Author: bharati

  • फिल्म, विवाद और सियासत के बीच दिलजीत दोसांझ चर्चा में, क्या 'सतलुज' के बाद बदलने वाली है पंजाब की राजनीति?

    फिल्म, विवाद और सियासत के बीच दिलजीत दोसांझ चर्चा में, क्या 'सतलुज' के बाद बदलने वाली है पंजाब की राजनीति?

    नई दिल्ली । अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपनी फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। लंबे समय तक विवादों और इंतजार के बाद ओटीटी पर रिलीज हुई यह फिल्म पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और 1990 के दशक की घटनाओं पर आधारित है। फिल्म के सामने आने के साथ ही पंजाब में फिल्मों और राजनीति के पुराने रिश्ते पर नई बहस शुरू हो गई है। साथ ही, दिलजीत के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी अटकलों का दौर तेज हो गया है।

    फिल्म में पंजाब के उस दौर को दिखाया गया है जब राज्य उग्रवाद और सुरक्षा अभियानों के कारण लगातार सुर्खियों में था। कहानी कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और उन मामलों की पड़ताल पर केंद्रित है, जिन्होंने वर्षों तक सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित किया। इसी संवेदनशील विषय के कारण फिल्म लंबे समय तक विवादों में रही और इसके शीर्षक तथा अन्य पहलुओं को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई।

    पंजाब में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सामाजिक और ऐतिहासिक विषयों पर बनी फिल्मों की चर्चा चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है। हालांकि इस बात पर राय अलग-अलग है कि फिल्म का सीधा चुनावी असर कितना होगा। कुछ लोगों का मानना है कि इसका प्रभाव सीमित रहेगा, जबकि अन्य इसे जनभावनाओं और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करने वाला मान रहे हैं।

    पंजाब में फिल्मों और राजनीतिक विवादों का इतिहास नया नहीं है। राज्य के इतिहास, धार्मिक भावनाओं, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक घटनाओं पर आधारित कई फिल्मों को पहले भी विरोध और विवाद का सामना करना पड़ा है। विभिन्न अवसरों पर सेंसर प्रक्रिया, प्रदर्शन और सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं ने इन फिल्मों को चर्चा का विषय बनाया है। ऐसे मामलों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन पर भी सवाल खड़े किए हैं।

    दिलजीत दोसांझ भी पिछले कुछ वर्षों में कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखने के कारण चर्चा में रहे हैं। किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी थी। हालांकि उन्होंने बार-बार यह स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं और खुद को केवल एक कलाकार मानते हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि राजनीति में आने की उनकी कोई योजना नहीं है।

    बीते समय में देश और विदेश में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान भी दिलजीत कई बार सुर्खियों में रहे। उन्होंने विभिन्न मंचों पर पंजाबी संस्कृति और प्रवासी समुदाय की उपलब्धियों का उल्लेख किया, वहीं विवादित राजनीतिक प्रतीकों और अलगाववादी विचारों से दूरी बनाए रखने की भी कोशिश की। उनके इन बयानों को कई लोगों ने संतुलित सार्वजनिक रुख के रूप में देखा।

    राजनीतिक गलियारों में समय-समय पर यह चर्चा होती रही है कि लोकप्रिय कलाकार भविष्य में सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन सकते हैं। दिलजीत के मामले में भी ऐसी अटकलें लगती रही हैं, लेकिन उन्होंने अब तक किसी राजनीतिक दल से जुड़ने या चुनाव लड़ने का संकेत नहीं दिया है। उनके हालिया बयान भी यही दर्शाते हैं कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान अभिनय, संगीत और सामाजिक विषयों पर आधारित रचनात्मक कार्यों पर है।

    फिलहाल ‘सतलुज’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि पंजाब के इतिहास, सामाजिक विमर्श और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई चर्चा का माध्यम बन गई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म को दर्शकों का कितना व्यापक समर्थन मिलता है और क्या इससे जुड़ी राजनीतिक चर्चाएं चुनावी माहौल तक कोई प्रभाव छोड़ पाती हैं।

  • पति की हत्या के बाद रची गई साजिश की परतें खुलीं, बाथरूम का फर्श बनवाने बुलाया राजमिस्त्री, पूछताछ में सामने आई चौंकाने वाली कहानी

    पति की हत्या के बाद रची गई साजिश की परतें खुलीं, बाथरूम का फर्श बनवाने बुलाया राजमिस्त्री, पूछताछ में सामने आई चौंकाने वाली कहानी

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के आगरा में सामने आए चर्चित बाथरूम हत्याकांड की जांच आगे बढ़ने के साथ ही नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस की जांच में अब उस राजमिस्त्री का बयान भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसने कथित तौर पर आरोपी महिला के घर पहुंचकर बाथरूम का फर्श तैयार किया था। उसके बयान ने पूरे घटनाक्रम की कई नई परतों को उजागर कर दिया है।

    जांच के अनुसार, आरोपी महिला पर अपने पति की हत्या करने के बाद शव को घर के बाथरूम में खोदे गए गड्ढे में छिपाकर उसके ऊपर फर्श बनवाने का आरोप है। मामले में गिरफ्तार महिला से पूछताछ के बाद पुलिस ने बाथरूम का फर्श खुदवाया, जहां से शव बरामद किया गया। इसके बाद जांच एजेंसियां हत्या की पूरी साजिश और उससे जुड़े सभी तथ्यों की पड़ताल में जुटी हैं।

    राजमिस्त्री ने पुलिस को बताया कि करीब डेढ़ महीने पहले उसे एक महिला का फोन आया था, जिसने घर के बाथरूम का फर्श तत्काल बनवाने की बात कही थी। जब वह मौके पर पहुंचा तो देखा कि बाथरूम का फर्श पूरी तरह टूटा हुआ था। महिला ने उसे बताया कि उसके पति घर से बाहर गए हैं और उनके लौटने से पहले फर्श तैयार कर देना जरूरी है।

    राजमिस्त्री के अनुसार, उस समय उसे सबसे अधिक हैरानी इस बात पर हुई कि महिला खुद बाल्टी से गड्ढे में कंक्रीट और मलबा डाल रही थी। उसने उसी दिन काम करने से इनकार करते हुए अगले दिन आने की बात कही। अगले दिन महिला ने उसे सीमेंट खरीदने के लिए पैसे दिए, जिसके बाद उसने बाथरूम का फर्श तैयार कर दिया। उस दौरान उसे इस बात का कोई अंदेशा नहीं था कि जिस जगह पर फर्श बनाया जा रहा है, उसके नीचे किसी का शव दबा हो सकता है।

    राजमिस्त्री ने यह भी बताया कि काम के दौरान महिला की बेटी से उसकी बातचीत हुई थी। बच्ची ने घर में माता-पिता के बीच अक्सर होने वाले विवाद और पैसों को लेकर होने वाले झगड़ों का जिक्र किया था। हालांकि उस समय इन बातों को उसने सामान्य पारिवारिक विवाद मानकर अधिक महत्व नहीं दिया।

    पुलिस के अनुसार, महिला ने अपने पति के लापता होने की शिकायत भी दर्ज कराई थी, ताकि किसी को उस पर शक न हो। लेकिन पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच का रुख बदला। इसके बाद पुलिस ने घर के बाथरूम की खुदाई कराई, जहां से शव बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में हत्या के बाद शव को छिपाने की योजना सामने आई है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े हर पहलू की गहन जांच की जा रही है ताकि हत्या की पूरी साजिश, उसका कारण और इसमें यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका रही हो तो उसे भी स्पष्ट किया जा सके।

  • संजू सैमसन की वापसी पर अंबाती रायुडू का भरोसा, बोले- तीन मैच खराब होने से नहीं भूल सकते उनका योगदान

    संजू सैमसन की वापसी पर अंबाती रायुडू का भरोसा, बोले- तीन मैच खराब होने से नहीं भूल सकते उनका योगदान


    नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। उनके डेब्यू को लेकर पूरे देश में उत्साह देखने को मिला, लेकिन इस मुकाबले में संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठना पड़ा। इस फैसले के बाद भारत के पूर्व बल्लेबाज अंबाती रायुडू ने संजू के समर्थन में बयान देते हुए उनके हालिया योगदान को याद रखने की अपील की है।

    रायुडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वैभव सूर्यवंशी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण भारतीय क्रिकेट के लिए खुशी का पल है और इसका जश्न मनाया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने कहा कि इस उत्साह के बीच यह नहीं भूलना चाहिए कि महज तीन टी20 मैच पहले संजू सैमसन टी20 विश्व कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे थे और भारत को खिताब दिलाने में उनकी बड़ी भूमिका थी।

    पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि संजू सैमसन एक बार फिर मजबूत वापसी करेंगे। साथ ही उन्होंने वैभव सूर्यवंशी के उज्ज्वल भविष्य की भी कामना करते हुए कहा कि युवा बल्लेबाज लंबा और रिकॉर्ड बनाने वाला करियर बनाए।

    दरअसल टी20 विश्व कप 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले संजू सैमसन का बल्ला पिछले कुछ मुकाबलों में खामोश रहा। आयरलैंड के खिलाफ दो टी20 मैचों में वह बड़ी पारी नहीं खेल सके। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 में भी वह केवल एक रन बनाकर आउट हो गए। लगातार तीन मैचों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करने के कारण टीम प्रबंधन ने दूसरे टी20 में उनकी जगह आईपीएल 2026 के ऑरेंज कैप विजेता वैभव सूर्यवंशी को मौका दिया।

    वैभव सूर्यवंशी ने अपने पहले अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच में 10 गेंदों पर 14 रन बनाए और दो आकर्षक छक्के लगाए। हालांकि उनकी पारी छोटी रही, लेकिन उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी की झलक जरूर दिखाई। अब तीसरे टी20 मुकाबले में एक बार फिर उनकी बल्लेबाजी पर सभी की नजरें रहेंगी।

    संजू सैमसन के करियर में टीम से बाहर होना और फिर दमदार वापसी करना नई बात नहीं है। इससे पहले भी वह कई बार वापसी कर अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय टीम प्रबंधन उन्हें फिर कब मौका देता है और वह उस अवसर को किस तरह भुनाते हैं।

  • पाकिस्तान क्रिकेट में बड़ा बदलाव, बाबर आजम की टेस्ट कप्तानी में वापसी, चार नए खिलाड़ियों को मिला मौका

    पाकिस्तान क्रिकेट में बड़ा बदलाव, बाबर आजम की टेस्ट कप्तानी में वापसी, चार नए खिलाड़ियों को मिला मौका


    नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए टीम का ऐलान करते हुए बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने एक बार फिर बाबर आजम को टेस्ट टीम की कप्तानी सौंप दी है। लगातार निराशाजनक प्रदर्शन के बाद शान मसूद को कप्तानी से हटा दिया गया है। इस फैसले के साथ पाकिस्तान टीम नए नेतृत्व में विदेशी दौरों पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लेकर मैदान में उतरेगी।

    शान मसूद के नेतृत्व में पाकिस्तान का टेस्ट प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। उनकी कप्तानी में टीम ने 16 टेस्ट मुकाबले खेले जिनमें से 12 में हार का सामना करना पड़ा। हाल ही में पाकिस्तान को बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज गंवानी पड़ी थी। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी टीम एक भी टेस्ट जीतने में सफल नहीं हो सकी थी। लगातार खराब नतीजों के बाद चयनकर्ताओं ने कप्तानी में बदलाव का फैसला लिया।

    चयन समिति ने वेस्टइंडीज दौरे के लिए 16 सदस्यीय टीम घोषित की है। वहीं इंग्लैंड दौरे के लिए सऊद शकील को अतिरिक्त खिलाड़ी के रूप में शामिल किया गया है। हालांकि उन्हें टीम से जुड़ने से पहले फिटनेस टेस्ट पास करना होगा। इस बार चयनकर्ताओं ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए चार नए खिलाड़ियों को पहली बार टेस्ट टीम में मौका दिया है। इनमें बाएं हाथ के स्पिनर अली उस्मान बल्लेबाज मोहम्मद अवैस जफर तेज गेंदबाज उबैद शाह और विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद गाजी गोरी शामिल हैं।

    पाकिस्तान टीम सबसे पहले वेस्टइंडीज का दौरा करेगी जहां दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला मुकाबला 25 से 29 जुलाई तक खेला जाएगा जबकि दूसरा टेस्ट 2 से 6 अगस्त के बीच पोर्ट ऑफ स्पेन में होगा। इसके बाद टीम इंग्लैंड रवाना होगी जहां तीन टेस्ट मैचों की सीरीज 19 अगस्त से 13 सितंबर के बीच लीड्स लॉर्ड्स और बर्मिंघम में खेली जाएगी।

    टीम में बाबर आजम के अलावा मोहम्मद रिजवान सलमान अली आगा इमाम उल हक आमिर जमाल मोहम्मद अब्बास मोहम्मद अली खुर्रम शहजाद साजिद खान और शान मसूद जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को भी जगह दी गई है। चयनकर्ताओं को उम्मीद है कि अनुभवी खिलाड़ियों और नए चेहरों का यह संतुलन पाकिस्तान को विदेशी दौरों पर बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा।

    अब सभी की नजरें बाबर आजम की कप्तानी पर होंगी। एक बार फिर टेस्ट टीम की जिम्मेदारी संभालने वाले बाबर के सामने पाकिस्तान को जीत की राह पर लौटाने और विदेशी सरजमीं पर मजबूत प्रदर्शन करने की बड़ी चुनौती होगी।

  • महिला टी20 विश्व कप फाइनल में क्या बदलेगा इतिहास, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इंग्लैंड पर तीन हार का साया

    महिला टी20 विश्व कप फाइनल में क्या बदलेगा इतिहास, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इंग्लैंड पर तीन हार का साया


    नई दिल्ली। महिला टी20 विश्व कप 2026 का फाइनल रविवार को क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान लॉर्ड्स में खेला जाएगा। खिताब के लिए एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड आमने-सामने होंगे। दोनों टीमों ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए बिना कोई मुकाबला गंवाए फाइनल तक का सफर तय किया है। हालांकि खिताबी मुकाबलों का इतिहास इंग्लैंड के पक्ष में नहीं रहा है और यही बात इस बार भी चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है।

    टी20 विश्व कप के इतिहास में यह चौथी बार होगा जब ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड फाइनल में भिड़ेंगे। इससे पहले हुए तीनों खिताबी मुकाबलों में ऑस्ट्रेलिया ने जीत दर्ज कर इंग्लैंड के चैंपियन बनने का सपना तोड़ दिया था। पहली बार वर्ष 2012 के फाइनल में कंगारू टीम ने इंग्लैंड को हराया। इसके बाद 2014 और 2018 के फाइनल में भी ऑस्ट्रेलिया ने बाजी मारते हुए अपनी श्रेष्ठता साबित की।

    अगर दोनों टीमों के टी20 विश्व कप मुकाबलों का रिकॉर्ड देखें तो अब तक सात बार आमना-सामना हुआ है। इनमें ऑस्ट्रेलिया ने चार मुकाबले अपने नाम किए हैं जबकि इंग्लैंड को केवल दो जीत मिली हैं। एक मैच का कोई नतीजा नहीं निकला। आंकड़े साफ तौर पर ऑस्ट्रेलिया की बढ़त दिखाते हैं लेकिन इस बार इंग्लैंड को घरेलू परिस्थितियों का फायदा मिलने की उम्मीद है।

    मेजबान इंग्लैंड का रिकॉर्ड अपने घर में बेहद शानदार रहा है। टीम ने अपनी सरजमीं पर खेले गए महिला टी20 विश्व कप के सभी 11 मुकाबलों में जीत दर्ज की है। यही वजह है कि इंग्लिश टीम पूरे आत्मविश्वास के साथ फाइनल में उतरने वाली है। सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने दक्षिण अफ्रीका को 40 रन से हराकर फाइनल का टिकट कटाया था।

    इंग्लैंड की बल्लेबाजी में डैनी व्याट सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं। वह छह पारियों में 294 रन बनाकर टूर्नामेंट की सबसे सफल बल्लेबाज हैं। वहीं कप्तान नेट साइवर-ब्रंट ने भी अहम मौकों पर जिम्मेदारी निभाई है। गेंदबाजी में सोफी एक्लेस्टोन लगातार किफायती और प्रभावी रही हैं तथा फाइनल में भी उनसे बड़ी उम्मीदें रहेंगी।

    दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया एक बार फिर संतुलित और मजबूत टीम के रूप में सामने आई है। अनुभवी ऑलराउंडर एलिसा पेरी शानदार फॉर्म में हैं और बल्ले के साथ गेंद से भी उपयोगी योगदान दे रही हैं। कप्तान सोफी मोलिनेक्स ने छह मैचों में 10 विकेट लेकर विरोधी बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया है। ऑस्ट्रेलियाई टीम बड़े मुकाबलों का अनुभव भी अपने साथ लेकर मैदान पर उतरेगी।

    अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि क्या इंग्लैंड अपने घरेलू मैदान पर इतिहास बदलकर पहली बार टी20 विश्व कप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हरा पाएगा या फिर कंगारू टीम एक बार फिर खिताबी मुकाबले में अपना दबदबा कायम रखेगी।

  • तिमाही नतीजों से लेकर कच्चे तेल तक कई फैक्टर रहेंगे अहम, अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर रहेगी निवेशकों की नजर

    तिमाही नतीजों से लेकर कच्चे तेल तक कई फैक्टर रहेंगे अहम, अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर रहेगी निवेशकों की नजर

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए आगामी कारोबारी सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाओं के कारण बेहद अहम माना जा रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों की शुरुआत, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया के हालात बाजार की दिशा तय करने में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। निवेशकों की निगाहें घरेलू और वैश्विक दोनों मोर्चों पर बने घटनाक्रमों पर बनी रहेंगी।

    आने वाले सप्ताह में पहली तिमाही के नतीजों का सिलसिला शुरू होने जा रहा है। इसकी शुरुआत देश की प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस के वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजों से होगी। बाजार को उम्मीद है कि इस तिमाही के नतीजे आईटी सेक्टर के साथ-साथ अन्य कॉर्पोरेट कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर शुरुआती संकेत देंगे। यही कारण है कि निवेशकों के लिए यह परिणाम विशेष महत्व रखते हैं।

    वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे घटनाक्रम भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। यदि दोनों देशों के बीच तनाव नियंत्रित रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रह सकती है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। ऊर्जा कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीय बाजार, महंगाई और आयात लागत पर भी देखने को मिल सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की रणनीति भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत देगी। बीते सप्ताह शुरुआती दिनों में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपनाया, हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में उन्होंने फिर से खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया। यदि आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों का निवेश बढ़ता है तो इससे बाजार की धारणा मजबूत हो सकती है, जबकि लगातार बिकवाली दबाव बढ़ा सकती है।

    पिछला कारोबारी सप्ताह घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रहा। प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मजबूती के साथ सप्ताह का समापन किया। निवेशकों की खरीदारी का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। इससे व्यापक बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत होता दिखाई दिया।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी और फार्मा कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक मजबूती दर्ज की गई। हेल्थकेयर, डिफेंस, एफएमसीजी, मेटल और सर्विसेज सेक्टर के शेयरों ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर पीएसयू बैंक, एनर्जी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में कुछ दबाव देखने को मिला, जिससे इन सूचकांकों ने सप्ताह का समापन गिरावट के साथ किया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तिमाही नतीजों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक संकेत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि कंपनियों के परिणाम उम्मीद के अनुरूप रहते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा नकारात्मक घटनाक्रम नहीं होता, तो बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है। वहीं वैश्विक तनाव या कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल जैसी परिस्थितियां निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं।

    ऐसे में आगामी सप्ताह निवेशकों के लिए सतर्कता और अवसर दोनों लेकर आ सकता है। बाजार की चाल काफी हद तक कॉर्पोरेट प्रदर्शन, वैश्विक संकेतों और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगी, इसलिए कारोबारियों की नजर हर प्रमुख आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर बनी रहेगी।

  • सेंसेक्स-निफ्टी की मजबूती का बड़ा असर, छह बड़ी कंपनियों की बाजार पूंजी में जबरदस्त उछाल, निवेशकों का भरोसा लौटा

    सेंसेक्स-निफ्टी की मजबूती का बड़ा असर, छह बड़ी कंपनियों की बाजार पूंजी में जबरदस्त उछाल, निवेशकों का भरोसा लौटा

    मुंबई । शेयर बाजार में लौटे सकारात्मक माहौल का असर देश की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों पर भी साफ दिखाई दिया। बीते कारोबारी सप्ताह के दौरान शीर्ष 10 कंपनियों में से छह के बाजार पूंजीकरण में संयुक्त रूप से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। निवेशकों की लगातार खरीदारी और बाजार में बेहतर धारणा के चलते कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जिससे उनके मार्केटकैप में उल्लेखनीय इजाफा हुआ।

    सप्ताह के दौरान प्रमुख शेयर सूचकांकों ने भी मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। बाजार में आई इस तेजी ने बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, दूरसंचार, बीमा और उपभोक्ता क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को सबसे अधिक लाभ पहुंचाया। विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों के भरोसे में सुधार और सकारात्मक आर्थिक संकेतों ने बाजार को समर्थन दिया, जिससे कई कंपनियों का मूल्यांकन मजबूत हुआ।

    सप्ताह भर के प्रदर्शन में सबसे अधिक बढ़त दूरसंचार क्षेत्र की अग्रणी कंपनी भारती एयरटेल के बाजार पूंजीकरण में दर्ज की गई। इसके बाद बजाज फाइनेंस ने भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हासिल की। निजी बैंकिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आईसीआईसीआई बैंक का बाजार मूल्य भी मजबूत हुआ, जबकि एलआईसी, एचडीएफसी बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केटकैप में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली। इन कंपनियों में निवेशकों की लगातार खरीदारी ने उनके बाजार मूल्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    हालांकि सभी कंपनियों के लिए सप्ताह समान रूप से सकारात्मक नहीं रहा। कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली और सीमित दबाव के कारण उनके बाजार पूंजीकरण में गिरावट दर्ज की गई। इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और आईटी क्षेत्र की कुछ प्रमुख कंपनियां इस दौरान नुकसान उठाने वालों में शामिल रहीं। इसके बावजूद समग्र रूप से बाजार की दिशा सकारात्मक बनी रही और अधिकांश क्षेत्रों में निवेशकों का रुझान मजबूत बना रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में वैश्विक संकेतों में सुधार, घरेलू आर्थिक गतिविधियों में स्थिरता और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने भारतीय शेयर बाजार को मजबूती प्रदान की है। यही कारण रहा कि बड़ी कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली और उनके मूल्यांकन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ।

    साप्ताहिक उतार-चढ़ाव के बावजूद देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी के रूप में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं तथा निवेशकों का भरोसा इसी तरह कायम रहता है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है। इससे बड़ी कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में आगे भी बढ़ोतरी की संभावना बनी रहेगी।

  • भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगा नया आयाम, पीएम मोदी के दौरे पर टैगोर की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी खास पुस्तक की जाएगी भेंट

    भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगा नया आयाम, पीएम मोदी के दौरे पर टैगोर की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी खास पुस्तक की जाएगी भेंट


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के दौरे पर रहेंगे, जहां उनके स्वागत की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह यात्रा भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति और दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जकार्ता सहित कई प्रमुख स्थानों पर स्वागत की तैयारियों के बीच इस दौरे का सांस्कृतिक महत्व भी विशेष रूप से चर्चा में है।

    प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में द्विपक्षीय बैठकों के साथ भारतीय समुदाय से संवाद भी शामिल है। इस दौरान व्यापार, निवेश, समुद्री सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक साझेदारी जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को नई गति देने की दिशा में इस यात्रा को अहम माना जा रहा है।

    इस दौरे की एक विशेष उपलब्धि यह भी होगी कि प्रधानमंत्री मोदी को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा पर आधारित एक विशेष पुस्तक भेंट की जाएगी। यह वर्ष टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, जिससे इस यात्रा का सांस्कृतिक महत्व और बढ़ गया है। पुस्तक में टैगोर की यात्रा, उनके अनुभवों और भारत तथा इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है।

    बताया गया है कि इस पुस्तक पर पिछले दो वर्षों से शोध और लेखन का कार्य किया गया। शताब्दी वर्ष के अवसर पर इसके पूर्ण होने को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। लेखक का मानना है कि यह पुस्तक दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक संबंधों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी।

    रवींद्रनाथ टैगोर ने लगभग एक सदी पहले इंडोनेशिया की यात्रा के दौरान वहां की संस्कृति, कला और परंपराओं का गहन अध्ययन किया था। उन्होंने जावा, बाली, सुमात्रा, जकार्ता और अन्य क्षेत्रों का भ्रमण करते हुए भारतीय सांस्कृतिक प्रभावों को करीब से देखा। विशेष रूप से रामायण और महाभारत से जुड़े सांस्कृतिक स्वरूपों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया था।

    अपनी यात्रा के दौरान टैगोर ने प्रसिद्ध बोरोबुदुर मंदिर का भी भ्रमण किया और वहां की सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। उन्होंने स्थानीय कला, नृत्य और पारंपरिक शिल्प में गहरी रुचि दिखाई। उनकी इस यात्रा का प्रभाव बाद में भारतीय सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों में भी दिखाई दिया, जहां दक्षिण-पूर्व एशियाई कला और परंपराओं को विशेष महत्व दिया गया।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल कूटनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को भी नई पहचान देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ साझा सांस्कृतिक विरासत पर आधारित यह पहल दोनों देशों के रिश्तों को भविष्य में और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • महिला टी20 विश्व कप फाइनल में इन 5 स्टार खिलाड़ियों पर रहेंगी नजरें, एलिसा पेरी से इंग्लैंड को सबसे बड़ा खतरा

    महिला टी20 विश्व कप फाइनल में इन 5 स्टार खिलाड़ियों पर रहेंगी नजरें, एलिसा पेरी से इंग्लैंड को सबसे बड़ा खतरा


    नई दिल्ली। महिला टी20 विश्व कप 2026 का फाइनल रविवार को क्रिकेट के ऐतिहासिक मैदान लॉर्ड्स में खेला जाएगा, जहां मेजबान इंग्लैंड और छह बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया खिताब के लिए आमने-सामने होंगी। दोनों टीमें पूरे टूर्नामेंट में शानदार लय में रही हैं और अब सबकी निगाहें उन खिलाड़ियों पर होंगी जो अपने दम पर मैच का रुख बदल सकते हैं।

    इंग्लैंड की सलामी बल्लेबाज डैनी व्याट इस विश्व कप की सबसे सफल बल्लेबाज रही हैं। उन्होंने छह पारियों में 294 रन बनाए हैं और उनका औसत 73 रहा है। पूरे टूर्नामेंट में उनके बल्ले से एक शतक और दो अर्धशतक निकले हैं। यदि फाइनल में भी व्याट को अच्छी शुरुआत मिलती है तो ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ सकता है।

    गेंदबाजी में इंग्लैंड की सबसे बड़ी उम्मीद सोफी एक्लेस्टोन हैं। उन्होंने छह मैचों में नौ विकेट हासिल किए हैं और उनकी इकॉनमी मात्र 5.79 रही है। बीच के ओवरों में रन रोकने और महत्वपूर्ण विकेट लेने की उनकी क्षमता इंग्लैंड के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकती है।

    इंग्लैंड की कप्तान नेट साइवर-ब्रंट भी शानदार फॉर्म में हैं। सेमीफाइनल में उन्होंने मुश्किल परिस्थिति में 75 रन की मैच जिताऊ पारी खेलकर टीम को फाइनल तक पहुंचाया। बल्लेबाजी के साथ-साथ वह गेंद से भी योगदान देने में सक्षम हैं, इसलिए ऑस्ट्रेलिया को उनसे विशेष सावधान रहना होगा।

    ऑस्ट्रेलिया की सबसे अनुभवी ऑलराउंडर एलिसा पेरी एक बार फिर बड़े मुकाबले में सबसे बड़ी मैच विनर मानी जा रही हैं। उन्होंने इस विश्व कप में 185 रन बनाने के साथ चार विकेट भी अपने नाम किए हैं। बड़े मंच पर दबाव झेलने और मैच जिताने का उनका अनुभव इंग्लैंड के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।

    ऑस्ट्रेलियाई कप्तान सोफी मोलिनेक्स भी शानदार लय में हैं। उन्होंने छह मुकाबलों में 10 विकेट चटकाए हैं और उनकी इकॉनमी सिर्फ 6.50 रही है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर वह बल्ले से भी उपयोगी योगदान देने की क्षमता रखती हैं, जिससे उनका महत्व और बढ़ जाता है।

    दोनों टीमों के पास विश्व स्तरीय खिलाड़ी मौजूद हैं, लेकिन इन पांच सितारों का प्रदर्शन खिताबी मुकाबले का नतीजा तय करने में सबसे अहम भूमिका निभा सकता है। क्रिकेट प्रेमियों को लॉर्ड्स में एक रोमांचक और कांटे की टक्कर वाला फाइनल देखने की उम्मीद है।

  • जिनेवा में एआई गवर्नेंस पर वैश्विक मंथन, संयुक्त राष्ट्र के पहले ग्लोबल डायलॉग में भारत का नेतृत्व करेंगे केंद्रीय मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह

    जिनेवा में एआई गवर्नेंस पर वैश्विक मंथन, संयुक्त राष्ट्र के पहले ग्लोबल डायलॉग में भारत का नेतृत्व करेंगे केंद्रीय मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह

    नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक नियमन और जिम्मेदार उपयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहल शुरू होने जा रही है। इसी क्रम में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में 6 और 7 जुलाई को आयोजित होने वाले संयुक्त राष्ट्र के पहले एआई गवर्नेंस ग्लोबल डायलॉग में भारत सक्रिय भागीदारी करेगा। इस महत्वपूर्ण मंच पर केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।

    यह वैश्विक संवाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नीति निर्माण और साझा मानकों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसा वैश्विक ढांचा तैयार करना है, जो विभिन्न देशों, क्षेत्रीय संगठनों, निजी क्षेत्र, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों के प्रयासों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सके। तेजी से विकसित हो रही एआई तकनीकों को सुरक्षित, पारदर्शी और मानव-केंद्रित बनाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

    सम्मेलन में एआई के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव, विकसित और विकासशील देशों के बीच तकनीकी अंतर को कम करने, सुरक्षित एवं भरोसेमंद एआई प्रणालियों के विकास तथा मानवाधिकारों के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इन मुद्दों पर वैश्विक सहमति भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी सहयोग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    बैठक के दौरान एआई पर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की पहली वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाएगी। इस रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वर्तमान क्षमताओं, भविष्य की संभावनाओं और उससे जुड़े संभावित जोखिमों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट का उद्देश्य नीति निर्माताओं को विश्वसनीय और तथ्य आधारित जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि भविष्य की नीतियां संतुलित और प्रभावी बनाई जा सकें।

    भारत लगातार जिम्मेदार और समावेशी एआई विकास की वकालत करता रहा है। डिजिटल नवाचार, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में भारत की पहल को वैश्विक स्तर पर सकारात्मक दृष्टि से देखा जा रहा है। इसी क्रम में भारतीय प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन के दौरान विकासशील देशों की आवश्यकताओं, तकनीकी समानता और डिजिटल समावेशन से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाएगा।

    वैश्विक स्तर पर एआई तकनीक के तेजी से विस्तार ने नियामकीय ढांचे की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते साझा नियम और पारदर्शी व्यवस्था विकसित नहीं की गई, तो भविष्य में सुरक्षा, गोपनीयता और नैतिकता से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में यह संवाद वैश्विक सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।

    जिनेवा में होने वाले इस पहले सत्र के बाद अगले चरण का आयोजन वर्ष 2027 में न्यूयॉर्क में किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि इन बैठकों के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित, जिम्मेदार और टिकाऊ उपयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहमति मजबूत होगी तथा वैश्विक डिजिटल शासन व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।