Author: bharati

  • होलाष्टक आज से शुरू: विवाह और मांगलिक कार्यों का मुहूर्त निषिद्ध, होलिका दहन पर लगेगा चंद्र ग्रहण

    होलाष्टक आज से शुरू: विवाह और मांगलिक कार्यों का मुहूर्त निषिद्ध, होलिका दहन पर लगेगा चंद्र ग्रहण


    नई दिल्ली । आज 24 फरवरी से होलाष्टक शुरू हो रहा है। होली से पहले के आठ दिन यानी फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी से होलाष्टक माना जाता है। इन आठ दिनों में विवाह, जनेऊ, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते। ज्योतिषियों के अनुसार इस दौरान ग्रहों की स्थिति उग्र होती है, इसलिए मांगलिक कार्यों के लिए शुभ योग नहीं बनते। होलाष्टक का समापन होलिका दहन के साथ होता है।

    इस साल होलिका दहन यानी फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण भी होगा। ग्रहण के समय और सूतक में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। 3 मार्च को सुबह 6.21 बजे से ग्रहण का सूतक शुरू होगा और दोपहर 3.21 बजे से ग्रहण आरंभ होकर शाम 6.47 बजे तक रहेगा। ग्रहण के दौरान रंग-गुलाल खेलना उचित नहीं माना गया है। ज्योतिषियों की सलाह है कि इस समय मानसिक रूप से मंत्र जप, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करना चाहिए। इसके चलते इस साल धुलंडी होली 4 मार्च को मनाने की सलाह दी जा रही है, हालांकि कुछ पंचांगों में 3 मार्च को भी होली खेलने का उल्लेख है।

    होलाष्टक की कथा

    होलाष्टक से जुड़ी कथा भक्त प्रह्लाद से संबंधित है। असुरराज हिरण्यकश्यपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति के कारण अनेक यातनाएं दीं। फाल्गुन कृष्ण अष्टमी से पूर्णिमा तक होलिका ने प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने की कोशिश की, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका अग्नि में भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

    होलाष्टक में किए जाने वाले शुभ कार्य

    ध्यान, जप और पूजा का विशेष महत्व। शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करें, बिल्वपत्र चढ़ाएं और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें। हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें। भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा करें, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें दान-पुण्य, हवन, अभिषेक, ध्यान और तीर्थ यात्रा करना शुभ फलदायी माना गया है। इस प्रकार होलाष्टक का समय आध्यात्मिक उन्नति और भक्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है, जबकि मांगलिक कार्यों के लिए यह निषिद्ध अवधि है। होलिका दहन पर चंद्र ग्रहण के कारण इस वर्ष रंगों की होली 4 मार्च को खेलने की सलाह दी जा रही है।

  • जेल में बनी गैंग 11 ने अंबाह में डाली डकैती, किन्नर गुरु को बंधक बनाकर सोना-चांदी लूटा

    जेल में बनी गैंग 11 ने अंबाह में डाली डकैती, किन्नर गुरु को बंधक बनाकर सोना-चांदी लूटा


    मुरैना। अंबाह में किन्नर गुरु के घर हुई सनसनीखेज डकैती ने पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। वारदात के पीछे मामा भांजे की जोड़ी द्वारा जेल में तैयार की गई 11 सदस्यों की संगठित गैंग का हाथ सामने आया है। इस गिरोह ने पांच दिन के भीतर तीन अलग अलग जगहों पर वारदात की कोशिश की जिनमें दो बार असफल रहने के बाद तीसरी बार अंबाह में बड़ी लूट को अंजाम देकर फरार हो गए।

    पुलिस जांच के मुताबिक गिरोह की कमान सुरेश निषाद और उसके भांजे सुनील निषाद के हाथ में थी। दोनों पहले से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं और जेल में बंद रहने के दौरान उनकी मुलाकात अन्य अपराधियों से हुई। समान आपराधिक पृष्ठभूमि और एक ही समाज से जुड़े होने के कारण इनके बीच नजदीकियां बढ़ीं। जेल से रिहा होने के बाद मामा भांजे ने संपर्क बनाए रखा और नौ अन्य लोगों को जोड़कर गैंग 11 तैयार कर ली। गिरोह के सभी सदस्य मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश और राजस्थान में दर्ज मामलों में आरोपी रहे हैं।

    गैंग ने 13 जनवरी को राजस्थान के पाली जिले के सराफा बाजार में पहली वारदात की कोशिश की लेकिन बाजार में हलचल होने से भागना पड़ा। 16 जनवरी को मुरैना जिले के कैलारस में एक परिवार को बंधक बनाकर चोरी की पर उम्मीद के मुताबिक माल नहीं मिला। उसी रात सराफा बाजार में सीसीटीवी तार काटने के बावजूद वे सफल नहीं हो सके। 17 जनवरी की रात करीब दो बजे बदमाश सफेद एसयूवी से अंबाह पहुंचे। खेतों के रास्ते छत पर चढ़कर गैस कटर से गेट काटा और घर में घुस गए। किन्नर राबिया और रिया को हथियारों की नोक पर बंधक बनाकर 22 तोला सोना 4 किलो चांदी और करीब चार लाख रुपये नकद लूट लिए। पहचान छिपाने के लिए सीसीटीवी डीवीआर भी साथ ले गए।

    पीड़िता के अनुसार लूट के बाद बदमाशों ने अश्लील हरकतें कीं और जान से मारने की धमकी दी। बदमाश बार बार घर में किसी पुरुष की मौजूदगी के बारे में पूछते रहे। एक आरोपी के फारसी भाषा बोलने का भी जिक्र सामने आया है जिससे अंदरूनी मुखबिरी की आशंका गहराई। जांच में पता चला कि एक मुस्लिम साईं ने किन्नर के यहां कार्यक्रमों के दौरान जेवर देखे थे और यह जानकारी अपने दामाद के माध्यम से सुनील निषाद तक पहुंचाई गई जिसके बाद पूरी योजना बनाई गई।

    घटना के बाद मुरैना पुलिस ने चार विशेष टीमें गठित कर मध्यप्रदेश राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जांच का दायरा बढ़ाया। 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और मुखबिर की सूचना पर अलग अलग राज्यों से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अब तक करीब डेढ़ लाख रुपये नकद डेढ़ किलो चांदी और छह तोला सोना बरामद किया गया है। मुख्य आरोपी समेत छह बदमाश अभी फरार हैं जिनकी तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह है जिसने योजनाबद्ध तरीके से वारदातों को अंजाम दिया। शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अन्य मामलों के भी खुलासे होने की संभावना है।

  • अंक ज्योतिष भविष्यफल: आज स्थिरता और भावनात्मक संतुलन पर रहेगा जोर

    अंक ज्योतिष भविष्यफल: आज स्थिरता और भावनात्मक संतुलन पर रहेगा जोर


    नई दिल्ली:24 फरवरी 2026 का अंक ज्योतिष जीवन में स्थिरता, जिम्मेदारी और भावनात्मक संतुलन को प्राथमिकता देने का संकेत देता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज का मूलांक 6 है, जो प्रेम, परिवार, सामंजस्य और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। वहीं भाग्यांक 9 त्याग, पूर्णता और पुराने बोझ से मुक्ति की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है।

    इन दोनों अंकों का संयोजन यह दर्शाता है कि आज का दिन जल्दबाजी से बचकर धैर्य और विवेक के साथ निर्णय लेने के लिए अनुकूल है। कार्यक्षेत्र और पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक रहेगा। भावनात्मक रूप से परिपक्व फैसले भविष्य में स्थायी और सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं।

    मूलांक के अनुसार आज का प्रभाव
    मूलांक 1
    नेतृत्व क्षमता का उपयोग करें, लेकिन सामूहिक कार्यशैली अपनाएं। टीम के साथ तालमेल बनाकर चलना लाभकारी रहेगा।

    मूलांक 2
    संवाद और समझदारी से समस्याओं का समाधान संभव है। रिश्तों में नरमी और धैर्य से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।

    मूलांक 3
    रचनात्मक योजनाओं की शुरुआत के लिए समय अनुकूल है। नई सोच और आत्मविश्वास आपको आगे बढ़ाएंगे।

    मूलांक 4
    प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में स्थिरता रखें। सोच-समझकर लिए गए निर्णय भविष्य में लाभ देंगे।

    मूलांक 5
    निवेश और आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें। जल्दबाजी से नुकसान हो सकता है, इसलिए योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ें।

    मूलांक 6
    सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि के संकेत हैं। परिवार और कार्यक्षेत्र में संतुलन बनाकर चलें।

    मूलांक 7
    शोध, अध्ययन और आत्ममंथन के लिए दिन अनुकूल है। मानसिक स्पष्टता पाने के लिए ध्यान या एकांत समय लाभकारी रहेगा।

    मूलांक 8
    आर्थिक और कानूनी मामलों में सतर्कता रखें। धैर्य और अनुशासन से कार्य करें।

    मूलांक 9
    अधूरे कार्य पूरे करने और पुराने विवाद समाप्त करने का अवसर मिल सकता है। सकारात्मक पहल से संबंध सुधरेंगे।

    दिन का संदेश
    विशेषज्ञों का मानना है कि आज की ऊर्जा लोगों को अपने व्यक्तिगत और सामाजिक दायित्वों के प्रति अधिक सजग बनाएगी। परिवार में संवाद और समझदारी से रिश्ते मजबूत हो सकते हैं।

    मानसिक शांति बनाए रखने के लिए ध्यान, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी गई है। आज का दिन दिल और दिमाग दोनों के संतुलन से आगे बढ़ने का संकेत देता है।

  • हिंदू 4 बच्चे पैदा करें, शादी के बाद मैं भी आबादी बढ़ाऊंगा… बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री का बयान

    हिंदू 4 बच्चे पैदा करें, शादी के बाद मैं भी आबादी बढ़ाऊंगा… बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री का बयान


    नई दिल्ली । धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदुओं को कम से कम चार बच्चे पैदा करने की सलाह दी है. उन्होंने ये भी बताया कि जब उनकी शादी होगी तो वो भी हिंदुओं की आबादी बढ़ाने में अपना योगदान देंगे. बागेश्वर धाम सरकार ने इस दौरान अजमेर शरीफ की दरगाह जाने वाले हिंदुओं को सलाह दी को वो सनातन का ही पालन करें.
    आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बाद अब बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदुओं की घटती आबादी को लेकर चिंता जताई है. जहां भागवत ने हिंदुओं को तीन बच्चे पैदा करने के लिए कहा था वहीं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदुओं को 4 बच्चे पैदा करने की सलाह दी है.

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हनुमान कथा के लिए तीन दिवसीय पुष्कर दौरे पर गए हैं. इस दौरान उन्होंने कई अलग अलग मुद्दों पर अपने विचार साझा किए. इस दौरान उन्होंने भारतीय मुसलमानों की घर वापसी को लेकर भी अपनी राय दी है.

    हिंदुओं की घटती आबादी को लेकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कहा ‘ये बहुत वैश्विक विषय है खासकर भारत का बहुत बड़ा मुद्दा है. घटते हिंदू बढ़ते मजहबी देश को बर्बाद करने के परिस्थिति पर जा रहा है
    ‘शादी के बाद हम भी हिंदुओं की आबादी..

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आगे कहा ‘हिंदूओं को कम से कम चार बच्चे पैदा करना चाहिए. हमारी तो शादी नहीं हुई तो हम पर तो अभी लोग कमेंट करेंगे ही कि बाबा आपका क्या योगदान है. जब हमारा ब्याह हो जाएगा तो हम भी हिंदुओं की आबादी बढ़ाने में योगदान देंगे

    मुसलमानों की घर वापसी पर बोले बाबाधाम सरकार

    भारतीय मुसलमानों की घर वापसी के सवाल पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दावा किया कि उनके पूर्वज हिंदू थे. उन्होंने कहा एक फिल्म आई थी अमर अकबर एंथनी उसमें आखिर में तीनों का बाप कन्हैयालाल निकला था. उन्हें अगर ये बात समझ आ जाए तो घर वापसी हो जाएगी

    हिंदुओं को अजमेर की दरगाह पर ना जाने की सलाह

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अजमेर शरीफ की दरगाह जाने वाले हिंदू धर्म के लोगों से अपील की. उन्होंने कहा सबके अपने अपने विचार हैं लेकिन सनातनों से मैं एक प्रार्थना करूंगा कि गीता में कृष्ण भगवान ने कहा कि अपने धर्म में ही चलना जीना सही है. दूसरे धर्म मजहब में उनकी सेवा उन्हें करने दो. हमें अपनी श्रद्धा भावना से भक्ति करनी चाहिए और हमें लगता है हिंदुओं में भगवानों की कमी नहीं है

  • पीएमएफएमई योजना से प्रेमलता गृहिणी से बनी सफल उद्यमी, सालाना 30 लाख की आय

    पीएमएफएमई योजना से प्रेमलता गृहिणी से बनी सफल उद्यमी, सालाना 30 लाख की आय


    नीमच। कभी घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली नीमच जिले के ग्राम बमोरा की श्रीमती प्रेमलता पाटीदार आज एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना ने उनके सपनों को पंख देकर आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है।

    श्रीमती प्रेमलता बताती हैं कि वे हमेशा कुछ अपना करना चाहती थीं, लेकिन संसाधनों की कमी और मार्गदर्शन के अभाव में आगे बढ़ना आसान नहीं था। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग के माध्यम से पीएमएफएमई योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत उन्होंने 23.61 लाख रुपये की लागत से बालाजी उद्योग नाम से खाद्य तेल प्रसंस्करण इकाई स्थापित की। उद्योग की स्थापना के लिए उन्होंने नीमच जिले में भारतीय स्टेट बैंक की जीरन शाखा से 20 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। शासन की ओर से उन्हें 8.26 लाख रुपये का अनुदान भी मिला, जिससे उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ।

    श्रीमती प्रेमलता ने गोपाल कृष्ण नाम के ब्रांड से कोकोनट ऑयल का पंजीयन कराया और अपने उत्पाद को बाजार में उतारा। गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और निरंतर मेहनत के बल पर उनका व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ा। आज उनका मासिक टर्नओवर लगभग 8 से 10 लाख रुपये है और वे प्रतिमाह 2 से 3 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। सालाना लाभ लगभग 30 लाख रुपये से अधिक पहुंच चुका है।

    प्रेमलता की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। उन्होंने अपने उद्योग में 7 स्थानीय लोगों को रोजगार देकर गांव में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया है। वे कहती हैं, “सरकार की योजना ने मुझे हिम्मत दी, लेकिन सफलता मेहनत और विश्वास से मिली।

    नीमच जिले में पीएमएफएमई योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिले में अब तक 210 हितग्राहियों को योजना से लाभान्वित किया गया है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 125 नए उद्योग स्थापित हुए हैं। इस उपलब्धि के साथ नीमच जिला प्रदेश और संभाग के अग्रणी जिलों में शामिल हो गया है।

    प्रेमलता पाटीदार की यह कहानी बताती है कि आत्म विश्वास के साथ सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिल जाये तो एक गृहिणी भी सफल उद्योगपति बन सकती है। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण है।

  • केरल का नया नाम ‘केरलम’! मोदी कैबिनेट ने दिया ऐतिहासिक मंजूरी, राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नया सम्मान

    केरल का नया नाम ‘केरलम’! मोदी कैबिनेट ने दिया ऐतिहासिक मंजूरी, राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नया सम्मान


    नई दिल्ली। केरल अब आधिकारिक तौर पर ‘केरलम’ के नाम से जाना जाएगा। मोदी कैबिनेट ने मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को इस ऐतिहासिक फैसले पर मुहर लगा दी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि केरल का नाम बदलने की मांग लंबे समय से राज्य और स्थानीय भाषा प्रेमियों के बीच उठती रही है, और अब इस पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हरी झंडी दे दी है। इस कदम को राज्य विधानसभा में अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह संविधान की आठवीं अनुसूची में भी शामिल कर दिया जाएगा।

    केरल विधानसभा ने इस प्रस्ताव को पारित करने का रास्ता पहले ही साफ कर दिया था। 24 जून, 2024 को विधानसभा ने आम सहमति से केंद्र सरकार को राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रारंभिक प्रस्ताव में कुछ तकनीकी सुधार सुझाए थे। इसके बाद दूसरी बार प्रस्ताव पारित किया गया और अब केंद्र ने इसे मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में राज्य के हित में यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि यह नाम न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि मलयालम भाषा के महत्व को भी उजागर करेगा।

    केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी राज्य का नाम बदलने का लंबे समय से समर्थन किया था। उनका कहना था कि ‘केरलम’ नाम मलयालम भाषा और स्थानीय संस्कृति की गहनता को दर्शाता है और इससे राज्य की पहचान और गौरव बढ़ेगा। भाजपा के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी इस साल के शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य का आधिकारिक नाम बदलने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि ‘केरलम’ नाम स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करता है और राज्य की असली पहचान को दर्शाता है।

    नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित इस बैठक में केरल का नाम बदलने के अलावा भी कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इस कदम से राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक और सांस्कृतिक माहौल में भी एक नया उत्साह देखा जा रहा है। नाम परिवर्तन न केवल औपचारिकता है, बल्कि यह राज्यवासियों के लिए सांस्कृतिक गर्व और भाषाई सम्मान का प्रतीक है।

    केरल का यह नाम परिवर्तन देश के अन्य राज्यों में भी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूकता बढ़ा सकता है। राज्य में स्थानीय भाषा, परंपराएं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए यह एक मजबूत संदेश है। अब केरलम के नाम से राज्य की पहचान और भी व्यापक होगी, और यह राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

    संक्षेप में कहा जाए तो मोदी कैबिनेट द्वारा केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की मंजूरी राज्य की भाषाई, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान को मजबूत करने वाला निर्णय है। अब इसे अंतिम रूप देने के लिए राज्य विधानसभा में विधेयक पेश किया जाएगा, जिसके बाद यह नाम संविधान की आठवीं अनुसूची में भी दर्ज होगा। इस कदम से केरलम की सांस्कृतिक विरासत को एक नई पहचान मिलेगी और राज्यवासियों में गर्व की भावना और बढ़ेगी।

  • मंगल दोष के प्रभाव कम करने के उपाय: मंगलवार को हनुमान उपासना और दान का विशेष महत्व

    मंगल दोष के प्रभाव कम करने के उपाय: मंगलवार को हनुमान उपासना और दान का विशेष महत्व


    नई दिल्ली।वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को पराक्रम, ऊर्जा, साहस और भूमि का कारक माना गया है। यदि कुंडली में मंगल की स्थिति प्रतिकूल हो, तो इसे मंगल दोष या कुज दोष कहा जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार मंगलवार का दिन मंगल ग्रह की शांति और अनुकूलता के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन हनुमान उपासना, व्रत, दान और संयमित जीवनशैली को प्रभावी उपाय माना गया है।

    मंगल ग्रह को अनुकूल बनाने के धार्मिक उपाय
    ज्योतिषीय मान्यता है कि मंगलवार को श्रद्धा और नियमपूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, बाधा और मानसिक अशांति में कमी आती है। प्रातः स्नान कर स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें और भगवान हनुमान की पूजा करें। दीप प्रज्वलित कर सिंदूर, चोला तथा गुड़-चना का भोग अर्पित करना मंगल ग्रह के शुभ फल को बढ़ाने वाला माना गया है।

    मंगलवार का व्रत भी विशेष फलदायी बताया गया है। इस दिन सात्विक आहार ग्रहण करें और यथासंभव नमक का त्याग करें। दिनभर संयम, धैर्य और सेवा भाव बनाए रखना धार्मिक दृष्टि से मंगल शांति का साधन माना जाता है।

    दान और सेवा का महत्व
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान और सेवा मंगल कृपा प्राप्ति का श्रेष्ठ मार्ग है। जरूरतमंदों को लाल मसूर की दाल, गुड़, शहद या लाल वस्त्र दान करना पुण्यदायी माना गया है।

    गौ सेवा भी मंगल शांति के उपायों में शामिल है। विशेषकर मंगलवार को गौमाता को गुड़ और रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन आने की मान्यता है।

    तांबा और मंत्र जाप
    ज्योतिष परंपरा में तांबा मंगल ग्रह की धातु मानी जाती है। इसलिए तांबे के पात्र का उपयोग करना या तांबे का कड़ा अथवा चेन धारण करना पारंपरिक उपायों में शामिल है।

    इसके साथ ‘ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः’ या ‘ॐ अंग अंगारकाय नमः’ मंत्र का नियमित जप मंगल ग्रह की शांति और कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना गया है। नियमित जप से मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास में वृद्धि होने की भी मान्यता है।

    मंगल दोष शांति के विशेष उपाय
    यदि कुंडली में मंगल दोष अधिक प्रबल हो, तो विवाह से पूर्व विशेष पूजा-अनुष्ठान कराने की परंपरा है। योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में मंगल शांति अनुष्ठान, पीपल पूजन या मंगल यंत्र की स्थापना कर पूजा की जाती है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करना भी मंगल के संतुलन का प्रतीक माना गया है। हालांकि, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अनुभवी ज्योतिषाचार्य से परामर्श करना उचित माना जाता है।

    आध्यात्मिक संदेश
    धार्मिक दृष्टि से ग्रहों की शांति केवल अनुष्ठानों से नहीं, बल्कि आचरण से भी जुड़ी मानी जाती है। संयमित जीवन, सेवा भाव, परिवार के प्रति सद्भाव और ईश्वर स्मरण जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। श्रद्धा, नियम और सत्कर्म ही मंगल की कृपा का सच्चा आधार माने गए हैं।

  • मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल

    मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल


    भोपाल!
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य खाद्यान्न, दलहन तथ तिलहन फसलों के उत्पादन में शीर्ष तीन राज्यों में शामिल रहा है। मध्यप्रदेश ने कुल खाद्यान्न उत्पादन में 46.63 मिलियन टन उत्पादन के साथ देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया, जो राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 13.04 प्रतिशत है। राज्य कुल दलहन फसल उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर हैं। तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कृषकों की आय को बढ़ाने एवं उनके समग्र कल्याण के उद्देश्य से वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है।

    खाद्यान्न उत्पादन में देश में दूसरा स्थान

    गेहूं उत्पादन में राज्य ने 24.51 मिलियन टन उत्पादन किया और लगभग 20.78 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में दूसरा स्थान हासिल किया। राज्य मक्का उत्पादन में भी अग्रणी रहा, 6.64 मिलियन टन उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश का राष्ट्रीय हिस्सेदारी में लगभग 15.30 प्रतिशत योगदान रहा, जिससे यह देश का प्रमुख उत्पादक राज्य बना। मोटे अनाज (न्यूट्री/कोर्स सीरियल्स) के उत्पादन में भी राज्य ने 7.78 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 12.17 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की और देश में तृतीय स्थान हासिल किया।

    दलहन उत्पादन शीर्ष स्थान बरक़रार

    दलहन क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल दलहन उत्पादन में 5.24 मिलियन टन उत्पादन किया और 20.40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में पहला स्थान प्राप्त किया। चना उत्पादन में राज्य 2.11 मिलियन टन उत्पादन और लगभग 19.01 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष तीन राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा।

    तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी राज्य

    तिलहन क्षेत्र में भी राज्य की स्थिति मजबूत रही। कुल तिलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश ने 8.25 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 19.19 प्रतिशत राष्ट्रीय हिस्सेदारी दर्ज की एवं देश से दूसरा स्थान हासिल किया। विशेष रूप से सोयाबीन उत्पादन में राज्य ने 5.38 मिलियन टन उत्पादन किया, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 35.27 प्रतिशत है और इसे देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में स्थापित करता है। राज्य में मूंगफली का उत्पादन 1.55 मिलियन टन रहा जो कि देश के कुल उत्पादन का 12.99 प्रतिशत रहा। मूंगफली उत्पादन में राज्य देश में तीसरे स्थान पर है।

    मध्यप्रदेश में केंद्र एवं राज्य सरकार की कृषि विकास योजनाओं रासायनिक उर्वरकों का वितरण, पौध संरक्षण कार्यक्रम, मांग आधारित कृषि के लिए फसलों का विविधीकरण, एक जिला-एक उत्पाद योजना, मध्यप्रदेश राज्य मिलेट मिशन, कृषि उत्पादक संगठनों का गठन एवं संवर्धन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भावांतर भुगतान, रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना आदि का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया। परिणामस्वरूप राज्य को कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है। कुल उत्पादन में वृद्धि हुई है। कृषि आधारित नीतियों के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण राज्य के रूप में स्थापित है।

  • चंद्र ग्रहण की वजह से होली को तिथि को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति, नोट कर लें होलिका दहन और रंग खेलने की सही डेट

    चंद्र ग्रहण की वजह से होली को तिथि को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति, नोट कर लें होलिका दहन और रंग खेलने की सही डेट


    नई दिल्ली । Holi 2026: इस बार रंगों की होली और होलिका दहन को लेकर कंफ्यूजन देखने को मिल रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण। वाराणसी के प्रसिद्ध हृषिकेश पंचांग और जाने माने ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार इस ग्रहण ने होली की गणित को थोड़ा पेचीदा बना दिया है। अगर आप भी इसी उलझन में हैं कि होलिका दहन कब होगा सूतक कब लगेगा और रंग कब खेला जाएगा तो जानिए यहां सबकुछ।

    2 मार्च: भद्रा पुच्छ में ही होगा होलिका दहन

    वैदिक पंचांग के अनुसार 2 मार्च 2026 सोमवार को चतुर्दशी तिथि शाम 5:18 बजे तक रहेगी उसके तुरंत बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। शास्त्रों का नियम है कि होलिका दहन हमेशा पूर्णिमा तिथि में ही किया जाता है लेकिन इस बार पूर्णिमा के साथ ही भद्रा का आगमन भी हो रहा है।

    भद्रा का लंबा साया 2 मार्च की शाम 5:18 बजे से लेकर पूरी रात और अगले दिन 3 मार्च की भोर सुबह 4:56 बजे तक भद्रा का वास रहेगा। शास्त्रों में भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है क्योंकि इससे राज्य और व्यक्ति पर अशुभ प्रभाव पड़ते हैं।

    शुभ मुहूर्त का चयन ऐसी स्थिति में जब पूरी रात भद्रा हो तो शास्त्रों में भद्रा पुच्छ भद्रा का पूंछ वाला भाग में कार्य करने का विधान है। पं. नरेंद्र उपाध्याय जी के अनुसार इस साल दहन का सबसे शुभ समय यह रहेगा

    शुभ मुहूर्त: रात 12:50 बजे से रात 02:02 बजे तक अवधि: 1 घंटा 12 मिनट

    इसी समय में दहन करना शास्त्रीय दृष्टि से सबसे उत्तम और कल्याणकारी है। 3 मार्च: होली पर चंद्र ग्रहण का पहरा 3 मार्च मंगलवार को पूर्णिमा तिथि के दिन ही साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा इसलिए इसका धार्मिक प्रभाव सूतक भी पूरे देश में मान्य होगा। ग्रहण की टाइमिंग भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण दोपहर लगभग 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा। इस ग्रहण के दौरान ब्लड मून का नजारा भी देखने को मिल सकता है।

    सूतक काल और नियम चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। इसका मतलब यह है कि 3 मार्च को सुबह 06:20 बजे से ही सूतक लग जाएगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। इस दौरान पूजा पाठ मूर्ति स्पर्श और खाना पीना वर्जित होता है। सूतक और ग्रहण के साये में होली का डंडा या रंग गुलाल खेलना अशुभ माना जाता है इसलिए 3 मार्च को रंग वाली होली नहीं मनाई जाएगी।

    4 मार्च: रंगों की होली धुलेंडी का असली उत्सव 3 मार्च की शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद शुद्धिकरण और स्नान किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 4 मार्च 2026 बुधवार को सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि रहेगी। शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार ग्रहण और सूतक से मुक्त होने के बाद इसी दिन पूरे देश में धूम धाम से धुलेंडी और रंगों का त्योहार मनाया जाएगा।

    होली 2026: पूरा कैलेंडर

    2 मार्च सोमवार होलिका दहन रात 12:50 बजे से 02:02 बजे तक

    3 मार्च मंगलवार चंद्र ग्रहण दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक

    3 मार्च मंगलवार सूतक काल सुबह 06:20 बजे से शुरू

    4 मार्च बुधवार रंग वाली होली सुबह से धुलेंडी का असली दिन

    ग्रहण के दौरान सावधानियां और उपाय

    तुलसी का प्रयोग सूतक लगने से पहले 3 मार्च सुबह दूध दही और पके हुए खाने में तुलसी के पत्ते जरूर डाल दें। गर्भवती महिलाएं ग्रहण के समय बाहर न निकलें और न ही किसी नुकीली चीज़ सुई कैंची का इस्तेमाल करें। स्नान और दान ग्रहण खत्म होने के बाद 3 मार्च शाम 7 बजे के बाद स्नान करें और सफेद वस्त्र चावल या चीनी का दान करें। इससे ग्रहण का अशुभ प्रभाव कम होता है। मंत्र जाप ग्रहण के दौरान ॐ नमः शिवाय का जाप करना होली पर कई गुना फलदायी होता है।

  • 24 फरवरी 2026 पंचांग: अभिजीत और अमृत काल में करें शुभ कार्य, जानें ग्रह-नक्षत्र की स्थिति

    24 फरवरी 2026 पंचांग: अभिजीत और अमृत काल में करें शुभ कार्य, जानें ग्रह-नक्षत्र की स्थिति


    नई दिल्ली।24 फरवरी 2026, मंगलवार का दिन विशेष खगोलीय संयोगों के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि प्रातः 7:01 बजे तक प्रभावी रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आज का दिन सामाजिक प्रतिष्ठा, प्रशासनिक कार्यों और व्यक्तिगत निर्णयों के लिहाज से प्रभावशाली रह सकता है।

    ग्रहों की स्थिति और नक्षत्र प्रभाव
    आज सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और राहु का कुंभ राशि में संयोग बना हुआ है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह ग्रह स्थिति सामूहिक प्रयासों, सार्वजनिक जीवन और सरकारी गतिविधियों में सक्रियता बढ़ाने वाली मानी जाती है।

    वहीं चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहेगा और कृत्तिका नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। कृत्तिका नक्षत्र को ऊर्जा, स्पष्ट सोच और साहस का प्रतीक माना जाता है। पंचांग विशेषज्ञों का मानना है कि यह नक्षत्र अधूरे कार्यों को पूरा करने और नई योजनाओं को गति देने के लिए अनुकूल समय प्रदान करता है।

    योग और शुभ मुहूर्त
    दिन की शुरुआत इन्द्र योग से होगी, जो प्रातः 7:24 बजे तक प्रभावी रहेगा। इन्द्र योग को मान-सम्मान और सफलता प्रदान करने वाला योग माना जाता है। इसके पश्चात वैधृति योग प्रारंभ होगा। इस योग में धैर्य, संतुलन और सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।

    आज का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:12 बजे से 12:57 बजे तक रहेगा। इस अवधि को विशेष रूप से शुभ कार्यों, सरकारी प्रक्रियाओं और महत्वपूर्ण शुरुआत के लिए अनुकूल माना गया है।

    इसके अतिरिक्त अमृत काल दोपहर 12:51 बजे से 2:22 बजे तक रहेगा। यह समय नए कार्य आरंभ करने, अनुबंध करने और सकारात्मक निर्णय लेने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

    राहुकाल और सावधानियां
    पंचांग के अनुसार राहुकाल सायं 3:26 बजे से 4:52 बजे तक रहेगा। इस दौरान निवेश, विवाद या बड़े निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जाती है।

    यमगण्ड और गुलिकाल के समय भी पारंपरिक रूप से सावधानी बरतने की परंपरा रही है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इन समयों का पालन केवल धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि मानसिक अनुशासन और समय प्रबंधन का भी एक हिस्सा है।

    सूर्योदय और चंद्रमा से जुड़ी जानकारी
    आज सूर्योदय प्रातः 6:51 बजे और सूर्यास्त सायं 6:18 बजे होगा। चंद्रोदय 10:58 बजे और चंद्रास्त अगले दिन 1:40 बजे निर्धारित है। यह जानकारी विशेष रूप से व्रत, पूजन और दैनिक धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    पंचांग का व्यापक महत्व
    ज्योतिष विश्लेषकों का कहना है कि पंचांग केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर समय का सदुपयोग, निर्णय की दिशा और कार्यों की योजना बनाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।