Author: bharati

  • TVK सरकार पर संकट के बादल, CPI-M ने दी समर्थन वापसी की चेतावनी, तमिलनाडु में बढ़ा सियासी टकराव

    TVK सरकार पर संकट के बादल, CPI-M ने दी समर्थन वापसी की चेतावनी, तमिलनाडु में बढ़ा सियासी टकराव


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी तनाव देखने को मिल रहा है, जहां मुख्यमंत्री थलपति विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के नेतृत्व वाली सरकार पर संकट के बादल गहराते नजर आ रहे हैं। सरकार को बाहर से समर्थन दे रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) ने अब खुलकर चेतावनी दी है कि यदि सत्ता समीकरणों में बदलाव किया गया या AIADMK को सरकार में शामिल किया गया तो समर्थन पर पुनर्विचार किया जा सकता है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीतिक परिस्थितियां और अधिक जटिल होती दिखाई दे रही हैं।

    CPI-M के वरिष्ठ नेता ने साफ तौर पर कहा है कि तमिलनाडु की जनता ने इस बार परंपरागत राजनीतिक दलों से हटकर एक नया विकल्प चुना है और टीवीके सरकार का गठन इसी जनादेश का परिणाम है। उनके अनुसार, वामपंथी दलों और अन्य सहयोगी पार्टियों ने केवल इसलिए समर्थन दिया ताकि राज्य में एक वैकल्पिक और अपेक्षाकृत साफ-सुथरी शासन व्यवस्था स्थापित हो सके। ऐसे में यदि सरकार अपने मूल राजनीतिक रुख से हटकर AIADMK के साथ गठजोड़ करती है या उसे सत्ता में हिस्सेदारी देती है, तो यह जनता के भरोसे के साथ समझौता माना जाएगा।

    इस चेतावनी के बाद तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ताधारी गठबंधन के भीतर भी असहजता की स्थिति देखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन की स्थिरता कई छोटे दलों के समर्थन पर निर्भर है, ऐसे में किसी भी प्रमुख सहयोगी का असंतोष सरकार के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है।

    गौरतलब है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था और राज्य में गठबंधन सरकार का गठन हुआ था। टीवीके ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते हुए सबसे अधिक सीटें हासिल की थीं, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे कई छोटे दलों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ा। यही कारण है कि शुरुआत से ही इस गठबंधन में राजनीतिक मतभेद और असहमति की स्थिति बनी हुई है।

    CPI-M का यह ताजा रुख सरकार के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है कि आने वाले समय में राजनीतिक संतुलन और सहयोग बनाए रखना आसान नहीं होगा। पार्टी ने यह भी कहा है कि वह सरकार की नीतियों और फैसलों पर नजर बनाए हुए है और जनहित के खिलाफ किसी भी निर्णय पर सख्त रुख अपनाया जाएगा।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि तमिलनाडु की मौजूदा स्थिति बेहद नाजुक है, जहां छोटे दलों का समर्थन सरकार की स्थिरता तय करने में अहम भूमिका निभा रहा है। ऐसे में हर निर्णय और हर राजनीतिक गठजोड़ राज्य की सत्ता समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल सभी की नजर मुख्यमंत्री विजय के अगले कदम पर टिकी हुई है, जो यह तय करेगा कि सरकार आगे स्थिर रहती है या राजनीतिक संकट और गहरा जाता है।

  • लखनऊ में मेडिकल स्टोर बंद: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन

    लखनऊ में मेडिकल स्टोर बंद: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन



    लखनऊ। लखनऊ में बुधवार को मेडिकल स्टोरों की बंदी से आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। शहर के अमीनाबाद, चौक, चारबाग समेत प्रमुख दवा बाजारों में सुबह से ही अधिकांश दुकानें शटर डाउन रहीं। इस बंदी का असर पूरे प्रदेश में देखा गया, जहां अनुमानित रूप से लाखों मेडिकल स्टोर बंद रहे।

    यह बंदी ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स के विरोध में की गई है। दवा व्यापारियों का आरोप है कि ऑनलाइन कंपनियां बिना पर्याप्त जांच और फार्मासिस्ट की निगरानी के दवाएं बेच रही हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। साथ ही फर्जी प्रिस्क्रिप्शन और भारी डिस्काउंटिंग से पारंपरिक दवा कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।

    इस विरोध प्रदर्शन के तहत ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने 24 घंटे की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इसी के समर्थन में लखनऊ केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन समेत विभिन्न संगठनों ने भी बंद को समर्थन दिया।

    व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए स्लीपिंग पिल्स, पेन किलर्स और अन्य नियंत्रित दवाओं की आसान उपलब्धता चिंता का विषय है, जिससे युवाओं में दुरुपयोग की आशंका बढ़ रही है। साथ ही अत्यधिक डिस्काउंटिंग को भी नियमों के खिलाफ बताते हुए उन्होंने सप्लाई चेन में गड़बड़ी और नकली दवाओं की संभावना जताई है।

    एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित तिवारी ने कहा कि यह केवल व्यापार का मुद्दा नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी पर्चों के आधार पर दवाएं बेची जा रही हैं, जिससे गलत उपचार और गंभीर दुष्प्रभाव का खतरा बढ़ सकता है।

    हालांकि, संगठनों ने स्पष्ट किया है कि बंद के बावजूद इमरजेंसी और जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।

    दवा व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम लागू किए जाएं, फार्मासिस्ट की निगरानी अनिवार्य की जाए और फर्जी प्रिस्क्रिप्शन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

  • बंगाल में आरक्षण नीति पर नया मोड़, ओबीसी कोटा गणित बदला; कई समुदायों की स्थिति में बड़ा बदलाव

    बंगाल में आरक्षण नीति पर नया मोड़, ओबीसी कोटा गणित बदला; कई समुदायों की स्थिति में बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में आरक्षण व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक और नीतिगत बदलाव देखने को मिला है, जहां ओबीसी वर्गीकरण प्रणाली में संशोधन कर पुरानी सूची को फिर से लागू कर दिया गया है। इस फैसले के बाद राज्य की आरक्षण संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है, जिससे सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नई चर्चा शुरू हो गई है। यह कदम अदालत के निर्देशों और मौजूदा नियमों के अनुपालन के संदर्भ में उठाया गया बताया जा रहा है, जिसके तहत पहले लागू संशोधित ओबीसी सूची को रद्द कर दिया गया है।

    इस बदलाव के बाद राज्य में 2010 से पहले की ओबीसी सूची को बहाल किया गया है, जिसमें कई पारंपरिक समुदायों को फिर से शामिल किया गया है। इस सूची के अनुसार अब संबंधित समुदायों को सरकारी नौकरियों और अन्य नियुक्तियों में निर्धारित आरक्षण का लाभ मिलेगा। प्रशासनिक स्तर पर इस निर्णय को व्यवस्था में पारदर्शिता और संतुलन लाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है।

    पहले राज्य में ओबीसी आरक्षण को दो श्रेणियों में बांटा गया था, जिसमें एक वर्ग को अधिक पिछड़ा मानते हुए अलग प्रतिशत का लाभ दिया जाता था, जबकि दूसरे वर्ग को अलग कोटा मिलता था। लेकिन अब इस पूरी व्यवस्था को समाप्त कर एकीकृत प्रणाली लागू की गई है, जिससे आरक्षण ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है।

    इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में पहले जारी किए गए ओबीसी प्रमाणपत्रों की वैधता पर भी प्रभाव पड़ा है। बताया जा रहा है कि 2010 के बाद जारी कई प्रमाणपत्र अब इस नई व्यवस्था के दायरे में नहीं आते, जिससे प्रभावित लोगों की संख्या लाखों में है। हालांकि पहले से नौकरी प्राप्त कर चुके कर्मचारियों की स्थिति को सुरक्षित रखा गया है और पुराने प्रमाणपत्रों को मान्यता दी गई है।

    नई सूची में कई पारंपरिक सामाजिक समुदायों को शामिल किया गया है, जो लंबे समय से पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में आते रहे हैं। इसके साथ ही कुछ अल्पसंख्यक समुदायों को भी पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया है, जिससे आरक्षण ढांचे का सामाजिक संतुलन बदलता हुआ दिखाई दे रहा है।

    इस निर्णय के बाद राज्य में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। विभिन्न स्तरों पर इसे सामाजिक न्याय और प्रशासनिक सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि कुछ वर्ग इसे आरक्षण नीति में बड़ा बदलाव मान रहे हैं। आने वाले समय में यह बदलाव राज्य की सामाजिक संरचना और सरकारी नौकरियों की प्रक्रिया पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

  • देवास ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: मुख्य आरोपी का भाई दिल्ली से गिरफ्तार

    देवास ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: मुख्य आरोपी का भाई दिल्ली से गिरफ्तार


    मध्य प्रदेश ।  देवास जिले के टोंककला स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट मामले में जांच एजेंसी SIT ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी मुकेश विज के भाई कपिल विज को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। इस दर्दनाक हादसे में 6 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद से जांच एजेंसियां लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थीं। गिरफ्तारी के बाद कपिल विज से पूछताछ जारी है और उससे मामले से जुड़े कई अहम खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार, SIT पिछले कई दिनों से दिल्ली के विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही थी। लगातार निगरानी और तकनीकी इनपुट के आधार पर मंगलवार को कपिल विज को गिरफ्तार किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि फैक्ट्री के संचालन में कपिल विज की अहम भूमिका थी और वह पूरे नेटवर्क का हिस्सा था। इसी आधार पर उसे मामले में आरोपी बनाया गया है।

    वहीं, मुख्य आरोपी मुकेश विज फिलहाल फरार बताया जा रहा है और उसके चीन में छिपे होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि वह पटाखा बनाने वाली मशीनें लेने के लिए चीन गया था। पुलिस और जांच एजेंसियां अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी तलाश में जुट गई हैं।

    गौरतलब है कि यह मामला बेहद गंभीर है, जिसमें फैक्ट्री में हुए विस्फोट के कारण 6 मजदूरों की जान चली गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया था और प्रशासनिक स्तर पर भी कई सवाल खड़े हुए थे। जांच में यह सामने आया कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की गई थी और बड़े पैमाने पर विस्फोटक सामग्री अवैध रूप से रखी गई थी।

    एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ कि प्रारंभिक जांच के दौरान चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मुख्य संचालक के रूप में मुकेश विज का नाम सामने आया। अब उसके भाई कपिल विज की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।

    पुलिस के अनुसार, देवास से भेजी गई विशेष टीम ने दिल्ली में कार्रवाई करते हुए कपिल विज को पकड़ा और अब उसे देवास लाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अब कुल छह आरोपियों को नामजद किया जा चुका है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    इस बीच हादसे के बाद प्रशासनिक लापरवाही पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि फैक्ट्री में लाइसेंस से अधिक विस्फोटक सामग्री रखी गई थी और सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया था। यहां तक कि बिना पूर्ण निर्माण और सुरक्षा इंतजामों के ही फैक्ट्री में उत्पादन शुरू कर दिया गया था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले ही कुछ प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होना अभी बाकी है। राजनीतिक स्तर पर भी इस हादसे को लेकर बयानबाजी जारी है और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

    फिलहाल SIT की प्राथमिकता मुख्य आरोपी मुकेश विज को गिरफ्तार करना है, ताकि पूरे रैकेट और फैक्ट्री संचालन के पीछे की असल सच्चाई सामने लाई जा सके। पुलिस का दावा है कि जल्द ही फरार आरोपी को भी पकड़ लिया जाएगा।

  • जटाधारी बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन: भक्तों ने किए दिव्य दर्शन

    जटाधारी बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन: भक्तों ने किए दिव्य दर्शन


    मध्य प्रदेश ।  विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में बुधवार तड़के भव्य और दिव्य भस्म आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बाबा महाकाल के गर्भगृह में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्ति वाचन किया गया और विधिवत आज्ञा लेने के बाद चांदी द्वार खोला गया। इसके बाद गर्भगृह के पट खोलकर बाबा महाकाल के दर्शन का क्रम प्रारंभ हुआ।

    आरती की शुरुआत में पुजारियों द्वारा भगवान महाकाल का श्रृंगार उतारा गया और जलाभिषेक किया गया। इसके बाद पंचामृत से विशेष पूजन किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस का उपयोग कर भगवान का अभिषेक किया गया। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार और आरती की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो गया।

    पंचामृत पूजन के बाद कर्पूर आरती की गई और इसके पश्चात बाबा महाकाल को भस्म अर्पित कर उनका दिव्य श्रृंगार किया गया। जटाधारी स्वरूप में भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों की मालाओं से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही उन्हें ड्रायफ्रूट, फल और मिठाई का भोग भी अर्पित किया गया।

    भस्म अर्पण की यह विशेष परंपरा महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से निभाई गई, जिसे महाकालेश्वर मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था और भी गहरी हो जाती है।

    इस दौरान नंदी हाल में नंदी महाराज का भी विशेष स्नान, ध्यान और पूजन किया गया, जिसके बाद पूरी भस्म आरती की प्रक्रिया पूर्ण हुई। आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और आस्था के इस अद्भुत दृश्य ने पूरे मंदिर परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। हर ओर “जय श्री महाकाल” के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा और भक्तों ने इस अलौकिक क्षण को अपने जीवन का सौभाग्य माना।

  • इटली दौरे में पीएम मोदी-मेलोनी की दोस्ती चर्चा में: कोलोजियम में सेल्फी, रोम की सड़कों पर साथ सफर

    इटली दौरे में पीएम मोदी-मेलोनी की दोस्ती चर्चा में: कोलोजियम में सेल्फी, रोम की सड़कों पर साथ सफर



    नई दिल्ली। इटली दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात इस बार खास अंदाज में चर्चा का विषय बन गई। रोम में दोनों नेताओं के बीच न सिर्फ औपचारिक बातचीत हुई, बल्कि उनका दोस्ताना अंदाज भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

    पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को एक खास “मेलोडी” नाम की टॉफी गिफ्ट की, जिसे लेकर मेलोनी ने एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए खुशी जताई और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके लिए बहुत अच्छी टॉफी लेकर आए हैं, इसके लिए उन्होंने धन्यवाद भी दिया।

    इस मुलाकात के दौरान दोनों नेता रोम की सड़कों पर एक ही कार में साथ नजर आए और करीब 2000 साल पुराने ऐतिहासिक कोलोजियम का दौरा किया। वहां दोनों ने साथ में तस्वीरें भी खिंचवाईं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं।

    इससे पहले दोनों नेताओं ने साथ में डिनर किया और कई अहम वैश्विक मुद्दों पर अनौपचारिक बातचीत भी की। मेलोनी ने मोदी के साथ एक सेल्फी साझा करते हुए लिखा “वेलकम माय फ्रेंड”, जिसने दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों को और भी उजागर किया।

    सूत्रों के अनुसार, इस दौरे में भारत और इटली के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, एडवांस टेक्नोलॉजी, रक्षा, ऊर्जा और ग्लोबल सप्लाई चेन जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत हुई।

    भारत और इटली के बीच वर्तमान में 14 अरब यूरो से अधिक का व्यापार होता है और दोनों देश मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, फार्मा और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। इस दौरे में स्पेशल स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने पर भी विचार किया गया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं से भी मुलाकात की, जिसमें भारत में निवेश और नई औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

    इसके अलावा दोनों नेताओं ने वैश्विक मुद्दों जैसे मिडिल-ईस्ट तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर भी विचार साझा किए।

    गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी 2024 में इटली का दौरा कर चुके हैं, जहां उन्होंने जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। यह यात्रा उनके पांच देशों के दौरे का अंतिम पड़ाव रहा, जिसमें यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे शामिल रहे।

  • पानी की किल्लत से गुस्सा फूटा: महिलाओं के प्रदर्शन के दौरान वाहन निकालने पर विवाद

    पानी की किल्लत से गुस्सा फूटा: महिलाओं के प्रदर्शन के दौरान वाहन निकालने पर विवाद


    मध्य प्रदेश । देवास शहर के आवास नगर क्षेत्र में बुधवार को जल संकट को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। लंबे समय से पानी की नियमित सप्लाई न होने और नलों के सीमित समय तक चालू रहने से नाराज महिलाओं ने मुख्य मार्ग पर उतरकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के चलते सड़क पर यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया और करीब 15 से 20 मिनट तक नारेबाजी के साथ विरोध प्रदर्शन चलता रहा।

    प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय बिगड़ गए जब एक ट्रक चालक ने जाम के बीच से अपना वाहन निकालने की कोशिश की। इस पर मौजूद लोगों और चालक के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई। इसी दौरान पार्षद प्रतिनिधि राज वर्मा ने गुस्से में आकर ट्रक ड्राइवर पर चप्पल फेंक दी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    आवास नगर की महिलाओं का कहना था कि क्षेत्र में लंबे समय से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। कई बार शिकायत करने के बावजूद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, जिसके चलते उन्हें मजबूर होकर सड़क पर उतरना पड़ा। महिलाओं ने एकजुट होकर मुख्य मार्ग को पूरी तरह से बंद कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    इस प्रदर्शन में पूर्व पार्षद प्रत्याशी उषा अग्रवाल भी मौजूद रहीं, जिन्होंने महिलाओं के साथ धरने में हिस्सा लिया। चक्काजाम के दौरान पार्षद प्रतिनिधि राज वर्मा और उषा अग्रवाल के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। राज वर्मा ने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति के घर में पहले से ही दो नल कनेक्शन मौजूद हैं, जिसके कारण असमान जल वितरण को लेकर विवाद और गहरा गया।

    स्थिति बिगड़ती देख मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और उन्होंने लोगों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक बातचीत और समझाइश के बाद प्रदर्शनकारियों ने चक्काजाम समाप्त किया और यातायात बहाल हुआ।

    प्रदर्शन खत्म होने के बाद पार्षद प्रतिनिधि राज वर्मा ने कहा कि जल संकट एक गंभीर समस्या है और इस मुद्दे को लेकर संबंधित अधिकारियों से चर्चा की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि क्षेत्र में पानी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे।

    हालांकि इस घटना ने एक बार फिर शहर में जल आपूर्ति व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा ताकि उन्हें इस तरह के विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर न होना पड़े।

  • चित्रकूट में पीएम स्वनिधि योजना पर सख्ती: 460 आवेदन बैंक में लंबित, एक सप्ताह में निपटाने के आदेश

    चित्रकूट में पीएम स्वनिधि योजना पर सख्ती: 460 आवेदन बैंक में लंबित, एक सप्ताह में निपटाने के आदेश



    चित्रकूट । चित्रकूट में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की धीमी प्रगति को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। एडीएम न्यायिक अरुण कुमार यादव ने बैंक प्रतिनिधियों और नगर निकायों के ईओ के साथ समीक्षा बैठक कर लंबित आवेदनों पर नाराजगी जताई और तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।

    जानकारी के अनुसार, वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में नगर निकायों को कुल 885 वेंडरों को योजना से लाभान्वित करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके तहत नगर पालिका कर्वी सहित नगर पंचायत मऊ, मानिकपुर और राजापुर में बड़ी संख्या में स्ट्रीट वेंडरों ने आवेदन किया था।

    हालांकि अब तक केवल 124 लाभार्थियों को ही बैंक से 15 हजार रुपये का लोन मिल पाया है, जबकि 460 आवेदन अभी भी विभिन्न बैंकों में लंबित पड़े हैं। लंबित मामलों के कारण योजना की प्रगति प्रभावित हो रही है और लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है।

    बैठक में एडीएम न्यायिक ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी बैंक एक सप्ताह के भीतर लंबित आवेदनों का निस्तारण करें और पात्र वेंडरों को जल्द से जल्द ऋण उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    उन्होंने नगर निकायों को भी निर्देशित किया कि वे अपने-अपने लक्ष्यों को समय पर पूरा करें और लाभार्थियों को योजना का अधिकतम लाभ दिलाना सुनिश्चित करें। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि प्रगति में सुधार न होने पर संबंधित विभागों की जवाबदेही तय की जाएगी।

    यह योजना छोटे व्यापारियों और स्ट्रीट वेंडरों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से चलाई जा रही है, लेकिन लंबित आवेदनों के कारण इसकी रफ्तार पर असर पड़ा है।

  • ई-प्रिस्क्रिप्शन को लेकर विवाद: दवा बिक्री नियमों पर उठी सख्त मांग

    ई-प्रिस्क्रिप्शन को लेकर विवाद: दवा बिक्री नियमों पर उठी सख्त मांग


    मध्य प्रदेश । शाजापुर जिले में बुधवार को दवा व्यापारियों ने ऑनलाइन दवा बिक्री और इससे जुड़े नियमों के विरोध में एकदिवसीय सांकेतिक हड़ताल की, जिससे पूरे जिले के मेडिकल स्टोर दिनभर बंद रहे। यह हड़ताल शाजापुर जिला केमिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर की गई, जिसमें बड़ी संख्या में केमिस्ट शामिल हुए। विरोध के दौरान दवा व्यापारियों ने कलेक्ट कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम मनीषा वास्कले को सौंपा।

    ज्ञापन में मुख्य रूप से इस बात पर चिंता जताई गई कि इंटरनेट के माध्यम से बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के दवाइयों की बिक्री और होम डिलीवरी तेजी से बढ़ रही है। केमिस्टों का कहना है कि यह प्रवृत्ति जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, क्योंकि इससे दवाओं के गलत और अनियंत्रित उपयोग की आशंका बढ़ जाती है।

    दवा व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स भारी छूट देकर दवाइयों की बिक्री कर रहे हैं, जिससे स्थानीय और लाइसेंसधारी केमिस्टों का व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि छोटे मेडिकल स्टोर इस प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पा रहे हैं, जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।

    एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद कई ई-कॉमर्स कंपनियां लंबे समय से दवाओं की बिक्री कर रही हैं। केमिस्टों ने केंद्र सरकार द्वारा जारी GSR 817(E) और GSR 220(E) को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग भी की है।

    दवा व्यापारियों ने सरकार से यह भी अपील की कि बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के किसी भी प्रकार की दवा बिक्री और होम डिलीवरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा अपनाई जा रही डीप डिस्काउंटिंग और प्रीडेटरी प्राइसिंग जैसी नीतियों पर भी सख्त रोक लगाने की मांग की गई है, ताकि बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

    जिला अध्यक्ष विकास सिंदल ने बताया कि यह हड़ताल ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) और मध्यप्रदेश केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर आयोजित की गई थी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आगे बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

    पूरे जिले में मेडिकल स्टोर बंद रहने से सामान्य दवा खरीदने वाले लोगों को भी थोड़ी असुविधा का सामना करना पड़ा, हालांकि आपातकालीन सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं।

  • भारत की एयर डिफेंस क्षमता और मजबूत, इस हफ्ते मिलेगा S-400 का चौथा स्क्वॉड्रन, सीमा सुरक्षा पर बढ़ेगी नजर

    भारत की एयर डिफेंस क्षमता और मजबूत, इस हफ्ते मिलेगा S-400 का चौथा स्क्वॉड्रन, सीमा सुरक्षा पर बढ़ेगी नजर


    नई दिल्ली । भारत की वायु रक्षा क्षमता को इस सप्ताह एक और बड़ा विस्तार मिलने जा रहा है, जब रूस से S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम का चौथा स्क्वॉड्रन देश में पहुंचने की संभावना है। इस नई खेप के शामिल होने के साथ ही भारत की हवाई सुरक्षा ढांचा और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है, खासकर पश्चिमी सीमा पर जहां संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्कता बनी रहती है।

    सूत्रों के अनुसार इस नए स्क्वॉड्रन को राजस्थान और उसके आसपास के रणनीतिक इलाकों में तैनात किया जा सकता है, ताकि किसी भी संभावित हवाई खतरे को समय रहते रोका जा सके। यह तैनाती भारत की बहुस्तरीय एयर डिफेंस प्रणाली को और प्रभावी बनाएगी और सीमा सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त परत जोड़ेगी।

    भारत और रूस के बीच यह डील वर्ष 2018 में हुई थी, जिसके तहत कुल पांच S-400 स्क्वॉड्रन की आपूर्ति होनी है। हालांकि रूस-यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाओं के चलते इस परियोजना में देरी देखी गई, लेकिन अब धीरे-धीरे इसकी डिलीवरी आगे बढ़ रही है। चौथे स्क्वॉड्रन के बाद अंतिम यूनिट भी आने वाले महीनों में मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    S-400 प्रणाली को दुनिया की सबसे उन्नत लंबी दूरी की एयर डिफेंस मिसाइल प्रणालियों में से एक माना जाता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन जैसे कई प्रकार के हवाई खतरों को एक साथ ट्रैक और नष्ट कर सके। इसकी उन्नत रडार प्रणाली और मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग क्षमता इसे आधुनिक युद्ध परिदृश्य में बेहद प्रभावी बनाती है।

    यह एक मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे आवश्यकता के अनुसार तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। इसकी खासियत यह भी है कि यह इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी स्थितियों में भी काम करने में सक्षम माना जाता है, जिससे युद्ध के दौरान इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।

    भारत पहले ही इस प्रणाली के तीन स्क्वॉड्रन को अपनी रक्षा व्यवस्था में शामिल कर चुका है, जो वर्तमान में सक्रिय रूप से सेवा में हैं। इन यूनिट्स के जुड़ने से भारतीय वायुसेना की निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

    विशेषज्ञों के अनुसार चौथे स्क्वॉड्रन के शामिल होने से पश्चिमी सीमा पर हवाई निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी, जिससे किसी भी संभावित खतरे का तुरंत जवाब देना संभव होगा। इस कदम को भारत की रणनीतिक रक्षा तैयारियों में एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।