Author: bharati

  • बारिश में जूतों से आने वाली बदबू से हैं परेशान? घर की 4 आसान चीजें मिनटों में दूर करें नमी, बैक्टीरिया और दुर्गंध की समस्या

    बारिश में जूतों से आने वाली बदबू से हैं परेशान? घर की 4 आसान चीजें मिनटों में दूर करें नमी, बैक्टीरिया और दुर्गंध की समस्या

    नई दिल्ली । मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इसके साथ कई छोटी-बड़ी परेशानियां भी लेकर आता है। इनमें जूतों से आने वाली बदबू एक आम समस्या है, जिससे कई लोग रोजमर्रा की जिंदगी में असहज महसूस करते हैं। ऑफिस, स्कूल, कॉलेज या किसी सामाजिक कार्यक्रम में जूते उतारते समय अगर उनमें से तेज दुर्गंध आने लगे तो यह शर्मिंदगी का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी मुख्य वजह बारिश के मौसम में बढ़ी हुई नमी और बैक्टीरिया का तेजी से पनपना है।

    बारिश के दिनों में पैर अक्सर पसीने या पानी के संपर्क में रहते हैं। जब नमी लंबे समय तक जूतों के अंदर बनी रहती है तो बैक्टीरिया और फंगस विकसित होने लगते हैं। यही सूक्ष्म जीव दुर्गंध पैदा करते हैं। यदि समय रहते जूतों की सफाई और देखभाल न की जाए तो समस्या और बढ़ सकती है।

    इस परेशानी से राहत पाने के लिए महंगे उत्पादों की जरूरत नहीं होती। घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों का सही तरीके से उपयोग कर जूतों की बदबू को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सबसे प्रभावी उपायों में बेकिंग सोडा शामिल है। रात में सोने से पहले जूतों के अंदर थोड़ा-सा बेकिंग सोडा छिड़कने से यह अतिरिक्त नमी और दुर्गंध को सोख लेता है। सुबह जूतों को अच्छी तरह झाड़कर साफ कर दें। इससे जूते अधिक ताजगी भरे महसूस होते हैं।

    सूखी चाय की पत्ती या इस्तेमाल किए गए और अच्छी तरह सुखाए गए टी-बैग भी इस समस्या में उपयोगी साबित हो सकते हैं। इन्हें कुछ घंटों के लिए जूतों के अंदर रखने से नमी कम होती है और दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया की सक्रियता घटती है। यह तरीका विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभदायक है जो रोजाना लंबे समय तक जूते पहनते हैं।

    अगर बारिश में जूते भीग गए हों तो उन्हें तुरंत सुखाना बेहद जरूरी है। इसके लिए पुराने अखबार का इस्तेमाल किया जा सकता है। अखबार को मोड़कर जूतों के अंदर भर देने से वह तेजी से नमी सोख लेता है। यदि अखबार पूरी तरह गीला हो जाए तो उसे बदलकर दूसरा सूखा अखबार रख दें। इससे जूतों के अंदर नमी जमा नहीं होती और बैक्टीरिया के पनपने की संभावना कम हो जाती है।

    इसके अलावा, जब भी मौसम साफ हो और धूप निकले, जूतों को कुछ समय के लिए खुली हवा और धूप में जरूर रखें। सूर्य की किरणें प्राकृतिक रूप से नमी कम करने के साथ बैक्टीरिया और फंगस की वृद्धि को भी रोकने में मदद करती हैं। नियमित रूप से जूतों को हवा लगने देने से उनमें ताजगी बनी रहती है और दुर्गंध की समस्या दोबारा होने की संभावना कम होती है।

    मानसून के दौरान जूतों की साफ-सफाई और सही देखभाल पर थोड़ा-सा ध्यान देकर बदबू की समस्या से आसानी से बचा जा सकता है। घरेलू उपाय न केवल किफायती हैं, बल्कि नियमित उपयोग से जूतों की स्वच्छता बनाए रखने और पैरों को संक्रमण से सुरक्षित रखने में भी मददगार साबित होते हैं।

  • अगर दिल है मजबूत तो जरूर देखें OTT की ये 7 जबरदस्त हॉरर सीरीज सस्पेंस और डर का मिलेगा डबल डोज

    अगर दिल है मजबूत तो जरूर देखें OTT की ये 7 जबरदस्त हॉरर सीरीज सस्पेंस और डर का मिलेगा डबल डोज


    नई दिल्ली। अगर आप हॉरर और सस्पेंस से भरपूर वेब सीरीज देखने के शौकीन हैं तो ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कई ऐसी शानदार हिंदी सीरीज मौजूद हैं जो आपको शुरुआत से लेकर आखिरी एपिसोड तक बांधे रखेंगी। इन कहानियों में रहस्य अलौकिक शक्तियां मनोवैज्ञानिक डर और थ्रिल का ऐसा मिश्रण देखने को मिलता है जो हर सीन के साथ रोमांच बढ़ाता जाता है। इनमें से कई सीरीज को दर्शकों के साथ साथ आलोचकों ने भी खूब सराहा है और IMDb पर अच्छी रेटिंग हासिल हुई है।

    इस सूची में सबसे पहला नाम खौफ का है। प्राइम वीडियो पर उपलब्ध यह सीरीज एक गर्ल्स हॉस्टल की कहानी दिखाती है जहां एक रहस्यमयी और खौफनाक शक्ति का साया मंडराता रहता है। हॉस्टल की लड़कियां वहां से निकलना चाहती हैं लेकिन परिस्थितियां उन्हें ऐसा करने नहीं देतीं। दमदार अभिनय और डरावने माहौल की वजह से इसे IMDb पर 7.4 की रेटिंग मिली है।

    दूसरे नंबर पर दहन राकन का रहस्य है जो जियो हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रही है। कहानी एक दूरदराज गांव की है जहां एक महिला अधिकारी की पोस्टिंग होती है। गांव में होने वाली रहस्यमयी घटनाओं के पीछे का सच धीरे धीरे सामने आता है और दर्शकों को अंत तक सस्पेंस में रखता है। इसे IMDb पर 7.1 की रेटिंग मिली है।

    अगर आपको मनोवैज्ञानिक हॉरर पसंद है तो भ्रम एक अच्छा विकल्प हो सकता है। जी5 पर उपलब्ध यह सीरीज एक ऐसी महिला की कहानी है जो हादसे के बाद अजीब घटनाओं का सामना करती है और वास्तविकता तथा भ्रम के बीच फंस जाती है।

    डायन भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हॉरर शोज में शामिल है। यह कहानी प्रेम और रहस्य के बीच अलौकिक शक्तियों की एंट्री के बाद खौफनाक मोड़ लेती है। लंबे एपिसोड्स वाली यह सीरीज हॉरर प्रेमियों को पसंद आ सकती है।

    प्राइम वीडियो की अधूरा एक बोर्डिंग स्कूल में घटने वाली रहस्यमयी घटनाओं पर आधारित है। पुराने राज और नए रहस्यों के खुलासे के साथ कहानी लगातार रोमांचक होती जाती है। स्कूल का डरावना माहौल और सस्पेंस इसे खास बनाते हैं।

    सूची में शामिल धूता अपनी अनोखी कहानी की वजह से अलग पहचान रखती है। इसमें एक पत्रकार की जिंदगी उस समय बदल जाती है जब अखबार में उसके भविष्य की घटनाएं पहले से प्रकाशित होने लगती हैं। रहस्य और अलौकिक घटनाओं का मेल इसे बेहद दिलचस्प बनाता है। IMDb पर इसे 7.7 की शानदार रेटिंग मिली है जो इस सूची में सबसे ज्यादा है।

    वहीं घूल नेटफ्लिक्स की चर्चित हॉरर सीरीज है। इसकी कहानी एक मिलिट्री डिटेंशन सेंटर और वहां लाए गए रहस्यमयी कैदी के इर्द गिर्द घूमती है। डरावने माहौल और दमदार कहानी के कारण यह सीरीज आज भी हॉरर प्रेमियों की पसंदीदा लिस्ट में शामिल है।

    अगर इस वीकेंड आप कुछ अलग और रोमांचक देखना चाहते हैं तो ये सातों हॉरर सीरीज आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए। इनमें डर रहस्य और बेहतरीन कहानी का ऐसा मेल है जो हर एपिसोड के साथ रोमांच को नई ऊंचाई पर ले जाता है।

  • सोनाक्षी सिन्हा के घर की खास पेंटिंग बनी चर्चा का विषय गायत्री मंत्र और कलमा साथ दिखने पर सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा

    सोनाक्षी सिन्हा के घर की खास पेंटिंग बनी चर्चा का विषय गायत्री मंत्र और कलमा साथ दिखने पर सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनकी कोई फिल्म या नया प्रोजेक्ट नहीं बल्कि उनके घर में लगी एक खास पेंटिंग है। अभिनेत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस कलाकृति की तस्वीर साझा की जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गई। पेंटिंग में हिंदू धर्म के पवित्र गायत्री मंत्र और इस्लाम के कलमा को एक साथ कलात्मक रूप में दर्शाया गया है। इस अनोखी प्रस्तुति ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। कुछ लोगों ने इसे आपसी सम्मान और सौहार्द का प्रतीक बताया जबकि कुछ यूजर्स ने इसकी आलोचना भी की।

    सोनाक्षी सिन्हा ने इस पेंटिंग के पीछे की भावनात्मक कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी शादी के दौरान जब वैदिक मंत्रों का उच्चारण हो रहा था उसी समय आसपास से अजान की आवाज भी सुनाई दे रही थी। उनके अनुसार दोनों प्रार्थनाओं का वह संगम उनके जीवन की सबसे खूबसूरत यादों में शामिल है और उसी भावना को इस पेंटिंग में साकार किया गया है।

    अभिनेत्री ने बताया कि यह पेंटिंग उन्हें उनकी करीबी मित्र शुभिका शर्मा ने शादी के उपहार के रूप में देने का विचार किया था। ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान शुभिका ने उनसे संपर्क कर इस विशेष उपहार का जिक्र किया। बाद में कलाकार आदिल बेदी ने इस विचार को एक खूबसूरत कलाकृति का रूप दिया। पेंटिंग में बड़े आकार का ओम चिन्ह बनाया गया है जिसके भीतर गायत्री मंत्र अंकित है जबकि नीचे कलमा को भी स्थान दिया गया है। यह पूरी रचना दोनों धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान और प्रेम का संदेश देती दिखाई देती है।

    पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने इसे प्रेम विश्वास और धार्मिक सद्भाव का सुंदर उदाहरण बताया। लोगों ने लिखा कि अलग अलग आस्थाओं के बावजूद एक दूसरे के विश्वास का सम्मान करना ही रिश्तों की असली खूबसूरती है। कई प्रशंसकों ने इस कलाकृति की रचनात्मकता और भावनात्मक संदेश की भी सराहना की।

    हालांकि दूसरी ओर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पेंटिंग पर आपत्ति भी जताई। कुछ लोगों ने धार्मिक प्रतीकों को एक साथ प्रस्तुत करने पर सवाल उठाए जबकि कुछ ने इसे लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियां कीं। सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर अलग अलग विचार सामने आए और पोस्ट चर्चा का विषय बन गई।

    सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल ने वर्ष 2024 में विवाह किया था। अलग धार्मिक पृष्ठभूमि होने के कारण उनकी शादी भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रही थी। इसके बावजूद दोनों ने हमेशा अपने रिश्ते को आपसी सम्मान और समझ का उदाहरण बताया है। अब यह नई पेंटिंग भी उसी सोच को दर्शाती नजर आ रही है जिसमें प्रेम और विविधता को साथ लेकर चलने का संदेश दिया गया है।

  • टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अक्षर पटेल का ऐतिहासिक धमाका, 100 विकेट का आंकड़ा छूने वाले भारत के पहले स्पिनर बनकर रचा नया कीर्तिमान

    टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अक्षर पटेल का ऐतिहासिक धमाका, 100 विकेट का आंकड़ा छूने वाले भारत के पहले स्पिनर बनकर रचा नया कीर्तिमान

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पटल पर अपनी फिरकी का लोहा मनवाते हुए एक बेहद ऐतिहासिक और दुर्लभ उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में अक्षर पटेल ने यह विशेष मुकाम हासिल किया। उन्होंने इस मुकाबले में कसी हुई गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड क्रिकेट टीम के कप्तान हैरी ब्रूक का महत्वपूर्ण विकेट चटकाया। इस विकेट को हासिल करने के साथ ही अक्षर पटेल के टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 विकेट पूरे हो गए हैं, जिसने उन्हें एक बेहद खास और विशिष्ट क्लब में शामिल कर दिया है।

    अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ दौर से गुजर रहे 32 वर्षीय बाएं हाथ के स्पिनर अक्षर पटेल अब भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 100 विकेट का जादुई आंकड़ा छूने वाले चौथे गेंदबाज बन गए हैं। इस रिकॉर्ड की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वह यह मुकाम हासिल करने वाले भारत के इतिहास के पहले स्पिन गेंदबाज हैं। उनसे पहले भारत के लिए यह उपलब्धि केवल तीन तेज गेंदबाजों ने ही हासिल की थी, जिसमें अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या का नाम शामिल है। भारतीय क्रिकेट इतिहास में अब तक कई महान स्पिनरों ने टी20 प्रारूप में देश का प्रतिनिधित्व किया है, लेकिन कोई भी इस प्रतिष्ठित आंकड़े तक नहीं पहुंच सका था, जिससे अक्षर की यह सफलता और अधिक मायने रखती है।

    अक्षर पटेल ने इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को छूने के लिए कुल 98 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। मैनचेस्टर टी20 मैच के पांचवें ओवर में जब उन्होंने हैरी ब्रूक को अपना शिकार बनाया, तो उन्होंने न केवल मैच में भारत की स्थिति मजबूत की बल्कि अपना नाम भी इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों से दर्ज करा दिया। भारत के लिए इस प्रारूप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में अर्शदीप सिंह 134 विकेटों के साथ शीर्ष पर हैं, जबकि जसप्रीत बुमराह 121 विकेट और हार्दिक पंड्या 114 विकेट के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर काबिज हैं। स्पिन गेंदबाजों की बात करें, तो अक्षर के बाद युजवेंद्र चहल इस सूची में सबसे करीब हैं, जिनके नाम 80 मैचों में 96 विकेट दर्ज हैं।

    पिछले कुछ वर्षों में अक्षर पटेल ने अपनी कसी हुई गेंदबाजी और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर खुद को सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद और उपयोगी खिलाड़ियों में स्थापित किया है। मैच की शुरुआत में नई गेंद से गेंदबाजी करनी हो या फिर बीच के ओवरों में रनों की गति पर अंकुश लगाना हो, भारतीय कप्तान हर मुश्किल परिस्थिति में अक्सर अक्षर पटेल की ओर ही देखते हैं। उनकी सटीक लाइन-लेंथ, विकेट के चारों ओर गेंद को टर्न कराने की कला और अत्यधिक दबाव वाले क्षणों में शांत रहकर विकेट निकालने की असाधारण क्षमता उन्हें समकालीन क्रिकेट में अन्य स्पिनरों से काफी अलग बनाती है।

    केवल गेंदबाजी ही नहीं, बल्कि अक्षर पटेल ने निचले क्रम में आकर कई महत्वपूर्ण अवसरों पर बल्ले से भी टीम इंडिया के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाई है और मैच जिताऊ पारियां खेली हैं। यही कारण है कि आज वह क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में भारतीय राष्ट्रीय टीम का एक अनिवार्य और अटूट हिस्सा बन चुके हैं। 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेटों का आंकड़ा पार करना किसी भी आधुनिक गेंदबाज के करियर की एक महान व्यक्तिगत बानगी माना जाता है। खेल के प्रति उनके समर्पण और निरंतरता को देखते हुए क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि यदि उनका यह शानदार प्रदर्शन आगामी मैचों में भी इसी तरह जारी रहा, तो वह जल्द ही भारत के लिए इस प्रारूप में सबसे सफल गेंदबाज बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ेंगे।

  • दरिद्रता दूर कर समृद्धि दिलाने वाली गरुड़ पुराण की 5 आदतें जिन्हें अपनाकर जीवन में आएगा सकारात्मक बदलाव

    दरिद्रता दूर कर समृद्धि दिलाने वाली गरुड़ पुराण की 5 आदतें जिन्हें अपनाकर जीवन में आएगा सकारात्मक बदलाव


    नई दिल्ली। सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों में शामिल गरुड़ पुराण केवल मृत्यु और परलोक से जुड़े विषयों तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें सफल और संतुलित जीवन जीने के अनेक व्यवहारिक सूत्र भी बताए गए हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार मनुष्य के आचरण विचार और दैनिक दिनचर्या का सीधा प्रभाव उसके जीवन की प्रगति पर पड़ता है। यही कारण है कि गरुड़ पुराण में कुछ ऐसी आदतों का उल्लेख मिलता है जिन्हें अपनाने से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि इन बातों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    गरुड़ पुराण के अनुसार स्वच्छता को समृद्धि का आधार माना गया है। शरीर वस्त्र और घर की नियमित साफ सफाई केवल स्वास्थ्य के लिए ही लाभकारी नहीं मानी जाती बल्कि इसे सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी बताया गया है। मान्यता है कि स्वच्छ वातावरण में देवी लक्ष्मी का वास होता है जबकि गंदगी नकारात्मकता और अव्यवस्था को बढ़ावा देती है। इसलिए प्रतिदिन स्नान करना साफ वस्त्र पहनना और घर को व्यवस्थित रखना शुभ माना गया है।

    दूसरी महत्वपूर्ण बात भोजन से जुड़ी है। धार्मिक परंपरा के अनुसार भोजन बनाने के बाद सबसे पहले ईश्वर को भोग अर्पित करना और पहली रोटी गौ माता या किसी जरूरतमंद जीव के लिए निकालना पुण्यदायी माना गया है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सेवा करुणा और कृतज्ञता का प्रतीक भी है। माना जाता है कि जो व्यक्ति अपनी थाली से पहले दूसरों का ध्यान रखता है उसके जीवन में अन्न और धन की कमी नहीं रहती।

    गरुड़ पुराण में मधुर वाणी और विनम्र व्यवहार को भी विशेष महत्व दिया गया है। कटु वचन अहंकार और अपमानजनक व्यवहार रिश्तों में दूरी पैदा करते हैं जबकि मीठी बोली सम्मान और विश्वास को मजबूत बनाती है। धार्मिक दृष्टि से विनम्र व्यक्ति पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है और समाज में भी उसे सहयोग और सम्मान मिलता है। इसलिए क्रोध पर नियंत्रण रखना और सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना जीवन की बड़ी पूंजी माना गया है।

    दान और सेवा को भी समृद्ध जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। अपनी आय का एक छोटा हिस्सा जरूरतमंद लोगों की सहायता में लगाना केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि पुण्य का कार्य भी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि निस्वार्थ भाव से किया गया दान व्यक्ति के जीवन में शुभ फल लेकर आता है और मानसिक संतोष प्रदान करता है। दान का उद्देश्य दिखावा नहीं बल्कि सेवा और मानवता की भावना होना चाहिए।

    गरुड़ पुराण में समय के महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया है। ब्रह्म मुहूर्त में जागना नियमित दिनचर्या अपनाना और आलस्य से दूर रहना सफलता की कुंजी माना गया है। सुबह का समय अध्ययन साधना योग ध्यान और आत्मचिंतन के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। अनुशासित जीवनशैली न केवल मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है बल्कि व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में भी सहायता करती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये पांच आदतें केवल धन प्राप्ति का माध्यम नहीं बल्कि बेहतर व्यक्तित्व सकारात्मक सोच और संतुलित जीवन की आधारशिला हैं। जब व्यक्ति स्वच्छता अनुशासन सेवा मधुर व्यवहार और समय के महत्व को समझकर जीवन में अपनाता है तब उसके जीवन में सुख शांति और समृद्धि के नए अवसर स्वतः बनने लगते हैं।

  • बॉलीवुड की 'ड्रीम गर्ल' हेमा मालिनी के डायमंड जुबली कॉन्सर्ट में उमड़ा सिनेमाई सितारों का मेला, विशेष डॉक्यूमेंट्री और पुस्तक लॉन्च के साथ पुरानी यादें हुईं ताजा

    बॉलीवुड की 'ड्रीम गर्ल' हेमा मालिनी के डायमंड जुबली कॉन्सर्ट में उमड़ा सिनेमाई सितारों का मेला, विशेष डॉक्यूमेंट्री और पुस्तक लॉन्च के साथ पुरानी यादें हुईं ताजा

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की सदाबहार अभिनेत्री और ‘ड्रीम गर्ल’ के नाम से विख्यात हेमा मालिनी ने अपने कलात्मक जीवन और सांस्कृतिक सफर को समर्पित एक भव्य ‘लाइव इन कॉन्सर्ट’ का आयोजन किया। यह विशेष आयोजन हेमा मालिनी के डायमंड जुबली सेलिब्रेशन का हिस्सा था, जिसने मुंबई के कला जगत और प्रशंसकों को एक बार फिर बॉलीवुड के सुनहरे दौर की याद दिला दी। अपने तरह के इस पहले और अनूठे लाइव कॉन्सर्ट में मनोरंजन जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की, जिससे यह शाम पूरी तरह से ऐतिहासिक और यादगार बन गई।

    इस भव्य उत्सव के दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें हेमा मालिनी के साथ अपने जमाने की मशहूर और दिग्गज अभिनेत्रियां पद्मिनी कोल्हापुरे, पूनम ढिल्लों और विजयता पंडित एक साथ नजर आ रही हैं। हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली ये सभी दिग्गज अदाकाराएं हेमा मालिनी के इस विशेष लाइव इन कॉन्सर्ट में उन्हें बधाई देने और इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनने पहुंची थीं। मंच और मंच के पीछे इन वरिष्ठ कलाकारों की आपसी बॉन्डिंग और गर्मजोशी को देखकर प्रशंसक सोशल मीडिया पर लगातार अपना प्यार और सम्मान जता रहे हैं।

    यह डायमंड जुबली जश्न केवल एक म्यूजिकल कॉन्सर्ट या शाम की महफिल तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे हेमा मालिनी की कलात्मक यात्रा के एक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर एक विशेष किताब का भी विमोचन किया गया, जिसे स्वयं हेमा मालिनी और जाने-माने आरजे अनिरुद्ध चावला ने संयुक्त रूप से लिखा है। इसके साथ ही समारोह में अनिरुद्ध चावला द्वारा निर्देशित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी प्रदर्शित की गई। यह डॉक्यूमेंट्री मुख्य रूप से हेमा मालिनी के एक पारंपरिक नृत्यांगना से लेकर बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्री और अंततः एक सांस्कृतिक आइकन बनने तक के शानदार और प्रेरणादायक सफर को बेहद संजीदगी से दिखाती है।

    यह पूरा आयोजन केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि का उत्सव नहीं था, बल्कि यह हेमा मालिनी की शानदार सांस्कृतिक विरासत, भारतीय सिनेमा के गौरवशाली अतीत और कलाकारों का उनके दर्शकों के साथ पीढ़ियों से चले आ रहे अटूट रिश्ते का एक अनूठा संगम था। इस कॉन्सर्ट के माध्यम से न केवल बीते दौर के संगीत और अभिनय की कला को याद किया गया, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य और सिनेमा के प्रति हेमा मालिनी के समर्पण को भी सम्मानित किया गया। इस भव्य कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि वक्त बदलने के बाद भी सिनेमा के इन सितारों की चमक और उनका प्रभाव आज भी दर्शकों के दिलों में पूरी तरह बरकरार है।

  • केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला… मिडिल ईस्ट तनाव के बीच गैस सप्लाई पर लागू किए गए विशेष प्रावधान हटाए

    केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला… मिडिल ईस्ट तनाव के बीच गैस सप्लाई पर लागू किए गए विशेष प्रावधान हटाए


    नई दिल्ली।
    मिडिल ईस्ट (Middle East) में तनाव कम होने के बाद भारत सरकार (Government of India) ने नेचुरल गैस सप्लाई (Natural gas supply) को लेकर बड़ा फैसला लिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू होने के बाद सरकार ने मार्च 2026 में लागू किए गए आपातकालीन गैस सप्लाई नियमों में बदलाव किया है. नए आदेश के तहत पहले लागू किए गए कई विशेष प्रावधान हटा दिए गए हैं. यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।

    दरअसल, मार्च 2026 में मिडिल ईस्ट के तनाव की वजह से समुद्र के रास्ते आने वाली एलएनजी (Liquefied Natural Gas) की सप्लाई बुरी प्रभावित हो गई थी. कुछ विदेशी कंपनियों ने भी हाथ खड़े कर दिए थे और गैस देने से मना कर दिया था. ऐसे बिगड़े हालातों को संभालने के लिए सरकार ने 9 मार्च 2026 को नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर लागू किया था।

    इस आदेश का मकसद यह था कि देश में उपलब्ध गैस की सप्लाई प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तक बिना रुकावट पहुंचती रहे. इसके लिए सरकार ने गैस के उत्पादन, आवंटन और वितरण को लेकर विशेष नियम लागू किए थे।

    सरकार के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में अब युद्धविराम लागू हो चुका है. वहां शांति के लिए बातचीत का दौर भी चल रहा है. इसी बीच होर्मुज के रास्ते जहाजों का आना-जाना फिर से शुरू हो गया है. हालात में आए इसी बड़े बदलाव को देखते हुए पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने 4 जुलाई 2026 को नया आदेश जारी किया है।

    9 मार्च 2026 को जारी किए गए आदेश में सरकार ने आपातकालीन हालात से निपटने के लिए कई विशेष प्रावधान लागू किए थे. अब नए आदेश के जरिए इन्हें हटा दिया गया है. इनमें मुख्य तौर पर ये प्रावधान शामिल थे।

    गैस के उत्पादन और बंटवारे पर नियंत्रण: संकट के समय सरकार ने यह नियम बनाया था कि देश में नेचुरल गैस का कितना उत्पादन होगा और वह किस सेक्टर को कितनी दी जाएगी, यह सब सरकार ही तय करेगी।


    जरूरी क्षेत्रों को प्राथमिकता:

    गैस की कमी को देखते हुए सबसे पहले घरेलू इस्तेमाल और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई थी.


    सप्लाई और इस्तेमाल पर पाबंदियां:

    नेचुरल गैस और एलएनजी (LNG) की सप्लाई, उसके वितरण और इस्तेमाल को लेकर कुछ समय के लिए कड़े नियम लागू कर दिए गए थे, ताकि कोई इसका गलत इस्तेमाल न कर सके.

    अब मिडिल ईस्ट में युद्धविराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से समुद्री आवाजाही फिर शुरू होने के बाद सरकार ने ये विशेष प्रावधान हटा दिए हैं. इससे गैस सप्लाई व्यवस्था फिर पहले जैसे सामान्य नियमों के तहत चलेगी।


    इसका क्या असर होगा?

    सरकार का मानना है कि समुद्री मार्ग दोबारा खुलने से गैस की आपूर्ति व्यवस्था पहले के मुकाबले आसान होगी. इसी वजह से आपातकालीन व्यवस्था के तहत लागू कुछ नियमों की अब जरूरत नहीं रही. हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया है कि हालात पर लगातार नजर रखी जाएगी. अगर भविष्य में फिर कोई संकट पैदा होता है, तो जरूरत के मुताबिक नए कदम उठाए जा सकते हैं.

  • MP: RGPV में पेपर चोरी…. परीक्षा से पहले गायब हुए प्रश्नपत्रों के 9 बंडल

    MP: RGPV में पेपर चोरी…. परीक्षा से पहले गायब हुए प्रश्नपत्रों के 9 बंडल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सबसे बड़े तकनीकी विश्वविद्यालयों में शामिल राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Rajiv Gandhi Proudyogiki Vishwavidyalaya- RGPV) में एग्जाम से ठीक पहले प्रश्नपत्र चोरी होने का गंभीर मामला सामने आया है. इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    शुक्रवार को स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (School of Biotechnology) के सेकंड ईयर (चौथे सेमेस्टर) के कंप्यूटर विषय का एग्जाम था, लेकिन सुबह 11 बजे एग्जाम शुरू होने से ठीक पहले छात्रों को बताया गया कि परीक्षा रद्द कर दी गई है. थोड़ी देर बाद जानकारी मिली कि प्रश्नपत्र चोरी हो गया है. इसके बाद यूनिवर्सिटी में हड़कंप मच गया।

    यूनिवर्सिटी ने पेपर चोरी होने की जानकारी देते हुए परीक्षा अगले आदेश तक स्थगित कर दी है. जानकारी के मुताबिक अलग-अलग प्रश्नपत्रों के करीब 9 बंडल गायब मिले हैं।


    गांधीनगर थाने में दर्ज कराई FIR

    यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए भोपाल के गांधीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत के मुताबिक, संबंधित प्रश्नपत्र गुरुवार देर रात चोरी हो गया था. पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रश्नपत्र कैसे गायब हुआ और इसमें किसकी भूमिका हो सकती है।


    सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल

    परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र चोरी की घटना ने विश्वविद्यालय की गोपनीय परीक्षा व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. घटना को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा ‘बीजेपी के राज में चोरी अब व्यवस्था बन चुकी है. पहले वोट चोरी, फिर सीट चोरी, उज्जैन में जमीन चोरी, मंदिरों से चढ़ावा चोरी, और अब प्रश्नपत्र चोरी! भोपाल स्थित RGPV में परीक्षा शुरू होने से पहले गोपनीय प्रश्नपत्रों के 9 सीलबंद लिफाफे चोरी हो गए।

    उमंग सिंघार ने आगे लिखा, मुख्यमंत्री मोहन यादव के राज में अब माफिया और चोर इतने बेखौफ हैं कि छात्रों का भविष्य भी सुरक्षित नहीं है. यह केवल प्रश्नपत्र की चोरी नहीं, युवाओं की मेहनत, विश्वास और भविष्य की चोरी है. बीजेपी राज में आखिर बचा क्या है जो चोरी नहीं हो रहा?

  • मॉनसून सत्र 20 जुलाई से….. मोदी सरकार अधिक संख्याबल के साथ पहुंचेगी संसद

    मॉनसून सत्र 20 जुलाई से….. मोदी सरकार अधिक संख्याबल के साथ पहुंचेगी संसद


    नई दिल्ली।
    मोदी सरकार (Modi government) द्वारा लाया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक फेल हो गया। वजह थी सरकार के पास पर्याप्त दो-तिहाई बहुमत नहीं था। तब से लेकर अब तक भारतीय राजनीति में काफी कुछ बदलाव हुआ है। दल-बदल और पार्टियों की टूट के बाद मोदी सरकार की ताकत में वृद्धि हुई है। अब, जबकि संसद (Parliament) का मॉनसून सत्र (Monsoon Session) 20 जुलाई से शुरू होने वाला है, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) मजबूत स्थिति में हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ताकतवर होकर संसद पहुंच रही मोदी सरकार की नजर कुछ ऐसे फैसलों पर है, जिन्हें वह पिछले काफी समय से करना चाहती थी, लेकिन संसद में संख्या बल न होने की वजह से अभी तक फेल होती आ रही थी।

    अप्रैल में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक लाने के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के पटल पर खड़े होकर विपक्षी नेताओं से एक बात कही थी। उन्होंने कहा कि था कि आज अगर आप इसका समर्थन करते हैं, तो इसका श्रेय आपको भी जाएगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो फिर इसका श्रेय केवल एनडीए सरकार को ही जाएगा। उस समय एनडीए को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। पिछले तीन महीनों में एनडीए को कई विधायकों और सांसदों का समर्थन मिला है। फिर चाहे वह राज्यसभा हो या लोकसभा भाजपा ने अपनी स्थिति मजबूत की है। लेकिन क्या भाजपा और उसका गठबंधन इतना मजबूत है कि वह आसानी से संविधान संशोधन कर सके?


    मोदी सरकार के लिए क्यों आसान नहीं है संवैधानिक संशोधन

    अप्रैल में जब एनडीए सरकार द्वारा लाया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक फेल हुआ था, तब उसे 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन पक्ष में केल 298 वोट ही पड़े थे। चूंकि किसी भी संविधान संसोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। इसलिए 352 के आंकड़े को छूने के लिए केंद्र सरकार 54 वोट पीछे रह गई।

    वर्तमान स्थिति की बात करते हैं। तृणमूल कांग्रेस के सांसद, उद्धव ठाकरे के सांसद इन सब को मिलाकर एनडीए गठबंधन अभी 320 के पार पहुंच गया है। लेकिन इसके बाद भी वह पूर्ण रूप से भरे सदन के दो-तिहाई बहुमत के करीब नहीं पहुंच पाया है।

    राज्यसभा की बात करें, तो भले ही भाजपा ने आम आदमी पार्टी के सांसदों को तोड़ लिया हो। लेकिन अभी भी उसकी स्थिति मजबूत नहीं है। ऐसी स्थिति में भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि वह बाकी बची संख्या को कहां से लाएगी?


    तीन संवैधानिक संशोधनों पर भाजपा की नजर
    1. पीएम-सीएम को हटाने वाले विधेयक पर होगा फैसला?

    भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार 130वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या राज्य मंत्री को हटाने का प्रस्ताव लेकर आई थी। लेकिन बहुमत न होने की वजह से केंद्र ने इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक मॉनसून सत्र के ठीक पहले यह समिति अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है, जिसके बाद यह विधेयक एक बार फिर से संसद में पेश किया जा सकता है।

    दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जब जेल से सरकार चला रहे थे। उस वक्त भारतीय जनता पार्टी ने इसे एक बहुत बड़ा मुद्दा बनाया था। इसी घटनाक्रम के बाद सरकार यह बिल लेकर आई थी। इसके अनुसार अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या राज्य मंत्री 5 साल तक सजा वाले किसी मामले में 30 दिनों तक जेल में रहता है। तो उसका पद अपने आप ही समाप्त हो जाएगा।

    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कई बार जेल से सरकार चलाने के लिए अरविंद केजरीवाल पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने इस बिल को जवाबदेही तय करने वाला करार दिया था। उनसे जब सवाल पूछा गया कि अगर किसी पर झूठा मामला होता है तब क्या होगा। इसका जवाब देते हुए गृहमंत्री ने कहा था कि अगर मामला झूठा होता है, तो अदालतें जमानत देगीं। लेकिन यदि जमानत नहीं मिलती है, तो फिर पद छोड़ना होगा।


    2. वन नेशन, वन इलेक्शन पर नजर

    भारतीय जनता पार्टी के कोर मुद्दों में से एक वन नेशन, वन इलेक्शन को भी इस मॉनसून सत्र में देखा जा सकता है। पिछले वर्ष लाया गया यह 129वां संविधान संसोधन विधेयक इस वक्त 39 सदस्यीय संसदीय समिति के पास विचाराधीन पड़ा हुआ है। पीएम मोदी का मत है कि देश में हर समय होने वाले चुनाव विकास के बाधक हैं। इसलिए एक देश एक चुनाव पर सहमति बनाकर सभी को इसके लिए राजी रहना चाहिए। हालांकि, अन्य मुद्दों की तरफ विपक्ष और अन्य लोग इस मुद्दे पर लगातार सरकार को घेरते हुए नजर आते हैं। वर्तमान में यह विधेयक भाजपा सांसद पी.पी. चौधरी की अध्यक्षता वाली समिति के पास है। इसका कार्यकाल बढ़ा दिया गया है।


    3. महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक

    अप्रैल में एनडीए सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक लेकर आई थी। लेकिन दो-तिहाई बहुमत न होने की वजह से सदन में यह बिल पास नहीं हो पाया था। सरकार का तर्क है कि 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को जल्दी लागू करने के लिए 2029 चुनाव के पहले परिसीमन करवाना अनिवार्य है। लेकिन विपक्ष की इस पर अलग राय है। विपक्ष का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में परिसीमन लागू कर लोकसभा की सीटों को अपने हिसाब से बांटना चाहती है।

    दक्षिण भारत के राज्यों में भी इस विधेयक को लेकर अपना डर है। उनका कहना है कि इस फैसले से उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों को लाभ मिलेगा। क्योंकि उनकी जनसंख्या अधिक है। हालांकि, सरकार ने उनको भरोसे में लेने की कोशिश की लेकिन विपक्ष मानने को तैयार नहीं है।

    विपक्ष का आरोप है कि अगर सरकार को महिला आरक्षण कि इतनी ही चिंता है तो क्यों न इसे वर्तमान सीट संख्या पर ही लागू कर दिया जाए?

  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज 6 देशों की यात्रा पर होंगे रवाना….देखें पूरा शेड्यूल

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज 6 देशों की यात्रा पर होंगे रवाना….देखें पूरा शेड्यूल


    नई दिल्ली।
    विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) रविवार से छह देशों के दौरे (Six-Nation Tour) पर रवाना होंगे। वह कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, बेल्जियम और अमेरिका का दौरा करेंगे।

    विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, यह यात्रा 5 जुलाई से 10 जुलाई तक खाड़ी देशों की होगी। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं।

    खाड़ी देशों की यात्रा पूरी करने के बाद विदेश मंत्री न्यूयॉर्क जाएंगे। वहां वह 13 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत के 2028-29 कार्यकाल के लिए आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद यात्रा के अंतिम चरण में वह ब्रसेल्स जाएंगे, जहां वह भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की तीसरी बैठक में शामिल होंगे।


    विदेश मंत्रालय ने क्या बताया जयशंकर का कार्यक्रम?

    विदेश मंत्री जयशंकर 5 जुलाई से 10 जुलाई तक कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। यात्रा के दौरान जयशंकर इन देशों के समकक्षों और शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है और साथ ही क्षेत्रीय घटनाक्रमों और साझा हितों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है।

    विदेश मंत्री 13 जुलाई को न्यूयॉर्क में भारत की यूएनएससी 2028-29 की आधिकारिक उम्मीदवारी की शुरुआत करेंगे। इसके बाद वह 14 और 15 जुलाई को ब्रसेल्स में होने वाली तीसरी भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद बैठक (भारत-ईयू टीटीसी) में शामिल होंगे और यूरोपीय संघ तथा बेल्जियम के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे।


    टीटीसी की शुरुआत कब हुई और इसका मकसद क्या है?

    मंत्रालय के अनुसार, टीटीसी की शुरुआत 2022 में हुई थी, जिसका मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और साइबर सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग बढ़ाना है।