Author: bharati

  • 25 हजार आबादी के भरोसे सिर्फ एक फार्मासिस्ट! महोबा के ग्योंडी गांव में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

    25 हजार आबादी के भरोसे सिर्फ एक फार्मासिस्ट! महोबा के ग्योंडी गांव में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा


    महोबा  महोबा जिले के कबरई विकासखंड के सबसे बड़े गांव ग्योंडी में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली अब ग्रामीणों के सब्र की सीमा पार कर चुकी है। करीब 25 हजार की आबादी वाले इस गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से डॉक्टरों और जरूरी स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी केवल एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को न तो नियमित चिकित्सक मिलते हैं और न ही स्टाफ नर्स लैब टेक्नीशियन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।

    स्वास्थ्य सुविधाओं की इसी बदहाली के विरोध में बुंदेलखंड नव निर्माण सेना के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि ग्योंडी गांव ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों के लोग भी इसी सरकारी अस्पताल पर निर्भर हैं लेकिन पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था नहीं होने से लोगों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है जबकि गंभीर मरीजों की जान भी खतरे में पड़ जाती है।

    ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में लंबे समय से डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं और प्रशासन इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चौबीस घंटे आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। आवश्यक दवाइयों की कमी जांच सुविधाओं का अभाव और साफ सफाई बिजली तथा पेयजल जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं भी संतोषजनक नहीं हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल होने के बावजूद मरीजों को अपेक्षित उपचार नहीं मिल पा रहा है।

    बुंदेलखंड नव निर्माण सेना ने प्रशासन के सामने पांच सूत्रीय मांगें रखीं। संगठन ने अस्पताल के सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्तियां करने नियमित डॉक्टरों और स्टाफ नर्स की तैनाती सुनिश्चित करने चौबीस घंटे आपातकालीन चिकित्सा सेवा शुरू करने आवश्यक दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने तथा अस्पताल में साफ सफाई बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग की है।

    संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर जिले में चक्का जाम और बड़े स्तर पर प्रदर्शन भी किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा से लोगों को वंचित रखना गंभीर लापरवाही है और इसे अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    जिलाधिकारी ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनकी जायज मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर अस्पताल में आवश्यक संसाधनों और स्टाफ की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं क्योंकि लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के समाधान का इंतजार हजारों लोगों को है।

  • जीएसटीएटी पोर्टल पर भारी दबाव के बाद सरकार का बड़ा फैसला, अपील दाखिल करने की अंतिम तारीख एक माह बढ़ाई

    जीएसटीएटी पोर्टल पर भारी दबाव के बाद सरकार का बड़ा फैसला, अपील दाखिल करने की अंतिम तारीख एक माह बढ़ाई

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) में अपील दाखिल करने वाले करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए अंतिम तारीख एक माह बढ़ा दी है। वित्त मंत्रालय ने घोषणा की कि अब करदाता और अन्य पात्र पक्ष 31 जुलाई 2026 तक जीएसटीएटी में अपील दाखिल कर सकेंगे। पहले यह समय-सीमा 30 जून 2026 तक निर्धारित थी।

    वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह निर्णय जीएसटीएटी पोर्टल पर अत्यधिक ट्रैफिक और उससे उत्पन्न तकनीकी समस्याओं को देखते हुए लिया गया है। मंत्रालय के अनुसार, बड़ी संख्या में करदाताओं और हितधारकों ने शिकायत की थी कि पोर्टल पर भारी दबाव के कारण समय पर अपील दाखिल करने में कठिनाई हो रही है।

    सरकार ने स्पष्ट किया कि यह विस्तार केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम की धारा 112(1) और धारा 112(3) के तहत दायर की जाने वाली अपीलों पर लागू होगा। यानी जिन मामलों में करदाता जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाना चाहते हैं, उन्हें अब अतिरिक्त समय उपलब्ध रहेगा।

    मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताह में अपील दाखिल करने की प्रक्रिया में अचानक तेजी आई। केवल अंतिम 15 दिनों में करीब 30 हजार अपीलें पोर्टल पर दर्ज की गईं। कुछ दिनों में प्रतिदिन लगभग 5,500 अपीलें दाखिल होने से सिस्टम पर दबाव काफी बढ़ गया, जिसके कारण तकनीकी बाधाएं सामने आईं।

    वित्त मंत्रालय ने बताया कि बढ़ती शिकायतों और पोर्टल की क्षमता पर पड़ रहे दबाव का आकलन करने के बाद समय-सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी करदाता को तकनीकी कारणों से अपील दाखिल करने के अधिकार से वंचित न होना पड़े।

    गौरतलब है कि सरकार ने सितंबर 2025 में जारी अधिसूचना के माध्यम से 30 जून 2026 को अपील दाखिल करने की अंतिम तारीख तय की थी। हालांकि, अंतिम चरण में अपीलों की संख्या उम्मीद से कहीं अधिक बढ़ने के कारण यह समय-सीमा बढ़ानी पड़ी।

    सरकार ने करदाताओं से यह भी आग्रह किया है कि वे अंतिम दिनों तक प्रतीक्षा न करें और समय रहते अपनी अपील दाखिल कर दें। मंत्रालय का कहना है कि इससे पोर्टल पर अचानक भीड़ नहीं बढ़ेगी और तकनीकी व्यवधानों की संभावना भी कम होगी।

    इस बीच सरकार के कर संग्रह के आंकड़े भी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। मई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह पिछले वर्ष की तुलना में 3.2 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं शुद्ध जीएसटी संग्रह 3.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.67 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

    इसी अवधि में जीएसटी रिफंड में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 27,281 करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर, प्रत्यक्ष कर संग्रह के आंकड़े भी मजबूत वृद्धि दर्शाते हैं। आयकर विभाग के अनुसार, 1 अप्रैल से 17 जून 2026 के बीच शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 12.46 प्रतिशत बढ़कर 6.10 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अपील की समय-सीमा बढ़ाने से हजारों करदाताओं को राहत मिलेगी और वे बिना तकनीकी दबाव के अपने मामलों को जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। साथ ही यह कदम सरकार की उस नीति को भी दर्शाता है, जिसमें कर प्रशासन को अधिक सुगम और करदाता-अनुकूल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

  • पश्चिम एशिया तनाव, महंगाई की आशंका और ब्याज दरों का दबाव, सोना-चांदी 1 प्रतिशत से ज्यादा फिसले, बाजार की नजर अब अमेरिकी आंकड़ों पर

    पश्चिम एशिया तनाव, महंगाई की आशंका और ब्याज दरों का दबाव, सोना-चांदी 1 प्रतिशत से ज्यादा फिसले, बाजार की नजर अब अमेरिकी आंकड़ों पर

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति की आशंकाओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच मंगलवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों पर भारी दबाव देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) से लेकर वैश्विक बुलियन बाजार तक दोनों कीमती धातुओं में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कारोबारी सत्र के दौरान कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन बाजार का समग्र रुख कमजोर बना रहा।

    घरेलू वायदा बाजार में अगस्त डिलीवरी वाला सोना कारोबार की शुरुआत से ही दबाव में रहा। शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत पिछले बंद स्तर की तुलना में एक प्रतिशत से अधिक टूटकर खुली। दिन के दौरान बिकवाली और तेज हुई, जिससे सोना करीब 1.37 प्रतिशत तक फिसलकर दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। बाद में सीमित खरीदारी लौटने से इसमें कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन बाजार की धारणा पूरी तरह सकारात्मक नहीं बन सकी।

    चांदी की कीमतों में भी इसी तरह कमजोरी देखने को मिली। सितंबर डिलीवरी वाला चांदी वायदा शुरुआती कारोबार में करीब एक प्रतिशत गिरावट के साथ खुला और दिन के शुरुआती सत्र में ही निचले स्तर तक पहुंच गया। बाद के कारोबार में मामूली सुधार हुआ, लेकिन कुल मिलाकर निवेशकों का रुझान सतर्क बना रहा और बड़े निवेशकों ने जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी पर दबाव स्पष्ट दिखाई दिया। स्पॉट गोल्ड में लगभग डेढ़ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि स्पॉट सिल्वर दो प्रतिशत तक टूट गया। इसके अलावा प्लेटिनम और पैलेडियम जैसी अन्य कीमती धातुओं में भी कमजोरी देखने को मिली। विश्लेषकों का मानना है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहा तो सोना कई वर्षों की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज कर सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित सख्त मौद्रिक नीति है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई बढ़ने की आशंकाएं मजबूत हुई हैं। ऐसी स्थिति में निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए आगे भी ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है या उनमें बढ़ोतरी कर सकता है।

    ऊंची ब्याज दरों की संभावना से अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिलती है, जिसका सीधा असर सोने और चांदी जैसी बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों की मांग पर पड़ता है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है, जिससे निवेशकों का आकर्षण कम होता है और बिकवाली का दबाव बढ़ने लगता है। यही वजह रही कि सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली कीमती धातुओं में भी इस बार कमजोरी देखने को मिली।

    इस बीच कच्चे तेल के बाजार में भी उतार-चढ़ाव जारी रहा। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की उम्मीदों के बावजूद हालिया मिसाइल हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को फिर बढ़ा दिया है। इसके चलते निवेशक फिलहाल किसी बड़े जोखिम वाले निवेश से बचते हुए आर्थिक संकेतकों का इंतजार कर रहे हैं। तेल बाजार में आई नरमी ने भी वैश्विक निवेश धारणा को प्रभावित किया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। विशेष रूप से गैर-कृषि रोजगार, बेरोजगारी दर, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र से जुड़े आंकड़े तथा यूरोजोन की मुद्रास्फीति रिपोर्ट निवेशकों की रणनीति तय करेंगे। यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत संकेत देती है और फेड की सख्त नीति बरकरार रहती है तो कीमती धातुओं पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है। वहीं किसी भी भू-राजनीतिक घटनाक्रम या आर्थिक संकेत में बदलाव से बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने की संभावना बनी रहेगी।

  • मंदिर में संत की हत्या से भड़का गुस्सा महोबा में नामदेव समाज ने दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की उठाई मांग

    मंदिर में संत की हत्या से भड़का गुस्सा महोबा में नामदेव समाज ने दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की उठाई मांग


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में मंदिर के पुजारी और संत सच्चिदानंद महाराज की हत्या के बाद नामदेव समाज में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। घटना के विरोध में अखंड भारतीय नामदेव महासभा के कार्यकर्ताओं ने महोबा में विरोध प्रदर्शन करते हुए अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा और दोषियों के खिलाफ त्वरित तथा कठोर कार्रवाई की मांग की। संगठन ने कहा कि इस जघन्य वारदात ने पूरे समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।

    बताया गया कि बांदा जिले के तिंदवारा गांव स्थित त्रिदेव शनि मंदिर में रहने वाले 68 वर्षीय संत बाल ब्रह्मचारी सच्चिदानंद महाराज मंदिर की छत पर विश्राम कर रहे थे। इसी दौरान देर रात कुछ अज्ञात हमलावर वहां पहुंचे और लाठी डंडों तथा धारदार हथियार से उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल संत को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया।

    घटना ऐसे समय हुई जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुंदेलखंड के दौरे पर थे। ऐसे में कानून व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। नामदेव समाज के लोगों का कहना है कि प्रदेश में संत और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस तरह की घटना बेहद चिंताजनक है।

    महोबा में अखंड भारतीय नामदेव महासभा के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष अखिलेन्द्र नामदेव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाज के लोग एकत्र हुए। उन्होंने राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्रीय ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की घटना को अंजाम देने की हिम्मत न कर सके।

    संगठन ने यह भी मांग उठाई कि यदि आरोपी दोषी पाए जाते हैं तो उनके अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि घटना के कई दिन बाद भी पुलिस हत्या के पीछे की असली वजह का खुलासा नहीं कर सकी है और अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना जांच की धीमी रफ्तार को दर्शाता है।

    प्रदर्शन के दौरान समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि मंदिर जैसे पवित्र स्थल में एक संत की हत्या केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि समाज की आस्था पर भी चोट है। उन्होंने सरकार से निष्पक्ष और तेज जांच कर दोषियों को जल्द सजा दिलाने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

  • ग्रीस तक पहुंचा भारत का यूपीआई नेटवर्क, पीयूष गोयल बोले- डिजिटल भुगतान के साथ निवेश, व्यापार और साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

    ग्रीस तक पहुंचा भारत का यूपीआई नेटवर्क, पीयूष गोयल बोले- डिजिटल भुगतान के साथ निवेश, व्यापार और साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को वैश्विक स्तर पर लगातार मिल रही स्वीकार्यता के बीच यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की सेवाएं अब ग्रीस में भी शुरू हो गई हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारत की डिजिटल नवाचार क्षमता और तकनीक आधारित वित्तीय समाधानों की अंतरराष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल से योग्य उपभोक्ताओं को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक डिजिटल भुगतान का विकल्प मिलेगा, वहीं सीमा पार लेनदेन की लागत भी पारंपरिक भुगतान प्रणालियों की तुलना में कम होगी।

    पीयूष गोयल ने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों में यूपीआई को मिल रही बढ़ती स्वीकृति इस बात का प्रमाण है कि भारत द्वारा विकसित डिजिटल भुगतान प्रणाली पर वैश्विक भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। उनके अनुसार तकनीक आधारित समाधान केवल भुगतान को सरल बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग, व्यापारिक संपर्क और साझा विकास के नए अवसर भी तैयार कर रहे हैं।

    ग्रीस यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने यूरोबैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फोकियन करावियास से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच आर्थिक और निवेश संबंधों को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में ग्रीस की कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ विनिर्माण, बुनियादी ढांचा और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया। दोनों पक्षों ने भविष्य में आर्थिक भागीदारी को और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

    एथेंस स्थित यूरोबैंक मुख्यालय में मंत्री ने यूरोबैंक और एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड की साझेदारी के तहत शुरू हुई यूपीआई सेवा का लाइव प्रदर्शन भी देखा। इस अवसर पर बैंकिंग और डिजिटल भुगतान क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने नई व्यवस्था की कार्यप्रणाली और इसके संभावित लाभों की जानकारी दी। इसे भारत के डिजिटल भुगतान नेटवर्क के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    अपने दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने भारत-ग्रीस बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्थिर व्यापक आर्थिक स्थिति और तेजी से विकसित होता औद्योगिक वातावरण विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने ग्रीस के उद्योग जगत से भारत में दीर्घकालिक निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता व्यापार, निवेश और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा दे सकता है। उनका मानना है कि यदि इस दिशा में प्रगति होती है तो भारतीय और यूरोपीय उद्योगों के बीच सहयोग का दायरा और अधिक व्यापक होगा तथा दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को नए बाजार और निवेश के अवसर प्राप्त होंगे।

    उन्होंने ग्रीस के उद्योगपतियों और निवेशकों से सह-निर्माण, सह-निवेश और संयुक्त औद्योगिक परियोजनाओं में भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच तकनीक, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, वित्तीय सेवाओं और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं। इससे रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीस में यूपीआई सेवा की शुरुआत भारत की डिजिटल वित्तीय प्रणाली के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का संकेत है। इससे अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था अधिक सरल और किफायती बनने के साथ-साथ भारत और ग्रीस के बीच व्यापारिक संपर्क, निवेश सहयोग तथा आर्थिक संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में अन्य देशों में भी यूपीआई के विस्तार से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की वैश्विक पहुंच और मजबूत हो सकती है।

  • एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व परिवर्तन के बीच बाजार सतर्क, नए चेयरमैन की तैनाती के बाद शेयर फिसले, सीईओ चयन प्रक्रिया का इंतजार

    एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व परिवर्तन के बीच बाजार सतर्क, नए चेयरमैन की तैनाती के बाद शेयर फिसले, सीईओ चयन प्रक्रिया का इंतजार

    नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व परिवर्तन के बीच मंगलवार को शेयर बाजार में निवेशकों का रुख सतर्क दिखाई दिया। बैंक द्वारा पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को तीन वर्ष के लिए नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किए जाने के बाद शुरुआती कारोबार में बैंक के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की निगाह अब बैंक की शीर्ष प्रबंधन टीम से जुड़े अगले महत्वपूर्ण फैसलों, विशेष रूप से मुख्य कार्यकारी अधिकारी की पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया पर टिकी हुई है।

    मंगलवार के शुरुआती कारोबार में एचडीएफसी बैंक का शेयर गिरावट के साथ खुला और कारोबार के दौरान यह 794 रुपये के इंट्रा-डे स्तर तक पहुंच गया। बाद में इसमें कुछ सुधार जरूर देखने को मिला, लेकिन शेयर पूरे कारोबार के दौरान दबाव में बना रहा। निवेशकों ने नए नेतृत्व की घोषणा का स्वागत करने के साथ-साथ बैंक की भविष्य की प्रबंधन रणनीति को लेकर सतर्क रुख अपनाया।

    बैंक ने हाल ही में शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया कि पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को तीन वर्षों के लिए पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के साथ बैंक को स्थायी नेतृत्व मिल गया है, जिससे बोर्ड स्तर पर लंबे समय से बनी अस्थायी व्यवस्था समाप्त हो गई है। राजीव कुमार ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं जब बैंक कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और रणनीतिक निर्णयों की प्रक्रिया से गुजर रहा है।

    राजीव कुमार ने पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती का स्थान लिया है। चक्रवर्ती ने इस वर्ष अपने पद से इस्तीफा देते समय बैंक की कुछ कार्यप्रणालियों को अपने व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं बताया था। उनके इस्तीफे के बाद बैंक ने संचालन में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से केकी मिस्त्री को अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया था। अब स्थायी नियुक्ति होने से बैंक के निदेशक मंडल को स्थिरता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इस बीच बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गवर्नेंस, नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की हालिया बैठक में इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। माना जा रहा है कि बैंक पहले नए चेयरमैन को पूरी तरह कार्यभार संभालने का अवसर देगा, जिसके बाद सीईओ की पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। यही कारण है कि बाजार फिलहाल नेतृत्व से जुड़े अगले फैसलों पर विशेष नजर बनाए हुए है।

    शेयर बाजार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले 52 सप्ताह के दौरान एचडीएफसी बैंक के शेयर ने 1,020.35 रुपये का उच्चतम और 726.75 रुपये का न्यूनतम स्तर दर्ज किया है। पिछले एक वर्ष में बैंक के शेयर में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, जबकि बीते छह महीनों में भी इसमें लगभग 20 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट है कि बैंक का शेयर हाल के महीनों में लगातार दबाव का सामना कर रहा है।

    पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे से जुड़ी कानूनी समीक्षा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि समीक्षा के दौरान मुख्य रूप से नियामकीय अनुपालन पर ध्यान दिया गया, जबकि बैंक की कारोबारी कार्यप्रणालियों को लेकर उनकी व्यापक चिंताओं पर अपेक्षित गंभीरता से विचार नहीं किया गया। ऐसे में निवेशकों की नजर अब इस बात पर भी रहेगी कि नया नेतृत्व बैंक की गवर्नेंस व्यवस्था, प्रबंधन निर्णयों और भविष्य की रणनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले पर अयोध्या में घमासान कांग्रेस का विरोध और प्रशासन की सख्त कार्रवाई

    राम मंदिर चढ़ावा मामले पर अयोध्या में घमासान कांग्रेस का विरोध और प्रशासन की सख्त कार्रवाई


    अयोध्या । अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जोरदार विरोध दर्ज कराया है और प्रदेश नेतृत्व के साथ कई सांसद और वरिष्ठ नेता अयोध्या पहुंचने की कोशिश में जुटे रहे। इसी बीच प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को देर रात एक होटल में नजरबंद कर दिया और बाद में उन्हें कृषि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में स्थानांतरित किया गया। इसके साथ ही कई अन्य कांग्रेस नेताओं को भी उनके आवास या ठहरने के स्थान पर ही रोक दिया गया जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया।

    कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल राम जन्मभूमि मंदिर जाकर कथित चढ़ावा प्रबंधन और चोरी के आरोपों की जांच और विरोध दर्ज कराना चाहता था। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। टेढ़ी बाजार क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का मुक्की की स्थिति भी देखने को मिली। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। कुछ नेताओं को बस में बैठाकर हटाया गया जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी और बढ़ गई।

    कांग्रेस सांसदों और नेताओं का कहना है कि उन्हें किसी प्रकार का लिखित आदेश नहीं दिया गया है और बिना आधिकारिक सूचना के इस तरह हाउस अरेस्ट करना लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। उनका आरोप है कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है और धार्मिक मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ नियंत्रण के लिए यह कदम आवश्यक था।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चढ़ावा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है और कई आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों से पूछताछ भी हुई है और जांच एजेंसियां पूरे मामले की तह तक जाने का दावा कर रही हैं।

    उधर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से उछाल रही है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत करने की कोशिश की जा रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है और इसमें कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।
    उधर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से उछाल रही है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत करने की कोशिश की जा रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है और इसमें कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।

    अयोध्या में बढ़ते तनाव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की कानून व्यवस्था को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    इस पूरे मामले ने प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।

    शॉर्ट डिस्क्रिप्शन
    अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर कांग्रेस नेताओं का विरोध प्रदर्शन तेज हुआ, कई नेता हाउस अरेस्ट किए गए, पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ा

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    Ayodhya Protest, Ram Mandir Issue, Congress Politics, Uttar Pradesh News, SIT Investigation

  • भारत के बंदरगाह क्षेत्र में सबसे बड़ा विदेशी निजी निवेश, एमएससी ग्रुप करेगा विझिंजम पोर्ट में 49% हिस्सेदारी का अधिग्रहण; वैश्विक व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

    भारत के बंदरगाह क्षेत्र में सबसे बड़ा विदेशी निजी निवेश, एमएससी ग्रुप करेगा विझिंजम पोर्ट में 49% हिस्सेदारी का अधिग्रहण; वैश्विक व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत के समुद्री व्यापार क्षेत्र में एक बड़ा निवेश समझौता सामने आया है। अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन ने घोषणा की है कि उसने वैश्विक शिपिंग कंपनी एमएससी ग्रुप की कंटेनर टर्मिनल संचालन इकाई टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के साथ एक निश्चित समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत एमएससी ग्रुप विझिंजम पोर्ट में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए लगभग 1.4 अरब डॉलर का निवेश करेगा। इसे भारत के बंदरगाह क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निजी निवेश माना जा रहा है।

    समझौते के अनुसार टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड करीब 1.397 अरब डॉलर का निवेश करेगी। यह राशि विझिंजम पोर्ट के लगभग 2.85 अरब डॉलर के कुल मूल्यांकन के आधार पर निर्धारित की गई है। निवेश पूरा होने के बाद कंपनी पोर्ट में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी की भागीदार बनेगी, जबकि नियंत्रण अदाणी समूह के पास रहेगा। हालांकि यह सौदा सभी आवश्यक नियामकीय और वैधानिक मंजूरियां मिलने के बाद प्रभावी होगा।

    अदाणी पोर्ट्स का मानना है कि इस रणनीतिक साझेदारी से विझिंजम पोर्ट की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। कंपनी के अनुसार एमएससी ग्रुप के व्यापक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से अतिरिक्त कार्गो उपलब्ध होगा, जिससे बंदरगाह की परिचालन क्षमता तेजी से बढ़ेगी और विस्तार योजनाओं को निर्धारित समय से पहले पूरा करने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही भारत की वैश्विक समुद्री व्यापार श्रृंखला में भागीदारी भी और मजबूत होगी।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अश्विनी गुप्ता ने कहा कि विझिंजम पोर्ट ने बहुत कम समय में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि परिचालन शुरू होने के केवल 18 महीनों के भीतर बंदरगाह ने 20 लाख टीईयू कार्गो हैंडलिंग का आंकड़ा पार कर लिया, जो इस उपलब्धि तक पहुंचने वाला भारत का पहला बंदरगाह बन गया है। उनके अनुसार एमएससी के साथ लंबे समय से चले आ रहे सहयोग का विस्तार अब विझिंजम पोर्ट तक होना दोनों कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    कंपनी का कहना है कि इस साझेदारी से बांग्लादेश से आने वाले ट्रांसशिपमेंट कार्गो को आकर्षित करने में मदद मिलेगी, जो वर्तमान में दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य बंदरगाहों के माध्यम से संचालित होता है। इसके अलावा पूर्वी अफ्रीका के समुद्री व्यापार मार्गों पर भी पोर्ट की मौजूदगी मजबूत होगी और रिले कार्गो की मात्रा में वृद्धि होने की संभावना है। इससे भारत क्षेत्रीय समुद्री लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकेगा।

    टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड दुनिया की प्रमुख कंटेनर टर्मिनल परिचालन कंपनियों में शामिल है। कंपनी पांच महाद्वीपों में 100 से अधिक कंटेनर टर्मिनलों का संचालन करती है और हर वर्ष 7 करोड़ टीईयू से अधिक कार्गो का प्रबंधन करती है। ऐसे वैश्विक अनुभव के जुड़ने से विझिंजम पोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद है।

    दिसंबर 2024 में परिचालन शुरू करने वाला विझिंजम पोर्ट भारत का पहला डीप-ड्राफ्ट मेगा ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है। इसकी वर्तमान क्षमता 16 लाख टीईयू है, जबकि विस्तार कार्य पूरा होने के बाद दिसंबर 2028 तक इसकी क्षमता बढ़कर 57 लाख टीईयू तक पहुंच जाएगी। रणनीतिक दृष्टि से यह बंदरगाह यूरोप, फारस की खाड़ी और सुदूर पूर्व को जोड़ने वाले प्रमुख पूर्व-पश्चिम समुद्री मार्ग से केवल 10 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इस पोर्ट ने 13 लाख टीईयू कार्गो और 615 जहाजों का संचालन किया, जिससे यह भारत के सबसे तेजी से विकसित होते ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों में शामिल हो गया है।

  • यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा ट्रेलर में घुसी वॉल्वो बस चार की मौत 27 घायल कंडक्टर चला रहा था बस

    यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा ट्रेलर में घुसी वॉल्वो बस चार की मौत 27 घायल कंडक्टर चला रहा था बस


    मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में यमुना एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हो गई जबकि 27 यात्री घायल हो गए। हादसा इतना भयावह था कि तेज रफ्तार वॉल्वो बस का अगला हिस्सा ट्रेलर में करीब आठ फीट तक घुस गया। कई यात्री बस के अंदर फंस गए और उन्हें बाहर निकालने के लिए पुलिस और बचाव दल को गैस कटर की मदद लेनी पड़ी। हादसे के बाद मौके पर चीख पुकार और अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    यह दुर्घटना तड़के करीब साढ़े तीन बजे राया थाना क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर हुई। लखनऊ से दिल्ली जा रही गोला बस सर्विस की वॉल्वो बस में करीब 65 यात्री सवार थे। शुरुआती जांच के अनुसार गिट्टी से लदा ट्रेलर अपनी लेन में चल रहा था तभी पीछे से आ रही तेज रफ्तार बस उससे टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और कई यात्री सीटों के बीच फंस गए।

    मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने बताया कि हादसे में बस चालक उपदेश यादव परिचालक क्लीनर और एक यात्री की मौत हुई है। मृतकों में तीन की पहचान अभी नहीं हो सकी है। वहीं 34 यात्रियों को सुरक्षित दूसरी बसों के माध्यम से उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया। घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका उपचार जारी है।

    पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे के समय नियमित चालक नहीं बल्कि बस का कंडक्टर वाहन चला रहा था। तेज रफ्तार और नियंत्रण खोने के कारण बस सीधे ट्रेलर के पिछले हिस्से में जा घुसी। इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि कंडक्टर को बस चलाने की अनुमति किस परिस्थिति में दी गई थी।

    हादसे के समय अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे इसलिए उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला। कई लोग सीटों के बीच दब गए और कुछ यात्रियों को बाहर निकालने के लिए बस के इमरजेंसी गेट और खिड़कियों के शीशे तोड़ने पड़े। पुलिस स्थानीय लोगों एसडीआरएफ फायर सर्विस और एंबुलेंस टीमों ने करीब दो घंटे तक लगातार राहत और बचाव अभियान चलाया।

    घायल यात्रियों ने बताया कि हादसे से कुछ देर पहले बस एक ढाबे पर रुकी थी। इसके बाद बस काफी तेज रफ्तार से चल रही थी और कुछ यात्रियों को वाहन के डगमगाने का भी एहसास हुआ था। टक्कर इतनी तेज थी कि आगे की सीटों पर बैठे यात्रियों को सबसे ज्यादा चोटें आईं जबकि पीछे बैठे कई लोग बाल बाल बच गए।

    मथुरा जिला अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार सभी घायलों का इलाज जारी है। कुछ गंभीर घायलों को बेहतर उपचार के लिए आगरा और दिल्ली रेफर किया गया है। तीन यात्रियों की जांघ की हड्डी टूटने की पुष्टि हुई है जबकि अन्य की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

  • व्यापार से लेकर रक्षा और तकनीक तक नई ऊंचाइयों पर भारत-अमेरिका संबंध, पूर्व अमेरिकी राजदूत ने बताया लोगों के रिश्तों को सबसे बड़ी शक्ति

    व्यापार से लेकर रक्षा और तकनीक तक नई ऊंचाइयों पर भारत-अमेरिका संबंध, पूर्व अमेरिकी राजदूत ने बताया लोगों के रिश्तों को सबसे बड़ी शक्ति

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक संबंधों की सबसे बड़ी ताकत दोनों देशों के नागरिकों के बीच गहरा विश्वास और लंबे समय से बना मानवीय जुड़ाव है। भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत केनेथ आई. जस्टर ने कहा कि सरकारी स्तर पर समय-समय पर परिस्थितियां बदलती रही हैं, लेकिन दोनों देशों के लोगों के बीच विकसित रिश्तों ने हमेशा इस साझेदारी को स्थिर और मजबूत बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि यही भरोसा आज भारत-अमेरिका संबंधों की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला बन चुका है।

    उन्होंने अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम के लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका की निकटता केवल आधुनिक रणनीतिक समझौतों का परिणाम नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संपर्क कई सदियों पुराने हैं। उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरी के बावजूद दोनों देशों के संबंध दुनिया के सबसे मजबूत लोकतांत्रिक साझेदारों में शामिल हैं।

    केनेथ जस्टर ने बताया कि अमेरिका ने अपने शुरुआती विदेशी कूटनीतिक मिशनों में भारत को विशेष महत्व दिया था। अमेरिका ने वर्ष 1792 में तत्कालीन कलकत्ता और 1794 में मद्रास में अपने शुरुआती राजनयिक मिशन स्थापित किए थे। उन्होंने कहा कि यह तथ्य दर्शाता है कि भारत लंबे समय से अमेरिकी विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता आया है।

    उन्होंने भारत की स्वतंत्रता से पहले के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने भारत की स्वतंत्रता के समर्थन में ब्रिटेन पर दबाव बनाया था। इसके अलावा अमेरिका ने सितंबर 1946 में भारत की अंतरिम सरकार के साथ औपचारिक संबंध स्थापित कर दिए थे, जबकि भारत की स्वतंत्रता में तब भी लगभग 11 महीने का समय शेष था।

    पूर्व राजदूत ने कहा कि शीत युद्ध की समाप्ति के बाद भारत के आर्थिक सुधारों ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दी। हालांकि वर्ष 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद संबंधों में कुछ समय के लिए तनाव पैदा हुआ, लेकिन दोनों देशों के वरिष्ठ नेतृत्व के बीच लगातार संवाद ने इस दूरी को कम किया। इसी प्रक्रिया ने बाद में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की भारत यात्रा का मार्ग भी प्रशस्त किया और द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिली।

    उन्होंने कहा कि इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल में दोनों देशों के रिश्तों में ऐतिहासिक बदलाव आया। उच्च प्रौद्योगिकी सहयोग और असैन्य परमाणु समझौता इस परिवर्तन के प्रमुख आधार बने। आगे चलकर बराक ओबामा प्रशासन ने भारत को प्रमुख रक्षा साझेदार का दर्जा दिया, जबकि ट्रंप प्रशासन के दौरान 2+2 मंत्रीस्तरीय संवाद और क्वाड सहयोग को नई मजबूती मिली। इसके बाद जो बाइडेन प्रशासन ने क्वाड को शीर्ष नेतृत्व के स्तर तक पहुंचाकर रणनीतिक सहयोग को और व्यापक बनाया।

    जस्टर ने कहा कि हाल के वर्षों में रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा, निवेश और व्यापार जैसे अनेक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार लगभग 19 अरब डॉलर था, जो अब बढ़कर करीब 250 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। दोनों देश इस दशक के अंत तक इसे 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौता इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    पूर्व अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भारतवंशी समुदाय ने भी दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई देने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। अमेरिका में रहने वाले 50 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोगों ने आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने 2019 के “हाउडी मोदी” और 2020 के “नमस्ते ट्रंप” जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम दोनों देशों के नागरिकों के बीच बढ़ते विश्वास और आपसी सद्भाव के प्रतीक हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यही जनसंपर्क भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और अधिक व्यापक तथा मजबूत बनाने का सबसे महत्वपूर्ण आधार बना रहेगा।