Author: bharati

  • राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का केंद्र और यूपी सरकार पर तीखा प्रहार, SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने समेत कई सवालों पर मांगा जवाब

    राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का केंद्र और यूपी सरकार पर तीखा प्रहार, SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने समेत कई सवालों पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरते हुए मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। पार्टी का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रकरण में अब तक कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं। कांग्रेस ने विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सार्वजनिक करने के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने की मांग दोहराई है।

    कांग्रेस का कहना है कि यदि इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया था, तो उसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। पार्टी के अनुसार, जब मामला देशभर के श्रद्धालुओं के विश्वास और दान से जुड़ा है, तब जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की गोपनीयता नहीं बरती जानी चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच के निष्कर्ष देश के सामने लाए जाने आवश्यक हैं।

    पार्टी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय के दौरान राम मंदिर परिसर में चोरी की कई घटनाएं सामने आई हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में चोरी के मामले सामने आए हैं, तो यह जानना भी जरूरी है कि पिछले वर्षों में कुल कितनी घटनाएं हुईं, कितना सामान गायब हुआ और दान में प्राप्त संपत्तियों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई थी। पार्टी ने मांग की कि पूरे रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए ताकि किसी भी तरह की आशंका समाप्त हो सके।

    जांच प्रक्रिया को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि कार्रवाई केवल सीमित स्तर तक की गई है, जबकि यदि किसी बड़े स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए और किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को केवल पद या प्रभाव के आधार पर जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। पार्टी का कहना है कि जब मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए विभिन्न एजेंसियां और सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, तब लगातार चोरी की घटनाओं के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं। कांग्रेस ने निजी सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका और उसकी जवाबदेही तय करने की भी मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में कहीं चूक हुई है तो उसकी स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

    कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि दान में प्राप्त आभूषणों, नकदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। पार्टी का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित प्रत्येक वस्तु का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए ताकि किसी प्रकार का संदेह उत्पन्न न हो। इसके साथ ही पूरे चढ़ावे का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराने की मांग भी दोहराई गई है।

    पार्टी ने राज्य सरकार से SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। कांग्रेस का यह भी कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था या प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार अब तक इस पूरे विवाद पर स्पष्ट स्थिति रखने से बच रही है।

    राम मंदिर को करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि इस तरह के किसी भी विवाद का समाधान केवल पारदर्शी जांच, जवाबदेही और तथ्यों को सार्वजनिक करने से ही संभव है। पार्टी का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होने और सभी संबंधित तथ्यों के सामने आने से ही श्रद्धालुओं का विश्वास और संस्थागत पारदर्शिता मजबूत हो सकेगी।

  • SIR विवाद पर विपक्ष की न्यायपालिका से दखल की मांग, 23 राजनीतिक दल और एक निर्दलीय सांसद एकजुट, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जताई गहरी चिंता


    नई दिल्ली । देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन- SIR) अभियान को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी गठबंधन ‘INDIA जनबंधन’ से जुड़े 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को संयुक्त पत्र भेजकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची के सत्यापन की वर्तमान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और संवैधानिक मानकों के अनुरूप बनाए जाने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता के अधिकार प्रभावित न हों।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है और इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवाद चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है। इसी कारण सभी दलों ने एकजुट होकर सर्वोच्च न्यायपालिका का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि इस विषय पर न्यायिक स्तर पर आवश्यक मार्गदर्शन और निगरानी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

    इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने पहले भी आपसी स्तर पर कई दौर की चर्चा की थी। हाल ही में आयोजित बैठक में विभिन्न दलों ने चुनाव आयोग द्वारा संचालित SIR प्रक्रिया और उससे जुड़े अन्य चुनावी विषयों पर साझा रणनीति तैयार की। बैठक में यह सहमति बनी कि इन चिंताओं को औपचारिक रूप से देश के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए। बाद में इस पहल को व्यापक समर्थन मिला और संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले दलों की संख्या बढ़कर 23 हो गई।

    संयुक्त पत्र को कई प्रमुख विपक्षी नेताओं और राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है। इसमें विभिन्न राज्यों के क्षेत्रीय दलों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के दल भी शामिल हैं। एक निर्दलीय सांसद ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का कहना है कि यह कदम किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    विवाद का केंद्र चुनाव आयोग द्वारा संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान है। इस प्रक्रिया के तहत घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जा रहा है। साथ ही परिवार आधारित विवरण का मिलान, रिकॉर्ड का अद्यतन तथा फर्जी या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाने की कार्रवाई भी की जा रही है। चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना बताया जा रहा है, ताकि भविष्य में चुनाव प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय हो सके।

    हालांकि विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर वैध मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उनका कहना है कि यदि सत्यापन अभियान पूरी पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ नहीं चलाया गया तो बड़ी संख्या में पात्र नागरिक अपने मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं। विपक्ष ने यह भी कहा है कि ऐसे मामलों की स्वतंत्र समीक्षा और प्रभावी निगरानी आवश्यक है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बहस का विषय बन सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजे गए इस संयुक्त पत्र पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और चुनाव आयोग इस संबंध में उठाई गई चिंताओं पर किस प्रकार अपनी प्रतिक्रिया देता है। आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी सुधार और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़ी चर्चा का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।

  • देश की सेवा जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य' कहकर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सौंपी जिम्मेदारी, संयुक्त सैन्य शक्ति पर दिया भविष्य का विजन

    देश की सेवा जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य' कहकर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सौंपी जिम्मेदारी, संयुक्त सैन्य शक्ति पर दिया भविष्य का विजन

    नई दिल्ली । भारतीय सेना में नेतृत्व परिवर्तन के महत्वपूर्ण चरण के तहत मंगलवार को जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना प्रमुख का पदभार जनरल धीरज सेठ को सौंप दिया। चार दशक से अधिक समय तक भारतीय सेना की सेवा करने वाले जनरल द्विवेदी ने अपने विदाई संबोधन में सैन्य जीवन को अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया और कहा कि देश की रक्षा के लिए समर्पित प्रत्येक सैनिक का योगदान भारतीय सेना की सबसे बड़ी शक्ति है। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

    अपने विदाई संबोधन में जनरल द्विवेदी ने कहा कि सैनिक विद्यालय से लेकर भारतीय सेना के सर्वोच्च पद तक का उनका सफर अविस्मरणीय रहा। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त करते हुए उनके मन में विनम्रता, कृतज्ञता, गर्व और संतोष की भावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना की असली ताकत किसी एक व्यक्ति में नहीं, बल्कि उन लाखों सैनिकों, अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और देशवासियों के विश्वास में निहित है, जिन्होंने हमेशा सेना का मनोबल बढ़ाया है।

    उन्होंने उन सभी सैनिकों को विशेष श्रद्धांजलि दी जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना की परंपराएं, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा ही उसकी सबसे बड़ी पहचान हैं और यही मूल्य भविष्य में भी सेना का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि नया नेतृत्व भी इन्हीं आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए सेना को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

    अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारतीय सेना ने हर मोर्चे पर उच्च स्तर की तैयारी, सतर्कता और संतुलन बनाए रखा। उन्होंने उत्तरी सीमाओं पर संचालित ऑपरेशन स्नो लेपर्ड का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद सेना ने पूरी मजबूती और सजगता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। इसी प्रकार पश्चिमी मोर्चे पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सेना ने अनुशासन, संयम और रणनीतिक दक्षता का प्रभावी प्रदर्शन किया।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रत्येक निर्णय और कार्रवाई में भारतीय सेना ने स्पष्ट उद्देश्य, जिम्मेदारी और पेशेवर दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी। इसी सोच ने बदलते सुरक्षा परिदृश्य में देश के लिए एक नए सुरक्षा मानक को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और भविष्य में संयुक्त सैन्य अभियानों का महत्व लगातार बढ़ेगा।

    जनरल द्विवेदी ने तीनों सेनाओं के बीच बढ़ते समन्वय को भी अपने कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना ने साझा रणनीति, आपसी विश्वास और बेहतर समन्वय के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया है। उनका मानना है कि भविष्य के युद्ध अधिक एकीकृत, तकनीक आधारित और संयुक्त अभियान पर केंद्रित होंगे। इसलिए तीनों सेनाओं को एक साथ स्थिति का आकलन करने, संयुक्त रूप से निर्णय लेने और समन्वित कार्रवाई करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

    नई जिम्मेदारी संभालने वाले जनरल धीरज सेठ के नेतृत्व में भारतीय सेना अब बदलती सुरक्षा चुनौतियों और आधुनिक सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी रणनीतियों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। नेतृत्व परिवर्तन के इस अवसर पर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं, पेशेवर उत्कृष्टता और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण के साथ भविष्य में भी देश की सुरक्षा सुनिश्चित करती रहेगी।

  • शामली धर्मांतरण विवाद में नया मोड़, आयुष मलिक ने दोबारा अपनाया हिंदू धर्म; परिवार से मांगी माफी, बोले- अपनी इच्छा से लौटा हूं

    शामली धर्मांतरण विवाद में नया मोड़, आयुष मलिक ने दोबारा अपनाया हिंदू धर्म; परिवार से मांगी माफी, बोले- अपनी इच्छा से लौटा हूं

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के शामली जिले में धर्मांतरण से जुड़ा चर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। कुछ समय पहले इस्लाम धर्म स्वीकार करने वाले आयुष मलिक ने अब दोबारा हिंदू धर्म अपनाने की घोषणा की है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में वह धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में वापसी करने का निर्णय लिया है और अब वह अपने परिवार के साथ रहकर उनकी देखभाल तथा सुरक्षा को प्राथमिकता देना चाहते हैं। इस घटनाक्रम के बाद यह मामला फिर चर्चा का विषय बन गया है।

    आयुष मलिक ने वीडियो संदेश में कहा कि उन्होंने पहले इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था, लेकिन परिवार की भावनाओं और परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने स्वेच्छा से सनातन धर्म में लौटने का फैसला किया है। उन्होंने अपने माता-पिता से क्षमा भी मांगी और भविष्य में परिवार के साथ रहने की बात दोहराई। वीडियो में धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनकी घर वापसी की प्रक्रिया भी दिखाई गई है।

    आयुष के पिता देवराज मलिक ने भी पुष्टि की कि उनके बेटे ने औपचारिक रूप से दोबारा हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया है। उनका कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह स्वेच्छा से लिया गया है और परिवार ने इसका स्वागत किया है। उन्होंने पहले भी आरोप लगाया था कि उनके बेटे का योजनाबद्ध तरीके से ब्रेनवॉश किया गया और उसे धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया गया। परिवार का यह भी दावा रहा है कि पूरे मामले के पीछे आर्थिक हित और पारिवारिक संपत्ति से जुड़े उद्देश्य थे।

    धर्मांतरण विवाद को लेकर पहले दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। इसी मामले में फिजियोथेरेपिस्ट चांदनी कुरैशी और उनके पिता इस्लाम कुरैशी के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। पुलिस ने आरोपों की जांच के बाद दोनों को गिरफ्तार किया था और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि धर्म परिवर्तन किन परिस्थितियों में हुआ और उसमें किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या अन्य अवैध तत्व शामिल थे या नहीं।

    जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार आयुष मलिक की मुलाकात वर्ष 2018 में पैर की चोट के इलाज के दौरान एक स्थानीय अस्पताल में चांदनी से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और संबंध विकसित हुए। परिवार का आरोप है कि इसी दौरान आयुष पर धीरे-धीरे धर्म परिवर्तन का प्रभाव डाला गया। दूसरी ओर, मामले की कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी आरोपों की जांच जारी है और संबंधित पक्षों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।

    धर्मांतरण और पुनर्धर्म ग्रहण से जुड़ा यह मामला सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर आयुष ने सार्वजनिक रूप से अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में लौटने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर पहले दर्ज किए गए धर्मांतरण प्रकरण की जांच और उससे संबंधित न्यायिक प्रक्रिया भी जारी है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा। फिलहाल आयुष की घर वापसी के बाद यह प्रकरण एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया है।

  • गिरफ्तारी दस्तावेजों में गंभीर त्रुटि का मामला, हाईकोर्ट ने सोनम रघुवंशी को मिली जमानत रद्द करने से किया इनकार

    गिरफ्तारी दस्तावेजों में गंभीर त्रुटि का मामला, हाईकोर्ट ने सोनम रघुवंशी को मिली जमानत रद्द करने से किया इनकार

    शिलांग: मेघालय हाईकोर्ट ने हनीमून के दौरान अपने पति की कथित हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को निचली अदालत से मिली जमानत बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर प्रक्रियागत कमियां थीं, जिनके आधार पर जमानत रद्द करने का पर्याप्त आधार नहीं बनता।

    एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि गिरफ्तारी के आधार तैयार करने की प्रक्रिया में आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई। अदालत के अनुसार, दस्तावेजों में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि आरोपी के खिलाफ वास्तविक आरोप क्या हैं और किन तथ्यों के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया। न्यायालय ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर कमी माना।

    सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि गिरफ्तारी मेमो, औचित्य चेकलिस्ट, निरीक्षण मेमो और केस डायरी के कुछ हिस्सों सहित कई दस्तावेजों में हत्या से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के स्थान पर गलती से धारा 403(1) का उल्लेख किया गया था। अदालत ने कहा कि एक ही प्रकार की त्रुटि सभी दस्तावेजों में दोहराई गई है, इसलिए इसे केवल टाइपिंग या लिपिकीय गलती नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि किसी भी दस्तावेज में स्पष्ट रूप से यह दर्ज नहीं था कि आरोपी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है। साथ ही गिरफ्तारी के समय कथित अपराध से जुड़े विशिष्ट तथ्यों की जानकारी भी आरोपी को उचित तरीके से नहीं दी गई। न्यायालय ने माना कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानून के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी।

    राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दलील दी कि दस्तावेजों में हुई गलती केवल टाइपिंग संबंधी त्रुटि थी, जिससे आरोपी को किसी प्रकार का वास्तविक नुकसान नहीं हुआ। सरकार का कहना था कि रिमांड आदेश, चार्जशीट और बाद की न्यायिक कार्यवाही में हत्या के आरोप का स्पष्ट उल्लेख मौजूद है, इसलिए केवल इस तकनीकी त्रुटि के आधार पर जमानत देना उचित नहीं माना जाना चाहिए।

    सरकार ने अपने पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी प्रक्रियागत कमियां, जिनसे आरोपी के अधिकारों पर वास्तविक असर न पड़े, बाद में सुधारी जा सकती हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इन दलीलों से सहमति नहीं जताई और कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में आवश्यक कानूनी मानकों का पालन किया जाना अनिवार्य है।

    सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार की जमानत रद्द करने संबंधी याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही सोनम रघुवंशी को निचली अदालत से मिली जमानत फिलहाल बरकरार रहेगी और वह आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक जमानत पर बाहर रहेगी।

  • कांग्रेस में बगावत की आहट! 300 किलोमीटर पैदल चलकर भोपाल पहुंचे दो कार्यकर्ता, PCC कार्यालय के बाहर खोला मोर्चा


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश कांग्रेस में जिला कांग्रेस कमेटियों के गठन के बाद संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। रतलाम के दो निष्कासित कांग्रेस कार्यकर्ता करीब 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर भोपाल पहुंचे और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। दोनों कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने जिला संगठन में एक ही व्यक्ति को कई पद दिए जाने का विरोध किया था, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और उन्हें अपनी बात रखने की सजा मिली है।

    धरने पर बैठे संजय रावल ने बताया कि वह और उनके साथी गौरव पोरवाल आठ दिन तक लगातार पैदल चलकर भोपाल पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जिस पदाधिकारी ने उन्हें निष्कासित किया, उसके पास ऐसा निर्णय लेने का अधिकार ही नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे, लेकिन उनसे बातचीत किए बिना ही चले गए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि संगठन में पारदर्शिता और कार्यकर्ताओं के सम्मान की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं।

    गौरव पोरवाल ने बताया कि हाल ही में घोषित रतलाम जिला कांग्रेस कमेटी में कुछ नेताओं को एक साथ तीन-तीन और चार-चार पद दे दिए गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से जिला अध्यक्ष को इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि संगठन में एक व्यक्ति को कई जिम्मेदारियां देना उचित नहीं है और इससे समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय होता है। उनका दावा है कि इस मुद्दे पर जब उन्होंने जिला अध्यक्ष से चर्चा की तो जवाब मिला कि संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं की कमी है, इसलिए एक ही व्यक्ति को कई पद देने पड़े।

    गौरव का कहना है कि उन्होंने केवल संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से अपनी बात रखी थी, लेकिन इसके बजाय उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके निष्कासन के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया गया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।

    दोनों कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि चार जून को नामली में उनकी मुलाकात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से हुई थी। उनके मुताबिक पटवारी ने उन्हें गले लगाया और साथ बैठाकर बातचीत भी की थी। उनका आरोप है कि इसके बाद जिला कांग्रेस नेतृत्व नाराज हो गया और कुछ ही समय बाद उन्हें निष्कासित कर दिया गया।

    गौरव पोरवाल ने दावा किया कि जिला कांग्रेस में रवि तिवारी को तीन पद दिए गए हैं, जबकि प्रकाश पाटीदार और सुनील पोरवाल को भी एक से अधिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उनका कहना है कि वे स्वयं किसी पद पर नहीं हैं और केवल एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में संगठन में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

    धरने पर बैठे दोनों कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें किसी पद की इच्छा नहीं है। उनकी केवल यही मांग है कि पार्टी में ईमानदारी से काम करने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान हो और संगठन में नियुक्तियां निष्पक्ष तरीके से की जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदेश नेतृत्व ने उनकी बात नहीं सुनी तो वे भोपाल से पैदल दिल्ली तक मार्च करेंगे और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे। फिलहाल दोनों कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरना जारी रखे हुए हैं और प्रदेश नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। 

  • मध्य प्रदेश में मानसून का असर तेज: 50 जिलों में बारिश का अलर्ट, बिजली गिरने से दो की मौत, बैतूल में नदी बनी काल

    मध्य प्रदेश में मानसून का असर तेज: 50 जिलों में बारिश का अलर्ट, बिजली गिरने से दो की मौत, बैतूल में नदी बनी काल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मानसून का असर लगातार बढ़ता जा रहा है और मंगलवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ले ली। राजधानी भोपाल, सीहोर और पांढुर्णा समेत कई जिलों में सुबह से बादल छाए रहे और कई स्थानों पर बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने प्रदेश के 50 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान करीब चार इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    बारिश के बीच कई जिलों से हादसों की खबरें भी सामने आई हैं। खरगोन जिले में दो अलग-अलग घटनाओं में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में मजदूर राधेश्याम और गृहिणी केनू शामिल हैं। केनू अपने पीछे तीन साल के बेटे को छोड़ गई हैं। उधर बैतूल जिले के चिचोली क्षेत्र में चंपा नदी उफान पर होने के कारण सोमवार रात बड़ा हादसा हो गया। सिप्लाई गांव के राजेश बिहारे और दद्दू धुर्वे बाइक सहित नदी के रपटे से बह गए थे। रातभर चले तलाश अभियान के बाद मंगलवार सुबह दोनों के शव रपटे से करीब एक किलोमीटर दूर झाड़ियों में मिले।

    पांढुर्णा जिले में सोमवार रात से लगातार रुक-रुककर बारिश हो रही है। मंगलवार सुबह मुंगणापार-मोहगांव मार्ग पर एक बड़ा पेड़ बिजली के तारों पर गिर गया जिससे सड़क पर आवागमन प्रभावित हुआ और आसपास के आठ गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। प्रशासन ने पेड़ हटाने और बिजली व्यवस्था बहाल करने का काम शुरू कर दिया है।

    मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, आगर मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, हरदा, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत कुल 50 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। वहीं ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ और अलीराजपुर में हल्की बारिश की संभावना है।

    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में मानसून की एंट्री 24 जून को हुई थी और शुरुआती दौर में 15 जिलों तक इसकी आधिकारिक पहुंच दर्ज की गई थी। हालांकि इसके बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई और वह एक ही क्षेत्र में ठहर गया। इसी कारण प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी और उमस का असर भी बना रहा। फिलहाल मानसून के तेजी से आगे बढ़ने के संकेत नहीं मिले हैं लेकिन अगले कुछ दिनों तक अधिकांश जिलों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    एक जून से अब तक प्रदेश में औसतन 124.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी जबकि अभी तक केवल 75.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब 39 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 68 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है जबकि पश्चिमी हिस्से में यह कमी 11 प्रतिशत है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान नदी-नालों से दूर रहने, आकाशीय बिजली के समय खुले स्थानों में नहीं जाने और प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करने की अपील की है।

  • फुटबॉल वर्ल्ड कप में बड़ा उलटफेर: जर्मनी का सफर राउंड ऑफ 32 में समाप्त, रोमांचक मुकाबले में जापान को हराकर अंतिम-16 में पहुंचा ब्राजील

    फुटबॉल वर्ल्ड कप में बड़ा उलटफेर: जर्मनी का सफर राउंड ऑफ 32 में समाप्त, रोमांचक मुकाबले में जापान को हराकर अंतिम-16 में पहुंचा ब्राजील

    बोस्टन: फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में फुटबॉल जगत का एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही चार बार की विश्व विजेता जर्मनी का सफर इस बार बेहद निराशाजनक तरीके से समाप्त हो गया। पराग्वे की टीम ने मैदान पर शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए जर्मनी को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से शिकस्त देकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही पराग्वे ने प्री-क्वार्टर फाइनल यानी अंतिम-16 में अपनी जगह सुरक्षित कर ली है। दोनों टीमों के बीच निर्धारित समय और एक्स्ट्रा टाइम तक मुकाबला 1-1 की बराबरी पर छूटा था।

    मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। गेंद पर अधिकांश समय जर्मनी के खिलाड़ियों का नियंत्रण रहा, लेकिन पराग्वे के मजबूत डिफेंस और सटीक रणनीति के आगे जर्मनी की आक्रामक पंक्ति पूरी तरह बेअसर साबित हुई। मैच के पहले हाफ के अंतिम क्षणों में पराग्वे को एक कॉर्नर मिला, जिस पर जर्मनी के गोलकीपर ने गेंद को रोकने की कोशिश की, मगर पराग्वे ने दोबारा गेंद पर नियंत्रण पा लिया। मटियास गलार्सा के बेहतरीन क्रॉस पर जूलियो एनसिसो ने एक शानदार हेडर लगाकर अपनी टीम को 1-0 की महत्वपूर्ण बढ़त दिला दी। विश्व कप के नॉकआउट चरण में पराग्वे का यह पहला गोल भी दर्ज हुआ।

    एक गोल से पिछड़ने के बाद दूसरे हाफ में जर्मनी ने अपनी रणनीति बदली और अधिक आक्रामक होकर मैच में वापसी की। खेल के 54वें मिनट में फ्लोरियन विर्ट्ज के बाएं छोर से आए एक सटीक क्रॉस पर काई हैवर्ट्ज ने दमदार हेडर लगाकर स्कोर को 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया। इस बराबरी के बाद जर्मनी ने विजयी गोल की तलाश में पराग्वे के पाले पर लगातार कई तीखे हमले किए, लेकिन पराग्वे की रक्षात्मक पंक्ति दीवार की तरह डटी रही और उन्होंने जर्मनी को बढ़त बनाने का कोई दूसरा मौका नहीं दिया।

    तय समय तक नतीजा न निकलने पर मुकाबला अतिरिक्त समय में चला गया। जर्मनी के मुख्य कोच ने मैच को पेनल्टी शूटआउट में जाने से रोकने के लिए अपने सभी प्रमुख फॉरवर्ड खिलाड़ियों को मैदान पर उतार दिया। एक्स्ट्रा टाइम के दौरान जर्मनी के जोनाथन ताह ने गेंद को गोल पोस्ट में पहुंचा भी दिया था, लेकिन रेफरी ने उनके साथी खिलाड़ी द्वारा पराग्वे के गोलकीपर पर किए गए फाउल के कारण इस गोल को अमान्य घोषित कर दिया। 120 मिनट के खेल के बाद भी जब स्कोर 1-1 रहा, तो मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट के जरिए करने का निर्णय लिया गया।

    पेनल्टी शूटआउट का रोमांच बेहद चरम पर था। जर्मनी की तरफ से पहली किक लेने आए काई हैवर्ट्ज के शॉट को पराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने शानदार तरीके से रोककर अपनी टीम को शुरुआती बढ़त दिला दी। इसके बाद दोनों टीमों की तरफ से गोल करने और चूकने का सिलसिला जारी रहा। अंत में पराग्वे के जोसे कनाले ने बेहद शांत अंदाज में निर्णायक पेनल्टी को गोल में तब्दील कर अपनी टीम को 4-3 से ऐतिहासिक जीत दिला दी। शानदार गोलकीपिंग के लिए ऑरलैंडो गिल को मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। अब पराग्वे की टीम चार जुलाई को फिलाडेल्फिया में फ्रांस और स्वीडन के बीच होने वाले मैच के विजेता से मुकाबला करेगी।

    इसी दौरान टूर्नामेंट के एक अन्य रोमांचक मुकाबले में ब्राजील ने जापान को 2-1 से हराकर अंतिम-16 में अपनी जगह पक्की की। इस मैच में जापान ने 29वें मिनट में काइशु सानो के बेहतरीन गोल की मदद से 1-0 की शुरुआती बढ़त बनाकर ब्राजील को संकट में डाल दिया था। इसके बाद ब्राजील ने वापसी करते हुए कासेमिरो के हेडर की मदद से स्कोर बराबर किया। मैच के आखिरी मिनटों तक दोनों टीमें बढ़त बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं, लेकिन इंजरी टाइम में गैब्रियल完整 मार्टिनेली ने ब्राजील के लिए विजयी गोल दागकर अपनी टीम को प्री-क्वार्टर फाइनल का टिकट दिला दिया।

  • नगर निकाय चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक बदलाव बैतूल को नगर निगम बनाने की तैयारी तेज 26 पंचायतों का सर्वे शुरू

    नगर निकाय चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक बदलाव बैतूल को नगर निगम बनाने की तैयारी तेज 26 पंचायतों का सर्वे शुरू


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में अगले वर्ष प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनाव से पहले बैतूल को नगर निगम का दर्जा दिए जाने की तैयारी तेज हो गई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने प्रस्तावित नगर निगम की सीमा तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कलेक्टर को उन ग्राम पंचायतों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है जिन्हें नई नगर निगम सीमा में शामिल किया जाना प्रस्तावित है। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेगी।

    बैतूल को नगर निगम बनाने की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और स्थानीय विधायक हेमंत खंडेलवाल का विधानसभा क्षेत्र है। प्रशासनिक स्तर पर इस दिशा में गतिविधियां तेज होने के बाद इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर भी चर्चाएं बढ़ गई हैं।

    नगर निगम गठन की प्रक्रिया के तहत जनपद पंचायत बैतूल की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने प्रस्तावित ग्राम पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों का विस्तृत ब्यौरा तैयार कराया है। इसमें पंचायत सचिव रोजगार सहायक और अन्य कर्मचारियों की जानकारी एकत्र की गई है। यह रिपोर्ट संबंधित एसडीएम और राजस्व अधिकारियों के माध्यम से कलेक्टर को भेजी जा चुकी है ताकि प्रशासनिक मूल्यांकन पूरा किया जा सके।

    जानकारी के अनुसार इस विषय पर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बैठक भी आयोजित की गई है जिसमें प्रस्तावित क्षेत्रों को नगर निगम सीमा में शामिल करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसके बाद संबंधित गांवों की प्रशासनिक स्थिति आबादी और अन्य आवश्यक मानकों का परीक्षण शुरू किया गया है।

    प्रस्ताव के अनुसार कुल 26 ग्राम पंचायतों को बैतूल नगर निगम की सीमा में शामिल किया जा सकता है। इनमें कढ़ाई दनोरा बड़ोरा आरूल बाजपुर भैंसदेही खेड़ली मरामझिरी टेमनी जामठी खेड़ला डहरगांव खेड़ी सांवलीगढ़ महदगांव भड़ूस कुम्हारटेक भोगीतेड़ा रोढ़ा सूरगांव भरकावाड़ी खंडारा मलकापुर मिलानपुर बयावाड़ी ढोड़वाड़ा और खड़ला शामिल हैं। इन क्षेत्रों के शामिल होने से नगर निगम की आबादी और क्षेत्रफल दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो नगर निगम गठन से पहले कैबिनेट की स्वीकृति आवश्यक होगी। इसके बाद संबंधित ग्राम पंचायतों को पंचायत क्षेत्र से हटाकर नगर निगम सीमा में शामिल किया जाएगा। साथ ही इन क्षेत्रों के मतदाताओं के नाम पंचायत मतदाता सूची से हटाकर नगर निगम की मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी करना आवश्यक होगा ताकि अगले नगरीय निकाय चुनाव नई व्यवस्था के तहत कराए जा सकें।

    वर्तमान में मध्य प्रदेश में 16 नगर निगम हैं। इनमें भोपाल इंदौर ग्वालियर जबलपुर उज्जैन सागर रीवा सतना सिंगरौली छिंदवाड़ा रतलाम मुरैना कटनी देवास खंडवा और बुरहानपुर शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री पहले ही विदिशा को नगर निगम बनाने की घोषणा कर चुके हैं हालांकि वहां प्रक्रिया अभी अंतिम चरण तक नहीं पहुंची है। अब बैतूल को लेकर भी प्रशासनिक प्रक्रिया तेज होने से आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।

  • शहरी रोजगार रिपोर्ट: देश के 46 बड़े शहरों में सात साल में तेजी से घटी बेरोजगारी दर, महिलाओं की स्थिति में भी बड़ा सुधार

    शहरी रोजगार रिपोर्ट: देश के 46 बड़े शहरों में सात साल में तेजी से घटी बेरोजगारी दर, महिलाओं की स्थिति में भी बड़ा सुधार

    नई दिल्ली। देश के बड़े शहरों में रोजगार के मोर्चे पर एक राहत भरी और सकारात्मक खबर सामने आई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश के 46 प्रमुख शहरों में पिछले सात वर्षों के दौरान बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2018 से 2025 के बीच इन शहरों की कुल बेरोजगारी दर 7.9 फीसदी से घटकर अब महज 4.9 फीसदी के स्तर पर आ गई है। यह बदलाव दर्शाते हैं कि देश के बड़े महानगरीय और शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं, जिससे नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

    इस रिपोर्ट में महिला और पुरुष दोनों ही श्रेणियों में बेरोजगारी दर में निरंतर आ रही कमी का विशेष उल्लेख किया गया है। पुरुषों की बात करें तो उनकी बेरोजगारी दर जो साल 2017-18 में 7.5 प्रतिशत थी, वह लगातार गिरते हुए वर्ष 2025 में 4.5 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है। इसी तरह महिलाओं के मामले में भी काफी बड़ा सुधार देखने को मिला है। साल 2018-19 में महिला बेरोजगारी दर बढ़कर 10.4 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, लेकिन इसके बाद इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई और साल 2025 में यह घटकर 6.1 प्रतिशत रह गई। यह आंकड़े कामकाजी महिलाओं के लिए शहरी क्षेत्रों में बढ़ते अवसरों को रेखांकित करते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, इन 46 शहरों में रोजगार की सामान्य स्थिति 4.9 प्रतिशत रही, जबकि वर्तमान साप्ताहिक स्थिति के आधार पर यह 6.8 प्रतिशत दर्ज की गई। यह आंकड़े लगभग पूरे शहरी भारत के औसत के समान ही हैं, जहां क्रमशः यह दर 4.8 प्रतिशत और 6.8 प्रतिशत रही है। एक खास बात यह भी सामने आई है कि इन बड़े शहरों में काम करने वाले पुरुष और महिला श्रमिक पूरे देश के अन्य शहरी इलाकों के मुकाबले औसतन अधिक घंटे काम कर रहे हैं। इसके अलावा, 15 से 29 वर्ष के ऐसे युवाओं का अनुपात जो किसी भी प्रकार के रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण का हिस्सा नहीं हैं, इन शहरों में 22.2 फीसदी रहा, जो पूरे शहरी भारत के औसत (25.0 फीसदी) से काफी बेहतर है।

    मंत्रालय की रिपोर्ट में श्रम बल से बाहर रहने के मुख्य कारणों का भी विश्लेषण किया गया है। पुरुषों के मामले में 53.5 प्रतिशत ने श्रम बल से बाहर रहने की मुख्य वजह अपनी पढ़ाई जारी रखना बताया। वहीं, महिलाओं के मामले में 68.7 प्रतिशत ने बच्चों की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियों को रोजगार न करने या उससे बाहर रहने का प्राथमिक कारण बताया। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ते देश में शहर आर्थिक गतिविधियों, नवाचार और रोजगार सृजन के मुख्य केंद्र बन चुके हैं, इसलिए इनकी आर्थिक संरचना को समझना बेहद जरूरी है।

    इसके साथ ही, इन 46 बड़े शहरों में रहने वाले लोगों की औसत आय देश के अन्य शहरी हिस्सों की तुलना में काफी बेहतर पाई गई है। आंकड़ों के मुताबिक, स्वरोजगार से जुड़े लोगों की पिछले 30 दिनों की औसत आय 30,858 रुपये रही, जबकि नियमित वेतन पाने वाले कर्मचारियों की औसत आय 28,808 रुपये दर्ज की गई। दिहाड़ी या आकस्मिक श्रमिकों की बात करें तो वे रोजाना औसतन 624 रुपये कमा रहे हैं। इसके विपरीत, पूरे शहरी भारत में स्वरोजगार की औसत आय 23,013 रुपये, नियमित वेतनभोगियों की 26,258 रुपये और दिहाड़ी मजदूरों की कमाई 550 रुपये प्रतिदिन रही।