Author: bharati

  • व्यापार से लेकर रक्षा और तकनीक तक नई ऊंचाइयों पर भारत-अमेरिका संबंध, पूर्व अमेरिकी राजदूत ने बताया लोगों के रिश्तों को सबसे बड़ी शक्ति

    व्यापार से लेकर रक्षा और तकनीक तक नई ऊंचाइयों पर भारत-अमेरिका संबंध, पूर्व अमेरिकी राजदूत ने बताया लोगों के रिश्तों को सबसे बड़ी शक्ति

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक संबंधों की सबसे बड़ी ताकत दोनों देशों के नागरिकों के बीच गहरा विश्वास और लंबे समय से बना मानवीय जुड़ाव है। भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत केनेथ आई. जस्टर ने कहा कि सरकारी स्तर पर समय-समय पर परिस्थितियां बदलती रही हैं, लेकिन दोनों देशों के लोगों के बीच विकसित रिश्तों ने हमेशा इस साझेदारी को स्थिर और मजबूत बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि यही भरोसा आज भारत-अमेरिका संबंधों की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला बन चुका है।

    उन्होंने अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम के लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका की निकटता केवल आधुनिक रणनीतिक समझौतों का परिणाम नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संपर्क कई सदियों पुराने हैं। उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरी के बावजूद दोनों देशों के संबंध दुनिया के सबसे मजबूत लोकतांत्रिक साझेदारों में शामिल हैं।

    केनेथ जस्टर ने बताया कि अमेरिका ने अपने शुरुआती विदेशी कूटनीतिक मिशनों में भारत को विशेष महत्व दिया था। अमेरिका ने वर्ष 1792 में तत्कालीन कलकत्ता और 1794 में मद्रास में अपने शुरुआती राजनयिक मिशन स्थापित किए थे। उन्होंने कहा कि यह तथ्य दर्शाता है कि भारत लंबे समय से अमेरिकी विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता आया है।

    उन्होंने भारत की स्वतंत्रता से पहले के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने भारत की स्वतंत्रता के समर्थन में ब्रिटेन पर दबाव बनाया था। इसके अलावा अमेरिका ने सितंबर 1946 में भारत की अंतरिम सरकार के साथ औपचारिक संबंध स्थापित कर दिए थे, जबकि भारत की स्वतंत्रता में तब भी लगभग 11 महीने का समय शेष था।

    पूर्व राजदूत ने कहा कि शीत युद्ध की समाप्ति के बाद भारत के आर्थिक सुधारों ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दी। हालांकि वर्ष 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद संबंधों में कुछ समय के लिए तनाव पैदा हुआ, लेकिन दोनों देशों के वरिष्ठ नेतृत्व के बीच लगातार संवाद ने इस दूरी को कम किया। इसी प्रक्रिया ने बाद में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की भारत यात्रा का मार्ग भी प्रशस्त किया और द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिली।

    उन्होंने कहा कि इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल में दोनों देशों के रिश्तों में ऐतिहासिक बदलाव आया। उच्च प्रौद्योगिकी सहयोग और असैन्य परमाणु समझौता इस परिवर्तन के प्रमुख आधार बने। आगे चलकर बराक ओबामा प्रशासन ने भारत को प्रमुख रक्षा साझेदार का दर्जा दिया, जबकि ट्रंप प्रशासन के दौरान 2+2 मंत्रीस्तरीय संवाद और क्वाड सहयोग को नई मजबूती मिली। इसके बाद जो बाइडेन प्रशासन ने क्वाड को शीर्ष नेतृत्व के स्तर तक पहुंचाकर रणनीतिक सहयोग को और व्यापक बनाया।

    जस्टर ने कहा कि हाल के वर्षों में रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा, निवेश और व्यापार जैसे अनेक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार लगभग 19 अरब डॉलर था, जो अब बढ़कर करीब 250 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। दोनों देश इस दशक के अंत तक इसे 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौता इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    पूर्व अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भारतवंशी समुदाय ने भी दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई देने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। अमेरिका में रहने वाले 50 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोगों ने आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने 2019 के “हाउडी मोदी” और 2020 के “नमस्ते ट्रंप” जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम दोनों देशों के नागरिकों के बीच बढ़ते विश्वास और आपसी सद्भाव के प्रतीक हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यही जनसंपर्क भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और अधिक व्यापक तथा मजबूत बनाने का सबसे महत्वपूर्ण आधार बना रहेगा।

  • ट्रंप की नीतियों पर रो खन्ना का तीखा हमला, बोले- भारत-अमेरिका साझेदारी की असली ताकत साझा लोकतंत्र, स्वतंत्रता और मानवीय मूल्यों में है

    ट्रंप की नीतियों पर रो खन्ना का तीखा हमला, बोले- भारत-अमेरिका साझेदारी की असली ताकत साझा लोकतंत्र, स्वतंत्रता और मानवीय मूल्यों में है

    नई दिल्ली। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को केवल रक्षा, व्यापार और निवेश तक सीमित रखने के बजाय साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय आदर्शों पर आधारित बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी तभी अधिक मजबूत और प्रभावी बन सकती है, जब उसका आधार लोकतंत्र, स्वतंत्रता, बहुलवाद और आत्मनिर्णय जैसे साझा सिद्धांत हों।

    अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए रो खन्ना ने अमेरिकी विदेश नीति, वैश्विक सहयोग और इमिग्रेशन से जुड़े कई मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति और आव्रजन संबंधी दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए कहा कि एकतरफा फैसलों और व्यापारिक नीतियों ने अमेरिका की वैश्विक विश्वसनीयता को प्रभावित किया है। उनके अनुसार, अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने सहयोगी देशों के साथ विश्वास और साझेदारी को दोबारा मजबूत करने की आवश्यकता है।

    रो खन्ना ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंधों की वास्तविक शक्ति केवल रणनीतिक या आर्थिक सहयोग में नहीं, बल्कि उन साझा मूल्यों में है जो दोनों लोकतंत्रों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को मानव स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, साझेदारी का उद्देश्य केवल व्यावसायिक लाभ नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका जैसे लोकतांत्रिक देशों को ऐसी विश्व व्यवस्था के निर्माण में योगदान देना चाहिए, जहां मानवाधिकारों, आत्मनिर्णय और सभ्यतागत मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी साझेदारी का उद्देश्य अंध समर्थन नहीं होना चाहिए, बल्कि उन देशों के साथ सहयोग होना चाहिए जो समान मूल्यों और सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हों।

    अपने संबोधन में रो खन्ना ने अमेरिका की ऐतिहासिक भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने लंबे समय तक स्वतंत्रता, लोकतंत्र और उपनिवेशवाद से मुक्ति जैसे सिद्धांतों का समर्थन किया है। उनके अनुसार, इन्हीं आदर्शों ने दुनिया भर के लाखों प्रवासियों को अमेरिका में अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया और यही मूल्य भविष्य में भी अमेरिका की वैश्विक पहचान को मजबूत बनाए रख सकते हैं।

    इमिग्रेशन नीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान नीतियों के कारण दुनिया की प्रतिभाओं को आकर्षित करने की अमेरिका की क्षमता प्रभावित हो रही है। उनका मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अमेरिका को योग्य और प्रतिभाशाली पेशेवरों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नवाचार और अनुसंधान में वैश्विक प्रतिभा की भागीदारी किसी भी देश की तकनीकी प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

    रो खन्ना ने अमेरिकी राजनीति पर भी अपने विचार व्यक्त किए और विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में डेमोक्रेटिक पार्टी फिर से मजबूत स्थिति में लौटेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका में समय-समय पर चुनौतियां जरूर आई हैं, लेकिन देश ने हमेशा लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक मूल्यों के बल पर स्वयं को मजबूत किया है। उनके अनुसार, यही क्षमता अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत है।

    भारतीय मूल के सांसद ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनके परिवार की प्रेरणा भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय विरासत और अमेरिकी लोकतांत्रिक परंपराओं ने उनके सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक सोच को गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और अमेरिका भविष्य में रक्षा, व्यापार, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी अपनी साझेदारी का केंद्रीय आधार बनाए रखेंगे।

  • भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को नई उड़ान देने की तैयारी, बोइंग समझौते पर तेजी, ट्रंप प्रशासन ने निवेश और तकनीकी सहयोग पर दिया बड़ा संकेत

    भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को नई उड़ान देने की तैयारी, बोइंग समझौते पर तेजी, ट्रंप प्रशासन ने निवेश और तकनीकी सहयोग पर दिया बड़ा संकेत

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति के संकेत मिले हैं। अमेरिका के भारत स्थित राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्वयं भारत के साथ व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच एक नई बोइंग डील लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जिससे विमानन क्षेत्र के साथ-साथ व्यापक आर्थिक सहयोग को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हालिया बातचीत में बोइंग समझौता प्रमुख विषयों में शामिल रहा। उन्होंने इसे दोनों देशों के बढ़ते आर्थिक रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि अमेरिका इस समझौते को जल्द अंतिम रूप तक पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है।

    गोर ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि दुनिया के विभिन्न देश अत्याधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाले विमानों का उपयोग करें तथा बोइंग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत के साथ प्रस्तावित नया समझौता दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक और औद्योगिक सहयोग का मजबूत आधार बनेगा। उनके अनुसार अमेरिका भारत को केवल एक व्यापारिक साझेदार नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक आर्थिक सहयोगी के रूप में देखता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से उभरती हुई शक्ति बन चुका है और अमेरिका इस विकास यात्रा का सहभागी बनना चाहता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत तकनीक, विमानन, रक्षा और अन्य आधुनिक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उनका कहना था कि दोनों देशों की क्षमताओं का समन्वय भविष्य में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा दे सकता है।

    निवेश के मुद्दे पर बोलते हुए अमेरिकी राजदूत ने कहा कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस वर्ष अमेरिका में निवेश आकर्षित करने के मामले में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि लगभग 20.5 अरब डॉलर के नए निवेश को बढ़ावा देने में दूतावास की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके अनुसार यह उपलब्धि भारत में कार्यरत अमेरिकी कंपनियों के बढ़ते विश्वास और स्थिर कारोबारी वातावरण का परिणाम है।

    गोर ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश से पहले बौद्धिक संपदा की सुरक्षा, नियामकीय स्थिरता और कारोबारी माहौल जैसे विषयों पर जानकारी प्राप्त करती हैं। उन्होंने कहा कि भारत के प्रति बढ़ते भरोसे ने निवेशकों का विश्वास मजबूत किया है और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध लगातार गहरे हो रहे हैं। उन्होंने उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि यदि किसी व्यावसायिक परियोजना के दौरान प्रशासनिक या प्रक्रियागत कठिनाइयां आती हैं तो अमेरिकी दूतावास हर संभव सहयोग के लिए उपलब्ध रहेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप विदेशी बाजारों में अमेरिकी कंपनियों के हितों को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार यदि किसी व्यावसायिक समझौते से अमेरिका में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं तो राष्ट्रपति स्वयं भी उस दिशा में पहल करने से पीछे नहीं हटते। इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिकी प्रशासन अंतरराष्ट्रीय आर्थिक साझेदारियों को रोजगार और औद्योगिक विकास से जोड़कर देख रहा है।

    भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल है और आने वाले वर्षों में हजारों नए विमानों की आवश्यकता का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में प्रस्तावित बोइंग समझौता केवल विमान खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में निवेश, तकनीक, रक्षा, ऊर्जा, एयरोस्पेस और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर भी पैदा कर सकता है। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है, जिसके लिए व्यापक आर्थिक सहयोग को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • रिकॉर्ड और ट्रॉफियां नहीं वापसी की ताकत बनाती है महान युवराज सिंह का बेन स्टोक्स के लिए भावुक संदेश

    रिकॉर्ड और ट्रॉफियां नहीं वापसी की ताकत बनाती है महान युवराज सिंह का बेन स्टोक्स के लिए भावुक संदेश


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के स्टार ऑलराउंडर बेन स्टोक्स के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह ने उन्हें भावुक अंदाज में विदाई दी है। युवराज ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लंबा संदेश साझा करते हुए स्टोक्स के शानदार करियर के साथ उनकी संघर्ष से उबरने की क्षमता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी की महानता केवल रिकॉर्ड या ट्रॉफियों से नहीं बल्कि हर कठिन दौर के बाद फिर मजबूती से खड़े होने की ताकत से तय होती है।

    युवराज सिंह ने अपने संदेश में स्टोक्स के करियर के कई यादगार पलों का जिक्र किया। उन्होंने विश्व कप फाइनल में खेली गई ऐतिहासिक पारी और हेडिंग्ले टेस्ट में नाबाद 135 रन की पारी को क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार पारियों में से एक बताया। युवराज ने कहा कि इन पारियों ने यह साबित कर दिया कि असंभव दिखने वाली परिस्थितियों में भी जीत हासिल की जा सकती है।

    युवराज ने स्टोक्स की मानसिक मजबूती की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय पर खुलकर बात करने का साहस हर खिलाड़ी में नहीं होता लेकिन स्टोक्स ने इसे पूरी ईमानदारी से दुनिया के सामने रखा। इसके अलावा अपने पिता को खोने जैसे निजी दुख के बावजूद उन्होंने जिस तरह हर बार खुद को संभाला और मैदान पर वापसी की वह प्रेरणादायक है।

    पूर्व भारतीय ऑलराउंडर ने लिखा कि वह खुद भी अपने करियर में सफलता और संघर्ष के कई दौर से गुजर चुके हैं इसलिए वह स्टोक्स के सफर को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के शिखर पर पहुंचने और फिर कठिन परिस्थितियों का सामना करने का अनुभव उन्होंने भी किया है और स्टोक्स में उन्हें वही जज्बा दिखाई दिया।

    युवराज ने कहा कि यही गुण किसी अच्छे खिलाड़ी को महान खिलाड़ी बनाता है। रिकॉर्ड टूटते रहते हैं ट्रॉफियां भी समय के साथ इतिहास का हिस्सा बन जाती हैं लेकिन मुश्किलों के बाद दोबारा उठ खड़े होने की क्षमता हमेशा याद रखी जाती है। उन्होंने स्टोक्स को दो विश्व कप जीतने वाला खिलाड़ी और ऐसा कप्तान बताया जिसने अपनी टीम में यह भरोसा जगाया कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

    35 वर्षीय बेन स्टोक्स ने वर्ष 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। अपने 15 साल लंबे करियर में उन्होंने इंग्लैंड के लिए 122 टेस्ट 114 वनडे और 43 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 7273 रन और 252 विकेट दर्ज हैं जबकि वनडे में उन्होंने 3463 रन बनाने के साथ 74 विकेट भी हासिल किए। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्होंने 585 रन बनाए और 26 विकेट अपने नाम किए।

    स्टोक्स इंग्लैंड के सबसे प्रभावशाली ऑलराउंडरों में गिने जाते हैं। दो विश्व कप जीतने के अलावा एशेज सीरीज में उनके कई यादगार प्रदर्शन और कप्तान के रूप में इंग्लैंड की टेस्ट टीम में लाए गए बदलाव उन्हें आधुनिक दौर के महान क्रिकेटरों में शामिल करते हैं। युवराज सिंह का संदेश भी इसी बात का प्रमाण है कि स्टोक्स का प्रभाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं बल्कि क्रिकेट जगत के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

  • भारत के प्रति ट्रंप का विशेष लगाव, पीएम मोदी से व्यक्तिगत रिश्तों के सहारे मजबूत होगी द्विपक्षीय साझेदारी; अमेरिकी राजदूत गोर का बड़ा बयान

    भारत के प्रति ट्रंप का विशेष लगाव, पीएम मोदी से व्यक्तिगत रिश्तों के सहारे मजबूत होगी द्विपक्षीय साझेदारी; अमेरिकी राजदूत गोर का बड़ा बयान

    नई दिल्ली । भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा मित्र मानते हैं और भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने दोनों नेताओं के बीच मजबूत व्यक्तिगत विश्वास को द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में दोनों देश व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति कर सकते हैं।

    अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत के प्रति विशेष सम्मान रखते हैं और अक्सर अपने भारत दौरे तथा यहां के अनुभवों का उल्लेख करते हैं। उनके अनुसार अमेरिकी प्रशासन भारत के साथ दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल औपचारिक कूटनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साझा हितों और आपसी विश्वास पर आधारित हैं।

    राजदूत गोर ने बताया कि हाल ही में वाशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई उनकी मुलाकात के दौरान भारत को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत में अपने अनुभवों और वहां मिले सकारात्मक माहौल को लेकर राष्ट्रपति बेहद संतुष्ट दिखाई दिए। ट्रंप के मन में भारत की कई सुखद यादें हैं और उनका पिछला भारत दौरा उनके सबसे यादगार विदेशी दौरों में शामिल रहा है। गोर ने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान एक बार फिर भारत का दौरा कर सकते हैं।

    उन्होंने दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंधों का उदाहरण देते हुए मियामी में आयोजित एक यूएफसी कार्यक्रम का उल्लेख किया। गोर ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करने की इच्छा जताई थी। समय का अंतर देखते हुए बातचीत अगले दिन के लिए तय की गई, लेकिन इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को एक करीबी मित्र के रूप में देखते हैं और उनके साथ नियमित संवाद बनाए रखना चाहते हैं।

    गोर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच विकसित व्यक्तिगत विश्वास ने पिछले वर्षों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई गति दी है। उन्होंने कहा कि दोनों सरकारें व्यापार, निवेश, रक्षा उत्पादन, अत्याधुनिक तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में ठोस परिणाम हासिल करने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। उनका मानना है कि अगले दो वर्ष दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगे और इस अवधि में लिए गए निर्णय आने वाले दशकों तक सहयोग की नींव मजबूत करेंगे।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के संबंधों को लेकर समय-समय पर उठने वाले संदेह वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करते। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और लोगों के बीच बढ़ते संपर्क लगातार रिश्तों को मजबूत बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में अपने पिछले छह महीनों के कार्यकाल के दौरान उन्होंने लगभग हर क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं देखी हैं और दोनों देशों के बीच साझेदारी लगातार विस्तार की ओर बढ़ रही है।

    राजदूत गोर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत प्रौद्योगिकी, रक्षा, निवेश और नवाचार को भविष्य के सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बताते हुए कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर वैश्विक स्तर पर नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक हितों और रणनीतिक दृष्टिकोण के आधार पर दोनों देशों की साझेदारी आने वाले समय में और अधिक मजबूत होगी तथा वैश्विक स्तर पर स्थिरता और विकास को भी नई दिशा देगी।

  • महिला टी20 विश्व कप भारत को हराने के बाद ऑस्ट्रेलिया का बढ़ा हौसला लूसी हैमिल्टन ने सेमीफाइनल से पहले भरी हुंकार

    महिला टी20 विश्व कप भारत को हराने के बाद ऑस्ट्रेलिया का बढ़ा हौसला लूसी हैमिल्टन ने सेमीफाइनल से पहले भरी हुंकार


    नई दिल्ली। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया की युवा तेज गेंदबाज लूसी हैमिल्टन ने कहा है कि भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ मिली जीत ने पूरी टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। उनका मानना है कि बड़े मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करने से खिलाड़ियों का भरोसा बढ़ता है और यही आत्मविश्वास अब वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाले सेमीफाइनल में भी टीम की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।

    क्रिकेट डॉट कॉम डॉट एयू से बातचीत में हैमिल्टन ने कहा कि नई गेंद के साथ गेंदबाजी करना उनके लिए हमेशा रोमांचक अनुभव रहता है। विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में नई गेंद संभालना बड़ी जिम्मेदारी होती है लेकिन भारत के खिलाफ सफल प्रदर्शन के बाद उनका आत्मविश्वास काफी मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि टीम ने उस मुकाबले में जिस तरह दबाव झेलते हुए जीत हासिल की उससे सभी खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा है।

    हैमिल्टन ने स्वीकार किया कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर खेलते समय दबाव महसूस होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान के दौरान हर खिलाड़ी के मन में घबराहट होती है लेकिन जैसे ही पहला ओवर शुरू होता है पूरा ध्यान सिर्फ खेल पर केंद्रित हो जाता है। उनके मुताबिक लगातार बड़े मुकाबले खेलने से मानसिक मजबूती भी बढ़ती है और खिलाड़ी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटना सीखते हैं।

    ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज ने कहा कि भारत के खिलाफ प्रदर्शन ने उन्हें यह भरोसा दिया कि वे बड़े मैचों में भी अपनी जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभा सकती हैं। यही अनुभव सेमीफाइनल जैसे महत्वपूर्ण मुकाबले में उनके लिए काफी उपयोगी साबित होगा। उन्होंने कहा कि टीम का लक्ष्य पिछले मैचों की लय को बरकरार रखते हुए आक्रामक क्रिकेट खेलना है।

    हैमिल्टन ने मैचों के बीच कम अंतराल को भी टीम के लिए सकारात्मक बताया। उनके अनुसार लगातार मुकाबले खेलने से खिलाड़ियों की लय बनी रहती है और टीम का मोमेंटम भी कायम रहता है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया हाल के मैचों में जिस गुणवत्ता का क्रिकेट खेल रहा है उसे सेमीफाइनल में भी दोहराने की पूरी कोशिश की जाएगी।

    द ओवल मैदान पर पहली बार खेलने जा रहीं हैमिल्टन ने कहा कि मैच से पहले मैदान का निरीक्षण करने से परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने माना कि हालात तेजी से बदल सकते हैं इसलिए टीम का फोकस जल्द से जल्द खुद को परिस्थितियों के अनुरूप ढालने पर रहेगा।

    उन्होंने वेस्टइंडीज को भी बेहद खतरनाक प्रतिद्वंद्वी बताया। हैमिल्टन का कहना है कि अंडरडॉग के रूप में उतरने वाली टीमों पर अतिरिक्त दबाव नहीं होता और वे खुलकर खेलती हैं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतेगा। दोनों टीमों के बीच होने वाले इस सेमीफाइनल की विजेता फाइनल में जगह बनाएगी जहां विश्व कप खिताब के लिए मुकाबला होगा।
  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील को मिलेगी जल्द मंजूरी! अमेरिकी राजदूत का दावा- 18 महीने की बातचीत निर्णायक मोड़ पर, 500 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य पर जोर

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील को मिलेगी जल्द मंजूरी! अमेरिकी राजदूत का दावा- 18 महीने की बातचीत निर्णायक मोड़ पर, 500 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य पर जोर

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि दोनों देशों के बीच इस समझौते का अधिकांश हिस्सा तय हो चुका है और अब केवल अंतिम एक से दो प्रतिशत मुद्दों पर सहमति बननी बाकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि करीब 18 महीने से चल रही बातचीत जल्द ही सफल निष्कर्ष तक पहुंचेगी और इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

    अमेरिका-रणनीतिक साझेदारी फोरम के नेतृत्व सम्मेलन में संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि हाल के सप्ताहों में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बातचीत की गति तेज हुई है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर हाल ही में नई दिल्ली पहुंचे थे, जहां लंबी चर्चा के बाद समझौते के शेष बिंदुओं पर भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई। उनके अनुसार अधिकांश प्रावधानों पर सहमति बन चुकी है और अब अंतिम औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है।

    राजदूत ने कहा कि इतने व्यापक और जटिल व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में समय लगना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े व्यापार समझौतों में कई वर्षों तक बातचीत चलना सामान्य बात है। इसी संदर्भ में उन्होंने यूरोपीय व्यापार समझौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां ऐसे समझौतों को पूरा होने में दो दशक तक लग गए थे, जबकि भारत और अमेरिका अपेक्षाकृत कम समय में निर्णायक स्थिति तक पहुंच गए हैं।

    सर्जियो गोर ने इस प्रस्तावित समझौते को दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी बताया। उनका कहना था कि यह किसी एक पक्ष के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि समझौते के लागू होने से निवेशकों और व्यापारिक संस्थानों को अधिक स्पष्टता और स्थिरता मिलेगी, जिससे द्विपक्षीय व्यापार को नई गति प्राप्त होगी।

    उन्होंने यह भी बताया कि हाल के सप्ताहों में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के बीच लगातार उच्च स्तरीय बैठकें हुई हैं। भारत और अमेरिका के प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे के देशों का दौरा कर लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की है। उनका मानना है कि इसी सक्रिय संवाद के कारण बातचीत अब अंतिम चरण तक पहुंच सकी है।

    राजदूत ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में पिछले दो दशकों के दौरान आई उल्लेखनीय वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार लगभग 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जो दोनों देशों के मजबूत आर्थिक सहयोग का प्रमाण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रस्तावित व्यापार समझौते के बाद यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ेगा।

    सर्जियो गोर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य दोनों देशों की साझा आर्थिक सोच और भविष्य की रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। उनके अनुसार व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

    उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर सामने आने वाली नकारात्मक अटकलों को भी खारिज किया। उनका कहना था कि व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, निवेश और लोगों के बीच बढ़ते संपर्क इस बात का प्रमाण हैं कि दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि यह दोनों लोकतांत्रिक देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत आधार प्रदान करेगा।

  • 'मेसी-रोनाल्डो जैसी प्रतिद्वंदिता फिर शायद कभी नहीं दिखेगी' ओलिवर कान ने दोनों दिग्गजों की जमकर की तारीफ

    'मेसी-रोनाल्डो जैसी प्रतिद्वंदिता फिर शायद कभी नहीं दिखेगी' ओलिवर कान ने दोनों दिग्गजों की जमकर की तारीफ


    नई दिल्ली। जर्मनी के पूर्व कप्तान और दिग्गज गोलकीपर ओलिवर कान का मानना है कि फुटबॉल इतिहास में लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसी प्रतिद्वंदिता दोबारा देखने को मिलना बेहद मुश्किल है। उनके अनुसार दोनों खिलाड़ियों ने लगभग दो दशकों तक लगातार एक-दूसरे को बेहतर बनने की प्रेरणा दी और अपने शानदार प्रदर्शन से विश्व फुटबॉल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। कान ने कहा कि उनकी प्रतिस्पर्धा केवल लोकप्रियता तक सीमित नहीं रही बल्कि मैदान पर प्रदर्शन और निरंतर उत्कृष्टता के दम पर इतिहास रचा गया।

    फीफा विश्व कप 2026 के दौरान विशेषज्ञ के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे ओलिवर कान ने कहा कि मेसी और रोनाल्डो ने हर सीजन में एक-दूसरे को चुनौती देते हुए अपने खेल का स्तर लगातार ऊंचा किया। यही वजह है कि दोनों खिलाड़ियों ने वर्षों तक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलरों की सूची में अपना दबदबा बनाए रखा। कान के मुताबिक उनकी प्रतिद्वंदिता व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं आगे थी क्योंकि इसने पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रशंसकों को लंबे समय तक रोमांचित किया।

    उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर बने रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता लेकिन मेसी और रोनाल्डो ने अपनी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण से यह कर दिखाया। दोनों ने क्लब फुटबॉल में कई रिकॉर्ड बनाए और एक-दूसरे को लगातार चुनौती देते हुए नए कीर्तिमान स्थापित किए। कान का मानना है कि इसी कारण यह प्रतिद्वंदिता खेल इतिहास की सबसे यादगार प्रतिस्पर्धाओं में गिनी जाएगी।

    ओलिवर कान ने अपने करियर के सबसे यादगार पल के रूप में 2002 फीफा विश्व कप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस टूर्नामेंट में जर्मनी को फाइनल तक पहुंचाना उनके जीवन का सबसे बड़ा अनुभव था। हालांकि फाइनल में हार का दर्द आज भी उनके मन में है क्योंकि हर खिलाड़ी का सपना विश्व कप जीतना होता है। उन्होंने स्वीकार किया कि गोलकीपर के रूप में गोल्डन बॉल जीतना उनके लिए गर्व की बात थी लेकिन यदि मौका मिले तो वह इस व्यक्तिगत सम्मान के बदले विश्व कप ट्रॉफी लेना पसंद करेंगे।

    दिग्गज गोलकीपर ने मौजूदा विश्व कप में खेल रहे युवा खिलाड़ियों और खासकर गोलकीपरों को भी महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होनी चाहिए। खिलाड़ियों को लगातार अपने खेल में सुधार करते रहना चाहिए और बड़े मंच पर दबाव से घबराने के बजाय उसका आनंद लेना चाहिए। उनके अनुसार विश्व कप ऐसा मंच है जहां पूरी दुनिया की नजर खिलाड़ियों पर होती है और कई बार एक पल या एक फैसला पूरे टूर्नामेंट का भविष्य तय कर देता है। इसलिए हर खिलाड़ी को हर क्षण पूरी एकाग्रता के साथ खेलना चाहिए।

    मेसी और रोनाल्डो को आधुनिक फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों में गिना जाता है। दोनों ने क्लब फुटबॉल में वर्षों तक शानदार मुकाबले खेले और अनगिनत रिकॉर्ड अपने नाम किए। हालांकि विश्व कप में दोनों कभी आमने-सामने नहीं आ सके। माना जा रहा है कि फीफा विश्व कप 2026 दोनों दिग्गजों का आखिरी विश्व कप हो सकता है। ऐसे में दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की नजर एक बार फिर इन दोनों खिलाड़ियों पर रहेगी, जो अपने करियर के इस अहम पड़ाव पर यादगार प्रदर्शन कर इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ने की कोशिश करेंगे।

  • राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का केंद्र और यूपी सरकार पर तीखा प्रहार, SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने समेत कई सवालों पर मांगा जवाब

    राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का केंद्र और यूपी सरकार पर तीखा प्रहार, SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने समेत कई सवालों पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरते हुए मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। पार्टी का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रकरण में अब तक कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं। कांग्रेस ने विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सार्वजनिक करने के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने की मांग दोहराई है।

    कांग्रेस का कहना है कि यदि इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया था, तो उसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। पार्टी के अनुसार, जब मामला देशभर के श्रद्धालुओं के विश्वास और दान से जुड़ा है, तब जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की गोपनीयता नहीं बरती जानी चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच के निष्कर्ष देश के सामने लाए जाने आवश्यक हैं।

    पार्टी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय के दौरान राम मंदिर परिसर में चोरी की कई घटनाएं सामने आई हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में चोरी के मामले सामने आए हैं, तो यह जानना भी जरूरी है कि पिछले वर्षों में कुल कितनी घटनाएं हुईं, कितना सामान गायब हुआ और दान में प्राप्त संपत्तियों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई थी। पार्टी ने मांग की कि पूरे रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए ताकि किसी भी तरह की आशंका समाप्त हो सके।

    जांच प्रक्रिया को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि कार्रवाई केवल सीमित स्तर तक की गई है, जबकि यदि किसी बड़े स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए और किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को केवल पद या प्रभाव के आधार पर जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। पार्टी का कहना है कि जब मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए विभिन्न एजेंसियां और सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, तब लगातार चोरी की घटनाओं के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं। कांग्रेस ने निजी सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका और उसकी जवाबदेही तय करने की भी मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में कहीं चूक हुई है तो उसकी स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

    कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि दान में प्राप्त आभूषणों, नकदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। पार्टी का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित प्रत्येक वस्तु का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए ताकि किसी प्रकार का संदेह उत्पन्न न हो। इसके साथ ही पूरे चढ़ावे का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराने की मांग भी दोहराई गई है।

    पार्टी ने राज्य सरकार से SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। कांग्रेस का यह भी कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था या प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार अब तक इस पूरे विवाद पर स्पष्ट स्थिति रखने से बच रही है।

    राम मंदिर को करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि इस तरह के किसी भी विवाद का समाधान केवल पारदर्शी जांच, जवाबदेही और तथ्यों को सार्वजनिक करने से ही संभव है। पार्टी का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होने और सभी संबंधित तथ्यों के सामने आने से ही श्रद्धालुओं का विश्वास और संस्थागत पारदर्शिता मजबूत हो सकेगी।

  • SIR विवाद पर विपक्ष की न्यायपालिका से दखल की मांग, 23 राजनीतिक दल और एक निर्दलीय सांसद एकजुट, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जताई गहरी चिंता


    नई दिल्ली । देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन- SIR) अभियान को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी गठबंधन ‘INDIA जनबंधन’ से जुड़े 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को संयुक्त पत्र भेजकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची के सत्यापन की वर्तमान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और संवैधानिक मानकों के अनुरूप बनाए जाने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता के अधिकार प्रभावित न हों।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है और इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवाद चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है। इसी कारण सभी दलों ने एकजुट होकर सर्वोच्च न्यायपालिका का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि इस विषय पर न्यायिक स्तर पर आवश्यक मार्गदर्शन और निगरानी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

    इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने पहले भी आपसी स्तर पर कई दौर की चर्चा की थी। हाल ही में आयोजित बैठक में विभिन्न दलों ने चुनाव आयोग द्वारा संचालित SIR प्रक्रिया और उससे जुड़े अन्य चुनावी विषयों पर साझा रणनीति तैयार की। बैठक में यह सहमति बनी कि इन चिंताओं को औपचारिक रूप से देश के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए। बाद में इस पहल को व्यापक समर्थन मिला और संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले दलों की संख्या बढ़कर 23 हो गई।

    संयुक्त पत्र को कई प्रमुख विपक्षी नेताओं और राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है। इसमें विभिन्न राज्यों के क्षेत्रीय दलों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के दल भी शामिल हैं। एक निर्दलीय सांसद ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का कहना है कि यह कदम किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    विवाद का केंद्र चुनाव आयोग द्वारा संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान है। इस प्रक्रिया के तहत घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जा रहा है। साथ ही परिवार आधारित विवरण का मिलान, रिकॉर्ड का अद्यतन तथा फर्जी या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाने की कार्रवाई भी की जा रही है। चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना बताया जा रहा है, ताकि भविष्य में चुनाव प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय हो सके।

    हालांकि विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर वैध मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उनका कहना है कि यदि सत्यापन अभियान पूरी पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ नहीं चलाया गया तो बड़ी संख्या में पात्र नागरिक अपने मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं। विपक्ष ने यह भी कहा है कि ऐसे मामलों की स्वतंत्र समीक्षा और प्रभावी निगरानी आवश्यक है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बहस का विषय बन सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजे गए इस संयुक्त पत्र पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और चुनाव आयोग इस संबंध में उठाई गई चिंताओं पर किस प्रकार अपनी प्रतिक्रिया देता है। आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी सुधार और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़ी चर्चा का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।