विधायक को शब्दों के चयन में भी सावधानी बरतने की सलाह दी।


    सीएम बोले- 16 नहीं, हम 17 सड़कें देंगे, शब्दों का ध्यान रखें

    मुख्यमंत्री यादव ने विधायक को जवाब देते हुए कहा, ’16 नहीं, 17 सड़कें देंगे। हमारे जूते-चप्पल कांटों से बचाने और दौड़ लगाने के लिए हैं। विधायक जी को जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं है। अपनी बात और शब्दों का ध्यान रखना चाहिए। यह काम कांग्रेसियों के लिए रहने दो। सरकार अच्छे और सच्चे काम के लिए आपके साथ है।’


    सीएम ने दी 30.86 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा, ‘यह कागज मैंने ले लिया है। नाम नहीं पढ़ूंगा, लेकिन आपको बुलाकर सभी मांगें मंजूर कर रहा हूं। विकास के कामों में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी।’ इसके साथ ही सीएम ने 30.86 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया। इस दौरान उन्होंने 16 प्रमुख सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन के साथ ही सांसद की मांग पर रेलवे ओवर ब्रिज की भी घोषणा की।

    दरअसल ये पूरा वाकिया शाजापुर जिले के कालापीपल में आयोजित किसान सम्मेलन में नजर आया, जिसमें शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव पहुंचे थे। इस कार्यक्रम के दौरान प्रदेश सरकार में मंत्री इंदर सिंह परमार, सांसद महेंद्र सोलंकी और स्थानीय विधायक घनश्याम चंद्रवंशी समेत अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्यजन नागरिक भी उपस्थित रहे।

  • Ind vs Eng Test : लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर आज इतिहास रचने उतरेगी भारतीय महिला टीम

    Ind vs Eng Test : लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर आज इतिहास रचने उतरेगी भारतीय महिला टीम


    लंदन ।
    लॉर्ड्स (Lord’s) के ऐतिहासिक मैदान पर शुक्रवार से भारत और इंग्लैंड की महिला टीमों के बीच टेस्ट मुकाबला खेला जाएगा। भारत की कप्तान (India captain) हरमनप्रीत कौर (Harmanpreet Kaur) ने लॉर्ड्स (Lord’s) में इंग्लैंड (England) के खिलाफ होने वाले ऐतिहासिक महिला टेस्ट (Historic Women’s Test) को टीम के लिए टर्निंग प्वाइंट बताया है. उन्होंने कहा कि इस मुकाबले में जीत T20 वर्ल्ड कप से मिली निराशा को खत्म कर सकती है और टीम का आत्मविश्वास लौटाएगी. कप्तान ने पहली बार लॉर्ड्स में महिला टेस्ट होने, रेड-बॉल क्रिकेट, श्री चरणी और महिला टेस्ट के भविष्य पर भी खुलकर बात की।

    भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर का मानना है कि अगर भारत इस मुकाबले में जीत दर्ज करता है तो हालिया T20 वर्ल्ड कप में ग्रुप स्टेज से बाहर होने का दर्द काफी हद तक कम हो जाएगा और टीम नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेगी। हरमनप्रीत ने कहा कि T20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम अपनी क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी. कुछ मुकाबलों में टीम ने अच्छा खेल दिखाया, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में लगातार बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई. यही वजह है कि लॉर्ड्स टेस्ट टीम के लिए नई शुरुआत साबित हो सकता है।

    उन्होंने कहा- अगर हम यह टेस्ट जीतते हैं तो टीम के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी. वर्ल्ड कप के बाद हर खिलाड़ी निराश था, लेकिन इस टेस्ट के जरिए हम अपना आत्मविश्वास वापस हासिल कर सकते हैं. जीत के बाद आपको महसूस होता है कि आप दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में शामिल हैं।

    कप्तान ने कहा कि जब परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आते तो खिलाड़ियों का मनोबल गिरता है. ऐसे समय में टीम का एकजुट रहना सबसे ज्यादा जरूरी होता है. उन्होंने भरोसा जताया कि अगर सभी खिलाड़ी एक-दूसरे का साथ दें और टीम के लिए खेलें तो यह जीत आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में भी भारत के लिए फायदेमंद साबित होगी।


    142 साल बाद लॉर्ड्स में पहली बार महिला टेस्ट

    लॉर्ड्स में यह पहला महिला टेस्ट मैच होगा. इस ऐतिहासिक मौके पर हरमनप्रीत ने कहा कि हर क्रिकेटर का सपना होता है कि वह लॉर्ड्स में टेस्ट खेले. उन्हें यह जानकर भी हैरानी हुई कि इस प्रतिष्ठित मैदान पर अब तक महिला टेस्ट आयोजित नहीं हुआ था।

    उन्होंने कहा- जब हमें पता चला कि इतने साल बाद यहां पहला महिला टेस्ट होने जा रहा है तो हम सभी हैरान थे. मुझे पहले इसकी जानकारी नहीं थी. लेकिन मैं यही कहूंगी कि देर हुई है, बहुत ज्यादा देर नहीं हुई. मैं खुश हूं कि अपने करियर में मुझे इस ऐतिहासिक मैच का हिस्सा बनने का मौका मिला।

    उन्होंने बताया कि पूरी भारतीय टीम इस मुकाबले को लेकर बेहद उत्साहित है और सभी खिलाड़ी इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाना चाहते हैं।


    रेड-बॉल क्रिकेट चुनौती भी, मौका भी

    हरमनप्रीत ने माना कि महिला खिलाड़ियों को रेड-बॉल क्रिकेट खेलने के ज्यादा मौके नहीं मिलते, इसलिए यह फॉर्मेट चुनौतीपूर्ण जरूर है. हालांकि उन्होंने कहा कि टीम ने पिछले कुछ दिनों में कई प्रैक्ट‍िस सेशन किए हैं और खिलाड़ी अच्छी लय में नजर आए। उन्होंने कहा- हम रेड-बॉल क्रिकेट खेलने के आदी नहीं हैं, लेकिन जब किसी चीज को लेकर उत्साह होता है तो खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं.”


    ज्यादा महिला टेस्ट खेलने की जताई इच्छा

    भारतीय कप्तान ने महिला टेस्ट क्रिकेट के भविष्य पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि खिलाड़ी के तौर पर वह ज्यादा से ज्यादा टेस्ट मैच खेलना चाहती हैं, लेकिन इसका फैसला ICC और संबंधित क्रिकेट बोर्डों को करना है। हरमनप्रीत ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में महिला क्रिकेट लगातार आगे बढ़ा है. पिछले साल मार्च में भारत ने टेस्ट खेला था और अब लॉर्ड्स में एक और मौका मिला है. उन्हें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में महिला टेस्ट मैचों की संख्या और बढ़ेगी।


    इंग्लैंड के खिलाफ रिकॉर्ड से बढ़ा भरोसा

    हरमनप्रीत ने कहा कि भारत ने हाल के टेस्ट मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन किया है और इंग्लैंड के खिलाफ भी टीम का रिकॉर्ड मजबूत रहा है. ऐसे में खिलाड़ियों ने तय किया है कि वे एकजुट होकर मैदान पर उतरेंगे और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे.


    श्री चरणी पर कप्तान को पूरा भरोसा

    कप्तान ने बाएं हाथ की स्पिनर श्री चरणी की जमकर तारीफ की, जो लॉर्ड्स टेस्ट में डेब्यू करने जा रही हैं. T20 वर्ल्ड कप में भारत की सबसे सफल गेंदबाज रहीं चरणी को लेकर हरमनप्रीत ने कहा कि वह टीम की सबसे अहम गेंदबाजों में से एक हैं.

    उन्होंने कहा कि चरणी ने केवल वर्ल्ड कप ही नहीं, उससे पहले भी लगातार शानदार प्रदर्शन किया है. जब भी टीम को विकेट की जरूरत होती है, वह कप्तान की उम्मीदों पर खरी उतरती हैं. ऐसे खिलाड़ी कप्तान का आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं और टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाते हैं।

  • देशभर में सक्रिय हुआ मानसून…. दिल्ली-यूपी समेत 18 राज्यों में आज भारी बारिश का अलर्ट!

    देशभर में सक्रिय हुआ मानसून…. दिल्ली-यूपी समेत 18 राज्यों में आज भारी बारिश का अलर्ट!


    नई दिल्ली।
    देशभर में मानसून (Monsoon) अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और कई राज्यों में इसका असर लगातार तेज होता जा रहा है. इसी बीच मौसम विभाग ने 10 जुलाई के लिए दिल्ली (Delhi), उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सहित 18 राज्यों में भारी बारिश (Heavy rain), तेज आंधी और खराब मौसम को लेकर चेतावनी जारी की है. विभाग के अनुसार कुछ स्थानों पर हवा की रफ्तार 85 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. ऐसे में लोगों से गैर-जरूरी यात्रा से बचने और मौसम से जुड़ी आधिकारिक सलाह का पालन करने की अपील की गई है।

    मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले 48 घंटे के दौरान बारिश का दौर और तेज हो सकता है. दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी चलने की संभावना है. कई स्थानों पर जलभराव, यातायात प्रभावित होने और पेड़ गिरने जैसी घटनाएं भी सामने आ सकती हैं।


    पहाड़ी राज्यों में बढ़ सकता है खतरा

    हिमालयी राज्यों में लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन, चट्टानें गिरने और नदियों-नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है. पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है. प्रशासन भी संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए है.


    पूर्वी भारत में बिजली गिरने का खतरा

    पूर्वी भारत के कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है. मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है.


    देश के 18 राज्यों में बारिश और तेज आंधी का अलर्ट

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 10 जुलाई के लिए देश के 18 राज्यों में भारी बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी की है. प्रभावित राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय, महाराष्ट्र और केरल शामिल हैं. विभाग के अनुसार कई इलाकों में 80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. वहीं, कुछ राज्यों में बड़े आकार के ओले गिरने की भी आशंका जताई गई है।


    मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी

    समुद्र और नदी किनारे रहने वाले लोगों के साथ-साथ मछुआरों को भी सतर्क रहने को कहा गया है. विभाग ने खराब मौसम को देखते हुए समुद्र में नहीं जाने और नदी तटीय क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की सलाह जारी की है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. इसके साथ ही मानसून ट्रफ उत्तर-पश्चिम राजस्थान से उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है. यही प्रणाली कई राज्यों में लगातार बारिश और तेज हवाओं की वजह बन रही है।


    किन राज्यों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर?

    मौसम विभाग के अनुसार 10 जुलाई को दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत कुल 18 राज्यों में कहीं भारी तो कहीं बहुत भारी बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक का दौर देखने को मिल सकता है. कई जिलों के लिए अलग-अलग स्तर के अलर्ट भी जारी किए गए हैं. आगे हम राज्यवार और जिला स्तर पर जानेंगे कि 10 जुलाई को कहां सबसे ज्यादा बारिश की संभावना है, किन जिलों में तेज आंधी चल सकती है और किन इलाकों में लोगों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत होगी।