Author: bharati

  • इंडोनेशिया का भारत को बड़ा झटका! टाटा-महिंद्रा के 1.05 लाख ट्रकों का मेगा ऑर्डर फिलहाल रोका

    इंडोनेशिया का भारत को बड़ा झटका! टाटा-महिंद्रा के 1.05 लाख ट्रकों का मेगा ऑर्डर फिलहाल रोका


    नई दिल्ली ।
    दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इंडोनेशिया ने भारत की ऑटो इंडस्ट्री को बड़ा झटका दिया है। स्थानीय नीति निर्माताओं और व्यापारिक संगठनों के तीखे विरोध के बाद इंडोनेशिया सरकार ने भारतीय कंपनियों टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा से 1 05 000 ट्रकों की खरीद के मेगा ऑर्डर पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह डील दोनों भारतीय कंपनियों के लिए अब तक के सबसे बड़े निर्यात ऑर्डरों में से एक मानी जा रही थी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस ऑर्डर के तहत महिंद्रा को 35 ,000 स्कॉर्पियो पिक अप वाहन सप्लाई करने थे जिसे कंपनी अपने इतिहास का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर बता रही थी। वहीं टाटा मोटर्स की स्थानीय इकाई को 35,000 योद्धा पिक अप और 35 ,000 अल्ट्रा T.7 ट्रकों की डिलीवरी करनी थी। इंडोनेशिया के लिए यह टाटा का अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर माना जा रहा था। हालांकि इस फैसले पर दोनों कंपनियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    दरअसल यह पूरा प्रोजेक्ट इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियान्टो की महत्वाकांक्षी योजना से जुड़ा है। सरकार देशभर में 80,000 से ज्यादा सामुदायिक सहकारी समितियां स्थापित करना चाहती है। इन 4×4 और 6 पहिया ट्रकों का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी वाली खाद और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए किया जाना था। साथ ही ये समितियां लोन सेवाएं भी देतीं जिससे सरकार सीधे ग्रामीण आबादी तक पहुंच बना सके।

    लेकिन जकार्ता में इस बड़े आयात का जबरदस्त विरोध हुआ। इंडोनेशिया में पहले से टोयोटा सुजुकी और मित्सुबिशी जैसी वैश्विक कंपनियों की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स मौजूद हैं। कमजोर घरेलू मांग और घटती कार बिक्री के बीच स्थानीय उद्योग पहले ही दबाव में है। ऐसे में बाहर से 1 लाख से ज्यादा वाहन आयात करने के फैसले को उद्योग संगठनों ने सरकार की औद्योगीकरण और रोजगार सृजन नीति के खिलाफ बताया।

    इंडोनेशिया के उद्योग मंत्री अगुस गुमीवांग कर्तासस्मिता ने कहा कि देश के ऑटो सेक्टर में सालाना लगभग 10 लाख पिक अप ट्रक बनाने की क्षमता है। उनके मुताबिक अगर 70, 000 पिक अप ट्रक देश में ही बनाए जाते तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को करीब 27 ट्रिलियन रुपिया लगभग 1.6 अरब डॉलर का फायदा होता और हजारों नौकरियां पैदा होतीं।

    यह खरीद सरकारी कंपनी पीटी अग्रिनास पंगन नुसंतारा द्वारा की जानी थी जिसे खाद्य आत्मनिर्भरता और कृषि परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में स्थापित किया गया है। शेष सरकार और संसद के बीच अहम बैठक तक इस आदेश को होल्ड पर रखा गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इंडोनेशिया सरकार स्थानीय निर्माण को प्राथमिकता देगी या भारत के साथ इस बड़े व्यापारिक समझौते को फिर से हरी झंडी मिलेगी। यह फैसला दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर भी असर डाल सकता है।

  • अमर अकबर एंथनी का फीमेल वर्जन बना, लेकिन कभी नहीं हो पाई रिलीज़ सुधा चंद्रन ने सुनाई अनसुनी कहानी

    अमर अकबर एंथनी का फीमेल वर्जन बना, लेकिन कभी नहीं हो पाई रिलीज़ सुधा चंद्रन ने सुनाई अनसुनी कहानी


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की सदाबहार फिल्मों में शुमार अमर अकबर एंथनी आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह रखता है। अमिताभ बच्चन विनोद खन्ना और ऋषि कपूर जैसे सितारों से सजी इस फिल्म ने भाईचारे और मनोरंजन का अनोखा संगम पेश किया था। लेकिन अब अभिनेत्री सुधा चंद्रन ने इस फिल्म से जुड़ा एक ऐसा राज़ खोला है जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया।

    हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में सुधा चंद्रन ने बताया कि अमर अकबर एंथनी का एक फीमेल वर्जन भी बनाया गया था। इस फिल्म का नाम था सीता सलमा सूज़ी । यह प्रोजेक्ट मूल फिल्म से प्रेरित था और इसमें तीन बहनों की कहानी दिखाई जानी थी। सुधा ने बताया कि वे इस फिल्म में लीड रोल निभा रही थीं और उनके साथ अर्चना पूरन सिंह और मुनमुन सेन भी मुख्य भूमिकाओं में थीं।

    सुधा ने याद करते हुए कहा कि उस समय पूरी टीम को विश्वास था कि वे एक बड़ी और यादगार फिल्म बना रहे हैं। फिल्म में पुरुष कलाकारों में जीत उपेंद्र और शेखर सुमन जैसे नाम शामिल थे। सभी कलाकार बेहद समर्पण के साथ काम कर रहे थे लेकिन दुर्भाग्यवश यह फिल्म कभी रिलीज़ नहीं हो पाई। इसके पीछे क्या कारण थे यह साफ नहीं हो सका और यह प्रोजेक्ट अधूरा रह गया।

    इस अनरिलीज़्ड फिल्म से जुड़ी एक और दिलचस्प बात यह है कि इसी के सेट पर सुधा चंद्रन की मुलाकात उनके भावी पति रवि डांग से हुई थी जो फिल्म में एसोसिएट डायरेक्टर थे। सुधा ने बताया कि शुरुआत में उन्हें रवि का व्यवहार थोड़ा अजीब लगा क्योंकि वे उनके गुड मॉर्निंग का जवाब नहीं देते थे। जब उन्होंने इस बारे में पूछा तो रवि ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें काम के लिए पैसे मिलते हैं औपचारिक अभिवादन के लिए नहीं। रवि की यह साफगोई और काम के प्रति समर्पण सुधा के दिल को छू गया।

    धीरे धीरे दोनों के बीच दोस्ती और फिर प्यार पनपा। हालांकि शादी का फैसला आसान नहीं था क्योंकि परिवार इंडस्ट्री से जुड़े व्यक्ति को अपनाने को लेकर आशंकित था। लेकिन सुधा के आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय ने आखिरकार परिवार को मना लिया। उनकी मां ने भरोसा जताया कि उनकी बेटी कभी गलत फैसला नहीं ले सकती।

    सीता सलमा सूजी भले ही बड़े पर्दे तक नहीं पहुंच सकी लेकिन यह फिल्म सुधा चंद्रन के जीवन की एक अहम कड़ी बन गई। एक ओर जहां यह प्रोजेक्ट अधूरा रह गया वहीं दूसरी ओर इसी के जरिए उनकी जिंदगी में एक नया रिश्ता और नई शुरुआत जुड़ गई। बॉलीवुड के इतिहास में यह किस्सा आज भी एक दिलचस्प लेकिन अनकही कहानी के रूप में दर्ज है।

  • पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल में किया ध्यान

    पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल में किया ध्यान


    उज्जैन। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आज तड़के उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे और भस्म आरती में शामिल हुए। भस्म आरती में बाबा महाकाल के दर्शन लाभ लेने के बाद उन्हें श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।

    इस दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि भारत में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है जो हमारी वर्षों पुरानी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास सराहनीय है।

    धनखड़ ने कहा मैं प्रशासन की सरलता सुगमता और लगनशीलता से बहुत प्रभावित हूं। यहां सभी से समानता का व्यवहार किया जा रहा है। मैं एक स्वच्छ छवि लेकर यहां से जा रहा हूं। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर में आकर अहंकार ईर्ष्या अहम और प्रतिशोध का त्याग होता है।

    इसके बाद पूर्व उपराष्ट्रपति नंदी हॉल में बैठकर ध्यान साधना में लीन हुए। उनका यह दौरा धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है साथ ही यह महाकालेश्वर मंदिर की लोकप्रियता और अनुशासन को भी दर्शाता है।

  • पंधाना थाना पुलिस ने 9 जुआरी पकड़े बाइक और कार समेत लाखों की संपत्ति जब्त

    पंधाना थाना पुलिस ने 9 जुआरी पकड़े बाइक और कार समेत लाखों की संपत्ति जब्त


    खंडवा जिले के पंधाना थाना क्षेत्र में पुलिस ने देर रात अवैध जुआ खेल रहे 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई में पुलिस ने नगदी, तीन मोटरसाइकिल और दो कारें जब्त की हैं। कुल जब्त सामग्री की कीमत 3,79,465 रुपए आंकी गई है।

    टीआई दिलीपसिंह देवड़ा को सूचना मिली कि खापरी गांव के बाहर ईंट भट्टे के पास कुछ लोग ताश के पत्तों पर हार-जीत का दांव लगाकर जुआ खेल रहे हैं। सूचना के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति से पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक व डीएसपी मुख्यालय के मार्गदर्शन में टीम गठित कर दबिश दी गई।

    पुलिस टीम ने मौके पर पंचों के साथ घेराबंदी कर 9 लोगों को पकड़ा। सभी आरोपी और जब्त सामान विधिवत थाने लाए गए। आरोपियों के खिलाफ जुआ एक्ट की धारा 13 के तहत अपराध क्रमांक 81/26 दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।

    गिरफ्तार आरोपी:

    भूपेंद्र यादव (33), घुघरिया खेड़ी, थाना गोगावा

    दिलावर शाह (48), ग्राम टेमी

    कृष्णा सेन (40), ग्राम बगमार

    योगेंद्र राजावत (24), ग्राम जामली

    जितेंद्र पटेल (30), बगमार

    अक्तर खान (38), पंधाना

    सलीम खान (40), पंधाना

    वसीम (36), सिविल लाइन, खंडवा

    अशफाक खान (42), पंधाना

    मौके से जब्त सामान:

    नगदी: 24,465 रुपए

    52 ताश के पत्ते

    मोटरसाइकिल MP-12-MW-9725 (करीब 20 हजार रुपए)

    मोटरसाइकिल MP-12-MW-6281 (करीब 15 हजार रुपए)

    मोटरसाइकिल MP-12-MW-7690 (करीब 20 हजार रुपए)

    टाटा कार MP-12-ZG-6502 (करीब 1.20 लाख रुपए)

    मारुति सुजुकी आर्टिगा MP-09-WD-8070 (करीब 1.80 लाख रुपए)

    पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई जारी है और बाकी सहयोगियों की पहचान के लिए जांच बढ़ाई जा रही है।

  • दिव्यांगों के 22 हजार खाली पदों पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब अगली सुनवाई 15 अप्रैल

    दिव्यांगों के 22 हजार खाली पदों पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब अगली सुनवाई 15 अप्रैल


    जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दिव्यांगों के रिक्त पदों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस डीडी बंसल की एकल पीठ ने शुक्रवार को सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला और मध्य प्रदेश वेयरहाउस एंड लॉजिस्टिक कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक अनुराग वर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने जवाब 15 अप्रैल तक देने का निर्देश दिया है।

    कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से पूछा कि पूर्व आदेश के बावजूद विभिन्न विभागों में दिव्यांगों के रिक्त पद अब तक क्यों नहीं भरे गए। यह मामला करीब 22 हजार खाली पदों का है। कोर्ट ने 30 जनवरी 2024 को दिए गए आदेशों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

    दरअसल, नरसिंहपुर निवासी दिव्यांग अभ्यर्थी राजेंद्र मेहरा ने याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में दिव्यांगों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इससे पहले भी इसी संबंध में याचिका दायर की गई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने रिक्त पद भरने के आदेश दिए थे।

    सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील शिवम त्रिपाठी ने दावा किया कि संबंधित अधिकारी जानबूझकर अदालत के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं। उन्होंने इसे अवमानना का मामला बताया। कोर्ट ने प्रमुख सचिव सहित अन्य अधिकारियों को 15 अप्रैल तक जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

    अगली सुनवाई में हाईकोर्ट इस बात का जायजा लेगा कि कितने पद भरे गए और किन कारणों से अभी तक रिक्त पदों को भरने में देरी हो रही है। यह मामला दिव्यांगों के अधिकारों और सरकारी जवाबदेही की दिशा में अहम माना जा रहा है।

  • खंडवा में बेकाबू ट्रक हादसा: शिक्षक की मौत, घंटों की कोशिश के बाद निकाला शव

    खंडवा में बेकाबू ट्रक हादसा: शिक्षक की मौत, घंटों की कोशिश के बाद निकाला शव


    खंडवा । पिपलोद खास बस स्टैंड के पास मंगलवार तड़के करीब 3 बजे एक भयानक सड़क हादसा हुआ जिसमें शिक्षक सोहन सिंह चौहान की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार तेज रफ्तार ट्रक बस स्टैंड के टर्न पर पहुंचा तो ड्राइवर का स्टेयरिंग नियंत्रण से बाहर हो गया। ट्रक सीधे रोड से उतरते हुए वहां बनी तीन दुकानों और एक पेड़ को तोड़ता हुआ आगे बढ़ा।

    हादसे के समय ट्रक में रखी कपास की गठानें सड़क और फुटपाथ पर बिखर गईं। ट्रक के नीचे दबे शिक्षक का शव कई घंटे की मेहनत के बाद रेस्क्यू टीम ने बाहर निकाला। पुलिस के अनुसार ट्रक डेढ़ तलाई से इंदौर की ओर जा रहा था। हादसे में ट्रक ड्राइवर और क्लीनर को मामूली चोटें आई हैं।

    शिक्षक सोहन सिंह चौहान अपने स्कूल के काम से इंदौर जाने के लिए घर से तड़के 3 बजे निकले थे। बस स्टैंड के मोड़ पर वह एक दुकान के नीचे खड़े होकर बस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

    रेस्क्यू टीम ने ट्रक के नीचे फंसे शव को सुरक्षित बाहर निकाला और आसपास बिखरी कपास की गठानें हटाई। हादसे ने इलाके में सन्नाटा और शोक की लहर दौड़ा दी है। अधिकारियों ने कहा कि आगे ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सड़क सुरक्षा और वाहन की गति पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

  • बड़ा तालाब का खतरा एफटीएल से 50 मीटर के दायरे में लाखों का अतिक्रमण

    बड़ा तालाब का खतरा एफटीएल से 50 मीटर के दायरे में लाखों का अतिक्रमण


    भोपाल के बड़ा तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) के आसपास पिछले वर्षों में हुए अतिक्रमण का मामला फिर से सुर्खियों में है। अब तक के सर्वे में 153 झुग्गियां और पक्के मकान सामने आए हैं, जिनमें कुछ आलिशान घर भी शामिल हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 16 मार्च 2022 के बाद तालाब के शहरी हिस्से में एफटीएल से 50 मीटर और ग्रामीण हिस्से में 250 मीटर के भीतर हुए सभी निर्माण अवैध माने जाएंगे।

    इस कार्रवाई का आधार वेटलैंड एक्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश हैं। सांसद Alok Sharma और कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की फटकार के बाद सीमांकन और कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

    टीटी नगर अनुभाग के ग्राम सेवनिया गौड़, धर्मपुरी, प्रेमपुरा, आमखेड़ा, पीपलखेड़ी, कोटरा सुल्तानाबाद और बरखेड़ी खुर्द में 108 निर्माण मिले हैं। खानूगांव के आसपास 3 मकान, हलालपुरा में 7 और कोहेफिजा में 35 मकान एफटीएल के दायरे में आते हैं। खानूगांव में 15 सरकारी जमीनों पर भी कब्जा मिला। वीआईपी रोड पर एक मंत्री और आईएएस के बंगले के पास भी लाल निशान लगाए गए।

    कलेक्टर सिंह ने सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि होली से पहले तालाब के चारों ओर सीमांकन पूरा किया जाए। एमपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को भी वाटर बॉडी में मिलने वाले गंदे नालों की पहचान करनी होगी और दूषित करने वाले स्रोतों को चिन्हित किया जाएगा।

    वेटलैंड एक्ट लागू होने के बाद, एफटीएल के निर्धारित दायरे में बने सभी निर्माण बिना किसी अनुमति के अवैध होंगे। पुराने निर्माण के लिए संबंधित विभागों से अनुमति दस्तावेज मांगे जाएंगे।

    बड़ा तालाब का क्षेत्र पिछले दस साल में तीन बार सर्वे किया जा चुका है। 2016 में डीजीपीएस सर्वे में 38.72 वर्ग किमी क्षेत्र निर्धारित किया गया था, लेकिन रिपोर्ट कभी सामने नहीं आई। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत हुए सर्वे में भी मुनारों की गिनती और सीमा निर्धारण अधूरा रह गया।

    करीब दो साल पहले भदभदा झुग्गी बस्ती से 386 घरों को हटाया गया था, लेकिन उसके बाद व्यापक अतिक्रमण रुक नहीं पाया। भोपाल सांसद अलोक शर्मा ने तालाब के लिए मास्टर प्लान बनाने की भी पैरवी की, जिससे तालाब और उसके कैचमेंट एरिया को सुरक्षित किया जा सके।

    विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी सीमा में 50 मीटर और ग्रामीण सीमा में 250 मीटर के भीतर निर्माण नहीं होना चाहिए। लेकिन बीते वर्षों में सैकड़ों निर्माण एफटीएल से सटकर बन गए हैं। भदभदा, बिसनखेड़ी, गौरागांव, बील गांव और सूरजनगर में फार्म हाउस, रिसॉर्ट और मैरिज गार्डन भी तालाब के बीच बन गए हैं।

    सिंह ने स्पष्ट किया है कि अब बिना किसी विलंब के अतिक्रमण हटाने और सीमांकन की ठोस कार्रवाई की जाएगी। यह कदम बड़ा तालाब और भोपाल शहर की जलधारा और पर्यावरण सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है।

  • इंदौर चोरी कांड का खुलासा 60 लाख की चोरी का मास्टरमाइंड दंपती का भतीजा निकला

    इंदौर चोरी कांड का खुलासा 60 लाख की चोरी का मास्टरमाइंड दंपती का भतीजा निकला


    इंदौर
    के बाणगंगा थाना क्षेत्र में हुई 60 लाख रुपये की नकदी और गहनों की चोरी का मास्टरमाइंड दंपती का ही भतीजा निकला है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई, लेकिन चोरी का पूरा माल अभी बरामद नहीं हुआ है।

    दंपती के भतीजे रोहित उर्फ गोलू को हिरासत में लिया गया है। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसने दोस्त लक्की बोरासी और सुधांशु प्रजापत के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया था। इनके अलावा एक और साथी भी शामिल था। चोरी के बाद यह साथी जेवर और नकदी लेकर फरार हो गया, इसलिए गोलू के पास से कोई रकम बरामद नहीं हुई।

    पुलिस ने राजस्थान में भी जांच की, क्योंकि गोलू ने आरोपियों के वहां जाने की बात बताई थी, लेकिन वहां भी आरोपी नहीं मिले।

    चोरी 7 फरवरी को डागर मोहल्ले के बाणेश्वरी कुंड के पास स्थित मकान में हुई थी। मकान मालिक विनोद यादव और उनकी पत्नी मनीषा वैष्णो देवी उस समय घर पर नहीं थे। जब वे लौटे तो चोरी का पता चला। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में दो चोर घर में दाखिल दिखे जबकि गोलू बाहर खड़ा था। पुलिस ने फुटेज और हुलिए के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की।

    जांच में सामने आया कि चोरी से कुछ दिन पहले और बाद में गोलू, लक्की और सुधांशु लगातार मोबाइल पर संपर्क में थे। उन्होंने चोरी से पहले एक-दूसरे को मैसेज कर बाहर बुलाया था। चोरी के बाद सुधांशु, लक्की और उनका साथी बिना गोलू को हिस्सा दिए फरार हो गए। डर के कारण गोलू ने किसी को कुछ नहीं बताया। घटना की रात वह देर तक गली में घूमता नजर आया, जिससे पुलिस का शक उस पर और गहरा गया।

    पुलिस ने बताया कि गोलू ने चाचा के लाखों के प्लॉट बेचने की जानकारी अपने दोस्तों को दी थी और इसी के आधार पर 6-7 फरवरी की रात चोरी की योजना बनाई गई। विनोद यादव ने रामनगर क्षेत्र में एक प्लॉट बेचा था और उस सौदे से मिले 35 लाख रुपये घर में रखे थे।

    पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मौके पर जांच जारी है और कुछ संदिग्धों की पहचान हो गई है। आरोपी और चोरी का माल ढूंढने के लिए कार्रवाई जारी है।

  • होली पर बसें थमेंगी: नई परिवहन नीति के विरोध में 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल

    होली पर बसें थमेंगी: नई परिवहन नीति के विरोध में 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल


    जबलपुर । मध्यप्रदेश में होली के त्यौहार से पहले बसों के पहिए थम सकते हैं। बस एसोसिएशन ने 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है। संगठन ने यह कदम नई परिवहन नीति के विरोध में उठाया है। इसके कारण पूरे प्रदेश में त्योहार के दौरान सार्वजनिक परिवहन बाधित रहेगा, और यात्रियों को अपनी यात्रा के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने पड़ सकते हैं।

    बस एसोसिएशन का आरोप है कि नई नीति के तहत बसों का राष्ट्रीयकरण कर छोटे बस मालिकों को बाहर किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि नई पॉलिसी में परमिट का काम एक ही कंपनी को सौंपा जा रहा है और मल्टीनेशनल कंपनियों के आने से छोटे बस मालिक किराएदार बन जाएंगे। इसके अलावा, निजी बसों के परमिट रद्द कर उन्हें अनुबंध पर चलाने की योजना बनाई जा रही है। बस मालिकों का आरोप है कि सरकार बस संचालकों का शोषण कर उन्हें कमजोर करने पर तुली है।

    नई परिवहन नीति में बस संचालन को पूरी तरह डिजिटल मॉनिटरिंग के तहत रखा जाएगा। बसों में अतिरिक्त यात्रियों को बैठने पर पाबंदी रहेगी और ओवरलोडिंग रोकने के लिए चालान का प्रावधान होगा। नीति के अनुसार किसी भी रूट का किराया परिवहन विभाग तय करेगा और बस संचालन के दौरान सरकार का पूरा नियंत्रण रहेगा।

    बस मालिकों और सरकार के बीच विवाद के कारण होली पर यात्रियों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। त्योहार के दौरान घर लौटने वाले लोग समय से पहले अपने यात्रा प्रबंध करने को मजबूर हैं, क्योंकि हड़ताल की अनिश्चित अवधि को देखते हुए बसों की उपलब्धता नहीं रहेगी।

  • दिल्ली में सड़क हादसे: 2025 में 649 मौतें, 1,738 घायल, पैदल यात्री सबसे असुरक्षित

    दिल्ली में सड़क हादसे: 2025 में 649 मौतें, 1,738 घायल, पैदल यात्री सबसे असुरक्षित


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी में सड़क हादसों ने 2025 में चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के जनवरी 2026 के न्यूजलेटर के अनुसार बीते साल 649 लोगों की मौत हुई और 1 738 लोग घायल हुए। इनमें पैदल यात्रियों की संख्या सबसे अधिक रही। आंकड़े बताते हैं कि निजी कारों की चपेट में आने से 92 दोपहिया वाहनों से 75 और भारी वाहनों से 43 पैदल यात्रियों की मौत हुई।

    तेज रफ्तार लापरवाही यातायात नियमों का उल्लंघन और सुरक्षित पारपथों की कमी हादसों के मुख्य कारण हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने 13 जनवरी को दोपहिया वाहनों की जागरूकता रैली का आयोजन किया। इस रैली में 70 पुलिस कर्मियों और 200 से अधिक लोग शामिल हुए। रैली का उद्देश्य दोपहिया वाहन चालकों के बीच सड़क सुरक्षा नियमों और हेलमेट के इस्तेमाल के प्रति जागरूकता फैलाना था। अधिकारियों ने जोर दिया कि आईएसआई प्रमाणित हेलमेट पहनना अनिवार्य है।

    सड़क सुरक्षा सुधारने के लिए सख्ती भी बढ़ाई गई। दिसंबर 2025 में गलत दिशा में वाहन चलाने वालों के खिलाफ 42 945 चालान किए गए जो पिछले साल के 8 854 मामलों से कई गुना अधिक है। इनमें दोपहिया वाहन चालक सबसे आगे थे जिनके खिलाफ 30 224 चालान किए गए। जनवरी 2026 में पहली बार भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 के तहत 173 FIR दर्ज की गईं। इस धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की कैद या 1 000 रुपये तक का जुर्माना और वाहन ज़ब्त किया जा सकता है।

    ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि गलत दिशा में वाहन चलाना सड़क हादसों की बड़ी वजह है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें सतर्क रहें और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाएं। सड़क पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ा चुनौती बन चुका है।
    यह आंकड़े और उपाय दर्शाते हैं कि दिल्ली में सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए केवल कानून नहीं बल्कि जागरूकता और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर भी उतना ही जरूरी है