Author: bharati

  • फेक बयान पर सूर्यकुमार यादव की सफाई: भारतीय टीम के साथ खड़ा हूं, अफवाहों पर न करें भरोसा

    फेक बयान पर सूर्यकुमार यादव की सफाई: भारतीय टीम के साथ खड़ा हूं, अफवाहों पर न करें भरोसा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज और पूर्व टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव ने सोशल मीडिया पर उनके नाम से वायरल हो रहे कथित बयानों को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटरनेट पर प्रसारित किए जा रहे कई बयान पूरी तरह भ्रामक हैं और उनका उन बयानों से कोई संबंध नहीं है। सूर्यकुमार ने लोगों से अपील की है कि बिना पुष्टि किसी भी जानकारी पर भरोसा न करें और न ही उसे आगे साझा करें।

    सूर्यकुमार यादव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि वह भारतीय टीम के प्रदर्शन से बेहद खुश हैं और हमेशा टीम की सफलता की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि टीम के खिलाड़ी देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें हमेशा उनका पूरा समर्थन मिलेगा। उन्होंने भारतीय टीम के उज्ज्वल भविष्य पर भरोसा जताते हुए सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं।

    अपने संदेश में सूर्यकुमार यादव ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के लिए भी विशेष शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि वैभव अपने क्रिकेट करियर के बेहद रोमांचक दौर की शुरुआत कर रहे हैं और उन्हें हर पल का आनंद लेते हुए देश का नाम रोशन करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा खिलाड़ी आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगे।

    सूर्यकुमार यादव ने अपने नाम से प्रसारित किए जा रहे कथित बयानों पर नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने साफ कहा कि सोशल मीडिया पर जो बयान उनके नाम से साझा किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने ऐसा कोई बयान न तो दिया है और न ही किसी को इसकी अनुमति दी है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि किसी भी खबर या पोस्ट को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें ताकि गलत सूचनाओं के प्रसार पर रोक लगाई जा सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय क्रिकेट, अपने साथी खिलाड़ियों और खेल के प्रति उनका समर्पण किसी भी अफवाह या झूठे बयान से कहीं अधिक मजबूत है। उनके लिए देश और टीम सर्वोपरि है तथा वह हमेशा भारतीय क्रिकेट के हित में खड़े रहेंगे। उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और क्रिकेट प्रेमी इसे जिम्मेदार और सकारात्मक पहल मान रहे हैं।

    हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट में दावा किया गया था कि सूर्यकुमार यादव ने भारतीय टी20 टीम की कप्तानी, अपने चयन और युवा खिलाड़ियों को लेकर कुछ विवादित टिप्पणियां की हैं। हालांकि अब स्वयं सूर्यकुमार यादव ने इन दावों का खंडन कर दिया है। उनकी इस स्पष्ट प्रतिक्रिया के बाद उनके नाम से फैलाए जा रहे भ्रामक बयानों पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • एमएस धोनी के 45वें जन्मदिन का जश्न: कोलकाता और ओडिशा से रांची पहुंचे फैंस, माही की एक झलक पाने का इंतजार

    एमएस धोनी के 45वें जन्मदिन का जश्न: कोलकाता और ओडिशा से रांची पहुंचे फैंस, माही की एक झलक पाने का इंतजार


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी ने मंगलवार को अपना 45वां जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर देश और विदेश से उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं मिलीं। रांची स्थित उनके आवास के बाहर सुबह से ही प्रशंसकों का जमावड़ा लगा रहा। कई फैंस सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके केवल अपने पसंदीदा क्रिकेटर की एक झलक पाने और उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देने पहुंचे।

    धोनी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ओडिशा और कोलकाता सहित कई राज्यों से प्रशंसक रांची पहुंचे। कुछ फैंस कई दिनों से वहीं ठहरे हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि धोनी बाहर आकर उनसे मुलाकात करेंगे। उनके हाथों में पोस्टर, बैनर और जन्मदिन की शुभकामनाओं वाले संदेश नजर आए। कई प्रशंसकों ने केक काटने की भी तैयारी की थी।

    ओडिशा से पहुंचे एक प्रशंसक ने बताया कि वह पिछले छह दिनों से रांची में हैं और केवल एक बार अपने पसंदीदा खिलाड़ी से मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना था कि धोनी ने अपने खेल और नेतृत्व से करोड़ों लोगों को प्रेरित किया है और वह उनके स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन की कामना करते हैं।

    कोलकाता से पहुंचे एक अन्य प्रशंसक ने बताया कि वह हर साल धोनी का जन्मदिन मनाने रांची आते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी टीम हर वर्ष धोनी के जन्मदिन और उनके एकदिवसीय क्रिकेट में पदार्पण दिवस पर सामाजिक सेवा के कार्यक्रम भी आयोजित करती है। उनके अनुसार धोनी केवल एक महान क्रिकेटर ही नहीं बल्कि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं।

    युवा प्रशंसकों में भी धोनी को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कई फैंस ने उम्मीद जताई कि माही बाहर आकर उनसे मुलाकात करेंगे, उनके साथ केक काटेंगे और कुछ समय बिताएंगे। प्रशंसकों ने उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबे जीवन की कामना करते हुए यह इच्छा भी जताई कि वह आने वाले वर्षों में भी इंडियन प्रीमियर लीग में खेलते रहें।

    महेंद्र सिंह धोनी भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तानों में गिने जाते हैं। उनकी कप्तानी में भारत ने टी20 विश्व कप, वनडे विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी जैसे बड़े आईसीसी खिताब अपने नाम किए। शांत स्वभाव, बेहतरीन नेतृत्व क्षमता और मैच फिनिश करने की कला के कारण उन्हें दुनिया भर में कैप्टन कूल के नाम से जाना जाता है। यही वजह है कि क्रिकेट से जुड़े उनके हर खास दिन पर प्रशंसकों का उत्साह देखते ही बनता है।

  • अभिषेक शर्मा के पर्सनैलिटी राइट्स केस पर 9 जुलाई को होगी अगली सुनवाई, दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगे अतिरिक्त सबूत

    अभिषेक शर्मा के पर्सनैलिटी राइट्स केस पर 9 जुलाई को होगी अगली सुनवाई, दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगे अतिरिक्त सबूत


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा से जुड़ी याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई तय करते हुए याचिकाकर्ता को विवादित ऑनलाइन सामग्री से जुड़े आवश्यक दस्तावेज और स्क्रीनशॉट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत का कहना है कि संबंधित सामग्री की जांच किए बिना कोई आदेश पारित करना उचित नहीं होगा।

    मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने कहा कि मानहानि और पर्सनैलिटी राइट्स के बीच बहुत बारीक अंतर होता है। कई मामलों में मानहानि से जुड़े विवादों में व्यक्तित्व अधिकारों का पहलू भी शामिल हो सकता है। इसलिए अदालत को किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और रिकॉर्ड का सावधानीपूर्वक परीक्षण करना आवश्यक है।

    सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में आया कि याचिका के साथ उन यूआरएल के स्क्रीनशॉट संलग्न नहीं किए गए थे जिनके माध्यम से कथित आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित होने का दावा किया गया है। इस पर अदालत ने अभिषेक शर्मा की ओर से पेश अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करें जिसमें सभी विवादित पोस्ट और यूआरएल से संबंधित स्क्रीनशॉट शामिल हों तथा वे याचिका में दी गई सूची से मेल खाते हों।

    सुनवाई के दौरान मेटा की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याचिका में दिए गए आठ यूआरएल में से दो उपलब्ध नहीं थे और उन तक पहुंच संभव नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी कहा कि एक यूआरएल पर मौजूद सामग्री पैपराजी द्वारा अपलोड की गई प्रतीत होती है और प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट नहीं है कि वह पर्सनैलिटी राइट्स के दायरे में आती है या नहीं। इस पर अभिषेक शर्मा की ओर से दलील दी गई कि संबंधित सामग्री कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के माध्यम से तैयार की गई थी। साथ ही यह भी कहा गया कि एक पोस्ट में उनकी मैनेजर को उनकी गर्लफ्रेंड के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो गलत और भ्रामक है।

    याचिका में अभिषेक शर्मा ने अदालत से अनुरोध किया है कि उनके व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की जाए और सोशल मीडिया तथा अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कथित रूप से भ्रामक, मानहानिकारक और एआई से तैयार सामग्री को हटाने के निर्देश दिए जाएं। उनका कहना है कि ऐसी सामग्री उनकी प्रतिष्ठा और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा सकती है।

    फिलहाल अभिषेक शर्मा भारतीय क्रिकेट टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर हैं और पांच मैचों की टी20 श्रृंखला का हिस्सा हैं। अब इस मामले में सभी की नजर 9 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी, जब अदालत अतिरिक्त दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्यवाही करेगी।

  • एमपी में मानसून का कहर: इंदौर में सड़क धंसी, पन्ना जिला अस्पताल में घुसा पानी, रायसेन का आश्रम जलमग्न

    एमपी में मानसून का कहर: इंदौर में सड़क धंसी, पन्ना जिला अस्पताल में घुसा पानी, रायसेन का आश्रम जलमग्न


    इंदौर । मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के 35 से अधिक जिलों में झमाझम बारिश दर्ज की गई। कहीं सड़कें धंस गईं तो कहीं अस्पताल और आश्रम जलमग्न हो गए। कई स्थानों पर नदियां और नाले उफान पर हैं, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है।

    इंदौर जिले के जेतकारण गांव में भारी बारिश के कारण सड़क धंस गई। सड़क टूटने से स्कूली बच्चों का रास्ता बंद हो गया। ऐसे में ग्रामीणों ने मानव शृंखला बनाकर बच्चों को उफनते नाले से सुरक्षित पार कराया। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में मानसून के दौरान बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया।

    पन्ना जिले में बारिश का असर जिला अस्पताल तक पहुंच गया। अस्पताल के सर्जिकल वार्ड और डिलीवरी वार्ड की गैलरी में घुटनों तक पानी भर गया। जलभराव के कारण मरीजों और अस्पताल स्टाफ को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल परिसर में पानी भरने की तस्वीरों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    रायसेन जिले के बरेली क्षेत्र स्थित बापौली धाम आश्रम में भी भारी बारिश के बाद पानी भर गया। आश्रम परिसर में मौजूद संस्कृत पाठशाला के करीब 60 छात्रों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। शिव मंदिर, गुरुदेव की कुटी और गोशाला में भी पानी घुस गया। समय रहते छात्रों को सुरक्षित निकाल लेने से बड़ा हादसा टल गया।

    खजुराहो में बीते 24 घंटे के दौरान प्रदेश में सबसे अधिक 4.4 इंच बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण खूडर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और खतरे के निशान के करीब पहुंच गया। एहतियात के तौर पर खजुराहो-जटकरा मार्ग बंद कर दिया गया, हालांकि इसके बावजूद कुछ लोग नदी पार करने की कोशिश करते नजर आए, जिससे प्रशासन ने लोगों से जोखिम नहीं उठाने की अपील की।

    पन्ना जिले का हरसा-बागोहा नाला भी तेज बारिश के बाद उफान पर आ गया। पुल के ऊपर से पानी बहने के बावजूद कई लोग जान जोखिम में डालकर नाला पार करते दिखाई दिए। प्रशासन ने लोगों से ऐसे स्थानों से दूर रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

    इसी बीच प्रदेश के एक जलप्रपात क्षेत्र में पिकनिक मनाने गए दो युवक अचानक जलस्तर बढ़ने से बीच धारा में फंस गए। सूचना मिलने पर पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने देर रात रेस्क्यू अभियान चलाकर दोनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते किए गए इस अभियान से बड़ा हादसा टल गया।

    मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों को नदी-नालों, जलभराव वाले इलाकों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है। साथ ही अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है।

  • तेलंगाना में पत्नी और प्रेमी पर पति की हत्या का आरोप, छत से धक्का देने के बाद जिंदा बचने पर कथित तौर पर जहरीला क्लीनर इंजेक्ट करने का मामला उजागर

    तेलंगाना में पत्नी और प्रेमी पर पति की हत्या का आरोप, छत से धक्का देने के बाद जिंदा बचने पर कथित तौर पर जहरीला क्लीनर इंजेक्ट करने का मामला उजागर

    नई दिल्ली । तेलंगाना के निजामाबाद जिले में एक व्यक्ति की मौत का मामला पुलिस जांच के बाद कथित हत्या की साजिश में बदल गया है। प्रारंभिक तौर पर इसे नशे की हालत में इमारत से गिरने की घटना बताया गया था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पुलिस के सामने ऐसे तथ्य आए जिनके आधार पर मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार किया गया। मामले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान प्रशांत के रूप में हुई है, जिसकी शादी कई वर्ष पहले संध्या से हुई थी। शुरुआती जांच में सामने आया कि पिछले कुछ समय से पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद चल रहा था। जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि महिला के किसी अन्य व्यक्ति के साथ कथित संबंधों को लेकर परिवार में तनाव बना हुआ था। इसी विवाद के कारण दोनों के बीच अक्सर कहासुनी होती थी, जिससे पारिवारिक संबंध लगातार बिगड़ते गए।

    जांच अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर यह आशंका बनी कि पति की हत्या की योजना पहले से तैयार की गई थी। आरोप है कि घटना वाले दिन प्रशांत को पहले शराब पिलाई गई और बाद में उसे एक इमारत की छत पर ले जाया गया। पुलिस के अनुसार वहां से उसे नीचे धक्का दिया गया। हालांकि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उसकी तत्काल मौत नहीं हुई।

    पुलिस का दावा है कि इसके बाद आरोपियों ने कथित रूप से एक और खतरनाक कदम उठाया। जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार घायल अवस्था में पड़े प्रशांत को एक घरेलू सफाई उत्पाद सिरिंज के माध्यम से शरीर में इंजेक्ट किया गया। पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक जांच के दौरान मिले निष्कर्षों के आधार पर पुलिस ने इस पहलू को भी अपनी जांच में शामिल किया। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों ने मामले की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    घटना के बाद आरोपियों ने इसे दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की। परिवार और आसपास के लोगों को बताया गया कि प्रशांत नशे की हालत में छत से गिर गया था। हालांकि मृतक के परिजनों को घटना की परिस्थितियों पर संदेह हुआ। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, संबंधित लोगों से पूछताछ की और फोरेंसिक रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्यों को एकत्र किया।

    जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के बाद दोनों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। पुलिस का कहना है कि मामले में सभी तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है ताकि अदालत में मजबूत चार्जशीट प्रस्तुत की जा सके।

    यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई किसी भी मौत की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कितनी महत्वपूर्ण होती है। शुरुआती तौर पर दुर्घटना जैसा दिखाई देने वाला मामला विस्तृत जांच के बाद कथित हत्या की साजिश में बदल गया। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना अभी जारी है और यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो उन्हें भी कानूनी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। दोष तय करना अंततः अदालत का अधिकार है और सभी आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

  • NEET पेपर लीक के विरोध में इंदौर में सातवें दिन भी धरना जारी: कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    NEET पेपर लीक के विरोध में इंदौर में सातवें दिन भी धरना जारी: कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी


    इंदौर । इंदौर में NEET पेपर लीक मामले और छात्रों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। टंट्याभील चौराहे पर छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि बारिश के बावजूद धरनास्थल पर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने टेंट लगाकर अपना आंदोलन जारी रखा और नारेबाजी, कैंडल मार्च, हवन तथा क्रांतिकारी गीतों के माध्यम से अपनी मांगों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

    आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र संगठनों का कहना है कि देशभर में सामने आए NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के संबंध में कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।

    धरने में केवल NEET परीक्षा का मुद्दा ही नहीं बल्कि प्रदेश के छात्रों से जुड़े कई अन्य विषय भी शामिल किए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने छात्रवृत्ति का समय पर भुगतान, छात्रावास की बेहतर सुविधाएं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कुल 23 मांगों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखा है। उनका कहना है कि छात्रों की समस्याओं का लंबे समय से समाधान नहीं हो रहा है, इसलिए उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    धरनास्थल पर पिछले सात दिनों के दौरान कई प्रतीकात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों ने दिवंगत छात्रों की स्मृति में कैंडल मार्च निकाला, हवन किया और थाली बजाकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। उनका कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य छात्रों की आवाज शासन तक पहुंचाना है।

    प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारियों के सामने सभी मांगें रखी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में आगामी दिनों में विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

    छात्र संगठनों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। उनका आग्रह है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में भी शीघ्र कदम उठाए जाएं।

  • भूपेंद्र यादव के कार्यालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, निजी सचिव समेत तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाया गया

    भूपेंद्र यादव के कार्यालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, निजी सचिव समेत तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाया गया

    नई दिल्ली । केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय में महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। मंत्रालय ने निजी सचिव सहित तीन अधिकारियों को उनके वर्तमान दायित्वों से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया है। जारी आदेश के अनुसार यह कार्रवाई सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के निर्देशों के अनुरूप की गई है। हालांकि इस बदलाव के पीछे किसी विशेष कारण की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के तहत मंत्री के निजी सचिव अमर सिंह को उनके पद से मुक्त करते हुए उनके मूल कैडर, राजस्व विभाग में वापस भेज दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि वह तत्काल प्रभाव से अपने मूल विभाग में कार्यभार ग्रहण करें। अमर सिंह भारतीय राजस्व सेवा के वर्ष 2010 बैच के अधिकारी हैं और मंत्री कार्यालय में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल रहे थे।

    इसी क्रम में अतिरिक्त निजी सचिव शैलेश कुमार सिंह को भी निर्धारित कार्यकाल पूरा होने से पहले उनके मूल कैडर में वापस भेजने का निर्णय लिया गया है। उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनकी प्रतिनियुक्ति समय से पहले समाप्त कर दी गई है।

    मंत्री कार्यालय में कार्यरत एक अन्य अतिरिक्त निजी सचिव आयुष शरण को भी उनके वर्तमान पद से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया गया है। आदेश के अनुसार सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति मिलने के बाद उन्हें भी तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया गया है। इस प्रकार एक साथ तीन वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण और कार्यमुक्त किए जाने को मंत्रालय के भीतर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव माना जा रहा है।

    यह आदेश पर्यावरण मंत्रालय की ओर से 3 जुलाई 2026 को जारी किया गया था। आधिकारिक दस्तावेज में उल्लेख किया गया है कि यह निर्णय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के 2 जुलाई 2026 के आदेश के आधार पर लिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सभी आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए यह कार्रवाई की गई है।

    आदेश पर मंत्रालय के उप सचिव विभूति पंजियार के हस्ताक्षर हैं। इसकी प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग तथा अन्य संबंधित सरकारी कार्यालयों को भी भेजी गई हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह बदलाव नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत उच्च स्तर पर अनुमोदित निर्णय का हिस्सा है।

    फिलहाल मंत्रालय की ओर से यह नहीं बताया गया है कि इन अधिकारियों को हटाने के पीछे कोई विशेष प्रशासनिक या कार्यगत कारण है अथवा यह नियमित कैडर प्रबंधन प्रक्रिया का हिस्सा है। इसी तरह मंत्री कार्यालय में खाली हुए पदों पर नए अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में समय-समय पर प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी होने, कैडर प्रबंधन अथवा अन्य प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर अधिकारियों की तैनाती और वापसी की प्रक्रिया सामान्य रूप से चलती रहती है। हालांकि किसी मंत्री के कार्यालय में एक साथ कई वरिष्ठ अधिकारियों का बदलाव स्वाभाविक रूप से ध्यान आकर्षित करता है।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय में इन महत्वपूर्ण पदों पर नए अधिकारियों की नियुक्ति कब की जाती है। मंत्रालय की ओर से जैसे ही नई तैनातियों या इस प्रशासनिक फेरबदल से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी जारी की जाएगी, स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक आदेशों के अनुसार तीनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनके वर्तमान दायित्वों से मुक्त कर संबंधित विभागों में रिपोर्ट करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

  • 'सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक लड़ाई का मंच नहीं'-करूर मामले में डीएमके को झटका, मुख्यमंत्री विजय की यात्रा पर रोक लगाने से इनकार

    'सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक लड़ाई का मंच नहीं'-करूर मामले में डीएमके को झटका, मुख्यमंत्री विजय की यात्रा पर रोक लगाने से इनकार

    नई दिल्ली । करूर भगदड़ मामले से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को राहत देते हुए उनकी प्रस्तावित करूर यात्रा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने इस मामले में दायर याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि न्यायपालिका राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का मंच नहीं बन सकती और राजनीतिक दलों को अपने मतभेद लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाने चाहिए।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी मुख्यमंत्री की सार्वजनिक गतिविधियों या पीड़ित परिवारों से मिलने जैसे कार्यक्रमों में हस्तक्षेप करना न्यायालय का कार्यक्षेत्र नहीं है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित मामले की प्राथमिकी में मुख्यमंत्री विजय का नाम आरोपी के रूप में दर्ज नहीं है, इसलिए केवल आशंकाओं के आधार पर उनकी यात्रा पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता।

    मुख्यमंत्री विजय करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात करने तथा प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और अन्य राहत उपायों की घोषणा करने वाले हैं। इसी प्रस्तावित दौरे को लेकर आपत्ति जताते हुए याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस तरह की गतिविधियों से मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।

    अदालत ने इस दलील पर असहमति जताते हुए कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को अपने प्रतिद्वंद्वी के बयानों या कार्यक्रमों पर आपत्ति है तो उसका जवाब राजनीतिक मंच पर दिया जाना चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक विवादों को अदालत में लाने की प्रवृत्ति उचित नहीं है और इससे न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।

    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि करूर भगदड़ मामले की जांच पहले से ही स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से आगे बढ़ रही है। ऐसे में जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने संबंधी किसी भी आरोप का मूल्यांकन तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा, न कि राजनीतिक आशंकाओं के आधार पर। अदालत ने संकेत दिया कि जांच एजेंसियां अपने दायित्वों का निर्वहन स्वतंत्र रूप से करेंगी।

    इस मामले में पहले से जांच की निगरानी के लिए न्यायिक व्यवस्था लागू है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि जब जांच निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार चल रही है, तब केवल राजनीतिक मतभेदों के आधार पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता।

    सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को राजनीतिक मामलों में न्यायिक संयम का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। अदालत ने दोहराया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका समाधान न्यायालय के बजाय सार्वजनिक विमर्श और राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए। इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री विजय का करूर दौरा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होने का रास्ता साफ हो गया है, जबकि करूर भगदड़ मामले की जांच अपनी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी।

  • MP : 190 तहसीलदार और प्रभारी डिप्टी कलेक्टर पदोन्नत, बने डिप्टी कलेक्टर, आदेश जारी

    MP : 190 तहसीलदार और प्रभारी डिप्टी कलेक्टर पदोन्नत, बने डिप्टी कलेक्टर, आदेश जारी

    भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए प्रदेश के 190 तहसीलदार एवं प्रभारी डिप्टी कलेक्टरों को नियमित रूप से डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नत कर दिया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आदेश जारी कर सभी अधिकारियों की पदोन्नति को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

    आदेश के अनुसार, पदोन्नत किए गए अधिकारी पूर्व से प्रभारी डिप्टी कलेक्टर अथवा तहसीलदार के रूप में कार्यरत थे। अब इन्हें मध्यप्रदेश राज्य प्रशासनिक सेवा के डिप्टी कलेक्टर (वरिष्ठ श्रेणी) के पद पर नियमित पदोन्नति प्रदान की गई है। पदोन्नति के साथ ही इन अधिकारियों को नियमित डिप्टी कलेक्टर का दर्जा मिल गया है।

    सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह पदोन्नति मध्यप्रदेश लोक सेवा (पदोन्नति) नियमों तथा विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की अनुशंसा के आधार पर की गई है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि पदोन्नति शासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अधीन प्रभावी रहेगी।

    विभाग ने सभी संबंधित विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों तथा अन्य अधिकारियों को आदेश की प्रति भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पदोन्नत अधिकारियों की सूची भी आदेश के साथ संलग्न की गई है, जिसमें सभी 190 अधिकारियों के नाम एवं वर्तमान पदस्थापना का उल्लेख है।

    इस निर्णय से प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती मिलने के साथ-साथ जिलों एवं उपखंड स्तर पर नियमित डिप्टी कलेक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों के संचालन में गति आने की उम्मीद है।

  • पत्नी की हत्या छिपाने के लिए खरीदा जहरीला कोबरा: पोस्टमार्टम ने खोली साजिश की परतें, बैंक अफसर को उम्रकैद

    पत्नी की हत्या छिपाने के लिए खरीदा जहरीला कोबरा: पोस्टमार्टम ने खोली साजिश की परतें, बैंक अफसर को उम्रकैद


    इंदौर । इंदौर के बहुचर्चित वर्ष 2019 के शिवानी हत्याकांड में करीब साढ़े छह साल बाद अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी बैंक अधिकारी अमितेष उर्फ शालू पटेरिया को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि आरोपी ने अपनी पत्नी की पहले गला घोंटकर हत्या की और इसके बाद मौत को सर्पदंश से हुई प्राकृतिक मृत्यु दिखाने के लिए बेहद सुनियोजित साजिश रची। इस मामले में आरोपी को हत्या के अलावा साक्ष्य मिटाने और संरक्षित वन्यजीव की अवैध हत्या के मामले में भी अलग-अलग सजा सुनाई गई है।

    अभियोजन के अनुसार घटना एक दिसंबर 2019 को इंदौर के संचार नगर स्थित घर में हुई थी। आरोपी अपनी पत्नी शिवानी को अस्पताल लेकर पहुंचा और डॉक्टरों को बताया कि उसकी मौत सांप के काटने से हुई है। लेकिन मृतका के परिजनों ने शुरू से ही इस पर संदेह जताया और हत्या की आशंका व्यक्त की। घटनास्थल पर एक मृत कोबरा मिलने से मामला और उलझ गया।

    जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे तथ्य मिले जिन्होंने पूरी कहानी बदल दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि शिवानी की मौत सर्पदंश से नहीं बल्कि मुंह और गला दबाने से दम घुटने के कारण हुई थी। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों ने इस निष्कर्ष को मजबूत किया। बिस्तर, तकिए और अन्य सामग्री से मिले वैज्ञानिक प्रमाणों ने हत्या की पुष्टि की।

    जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी राजस्थान के अलवर से करीब 620 किलोमीटर दूर जाकर ब्लैक डेजर्ट प्रजाति का जहरीला कोबरा खरीदकर लाया था। आरोप है कि उसने कई दिनों तक उसे घर में छिपाकर रखा और हत्या के बाद कोबरा का उपयोग सर्पदंश की झूठी कहानी गढ़ने के लिए किया। बाद में उसने कोबरा को भी मार दिया। अदालत ने इसे सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र माना।

    पुलिस जांच के दौरान आरोपी से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। अभियोजन ने मोबाइल रिकॉर्ड, कथित बातचीत, फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयानों को अदालत में पेश किया। अदालत ने उपलब्ध वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को दोषी ठहराया।

    मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू वन्यजीव संरक्षण कानून से भी जुड़ा रहा। जांच में कोबरा की अवैध हत्या की पुष्टि होने के बाद आरोपी पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई। अदालत ने इस अपराध के लिए तीन वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा साक्ष्य मिटाने के अपराध में भी अलग से कारावास का दंड दिया गया।

    इस फैसले के साथ मध्य प्रदेश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल शिवानी हत्याकांड का न्यायिक अध्याय समाप्त हुआ। यह मामला इस बात का उदाहरण माना जा रहा है कि आधुनिक फोरेंसिक जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्य किस तरह जटिल आपराधिक मामलों की सच्चाई सामने लाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।