Author: bharati

  • उज्जैन में चोरी का बड़ा हमला: RSS पदाधिकारी पर हमला, आंख में गंभीर चोट, चेन्नई में मिलेगा इलाज

    उज्जैन में चोरी का बड़ा हमला: RSS पदाधिकारी पर हमला, आंख में गंभीर चोट, चेन्नई में मिलेगा इलाज



    उज्जैन उज्जैन के देवास रोड स्थित पार्श्वनाथ कॉलोनी में 18 फरवरी की रात लगभग 2 बजे चोरी की नीयत से घुसे छह बदमाशों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पदाधिकारी अर्जुन सिंह पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। बताया गया कि हमलावरों ने उनके चेहरे पर हथियार से वार किया, जिससे उनकी आंख में गंभीर चोट आई। गंभीर स्थिति को देखते हुए उनका ऑपरेशन इंदौर के अस्पताल में किया गया और आगे के बेहतर इलाज के लिए उन्हें चेन्नई रेफर कर दिया गया।

    घटना के दौरान मकान मालिक मनोहर सिंह बाहर गए हुए थे और कॉलोनी निवासी अभिलाष जैन ने बताया कि संदिग्ध आवाज सुनकर आसपास के लोग जाग गए। अर्जुन सिंह मौके पर पहुंचे और बदमाशों को ललकारा, जिससे गुस्साए आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया। यह वही मकान है जिसे 2023 में भी चोरों ने निशाना बनाया था।

    पुलिस ने घटना की सूचना मिलते ही नागझिरी थाना क्षेत्र में जाकर आसपास के सीसीटीवी फुटेज जुटाए और मामले की जांच शुरू की। घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें बदमाश सामान उठाते दिख रहे हैं। शनिवार को कॉलोनीवासी एसपी प्रदीप शर्मा से मिले और सुरक्षा बढ़ाने की मांग की। एसपी ने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए और भरोसा दिलाया कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने रहवासियों को निजी सुरक्षा गार्ड बढ़ाने की सलाह दी।

    घटना ने उज्जैन की पार्श्वनाथ कॉलोनी में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है और आरोपियों की पहचान के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।

  • तेहरान समेत कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा

    तेहरान समेत कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा


    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय माहौल आज 28 फरवरी 2026 को अचानक तनावपूर्ण हो गया है जब Israel ने Iran पर एक बड़ा सैन्य हमला शुरू कर दिया। इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने बताया कि यह हमला पहले से किया गया हमला प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक था जिसका उद्देश्य देश पर संभावित खतरे को दूर करना है। इस कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति अत्यधिक नाजुक हो गई है। इजरायल ने देश भर में विशेष और स्थायी आपातकाल लागू कर दिया है और नागरिकों से सतर्क रहने को कहा है क्योंकि संभावित मिसाइलों या जवाबी हमलों का खतरा बना हुआ है।

    तेहरान में जोरदार धमाके राजधानी में तनाव फैल गया
    ईरान की राजधानी तेहरान के केंद्र में आज सुबह कई धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं और धुएं का गुबार भी उठता देखा गया। ईरानी मीडिया के अनुसार राजधानी के रिपब्लिक और यूनिवर्सिटी स्ट्रीट जैसे इलाकों में मिसाइलें गिरीं जिससे इलाके में भारी तनाव का माहौल बन गया है। स्थानीय प्रशासन ने सक्रिय सुरक्षा बलों को मौके पर भेज दिया है लेकिन फिलहाल किसी नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटनास्थल से धुएं के काले बादल उठते हुए देखे गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की चेतावनी जारी की गई है। इस हमले की पृष्ठभूमि और विस्तृत रणनीतिक वजहों पर अभी तक पूर्ण जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन यह घटना क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।

    क्या है इस हमले के पीछे कारण? ईरान-इजरायल तनाव की पृष्ठभूमि

    विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला उन वर्षों से चल रहे तनावों का नवीनतम चरण है जिसमें इजरायल और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम बैलिस्टिक मिसाइल विकास और सैन्य विवाद शामिल रहे हैं। इजरायल लगातार चेतावनी देता रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमताएं उसके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। पिछले साल दोनों देशों के बीच हवाई संघर्ष और मिसाइल दागे जाने जैसे कई घटनाक्रम भी सामने आ चुके हैं। ऐसे में आज का हमला इसी तनाव की परिणति भी माना जा रहा है।

    आपातकाल के बीच कैसा माहौल? नागरिकों के लिए क्या किया गया ऐलान
    इजरायल में आपातकाल के लागू होने के बाद वहां के नागरिकों को संभावित मिसाइल हमलों से निपटने के लिए चेतावनी जारी की गई है। सेना ने एयर राइड सायरन बजाने के साथ सुरक्षा आश्रयों के पास रहने की सलाह दी है और लोगों से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने को कहा गया है। वहीं ईरान ने भी अपनी एयर स्पेस बंद कर दी है और सुरक्षा बलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है जिससे आसपास के देशों की सुरक्षा नीति पर भी प्रभाव दिख सकता है।

  • दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से बैठक: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बजट और प्रशासनिक मुद्दों पर जताई कड़ी अपील

    दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से बैठक: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बजट और प्रशासनिक मुद्दों पर जताई कड़ी अपील

    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, जिसमें दोनों ने राजनीतिक और प्रशासनिक मामलों पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में राज्य सरकार के बजट संबंधी बकाया राशि को समय पर जारी करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। चालू वित्त वर्ष में केंद्र से प्रदेश को कुल 44,000 करोड़ रुपए मिलने हैं, लेकिन जनवरी तक मात्र 9,500 करोड़ रुपए ही जारी किए जा सके हैं। इसी मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्रियों से आग्रह किया कि बची हुई राशि 31 मार्च से पहले राज्य सरकार को उपलब्ध कराई जाए, ताकि प्रदेश में विकास कार्य और योजनाएं समय पर पूरी हो सकें।

    इसके अलावा मुख्यमंत्री ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से सौजन्य भेंट की। इस दौरान प्रदेश में संगठनात्मक सुधार और आगामी नियुक्तियों पर चर्चा हुई। इसी क्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी दिल्ली में मुलाकात की। इस बैठक में नर्मदा परियोजना के वैज्ञानिक अध्ययन और बलिदानी वीरनारी कार्यक्रम के संबंध में भी चर्चा की गई।

    मुख्यमंत्री का यह दिल्ली दौरा वित्तीय और प्रशासनिक मामलों के साथ-साथ संगठनात्मक सुधार और प्रदेश के विकास लक्ष्यों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्रियों और अन्य अधिकारियों से संवाद के जरिए प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बकाया राशि समय पर मिले और विकास योजनाएं बाधा रहित ढंग से लागू हो सकें। इस दौरे में प्रशासनिक मामलों, बजट वितरण और संगठनात्मक स्थिरता के मुद्दों पर फोकस किया गया।

  • इजरायल के सामने कितनी देर तक टिक सकता है ईरान, देखें दोनों की मिलिट्री पावर

    इजरायल के सामने कितनी देर तक टिक सकता है ईरान, देखें दोनों की मिलिट्री पावर


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव का माहौल बन गया है. आज यानी शनिवार को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान की राजधानी तेहरान पर हमले किए. इसके बाद पूरे इलाके में हालात तेजी से बदल गए. इजरायल ने इसे प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक बताया और कहा कि संभावित हमले के खतरे को रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई है. जबकि ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की आशंका जताई गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार तेहरान इस्फहान कोम और खोर्रमाबाद समेत कई शहरों में इजरायल की ओर से मिसाइल और एयर स्ट्राइक की गई है. बताया जा रहा है कि इजरायल की और से ईरान पर हुए अचानक हमले में अमेरिका भी शामिल था.

    रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के घर को भी निशाना बनाकर तबाह कर दिया गया. हालांकि अयातुल्ला अली खामेनेई तेहरान में नहीं है उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है. इसी हमले के बीच एक बार फिर यही सवाल सामने आ गया है कि अगर ईरान और इजरायल के बीच यह टकराव लंबा चलता है तो सैन्य ताकत के मामले में कौन भारी पड़ सकता है.

    ईरान इजरायल में सैनिकों की संख्या में कौन आगे?

    अगर ईरान और इजरायल की बात करें तो सक्रिय सैनिकों की संख्या में ईरान आगे बताया जाता है. ईरान के पास करीब 6 लाख तक एक्टिव सैन्य बल और करीब 3.5 लाख रिजर्व सैनिक हैं. जबकि इजरायल के पास करीब 1.7 लाख सक्रिय सैनिक है. हालांकि इजरायल के पास 4.5 लाख प्रशिक्षित रिजर्व फोर्स है जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है. वहीं संख्या के मामले में भले ही ईरान आगे दिखाई देता है लेकिन ट्रेनिंग तकनीक और ऑपरेशन के एक्सपीरियंस में इजरायल को बड़ा माना जाता है.

    एयर पावर पर पकड़ किसकी मजबूत

    वायु सेना की बात करें तो इजरायल के पास 600 से ज्यादा आधुनिक लड़ाकू विमान है जिनमें एफ 35 जैसे स्टेल्थ जेट शामिल है. यह जेट रडार से बच निकलने की क्षमता रखते हैं और एडवांस हथियारों से लैस है. दूसरी और ईरान के पास करीब 500 से कुछ ज्यादा विमान हैं लेकिन ईरान के जेट कई पुराने मॉडल के है. ईरान पर बैन के कारण उसे अपग्रेड और मेंटेनेंस में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में हवा में मुकाबले की स्थिति में इजरायल ईरान के मुकाबले बहुत ज्यादा मजबूत है. वहीं ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल मानी जाती है. उसके पास हजारों की संख्या में अलग अलग रेंज की मिसाइल है जो क्षेत्रीय स्तर पर इजरायल के लिए बड़ा खतरा बन सकती है. वहीं इजरायल के पास संख्या कम जरूर है लेकिन उसकी मिसाइल तकनीक काफी उन्नत है और कुछ मिसाइलें लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम है.

    ईरान और इजरायल के रक्षा बजट में बड़ा अंतर

    अगर दोनों देशों के रक्षा बजट की बात करें तो इजरायल हर साल अपने सैन्य बजट पर ईरान से कई गुना ज्यादा खर्च करता है. अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आंकड़ों के अनुसार इजरायल ने 2024 में करीब 46.5 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किया था. उसे अमेरिका से सैन्य सहायता भी मिलती है. दूसरी ओर ईरान का बजट सीमित है और वह कम लागत वाली रणनीतियों जैसे मिसाइल और ड्रोन तकनीक पर ज्यादा ध्यान देता है. वहीं इजरायल का मल्टी लेयर एयर डिफेंस सिस्टम उसकी सबसे बड़ी ताकतों में गिना जाता है. आयरन डोम जैसे सिस्टम कम दूरी की मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने के लिए जाने जाते हैं. इसके अलावा मध्यम और लंबी दूरी की इंटरसेप्टर क्षमता भी उसके पास है. ईरान के पास भी घरेलू और रूसी तकनीक पर आधारित एयर डिफेंस सिस्टम हैं लेकिन तकनीकी रूप से वे इजरायल के मुकाबले कमजोर माने जाते हैं.

  • उज्जैन दर्शन से लौटते समय नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, मायके ने ससुराल पर लगाया दहेज हत्या का आरोप

    उज्जैन दर्शन से लौटते समय नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, मायके ने ससुराल पर लगाया दहेज हत्या का आरोप

    नई दिल्ली। जबलपुर के कटंगी क्षेत्र के कैमोरी गांव निवासी नवविवाहिता पूजा साहू की मौत ने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी है। पूजा की शादी 6 फरवरी 2026 को गढ़ा फाटक निवासी निखिल साहू से हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद पूजा अपने पति और परिवार के साथ उज्जैन दर्शन के लिए गई थी। परिजनों के अनुसार, 20 फरवरी को जब वे वापस लौट रहे थे, तब पूजा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। पति निखिल ने परिवार को एक वीडियो भेजकर बताया कि पूजा की हालत खराब है। लेकिन रास्ते में तेंदूखेड़ा, दमोह के पास पूजा की मौत हो गई।

    मृतका के मायके पक्ष का आरोप है कि पूजा के साथ लगातार दहेज की मांग और मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा था। परिजनों के अनुसार, शादी के समय 10 लाख रुपए की मांग की गई थी, जिसमें केवल 4 लाख रुपए दिए गए। पूजा ने अपनी मौत से पहले अपने मोबाइल के जरिए परिजनों को वीडियो भेजे थे, जिनमें उन्होंने ससुराल वालों के बर्ताव और अपनी व्यथा बताई। ये वीडियो अब पुलिस को साक्ष्य के रूप में सौंपे जा रहे हैं।

    पूजा की मौत के बाद पूरे साहू समाज में आक्रोश फैल गया। समाज के सैकड़ों लोग और मृतका के रिश्तेदार जबलपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। उन्होंने नारेबाजी की और दोषियों के खिलाफ तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की। समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह हत्या बीमारी का रूप देने की कोशिश है।

    पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जीरो में मामला दर्ज कर जांच के लिए डायरी दमोह भेज दी है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने आश्वासन दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस मामले में पूजा की मौत ने परिवार और समाज में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। फिलहाल पुलिस साक्ष्यों और वीडियो की जांच कर रही है ताकि मामले की वास्तविकता सामने आ सके और न्याय सुनिश्चित हो।

  • किन मुस्लिम देशों में नहीं खेली जाती होली? रंग दिखने पर मिलती है इतनी कड़ी सजा

    किन मुस्लिम देशों में नहीं खेली जाती होली? रंग दिखने पर मिलती है इतनी कड़ी सजा


    नई दिल्ली । होली भारत का वह त्योहार है जो खुशियों हंसी मजाक और रंगों से भरा होता है. यह त्योहार गिले शिकवे भूलकर आपसी रिश्तों में मिठास घोलने पुराने मतभेद मिटाने और जीवन में नए उत्साह को लाने का प्रतीक माना जाता है. भारत में होली को खुले मैदानों गलियों और सड़कों पर मनाया जाता है जहां बड़े बड़े जुलूस रंगों का उत्सव और पारंपरिक मिठाइयों के साथ धूमधाम होती है लेकिन जब हम सीमाओं के पार झांकते हैं खासकर उन देशों में जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं तो होली का रंग और उत्साह कई तरह से बदल जाता है.

    कई इस्लामिक देशों में धार्मिक और सामाजिक नियम इतने सख्त हैं कि होली को सार्वजनिक रूप से मनाना नामुमकिन है. कुछ जगहों पर यह पूरी तरह प्रतिबंधित है और अगर कोई खुले तौर पर रंग खेलता है तो उसे भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है. तो आइए जानते हैं कि किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है और रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है.

    किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है

    अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद धार्मिक नियम बहुत सख्त हो गए हैं. हिंदू और सिख समुदाय की संख्या बहुत कम रह गई है इसलिए होली अब सार्वजनिक रूप से नहीं मनाई जाती है. रंग खेलना या जुलूस निकालना प्रतिबंधित है. त्योहार सिर्फ घर या मंदिर के भीतर ही सीमित है. प्रशासन ने सुरक्षा का आश्वासन तो दिया है लेकिन खुले मैदानों पर कोई उत्सव नहीं होता है. इसलिए अफगानिस्तान में होली का रंग फीका नहीं बल्कि दबा हुआ है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो कानूनी कार्रवाई का खतरा रहता है.

    इसके अलावा सऊदी अरब में गैर इस्लामी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन पर लंबे समय तक सख्ती रही है. भारतीय प्रवासी भी सिर्फ निजी परिसरों या दूतावास में ही होली मना सकते हैं. वहीं अन्य खाड़ी देश जैसे कतर और ओमान मे धार्मिक स्वतंत्रता सीमित है. सार्वजनिक रूप से रंग खेलना नहीं होता है सिर्फ प्रशासन की अनुमति से निजी कार्यक्रम हो सकते हैं. इन देशों में होली का उत्सव पूरी तरह प्रतिबंधित या बहुत सीमित है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो उसे कानूनी कार्रवाई या भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

    रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है

    कुछ इस्लामिक देशों में होली में रंग खेलना या सार्वजनिक रूप से मनाना कानूनी अपराध माना जाता है और इसके लिए सजा काफी कड़ी हो सकती है. सजा की सीमा देश के कानून और स्थानीय प्रशासन के नियमों पर निर्भर करती है. जैसे अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से होली के रंग खेलना या जुलूस निकालना गैरकानूनी है. उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है.

    विशेष रूप से तालिबानी शासन के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए कोई भी सार्वजनिक आयोजन कठोर रूप से रोका जाता है. वहीं सऊदी अरब में रंग खेलते पकड़े जाने पर अपराधी को गिरफ्तार किया जा सकता है और कुछ मामलों में जेल या प्रत्यर्पण तक हो सकता है. वहीं कतर और ओमान में सार्वजनिक रूप से होली मनाना भी प्रतिबंधित है. उल्लंघन करने पर जुर्माना प्रशासनिक कार्रवाई या अपवित्रता के आरोप लग सकते हैं.

    होली भारत का वह त्योहार है जो खुशियों हंसी मजाक और रंगों से भरा होता है. यह त्योहार गिले शिकवे भूलकर आपसी रिश्तों में मिठास घोलने पुराने मतभेद मिटाने और जीवन में नए उत्साह को लाने का प्रतीक माना जाता है. भारत में होली को खुले मैदानों गलियों और सड़कों पर मनाया जाता है जहां बड़े बड़े जुलूस रंगों का उत्सव और पारंपरिक मिठाइयों के साथ धूमधाम होती है लेकिन जब हम सीमाओं के पार झांकते हैं खासकर उन देशों में जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं तो होली का रंग और उत्साह कई तरह से बदल जाता है.

    कई इस्लामिक देशों में धार्मिक और सामाजिक नियम इतने सख्त हैं कि होली को सार्वजनिक रूप से मनाना नामुमकिन है. कुछ जगहों पर यह पूरी तरह प्रतिबंधित है और अगर कोई खुले तौर पर रंग खेलता है तो उसे भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है. तो आइए जानते हैं कि किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है और रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है.

    किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है

    अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद धार्मिक नियम बहुत सख्त हो गए हैं. हिंदू और सिख समुदाय की संख्या बहुत कम रह गई है इसलिए होली अब सार्वजनिक रूप से नहीं मनाई जाती है. रंग खेलना या जुलूस निकालना प्रतिबंधित है. त्योहार सिर्फ घर या मंदिर के भीतर ही सीमित है. प्रशासन ने सुरक्षा का आश्वासन तो दिया है लेकिन खुले मैदानों पर कोई उत्सव नहीं होता है. इसलिए अफगानिस्तान में होली का रंग फीका नहीं बल्कि दबा हुआ है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो कानूनी कार्रवाई का खतरा रहता है.

    इसके अलावा सऊदी अरब में गैर इस्लामी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन पर लंबे समय तक सख्ती रही है. भारतीय प्रवासी भी सिर्फ निजी परिसरों या दूतावास में ही होली मना सकते हैं. वहीं अन्य खाड़ी देश जैसे कतर और ओमान मे धार्मिक स्वतंत्रता सीमित है. सार्वजनिक रूप से रंग खेलना नहीं होता है सिर्फ प्रशासन की अनुमति से निजी कार्यक्रम हो सकते हैं. इन देशों में होली का उत्सव पूरी तरह प्रतिबंधित या बहुत सीमित है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो उसे कानूनी कार्रवाई या भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

    रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है

    कुछ इस्लामिक देशों में होली में रंग खेलना या सार्वजनिक रूप से मनाना कानूनी अपराध माना जाता है और इसके लिए सजा काफी कड़ी हो सकती है. सजा की सीमा देश के कानून और स्थानीय प्रशासन के नियमों पर निर्भर करती है. जैसे अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से होली के रंग खेलना या जुलूस निकालना गैरकानूनी है. उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है.

    विशेष रूप से तालिबानी शासन के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए कोई भी सार्वजनिक आयोजन कठोर रूप से रोका जाता है. वहीं सऊदी अरब में रंग खेलते पकड़े जाने पर अपराधी को गिरफ्तार किया जा सकता है और कुछ मामलों में जेल या प्रत्यर्पण तक हो सकता है. वहीं कतर और ओमान में सार्वजनिक रूप से होली मनाना भी प्रतिबंधित है. उल्लंघन करने पर जुर्माना प्रशासनिक कार्रवाई या अपवित्रता के आरोप लग सकते हैं.

  • बैतूल जेल में महिला कैदी ने चूड़ियां निगलकर आत्मघाती प्रयास किया, गम्भीर हालत में भोपाल रेफर

    बैतूल जेल में महिला कैदी ने चूड़ियां निगलकर आत्मघाती प्रयास किया, गम्भीर हालत में भोपाल रेफर

    नई दिल्ली। बैतूल जिला जेल की महिला बैरक में शनिवार सुबह हड़कंप मच गया, जब पति की हत्या के आरोप में बंद 21 वर्षीय कैदी पूनम उईके ने कांच की चूड़ियां पीसकर निगल लीं। घटना के बाद जेल प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ और महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति गंभीर होने के कारण उसे भोपाल रेफर कर दिया गया।

    पूनम अपने पति राजू उईके की हत्या के मामले में 18 दिसंबर 2025 से जेल में बंद है। घटना के समय बैरक में 18 अन्य महिला कैदी मौजूद थीं, लेकिन किसी को इसका पता नहीं चला। जेल में कड़ा सुरक्षा नियम होने के बावजूद पूनम के पास चूड़ियां कैसे पहुंचीं, यह एक गंभीर सवाल बन गया है। प्रभारी जेलर योगेश शर्मा ने बताया कि उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।

    जिला अस्पताल के सिविल सर्जन के अनुसार, पूनम के गले के अंदरूनी हिस्से में कांच के टुकड़ों से गहरे जख्म हुए हैं। इन जख्मों को और गंभीर नुकसान न पहुंचे, इसके लिए महिला को बेहतर इलाज के लिए भोपाल रेफर किया गया है।

    पूनम की पर्सनल लाइफ और आपराधिक रिकॉर्ड काफी जटिल है। वह अपने पति की हत्या में महाराष्ट्र के तीन युवकों के साथ शामिल थी। शुरुआती जांच में ऐसा प्रतीत होता है कि पूनम ने आत्मग्लानि या मानसिक तनाव के चलते यह कदम उठाया। चर्चा है कि पूनम का जेल में बॉयफ्रेंड भी मौजूद है, और यह घटना किसी दबाव या डिप्रेशन का नतीजा हो सकती है।

    घटना के बाद जेल प्रशासन ने महिला बैरक की निगरानी बढ़ा दी है। पुलिस और प्रशासन दोनों ही महिला के स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं और उसके विस्तृत बयान लेने की तैयारी कर रहे हैं। इस घटना ने न केवल जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और कैदियों की सुरक्षा के महत्व को भी उजागर किया है।

  • उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.2 लाख विद्यार्थियों को दी उपाधियां, महिला शिक्षा और राष्ट्र सेवा पर दिया जोर

    उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.2 लाख विद्यार्थियों को दी उपाधियां, महिला शिक्षा और राष्ट्र सेवा पर दिया जोर


    नई दिल्ली । दिल्ली उपराष्ट्रपति एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और 1.2 लाख से अधिक स्नातकों को उपाधियां प्रदान कीं। समारोह में उन्होंने विश्वविद्यालय की 104 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा की सराहना करते हुए इसे भारत के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक बताया।

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की शुरुआत मात्र तीन कॉलेजों दो संकायों आठ विभागों और 750 विद्यार्थियों से हुई थी वहीं आज यह 16 संकाय 86 विभाग 90 कॉलेज और छह लाख से अधिक विद्यार्थियों वाला एक विशाल शैक्षणिक संस्थान बन चुका है। उन्होंने विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार का भी उल्लेख किया और कहा कि यह शिक्षा में निरंतरता और उत्कृष्टता का प्रतीक है।

    उन्होंने स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि उपाधि केवल प्रमाण-पत्र नहीं है बल्कि समाज की सेवा राष्ट्र के कल्याण और राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत को निभाने की प्रतिबद्धता है। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि विकसित भारत @2047 को साकार करने की कुंजी युवाओं में निहित है और हर विद्यार्थी चाहे वह वैज्ञानिक शिक्षक कलाकार उद्यमी या नवोन्मेषक बने वह इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    विशेष रूप से उन्होंने महिला शिक्षा में हुई प्रगति की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने बताया कि स्नातकों में 50 प्रतिशत से अधिक और स्वर्ण पदक विजेताओं में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं जो देश में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास का प्रतीक है।

    स्नातकों को सामाजिक जिम्मेदारी नवाचार और प्रौद्योगिकी अनुसंधान तथा उद्यमिता के माध्यम से देश के विकास में योगदान देने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने उन्हें नशीले पदार्थों से दूर रहने और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने की सलाह दी।

  • हैवानियत की पराकाष्ठा! खेलने के बहाने गोद में उठाया और उजाड़ दी मासूम की दुनिया; दमोह पुलिस ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन

    हैवानियत की पराकाष्ठा! खेलने के बहाने गोद में उठाया और उजाड़ दी मासूम की दुनिया; दमोह पुलिस ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन


    दमोह: मध्य प्रदेश के दमोह जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि समाज के सुरक्षा दावों पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। नोहटा थाना क्षेत्र के एक शांत गांव में उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब एक नरपिशाच पड़ोसी ने महज 9 माह की मासूम बच्ची को अपनी दरिंदगी का शिकार बना डाला। इस जघन्य कृत्य के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

    घटना के संदर्भ में प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी युवक पीड़ित परिवार का पड़ोसी बताया जा रहा है। वह अक्सर बच्ची के घर आता-जाता था और परिवार का उस पर भरोसा था। वारदात वाले दिन, आरोपी ने मासूम की मां के पास जाकर उसे अपनी गोद में लिया और यह कहकर बाहर ले गया कि वह बच्ची के साथ कुछ देर खेलना चाहता है। मां को अंदाजा भी नहीं था कि जिसे वह अपना पड़ोसी और शुभचिंतक समझ रही है, वह वास्तव में एक भेड़िया है जो उसकी कोख से जन्मी नन्हीं सी जान को नोंचने की ताक में बैठा है।

    आरोपी मासूम को एकांत स्थान पर ले गया और वहां उसके साथ घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। कुछ देर बाद जब बच्ची की चीखें बंद हुईं और उसकी हालत बिगड़ने लगी, तो आरोपी घबरा गया। वह मरणासन्न हालत में मासूम को उसकी मां के पास छोड़कर मौके से फरार हो गया। बच्ची की नाजुक स्थिति और उसके शरीर पर चोट के निशान देखकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन-फानन में मासूम को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर बताई है।

    इस बर्बरता की सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया। आक्रोशित ग्रामीणों की भीड़ सड़कों पर उतर आई और आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी के साथ-साथ उसे बीच चौराहे पर सख्त सजा देने की मांग करने लगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकASP सुजीत सिंह भदोरिया सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर बच्ची के स्वास्थ्य की जानकारी ली और परिजनों को न्याय का भरोसा दिलाया।

    पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध पॉक्सो एक्टPOCSO Act और दुष्कर्म की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की अलग-अलग टीमें आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और मामले की फास्ट ट्रैक सुनवाई कराकर उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जाएगी। फिलहाल, पूरा गांव गम और गुस्से में डूबा हुआ है और हर कोई बस यही दुआ कर रहा है कि वह मासूम इस मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकल आए।

  • आधी रात भड़की आग ने मचाया तांडव: ग्वालियर के टेंट गोदाम में 50 लाख राख, 10 फीट तक उठीं लपटें

    आधी रात भड़की आग ने मचाया तांडव: ग्वालियर के टेंट गोदाम में 50 लाख राख, 10 फीट तक उठीं लपटें


    ग्वालियरमध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में शुक्रवार-शनिवार दरमियानी रात भीषण आग की घटना सामने आई। नाका चंद्रवदनी इलाके में स्थित एक टेंट गोदाम में अचानक आग लग गई, जिसने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। करीब 10 फीट ऊंची लपटें उठने लगीं, जो दूर सड़क से साफ दिखाई दे रही थीं। धुएं का गुबार पूरे इलाके में फैल गया, जिससे आसपास के रहवासी इलाकों में हड़कंप मच गया।

    घटना हीरा भूमिया मंदिर के पास स्थित टेंट व्यवसायी अवधेश सिंह यादव के गोदाम की बताई जा रही है। अवधेश शादी समारोहों में टेंट और डेकोरेशन का काम करते हैं और उनका पूरा सामान इसी गोदाम में रखा था। बताया गया कि होलिका अष्टक के चलते विवाह समारोह फिलहाल बंद थे, इसलिए अलग-अलग स्थानों से लाया गया सारा टेंट और सजावटी सामान एक ही जगह स्टोर कर दिया गया था।

    रात करीब 2 से 3 बजे के बीच अचानक आग भड़क उठी। जब तक लोगों को जानकारी मिली, तब तक आग बेकाबू हो चुकी थी। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सूचना मिलते ही सात दमकल वाहन मौके पर पहुंचे, लेकिन संकरी गलियों के कारण उन्हें गोदाम तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।

    आग इतनी भीषण थी कि चारों ओर से पानी डालने के बावजूद काबू में नहीं आ रही थी। अंततः दमकल कर्मियों को गोदाम की दीवार तोड़नी पड़ी, ताकि अंदर तक पानी पहुंचाया जा सके। टेंट का कपड़ा, प्लास्टिक और डेकोरेशन में इस्तेमाल होने वाली वायरिंग के कारण आग तेजी से फैलती रही। करीब चार घंटे की लगातार मशक्कत के बाद सुबह लगभग 7 बजे आग पर काबू पाया जा सका।

    घटना में गोदाम में रखा टेंट, सजावटी सामग्री, सीजन के लिए खरीदा गया नया सामान, एक लोडिंग वाहन और एक बाइक पूरी तरह जलकर खाक हो गए। गोदाम मालिक के अनुसार कुल मिलाकर करीब 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

    सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि आग रिहायशी इलाके तक नहीं फैली। यदि लपटें आसपास के मकानों तक पहुंच जातीं, तो बड़ा हादसा हो सकता था। दमकल कर्मियों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से संभावित बड़ा नुकसान टल गया।

    प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि पुलिस और फायर विभाग ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट के बाद ही आग के वास्तविक कारणों का खुलासा होगा। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य है, लेकिन इस घटना ने घनी आबादी वाले इलाकों में सुरक्षा इंतजामों पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।