Author: bharati

  • एमपी के 35 जिलों में झमाझम बारिश, खजुराहो-मंडला में 4 इंच से ज्यादा पानी; कई जगह जनजीवन प्रभावित

    एमपी के 35 जिलों में झमाझम बारिश, खजुराहो-मंडला में 4 इंच से ज्यादा पानी; कई जगह जनजीवन प्रभावित


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में जुलाई की शुरुआत के साथ ही मानसून ने पूरी रफ्तार पकड़ ली है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 35 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक वर्षा खजुराहो में 4.4 इंच और मंडला में 4.2 इंच रिकॉर्ड की गई। लगातार छह दिनों से हो रही बारिश के कारण प्रदेश की औसत वर्षा करीब 7 इंच तक पहुंच गई है। जून के आखिर तक जहां प्रदेश में बारिश सामान्य से 33 प्रतिशत कम थी, वहीं अब यह कमी घटकर केवल 1 प्रतिशत रह गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार सतना, रतलाम, सीधी, उमरिया, पन्ना, पचमढ़ी, रीवा, श्योपुर, नौगांव, भोपाल, नरसिंहपुर, दमोह, टीकमगढ़, बैतूल, नर्मदापुरम, इंदौर, सिवनी, सागर, शिवपुरी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, रायसेन, धार, जबलपुर, गुना, उज्जैन, खंडवा, खरगोन, दतिया, मैहर, शाजापुर, सीहोर, छतरपुर, बुरहानपुर, बड़वानी और पांढुर्णा समेत कई जिलों में अच्छी बारिश हुई।

    बारिश से जनजीवन प्रभावित, दो छात्राएं घायल

    लगातार बारिश के बीच बड़वानी जिले के सेंधवा स्थित सांदीपनि (सीएम राइज) स्कूल में बड़ा हादसा हो गया। कक्षा 9 के कमरे की छत का प्लास्टर गिरने से दो छात्राओं के सिर में मामूली चोट आई। दोनों को तत्काल सिविल अस्पताल ले जाकर उपचार कराया गया। वहीं इंदौर के पास खुड़ैल रोड स्थित जेतकारण गांव में सड़क धंस जाने से स्कूली बच्चों की आवाजाही प्रभावित हुई। उफनते नाले को पार कराने के लिए ग्रामीणों ने मानव शृंखला बनाकर बच्चों को सुरक्षित दूसरी ओर पहुंचाया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है।

    खजुराहो में नदी उफान पर, सड़क बंद

    खजुराहो में लगातार 24 घंटे से हो रही मूसलधार बारिश के कारण खूडर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। एहतियात के तौर पर खजुराहो-जटकरा मार्ग को बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के पास जाने से बचने की अपील की है। पन्ना जिले में हरसा-बागोहा नाला उफान पर है। पुल के ऊपर से पानी बहने के बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

    हरदा में सामान्य से ज्यादा बारिश

    हरदा जिले में उमस के बाद बारिश का दौर शुरू हुआ। मौसम विभाग के मुताबिक जिले में इस मानसून सीजन में अब तक करीब 13 इंच बारिश हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से अधिक है। किसानों का कहना है कि खरीफ फसलों के लिए यह बारिश बेहद लाभदायक साबित होगी।

    इन जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम विभाग ने गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर और छतरपुर जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा बड़वानी, धार, बुरहानपुर, रतलाम, टीकमगढ़, पन्ना सहित कई जिलों में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों, जलभराव वाले क्षेत्रों और कमजोर पुल-पुलियों से दूरी बनाए रखें तथा मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें।

  • लगातार दूसरे दिन फिसले सोने-चांदी के भाव, घरेलू और वैश्विक बाजारों में बिकवाली से निवेशकों की बढ़ी सतर्कता

    लगातार दूसरे दिन फिसले सोने-चांदी के भाव, घरेलू और वैश्विक बाजारों में बिकवाली से निवेशकों की बढ़ी सतर्कता

    नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। कारोबारी सत्र की शुरुआत से ही दोनों कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव दिखाई दिया, जिसके कारण इनके दाम में लगभग 1.20 प्रतिशत तक की कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी नरमी का असर भारतीय बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिससे निवेशकों और कारोबारियों ने सतर्क रुख अपनाया।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने के अगस्त 2026 डिलीवरी वाले वायदा अनुबंध की शुरुआत पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले हल्की कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार के दौरान कीमतों में लगातार गिरावट बनी रही और सोना दिन के शुरुआती घंटों में एक हजार रुपये से अधिक सस्ता होकर कारोबार करता दिखाई दिया। कारोबार के दौरान सोने ने दिन का निचला स्तर भी छुआ, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में खरीदारी की तुलना में बिकवाली का दबाव अधिक बना हुआ है।

    चांदी के वायदा कारोबार में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला। सितंबर 2026 डिलीवरी वाले अनुबंध की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और शुरुआती कारोबार के दौरान इसमें और अधिक कमजोरी दर्ज की गई। कारोबार के पहले कुछ घंटों में चांदी एक प्रतिशत से अधिक टूट गई। दिन के दौरान इसके भाव लगातार दबाव में बने रहे, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का झुकाव फिलहाल सुरक्षित मुनाफावसूली की ओर है।

    अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में भी सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे। वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं में आई बिकवाली का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में बदलाव और डॉलर से जुड़े संकेतों का प्रभाव कीमती धातुओं की कीमतों पर लगातार बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशक नए आर्थिक संकेतों और केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों पर भी नजर बनाए हुए हैं।

    हालांकि कीमतों में गिरावट के बावजूद सोने की मांग से जुड़ा एक अलग रुझान भी सामने आया है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से जून तिमाही के दौरान गोल्ड लोन का दायरा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। हालिया आकलनों के अनुसार, गोल्ड लोन अब सुरक्षित ऋण श्रेणी में सबसे बड़ा एसेट क्लास बनकर उभरा है और इसने वाहन ऋण को भी पीछे छोड़ दिया है। यह संकेत देता है कि आर्थिक जरूरतों के समय लोग सोने को वित्तीय सुरक्षा के प्रभावी साधन के रूप में अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कीमती धातुओं में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। निवेशकों को केवल दैनिक मूल्य परिवर्तन के आधार पर निर्णय लेने के बजाय वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, ब्याज दरों के रुझान, मुद्रा बाजार की चाल और घरेलू मांग जैसे व्यापक कारकों पर भी ध्यान देना चाहिए। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दबाव बना रहता है तो निकट भविष्य में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वहीं, घरेलू मांग और निवेशकों की खरीदारी की रणनीति आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • भारत-इंडोनेशिया रक्षा साझेदारी को नई मजबूती, ब्रह्मोस मिसाइल आपूर्ति समझौते से स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

    भारत-इंडोनेशिया रक्षा साझेदारी को नई मजबूती, ब्रह्मोस मिसाइल आपूर्ति समझौते से स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देते हुए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस करार को भारत के रक्षा निर्यात, स्वदेशी सैन्य तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। समझौते के साथ दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, औद्योगिक सहयोग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी संबंधों को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई है।

    यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान संपन्न हुआ, जो उनके तीन देशों के विदेश दौरे का पहला चरण है। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच कई रणनीतिक और आर्थिक समझौतों को अंतिम रूप दिया गया। ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति के साथ भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    समझौते के तहत इंडोनेशिया भारत में विकसित ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली की खरीद भी करेगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित यह मिसाइल ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ क्षमता से लैस है और आधुनिक हवाई युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। यह तेजी से दिशा बदलने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों को लक्ष्य बनाकर उन्हें प्रभावी ढंग से निष्क्रिय करने में सक्षम मानी जाती है।

    जानकारी के अनुसार भारत भविष्य में इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त बैटरियां भी उपलब्ध करा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह भारत के रक्षा निर्यात कार्यक्रम को और मजबूती देगा तथा स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए नए अवसर तैयार करेगा। हाल के वर्षों में भारत ने रक्षा उपकरणों के निर्यात को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है और कई मित्र देशों के साथ इस दिशा में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास को इस साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उनके अनुसार नए समझौतों से रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन, औद्योगिक सहयोग और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक सहयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।

    रक्षा क्षेत्र के अलावा दोनों देशों ने स्वास्थ्य, खनिज संसाधन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। भारत की गुणवत्तापूर्ण और किफायती दवाओं की उपलब्धता इंडोनेशिया में और आसान बनाने पर सहमति बनी है। साथ ही डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास में भी भारत सहयोग करेगा, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।

    भारत और इंडोनेशिया ने आवश्यक खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए स्टील, मिनरल्स और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा भारत इंडोनेशिया को विशेष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन विकसित करने और चुनावी प्रौद्योगिकी से जुड़ा तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराएगा। इन पहलों को दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

    यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक एवं सैन्य सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से सम्मानित किया। यह सम्मान उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने असाधारण योगदान और उत्कृष्ट सेवाएं दी हों। इस सम्मान को भारत और इंडोनेशिया के बीच मजबूत होते संबंधों तथा पारस्परिक विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस और ‘अस्त्र’ जैसी स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का निर्यात भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और वैश्विक रक्षा बाजार में बढ़ती उपस्थिति को और मजबूत करेगा। साथ ही यह समझौता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने के साथ भारत के घरेलू रक्षा उद्योग, अनुसंधान और विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी दीर्घकालिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

  • बेतवा को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी, 2053 तक साफ रखने के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना

    बेतवा को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी, 2053 तक साफ रखने के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश सरकार ने बेतवा नदी को आने वाले तीन दशकों तक स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए व्यापक योजना तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केवल वर्तमान जरूरतों को नहीं, बल्कि वर्ष 2053 तक की संभावित आबादी, शहरी विस्तार और बढ़ने वाले सीवेज भार को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। सरकार का उद्देश्य ऐसा स्थायी सिस्टम विकसित करना है, जिससे भविष्य में बार-बार नई परियोजनाओं की आवश्यकता न पड़े और नदी की जल गुणवत्ता लगातार बेहतर बनी रहे।

    भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बनेगा पूरा नेटवर्क

    योजना के तहत सीवर लाइन, पंपिंग स्टेशन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और इंटरसेप्शन नेटवर्क की क्षमता भविष्य की आबादी के अनुसार तय की जाएगी। साथ ही अतिरिक्त क्षमता भी रखी जाएगी ताकि आने वाले वर्षों में आबादी बढ़ने के बावजूद व्यवस्था प्रभावित न हो।

    नदी में गिरने से पहले रोका जाएगा गंदा पानी

    परियोजना का सबसे अहम हिस्सा यह है कि बेतवा नदी में मिलने वाले सभी नालों की पहचान कर उनका गंदा पानी नदी तक पहुंचने से पहले रोक लिया जाएगा। पाइपलाइन के माध्यम से इस पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक भेजा जाएगा, जहां वैज्ञानिक तरीके से उसका शोधन होगा। जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन संभव नहीं होगी, वहां पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी के लिए अलग निकासी व्यवस्था भी बनाई जाएगी ताकि एसटीपी पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

    मंडीदीप और विदिशा सबसे बड़े प्रदूषण स्रोत

    प्रस्तुतीकरण में सामने आया कि बेतवा नदी में सबसे अधिक प्रदूषण मंडीदीप और विदिशा क्षेत्र से पहुंच रहा है। मंडीदीप में घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और खुले नालों का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है। यहां अब तक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) उपलब्ध नहीं है। वहीं विदिशा के तीन प्रमुख नालों का बिना शोधन वाला पानी भी सीधे बेतवा में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा कोलार जलशोधन संयंत्र का बैकवॉश पानी और जलकुंभी भी नदी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।

    15 वर्षों तक होगी डिजिटल निगरानी

    परियोजना केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रहेगी। इसके तहत 15 वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। आधुनिक SCADA और ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) की मदद से पानी की गुणवत्ता और एसटीपी के संचालन पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी। किसी भी तकनीकी खराबी या प्रदूषण की स्थिति का तुरंत पता लगाया जा सकेगा।

    वैज्ञानिक सर्वे के बाद बनेगी डीपीआर

    डीपीआर तैयार करने से पहले नदी, नालों और पूरे जलग्रहण क्षेत्र का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इसमें नदी और नालों का सर्वे, मिट्टी और भू-आकृति का परीक्षण, सीवेज की मात्रा का आकलन, उपयुक्त ट्रीटमेंट तकनीक का चयन, इंजीनियरिंग डिजाइन, परियोजना लागत और पर्यावरणीय स्वीकृतियों जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

    लंबी अवधि के संरक्षण पर रहेगा फोकस

    सरकार का लक्ष्य केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि बेतवा नदी के संरक्षण के लिए स्थायी और आर्थिक रूप से टिकाऊ व्यवस्था विकसित करना है। योजना में स्थानीय निकायों की जवाबदेही तय करने, संचालन व्यवस्था को मजबूत बनाने और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

    यदि यह योजना निर्धारित रूप में लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में बेतवा नदी की जल गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।

  • भोपाल-राजगढ़ को जोड़ने वाला डायवर्सन जलमग्न, प्रशासन ने आवाजाही पर लगाया प्रतिबंध

    भोपाल-राजगढ़ को जोड़ने वाला डायवर्सन जलमग्न, प्रशासन ने आवाजाही पर लगाया प्रतिबंध


    भोपाल  लगातार हो रही बारिश के चलते भोपाल और राजगढ़ जिले को जोड़ने वाले पार्वती नदी के अस्थायी वैकल्पिक मार्ग पर आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। बैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर नदी के बीच बनाए गए इस डायवर्सन पर पानी भर जाने और तेज बहाव के कारण प्रशासन ने सोमवार देर रात यह फैसला लिया। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।

    बैरसिया एसडीएम आशुतोष शर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि पार्वती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे नदी के बीच बना अस्थायी मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया है और वहां से गुजरना बेहद जोखिमभरा हो गया है। किसी भी संभावित हादसे को रोकने के लिए इस मार्ग पर सभी प्रकार के वाहनों और लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

    बैरिकेडिंग और निगरानी के निर्देश

    प्रशासन ने संबंधित विभागों को मार्ग के दोनों ओर बैरिकेडिंग लगाने, चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा संकेतक स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति जोखिम उठाकर इस रास्ते का उपयोग न कर सके।

    आदेश के पालन की जिम्मेदारी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, जनपद पंचायत, लोक निर्माण विभाग (PWD) और पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है। अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने तथा लोगों को सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों से भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

    उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    पहले भी हो चुके हैं हादसे

    यह वैकल्पिक मार्ग जनवरी 2025 में पार्वती नदी पर बने 49 वर्ष पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद तैयार किया गया था। बारिश शुरू होने से पहले तक इसी रास्ते से बसें, ट्रक, कारें और दोपहिया वाहन गुजर रहे थे, लेकिन जलस्तर बढ़ने के साथ यहां हादसों का खतरा भी बढ़ गया। पिछले वर्ष अक्टूबर में इसी मार्ग पर एक बस फंस गई थी, जबकि हाल ही में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पानी में गिर गई थी। हालांकि उस हादसे में चारों लोग सुरक्षित बच गए थे।

    कई जिलों की लाइफलाइन है यह मार्ग

    बैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर स्थित यह पुल भोपाल और राजगढ़ के अलावा गुना, विदिशा, शिवपुरी, अशोकनगर, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन और इंदौर जैसे जिलों की आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यही मार्ग आगरा-बंबई राष्ट्रीय राजमार्ग से भी जुड़ता है।

    करीब 49 वर्ष पुराने इस पुल की अब तक केवल दो बार मरम्मत हुई है। रखरखाव के अभाव में इसकी स्थिति लगातार खराब होती गई और जनवरी 2025 में पुल धंसने के बाद इसे पूरी तरह बंद करना पड़ा था। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे बंद मार्ग से गुजरने का प्रयास न करें और केवल सुरक्षित वैकल्पिक रास्तों का ही उपयोग करें।

  • कमजोर तिमाही बिजनेस अपडेट से ट्रेंट के शेयर में बड़ी बिकवाली, निवेशकों की उम्मीदों को झटका, एक ही दिन में 11 प्रतिशत से अधिक लुढ़का स्टॉक

    कमजोर तिमाही बिजनेस अपडेट से ट्रेंट के शेयर में बड़ी बिकवाली, निवेशकों की उम्मीदों को झटका, एक ही दिन में 11 प्रतिशत से अधिक लुढ़का स्टॉक

    नई दिल्ली । टाटा समूह की प्रमुख रिटेल कंपनी ट्रेंट के शेयरों में मंगलवार को तेज गिरावट दर्ज की गई, जब कंपनी की जून तिमाही से जुड़ा कारोबारी अपडेट बाजार की अपेक्षाओं से कमजोर रहा। कारोबार के शुरुआती घंटों में कंपनी का शेयर 11 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जिससे निवेशकों की धारणा पर स्पष्ट असर दिखाई दिया। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी की आय वृद्धि अनुमान से कम रहने और नए स्टोर जोड़ने की रफ्तार धीमी पड़ने के कारण बाजार ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

    जून तिमाही के दौरान ट्रेंट ने 5,666 करोड़ रुपये की स्टैंडअलोन आय दर्ज की, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 4,781 करोड़ रुपये था। हालांकि कंपनी की आय में सालाना आधार पर वृद्धि हुई, लेकिन यह वृद्धि बाजार की उम्मीदों से कम रही। निवेशकों और विश्लेषकों को इस अवधि में लगभग 22 से 23 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद थी, जबकि वास्तविक वृद्धि करीब 19 प्रतिशत के आसपास रही। इसी अंतर ने शेयर बाजार में दबाव बढ़ा दिया।

    तिमाही के अंत तक कंपनी के कुल स्टोरों की संख्या बढ़कर 1,312 हो गई। इनमें 301 वेस्टसाइड स्टोर, 982 जूडियो आउटलेट और लाइफस्टाइल श्रेणी के 29 स्टोर शामिल रहे। इसके बावजूद नए स्टोर खोलने की गति पहले की तुलना में अपेक्षाकृत धीमी रहने को लेकर बाजार ने चिंता जताई। रिटेल क्षेत्र में विस्तार की रफ्तार निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है और इसी वजह से इस पहलू पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि तिमाही प्रदर्शन अपेक्षाओं से कमजोर जरूर रहा, लेकिन इसे कंपनी के कारोबार में किसी स्थायी या संरचनात्मक समस्या का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। उनका मानना है कि रिटेल कारोबार में तिमाही दर तिमाही उतार-चढ़ाव सामान्य बात है और किसी एक तिमाही के आंकड़ों के आधार पर कंपनी की दीर्घकालिक संभावनाओं का आकलन करना उचित नहीं होगा। आने वाली तिमाहियों में कंपनी के विस्तार और बिक्री की गति पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

    हाल के महीनों में ट्रेंट के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया था और निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न भी मिला था। मंगलवार की बड़ी गिरावट के बावजूद पिछले एक महीने के दौरान कंपनी का शेयर लगभग 9 प्रतिशत का लाभ दे चुका है। हालांकि एक वर्ष की अवधि में इसमें करीब 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत, यदि लंबे समय के प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले पांच वर्षों में ट्रेंट ने लगभग 390 प्रतिशत का उल्लेखनीय रिटर्न देकर निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है।

    कंपनी के पिछले वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2025-26 की मार्च तिमाही में ट्रेंट ने 5,028 करोड़ रुपये की आय दर्ज की थी। इस दौरान कुल खर्च 4,117 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का ऑपरेटिंग मुनाफा 911 करोड़ रुपये और कर के बाद शुद्ध लाभ 413 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। ऑपरेटिंग मार्जिन भी बढ़कर 18 प्रतिशत पर पहुंच गया था, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 15 प्रतिशत से अधिक था। इससे स्पष्ट है कि कंपनी की लाभप्रदता में सुधार देखने को मिला था, लेकिन मौजूदा तिमाही के कारोबारी संकेतकों ने निवेशकों की उम्मीदों को फिलहाल कुछ हद तक निराश किया है।

  • सेंसेक्स-निफ्टी सीमित बढ़त के साथ खुले, आईटी सेक्टर में खरीदारी रही हावी, एफपीआई के रुख में बदलाव से बाजार को मिला सहारा

    सेंसेक्स-निफ्टी सीमित बढ़त के साथ खुले, आईटी सेक्टर में खरीदारी रही हावी, एफपीआई के रुख में बदलाव से बाजार को मिला सहारा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को कारोबारी सत्र की शुरुआत सीमित बढ़त के साथ की। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लगभग सपाट स्तर पर कारोबार करते दिखाई दिए, जबकि आईटी क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया। निवेशकों का रुझान फिलहाल चुनिंदा सेक्टरों की ओर बना हुआ है और बाजार में सतर्क आशावाद का माहौल देखने को मिल रहा है।

    शुरुआती कारोबार में आईटी कंपनियों के शेयर सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बने। इस क्षेत्र में लगातार खरीदारी के कारण संबंधित सेक्टोरल इंडेक्स अन्य सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करता नजर आया। इसके अलावा वित्तीय सेवाएं, निजी बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, ऑटो, हेल्थकेयर, ऑयल एंड गैस, रियल्टी और सर्विसेज सेक्टर में भी सकारात्मक कारोबार देखने को मिला, जिससे बाजार का समग्र रुख संतुलित बना रहा।

    दूसरी ओर धातु, रक्षा, मीडिया, मैन्युफैक्चरिंग, सार्वजनिक उपक्रमों और कमोडिटी से जुड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला। इन क्षेत्रों में बिकवाली के कारण कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते रहे। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल मजबूत बुनियादी संकेतों वाले क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    लार्जकैप कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। व्यापक बाजार में किसी बड़ी तेजी या गिरावट के बजाय संतुलित कारोबार देखने को मिला। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशक फिलहाल बड़े फैसले लेने के बजाय बाजार के अगले संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

    आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के साथ कुछ वित्तीय और उपभोक्ता कंपनियों के शेयरों में अच्छी मजबूती देखने को मिली। वहीं कुछ औद्योगिक, स्टील, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना रहा। बाजार का यह मिश्रित प्रदर्शन निवेशकों की सेक्टर आधारित रणनीति को दर्शाता है, जहां अलग-अलग उद्योगों में अलग रुख अपनाया जा रहा है।

    वैश्विक बाजारों का प्रभाव भी भारतीय शेयर बाजार पर सीमित रूप से दिखाई दिया। अधिकांश एशियाई बाजारों में कमजोरी का माहौल रहा, जबकि अमेरिकी बाजार पिछले कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे। विशेष रूप से तकनीकी कंपनियों में आई मजबूती का सकारात्मक असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी दिखाई दिया।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में जिन दो प्रमुख कारणों से बाजार पर दबाव बना हुआ था, उनमें अब राहत के संकेत दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी से आयात लागत को लेकर चिंताएं कम हुई हैं। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का रुख भी बदलता नजर आ रहा है। लगातार बिकवाली के बाद अब विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी शुरू होना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रिय खरीदारी भी बाजार को स्थिरता प्रदान कर रही है। विदेशी और घरेलू निवेशकों की भागीदारी से बाजार में संतुलन बना हुआ है, जिससे आने वाले समय में निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो भारतीय शेयर बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर आगामी आर्थिक संकेतकों, कॉर्पोरेट नतीजों और वैश्विक बाजारों की दिशा पर बनी हुई है।

  • शेयर बाजार में बढ़त के बीच ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली के संकेत, टाइटन और आईटी शेयरों की तेजी ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    शेयर बाजार में बढ़त के बीच ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली के संकेत, टाइटन और आईटी शेयरों की तेजी ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार ने मंगलवार को सकारात्मक संकेतों के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सत्र में निवेशकों की खरीदारी के चलते प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ खुले। सेंसेक्स ने शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाई, जबकि निफ्टी भी बढ़त के साथ महत्वपूर्ण स्तरों के करीब पहुंच गया। बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के चुनिंदा शेयरों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला, जिससे बाजार का समग्र माहौल सकारात्मक बना रहा।

    शुरुआती कारोबार में टाइटन कंपनी के शेयर सबसे अधिक चर्चा में रहे। कंपनी के हालिया कारोबारी अपडेट के बाद निवेशकों की मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिससे शेयर में करीब तीन प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा आईटी क्षेत्र में भी सकारात्मक रुझान दिखाई दिया और इंफोसिस सहित कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज हुई। इससे संकेत मिला कि निवेशक गुणवत्ता वाले बड़े शेयरों में दोबारा रुचि दिखा रहे हैं।

    बाजार में श्रीराम फाइनेंस, एसबीआई लाइफ, जियो फाइनेंशियल, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और आयशर मोटर्स जैसे शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली। विभिन्न क्षेत्रों में खरीदारी का यह रुझान दर्शाता है कि निवेशक फिलहाल चुनिंदा कंपनियों पर भरोसा जता रहे हैं। हालांकि व्यापक बाजार में कारोबार अपेक्षाकृत संतुलित बना हुआ है और निवेशक अगले संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कई सत्रों की बढ़त के बाद अब ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिल सकता है। इसी वजह से निफ्टी कुछ समय तक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। साप्ताहिक एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव बाजार की गतिविधियां भी सूचकांकों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे समय में उतार-चढ़ाव सामान्य से अधिक रहने की संभावना मानी जा रही है।

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 24,500 अंक का स्तर निकट अवधि में महत्वपूर्ण प्रतिरोध माना जा रहा है। यदि बाजार इस स्तर को मजबूती के साथ पार करता है तो आगे नई तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर 24,400 अंक के आसपास का स्तर तत्काल समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। यदि बाजार इस स्तर से नीचे फिसलता है तो अल्पकालिक दबाव बढ़ सकता है।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि बाजार में अभी तक व्यापक कमजोरी के संकेत नहीं हैं, लेकिन ऊंचे स्तरों पर निवेशकों द्वारा लाभ बुक करने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में सूचकांक कुछ समय तक सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद अगली दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने के बजाय कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन और बाजार के समग्र रुझान पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

    घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार फिलहाल संतुलित स्थिति में दिखाई दे रहा है। कॉर्पोरेट नतीजों, आर्थिक आंकड़ों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। आने वाले कारोबारी सत्रों में यही कारक बाजार की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल शुरुआती कारोबार में आई मजबूती ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है, लेकिन ऊपरी स्तरों पर सतर्कता बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक माना जा रहा है।

  • थाईलैंड की खुदाई में मिला भारत से जुड़ा बड़ा सबूत, ब्राह्मी लिपि की अंगूठी ने खोले इतिहास के राज

    थाईलैंड की खुदाई में मिला भारत से जुड़ा बड़ा सबूत, ब्राह्मी लिपि की अंगूठी ने खोले इतिहास के राज


    नई दिल्ली । भारत और थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक तथा व्यापारिक संबंध आधुनिक दौर तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें करीब दो हजार वर्ष पुरानी हैं। इसका ताजा प्रमाण थाईलैंड में हुई एक पुरातात्विक खुदाई से मिला है, जहां वैज्ञानिकों को दो सोने की प्राचीन अंगूठियां मिली हैं। इनमें से एक अंगूठी पर भारतीय ब्राह्मी लिपि में अंकित शब्दों ने इतिहासकारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज प्राचीन भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मजबूत व्यापारिक संपर्क का महत्वपूर्ण साक्ष्य है।

    यह खोज थाईलैंड के पेत्चाबुरी प्रांत स्थित दोन याई थोंग पुरातात्विक स्थल पर हुई। थाईलैंड के फाइन आर्ट्स डिपार्टमेंट के अनुसार यहां मानव कंकालों की खुदाई के दौरान ये अंगूठियां मिलीं। प्रारंभिक अध्ययन में पता चला कि इनका संबंध लगभग 2,000 वर्ष पुराने आयरन एज काल से हो सकता है।

    ब्राह्मी लिपि में मिला अहम संदेश

    विशेषज्ञों ने एक अंगूठी पर अंकित ब्राह्मी लिपि को पढ़ने की कोशिश की, जिसमें ‘पुस रखितस’ लिखा मिला। इसका अर्थ बताया गया है- “वह व्यक्ति जिसे पुष्य का संरक्षण प्राप्त है।” भारतीय परंपरा में पुष्य नक्षत्र को अत्यंत शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। दूसरी अंगूठी पर कोई लेख नहीं मिला, लेकिन दोनों आभूषणों की बनावट और शैली भारतीय प्रभाव की ओर संकेत करती है।

    भारतीय व्यापारी से जुड़ा हो सकता है संबंध

    पुरातत्वविदों का मानना है कि ये अंगूठियां किसी संपन्न भारतीय व्यापारी की हो सकती हैं, जो समुद्री व्यापार के जरिए उस समय थाईलैंड पहुंचा होगा। उस दौर में भारत के व्यापारी मसाले, वस्त्र, धातु, आभूषण और अन्य वस्तुओं का व्यापार दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से करते थे। यही कारण है कि थाईलैंड सहित कई क्षेत्रों में भारतीय संस्कृति, भाषा और धार्मिक प्रभाव के प्रमाण समय-समय पर मिलते रहे हैं।

    धान के खेत से शुरू हुई बड़ी खोज

    इस ऐतिहासिक स्थल की पहचान तब हुई जब स्थानीय ग्रामीणों को धान के खेत में प्राचीन वस्तुएं मिलीं। इसके बाद सरकार ने यहां वैज्ञानिक खुदाई शुरू कराई। फरवरी से अब तक यहां से आठ मानव कंकाल, सोने और कांसे के आभूषण, मिट्टी के बर्तन और कई अन्य प्राचीन वस्तुएं बरामद हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि खुदाई पूरी होने के बाद इन सभी अवशेषों को संग्रहालय में आम लोगों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा।

    राखीगढ़ी पर भी बढ़ी उम्मीदें

    उधर भारत में भी सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े स्थलों में शामिल राखीगढ़ी को लेकर शोध तेज हो गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने वहां से मिले मानव कंकालों को वैज्ञानिक और डीएनए विश्लेषण के लिए भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण को सौंपा है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इन अध्ययनों से प्राचीन भारतीय सभ्यता, लोगों की जीवनशैली और आनुवंशिक इतिहास से जुड़े कई नए तथ्य सामने आएंगे। थाईलैंड में मिली यह नई खोज एक बार फिर साबित करती है कि प्राचीन भारत का व्यापारिक और सांस्कृतिक प्रभाव समुद्री मार्गों के जरिए हजारों किलोमीटर दूर तक फैला हुआ था।

  • खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, परमाणु हथियार पर दोहराया अमेरिकी रुख

    खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, परमाणु हथियार पर दोहराया अमेरिकी रुख


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका समझौते का रास्ता चाहता है, लेकिन यदि हालात बने तो निर्णायक कार्रवाई करने में भी देर नहीं करेगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं।

    व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में अपने हितों की रक्षा करेगा। उनके अनुसार, पहला विकल्प समझौता है, लेकिन यदि बातचीत सफल नहीं होती तो अमेरिका अपने उद्देश्य पूरे करने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा कि वह बड़े पैमाने पर जनहानि नहीं चाहते, इसलिए कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं।

    परमाणु कार्यक्रम पर दोहराया अमेरिकी रुख

    ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता न बचे।

    उन्होंने यह भी कहा कि हाल के समय में तेल की कीमतें युद्ध के दौरान बढ़े स्तर से नीचे आ चुकी हैं और अमेरिका चाहता है कि ईरान किसी भी संभावित समझौते की शर्तों का पालन करे।

    सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता अमेरिका

    ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन कराना नहीं है। उनका कहना था कि अमेरिका की प्राथमिकता क्षेत्रीय स्थिरता और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है।

    युद्धविराम के बाद भी जारी है बयानबाजी

    हालांकि हाल के संघर्ष के बाद दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन बयानबाजी लगातार जारी है। ट्रंप पहले भी कई बार ईरान को लेकर कड़े बयान दे चुके हैं और राजनयिक समाधान के साथ-साथ सैन्य विकल्प खुले होने की बात कह चुके हैं।

    ईरान ने दिया कड़ा जवाब

    ट्रंप के बयान पर ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई। आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की हत्या से उसके विचार समाप्त नहीं होते। दूतावास ने अमेरिका पर ईरान के इतिहास और संस्कृति को न समझने का आरोप लगाया और कहा कि दबाव की राजनीति से उसके सिद्धांत नहीं बदलेंगे।

    दोनों देशों के बीच जारी यह तीखी बयानबाजी संकेत देती है कि युद्धविराम के बावजूद रिश्तों में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत और क्षेत्रीय घटनाक्रम इस संबंध की दिशा तय करेंगे।