Author: bharati

  • UN: भारत की नई शिक्षा नीति के समावेशी शिक्षा मॉडल की वैश्विक स्तर पर सराहना

    UN: भारत की नई शिक्षा नीति के समावेशी शिक्षा मॉडल की वैश्विक स्तर पर सराहना


    जिनेवा।
    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) (United Nations Human Rights Council (UNHRC) के 61वें सत्र में भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 (National Education Policy (NEP) 2020 के समावेशी शिक्षा मॉडल की वैश्विक स्तर पर सराहना की गई है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय (Oxford University) के शोधार्थी जैन ह्यूबल ने जेनेवा में परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की यह नीति दिव्यांग बच्चों के अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।

    ह्यूबल ने रेखांकित किया कि पारंपरिक परीक्षा-केंद्रित प्रणाली के बजाय भारत अब कौशल और योग्यता आधारित शिक्षा पर जोर दे रहा है। उन्होंने विशेष रूप से अक्षर फाउंडेशन जैसे संगठनों के कार्यों का उल्लेख किया, जो सरकारी स्कूलों के साथ मिलकर दिव्यांग छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ रहे हैं।

    21 लाख विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को बनाया जा रहा सशक्त
    ह्यूबल के अनुसार सहायक तकनीकों और लचीले शिक्षण रास्तों के माध्यम से भारत के लगभग 21 लाख विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को सशक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से भारत के इस होलिस्टिक (समग्र) शिक्षा मॉडल को समर्थन देने की अपील की, जो न केवल साक्षरता बल्कि रोजगार और सामाजिक भागीदारी पर भी केंद्रित है।

    अब समझिए क्या है राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020?
    बता दें कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव लेकर आई है। यह नीति पारंपरिक परीक्षा-केंद्रित मॉडल से हटकर कौशल और योग्यता आधारित शिक्षा पर जोर देती है। एनईपी 2020 का लक्ष्य बच्चों के समान अवसर, समावेशी शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देना है। दिव्यांग छात्रों और पिछड़े क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान इसके मुख्य हिस्से हैं।

  • T20 World Cup: फाइनल में कल होगी IND-NZ की भिड़ंत, जानें कैसी रहेगी अहमदाबाद की पिच?

    T20 World Cup: फाइनल में कल होगी IND-NZ की भिड़ंत, जानें कैसी रहेगी अहमदाबाद की पिच?


    नई दिल्ली।
    इंडिया वर्सेस न्यूजीलैंड टी20 वर्ल्ड कप 2026 (India vs New Zealand T20 World Cup 2026) का फाइनल रविवार, 8 मार्च को अहमदाबाद (Ahmedabad) के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाना है। भारतीय टीम (Indian team) अपने खिताब का बचाव करने के लिए पूरी तरह तैयार है, हालांकि इस मैदान ने जो दुख दिए हैं उससे फैंस थोड़ा घबराए हुए हैं। 2023 वर्ल्ड कप से भारत आईसीसी इवेंट में कुल दो ही मुकाबले हारे हैं। एक ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2023 वर्ल्ड कप का फाइनल और एक 2026 टी20 वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका के खिलाफ सुपर-8 का मैच। दुखद: बात यह है कि यह दोनों ही मैच टीम इंडिया ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में ही हारे हैं। ICC इवेंट में यहां की पिच भारतीय खिलाड़ियों को सूट नहीं करती। ऐसे में IND vs NZ फाइनल में कैसी पिच का इस्तेमाल होगा ये देखने वाली बात है। क्या इस बार भी फैंस का दिल टूटेगा?


    IND vs NZ फाइनल में कैसी होगी नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच

    एक रिपोर्ट के अनुसार न्यूजीलैंड के खिलाफ ICC T20 वर्ल्ड कप के फाइनल मैच के लिए भारतीय टीम को नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मिक्स मिट्टी वाली पिच दी जाएगी। हालांकि इसमें काली मिट्टी के मुकाबले लाल मिट्टी ज्यादा है। लाल मिट्टी का ज्यादा प्रतिशत होने से गेंद दोनों इनिंग में बल्ले पर आसानी से आती है और अच्छा बाउंस भी मिलता है। यह वही पिच होगी जिस पर साउथ अफ्रीका ने अपने लीग गेम में कनाडा के खिलाफ खेला था और 5 विकेट पर 213 रन बनाए थे, जबकि कनाडा ने अपनी इनिंग 156/8 पर खत्म की थी।

    इस विकेट को चुनने का कारण, जिसमें काली मिट्टी के मुकाबले लाल मिट्टी ज्यादा है, यह है कि भारत का दो जरूरी मैच हारने का पिछला इतिहास रहा है। भारत 50 ओवर के 2023 वर्ल्ड कप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से काली मिट्टी वाली पिच पर हारा था, जिससे ट्रैक धीमा हो जाता है, जैसा कि 19 नवंबर, 2023 को भारतीय बल्लेबाजों को शुरू करने में संघर्ष करते हुए देखा गया था। पूरे देश में अभी भी दुख है।

    सूत्र ने बताया, “इंडियन टीम को फाइनल के लिए नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मिक्स-सॉइल पिच ऑफर की जाएगी। यह एक स्पोर्टिंग पिच होगी जहां कोई फालतू फायदा नहीं होगा। इस ट्रैक पर ज्यादा लाल मिट्टी होने का मतलब है कि कुछ बाउंस होगा और बैट्समैन को भी फायदा होगा।”


    लीग मैचों के दौरान पिच से खुश नहीं था भारत

    इंडिया का टीम मैनेजमेंट लीग गेम्स के दौरान ऑफर की गई कुछ पिचों से खुश नहीं था। उन्होंने लोकल क्यूरेटर के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। यही एक वजह थी कि इंडियन बोर्ड ने पिच तैयार करने के बारे में लोकल क्यूरेटर से बात करने के लिए अपने स्टाफ को भेजने का फैसला किया था।

  • नेपाल में बड़े राजनीतिक उलटफेर की आहट, चुनाव नतीजों से पहले सबकी धड़कनें तेज, PM की रेस में बालेन शाह….

    नेपाल में बड़े राजनीतिक उलटफेर की आहट, चुनाव नतीजों से पहले सबकी धड़कनें तेज, PM की रेस में बालेन शाह….


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) चुनाव के नतीजे (Election Results) आने से पहले सबकी धड़कनें तेज हैं. जारी मतगणना से साफ है कि वहां राजनीति में बड़ा उलटफेर (Big Political Ppheaval) दहलीज पर है. 5 मार्च को हुए चुनाव में काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन्द्र (बालेन) शाह (Balendra (Balen) Shah) की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) भारी बढ़त के साथ आगे चल रही है. वहीं पारंपरिक दलों को करारी हार का सामना करना पड़ रहा है।

    ताजा रुझानों के मुताबिक, 275 सदस्यीय संसद के लिए हुए चुनाव में प्रत्यक्ष चुनाव की 165 सीटों में से शुक्रवार देर रात तक RSP 117 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. इससे बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनना लगभग तय है. जहां RSP प्रचंड बहुमत की ओर आगे बढ़ रही है, वहीं नेपाल के पारंपरिक दल जैसे- नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल को जनता ने पूरी तरह से हाशिए पर डाल दिया है.

    117 सीटों पर RSP आगे है तो दूसरे नंबर पर नेपाली कांग्रेस सिर्फ 15 सीटों पर और के पी ओली के नेतृत्व में रहे यूएमएल सिर्फ 13 सीटों पर जीत के लिए संघर्ष कर रहे हैं. वहीं, पुष्प कमल दहाल प्रचंड के नेतृत्व वाली पार्टी की हालत इनसे भी बदतर हैं।


    बालेन शाह को Gen-Z का सपोर्ट, ओली बुरी तरह हार रहे

    विश्लेषकों का कहना है कि युवाओं और “Gen-Z” मतदाताओं का भारी समर्थन बालेन शाह की जीत का सबसे बड़ा कारण बना है, जिसने दशकों से सत्ता में रहे पारंपरिक दलों की पकड़ को कमजोर कर दिया है।

    पूर्व प्रधानमंत्री के पी ओली अपने निर्वाचन क्षेत्र से बुरी तरह से पिछड़ गए हैं. झापा जिले के जिस संसदीय क्षेत्र से एक बार छोड़कर वो लगातार सात बार चुनाव जीतते आए थे आज उसी निर्वाचन क्षेत्र से बालेन शाह उनको पटखनी देने वाले हैं। देर रात तक चल रहे मतगणना में जहां बालेन को करीब 17 हजार वोट मिल चुके थे, वहीं ओली को सिर्फ 4 हजार वोट ही मिल पाए. यानी ओली अभी बालेन से 13 हजार वोट से पीछे चल रहे हैं।

    सिर्फ ओली ही नहीं उनकी पार्टी के एक भी पदाधिकारी या उनकी सरकार के एक भी मंत्री मतगणना में आगे नहीं है. पार्टी के सभी दिग्गज चुनाव में हार की कगार पर हैं. उधर नेपाली कांग्रेस का भी कुछ यही हाल है. इस पार्टी के अध्यक्ष गगन थापा भी अपने निकटतम प्रतिद्वंदी से पीछे चल रहे हैं जबकि पार्टी के कई दिग्गज चुनाव हार चुके हैं।


    उलटफेर के तीन बड़े कारण

    – भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता से जनता की नाराजगी
    – युवा मतदाताओं का ओली सहित पुराने नेताओं से नफरत
    – बालेन शाह का नई राजनीति का वादा करना

    नेपाल में कुल 1 करोड़ 89 लाख मतदाता हैं. कुल 275 सीटों के लिए मतदान हुआ. First Past The Post (FPTP) या प्रत्यक्ष मतदान की 165 सीटों में ही RSP को दो तिहाई का बहुमत मिलता दिख रहा है. वहीं, Proportional Representation (PR) या समानुपातिक सिस्टम की 110 सीटों के लिए गिनती जारी है जिसका परिणाम आखिर में बताया जाएगा. प्रत्यक्ष में RSP के पक्ष में सुनामी को देखते हुए इस पार्टी को समानुपातिक में भी 50 से ज्यादा सीट मिलने की उम्मीद है. यानि नेपाल के इतिहास में 36 सालों के बाद किसी एक पार्टी को न सिर्फ पूर्ण बहुमत बल्कि प्रचंड बहुमत मिलेगा. लोगों को राजनीतिक स्थायित्व की उम्मीद है और इस सरकार से अपेक्षा भी बहुत है।

  • पश्चिम बंगाल: चुनाव से पहले TMC और EC में बढ़ा टकराव, धरने पर बैठी CM ममता…टेंट में गुजारी रात

    पश्चिम बंगाल: चुनाव से पहले TMC और EC में बढ़ा टकराव, धरने पर बैठी CM ममता…टेंट में गुजारी रात


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) ने शुक्रवार को एसआईआर (SIR) के बाद राज्य की मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में सेंट्रल कोलकाता में धरना शुरू कर दिया. जिससे विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) से कुछ सप्ताह पहले टीएमसी और चुनाव आयोग के बीच टकराव और बढ़ गया है. उन्होंने नाटकीय रूप से सड़क की राजनीति में वापसी की है, इस स्ट्रीट पॉलिटिक्स के दम पर ही ममता ने राजनीति में अपनी पहचान बनाई थी।

    धरना शुरू करते हुए, बनर्जी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर ‘बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने’ की साजिश रचने का आरोप लगाया। टीएमसी सुप्रीमो ने विरोध प्रदर्शन की शुरुआत में कहा, ‘मैं बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के बीजेपी-चुनाव आयोग के षड्यंत्र का पर्दाफाश करूंगी।

    पहले दिन का धरना दोपहर करीब 2.15 बजे शुरू हुआ था. शुक्रवार रात को भी ममता बनर्जी टेंट में ही रहीं. उन्होंने बाकी नेताओं को घर भेज दिया था. प्रोटेस्ट शनिवार को दोबारा शुरू होगा। ममता के इस धरने की अपडेट्स देते हुए डेरेक ओ ब्रायन (TMC के राज्यसभा सांसद) ने लिखा, ‘ममता बनर्जी के नेतृत्व में चल रहे धरने का पहला दिन (शुक्रवार) खत्म हो गया है. हमारी नेता ने हम सभी को घर पर जाकर आराम करने के लिए कहा है. रात में, वह सेंट्रल कोलकाता में धरना स्थल पर सड़क पर एक टेंट में रहेंगी. दीदी तो दीदी हैं.’


    बंगाल SIR में कितने नाम कटे

    28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से लगभग 63.66 लाख नाम, यानी मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत, हटा दिए गए हैं, जिससे मतदाता आधार लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ से थोड़ा अधिक रह गया है. इसके अतिरिक्त, 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘न्यायिक जांच के अधीन’ श्रेणी में रखा गया है, जिसका मतलब है कि आने वाले हफ्तों में कानूनी जांच के माध्यम से उनकी पात्रता का फैसला किया जाएगा.

    टीएमसी ने आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इससे 1.2 करोड़ से अधिक मतदाता प्रभावित हो सकते हैं, इस आरोप को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है. धरने के दौरान बनर्जी ने दावा किया, ‘कई लोगों को मृत घोषित कर दिया गया है, लेकिन वे जिंदा हैं. मैं उन्हें मंच पर लाऊंगी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि विरोध प्रदर्शन कब तक चलेगा, जबकि यह चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के राज्य के प्रस्तावित दौरे से ठीक दो दिन पहले हो रहा है।


    ममता की जन-योद्धा वाली छवि

    कोलकाता के मेट्रो चैनल एरिया में हो रहा ये धरना ममता बनर्जी की आंदोलनकारी राजनीति के लिए गहरा राजनीतिक प्रतीक है. मुख्यमंत्री बनने से बहुत पहले, सेंट्रल कोलकाता के फुटपाथ वे मंच थे जहां उन्होंने तत्कालीन प्रभावशाली वाम मोर्चे के खिलाफ एक जन-योद्धा के रूप में अपनी छवि बनाई थी।

    फिर 4 दिसंबर, 2006 को उन्होंने टाटा मोटर्स परियोजना के लिए सिंगूर में कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध में उसी स्थान पर 26 दिनों की भूख हड़ताल शुरू की, जिससे आंदोलन एक राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बन गया जिसने आखिरकार टीएमसी को 2011 के विधानसभा चुनावों में वाम मोर्चा को सत्ता से बेदखल करने में मदद की, जिससे उसका 34 साल का शासन समाप्त हो गया।

    मुख्यमंत्री बनने के बाद भी, बनर्जी समय-समय पर आंदोलन की राजनीति में लौटती रही हैं, विशेष रूप से फरवरी 2019 में, जब उन्होंने केंद्र पर संघवाद को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए धरना दिया था, जब सीबीआई ने शारदा चिट फंड जांच में तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ करने की कोशिश की थी।

  • मिडिल ईस्ट तनाव में रूस की एंट्री! ईरान को दी अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी

    मिडिल ईस्ट तनाव में रूस की एंट्री! ईरान को दी अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच रूस अब खुलकर ईरान के समर्थन में सामने आता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने ईरान को ऐसी खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई है, जिससे उसे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, युद्धपोतों और विमानों को निशाना बनाने में मदद मिल सकती है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार, दो अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि रूस ने तेहरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और संपत्तियों से जुड़ी अहम जानकारी साझा की है। इससे ईरान को अमेरिका की सैन्य तैनाती को समझने और संभावित हमले की रणनीति बनाने में मदद मिल सकती है। माना जा रहा है कि यह पहला संकेत है कि मॉस्को उस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने की कोशिश कर रहा है, जिसे अमेरिका और इजरायल ने हाल ही में ईरान के खिलाफ शुरू किया है।

    दरअसल, रूस और ईरान के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में और मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को मिसाइलों और ड्रोन की जरूरत पड़ी, जिसके चलते दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ा। वहीं ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हिज्बुल्लाह, हमास और हूती जैसे समूहों के समर्थन के कारण लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है, ऐसे में रूस का समर्थन उसके लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

    पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति से की बातचीत
    इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत भी की। इस दौरान उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और हमलों में आम नागरिकों की जान जाने पर दुख जताया। युद्ध शुरू होने के बाद क्रेमलिन की ओर से ईरान को किया गया यह पहला आधिकारिक फोन कॉल था।

    पुतिन ने बातचीत में तनाव खत्म करने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट से जुड़े मुद्दों को सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

    अमेरिका की प्रतिक्रिया
    रूस द्वारा ईरान को खुफिया जानकारी दिए जाने की खबरों पर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इससे उनके सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन जारी रहेंगे और अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल किया जाएगा।

    ईरान के लगातार हमले
    वहीं, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और इजरायल जहां ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और मिडिल ईस्ट के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अब तक इजरायल समेत करीब 12 देशों में सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इनमें यूएई, कतर, बहरीन, जॉर्डन, इराक, कुवैत, ओमान, सऊदी अरब, साइप्रस, सीरिया और अजरबैजान शामिल हैं। इन हमलों में ईरान ने खोर्रमशहर-4, खेबर और फतेह जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। यह भी बताया जा रहा है कि इजरायल पर दागी गई कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों में क्लस्टर बम लगे थे।

    हालांकि, अब बड़ा सवाल यह है कि बढ़ते दबाव और हमलों के बीच ईरान अपने रुख में नरमी दिखाएगा या टकराव और बढ़ेगा। फिलहाल ईरान के रुख से ऐसा संकेत नहीं मिल रहा कि वह पीछे हटने को तैयार है।

  • तपने लगा मध्‍य प्रदेश, इंदौर में पारा 36 डिग्री पार, भोपाल-ग्वालियर में 35 डिग्री से ज्यादा

    तपने लगा मध्‍य प्रदेश, इंदौर में पारा 36 डिग्री पार, भोपाल-ग्वालियर में 35 डिग्री से ज्यादा



    भोपाल। मध्य प्रदेश में मार्च की शुरुआत से ही गर्मी का असर तेज होता दिखाई दे रहा है। आमतौर पर प्रदेश में 15 मार्च के बाद तापमान तेजी से बढ़ता है, लेकिन इस बार ट्रेंड बदल गया है और महीने के शुरुआती दिनों में ही पारा चढ़ने लगा है। सागर और ग्वालियर-चंबल संभाग के बाद अब इंदौर और उज्जैन क्षेत्र में भी गर्मी का प्रभाव बढ़ गया है।

    इंदौर में अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। वहीं भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। शुक्रवार को नर्मदापुरम प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा धार, दमोह, सागर, शाजापुर, गुना, छतरपुर, रतलाम और टीकमगढ़ में भी तापमान 36 डिग्री या उससे अधिक रहा। रात का तापमान भी 18 डिग्री से ऊपर बना हुआ है।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के पूर्वी हिस्से से एक टर्फ गुजर रही है और साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी सक्रिय है, लेकिन इसका प्रदेश के मौसम पर ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है। आसमान साफ होने के कारण सूरज की तेज किरणें सीधे जमीन पर पड़ रही हैं, जिससे गर्मी का असर बढ़ गया है।

    मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो दिनों में प्रदेश के अधिकतम तापमान में करीब 4 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में संभावना है कि मार्च के पहले पखवाड़े में ही कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए। विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल अप्रैल और मई में हीट वेव यानी लू चलने की संभावना है, जो करीब 15 से 20 दिनों तक रह सकती है। हालांकि मार्च में फिलहाल लू चलने का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    तेज धूप को देखते हुए विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर के समय करीब तीन घंटे तक धूप से बचकर छांव में रहने की कोशिश करें।

  • भेदभाव-स्वार्थ त्यागकर देश के लिए समर्पित हों, तभी भारत संपूर्ण मानवता को शांति-समृद्धि का मार्ग दिखाएगाः मोहन भागवत

    भेदभाव-स्वार्थ त्यागकर देश के लिए समर्पित हों, तभी भारत संपूर्ण मानवता को शांति-समृद्धि का मार्ग दिखाएगाः मोहन भागवत


    जैसलमेर ।
    राजस्थान के जैसलमेर में दादा गुरुदेव आचार्य श्री जिनदत्त सूरी के 871वें चादर महोत्सव के अवसर पर सामाजिक समरसता का अनुपम दृश्य देखने को मिला। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जैन और सनातन परंपरा के संतों सहित समाज के सभी वर्गों के लोगों का संगम हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत भी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम पूर्णतः समरसता और सामाजिक एकता के भाव पर आधारित था, जिसमें गच्छाधिपति जिनमणिप्रभ सागर के नेतृत्व में धर्म, तीर्थ एवं संस्कृति की रक्षा का संकल्प दोहराया गया।

    इस अवसर पर डॉ. भागवत ने समाज से केवल उपदेशों तक सीमित न रहकर आचरण में परिवर्तन लाने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से कहा कि अपने मित्रों और परिचितों के दायरे में विभिन्न जातियों, पंथों, भाषाओं और प्रदेशों के लोगों को शामिल करें। जब हम सुख-दुख, खान-पान और सामाजिक जीवन साझा करेंगे, तभी वास्तविक सामाजिक शक्ति प्रकट होगी।

    डॉ. भागवत ने भारतीय संस्कृति की चिरंतनता, विविधता में एकता और सामाजिक समरसता पर प्रकाश डाला। उन्होंने दादा गुरुदेव आचार्य जिन दत्त सूरी की 871 वर्ष पुरानी चादर को भारत की सनातन संस्कृति की जीवटता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह चादर उस सत्य का प्रतीक है जिसे न अग्नि जला सकती है, न शस्त्र काट सकते हैं और न ही जल भिगो सकता है। यह हमारे पूर्वजों द्वारा पहचाने गए उस शाश्वत सत्य का प्रमाण है जो सर्वत्र विद्यमान है। उन्होंने सभी को यह संकल्प दिलाया कि यदि हम आपसी भेदभाव और स्वार्थ को त्यागकर देश के लिए समर्पित हो जाएं, तो भारत न केवल परम वैभव संपन्न राष्ट्र बनेगा बल्कि एक विश्वगुरु के रूप में संपूर्ण मानवता को शांति और समृद्धि का मार्ग दिखाएगा।

    डॉ. भागवत ने जैन दर्शन के अनेकांतवाद सिद्धांत की सराहना करते हुए कहा कि सत्य इतना व्यापक है कि उस तक पहुंचने के मार्ग अलग-अलग होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि विविधता वास्तव में एकता का शृंगार और उत्सव है, न कि विभाजन का कारण।

    अपने भाषण में उन्होंने एक रेल यात्रा की मार्मिक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि समाज में झगड़े और संघर्ष इसलिए होते हैं क्योंकि लोग एक-दूसरे को पहचान नहीं पाते और अपने एकत्व के भाव को भूल जाते हैं। जब मनुष्य यह समझ जाता है कि हम सब एक ही चेतना के अंश हैं, तब स्वार्थ और भेदभाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि लीग ऑफ नेशंस और संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी वैश्विक संस्थाएं युद्धों को नहीं रोक सकतीं। इसके लिए मानव के भीतर करुणा और एकात्मता का भाव होना आवश्यक है।

    इस अवसर पर गच्छाधिपति जिन मणिप्रभसागर महाराज ने कहा कि समरसता ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। भारत का ध्वज पूरे विश्व में सम्मानपूर्वक लहराने के लिए सभी संप्रदायों के संतों को एकता और अहिंसा का मार्ग अपनाना होगा। उन्होंने भगवान महावीर और भगवान राम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में जातिवाद और छुआछूत का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने युवाओं को सही दिशा देने और समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर संघ और समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान चादर महोत्सव की स्मृति में डाक टिकट, विशेष सिक्के और दादा गुरुदेव पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन किया गया। महोत्सव समिति के अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, संयोजक तेजराज गुलेचा तथा पद्म भूषण डॉ. डीआर मेहता सहित अनेक समाजसेवियों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर

    देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया संकट के बीच स्वर्ण भंडार में तेज उछाल से देश का विदेशी मुद्रा भंडार 27 फरवरी को समाप्त हफ्ते में 4.885 अरब डॉलर बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में बताया कि इससे पिछले हफ्ते में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 2.11 अरब डॉलर घटकर 723.60 अरब डॉलर रहा था। इससे पहले इस वर्ष 13 फरवरी को समाप्त हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 725.72 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था।

    आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 27 फरवरी को समाप्त हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम घटक माने जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 56.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 573.12 अरब डॉलर हो गईं। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान स्वर्ण भंडार का मूल्य 4.14 अरब डॉलर बढ़कर 131.63 अरब डॉलर हो गया।

    केंद्रीय बैंक के अनुसार इस अवधि में विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 2.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.87 अरब डॉलर हो गया। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित भंडार भी 15.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.87 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

  • जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को मिला एरोड्रम लाइसेंस

    जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को मिला एरोड्रम लाइसेंस


    नई दिल्ली/नोएडा ।
    उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (एनआईए) के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएपीएल) को एयरोड्रोम लाइसेंस मिल गया है। जेवर एयरपोर्ट को इसका लंबे समय से इंतजार था।

    नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में बताया कि विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के जेवर में स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को एयरोड्रोम लाइसेंस दे दिया है। इससे पहले जेवर एयरपोर्ट को सिक्योरिटी क्लीयरेंस भी मिल चुका है।

    मंत्रालय के मुताबिक इस एयरपोर्ट को ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी कंपनी वाईआईएपीएल ने उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ सरकारी निजी कंपनी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया है। इसका कंसेशन पीरियड 1 अक्टूबर, 2021 को 40 साल के लिए शुरू हुआ।

    मंत्रालय के मुताबिक इस एयरपोर्ट को हर मौसम में ऑपरेशन के लिए पब्लिक यूज़ कैटेगरी के तहत लाइसेंस मिला है। इसमें 10/28 ओरिएंटेशन वाला रनवे है। इसका डाइमेंशन 3,900 m×45 m है, जिसे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और एरोनॉटिकल ग्राउंड लाइटिंग (एजीएल) सिस्टम से सपोर्ट मिलता है, जिससे इसका 24×7 ऑपरेशन हो सकता हैं। एयरोड्रम में 24 कोड C और 02 कोड D/F एयरक्राफ्ट के लिए पार्किंग स्टैंड हैं। यह एआरएफएफ कैटेगरी 9 सुविधाओं से पूरी तरह लैस है, जो बोइंग 777-300ER जैसे वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट को हैंडल कर सकती हैं।

    उल्लेखनीय है कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (एनआईए) को जेवर एयरपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है। सरकार का लक्ष्य इसको देश के सबसे आधुनिक और बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करना है। इस एयरपोर्ट को मल्टी-मॉडल कार्गो हब के साथ 4 फेज में डेवलप किया जा रहा है। इसमें पहले फेज में एक रनवे और एक टर्मिनल डेवलप होगा। इससे एयरपोर्ट की कैपेसिटी हर साल लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को हैंडल करने की होगी। इसके सभी फेज पूरे होने के बाद इस एयरपोर्ट पर हर साल 7 करोड़ यात्री आ सकेंगे, जो दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी के लिए एक बड़ा एविएशन हब बन जाएगा।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि जल्द ही एयरपोर्ट का उद्घाटन होगा। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इसके उद्घाटन करने का अनुरोध कर उद्घाटन कार्यक्रम की तिथि निश्चित की जाएगी।

    उन्होंने बताया कि यहां से एयर इंडिया, आकाशा और इंडिगो ने अपने विमानों को उड़ान भरने के लिए समझौता किया है। एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद इन एयरलाइंस कंपनियां यहां पर अपना स्टाफ की नियुक्तियां और अन्य तकनीकी सुविधाओं को लगाना शुरू कर देंगे। एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए पहले से ही सीआईएसएफ और यूपी पुलिस तैनात है। एयरपोर्ट से अच्छी कनेक्टिविटी देने के लिए विभिन्न मार्गों और साधनों पर कार्य हो रहा है। इसके शुरू होने से उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। साथ ही हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    उन्होंने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कई चरणों में विकसित किया जा रहा है। पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद यह देश ही नहीं एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल हो जाएगा। इसकी क्षमता प्रतिवर्ष करोड़ों यात्रियों को संभालने की होगी और यह उत्तर प्रदेश को वैश्विक एविएशन नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • तकनीकी खराबी के कारण ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस लावान’ को कोच्चि में दी गई डॉकिंग की अनुमति

    तकनीकी खराबी के कारण ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस लावान’ को कोच्चि में दी गई डॉकिंग की अनुमति


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार ने श्रीलंका के दक्षिण में हुए ‘आईआरआईएस डेना’ से जुड़े घटनाक्रम से कुछ दिन पहले ईरान ने अपने एक अन्य युद्धपोत आईआरआईएस लावान को भारत में शरण देने का अनुरोध किया था।

    भारत सरकार के सूत्रों के अनुसार, ईरान ने 28 फरवरी को भारत से संपर्क कर अपने नौसैनिक पोत आईआरआईएस लावान को कोच्चि बंदरगाह पर डॉकिंग की अनुमति देने का आग्रह किया था। उस समय यह पोत अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में भाग लेने के लिए क्षेत्र में मौजूद था, लेकिन इसमें तकनीकी खराबी आ जाने के कारण तत्काल डॉकिंग की आवश्यकता बताई गई थी। भारत सरकार ने इस अनुरोध पर विचार करने के बाद 1 मार्च को जहाज को कोच्चि में डॉकिंग की अनुमति प्रदान कर दी। इसके बाद ईरानी युद्धपोत 4 मार्च को केरल के कोच्चि स्थित बंदरगाह पर पहुंचकर सुरक्षित रूप से डॉक हो गया।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जहाज के तकनीकी मुद्दों के समाधान तक उसके चालक दल के 183 सदस्यों को कोच्चि स्थित भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है। वहां उन्हें आवश्यक सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सूत्रों ने कहा कि यह कदम मानवीय आधार और समुद्री परंपराओं के अनुरूप उठाया गया है, जिसके तहत किसी भी जहाज को तकनीकी समस्या या आपात स्थिति में सुरक्षित बंदरगाह उपलब्ध कराना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग का हिस्सा माना जाता है।

    गौरतलब है कि यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में ईरानी नौसैनिक जहाज आईआरआईएस डेना से जुड़ी घटना को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि कोच्चि में आईआरआईएस लावान की डॉकिंग केवल तकनीकी समस्या के कारण की गई है और यह नियमित समुद्री सहायता की प्रक्रिया के तहत हुई है।

    सूत्रों ने यह भी बताया कि जहाज की मरम्मत और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद उसके आगे के कार्यक्रम के बारे में निर्णय लिया जाएगा।सूत्रों ने बताया कि ईरान ने 28 फरवरी 2026 को भारत से संपर्क कर अपने नौसैनिक पोत आईआरआईएस लावान को कोच्चि बंदरगाह पर डॉकिंग की अनुमति देने का आग्रह किया था। उस समय यह पोत अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में भाग लेने के लिए क्षेत्र में मौजूद था, लेकिन इसमें तकनीकी खराबी आ जाने के कारण तत्काल डॉकिंग की आवश्यकता बताई गई थी।

    भारत सरकार ने इस अनुरोध पर विचार करने के बाद 1 मार्च को जहाज को कोच्चि में डॉकिंग की अनुमति प्रदान कर दी। इसके बाद ईरानी युद्धपोत 4 मार्च को केरल के कोच्चि स्थित बंदरगाह पर पहुंचकर सुरक्षित रूप से डॉक हो गया।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जहाज के तकनीकी मुद्दों के समाधान तक उसके चालक दल के 183 सदस्यों को कोच्चि स्थित भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है। वहां उन्हें आवश्यक सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सूत्रों ने कहा कि यह कदम मानवीय आधार और समुद्री परंपराओं के अनुरूप उठाया गया है, जिसके तहत किसी भी जहाज को तकनीकी समस्या या आपात स्थिति में सुरक्षित बंदरगाह उपलब्ध कराना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग का हिस्सा माना जाता है।

    गौरतलब है कि यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में ईरानी नौसैनिक जहाज आईआरआईएस डेना से जुड़ी घटना को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि कोच्चि में आईआरआईएस लावान की डॉकिंग केवल तकनीकी समस्या के कारण की गई है और यह नियमित समुद्री सहायता की प्रक्रिया के तहत हुई है। सूत्रों ने यह भी बताया कि जहाज की मरम्मत और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद उसके आगे के कार्यक्रम के बारे में निर्णय लिया जाएगा।