Author: bharati

  • एमपी विधानसभा बजट सत्र की शुरुआत हंगामेदार, विपक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान किया हंगामा

    एमपी विधानसभा बजट सत्र की शुरुआत हंगामेदार, विपक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान किया हंगामा


    भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से हंगामेदार रहा। सत्र की शुरुआत में संपूर्ण छह छंदों में “वंदे मातरम्” का गायन हुआ, इसके बाद राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अपना अभिभाषण प्रस्तुत किया। अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया, जिससे कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित कर दी गई।
    राज्यपाल ने अपने संबोधन में सरकार की विकास उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और संकल्प पत्र 2023 में किए गए वादों के तहत अब तक हुए कार्यों तथा आगामी लक्ष्यों की जानकारी दी। साथ ही सदन में विभिन्न हस्तियों और नेताओं के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संसद भवन पहुंचने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यपाल का स्वागत किया।

    अभिभाषण और हंगामा
    राज्यपाल ने अपने भाषण में देश की वर्तमान स्थिति को “अमृत काल” बताया और उद्योगों के अनुकूल वातावरण, भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश की 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य, 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने, पीएम जनमन योजना के तहत 1.35 लाख आवास निर्माण, उज्जैन में शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करने और नई शिक्षा नीति के तहत किए गए कार्यों का उल्लेख किया।

    इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि नल-जल योजना और इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा अभिभाषण में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के बीच राज्यपाल ने अपना अभिभाषण जारी रखा।

    राज्यपाल के सदन से जाने के बाद कार्यवाही पुनः शुरू हुई, जहां विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जो हिस्सा पढ़ा नहीं जा सका, उसे पढ़ा हुआ माना जाएगा। इसके बाद सदन की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित कर दी गई।

    सत्र का विस्तृत कार्यक्रम
    बजट सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगा। पहले दिन राज्यपाल का अभिभाषण हुआ। इस सत्र में कुल 3478 प्रश्न, 236 ध्यानाकर्षण, 10 स्थगन प्रस्ताव, 41 अशासकीय संकल्प और शून्यकाल में 83 सवाल विधानसभा में प्रस्तुत किए जाएंगे।

  • रोहित शेट्टी फायरिंग केस: हरियाणा से 4 आरोपी गिरफ्तार, मुख्य शूटर हरि बॉक्सर के संपर्क में था

    रोहित शेट्टी फायरिंग केस: हरियाणा से 4 आरोपी गिरफ्तार, मुख्य शूटर हरि बॉक्सर के संपर्क में था


    नई दिल्ली । मुंबई में फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के घर पर 31 जनवरी को हुई पांच राउंड फायरिंग मामले में हरियाणा STF और मुंबई पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन कर हरियाणा के बहादुरगढ़ से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम ऋतिक यादव दीपक सनी और सोनू हैं। सभी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं।

    हरियाणा STF के एसपी विक्रांत भूषण के मुताबिक दीपक मुख्य शूटर था और वह विदेश में बैठे हरि बॉक्सर और आरजू के संपर्क में था। दीपक ने रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग की जबकि सनी और सोनू ने घर के बाहर रेकी की। आरोपी ऋतिक ने उन्हें छिपने में मदद की। सभी के खिलाफ बीएनएस और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। अब तक कुल 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच जारी है।

    31 जनवरी को रात करीब 12:45 बजे मुंबई के जुहू इलाके में स्थित रोहित शेट्टी की नौ मंजिला इमारत पर पांच गोलियां चलाई गईं। इनमें से एक गोली जिम के शीशे से टकराई। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि लॉरेंस गैंग ने फायरिंग की जिम्मेदारी ली है। फेसबुक पोस्ट में कहा गया था कि यह चेतावनी थी और अगर अनुरोध नहीं माना गया तो गंभीर परिणाम होंगे।

    इसी गैंग से जुड़े मामले में बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह को 10 फरवरी को जान से मारने की धमकी मिली। यह धमकी वॉट्सएप वॉइस नोट के जरिए दी गई थी जिसमें करोड़ों रुपए की फिरौती की मांग भी शामिल थी। धमकी मिलने के तुरंत बाद मुंबई पुलिस ने रणवीर सिंह के बांद्रा स्थित आवास पर सुरक्षा कड़ी कर दी।

    इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि लॉरेंस गैंग की धमकियों और फायरिंग जैसी वारदातों से मुंबई में सुरक्षा चुनौती बढ़ गई है। पुलिस और STF की संयुक्त कार्रवाई अब तक मुख्य आरोपी पकड़ने में सफल रही है लेकिन जांच जारी है और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश चल रही है।

  • मप्र बजट सत्र का पहला दिन: कांग्रेस ने भागीरथपुरा दूष‍ित पानी का उठाया मुद्दा, सरकार को घेरा

    मप्र बजट सत्र का पहला दिन: कांग्रेस ने भागीरथपुरा दूष‍ित पानी का उठाया मुद्दा, सरकार को घेरा


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को कांग्रेस विधायक दल ने राज्य सरकार पर तीखे सवाल उठाए और जनहित के मुद्दों को सदन में जोरदार तरीके से पेश किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसमें सरकार और प्रधानमंत्री की उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख है, लेकिन प्रदेशवासियों की वास्तविक समस्याओं और पीड़ा को उचित जगह नहीं मिली।
    उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा में हुई दु:खद घटना का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की लापरवाही से 35 निर्दोष लोगों की जान गई। उन्होंने पूछा कि क्या उन परिवारों का दर्द और उनके सवाल इस सदन के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक दल इस मामले को गंभीरता से उठाएगा और जिम्मेदारों को चिन्हित करने की मांग करेगा।

    मीडिया से बातचीत में उमंग सिंघार ने कहा कि बजट केवल घोषणाओं का दस्तावेज नहीं होना चाहिए, बल्कि यह प्रदेश की जमीनी हकीकत को उजागर करने का माध्यम होना चाहिए। उन्होंने बढ़ते प्रदेश कर्ज पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की, ताकि जनता को आर्थिक स्थिति की पारदर्शी जानकारी मिल सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस विधायक दल बजट में की गई घोषणाओं और उनकी जमीनी वास्तविकता के बीच के अंतर को सदन में सामने लाएगा। नेता प्रतिपक्ष ने दोहराया कि वह लगातार जनता के मुद्दों को उठाएगी और सरकार को जवाबदेह बनाएगी।

  • दिल्ली में नाबालिग अपराध बढ़ा, नई पीढ़ी क्यों भटक रही है? खेल-खेल से अपराध तक का रास्ता

    दिल्ली में नाबालिग अपराध बढ़ा, नई पीढ़ी क्यों भटक रही है? खेल-खेल से अपराध तक का रास्ता


    नई दिल्ली । दिल्ली में नाबालिगों द्वारा किए जा रहे अपराध अब गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं। खासकर झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 12 से 17 वर्ष के किशोर जघन्य वारदातों में अधिक शामिल पाए जा रहे हैं। चोरी लूट हिंसा और नशे से जुड़े अपराधों में नाबालिगों की बढ़ती संलिप्तता कानूनव्यवस्था के लिए चुनौती बन रही है। पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद अपराध का ग्राफ कम नहीं हो रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नाबालिग अपराध केवल व्यक्तिगत प्रवृत्ति नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक उपेक्षा का नतीजा है। दिल्ली में करीब 75% जुवेनाइल अपराध झुग्गी-झोपड़ी और पुनर्वास कॉलोनियों से आते हैं जबकि 22% निम्न मध्यम वर्ग और केवल 3% मध्यम वर्गीय परिवारों से जुड़े हैं।

    प्रमुख कारणों में शामिल हैं

    परिवारिक अस्थिरता और निगरानी की कमी: गरीब परिवारों में माता-पिता की व्यस्तता या घरेलू हिंसा के कारण बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता।शिक्षा से दूरी: स्कूल छोड़ने और पढ़ाई में रुचि कम होने से किशोर गलत संगत की ओर जाते हैं। गलत संगत और गैंग संस्कृति: स्थानीय गैंग के प्रभाव में जल्दी पैसा और दबदबा पाने की चाह में अपराध की राह अपनाई जाती है। नशे और डिजिटल प्रभाव: नशे की उपलब्धता और हिंसक कंटेंट किशोरों के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। सामाजिक उपेक्षा: खेल कौशल विकास और काउंसलिंग की कमी बच्चों की ऊर्जा गलत दिशा में ले जाती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़े केवल अपराध नहीं बल्कि सामाजिक ढांचे की कहानी हैं जहां बचपन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।दिल्ली में लगातार नाबालिग अपराधों ने समाज और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। कम उम्र में अपराध की ओर झुकाव केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक संकट का संकेत है। बार-बार अपराध में शामिल किशोरों के लिए पुनर्वास और सुधार चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है।

    प्रमुख प्रवृत्तियां जो सामने आईं

    छोटी उम्र में गंभीर अपराधों में संलिप्तता जैसे लूट चाकूबाजी हत्या का प्रयास। गैंग का प्रभाव और बार-बार अपराध करना। नशे की लत और उससे जुड़े अपराध। जुवेनाइल कानून के कारण सख्त सजा का डर कम होना। मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सुझाव देते हैं कि समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं आएगा। इसके लिए परिवार स्कूल समुदाय और सरकार को मिलकर शिक्षा कौशल विकास और पुनर्वास पर काम करना होगा तभी किशोर अपराध की प्रवृत्ति को रोका जा सकता है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ, बताया तकनीक आधारित सुशासन की नई शुरुआत

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ, बताया तकनीक आधारित सुशासन की नई शुरुआत


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार विकास के साथ प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, शुचिता, तत्परता, नवाचार और जनकल्याण को प्रोत्साहन दे रही है। पंजीयन विभाग के सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ इसी संकल्प की सिद्धि का प्रमाण है। संपदा-1.0 और संपदा 2.0 के बाद प्रदेश में सायबर पंजीयन की प्रक्रिया का आरंभ होना तकनीक आधारित सुशासन की नई शुरुआत है। मध्यप्रदेश तेजी से बदल रहा है। मध्यप्रदेश भारत का पहला राज्य है, जिसने डिजिटल क्रांति के माध्यम से लोन, मुख्तयारनामा, माइनिंग लीज, हलफनामा, पावर आफ अटार्नी, पार्टनरशिप डीड जैसी 75 से अधिक सेवाओं के लिए सायबर पंजीयन प्रारंभ किया है। राज्य सरकार के इस नवाचार से पेपरलेस और कैशलेस प्रक्रिया को प्रोत्साहन मिल रहा है। यह नई पीढ़ी के लिए पर्यावरण और पारदर्शिता के मामले में महत्वपूर्ण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को भोपाल में पंजीयन भवन में सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ करने के बाद ये विचार व्यक्त किए।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब शासन और उसके उपक्रमों के अंतरण दस्तावेज भी पेपरलेस रजिस्ट्रेशन के माध्यम से पूरे होंगे। हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरण के अंतरण के लिए जनता को पंजीयन कार्यालय नहीं आना पड़ेगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से वीडियो केवायसी सहित सभी कार्य होंगे, इससे धन और समय दोनों की बचत होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि संपदा 2.0 के नवाचार को वर्ष 2025 का राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार मिला है। अब तक 14 लाख 95 हजार से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन हो चुका है। राज्य सरकार ने 55 जिलों में सायबर तहसील परियोजना को लागू किया है, जिसमें राजस्व बंटवारा, नामांतरण की प्रक्रिया भी संपदा 2.0 से हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभागीय अधिकारी सायबर पंजीयन सुविधा के माध्यम से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ मौजूदा वित्त वर्ष में अपने लक्ष्य पूरे करें।

    उप मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि वर्ष 2024-25 में दस्तावेजों के पंजीयन और ई-स्टाम्पिंग के लिए एडवांस सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 लागू किया। इससे चल और अचल संपत्ति के दस्तावेज डिजिटल और पेपरलेस तरीके से पंजीकृत हो रहे हैं। कई दस्तावेज तो ऐसे हैं जिनके लिए उप-पंजीयक कार्यालय भी नहीं आना पड़ता है। सबसे पहले गुना,हरदा, रतलाम और डिण्डौरी जिलों में नए ई-पंजीयन और ई- स्थम्पिंग सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 का सफल पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था। प्रदेश के नवाचारों को देशभर में सराहा गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जारी इन नवाचारों का लाभ प्रदेश के नागरिकों को मिल रहा हैं। पंजीयन से जुड़े कार्यों को त्रूटि रहित पूरा करने के लिए प्रदेशभर के 14 लाख कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव अमित राठौर, प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह, महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक अमित तोमर उपस्थित रहे। कार्यक्रम से जिलों के अधिकारी, बैंककर्मी और लाभार्थी वर्चुअली जुड़े।

  • 36 घंटे में बलूचिस्तान में 4 युवाओं की हत्या, 3 साल में 1700 से अधिक बलूच युवा जबरन गायब

    36 घंटे में बलूचिस्तान में 4 युवाओं की हत्या, 3 साल में 1700 से अधिक बलूच युवा जबरन गायब


    नई दिल्ली । बलूचिस्तान में पिछले 36 घंटों में चार बलूच छात्रों की हत्या ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवारों का आरोप है कि ये सभी छात्र पहले जबरन गायब किए गए और फिर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसी ISI के सशस्त्र गिरोहों ने उन्हें मार डाला।

    ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ़ बलूचिस्तान के डेटा के अनुसार, पिछले 3 सालों में बलूचिस्तान से 1713 युवा जबरन गायब हुए हैं। इसी अवधि में 390 से अधिक युवाओं के गायब होने और 80 से ज्यादा शव मिलने के मामले सामने आए। स्थानीय मानवाधिकार संगठन Baloch Yakjehti Committee का कहना है कि ये घटनाएं अलग-थलग नहीं हैं बल्कि व्यवस्थित पैटर्न का हिस्सा हैं।

    जुनैद अहमद, 22 वर्षीय ग्रेजुएशन छात्र, सुराब का निवासी, 23 जनवरी 2026 को जबरन उठाया गया। क्वेटा के एक अस्पताल से ईगल फोर्स और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट ने उसे बिना वारंट हिरासत में लिया। 15 फरवरी को उसका शव मिला, जिस पर गोली के निशान थे।

    पंजगुर के मैट्रिक छात्र जंगीयान बलोच को 26 मई 2025 को फ्रंटियर कॉर्प्स और ISI के डेथ स्क्वाड ने उठाया था। 15 फरवरी को उसका शव शापतान इलाके में मिला।

    17 वर्षीय मुहनास बलोच को 14 फरवरी को स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने उसके घर से उठाकर गोली मार दी। वहीं नवाब अब्दुल्ला, जिसे मई 2025 में उठाया गया था, का शव 14 फरवरी को घर के बाहर फेंक दिया गया।

    बलूचिस्तान में युवाओं को जबरन गायब करने की घटनाएं साल 2000 से लगातार हो रही हैं, जब से क्षेत्र में सशस्त्र विद्रोह शुरू हुआ। पाकिस्तानी सेना और ISI आज़ादी आंदोलन में शामिल युवाओं को अवैध हिरासत में लेने के बाद मार देती है या उनके गुटों में शामिल करवा देती है।

    बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर इलाका है सोना, चांदी, यूरेनियम, रेयर अर्थ मिनरल्स और क़ीमती रत्नों से संपन्न। बावजूद इसके, गृह युद्ध और हिंसा की वजह से स्थानीय आबादी इन संसाधनों के लाभ से वंचित है। पाकिस्तान की सत्ता में बैठे नेता और विदेशी साझेदार इन संसाधनों का फायदा उठा रहे हैं, जबकि आम बलूच युवा हिंसा और जबरन गायब होने की त्रासदी का शिकार हो रहे हैं।

  • निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी पर सफाई दी, कहा- ‘जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है’

    निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी पर सफाई दी, कहा- ‘जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है’


    नई दिल्ली । हाल ही में बजट सत्र के दौरान झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के भाषण ने राजनीतिक माहौल गरम कर दिया। विवादित किताबों और टिप्पणियों के कारण उनकी ओर से उठाए गए आरोपों ने विपक्षी दल कांग्रेस में हड़कंप मचा दिया। इंडिया टीवी के कार्यक्रम आप की अदालत में दुबे ने खुलकर अपने बयान की सफाई दी। दुबे ने कहा जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है। प्रियंका गांधी कहीं भी होंगी तो सुनने आ जाएंगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें किसी से डर नहीं है क्योंकि उनके साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं।

    नेहरू और इंदिरा गांधी पर विवादित टिप्पणियों के सवाल पर दुबे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संसद में वही पढ़ा जो प्रकाशित किताबों में था। पंडित जवाहरलाल नेहरू को अय्याश कहे जाने के आरोप पर उन्होंने कहा कि यह शब्द उन्होंने खुद नहीं जोड़ा बल्कि यह किताब में लिखा था। इसी तरह इंदिरा गांधी के बारे में अश्लील टिप्पणी के आरोप पर दुबे ने बताया कि यह एमओ मथाई की किताब का संदर्भ था जिसमें उन्होंने कुछ भी नया नहीं जोड़ा।

    राहुल गांधी को किताब न पढ़ने देने के आरोप पर दुबे ने कहा कि उन्होंने उन्हें एक्सपोज़ होने से बचाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी बिना टोके बोलते तो वे पांच मिनट भी प्रभावी ढंग से नहीं बोल पाएंगे। उनके अनुसार राहुल गांधी संसद में सिर्फ किताब और संविधान लेकर आते हैं और वास्तविक बहस में उनका योगदान सीमित रहता है।

    दुबे के इस बयान के बाद कांग्रेस ने भी उनके खिलाफ कई आरोप लगाए लेकिन सांसद ने साफ किया कि विपक्ष उन्हें डरता है और वे केवल प्रकाशित सामग्री पढ़कर अपनी बात रखते हैं। संसद में उनके भाषण और विवादित टिप्पणियों ने राजनीतिक बहस को जोरदार मोड़ दिया है।

  • हरियाणा के छायंसा गांव में 15 दिनों में 12 मौतों से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगाया डेरा

    हरियाणा के छायंसा गांव में 15 दिनों में 12 मौतों से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगाया डेरा


    नई दिल्ली । हरियाणा के पलवल जिले के छायंसा गांव में पिछले 15 दिनों में 12 मौतों ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। मृतकों में पांच स्कूली बच्चे भी शामिल हैं। लगातार हो रही मौतों ने गांववासियों को दहशत में डाल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 15 दिन पहले तीन लोगों की तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद से मौतों का सिलसिला जारी है।

    ग्रामीणों के मुताबिक गांव में लगभग हर घर में मरीज हैं और कई की हालत गंभीर है। परिजन अस्पतालों के चक्कर काटकर भी अपने बीमार परिवारजनों को ठीक नहीं कर पा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कदम उठाते हुए गांव में टीम डेरा डाला है। विभाग की टीम लगातार लोगों की जांच कर रही है और ब्लड सैंपल जुटा रही है। अब तक 300 ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं जबकि 400 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है।

    स्वास्थ्य विभाग की डॉ. सतिंदर वशिष्ठ के मुताबिक मृतकों के मेडिकल रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट में 4 मामलों में हेपेटाइटिस B और C का पता चला जबकि 3 मामलों में मल्टीपल ऑर्गन फेलियर और लिवर इंफेक्शन मिले। दो मरीजों को इलाज के लिए पलवल सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया है।

    गांव मुस्लिम बाहुल्य है और करीब 5 हजार आबादी वाले इस गांव में पानी की सप्लाई तीन अलग-अलग स्रोतों से होती है। कुछ घरों में सरकारी पानी आता है जबकि कुछ घरों में अंडरग्राउंड टैंक बनाए गए हैं जिनमें पानी भरने के लिए टैंकर मंगाए जाते हैं। हथीन शहर से आरओ प्लांट का पानी लेने वाले भी हैं। अब तक लिए गए 107 पानी के सैंपलों में 23 फेल पाए गए हैं जिनमें बैक्टीरिया की वृद्धि और क्लोरीन की कमी देखी गई है।

    स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के लिए ओपीडी लगाई है और घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही है। डॉ. वशिष्ठ ने बताया कि मृतकों के परिवारजनों और आसपास के लोगों के सैंपल भी लिए गए हैं ताकि बीमारी फैलने से रोकी जा सके। ग्रामीणों की मुख्य चिंता यह है कि यह हेपेटाइटिस B और C जैसी बीमारियां जल्द नियंत्रण में आएं और मौतों का सिलसिला थमे। यह स्थिति गांववासियों और अधिकारियों दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी और उपचार की प्रक्रिया में लगा हुआ है।

  • CBSE 12वीं बोर्ड 2026: नंबर सुधार के लिए अब सिर्फ एक सब्जेक्ट में सप्लीमेंट्री की अनुमति, मेन एग्जाम में होगा बहु सब्जेक्ट सुधार

    CBSE 12वीं बोर्ड 2026: नंबर सुधार के लिए अब सिर्फ एक सब्जेक्ट में सप्लीमेंट्री की अनुमति, मेन एग्जाम में होगा बहु सब्जेक्ट सुधार


    नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE ने 12वीं बोर्ड एग्जाम 2026 के लिए सप्लीमेंट्री एग्जाम नियमों में बड़ा बदलाव किया है। पुराने नियमों के तहत स्टूडेंट्स बोर्ड रिजल्ट आने के दो महीने के भीतर एक से अधिक सब्जेक्ट्स में नंबर सुधार इंप्रूवमेंट के लिए सप्लीमेंट्री एग्जाम दे सकते थे। लेकिन अब सीबीएसई ने स्पष्ट कर दिया है कि 12वीं बोर्ड के स्टूडेंट्स केवल एक ही सब्जेक्ट में सप्लीमेंट्री एग्जाम दे सकेंगे।

    सीबीएसई ने यह भी बताया कि यदि किसी स्टूडेंट को एक से अधिक सब्जेक्ट्स में नंबर सुधार करवाना है तो उन्हें अगले साल आयोजित होने वाले मेन बोर्ड एग्जाम में शामिल होना होगा। इसका मतलब यह है कि बहु सब्जेक्ट सुधार का विकल्प केवल मेन एग्जाम के माध्यम से ही उपलब्ध रहेगा।

    इस बदलाव का असर स्टूडेंट्स पर साफ दिखाई देगा। पहले स्टूडेंट्स रिजल्ट आने के बाद आसानी से कई सब्जेक्ट्स में सुधार कर सकते थे लेकिन अब उन्हें सावधानीपूर्वक तैयारी करनी होगी और केवल एक विषय में ही सप्लीमेंट्री का विकल्प मिलेगा। इससे स्टूडेंट्स को अपने एग्जाम प्रदर्शन पर ध्यान देने और बेहतर तैयारी करने की आवश्यकता बढ़ जाएगी।

    सीबीएसई ने 12वीं बोर्ड 2026 के सप्लीमेंट्री एग्जाम का टेंटिव शेड्यूल भी जारी कर दिया है। बोर्ड के अनुसार सप्लीमेंट्री एग्जाम 15 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है। मई 2026 में 12वीं बोर्ड का रिजल्ट घोषित किया जाएगा और इसके बाद सप्लीमेंट्री एग्जाम के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। स्टूडेंट्स को इसके लिए बोर्ड द्वारा जारी सर्कुलर का पालन करना होगा।

    इस नए नियम से स्टूडेंट्स के लिए परीक्षा तैयारी की रणनीति बदल जाएगी क्योंकि उन्हें केवल एक सब्जेक्ट में सुधार के मौके का लाभ उठाना होगा। बहु सब्जेक्ट सुधार के लिए उन्हें अगले साल मेन एग्जाम की तैयारी करनी होगी। यह कदम स्टूडेंट्स में जिम्मेदारी और तैयारी के प्रति गंभीरता बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।

    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE ने 12वीं बोर्ड एग्जाम 2026 के लिए सप्लीमेंट्री एग्जाम नियमों में बड़ा बदलाव किया है। पुराने नियमों के तहत स्टूडेंट्स बोर्ड रिजल्ट आने के दो महीने के भीतर एक से अधिक सब्जेक्ट्स में नंबर सुधार इंप्रूवमेंट के लिए सप्लीमेंट्री एग्जाम दे सकते थे। लेकिन अब सीबीएसई ने स्पष्ट कर दिया है कि 12वीं बोर्ड के स्टूडेंट्स केवल एक ही सब्जेक्ट में सप्लीमेंट्री एग्जाम दे सकेंगे।

    सीबीएसई ने यह भी बताया कि यदि किसी स्टूडेंट को एक से अधिक सब्जेक्ट्स में नंबर सुधार करवाना है तो उन्हें अगले साल आयोजित होने वाले मेन बोर्ड एग्जाम में शामिल होना होगा। इसका मतलब यह है कि बहु सब्जेक्ट सुधार का विकल्प केवल मेन एग्जाम के माध्यम से ही उपलब्ध रहेगा।

    इस बदलाव का असर स्टूडेंट्स पर साफ दिखाई देगा। पहले स्टूडेंट्स रिजल्ट आने के बाद आसानी से कई सब्जेक्ट्स में सुधार कर सकते थे लेकिन अब उन्हें सावधानीपूर्वक तैयारी करनी होगी और केवल एक विषय में ही सप्लीमेंट्री का विकल्प मिलेगा। इससे स्टूडेंट्स को अपने एग्जाम प्रदर्शन पर ध्यान देने और बेहतर तैयारी करने की आवश्यकता बढ़ जाएगी।

    सीबीएसई ने 12वीं बोर्ड 2026 के सप्लीमेंट्री एग्जाम का टेंटिव शेड्यूल भी जारी कर दिया है। बोर्ड के अनुसार सप्लीमेंट्री एग्जाम 15 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है। मई 2026 में 12वीं बोर्ड का रिजल्ट घोषित किया जाएगा और इसके बाद सप्लीमेंट्री एग्जाम के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। स्टूडेंट्स को इसके लिए बोर्ड द्वारा जारी सर्कुलर का पालन करना होगा।

    इस नए नियम से स्टूडेंट्स के लिए परीक्षा तैयारी की रणनीति बदल जाएगी क्योंकि उन्हें केवल एक सब्जेक्ट में सुधार के मौके का लाभ उठाना होगा। बहु सब्जेक्ट सुधार के लिए उन्हें अगले साल मेन एग्जाम की तैयारी करनी होगी। यह कदम स्टूडेंट्स में जिम्मेदारी और तैयारी के प्रति गंभीरता बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।

  • बैंगलुरु बैंक मैनेजर ने ग्राहकों का 3 किलो सोना हड़पकर जुए में उड़ाया, पुलिस ने गिरफ्तार किया

    बैंगलुरु बैंक मैनेजर ने ग्राहकों का 3 किलो सोना हड़पकर जुए में उड़ाया, पुलिस ने गिरफ्तार किया


    बैंगलुरु । बैंगलुरु में एक चौकाने वाला बैंक फ्रॉड सामने आया है जिसमें इंडियन बैंक के 34 वर्षीय असिस्टेंट मैनेजर किरन कुमार ने ग्राहकों के करीब 3 किलो सोना हड़प लिया। यह सोना ग्राहकों के लॉकर में सुरक्षित रखा गया था और इसकी कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये बताई जा रही है। आरोपी ने इस सोने को बेचकर प्राप्त राशि से ऑनलाइन जुआ खेला।

    पुलिस और बैंक सूत्रों के मुताबिक जब शाखा के ब्रांच मैनेजर अनुपस्थित थे तब किरन कुमार के पास लॉकर का एक्सेस था। उन्होंने लगातार छोटे-छोटे हिस्सों में सोना चुराना शुरू किया और धीरे-धीरे ग्राहकों के करीब 2.70 किलो सोने पर कब्जा कर लिया।

    यह मामला 2 जनवरी को तब उजागर हुआ जब एक ग्राहक अपने गहने निकालने बैंक गया और लॉकर में छेड़छाड़ पाई। जांच में पता चला कि बैंक के 21 लॉकरों से गहने गायब हैं जबकि तीन लॉकर पूरी तरह खाली कर दिए गए थे। इसके बाद बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और बैंगलुरु पुलिस ने किरन कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह फ्रॉड पिछले साल तेलंगाना में एसबीआई बैंक के कैशियर द्वारा किए गए बड़े घोटाले की याद दिलाता है। उस मामले में कैशियर ने 10 महीने की योजना के तहत ग्राहकों के 14 करोड़ रुपये और 20 किलो सोना हड़प लिया था।

    अब बैंगलुरु में हुए इस फ्रॉड की जांच जारी है। पुलिस ने कहा है कि ग्राहक अपने लॉकर की सामग्री की सुरक्षा और ट्रैकिंग के लिए सावधान रहें। अधिकारियों के अनुसार इस मामले में आरोपी से पूछताछ के बाद चोरी किए गए सोने की वापसी और अन्य संभावित अपराधियों की पहचान की जाएगी। यह घटना एक बार फिर बैंकिंग सुरक्षा और कर्मचारियों पर भरोसे के बीच खतरनाक अंतर दिखाती है और ग्राहकों के लिए चेतावनी है कि उन्हें अपनी संपत्ति की निगरानी व्यक्तिगत रूप से भी करनी चाहिए।