Author: bharati

  • 2027 वर्ल्ड कप पर रोहित शर्मा का बड़ा इशारा, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर को लेकर दिया दिलचस्प जवाब

    2027 वर्ल्ड कप पर रोहित शर्मा का बड़ा इशारा, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर को लेकर दिया दिलचस्प जवाब


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा एक बार फिर अपने मजेदार अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उनके बयान की वजह साल 2027 में होने वाला वनडे वर्ल्ड कप है। रोहित शर्मा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह 2027 वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं इसलिए उन्हें भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल को खुश रखना होगा। उनके इस बयान ने क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान खींच लिया है। रोहित ने यह टिप्पणी उस समय की जब उनसे शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर में से किसी एक को चुनने के लिए कहा गया। अपने चुटीले जवाब से उन्होंने वहां मौजूद लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया।

    दरअसल फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा कार्यक्रम के दौरान पूर्व भारतीय कप्तान से एक दिलचस्प सवाल पूछा गया। उनसे जानना चाहा गया कि अगर उन्हें किसी आपात स्थिति में मदद के लिए फोन करना हो तो वह श्रेयस अय्यर और शुभमन गिल में से किसे कॉल करेंगे। इस सवाल का जवाब देते हुए रोहित ने कहा कि दोनों ही भारतीय टीम के कप्तान हैं। शुभमन गिल फिलहाल उनके कप्तान हैं और वह 2027 वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं इसलिए उन्हें गिल को खुश रखना होगा। इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर 2027 वर्ल्ड कप के बाद उन्हें टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करनी पड़ी तो उन्हें श्रेयस अय्यर को भी खुश रखना होगा। रोहित ने कहा कि उन्हें दोनों की जरूरत है।

    रोहित शर्मा का यह जवाब भले ही मजाकिया अंदाज में दिया गया हो लेकिन इससे उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि उनके इस बयान को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता। रोहित ने 2024 में टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद इस प्रारूप से संन्यास लेने का फैसला किया था। इसके बाद उन्होंने अपना ध्यान वनडे और टेस्ट क्रिकेट पर केंद्रित किया। अब 2027 वनडे वर्ल्ड कप को लेकर उनकी दिलचस्पी ने प्रशंसकों के बीच नई उम्मीदें जगा दी हैं।

    रोहित शर्मा की हालिया फॉर्म भी भारतीय क्रिकेट के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में उन्होंने 225 रन बनाए और भारतीय बल्लेबाजों में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे। उनके प्रदर्शन ने दिखाया कि वह अब भी बड़े मुकाबलों में अपनी बल्लेबाजी से टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि प्रशंसक उन्हें अगले वनडे वर्ल्ड कप में खेलते हुए देखने की उम्मीद कर रहे हैं।

    भारतीय टीम का न्यूजीलैंड दौरा भी रोहित शर्मा के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। पांच मैचों की टी20 सीरीज के बाद दोनों देशों के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज खेली जानी है। वनडे मुकाबलों में रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर खास नजर रहेगी। दोनों दिग्गज बल्लेबाजों का अनुभव भारतीय टीम के लिए काफी अहम हो सकता है।

    फिलहाल रोहित शर्मा के सामने अपनी फिटनेस और शानदार फॉर्म को बनाए रखने की चुनौती है। 2027 वर्ल्ड कप तक उनकी निरंतरता और प्रदर्शन ही उनके चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनके हालिया बयान ने यह जरूर साफ किया है कि वह अपने मजाकिया अंदाज में भविष्य की संभावनाओं को लेकर बात करने से पीछे नहीं हटते। अब देखना होगा कि आने वाले समय में रोहित का बल्ला किस तरह प्रदर्शन करता है और क्या वह 2027 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की जर्सी में नजर आते हैं।

  • बंगाल में अपने ही मंत्री पर भड़के BJP विधायक, बोले- हत्या के आरोपियों के साथ मंच साझा करना शर्मनाक

    बंगाल में अपने ही मंत्री पर भड़के BJP विधायक, बोले- हत्या के आरोपियों के साथ मंच साझा करना शर्मनाक


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भाजपा के भीतर 2020 में हुई पार्टी नेता मनीष शुक्ला की हत्या का मामला एक बार फिर चर्चा में है। बैरकपुर से भाजपा विधायक कौस्तुव बागची ने अपनी ही पार्टी के श्रम एवं परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह पर सवाल उठाए हैं। बागची ने कुछ तस्वीरों और वीडियो का हवाला देते हुए पूछा कि मनीष शुक्ला हत्याकांड में जिन लोगों के नाम सामने आए थे, उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता मंच कैसे साझा कर सकते हैं। उन्होंने इस मामले में कानूनी कार्रवाई की तैयारी की बात भी कही है।

    2020 में हुई थी मनीष शुक्ला की हत्या
    भाजपा नेता मनीष शुक्ला की 4 अक्टूबर 2020 को टीटागढ़ में भाजपा कार्यालय के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच सीआईडी ने की थी और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। अब कौस्तुव बागची ने पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेताओं उत्तम दास और प्रशांत चौधरी के साथ अर्जुन सिंह की मौजूदगी पर आपत्ति जताई है।

    बागची का दावा है कि मनीष शुक्ला के पिता ने हत्या के मामले में इन दोनों के नाम आरोपियों के तौर पर लिए थे। उनके मुताबिक, ऐसे लोगों के साथ पार्टी नेताओं की तस्वीरें सामने आने से उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र में लोगों के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम मामले में आने और अदालत में दोष सिद्ध होने के बीच अंतर है।

    अर्जुन सिंह से निजी नाराजगी नहीं, लेकिन साथ मंच साझा करने पर आपत्ति
    कौस्तुव बागची ने कहा कि अर्जुन सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उनसे उनकी कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है। उनकी आपत्ति उन लोगों के साथ मंच साझा करने को लेकर है, जिनके नाम मनीष शुक्ला हत्याकांड में सामने आने का दावा किया जा रहा है।

    बागची ने कहा कि वह इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए कानूनी कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, मुख्य सचिव, सीआईडी के महानिदेशक और बैरकपुर पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखने की बात कही है।

    BJP में शामिल करने का भी कर रहे विरोध
    बागची ने उत्तम दास और प्रशांत चौधरी को भाजपा में शामिल किए जाने का भी विरोध किया। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर वह भाजपा के प्रदेश मुख्यालय के सामने खुद को आग लगा लेंगे। इससे पहले भी उन्होंने इस मुद्दे पर सिर मुंडवाकर विरोध जताने की बात कही थी।

    उनके बयान से पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। हालांकि, दोनों व्यक्तियों की भाजपा में औपचारिक सदस्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया जरूरी होगी।

    अर्जुन सिंह और उत्तम दास ने क्या कहा?
    अर्जुन सिंह ने बागची के आरोपों को ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि राजनीति कैसे करनी है।” वहीं, उत्तम दास ने मंत्री के साथ अपनी मौजूदगी को निजी संबंधों से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि वह काफी समय पहले तृणमूल कांग्रेस से अलग हो चुके हैं और उन्होंने भाजपा में शामिल होने की इच्छा नहीं जताई है।

    TMC ने भी BJP पर साधा निशाना
    इस विवाद पर तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने भी भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सार्वजनिक रूप से तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को पार्टी में शामिल नहीं करने की बात करती है, लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं करती।

    इस तरह मनीष शुक्ला हत्याकांड को लेकर भाजपा के भीतर उठे सवालों ने बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब इस मामले में संबंधित नेताओं की आगे की प्रतिक्रिया और बागची की प्रस्तावित कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।

  • करवा चौथ से पहले शुक्र अस्त, फिर भी महिलाएं खरीद सकेंगी सुहाग का सामान, जानें कब करें ?

    करवा चौथ से पहले शुक्र अस्त, फिर भी महिलाएं खरीद सकेंगी सुहाग का सामान, जानें कब करें ?


    नई दिल्ली। करवा चौथ का व्रत इस साल 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ महिलाएं इस व्रत की तैयारियों में जुटी हैं। हालांकि, शुक्र ग्रह के अस्त होने और पंचक की समाप्ति को लेकर सुहाग सामग्री की खरीदारी के शुभ समय पर सवाल उठ रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र अस्त होने से करवा चौथ का व्रत रखने या पूजा की सामग्री और सुहाग का सामान खरीदने पर रोक नहीं है।

    26 से 28 अक्टूबर तक कर सकती हैं खरीदारी

    ज्योतिषविदों के अनुसार, इस साल पंचक 25 अक्टूबर को शाम करीब 7 बजकर 22 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। इसके बाद महिलाएं 26, 27 और 28 अक्टूबर को करवा चौथ की तैयारियों के लिए खरीदारी कर सकती हैं। सोमवार से ही त्योहार की तैयारी शुरू की जा सकती है।

    इन दिनों महिलाएं पूजा के लिए करवा, पूजा की थाली, दीपक और छलनी खरीद सकती हैं। इसके अलावा चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, साड़ी और अन्य सुहाग सामग्री भी अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार ली जा सकती है।

    क्या शुक्र अस्त होने पर सुहाग सामग्री खरीदना अशुभ है?

    ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को प्रेम, सौंदर्य, विवाह और वैवाहिक सुख का कारक माना जाता है। शुक्र के अस्त होने की अवधि में विवाह जैसे कुछ मांगलिक कार्यों के मुहूर्त को लेकर सावधानी बरती जाती है। इसी वजह से करवा चौथ की खरीदारी को लेकर भी महिलाओं के मन में असमंजस है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शुक्र अस्त होने का मतलब यह नहीं है कि करवा चौथ का व्रत नहीं रखा जा सकता या सुहाग का सामान खरीदना वर्जित है। महिलाएं चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, नई साड़ी और पूजा सामग्री खरीद सकती हैं। सोशल मीडिया पर खरीदारी को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारियों के बीच जरूरी है कि व्रत और विवाह जैसे अलग-अलग धार्मिक आयोजनों के नियमों को एक जैसा न समझें।

    29 अक्टूबर को शुक्र का उदय होने की जानकारी

    द्रिक पंचांग के अनुसार, शुक्र 12 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 19 मिनट पर अस्त हुए थे। पंचांग में 29 अक्टूबर को शाम 6 बजे शुक्र के उदय होने का समय बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र के उदय होने के बाद कुछ शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय माना जाता है।

    हालांकि, विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के मुहूर्त की शुरुआत को लेकर अलग-अलग पंचांगों और स्थानीय परंपराओं में अंतर हो सकता है। इसलिए विवाह की तारीख तय करने से पहले संबंधित पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से जानकारी लेना उचित रहेगा।

    करवा चौथ की पूजा के लिए पहले जुटा लें ये सामग्री

    करवा चौथ के दिन पूजा के समय किसी जरूरी वस्तु की कमी न हो, इसके लिए सामग्री पहले से खरीदकर रख लेना सुविधाजनक रहता है। पूजा के लिए करवा, छलनी, पूजा की थाली, दीपक, रोली, अक्षत, कलावा, फल और मिठाई जैसी चीजें जुटा लें।

    इसके साथ ही महिलाएं अपनी पसंद के अनुसार चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, साड़ी या सूट भी खरीद सकती हैं। समय रहते तैयारी करने से व्रत के दिन की भागदौड़ कम होगी और पूजा की व्यवस्था आसानी से की जा सकेगी।

  • हूती हमले रुकवाने के लिए सऊदी अरब देगा 1 अरब डॉलर! ईरान के जरिए समझौते की चर्चा

    हूती हमले रुकवाने के लिए सऊदी अरब देगा 1 अरब डॉलर! ईरान के जरिए समझौते की चर्चा


    नई दिल्ली। सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच जारी तनाव के बीच एक अरब डॉलर के कथित वित्तीय समझौते की चर्चा सामने आई है। खाड़ी क्षेत्र के राजनयिक सूत्रों का दावा है कि सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने हूतियों के हमले रुकवाने और संघर्षविराम पर बातचीत के लिए ईरान का दौरा किया। हालांकि, हूतियों को इतनी बड़ी रकम देने या किसी तरह के वित्तीय लेन-देन की सऊदी अरब ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    ईरान के जरिए हूतियों तक रकम पहुंचाने की चर्चा

    राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते के तहत सऊदी अरब ईरान के माध्यम से हूती विद्रोहियों को एक अरब डॉलर देने की पेशकश कर सकता है। कुछ सूत्रों ने दावा किया कि सऊदी रक्षा मंत्री यह रकम लेकर सैन्य परिवहन विमान ‘हरक्यूलिस’ से तेहरान पहुंचे थे। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार भी नहीं किया गया है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब सऊदी अरब की तेल सुविधाओं को निशाना बनाए जाने और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर चिंता बनी हुई है। बताया जा रहा है कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य हमलों को रोकना और संघर्षविराम की संभावनाएं तलाशना है।

    तनाव कम करने के लिए ईरान ने की मध्यस्थता की पेशकश

    ईरान ने सऊदी अरब और हूतियों के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की है। सऊदी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान और मक्का संयुक्त रक्षा गठबंधन के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की ईरान यात्रा का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करने के प्रयास करना है।

    हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने कथित एक अरब डॉलर के भुगतान या रकम हस्तांतरित किए जाने की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में इस कथित पेशकश और इसके तहत संभावित समझौते को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    मक्का समझौते के बावजूद सैन्य मदद पर सवाल

    रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत में तुर्किये के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलिन और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी शामिल हैं। बताया गया है कि सऊदी अरब के साझेदार देशों ने सैन्य सलाहकार भेजे हैं, लेकिन अतिरिक्त सैन्य बल उपलब्ध नहीं कराया है।

    इससे मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। बताए गए प्रावधानों के अनुसार, किसी सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में दूसरे सदस्य देशों को उसे सैन्य सहायता देनी है। हालांकि, समझौते की शर्तों और इस मामले में संबंधित देशों की वास्तविक प्रतिबद्धताओं की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

    तीन साल पुराने समझौतों को लेकर भी विवाद

    सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव की एक वजह करीब तीन साल पहले हुए समझौतों को लागू करने का विवाद भी है। इन समझौतों के तहत सऊदी अरब की ओर से हूतियों के नियंत्रण वाले इलाकों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन, नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहायता दिए जाने की बात थी। इसके बदले हूतियों से संघर्षविराम बनाए रखने और सऊदी अरब पर हमले रोकने की अपेक्षा की गई थी।

    हाल के महीनों में हूतियों ने आरोप लगाया है कि सऊदी अरब पहले बनी सहमतियों से पीछे हट गया है। इन आरोपों और समझौतों की मौजूदा स्थिति पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

    क्षेत्रीय संघर्ष के बीच सऊदी अरब पर दबाव

    रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान हूतियों को हथियार और अन्य सहायता उपलब्ध करा रहा है। अमेरिका के साथ ईरान के जारी संघर्ष के संदर्भ में यह समर्थन क्षेत्रीय तनाव को और जटिल बना सकता है।

    यदि एक अरब डॉलर की कथित पेशकश की पुष्टि होती है, तो इसे सऊदी अरब की ओर से हमले रोकने और तेल निर्यात को सामान्य करने के लिए बड़ी रियायत के तौर पर देखा जा सकता है। फिलहाल, भुगतान और समझौते से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं होने के कारण इस घटनाक्रम को सावधानी के साथ देखना जरूरी है।

  • MP में मानसून जैसा सिस्टम एक्टिव, 3 दिन भारी बारिश के आसार, 29 अक्टूबर को सबसे ज्यादा असर

    MP में मानसून जैसा सिस्टम एक्टिव, 3 दिन भारी बारिश के आसार, 29 अक्टूबर को सबसे ज्यादा असर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवातीय सिस्टम के असर से प्रदेश के पूर्वी हिस्से में 28 से 30 अक्टूबर तक भारी और अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मंगलवार को जबलपुर सहित 11 जिलों में आंधी-बारिश होने का अनुमान है, जबकि 29 अक्टूबर को इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है।

    बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम, पूर्वी MP में ज्यादा असर

    मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा अवदाब अब गंभीर चक्रवातीय तूफान में बदल गया है। 27 अक्टूबर से इसके और मजबूत होने का अनुमान है। सिस्टम के आगे बढ़ने के साथ मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में तेज आंधी और बारिश का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

    29 अक्टूबर को सबसे ज्यादा बारिश की संभावना

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अक्टूबर को सिस्टम का असर सबसे अधिक रह सकता है। इसी दिन करवा चौथ भी है। ऐसे में बादल और बारिश के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में रात को चांद दिखाई देने में परेशानी हो सकती है।

    सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट बताया गया है। इन क्षेत्रों में अगले 24 घंटे के दौरान साढ़े चार इंच से ज्यादा बारिश होने की आशंका है।

    वहीं, जबलपुर, छतरपुर, पन्ना, कटनी, दमोह, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, सागर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने का अनुमान है।

    30 अक्टूबर को भी इन जिलों में बारिश के आसार

    बारिश का दौर 30 अक्टूबर को भी जारी रह सकता है। इस दिन छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर और शहडोल में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में मौसम का असर ज्यादा रहने का अनुमान है।

    पचमढ़ी में रात का पारा 13 डिग्री पर पहुंचा

    बारिश की चेतावनी के बीच प्रदेश में रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ने लगी है। बीती रात पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कटनी के करौंदी में 13.9 डिग्री, शहडोल के कल्याणपुर में 14.2 डिग्री, बालाघाट के मलाजखंड में 14.7 डिग्री और मंडला में 14.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा।

    दूसरी ओर, दिन के तापमान में भी करीब एक डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, उज्जैन, गुना, नर्मदापुरम, धार, ग्वालियर, इंदौर, खजुराहो और सागर में अधिकतम तापमान 35 से 35.5 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा।

  • थाईलैंड के फुकेत में भारी बारिश के बाद बाढ़, तीन जिलों में जनजीवन प्रभावित और करीब 100 परिवारों पर संकट…

    थाईलैंड के फुकेत में भारी बारिश के बाद बाढ़, तीन जिलों में जनजीवन प्रभावित और करीब 100 परिवारों पर संकट…


    नई दिल्ली । थाईलैंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल फुकेत द्वीप पर भारी बारिश के बाद बाढ़ से हालात बिगड़ गए हैं। रातभर हुई मूसलाधार बारिश के कारण सोमवार को प्रांत के कई इलाकों में पानी भर गया। दक्षिणी द्वीपीय प्रांत के तीनों जिले बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें प्रांतीय राजधानी फुकेत शहर भी शामिल है। जलभराव के कारण सड़कों पर आवागमन प्रभावित हुआ और कई स्थानों पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    प्रांत के उप-गवर्नर रोमडोन हाइयावाए के मुताबिक, सोमवार सुबह के बाद बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा था। हालांकि, कई निचले इलाकों में जलभराव बना हुआ था। प्रशासन ने इन क्षेत्रों में छोटे वाहनों को ले जाने से बचने की सलाह दी है। पानी घटने के बावजूद प्रभावित इलाकों में सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लग सकता है।

    भारी बारिश के कारण फुकेत के कुछ हिस्सों में भूस्खलन भी हुआ है। प्रशासनिक अधिकारी मलबा हटाने के काम में जुटे हैं। उनकी कोशिश है कि मिट्टी और पत्थर नहरों में न पहुंचें, क्योंकि इससे जलमार्गों में रुकावट पैदा हो सकती है और पानी की निकासी प्रभावित होने का खतरा रहता है। बाढ़ के बाद कई जगहों पर जमा मलबे को हटाना भी चुनौती बना हुआ है।

    सोशल मीडिया पर साझा किए गए फोटो और वीडियो में बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में घुसता और सड़कों पर जमा होता दिखाई दिया। कई मार्गों पर पानी भरने के कारण यातायात बंद करना पड़ा। कुछ जगहों पर मिट्टी और पत्थरों के ढेर में वाहन आंशिक रूप से दबे हुए नजर आए। इन हालात ने स्थानीय लोगों की आवाजाही और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित किया है।

    उप-गवर्नर के अनुसार, बाढ़ से करीब 100 परिवार प्रभावित हुए हैं। हालांकि, अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जलभराव वाले इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने और छोटे वाहनों के साथ जोखिम लेने से बचने की सलाह दी गई है।

    थाईलैंड के मौसम विभाग ने दक्षिणी क्षेत्र में बुधवार तक लगातार भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने से अचानक बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में फुकेत सहित प्रभावित इलाकों में प्रशासन के सामने जलनिकासी, मलबा हटाने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती बनी हुई है।

    यह संकट केवल फुकेत तक सीमित नहीं है। थाईलैंड के आपदा रोकथाम एवं न्यूनीकरण विभाग के अनुसार, देश के कई हिस्सों में सितंबर के मध्य से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। सोमवार तक बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 83 लोगों की मौत होने की सूचना दी गई है। लगातार बारिश और जलभराव ने कई क्षेत्रों में जनजीवन को प्रभावित किया है।

    सितंबर के अंत में राजधानी बैंकॉक में भी कई दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद बाढ़ आ गई थी। उस दौरान हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा था और सामान्य गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई थीं। फुकेत में ताजा बाढ़ की घटना के बीच मौसम विभाग की चेतावनी ने चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन के लिए आने वाले दिनों में संभावित बारिश के मद्देनजर सतर्कता बनाए रखना और प्रभावित इलाकों में पानी की निकासी सुनिश्चित करना अहम होगा।

  • अफगानिस्तान सीमा बंद करने से पाकिस्तान के व्यापार को झटका, कारोबार 74 प्रतिशत गिरा, तालिबान ने तलाशे नए रास्ते

    अफगानिस्तान सीमा बंद करने से पाकिस्तान के व्यापार को झटका, कारोबार 74 प्रतिशत गिरा, तालिबान ने तलाशे नए रास्ते

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा बंद होने का असर दोनों देशों के व्यापार पर पड़ा है। पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी पत्रकार और भू-राजनीतिक विश्लेषक जहांगीर खट्टक के मुताबिक, इस फैसले से पाकिस्तान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दूसरे देशों के साथ कारोबार के विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। उनके अनुसार, पाकिस्तान की रणनीति का उद्देश्य सीमा बंद करके तालिबान पर दबाव बनाना था, लेकिन इसके परिणाम उम्मीदों के विपरीत दिखाई दे रहे हैं।

    पाकिस्तान ने पिछले वर्ष तालिबान के साथ तनाव के बाद अफगानिस्तान से लगने वाली प्रमुख सीमा चौकियों को बंद कर दिया था। इनमें तोरखम, स्पिन बोल्डक, खरलाची, गुलाम खान और अंगूर अड्डा क्रॉसिंग शामिल हैं। पाकिस्तान की सरकार और सैन्य नेतृत्व को उम्मीद थी कि व्यापारिक आवाजाही रोकने से तालिबान पर दबाव बढ़ेगा और वह पाकिस्तान की शर्तें मानने के लिए तैयार होगा। हालांकि, सीमा बंद रहने से दोनों तरफ के व्यापारियों को नुकसान हुआ है।

    जहांगीर खट्टक ने कहा कि सीमा बंद होने के एक वर्ष से अधिक समय बाद भी पाकिस्तान को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है। उनके मुताबिक, सीमा के दोनों ओर कारोबार करने वाले कई व्यापारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले का प्रभाव केवल अफगानिस्तान के साथ होने वाले प्रत्यक्ष व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कारण पाकिस्तान के मध्य एशियाई बाजारों तक पहुंचने के अवसर भी प्रभावित हुए हैं।

    पाकिस्तान की दवा इंडस्ट्री को इस स्थिति से खास नुकसान होने की बात कही गई है। इसके अलावा सीमेंट और कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी असर पड़ा है। अफगानिस्तान के रास्ते मध्य एशिया तक पहुंचने वाले पाकिस्तानी कारोबारियों के लिए सीमा बंद होने से व्यापारिक मार्ग सीमित हो गए हैं। निर्यातकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और पाकिस्तान के लिए इन बाजारों में अपनी पहुंच बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

    दोनों देशों के बीच व्यापार के आंकड़े भी गिरावट की ओर संकेत करते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान और अफगानिस्तान का द्विपक्षीय व्यापार करीब 1.3 अरब डॉलर से घटकर 358 मिलियन डॉलर रह गया। यह लगभग 74 प्रतिशत की गिरावट है। व्यापार में इस कमी से सीमा पार सामान भेजने वाले कारोबारियों और संबंधित उद्योगों पर दबाव बढ़ा है।

    दूसरी ओर, तालिबान प्रशासन पाकिस्तान पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक रास्ते विकसित करने की कोशिश कर रहा है। अफगानिस्तान ने चीन के साथ वखान कॉरिडोर के जरिए संपर्क बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इस मार्ग के माध्यम से चीन और मध्य एशियाई देशों के साथ सीधे व्यापार की संभावनाएं बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही अफगानिस्तान ने ईरान और तुर्की के रास्ते रेल परिवहन के जरिए कारोबार बढ़ाने के विकल्प भी अपनाए हैं। चीन के साथ व्यापारिक संपर्क बढ़ने से अफगानिस्तान को नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिला है।

    जहांगीर खट्टक का मानना है कि सीमा बंद करने की नीति का सबसे बड़ा असर पाकिस्तान के उद्योगों पर पड़ा है। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ व्यापार रोककर तालिबान पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन इससे खुद उसके निर्यातकों और उद्योगों को नुकसान पहुंचा। वहीं, अफगानिस्तान दूसरे व्यापारिक मार्गों की तलाश में जुटा है।

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक संबंधों में आई गिरावट क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और सीमा पार कारोबार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष सीमा संबंधी प्रतिबंधों और व्यापारिक मतभेदों को लेकर क्या कदम उठाते हैं।

  • चीन ने पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान के लिए शुरू किया नया रेल मार्ग, भारत के रणनीतिक हितों पर भी नजर

    चीन ने पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान के लिए शुरू किया नया रेल मार्ग, भारत के रणनीतिक हितों पर भी नजर

    नई दिल्ली । चीन ने अफगानिस्तान के साथ व्यापारिक संपर्क बढ़ाने की दिशा में नया कदम उठाया है। चीन के शेडोंग प्रांत के लिनयी शहर से अफगानिस्तान के हैरातन के लिए पहली समर्पित मालगाड़ी रवाना की गई है। इस रेल सेवा को चीन और अफगानिस्तान के बीच जमीनी व्यापार बढ़ाने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। नया मार्ग पाकिस्तान, खासकर कराची बंदरगाह से होकर गुजरने वाले पारंपरिक ट्रांजिट रास्तों का विकल्प बन सकता है। इसके संभावित आर्थिक और रणनीतिक प्रभावों पर भी चर्चा हो रही है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, मालगाड़ी में लगभग 80 लाख युआन यानी करीब 11 लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य का सामान लदा है। इसके लगभग 20 दिनों में उत्तरी अफगानिस्तान के बल्ख प्रांत स्थित हैरातन ड्राई पोर्ट पहुंचने की उम्मीद है। यह शेडोंग से हैरातन तक शुरू की गई पहली समर्पित रेल माल-ढुलाई सेवा बताई जा रही है, जो दोनों क्षेत्रों को सीधे जोड़ने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है।

    इस खेप में लिनयी में निर्मित कपड़े, रासायनिक कच्चा माल, औजार और निर्माण मशीनरी शामिल हैं। चीन से रवाना होने के बाद मालगाड़ी कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान से होकर गुजरेगी। इसके बाद तेरमेज सीमा चौकी के रास्ते अफगानिस्तान में प्रवेश करेगी और हैरातन पहुंचेगी। इस मार्ग के जरिए चीन को अफगानिस्तान तक सामान पहुंचाने के लिए एक वैकल्पिक जमीनी संपर्क उपलब्ध हो सकता है।

    अफगानिस्तान चारों ओर से जमीन से घिरा देश है और वहां घरेलू रेल नेटवर्क का विस्तार सीमित है। ऐसे में क्षेत्रीय रेल संपर्क उसके लिए व्यापार और माल परिवहन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। फिलहाल उज्बेकिस्तान की सीमा से मजार-ए-शरीफ तक रेल संपर्क उपलब्ध है। इसके अलावा ईरान के साथ खाफ-हेरात रेलवे के माध्यम से संपर्क विकसित करने के प्रयास भी चल रहे हैं। नए रेल मार्ग से अफगानिस्तान के लिए आयातित सामान की आपूर्ति के विकल्प बढ़ सकते हैं।

    चीन की इस पहल को पाकिस्तान के रास्ते होने वाले व्यापार पर निर्भरता कम करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। अब तक अफगानिस्तान के आयात का बड़ा हिस्सा कराची बंदरगाह से जुड़े पारंपरिक मार्गों के जरिए पहुंचता रहा है। नए गलियारे से चीन को वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से जुड़ी परियोजनाओं को स्थानीय विरोध और अपेक्षित लाभ से संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में अफगानिस्तान के साथ संपर्क बढ़ाना चीन की क्षेत्रीय व्यापार रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

    इस घटनाक्रम का भारत के लिए भी रणनीतिक महत्व है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान में पुनर्निर्माण और विकास से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग करता रहा है। चीन की अफगानिस्तान में बढ़ती आर्थिक मौजूदगी से क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। हालांकि, नए रेल मार्ग के शुरू होने मात्र से भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर किसी निश्चित प्रभाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। इसका वास्तविक असर व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग में होने वाले बदलावों से स्पष्ट होगा।

    इससे पहले भी चीन के जिआंगसू प्रांत के हैमेन से मालगाड़ी अफगानिस्तान के हैरातन पहुंच चुकी है। उस खेप में 2,000 टन से अधिक सामान था, जिसका मूल्य 2 करोड़ डॉलर से ज्यादा बताया गया था। कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान से होकर हुई उस यात्रा में 12 दिन लगे थे। इस मार्ग पर महीने में दो बार आने-जाने वाली सेवाएं शुरू करने की योजना भी बताई गई थी।

    नए गलियारे की व्यावसायिक सफलता परिवहन लागत, समय पर डिलीवरी और माल ढुलाई की गति पर निर्भर करेगी। चीनी अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे व्यापार सुगम होगा और खर्च घटेगा। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया मार्ग नियमित माल परिवहन में कितना उपयोगी साबित होता है और चीन-अफगानिस्तान व्यापार को किस हद तक विस्तार मिलता है।

  • इजरायल चुनाव पर भारत की नजर, IMEC कॉरिडोर से रक्षा साझेदारी तक दांव पर कई अहम हित….

    इजरायल चुनाव पर भारत की नजर, IMEC कॉरिडोर से रक्षा साझेदारी तक दांव पर कई अहम हित….

    नई दिल्ली । इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले आम चुनाव पर भारत की नजरें टिकी हैं। इस चुनाव को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ भारत और इजरायल के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक, साइबर सुरक्षा, कृषि, नवाचार और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग है। ऐसे में इजरायल में सत्ता परिवर्तन या मौजूदा सरकार की वापसी से इन साझेदारियों की प्राथमिकताओं पर असर पड़ सकता है।

    यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान तथा सीरिया में इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों के बाद पहला आम चुनाव है। नेतन्याहू को बंधकों की रिहाई के मामले को संभालने और गाजा युद्ध की रणनीति को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी हैं। हालांकि, उनके समर्थन में धुर राष्ट्रवादी और धार्मिक राजनीतिक दलों का गठबंधन है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन भी नेतन्याहू के राजनीतिक पक्ष के लिए अहम माना जा रहा है।

    चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और इजरायली सेना के पूर्व प्रमुख गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी के बीच मुकाबले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नेतन्याहू इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं और सातवें कार्यकाल के लिए दावेदारी कर रहे हैं। दूसरी ओर, आइजेनकोट 7 अक्टूबर के हमले, गाजा युद्ध और बंधकों की रिहाई के मुद्दों पर सरकार को घेर रहे हैं। हाल के सर्वेक्षणों में उनके आगे रहने की बात कही गई है, हालांकि चुनाव का अंतिम परिणाम मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेगा।

    गादी आइजेनकोट इजरायली सेना के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। वह 2022 में राजनीति में आए और हमास के हमले के बाद नेतन्याहू की युद्ध कैबिनेट का हिस्सा बने। जून 2024 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। उनका आरोप रहा है कि सरकार के पास गाजा युद्ध को लेकर स्पष्ट रणनीति नहीं है। वह भ्रष्टाचार, राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी नेतन्याहू की आलोचना करते रहे हैं। दिसंबर 2023 में उनके सबसे छोटे बेटे की गाजा में लड़ाई के दौरान मौत हो गई थी। युद्ध में उनके दो भतीजे भी मारे गए।

    भारत के लिए चुनाव का एक बड़ा पहलू इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी IMEC है। इस प्रस्तावित आर्थिक गलियारे में इजरायल को महत्वपूर्ण भागीदार माना गया है। परियोजना का उद्देश्य भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच संपर्क तथा व्यापार को बढ़ावा देना है। यदि नई सरकार की प्राथमिकताओं में इस परियोजना को पर्याप्त महत्व नहीं मिला, तो इसके क्रियान्वयन में देरी की आशंका हो सकती है। इसलिए भारत के लिए इजरायल की नई सरकार की क्षेत्रीय नीति और आर्थिक सहयोग को लेकर रुख महत्वपूर्ण रहेगा।

    व्यापार के मोर्चे पर वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और इजरायल के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार लगभग 3.93 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते पर भी बातचीत कर रहे हैं। भारत इजरायल को रत्न और आभूषण, रिफाइंड पेट्रोलियम, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू लिनेन का निर्यात करता है। वहीं, भारत इजरायल से इंटीग्रेटेड सर्किट, हीरे, उर्वरक, पेट्रोलियम उत्पाद और रक्षा उपकरण आयात करता है। दोनों देशों के बीच रुपये में व्यापार को बढ़ावा देने पर भी बातचीत जारी है।

    भारत ने 17 सितंबर 1950 को इजरायल को मान्यता दी थी। वर्ष 1992 में दोनों देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित हुए और नियमित दूतावास खोले गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिली है। मोदी 2017 में इजरायल की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने फरवरी 2026 में भी इजरायल का राजकीय दौरा किया और इजरायली संसद नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। इजरायल में एक लाख से अधिक भारतीय मूल के यहूदी रहते हैं, जबकि भारत में भी इजरायली नागरिक मौजूद हैं। ऐसे में चुनाव परिणाम दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक सहयोग की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • छोटे कारोबारियों के लिए AI कैसे बन सकता है तरक्की का साधन, किराना दुकान से रेस्टोरेंट तक जानें इसके उपयोग

    छोटे कारोबारियों के लिए AI कैसे बन सकता है तरक्की का साधन, किराना दुकान से रेस्टोरेंट तक जानें इसके उपयोग


    नई दिल्ली ।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। बड़ी कंपनियों और स्टार्टअप के साथ अब छोटे कारोबारियों के लिए भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। किराना दुकान, कपड़ों का कारोबार, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर और छोटी विनिर्माण इकाइयों में AI की मदद से रोजमर्रा के कई काम आसान बनाए जा सकते हैं। इससे कारोबारियों को समय बचाने, ग्राहकों की जरूरतों को समझने और अपने व्यवसाय के विस्तार पर ध्यान देने का अवसर मिल सकता है।

    छोटे कारोबारों में अक्सर सीमित कर्मचारी ही बिक्री, स्टॉक, हिसाब-किताब, प्रचार और ग्राहक सेवा जैसी जिम्मेदारियां संभालते हैं। इसके मुकाबले बड़ी कंपनियों के पास अलग-अलग कामों के लिए विशेष टीमें होती हैं। ऐसे में डिजिटल उपकरण और AI आधारित सुविधाएं छोटे कारोबारियों के लिए सहायक बन सकती हैं। हालांकि, तकनीक का चुनाव कारोबार की जरूरत और बजट को ध्यान में रखकर करना जरूरी है।

    किराना दुकानदार बिक्री और स्टॉक से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे ज्यादा बिकने वाली वस्तुओं की पहचान करने और दोबारा सामान मंगाने की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। कपड़ों के कारोबार में पिछले बिक्री रिकॉर्ड और मौसमी मांग को समझकर खरीदारी की योजना बेहतर बनाई जा सकती है। इस तरह उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल कारोबार से जुड़े फैसलों को व्यवस्थित करने में सहायक हो सकता है।

    रेस्टोरेंट संचालक AI की मदद से मेन्यू के विवरण, प्रचार सामग्री और सोशल मीडिया पोस्ट तैयार कर सकते हैं। ग्राहकों के सामान्य सवालों के जवाब देने में भी ऐसे उपकरण उपयोगी हो सकते हैं। कोचिंग सेंटरों में प्रवेश, फीस, कक्षाओं के समय और पाठ्यक्रम से संबंधित नियमित पूछताछ को व्यवस्थित किया जा सकता है। वहीं, छोटी विनिर्माण इकाइयां ऑर्डर, स्टॉक और डिलीवरी से जुड़ी जानकारी को संभालने के लिए डिजिटल समाधानों का उपयोग कर सकती हैं।

    छोटे कारोबारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि हर काम के लिए महंगे AI सॉफ्टवेयर की आवश्यकता नहीं होती। यदि किसी दुकानदार को बिलिंग और स्टॉक का हिसाब रखने में परेशानी है, तो सामान्य बिलिंग या इन्वेंटरी सॉफ्टवेयर ही उसकी जरूरत पूरी कर सकता है। दूसरी ओर, जहां बड़ी संख्या में ग्राहकों की पूछताछ आती है, वहां AI आधारित चैटबॉट सामान्य सवालों के जवाब देने और जानकारी को संबंधित कर्मचारी तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।

    सभी ऑटोमेशन उपकरण AI आधारित नहीं होते। कुछ सॉफ्टवेयर पहले से तय नियमों के अनुसार काम करते हैं, जबकि AI आधारित प्रणालियां भाषा समझने, सामग्री तैयार करने और आंकड़ों का विश्लेषण करने जैसे कार्य कर सकती हैं। इसलिए किसी समाधान को अपनाने से पहले उसकी उपयोगिता, लागत और मौजूदा कार्यप्रणाली के साथ अनुकूलता की जांच करनी चाहिए।

    AI का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। इससे तैयार की गई जानकारी या बिक्री संबंधी अनुमान हमेशा सही हों, यह जरूरी नहीं है। महत्वपूर्ण व्यावसायिक फैसले लेने से पहले परिणामों की जांच करनी चाहिए। ग्राहकों की निजी जानकारी, भुगतान विवरण और कारोबार के गोपनीय आंकड़ों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है। किसी सेवा का इस्तेमाल करने से पहले उसकी गोपनीयता नीति और डेटा उपयोग की शर्तों को समझना चाहिए।

    छोटे कारोबारी शुरुआत किसी एक काम से कर सकते हैं। मसलन, प्रचार सामग्री तैयार करना, ग्राहकों के सामान्य सवालों के जवाब देना या बिक्री के आंकड़ों को समझना। इसके बाद यह देखा जा सकता है कि संबंधित उपकरण से कितना समय बचा, खर्च कितना हुआ और काम में कितना सुधार आया। यदि परिणाम उपयोगी हों, तो धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है।

    छोटे कारोबारों की असली ताकत अनुभव, स्थानीय बाजार की समझ और ग्राहकों के साथ भरोसेमंद संबंध हैं। AI इन खूबियों का विकल्प नहीं, बल्कि उन्हें मजबूत करने का साधन बन सकता है। कारोबारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे तकनीक को केवल नया चलन समझकर नहीं, बल्कि अपनी वास्तविक जरूरतों के हिसाब से अपनाएं।